Media24Media.com: बिलासपुर हाईकोर्ट

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छत्तीसगढ़ में ‘पानी’ की वजह से नहीं हो रही शादियां, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, पढ़े पूरी खबर

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देवभोग के नांगलदेही गांव में फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी फैल गई है। जिसके चलते यहां के बच्चों के दांत पीले और बाल सफेद हो गए हैं। इस वजह से गांव के लड़के-लड़कियों की शादी तय नहीं हो रही है। इसको लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।


चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले को जनहित याचिका मानकर सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने सरकार से पूछा है कि बीमारी रोकने के लिए शासन स्तर पर क्या प्रयास किया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।

दरअसल, इस गांव में पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने से युवाओं से लेकर बच्चे तक डेंटल फ्लोरोसिस नाम की बीमारी से पीड़ित हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां के पानी में ह्यूमिडिटी 8 गुना ज्यादा है। इसे कंट्रोल करने के लिए जिले के 40 गांवों में 6 करोड़ की लागत से फिल्टरेशन प्लांट तो लगाए गए लेकिन वह कुछ महीने में ही बंद हो गए।

लिहाजा हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है।

सोमवार को इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने की। बेंच ने कहा कि रिपोर्ट से साफ है कि बच्चे डेंटल फ्लोरोसिस से पीड़ित हैं। पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) है। हालांकि, कुछ गांवों में 2021 में पानी की गुणवत्ता परीक्षण में फ्लोराइड का स्तर 4 पीपीएम के आसपास पाया गया।

पानी में फ्लोराइड का उच्च स्तर स्केलेटल फ्लोरोसिस, गठिया, हड्डियों की क्षति, आस्टियोपोरोसिस, मांसपेशियों की क्षति, जोड़ों से संबंधित समस्या, थकान, किडनी से संबंधित रोग और दूसरी पुरानी बीमारियों की वजह बन सकता है।

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि प्रभावित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों की कई कोशिशों के बाद भी, राज्य के अधिकारी पानी से फ्लोराइड को हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने इस मामले में स्थानीय प्रशासन और शासन की उदासीनता पर सवाल उठाते हुए चिंता जाहिर की।

छत्तीसगढ़ के 10वें राज्यपाल रामेन डेका आज रायपुर पहुंचेंगे, कल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिलाएंगे इन्हें शपथ

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के 10वें राज्यपाल रामेन डेका आज रायपुर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उनका स्वागत कर सकते हैं। बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा 31 जुलाई को नए राज्यपाल को शपथ दिलाएंगे। ये कार्यक्रम रायपुर के राजभवन में आयोजित होगा। अब तक प्रदेश के राज्यपाल रहे विष्वभूषण हरिचंदन अब छत्तीसगढ़ छोड़ गृह प्रदेश आेडिशा जा रहे हैं। उन्हें किसी अन्य प्रदेश का राज्यपाल नहीं बनाया गया है।


27 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, पंजाब समेत 10 राज्यों के राज्यपालों की नई नियुक्ति की थी। झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन अब महाराष्ट्र के राज्यपाल होंगे। अब तक वहां रमेश बैस महाराष्ट्र के गवर्नर थे। बैस छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और रायपुर लोकसभा सीट से 7 बार सांसद रहे हैं। उन्हें कहीं भी राज्यपाल इसबार नहीं बनाया गया। लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को हटाकर ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम के राज्यपाल का पद सौंपा गया है। माथुर छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रभारी रह चुके हैं।

राज्यपाल को शपथ दिलाने का ये है नियम

प्रदेश के CM और मंत्रियों को राज्यपाल शपथ दिलाते हैं। मगर राज्यपाल को शपथ कौन दिलाएगा इसका नियम तय है। भारत के संविधान अनुच्‍छेद 159 अनुसार राज्‍यपाल को राज्‍य के हाईकोर्ट के मुख्‍य न्‍यायमूर्ति ही शपथ दिलाते हैं। इस वक्त बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा हैं।

 

हाईकोर्ट की रेलवे को फटकार, कहा - मालगाड़ियां चल रही पर यात्री ट्रेनें क्यों नहीं, पढ़े पूरी खबर

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 रायपुर : बिलासपुर हाईकोर्ट ने रेलवे से इस बात को लेकर जानकारी तलब की है कि जब रेलवे ट्रैक पर काम चलने की बात कहकर यात्री ट्रेनों को रद्द कर रहा है तो तो उसी ट्रैक पर मालगाड़ियां कैसे चलायी जा रही है. यात्री ट्रेनों को लगातार रद्द किए जाने के मामले में बिलासपुर निवासी पत्रकार कमल कुमार दुबे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रेलवे बोर्ड से यह जानकारी मांगी है. कोर्ट ने इस मामले में गुरुवार 21 मार्च को फिर सुनवाई करेगा.


मंगलवार 19 मार्च 2024 को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की अदालत रेलवे से पूछा कि क्या वजह है कि यात्री गाड़ियां अचानक बड़ी संख्या में रद्द की जा रही हैं. इस पर रेलवे की ओर से पेश अधिवक्ता ने रेलवे ट्रैक पर काम चलने की जानकारी दी और कहा कि इस कारण ट्रेनों को रोकना पड़ता है.

इस पर हाईकोर्ट ने यह जानना चाहा कि उसी ट्रैक पर मालगाड़ी कैसे चलाई जाती है? इसका कोई स्पष्ट जवाब रेलवे की ओर से पेश अधिवक्ता नहीं दे सके. कोर्ट ने रेलवे से यह भी पूछा है कि मालगाड़ियां उसी रूट पर लगातार चलायी जा रही हैं तो यात्री ट्रेनें क्यों नहीं चल सकती? पटरियों की खराब होने की बात है तो यात्री ट्रेनें तो चल ही नही रहीं तो मेंटेनेंस क्यों नहीं हो रहा है.

बिलासपुर निवासी कमल कुमार दुबे ने जनहित याचिका दायर कर बताया है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में यात्री ट्रेनों को लगातार रद्द किया जा रहा है. यात्रियों को अचानक पता चलता है कि एक्सप्रेस या पेसेंजर ट्रेन अब नहीं जाएगी. कई बार बीच रास्ते में ही ट्रेन को रद्द कर दिया जाता है. इससे हजारों यात्रियों को परेशान होना पड़ता है. लंबे समय से रेलवे इसी तरह का व्यवहार करते आ रहा है. याचिका में उसी मार्ग पर मालगाड़ियों को चलाये जाने पर सवाल उठाये गये हैं.

छत्तीसगढ़ कोल स्कैम मामला में जेल में बंद रानू साहू की जमानत याचिका खारिज

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 रायपुर : बिलासपुर हाईकोर्ट ने निलंबित आईएएस रानू साहू की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद रानू साहू को फिलहाल जेल में रहना पड़ेगा। बीते सात जनवरी को मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिस पर गुरुवार को आर्डर किया गया है। निलंबित आईएएस रानू साहू कोल घोटाला मामले में जेल में बंद हैं। इससे पहले लोअर कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।


हाईकोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान ईडी के वकील ने कुछ और तथ्य रखने की बात कही थी। इसके बाद 8 जनवरी को सुनवाई की तारीख तय की गई गई थी। रानू साहू को ईडी ने 22 जुलाई 2023 को गिरफ्तार किया था।

बता दें कि कोयला मामले को लेकर साल 2022 में आयकर विभाग ने सबसे पहले रानू साहू के शासकीय निवास, घर और दफ्तर में छापा मारा था। जिसके बाद ईडी ने इस मामले में रानू के घर छापा मारते हुए लंबे समय से पूछताछ के लिए बुला रही है। ईडी ने कथित कोल घोटाले को लेकर रानू साहू पर यह आरोप लगया कि निलंबित आईएएस रानू साहू द्वारा कोरबा कलेक्टर रहते हुए कोल लेवी मामले में संलिप्तता पाई गई थी।


वीआईपी के लिए रास्ते बन जाते हैं, आमलोगों के लिए क्यों नहीं, HC ने राज्य सरकार को भेजा नोटिस

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 रायपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने रायपुर के विधानसभा रोड किनारे अतिक्रमण को लेकर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस ने बेतरतीब तरीके से खड़े होने वाले भारी वाहनों, अतिक्रमण और जर्जर सड़क को लेकर राज्य सरकार से पूछा है कि बदहाल सड़कों पर वीवीआइपी सुरक्षा व्यवस्था के साथ आना-जाना कर सकते हैं। लेकिन, यहां से आम आदमी भी गुजरते हैं। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।


विधानसभा जाने वाली सड़क की खस्ताहाल हालत के कारण जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। जिसके कारण इस रास्ते पर धूल का गुबार उड़ता रहता है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इसे गंभीरता से लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है। बुधवार को केस की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने राज्य शासन के वकील से पूछा कि रोड किनारे वाहन खड़ा करने की अनुमति किसने दिया है। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी है या नहीं। अगर दुर्घटना घट जाए तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।

चीफ जस्टिस ने सरकार से यह भी पूछा है कि यह नेशनल हाईवे है या स्टेट हाईवे। सरकारी वकील ने जब जवाब दिया कि यह रिंग रोड है। तब उन्होंने कहा कि जो भी जिम्मेदार हैं उन्हें आम लोगों के जीवन की परवाह है भी या नहीं। सड़कों की हालत कब सुधरेगी, खंभों पर बिजली कब तक लगेगी और सड़क किनारे भारी वाहनों को हटाने को लेकर चीफ जस्टिस ने राज्य शासन को शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा है।


बिलासपुर हाईकोर्ट का फैसला- 10 दिनों के भीतर संशोधित शालाओं में शिक्षकों को जॉइन किया जाए

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षकों की पोस्टिंग के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सरकार को 10 दिनों के भीतर शिक्षकों को संशोधित शालाओं में ज्वाइनिंग देने के निर्देश दिया है। इससे पहले संशोधन पर राज्य सरकार ने निरस्तीकरण की कार्रवाई की थी, जिसके खिलाफ कई शिक्षकों ने हाईकोर्ट में खाचिका लगाई थी।

दरअसल, प्रदेश के सहायक शिक्षकों को शिक्षकों के पदों में प्रमोशन दिया गया था। प्रमोशन के बाद उनका पदांकन कर विभिन्न स्कूलों में करते हुए पोस्टिंग दी गई थी। सैकड़ों शिक्षकों को दूरस्थ स्कूलों में पदस्थ किया गया था, जिसके खिलाफ शिक्षा विभाग में आवेदन देकर अपनी पोस्टिंग संशोधित करवाते हुए पास के स्कूलों में करवा ली थी। संशोधन आदेश के एवज में लाखों रुपए के लेन-देन के आरोपों के बाद सरकार ने संशोधन आदेश को 4 सितंबर को निरस्त कर शिक्षकों को एकतरफा कार्यमुक्त कर दिया था।

संशोधन आदेश निरस्तीकरण को लेकर सैकड़ों शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद चंदेल ने ट्रांसफर पर 11 सितंबर को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देश के बाद शिक्षक ना तो पदांकन वाली शालाओं में ज्वाइन कर पा रहे थे और न ही संशोधित स्कूलों में। इससे शिक्षकों को वेतन भी जारी नहीं हो पा रहा था, जिसके लिए एक बार फिर शिक्षक कोर्ट पहुंचे थे।

छत्तीसगढ़ के 4 IFS अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति का मामला, हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा

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रायपुर/बिलासपुर: देश के अपने किस्म के पहले मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आर.सी.एस. सामंत की पीठ ने केंद्र से, याचिकाकर्ता रायपुर के ब्यास मुनि दिवेदी की याचिका पर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि छत्तीसगढ़ वन विभाग, असम के मानस नेशनल पार्क से से एक नर और एक मादा अर्थात दो वन भैंसों को पकड़ कर लाया है, जिसके लिए पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार ने अनुमति दी थी कि वन भैसों को समुचित प्राकृतिक वास में छोड़ा जाएगा, लेकिन वन अधिकारियों ने दोनों वन भैसों को छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभ्यारण में बाड़े में बंधक बना रखा है, जो कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रावधानों के तहत अपराध है, जिसके लिए कम से कम 3 साल जो कि 7 साल हो सकती है की सजा का प्रावधान है। 

गौरतलब है कि वन भैसा, बाघ के समान ही अनुसूची-एक का वन्य प्राणी है, इनको तब तक बंधक नहीं बनाया जा सकता जब तक कि यह सुनिश्चित नहीं हो जाये कि उन को पुनर्वासित नहीं किया जा सकता, जैसे की बाघ के मामले में ऐसी चोट लगने से जो ठीक न हो सके, जिस से वह शिकार न कर सके। वन भैसों के मामले में तो केंद्र से अनुमती ही इस शर्त के साथ मिली थी कि उन्हें उचित रहवास वाले वन में छोड़ा जायेगा, फिर भी उन्हें बंधक बना रखा गया है। 

आवेदन पर निर्णय लेने के लिए आदेशित करने की मांग 

दिवेदी ने बताया कि क्योंकि वन भैंसे असम से छत्तीसगढ़ लाने में 4 आई.एफ.एस.  जिम्मेदार है अतः उनके विरुद्ध अभियोजन की अनुमति पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ही दे सकता है। अत: अभियोजन के लिए उन्होंने सितंबर 2021 में अनुमति देने की मांग मंत्रालय से की थी, बाद में कई रिमाइंडर भी भेजे गए, परंतु मंत्रालय द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने पर कोर्ट से अभियोजन की अनुमति के आवेदन पर निर्णय लेने के लिए आदेशित करने की मांग की गई, जिस पर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ वन विभाग वर्तमान में पदस्थ प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) पीवी नरसिम्ह राव आई.एफ.एस. तथा तत्कालीन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) वर्तमान में सदस्य सचिव बायो-डाइवर्सिटी बोर्ड अरुण कुमार पांडे, आई.एफ.एस.  के कार्यकाल में अप्रैल 2021 में असम से वन भैसा लेकर आया, जिन्हें बारनवापारा अभ्यारण में बाड़े में कैद कर रखा है, इनके विरुद्ध अभियोजन की अनुमती मांगी गई है। 

अभियोजन की मांगी गई अनुमति 

पूर्व में पदस्थ सेवानिवृत्त IFS प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) कौशलेंद्र कुमार सिंह ने प्लान बनाया था कि असम से पांच “मादा” वन भैंसों को पकड़ कर लाया जाएगा और यहां पर बंधक बनाकर उनसे प्रजनन कराया जाएगा और जो वन भैसे पैदा होंगे उन को वन में छोड़ा जाएगा। वन अधिकारी असम के वन भैसों का उदंती सीता नदी अभ्यारण में रखे गए वन भैसों से मेल करा कर नई जीन पूल तैयार करना चाहते थे। इनके खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी गई है। 

विरोध में रहा है वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया

गौरतलब है कि देश के प्रतिष्ठित संस्थान वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया असम से वन भैंसा छत्तीसगढ़ लाने के विरुद्ध रहा है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अनुसार छत्तीसगढ़ के वन भैंसों का जीन पूल पूरे विश्व में सबसे यूनिक है, अतः दो जीन पूल अर्थात छत्तीसगढ़ और असम के वन भैसों का जीन पूल को नहीं मिलाना चाहिए। 

बाद में बदला गया प्लान 

बाद में निर्णय लिया गया कि असम से पांच मादा वन भैसों को लाने के साथ साथ एक  नर वन भैसा भी लाया जाये इसके लिए पूर्व में पदस्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) वर्तमान पदस्थापना प्रधान मुख्य वन संरक्षक, स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट रायपुर अतुल कुमार शुक्ला द्वारा असम से एक वन ऐसा लाने की अनुमति मांगी गई।इनके विरुद्ध अभियोजन की अनुमती मांगी गई है। 

स्वछंद विचरण करने वाले वन भैसे आजीवन रहेंगे कैद 

दिवेदी ने बताया कि वन विभाग के दस्तावेज पूर्ण: स्पष्ट करते है कि असम के मानस नेशनल पार्क से लाए गए दो वन भैसों को आजीवन बाड़े में कैद कर प्रजनन कराने की योजना है। वन विभाग 4 मादा वन भैसों को असम से और लाने वाला है तथा इन सभी वन भैसों को और इन से पैदा हुए वन भैसों को आजीवन कैद में रहना होगा, इन्हें वन में छोड़ने का कोई भी प्लान वन विभाग के पास नहीं है। दिवेदी ने बताया कि अभियोजन की अनुमती मिलने उपरांत उनके द्वारा दोषियों को सजा दिलाने हेतु वाद दायर किया जाएगा।

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट फिर से बंद, अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी सुनवाई

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छत्तीसगढ़ में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे देखते हुए एक बार फिर हाईकोर्ट को बंद करने का फैसला लिया गया है। हाईकोर्ट में 11 जनवरी से अब मामलों की वर्चुअल सुनवाई होगी। हाईकोर्ट परिसर में भीड़ नियंत्रित करने के लिए अब वकीलों का प्रवेश भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। सिर्फ आवश्यक होने पर ही वकील सीमित संख्या में हाईकोर्ट जा सकेंगे। इसी तरह निचली अदालतों में भी मामलों की सुनवाई के लिए भी हाईकोर्ट ने गाइडलाइन जारी की है। फिलहाल ये व्यवस्था 11 से 31 जनवरी तक रहेगी।

बिलासपुर हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की ओर से सुनवाई के लिए अलग-अलग बेंच निर्धारित की जाएगी। हालांकि अभी इसके लिए रोस्टर तय नहीं किया गया है। हाईकोर्ट परिसर में काउंटर के माध्यम से नई फाइलिंग यानी नई याचिकाएं और अपील दायर की जा सकेंगी। किसी विशेष बेंच के समक्ष सूचीबद्ध होने वाले मामलों की संख्या संबंधित बेंच की ओर से ही तय होगी। मामले की तत्काल सूची के लिए उल्लेख पर्ची न्यायिक रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

वकीलों को मास्क पहनना जरूरी

हाईकोर्ट ने भीड़ से बचने के लिए अधिवक्ताओं से भी अपील की है। रजिस्ट्रार जनरल की ओर से कहा गया है कि अधिवक्ता कोर्ट परिसर में तभी आएं, जब उन्हें याचिकाएं लगानी हो या फिर या उनका कोई मामला किसी कोर्ट में सूचीबद्ध हो। कोर्ट परिसर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ ही वकीलों को भी मास्क पहनना जरूरी होगा। वहीं अधिकारियों और कर्मचारियों की भी न्यूनतम संख्या रखने के आदेश दिए गए हैं। हालांकि संख्या और जरूरत को देखते हुए इसका फैसला अनुभाग और प्रशासन के प्रमुख करेंगे।

कोर्ट में पक्षकारों का प्रवेश प्रतिबंधित

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए हाईकोर्ट के साथ ही अधीनस्थ न्यायालय के कामकाज के संबंध में गाइडलाइन जारी की गई है। लोवर कोर्ट में रिमांड और जमानत मामले, सुपुर्दनामा प्रकरण, अपील और संशोधन, जमा राशि के भुगतान से संबंधित मामले, मोटर दुर्घटना दावा मामलों के साथ ही कोर्ट की ओर से तय जरूरी प्रकरणों की ही सुनवाई होगी। कोर्ट में मामलों की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षकार के वकील ही प्रवेश कर सकेंगे।

बिना सूचना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे कर्मचारी

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी भी अधिकारी और कर्मचारी को बिना पूर्व सूचना के मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसका उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा मुख्यालय के बाहर आवाजाही की भी अनुमति नहीं होगी। न्यायालय अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से और CCTV कैमरे के माध्यम से भी परिसर में उचित सैनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग, मास्क की देखभाल करने का निर्देश दिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल ने जिम्मेदार अधिकारी को मॉनिटरिंग कर व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। 

24 घंटे में कोरोना के 3 हजार 455 नए केस

बता दें कि छत्तीसगढ़ में 24 घंटे के अंदर कोरोना के 3 हजार 455 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक 24 घंटे में 69 मरीज स्वस्थ हुए हैं। वहीं 24 घंटे में कोरोना से 4 मरीजों की मौत हुई है। प्रदेश में 46 हजार 495 टेस्ट हुए हैं, जिसमें 3,455 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सबसे ज्यादा 1024 मरीजों की पुष्टि रायपुर में हुई है। वहीं दुर्ग में 463 और रायगढ़ में 455 नए मरीज मिले हैं। नए मरीज मिलने और डिस्चार्ज होने के बाद अब एक्टिव मरीजों की संख्या 13,066 हो गई है, जिनका इलाज अभी जारी है।  

हाथियों की मौत का मामला फिर पहुंचा हाईकोर्ट, 174 हाथियों की हो चुकी है करंट लगने से मौत

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी और वन विभाग की लापरवाही से हाथियों की मौत का क्रम जारी है। छत्तीसगढ़ में हाथियों की लगातार हो रही मौतों पर  जनहित याचिका दायर की गई है। इस पर संज्ञान लेते हुए आज छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी की बेंच ने विद्युत वितरण कंपनी और वन विभाग को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह में जवाब मांगा है।

क्या है मामला

दरअसल हाथियों की बिजली करंट से लगातार हो रही मौतों के चलते जनवरी 2018 में रायपुर के याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी ने एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में विद्युत वितरण कंपनी ने जवाब देकर कहा था कि वे उचित कार्यवाही कर रहे हैं। याचिका का निराकरण करते हुए कोर्ट ने कहा था कि याचिका का निराकरण करने का यह मतलब नहीं निकाला जाए कि अधिकारी गहन निद्रा में चले जाएं। 

वन विभाग से 1674 करोड़ रुपए की मांग

याचिका का निराकरण होने के बाद विद्युत वितरण कंपनी ने वन क्षेत्रों से गुजरने वाली नीचे झुकी हुई 4591 किलोमीटर लाइनों की ऊंचाई बढ़ाने और 3976 किलोमीटर लाइन को कवर्ड कंडक्टर लगाने के लिए वन विभाग से 1674 करोड़ रुपए की मांग की। इस पर वन विभाग ने भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से 1674 करोड़ रुपए देने के लिए कहा। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने पत्र लिखकर वन विभाग को कहा कि बिजली लाइनों का सुधार कार्य करने का कार्य ‘स्ट्रिक्ट लायबिलिटी’ सिद्धांत के तहत विद्युत वितरण कंपनी का है। और विद्युत वितरण कंपनी और राज्य सरकार को अपने बजट से सुधार कार्य कराना चाहिए।

2019 के बाद शुक्रवार को दायर की गई नई याचिका

2019 के बाद से शुक्रवार को दायर की गई नई याचिका तक वन विभाग, विद्युत वितरण कंपनी को सुधार कार्य करने को कह रहा है और विद्युत वितरण कंपनी वन विभाग से 1674 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कह रही है। इस बीच 1674 करोड रुपए के विवाद का निपटारा करने के लिए सिंघवी ने राज्य शासन और भारत सरकार को कई पत्र लिखकर बताया कि विवाद के चलते सुधार कार्य नहीं हो पा रहा है। और हाथियों की मौत हो ही रही है। याचिका में मांग की गई है कि यह निर्धारित कराया जाय कि 1674 करोड़ रुपए की जवाबदारी किसकी है और लाइनों में सुधार कार्य करवाया जाय। पिछली याचिका के निराकरण के बाद 15 हाथियों की मौत करंट से हो चुकी है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद 174 हाथियों की मौत हो चुकी है। जिसमे से 30 प्रतिशत अर्थात 53 हाथी विद्युत कर्रेंट से मरे है।

हेड ऑफ फॉरेस्ट नहीं कर रहे हैं भारत सरकार की अनुशंसाओं का पालन

याचिका में बताया गया है कि भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ में बढ़ते हुए मानव हाथी द्वंद और हाथियों की लगातार हो रही मौतों के कारण वर्ष 2020 में एक जांच समिति छत्तीसगढ़ भेजी थी। इसके बाद जुलाई 2020 में हेड आफ फॉरेस्ट राकेश चतुर्वेदी को डी.ओ. लेटर लिखकर  कहा था कि छत्तीसगढ़ राज्य में जिला एवं डिवीजन स्तर पर विभिन्न विभागों जैसे बिजली,  कृषि, राजस्व, पुलिस विभाग इत्यादि में समन्वय की कमी है। इसलिए राज्य के सर्वोच्च स्तर के हस्तक्षेप से वन बल प्रमुख मानव हाथी द्वंद रोकने के लिए राज्य, जिला और संभाग स्तरीय कार्यवाही करवाएंगे। इसी के साथ समिति की अनुशंसा अनुसार कार्यवाही भी करवाएंगे। मानव-हाथी द्वंद रोकने के लिए भारत सरकार की समिति ने वन विभाग, विद्युत, राजस्व, पुलिस, कृषि विभागों और  ग्राम पंचायत द्वारा किए जाने वाले 30 बिंदुओं पर सुझाव दिए थे। इनमें एक सुझाव फसल पैटर्न बदलने का भी है।

कोर्ट ने वन विभाग को भेजा लेटर

वन बल प्रमुख द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण बाद में भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने उच्च स्तर पर प्रमुख सचिव और तत्कालीन मुख्य सचिव को डी.ओ. लेटर भेजा। कोर्ट को बताया गया कि भारत सरकार के कई पत्रों के बाद भी मानव हाथी द्वन्द रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। भारत सरकार ने अगस्त 2021 में फिर पत्र लिखकर याद दिलाया है कि  एक्शन टेकन रिपोर्ट अभी तक नहीं भेजी गई है। याचिका में मांग की गई है कि मानव हाथी द्वन्द रोकने के लिए भारत सरकार की अनुशंशाओं का क्रियान्वन वन विभाग द्वारा करवाया जाये।

वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो से जांच करवाएं

कोर्ट को बताया गया कि हाथियों की ज्यादा संख्या में मृत्यु होने पर भारत सरकार ने अगस्त 2021 में वन विभाग को लिखा है कि वह वाइल्डलाइफ क्राईम कंट्रोल ब्यूरो से पूर्ण इंवेस्टिगेशन करवाएं।

मॉडल स्कूल में शिक्षक व्यवस्था को लेकर बेरोजगारों से छलावा, अफसरों की मनमर्जी को हाइकोर्ट में चुनौती!

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महासमुंद। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मॉडल स्कूल योजना को अफसर फेल करने में लगे हैं। संविदा भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया रद्द करना, बाद प्रतिनियुक्ति के नाम पर गड़बड़ी को हाइकोर्ट में चुनौती दी गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि महासमुंद जिले की स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में लगातार अनियमितता बरती जा रही है। 

राजनीतिक संरक्षण में प्रशासनिक अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। प्रदेश और क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के साथ छल किया जा रहा है। जिले के पांच ब्लाकों में 78 पद के लिए संविदा भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। जिसमें बड़ी संख्या में प्रदेश के बेरोजगार युवाओं ने आवेदन किया, जिसके बाद साक्षात्कार में अपने चहेतों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों की नियुक्ति के लिए नियम में हेरफेर किया गया।

अभ्यर्थी ने की हाईकोर्ट में शिकायत 

बेरोजगार युवाओं को साक्षात्कार के दिन अवैधानिक रूप से अपात्र बताकर दस्तावेज सत्यापन से वंचित किया गया। जिसकी शिकायत और लिखित आपत्ति अभ्यर्थियों के द्वारा किया गया।  जिस पर महासमुन्द कलेक्टर  के द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया और जहां जाना है, जा सकते हैं कहकर शिक्षा विभाग के पथभ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दिया गया। इससे व्यथित होकर एक अभ्यर्थी अंजलि स्वामी ने नगर के पूर्व पार्षद और RTI एक्टिविस्ट पंकज साहू के सहयोग से उच्च न्यायालय में शिकायत किया। 

शासकीय सेवकों की नियुक्ति

स्थगन के लिए केश दायर किया। इस पर 25 सितंबर 2021 तक जिम्मेदारों के द्वारा चयन सूची में फिर दावा-आपत्ति मंगवाया गया। जिस पर अंजलि स्वामी ने पुनः 24 सितंबर 2021को दावा आपत्ति प्रस्तुत की।  फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए चयन सूची पर आपत्ति की गई। परिणामस्वरूप विज्ञापन निरस्त हुई है। इसके पूर्व जिला प्रशासन के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के साथ मिलकर पूर्व में इन स्कूलों के लिए शिक्षक भर्ती में प्रतिनियुक्ति के आधार पर शासकीय सेवकों की नियुक्ति की जा चुकी है। 

'अवैधानिक रूप से प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया'

शेष पद के लिए संविदा भर्ती की विज्ञापन जारी की गई और निरस्त होने के बाद फिर संविदा भर्ती नियम 2012 के अनुसार किया जाना चाहिए, लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा एक बार फिर अवैधानिक रूप से प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जो कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय और छल सहित उनके भविष्य से खिलवाड़ है। जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संलिप्तता होने की बातें भी आ रही है। 

भर्ती प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती

विज्ञापन निरस्त होने से भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता किया जाना प्रमाणित हुआ है। जिसके लिए जिम्मेदारों और प्रभारी जिला शिक्षाधिकारी हिमांशु भारतीय को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। साथ ही तत्काल निलंबित कर जांच कार्रवाई कराने की मांग की जा रही है।  जिला प्रशासन और स्थानीय नेताओं का संरक्षण और मिलीभगत प्रमाणित होने का दावा किया जा रहा है। बेरोजगार युवकों ने कहा है कि फिर प्रतिनियुक्ति पर भर्ती में आपत्ति किया जाएगा और उच्च न्यायालय बिलासपुर में इस भर्ती  प्रक्रिया को चुनौती भी दी जाएगी।

ई-कोर्ट के बेहतर प्रसार और क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिला सिल्वर अवार्ड

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ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के बेहतर प्रसार और क्रियान्वयन के लिए नेशनल इंफरमेशन सेंटर (एनआईसी) के डायरेक्टर जनरल की ओर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को सिल्वर अवार्ड प्रदान किया गया है। भारत सरकार राष्ट्रीय सूचना और विज्ञान केंद्र की ओर से ई-कोर्ट, ई-हास्पिटल, ई-आफिस, सर्विस प्लस जैसे सात प्रोजेक्ट पर अवार्ड दिए गए हैं। जिसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में संचालित ई-कोर्ट प्रोजेक्ट को यह अवार्ड प्रदान किया गया है। अवार्ड समारोह 1 अक्टूबर को वर्चुअली आयेाजित किया था। 


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की इस उपलब्धि में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा का सतत मार्गदर्शन और प्रोत्साहन रहा। हाईकोर्ट कम्प्यूटराइजेशन कमेटी के चेयरमेन जस्टिस मुनींद्र मोहन श्रीवास्तव, रजिस्टार जनरल, रजिस्टार कम्प्यूटराइजेशन और  हाईकोर्ट के सभी तकनीकी अधिकारी कर्मचारी का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा।

केस स्टेट्स की जानकारी ले सकते हैं लोग

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एनआईसी के प्रभारी और साइंटिस्ट-सी संजय कुमार कश्यप ने बताया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश अनुसार ई-कोर्ट प्रोजेक्ट कार्यान्वित की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत् हाईकोर्ट, जिला कोर्ट और तालुका कोर्ट में केस इंफरमेशन सिस्टम का नवीनतम संस्करण स्थापित किया गया है, जो सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। केस इंफरमेशन सिस्टम से प्रत्येक स्तर के कोर्ट का डाटा कहीं से भी इंटरनेट में एक्सेस कर ऑनलाइन केस स्टेट्स देख सकते हैं। ई-कोर्ट का एक मोबाइल ऐप भी उपलब्ध है। कोई भी यूजर ऐप के माध्यम से  अपने केस स्टेट्स की जानकारी ले सकता है।

हाईकोर्ट को और आगे ले जाने का प्रयास

कश्यप ने बताया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में क्योस्क मशीन लगाया गया है और लगभग सभी ज्यूडिशियल सेक्शन को कम्प्यूटराइज कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिला और तालुका कोर्ट में भी क्योस्क मशीन उपलब्ध है, जिससे कोई भी पक्षकार अपने केस का स्टेट्स देख सकता है।  केस का स्टेट्स, जजमेंट सभी ऑनलाइन है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वेबसाइट में जाकर एक क्लिक में सभी जानकारी ली जा सकती है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में हाईकोर्ट में ई-कोर्ट प्रोजेक्ट को और विस्तारित किया जाएगा और डिजिटलाइजेशन और कम्प्यूटराइजेशन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को और आगे ले जाने का प्रयास करेंगे।

पुलिस उत्पीड़न के कारण आत्महत्या मामले में सुनवाई, HC ने DGP सहित कई पुलिस अधिकारियों को मांगा जवाब

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बिलासपुर हाईकोर्ट (bilaspur high court) में पुलिस उत्पीड़न के कारण आत्महत्या मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने DGP डीएम अवस्थी, बिलासपुर IG सहित जांजगीर चांपा SP को नोटिस जारी किया है। बता दें कि यह सुनवाई संजय कुमार आत्महत्या मामले की हुई है।





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दरअसल हाईकोर्ट (bilaspur high court) में पुलिस उत्पीड़न के कारण आत्महत्या करने के मामले में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट से CBI जांच को लेकर आदेश जारी करने की मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने DGP डीएम अवस्थी, बिलासपुर IG सहित जांजगीर चांपा SP को नोटिस जारी किया है। पुलिस अधिकारियों को जवाब मांगा है।





युवक ने फांसी लगाकर की थी आत्महत्या





जांजगीर चांपा के रहने वाले संजय कुमार खरे और अन्य लोगों के बीच जमीन कब्जे को लेकर पिछले साल विवाद हुआ था। बाद में संजय कुमार और उनके बेटे पर हमला किया गया। इसके बाद दूसरे पक्ष ने मारपीट भी की। पीड़ितों ने पामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।





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याचिका में आरोप लगाया गया है कि संजय कुमार से पुलिस अधिकारियों ने कोरे कागज में दस्तखत कराया। इतना ही नहीं 20 हजार रुपये की रिश्वत भी मांग की। इस घटना से दुखी होकर संजय कुमार ने सहायक उप निरीक्षक के खिलाफ सुसाइड नोट लिख कर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मृतक की पत्नी कलेश्वरी खरे ने अपने वकील के जरिए हाईकोर्ट (bilaspur high court) में याचिका दायर की थी।





इन्होंने की सुनवाई





याचिका में पूरे मामले की CBI या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराए जाने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने की है।


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