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भारत की जनजातीय कला और सांस्कृतिक विरासत ने IITF में बिखेरी चमक

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भारत की जीवंत सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव

भारत में 705 से अधिक जनजातीय समुदाय रहते हैं, जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग 8.6% हैं। ये समुदाय अपनी अनूठी पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प के लिए जाने जाते हैं, जो सदियों से उनकी संस्कृति का हिस्सा रहे हैं।

नई दिल्ली में आयोजित 44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF) में इसी समृद्ध जनजातीय कला और विरासत का उत्सव मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूत करना है। इस मेले में देशभर की जनजातियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिसे भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों का सहयोग प्राप्त है।

जनजातीय कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा

भारत रेशम उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। रेशम, जिसे ‘रेशों की रानी’ कहा जाता है, 15वीं शताब्दी से भारत की अर्थव्यवस्था और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है।
आज कई जनजातीय समुदाय विशेष प्रकार का रेशमी कपड़ा और हस्तशिल्प बनाते हैं। देशभर के 52,000 गांवों में लगभग 97 लाख लोग इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।

गोंड जनजाति के सचिन वाल्के – तसर रेशम के शिल्पकार

महाराष्ट्र के नागपुर से गोंड जनजाति के सचिन वाल्के और उनका परिवार तसर रेशम की साड़ी बनाते हैं, जिन पर वारली और करवत जैसे पारंपरिक डिजाइन उकेरे जाते हैं।
TRIFED (जनजातीय सहकारी विपणन विकास प्रबंधन महासंघ) ने उन्हें IITF और दिल्ली में आयोजित आदि महोत्सव में अपना काम प्रदर्शित करने में मदद की। वाल्के कहते हैं,
“कपास से लेकर अंतिम उत्पाद तक—हम सब कुछ खुद करते हैं। मेले हमारे लिए खरीदारों तक पहुंचने का सबसे बड़ा माध्यम हैं।”

TRIFED की प्रमुख रणनीतियाँ

  1. क्षमता निर्माण – स्वयं सहायता समूह, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम

  2. बाज़ार विकास – राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जनजातीय उत्पादों की पहुंच

  3. ब्रांड निर्माण – जनजातीय उत्पादों की पहचान और स्थायी विपणन

भारत दुनिया का एकमात्र देश है जो सभी चार वाणिज्यिक रेशम—मल्बरी, तसर, एरी और मूगा—का उत्पादन करता है।

गुजरात की महिला कारीगर – अप्लीक व मिरर वर्क

गुजरात के बनासकांठा जिले की उगामबेन रामाभाई सुथार सहित 300 महिलाएं अप्लीक और कांच के काम वाले वस्त्र तैयार करती हैं। पहले वे केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित थीं, पर अब TRIFED के सहयोग से उन्हें देशभर में पहचान मिल रही है।
उनके रिश्तेदार प्रिंस कुमार लालजीभाई भी IITF में शामिल हुए और बताया कि “आदि महोत्सव में हमें बहुत अच्छा रिस्पांस मिला।”

झारखंड की पाइटकर कला – एक विलुप्त होती कला को बचाने का प्रयास

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले से झंतु गोपे पाइटकर (Pyatkar) कला को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह भारत की सबसे पुरानी लिपिक (narrative) कलाओं में से एक है—प्राकृतिक रंगों से बनी स्क्रॉल-पेंटिंग, जिनमें नृत्य, गीत, मिथक और लोक कथाएं दर्शाई जाती हैं।
गोपे बताते हैं कि इस क्षेत्र की कई पारंपरिक परिवार अब इसे बनाना छोड़ चुके हैं, लेकिन झारखंड कला मंदिर और मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्योग विकास बोर्ड ने उन्हें मेलों में प्रदर्शित करने का अवसर दिया।

मध्य प्रदेश का भारेवां कला – कबाड़ से कला का निर्माण

मध्य प्रदेश के बैतूर से विशाल बागमारी "भारेवां" कला को जीवित रखे हुए हैं। कबाड़ धातुओं से देवी-देवताओं की मूर्तियां, आभूषण और सजावटी वस्तुएं बनाना इस कला की विशेषता है। गोंड जनजाति के उप-समूह भारेवां समुदाय में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।

निष्कर्ष

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) जनजातीय कला और परंपराओं को संरक्षित करने के राष्ट्रीय प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरकारी संस्थाएं जनजातीय कलाकारों को मंच और बाजार उपलब्ध कराकर न सिर्फ उनकी कला को जीवित रख रही हैं, बल्कि उनके समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रही हैं।

भारत की "एकता में विविधता" को प्रदर्शित करती यह पहल सुनिश्चित करती है कि जनजातीय कला आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत बनी रहे।

IITF 2025 में युवाओं की भागीदारी का उत्सव

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नई दिल्ली में आयोजित 44वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF) में इस वर्ष का थीम “एक भारत श्रेष्ठ भारत” केवल मंडपों या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ही नहीं, बल्कि उन युवा कारीगरों और उद्यमियों के चेहरों पर जीवंत होता दिखाई देता है, जो गर्व के साथ अपने स्टॉल संभाल रहे हैं। बिजनौर से मधुबनी, अलवर से कच्छ, और भूमध्यसागर पार ट्यूनीशिया तक—IITF 2025 भारत और विश्व के आर्थिक तथा सांस्कृतिक परिदृश्य को बदलने वाली युवा पीढ़ी की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।

भारत मंडपम की चौड़ी गलियारों में ये युवा प्रतिभागी केवल उत्पाद नहीं बेच रहे हैं। वे पारिवारिक विरासतों को आगे बढ़ा रहे हैं, पारंपरिक हस्तशिल्प में नवाचार कर रहे हैं, नई तकनीकों के साथ प्रयोग कर रहे हैं और अपने आत्मनिर्भर उद्यमी सफर को आकार दे रहे हैं।

इन युवाओं की कहानियों में MSME विकास, कौशल उन्नयन, ग्रामीण आजीविका और वैश्विक बाजार से जुड़ाव बढ़ाने वाली नीतियों की वास्तविक अभिव्यक्ति देखी जा सकती है। इन प्रयासों को सशक्त बनाता है मेरा युवा भारत (MY Bharat)—भारत सरकार की एक ऐतिहासिक पहल, जो युवाओं को नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्रनिर्माण के लिए मंच प्रदान करती है।

IITF 2025 में, युवाओं की आकांक्षाएँ अवसर से मिलती हैं—और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के भविष्य को आकार देने का मौका मिलता है।

बिजनौर का गुड़ नवाचारक

उत्तर प्रदेश के बिजनौर से आए 26 वर्षीय नमन शर्मा नई पीढ़ी के उस संकल्प का प्रतीक हैं, जो अपनी मिट्टी से जुड़कर विरासत को आधुनिक पहचान देना चाहते हैं। भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में से एक बिजनौर का प्रतिनिधित्व करते हुए नमन कहते हैं—

“मैं गुड़ उद्योग को आधुनिक बनाना चाहता हूँ और लोगों को रसायन-मुक्त, प्राकृतिक उत्पाद देना चाहता हूँ।”

2018 से प्रयोग शुरू कर चुके नमन ने 2021 में अपनी कंपनी पंजीकृत की। उनके 21 वर्षीय भाई और 23 वर्षीय बहन उनकी मुख्य टीम हैं। वे 15 फैक्ट्री कर्मचारियों और पैकेजिंग यूनिट में 25 महिलाओं को रोजगार देते हैं।

IITF में उनकी यह पहली भागीदारी है, जो क्षेत्रीय आयोजनों में उल्लेखनीय सफलता के बाद संभव हुई। अब वे निर्यात बाजार को लक्ष्य बना रहे हैं और PMEGP के माध्यम से यूनिट विस्तार की तैयारी कर रहे हैं।

पद्मश्री विरासत को आगे बढ़ाता मधुबनी का युवा कलाकार

बिहार मंडप में मधुबनी कला के रंग सबका ध्यान आकर्षित करते हैं। इन्हीं रंगों के बीच 18 वर्षीय मधुरम कुमार झा खड़े हैं—जितवारपुर गाँव के, जो मधुबनी कला का केंद्र माना जाता है।

उनकी दादी पद्मश्री बऊआ देवी—मिथिला कला की अग्रणी हस्ती हैं। मधुरम बचपन से उनकी कला को देखते हुए बड़े हुए।

वे कहते हैं—
“जब दादी माँ पेंटिंग करती थीं, मैं उनके पास बैठ जाता था… देखकर सीखता था।”

पढ़ाई के साथ वे देशभर में प्रदर्शनियों में भाग लेते हैं। वे चाहते हैं कि मधुबनी कला “हर गली, हर देश” तक पहुँचे। आगे चलकर वे IRS अधिकारी या नौसेना में शामिल होना चाहते हैं।

वे बताते हैं—
“सरकार ने हमें नाम दिया है, पहचान दी है… दादी माँ की वजह से।”

राजस्थान की कुम्हार परंपरा को आगे बढ़ाती करिश्मा

राजस्थान मंडप में टेराकोटा के बर्तन करीने से सजे हैं। इनके बीच 20 वर्षीय करिश्मा परजापत अपने परिवार की कुम्हारी परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।

वे बताती हैं—
“हम मिट्टी तोड़ते हैं, गलाते हैं, भिगोते हैं… फिर पिता उसे आकार देते हैं और भट्टी में पकाते हैं।”

करिश्मा बीए कर रही हैं और साथ ही परिवार की इस कला में हाथ बँटा रही हैं। उनका स्टॉल महिला सशक्तिकरण निदेशालय द्वारा प्रायोजित है, और यह उनका दूसरा चयन है।

उनकी उपस्थिति भारतीय हस्तकला में युवा महिलाओं की बढ़ती भूमिका का मजबूत संकेत है।

800 वर्ष पुरानी कच्छ की घंटी कला के युवा शिल्पकार

गुजरात के 26 वर्षीय लुहार जावेद अब्दुल्ला जब अपनी कला के बारे में बताते हैं, तो मानों सदियों पुरानी कहानी सुनाते हैं—

“हमारा काम 800-900 साल पुराना है, और हमारे परिवार का 400 साल से अधिक।”

कच्छ की यह पारंपरिक तांबे की घंटियाँ, जो पहले मवेशियों के गलों में बांधी जाती थीं, अब वाद्ययंत्र, विंड चाइम और सजावटी वस्तुओं के रूप में बनाई जाती हैं। उनकी यूनिट में 20 कर्मचारी हैं, जिनमें अधिकतर महिलाएँ हैं।

IITF उनके लिए व्यापार से आगे एक सांस्कृतिक मंच है—जहाँ हर घंटी कच्छ की विरासत को नई पहचान देती है।

सीमाओं के पार: अंतरराष्ट्रीय मंडप के युवा चेहरे

IITF 2025 में 12 देशों ने भाग लिया है। अंतरराष्ट्रीय मंडप वैश्विक संस्कृतियों और शिल्प का जीवंत संगम बन गया है।

इसी भीड़ में 26 वर्षीय अहमद शाहिद (ट्यूनीशिया) अपने हाथ से बने सिरेमिक, ऑलिव वुड उत्पाद और सजावटी वस्तुएँ प्रदर्शित कर रहे हैं।

वे कहते हैं—
“भारतीय लोग बहुत सवाल पूछते हैं… जानना चाहते हैं कि चीजें कैसे बनती हैं।”

IITF उनके लिए भारतीय बाजार को समझने, व्यापारिक साझेदारियों और निर्यात अवसरों का द्वार है।

युवा: परिवर्तन की धुरी

IITF 2025 “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना को युवाओं की जीवंत भागीदारी के माध्यम से मजबूत बनाता है। ये युवा—
उद्यमी, कलाकार, नवप्रवर्तक—भारत की विविधता को अपनी रचनात्मक ऊर्जा के साथ प्रस्तुत करते हैं।

उनकी कहानियाँ दर्शाती हैं कि जब युवाओं को मंच मिलता है, तो वे परंपरा और नवाचार दोनों में नया जीवन फूँकते हैं।

यही युवा हैं जो आज देश की प्रगति को आगे बढ़ा रहे हैं—हर कला, हर तकनीक और हर विचार के साथ।


IITF 2025: भारत मंडपम में भारत की आर्थिक विविधता और जमीनी उद्यमिता का भव्य प्रदर्शन

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भारत मंडपम परिसर भारत की आर्थिक विविधता का एक जीवंत प्रदर्शन बन गया है, जहाँ पारंपरिक शिल्प, कृषि उद्यम, स्टार्टअप नवाचार और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय विशेषताएँ एक साथ प्रदर्शित हो रही हैं।

44वां भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2025, जिसकी थीम एक भारत, श्रेष्ठ भारत है, में 3,500 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए—हर कोई अपने श्रम, विरासत और आकांक्षा की अपनी-अपनी कहानी लेकर।

14 नवंबर 2025 को उद्घाटन किया गया यह चौदह-दिवसीय आयोजन सिर्फ एक व्यापारिक मेला नहीं है, बल्कि एक ऐसा अवसर मंच है जहाँ प्रथम-पीढ़ी के उद्यमी, ग्रामीण कारीगर और घरेलू ब्रांड अपनी मांग परखते हैं, खरीदारों से जुड़ते हैं, साथियों से सीखते हैं और राज्य-स्तरीय सहायता तंत्र तक पहुँचते हैं। कई प्रदर्शकों के लिए IITF राष्ट्रीय बाज़ार में प्रवेश का पहला बड़ा कदम है—एक ऐसा बाज़ार जो आत्मविश्वासी, निरंतर बढ़ता हुआ और आत्मनिर्भर भारत का प्रतिबिंब है।

क्या आप जानते हैं?

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF), जो 1980 से हर वर्ष इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (ITPO) द्वारा आयोजित किया जाता है, MSME, कारीगरों, स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए देश के सबसे महत्वपूर्ण मंचों में से एक है। वर्षों में यह भारत की विनिर्माण क्षमता, नवाचार और विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक शिल्प का प्रमुख प्रदर्शन स्थल बन गया है।

2024 में, इस मेले में दस लाख से अधिक आगंतुक आए, जिससे यह देश के सबसे लोकप्रिय व्यापार आयोजनों में अपनी स्थिति को और मजबूत करता है।

IITF का आयोजन भारत मंडपम में होता है, जो प्रगति मैदान परिसर में निर्मित आधुनिक सम्मेलन एवं प्रदर्शनी केंद्र है, जिसका उद्घाटन 2023 में किया गया। यह 123 एकड़ में फैला है तथा इसमें 7,000-सीट वाला कन्वेंशन हॉल, सात प्रदर्शनी हॉल और 100,000 वर्ग मीटर से अधिक प्रदर्शनी क्षेत्र शामिल है। ITPO प्रति वर्ष लगभग 90 कार्यक्रम आयोजित करता है, जिससे नई दिल्ली एक प्रमुख वैश्विक प्रदर्शनी गंतव्य बनती जा रही है।

बिहार: एक कारीगर का राष्ट्रीय मंच पर पदार्पण

बिहार मंडप में 45 वर्षीय सृद्धि कुमारी अपने सामने सजी भागलपुरी रेशम और ज़री के काम को संभालती हैं—एक कला जिसे उन्होंने 12 वर्षों में निखारा है। IITF में पहली बार भाग लेते हुए वे महिला-उद्यमिता की यात्रा का प्रतीक बनती हैं। वे गर्व से कहती हैं, “मैं अधिकृत विक्रेता हूँ।”

बिहार सरकार ने महिला-उद्यमिता योजनाओं के तहत उन्हें सहायता दी। उनके अनुसार, “सभी सरकारी औपचारिकताओं में सचिव ने मेरा मार्गदर्शन किया।”
उनका शिल्प बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों के कौशल का संगम है।

एक अन्य कारीगर ने उन्हें IITF में आने के लिए प्रेरित किया था। मार्च 2025 के GI-महोत्सव में उन्होंने दो–तीन महीने की आय के बराबर कमाया था, जिससे इस बार उनकी भागीदारी का आत्मविश्वास बढ़ा।

नालंदा से दिल्ली तक: हर साल लौटने वाला बुनकर

कुछ दूरी पर 49 वर्षीय तरुण पांडे बेहद नाजुक बावनबु्टी साड़ियों को सजाते नज़र आते हैं। यह उनका आठवाँ IITF है।

वे बताते हैं, “IITF से मुझे दो से ढाई महीने की आय के बराबर कमाई होती है। हम अन्य मेलों में भाग नहीं लेते, IITF हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।”

उनके नियमित ग्राहक उन्हें “नालंदा के बुनकर” के रूप में पहचानते हैं।

किसान से उद्यमी: अवसरों का विस्तार

51 वर्षीय प्रहलाद रामराव बोर्गड और उनकी पत्नी कावेरी, महाराष्ट्र के हिंगोली से आए हैं। वे जैविक दालें, हल्दी, अदरक, अचार और मसाले बेचते हैं।

2012 से जैविक खेती अपनाने के बाद उन्होंने 2015 में ‘सूर्या फार्मर्स’ शुरू किया।

IITF के बारे में उन्होंने ऑनलाइन जाना और महाराष्ट्र सरकार ने आवेदन प्रक्रिया में सहायता की।

उनके अनुसार,

“ऐसे मंच केवल उत्पाद बेचने के लिए नहीं, बल्कि संपर्क बनाने, उपभोक्ता अपेक्षाएँ समझने और पेशेवर तरीके सीखने में मदद करते हैं।”
IITF में उन्हें चार से पाँच महीने की आय के बराबर कमाई होती है।

लातूर की परंपरा: गोधड़ी कला का संरक्षण

महाराष्ट्र मंडप में रुक्मणी गणेशपट सालगे अपनी 15 वर्षीय बेटी के साथ पारंपरिक गोधड़ी क्विल्ट प्रदर्शित करती हैं।

वे बताती हैं, “प्रत्येक गोधड़ी को हाथ से बनाने में चार–पाँच दिन लगते हैं।”
IITF उनके लिए सिर्फ बिक्री का मंच नहीं, बल्कि उस कला को बचाने का अवसर है जो सस्ती मशीन-निर्मित वस्तुओं के कारण जोखिम में है।

झारखंड: 400 आदिवासी महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती लाख की चूड़ियाँ

झारखंड—जो 2025 में अपनी स्थापना के 25 वर्ष मना रहा है—इस वर्ष थीम स्टेट है।
यहाँ 49 वर्षीय झबर माल पारंपरिक तकनीकों से बनी लाख की चूड़ियाँ बेचते हैं।
वे कहते हैं,
“मेरे स्थायी ग्राहक हर साल मेरा इंतज़ार करते हैं। मेले के बाद मिलने वाले ऑर्डर ही मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।”
उनकी कमाई झारखंड की लगभग 400 आदिवासी महिलाओं के आजीविका समूह का समर्थन करती है।

व्यापार मेले: आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र

IITF जैसे मेले सिर्फ तत्काल बिक्री नहीं बढ़ाते—वे छोटे उद्यमियों को दृश्यता देते हैं, दीर्घकालिक खरीदार जोड़ते हैं और बाज़ार के व्यवहार को समझने में मदद करते हैं।
2025 का यह संस्करण विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहाँ आर्थिक मजबूती, राजनीतिक स्थिरता और वैश्विक व्यापार साझेदारियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

जैसे ही शाम को पवेलियन रोशन होते हैं, प्रत्येक स्टॉल के पीछे की कहानी भारत के उद्यमशीलता परिदृश्य की विविधता को उजागर करती है।
सृद्धि, तरुण, प्रहलाद, रुक्मणी और झबर जैसे कारीगरों के लिए IITF वह स्थान है जहाँ परंपरा उद्यम से मिलती है, स्थानीय कौशल राष्ट्रीय पहचान पाता है, और छोटे व्यवसाय आगे बढ़ने के लिए आवश्यक गति पाते हैं।

IITF का 44वां संस्करण साबित करता है कि भारत की आर्थिक प्रगति केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि छोटे उद्यमियों की मेहनत, रचनात्मकता और संकल्प से भी आकार लेती है।


44वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में खादी की समृद्ध परंपरा का प्रदर्शन

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भारत की कालजयी खादी परंपरा 44वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2025 में हॉल नंबर 6, भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में पूरी भव्यता के साथ प्रदर्शित हो रही है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के तहत खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) इस मेले में खादी और ग्राम उद्योग उत्पादों की विस्तृत और आकर्षक श्रृंखला के साथ भाग ले रहा है, जो नई भारत की नई खादी का प्रतिनिधित्व करती है।

इस पवेलियन में नवीन और समकालीन खादी उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक वैश्विक ब्रांड के रूप में उभरे हैं।

बुधवार को, KVIC के अध्यक्ष मनोज कुमार ने खादी इंडिया पवेलियन का दौरा किया और विभिन्न राज्यों के खादी शिल्पकारों, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) से जुड़े उद्यमियों, और SFURTI क्लस्टर्स के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने उनके उत्पादों, अनुभवों और नवाचारों के बारे में चर्चा की और भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में उनके योगदान की सराहना की।

शिल्पकारों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करते हुए, अध्यक्ष ने उन्हें भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल अभियानों का समर्थन जारी रखने के लिए कहा।

मनोज कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि खादी इंडिया पवेलियन को “हर घर स्वदेशी, घर घर स्वदेशी” और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप thoughtfully डिजाइन किया गया है।

पवेलियन में कुल 150 स्टाल लगाए गए हैं, जिससे खादी संस्थानों, PMEGP इकाइयों और SFURTI क्लस्टर्स के खादी शिल्पकारों की भागीदारी सुनिश्चित हुई है। इन स्टालों में पारंपरिक हस्तशिल्प, खादी और ग्राम उद्योग उत्पादों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया है।

दौरे के दौरान, मनोज कुमार ने देशी चरखा, पेटी चरखा, इलेक्ट्रिक पॉटरी व्हील और पारंपरिक घानी आधारित तेल निष्कर्षण जैसी लाइव प्रदर्शनों का अवलोकन किया, जो भारत की समृद्ध शिल्प परंपरा और सतत उत्पादन प्रथाओं को दर्शाते हैं।

बात खादी की – मुख्य आकर्षण

खादी इंडिया पवेलियन का एक प्रमुख आकर्षण नया पॉडकास्ट स्टूडियो “बात खादी की” है, जहां शिल्पकार अपनी यात्राओं, नवाचारों और पारंपरिक कला की विरासत को अपनी आवाज़ में साझा कर रहे हैं। इस पहल की सराहना करते हुए, KVIC अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि यह स्टूडियो आधुनिक तकनीक और विरासत का मिश्रण है और युवाओं को खादी से जोड़ने में मदद करेगा।

पवेलियन में वस्त्र, कॉस्मेटिक्स, ग्रामीण खाद्य पदार्थ, बांस और बेंत के शिल्प और जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के विशेष उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं। कई PMEGP और SFURTI उद्यमी अपने सफल उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं, जो खादी और ग्राम उद्योग की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं।


IITF 2025 में आयुष मंत्रालय की भव्य प्रस्तुति: ‘आयुष के साथ – स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत’ थीम पर आकर्षण का केंद्र

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आयुष मंत्रालय ने इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य विरासत का व्यापक प्रदर्शन किया है। “आयुष के साथ – स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत” थीम के साथ स्थापित आयुष पवेलियन में हजारों आगंतुकों की उपस्थिति देखी जा रही है, जहां लोग आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी पर आधारित समग्र स्वास्थ्य समाधान को जानने के लिए उत्सुक हैं।

पवेलियन के प्रत्येक थीम आधारित स्टॉल में डिजिटल डायग्नोस्टिक्स, आहार संबंधी प्रदर्शन, इंटरैक्टिव गेम्स, विशेषज्ञ परामर्श और सभी आयु वर्ग के लिए सहभागितात्मक गतिविधियों के माध्यम से आयुष प्रणालियों की विशेषताओं को प्रदर्शित किया गया है।

AIIA स्टॉल: आयुर्वेदिक आहार का विस्तृत प्रदर्शन

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) का स्टॉल पवेलियन के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यहां आयुर्वेद-आधारित फंक्शनल फूड्स जैसे रागी नाचोज़, सुंठ्यादि लड्डू, रागी-उड़द लड्डू, मूंग सूप प्रीमिक्स और यवाड़ी सत्तू का प्रदर्शन किया जा रहा है। विशेषज्ञ इन खाद्य पदार्थों के पोषण संबंधी लाभ जैसे एनीमिया प्रबंधन, प्रतिरक्षा वृद्धि और पाचन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दे रहे हैं। आगंतुकों को आयुर्वेदिक अनाज, मसाले और जड़ी-बूटियों के उपयोग से संबंधित पुस्तिकाएँ भी वितरित की जा रही हैं।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर: सात्त्विक आहार और व्यक्तिगत देखभाल

NIA ने सात्त्विक आहार पर केंद्रित प्रदर्शनी लगाई है, जिसमें त्रिफला जैम, रीजुवेनेटिंग ग्रैन्यूल्स, रागी बिस्किट, एलोवेरा जेल, लिप बाम और फुट क्रीम जैसे उत्पाद शामिल हैं। विशेषज्ञ सात्त्विक आहार के मानसिक स्पष्टता, ऊर्जा संतुलन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य में योगदान को समझा रहे हैं।

RAV: आयुष आहार थीम पर आधारित उत्पाद और मिलेट क्विज़

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (RAV) अपने स्टॉल पर पोषक कुकीज़, एनी ब्रेड, जीतायु टी, एनपी ड्रिंक और फुल मून चॉकलेट जैसे उत्पाद प्रदर्शित कर रहा है। मिलेट क्विज़ के माध्यम से आगंतुक बाजरे के आयुर्वेदिक महत्व को जान रहे हैं।

MDNIY: योग आधारित लाइव डेमो और Y-ब्रेक सत्र

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) कॉमन योग प्रोटोकॉल, रिदमिक योग, इंटरैक्टिव क्विज़ और कार्यरत लोगों के लिए “Y-Break” सत्र आयोजित कर रहा है, ताकि लोग सरल योग अभ्यासों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकें।

यूनानी चिकित्सा: डिजिटल मिज़ाज-असेसमेंट और पारंपरिक खाद्य पदार्थ

CCRUM और NIUM द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित यूनानी स्टॉल में हरीरा, यूनानी क़हवा, हलवा गी़क़वार, गुलकंद और तलबीनाह जैसे खाद्य पदार्थ आकर्षण का केंद्र रहे। डिजिटल मिज़ाज-परीक्षण (Damvi, Balghami, Safravi, Saudavi) आगंतुकों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य समझने में मदद कर रहा है।

सिद्ध चिकित्सा: पोषण, जागरूकता और चिकित्सा परामर्श

NIS और CCRS के स्टॉल में हिबिस्कस इंफ्यूज़न टी, पंचमुठ्टी कंजी, करिसलाई मिठाई और हलीम नाचोज़ जैसे सिद्ध-प्रेरित खाद्य पदार्थ प्रदर्शित किए जा रहे हैं। 100 से अधिक लोगों को निःशुल्क चिकित्सा परामर्श भी दिया गया।

CCRH: होम्योपैथी अनुसंधान और निःशुल्क ओपीडी

CCRH के स्टॉल में शोध प्रकाशन, क्लिनिकल अध्ययन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी प्रदर्शित की जा रही है। होम्योपैथिक चिकित्सक पवेलियन में निःशुल्क ओपीडी चला रहे हैं।

Sowa-Rigpa (सोवा-रिग्पा): हिमालयी पारंपरिक चिकित्सा की झलक

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा प्रतिदिन लगभग 40 निःशुल्क परामर्श प्रदान कर रहा है तथा आगंतुकों को सowa-रिग्पा के आहार, आचरण और उपचार सिद्धांतों के बारे में जानकारी दे रहा है।

NMPB: औषधीय पौधों की जीवंत प्रदर्शनी

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) अपने स्टॉल पर औषधीय पौधों का लाइव डिस्प्ले, पहचान, खेती और औषधीय उपयोग पर जानकारी दे रहा है। “अटल आयुष महोत्सव” के तहत औषधीय पौधों के पौधे भी वितरित किए जा रहे हैं।

IMPCL: उच्च गुणवत्ता वाली औषधियाँ

IMPCL ने अपनी WHO-GMP और ISO प्रमाणित इकाई द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक और यूनानी औषधियों का प्रदर्शन किया है, जिसकी वार्षिक आय वर्ष 2024–25 में लगभग ₹170 करोड़ रही।

PCIM&H: औषधीय मानकों और वैज्ञानिक प्रमाणीकरण पर फोकस

PCIM&H अपने फार्माकोपिया प्रकाशन, दवाइयों के नमूने और ऑडियो-विज़ुअल सामग्री के माध्यम से आयुष औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर जागरूकता बढ़ा रहा है।

CCRYN: प्राकृतिक चिकित्सा आधारित पोषण और IEC सामग्री

CCRYN के स्टॉल में तिल लड्डू, मूंगफली-तिल लड्डू, मखाना लड्डू और मिलेट नमकीन जैसे प्राकृतिक आहार प्रदर्शित किए गए हैं।

स्टार्ट-अप सेक्शन: नवाचार आधारित आयुर्वेदिक उत्पाद

आयुर्वेद आधारित स्टार्ट-अप्स स्किनकेयर, डिटॉक्स ड्रिंक्स, आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थ और वेलनेस उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।

एक्टिविटी ज़ोन: बच्चों और युवाओं में स्वास्थ्य जागरूकता

ड्रॉइंग प्रतियोगिता, स्वास्थ्य-आधारित साँप-सीढ़ी, प्रकृति-परिक्षण, मिलेट क्विज़, स्लोगन रायटिंग और फोटो बूथ आगंतुकों में लोकप्रिय हैं।

समापन

IITF 2025 का आयुष पवेलियन सार्वजनिक भागीदारी, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और आयुष चिकित्सा वितरण के साथ व्यापक लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। यह पवेलियन भारत की समृद्ध समग्र चिकित्सा परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।



भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला: ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत झलक

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भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला: ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत झलक

भारत मंडपम में आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) देश के सबसे बड़े और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध आयोजनों में से एक है। 44 वर्षों की अपनी गौरवशाली विरासत के साथ, इस वर्ष का थीम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ भारत की विविधता में एकता, आर्थिक आत्मविश्वास और रचनात्मक ऊर्जा को एक ही मंच पर प्रस्तुत करता है। यहाँ साझेदार राज्य, फोकस राज्य, मंत्रालय, वैश्विक प्रतिभागी, MSMEs, कारीगर और स्टार्ट-अप मिलकर एक ऐसा समावेशी वातावरण बनाते हैं, जहां परंपरा, नवाचार और उद्यमिता एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

भारत की सांस्कृतिक विराटता का जीवंत अनुभव

एक आगंतुक के दृष्टिकोण से IITF मानो भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और हस्तशिल्प विरासत की यात्रा है। हर राज्य का मंडप अपनी खास पहचान लिए खड़ा है —

  • झारखंड के हस्तकरघा और जनजातीय कला,

  • उत्तर प्रदेश की बारीक धातुकारी,

  • राजस्थान की रंगीन ब्लॉक-प्रिंट परंपरा,

  • दर्पण-काम, टेराकोटा, जनजातीय आभूषण, बाँस और जूट शिल्प,

  • हाथ से काढ़े गए वस्त्र —

सब कुछ एक ही छत के नीचे दृष्टिगोचर होता है।

यहाँ ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का संदेश लोक-नृत्य, लोक-संगीत, शिल्प कार्यशालाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से हर कोने में गूंजता है।

कला, समुदाय और व्यवसाय को जोड़ता एक मंच

एक प्रदर्शक की नज़र से IITF सिर्फ एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन भर की मेहनत, पारिवारिक परंपराओं और सामुदायिक पहचान का प्रदर्शन है।

कारीगरों की आवाज़:

पैतकर कला – झारखंड

कलाकार बताते हैं कि मेला उनके सदियों पुराने स्क्रॉल-पेंटिंग शिल्प को जीवंत रखने में मदद करता है।

मधुबनी कला – बिहार

वे कहते हैं कि IITF उन्हें ऐसे दर्शकों से मिलाता है जो उनके प्रतीकों और सूक्ष्म चित्रण को समझते हैं।

कच्छ के पारंपरिक घंटानिर्माता – गुजरात

पहले मवेशियों के लिए बनी घंटियाँ आज संगीत वाद्य और सजावटी सामग्रियों में बदल गई हैं।
“यह मेला हमें अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से मिलने का अवसर देता है,” वे साझा करते हैं।

राजस्थान के जूत्ती शिल्पकार

मशीन-निर्मित फुटवियर के दौर में यह मंच उनके श्रमसाध्य शिल्प को जीवित रखता है।

पीढ़ियों से चली आ रही कला की मिसालें

डॉ. जी. दसरथ चारी – पारंपरिक लकड़ी नक्काशी, आंध्र प्रदेश

सदियों पुरानी मंदिर-कला शैली को जीवित रखते हुए वे कहते हैं—
“तकनीक वही है, चाहे पारंपरिक पैनल बनाएं या आधुनिक उपयोगी वस्तुएँ। IITF हमें ऐसा मंच देता है जहां लोग कला की गहराई को समझते हैं।”

देबाकी परीडा – ढोकरा कला, ओडिशा

ढोकरा उनके जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान है।
“हर डिजाइन हमारी कहानी कहता है,” वे मुस्कुराकर कहती हैं।

धीरज – बांस और बेंत शिल्प, असम

“हमारे गाँव के अनेक परिवार इस शिल्प पर निर्भर हैं। मेला हमें पहचान और सम्मान दिलाता है,” वे बताते हैं।

मधुरी सिंह – पारंपरिक मिट्टी और जूट की गुड़िया, बिहार

महामारी के दौरान शुरू की गई उनकी कला आज कई महिलाओं को आजीविका दे रही है।
“मैं गुड़िया में भारत की परंपराएँ और त्योहारों की झलक डालती हूँ,” वे कहती हैं।

IITF: भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति का संगम

IITF में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना बड़े घोषणाओं में नहीं, बल्कि कारीगरों के हाथों में बसती है—

  • जहाँ मधुबनी की रेखाएँ ढोकरा की चमक से मिलती हैं,

  • जहाँ कच्छ की घंटियों की धुन असम की बांस-कला की सौम्यता से जुड़ती है,

  • और जहाँ पीढ़ियों की स्मृतियाँ और तकनीकें एक साझा राष्ट्रीय कहानी बन जाती हैं।

यह मेला हमें याद दिलाता है कि भारत की शक्ति उसकी विविधता के सहज मेल में है। यहाँ हर कारीगर अपने गाँव की मिट्टी और परंपरा लेकर आता है और उन्हें एक ऐसे मंच पर रखता है जहाँ वे सिर्फ कला नहीं, बल्कि भारत की आत्मा बन जाते हैं।

राष्ट्र के कारीगर: भारत का हृदय, भारत की पहचान

IITF यह प्रमाणित करता है कि जब विविध परंपराएँ एक साथ खड़ी होती हैं, तो भारत सिर्फ विशाल नहीं —
सुंदर, सामूहिक और अद्भुत रूप से एकजुट दिखाई देता है।

IITF 2025 में एफसीआई पैविलियन ने भारत की खाद्य सुरक्षा, किसानों के सशक्तिकरण और आधुनिकीकरण का प्रदर्शन किया

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भारत सरकार के भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2025 में हॉल नंबर 6, भारत मंडपम में एक विशेष पवेलियन स्थापित किया है। यह मेला 14 से 27 नवंबर, 2025 तक ITPO द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस पवेलियन के माध्यम से देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली की मजबूती, आधुनिकरण और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया गया है।

पवेलियन में “किसानों का सम्मान, भारतीय खाद्य निगम का अभिमान” और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को दर्शाया गया है।

पवेलियन में भारत में अन्न भंडारण की यात्रा को प्रदर्शित किया गया है, पारंपरिक भंडारण पद्धतियों से लेकर वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से उन्नत भंडारण समाधानों जैसे सिलो (SILOs) तक। यह प्रदर्शनी FCI के योगदान और उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह राष्ट्रीय अन्न भंडारण की पर्याप्तता सुनिश्चित करने के साथ-साथ गुणवत्ता-प्रधान, समावेशी, पारदर्शी और सतत खाद्य प्रबंधन प्रणाली की दिशा में काम कर रहा है। यह पहल विकसित भारत @ 2047 के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को भी सुदृढ़ करती है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री,प्रल्हाद जोशी ने आज (18.11.2025) FCI पवेलियन का दौरा किया और खुले बाजार बिक्री योजना (OMS – छोटे/थोक) के तहत वस्तु (गेहूँ/चावल) उपलब्धता और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए FCI की पहलों की सराहना की। उन्होंने FCI की पारदर्शिता, कुशल खाद्य वितरण और राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी देखा। मंत्री के दौरे के दौरान संजीव चोपड़ा, सचिव (खाद्य), अशुतोष अग्निहोत्री, चेयरमैन एवं MD (FCI), अजीत कुमार सिन्हा, कार्यकारी निदेशक (उत्तरी क्षेत्र) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

FCI पवेलियन में आधुनिक गोदामों, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता के लिए डिजिटल पहलों, सततता उपायों और किसानों-केंद्रित समर्थन प्रणाली को दर्शाने वाली जानकारीपूर्ण प्रदर्शनी, लाइव डेमोंस्ट्रेशन, इंटरैक्टिव पैनल और ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।


विशेष पहल के रूप में, पवेलियन में छह राज्यों – ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब और हरियाणा – से प्राप्त FCI चावल की खुदरा बिक्री भी की जा रही है, जो पहली बार एक मंच पर उपलब्ध हैं। कीमतें क्रमशः ₹28.90 प्रति किग्रा और ₹30.90 प्रति किग्रा रखी गई हैं। पिछले 4 दिनों में लगभग 1000 किग्रा चावल खरीदा जा चुका है।

यह पहल FCI की उपभोक्ताओं को सस्ती और गुणवत्ता वाली अन्न सामग्री उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता और राज्य-स्तरीय विविधता तथा एकता को बढ़ावा देने का प्रतीक है। युवाओं, छात्रों, महिलाओं और आम दर्शकों से आग्रह किया गया है कि वे FCI पवेलियन का दौरा करें और भारत के खाद्य क्षेत्र में हुई प्रगति का प्रत्यक्ष अनुभव लें।

IITF 'मेड इन इंडिया' उत्पादों जैसे कि अन्न, हथकरघा और हस्तशिल्प, तथा विभिन्न स्तरों की नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच बना हुआ है, जो माननीय प्रधानमंत्री की ‘वोकल फॉर लोकल’ की दृष्टि से गहराई से जुड़ा है।

इस पवेलियन के माध्यम से FCI देश की खाद्य सुरक्षा संरचना को मजबूत करने, किसानों को सशक्त बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और प्रत्येक घर तक गुणवत्तापूर्ण अन्न सामग्री पहुँचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रहा है, जिससे एक आत्मनिर्भर और समावेशी विकसित भारत का निर्माण संभव हो।


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