Media24Media.com: #SpaceInnovation

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #SpaceInnovation. Show all posts
Showing posts with label #SpaceInnovation. Show all posts

भारत में अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट, 399 स्टार्टअप DPIIT में पंजीकृत

No comments Document Thumbnail

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के पास स्टार्टअप्स के लिए कोई अलग पंजीकरण प्रक्रिया नहीं है, क्योंकि यह उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की भूमिका की पुनरावृत्ति होगी। स्टार्टअप्स इंडिया पोर्टल के अनुसार, वर्तमान में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े 399 स्टार्टअप्स DPIIT में पंजीकृत हैं, जिनमें उपग्रह, प्रक्षेपण यान विकास एवं अन्य अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़े स्टार्टअप शामिल हैं। हालांकि, IN-SPACe राज्यवार स्टार्टअप्स का डेटा संधारित नहीं करता है।

अब तक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स द्वारा 7 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण, 20 पेलोड्स का सफल लॉन्च, तथा 2 अंतरिक्ष यानों (सब-ऑर्बिटल लॉन्च) का सफल प्रक्षेपण किया जा चुका है।

निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को सुगम और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से IN-SPACe ने 3 मई 2024 को भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के क्रियान्वयन हेतु Norms, Guidelines and Procedures (NGP) अधिसूचित किए हैं। यह ढांचा निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देने के लिए एक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और पूर्वानुमेय नियामक व्यवस्था प्रदान करता है।

सरकार भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में भी सक्रिय सहयोग दे रही है। भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के साथ उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक विस्तार के लिए वित्तीय और परिचालन सुविधा प्रदान करती है।

इसके अतिरिक्त, IN-SPACe विदेशी उद्योगों और सरकारी संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर भारतीय स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे रहा है। अब तक 7 स्पेस डेज़ का आयोजन किया जा चुका है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल कांग्रेस (IAC), GSTCE सिंगापुर और केन्या स्पेस एक्सपो में भारतीय प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स ने 25 से अधिक देशों में व्यावसायिक समझौते हासिल किए हैं।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

भारत की अंतरिक्ष यात्रा में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ: 2024–25 में ISRO की बड़ी सफलताएँ

No comments Document Thumbnail

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने वर्ष 2024–25 के दौरान अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी, मानव अंतरिक्ष उड़ान, कृषि, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं। ये उपलब्धियाँ भारत के स्पेस विज़न 2047 को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

Figure - Spadex Satellites

SpaDeX मिशन: अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक में ऐतिहासिक सफलता

PSLV-C60 के माध्यम से 30 दिसंबर 2024 को प्रक्षेपित SpaDeX उपग्रहों ने जनवरी 2025 में अंतरिक्ष में सफल डॉकिंग, अनडॉकिंग, पावर ट्रांसफर और सर्कम-नेविगेशन प्रयोग को अंजाम दिया। अप्रैल 2025 में दोबारा डॉकिंग कर संयुक्त नियंत्रण और ऊर्जा हस्तांतरण का सफल परीक्षण किया गया। यह तकनीक भविष्य के मानव मिशनों और अंतरिक्ष स्टेशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

CROPS मिशन: अंतरिक्ष में पौधों की सफल खेती

CROPS-1 प्रयोग के तहत अंतरिक्ष में लोबिया (Cowpea) के बीजों का सफल अंकुरण और दो-पत्ती अवस्था तक विकास किया गया। यह प्रयोग अंतरिक्ष में जैविक जीवन को बनाए रखने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।

Docking mechanism
CROPS image from orbit on 30th Dec. 2024

आदित्य-L1: सूर्य अध्ययन में नई उपलब्धि

जनवरी 2025 में ISRO ने आदित्य-L1 मिशन का पहला वैज्ञानिक डेटा जारी किया। इस मिशन से सूर्य की सतह, वायुमंडल और कोरोना से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े प्राप्त हुए, जो सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम की समझ को मजबूत करते हैं।

श्रीहरिकोटा से 100वां प्रक्षेपण

29 जनवरी 2025 को GSLV-F15 के माध्यम से ISRO ने श्रीहरिकोटा से अपना 100वां प्रक्षेपण पूरा किया। हालांकि तकनीकी कारणों से NVS-02 उपग्रह को अंतिम कक्षा में नहीं पहुंचाया जा सका, लेकिन उपग्रह पूरी तरह सुरक्षित है।

तीसरे लॉन्च पैड को कैबिनेट की मंजूरी

केंद्र सरकार ने श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्च पैड की स्थापना को मंजूरी दी, जिससे भविष्य के भारी प्रक्षेपण यानों और मानव अंतरिक्ष उड़ानों की क्षमता बढ़ेगी।

POEM-4: 1000 कक्षाओं का सफल सफर

PSLV के चौथे चरण को प्रयोगशाला के रूप में उपयोग करते हुए POEM-4 ने 1000 कक्षाएँ पूरी कीं। इसमें 24 पेलोड्स ने सफल प्रयोग किए, जिनमें AI मॉडल, बीज अंकुरण और ग्रीन प्रोपल्शन शामिल हैं।

मेक इन इंडिया माइक्रोप्रोसेसर

ISRO और SCL चंडीगढ़ ने संयुक्त रूप से 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर VIKRAM3201 और KALPANA3201 विकसित किए, जो पूरी तरह स्वदेशी हैं और अंतरिक्ष उपयोग के लिए प्रमाणित हैं।

मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

भारतीय गगनयात्री शुभांशु शुक्ला ने Axiom-04 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताकर भारत का नाम रोशन किया। उन्होंने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और प्रधानमंत्री से सीधा संवाद भी किया।

NISAR मिशन: भारत-अमेरिका की साझेदारी

जुलाई 2025 में लॉन्च हुआ NISAR उपग्रह पृथ्वी की सतह में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों की निगरानी करेगा, जिससे आपदा प्रबंधन, कृषि और जल संसाधन प्रबंधन को नई मजबूती मिलेगी।

कृषि और आपदा प्रबंधन में अंतरिक्ष तकनीक

ISRO के उपग्रहों ने 2024–25 में देश में गेहूं उत्पादन का सटीक आकलन किया। साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय आपदा चार्टर में नेतृत्व की भूमिका निभाई।

इन सभी उपलब्धियों के साथ ISRO ने यह साबित किया है कि भारत न केवल आत्मनिर्भर अंतरिक्ष शक्ति बन रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह प्रगति विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार है। 




प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद में स्काईरूट के इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया

No comments Document Thumbnail

हैदराबाद- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट के इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत आज अंतरिक्ष क्षेत्र में अभूतपूर्व अवसरों का साक्षी है, और निजी क्षेत्र की भागीदारी से देश का अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से प्रगति कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने स्काईरूट के इन्फिनिटी कैंपस को भारत की नई सोच, नवाचार और युवा शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने संस्थापक पवन कुमार चंदाना और नागा भरत ढाका को युवा अंतरिक्ष उद्यमियों के प्रेरक उदाहरण के रूप में सराहा। उन्होंने कहा कि इन दोनों ने खुद पर विश्वास किया, जोखिम उठाने से नहीं हिचकिचाए, और आज पूरा देश उनके सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत सीमित संसाधनों से हुई, लेकिन महत्वाकांक्षाओं की कोई सीमा नहीं थी, बताते हुए कहा कि “रॉकेट पार्ट्स को साइकिल पर लेकर ISRO की विश्वसनीय लॉन्च क्षमताओं तक, भारत ने यह साबित किया कि सपनों की ऊँचाई संसाधनों से नहीं, बल्कि संकल्प से तय होती है।” उन्होंने ISRO की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि दशकों से यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नई ऊँचाई पर ले जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते समय में अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार स्पष्ट है, क्योंकि यह संचार, कृषि, समुद्री निगरानी, शहरी नियोजन, मौसम पूर्वानुमान और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बन गया है। इसी कारण से सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार लागू किए और निजी नवाचार के लिए इसे खोला। उन्होंने बताया कि IN-SPACe की स्थापना स्टार्टअप और उद्योग को ISRO की सुविधाओं एवं तकनीक तक पहुँच प्रदान करने के लिए की गई।

प्रधानमंत्री ने भारत की जनरेशन-Z युवा शक्ति की सराहना की, जिन्होंने सीमित संसाधनों के साथ भी 300 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को गति दी है। उन्होंने कहा कि यही युवा भारत में निजी अंतरिक्ष क्रांति को जन्म दे रहे हैं, और रॉकेट प्रणालियों, उपग्रह प्लेटफॉर्म्स और कंपोजिट मैटीरियल जैसे क्षेत्रों में नए नवाचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छोटे उपग्रहों की मांग और लॉन्च आवृत्तियाँ दुनिया भर में बढ़ रही हैं, और अंतरिक्ष अब एक रणनीतिक संपत्ति बन गया है। प्रधानमंत्री ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता को विश्वसनीय और लागत-प्रभावी बताते हुए कहा कि वैश्विक कंपनियाँ भारत में उपग्रह निर्माण और लॉन्च सेवाओं में निवेश करना चाहती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि भारत अब केवल ऐप्स और सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि डीप-टेक, निर्माण और हार्डवेयर नवाचार की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक कदमों का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भारत के तकनीकी भविष्य की नींव मजबूत कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार युवाओं, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों के हर कदम पर उनके साथ है। उन्होंने स्काईरूट टीम को बधाई दी और सभी को प्रेरित किया कि वे 21वीं सदी को भारत की सदी बनाएं, चाहे वह पृथ्वी पर हो या अंतरिक्ष में।

पृष्ठभूमि:

स्काईरूट का इन्फिनिटी कैंपस लगभग 2,00,000 वर्ग फीट में फैला अत्याधुनिक सुविधा केंद्र है, जहाँ हर महीने एक आर्बिटल रॉकेट का निर्माण किया जा सकता है। स्काईरूट, भारत की प्रमुख निजी अंतरिक्ष कंपनी है, जिसे IIT के पूर्व वैज्ञानिक पवन चंदाना और भरत ढाका ने स्थापित किया है। नवंबर 2022 में, स्काईरूट ने अपना सब-ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-S लॉन्च किया, जिससे यह भारत की पहली निजी कंपनी बनी जिसने रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजा।


भारत को वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र बनाने की दिशा में कदम: डॉ. जितेन्द्र सिंह

No comments Document Thumbnail

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज कहा कि “अंतरिक्ष” भारत को वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

भारत की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष भूमिका के विस्तार की ओर इशारा करते हुए, मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश और भागीदारी के लिए एक प्राथमिक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। यह हाल के महीनों में देश का दौरा करने वाले कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों में बढ़ती रुचि से स्पष्ट होता है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र निर्णायक परिवर्तन से गुजर रहा है, जो इस वर्ष के इंडिया इंटरनेशनल स्पेस कॉन्क्लेव (IISC 2025) के विषय — “Expanding Horizons: Innovation, Inclusion & Resilience in the New Space Age” — को प्रत्यक्ष रूप से प्रतिबिंबित करता है। उद्योग नेताओं, वैश्विक एजेंसियों, राजदूतों और स्टार्ट-अप्स को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए सुधारों ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया है, जहां प्रतिभा, तकनीक और निवेश मिलकर भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का भविष्य आकार दे सकते हैं।

मंत्री ने कहा कि विषय बहुत सोच-समझकर चुना गया है क्योंकि यह भारत की तेजी से विकसित हो रही अंतरिक्ष प्रणाली में नई ऊर्जा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत में हमेशा वैज्ञानिक क्षमता रही है, लेकिन निर्णायक बदलाव तब आया जब नीति निर्माताओं ने नवाचार और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने वाला वातावरण तैयार किया। 2019 के बाद किए गए सुधारों में निजी खिलाड़ियों को क्षेत्र में शामिल करना, IN-SPACe को एकल-विंडो नियामक निकाय के रूप में स्थापित करना और 2023 में अंतरिक्ष नीति जारी करना शामिल हैं, जिन्होंने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष परिदृश्य में अपनी भूमिका बढ़ाने में मदद की।

“समावेशन” पहलू पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र का उद्घाटन स्टार्ट-अप्स, छात्रों, उद्योग और नागरिकों को उस क्षेत्र में लाया है जो पहले बंद था। हजारों लोग अब रॉकेट लॉन्चिंग व्यक्तिगत रूप से देखते हैं और कुछ वर्षों में 300 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स उभर चुके हैं। इनमें से कई ने विदेशी निवेश सुरक्षित किया और तेजी से बढ़े, जिससे भारत में लुप्त पड़ी उद्यमी प्रतिभा उजागर हुई।

“नवाचार” की बात करते हुए, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया — चंद्रयान का साउथ पोल लैंडिंग, चंद्र जल की खोज, मंगलयान मिशन और एक बार में 104 उपग्रहों का प्रक्षेपण। उन्होंने कहा कि भारत का सबसे महत्वपूर्ण योगदान अंतरिक्ष तकनीक का शासन और नागरिक कल्याण के लिए अनुप्रयोग रहा है। भारत के लगभग 70% अंतरिक्ष अनुप्रयोग अब जीवन की सुविधा बढ़ाने में मदद कर रहे हैं, जैसे कि अवसंरचना योजना के लिए गती शक्ति, भूमि मानचित्रण के लिए स्वामित्व, उपग्रह-सक्षम आपदा प्रबंधन, दूरदराज क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन और रेलवे सुरक्षा प्रणाली।

मंत्री ने कहा कि यह दृष्टिकोण “सहनशीलता” को भी मजबूत करता है, जो कॉन्क्लेव के विषय का एक और मूल तत्व है, क्योंकि उपग्रह-आधारित सेवाएं अब आपदा प्रतिक्रिया, कृषि, मौसम पूर्वानुमान और देशभर में कनेक्टिविटी का समर्थन करती हैं। भारत इन क्षमताओं का विस्तार पड़ोसी देशों — भूटान, मालदीव, श्रीलंका, नेपाल और म्यांमार — में भी कर रहा है।

मंत्री ने कहा कि जापान, इटली और कई अन्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा दिखाई गई आत्मविश्वास भारत को अंतरिक्ष साझेदारी के लिए एक प्राथमिक वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय दिया कि उन्होंने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर किया और भारत के वैश्विक विस्तार के लिए आवश्यक नीति वातावरण बनाया।

IISC 2025 ने मंत्रालयों, उद्योग, अंतरिक्ष एजेंसियों, निवेशकों, स्टार्ट-अप्स और अकादमिक संस्थानों को एक मंच पर लाया। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इन विचार-विमर्शों से भारत की अभिनव, समावेशी और सहनशील अंतरिक्ष प्रणाली बनाने की कोशिशों को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के पांच गुना बढ़ने की संभावना के साथ, भारत वैश्विक अंतरिक्ष परिदृश्य में एक मजबूत स्थिति सुरक्षित करने के लिए तैयार है।

सीएसआईआर–इसरो स्पेस मीट 2025: भारत के मानव अंतरिक्ष मिशनों में नई प्रगति

No comments Document Thumbnail

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) संयुक्त रूप से 17 नवंबर 2025 को सीएसआईआर–इसरो स्पेस मीट 2025 का आयोजन करेंगे। यह कार्यक्रम बेंगलुरु स्थित होटल रैडिसन ब्लू एट्रिया में आयोजित होगा। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की प्रमुख वैज्ञानिक और अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत करते हुए मानव अंतरिक्ष उड़ान शोध, माइक्रोग्रैविटी अध्ययन और स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नवाचारों को बढ़ावा देना है, जो भारत की अंतरिक्ष आत्मनिर्भरता की दृष्टि के अनुरूप है।

कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. एन. कलईसेल्वी, सचिव, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) एवं महानिदेशक, CSIR, और डॉ. वी. नारायणन, सचिव, अंतरिक्ष विभाग एवं अध्यक्ष, इसरो द्वारा किया जाएगा। इस सम्मेलन में लगभग 150–200 प्रतिनिधियों के भाग लेने की अपेक्षा है, जिनमें वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, अंतरिक्ष यात्री तथा विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

समारोह में फ्रांस के कौंसुल जनरल (बेंगलुरु), DRDO, ISRO, IISc, भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी, तथा ESA, JAXA और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES के विशेषज्ञ भी उपस्थित रहेंगे।

सम्मेलन के प्रमुख फोकस क्षेत्र

यह स्पेस मीट CSIR के बहुविषयक अनुसंधान को ISRO की मिशन-केंद्रित तकनीकी आवश्यकताओं के साथ एकीकृत करने पर केंद्रित होगा। मुख्य विषयों में शामिल होंगे:

  • मानव अंतरिक्ष उड़ान शरीर विज्ञान

  • बायोमेडिकल इंस्ट्रुमेंटेशन

  • सामग्री विज्ञान एवं माइक्रोग्रैविटी में जीवन विज्ञान

  • अंतरिक्ष यान रखरखाव और संचालन के लिए उन्नत प्रणालियाँ

  • अंतरिक्ष में पौधों की वृद्धि, स्पेस फूड, माइक्रोफ्लूडिक्स

  • सिरेमिक मैटामटेरियल्स और माइक्रोबियल करप्शन प्रिवेंशन

भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रियों के अनुभव साझा होंगे

कार्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा (सेवानिवृत्त) और ग्रुप कैप्टन प्रसन्नथ बी. नायर अपने अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा, यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के अंतरिक्ष यात्री और नासा स्पेस शटल मिशनों के अनुभवी जीन-फ्रांस्वा क्लेर्वॉय का विशेष वीडियो संदेश भी प्रदर्शित किया जाएगा।

ESA, JAXA, CNES और फ्रांसीसी अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ स्पेस फिजियोलॉजी, बायोइंजीनियरिंग और मानवीय उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष आधारित तकनीकों पर अपने विचार साझा करेंगे।

CSIR–NAL मुख्य आयोजक संस्थान

बेंगलुरु स्थित CSIR–नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (NAL) इस कार्यक्रम का नोडल आयोजक है। NAL ने एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है—

  • एयरोडायनमिक्स

  • स्ट्रक्चरल डिजाइन

  • एयरोस्पेस मटेरियल्स

  • फ्लाइट टेस्टिंग

  • हल्के कंपोज़िट मटेरियल्स

  • उन्नत एयरफ़्रेम संरचनाएँ और सिमुलेशन प्रणालियाँ

इन सभी क्षमताओं ने ISRO और DRDO को स्वदेशी तकनीक के विकास में अत्यंत सहयोग दिया है।

भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

सीएसआईआर–इसरो स्पेस मीट 2025 का उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों के बीच मजबूत अनुसंधान संपर्क बनाना और ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है जो स्पेस मेडिसिन, ह्यूमन फैक्टर्स इंजीनियरिंग और जन-कल्याणकारी अंतरिक्ष तकनीकों को बढ़ावा दे सके। इस आयोजन में मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए भविष्य की संयुक्त रूपरेखा और नए शोध एवं विकास क्षेत्रों की पहचान पर विशेष चर्चा होगी।

यह कार्यक्रम भारत की वैज्ञानिक नवाचार क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई ऊँचाई पर ले जाने वाला सिद्ध होगा। यह विकसित भारत @2047 के उस व्यापक लक्ष्य को भी प्रतिबिंबित करता है जिसमें भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी वैश्विक प्रगति में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

चंद्रयान से चाँद तक – भारत का स्पेस मिशन अब होगा और बड़ा!

No comments Document Thumbnail

2033 तक भारत की स्पेस इकॉनमी होगी 44 अरब डॉलर की, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया – निजी भागीदारी से अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़त

नई दिल्ली- भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में जबरदस्त उछाल लेने जा रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की स्पेस इकॉनमी 2033 तक करीब 44 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगी, जो 2022 के 8.4 अरब डॉलर से लगभग पाँच गुना वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा किए गए ऐतिहासिक सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी ने भारत को एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभरने का मौका दिया है।

🚀 निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स ने बढ़ाई रफ्तार

डॉ. सिंह ने कहा कि IN-SPACe और New Space India Limited (NSIL) जैसी संस्थाओं की स्थापना से सरकारी एकाधिकार खत्म हुआ और निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रवेश का अवसर मिला।
इसके परिणामस्वरूप, पिछले पाँच वर्षों में 300 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स उभरे हैं, जिससे भारत दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।

🌕 चंद्रयान-3 बना भारत की पहचान

उन्होंने बताया कि चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत पहला देश बना।
यह मिशन अन्य देशों की तुलना में लगभग आधी लागत में पूरा हुआ, जिससे भारत की लागत-प्रभावी तकनीक की विश्व भर में सराहना हुई।

💰 विदेशी सैटेलाइट लॉन्च से हुआ बड़ा मुनाफा

अब तक भारत ने 433 विदेशी उपग्रह लॉन्च किए हैं, जिससे 190 मिलियन डॉलर और 270 मिलियन यूरो की कमाई हुई है।

🛰️ भविष्य की बड़ी योजनाएँ

मंत्री ने बताया कि भारत की दीर्घकालिक योजना के तहत –

  • 2035 तक “भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन” (Bharatiya Antariksh Station) की स्थापना की जाएगी।

  • 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे, और “विकसित भारत 2047” की दृष्टि का ऐलान करेंगे।

  • अगले 15 वर्षों में 100 से अधिक उपग्रहों के प्रक्षेपण की योजना है, जिनमें अधिकांश छोटे उपग्रह होंगे जो निजी कंपनियों के साथ मिलकर बनाए जाएंगे।

🌍 शासन और विकास में बढ़ती भूमिका

अंतरिक्ष तकनीक अब शासन और विकास में भी अहम भूमिका निभा रही है।
SVAMITVA योजना के जरिए अब तक 1.61 लाख गांवों के 2.4 करोड़ ग्रामीणों को संपत्ति स्वामित्व अधिकार उपग्रह मानचित्रण के माध्यम से मिले हैं।
साथ ही उपग्रह तकनीक का उपयोग आपदा प्रबंधन, कृषि आकलन, वनाग्नि निगरानी और बुनियादी ढांचा योजना (गति शक्ति) में किया जा रहा है।

🤝 अंतरराष्ट्रीय सहयोग

भारत की “स्पेस डिप्लोमेसी” भी मजबूत हो रही है।
भारत जल्द ही जापान के साथ चंद्रयान-5 मिशन और NASA के साथ NISAR मिशन लॉन्च करने जा रहा है।
पड़ोसी देश भी अब आपदा प्रबंधन और संचार के लिए भारतीय सैटेलाइट्स पर निर्भर हो रहे हैं।

🗣️ “विकसित भारत 2047” की ओर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा,

“हमारी 70 प्रतिशत अंतरिक्ष तकनीक देश के विकास और लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए समर्पित है। अंतरिक्ष, डिजिटल अवसंरचना और शासन का संगम ‘विकसित भारत 2047’ की डिजिटल तंत्रिका प्रणाली बनेगा।”

कार्यक्रम में IN-SPACe के चेयरमैन डॉ. पवन गोयंका और ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने भी संबोधित किया और भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

सत्र का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिससे सैटेलाइट नेटवर्क के माध्यम से सार्वभौमिक कनेक्टिविटी पर सहयोगात्मक चर्चा की नई शुरुआत हुई।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.