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SYNCHN 2026: लैब से मरीज तक स्वास्थ्य नवाचार पहुंचाने पर जोर, THSTI ने आयोजित किया तीसरा इंडस्ट्री बिजनेस मीट

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जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारत सरकार के अंतर्गत बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल (BRIC) के संस्थान ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI) ने आज फरीदाबाद स्थित एनसीआर बायोटेक साइंस क्लस्टर में अपना तीसरा वार्षिक इंडस्ट्री बिजनेस मीट SYNCHN 2026 (Synergistic Collaboration in Healthcare Innovation) सफलतापूर्वक आयोजित किया।

इस सम्मेलन में वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, जैव प्रौद्योगिकी वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स, निवेशकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित शोध को व्यावसायिक स्तर पर मरीजों तक पहुंचाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योग–शोध संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत बनाना था।

मुख्य अतिथि डॉ. किरण मजूमदार-शॉ, कार्यकारी अध्यक्ष, बायोकॉन, ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि 21वीं सदी जीवविज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की होगी। उन्होंने कहा कि भारत में उत्कृष्ट वैज्ञानिक संस्थान हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती वैज्ञानिक खोजों को बाजार और मरीजों तक पहुंचाना है। THSTI और SYNCHN जैसे मंच इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

THSTI के कार्यकारी निदेशक प्रो. गणेशन कार्तिकेयन ने बताया कि 2024 में SYNCHN के पहले संस्करण में 13 लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 19 रणनीतिक समझौतों तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि संस्थान का लक्ष्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि उसे सफल उत्पाद और उपचार में बदलना है।

उन्होंने THSTI के अत्याधुनिक मेडिकल रिसर्च सेंटर (MRC) और APEX (Accelerated Productisation and Epidemic Preparedness) पहल की भी जानकारी दी। MRC में प्रारंभिक चरण के क्लिनिकल ट्रायल, CAR-T सेल रिसर्च यूनिट और भारत की पहली Controlled Human Infection Studies (CHIS) सुविधा उपलब्ध है।

कार्यक्रम में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने बताया कि CDSCO जैविक दवाओं (Biologics) के लिए नई नियामक व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसमें उद्योग विशेषज्ञों की भी भागीदारी होगी। वहीं नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास ने शोध को सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने के लिए उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग पर जोर दिया।

BIRAC के डॉ. मनीष दीवान ने Research Development and Innovation (RDI) Fund को स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए वित्तीय सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। वहीं IVCA के अमित पांडेय ने कहा कि भारत की बायोइकोनॉमी लगभग 18% वार्षिक वृद्धि के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है।

सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग, प्रारंभिक क्लिनिकल ट्रायल को तेज करने, जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और शोध से व्यवसाय तक की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम के अंत में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने THSTI के वैज्ञानिकों के साथ खुली चर्चा की और संस्थान की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का दौरा भी किया।



केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने लॉन्च कीं कई नई डिजिटल स्वास्थ्य पहलें, देश की हेल्थ सेवाओं को मिलेगा बड़ा डिजिटल बूस्ट

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज भारत के डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए कई नई डिजिटल स्वास्थ्य पहलों का शुभारंभ किया। इन पहलों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी, एकीकृत और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

लॉन्च की गई प्रमुख डिजिटल पहलें

  • आरोग्य सेतु 2.0 (Aarogya Setu 2.0)

  • आयुष्मान ऐप (Ayushman App)

  • आयुष्मान सारथी व्हाट्सएप चैटबॉट

  • नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX)

  • यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI)

  • ई-सुश्रुत क्लिनिक

  • ड्रग रजिस्ट्री

  • भारत हेल्थ टर्मिनोलॉजी सर्विस (BHTS)

  • कॉमन LOINC कोड्स फॉर इंडिया (CLCI)

क्या होगा फायदा?

  • देशभर में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच।

  • मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का सुरक्षित और निर्बाध आदान-प्रदान।

  • अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, दक्षता और निरंतरता बढ़ेगी।

  • डॉक्टरों, मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलेगा।

एबीडीएम (ABDM) की बड़ी उपलब्धि

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत अब तक:

  • 90 करोड़ से अधिक ABHA (आभा) खाते बनाए जा चुके हैं।

  • 100 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए जा चुके हैं।

  • भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में शामिल हो चुका है।

एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

सरकार ने SAHI और BODHI जैसे एआई आधारित प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक स्मार्ट, तेज और प्रभावी बनाना है।

राज्यों से अपील

जगत प्रकाश नड्डा ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू करने का आग्रह करते हुए कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार बेहद आवश्यक है।

महिलाओं और स्वास्थ्यकर्मियों को होगा लाभ

केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड से महिलाओं को देश के किसी भी हिस्से में आसानी से उपचार मिलेगा। साथ ही, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशासनिक बोझ भी कम होगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

प्रिसिजन मेडिसिन और जीन थेरेपी से बदलेगा स्वास्थ्य सेवा का भविष्य, भारत बनेगा वैश्विक हेल्थकेयर इनोवेशन हब: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- डॉक्टर्स डे की पूर्व संध्या पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine), जीन थेरेपी, न्यूक्लियर मेडिसिन और अन्य उभरती तकनीकें भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बदल देंगी। उन्होंने कहा कि भारत स्वदेशी अनुसंधान के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान विकसित कर रहा है और तेजी से विश्वस्तरीय हेल्थकेयर इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है।

डॉक्टर्स डे कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की विशाल आनुवंशिक (Genetic) विविधता, विभिन्न प्रकार की बीमारियों का व्यापक स्वरूप और मजबूत होता वैज्ञानिक ढांचा देश को "भारतीय मरीजों के लिए भारतीय डेटा आधारित भारतीय उपचार" विकसित करने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। इससे न केवल देश की स्वास्थ्य जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि दुनिया को भी किफायती और प्रभावी चिकित्सा समाधान मिलेंगे।

प्रिसिजन मेडिसिन से बदलेगा इलाज का तरीका

उन्होंने कहा कि भविष्य में इलाज मरीज के जीन, जीवनशैली और पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर तय होगा। इससे रोगों का अधिक सटीक निदान, लक्षित उपचार और बेहतर परिणाम संभव होंगे।

जीनोम इंडिया मिशन बना मजबूत आधार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जीनोम इंडिया मिशन के तहत अब तक 10,000 से अधिक लोगों का जीनोम सीक्वेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है और भारत दुनिया के सबसे बड़े जीनोमिक डाटाबेस में से एक तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे दुर्लभ आनुवंशिक रोगों और व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) पर शोध को नई गति मिलेगी।

जीन थेरेपी और न्यूक्लियर मेडिसिन में बड़ी उपलब्धियां

उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने हाल ही में हीमोफीलिया के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल प्रदर्शन किया है, जो देश की चिकित्सा अनुसंधान क्षमता का बड़ा उदाहरण है। साथ ही न्यूक्लियर मेडिसिन कैंसर सहित गंभीर बीमारियों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की बढ़ती भूमिका

डॉ. सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज जीनोम विश्लेषण, रोगों की पहचान, मेडिकल शिक्षा, बायोमेडिकल रिसर्च और टेलीमेडिसिन जैसे क्षेत्रों में तेजी से उपयोग हो रहा है। इससे जटिल चिकित्सा डेटा का विश्लेषण तेजी से संभव हो रहा है और दूरदराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं।

स्वदेशी दवा अनुसंधान में भारत आगे

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल विदेशों में विकसित दवाओं का निर्माण करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान, क्लिनिकल ट्रायल और नवाचार के माध्यम से नई दवाएं विकसित कर रहा है। हाल ही में दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए विकसित भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक इसका प्रमाण है।

जैव प्रौद्योगिकी और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में तेजी

डॉ. सिंह ने बताया कि BioE3 नीति और Bio-RIDE मिशन के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थकेयर इनोवेशन को नई गति मिल रही है। वहीं भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीक विकसित कर रहा है।

आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ नेटवर्क की सराहना

उन्होंने आयुष्मान भारत को दुनिया की सबसे समावेशी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीमेडिसिन ने देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को काफी मजबूत किया है।

रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य में डायबिटीज, कैंसर और फैटी लिवर जैसी गैर-संचारी बीमारियों से निपटने के लिए समय पर जांच, नियमित स्क्रीनिंग, जन-जागरूकता और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान में निरंतर निवेश तथा सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी भारत को अगली पीढ़ी की स्वास्थ्य सेवाओं का वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाएगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इंडियाAI मिशन और NHA ने AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया

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इंडियाAI मिशन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के सहयोग से 9 मई 2026 को IISc बेंगलुरु में AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया। यह आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के शोकेस का समापन था, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को प्रदर्शित किया गया।

यह हैकाथॉन NHA और IISc बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य दावों (क्लेम्स) के निपटान की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनाना तथा धोखाधड़ी (फ्रॉड) की पहचान को मजबूत करना था।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ सुनील कुमार बर्नवाल, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह, NHA की संयुक्त सचिव ज्योति यादव तथा MeitY की संयुक्त निदेशक शिखा दहिया ने उन नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया, जिनके समाधान AI आधारित क्लेम प्रोसेसिंग को बदलने की क्षमता रखते हैं।

यह हैकाथॉन आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अंतर्गत तीन प्रमुख समस्या क्षेत्रों पर केंद्रित था, जो दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत प्रतिदिन 1900+ उपचार पैकेजों के लिए बड़ी संख्या में क्लेम प्रोसेस किए जाते हैं।

हैकाथॉन विजेता

समस्या विवरण 1: क्लिनिकल डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन एवं STG अनुपालन

अलग-अलग गुणवत्ता वाले मेडिकल दस्तावेजों को पढ़कर महत्वपूर्ण डेटा निकालना, आवश्यक विज़ुअल तत्वों की पहचान करना और NHA द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस (STG) के अनुपालन की जांच करना।

  • विजेता: विनय बाबू उल्ली

  • रनर-अप:  खुशी सिंह

  • द्वितीय रनर-अप: विजय बालाजी

समस्या विवरण 2: रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित रोग पहचान एवं रिपोर्ट मिलान

एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों की इमेज का विश्लेषण कर उन्हें रिपोर्ट से मिलाकर सही तरीके से क्लेम का सत्यापन करना।

  • विजेता: हरीश कुमार

  • रनर-अप:  भरत वर्मा संगाराजू

  • द्वितीय रनर-अप: अर्नोल्ड सचित

समस्या विवरण 3: डॉक्यूमेंट फर्जीवाड़ा एवं डीपफेक पहचान

फर्जी या AI-जनरेटेड दस्तावेजों, जैसे कि नकली डिस्चार्ज समरी, बिल में छेड़छाड़ और फर्जी पहचान की पहचान करना।

  • विजेता: प्रवीण श्रीधर

  • रनर-अप: निकिलेश्वर राव सुलाके

  • द्वितीय रनर-अप: सुमंत नायडू माथिरेड्डी

विजेता टीमों को क्रमशः ₹5 लाख, ₹3 लाख और ₹2 लाख की नकद राशि प्रदान की गई। अधिकारियों ने बताया कि चयनित समाधान भविष्य में AB PM-JAY प्रणाली में लागू किए जा सकते हैं।

भारत में AB PM-JAY ऑटो-अडजुडिकेशन हैकाथॉन 2026 का सफल समापन

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने इंडिया एआई मिशन और भारतीय विज्ञान संस्थान के सहयोग से AB PM-JAY ऑटो-अडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया।

यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत स्वास्थ्य बीमा दावों की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

3,500 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी

इस हैकाथॉन में देशभर से स्टार्टअप, छात्र, शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। 3,500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और उनके समाधानों का मूल्यांकन विशेषज्ञ जूरी द्वारा किया गया।

प्रमुख श्रेणियों में विजेता

तीन प्रमुख समस्या क्षेत्रों में विजेताओं का चयन किया गया—

1. क्लिनिकल डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और STG अनुपालन

  • विजेता: टीम निर्णय (विनय बाबू उल्ली)

  • रनर-अप: आईआईआईटी ग्वालियर की टीम

  • द्वितीय रनर-अप: विदाल हेल्थ टीम

2. रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित डिटेक्शन

  • विजेता: टीम बिल्टआईक्यू एआई (हरिश कुमार)

  • रनर-अप:टीम कण्टक शोधना

  • द्वितीय रनर-अप: टीम अर्नोल्ड सचिथ एवं डॉ. स्मिता राव

3. डॉक्यूमेंट फ्रॉड / डीपफेक डिटेक्शन

  • विजेता: टीम सोपा क्लेम्स (प्रवीण श्रीधर, स्नेहल जोशी)

  • रनर-अप: आरजीयूकेटी-नुज़विद की टीम फॉरेंसिक

  • द्वितीय रनर-अप: टीम सुश्रुत हेल्थ एआई

पुरस्कार राशि

  • विजेता: ₹5 लाख

  • रनर-अप: ₹3 लाख

  • द्वितीय रनर-अप: ₹2 लाख

AI और डिजिटल स्वास्थ्य पर चर्चा

कार्यक्रम में “दावों के निपटान (क्लेम्स एडजुडिकेशन) का भविष्य” और “एआई के युग में धोखाधड़ी, अपव्यय और दुरुपयोग” जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। इसमें एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य बीमा में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन पर फोकस

एक विशेष राउंडटेबल में बड़े अस्पतालों के साथ  आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) को लागू करने पर चर्चा हुई, जिसमें डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ABHA और इंटरऑपरेबल सिस्टम जैसे विषय शामिल रहे।

निष्कर्ष

NHA ने कहा कि यह पहल भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ाकर दावों की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

आयुष्मान भारत योजना में डिजिटल बदलाव को बढ़ावा देने के लिए ‘ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन 2026’ का आयोजन

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नई दिल्ली- National Health Authority द्वारा संचालित Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (AB PM-JAY) के तहत देश में डिजिटल हेल्थ ट्रांसफॉर्मेशन को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह योजना प्रतिदिन लगभग 50,000 क्लेम्स को प्रोसेस करती है, जो 1900 से अधिक उपचार पैकेजों से जुड़े होते हैं।

इतनी बड़ी संख्या में क्लेम्स को देखते हुए, तेज़, सटीक और पारदर्शी क्लेम निपटान (adjudication) बेहद आवश्यक हो गया है। वर्तमान में लगभग 15–20% क्लेम्स ही ऑटोमैटिक तरीके से निपटाए जा रहे हैं, जबकि एक स्केलेबल और सभी पैकेजों पर लागू होने वाली प्रणाली की जरूरत महसूस की जा रही है।

हैकाथॉन का उद्देश्य

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए NHA ने AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन 2026 की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य ऐसे डिजिटल समाधान विकसित करना है जो:

  • मौजूदा सिस्टम के साथ सहजता से जुड़ सकें

  • मैनुअल कार्यभार को कम करें

  • क्लेम प्रोसेसिंग को तेज और पारदर्शी बनाएं

  • AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन और रियल-टाइम वेरिफिकेशन को सक्षम बनाएं

प्रतिभागियों की बड़ी भागीदारी

इस हैकाथॉन को देशभर से शानदार प्रतिक्रिया मिली है, अब तक 2600 से अधिक प्रतिभागी रजिस्टर कर चुके हैं। इसमें छात्र, शोधकर्ता, डेवलपर्स, स्टार्टअप्स और प्रोफेशनल्स शामिल हैं।

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 13 अप्रैल 2026
इच्छुक प्रतिभागी आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

मास्टरक्लास सीरीज की शुरुआत

प्रतिभागियों को मार्गदर्शन देने के लिए NHA द्वारा 3 विशेष मास्टरक्लास सत्र आयोजित किए जा रहे हैं:

  • सत्र 1: 13 अप्रैल 2026 (दोपहर 2:00 – 4:00 बजे)

  • सत्र 2: 15 अप्रैल 2026 (दोपहर 2:00 – 4:00 बजे)

  • सत्र 3: 16 अप्रैल 2026 (दोपहर 2:00 – 4:00 बजे)

ये सभी सत्र NHA के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किए जाएंगे।

IISc बेंगलुरु में ग्रैंड फिनाले

हैकाथॉन का ग्रैंड फिनाले 8-9 मई 2026 को Indian Institute of Science में आयोजित होगा। इसमें चयनित टीमें अपने समाधान प्रस्तुत करेंगी, जिनका मूल्यांकन हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी और पब्लिक पॉलिसी के विशेषज्ञों की जूरी द्वारा किया जाएगा।

आकर्षक पुरस्कार

विजेताओं को प्रत्येक समस्या के लिए:

  • प्रथम पुरस्कार: ₹5 लाख

  • द्वितीय पुरस्कार: ₹3 लाख

  • तृतीय पुरस्कार: ₹2 लाख

साथ ही NHA के साथ भविष्य में सहयोग का अवसर भी मिलेगा।

डिजिटल हेल्थ के भविष्य की दिशा

इस पहल के माध्यम से NHA ने स्पष्ट किया है कि वह नवाचार और सहयोग के जरिए देश में एक मजबूत, पारदर्शी और प्रभावी डिजिटल हेल्थ सिस्टम विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे लाभार्थियों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं दोनों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की भूमिका पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल का संबोधन

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में “Innovation to Impact: AI as a Public Health Game-Changer” विषय पर सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का AI for India दृष्टिकोण “Artificial Intelligence नहीं बल्कि All-Inclusive Intelligence” है, जिसका लक्ष्य तकनीक को आम लोगों के जीवन से जोड़ना है।

उन्होंने बताया कि AI को रोग निगरानी, रोकथाम, निदान और उपचार तक स्वास्थ्य सेवा की पूरी श्रृंखला में लागू किया जा रहा है।

  • मीडिया डिजीज सर्विलांस सिस्टम 13 भाषाओं में रोग रुझानों की निगरानी कर रियल-टाइम अलर्ट देता है।

  • वन हेल्थ मिशन के तहत AI आधारित जीनोमिक सर्विलांस से संभावित जूनोटिक रोगों की भविष्यवाणी संभव हो रही है।

  • AI आधारित एक्स-रे और CA-TB टूल्स से टीबी मामलों की पहचान में 16% वृद्धि और उपचार परिणामों में 27% सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में स्केलेबल, किफायती और समावेशी AI समाधान जरूरी हैं। सरकार ने AIIMS दिल्ली, PGIMER चंडीगढ़ और AIIMS ऋषिकेश में AI के तीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि AI डॉक्टरों का विकल्प नहीं बल्कि सहायक है, ताकि चिकित्सक जटिल मामलों पर अधिक ध्यान दे सकें। साथ ही उन्होंने डॉक्टरों के लिए AI प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।

नीति आयोग के सदस्य प्रो. वी.के. पॉल ने AI को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए रणनीतिक अवसर बताया और मजबूत डेटा, नीति और सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

फिलिप्स के CEO रॉय जैकब्स ने कहा कि AI स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके लिए भरोसेमंद डेटा, पारदर्शिता और क्लिनिकल इंटीग्रेशन जरूरी है।

समापन में सभी वक्ताओं ने कहा कि AI को जिम्मेदारी, नैतिकता और बड़े पैमाने पर लागू कर भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत और भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है।


कैंसर के उपचार में क्रांति लाएगा नया एआई फ्रेमवर्क 'OncoMark'

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एक नई अध्ययन रिपोर्ट में एक ऐसा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) फ्रेमवर्क पेश किया गया है, जो कैंसर को समझने और उसके इलाज के तरीके को बदल सकता है। यह फ्रेमवर्क कैंसर को केवल उसकी आकार या प्रसार से नहीं बल्कि उसके मॉलिक्यूलर व्यक्तित्व (molecular personality) के आधार पर देखने का नया दृष्टिकोण देता है।

OncoMark का न्यूरल नेटवर्क कैंसर कोशिकाओं के भीतर जटिल आणविक संकेतों को डिकोड करता है और हॉलमार्क गतिविधियों की भविष्यवाणी करता है।

कैंसर केवल बढ़ती हुई गांठों (tumors) की बीमारी नहीं है, बल्कि इसे कुछ छिपे हुए जैविक प्रोग्राम्स द्वारा संचालित किया जाता है, जिन्हें "हॉलमार्क्स ऑफ कैंसर" कहा जाता है। ये हॉलमार्क्स बताते हैं कि कैसे स्वस्थ कोशिकाएँ मॅलिग्नेंट (malignant) बनती हैं, कैसे ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से बचती हैं और उपचार के प्रति प्रतिरोध (resistance) दिखाती हैं।

पारंपरिक रूप से डॉक्टर TNM जैसे स्टेजिंग सिस्टम्स का इस्तेमाल करते हैं, जो ट्यूमर के आकार और प्रसार का वर्णन करते हैं। लेकिन ये अक्सर उस आंतरिक आणविक कहानी को नहीं पकड़ पाते—यानी क्यों दो मरीज जिनका कैंसर एक ही स्टेज में है, उनके परिणाम अलग हो सकते हैं।

नवीनतम AI फ्रेमवर्क 'OncoMark'

  • S N Bose नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेस (DST के अधीन) और अशोका यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 'OncoMark' फ्रेमवर्क विकसित किया है।

  • इस फ्रेमवर्क को 14 प्रकार के कैंसर में 3.1 मिलियन सिंगल सेल्स का विश्लेषण करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

  • OncoMark ने सिंथेटिक “pseudo-biopsies” बनाई, जो हॉलमार्क-ड्रिवन ट्यूमर स्टेट्स का प्रतिनिधित्व करती हैं।

  • AI ने सीखा कि कैसे हॉलमार्क्स जैसे मेटास्टेसिस, इम्यून इवेज़न और जीनोमिक अस्थिरता ट्यूमर की वृद्धि और उपचार प्रतिरोध को बढ़ावा देते हैं।

प्रदर्शन और सत्यापन:

  • OncoMark ने आंतरिक परीक्षण में 99% से अधिक सटीकता हासिल की।

  • पांच स्वतंत्र कोहोर्ट में यह 96% से ऊपर सटीकता बनाए रखा।

  • 20,000 वास्तविक रोगी नमूनों पर भी इसे सत्यापित किया गया।

  • अब वैज्ञानिक यह देख सकते हैं कि किस रोगी के ट्यूमर में कौन सा हॉलमार्क सक्रिय है, जिससे उपचार को लक्षित किया जा सके।

उपचार में संभावित योगदान:

  • यह फ्रेमवर्क डॉक्टरों को यह संकेत दे सकता है कि कौन से ड्रग्स सीधे सक्रिय हॉलमार्क्स को लक्षित कर सकते हैं।

  • यह उन कैंसर को भी पहचान सकता है जो स्टैंडर्ड स्टेजिंग में कम खतरनाक लगते हैं लेकिन वास्तव में आक्रामक हैं।

  • समय पर हस्तक्षेप और व्यक्तिगत उपचार (personalized treatment) की दिशा में मदद करेगा।

प्रकाशन:

यह शोध Communications Biology (Nature Publishing Group) में प्रकाशित हुआ है।

यह अध्ययन कैंसर अनुसंधान और उपचार में AI के प्रभाव को एक नया दृष्टिकोण देता है, जिससे भविष्य में व्यक्तिगत और सटीक उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

भारत बनेगा वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान का अग्रणी केंद्र: केन्द्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया सिंह पटेल

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नई दिल्ली-केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया सिंह पटेल ने आज द्वितीय डीएचआर-आईसीएमआर हेल्थ रिसर्च एक्सीलेंस समिट 2025 में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधन किया। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी. के. पॉल भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्वास्थ्य अनुसंधान पारितंत्र अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा, “पिछले एक दशक में भारत ने स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख भूमिका निभाई है। मेडटेक मित्रा, रोटावैक वैक्सीन और कोविड-19 टीकों जैसी पहलें भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण हैं।”

राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विज्ञान और अनुसंधान के लाभ देश के हर नागरिक तक पहुँचें। उन्होंने कहा कि भारत मेडटेक और बायोमेडिकल नवाचार में आत्मनिर्भर बन रहा है और अब केवल अनुसंधान ही नहीं कर रहा बल्कि समाधान भी दे रहा है।

मंत्री पटेल ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण क्लिनिकल गाइडलाइन्स और मानक देश के प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी तक पहुँचने चाहिए ताकि सस्ती और समान स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा सकें।

उन्होंने कहा कि भारत का स्वास्थ्य तंत्र एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है और वैज्ञानिक समुदाय को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रिसीजन हेल्थकेयर और जीनोमिक्स जैसी उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने सभी शोधकर्ताओं और पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा, “भारत को न केवल वैश्विक विज्ञान में योगदान देना है बल्कि उसका नेतृत्व भी करना है।”

डॉ. वी. के. पॉल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में वर्तमान में स्वस्थ आयु प्रत्याशा (Healthy Life Expectancy) 60 वर्ष है और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप इसे 75 वर्ष से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने डीएचआर और आईसीएमआर से आग्रह किया कि वे एनसीडी, हाइपरटेंशन, ट्रॉमा केयर जैसी प्राथमिक स्वास्थ्य चुनौतियों पर विशेष ध्यान दें।

उन्होंने आईसीएमआर को विश्व की शीर्ष तीन स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थाओं में शामिल करने, आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और फ्रंटियर टेक्नोलॉजी (AI, Robotics) को स्वास्थ्य समाधान में अपनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कई प्रमुख पहलें लॉन्च की गईं —

  • मेडटेक मित्रा के इनोवेटर्स गाइडबुक फॉर इन-विट्रो डायग्नोस्टिक (IVD) मेडिकल डिवाइसेज

  • 11 नई स्वदेशी तकनीकों का तीन कंपनियों को ट्रांसफर, जिनमें निपाह, मंकीपॉक्स, कोविड-19, टीबी और डेंगू जैसे संक्रमणों की पहचान करने वाली अत्याधुनिक जांच तकनीकें शामिल हैं।

  • मानक उपचार कार्यप्रवाह (Standard Treatment Workflows) का नया, उपयोगकर्ता-अनुकूल डिजिटल संस्करण।

  • सहायक प्रौद्योगिकी (Assistive Technology) दिशानिर्देश और किट, जिसमें ICMR और IIT दिल्ली द्वारा विकसित एक्शन रिसर्च आर्म टेस्ट (ARAT) किट शामिल है, जो स्ट्रोक या न्यूरोलॉजिकल चोटों के बाद हाथ की कार्यक्षमता का आकलन करने में उपयोगी है।

  • राष्ट्रीय आवश्यक सहायक उत्पाद सूची (NLEAP) के लिए ICMR-BIS द्वारा विकसित मानक लॉन्च किए गए।

  • आईसीएमआर पेंशनर्स पोर्टल का शुभारंभ, जो पेंशनभोगियों के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच प्रदान करेगा।

समारोह में डीएचआर के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल, संयुक्त सचिव अनु नागर, वरिष्ठ उप महानिदेशक (प्रशासन) श्रीमती मनीषा सक्सेना और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



ESTIC 2025: आयुष मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवाचार और पारंपरिक चिकित्सा के संगम पर किया जोर

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आयुष मंत्रालय ने आज नई दिल्ली स्थित सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (CCRAS) मुख्यालय, जनकपुरी में ईमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2025 में अपनी भागीदारी को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव अलार्मेलमंगई डी ने की। उन्होंने मंत्रालय की ESTIC 2025 में भागीदारी को दर्शाने वाला एक थीमैटिक वीडियो भी प्रदर्शित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ESTIC 2025 भारत की वैज्ञानिक भावना और सहयोग की शक्ति का उत्सव है। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का उत्सव है — जो यह दर्शाता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिलकर एक स्वस्थ, स्थायी भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय “स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रौद्योगिकी” थीम के अंतर्गत भाग लेगा, जो भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के सुंदर संगम का प्रतीक है।

संयुक्त सचिव ने यह भी उल्लेख किया कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली आज एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निदान और प्रिसिजन मेडिसिन जैसे नवाचार नई दिशा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुनिया फिर से आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों की ओर रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य कल्याण के लिए रुख कर रही है। उन्होंने कहा कि ये दोनों धाराएँ मिलकर स्वास्थ्य सेवा की नई परिभाषा गढ़ सकती हैं।

आयुष ग्रिड पहल के माध्यम से मंत्रालय ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को डिजिटल और नागरिक-केंद्रित रूप देने के लिए कई अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं —

  • Ayush Hospital Management Information System (A-HMIS) — बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन हेतु

  • e-Learning Management System (e-LMS) — डिजिटल शिक्षा और छात्र प्रबंधन के लिए

  • Y-Break App — कार्यस्थल पर योग और वेलनेस के लिए

  • Yoga Portal — योग संसाधनों के एकीकृत मंच के रूप में

  • e-Aushadhi और Ayush Suraksha — औषधि नियंत्रण और रोगी सुरक्षा हेतु

इसके अतिरिक्त Ayush Research Portal, Clinical Case Repository, Ayusoft और NAMASTE Portal जैसी पहलों से अनुसंधान और मानकीकरण को सुदृढ़ किया जा रहा है। मंत्रालय mYoga App (WHO के साथ साझेदारी में) और Ayush Global Portal जैसे उपकरणों से वैश्विक पहुंच का विस्तार कर रहा है, वहीं PM GatiShakti Ayush Asset Mapping Tool अवसंरचना योजना और निगरानी को सशक्त बना रहा है।

अब मंत्रालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भविष्यवाणी विश्लेषण, साहित्य खनन, व्यक्तिगत अनुशंसाओं और वास्तविक समय निगरानी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है — जिससे एक डेटा-चालित, नवाचार-नेतृत्वित और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त आयुष डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सके।

डॉ. ए. रघु, सलाहकार (आय), ने कहा कि ESTIC 2025 भारत-केंद्रित नवाचारों, पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स, बायोमेडिकल प्रौद्योगिकियों और एकीकृत स्वास्थ्य समाधानों को प्रदर्शित करने का एक राष्ट्रीय मंच है। उन्होंने कहा कि यह भागीदारी आत्मनिर्भर, नवाचार-प्रधान और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

डॉ. श्रीनिवास राव चिंता, संयुक्त सलाहकार (एच), ने मंत्रालय की भागीदारी पर विस्तृत प्रस्तुति दी और बताया कि “हेल्थ एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज़” थीम के अंतर्गत मंत्रालय का फोकस क्षेत्र नवोन्मेषी अनुसंधान मॉडल, एकीकृत स्वास्थ्य ढाँचे और पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक वैज्ञानिक नवाचार से जोड़ने वाले सहयोगी प्रोजेक्ट्स पर होगा।

ESTIC 2025 में आयुष मंत्रालय पार्टनर मंत्रालय के रूप में भाग लेगा। मंत्रालय का विशेष सत्र 4 नवंबर 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव (आयुष) और डॉ. राजीव बहल, सचिव (डीएचआर) एवं महानिदेशक (ICMR) करेंगे।

इस सत्र में प्रमुख वक्ता होंगे —

  • डॉ. शिव कुमार सारिन, निदेशक, ILBS

  • प्रो. गगनदीप कांग, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन

  • प्रो. तनुजा नेसरी, निदेशक, ITRA, जामनगर

  • सी. वी. मुरलीधरन, SCTIMST, तिरुवनंतपुरम

पैनल चर्चा का संचालन डॉ. जितेंद्र शर्मा, प्रबंध निदेशक एवं संस्थापक-सीईओ, आंध्र प्रदेश मेडटेक ज़ोन करेंगे।

ESTIC 2025, जो कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है, 3 से 5 नवंबर 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा। इसका उद्देश्य सरकार, अकादमिक जगत, उद्योग, स्टार्टअप्स और नागरिक समाज के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत की नवाचार-आधारित विकास यात्रा को गति मिले और विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार किया जा सके।

आयुष मंत्रालय ने गोवा में 10वें आयुर्वेद दिवस पर लॉन्च किया DRAVYA पोर्टल

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100 प्रमुख औषधीय पदार्थों की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी

AI-रेडी प्लेटफ़ॉर्म भविष्य में आयुष ग्रिड और अन्य पहलों से जुड़ेगा

QR कोड इंटीग्रेशन से पौधों और दवा भंडारों में मानकीकृत जानकारी प्रदर्शित होगी

गोवा-आयुष मंत्रालय ने 10वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर DRAVYA (डिजिटाइज्ड रिट्रीवल एप्लिकेशन फॉर वर्सटाइल यार्डस्टिक ऑफ आयुष) पोर्टल लॉन्च किया। यह पोर्टल आयुष प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले 100 प्रमुख औषधीय पदार्थों की जानकारी डिजिटल रूप में संग्रहीत करेगा और समय-समय पर अपडेट होता रहेगा।

तकनीकी और वैश्विक दृष्टि:

DRAVYA पोर्टल AI-रेडी है और इसे भविष्य में आयुष ग्रिड और अन्य मंत्रालयीय पहलों से जोड़ा जाएगा। QR कोड इंटीग्रेशन के माध्यम से यह पोर्टल औषधीय पौधों के उद्यानों और दवा भंडारों में मानकीकृत जानकारी प्रदर्शित करेगा।

उद्घाटन समारोह में शामिल dignitaries:

इस अवसर पर गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू, मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव, ऊर्जा मंत्री श्रीपाद यस्सो नाइक और आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा मौजूद थे।

DRAVYA का उद्देश्य:

केंद्रीय आयुष मंत्री जाधव ने कहा, “DRAVYA केवल डिजिटल आर्काइव नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा का आधुनिक स्वरूप है। यह पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम है।”

आयुष सचिव वैद्य कोटेचा ने बताया कि पोर्टल क्लासिकल ग्रंथों और आधुनिक शोध को जोड़कर वैज्ञानिक समुदाय, नीति निर्माता और नवप्रवर्तकों के लिए सुलभ और भरोसेमंद संसाधन साबित होगा।

CCRAS के महानिदेशक प्रो. रबिनारायण आचार्य ने कहा, “यह पोर्टल शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए क्रॉस-डिसिप्लिनरी रिसर्च और साक्ष्य-आधारित आयुष दवाओं के सत्यापन में सहायक होगा।”

निष्कर्ष:

DRAVYA पोर्टल के माध्यम से आयुष प्रणाली के औषधीय ज्ञान को डिजिटल, खोज योग्य और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।


राष्ट्रीय कार्यशाला में आयुष डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों पर जोर

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कुमारकोम-राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत “आयुष क्षेत्र में आईटी समाधान” पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन आज केटीडीसी वाटरस्केप्स, कुमारकोम में हुआ। इस अवसर पर आयुष ग्रिड और उससे जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लाइव डेमोंस्ट्रेशन तथा गहन विचार-विमर्श आयोजित किए गए।

कार्यशाला में A-HMIS, e-LMS, योग पोर्टल एवं Y-Break ऐप, ई-औषधि पोर्टल, आयुष सुरक्षा, रिसर्च पोर्टल, NAMASTE पोर्टल, mYoga ऐप, आयुष ग्लोबल पोर्टल और पीएम-गतिशक्ति आयुष एसेट मैपिंग टूल सहित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किए गए। साथ ही, भविष्य के लिए एआई आधारित निर्णय समर्थन एवं मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी जानकारी दी गई।

समापन सत्र में सात राज्यों ने अपने अनुभव साझा किए और डिजिटल एकीकरण हेतु सामान्य प्रोटोकॉल का प्रारूप तैयार किया गया।

मुख्य वक्तव्य:

  • वीणा जॉर्ज, स्वास्थ्य एवं महिला-कल्याण मंत्री, केरल सरकार ने कहा कि “तेज़ तकनीकी प्रगति को अपनाते समय पारंपरिक मूल्यों का संरक्षण भी आवश्यक है।”

  • वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय ने कहा कि “डिजिटल उपकरण अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता हैं, जो आयुष सेवाओं की सुलभता, किफ़ायत और गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे।”

इस कार्यशाला में 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से 91 प्रतिनिधियों सहित कुल 155 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने कहा कि यह आयोजन न केवल केंद्रीय आईटी प्लेटफॉर्म्स पर स्पष्टता लाया, बल्कि अंतरराज्यीय सहयोग और एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य मानकों की दिशा में नई राह खोली।

आगामी कार्यक्रम:
प्रतिभागियों का 20–21 सितम्बर को कोट्टायम, आलप्पुझा और त्रिशूर जिलों में आयुष सुविधाओं का क्षेत्रीय दौरा आयोजित होगा।

यह कार्यशाला भारत की भविष्य-उन्मुख, गतिशील और नागरिक-केंद्रित आयुष डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।


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