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आतंक को खत्म करने के बाद जो खोया है उसे वापस लेंगे: गृहमंत्री अमित शाह

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 कश्मीर को भारत और उसकी आत्मा का अभिन्न अंग बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने न केवल कश्मीर घाटी से आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म किया है, बल्कि जो खोया है उसे वापस पाने के लिए दृढ़ संकल्प है। यह बात उन्होंने पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए क्षेत्र और क्षेत्र के सांस्कृतिक गौरव का परोक्ष संदर्भ देते हुए कही।


गृह मंत्री ने ‘जम्मू कश्मीर और लद्दाख: थ्रू द एजेस – ए विजुअल नैरेटिव ऑफ कॉन्टिन्यूटीज एंड लिंकेज’ नामक पुस्तक का विमोचन करने के बाद कहा। यह पुस्तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की कहानी पेश करती है। भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद की इस पुस्तक का संपादन रघुवेंद्र तंवर ने किया है।

गृह मंत्री शाह ने कहा, “कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा और हम जल्द ही कश्मीर को अपना सांस्कृतिक गौरव वापस पाते देखेंगे।” उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के एक कथन को याद करते हुए कहा, “जम्मू और कश्मीर न केवल भारत का हिस्सा है, बल्कि देश की आत्मा का अभिन्न अंग है।”
उन्होंने कहा कि इस पुस्तक ने साबित कर दिया है कि कश्मीर और लद्दाख भी हमारी संस्कृति और विरासत का अभिन्न अंग हैं। अनुच्छेद 370, जो कश्मीर को राष्ट्र से अलग करने का एक प्रयास था, उसे भी हटा दिया गया।”

उन्होंने कहा, “संविधान सभा में बहुमत नहीं चाहता था कि अनुच्छेद 370 संविधान का हिस्सा बने। हालांकि यह एक हिस्सा बन गया। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने जब यह एक हिस्सा बन गया, तो महसूस किया कि इसे एक अस्थायी प्रावधान के रूप में लिखना आवश्यक था।” “जो कृत्रिम है, जो प्राकृतिक या जैविक नहीं है, उसका अस्तित्व लंबे समय तक नहीं रहता। यह पीएम मोदी के दृढ़ संकल्प के साथ ही था कि 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया। इसने हमारे स्वतंत्रता के बाद के इतिहास के एक कलंकित अध्याय को समाप्त कर दिया। वहां से शेष भारत के साथ-साथ कश्मीर के विकास का एक नया अध्याय शुरू हुआ।”

कश्मीर पर सरकार के फोकस पर प्रकाश डालते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा: “हमने न केवल आतंकवाद पर नियंत्रण पाया है, बल्कि हम इसे रोकने में भी सफल रहे हैं। नरेंद्र मोदी सरकार ने घाटी से आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने का भी काम किया है। “और यह सब इस भूमि के लिए हुआ है, जिसने देश और दुनिया की सभ्यताओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कश्मीर के विद्वानों ने हमारे देश की भाषाओं, व्याकरण और ज्ञान के विभिन्न रूपों को समृद्ध किया है।”

“2024 में जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं हुई है। 25,000 से अधिक पंचायत सदस्य, सरपंच, तहसील पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य चुनाव जीतकर आए हैं और अब अपने गाँव, तहसील और जिले चला रहे हैं। जमीनी स्तर पर पंचायती राज और लोकतंत्र मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा, “पिछले 33 वर्षों में सबसे अधिक मतदान हाल ही में दर्ज किया गया।” पुस्तक के बारे में बात करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि लगभग 3,000 साल पुराने ग्रंथों को स्कैन किया गया और संपादक ने पुस्तक में कश्मीर के ऐतिहासिक संदर्भ को उजागर किया। उन्होंने कहा कि मंदिर के खंडहर और चित्रों में परिलक्षित संस्कृति और भारत से अफगानिस्तान और पश्चिमी एशिया की ओर बौद्ध धर्म की यात्रा भी पुस्तक में दर्ज है, यह भी पुष्टि करता है कि कश्मीर हमेशा से भारत का हिस्सा रहा है। हमलावरों द्वारा क्षतिग्रस्त मंदिरों की तस्वीरों का उपयोग, कश्मीर में संस्कृत का उपयोग, डोगरा राजवंश का प्रगतिशील शासन, महाराजा रणजीत सिंह की वीरता और 1947 के बाद की गई गलतियों और उनके सुधारों ने पुस्तक में कश्मीर के 3,000 साल के इतिहास को प्रस्तुत किया है। एचएम शाह ने कहा, “इतिहास को लुटियंस दिल्ली से जिमखाना क्लब या दरीबा कलां से बल्लीमारान तक सीमित या दर्ज नहीं किया जा सकता है। इतिहास को लोगों के साथ घुलने-मिलने, लोगों की संस्कृति और भाषा को समझने के माध्यम से समझना चाहिए,” उन्होंने इतिहासकारों के 150 वर्षों के उस दौर की आलोचना की, जिसमें उन्होंने बहुत ही संकीर्ण दृष्टिकोण अपनाया था।

गृहमंत्री अमित शाह के एक एडिटेड वीडियो मामले में पुलिस ने दर्ज की FIR, पढ़े पूरी खबर

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 Amit Shah Doctored Video : बीजेपी नेता और देश के गृहमंत्री अमित शाह के एक एडिटेड वीडियो मामले में दिल्ली पुलिस ने की FIR दर्ज की है. बीजेपी और गृहमंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से अमित शाह के एडिटेड वीडियो मामले में शिकायत की थी. इस कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर किया था.


अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज

बीजेपी और गृह मंत्रालय की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने IPC की धारा 153/153A/465/469/171G और IT एक्ट की धारा 66C के तहत केस दर्ज किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि गृहमंत्री अमित शाह ने एससी/एसटी या ओबीसी के लिए आरक्षण खत्म करने की बात नहीं की है और यह वीडियो फर्जी है.

अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना

कांग्रेस बार-बार भाजपा पर संविधान बदलने का आरोप लगा रही है. इस पर अमित शाह ने साफ किया कि भाजपा कभी ऐसा नहीं करेगी और न करने देगी. अमित शाह ने खुलकर कहा, "विपक्षी दल संविधान बदलने के मुद्दे को आरक्षण से जोड़कर पेश कर रही है. लेकिन मैं साफ कर देना चाहता हूं कि हमारे पास 2014 में भी संविधान बदलने के लिए पूर्ण बहुमत था और 2019 में तो भाजपा को पूर्ण बहुमत था. 10 साल से नरेंद्र मोदी जी पूर्ण बहुमत की सरकार के साथ शासन कर रहे हैं. हमने कभी आरक्षण को छेड़ा नहीं है." 

गृह मंत्री अमित शाह 14 अप्रैल को राजनांदगांव दौरे पर, जनसभा को करेंगे संबोधित

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 Amit Shah CG Visit : पीएम मोदी के दौरे के बाद गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ दौरे पर आ रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री शाह अपने दौरे के दौरान चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 14 अप्रैल को छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री शाह राजनांदगांव लोकसभा में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे।


केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपने प्रवास के दौरान राजनांदगांव लोकसभा सीट से प्रत्याशी संतोष पांडेय के पक्ष में प्रचार करेंगे और जनता से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील करेंगे। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे से ठीक एक दिन पहले यानी की 13 अप्रैल को कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी छत्तीसगढ़ दौरे पर आ रहे हैं। बता दें कि, 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान होना है और छत्तीसगढ़ की बस्तर सीट पर भी इसी दिन मतदान होगा. बता दें कि तो प्रदेश में 3 चरणों में मतदान होगा. 

वामपंथी उग्रवाद से लड़ाई में जीत के आखिरी चरण में : गृहमंत्री अमित शाह

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जगदलपुर। बस्तर में आज CRPF अपना 84वां स्थापना दिवस मना रही है। करनपुर कैंप में कोबरा के 201/204 बटालियन के परेड ग्राउंड में कार्यक्रम जारी है। अलग-अलग सेक्टर के जवानों ने परेड की। इस बीच गृहमंत्री ने परेड की सलामी ली। जवानों को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई अब अंतिम चरण में है।


अमित शाह ने CRPF के 84वें स्थापना दिवस पर बधाई दी। 2249 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देकर कार्यक्रम की शुरुआत की।अमित शाह ने कहा मैं बस्तर में खड़ा होकर आप लोगों के बीच बोल रहा हूं। आज नक्सलियों का जो खात्मा हो रहा है। ये CRPF की बदौलत है।

CRPF के पहुंचते ही मेरी चिंता खत्म हो जाती है

अमित शाह बोले, CRPF का जन्म लौह पुरुष सरदार पटेल ने किया था। एक बटालियन से शुरू हुई CRPF आज देश के सभी कोने में मौजूद है। अगर कहीं से अप्रिय घटना की खबर आती है। और फिर पता चलता है कि, वहां CRPF की टीम पहुंच जाती है, तो मेरी चिंता खत्म हो जाती है, क्योंकि मैं जानता हूं जहां CRPF है, वहा सब कुछ अच्छा होगा।

हिंसा की घटनाओं में आई है कमी

अमित शाह ने कहा, 2010 की तुलना में देश में वामपंथी उग्रवाद हिंसा की घटनाओं में 76 फीसदी की गिरावट हुई है। इसी का नतीजा है कि, होने वाली मौतों में 78 फीसदी की कमी आई है।

वामपंथियों से लड़ाई लड़ी है

अमित शाह ने कहा, उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई जारी है। इतिहास में CRPF का अहम योगदान है। उनके कल्याण के लिए भारत सरकार ने अहम कदम उठाएं हैं। जवानों ने वामपंथियों से लड़ाई लड़ी है। 18 हजार से ज्यादा आदिवासी भाइयों को जवानों ने दवाई से लेकर सभी सुविधाएं मुहैया कराई है।

जवानों ने जनता की सेवा में जज्बे से काम किया

अमित शाह बोले, कोरोना काल में CRPF की जहां तैनाती थी। वहां जनता की सेवा में जज्बे से काम किया है। अपना आदर्श वाक्य सेवा और निष्ठा का काम किया है। अस्पताल में भर्ती कराने से लेकर सभी तरह की जरूरत पूरी करने में अहम भूमिका निभाई है। इसके लिए उनका आभार व्यक्त किया है।

फंडिंग के स्त्रोत को रोके जा रहें

अमित शाह ने कहा कि, वामपंथियों और उग्रवादियों की फंडिंग के स्त्रोत को रोकने के लिए हमने NIAऔर ED को एक्टिव किया है। जोकि अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है।इसका नतीजा है कि आज नक्सलियों की कमर टूट गई है।

सुरक्षा का मजबूत आधार CRPF

अमित शाह बोले, देश की शांति और सुरक्षा का मजबूत आधार CRPF बन गया है। जोकि देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इसलिए बस्तर में हम स्थापना दिवस समारोह मना रहे हैं आंतरिक सुरक्षा में CRPF जवानों की अहम भूमिका है। अमित शाह ने शहीद जवानों की पत्नियों वीरता पुरस्कार से सम्मानित करके उनका हौसला बढ़ाया। नार्थ सेक्टर, मणिपुर, नागालैंड सेक्टर, कोबरा सेक्टर, साउथ सेक्टर, वेस्ट बंगाल सेक्टर,छत्तीसगढ़ सेक्टर के जवानों ने परेड की। डॉग शो, बाइक से स्टंट और नाट्य रूपांतरण करके फोर्स के कामों को दिखाया गया।

 

25 मार्च को बस्तर का दौरा करेंगे गृहमंत्री अमित शाह, दौरे से पहले अलर्ट

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रायपुर । लंबे समय से छत्तीसगढ़  के बस्तर में नक्सल फ्रंट पर सेवाएं दे रहे सीआरपीएफ जवानों के लिए 25 मार्च खास दिन होगा। 84वें स्थापना दिवस पर पहली बार बस्तर में बड़ा आयोजन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल करने जा रही है। इस आयोजन में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) शामिल होंगे। उनके अतिरिक्त सीआरपीएफ के डेढ़ हजार से अधिक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहेंगे। सुबह 9 बजे शुरू होकर ढाई घंटे तक चलने वाले इस आयोजन का आकर्षण परेड और डॉग शो रहेगा।


इस विशाल सैन्य बल की अब तक राइजिंग सेरेमनी देश  की राजधानी नई दिल्ली में होती रही है। पहली बार बस्तर में इतना बड़ा आयोजन कर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहता है। संभाग के नक्सल प्रभावित इलाके तक आकर केंद्रीय गृहमंत्री संभवतः यह संदेश देना चाहते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार माओवादी मामलों को लेकर संजीदा है। करनपुर में अभी से तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं, ताकि आयोजन को भव्यता प्रदान की जा सके।

सुरक्षा के लिहाज से बस्तर पुलिस  के अधिकारी भी तैयारी में जुटे हैं। हालांकि कोबरा बटालियन के करनपुर स्थित विशाल सेटअप और इसके आसपास के इलाके में माओवादियों की उपस्थिति के प्रमाण नहीं मिलते हैं, लेकिन चूंकि देश के कद्दावर नेता का प्रवास होना है। इस लिहाज से किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश न रह जाए, इस बात को ध्यान में रखते हुए बस्तर पुलिस पूरी एक्सरसाइज कर रही है। हालांकि सुरक्षा की कमान सीआरपीएफ के कमांडेंट बस्तर के अफसरों के हाथ रहेगी।


वामपंथी उग्रवाद पर गृहमंत्री अमित शाह बोले, वित्तीय चोकिंग कर इनके इकोसिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त करने में मिली सफलता

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नई दिल्‍ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद पर मोदी सरकार  ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई इससे बड़ी सफलता मिली है. बीते 4 दशकों में पहली बार 2022 में नागरिकों और सुरक्षाबलों की मृत्यु की संख्या 100 से कम रह गई है. उन्‍होंने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान में मोदी सरकार के तीन प्रमुख स्तम्भ हैं- उग्रवादी हिंसा पर कठोरता के साथ लगाम कसना, केंद्र-राज्य के बीच बेहतर समन्वय और विकास से जन-भागीदारी के माध्यम से वामपंथी उग्रवाद के प्रति समर्थन खत्म करना. वे नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद पर गृह मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे.


केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर और नए भारत’ में हिंसा और वामपंथी उग्रवादी विचार की कोई जगह नहीं है. हमारी सरकार ने इस दिशा में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. मोदी सरकार ने किसी भी दल और विचारधारा के भेदभाव के बिना वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों के साथ समन्वय बेहतर करने के लिए अनेक सफल प्रयास किए हैं. हमारे त्रि-सूत्रीय रणनीति से पिछले 8 वर्षो में वामपंथी उग्रवाद पर लगाम कसने में ऐतिहासिक सफलता मिली है.

वामपंथी उग्रवाद की रीढ़ तोड़ने में सुरक्षाबलों को बहुत बड़ी कामयाबी मिली

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद से संबंधित हिंसक घटनाओं में वर्ष 2010 के उच्च स्तर से 2022 में 76% की कमी आई है. वामपंथी उग्रवादी घटनाओं में जान गवाँने वाले नागरिकों तथा सुरक्षाकर्मियों की संख्या वर्ष 2010 के सर्वाधिक स्तर 1005 से 90% घटकर 2022 में 98 रह गई, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों की संख्या 90 से घटकर 45 रह गई है. वर्ष 2019 से अबतक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में 175 नए कैंप स्थापित कर सुरक्षा वैक्यूम को कम करने और टॉप लीडरशिप को निष्क्रिय करके वामपंथी उग्रवाद की रीढ़ तोड़ने में सुरक्षाबलों को बहुत बड़ी कामयाबी मिली है.

बिहार, झारखण्ड तथा उड़ीसा को वामपंथी उग्रवाद से लगभग मुक्त कराया गया

गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बूढ़ा पहाड़ और चकरबंदा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सफलता मिली है और बिहार, झारखण्ड तथा उड़ीसा को वामपंथी उग्रवाद से लगभग मुक्त करा लिया गया है. वामपंथी उग्रवाद-प्रभावित क्षेत्रों में ऑपरेशन में मदद और हमारे जवानों की जान बचाने के लिए बीएसएफ एयरविंग को सशक्त किया गया है, जिसके लिए पिछले एक वर्ष में नए पायलट्स और इंजिनियर्स की नियुक्ति हुई है. गृह मंत्रालय वामपंथी उग्रवादियों की वित्तीय चोकिंग कर इनके इकोसिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त करने का काम कर रहा है. बैठक में सभी सदस्यों ने अपने बहुमूल्य विचार दिए और वामपंथी उग्रवाद से लड़ने के मोदी सरकार के प्रयासों की सराहना की.

जम्मू-कश्मीर में गृहमंत्री अमित शाह का कड़ा संदेश, कहा जीरो टॉलरेंस की नीति रहेगी जारी

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देश के गृहमंत्री अमित शाह 3 दिवसीय दौरे पर शनिवार को जम्मू-कश्मीर पहुंचे, धारा 370 हटने के बाद अपनी पहली यात्रा पर आए गृहमंत्री शाह ने आतंकवादियों के हमले में मारे गए लोगों के परिजन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शांति भंग करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वसन दिया। उन्होंने ये भी दोहराया कि परिसीमन के बाद केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे और उसके बाद राज्य का दर्जा दिया जाएगा। साथ ही आतंक पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी। 


गृहमंत्री ने घाटी के युवाओं से शांति दूत बनने की अपील करते हुए कहा कि पांच अगस्त, 2019 के बाद से आतंकवाद घटा है। भ्रष्टाचार और वंशवादी राजनीति पर पूर्ण विराम लग गया है और शांति, विकास और समृद्धि का युग शुरू हुआ है।  शाह ने जम्मू-कश्मीर के शहीद पुलिस इंस्पेक्टर परवेज अहमद डार के घर जाकर अपने दिनभर के व्यस्त कार्यक्रम की शुरुआत की। शहर के बाहरी इलाके नौगाम में 22 जून को मस्जिद में शाम की नमाज अदा कर लौट रहे अहमद डार को आतंकवादियों ने उनके घर के पास गोली मार दी थी।

गृहमंत्री ने 9 लोगों के परिवार से की मुलाकात

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि शाह ने डार के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और डार की पत्नी फातिमा अख्तर को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी में नियुक्ति के दस्तावेज सौंपे। शाह ने श्रीनगर के लोकप्रिय दवा दुकान के मालिक कश्मीरी पंडित मखनलाल बिंद्रू और स्कूल की प्राचार्या सुपिंदर कौर समेत हाल के आतंकवादी हमलों में मारे गए 9 लोगों के परिवार के सदस्यों से भी मुलाकात की।

मिशन यूथ विभाग ने किया था कार्यक्रम का आयोजन

अधिकारियों के मुताबिक शाह ने सुरक्षा स्थिति की भी समीक्षा की। इस दौरान गृह मंत्री को केंद्र शासित प्रदेश से आतंकवाद को खत्म करने के लिए उठाए गए कदमों और सुरक्षा बलों द्वारा घुसपैठ रोधी उपायों की जानकारी दी गई। उन्होंने  केंद्रशासित प्रदेश के यूथ क्लब को संबोधित करते हुए कहा कि 'मैं यहां कश्मीर के युवाओं से मित्रता करने आया हूं।  मोदी जी और भारत सरकार के साथ हाथ मिलाइए और कश्मीर को आगे ले जाने की यात्रा में भागीदार बनिए।' मिशन यूथ विभाग ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था।

BJP नीत राजग सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के लिए किए गए फैसले का बचाव करते हुए शाह ने कहा कि 5 अगस्त, 2019 को कश्मीर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि कश्मीर में दहशत, आतंकवाद, भय, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद पर पूर्ण विराम के साथ एक नई शुरुआत की गई और शांति, विकास, समृद्धि और सह-अस्तित्व का नया युग शुरू हुआ।

गृहमंत्री का लोगों को संदेश

गृहमंत्री शाह ने कहा कि कुछ लोग दावा करने लगे थे कि कश्मीर में आतंकवाद बढ़ेगा, लेकिन वो घटा और पथराव कहीं नजर नहीं आता। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि 'हम उनसे कड़ाई से निपटेंगे जो जम्मू कश्मीर की शांति में बाधा पहुंचाएंगे।  ये हमारा वादा है कि कोई भी विकास की इस यात्रा को रोक नहीं पाएगा।' उन्होंने कहा कि कुछ स्थानीय नेता परिसीमन की प्रक्रिया बाधित कर रहे हैं।  उन्होंने कहा कि 'जो शोर मचा रहे हैं, वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि लोकतंत्र तीन परिवारों के चंगुल से बाहर आ गई है और अब यह गरीबों की हो गया है।'

जल्द दिया जा सकता है राज्य का दर्जा

गृहमंत्री ने कहा कि उन्होंने संसद से वादा किया है कि विधानसभा चुनाव के बाद जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 'चुनाव होंगे।  (कश्मीर के नेतागण चाहते हैं कि) परिसीमन को रोक दिया जाए। क्यों? क्योंकि इससे उनकी राजनीति को नुकसान होता है।  अब, कश्मीर में ऐसी चीजें नहीं रुकेंगी।' शाह ने कहा कि 'कश्मीर के युवाओं को मौके मिलेंगे, इसलिए एक सही परिसीमन किया जाएगा, उसके बाद चुनाव होंगे और फिर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।  मैंने देश की संसद में यह कहा है और इसका यह रोडमैप है।' शाह ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद और विकास साथ-साथ नहीं रह सकते।


गृहमंत्री ने कहा कि 'आतंकवाद का सफाया कौन करेगा? सरकार? नहीं।  सरकार बस प्रयास कर सकती है, लेकिन युवा क्लब के सदस्यों की आतंकवाद को दूर करने की जिम्मेदारी है।  आपको शांति और विकास का दूत बनना होगा और जम्मू कश्मीर में यह संदेश फैलाना होगा कि यह हमारी जिंदगी को आगे ले जाने का रास्ता नहीं है।  ये रास्ता नहीं हो सकता।'  उन्होंने कहा कि 'जो पाकिस्तान की बात कर रहे हैं, मैं उन्हें जवाब दे सकता हूं, लेकिन मैं यहां उसके लिए नहीं आया हूं।  मैं अपने छोटे भाई-बहनों से बतियाने आया हूं।  पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर समीप में है, वैसे हम यहां के विकास से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन जम्मू कश्मीर से उसकी तुलना कीजिए। PoK के लोगों को गरीबी और अंधेरे के सिवा क्या मिला है?'

'लोगों को गुमराह करने की कोशिश'

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 'ईश्वर ने प्राकृतिक सुंदरता के साथ कश्मीर को स्वर्ग बनाया है, लेकिन मोदी जी यहां शांति, समृद्धि और विकास भी देखना चाहते हैं।  उसके लिए, मैं यहां कश्मीर के युवाओं से समर्थन मांगने के लिए आया हूं।' उन्होंने कहा कि 'प्रशासन ने मित्रता का हाथ बढ़ाया है, युवा क्लब स्थापित किए गए हैं, आपको एक मंच, एक मौका दिया गया है, इसलिए आगे आएं और इस मौके का लाभ उठाएं।  यहां लोकतंत्र को मजबूत बनाएं, युवा उन तत्वों को जवाब दें जो लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।'

यूथ क्लबों का लाथ उठाते हुए बढ़े आगे: शाह

गृहमंत्री  ने कहा कि '70 साल की जम्हूरियत ने क्या दिया? 87 विधायक, सात सांसद, और तीन परिवार, लेकिन मोदी ने इतने कम समय में 30 हजार निर्वाचित प्रतिनिधि दिए।  उन्होंने कहा कि यूथ क्लबों के सदस्यों के साथ बातचीत के बाद उन्हें खुशी हुई क्योंकि कश्मीर के युवा अब सही मार्ग पर निकल पड़े हैं और विकास की यात्रा में साझेदार बन गए हैं।' उन्होंने आगे  कहा कि 'मैं आपके अच्छे भविष्य की कामना करता हूं।  यूथ क्लबों के इस अवसर का लाभ उठाते हुए आगे बढ़ते रहें और प्रशासन को सहयोग दें।'

गृहमंत्री अमित शाह की यात्रा जरूरी थी: फारूक अब्दुल्ला

अमित शाह की यात्रा पर नेशनल काफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि नागरिकों की लक्षित हत्याओं के बाद केंद्रीय गृहमंत्री की यात्रा जरूरी थी। हालांकि उन्होंने BJP के इस दावे पर सवाल खड़ा किया कि इस केंद्रशासित प्रदेश से आतंकवाद का सफाया हो गया है। अब्दुल्ला ने कहा कि 'जम्मू कश्मीर केंद्र के प्रत्यक्ष शासन में है और उभरती स्थिति की मांग थी कि शाह आएं क्योंकि ऐसा जरूरी था।  वो आए हैं और लोगों को उम्मीद है कि  लक्षित हत्या रूकेगी। वह उन्हें सुरक्षा दे पाएंगे।' बता दें कि गृहमंत्री के दौरे को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। 

आज ही के दिन 2001 में संसद पर हुआ था आतंकी हमला, PM मोदी सहित गृहमंत्री शाह और स्पीकर ओम बिरला ने किया शहीदों को नमन

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भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले को आज 19 साल पूरे हो गए हैं।इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सहित स्पीकर ओम बिरला ने संसद (Attack on parliament) पर हमले के दौरान शहीद हुए जवानों को नमन किया है।





LIVE UPDATE: छत्तीसगढ़ में वर्चुअल मैराथन का आयोजन आज, देखें पल पल के अपडेट





बता दें कि 19 साल पहले आज ही के दिन यानी 13 दिसंबर 2001 की सुबह लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन पर आतंकियों ने हमला किया था। 2001 में हमले के दौरान शीतकालीन सत्र चल रहा था। इस हमले में दिल्ली पुलिस के 5 जवान, CRPF की एक महिला कॉन्स्टेबल के अलावा तीन और अन्य लोगों की जान चली गई थी।





प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट सुरक्षा कर्मियों के बलिदान को किया याद





पीएम ने ट्वीट कर लिखा है कि 'हम 2001 में आज के दिन अपनी संसद पर हुए कायरतापूर्ण हमले को कभी नहीं भूलेंगे। हम उन लोगों की वीरता और बलिदान को याद करते हैं जिन्होंने हमारी संसद की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवा दी। भारत हमेशा उनका शुक्रगुजार रहेगा।'






https://twitter.com/narendramodi/status/1337938018426966022




वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी संसद पर हमले के दौरान शहीद हुए जवानों को नमन किया है।






https://twitter.com/AmitShah/status/1337941555781402625




गृह मंत्री ने ट्वीट कर लिखा है कि '2001 में लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन पर हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना सर्वोच्च न्योछावर करने वाले मां भारती के वीर सपूतों को कोटि-कोटि नमन करता हूं। कृतज्ञ राष्ट्र आपके अमर बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।'






https://twitter.com/AmitShah/status/1338004838584442881




स्पीकर ओम बिरला (Attack on parliament) ने भी दी श्रद्धांजलि






https://twitter.com/ombirlakota/status/1337953861902856192




गौरतलब है कि 2001 में 13 दिसंबर की सुबह संसद भवन की इमारत में घुसने के लिए आतंकवादियों ने सफेद रंग की एंबेसडर कार का इस्तेमाल किया था और सुरक्षाकर्मियों को गच्चा देने में कामयाब रहे, लेकिन उनके कदम लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र कर पाते उससे पहले ही सुरक्षा बलों ने उन्हें बलों ने उन्हें मार गिराया। हालांकि इस दौरान दिल्ली पुलिस के 5 जवान, सीआरपीएफ की एक महिला कॉस्टेबल के अलावा तीन और अन्य लोग शहीद हो गए थे। इसके अलावा इसमें 16 जवान भी घायल हुए थे।





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देश की संसद पर हुए हमले की कार्रवाई करीब 45 मिनट तक चली थी। इस हमले की खबर जब टीवी के माध्‍यम से लोगों तक पहुंची तो हर कोई हैरान था। देश की संसद पर हमले की ये पहली घटना थी। इस हमले में जैश ए मोहम्‍मद के पांच आतंकी शामिल थे। इन आतंकियों के मकसद को विफल करने में सीआरपीएफ की महिला कांस्टेबल और संसद के दो गार्ड और दिल्ली पुलिस के पांच जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।





हमले के 12 साल बाद दी गई आतंकियों को फांसी





संसद हमले (Attack on parliament) के 12 साल बाद 9 फरवरी 2013 को दोषी अफजल गुरु को फांसी पर चढ़ाया गया था।


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