Media24Media.com: #MadeInIndia

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #MadeInIndia. Show all posts
Showing posts with label #MadeInIndia. Show all posts

“स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सशक्त बनाना”

No comments Document Thumbnail

भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अधीन MSME विकास एवं सुविधा कार्यालय, चेन्नई ने IIT मद्रास के उद्यमिता प्रकोष्ठ के सहयोग से 18 अगस्त को IIT मद्रास, चेन्नई में “स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सक्षम बनाना” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

संगोष्ठी में MSMEs, उद्यमियों, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हितधारकों तथा डिजिटल कॉमर्स विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य MSMEs को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच बनाने के लिए व्यावहारिक मार्गों पर चर्चा करना था।

उद्घाटन सत्र में तमिलनाडु सरकार के MSME विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रवीण यादव ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल कॉमर्स भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए MSMEs की वैश्विक बाजारों तक पहुँच को बदल रहा है। उन्होंने MSMEs की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तेज करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय तथा सक्षम वातावरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

IIT मद्रास के IC&SR के डीन प्रो. मनु संथानम ने अपने विशेष संबोधन में नवाचार तथा अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग से MSMEs नए उत्पादों और प्रौद्योगिकियों का विकास कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकते हैं।

हंसराज वर्मा, महानिदेशक, Council of State Industrial Development & Investment Corporation of India, ने भी विशेष संबोधन दिया। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए गुणवत्ता को बुनियादी तत्व बताया और MSMEs की बाजार पहुँच बढ़ाने में डिजिटलीकरण के महत्व को रेखांकित किया।

धयालन, निदेशक एवं प्रमुख, MSME DFO चेन्नई ने मुख्य वक्तव्य दिया और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया। रेशमा राजीवन, उप निदेशक, MSME DFO चेन्नई ने स्वागत भाषण दिया और संगोष्ठी की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। उन्होंने MSMEs को घरेलू बाजारों से आगे बढ़ाकर वैश्विक अवसरों से जोड़ने के लिए आवश्यक सहयोग पर जोर दिया।

संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बदलते स्वरूप तथा MSMEs को भौगोलिक सीमाओं से परे ग्राहकों तक पहुँचाने में डिजिटल कॉमर्स, प्रौद्योगिकी, नवाचार और बाजार संपर्क की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।

तकनीकी सत्रों में DGFT, EXIM Bank, ECGC, IIT मद्रास तथा निर्यात और ई-कॉमर्स परामर्श क्षेत्र के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने MSMEs को निर्यात प्रक्रियाओं, व्यापार वित्त, निर्यात जोखिम प्रबंधन, बाजार की पहचान, अंतरराष्ट्रीय भुगतान, अनुपालन, डिजिटल ऑनबोर्डिंग तथा वैश्विक बाजार तक पहुँच के लिए ई-कॉमर्स का लाभ उठाने के अवसरों के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी।

चर्चाएँ सरकार द्वारा MSMEs की बाजार पहुँच मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहीं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की Procurement & Marketing Support (PMS) Scheme में क्षमता निर्माण के अंतर्गत राष्ट्रीय कार्यशालाओं/संगोष्ठियों को एक समर्पित घटक के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य MSMEs को बाजार पहुँच, पैकेजिंग, आयात-निर्यात प्रक्रियाओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तथा बाजार विस्तार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विकासों के बारे में जागरूक करना और शिक्षित करना है।

चेन्नई में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी इसी घटक के तहत आयोजित की गई, जिसके माध्यम से MSMEs को डिजिटल कॉमर्स और निर्यात के लिए तैयार होने से संबंधित विशेषज्ञों तथा व्यावहारिक जानकारी तक सीधे पहुँच प्रदान की गई।

संगोष्ठी ने विद्यार्थियों और उभरते उद्यमियों को डिजिटल कॉमर्स, उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उभरते अवसरों को समझने के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, विशेषज्ञों, पैनलिस्टों, भाग लेने वाले MSMEs, विद्यार्थियों, सहयोगी संस्थानों तथा आयोजन टीम के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया।

यह पहल MSMEs की बाजार पहुँच, डिजिटल अपनाने, निर्यात तैयारी और हैंडहोल्डिंग सहायता को मजबूत करने के लिए MSME मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भारतीय उद्यमों को “स्थानीय से वैश्विक” बनाने के दृष्टिकोण में योगदान देती है।

छत्तीसगढ़ के जैविक उत्पादों की राष्ट्रीय मंच पर गूंज

No comments Document Thumbnail

बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के विष्णुभोग चावल और केवची के प्राकृतिक शहद ने बटोरी सराहना

स्वसहायता समूहों की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान, जैविक उत्पादों के लिए खुले देश-विदेश के नए बाजार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, महिला स्वसहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने तथा जैविक कृषि को प्रोत्साहन देने के प्रयास लगातार नई सफलताएं प्राप्त कर रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के महिला स्वसहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठन द्वारा तैयार किए जा रहे जैविक उत्पादों ने देश के सबसे बड़े एवं प्रतिष्ठित जैविक उद्योग व्यापार मेला एवं सम्मेलन  ’बायोफैच इंडिया-2026’  में  अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला एवं सम्मेलन में जिले के प्रसिद्ध ’अरपा बिहान विष्णुभोग राइस’  तथा  ’केवची के जंगलों से संग्रहित प्राकृतिक शहद’ का राष्ट्रीय स्टॉल में आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इन उत्पादों ने देश-विदेश से पहुंचे खरीदारों, निर्यातकों, उद्योग विशेषज्ञों एवं जैविक उत्पादों से जुड़े प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह उपलब्धि न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली साबित हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा महिला स्वसहायता समूहों की आर्थिक मजबूती को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी सोच का परिणाम है कि बिहान से जुड़ी महिलाएं आज केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक आयोजनों में अपने उत्पादों का सफल प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि तथा उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।

बायोफैच इंडिया-2026 प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों तथा मोटे अनाज आधारित कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने वाला विश्वस्तरीय मंच है, जहां देश-विदेश के आयातक, निर्यातक, विपणन विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और व्यापारिक संस्थाएं एकत्रित होकर जैविक उत्पादों के व्यापार एवं निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ के उत्पादों की प्रभावी उपस्थिति राज्य के किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए नए व्यापारिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।

जिला मिशन प्रबंधक दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जैविक विष्णुभोग धान एवं प्राकृतिक शहद के साथ-साथ सूरन, कटहल तथा अन्य जैविक सब्जियों के उत्पादन को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उत्पादों की गुणवत्ता, प्राकृतिक उत्पादन पद्धति तथा विशिष्ट स्वाद के कारण राष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला स्वसहायता समूह आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बनने के साथ लखपति दीदी अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्पादों की भागीदारी से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनके लिए बेहतर विपणन के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि राज्य के प्रत्येक जिले की विशिष्ट कृषि एवं वन आधारित उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की आय में सतत वृद्धि हो तथा स्थानीय उत्पादों को उनकी गुणवत्ता के अनुरूप उचित पहचान और मूल्य प्राप्त हो। बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जैविक उत्पादों की प्रभावशाली उपस्थिति इसी दूरदर्शी सोच और ग्रामीण विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

सम्मेलन में राज्य स्तर से राज्य कार्यक्रम प्रबंधक राजन सोनी, जिले से जिला कार्यक्रम प्रबंधक अभिषेक जायसवाल तथा तिपान किसान उत्पादक संगठन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जितेन्द्र खैरवार ने सहभागिता कर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जैविक उत्पादों का प्रभावी प्रदर्शन एवं प्रचार-प्रसार किया। उनके प्रयासों से जिले के उत्पादों को खरीदारों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच व्यापक सराहना प्राप्त हुई।

'कांकेयर' ब्रांड बना ग्रामीण महिलाओं की पहचान,शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग

No comments Document Thumbnail

रायपुर- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह ब्रांड कांकेर की हजारों महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है।

‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का, आम का अचार सहित विभिन्न जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दण्डकारण्य क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में उगाए गए ये उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। ये उत्पाद स्वसहायता समूहों द्वारा पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किए जाते हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत होने के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

वर्तमान में ‘कांकेयर’ उत्पादों का सी-मार्ट और कांकेश्वरी एफपीसी के माध्यम से स्थानीय बाजारों में वितरण और बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। जिला पंचायत परिसर में स्थापित पैकेजिंग इकाई से इनकी थोक खरीदी की जा सकती है। वेबसाइट Kancare.Shop के माध्यम से इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर कर घर बैठे शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं। 

कांकेर जिला पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 'कांकेयर’ ब्रांड के 92 किलोग्राम अरहर दाल , 5.5 किलोग्राम शहद, 5 किलोग्राम छिंद गुड़, 9 किलोग्राम रागी आटा तथा 6 किलोग्राम मक्का आटा की बिक्री हो चुकी है। ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन की नई पहचान बनकर उभर रहा है।

गोंचा पर्व की तैयारियों में तुपकी निर्माण से बढ़ी आजीविका, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी बन रहा माध्यम

No comments Document Thumbnail

महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक संबल की राशि, बस्तर की परंपरा और महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मिल रही नई ताकत

रायपुर- महतारी वंदन योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दे रही, बल्कि उनकी पारंपरिक आजीविकाओं और स्थानीय संस्कृति को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। प्रदेश के बस्तर अंचल में इसका एक प्रेरक उदाहरण देखने को मिला है, जहां बस्तर जिला के जगदलपुर विकासखंड के ग्राम मांझीगुड़ा की चंदा ने योजना से प्राप्त राशि का उपयोग गोंचा पर्व में उपयोग होने वाली पारंपरिक तुपकी के निर्माण में किया है। इससे न केवल उनके परिवार की आय बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।

बस्तर का प्रसिद्ध गोंचा पर्व धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। पर्व की तैयारियों के बीच चंदा अपने पति चिगडू और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर बड़ी संख्या में तुपकी तैयार कर रही हैं। गोंचा पर्व के दौरान इन तुपकियों की विशेष मांग रहती है, जिससे परिवार को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

तुपकी बांस से बनाया जाने वाला बस्तर का पारंपरिक यंत्र है, जिसमें मलाग्नी वृक्ष के बीज (पेंगू) का उपयोग कर बन्दूक जैसी ध्वनि उत्पन्न की जाती है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान श्रद्धालु इसी तुपकी से पारंपरिक सलामी देते हैं। यह परंपरा वर्षों से बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है और आज भी पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

चंदा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से प्रत्येक माह मिलने वाली राशि ने उन्हें आर्थिक आत्मविश्वास दिया। इसी सहायता से उन्होंने तुपकी निर्माण के लिए आवश्यक बांस और अन्य सामग्री खरीदी। अब पूरा परिवार इस कार्य में जुटा है और गोंचा पर्व के दौरान अच्छी आय होने की उम्मीद है।

उनका कहना है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और अपनी पारंपरिक कला एवं कौशल को आजीविका से जोड़ने का अवसर भी है। इससे परिवार की आय बढ़ रही है और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी हो रहा है।

गौरतलब है कि योजना के प्रारंभ से अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को सीधे उनके खातों में उपलब्ध कराई जा चुकी है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

जशक्राफ्ट से छत्तीसगढ़ के बांस हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान

No comments Document Thumbnail

आधुनिक प्रशिक्षण, डिजाइन नवाचार और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से बढ़ेगी आजीविका और रोजगार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा "जशक्राफ्ट" ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विशेष पहल की जा रही है।

विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाना है। वर्तमान में 46 महिलाओं का प्रथम बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों और वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले बांस उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण में फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी सामग्री, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है।

जशपुर और मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध हो।

राज्य सरकार की यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को "लखपति दीदी" की श्रेणी में शामिल करना है।



आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता देश, प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में गिनाईं उपलब्धियां

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, विज्ञान और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, योग, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में निर्मित C-295 विमान की पहली सफल उड़ान देश के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही DRDO द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष दुनिया भर के 2,500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत ने 114 पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय उत्पाद अपनाने की अपील की। उन्होंने आगामी गणेश उत्सव के अवसर पर मिट्टी से बनी स्थानीय कारीगरों की गणेश प्रतिमाएं खरीदने तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों से बचने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए लोगों से इन योजनाओं का लाभ उठाने और अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की अपील की।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण, 'कैच द रेन' अभियान और जनभागीदारी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सभी नागरिकों से इसमें सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना ने किया ‘TARA’ हथियार का सफल पहला परीक्षण

No comments Document Thumbnail

Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Air Force (IAF) ने 7 मई 2026 को ओडिशा तट के पास Tactical Advanced Range Augmentation (TARA) हथियार का सफल पहला उड़ान परीक्षण किया।

TARA भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है, जो बिना गाइडेड वारहेड्स को अत्याधुनिक प्रिसीजन गाइडेड हथियारों में बदलने की क्षमता रखता है। यह सिस्टम कम लागत में दुश्मन के जमीनी ठिकानों को अधिक सटीकता और ताकत के साथ निशाना बनाने में सक्षम है।

इस अत्याधुनिक प्रणाली को Research Centre Imarat (RCI), हैदराबाद और DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया है। इसमें आधुनिक और कम लागत वाली तकनीकों का उपयोग किया गया है।

TARA परियोजना का निर्माण Development cum Production Partners (DcPP) और कई भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया है, जिन्होंने इसके उत्पादन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO, भारतीय वायुसेना और सभी साझेदार उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण से जुड़ी पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।


डीआरडीओ ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल प्रदर्शन किया

No comments Document Thumbnail

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 03 फरवरी, 2026 को लगभग 10:45 बजे ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास यह अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध है। यह तकनीक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के विकास में सक्षम बनाती है, जिससे भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर महत्वपूर्ण सामरिक बढ़त प्राप्त होगी।

इस परीक्षण के दौरान सभी उप-प्रणालियों ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन किया। ग्राउंड बूस्टर मोटर द्वारा प्रणाली को वांछित मैक संख्या तक पहुँचाने के बाद नोज़ल-रहित बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर तथा फ्यूल फ्लो कंट्रोलर ने सफलतापूर्वक कार्य किया। प्रणाली के प्रदर्शन की पुष्टि उड़ान के दौरान प्राप्त डेटा के माध्यम से की गई, जिसे बंगाल की खाड़ी के तट पर चांदीपुर ITR द्वारा तैनात अनेक ट्रैकिंग उपकरणों ने रिकॉर्ड किया।

इस प्रक्षेपण की निगरानी डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा की गई, जिनमें डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL), हाई एनर्जी मटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL), रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) तथा ITR, चांदीपुर शामिल हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने SFDR तकनीक के सफल प्रदर्शन पर डीआरडीओ और उद्योग जगत को बधाई दी।
वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण में शामिल सभी टीमों को शुभकामनाएँ दीं।


IS 19412:2025 – अगरबत्ती (Incense Sticks) के लिए नया भारतीय मानक जारी, उपभोक्ता सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित

No comments Document Thumbnail

केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, प्रत्‍भात जोशी ने IS 19412:2025 – अगरबत्ती (Incense Sticks) — विनिर्देश, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा विकसित, जारी किया। यह मानक राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर भारत मंडपम, नई दिल्ली में जारी किया गया।

नए मानक में कुछ कीटाणुनाशक रसायनों और सिंथेटिक सुगंधित पदार्थों के अगरबत्तियों में उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो मानव स्वास्थ्य, इनडोर वायु गुणवत्ता और पर्यावरण के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। IS 19412:2025 में ऐसे निषिद्ध पदार्थों की सूची दी गई है, जिनमें कीटाणुनाशक रसायन जैसे एलेथ्रिन, पर्मेथ्रिन, सायपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल शामिल हैं, साथ ही सिंथेटिक सुगंधित इंटरमीडिएट्स जैसे बेंज़ाइल साइनाइड, एथिल एक्रिलेट और डाइफेनिलामाइन। ये कई पदार्थ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिबंधित या सीमित हैं।

उपभोक्ता सुरक्षा, इनडोर वायु गुणवत्ता, पर्यावरणीय स्थिरता और नियामक अनुपालन को ध्यान में रखते हुए, साथ ही वैश्विक स्तर पर कुछ सुगंधित रसायनों और रसायनों पर प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए, अगरबत्ती के लिए समर्पित भारतीय मानक की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। यह मानक अगरबत्तियों को मशीन-निर्मित, हाथ-निर्मित और पारंपरिक मसाला अगरबत्तियों में वर्गीकृत करता है और कच्चे माल, जलने की गुणवत्ता, सुगंध प्रदर्शन और रासायनिक पैरामीटरों के लिए आवश्यकताएँ निर्धारित करता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित उत्पाद और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

इस मानक के अनुरूप उत्पाद BIS स्टैण्डर्ड मार्क प्राप्त करने के पात्र होंगे, जिससे उपभोक्ता आत्मविश्वास के साथ सूचित विकल्प चुन सकेंगे। IS 19412:2025 के अधिसूचना से उपभोक्ता विश्वास बढ़ाने, नैतिक और टिकाऊ उत्पादन प्रथाओं को बढ़ावा देने, पारंपरिक आजीविका की रक्षा करने और भारतीय अगरबत्ती उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ाने की उम्मीद है।

इस मानक का विकास Fragrance and Flavour Sectional Committee (PCD 18) द्वारा व्यापक हितधारक परामर्श के माध्यम से किया गया। CSIR–Central Institute of Medicinal and Aromatic Plants (CIMAP), CSIR–Indian Institute of Toxicology Research (IITR), CSIR–Central Food Technological Research Institute (CFTRI), Fragrance and Flavour Development Centre (FFDC), कन्नौज, और All India Agarbatti Manufacturers Association के विशेषज्ञों ने इसके निर्माण में योगदान दिया।

भारत अगरबत्तियों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, जिसमें उद्योग का वार्षिक अनुमानित आकार लगभग ₹8,000 करोड़ है और 150 से अधिक देशों में लगभग ₹1,200 करोड़ का निर्यात होता है। यह क्षेत्र कारीगरों, MSMEs और माइक्रो-उद्यमियों का बड़ा इकोसिस्टम सहारा देता है, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, और महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण रोजगार के अवसर प्रदान करता है।

अगरबत्तियां, जो भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं का अभिन्न हिस्सा हैं, घरों, पूजा स्थलों, ध्यान केंद्रों और वेलनेस स्पेस में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। योग, ध्यान, अरोमाथेरेपी और समग्र स्वास्थ्य में वैश्विक रुचि बढ़ने के साथ, अगरबत्ती उत्पादों की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी बढ़ गई है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने AEPC के वार्षिक पुरस्कार समारोह को किया संबोधित

No comments Document Thumbnail

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC) के वार्षिक पुरस्कार समारोह में भाग लिया और भारत के परिधान निर्यात क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी।

इस अवसर पर अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि परिधान और वस्त्र क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है और अप्रत्यक्ष रूप से 10 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2 प्रतिशत और विनिर्माण सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 11 प्रतिशत का योगदान देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने PM मित्र पार्क और समर्थ कौशल विकास कार्यक्रम जैसी प्रगतिशील नीतियों और योजनाओं के माध्यम से वस्त्र एवं परिधान उद्योग को सशक्त और बहुआयामी समर्थन प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र को वैश्विक शक्ति बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकारी पहलें तभी अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करती हैं, जब उद्योग नवाचार और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ता है।

वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में भारतीय परिधान निर्यातकों द्वारा दिखाए गए लचीलापन और प्रगति की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार इस क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार संवाद कर रही है, जिसमें मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताएं भी शामिल हैं।

उपराष्ट्रपति ने उद्योग से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों की संभावनाओं को तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने, निर्यात विविधीकरण, आयात निर्भरता कम करने, नवाचार और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने तथा सतत निर्यात को अपनाने की भी अपील की।

उन्होंने कहा कि वस्त्र क्षेत्र श्रम-प्रधान है और कृषि के बाद देश में रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। इस संदर्भ में उन्होंने श्रमिक कल्याण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के निर्यात दोगुने होने की संभावना है, जिससे बड़े पैमाने पर नए रोजगार सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि परिधान क्षेत्र विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

वस्त्र उद्योग से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे तिरुपुर से आते हैं, जो भारत का प्रमुख होजरी और निटवियर केंद्र है, और उन्होंने इस क्षेत्र के विकास को करीब से देखा है। उन्होंने संसद सदस्य के रूप में तथा वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की वस्त्र उपसमिति के सह-अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभवों को भी साझा किया।

उन्होंने सरकार और उद्योग के बीच सेतु के रूप में AEPC की भूमिका की सराहना की तथा परिषद की कॉफी टेबल बुक “Threads of Time: Story of India’s Textiles” का विमोचन भी किया।

इस अवसर पर दिल्ली एनसीटी सरकार के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, AEPC के चेयरमैन सुधीर सेखड़ी, उपाध्यक्ष डॉ. ए. शक्तिवेल सहित वस्त्र एवं परिधान उद्योग के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात में नवंबर 2025 में 9.4% की वृद्धि, हैंडीक्राफ्ट्स में सबसे अधिक उछाल

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत के वस्त्र और परिधान, जिसमें हैंडीक्राफ्ट्स भी शामिल हैं, का निर्यात नवंबर 2025 में 2,855.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो नवंबर 2024 (2,601.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की तुलना में 9.4% की वृद्धि दर्शाता है।

मुख्य क्षेत्रों में वृद्धि:

  • रेडीमेड गारमेंट्स (RMG): 11.3%

  • मानव निर्मित रेशा/कपड़े/मेड-अप्स आदि: 15.7%

  • कॉटन यार्न/कपड़े/मेड-अप्स और हथकरघा उत्पाद: 4.1%

  • हैंडीक्राफ्ट्स (हाथ से बने कालीन को छोड़कर): 29.7%

साल 2025 के लिए, जनवरी–नवंबर 2025 के दौरान वस्त्र और परिधान (हैंडीक्राफ्ट्स को छोड़कर) का कुल निर्यात 32,560.0 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (32,474.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की तुलना में 0.26% की वृद्धि दर्शाता है।

विशेष रूप से, जनवरी–नवंबर 2025 में रेडीमेड गारमेंट्स का निर्यात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.6% बढ़ा, जबकि जूट उत्पादों में 6.1% की वृद्धि हुई।

केंद्र ने कमलादेवी चट्टोपाध्याय क्राफ्ट लेक्चर सीरीज का उद्घाटन किया

No comments Document Thumbnail

वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हैंडिक्राफ्ट) कार्यालय ने आज अंतर्राष्ट्रीय क्राफ्ट कॉम्प्लेक्स (द कुंज), नई दिल्ली में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (EPCH) के सहयोग से कमलादेवी चट्टोपाध्याय क्राफ्ट लेक्चर सीरीज के पहले संस्करण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पद्म भूषण से सम्मानित श्री राजीव सेठी ने "हैंडमेड फॉर जन-नेक्स्ट" विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। इस कार्यक्रम में विकास आयुक्त (हैंडिक्राफ्ट) अमृत राज, विकास आयुक्त (हैंडलूम) डॉ. एम. बीना, पूर्व अध्यक्ष EPCH श्री रवी के पास्सी, अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक EPCH राजेश रावत सहित 100 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित थे, जिनमें प्रमुख डिजाइनर, विद्वान, शिल्प गुरु और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शामिल थे।

यह व्याख्यान श्रृंखला भारत के हस्तकला और हथकरघा परंपराओं को पुनर्जीवित करने में अग्रणी भूमिका निभाने वाली कमलादेवी चट्टोपाध्याय की दूरदर्शी विरासत को समर्पित है। उनका जीवन पर्यंत कार्य कारीगरों को सशक्त बनाने, देशी शिल्प को बढ़ावा देने और भारतीय हस्तकला को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में सहायक रहा।

राजीव सेठी ने उद्घाटन व्याख्यान में यह सवाल उठाया कि आज के युग में हाथ से बनने वाली चीज़ों की प्रासंगिकता क्या है और इसकी उम्र-पुरानी ताकतें आधुनिक चुनौतियों जैसे पलायन और सांस्कृतिक समानिकीकरण का सामना कैसे कर सकती हैं। उन्होंने हाथ की सूक्ष्मता, कौशल और संवेदनशीलता को रचनात्मक शक्ति बताया, जिसे कोई मशीन पूरी तरह से दोहरा नहीं सकती। उन्होंने यह भी बताया कि हाथ से बनने वाले शिल्प में कम यांत्रिकीकरण, स्थानीय आजीविका और महिलाओं एवं हाशिए पर रहने वाले समुदायों के सशक्तिकरण के माध्यम से स्थिरता जुड़ी होती है।

इस अवसर पर अमृत राज ने कहा कि यह व्याख्यान श्रृंखला याद दिलाती है कि भारत के लाखों कारीगर समावेशी, सतत विकास और वैश्विक हस्तकला उत्कृष्टता में हमारी दृष्टि के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि यह श्रृंखला कमलादेवी जी की उस दृष्टि का सम्मान है, जिसमें शिल्प को शिक्षा, आजीविका और राष्ट्रनिर्माण के साथ जोड़ा गया।

विकास आयुक्त (हैंडिक्राफ्ट) कार्यालय भारत सरकार की केंद्रीय एजेंसी है, जो कारीगर और शिल्प आधारित गतिविधियों के विकास, विपणन और निर्यात के लिए जिम्मेदार है। यह शिल्प रूपों और कौशल के संवर्धन में भी सहायक है।

भारत में NavIC का विस्तार: अंतरिक्ष विभाग ने बढ़ाया उपयोग और अपनाने की रफ्तार

No comments Document Thumbnail

अंतरिक्ष विभाग (DoS) विभिन्न क्षेत्रों में NavIC के उपयोग को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस दिशा में, विभाग ने कई गतिविधियाँ शुरू की हैं, जिनमें पायलट परियोजनाएँ, भारतीय उद्योग को तकनीक हस्तांतरण, तकनीकी सहायता, परीक्षण सहायता, और उपयोग कार्यक्रम शामिल हैं।

DoS ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उद्योग मानकों में NavIC को शामिल करने के लिए भी प्रयास किए हैं, ताकि उत्पादों और समाधानों में NavIC को आसानी से और प्रभावी रूप से अपनाया जा सके। वर्तमान में विभिन्न कंपनियों के 60 से अधिक स्मार्टफोन NavIC को समर्थन प्रदान करते हैं।

NavIC आधारित पायलट परियोजनाएँ

  1. रीयल-टाइम ट्रेन ट्रैकिंग
    – 10,000 से अधिक ट्रेनों में NavIC आधारित ट्रैकिंग डिवाइस लगाए गए हैं।

  2. मछली पकड़ने वाले जहाजों (Fishing Vessels) की ट्रैकिंग
    – 30,000+ नौकाएँ NavIC सक्षम ट्रांसपोंडर्स से लैस हैं।

  3. सार्वजनिक और वाणिज्यिक वाहनों की ट्रैकिंग
    – 140 से अधिक मॉडल प्रमाणित किए गए हैं और
    – 15 लाख से अधिक वाहनों में NavIC आधारित उपकरण लगाए गए हैं।

  4. NavIC समय प्रसारण द्वारा भारत में सामान्य IST प्रसारित करने के लिए सेकेंडरी टाइमस्केल स्थापित करना।

अनिवार्यता की स्थिति

सरकार ने अभी तक NavIC को अनिवार्य नहीं किया है। इसे अनिवार्य बनाने की संभावना पर चर्चा जारी है।

NavIC का उपयोग

NavIC के नागरिक संकेत (civilian signals) सभी के लिए खुले हैं। NavIC कवरेज क्षेत्र में कोई भी उपयोगकर्ता इसका उपयोग स्थिति निर्धारण (positioning), नेविगेशन और समय निर्धारण (timing) के लिए कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय GNSS सेवा प्रदाता, NavIC के साथ इंटरऑपरेबिलिटी और सिग्नल समन्वय को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से सहयोग करते रहते हैं।


IITF 2025 में एफसीआई पैविलियन ने भारत की खाद्य सुरक्षा, किसानों के सशक्तिकरण और आधुनिकीकरण का प्रदर्शन किया

No comments Document Thumbnail

भारत सरकार के भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2025 में हॉल नंबर 6, भारत मंडपम में एक विशेष पवेलियन स्थापित किया है। यह मेला 14 से 27 नवंबर, 2025 तक ITPO द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस पवेलियन के माध्यम से देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली की मजबूती, आधुनिकरण और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया गया है।

पवेलियन में “किसानों का सम्मान, भारतीय खाद्य निगम का अभिमान” और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को दर्शाया गया है।

पवेलियन में भारत में अन्न भंडारण की यात्रा को प्रदर्शित किया गया है, पारंपरिक भंडारण पद्धतियों से लेकर वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से उन्नत भंडारण समाधानों जैसे सिलो (SILOs) तक। यह प्रदर्शनी FCI के योगदान और उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह राष्ट्रीय अन्न भंडारण की पर्याप्तता सुनिश्चित करने के साथ-साथ गुणवत्ता-प्रधान, समावेशी, पारदर्शी और सतत खाद्य प्रबंधन प्रणाली की दिशा में काम कर रहा है। यह पहल विकसित भारत @ 2047 के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को भी सुदृढ़ करती है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री,प्रल्हाद जोशी ने आज (18.11.2025) FCI पवेलियन का दौरा किया और खुले बाजार बिक्री योजना (OMS – छोटे/थोक) के तहत वस्तु (गेहूँ/चावल) उपलब्धता और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए FCI की पहलों की सराहना की। उन्होंने FCI की पारदर्शिता, कुशल खाद्य वितरण और राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी देखा। मंत्री के दौरे के दौरान संजीव चोपड़ा, सचिव (खाद्य), अशुतोष अग्निहोत्री, चेयरमैन एवं MD (FCI), अजीत कुमार सिन्हा, कार्यकारी निदेशक (उत्तरी क्षेत्र) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

FCI पवेलियन में आधुनिक गोदामों, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता के लिए डिजिटल पहलों, सततता उपायों और किसानों-केंद्रित समर्थन प्रणाली को दर्शाने वाली जानकारीपूर्ण प्रदर्शनी, लाइव डेमोंस्ट्रेशन, इंटरैक्टिव पैनल और ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।


विशेष पहल के रूप में, पवेलियन में छह राज्यों – ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब और हरियाणा – से प्राप्त FCI चावल की खुदरा बिक्री भी की जा रही है, जो पहली बार एक मंच पर उपलब्ध हैं। कीमतें क्रमशः ₹28.90 प्रति किग्रा और ₹30.90 प्रति किग्रा रखी गई हैं। पिछले 4 दिनों में लगभग 1000 किग्रा चावल खरीदा जा चुका है।

यह पहल FCI की उपभोक्ताओं को सस्ती और गुणवत्ता वाली अन्न सामग्री उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता और राज्य-स्तरीय विविधता तथा एकता को बढ़ावा देने का प्रतीक है। युवाओं, छात्रों, महिलाओं और आम दर्शकों से आग्रह किया गया है कि वे FCI पवेलियन का दौरा करें और भारत के खाद्य क्षेत्र में हुई प्रगति का प्रत्यक्ष अनुभव लें।

IITF 'मेड इन इंडिया' उत्पादों जैसे कि अन्न, हथकरघा और हस्तशिल्प, तथा विभिन्न स्तरों की नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच बना हुआ है, जो माननीय प्रधानमंत्री की ‘वोकल फॉर लोकल’ की दृष्टि से गहराई से जुड़ा है।

इस पवेलियन के माध्यम से FCI देश की खाद्य सुरक्षा संरचना को मजबूत करने, किसानों को सशक्त बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और प्रत्येक घर तक गुणवत्तापूर्ण अन्न सामग्री पहुँचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रहा है, जिससे एक आत्मनिर्भर और समावेशी विकसित भारत का निर्माण संभव हो।


भारतीय नौसेना के लिए ISRO आज प्रक्षेपित करेगा सबसे उन्नत संचार उपग्रह GSAT-7R (CMS-03)

No comments Document Thumbnail

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज, 02 नवंबर 2025 को भारतीय नौसेना के लिए संचार उपग्रह GSAT-7R (CMS-03) का प्रक्षेपण करने जा रहा है। यह अब तक भारतीय नौसेना के लिए सबसे उन्नत संचार उपग्रह होगा। यह उपग्रह नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार और समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करेगा।

स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया यह उपग्रह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया जाएगा। लगभग 4,400 किलोग्राम वज़न वाला यह भारत का अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है। इसमें कई अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकी घटक शामिल हैं, जो विशेष रूप से भारतीय नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित किए गए हैं।

GSAT-7R भारतीय महासागर क्षेत्र में मजबूत दूरसंचार कवरेज प्रदान करेगा। इसके पेलोड में ऐसे ट्रांसपोंडर शामिल हैं जो कई संचार बैंड्स पर वॉयस, डेटा और वीडियो लिंक का समर्थन करने में सक्षम हैं। यह उपग्रह उच्च क्षमता वाली बैंडविड्थ के साथ कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा, जिससे नौसेना के जहाजों, विमानों, पनडुब्बियों और समुद्री संचालन केंद्रों के बीच निर्बाध और सुरक्षित संचार स्थापित हो सकेगा।

जटिल सुरक्षा चुनौतियों के इस दौर में, GSAT-7R भारत की आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta) के माध्यम से उन्नत तकनीक का उपयोग कर राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा के प्रति भारतीय नौसेना के संकल्प को दर्शाता है।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा: ECMS के तहत ₹5,532 करोड़ की 7 परियोजनाओं को मंजूरी

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत सात परियोजनाओं की पहली किस्त को मंजूरी देने की घोषणा की। अब भारत में मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), एचडीआई PCB, कैमरा मॉड्यूल, कॉपर क्लैड लैमिनेट और पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म्स का निर्माण किया जाएगा।

यह कदम भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर है — तैयार उत्पादों से आगे बढ़ते हुए अब देश मॉड्यूल, घटक, कच्चे माल और मशीनरी निर्माण में कदम रख रहा है।

योजना को मिला अभूतपूर्व प्रतिसाद

इस योजना को देशी और विदेशी दोनों कंपनियों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। अब तक 249 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कुल ₹1.15 लाख करोड़ निवेश, ₹10.34 लाख करोड़ उत्पादन और 1.42 लाख रोजगार सृजन की संभावना है। यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव है।

आज जिन सात परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, उनकी कुल लागत ₹5,532 करोड़ है। इन परियोजनाओं से ₹36,559 करोड़ मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक घटकों का उत्पादन और 5,100 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे।

स्वीकृत इकाइयां तमिलनाडु (5), आंध्र प्रदेश (1) और मध्य प्रदेश (1) में स्थापित होंगी — जिससे हाई-टेक विनिर्माण का विस्तार महानगरों से बाहर भी होगा और क्षेत्रीय संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

घरेलू मांग की पूर्ति और निर्यात की संभावनाएं

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई इकाइयों के माध्यम से भारत की 20% घरेलू PCB मांग और 15% कैमरा मॉड्यूल सब-असेंबली की मांग पूरी होगी।
इसके साथ ही, कॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) की पूरी घरेलू मांग अब देश में ही पूरी होगी और अतिरिक्त 60% उत्पादन का निर्यात किया जाएगा।

स्वीकृत उत्पादों में शामिल

  • HDI एवं मल्टी-लेयर PCB – हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मूल सर्किट प्रणाली

  • कैमरा मॉड्यूल – स्मार्टफोन, ड्रोन, लैपटॉप, चिकित्सा उपकरण, रोबोट, और ऑटोमोबाइल सिस्टम में उपयोग

  • कॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) – मल्टी-लेयर PCB निर्माण का आधारभूत घटक

  • पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म्स – कैपेसिटर निर्माण में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम, ईवी और औद्योगिक उपकरणों में इस्तेमाल होती है

रणनीतिक उपलब्धियां और औद्योगिक प्रभाव

  • भारत में पहली बार कॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) निर्माण संयंत्र स्थापित होगा।

  • परियोजनाएं आयात निर्भरता कम करेंगी, जिससे घरेलू बाजार में उत्पाद सस्ते होंगे।

  • उच्च कौशल वाले रोजगार और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा मिलेगा।

  • रक्षा, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) तैयार होगी।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

भारत अब “डिवाइस से लेकर डिज़ाइन”, “चिप्स से लेकर कंपोनेंट्स” और “मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इनोवेशन” तक एक पूर्ण मूल्य श्रृंखला (Value Chain) तैयार कर रहा है।
यह योजना PLI स्कीम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) को पूरक बनाती है — जिससे भारत एक सच्चे “प्रोडक्ट नेशन” के रूप में उभर रहा है।


राजनाथ सिंह ने SIDM वार्षिक सत्र में कहा — ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मेड-इन-इंडिया उपकरणों के प्रभावी उपयोग ने बढ़ाई भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा, निजी क्षेत्र को नवाचार और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर

No comments Document Thumbnail

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा — “ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा मेड-इन-इंडिया उपकरणों के प्रभावी उपयोग ने भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूत किया”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा ‘मेड-इन-इंडिया’ उपकरणों के प्रभावी उपयोग ने भारत की प्रतिष्ठा को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ किया है। उन्होंने घरेलू उद्योग, विशेष रूप से निजी क्षेत्र से, आत्मनिर्भरता की दिशा में नवाचार, अनुसंधान एवं विकास (R&D), तकनीक आधारित विनिर्माण, उप-प्रणालियों और घटकों के उत्पादन तथा आपूर्ति व रखरखाव श्रृंखलाओं में प्रभुत्व स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

वे 27 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के वार्षिक सत्र को संबोधित कर रहे थे, जिसका विषय था — “Defence Self-Reliance: Strengthening National Security through Indigenous Industry”।

रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाश मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस, आकाशतीर एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम और अन्य स्वदेशी प्लेटफॉर्म की ताकत देखी। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता का श्रेय भारतीय सशस्त्र बलों के साथ-साथ उन “उद्योग योद्धाओं” को भी जाता है, जिन्होंने नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण के मोर्चे पर काम किया।

उन्होंने कहा, “हालांकि हमने दृढ़ संकल्प के साथ दृढ़ जवाब दिया है और हमारी सेनाएँ देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी हमें आत्ममंथन करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर हमारे लिए एक केस स्टडी होना चाहिए, जिससे हम भविष्य की दिशा तय करें। यह घटना हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि सीमाओं पर कभी भी, कहीं भी, कुछ भी हो सकता है — हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए और यह तैयारी हमारे अपने संसाधनों पर आधारित होनी चाहिए।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज के वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में ‘स्वदेशीकरण’ ही रक्षा क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा कि “स्थापित विश्व व्यवस्था कमजोर हो रही है और कई क्षेत्रों में संघर्ष बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत को अपनी सुरक्षा और रणनीति को पुनर्परिभाषित करना आवश्यक है।”

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने और घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समान अवसरों वाला माहौल बनाया है। “हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि भारत में केवल असेंबली न हो, बल्कि वास्तविक विनिर्माण आधार तैयार किया जाए — जो ‘Made in India, Made for the World’ की भावना को साकार करे,” उन्होंने कहा।

रक्षा मंत्री ने बताया कि 2014 से पहले भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर था, लेकिन आज वह स्वयं रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहा है।
उन्होंने बताया — “2014 में रक्षा उत्पादन ₹46,000 करोड़ के आसपास था, जो अब बढ़कर ₹1.51 लाख करोड़ हो गया है, जिसमें ₹33,000 करोड़ निजी क्षेत्र का योगदान है। रक्षा निर्यात जो 10 वर्ष पहले ₹1,000 करोड़ से भी कम था, अब लगभग ₹24,000 करोड़ तक पहुँच गया है और मार्च 2026 तक ₹30,000 करोड़ तक पहुँचने का लक्ष्य है।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल 2025 लॉन्च किया है और डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 में संशोधन पर काम चल रहा है। उन्होंने निजी क्षेत्र से आग्रह किया कि वे रक्षा निर्माण में अपने योगदान को वर्तमान 25% से बढ़ाकर अगले तीन वर्षों में कम से कम 50% तक करें।

रक्षा मंत्री ने कहा कि उद्योग को घरेलू स्तर पर उप-प्रणालियों और घटकों के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए, ताकि विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम हो सके। उन्होंने कहा — “जब हम विदेशी प्लेटफॉर्म खरीदते हैं, तो उनके रखरखाव और पुर्जों की आपूर्ति पर भारी खर्च होता है। यदि हम इनके घटकों का निर्माण देश में ही करें, तो हमारी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि “हमारा उद्देश्य सिर्फ भारत में असेंबली करना नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण विकसित करना होना चाहिए।”

रक्षा मंत्री ने नवाचार और अनुसंधान पर जोर देते हुए कहा — “कोई भी देश नवाचार के बिना आगे नहीं बढ़ सकता। SIDM के दस वर्ष पूरे होने पर, उद्योग को चुनौती लेनी चाहिए कि वह बड़े पैमाने पर तकनीकी उत्पाद विकसित करे और सरकार को प्रस्तुत करे। सरकार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, SIDM अध्यक्ष राजिंदर सिंह भाटिया, महानिदेशक रमेश के, पूर्व अध्यक्ष एस.पी. शुक्ला, सशस्त्र बलों, रक्षा मंत्रालय, उद्योग और स्टार्टअप जगत के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जर्मनी में पीयूष गोयल ने लक्ज़मबर्ग के उपप्रधानमंत्री और जर्मनी की प्रमुख कंपनियों के सीईओ से की महत्वपूर्ण मुलाकातें

No comments Document Thumbnail

23 अक्टूबर 2025 को जर्मनी के संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्रालय तथा संघीय चांसलरी में उच्च स्तरीय बैठकों के बाद, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लक्ज़मबर्ग के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश और वाणिज्य मंत्री जेवियर बेट्टेल से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आर्थिक संबंधों की प्रगति की समीक्षा की और द्विपक्षीय व्यापार और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के और अवसरों का पता लगाया। उन्होंने लक्ज़मबर्ग के आगामी भारत राज्य दौरे के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी चर्चा की।

पीयूष गोयल ने जर्मनी की प्रमुख कंपनियों के सीईओ से व्यक्तिगत बैठकों में भी भाग लिया। उन्होंने निम्नलिखित सीईओ से मुलाकात की:

  • जोचेन हानेबेक, सीईओ, Infineon Technologies AG

  • क्लॉस रोसेनफेल्ड, सीईओ, Schaeffler Group

  • माइकल मासुर, सीईओ, Renk Vehicle Mobility

  • मार्टिन हरेनकनेच्ट, सीईओ, Herrenknecht AG

  • टोबियास बिशॉफ-निएम्ज़, बोर्ड सदस्य, Enertrag

  • ओला कैलेनियस, सीईओ, Mercedes-Benz

बैठकों में भारत और जर्मनी की कंपनियों के बीच सहयोग की संभावनाओं और समन्वय पर चर्चा की गई, विशेषकर रक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियाँ और मोबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में। व्यापारिक नेताओं ने भारत में व्यवसाय करने के प्रति अपने सकारात्मक दृष्टिकोण और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के इरादे को दोहराया।

आज बाद में,पीयूष गोयल बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में वैश्विक व्यापार पर उच्च स्तरीय पैनल में भाग लेंगे और जर्मनी की व्यवसाय और उद्योग संघों के नेताओं के साथ अपने संवाद को जारी रखेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने INS विक्रांत पर सशस्त्र बलों के साथ मनाई दिवाली, कहा – विक्रांत है आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक

No comments Document Thumbnail

कोच्चि-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिवाली के अवसर पर भारतीय नौसेना के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर सशस्त्र बलों के जवानों के साथ उत्सव मनाया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “आज का दिन, यह क्षण और यह दृश्य – तीनों ही असाधारण हैं। एक ओर सागर की विशालता है, तो दूसरी ओर मां भारती के वीर सपूतों की असीम शक्ति।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्र पर चमकती सूर्य की किरणें उन दीपों की तरह हैं, जो देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों द्वारा जलाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस बार की दिवाली उनके लिए खास है, क्योंकि वह इसे भारतीय नौसेना के वीर जवानों के बीच मना रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने याद किया कि जब उन्होंने INS विक्रांत पर एक रात बिताई थी, तो वह अनुभव शब्दों में बयान करना कठिन है। उन्होंने कहा कि “समुद्र के बीच गहराई में बिता वह रात्रि और उगते सूरज का नजारा इस दिवाली को अविस्मरणीय बना गया।”

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को INS विक्रांत से ही 140 करोड़ भारतीयों के लिए दिवाली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जब विक्रांत राष्ट्र को समर्पित किया गया था, तब उन्होंने कहा था – “विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि विक्रांत आज आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने बताया कि विक्रांत का नाम मात्र सुनकर दुश्मनों की नींद उड़ जाती है।

भारतीय रक्षा उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने बताया कि अब हजारों रक्षा उपकरणों का आयात बंद कर दिया गया है और अधिकांश जरूरतें देश में ही पूरी की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक हो गया है — जो तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है। 2014 के बाद से अब तक भारतीय शिपयार्ड्स ने नौसेना को 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां सौंप दी हैं। वर्तमान में औसतन हर 40वें दिन नौसेना में एक नया स्वदेशी पोत या पनडुब्बी शामिल हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रहमोस और आकाश जैसी मिसाइलों ने “ऑपरेशन सिंदूर” में अपनी ताकत साबित की है, और अब कई देश इन्हें खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य विश्व के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल होना है।

भारतीय नौसेना: वैश्विक स्थिरता की प्रहरी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की परंपरा सदैव रही है — “ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय” — अर्थात हमारी शक्ति और संपन्नता मानवता की सेवा और रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि विश्व के 66 प्रतिशत तेल परिवहन और 50 प्रतिशत कंटेनर व्यापार भारतीय महासागर से गुजरता है, और इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारतीय नौसेना सुनिश्चित करती है।

उन्होंने बताया कि नौसेना न केवल भारत के द्वीपों की सुरक्षा करती है, बल्कि ‘मिशन आधारित तैनाती’, ‘एंटी-पायरेसी पेट्रोलिंग’ और मानवीय सहायता अभियानों के जरिए वैश्विक स्थिरता में योगदान दे रही है।

प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि गणतंत्र दिवस पर सभी भारतीय द्वीपों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का संकल्प नौसेना ने पूरा किया।

मानवता के लिए सदैव तत्पर भारत

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से प्रगति कर रहा है और ‘महासागर मेरीटाइम विजन’ के तहत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ विकास साझेदारी को मजबूत कर रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में मालदीव के जल संकट के दौरान ‘ऑपरेशन नीर’, 2017 में श्रीलंका की बाढ़, 2018 में इंडोनेशिया की सुनामी, और म्यांमार, मोज़ाम्बिक व मेडागास्कर में आपदाओं के समय भारत ने सहायता पहुंचाई।

उन्होंने कहा कि यमन से लेकर सूडान तक, संकट के समय भारतीय सशस्त्र बलों ने न केवल भारतीय नागरिकों बल्कि हजारों विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला है।

माओवाद से मुक्ति और नई रोशनी

प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों के पराक्रम के कारण आज भारत ने एक बड़ी सफलता हासिल की है — माओवादी आतंकवाद का लगभग अंत। 2014 से पहले जहां 125 जिले माओवादी हिंसा से प्रभावित थे, आज यह संख्या घटकर केवल 11 रह गई है।

उन्होंने कहा कि “सैकड़ों जिले अब भय की छाया से मुक्त होकर पहली बार स्वतंत्र रूप से दिवाली मना रहे हैं।” पहले जहां सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और मोबाइल टावरों का निर्माण असंभव था, अब वहां हाईवे और उद्योग खड़े हो रहे हैं।

भारत नई ऊँचाइयों की ओर

प्रधानमंत्री ने कहा कि “भारत आज अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है — ज़मीन से अंतरिक्ष तक, असंभव को संभव कर रहा है।” उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल इस राष्ट्रनिर्माण के महान कार्य के आधारस्तंभ हैं।

समापन में प्रधानमंत्री ने कहा,

“हमारे सैनिक जिस पर्वत पर डटे हैं, वह भारत की विजय का प्रतीक है; जिस सागर की लहरें नीचे उमड़ती हैं, वह भारत की गर्जना हैं। इन सबके बीच एक ही स्वर गूंजता है — भारत माता की जय!”


DBT–उत्तर प्रदेश साझेदारी से भारत का फार्मा और बायोटेक क्षेत्र तेजी से बढ़ेगा, निर्यात 30 बिलियन डॉलर के पार

No comments Document Thumbnail

भारत के फार्मा निर्यात की वर्तमान मूल्य लगभग 27.8 बिलियन डॉलर है और यह वर्ष के अंत तक 30 बिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है, यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कर्मियों, लोक शिकायतों और पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां दी।

मंत्री ने यह भी बताया कि भारत का घरेलू फार्मा बाजार वर्तमान में 60 बिलियन डॉलर का है, जिसे 2030 तक दोगुना होकर 130 बिलियन डॉलर होने की उम्मीद है।

डॉ. जितेंद्र सिंह यह बात भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक आधिकारिक एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर समारोह के बाद कह रहे थे। यह समझौता, DBT की एजेंसी BIRAC और उत्तर प्रदेश प्रोमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) के माध्यम से किया गया, और इसका उद्देश्य फार्मा, बायोटेक और MedTech सेक्टर में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को तेज करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में वर्तमान में लगभग 800 मेडिकल डिवाइस निर्माता हैं और MedTech सेक्टर की वार्षिक वृद्धि 15 से 20% है।

अधिकारियों ने बताया कि इस सहयोग का ध्यान अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने, स्टार्टअप्स के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने, कौशल विकास और ज्ञान साझा करने, SMEs और MSMEs के साथ उद्योग संबंध मजबूत करने और निवेश को प्रोत्साहित करने पर होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का बायोटेक इकोसिस्टम 2014 में लगभग 50 स्टार्टअप्स से बढ़कर आज 11,000 से अधिक स्टार्टअप्स तक पहुँच गया है, जो देश के आर्थिक और स्वास्थ्य लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की क्षमता दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब वैश्विक स्तर पर वैक्सीन का आपूर्तिकर्ता माना जाता है, क्योंकि यहां दुनिया की 60 प्रतिशत से अधिक वैक्सीन का उत्पादन होता है और 200 से अधिक देशों को भारतीय वैक्सीन की खुराक भेजी जाती है।

मंत्री ने इस विकास का श्रेय नीति समर्थन और पूरे सरकारी दृष्टिकोण को दिया, जिसके तहत DBT और उसकी एजेंसियां राज्यों के साथ सहयोग स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि DBT–UP जैसे साझेदारी मॉडल विकसित भारत 2047 के विज़न को आगे बढ़ाने और “Made in India, Made for the World” के तहत सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के वैश्विक प्रदाता के रूप में भारत की स्थिति मजबूत करने में मदद करेंगे।

DBT सचिव और BIRAC चेयरमैन डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि उत्तर प्रदेश के साथ समझौता “नवाचार पाइपलाइन को खोलने और किफायती तकनीकों को स्केल करने” में मदद करेगा। वरिष्ठ राज्य सरकार के अधिकारियों ने राज्य को फार्मा, बायोटेक और MedTech के केंद्र के रूप में स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई, जिसमें लखनऊ में बायोटेक पार्क, ग्रेटर नोएडा में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग और फार्मा पार्क जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया।

भारत की बायोइकोनॉमी वर्तमान में लगभग 165 बिलियन डॉलर की है और सरकार ऐसे केंद्र–राज्य सहयोगों को भारत को वैश्विक बायोफार्मा और MedTech हब बनाने के लिए एक अवसर मानती है।

समारोह में उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि राज्य फार्मा, बायोटेक और MedTech के केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। DBT-BIRAC के सहयोग से लखनऊ, ग्रेटर नोएडा और ललितपुर में शुरू की गई पहलें स्टार्टअप्स को बढ़ावा देंगी और अनुसंधान सहयोग को बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाएंगी।

BIRAC के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि साझेदारी का फोकस कौशल विकास, इनक्यूबेशन और वाणिज्यीकरण पर होगा, ताकि नवाचार तेज़ी से बाज़ार तक पहुँचें और व्यापक सामाजिक और आर्थिक लाभ उत्पन्न करें।

समारोह में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित कुमार घोष और DBT, BIRAC और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे, जो केंद्र और राज्य दोनों की भारत के बायोटेक और फार्मा क्षेत्र को विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.