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AIIMS रायपुर दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का आह्वान: स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की जिम्मेदारी निभाएं युवा चिकित्सक

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर के तृतीय दीक्षांत समारोह में भाग लिया और स्नातक विद्यार्थियों से भारत के लोगों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाने का आह्वान किया।

समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी क्षण है। उन्होंने कहा, “आज आपको अपनी डिग्रियां मिल रही हैं और कल आपको इससे कहीं अधिक मूल्यवान—भारत के लोगों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन—की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में स्थापना के बाद से AIIMS रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बहुत कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ तथा पड़ोसी राज्यों, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य संस्थान बन गया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि AIIMS रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे व्यापक परिवर्तन का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कमजोर कनेक्टिविटी और वामपंथी उग्रवाद के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक विकास बाधित रहा। दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में भय और हिंसा के कारण सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार प्रभावित हुआ।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ अपने अतीत की छाया से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीतिक दृढ़ता और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया।

उन्होंने कहा कि दशकों से चली आ रही नक्सली समस्या का अंत हुआ है और जिन क्षेत्रों की पहचान कभी हिंसा से होती थी, वे अब सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, कनेक्टिविटी, निवेश और अवसरों के लिए पहचाने जा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने AIIMS रायपुर को “नए छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक” बताया, जो भय और अभाव के दौर से निकलकर शांति, प्रगति और संभावनाओं के युग की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने संस्थान की उन्नत चिकित्सा और प्रत्यारोपण सेवाओं में उपलब्धियों की भी सराहना की। छत्तीसगढ़ में पहला स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता, रीनल और कॉर्नियल ट्रांसप्लांट तथा कान के इम्प्लांट जैसी उपलब्धियों को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संतुलित विकास को आवश्यक बताते हुए कहा कि यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हर राज्य, जिला और गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा।

उच्च शिक्षा को विकसित भारत की दृष्टि का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने पिछले 12 वर्षों में उच्च शिक्षा के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर भी प्रकाश डाला। वर्ष 2014-15 में महिला नामांकन 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया—अर्थात 42.2 प्रतिशत की वृद्धि। AIIMS रायपुर के दीक्षांत समारोह में भी 376 छात्राओं और 313 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं।

स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने उनसे “ड्रग्स को दृढ़ता से ना कहने” तथा ऐसा भारत बनाने में योगदान देने का आह्वान किया, जहां तकनीक अंतिम नागरिक तक पहुंचे और प्रत्येक युवा भारतीय बेहतर भविष्य का सपना देख सके।

उन्होंने कहा:

“आपका ज्ञान उपचार करे, आपका अनुसंधान नवाचार करे और आपकी सेवा प्रेरणा बने।”

उपराष्ट्रपति ने AIIMS रायपुर को चिकित्सा उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार, जनस्वास्थ्य और करुणामय सेवा के क्षेत्र में निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि छत्तीसगढ़ का परिवर्तन विकसित भारत 2047 की व्यापक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनेगा।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए।

समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, AIIMS रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और कार्यकारी निदेशक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इंटर्न्स की समस्याओं पर चिकित्सा शिक्षा विभाग की बैठक, स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग पर विचार का आश्वासन

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इंटर्न्स एवं आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा के मध्य  मांगों को लेकर सकारात्मक चर्चा

रायपुर- आयुक्त चिकित्सा शिक्षा रितेश अग्रवाल की अध्यक्षता में आईएमए प्रतिनिधियों और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न्स के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य इंटर्न्स की समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान निकालना था।

स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग

बैठक के दौरान इंटर्न्स ने अपनी प्रमुख माँग रखते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने की बात कही। इस पर विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया कि छात्र हित में सरकार द्वारा हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं और इंटर्न्स की स्टाइपेंड संबंधी माँग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

हॉस्टल निर्माण को मंजूरी

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में प्रायः सभी मेडिकल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं, जो छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।

स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित न करने की अपील

बैठक के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों से अपील की गई कि स्वास्थ्य सेवाएँ सीधे तौर पर जनहित से जुड़ी होती हैं, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी परिस्थिति में सेवाएँ प्रभावित न हों।

बैठक में IMA-MSN Chhattisgarh  के संयोजक शाहदिल ख़ुसरू ने कहा कि आज की यह बैठक समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल साबित हुई है। दोनों पक्षों ने सकारात्मक वातावरण में चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की और बैठक का समापन भी सकारात्मक माहौल में हुआ। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि प्रशासन और इंटर्न्स, दोनों की ओर से इसी प्रकार संवाद और सहयोग की भावना बनी रहेगी तथा इस समस्या का जल्द ही संतोषजनक समाधान निकलेगा।

बैठक में पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर (PT. JNM Raipur), छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर (CIMS Bilaspur), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, राजनांदगांव (GMC Rajnandgaon), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कांकेर (GMC Kanker) एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर (GMC Ambikapur) के इंटर्न्स उपस्थित रहे।

शिक्षा से विकसित छत्तीसगढ़ तक: मुख्यमंत्री साय ने नीट क्वालीफाई विद्यार्थियों के साथ साझा किया भविष्य का रोडमैप

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रयास आवासीय विद्यालय के नीट क्वालीफाई विद्यार्थियों से किया प्रेरक संवाद

संवेदनशील डॉक्टर बनकर समाज और राष्ट्र की सेवा करने का दिया संदेश

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों के सवालों का विस्तार से दिया जवाब:  शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यटन, रोजगार, सुशासन, नशामुक्ति और विकसित छत्तीसगढ़ के विजन पर रखे विचार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रयास आवासीय विद्यालयों के नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रदेश में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों के गरीब एवं आदिवासी समुदाय के विद्यार्थियों ने नीट जैसी कठिन परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 17 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों का उद्देश्य दूरस्थ, आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता में उनके माता-पिता का आशीर्वाद, गुरुजनों का समर्पण और विद्यार्थियों की कठोर मेहनत समान रूप से शामिल है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आप सभी भविष्य के डॉक्टर हैं। समाज में डॉक्टर का स्थान भगवान के बाद माना जाता है। भगवान हमें जन्म देते हैं और डॉक्टर जीवन बचाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, व्यवहारिक और मिलनसार डॉक्टर भी बनें। उन्होंने कहा कि मरीज के साथ अच्छा व्यवहार स्वयं कई बीमारियों के उपचार का माध्यम बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज, प्रदेश और देश की सेवा को अपना सर्वोच्च दायित्व मानने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज शिक्षा सहित हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अपनी संघर्षपूर्ण शिक्षा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों को शासन की ओर से पहले की तुलना में कहीं अधिक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए प्रदेशभर में नालंदा परिसर संचालित किए जा रहे हैं तथा 34 नए नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। वहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास एवं भोजन की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इसी वर्ष ट्रायबल यूथ हॉस्टल के 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज निजी एवं शासकीय संस्थानों को मिलाकर 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। राज्य सरकार पांच नए मेडिकल कॉलेज भी स्थापित कर रही है, जिससे एमबीबीएस की 250 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए देशव्यापी 'नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान' का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज देशभर में करोड़ों लोगों ने नशा नहीं करने की शपथ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह अभियान स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो आगामी दो वर्षों तक संचालित होगा तथा इसमें माय भारत वालंटियर्स सहित बड़ी संख्या में युवा सहभागी बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि युवा स्वस्थ, संस्कारित, परिश्रमी और नशामुक्त रहेंगे तो स्वस्थ छत्तीसगढ़ और स्वस्थ भारत का निर्माण संभव होगा। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के शरीर और मस्तिष्क दोनों को प्रभावित करता है, अपराध को बढ़ावा देता है, पारिवारिक संबंधों को कमजोर करता है तथा पूरे परिवार को संकट में डाल देता है। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

जगदलपुर प्रयास आवासीय विद्यालय की छात्रा नेल्सा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के संसाधनों को लगातार बढ़ा रही है। प्रयास आवासीय विद्यालय इसका एक उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चे यदि विदेश में अध्ययन करना चाहते हैं तो उनका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करती है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिला मुख्यालयों एवं प्रमुख शहरों में 34 नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने।

अंबिकापुर प्रयास विद्यालय की छात्रा यामिनी पैकरा के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। शासकीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष विकसित करने के लिए स्मार्ट क्लास प्रारंभ की जा रही हैं, विद्यालयों का नवीनीकरण किया जा रहा है तथा शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब शासकीय विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तरह पेरेंट्स-टीचर मीटिंग आयोजित की जा रही है। विशेष अवसरों पर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा न्योता भोज जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को मध्यान्ह भोजन के अतिरिक्त पौष्टिक भोजन भी मिल सके। जवाहर उत्कर्ष योजना के माध्यम से बच्चों को निजी विद्यालयों में भी प्रवेश दिलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में शासकीय विद्यालय निजी विद्यालयों से भी बेहतर बनेंगे।

जगदलपुर की छात्रा दिलेश्वरी साहू ने युवाओं की राजनीति एवं प्रशासन में भागीदारी को लेकर प्रश्न पूछा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। डॉक्टर बनकर भी समाज और राष्ट्र की बड़ी सेवा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने सपनों के अनुरूप नौकरी, कृषि, राजनीति, जनसेवा अथवा व्यापार जैसे किसी भी क्षेत्र का चयन करना चाहिए, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा और संस्कार हमेशा सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति सेवा का एक प्रभावी माध्यम है और लोकतंत्र के माध्यम से समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। सेवा और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं।सरगुजा के छात्र समीर करकेट्टा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लगभग चार से पांच दशकों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा। डबल इंजन सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से 31 मार्च 2026 को प्रदेश नक्सलमुक्त हुआ। उन्होंने कहा कि अब बस्तर और सरगुजा में पर्यटन की अपार संभावनाएं विकसित हो रही हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़ और रानीदाह जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के साथ अबूझमाड़ का विशाल वन क्षेत्र विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के 60 देशों के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में बस्तर के धुड़मारास को स्थान दिया गया है। नई उद्योग नीति 2024-30 में पर्यटन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है तथा होमस्टे योजना के माध्यम से जनजातीय परिवारों को पांच कमरों के मकान निर्माण के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भोरमदेव मंदिर को भारत सरकार की प्रसाद योजना में शामिल किया गया है, जिसके लिए 168 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। साथ ही दंतेश्वरी, बम्लेश्वरी, चंद्रहासिनी, महामाया एवं बागेश्वरी शक्तिपीठों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। राम वन गमन पथ के माध्यम से भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों का विकास भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर में पर्यटन उद्योग के माध्यम से लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

महासमुंद के छात्र हेमंत यादव के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। यह देश के मध्य में स्थित राज्य है और चारों महानगरों से बेहतर संपर्क रखता है। प्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध है। देश के लगभग 19 से 20 प्रतिशत लौह अयस्क का उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। यहां कोयला, बॉक्साइट, हीरा, सोना, लिथियम और यूरेनियम जैसे बहुमूल्य खनिज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सुरक्षा शिविरों को सेवा डेरे के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्कूल, अस्पताल और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य है। वर्तमान में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है तथा ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनसे भविष्य में अतिरिक्त 30 हजार मेगावाट उत्पादन होगा। इससे रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है तथा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सिंचाई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। बस्तर संभाग में देउरगांव और मटनार सिंचाई परियोजनाओं पर लगभग 1700 करोड़ रुपये तथा सिकासार-कोड़ार पाइपलाइन परियोजना पर लगभग 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पशुपालन, मत्स्य पालन, हर्बल उत्पादन, राइस मिल, कोल्ड स्टोरेज तथा मूल्य संवर्धन आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नई उद्योग नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

सरगुजा के छात्र कोमल पटेल के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने कॉमनवेल्थ एवं ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया जैसे अभियान युवाओं को नई दिशा दे रहे हैं। जशपुर में 67 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा 60 करोड़ रुपये से आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खेल अलंकरण समारोह प्रारंभ किया है, जिसके तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता, प्रशस्ति पत्र तथा शासकीय सेवा का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की खेल नीति के अनुसार ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपये, स्वर्ण पदक विजेता को 3 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 2 करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तथा उत्कृष्ट खेल मिशन का भी उल्लेख किया।राजनांदगांव की छात्रा प्राची मलगामे के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अपने जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि 10 वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का कोई पूर्व निर्धारित लक्ष्य नहीं था, लेकिन जो भी दायित्व मिला, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में आज भी वे प्रदेश की साढ़े तीन करोड़ जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता, केवल उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण से करना चाहिए।

सरगुजा की शाहिना अंसारी के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जनजीवन का महत्वपूर्ण आधार माना था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप दिया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2014 को लाल किले से दिए गए आह्वान के बाद देश में स्वच्छता के प्रति व्यापक जागरूकता आई है। गांव-गांव में शौचालय बने हैं और लोगों की आदतों में सकारात्मक परिवर्तन आया है। 

दुर्ग के छात्र निखिल कुमार ठाकुर के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। युवाओं में संस्कार, बड़ों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्राचीन काल में भारत विश्वगुरु था और नालंदा तथा तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय विश्वभर के विद्यार्थियों को आकर्षित करते थे। लंबे समय तक विदेशी शासन के कारण यह परंपरा प्रभावित हुई, लेकिन आज भारत आर्थिक दृष्टि से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, मेक इन इंडिया, स्वदेशी वैक्सीन निर्माण और ब्रह्मोस जैसी उपलब्धियां नए भारत की शक्ति का परिचायक हैं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को बताया कि हाल ही में प्रारंभ की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेशवासी अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे शासन तक पहुंचा सकते हैं। इस व्यवस्था में लगभग 8 हजार अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण के लिए जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी भी अपने हॉस्टल अथवा शिक्षा से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को इस माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभ के डेढ़ माह में ही इस व्यवस्था को अच्छा प्रतिसाद मिला है और बिजली, पानी, नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन जैसी अनेक समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने अंत में बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री डैशबोर्ड भी विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी शासकीय संस्थानों को जोड़ा जाएगा। इस डैशबोर्ड के जरिए मुख्यमंत्री निवास से ही स्कूलों, अस्पतालों, शिक्षकों की उपस्थिति, राशन की उपलब्धता सहित विभिन्न सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। उन्होंने कहा कि सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना राज्य सरकार का संकल्प है।

छत्तीसगढ़ को मिली 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की सौगात, 250 नई MBBS सीटों को मंजूरी

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा का जताया आभार

रायपुर- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छत्तीसगढ़ में पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को मंजूरी दे दी है। ये मेडिकल कॉलेज गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम में स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक कॉलेज में 50-50 MBBS सीटें स्वीकृत की गई हैं। इस प्रकार राज्य में कुल 250 नई MBBS सीटों की बढ़ोतरी होगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का भी व्यापक विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, समावेशी और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा अपने ही राज्य में मिल सके और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर आदिवासी अंचल कुनकुरी (जशपुर) तक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना डबल इंजन सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसके तहत विकास का लाभ प्रदेश के हर क्षेत्र तक पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल विद्यार्थियों के लिए नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने के केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। नए मेडिकल कॉलेजों से दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी जिलों के विद्यार्थियों को राज्य के भीतर ही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा तथा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर सहयोग से राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि ये संस्थान केवल मेडिकल कॉलेज ही नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधन विकास के महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेंगे। इससे नई पीढ़ी के कुशल डॉक्टर तैयार होंगे और ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह स्वीकृति छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में राज्य को और अधिक सशक्त बनाएगी।

https://x.com/i/status/2076588311737500136

रायपुर के पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज में 20 एमबीबीएस सीटें बढ़ीं, कुल संख्या हुई 250

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रायपुर- राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (National Medical Commission - NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज, रायपुर में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। यह कॉलेज पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एंड आयुष यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ से संबद्ध है।

MARB की ओर से 10 जुलाई 2026 को जारी अनुमति पत्र (Letter of Permission) के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेज की एमबीबीएस सीटों की संख्या 230 से बढ़ाकर 250कर दी गई है, यानी कुल 20 नई सीटों की बढ़ोतरी हुई है।

स्थापना से अब तक सीटों में वृद्धि का इतिहास

वर्ष 1963 में 60 एमबीबीएस सीटों के साथ स्थापित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय ने समय-समय पर अपनी प्रवेश क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। प्रारंभिक 60 सीटों से बढ़कर यह संख्या 100, वर्ष 2009 में 150, वर्ष 2019 में 180, वर्ष 2023 में 230 तथा अब एनएमसी की नवीनतम स्वीकृति के पश्चात 250 सीटों तक पहुँच गई है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सीटों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और वे अपने ही राज्य में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और प्रयासों के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।

एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया

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कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्थित कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत के किसी भी कोल पीएसयू की पहली सीएसआर योजना बन गई है, जिसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अधिसूचित किया गया है।

कोयला मंत्रालय ने आधार (लक्षित वितरण वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाएं) अधिनियम, 2016 तथा आधार प्रमाणीकरण (सुशासन, सामाजिक कल्याण, नवाचार एवं ज्ञान) नियम, 2020 के तहत इस योजना के लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करते हुए राजपत्र अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना के माध्यम से लाभार्थियों को स्वैच्छिक आधार प्रमाणीकरण के जरिए पारदर्शी, प्रभावी और लक्षित तरीके से लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, जो लाभार्थी आधार का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके लिए सरकार द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों की भी व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2023 में शुरू की गई 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना, एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर पहल है। इसके तहत कंपनी के परिचालन क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को नीट (NEET) की निःशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।

इस योजना ने लगातार उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं।

पहला बैच (2023–24):

  • 40 में से 39 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • 11 विद्यार्थियों को एमबीबीएस (MBBS) में प्रवेश मिला।

  • 2-2 विद्यार्थियों को बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS) तथा बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPTH) में प्रवेश प्राप्त हुआ।

  • 2 विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में वेटरनरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया।

दूसरा बैच (2024–25):

  • 40 में से 31 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • विद्यार्थियों को एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस तथा बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस (B.F.Sc.) जैसे पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश मिला।

यह राजपत्र अधिसूचना 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना के विकास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे योजना की संस्थागत व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लाभार्थियों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित होगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल पर सूचीबद्ध होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली और एकमात्र सीएसआर योजना भी बन चुकी है। यह इसकी मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था तथा तकनीक आधारित पारदर्शी सेवा वितरण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

'एसईसीएल के सुश्रुत' के माध्यम से एसईसीएल खनन क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करते हुए देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भविष्य के योग्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने अमित शाह से की मुलाकात, छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की मांग

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  से मुलाकात कर राज्य में All India Institute of Ayurveda (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान छत्तीसगढ़ में आयुर्वेदिक चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से राज्य के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और मरीजों को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इसके साथ ही प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेदिक शिक्षा और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि संस्थान की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को गति मिलेगी। विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक शोध एवं उपचार सुविधाओं से जोड़ने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री द्वारा रखे गए प्रस्ताव पर सकारात्मक चर्चा की और राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां राष्ट्रीय स्तर का आयुर्वेदिक संस्थान स्थापित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि AIIA की स्थापना से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि आयुष क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और चिकित्सा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।


चिकित्सा शिक्षा में मजबूत क्लिनिकल आधार जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री और प्रख्यात चिकित्सक डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि मेडिकल शिक्षा में मजबूत क्लिनिकल (व्यावहारिक) आधार अत्यंत आवश्यक है, चाहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका कितनी भी बढ़ जाए।

वे “Pediatric Gastroenterology, Hepatology and Nutrition” पुस्तक के दूसरे संस्करण के विमोचन अवसर पर बोल रहे थे। यह पुस्तक प्रो. अनुपम सिबल और डॉ. सारथ गोपालन द्वारा संपादित की गई है, जिसमें कैथलीन बी. श्वार्ट्ज (Kathleen B. Schwartz)  (Johns Hopkins University) ने फॉरवर्ड लिखा है।

 AI और मेडिकल शिक्षा पर विचार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि:

  • AI एक सहायक (assistant) की भूमिका निभा सकता है

  • लेकिन पहले मूल चिकित्सा ज्ञान और क्लिनिकल समझ जरूरी है

  • बिना आधार के AI पर निर्भरता सीखने की प्रक्रिया को कमजोर कर सकती है

मेडिकल शिक्षा पर जोर

उन्होंने कहा कि:

  • चिकित्सा ज्ञान तेजी से बढ़ रहा है

  • छात्रों को बेसिक नॉलेज + प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर ध्यान देना चाहिए

  • तकनीक के साथ-साथ मानवीय अनुभव भी जरूरी है

 नई पुस्तक के बारे में

यह पुस्तक 45 अध्यायों में विस्तारित है और इसमें कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं:

  • इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज

  • सीलिएक डिजीज

  • लिवर ट्रांसप्लांट

  • न्यूरो-गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

  • जेनेटिक्स और एंडोस्कोपी

महत्वपूर्ण तथ्य

  • लगभग 30% बच्चे पेट और लिवर संबंधी बीमारियों से प्रभावित होते हैं

  • यह पुस्तक डॉक्टरों और प्रशिक्षुओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है

निष्कर्ष

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि भविष्य की चिकित्सा शिक्षा में AI की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, लेकिन मजबूत क्लिनिकल आधार ही एक सक्षम डॉक्टर की असली पहचान है।

देहरादून में स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने संबोधित किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज देहरादून स्थित स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है और यह सेवा व जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत भी है।

मंत्री नड्डा ने छात्रों से चिकित्सा पेशे के उच्चतम आदर्शों को अपनाने, निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और मानवता की सेवा में अपने ज्ञान और कौशल को समर्पित करने का आह्वान किया।

उन्होंने पिछले 11 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई बड़ी प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में AIIMS की संख्या 6 से बढ़कर 23 हो गई है। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव दर लगभग 89% तक पहुँच गई है, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, और भारत ने वैश्विक औसत से तेज़ी से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की है।

केंद्रीय मंत्री ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान, आयुष्मान भारत योजना, आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च में कमी, टीबी और मलेरिया नियंत्रण, तथा 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना जैसी उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की असली ताकत समर्पित और संवेदनशील चिकित्सा पेशेवरों में निहित है।



कोयंबटूर में स्वास्थ्य क्षेत्र के दो बड़े कार्यक्रमों में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन शामिल, ‘स्वस्थ भारत–विकसित भारत’ पर दिया जोर

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कोयंबटूर- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित दो प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन को रेखांकित किया।

उपराष्ट्रपति ने कोवाई मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल (केएमसीएच) में केएमसीएच इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज एवं ओपीडी ब्लॉक तथा केएमसीएच मेडिकल कॉलेज पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने कोडिसिया हॉल, कोयंबटूर में आयोजित रामकृष्णा हॉस्पिटल के स्वर्ण जयंती समारोह और रामकृष्णा डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

दोनों कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये संस्थान गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और करुणा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल एक सेवा क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मिशन है।

उन्होंने सरकार की पहलों के साथ तालमेल बिठाने में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सरकारी संस्थानों के साथ-साथ विश्वसनीय निजी चिकित्सा संस्थान ‘स्वस्थ भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’ की दिशा में देश की यात्रा में अहम भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार हो रहे हैं। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना बन चुकी है, जिससे लगभग 50 करोड़ नागरिकों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है और गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है। साथ ही, देशभर में स्थापित स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों ने निवारक और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती दी है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल और गैर-संचारी रोगों का प्रबंधन भी शामिल है।

चिकित्सा पेशेवरों की कमी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। पिछले एक दशक में एमबीबीएस सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वर्ष 2029 तक 75,000 और सीटें जोड़ने की योजना है। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 300 से अधिक नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जिससे चिकित्सा शिक्षा महानगरों से बाहर तक पहुंची है।

केएमसीएच इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के उद्घाटन के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां वैश्विक स्तर पर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रही हैं। अत्याधुनिक न्यूरो-नेविगेशन और रोबोटिक सर्जरी सुविधाओं से युक्त यह संस्थान समय की जरूरत को पूरा करने वाला एक दूरदर्शी कदम है।

रामकृष्णा हॉस्पिटल के स्वर्ण जयंती समारोह में उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2016 में बनाए गए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की सराहना की, जब केवल आठ घंटे में 13,206 अंगदान प्रतिज्ञाएं एकत्र की गई थीं।

भारतीय सभ्यतागत सोच का उल्लेख करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत में सदैव अच्छे स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। उन्होंने दोहराया कि “स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की नींव है” और स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को लागत नहीं, बल्कि देश के भविष्य में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने दोनों कार्यक्रमों के दौरान लोगों से संवाद किया और सभी को पोंगल पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की 21वीं वार्षिक दीक्षांत समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया संबोधन

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के 21वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज कुमार, उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री मयंकशवर शरण सिंह और भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद उपस्थित रहे।

नड्डा ने नए स्नातकों को बधाई दी और KGMU द्वारा चिकित्सा शिक्षा और रोगी देखभाल के क्षेत्र में किए गए योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “KGMU 2025 के NIRF रैंकिंग में 8वें स्थान पर है और इसके 12 फैकल्टी मेंबर्स स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में सूचीबद्ध हैं, जो वास्तव में प्रशंसनीय उपलब्धि है।”

केंद्रीय मंत्री ने पिछले दशक में भारत में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले सदी के अंत में देश में केवल एक AIIMS था, जबकि आज भारत में 23 AIIMS संस्थान हैं, जो हर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशिक्षण को पहुँचाने के सरकार के संकल्प को दर्शाते हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी प्रकार, स्नातक चिकित्सा सीटें 51,000 से बढ़कर 1,19,000 और पोस्टग्रेजुएट सीटें 31,000 से बढ़कर 80,000 हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशानुसार 2029 तक स्नातक और पोस्टग्रेजुएट स्तर पर अतिरिक्त 75,000 सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें से एक वर्ष में ही 23,000 से अधिक सीटें जोड़ दी गई हैं।

नड्डा ने यह भी बताया कि आज देश में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मन्दिर संचालित हैं, जो व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत – PMJAY योजना के तहत 62 करोड़ से अधिक लोग, यानी देश की 40% से अधिक आबादी, 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य कवरेज का लाभ प्राप्त कर रही है।

केंद्रीय मंत्री ने स्नातकों से आग्रह किया कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करें। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक MBBS छात्र पर 30-35 लाख रुपये खर्च करती है, इसलिए डॉक्टरों को समाज सेवा और चिकित्सा विज्ञान में उत्कृष्टता के लिए समर्पित रहना चाहिए।

इस अवसर पर, 81 छात्रों और एक फैकल्टी सदस्य को उनके शैक्षणिक, नैदानिक और शोध कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। पुरस्कारों में गोल्ड और सिल्वर मेडल, मेरिट सर्टिफिकेट, पुस्तक पुरस्कार, नकद पुरस्कार और सर्वोत्तम थीसिस तथा सर्वश्रेष्ठ निवासी के लिए पुरस्कार शामिल हैं।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि “120 से अधिक वर्षों से KGMU चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और मानव सेवा में एक मील का पत्थर रही है।” उन्होंने उत्तर प्रदेश में चिकित्सा क्षेत्र में हुए प्रगति का भी उल्लेख किया।

इस समारोह में KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यनंद (पद्म श्री पुरस्कार प्राप्त), डीन प्रो. अपजीत कौर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने UCMS दीक्षांत समारोह में युवाओं को नवाचार और करुणा के साथ चिकित्सा सेवा के लिए प्रेरित किया

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के तेजी से बदलते परिदृश्यों पर प्रकाश डाला, और एक ऐसे परिवर्तनकारी दशक की ओर इशारा किया जिसने भारत में स्वास्थ्य देखभाल को अधिक सुलभ, किफायती और समावेशी बनाया है।

डॉ. सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (UCMS) के 54वें स्थापना दिवस और दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को डिग्रियां प्रदान की और नई पीढ़ी के चिकित्सकों से नवाचार को अपनाने के साथ करुणा के मूल्यों में बने रहने का आह्वान किया।

मंत्री ने कहा कि पिछले दशक में भारत में चिकित्सा शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें मेडिकल कॉलेजों और प्रशिक्षण अवसरों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। “दस साल पहले केवल लगभग 45,000 अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटें थीं; आज यह संख्या लगभग 1.5 लाख के करीब है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि AIIMS जैसे संस्थानों का विस्तार क्षेत्रीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने और अधिक महिलाओं को चिकित्सा करियर अपनाने का अवसर देने में सहायक रहा है।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवा वितरण में हुए परिवर्तन का वर्णन तीन पहलुओं में किया — सुलभ, किफायती और उपलब्ध। उन्होंने आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्र जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने राज्य और नागरिक के बीच संबंध को नए सिरे से परिभाषित किया है। अपने चिकित्सा अनुभव को साझा करते हुए, डॉ. सिंह ने बताया कि भारत में स्वास्थ्य बीमा ने पूर्व-मौजूद बीमारियों को भी कवर करना शुरू कर दिया है, जिसे उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में “सबसे मानवीय नवाचारों में से एक” बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के जीवन विज्ञान क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक साख पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “यही विभाग — बायोटेक्नोलॉजी विभाग — जिसने COVID-19 के लिए दुनिया का पहला DNA टीका और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर रोकथाम के लिए HPV टीका विकसित किया। भारत अब 200 से अधिक देशों में देशज टीके सप्लाई करता है।”

उन्होंने भारत की पहली देशज एंटीबायोटिक ‘नाफिथ्रोमाइसिन’ और हेमोफीलिया के लिए सफल जीन थेरेपी परीक्षणों का भी उल्लेख किया, जो न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुए हैं। डॉ. सिंह ने UCMS और समान संस्थानों से निजी क्षेत्र के साथ सहयोग कर उन्नत क्लिनिकल ट्रायल और शोध करने का आग्रह किया। “सिलो में काम करने का युग समाप्त हो गया है,” उन्होंने कहा, और शैक्षणिक संस्थानों को उद्योग और सरकारी प्रयोगशालाओं के साथ एकीकृत होने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर संस्थान की 54 वर्षीय यात्रा को दर्शाते हुए एक स्मारिका जारी की गई, जिसमें चिकित्सा शिक्षा, शोध और सार्वजनिक सेवा में कॉलेज की उपलब्धियों को दर्शाया गया। स्मारिका ने विशेष रूप से GTB हॉस्पिटल के साथ UCMS की सामुदायिक स्वास्थ्य पहलों में योगदान को उजागर किया।

डॉ. सिंह ने उत्कृष्ट छात्रों और शिक्षकों को पुरस्कार और पदक भी प्रदान किए। उन्होंने विजेताओं को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि भारत की नई पीढ़ी के चिकित्सक देश के स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताओं को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

स्वास्थ्य चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने कहा कि आज के चिकित्सकों को “द्वि-चरणीय रोग स्पेक्ट्रम” — संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों के सह-अस्तित्व — के साथ-साथ वृद्ध होती आबादी और तेजी से बदलती तकनीक का सामना करना होगा। उन्होंने चिकित्सा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समावेश का उल्लेख किया, जिसका उन्होंने स्वयं टेली-मोबाइल क्लीनिक्स के माध्यम से अनुभव किया है। AI मरीज की भाषा में संवाद कर सकता है और मानव जैसी बातचीत से आराम भी प्रदान कर सकता है, जिसे उन्होंने सहानुभूति और नवाचार का सम्मिलित मॉडल बताया।

डॉ. सिंह ने स्नातकों को उनके अद्वितीय अवसर की याद दिलाई। “आज डिग्री प्राप्त करने वाले लोग 2047 में भारत की 100वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के समय अपने करियर के सर्वोच्च स्तर पर होंगे। भाग्य ने आपको एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करने का अवसर दिया है।”

इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा, चेयरमैन, गवर्निंग बॉडी, UCMS के स्वागत भाषण से हुई, इसके बाद प्रो. बालाराम पनी, डीन ऑफ कॉलेजेज, दिल्ली विश्वविद्यालय और मुख्य अतिथि ने संबोधन दिया। कार्यक्रम में UCMS के संकाय सदस्य, छात्र और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, और यह सरकार की व्यापक दृष्टि को भी दर्शाता है कि चिकित्सा शिक्षा को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने एम्स नई दिल्ली के 50वें दीक्षांत समारोह में युवा चिकित्सकों को सेवा, नैतिकता और नवाचार के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के 50वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

अपने संबोधन में मंत्री नड्डा ने सभी स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि AIIMS ने चिकित्सा विज्ञान, शिक्षा और रोगी देखभाल के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे सहानुभूति के साथ सेवा करें, उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखें और नवाचार के माध्यम से देश की बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करें।

AIIMS, नई दिल्ली की सराहना करते हुए मंत्री नड्डा ने कहा, “चिकित्सा विज्ञान, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में AIIMS ने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।” उन्होंने संस्थान की चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवा में उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।

मंत्री नड्डा ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां पिछली सदी के अंत तक भारत में केवल एक AIIMS था, वहीं आज देशभर में 23 AIIMS संस्थान कार्यरत हैं, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा प्रशिक्षण को हर क्षेत्र तक पहुँचाने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी तरह, एमबीबीएस सीटें 51,000 से बढ़कर 1,29,000 और पीजी सीटें 31,000 से बढ़कर 78,000 हो गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अतिरिक्त 75,000 सीटें जोड़ी जाएंगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है — मातृ मृत्यु दर (MMR) 130 से घटकर 88, शिशु मृत्यु दर (IMR) 39 से घटकर 27 हो गई है। 5 वर्ष से कम आयु मृत्यु दर (U5MR) और नवजात मृत्यु दर (NMR) में भी क्रमशः 42% और 39% की कमी आई है, जो वैश्विक औसत से बेहतर है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में टीबी के मामलों में 17.7% की कमी आई है, जो वैश्विक दर 8.3% से दोगुनी है — जैसा कि द लैंसेट रिपोर्ट में बताया गया है।

अपने समापन भाषण में मंत्री नड्डा ने छात्रों से आग्रह किया कि वे शिक्षा और अनुसंधान में सक्रिय योगदान दें और AIIMS की गौरवशाली परंपरा और प्रतिष्ठा को बनाए रखें। उन्होंने उन्हें आजीवन सीखने वाले और नवोन्मेषी बनने की प्रेरणा दी, ताकि वे चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाते हुए समाज की सेवा कर सकें।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. वी. के. पॉल ने कहा, “हम पर समाज के प्रति गहरी जिम्मेदारी है, जिसने हमें संवारने का अवसर दिया। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ें, उत्कृष्टता को अपनी आदत बनाएं और नवाचार को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत।”

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अकादमिक क्षेत्र में आएं, ताकि वे अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य पेशेवरों को शिक्षित, मार्गदर्शन और प्रेरित कर सकें, जिससे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में योगदान हो सके।

इस समारोह में कुल 326 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 50 पीएच.डी. विद्वान, 95 डीएम/एम.सी.एच. विशेषज्ञ, 69 एम.डी., 15 एम.एस., 4 एम.डी.एस., 45 एम.एससी., 30 एम.एससी. (नर्सिंग) और 18 एम.बायोटेक स्नातक शामिल थे। इसके अलावा, AIIMS में उत्कृष्ट सेवा और योगदान के लिए सात डॉक्टरों को आजीवन उपलब्धि पुरस्कार (Lifetime Achievement Award) से सम्मानित किया गया।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने AIIMS बिलासपुर के 3वें स्थापना दिवस समारोह में की अध्यक्षता

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बिलासपुर- केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हिमाचल प्रदेश में AIIMS बिलासपुर के तीसरे स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर अनुराग ठाकुर (लोकसभा सांसद), हर्ष महाजन (राज्यसभा सांसद), जय राम ठाकुर (पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी नेता हिमाचल प्रदेश) और कोल. डॉ. धनी राम शांदिल (स्वास्थ्य मंत्री, हिमाचल प्रदेश) भी उपस्थित थे।

जगत प्रकाश नड्डा ने कहा, “उन्नत MRI, CT स्कैनर, PET-CT, एंडोस्कोपी और ब्रोंकोस्कोपी जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ, केवल तीन वर्षों में AIIMS बिलासपुर ने उल्लेखनीय प्रगति की है। आसपास के राज्यों के लोग भी यहां इलाज के लिए आ रहे हैं, जो इस संस्थान में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।”

उन्होंने सरकार की गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दोहराया और न्यूक्लियर मेडिसिन, कैंसर केयर और रीनल ट्रांसप्लांट्स में महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले लोग PGI चंडीगढ़ तक यात्रा करते थे, लेकिन अब AIIMS बिलासपुर क्षेत्र की उच्च स्तरीय चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करता है।

चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान देते हुए मंत्री ने बताया कि AIIMS बिलासपुर के लिए हाल ही में 127 पदों को मंजूरी दी गई है, जिनमें 29 फैकल्टी और 98 नॉन-फैकल्टी पद शामिल हैं। चयन समिति एक वर्ष तक सक्रिय रहेगी और कम से कम चार साक्षात्कार दौर आयोजित कर इन पदों को शीघ्र भरने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने 500-बेड विश्राम सदन की योजना की घोषणा की ताकि दूरदराज से आने वाले मरीजों के लिए आवास सुनिश्चित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, ₹165 करोड़ आवासीय क्वार्टर और छात्रावास निर्माण के लिए तथा ₹5 करोड़ इनडोर स्टेडियम के निर्माण के लिए स्वीकृत किए गए हैं।

AIIMS ब्रांड की प्रतिष्ठा बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने अन्य AIIMS संस्थानों की सफलताओं को दोहराने और नई नवाचार पहलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने NITI आयोग और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के सहयोग से एक टीम के गठन की भी घोषणा की, जो सभी AIIMS संस्थानों का दौरा करेगी और भविष्य की विकास योजना बनाएगी।

जगत प्रकाश नड्डा ने पिछले 11 वर्षों में चिकित्सा शिक्षा में वृद्धि पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में अब 808 मेडिकल कॉलेज हैं और वार्षिक UG सीटें 35,000 से बढ़कर 1.25 लाख हो गई हैं। पिछले कैबिनेट में प्रधानमंत्री ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,000 नई UG और PG सीटों को मंजूरी दी थी। अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त 75,000 मेडिकल सीटें सरकारी संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएंगी।

कार्यक्रम के दौरान AIIMS बिलासपुर का कुलगीत जारी किया गया, जो संस्थान की भावना और मूल्यों का प्रतीक है। इसके अलावा, उपलब्धियों के लिए विशेष पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उत्कृष्ट छात्रों को सम्मानित किया गया।

AIIMS बिलासपुर की प्रमुख विशेषताएँ:

  • अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स: 1.5 टेस्ला MRI, 128-SLICE CT स्कैनर, PET-CT, SPECT-CT और रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी।

  • विशेषीकृत देखभाल: कैंसर ट्रीटमेंट, रेडियोथेरेपी, ऑनकोलॉजी यूनिट और फंक्शनल कैथ लैब।

  • आपातकालीन सेवाएँ: 64 ICU बिस्तर, ब्रोंकोस्कोपी सुइट, LMO प्लांट से निरंतर ऑक्सीजन।

  • ट्रांसप्लांट और सर्जरी: 8 सफल किडनी ट्रांसप्लांट, शीघ्र ही कॉर्नियल ट्रांसप्लांट यूनिट।

  • शोध और प्रयोगशालाएँ: एंडोक्राइनोलॉजी और इम्यूनोलॉजी लैब, क्षेत्रीय वायरल रिसर्च और डायग्नोस्टिक लैब (₹19.83 करोड़)।

  • मरीज सहायता: 3 अमृत/जन औषधि फार्मेसियाँ, 250-बेड विश्राम सदन निर्माणाधीन।

  • शिक्षा और प्रशिक्षण: आधुनिक लेक्चर हॉल, सिमुलेशन और स्किल लैब।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर: छात्रावास (540+ क्षमता), आवासीय क्वार्टर, रूफटॉप सोलर, इनडोर स्टेडियम।

भविष्य की योजनाओं में बोन मैरो ट्रांसप्लांट ब्लॉक, ऑटोप्सी ब्लॉक, ट्रॉमा एवं क्रिटिकल केयर सेंटर, रोबोटिक सर्जरी यूनिट और ड्रोन-आधारित हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इस अवसर पर अंकिता मिश्रा बुंदेला (संयुक्त सचिव PMSSY), प्रो. नरेंद्र कुमार अरोड़ा (अध्यक्ष AIIMS बिलासपुर), प्रो. दयानंद शर्मा (कार्यकारी निदेशक AIIMS बिलासपुर) और ले. कर्नल परांजपे (रजिस्ट्रार) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


एबीवीआईएमएस और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का 11वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, एनएमसी अध्यक्ष डॉ. अभिजात शेट ने दी बधाई

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एनएमसी अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेट की अध्यक्षता में एबीवीआईएमएस और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का 11वां दीक्षांत समारोह आयोजित

नई दिल्ली-नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेट की अध्यक्षता में आज अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ABVIMS) और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का 11वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक (DGHS) डॉ. सुनीता शर्मा और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव डॉ. विनोद कोटवाल भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. शेट ने उत्तीर्ण छात्रों, उनके अभिभावकों और फैकल्टी सदस्यों को बधाई दी और कहा कि सरकार पूरे देश में डॉक्टर-रोगी अनुपात को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अनुशंसा 1:1000 पर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) में 1:1 अनुपात सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि भारत की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता विकसित देशों के मानकों तक पहुँच सके।

उन्होंने यह भी कहा कि एनएमसी और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज द्वारा कौशल-आधारित और वर्चुअल लर्निंग को पारंपरिक शिक्षा पद्धति के साथ जोड़ने जैसे नवाचार किए जा रहे हैं। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, चुनौतियों का डटकर सामना करें और जीवनभर सीखते रहें।

डॉ. विनोद कोटवाल ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह अवसर वर्षों की मेहनत का परिणाम है और यह आपके जीवनभर के दायित्व का आरंभ है। उन्होंने एबीवीआईएमएस को हाल ही में प्राप्त NABH प्रत्यायन पर भी शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह संस्थान की गुणवत्ता, सुरक्षा और रोगी-केन्द्रित देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे ज्ञान, सेवा और अनुसंधान की दिशा में ईमानदारी, करुणा और सम्मान को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाएं।

डॉ. सुनीता शर्मा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “आज आप केवल एक डिग्री नहीं प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि एक गहन जिम्मेदारी ले रहे हैं—रोगियों को उपचार देना, समाज का नेतृत्व करना और राष्ट्र की सेवा करना।” उन्होंने कहा कि चाहे आप क्लिनिकल केयर, रिसर्च या शिक्षा के क्षेत्र में जाएँ, आपका काम हमेशा सहानुभूति, प्रमाणिकता और उत्कृष्टता पर आधारित होना चाहिए।

समारोह के दौरान 250 स्नातकोत्तर और डीएम छात्रों तथा पहले बैच के 100 एमबीबीएस स्नातकों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं। इस अवसर पर एबीवीआईएमएस की वार्षिक रिपोर्ट ‘संहिता’ भी जारी की गई।

एबीवीआईएमएस और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के बारे में

1932 में विलिंगडन नर्सिंग होम के रूप में स्थापित यह अस्पताल आज 1,532 बेड वाला प्रमुख संस्थान है, जो लगभग सभी विशेषताओं और सुपर-स्पेशियलिटीज़ में संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। 2019 में इसका नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ABVIMS) और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RMLH) किया गया।

संस्थान में प्रति वर्ष 100 एमबीबीएस, 203 स्नातकोत्तर और 48 डीएम/एम.च. सीटें उपलब्ध हैं। यह अस्पताल हर साल लगभग 12 लाख ओपीडी और 60,000 आईपीडी रोगियों को सेवाएँ देता है और 24×7 आपातकालीन सेवाएँ उपलब्ध कराता है।

समारोह में एबीवीआईएमएस के निदेशक डॉ. (प्रो.) अशोक कुमार, डीन डॉ. आरती मारिया, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और अभिभावक भी उपस्थित रहे।


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