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AIIMS रायपुर दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का आह्वान: स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की जिम्मेदारी निभाएं युवा चिकित्सक

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर के तृतीय दीक्षांत समारोह में भाग लिया और स्नातक विद्यार्थियों से भारत के लोगों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाने का आह्वान किया।

समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी क्षण है। उन्होंने कहा, “आज आपको अपनी डिग्रियां मिल रही हैं और कल आपको इससे कहीं अधिक मूल्यवान—भारत के लोगों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन—की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में स्थापना के बाद से AIIMS रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बहुत कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ तथा पड़ोसी राज्यों, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य संस्थान बन गया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि AIIMS रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे व्यापक परिवर्तन का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कमजोर कनेक्टिविटी और वामपंथी उग्रवाद के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक विकास बाधित रहा। दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में भय और हिंसा के कारण सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार प्रभावित हुआ।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ अपने अतीत की छाया से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीतिक दृढ़ता और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया।

उन्होंने कहा कि दशकों से चली आ रही नक्सली समस्या का अंत हुआ है और जिन क्षेत्रों की पहचान कभी हिंसा से होती थी, वे अब सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, कनेक्टिविटी, निवेश और अवसरों के लिए पहचाने जा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने AIIMS रायपुर को “नए छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक” बताया, जो भय और अभाव के दौर से निकलकर शांति, प्रगति और संभावनाओं के युग की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने संस्थान की उन्नत चिकित्सा और प्रत्यारोपण सेवाओं में उपलब्धियों की भी सराहना की। छत्तीसगढ़ में पहला स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता, रीनल और कॉर्नियल ट्रांसप्लांट तथा कान के इम्प्लांट जैसी उपलब्धियों को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संतुलित विकास को आवश्यक बताते हुए कहा कि यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हर राज्य, जिला और गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा।

उच्च शिक्षा को विकसित भारत की दृष्टि का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने पिछले 12 वर्षों में उच्च शिक्षा के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर भी प्रकाश डाला। वर्ष 2014-15 में महिला नामांकन 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया—अर्थात 42.2 प्रतिशत की वृद्धि। AIIMS रायपुर के दीक्षांत समारोह में भी 376 छात्राओं और 313 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं।

स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने उनसे “ड्रग्स को दृढ़ता से ना कहने” तथा ऐसा भारत बनाने में योगदान देने का आह्वान किया, जहां तकनीक अंतिम नागरिक तक पहुंचे और प्रत्येक युवा भारतीय बेहतर भविष्य का सपना देख सके।

उन्होंने कहा:

“आपका ज्ञान उपचार करे, आपका अनुसंधान नवाचार करे और आपकी सेवा प्रेरणा बने।”

उपराष्ट्रपति ने AIIMS रायपुर को चिकित्सा उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार, जनस्वास्थ्य और करुणामय सेवा के क्षेत्र में निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि छत्तीसगढ़ का परिवर्तन विकसित भारत 2047 की व्यापक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनेगा।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए।

समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, AIIMS रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और कार्यकारी निदेशक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय उन्मूलन मिशन की उपलब्धियों को सराहा

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ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने सिकल सेल रोग के उन्मूलन की दिशा में देश द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण चुनौती से निपटने की सार्थक पहल बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा किया जाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक की आयु के लगभग 7 करोड़ लोगों की जांच की गई है, जो विश्व के सबसे बड़े आनुवंशिक रोग स्क्रीनिंग अभियानों में से एक है।

उन्होंने कहा कि मिशन मोड में की गई स्क्रीनिंग के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 2.5 लाख सिकल सेल रोगियों की पहचान की गई है, जबकि 20 लाख से अधिक वाहकों (Carriers) का भी पता लगाया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वाहकों की पहचान भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने और उनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल मरीजों और वाहकों की पहचान की है, बल्कि उनके उचित उपचार और स्वास्थ्य देखभाल की भी व्यवस्था सुनिश्चित की है।

उन्होंने विशेष रूप से मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलाए गए "स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान" के तहत 4 लाख से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर "सिकल मित्र" पहल शुरू की थी। इस पहल के अंतर्गत सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा एनसीसी कैडेट्स के प्रतिनिधियों को जागरूकता फैलाने और मरीजों की सहायता के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राज्यों की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयासों से भारत वर्ष 2047 से पहले ही सिकल सेल रोग से मुक्ति के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा।


जहां कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी सपना था, वहां अब डॉक्टर दे रहे दस्तक : बस्तर के जंगलों तक पहुंची स्वास्थ्य क्रांति

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दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन : केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

पुराने सुरक्षा शिविर अब बन रहे जन सुविधा केंद्र

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा उपस्थित थे।

बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ  क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास  संभावित है।

"नर्सिंग सिस्टर" अब कहलाएंगी "सीनियर नर्सिंग ऑफिसर",स्टाफ नर्स का नाम होगा नर्सिंग ऑफिसर

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स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की घोषणा की

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभारः श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर राज्य की नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की बड़ी घोषणा की है। इस घोषणा के अनुसार "नर्सिंग सिस्टर" अब "सीनियर नर्सिंग ऑफिसर" कहलाएंगी जबकि स्टाफ नर्स का नाम नर्सिंग ऑफिसर होगा।  

डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ये घोषणा की है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी व नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ अस्पताल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मरीजों की सेवा में नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो दिन-रात समर्पण भाव से मरीजों की देखभाल कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में मानवीय संवेदनाओं और सेवा भाव का सबसे बड़ा उदाहरण नर्सिंग स्टाफ प्रस्तुत करता है।  उन्होंने कोविड काल में नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी नर्सों ने समर्पण और सेवा भाव के साथ कार्य किया। चिकित्सा सेवा में नर्स माँ के समान होती है। उनका दर्जा माँ के समान उच्च है क्योंकि वे मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करती हैं। 

स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्षों से लंबित कई सुविधाओं और व्यवस्थाओं को पूरा किया जा रहा है। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री ने सीनियर नर्सिंग ऑफिसर डॉ. रीना राजपूत, नीलिमा शर्मा, रंजना सिंह ठाकुर, सुमन देवांगन, कोमेश्वरी नवरंगे, प्रगति सतपुते, शीतल सोनी और नमिता डेनियल सहित पूरे नर्सिंग ऑफिसर को बधाई देते हुए उनके कार्यों की सराहना की।

JANANI प्लेटफॉर्म लॉन्च: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा डिजिटल मजबूती

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देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘JANANI’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करेगा।


JANANI प्लेटफॉर्म गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु देखभाल और परिवार नियोजन जैसी सेवाओं की ट्रैकिंग करेगा। इसमें QR आधारित डिजिटल मदर एंड चाइल्ड हेल्थ कार्ड, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी अलर्ट, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा दी गई है।

यह प्लेटफॉर्म U-WIN और POSHAN जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से भी जुड़ा होगा, जिससे लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। अब तक JANANI पर 1.34 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है।

भारत में वज़न घटाने वाली GLP-1 दवाओं की बिक्री पर सख्ती

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नई दिल्ली- भारत में वज़न घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली GLP-1 आधारित दवाओं की बढ़ती मांग और उनके गलत उपयोग को देखते हुए ड्रग्स कंट्रोलर ऑफ इंडिया (CDSCO) ने देशभर में इन दवाओं की बिक्री और प्रचार पर निगरानी कड़ी कर दी है।

हाल के समय में इन दवाओं के कई जनरिक (सस्ते) वेरिएंट बाजार में आए हैं, जिसके बाद यह दवाएं रिटेल मेडिकल स्टोर्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, थोक विक्रेताओं और वेलनेस क्लीनिक्स के जरिए आसानी से उपलब्ध होने लगी हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के इनका उपयोग करने से गंभीर साइड इफेक्ट्स और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

सरकार की बड़ी कार्रवाई

स्थिति को गंभीरता से लेते हुए, केंद्र सरकार और राज्य औषधि नियामकों ने मिलकर सप्लाई चेन में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।

  • 10 मार्च 2026 को एडवाइजरी जारी
    सभी दवा कंपनियों को निर्देश दिया गया कि वे:

    • किसी भी तरह के भ्रामक या अप्रत्यक्ष विज्ञापन (Surrogate Ads) न करें

    • दवाओं के गलत या ऑफ-लेबल उपयोग को बढ़ावा न दें

देशभर में जांच और निरीक्षण

पिछले कुछ हफ्तों में जांच अभियान तेज किया गया:

  • 49 संस्थानों का निरीक्षण, जिनमें शामिल हैं:

    • ऑनलाइन फार्मेसी वेयरहाउस

    • थोक दवा विक्रेता

    • रिटेल मेडिकल स्टोर

    • वेलनेस और स्लिमिंग क्लीनिक्स

  • जांच में फोकस रहा:

    • बिना अनुमति दवा बिक्री

    • गलत प्रिस्क्रिप्शन प्रैक्टिस

    • भ्रामक मार्केटिंग

  • नियम तोड़ने वालों को नोटिस जारी किए गए हैं

कौन लिख सकता है ये दवा?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि GLP-1 दवाएं केवल इन विशेषज्ञ डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन पर ही दी जा सकती हैं:

  • एंडोक्राइनोलॉजिस्ट

  • इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ

  • कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट

नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई

नियामक ने चेतावनी दी है कि आगे भी निगरानी जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर:

  • लाइसेंस रद्द

  • जुर्माना

  • कानूनी कार्रवाई

जैसे कदम उठाए जाएंगे।

आम जनता के लिए सलाह

सरकार ने लोगों से अपील की है कि:

  • वज़न घटाने की दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के न लें

  • केवल प्रमाणित विशेषज्ञ से परामर्श लें

  • ऑनलाइन या बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाएं खरीदने से बचें

निष्कर्ष

GLP-1 दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है, ताकि लोगों की सेहत सुरक्षित रहे और दवाओं का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ में बोले जे. पी. नड्डा, भारत को वैश्विक स्वास्थ्य हब बनाने पर जोर

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा आयोजित ‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ के 8वें संस्करण को वर्चुअल रूप से संबोधित किया।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने एक मजबूत, उच्च गुणवत्ता वाली और वैश्विक मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य प्रणाली बनाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मजबूत भागीदारी भारत की स्वास्थ्य सेवाओं की वैश्विक मान्यता और विश्वसनीयता को दर्शाती है।

मंत्री नड्डा ने इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के निरंतर आयोजन के लिए FICCI की सराहना की, जिसने भारत को मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के लिए एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच वैश्विक स्वास्थ्य हितधारकों के साथ संवाद, साझेदारी और निवेश को बढ़ावा देते हैं।

मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह भारत के वैश्विक स्वास्थ्य जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण आयाम है। उन्होंने कहा कि यह भारत की नैदानिक उत्कृष्टता, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सेवाएँ, पारदर्शी शासन ढांचा और रोगी-केंद्रित देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भारत के अत्यधिक कुशल चिकित्सा पेशेवर और आधुनिक स्वास्थ्य अवसंरचना हृदय रोग, कैंसर, अंग प्रत्यारोपण, ऑर्थोपेडिक्स और न्यूरोसाइंस सहित कई क्षेत्रों में उन्नत उपचार प्रदान करते हैं। मंत्री ने कहा कि उन्नत तकनीकों, डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों और गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों के एकीकरण से रोगी परिणाम और सेवा वितरण और मजबूत हुआ है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि भारत सरकार मंत्रालयों, नियामक प्राधिकरणों, मान्यता एजेंसियों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाकर मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के समर्थन में पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल ट्रैवल को केवल आर्थिक अवसर ही नहीं, बल्कि देशों के बीच विश्वास और जन-जन संबंधों को मजबूत करने के माध्यम के रूप में भी देखती है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ वैश्विक स्वास्थ्य गतिशीलता के भविष्य को आकार देने, सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज और सहभागिता को गहरा करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और हितधारकों से सक्रिय भागीदारी, सार्थक सहयोग और भारत की विशाल संभावनाओं को खोजने का आह्वान किया।

अपने वर्चुअल संबोधन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री और आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने स्वास्थ्य सेवा के वैश्विक और सहयोगात्मक स्वरूप पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवा केवल राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सहयोग, प्रौद्योगिकी, ज्ञान के आदान-प्रदान और साझा जिम्मेदारी से आकार लेती है।

मंत्री जाधव ने भारत के एकीकृत दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र उन्नत नैदानिक क्षमताओं, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार, मजबूत फार्मास्युटिकल क्षमता और वैश्विक जुड़ाव के लिए प्रतिबद्ध संस्थानों के बढ़ते नेटवर्क के साथ एक गतिशील और एकीकृत प्रणाली में विकसित हो गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यापक ढांचा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मरीजों की सेवा करने की भारत की क्षमता को मजबूत करता है।

राज्य मंत्री ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ एकीकृत करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह एकीकृत देखभाल मॉडल भारत के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो नवाचार के साथ परंपरा और उपचार के साथ रोकथाम को महत्व देता है। उन्होंने कहा कि ऐसा दृष्टिकोण समग्र और टिकाऊ स्वास्थ्य परिणामों में योगदान देता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ वैश्विक स्वास्थ्य सेवा वितरण में भारत की विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थिति को और मजबूत करेगा और सीमा पार स्थायी सहयोग को बढ़ावा देगा।

सत्र का समापन भारत की व्यापक स्वास्थ्य क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी के आधिकारिक उद्घाटन के साथ हुआ, जिसमें प्रमुख अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेवाएँ, उन्नत चिकित्सा तकनीकें, फार्मास्युटिकल ताकत, वेलनेस सेंटर और सहायक स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल थीं, जो भारत के स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र की व्यापकता और गहराई को दर्शाती हैं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, स्वास्थ्य उद्योग के प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि और अन्य हितधारक उपस्थित थे।

एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026 के बारे में

एडवांटेज हेल्थ केयर इंडिया 2026 का उद्देश्य रोगी गतिशीलता, ज्ञान आदान-प्रदान, कौशल विकास और संस्थागत साझेदारी को बढ़ावा देना है, साथ ही मेडिकल वैल्यू ट्रैवल में नियामक समन्वय और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है। यह मंच उच्च गुणवत्ता, तकनीक-संचालित और समग्र स्वास्थ्य समाधान प्रदान करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है और देश को एक मजबूत, समावेशी और भविष्य-तैयार वैश्विक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करता है।

कोयंबटूर में स्वास्थ्य क्षेत्र के दो बड़े कार्यक्रमों में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन शामिल, ‘स्वस्थ भारत–विकसित भारत’ पर दिया जोर

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कोयंबटूर- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित दो प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन को रेखांकित किया।

उपराष्ट्रपति ने कोवाई मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल (केएमसीएच) में केएमसीएच इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज एवं ओपीडी ब्लॉक तथा केएमसीएच मेडिकल कॉलेज पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने कोडिसिया हॉल, कोयंबटूर में आयोजित रामकृष्णा हॉस्पिटल के स्वर्ण जयंती समारोह और रामकृष्णा डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

दोनों कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये संस्थान गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और करुणा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल एक सेवा क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मिशन है।

उन्होंने सरकार की पहलों के साथ तालमेल बिठाने में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सरकारी संस्थानों के साथ-साथ विश्वसनीय निजी चिकित्सा संस्थान ‘स्वस्थ भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’ की दिशा में देश की यात्रा में अहम भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार हो रहे हैं। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना बन चुकी है, जिससे लगभग 50 करोड़ नागरिकों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है और गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है। साथ ही, देशभर में स्थापित स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों ने निवारक और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती दी है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल और गैर-संचारी रोगों का प्रबंधन भी शामिल है।

चिकित्सा पेशेवरों की कमी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। पिछले एक दशक में एमबीबीएस सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वर्ष 2029 तक 75,000 और सीटें जोड़ने की योजना है। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 300 से अधिक नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जिससे चिकित्सा शिक्षा महानगरों से बाहर तक पहुंची है।

केएमसीएच इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के उद्घाटन के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां वैश्विक स्तर पर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रही हैं। अत्याधुनिक न्यूरो-नेविगेशन और रोबोटिक सर्जरी सुविधाओं से युक्त यह संस्थान समय की जरूरत को पूरा करने वाला एक दूरदर्शी कदम है।

रामकृष्णा हॉस्पिटल के स्वर्ण जयंती समारोह में उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2016 में बनाए गए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की सराहना की, जब केवल आठ घंटे में 13,206 अंगदान प्रतिज्ञाएं एकत्र की गई थीं।

भारतीय सभ्यतागत सोच का उल्लेख करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत में सदैव अच्छे स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। उन्होंने दोहराया कि “स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की नींव है” और स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को लागत नहीं, बल्कि देश के भविष्य में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने दोनों कार्यक्रमों के दौरान लोगों से संवाद किया और सभी को पोंगल पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की

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रायपुर की IPHL देश की पहली NQAS प्रमाणित प्रयोगशाला बनी – छत्तीसगढ़ ने स्थापित किया राष्ट्रीय मानक

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ को दी बधाई: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आभार व्यक्त किया, राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने का संकल्प दोहराया

रायपुर- केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जिला अस्पताल रायपुर स्थित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी (IPHL) को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल करने के लिए बधाई दी है।

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को लिखे  पत्र में नड्डा ने उल्लेख किया कि रायपुर IPHL देश में अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला बन गई है, जिसे यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की विश्वसनीय एवं क्वालिटी-अश्योर्ड डायग्नोस्टिक सेवाएँ प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और रायपुर जिला अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में जनविश्वास को मजबूत किया है और सेवा-प्रदाय के नए मानक स्थापित किए हैं।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने आगे कहा कि IPHL की स्थापना प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन (PM-ABHIM) का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह मिशन पूरे देश में स्वास्थ्य निगरानी, प्रयोगशाला नेटवर्क और आपदा तैयारी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस मिशन का मूल उद्देश्य गुणवत्ता-सुनिश्चित, अस्पताल-विशिष्ट एवं रोग-विशिष्ट प्रयोगशाला निदान उपलब्ध कराना है। रायपुर IPHL को प्रदान किया गया यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि प्रयोगशाला ने अपने मानव संसाधन, अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत अधो संरचना का सफलतापूर्वक एकीकरण करते हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को प्राप्त किया है।

केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह किया कि वह रायपुर मॉडल को श्रेष्ठ अभ्यास (बेस्ट प्रैक्टिस) के रूप में अपनाते हुए राज्य के अन्य जिलों और क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार  जिलों में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला एवं डायग्नोस्टिक सेवाओं का निरंतर विस्तार करती रहेगी। उन्होंने कहा कि  यह उपलब्धि प्रौद्योगिकी-सक्षम और मानक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को भी दर्शाती है। यह प्रमाणन संस्थागत परिपक्वता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता आश्वासन की सुदृढ़ होती संस्कृति का परिचायक है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रायपुर IPHL को प्राप्त NQAS प्रमाणन छत्तीसगढ़ की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि राज्य में प्रयोगशाला सेवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक उपकरणों और मजबूत अवसंरचना के क्षेत्र में सतत एवं परिणाममूलक सुधार किए गए हैं। जायसवाल ने कहा कि यह प्रमाणन केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों, लैब तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और जिला अस्पताल रायपुर की समर्पित टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य के अन्य जिलों में भी IPHL को इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, सटीक और विश्वसनीय जांच सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने पुनः आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता संवर्धन के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य परिवर्तन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान सुदृढ़ करेगा।

अमित शाह ने अहमदाबाद में IMA NATCON 2025 को किया संबोधित, कहा— विकसित भारत के निर्माण में डॉक्टरों की भूमिका निर्णायक

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के अहमदाबाद में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन IMA NATCON 2025 को संबोधित किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


अमित शाह ने कहा कि जब कोई संस्था अपने 100 वर्ष पूरे करती है, तो वह अपने पीछे एक लंबा और गौरवशाली इतिहास छोड़ जाती है। उन्होंने कहा कि IMA के शताब्दी वर्ष में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में संगठन द्वारा किए गए योगदान को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि सेवा भावना, कर्तव्यबोध और उपलब्धियों की प्रेरणा जनमानस में और मजबूत हो। साथ ही यह समय स्वास्थ्य क्षेत्र में आए परिवर्तनों—RMP से लेकर विशेषज्ञता तक—के अनुरूप स्वयं को ढालने का भी है।

गृह मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र मूलतः सेवा का क्षेत्र है। जब कोई गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति डॉक्टर के पास जाता है, तो वह डॉक्टर में भगवान का स्वरूप देखता है। उन्होंने कहा कि 100 वर्ष पहले तय किए गए नैतिक मानदंड आज के समय में प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। अब समय आ गया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की नैतिकता (Ethics) को पुनः परिभाषित किया जाए। उन्होंने IMA से आग्रह किया कि वह एक समिति बनाकर आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करे और इन्हें चिकित्सा शिक्षा का हिस्सा बनाने के लिए भारत सरकार को सुझाव दे।

अमित शाह ने कहा कि केवल मेडिकल डिग्री प्राप्त कर लेना ही एक अच्छे डॉक्टर की पहचान नहीं है, बल्कि नैतिकता, सेवा भाव और संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। नैतिकता को कानून से थोपा नहीं जा सकता, यह एक नैतिक विषय है, जिसे आत्मसात करना होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि देश को विश्व में हर क्षेत्र में प्रथम स्थान पर लाने के लिए मानसिक, शारीरिक और ऊर्जावान रूप से स्वस्थ जनसंख्या आवश्यक है, जिसमें डॉक्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 2014 से 2025 के बीच सरकार ने समग्र दृष्टिकोण से मजबूत स्वास्थ्य इकोसिस्टम विकसित किया है।

उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन, फिट इंडिया, खेलो इंडिया और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे अभियानों से स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता बढ़ी है और योग अपनाने वालों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आयुष्मान भारत योजना के तहत देशभर में गरीबों को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया गया है, जबकि कई राज्यों में यह सीमा ₹15 लाख तक पहुंच चुकी है।

गृह मंत्री ने कहा कि मिशन इंद्रधनुष, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य केंद्रों, जेनेरिक दवा दुकानों, AIIMS के विस्तार और टेलीमेडिसिन जैसी पहलों से स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि 2013-14 में जहां स्वास्थ्य बजट ₹37 हजार करोड़ था, वहीं आज यह बढ़कर ₹1.28 लाख करोड़ हो गया है।

उन्होंने कहा कि मलेरिया में 97 प्रतिशत की कमी, कालाजार में 90 प्रतिशत से अधिक सुधार, डेंगू मृत्यु दर में भारी गिरावट, मातृ मृत्यु दर में 25 प्रतिशत कमी और शिशु मृत्यु दर में 50 प्रतिशत कमी इन योजनाओं की सफलता का प्रमाण है।

कोविड-19 महामारी के दौरान डॉक्टरों की भूमिका की सराहना करते हुए अमित शाह ने कहा कि उस कठिन समय में देश के डॉक्टरों ने अपने जीवन की परवाह किए बिना सेवा की और पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि IMA का योगदान टीकाकरण, रक्तदान शिविरों और हेल्पलाइनों के माध्यम से अभूतपूर्व रहा।

गृह मंत्री ने IMA से आग्रह किया कि वह बीमारी से वेलनेस की ओर फोकस करे, शोध में लगे डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने की योजना बनाए और टेलीमेडिसिन के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करे।

उन्होंने कहा कि 27 राज्यों से आए 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी इस सम्मेलन की व्यापकता को दर्शाती है और नए अध्यक्ष के नेतृत्व में IMA देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की 21वीं वार्षिक दीक्षांत समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया संबोधन

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के 21वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज कुमार, उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री मयंकशवर शरण सिंह और भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद उपस्थित रहे।

नड्डा ने नए स्नातकों को बधाई दी और KGMU द्वारा चिकित्सा शिक्षा और रोगी देखभाल के क्षेत्र में किए गए योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “KGMU 2025 के NIRF रैंकिंग में 8वें स्थान पर है और इसके 12 फैकल्टी मेंबर्स स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में सूचीबद्ध हैं, जो वास्तव में प्रशंसनीय उपलब्धि है।”

केंद्रीय मंत्री ने पिछले दशक में भारत में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले सदी के अंत में देश में केवल एक AIIMS था, जबकि आज भारत में 23 AIIMS संस्थान हैं, जो हर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशिक्षण को पहुँचाने के सरकार के संकल्प को दर्शाते हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी प्रकार, स्नातक चिकित्सा सीटें 51,000 से बढ़कर 1,19,000 और पोस्टग्रेजुएट सीटें 31,000 से बढ़कर 80,000 हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशानुसार 2029 तक स्नातक और पोस्टग्रेजुएट स्तर पर अतिरिक्त 75,000 सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें से एक वर्ष में ही 23,000 से अधिक सीटें जोड़ दी गई हैं।

नड्डा ने यह भी बताया कि आज देश में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मन्दिर संचालित हैं, जो व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत – PMJAY योजना के तहत 62 करोड़ से अधिक लोग, यानी देश की 40% से अधिक आबादी, 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य कवरेज का लाभ प्राप्त कर रही है।

केंद्रीय मंत्री ने स्नातकों से आग्रह किया कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करें। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक MBBS छात्र पर 30-35 लाख रुपये खर्च करती है, इसलिए डॉक्टरों को समाज सेवा और चिकित्सा विज्ञान में उत्कृष्टता के लिए समर्पित रहना चाहिए।

इस अवसर पर, 81 छात्रों और एक फैकल्टी सदस्य को उनके शैक्षणिक, नैदानिक और शोध कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। पुरस्कारों में गोल्ड और सिल्वर मेडल, मेरिट सर्टिफिकेट, पुस्तक पुरस्कार, नकद पुरस्कार और सर्वोत्तम थीसिस तथा सर्वश्रेष्ठ निवासी के लिए पुरस्कार शामिल हैं।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि “120 से अधिक वर्षों से KGMU चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और मानव सेवा में एक मील का पत्थर रही है।” उन्होंने उत्तर प्रदेश में चिकित्सा क्षेत्र में हुए प्रगति का भी उल्लेख किया।

इस समारोह में KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यनंद (पद्म श्री पुरस्कार प्राप्त), डीन प्रो. अपजीत कौर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


अध्ययन में महिलाओं के ओरल कैंसर में विशिष्ट CASP8 जीन म्यूटेशन की पहचान

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भारतीय वैज्ञानिकों ने दक्षिण भारत की महिला मरीजों में मौखिक कैंसर (ओरल कैंसर) उत्पन्न करने वाले ड्राइवर जीन म्यूटेशन की खोज की है। भारत दुनिया में ओरल कैंसर का सबसे अधिक बोझ झेलने वाले देशों में शामिल है, विशेषकर दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत की महिलाओं में इसकी दर चिंताजनक रूप से अधिक है। इसका मुख्य कारण तंबाकू-मिश्रित पान, सुपारी, गुटखा और संबंधित उत्पादों का व्यापक सेवन है। जहाँ पुरुषों में इस रोग पर काफी शोध हुए हैं, वहीं महिलाओं में होने वाला ओरल कैंसर अब तक काफी हद तक अनदेखा रहा है।

मरीजों के जीन का अनुक्रमण

जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बेंगलुरु और BRIC-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG), कल्याणी के वैज्ञानिकों ने देवराज उर्स अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (SDUAHER), कोलार के चिकित्सकों के साथ मिलकर एक महिला-केंद्रित अध्ययन किया है, जिसमें दक्षिण भारत की महिलाओं की एक विशिष्ट तंबाकू चबाने की आदत का विश्लेषण किया गया।

यह अध्ययन JNCASR, बेंगलुरु के प्रो. तापस के. कुंडू के नेतृत्व में किया गया, जिसका उद्देश्य यह समझना था कि महिलाओं में कैंसर कैसे विशिष्ट रूप से विकसित होता है, बीमारी किस प्रकार प्रकट होती है और आगे बढ़ती है, तथा इन मरीजों के उपचार को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।

जीन अनुक्रमण से प्राप्त बड़ी खोज

कोलार जिले की महिलाओं में प्रचलित एक विशिष्ट तंबाकू-चबाने की आदत (कड्डीपुड़ी) वाली OSCC-GB महिला मरीजों के ट्यूमर और रक्त के नमूनों पर Whole-exome sequencing (WES) और copy-number array प्रोफाइलिंग की गई। इस विश्लेषण से मौखिक कैंसर बनने की प्रक्रिया में शामिल एक अनोखे ड्राइवर म्यूटेशन की पहचान हुई।

यह अध्ययन Clinical and Translational Medicine Journal में प्रकाशित हुआ और इसका उद्देश्य उन जैविक कारणों को उजागर करना था, जिनके कारण भारतीय महिलाओं में ओरल कैंसर अत्यंत आक्रामक, पुनरावर्ती और जीवन-घातक रूप में सामने आता है।

उन्नत जीनोमिक तकनीकों के उपयोग से, शोधकर्ताओं ने कोलार (SDUAHER) की महिला मरीजों में 10 प्रमुख जीनों में महत्वपूर्ण म्यूटेशन पाए।

हालांकि दो प्रमुख जीन CASP8 और TP53 में उच्च म्यूटेशन पाए गए, लेकिन विशिष्ट रूप से CASP8 को एक प्रमुख ड्राइवर म्यूटेशन (कैंसर उत्पन्न करने वाला) पाया गया — जो पहले अध्ययन किए गए पुरुष-प्रधान ओरल कैंसर मामलों से अलग है।

शोध के मुख्य निष्कर्ष

  • छोटे समूह (N=38) के बावजूद, TP53 और CASP8 के संयुक्त म्यूटेशन से अत्यंत आक्रामक और घातक प्रकार का मौखिक कैंसर विकसित होने की पुष्टि हुई।

  • टीम अब इस नए ड्राइवर म्यूटेशन और TP53 परिवर्तन की पृष्ठभूमि में कैंसर बनने की आणविक प्रक्रिया को समझने के लिए आगे के शोध पर काम कर रही है।

  • शोधकर्ताओं ने ट्यूमर ऊतकों की डिजिटल जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (डीप लर्निंग) का उपयोग किया और दो अलग-अलग समूहों की पहचान की, जिनमें प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया भिन्न थी। यह संकेत देता है कि उपचार मरीज की प्रतिरक्षा प्रोफ़ाइल के आधार पर अधिक प्रभावी ढंग से अनुकूलित किया जा सकता है।

महत्व और आगे की दिशा

यह क्रांतिकारी अध्ययन कैंसर शोध में एक नया मानक स्थापित करता है।
यह न केवल महिलाओं को जैव-चिकित्सा अनुसंधान में अधिक शामिल करने की आवश्यकता पर बल देता है, बल्कि भारत में ओरल कैंसर से निपटने के लिए व्यक्तिगत चिकित्सा (personalized medicine) की दिशा भी दिखाता है — एक ऐसा रोग जो देश में हजारों जानें ले चुका है।

हालांकि, इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए अधिक बड़े और विविध मरीज समूहों पर शोध की आवश्यकता होगी।


इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) ने नागालैंड के स्वास्थ्य विभाग के साथ तीन समझौता ज्ञापन (MoU) किए

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भारतीय फार्माकोपिया कमीशन (IPC), गाजियाबाद, जो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है, ने आज नागालैंड में आयोजित “फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस” प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान नागालैंड मेडिकल काउंसिल, नागालैंड स्टेट ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (NSDCA), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, नागालैंड और स्टेट फार्मेसी काउंसिल, नागालैंड सरकार के साथ तीन समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य IPC के सहयोगात्मक प्रयासों को मजबूत करना था ताकि राज्य में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के सुरक्षित उपयोग, फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके और मरीजों की सुरक्षा के लिए पहल की जा सके।

समझौता ज्ञापन पर IPC के सचिव एवं वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कैलाइसेलवन ने नागालैंड मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. केविलहुलिये मेयासे, NSDCA की असिस्टेंट ड्रग्स कंट्रोलर श्रीमती इम्लिलीला और स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार  खेले थोरी के साथ हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम में MoHFW के AS&FA हौवेदा अब्बास और नागालैंड स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव अनूप खिंची भी उपस्थित थे।

विशेष रूप से, NSDCA के साथ MoU IPC का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में पहला समझौता है। नागालैंड मेडिकल काउंसिल के साथ MoU फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया और मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया को बढ़ावा देने के लिए किसी राज्य मेडिकल काउंसिल के साथ पहला MoU है। स्टेट फार्मेसी काउंसिल, नागालैंड के साथ MoU फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस गतिविधियों को मजबूत करने और दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए देश में चौथा MoU है।

इस समझौते के तहत IPC, NSDCA, नागालैंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल और नागालैंड मेडिकल काउंसिल के साथ मिलकर फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस गतिविधियों को मजबूत करेगा, दवा/चिकित्सा उपकरणों के प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्टिंग को बढ़ावा देगा, और राष्ट्रीय फार्मेसी ऑफ इंडिया (NFI) का उपयोग सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में मानक संदर्भ दस्तावेज के रूप में सुनिश्चित करेगा।

साथ ही, यह MoU सभी हितधारकों, जैसे चिकित्सक, फार्मासिस्ट, नर्स और वैज्ञानिक कर्मियों के लिए क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा और IPC के सहयोग से वार्षिक नेशनल फार्माकोविजिलेंस वीक का आयोजन सुनिश्चित करेगा।

इस सहयोग से क्षेत्र में पेशेवर सहभागिता बढ़ेगी, ADR मॉनिटरिंग सेंटर और मेडिकल डिवाइस मॉनिटरिंग सेंटर के माध्यम से रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन मिलेगा, और दवा सुरक्षा निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा। IPC तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञ समर्थन प्रदान करेगा, जबकि NSDCA और स्टेट फार्मेसी काउंसिल मेडिकल कॉलेज, अस्पताल, फार्मासिस्ट, ड्रग्स इंस्पेक्टर और उद्योग हितधारकों के साथ समन्वय करेगा।

यह साझेदारी मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने और दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने में IPC की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

IPC और JSPC ने दवा सुरक्षा और फार्माकोविजिलेंस को मजबूत करने के लिए किया महत्वपूर्ण MoU हस्ताक्षर

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भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC), गाज़ियाबाद, जो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्था है, ने आज झारखंड राज्य फार्मेसी परिषद (JSPC) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस MoU का उद्देश्य झारखंड राज्य में दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना, फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस गतिविधियों को सुदृढ़ करना, तथा रोगी सुरक्षा संबंधी पहलों को आगे बढ़ाना है।

यह MoU डॉ. वी. कलैसेलवन, सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक, IPC, और प्रसान्त कुमार पांडे, रजिस्ट्रार-सह-सचिव, JSPC द्वारा, दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।

इस सहयोग के तहत, IPC और JSPC पंजीकृत फार्मासिस्टों की क्षमता-निर्माण के लिए मिलकर कार्य करेंगे, विशेषकर प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया (ADR) रिपोर्टिंग, फार्माकोविजिलेंस एवं मैटेरियोविजिलेंस प्रथाओं, तथा दवाओं के सुरक्षित उपयोग जैसे क्षेत्रों में। साझेदारी का उद्देश्य झारखंड के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में नेशनल फार्म्युलेरी ऑफ इंडिया (NFI) को एक मानक संदर्भ दस्तावेज के रूप में अपनाने को सुदृढ़ करना और फार्मासिस्टों द्वारा इसके सुव्यवस्थित उपयोग को बढ़ावा देना है ताकि तर्कसंगत दवा वितरण और सुरक्षित दवा प्रथाओं को सुनिश्चित किया जा सके।

यह सहयोग अस्पताल और सामुदायिक फार्मासिस्टों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, संस्थागत फार्मेसी सिस्टम में NFI के अनिवार्य उपयोग को बढ़ावा देने, तथा IPC के सहयोग से राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह का वार्षिक आयोजन सुनिश्चित करने जैसे समन्वित प्रयासों को भी शामिल करता है।

इस MoU से पेशेवर भागीदारी में वृद्धि, ADR रिपोर्टिंग में व्यापक सहभागिता को प्रोत्साहन, और राज्य में दवा सुरक्षा निगरानी तंत्र को मजबूत करने की अपेक्षा है। IPC इन पहलों के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञ समर्थन प्रदान करेगा, जबकि JSPC सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के फार्मासिस्टों के साथ समन्वय कर इन गतिविधियों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेगा।

IPC और JSPC के बीच यह सहयोग दवा सुरक्षा में सुधार और साक्ष्य-आधारित फार्मेसी प्रथाओं को बढ़ावा देते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत में नर्सिंग नीति और सुधारों को सशक्त बनाने हेतु तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ज्हपाइगो (Jhpiego) के सहयोग से भारत में नर्सिंग नीति प्राथमिकताओं और सर्वोत्तम प्रथाओं पर राष्ट्रीय परामर्श एवं अनुभव साझा करने पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य नर्सिंग और दाई (मिडवाइफरी) क्षेत्र में नीति संवाद को सशक्त बनाना और सुधारों को आगे बढ़ाना है।

इस परामर्श में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नियामकों, नर्सिंग शिक्षकों, व्यावसायिक संघों और विकास सहयोगियों सहित देशभर के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य चल रही पहलों की समीक्षा करना, नई चुनौतियों की पहचान करना और नर्सिंग प्रशासन, शिक्षा और कार्यबल प्रबंधन को भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप मजबूत करने के लिए नवोन्मेषी मॉडल साझा करना था।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि नर्स और दाइयां भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर नर्सें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने बताया कि भारत में हाल के सुधार, जैसे राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग (NNMC) की स्थापना, क्षमता-आधारित पाठ्यक्रमों को अपनाना, और नियामक ढांचे का आधुनिकीकरण — नर्सिंग इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

स्वास्थ्य सचिव ने यह भी कहा कि राज्यों से प्राप्त सर्वोत्तम प्रथाएं (Best Practices) राष्ट्रीय नीति निर्माण के लिए मार्गदर्शक इनपुट के रूप में कार्य करेंगी और अन्य राज्यों को भी इन मॉडलों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए ताकि पूरे देश में नर्सिंग क्षेत्र में सुधार लाया जा सके।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. वी.के. पॉल ने मंत्रालय और WHO को इस महत्वपूर्ण परामर्श के आयोजन के लिए सराहा। उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली वैश्विक स्तर पर अपनी गुणवत्ता और नर्सिंग कार्यबल की प्रतिबद्धता के कारण सम्मानित है। उन्होंने नर्सिंग को भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बताते हुए नर्सों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और सेवा के दौरान प्रशिक्षण एवं कौशल संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

इस अवसर पर भारत में WHO की प्रतिनिधि डॉ. पेडेन ने नर्सिंग और मिडवाइफरी क्षेत्र में भारत की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व के सबसे बड़े नर्सिंग कार्यबल योगदानकर्ताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में 2030 तक नर्सों की कमी में अपेक्षित कमी का श्रेय भारत की नीतियों और सुधारों को जाता है।

कार्यशाला में प्रतिभागियों ने नीति प्राथमिकताओं जैसे कार्यबल का समान वितरण, शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना, नेतृत्व विकास और नर्सिंग पेशेवरों के लिए करियर प्रगति के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।

तीन दिवसीय कार्यशाला में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चा और राज्यों की प्रस्तुतियाँ होंगी, जिनमें नर्सिंग शिक्षा, कार्यबल योजना और डिजिटल लर्निंग में नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रमाण-आधारित नीतिगत निर्णय लेना और राज्यों के बीच पारस्परिक सीख को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत में एक मजबूत, कुशल और सशक्त नर्सिंग कार्यबल सुनिश्चित किया जा सके।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की “स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स नर्सिंग रिपोर्ट” में वैश्विक नर्सिंग कार्यबल की प्रवृत्तियों और प्राथमिकताओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह रिपोर्ट यहां देखी जा सकती है:

भारत को वैश्विक वेलनेस डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में अग्रसर: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित 22वें सीआईआई वार्षिक स्वास्थ्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को सरकार के निरंतर सुलभता (affordability) पर केंद्रित दृष्टिकोण से बहुत लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत (0%) कर दिया है, साथ ही चिकित्सा उपकरणों, कैंसर की दवाओं और अन्य आवश्यक दवाओं पर शुल्क में कमी की है ताकि उपचार अधिक से अधिक नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बन सके।

गोयल ने कहा कि सरकार आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उत्पादों पर शुल्क या उपकर (cess) में और कमी की संभावनाओं पर विचार करने के लिए खुली है, ताकि अधिक दवाएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे उन दवाओं और उत्पादों की सूची साझा करें जिन पर शुल्क में कमी से लाभ हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक “सुनने वाली सरकार (listening government)” है, जो सुझावों और विचारों के लिए हमेशा खुली है तथा सरकार, चिकित्सा पेशेवरों और स्वास्थ्य उद्योग के संयुक्त प्रयासों से न केवल भारत के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी बल्कि भारत को वैश्विक चिकित्सा एवं वेलनेस गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने जन औषधि केंद्रों की सफलता का भी उल्लेख किया, जो अब 10,000 से अधिक हो गए हैं, और जहाँ सस्ती जेनेरिक दवाएँ व स्वच्छता उत्पाद नाममात्र कीमतों पर उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को काफी राहत मिली है।

गोयल ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य मॉडल समावेशी और न्यायसंगत होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम ऐसा ढांचा नहीं अपना सकते जहाँ स्थानीय नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहें और ध्यान केवल अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पर्यटन पर केंद्रित हो।” उन्होंने ज़ोर दिया कि मजबूत घरेलू स्वास्थ्य प्रणाली भारत को चिकित्सा मूल्य यात्रा (medical value travel) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने में मदद करेगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार “अच्छा स्वास्थ्य एक समृद्ध समाज की नींव है” को दोहराते हुए कहा कि विकसित भारत (Viksit Bharat) 2047 के लक्ष्य की दिशा में डॉक्टरों और पूरे चिकित्सा तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

गोयल ने बताया कि जब 2014 में वर्तमान सरकार सत्ता में आई थी, तब भारत में केवल 7 एम्स (AIIMS) और 387 मेडिकल कॉलेज थे। अब यह संख्या बढ़कर 23 एम्स और 706 मेडिकल कॉलेज हो गई है। इससे डॉक्टरों की बढ़ती मांग पूरी होगी और भारत से विश्व को उत्कृष्ट चिकित्सा पेशेवरों का योगदान मिलता रहेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष लाल किले से घोषणा की थी कि 2029 तक मेडिकल सीटों की संख्या में बड़े पैमाने पर वृद्धि की जाएगी, जिससे चिकित्सा शिक्षा को और सशक्त बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 70 करोड़ लोग मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं के पात्र हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री की संवेदनशील नेतृत्व शैली का उदाहरण है 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, आय की परवाह किए बिना, मुफ्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का निर्णय।

गोयल ने मेडिकल टूरिस्ट्स के लिए वीजा ऑन अराइवल और ई-वीजा सुविधाओं का स्वागत किया, और कहा कि भारत पहले से ही कई देशों को यह सुविधा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी, विदेशों में लंबी प्रतीक्षा अवधि, और सस्ते इलाज की वजह से भारत एक विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने सुझाव दिया कि अस्पताल चाहें तो 10 प्रतिशत तक विदेशी मरीजों को सेवा दें और उनकी आय का कुछ हिस्सा आयुष्मान भारत या CSR कार्यक्रमों के माध्यम से गरीब वर्गों के लिए योगदान करें, जिससे विकास और समावेशन दोनों सुनिश्चित हों।

उन्होंने कहा कि भारत में विश्व-स्तरीय चिकित्सा सेवाएँ विकसित देशों की तुलना में एक-तिहाई या एक-चौथाई लागत पर उपलब्ध हैं। भारत के डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन और देखभाल करने वाले कर्मी पूरी दुनिया में मांग में हैं।

गोयल ने प्रमुख अस्पतालों से अनुरोध किया कि वे नर्सों और केयरगिवर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करें और सरकार एनआरआई डॉक्टरों को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में योगदान करने के लिए नीति विकल्पों पर विचार करने को तैयार है।

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत उसका आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक वेलनेस और करुणामय सेवा का संतुलित मेल है। उन्होंने कहा कि ‘हील इन इंडिया (Heal in India)’ में योग, आयुर्वेद, ध्यान और आध्यात्मिक पर्यटन को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि भारत को समग्र वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

उन्होंने कहा, “भारत के पास आधुनिक चिकित्सा कौशल, पारंपरिक वेलनेस विरासत, प्रतिभाशाली जनशक्ति और आतिथ्य की संस्कृति — सब कुछ है जो उसे दुनिया का नंबर एक वेलनेस डेस्टिनेशन बना सकता है।”

स्वास्थ्य मंत्री के गृह ग्राम की ऐतिहासिक उपलब्धि : जिले के खड़गवां सीएचसी को मिला ISO प्रमाणपत्र

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रायपुर-छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज करते हुए सरगुजा संभाग का पहला ISO प्रमाणित कोल्ड चेन प्वाइंट बनने का गौरव मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां ने हासिल किया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के गृह ग्राम खड़गवां में उनके सतत प्रयासों और दिशा-निर्देशों के परिणाम स्वरूप संभव हुई है। वहीं इस सफलता के पीछे सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे के कुशल मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग की समर्पित टीम की निरंतर मेहनत का अहम योगदान रहा।

कोल्ड चेन प्वाइंट खड़गवां को गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकताओं के पूर्ण अनुपालन में पाया गया है, जिसके चलते इसे ISO सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है। यह प्रमाणपत्र स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट प्रबंधन, पारदर्शिता और दक्षता का प्रतीक माना जा रहा है। इस प्रमाणन के साथ खड़गवां सीएचसी ने टीकों और रसद के सुरक्षित, वैज्ञानिक और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप भंडारण की नई मिसाल कायम की है। यहां सभी टीके CFC मुक्त और WHO प्रमाणित CCE तिथि वाले उपकरणों में अनुशंसित तापमान पर सुरक्षित रखे जाते हैं। आरआई टीकों और रसद की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावी बनाने के लिए ईवीआईएन (eVIN) के माध्यम से ऑनलाइन वास्तविक समय में स्टॉक अपडेट किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है। 

दिन में दो बार तापमान दर्ज कर टीकों की प्रभावकारिता सुनिश्चित की जाती है, वहीं वेब-आधारित डेटा लॉगर प्रणाली से उच्चस्तरीय सतत निगरानी भी की जाती है।

टीकों की आपूर्ति में FIFO (First In First Out) ) और  EEFO (Earliest Expiry First Out) दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है, जिससे शून्य अपव्यय (Zero Wastage) सुनिश्चित हो रहा है। इसके अलावा, आवश्यकतानुसार VVM  (Vaccine Vial Monitor) आधारित आपूर्ति प्रणाली भी लागू की गई है।

टीकों के भंडारण हेतु एक अलग ICE Pack Conditioning Area,  निर्बाध बिजली आपूर्ति व्यवस्था, उचित रैंकिंग सिस्टम वाला सूखा भंडारण क्षेत्र, और प्रशिक्षित व दक्ष मानव संसाधन की उपलब्धता से यह केंद्र सरगुजा संभाग का मॉडल स्वास्थ्य संस्थान बन गया है। कोल्ड चेन प्वाइंट में  NCCMIS सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपकरणों का सटीक प्रबंधन किया जा रहा है, साथ ही टीकाकरण अपशिष्ट निपटान प्रणाली को भी वैज्ञानिक और पर्यावरण हितैषी तरीके से अपनाया गया है।

एबीवीआईएमएस और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का 11वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, एनएमसी अध्यक्ष डॉ. अभिजात शेट ने दी बधाई

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एनएमसी अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेट की अध्यक्षता में एबीवीआईएमएस और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का 11वां दीक्षांत समारोह आयोजित

नई दिल्ली-नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेट की अध्यक्षता में आज अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ABVIMS) और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का 11वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक (DGHS) डॉ. सुनीता शर्मा और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव डॉ. विनोद कोटवाल भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. शेट ने उत्तीर्ण छात्रों, उनके अभिभावकों और फैकल्टी सदस्यों को बधाई दी और कहा कि सरकार पूरे देश में डॉक्टर-रोगी अनुपात को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अनुशंसा 1:1000 पर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) में 1:1 अनुपात सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि भारत की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता विकसित देशों के मानकों तक पहुँच सके।

उन्होंने यह भी कहा कि एनएमसी और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज द्वारा कौशल-आधारित और वर्चुअल लर्निंग को पारंपरिक शिक्षा पद्धति के साथ जोड़ने जैसे नवाचार किए जा रहे हैं। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, चुनौतियों का डटकर सामना करें और जीवनभर सीखते रहें।

डॉ. विनोद कोटवाल ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह अवसर वर्षों की मेहनत का परिणाम है और यह आपके जीवनभर के दायित्व का आरंभ है। उन्होंने एबीवीआईएमएस को हाल ही में प्राप्त NABH प्रत्यायन पर भी शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह संस्थान की गुणवत्ता, सुरक्षा और रोगी-केन्द्रित देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे ज्ञान, सेवा और अनुसंधान की दिशा में ईमानदारी, करुणा और सम्मान को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाएं।

डॉ. सुनीता शर्मा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “आज आप केवल एक डिग्री नहीं प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि एक गहन जिम्मेदारी ले रहे हैं—रोगियों को उपचार देना, समाज का नेतृत्व करना और राष्ट्र की सेवा करना।” उन्होंने कहा कि चाहे आप क्लिनिकल केयर, रिसर्च या शिक्षा के क्षेत्र में जाएँ, आपका काम हमेशा सहानुभूति, प्रमाणिकता और उत्कृष्टता पर आधारित होना चाहिए।

समारोह के दौरान 250 स्नातकोत्तर और डीएम छात्रों तथा पहले बैच के 100 एमबीबीएस स्नातकों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं। इस अवसर पर एबीवीआईएमएस की वार्षिक रिपोर्ट ‘संहिता’ भी जारी की गई।

एबीवीआईएमएस और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के बारे में

1932 में विलिंगडन नर्सिंग होम के रूप में स्थापित यह अस्पताल आज 1,532 बेड वाला प्रमुख संस्थान है, जो लगभग सभी विशेषताओं और सुपर-स्पेशियलिटीज़ में संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। 2019 में इसका नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ABVIMS) और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RMLH) किया गया।

संस्थान में प्रति वर्ष 100 एमबीबीएस, 203 स्नातकोत्तर और 48 डीएम/एम.च. सीटें उपलब्ध हैं। यह अस्पताल हर साल लगभग 12 लाख ओपीडी और 60,000 आईपीडी रोगियों को सेवाएँ देता है और 24×7 आपातकालीन सेवाएँ उपलब्ध कराता है।

समारोह में एबीवीआईएमएस के निदेशक डॉ. (प्रो.) अशोक कुमार, डीन डॉ. आरती मारिया, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और अभिभावक भी उपस्थित रहे।


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