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इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 का विशाखापत्तनम में भव्य समापन, समुद्री विरासत और पर्यटन को मिला नया आयाम

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विशाखापत्तनम में आयोजित दो दिवसीय इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 का समापन भव्य रूप से हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि इस आयोजन ने विशाखापत्तनम को “भारत की समुद्री विरासत और तटीय संस्कृति के एक प्रकाश-स्तंभ” के रूप में स्थापित किया है।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा,

“लाइटहाउस फेस्टिवल की परिकल्पना लोगों, संस्कृति और विरासत के उत्सव के रूप में की गई थी—और विशाखापत्तनम ने सभी अपेक्षाओं से बढ़कर प्रदर्शन किया है। जीवंत प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों, स्थानीय हस्तशिल्प, विविध व्यंजनों, फैशन प्रस्तुतियों और रात्रिकालीन प्रकाश-सज्जा ने इस स्थल को भारत की तटीय पहचान के जीवंत उत्सव में बदल दिया। सबसे अधिक हर्ष की बात यह रही कि परिवारों, युवाओं, कलाकारों, उद्यमियों, छात्रों और आगंतुकों की उत्साही भागीदारी ने इस महोत्सव को जीवंत, समावेशी और यादगार बनाया।”

समापन सत्र में सर्बानंद सोनोवाल ने आंध्र प्रदेश के पहले लाइटहाउस संग्रहालय को विशाखापत्तनम में विकसित करने की घोषणा की। यह संग्रहालय समुद्री शिक्षा, विरासत संरक्षण और पर्यटन संवर्धन का केंद्र होगा। 75 लाइटहाउसों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की सफलता के आधार पर उन्होंने कहा कि सरकार अब देशभर में अतिरिक्त 25 लाइटहाउस विकसित करने का प्रस्ताव रखती है, जिसमें आंध्र प्रदेश में और उपयुक्त स्थलों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि लाइटहाउस-आधारित पर्यटन को और बढ़ावा मिल सके।

सोनोवाल ने यहां से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के विजयपुरम (जंगलिघाट) में कर्मचारियों के क्वार्टरों के पुनर्निर्माण का शिलान्यास वर्चुअल माध्यम से किया। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने गोवा के अगुआडा लाइटहाउस में लाइट एंड साउंड प्रोजेक्शन मैपिंग शो का भी वर्चुअल उद्घाटन किया।

सर्बानंद सोनोवाल ने देशभर में समुद्री सुरक्षा, विरासत और पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई नई पहलों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि असम में राष्ट्रीय जलमार्ग–2 (ब्रह्मपुत्र नदी) पर बोगीबील, सिलघाट, पांडु और बिस्वनाथघाट में चार नए लाइटहाउस बनाए जाएंगे, जिससे अंतर्देशीय जलमार्गों पर नौवहन सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर उन्होंने कहा,

“माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हमारे लाइटहाउस केवल तटों पर ही नहीं, बल्कि लोगों के हृदय और मन में भी प्रकाश फैलाएं। इस महोत्सव की सफलता स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि लाइटहाउस पर्यटन किस प्रकार स्थानीय आजीविका सृजित कर सकता है, समुद्री जागरूकता बढ़ा सकता है और तटीय समुदायों को उनके समुद्री इतिहास से भावनात्मक रूप से जोड़ सकता है।”

विशाखापत्तनम पोर्ट प्राधिकरण (VPA) और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ लाइटहाउसेज़ एंड लाइटशिप्स (DGLL) के बीच विशाखापत्तनम में लाइटहाउस संग्रहालय के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान किया गया। इस सहयोग के अंतर्गत VPA बंदरगाह परिसर के पुराने लाइटहाउस क्षेत्र में 3,156 वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराएगा। संग्रहालय में लाइटहाउसों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें प्राचीन नौवहन साधनों से लेकर आधुनिक समुद्री सुरक्षा प्रणालियों तक के विकास और भारत की समुद्री विरासत में उनकी भूमिका को दर्शाया जाएगा।

मोदी सरकार की लाइटहाउस पर्यटन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) में निर्माणाधीन 77 मीटर ऊंचे लाइटहाउस संग्रहालय का उल्लेख किया, जिस पर ₹266 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। यह विश्व के सबसे बड़े समुद्री संग्रहालयों में से एक होगा और इसका लाइटहाउस संग्रहालय दुनिया का सबसे ऊंचा माना जाएगा। यह प्रतिष्ठित संरचना लाइटहाउसों के इतिहास और विकास को प्रदर्शित करेगी तथा भारत की बढ़ती समुद्री महत्वाकांक्षाओं का सशक्त प्रतीक बनेगी।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल के अवसर पर विशाखापत्तनम पोर्ट पर ₹230 करोड़ की परियोजनाएं

दिन में इससे पहले, इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 के अवसर पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने विशाखापत्तनम पोर्ट प्राधिकरण (VPA) में ₹230 करोड़ की बंदरगाह अवसंरचना विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ करना, जहाज मरम्मत क्षमताओं का विस्तार करना, प्रशासनिक अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना और बंदरगाह कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाओं में सुधार करना है, जो विश्वस्तरीय, भविष्य-तैयार समुद्री अवसंरचना के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

इस अवसर पर उन्होंने कहा,

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के बंदरगाह विकास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इंजन के रूप में परिवर्तित हो रहे हैं। आज विशाखापत्तनम पोर्ट पर शुरू की गई पहलें क्षमता, सुरक्षा और परिचालन दक्षता को सुदृढ़ करती हैं, विजाग की आधुनिक समुद्री द्वार के रूप में भूमिका को मजबूत करती हैं और भारत के पूर्वी तट को सशक्त बनाती हैं।”

परियोजनाओं में LPG बर्थ पर अग्निशमन सुविधाओं का उन्नयन शामिल है, जिससे 40,000 DWT और उससे अधिक क्षमता वाले जहाजों को संभाला जा सकेगा। ₹52.24 करोड़ की यह परियोजना बंदरगाह की सुरक्षा तैयारी को काफी मजबूत करेगी।

जहाज मरम्मत और रखरखाव क्षमता बढ़ाने के लिए ORS ड्राई डॉक में अवसंरचना सुविधाओं के उन्नयन और विकास की भी शुरुआत की गई, जिस पर ₹35.87 करोड़ का निवेश होगा। यह परियोजना समुद्री मरम्मत गतिविधियों को समर्थन देगी और रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी। साथ ही, सर्बानंद सोनोवाल ने इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर (ISTC) की स्थापना की घोषणा की, जो इंडिया मैरीटाइम यूनिवर्सिटी (IMU) के अंतर्गत विशाखापत्तनम में स्थापित किया जाएगा। यह जहाज निर्माण डिजाइन, मानव संसाधन प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास तथा परीक्षण सुविधाओं के समन्वय में भारत की क्षमताओं को बढ़ाएगा।

इसके अतिरिक्त, ₹97.70 करोड़ की लागत से नए प्रशासनिक कार्यालय भवन और ₹44.20 करोड़ की लागत से हार्बर पार्क में आवासीय अपार्टमेंट्स के निर्माण की भी शुरुआत की गई, जिससे कर्मचारियों के कल्याण और कार्यक्षमता में सुधार होगा।

पिछले एक दशक में भारत के समुद्री क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2024–25 में देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों ने 855 मिलियन टन कार्गो का संचालन किया, जबकि जहाजों का औसत टर्नअराउंड समय 2014 के 96 घंटों से घटकर 2025 में 49.5 घंटे हो गया। आज, नौ भारतीय बंदरगाह वैश्विक शीर्ष 100 में शामिल हैं, जिनमें विशाखापत्तनम पोर्ट कंटेनर ट्रैफिक में शीर्ष 20 में है। सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत ₹1.41 लाख करोड़ की 272 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, वहीं अंतर्देशीय जलमार्गों पर कार्गो परिवहन 700% से अधिक बढ़कर लगभग 150 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो गया है।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल भारत की समुद्री विरासत और लाइटहाउस पर्यटन के इस परिवर्तन को प्रदर्शित करने का एक प्रमुख मंच बनकर उभरा है। पहली कड़ी सितंबर 2023 में गोवा के फोर्ट अगुआडा में, दूसरी अक्टूबर 2024 में पुरी (ओडिशा) में और तीसरी कड़ी विशाखापत्तनम में आयोजित की गई। यह महोत्सव निदेशालय जनरल ऑफ लाइटहाउसेज़ एंड लाइटशिप्स (DGLL) द्वारा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के अंतर्गत आयोजित किया गया।


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