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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के समक्ष आदिवासियों ने पारंपरिक वेशभूषा में प्रसिद्ध लोकनृत्य का किया प्रदर्शन

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रायपुर। भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपने बीच पाकर छत्तीसगढ़ के लोग हमेशा गौरवान्वित होते हैं, विशेष रूप से यहां के जनजातीय समाज स्वयं को बहुत प्रतिष्ठित महसूस कर रहा है।

इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, लोकसभा क्षेत्र रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक खुशवंत साहेब एवं रोहित साहू उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के गौरवशाली पुरखौती मुक्तांगनमें आयोजित सरगुजा प्रखण्ड के लोकार्पण और महतारी वंदन की 9 वीं किस्त की राशि के अंतरण के अवसर पर छत्तीसगढ के आदिवासी समुदाय के लोगों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों के लोग अपनी जीवन-पद्धति, खान-पान, लोक-नृत्य, लोक-संगीत, लोकवाद्यों, कलाओं रीति-रिवाजों, तीज-त्यौहारों, अस्थाओं और अन्य आदिम परंपराओं को सहेज कर रखा है। नर्तक दलों ने अपने नृत्य के माध्यम से बताया कि जनजातीय समाज के गौरव और आत्मसम्मान को बढ़ाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। जनजातीय समाज का कल्याण करने सरकार प्रतिबद्ध है।   

छत्तीसगढ़ के गौरवशाली पुरखौती मुक्तांगनमें भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपने बीच पाकर हमारे छत्तीसगढ के आदिवासी समुदाय के लोगों ने अपनी पहचान नृत्य के माध्यम में प्रस्तुत की। जिला सरगुजा, विकासखण्ड मैनपाट के ग्रमा डांगबुड़ा के नर्तक दल ने सरगुजा संभाग के आदिवासियों के प्रसिद्ध लोकनृत्य करमा का पुरूष पारंपरिक वेशभूषा में धोती, कुर्ता, पगड़ी, मयूरपंख सहित और महिलाएं साड़ी- ब्लाउज के साथ पैर में घुंघरू पहनकर मांदर और झांझ बजाते हुए नृत्य का प्रदर्शन किए। करमा नृत्य लगभग हर खुशी के अवसर पर किया जाता है।

इसी प्रकार दंतेवाडा जिला के विपकासखण्ड गीदम के ग्राम जोड़तराई के नर्तकदल ने गौर नृत्य कर पारंपरिक बस्तर के विभिन्न त्यौहारों के जैसे- अमुस तिहार, नवाखाई आमा पण्डुम, शादी-विवाह आदि में महिलाओं और पुरूषों के द्वारा मिलकर सामुहिक रूप से पांरपरिक तरीके से नृत्य का प्रदर्शन किए।

जिला जशपुर के विकासखण्ड कांसाबेल के ग्राम टाटीडांड के नर्तकों ने करमा अपने नृत्य के माध्यम से बताया कि करमा दशहरा के चार दिन बाद गाड़ते हैं, शाम को करम डगाल काटकर गाड़तें हैं और रातभर करमा नृत्य करते हैं । यही राजी करमा के नाम से भी जाना जाता है। इस करमा को बड़े घुमघाम से मनाया जाता है। इसी प्राकर दीपावली करमा दीपावली के दिन शाम को करम पेड से डगाल काटकर गाडते हैं और और रातभर करमा नृत्य करते हुए सुबह विसर्जन करते हैं। इस करमा में गोवर्धन पूजा, लक्ष्मी पूजा भी करते हैं।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा, प्रमुख सचिव आदिम जाति एवं कल्याण विभाग सोनमणि बोरा एवं प्रमुख सचिव संस्कृति अन्बलगन पी., मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानन्द, आयुक्त आदिवासी विकास नरेंद्र दुग्गा, संचालक पुरातत्व एवं संस्कृति विवेक आचार्य भी उपस्थित थे।

 

विशेष लेख : सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर छत्तीसगढ़ सरकार ने हासिल की बड़ी उपलब्धि

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रायपुर।  छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों के हित में ठोस कदम उठा रही है| दूरस्थ और पिछड़े वनांचल इलाकों में मूलभूत सुविधाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अलावा बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का काम तेजी से हो रहा है| छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसी कई योजनाएं शुरू की हैं जिनके जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव से जन-जीवन जीवन बदल रहा है| मुख्यमंत्री की पहल पर नियद नेल्लानार योजना से आज आदिवासी परिवारों के जीवन में आशा की नई किरण आई है| इस योजना में माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित नए कैम्पों के आसपास के गांवों का चयन कर शासन के 12 विभागों की 32 कल्याणकारी योजनाओं के तहत आवास, अस्पताल, पानी, बिजली, पुल-पुलिया, स्कूल इत्यादि मूलभूत संसाधनों का विकास किया जा रहा|

दूरस्थ आदिवासी इलाकों से अयोध्या धाम तक सीधी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री साय की पहल पर भारत सरकार ने हरी झंडी दे दी है| सडकों के विकास को लेकर भी लगातार कार्य किया जा रहा है, जिससे आदिवासी अंचलों तक आवाजाही आसान हुई है| छत्तीसगढ़ सरकार ने 68 लाख गरीब परिवारों को 05 साल तक मुफ्त राशन देने का निर्णय भी लिया, जिसका लाभ बड़ी मात्रा में आदिवासी अंचलों के जरूरतमंद रहवासियों को मिल रहा है|

तेंदूपत्ता वनवासियों की आजीविका का मजबूत स्रोत है, इससे होने वाली आमदनी को बढ़ाते हुए सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर 4000 रुपए प्रति मानक बोरा से 5500 रुपए प्रति मानक बोरा किया, जिसका लाभ चालू तेंदूपत्ता सीजन से ही 12 लाख 50 हजार से अधिक संग्राहकों को मिल रहा है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार जल्द ही चरण पादुका योजना भी शुरू करने जा रही है, इसके साथ ही उन्हें बोनस का लाभ भी दिया जाएगा|

सुरक्षा और विकास के दोहरे मोर्चे पर काम करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है| इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज अनुपात के हिसाब से छत्तीसगढ़ का बस्तर देश में सबसे सैन्य संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है, बस्तर डिवीजन में प्रत्येक 9 नागरिकों के पीछे एक पैरामिलिट्री का जवान है| जल्द ही इन क्षेत्रों में सुरक्षाबलों के 250 से ज्यादा कैम्प और नियद नेल्लानार से 58 नए कैम्प स्थापित होंगे ताकि सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का दायरा बढ़ सके| मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में आदिवासी संस्कृति और परम्पराओं को आगे बढ़ाने के लिए बस्तर में प्राचीन काल से चले आ रहे अनेक ऐतिहासिक मेलों को भी शासकीय संरक्षण और आर्थिक सहायता दी जा रही है।

 दूरस्थ आदिवासी इलाकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के सरकार के मजबूत प्रयास से देश के दूसरे सबसे कम साक्षर जिले बीजापुर में नए भविष्य की बुनियाद गढ़ी जा रही है| बीजापुर जिले में माओवादियों द्वारा बंद 28 स्कूल अब मुख्यमंत्री साय की पहल से खुल गए हैं| स्थानीय बोलियों को सहेजने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने  आदिवासी अंचलों में स्थानीय बोलियों में प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने का निर्णय नई शिक्षा नीति के तहत आदिवासी समुदायों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जिसमें 18 स्थानीय भाषा-बोलियों में स्कूली बच्चों की पुस्तकें तैयार की जा रही हैं। प्रथम चरण में छत्तीसगढ़ी,  सरगुजिहा,  हल्बी,  सादरी, गोंड़ी और कुडुख में पाठ्यपुस्तक तैयार होंगे।

छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी युवाओं के सुनहरे भविष्य की नींव भी मजबूत कर रही है, इसी क्रम में नई दिल्ली के ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर अब 185 कर दी गई है। इस निर्णय से देश राजधानी में रहकर संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा की तैयारी करने के इच्छुक अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अब इस हॉस्टल में तीन गुने से भी अधिक सीटें उपलब्ध होंगी| इसी तरह आईआईटी की तर्ज पर राज्य के जशपुर, बस्तर, कबीरधाम, रायपुर और रायगढ़ में प्रौद्योगिकी संस्थानों का निर्माण भी किया जाएगा|

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ के माओवादी आतंक प्रभावित जिलों के विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए ब्याज रहित ऋण मिलेगा| शेष जिलों के विद्यार्थियों को एक प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण प्रदान किया जाएगा, जिससे स्वरोजगार की ओर बढ़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगे|

आदिवासियों को उनकी जमीन से उजाड़ना मानवता के खिलाफ अपराध - हरिचंदन

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रायपुर। भुवनेश्वर के जयदेव भवन में गत दिवस आयोजित मिट्टी, मां और मानवाधिकार विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्यपाल ने कहा कि आदिवासियों को अपना अधिकार और मानवाधिकार को जानना चाहिए। वे आज भी कई सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। उनके अधिकारों को कम नहीं आंका जाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि कमजोर, पीड़ित, उत्पीड़ित वर्ग के लोग भी अपने मानवाधिकारों से वंचित हैं।

प्रत्येक व्यक्ति का मानवाधिकार होता है। यह हर व्यक्ति को मिलना चाहिए। राज्यपाल ने सभी से आह्वान किया कि वे कमजोर लोगों को उनके मानवाधिकारों का एहसास कराने के लिए लड़ने में मदद करें। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। हर जागरूक युवा, नागरिक को मां, माटी और मानवाधिकार की रक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए। इसके लिए संविधान के प्रावधानों को लागू किया जाना चाहिए।

पृथ्वी पर तेजी से बढ़ रहे विभिन्न प्रकार के प्रदूषण पर हरिचंदन ने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि अगर हम अभी से प्रदूषण को नहीं रोकेंगे तो यह महामारी का रूप ले लेगा। राजधानी दिल्ली में हाल ही में प्रदूषण के कारण लोगों को हुई पीड़ा का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदूषण से बचने तथा देश और राज्य की रक्षा के लिए हर व्यक्ति अभी से जागरूक हो जाए।

कार्यशाला में उड़ीसा राज्य पुलिस के अधिकारियों सहित विश्व मानवाधिकार संरक्षण संगठन के अध्यक्ष एवं अन्य अतिथि शामिल हुए और मानव सुरक्षा पर अपने विचार रखे। विभिन्न राज्यों एवं जिलों से आये संगठन के सभी सदस्य एवं अन्य राज्यों के प्रमुख लोग भी उपस्थित थे।

 

हमने किसानों, मजदूरों और आदिवासियों को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज राजधानी रायपुर स्थित एक निजी होटल में जनसत्ता मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित मंथनकार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के किसानों, गरीबों और आदिवासियों सहित सभी वर्गों के उत्थान के लिए काम किया है। किसानों को ऋण मुक्त करने के लिए सर्वप्रथम लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण माफ किया इसके साथ ही सिंचाई कर माफ कर किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध करने का काम किया है।

मुख्यमंत्री बघेल नेे कहा कि देश में छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां हमने किसानों से सबसे ज्यादा दाम पर धान की खरीदी कर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया। प्रदेश में 44 प्रतिशत वन क्षेत्र है। पहले मात्र 7 प्रकार के वनोपजों की खरीदी होता था। अब हम 67 प्रकार के वनोपजों को समर्थन मूल्य पर खरीद रहे हैं। तेन्दूपत्ता प्रति मानक बोरा 2500 से बढ़ाकर 4000 रूपए किया। उन्होंने कहा कि लोहंडीगुड़ा में आदिवासियों की अधिग्रहित जमीन वापस की। वनाधिकार पट्टा, वन संसाधन अधिकार, पेसा कानून को लागू किया। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर काम हुए हैं। कुपोषण को दूर करने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान लागू किया। वनांचल क्षेत्रों में पहले छोटी-छोटी बीमारियों के कारण भी लोगों की जान चली जाती थी। ऐसे में दूरस्थ वनांचल के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हाट-बाजार क्लीनिक योजना शुरू की। हाट बाजार क्लीनिक व्यवस्था का एक करोड़ से अधिक लोग लाभ ले चुके हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार में प्रदेश के युवाओं के लिए बेहतर कार्य हुए हैं। प्रदेश में 750 से अधिक स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी-हिन्दी माध्यम स्कूल खोले गए है। इन स्कूलों के माध्यम से उन परिवारों को राहत मिली है जो अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाना चाहते हैं। राज्य में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़ी संख्या में शासकीय नौकरी के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। 40 हजार से अधिक शासकीय पदों के लिए भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश के युवा, विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोटा, राजस्थान जाते है।

वहां के सरकार से हमने कोटा में दो एकड़ जमीन की मांग की है, ताकि सुसज्जित और सुविधायुक्त छात्रावास तैयार कर यहां के विद्यार्थी को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए बजट में प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराये जा रहे है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के जरिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में 13 हजार से अधिक राजीव युवा मितान क्लब बनाये गए है। इनके माध्यम से सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गोधन न्याय योजना के जरिए गौपालकों और किसानों से गोबर खरीदी कर उन्हें समृद्ध करने का काम कर रहे हैं। अब तक गोधन न्याय योजना के तहत 265 करोड़ रूपए का गोबर खरीद चुके हैं। पारदर्शिता के लिए राशि सीधे हितग्राहियों के खाते में ट्रांसफर किया जाता है। मजदूरों, बेरोजगारों और किसानों को भी सीधे उनके खाते में राशि ट्रांसफर किए जा रहे हैं। प्रदेश के लोगों के आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ कला संस्कृति को भी संजोने और संवर्धन का कार्य हमारी सरकार कर रही है। इन पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा को संजोने, संवारने के साथ ही उन्हें पुनःस्थापित करने का काम किया। बस्तर में बादल नामक संस्था के माध्यम से यहां की आदिवासियों की कला-संस्कृति और परम्परा के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर उद्योग मंत्री कवासी लखमा, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा सहित गणमान्य नागरिक और विद्यार्थी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ किसानों, आदिवासियों, मजदूरों और मेहनतकशों का प्रदेश : मुख्यमंत्री बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ किसानों, आदिवासियों, मजदूर और मेहनतकशों का प्रदेश है और सबकी अपनी विशेषताएं है। सभी ने अपनी संस्कृति को बढ़ाया और उसको सहेज कर रखने के लिए बड़ी मेहनत की और इसी से छत्तीसगढ़िया संस्कृति की पहचान बनी है। हमारी सरकार ने इसे आगे बढ़ाने का काम किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज निजी न्यूज़ चैनल द्वारा आयोजित प्रगति पथ पर छत्तीसगढ़ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
                    

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी आहार में मुख्य स्थान रखने वाले बोरे-बासी को हमने सम्मान दिलाने का काम किया है। अब यह छत्तीसगढ़िया सम्मान से जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के माध्यम से हमने बड़ा मंच दिलाया। पिठ्ठूल, गिल्ली डंडा, भौंरा, फुगड़ी, खो-खो जैसे परंपरागत खेलों ने अपनी खोई पहचान हासिल की है और लोग उत्साह के साथ ओलंपिक खेलों से जुड़े। उन्होंने कहा कि अइरसा, ठेठरी, खुरमी, फरा, चीला जैसे छत्तीसगढ़िया पकवान अब गढ़ कलेवा के माध्यम से हर जगह मिलने लगा है और सामाजिक आयोजन में इसे बड़े सम्मान के साथ परोसा जा रहा है।
                   

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि कोरोना की विकट परिस्थिति में भी हम प्रदेश के किसानों और मजदूरों के साथ खड़े रहे। मनरेगा के माध्यम से उन्हें रोजगार दिलाने का काम किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है और वनवास काल में भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक यात्रा की। यहां शिवरीनारायण में भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाये। राम वन गमन पथ के माध्यम से हमें भगवान राम की इस यात्रा को चिरस्मरणीय बनाने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राम कौशल्या के राम है, शबरी के राम है, मेहनतकश लोगों के राम है, वनवासी राम है तथा राम सौम्य और कारुणिक है और हम सबके भांजे है। राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन भी हम कर पाये यह बड़ी बात है।

नक्सली समस्या पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश इससे लगातार ग्रसित रहा है। नक्सली उन्मूलन को लेकर हमारा नजरिया अलग है और यह एक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्या है। विश्वास, विकास और सुरक्षा के साथ हमने बस्तर के लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश की है। हमारी सरकार ने न केवल आदिवासियों का जमीन वापस दिलाया बल्कि लोगों को रोजगार मुहैया कराया। इन विकास कार्यों से बस्तर के लोग हमें अपना मानने लगे। हमने बंद पड़े स्कूल खोले। सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में बस्तर में बड़े बदलाव आए हैं जिसके अब सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि बस्तर के लोग प्रकृति की गोद में रहने वाले लोग हैं। हमारे प्रयासों से अब बस्तर उन्नति की राह पर आगे बढ़ रहा है।

हमारी सरकार हर वंचित तबके तक उनके अधिकार पहुंचाने के लिए कर रही है काम : मुख्यमंत्री बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि हमारी सरकार गांवों, किसानों, आदिवासियों, मजदूरों, महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम कर रही है। राज्य सरकार ने हर वंचित तबके तक उनके सामाजिक और आर्थिक अधिकार पहुंचाने का काम किया है। छत्तीसगढ़ में सरकार बनने से पहले ही हमने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी थी। इन्हीं पर छत्तीसगढ़ सरकार काम कर रही है। बघेल आज अंबिकापुर के पीजी कालेज हॉकी स्टेडियम में विशेष पिछड़ी जनजाति एवं वन अधिकार पत्र वितरण समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में लगभग 650 हितग्राहियों को लाभान्वित किया, इनमें 103 लोगों को शिक्षक के लिए नियुक्ति पत्र, 193 हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टा, 100 लोगों को आयुष्मान कार्ड, 39 लोगों को स्वामी आत्मानंद विद्यालयों के शिक्षक के लिए नियुक्ति पत्र के साथ ही 100 किसानों को एटीएम, 50 किसानों को मिलेट के बीज और 10 किसानों को स्प्रेयर वितरित किया। इस अवसर पर उन्होंनेे शासकीय सेवा का नियुक्ति पत्र पाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के युवाओं और वन अधिकार पट्टा प्राप्त करने पट्टाधारकों सहित समारोह में योजनाओं से लाभान्वित होने वाले हितग्राहियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में बेरोजगारों के खातों में हमने लगभग 48 करोड़ रूपए की राशि जारी की है जो सीधे उनके खाते में जा रही है। उन्होंने कहा कि अनेक युवाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है और प्लेसमेंट के माध्यम से उन्हें नौकरी भी मिल गयी है। आज इस कार्यक्रम में प्लेसमेंट प्राप्त करने वाले पहले बैच के 50 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपा गया है। उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति के पात्र 103 आवेदको में से 58 पुरूष तथा 45 महिला आवेदकों को सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति आदेश, वन अधिकार पट्टा वितरण के तहत अन्य परम्परागत वन्य निवासी के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग के 106 हितग्राहियों समेत कुल 193 हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टा का वितरण किया।

उन्होंने बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण मिलने के बाद प्रमाण पत्र, 100 कृषकों को एटीएम कार्ड, आयुष्मान योजना के तहत 100 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड और स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए 39 शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र प्रदान किया। मुख्यमंत्री बघेल ने मिलेट मिशन योजना अंतर्गत जिले के विशेष पिछड़ी जनजातियो को लघु धान्य फसलों के क्षेत्र विस्तार हेतु चयनित 50 कृषकों को रागी (मड़िया) बीज किट एवं इस वर्ग के 10 कृषकों को हस्तचलित स्प्रेयर पंप का निःशुल्क वितरण भी किया।

गौरतलब है कि बेरोजगारी भत्ता योजना के तहत जिले के 3076 आवेदक बेरोजगारी भत्त्ता हेतु पात्र पाये गये हैं, जिन्हें 01 करोड़ 42 लाख 85 हजार का भुगतान किया गया है। सरगुजा जिला बेरोजगारी भत्ता आवेदन निराकरण में 92.4 फीसदी के साथ पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। इसी प्रकार आयुष्मान कार्ड योजना के तहत जिले में 6 लाख 89 हजार 34 परिवारों का आयुष्मान कार्ड बनाया गया है। मिशन एटीएम कार्ड के तहत धान विक्रय करने वाले कृषकों को सहकारी बैंक के माध्यम से एटीएम कार्ड का वितरण किया जा रहा है। इसी क्रम में कृषकों को विशेष शिविर लगाकर 7770 कार्ड वितरण किया जा चुका है।

कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा, विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ,संसदीय सचिव चिंतामणि सिंह महाराज, संसदीय सचिव पारसनाथ रजवाड़े, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, सीजीएमएससी के अध्यक्ष एवं विधायक डॉ प्रीतम राम, सीजीएमएससी के संचालक एवं विधायक विनय जायसवाल छत्तीसगढ़ राज्य  खाद्य आयोग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह बाबरा, राज्य बीस सूत्रीय कार्यक्रम के उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल, अपेक्स बैंक के संचालक अजय बंसल, राज्य तेलघानी आयोग के सदस्य लक्ष्मी गुप्ता  सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में सरगुजा कलेक्टर कुन्दन कुमार ने जिले में शासकीय कार्यक्रमों की उपलब्धियों के संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

हम आस्तिक है न नास्तिक है, हम हैं वास्तविक

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा आदिवासियों को अपनी परंपराओं के बारे में कहने-सुनने का मंच दिलाने के लिए तीन दिवसीय जनजातीय वाचिकोत्सव-2023 आयोजित की गई है। द्वितीय दिवस के आहुत कार्यक्रम में जनजातीय समुदायों के प्रबुद्धजनों ने जनजातीय तीज-त्यौहार, जनजातीय जीवन संस्कार संबंधी एवं जनजातीय समुदाय की उत्पत्ति संबंधी वाचिक परंपरा के संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम आस्तिक है न नास्तिक है, हम हैं वास्तविक।

आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान नवा रायपुर में वाचिकोत्सव के दौरान जनजातीय तीज-त्यौहार एवं वाचिक परंपरा, जनजातीय जीवन संस्कार (जन्म, विवाह, मृत्यु इत्यादि) संबंधी वाचिक परंपरा एवं जनजातीय समुदाय की उत्पत्ति संबंधी धारणा एवं वाचिक परंपरा विषय पर प्रदेशभर से आए हुए आदिवासी समुदाय के प्रबुद्धजनों ने कहा कि विभिन्न बोलियां में बोलने वाले लोग हैं और उनके क्षेत्र अनुसार उनकी बोली है। इन समुदाय में उनके आदि पुरूष या पूर्वजों के द्वारा बताई गई कथा, कहानी, लोकोक्ति, देवी-देवताओं की स्तुति विभिन्न अवसरों पर पर्व मनाया जाता है।

जनजातीय जीवन संस्कार में वाचिक परंपरा के संबंध में जनजातीय समाज के लोगों ने सामुदायिक वाचिक परंपरा का अनुसरण करने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। प्रदेशभर से आए आदिवासी समाज के प्रबुद्धजनों ने कार्यशाला में जनजातीय समुदाय की उत्पत्ति के संबंध में इन समुदायों में उनके आदि पुरूष या पूर्वजों के द्वारा बताई गई कथा, कहानी, लोकोक्ति के माध्यम से लोक गीतों आदि के पीछे छुपी हुई उनकी अवधारणा, मान्यताएं, कहानियों के संबंध में अवगत कराया।

इस अवसर पर जनजातीय आयोग की सदस्य श्रीमती अर्चना पोर्ते, नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली के पंकज चतुर्वेदी, कोण्डागांव निवासी श्रीमती जयमती कश्यप, डॉ. वेदवती मंडावी, प्रमोद पोटाई नारायणपुर सहित अनेक विषय-विशेषज्ञ, प्रबुद्धजन एवं आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव : घर-घर जाकर मांग रहे हैं वोट

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जगदलपुर। भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार-प्रसार तेज हो गया है। आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने पार्टी प्रत्याशी सावित्री मंडावी के साथ नगर पंचायत चारामा में विभिन्न वार्डों में घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात कर वोट मांगा। इसके साथ ही भानुप्रतापपुर के ग्राम उडकूड़ा और चनदेली में ग्रामीणों की सभा ली। उधर, भारतीय जनता पार्टी के साथ ही अन्य उम्मीदवार भी संभाएं लेकर और घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी सहित सात उम्मीदवार मैदान में हैं। इस उपचुनाव के तहत पांच दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। वहीं, मतगणना और चुनाव परिणाम की घोषणा आठ दिसंबर को होगी।



कांग्रेस सरकार पर आदिवासियों को गुमराह करने का आरोप

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री केदार कश्यप ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर आदिवासियों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट में विषय लाना अलग बात है और उसे कानून में परिवर्तित करना अलग है। कश्यप ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कारण ही आज एससी और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण प्रभावित हुआ है। भानुप्रतापपुर विधानसभा के कोरर क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान कश्यप ने कई सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार केवल राजनीतिक छल कपट करना जानती है।

वहीं, भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक जयप्रकाश चंद्रवंशी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अंठावन फीसदी आरक्षण बचा नहीं पाई और अब प्रदेशवासियों को छिहत्तर प्रतिशत आरक्षण का सपना दिखा रही है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में आरक्षण को लेकर जो प्रस्ताव पारित किया गया है, वह जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है।

दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा के बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि भाजपा आदिवासी आरक्षण की विरोधी है और इसलिए आरक्षण बहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का विरोध कर रही है।

आरक्षित वर्ग का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा : भूपेश

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश में आरक्षित वर्ग का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आवश्यक होने पर आदिवासियों के आरक्षण के मुद्दे को लेकर विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों के हित और उनके उत्थान के लिए कृत संकल्पित है। बघेल ने कहा कि आदिवासियों के हित को ध्यान रखते हुए इस मामले में जो भी आवश्यक कदम होगा



वह उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आरक्षण के संबंध में अध्ययन भ्रमण के लिए आदिवासी समाज के विधायक और समाज प्रमुखों के संयुक्त दल को तमिलनाडु भेजा जाएगा। इस बीच, भाजपा की प्रदेश इकाई ने राज्य सरकार पर प्रदेश की जातियों को आपस में लड़ाने का आरोप लगाया है। आज रायपुर के एकात्म परिसर में मीडिया से बातचीत में भाजपा नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अनुसूचित जनजाति के लिए बत्तीस प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ मुख्य पक्षकार को राज्य अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। 

भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पी.एल. पुनिया ने कहा है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश और उत्साह है। वे राज्य सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उत्साहित हैं। बस्तर दौरे से वापस लौटने के बाद रायपुर विमानतल पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए पुनिया ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आदिवासी हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार नीतिगत फैसला लेगी।

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव : रायपुर साइंस कॉलेज मैदान में 1 से 3 नवंबर तक

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रायपुर। आधुनिकता के दौड़ से दूर जंगलों में रहने वाली जनजातियों की अपनी समृद्ध संस्कृति है। विभिन्न जनजातियों के अपने तीज-त्यौहार, लोक नृत्य व गीत भी हैं। इन आदिवासियों की कला और संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य के 23वें स्थापना दिवस के अवसर पर 1 से 3 नवंबर तक किया जा रहा है। राज्य में राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव का यह तीसरा आयोजन है। महोत्सव का आयोजन राजधानी रायपुर के साइंस कालेज मैदान में होगा।



छत्तीसगढ़ में 42 तरह की जनजातियां निवासरत्

छत्तीसगढ़ राज्य प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न है। यहां का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है एवं यहां जनजातियों की जनसंख्या राज्य की कुल जनसंख्या का 31 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ राज्य में 42 तरह की जनजातियां निवास करती हैं। इस महोत्सव के माध्यम से जनजाति कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शन का अवसर मिलता है।

आपसी मेल-जोल, कला-संस्कृतियों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण

महोत्सव के माध्यम से राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय कलाकारों के बीच उनकी कलाओं की साझेदारी होगी। वे एक-दूसरे के खान-पान, रीति-रिवाज, शिल्प-शैली को भी देख-समझ सकेंगे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजन से आदिवासी संस्कृति एवं सभ्यता को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। यह आयोजन देश और पूरी दुनिया के जनजातीय समुदायों के आपसी मेल-जोल, कला-संस्कृतियों के आदान-प्रदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

देश विदेश के 1500 से अधिक जनजातीय कलाकार हिस्सा लेंगे

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के लिए देश के सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों सहित 09 देशों के 1500 आदिवासी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेगें। इन कलाकरों में देश के 1400 और विदेशों के 100 प्रतिभागी शामिल होंगे। आयोजन में मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट के जनजातीय कलाकार हिस्सा लेंगे।

विदेशी जनजातियों की संस्कृति को भी जानने का मिलेगा मौका

छत्तीसगढ़ में प्रथम बार आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन वर्ष 2019 में 27 से 29 दिसम्बर तक किया गया था। इस महोत्सव में कुल 1,262 कलाकारों ने भाग लिया। इनमें 06 देशों के 59 जनजतीय कलाकारों शामिल थे। इसमें भारत के विभिन्न राज्यो सहित श्रीलंका, यूगांडा, मालदीव, थाईलैंड, बंग्लादेश और बेलारूस कलाकारों ने अपने देश के संस्कृति को नृत्य के माध्यम से प्रदर्शित किया।



राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव वर्ष 2021 का आयोजन 28 अक्टूबर से 01 नवंबर तक किया था। जिसमें कुल 1,149 कलाकारों ने भाग लिया। इनमें में 07 देशों के 60 जनजातीय कलाकारों भी शामिल थे। इनमें स्वीजरलैंड, माली, नाइजीरिया, श्रीलंका, फ़िलिस्तीन, यूगांडा और उज्बेकिस्तान  के कलाकारों ने भाग लिया।

इस वर्ष राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव वर्ष 2022 का आयोजन 01 से 03 नवंबर तक होगा। इस महोत्सव में कुल 1500 जनजातीय कलाकार भाग लेंगे। इसमें 09 देशों के 100 जनजातीय कलाकार भाग लेेने पहुँचेंगे। इनमें मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट के जनजातीय कलाकार हिस्सा लेंगे।

फसल कटाई और आदिवासी रीति-रिवाज की थीम पर होगा नृत्य महोत्सव

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में इस बार दो थीम रखी गई है। पहली थीम है फसल कटाई पर होने वाले आदिवासी नृत्यऔर दूसरी थीम है आदिवासी परम् पराएँ और रीति- रिवाज। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिभागियों को कुल 20 लाख रुपए का पुरस्कार

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के विजेताओं को कुल 20 लाख रुपए के पुरस्कारों का वितरण किया जाएगा। प्रथम स्थान के लिए 05 लाख रुपए, द्वितीय स्थान के लिए 03 लाख रुपए और तृतीय स्थान के लिए 02 लाख रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे।

जनजातीय कला, संस्कृति और विरासत को सहेजने के लिए हो रहे जतन

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने विगत् पौने चार वर्षो में छत्तीसगढ़ की लोक तथा जनजाति कला, संस्कृति और विरासत सहेजने और संवारने के लिए बहुत सारे जतन किये है। यहां के पर्यटन स्थलों, कला परपंराओं और संस्कृति के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ मंे राज्य गीत को मान्यता दी गई, इसका मानकीकरण किया गया। राज्य के लोक एवं पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण स्तर छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक नाम से खेलकूद आयोजन किया जा रहा है

विशेष लेख : अदृश्य शक्तियों को मानने और पूजने का अद्भुत दिवाड़ त्यौहार- हूँगा वेला मेला

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दंतेवाड़ा। आदिम जनजातियों और खूबसूरत प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है बस्तर। यहां की आदिम संस्कृति पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करती है। सीधे-सरल लोग बस्तर की पहचान हैं। इन सबके अलावा यहां की परंपराएं और आदिम मान्यताएं वैश्विक स्तर पर एक अबूझ पहेली है। जिनमें से एक है बस्तर क्षेत्र में अदृश्य शक्तियों को मानने और उस पर आस्था रखने की मान्यता। बस्तर के दंतेवाड़ा जिला में स्थित माँ दंतेश्वरी का समृद्ध प्राचीन इतिहास है। आदिवासियों की आराध्या माता दंतेश्वरी मंदिर प्राचीन काल से ही आस्था का केंद्र रहा है लेकिन यहाँ के रहने वाले बस्तर के निवासी भिन्न-भिन्न लोक आस्थाओं को मानने के बावजूद अदृश्य शक्तियों पर विश्वास रखते हैं।



भारत में प्रत्येक वर्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार दीवाली का त्यौहार मनाया जाता है, लेकिन बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव बिंजाम में ऐसा नहीं है। यहां के लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर लगने वाला हूँगा वेला मेला ही असली दिवाली है। जो कि अदृश्य शक्तियों को मानने का अनूठा पर्व है। बस्तर के लगभग सभी क्षेत्रों में आँगा देव पूजनीय है इसी आधार पर इस क्षेत्र के प्रमुख देव उसेन डोकरा हैं। जो अपनी पत्नी कोयले डोकरी के साथ घोटपाल में रहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि, उसेंन देव की दो शादियां हुई थी पहली पत्नी थूल डोकरी के साथ संबंध विच्छेद होने के बाद वह वर्तमान में अपनी दूसरी पत्नी के साथ घोटपाल में निवास करते हैं। इन दोनों से दो संतान हुई जो हूंगा और वेला के रूप में प्रसिद्ध हुए। इन्हें कोला के रूप में भी पहचान प्राप्त है।

क्यों लगता है हूँगा वेला मेला ?

दरसल दिवाड़ के नाम से प्रचलित इसी त्यौहार को दीपावली कहते हैं। हर साल यह नवम्बर के महीने में मनाया जाता है। इस त्यौहार को दंतेवाड़ा जिले के गाँव बिंजाम और गदापाल में मनाया जाता है, जिसमें आस- पास के गांव से सभी आँगा देव शामिल होते हैं। इस मेले में हूँगा वेला देव प्रमुख होते हैं क्योंकि सभी देव इनके घर आते हैं, पंडेवार, फरसपाल, मसेनार, गोंडपाल आसपास के सभी गांवों से यहां देवों का जमावड़ा होता है। इस मेले में देवों के सभी रिश्तेदार भी शामिल होते हैं। जिनमें गढ़ बोमड़ा, बोमड़ा देव, जात वोमड़ा, कड़े लिंगा ये सभी मौजूद होते हैं।

हूँगा वेला मेले की शुरुआत

हूँगा और वेला देव उत्सव में शामिल होने आए सभी देवों का स्वागत करते हैं, दूसरे देवों को जगाते हैं, जिसके बाद सभी देव गुड़ी के सामने बैठ कर पूजा अर्चना करते हैं। इसमें विशेष वोदा का फल, गोटफल और देसी मुर्गी का अंडा चढ़ाया जाता है। फिर देव एक दूसरे से गले मिलते हैं। चूंकि ये सालों बाद मिलते हैं इसीलिए मोहरी बजाकर उत्सव मनाया जाता है। बस्तर में मोहरी बाजा का खास स्थान है, दरअसल बस्तर में मोहरी के बिना कोई भी काम पूरा नहीं होता है। मेले का आकर्षण मोहरी बाजा की धुन पर सभी देव थिरकते हैं और गुड़ी के आस पास सभी नियमों को करते हुए चावल चढ़ाते हैं। इसके बाद सभी देव नदियों की ओर प्रस्थान करते हैं और एक साथ नदी में छलांग लगाते हैं। ये अभी आँगा किसी ना किसी पेड़ के बने होते होते हैं। चूंकि बस्तर के लोग प्राकृतिक पूजक होते हैं, इसलिए इनके देव भी इसी में बने होते हैं। कोई बाँस,महुआ,शीशम या सागौन के बने होते हैं। ये सभी नदी में डूबकर स्नान करते हैं। 



स्नान के बाद जब ये वापस लौटते हैं तो इस मेले में आए हुए बस्तरवासी आँगा से निकलते हुए पानी को पत्ते से बने हुए दोनी में जमा करते है। ऐसा माना जाता है कि आँगा के स्नान के बाद का पानी के पीकर लोगों की शारीरिक व्याधियां दूर हो जाती है। जैसे- जिन्हें कम सुनाई देता है उनके कान पर यह पानी डालने से वे ठीक हो जाते हैं। मान्यता के अनुसार पानी को आशीर्वाद के रूप में सभी आँगा देव के शरीर से निकलने के बाद जमा किया जाता है और उपयोग में लाया जाता है। स्नान के बाद सभी आँगा देव एक खुले मैदान में एकत्रित होते हैं जहाँ इस मेले का सबसे विशेष और ख़ास दृश्य देखने को मिलता है। यहां दूर दूर से जमा हुए लोग एक गोलाकार आकृति में जमा होते हैं और बीच में शादीशुदा जोड़े देवों के आशीर्वाद के लिए ज़मीन पर लेटकर उनकी प्रतीक्षा करते हैं।

मान्यता है हूँगा वेला से बच्चे की कामना पूरी करने दूर-दूर से आते हैं विवाहित जोड़े

लेकामी परिवार के हूँगा वेला दोनों भाई हैं। ये गाँव बिंजाम के देवगुड़ी में रहते है और इनके साथ वेला के बेटे बोमड़ा देव भी रहते है। इस मेले में एक पुरानी परम्परा देखने को मिलती है कि इस मेले में प्रत्येक वर्ष कई ऐसे विवाहित जोड़े शामिल होते हैं जिन्हें कई सालों से संतान की प्राप्ति नहीं हुई है। यह मान्यता है, कि इनके आशीर्वाद से निःसंतान दम्पत्तियों को संतान की प्राप्ति होती है। इस वर्ष 21 जोड़े हूँगा वेला देव से आशीर्वाद लेने पहुँचे थे। सभी जोड़े खुले मैदान पर उल्टा ज़मीन पर लेटते हैं और हूँगा वेला के समक्ष बिंजाम के स्थानीय दो से तीन सिरहा समस्याओं को रखते हैं उन्हें स्थानीय बोली गोंडी में देव का आह्वान करना कहते हैं।



अगर जोड़े को देवों ने आशीर्वाद दे दिया तो निश्चय ही उन्हें बच्चे की प्राप्ति होती है। मेले में ऐसे भी जोड़े मौजूद थे।जो हूँगा वेला देव को संतान प्राप्ति के बाद शुक्रिया अदा करने आए थे। इस मेले में हूँगा वेला देव सभी को आशीर्वाद देंगे या मिलेंगे यह ज़रूरी नहीं होता। कभी कभी कुछ जोड़ों को आशीर्वाद नहीं भी मिल पाता है। इसके पीछे का कारण पूछने पर यहाँ के प्रमुख गायता कहते हैं, कि जोड़ों में कुछ समस्या बाक़ी होती है, जिसके कारण उन्हें ये आशीर्वाद नहीं मिलता। दक्षिण बस्तर में देवों को आँगा और कोला के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस क्षेत्र के प्रमुख देव के रूप में उसेन डोकरा (आंगा) जो प्रमुख हैं,

और यहां के लेकामी वंश के प्रमुख देवता हैं, जिनका विवाह सर्वप्रथम थुले डोकरी से हुआ और उनसे संबंध विच्छेद होने के उपरांत कोयले डोकरी से विवाह किया। इनसे दो संतान हुई जो हूंगा और वेला के रूप में प्रसिद्ध हुए। इन्हें कोला के रूप में भी पहचान प्राप्त है।हूंगा से गढ़ बोमड़ा पैदा हुए जो अपने दादा उसेन डोकरा के साथ घोटपाल में रहते हैं और वेला से आदुरूँगा, बोमड़ा, कड़े लिंगा व जात बोमड़ा पैदा हुए। जो आतरा और लेकामी वंश के देव बने और ये मसेनार, पंडेवार के प्रमुख देव बने। ये कोला देव अभी तक अविवाहित हैं।

आदिम जन जातियों का संरक्षण (वृक्षों में हित) अधिनियम 1999 के प्रावधानों का किया गया सरलीकरण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियों का संरक्षण (वृक्षों में हित) अधिनियम 1999 की जटिलताओं को दूर करते हुए नया संशोधित अधिनियम 2022 तैयार किया गया है। इस संशोधन के माध्यम से अधिनियम को वर्तमान समय के अधिक प्रासंगिक और व्यावहारिक रूप दिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर इससे अब छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को अपनी जमीन या खेत पर स्थित वृक्षों को काटने और इसके विक्रय की राशि बैंकों से आहरित करने के संबंध में पहले की अपेक्षा अधिक अधिकार और सुविधा मिल गया है।


पुराने अधिनियम के कारण आदिवासियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था
, जिससे उनके समय और पैसों की बर्बादी होती थी। कई बार सूखे वृक्ष के काटने की अनुज्ञा समय पर न मिल पाने के कारण आंधी, तूफान, बारिश से वृक्ष के गिरने पर आदिवासियों के घर भी क्षतिग्रस्त हो जाते थे और उन्हें आर्थिक क्षति भी पहुंचती थी। संशोधित अधिनियम में इन दिक्कतों को दूर किया गया और वृक्ष कटाई से संबंधित नियमों का सरलीकरण किया गया है। 

नये नियमों से आदिवासी समुदाय को काफी राहत मिलेगी। आदिवासी समाज ने अपने हित में किए गए इन प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है। संशोधित अधिनियम 2022 के अनुसार अब आदिवासियों को अपनी जमीन या खेतों में वृक्ष कटाई की अनुज्ञा संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से लेनी होगी जबकि पहले अनुज्ञा देने का अधिकार जिला कलेक्टर के पास था। इसी प्रकार अब अनुज्ञा देने से पूर्व वन एवं राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त निरीक्षण का प्रावधान रखा गया है। 

जबकि पुराने अधिनियम में अनुज्ञा लेने की प्रक्रिया में वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा कई बार स्थल जांच करने का कठिन प्रावधान था। पूर्व अधिनियम के तहत पहले एक वर्ष में मात्र रूपए 50 हजार रूपए मूल्य की लकड़ी काटी जा सकती थी। अब संशोधित अधिनियम में वित्तीय सीमा समाप्त कर दी गई है। पहले के अधिनियम के तहत वृक्षों की कटाई के पश्चात् लकड़ी के कीमत का भुगतान कलेक्टर एवं भूमिस्वामी के संयुक्त बैंक खाता में किया जाता था। अब लकड़ी की कीमत का भुगतान भूमिस्वामी के बैंक खाता में सीधे किया जाएगा।

पुराने अधिनियम के अनुसार संयुक्त खाता से एक माह में मात्र रूपए 5 हजार रूपए की राशि भूमिस्वामी आहरित कर सकता था तथा राशि आहरण हेतु कलेक्टर से हस्ताक्षर प्राप्त करने में अत्यधिक समय लगता था। लेकिन संशोधित अधिनियम के अनुसार अब भूमिस्वामी अपने बैंक खाते का स्वविवेक से उपयोग कर सकता है। पूर्व अधिनियम के तहत कटाई की अनुज्ञा एवं राशि के आहरण के लिए समय-सीमा निर्धारित नहीं थी। अब नये नियमों द्वारा समय-सीमा का प्रावधान रखा गया है।

विश्व आदिवासी दिवस: मुख्यमंत्री ने आदि विद्रोह सहित 44 महत्वपूर्ण पुस्तकों का किया विमोचन

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रायपुर। कार्यक्रम में इस अवसर पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, संसदीय सचिव द्वारिकाधीश यादव तथा शिशुपाल सिंह सोरी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति के के सचिव डी.डी. सिंह, आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी भी उपस्थित थे।



छत्तीसगढ़ के आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा भारतीय स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम की श्रृंखला में एवं विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आदिवासी जनजीवन से संबद्ध विभिन्न आयामों को अभिलेखीकृत करने का कार्य किया गया है, संस्थान द्वारा 44 पुस्तकें प्रकाशित की गई है।

आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जल-जंगल-जमीन शोषण, उत्पीड़न से रक्षा एवं भारतीय स्वतंत्रता के लिए समय-समय पर आदिवासियों द्वारा किये गये विद्रोहों एवं देश की स्वतंत्रता हेतु विभिन्न आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाने वाली वीर आदिवासी जननायकों की शौर्य गाथा को प्रदर्शित करने आदि विद्रोह छत्तीसगढ़ के आदिवासी विद्रोह एवं स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी जननायक पुस्तिका तैयार की गयी है। 

इस पुस्तक में 1774 के हलबा विद्रोह से लेकर 1910 के भूमकाल विद्रोह एवं स्वतंत्रता पूर्व तक के विभिन्न आंदोलन जिसमें राज्य के आदिवासी जनजनायकों की भूमिका का वर्णन है। इस कॉफीटेबल बुक का अंग्रेजी संस्करण The Tribal Revolts Tribal Heroes of Freedom Movement and the Tribal Rebellions of Chhattisgarh के नाम से प्रकाशित की गई है।

आदिवासी व्यंजन 

राज्य के उत्तरी आदिवासी क्षेत्र जैसे सरगुजा, जशपुर कोरिया, बलरामपुर, सूरजपूर आदि, मध्य आदिवासी क्षेत्र जैसे रायगढ़ कोरबा, बिलासपुर, कबीरधाम, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, धमतरी एवं दक्षिण आदिवासी क्षेत्र जैसे कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर जिलों में निवासरत जनजातिया में उनके प्राकृतिक पर्यावास में उपलब्ध संसाधनों एवं उनकी जीवनशैली को प्रदर्शित करने वाले विशिष्ट प्रकार के व्यंजन एवं उनकी विधियां अभिलेखीकृत की गई हैं।

छत्तीसगढ़ की आदिम कला 

छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर मध्य एवं दक्षिण क्षेत्र के जिलों में निवासरत जनजातीय समुदायों में उनके दैनिक जीवन के उपयोगी वस्तुओं, घरो की दीवारों में उकेरे जाने वाले भित्ती चित्र, विशिष्ट संस्कारों में प्रयुक्त ज्यामितीय आकृतियां आदि सदैव आदिकाल से जनसामान्य के लिए आकर्षण का विषय रही है। इनमें सामान्य रूप से दीवारों व भूमि पर बनाये जाने वाले कलाकृति, बांस व रस्सी से निर्मित शिल्पाकृति एवं महिलाओं के शरीर में गुदवाये जाने वाले गोदनाकृति या डिजाइनों के स्वरूप तथा उनके पारंपरिक ज्ञान को अभिलेखीकृत किया गया है।

छत्तीसगढ़ के जनजातीय तीज-त्यौहार: राज्य के उत्तरी क्षेत्र की पहाड़ी कोरवा जनजाति का कठौरी, सोहराई त्यौहार, उरांव जनजाति का सरहुल, करमा त्यौहार, खैरवार जनजाति का बनगड़ी, जिवतिया त्यौहार आदि, मध्य क्षेत्र की बैगा जनजाति का छेरता, अक्ती त्यौहार, कमार जनजाति का माता पहुंचानी, अक्ती त्यौहार, बिंझवार जनजाति का ज्योतियां, चउरधोनी त्यौहार, राजगोंड जनजाति का उवांस, नवाखाई त्यौहार आदि वहीं राज्य के दक्षिण क्षेत्र या बस्तर संभाग की अबुझमाड़िया जनजाति द्वारा माटी तिहार, करसाड़ त्यौहार, मुरिया जनजाति के कोहकांग, माटी साड त्यौहार,

हलबा जनजाति का बीज बाहड़ानी, तीजा चौथ एवं परजा जनजाति का अमुस या हरेली, बाली परब त्यौहार के सदृश्य राज्य को अन्य जनजातियों के भी त्यौहारों का अभिलेखीकरण किया गया है।मानवशास्त्रीय अध्ययन: राज्य की 09 जनजातियों यथा राजगोंड धुरवा, कंडरा, नागवंशी, धांगड़, सौंता, पारधी, धनवार एवं कोंध जनजाति का मानवशास्त्रीय अध्ययन पुस्तक तैयार की गई। जिसमें जनजातियों की उत्पत्ति, सामाजिक संगठन, राजनैतिक जीवन, धार्मिक जीवन एवं सामाजिक संस्कार आदि का वर्णन किया गया है।

मोनोग्राफ अध्ययन

राज्य की जनजातियों के जीवनशैली से संबंधित 21 बिन्दूओं पर मोनोग्राफ अध्ययन किया गया है। जिसमें गोंड जनजाति में प्रथागत कानून, हलबा जनजाति में प्रथागत कानून, पहाड़ी कोरवा का प्रथागत कानून, कमार जनजाति में प्रथागत कानून, मझवार जनजाति में प्रथागत कानून, खड़िया जनजाति का प्रथागत कानून, उरांव का सरना उत्सव, उरांव जनजाति में सांस्कृतिक परिवर्तन, दंतेवाड़ा की फागुन मडई, नारायणपुर की मावली मडई, घोटपाल मडई, भंगाराम जात्रा, बैगा गोदना, भुजिया गोदना, भुंजिया जनजाति का लाल बंगला, कमार जनजाति में बांस बर्तन निर्माण, कमार जनजाति में हाट बाजार, बैगा जनजाति में हाट बाजार, खैरवार जनजाति में कत्था निर्माण विधि एवं सरगुजा संभाग में हड़िया एवं मंद निर्माण विधि संबंधी प्रकाशन किये गये है।

भाषा बोली

राज्य की जनजातियों में प्रचलित उनकी विशिष्ट बोलियों के संरक्षण के उद्देश्य से सादरी बोली में शब्दकोष एवं वार्तालाप संक्षेपिका, दोरली बोली में शब्दकोष एवं वार्तालाप संक्षेपिका, गोंडी बोली में शब्दकोष एवं वार्तालाप संक्षेपिका, गोंडी बोली दण्डामी माड़िया में शब्द कोष एवं वार्तालाप संक्षेपिका का निर्माण किया गया है।

प्राइमर्स

राज्य की जनजातीय बोलियों के प्रचार-प्रसार एवं प्राथमिक स्तर के बच्चों को उनकी मातृभाषा में अक्षर ज्ञान प्रदाय करने हेतु प्रायमर्स प्रकाशन का कार्य किया गया है। इस कड़ी में गोंडी बोली में गिनती चार्ट, गोंडी बोली में वर्णमाला चार्ट, बैगानी बोली में वर्णमाला चार्ट, बैगानी बोली में गिनती चार्ट एवं बैगानी बोली में बारहखड़ी चार्ट आदि शामिल है। इसके अलावा अन्य पुस्तकों में राजगोंड, धुरवा, कंडरा, नागवंशी, धांगड, सौंता, पारधी, धनवार, कोंध पर पुस्तकें प्रकाशित की गई।  

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