Media24Media.com: बर्ड फ्लू

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कोरोना के बीच फिर बढ़ा बर्ड फ्लू का खतरा, 100 मुर्गियों के मरने से मचा हड़कंप

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देश में कोरोना की तीसरी लहर का कहर अभी थमा नहीं है। इसी बीच महाराष्ट्र में बर्ड फ्लू का कहर देखने को मिल रहा है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है। दरअसल, ठाणे जिले के अंतर्गत आने वाले शाहपुर तहसील के बेहलोली गांव की एक पोल्ट्री फार्म में अचानक करीब 100 मुर्गियों के मरने से हड़कंप मच गया है। जिले के पशुपालन विभाग को बर्ड फ्लू के खतरे से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। हालांकि मुंबई अब तक बर्ड फ्लू के खतरे से बचा हुआ है, लेकिन अधिकारियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वक्त रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें। 

ठाणे और पालघर जिले में बर्ड फ्लू के खतरे को बढ़ता हुआ देख BMC भी एक्टिव हो गई है और मुंबई में इस पर कड़ी निगरानी बनाए हुए है और अधिकारियों को अलर्ट पर रहने को कहा गया है। अब तक मुंबई से सटे ठाणे पालघर और वसई-विरार जैसे शहरों में स्थानीय प्रशासन में बर्ड फ्लू की पुष्टि की है। मुंबई के चिकन विक्रेताओं का कहना है कि बर्ड फ्लू का खतरा मुंबई में नहीं है और अभी तक धंधे पर भी किसी का असर नहीं पड़ा है। हालांकि सावधानी बरती जा रही है।

25 हजार पक्षियों को मारा गया: पशुपालन मंत्री 

वहीं महाराष्ट्र के पशुपालन मंत्री सुनील केदार ने बर्ड फ्लू को लेकर कहा कि पालघर में करीब 1 हजार 922 और ठाणे में 23 हजार से ज्यादा पक्षियों को मारा गया है। पहले भी जब महाराष्ट्र में बर्ड फ्लू आया था तब राज्य ने बहुत अच्छे से नियंत्रित किया था और इस बार भी हम इसे नियंत्रित कर लेंगे। 

गौरतलब है कि राज्य में कोरोना के हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में नजर आ रहे हैं और और संक्रमण दर अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। इसी के चलते सरकार ने लोगों को पाबंदियों में राहत दी है, लेकिन बर्ड फ्लू की आहट से सभी लोग काफी चिंतित नजर आ रहे हैं।  

प्रवासी पक्षियों की वजह से फैलता है फ्लू (Bird Flu News)

पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मुताबिक भारत में बर्ड फ्लू का ज्यादातर संक्रमण प्रवासी पक्षियों के वजह से ही फैलता है। इसके बाद संक्रामक वस्तुओं से, जैसे कोई व्यक्ति, कपड़ा, सामान, खाने-पीने की वस्तुएं संक्रमित इलाके से देश के अंदर आई हों। हालांकि, भारत सरकार ने साल 2005 में ही बर्ड फ्लू के प्रसार को रोकने के लिए एक्शन प्लान बना लिया था। तब से इसी प्लान को अपडेट कर फॉलो किया जाता है।

ऐसा होता है बर्ड फ्लू का खतरा

बर्ड फ्लू से संक्रमित पहला इंसान साल 1997 में मिला था, जबकि इंसानों से इंसानों को बर्ड फ्लू होने का पहला मामला साल 2003 में चीन में सामने आया था। उससे पहले इंसानों के एक दूसरे के संपर्क में आने से एच7एन9 (H7N9) वायरस के संक्रमण के कोई सबूत नहीं मिले थे। सिर्फ पक्षियों के साथ सीधे संपर्क में आने से इंसानों में बर्ड फ्लू संक्रमण का खतरा होता था।

इंसानों के लिए जानलेवा

बर्ड फ्लू वायरस पक्षियों और मुर्गियों के लिए तो जानलेवा होता ही है, साथ ही यह इंसानों के लिए भी जानलेवा है। इंसानों में बर्ड फ्लू से संक्रमण का पहला मामला साल 1997 में हांगकांग में सामने आया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, तब से लेकर अब तक इससे संक्रमित होने वाले करीब 60 फीसदी लोगों की मौत हो चुकी है। इसलिए कोरोना की तरह इस वायरस से भी लोगों को बचकर रहने की जरूरत है।

2014 में मिला था पहला मामला

जनवरी 2014 में कनाडा ने अमेरिका में H5N1 वायरस से संक्रमित पहले व्यक्ति की सूचना दी थी। संक्रमित यात्री चीन से लौटा था। इसके बाद आज तक संयुक्त राज्य अमेरिका में H5N1 वायरस के संक्रमण की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। फ्लू के वायरस लगातार बदल रहे हैं और एनिमल फ्लू के वायरस इस तरह बदल सकते हैं कि वे लोगों को आसानी से संक्रमित करने और लोगों के बीच फैलने की क्षमता हासिल कर सकते हैं, जिससे महामारी फैल सकती है।

देश में फिर मंडराने लगा बर्ड फ्लू का खतरा, कई मुर्गियों के संक्रमित होने की पुष्टि

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देश में कोरोना की तीसरी लहर का कहर अभी थमा नहीं है। अभी भी रोजाना 20 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। वहीं रोजाना 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। इसी बीच महाराष्ट्र के ठाणे जिले में बर्ड फ्लू का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक ठाने के पड़ोसी जिले पालघर के वसई विरार इलाके के मुर्गी पालन केंद्र की मुर्गियों में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है। पालघर पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर प्रशांत कांबले ने बताया कि मुर्गी पालन केंद्र (पोल्ट्री फार्म) की कुछ मुर्गियां मृत मिली थी, जिसके बाद उनके नमूनों को जांच के लिए भेजा गया था।

डॉक्टर कांबले ने बताया कि जांच के नतीजे शुक्रवार रात को आए, जिसमें मुर्गियों के H5N1 वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। कांबले ने दावा किया कि ये स्थिति गंभीर नहीं है। उन्होंने ये भी स्पष्ट नहीं किया कि पोल्ट्री फार्म की कितनी मुर्गियां मरी हैं। हालांकि जिले के कलेक्टर ने संक्रमित क्षेत्र के एक किलोमीटर की परिधि के इलाके को संक्रमित जोन घोषित किए हुए सभी पंक्षियों को मारने का आदेश दिया है।  

2 हजार पक्षियों को मारने के आदेश

वहीं संबंधित जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों ने सावधानी बरतते हुए इलाके में कुल 2 हजार पक्षियों को मारने के आदेश दिए हैं। इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अभी तक इन दो जिलों के अलावा राज्य के किसी भी पक्षी में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों ने कहा कि इसके के अलावा संक्रमित क्षेत्र से 10 किलोमीटर के इलाके को सर्विलांस क्षेत्र घोषित कर दिया है। जिसका मतलब ये है कि इस 10 किलोमीटर के इलाके में किसी भी तरह का क्रय-विक्रय अगले आदेश तक प्रतिबंधित रहेगा। 

ठाणे में सबसे पहले बर्ड फ्लू की पुष्टि

बता दें कि इस हफ्ते के शुरुआत में ठाणे जिले के शाहपुर तहसील स्थित वेहलोली गांव के पोल्ट्री फार्म में करीब 100 पक्षियों की मौत हुई थी, जिनके नमूनों की जांच में उन्हें बर्ड फ्लू होने की पुष्टि हुई थी। अधिकारी ने बताया कि इसके बाद जिला प्रशासन ने एक किलोमीटर के दायरे में मौजूद मुर्गी पालन केंद्रों की करीब 25 हजार पक्षियों को मारने का आदेश दिया था।

प्रवासी पक्षियों की वजह से फैलता है फ्लू (Bird Flu News)

पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मुताबिक भारत में बर्ड फ्लू का ज्यादातर संक्रमण प्रवासी पक्षियों के वजह से ही फैलता है। इसके बाद संक्रामक वस्तुओं से, जैसे कोई व्यक्ति, कपड़ा, सामान, खाने-पीने की वस्तुएं संक्रमित इलाके से देश के अंदर आई हों। हालांकि, भारत सरकार ने साल 2005 में ही बर्ड फ्लू के प्रसार को रोकने के लिए एक्शन प्लान बना लिया था। तब से इसी प्लान को अपडेट कर फॉलो किया जाता है।

ऐसा होता है बर्ड फ्लू का खतरा

बर्ड फ्लू से संक्रमित पहला इंसान साल 1997 में मिला था, जबकि इंसानों से इंसानों को बर्ड फ्लू होने का पहला मामला साल 2003 में चीन में सामने आया था। उससे पहले इंसानों के एक दूसरे के संपर्क में आने से एच7एन9 (H7N9) वायरस के संक्रमण के कोई सबूत नहीं मिले थे। सिर्फ पक्षियों के साथ सीधे संपर्क में आने से इंसानों में बर्ड फ्लू संक्रमण का खतरा होता था।

इंसानों के लिए जानलेवा

बर्ड फ्लू वायरस पक्षियों और मुर्गियों के लिए तो जानलेवा होता ही है, साथ ही यह इंसानों के लिए भी जानलेवा है। इंसानों में बर्ड फ्लू से संक्रमण का पहला मामला साल 1997 में हांगकांग में सामने आया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, तब से लेकर अब तक इससे संक्रमित होने वाले करीब 60 फीसदी लोगों की मौत हो चुकी है। इसलिए कोरोना की तरह इस वायरस से भी लोगों को बचकर रहने की जरूरत है।

2014 में मिला था पहला मामला

जनवरी 2014 में कनाडा ने अमेरिका में H5N1 वायरस से संक्रमित पहले व्यक्ति की सूचना दी थी। संक्रमित यात्री चीन से लौटा था। इसके बाद आज तक संयुक्त राज्य अमेरिका में H5N1 वायरस के संक्रमण की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। फ्लू के वायरस लगातार बदल रहे हैं और एनिमल फ्लू के वायरस इस तरह बदल सकते हैं कि वे लोगों को आसानी से संक्रमित करने और लोगों के बीच फैलने की क्षमता हासिल कर सकते हैं, जिससे महामारी फैल सकती है।

देश में फिर मंडराने लगा बर्ड फ्लू का खतरा, एम्स में 11 साल के बच्चे ने तोड़ा दम

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देश में कोरोना की दूसरी लहर का कहर अभी थमा नहीं है। अभी भी रोजाना 40 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। वहीं रोजाना 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। इसी बीच देश में फिर बर्ड फ्लू का खतरा मंडराने लगा है। देश में इस साल बर्ड फ्लू के मरीज की पहली मौत हुई है। दिल्ली के एम्स में 11 साल के बच्चे की  H5N1 से मौत हो गई है। बच्चे को 2 जुलाई को एम्स में भर्ती कराया गया था। मरीज की मौत के बाद संपर्क में आए सभी अस्पताल के कर्मचारियों को आइसोलेशन में रखा गया है।



दिल्ली एम्स के प्रशासन के मुताबिक 11 साल का ये बच्चा 2 जुलाई को एम्स में भर्ती कराया गया था। इसके बाद लड़का एवियन फ्लू से संक्रमित पाया गया था। जानकारी के मुताबिक मृतक हरियाणा का था और NCDC की एक टीम को उस गांव में भेजा गया है, जहां इस मामले का पता चला है।  इस एवियन इन्फ्लूएंजा H5N1 मौत के बाद सभी कर्मचारी जो संपर्क में थे, उन्हें फ्लू के किसी भी लक्षण और लक्षणों के लिए खुद की निगरानी करने के लिए आइसोलेशन में रहने की हिदायत दी है। इसी साल शुरुआत में कई राज्यों बर्ड फ्लू के मामले सामने आए थे।


पक्षियों से इंसानों में कैसे आता है बर्ड फ्लू 


लोगों में इंफेक्शन मरे या जिंदा संक्रमित पक्षियों से होता है। उसके आंख से, मुंह से, नाक से जो द्रव निकलता है या उसके मल से ये फैलता है। अगर इनमें से किसी भी चीज़ के संपर्क में मनुष्य आता है तो उसके अंदर भी ये संक्रमण आ सकता है। अगर किसी सतह पर या किसी संक्रमित पक्षी को छूने के बाद यदि कोई मनुष्य अपनी आंख नाक या मुंह में वो गंदा हाथ लगाता है तो उसे संक्रमण का खतरा हो सकता है। यह भी देखा गया है के जब जंगली पक्षी उड़ते समय मल निष्काषित करतें हैं तो उसके संपर्क में आने से ये बीमारी शहरी पक्षियों में भी फैल जाती है। ऐसे में जो लोग भी पोल्ट्री फार्म में कार्य करतें हैं या पक्षियों के संपर्क में सीधे तौर पर रहते हैं उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने कि जरूरत है।


बर्ड फ्लू के लक्षण


बर्ड फ्लू के प्रमुख लक्षणों में कफ, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी दिक्कत, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट दर्द, उल्टी, निमोनिया गले में खराश, नाक बहना, बेचैनी, आंखों में इंफेक्शन जैसी समस्या हो सकती है। अगर आपको यह लगने लगे की आपको बर्ड फ्लू हो गया है तो आप तुरंत किसी डॉक्टर से कॉन्टैक्ट करें और किसी के भी संपर्क में आने से बचें। ताकि आपसे दूसरे इंसान को यह संक्रमण ना फैल पाए।


इस तरह कर सकते हैं बचाव 


बर्ड फ्लू से बचने का तरीका कोरोना से बचने के लिए अपनाएं जाने वाली सावधानियों जैसी ही है। जैसे हाथों को बार-बार साबुन से धोएं। करीब 15 सेकेंड तक धोएं।  सैनिटाइजर साथ में रखें। हाथ ना धो पाने की स्थिति में सैनिटाइज करें। संक्रमित पोल्ट्री फार्म में जाने से बचें। वहां काम करने वाले लोगों के संपर्क में भी आने से बचें। पोल्ट्री फार्म के कर्मचारियों या वहां जाने वाले लोगों को PPE किट पहननी चाहिए। डिस्पोजेबल ग्लव्स पहनें। इस्तेमाल के बाद इन्हें नष्ट कर दें। कपड़े पूरे बाजू के पहनें और अपने जूतों को डिसइनफेक्ट करते रहें। छींकने या खांसने से पहले मुंह को अच्छे से कवर करें। सांस के संक्रणण से बचने के लिए मास्क पहनकर रखें। अगर आप बीमार हैं तो भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।  इस्तेमाल के बाद टिश्यू पेपर को डस्टबिन में डालें। 


इन देशों में मिलता है ज्यादा केस


H5N1 वायरस मुख्य रूप से पक्षियों में होता है और उनमें अत्यधिक संक्रामक होता है। HPAI Asian H5N1 पोल्ट्री के लिए विशेष रूप से घातक होता है। इस वायरस का पहली बार 1996 में चीन में गीज में पता चला था। एशियाई H5N1 पहली बार 1997 में हांगकांग में एक पोल्ट्री प्रकोप के दौरान मनुष्यों में पाया गया था और तब से अब तक अफ्रीका, एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के 50 से अधिक देशों में मुर्गी और जंगली पक्षियों में पाया गया है। पोल्ट्री (बांग्लादेश, चीन, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम) में H5N1 वायरस के लिए 6 देशों को स्थानिक माना जाता है।



2014 में मिला था पहला मामला


जनवरी 2014 में कनाडा ने अमेरिका में H5N1 वायरस से संक्रमित पहले व्यक्ति की सूचना दी थी। संक्रमित यात्री चीन से लौटा था। इसके बाद आज तक संयुक्त राज्य अमेरिका में H5N1 वायरस के संक्रमण की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। फ्लू के वायरस लगातार बदल रहे हैं और एनिमल फ्लू के वायरस इस तरह बदल सकते हैं कि वे लोगों को आसानी से संक्रमित करने और लोगों के बीच फैलने की क्षमता हासिल कर सकते हैं, जिससे महामारी फैल सकती है।


कई मानव संक्रमणों के लिए जिम्मेदार है वायरस


यह वायरस कई मानव संक्रमणों के लिए जिम्मेदार है। जब भी महामारी की संभावना वाले वायरस की पहचान की जाती है तो सीडीसी नियमित सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों के उपाय करता है। क्योंकि एशियाई H5N1 का प्रसार जारी है और यह वायरस कई मानव संक्रमणों के लिए जिम्मेदार है। एशियाई H5 की तैयारी के प्रयास व्यापक रहे हैं. संयुक्त राज्य सरकार द्वारा महामारी की तैयारियों के लिए एशियाई H5N1 वैक्सीन को स्टोर किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल तब किया जा सकता है जब H5N1 वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से और कुशलता से ट्रांसमिट करना शुरू कर दे।

छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू की हुई एंट्री, बालोद के पक्षियों की रिपोर्ट पॉजिटिव

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छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू दस्तक (Bird Flu Chhattisgarh Updates) दे दिया है। गुरुवार को विभाग ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। बालोद जिले में मृत पाए गए पक्षियों की सैंपल रिपोर्ट पॉजिटिव (Bird Flu Reports) आई है। इसके बाद से ही प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू का ये पहला मामला सामना आया है ।





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बालोद जिले में 13 कौओं और 274 कुक्कुट पक्षियों के मृत पाए जाने के बाद तत्काल नमूना जांच के लिए भोपाल भेजा गया था। इसके बाद से ही राज्य सरकार ने अन्य जिलों में भी अलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासन ने किसी भी प्रकार के पक्षी की मौत की सूचना (Bird Flu Chhattisgarh Updates) तत्काल पशुधन विभाग को देने की बात कही है।






गिधाली गांव के पोल्ट्री फार्म के मुर्गियों के सैंपल टेस्ट के लिए भेजे गए थे। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। विभाग ने पोल्ट्री फार्म के मालिक को इसकी सूचना देते हुए फार्म से दूर रहने की बात कही है। ग्रामीणों को भी इस पोल्ट्री फार्म से दूर रहने की हिदायत दी गई है।






राज्य के सभी चिड़ियाघर, अभ्यारण, राष्ट्रीय उद्यान और जंगल सफारी में पक्षियों पर निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश के सभी जिलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। ये टीम बर्ड फ्लू की सतत निगरानी कर रही है।


रायपुर में मरे मिले 12 से 15 कबूतर, जांच के लिए भेजे सैंपल

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छत्तीसगढ़ की राजधानी (Bird Flu Raipur News) के पंडरी बस स्टैंड के पास 12-15 मरे हुए कबूतर मिले है। जानकारी मिलते ही रायपुर महापौर एजाज ढेबर डॉक्टर्स और सफाई मित्रों के साथ मौके पर पहुंचे। बर्ड फ्लू (Bird Flu News) की आशंका पर मृत पक्षियों का सैंपल वेटनरी डॉक्टर्स की टीम ने लिया। बताया जा रहा है सैंपल जांच के लिए कबूतरों के शव भोपाल भेजे जाएंगे।





जानिए भारत में क्यों बार-बार आता है बर्ड फ्लू






अब बर्ड फ्लू मुर्गियों में फैलनी शुरू हो गई है। अब तक सैंकड़ों पक्षियों की मौत हो चुकी है। हरियाणा के दो पोल्ट्री फार्म (Poultry farm) में संक्रमण के फैलने की पुष्टि हो चुकी है। दिल्ली में अब तक 150 से अधिक पक्षी मृत पाए गए हैं। दिल्ली के गाजीपुर मुर्गा मंडी को 10 दिन के लिए बंद कर दिया गया है।






वहीं 11 जिलों के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम बनाई गई। हरियाणा में सैकड़ों मुर्गियों की मौत के बाद बर्ड फ्लू (Bird Flu) की पुष्टि की गई। यूपी में जगह जगह बर्ड फ्लू के लिए छिड़काव शुरू हो गया है। केरल में बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत के बाद अलर्ट जारी किया गया है।





10 राज्यों में बर्ड फ्लू की पुष्टि(Bird Flu Raipur News)





दस जनवरी तक सात राज्यों केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश में बर्ड फ्लू (Bird Flu Virus) के प्रकोप की पुष्टि हुई थी. वहीं, सोमवार को दिल्ली, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में भी इस वायरस संक्रमण की पुष्टि की गई है.


जानिए भारत में क्यों बार-बार आता है बर्ड फ्लू

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देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बर्ड फ्लू की वजह से केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से इसके प्रसार को रोकने के लिए तत्काल हर संभव कदम उठाने को कहा है। केंद्र ने चेतावनी दी है कि यह फ्लू इंसानों और अन्य पालतू पशु पक्षियों में फैल सकता है। सवाल ये उठता है कि भारत में अक्सर बर्ड फ्लू (Bird Flu News) क्यों आ जाता है?





दिल्ली में ‘बर्ड फ्लू’ की पुष्टि, भोपाल प्रयोगशाला में भेजे गए सभी 8 नमूनों में संक्रमण






बर्ड फ्लू यानी एवियन इंफ्लूएंजा भारत समेत पूरी दुनिया में कई दशकों से फैल रहा है। भारत में इसका पहला हमला साल 2006 में हुआ। उस समय से लेकर अबतक भारत में बर्ड फ्लू के चार बड़े हमले हुए। पहला हमला साल 2006 में, दूसरा हमला साल 2012 में, तीसरा हमला साल 2015 में और चौथा हमला साल 2021 में।





ठंड में फैलता है फ्लू (Bird Flu News)





भारत में बर्ड फ्लू हमेशा साल के अंत महीनों यानी ठंडी के मौसम में ही फैलता आया है। इसके संक्रमण के अधिकांश मामले सितंबर या अक्टूबर से फरवरी-मार्च के बीच सामने आते हैं। आपको बता दें कि भारत में भारत में बर्ड फ्लू का संक्रमण फैलने के दो मुख्य वजह है, पहला प्रवासी पक्षियों द्वारा और दूसरा संक्रामक वस्तुओं के माध्यम से।





प्रवासी पक्षियों की वजह से फैलता है फ्लू (Bird Flu News)





पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मुताबिक भारत में बर्ड फ्लू का ज्यादातर संक्रमण प्रवासी पक्षियों के वजह से ही फैलता है। इसके बाद संक्रामक वस्तुओं से, जैसे कोई व्यक्ति, कपड़ा, सामान, खाने-पीने की वस्तुएं संक्रमित इलाके से देश के अंदर आई हों। हालांकि, भारत सरकार ने साल 2005 में ही बर्ड फ्लू के प्रसार को रोकने के लिए एक्शन प्लान बना लिया था। तब से इसी प्लान को अपडेट कर फॉलो किया जाता है।





ऐसा होता है बर्ड फ्लू का खतरा





बर्ड फ्लू से संक्रमित पहला इंसान साल 1997 में मिला था, जबकि इंसानों से इंसानों को बर्ड फ्लू होने का पहला मामला साल 2003 में चीन में सामने आया था। उससे पहले इंसानों के एक दूसरे के संपर्क में आने से एच7एन9 (H7N9) वायरस के संक्रमण के कोई सबूत नहीं मिले थे। सिर्फ पक्षियों के साथ सीधे संपर्क में आने से इंसानों में बर्ड फ्लू संक्रमण का खतरा होता था।





इंसानों के लिए जानलेवा





बर्ड फ्लू वायरस पक्षियों और मुर्गियों के लिए तो जानलेवा होता ही है, साथ ही यह इंसानों के लिए भी जानलेवा है। इंसानों में बर्ड फ्लू से संक्रमण का पहला मामला साल 1997 में हांगकांग में सामने आया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, तब से लेकर अब तक इससे संक्रमित होने वाले करीब 60 फीसदी लोगों की मौत हो चुकी है। इसलिए कोरोना की तरह इस वायरस से भी लोगों को बचकर रहने की जरूरत है।


बर्ड फ्लू का खतरा: पक्षी विहार में रोज किया जा रहा दवा का छिड़काव

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद गांव में कौवे का शव मिलने के बाद वन विभाग में हडकंप मचा हुआ है। राजधानी रायपुर स्थित पक्षी विहार गुरुवार से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। पक्षियों की बीमारी से बचाया जा सके, इसलिए बाडा और परिसर में रोजाना चूना व दवा का छिड़काव (Bird flu precaution in Chhattisgarh) करने का निर्देश दिया है। पक्षी विहार में विचरण कर रहे पक्षियों की इम्यूनिटी बढ़े इसलिए दाना और पानी में एंटीबायोटिक मिलाकर दिया जा रहा है। इसके अलावा पक्षी विहार में काम कर रहे कर्मचारियों को मास्क और सेफ्टी किट लगाना अनिवार्य है।





रायपुर : ऑयल टैंकर ब्लास्ट होने से फैक्ट्री में लगी आग





350 से ज्यादा पक्षी नंदनवन पक्षी विहार में






वन विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार नंदनवन पक्षी विहार में वर्तमान में अफ्रीकन ग्रे पेलिकन, ब्लैक श्वान, कारोलाइन डक, क्रस्टेड डक, सिल्वर फीजेंट, क्रेस्टेज वुड, लव बर्ड, जेब्रा फ्रिंज, ब्लयूरिंगनेट, गोल्डन फ्रीजेंट, लेडिज हेमरेस्ट, एमोजोन, ग्रे पैरेट, कोहिनूर, शुर्तरमुर्ग व मकाऊ पक्षी हैं।





वन विभाग के डॉक्टर का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पक्षियों के बाड़े और परिसर में दवा व चूने का छिड़काव किया गया है। पक्षियों को इम्युनिटी मजबूत हो सके इसलिए दाना व पानी में एंटी एंटीबायोटिक मिलाकर (Bird flu precaution in Chhattisgarh) दिया जा रहा है।


इंसानों में भी फैल सकता है बर्ड फ्लू

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देश में कोरोना के साथ-साथ एक और संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के बाद अब हिमाचल प्रदेश और केरल में भी बर्ड फ्लू (Bird Flu in Humans) का खतरा बढ़ गया है। इन राज्यों में सैकड़ों पक्षियों को मार दिया गया है। केरल ने राज्य में इसे राजकीय आपदा घोषित कर दिया है।





भारत के इन राज्यों में फैल रहा है बर्ड फ्लू का खतरा, अलर्ट जारी, जानिए इसके लक्षण और बचाव





केंद्रीय मंत्री संजीव बलयान का कहना है कि हमें पांच राज्यों हिमाचल प्रदेश, केरल, राजस्थान, हरियाणा और मध्यप्रदेश से ए1 इंफ्लूएंजा की रिपोर्ट्स मिली हैं। हरियाणा में यह वायरस पोल्ट्री में संक्रमित हो गया है, जबकि बाकी राज्यों में जंगली और प्रवासी पक्षियों में ही इसे देखा गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये इंसानों में फैल सकता है लेकिन अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। इसका कोई इलाज नहीं है। सभी राज्यों को सतर्कता बरतने के निर्देश दे दिए हैं।






मध्यप्रदेश में परिवहन पर रोक(Bird Flu in Humans)






मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक के बाद मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यहां किसी पोल्ट्री में बर्ड फ्लू नहीं मिला है। हम केरल और दूसरे प्रभावित राज्यों से पोल्ट्री उत्पाद (कुक्कुट) के परिवहन पर अस्थाई रोक लगा देंगे। हमने स्थिति पर नजर बनाई हुई है।





तीन राज्यों में लगातार की जा रही निगरानी





राजस्थान, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और केरल में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद पशुपालन और डेयरी विभाग, भारत सरकार ने दिल्ली में एक कंट्रोल रूम की स्थापना की है, ताकि राज्य अधिकारियों की ओर से किए जा रहे बचाव और नियंत्रण उपायों पर निगरानी की जा सके।


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