Media24Media.com: आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान: भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान: भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण

Document Thumbnail

भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ के सफल प्रक्षेपण ने वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के दूरदर्शी निर्णय का प्रत्यक्ष परिणाम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से मिशन ‘आगमन’ के सफल प्रक्षेपण का प्रत्यक्ष साक्षी बनते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई दी। इस मिशन के तहत विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक अपने निर्धारित लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में प्रवेश किया। इसके साथ ही स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई जिसने भारतीय धरती से ऑर्बिटल लॉन्च करने का इतिहास रच दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र, वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और उद्यमशीलता का प्रतीक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक पवन कुमार चंदाना और भरत डाका को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए नहीं खोला होता तो यह उपलब्धि संभव नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने भारतीय स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय अंतरिक्ष अवसंरचना तक पहुंच प्रदान की और विश्वस्तरीय अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने का अवसर दिया।

उन्होंने ISRO, IN-SPACe और अंतरिक्ष विभाग की भी सराहना करते हुए कहा कि इनके सहयोग से तैयार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई दिशा दी है। विक्रम-1 की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दूरदर्शी नीतियां, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और युवा उद्यमियों की प्रतिभा मिलकर वैश्विक स्तर की तकनीकी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन में उच्च तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। दुनिया के अधिकांश पहले प्रक्षेपण केवल डमी पेलोड लेकर उड़ान भरते हैं, जबकि विक्रम-1 अपने साथ कई प्रयोगात्मक पेलोड, तकनीकी प्रदर्शन और भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के पेलोड भी लेकर गया। इससे भारत की व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं पर वैश्विक विश्वास और मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि 2020 के सुधारों के बाद भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। कुछ वर्षों पहले जहां निजी लॉन्च इकोसिस्टम लगभग नहीं था, वहीं आज देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप, पहला स्पेस यूनिकॉर्न और लगभग 9 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था मौजूद है। सरकार का लक्ष्य अगले दशक में इसे बढ़ाकर 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

पूरी तरह भारत में विकसित विक्रम-1 लगभग 22 मीटर ऊंचा है और 350 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने में सक्षम है। इसमें कई स्वदेशी तकनीकी उपलब्धियां शामिल हैं, जैसे—

  • भारत का पहला ऑल-कार्बन कंपोजिट ऑर्बिटल रॉकेट,

  • 100 प्रतिशत 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन,

  • उन्नत अल्ट्रा-लो-शॉक न्यूमैटिक सेपरेशन सिस्टम,

  • और देश के सबसे लंबे मोनोलिथिक कार्बन-कंपोजिट रॉकेट स्टेज में से एक।

इस मिशन ने प्रणोदन (Propulsion), एवियोनिक्स, टेलीमेट्री, नेविगेशन और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का सफल परीक्षण किया, जिससे भारत के भविष्य के व्यावसायिक ऑर्बिटल लॉन्च मिशनों की मजबूत नींव तैयार हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण केवल एक मिशन की सफलता नहीं, बल्कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के नए युग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मजबूत नीति सुधारों, सार्वजनिक-निजी साझेदारी और भारतीय नवाचार के बल पर भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, "भारत के लिए अब आसमान भी सीमा नहीं रहा।"

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.