Media24Media.com: प्रिसिजन मेडिसिन और जीन थेरेपी से बदलेगा स्वास्थ्य सेवा का भविष्य, भारत बनेगा वैश्विक हेल्थकेयर इनोवेशन हब: डॉ. जितेंद्र सिंह

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प्रिसिजन मेडिसिन और जीन थेरेपी से बदलेगा स्वास्थ्य सेवा का भविष्य, भारत बनेगा वैश्विक हेल्थकेयर इनोवेशन हब: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- डॉक्टर्स डे की पूर्व संध्या पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine), जीन थेरेपी, न्यूक्लियर मेडिसिन और अन्य उभरती तकनीकें भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बदल देंगी। उन्होंने कहा कि भारत स्वदेशी अनुसंधान के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान विकसित कर रहा है और तेजी से विश्वस्तरीय हेल्थकेयर इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है।

डॉक्टर्स डे कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की विशाल आनुवंशिक (Genetic) विविधता, विभिन्न प्रकार की बीमारियों का व्यापक स्वरूप और मजबूत होता वैज्ञानिक ढांचा देश को "भारतीय मरीजों के लिए भारतीय डेटा आधारित भारतीय उपचार" विकसित करने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। इससे न केवल देश की स्वास्थ्य जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि दुनिया को भी किफायती और प्रभावी चिकित्सा समाधान मिलेंगे।

प्रिसिजन मेडिसिन से बदलेगा इलाज का तरीका

उन्होंने कहा कि भविष्य में इलाज मरीज के जीन, जीवनशैली और पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर तय होगा। इससे रोगों का अधिक सटीक निदान, लक्षित उपचार और बेहतर परिणाम संभव होंगे।

जीनोम इंडिया मिशन बना मजबूत आधार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जीनोम इंडिया मिशन के तहत अब तक 10,000 से अधिक लोगों का जीनोम सीक्वेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है और भारत दुनिया के सबसे बड़े जीनोमिक डाटाबेस में से एक तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे दुर्लभ आनुवंशिक रोगों और व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) पर शोध को नई गति मिलेगी।

जीन थेरेपी और न्यूक्लियर मेडिसिन में बड़ी उपलब्धियां

उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने हाल ही में हीमोफीलिया के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल प्रदर्शन किया है, जो देश की चिकित्सा अनुसंधान क्षमता का बड़ा उदाहरण है। साथ ही न्यूक्लियर मेडिसिन कैंसर सहित गंभीर बीमारियों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की बढ़ती भूमिका

डॉ. सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज जीनोम विश्लेषण, रोगों की पहचान, मेडिकल शिक्षा, बायोमेडिकल रिसर्च और टेलीमेडिसिन जैसे क्षेत्रों में तेजी से उपयोग हो रहा है। इससे जटिल चिकित्सा डेटा का विश्लेषण तेजी से संभव हो रहा है और दूरदराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं।

स्वदेशी दवा अनुसंधान में भारत आगे

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल विदेशों में विकसित दवाओं का निर्माण करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान, क्लिनिकल ट्रायल और नवाचार के माध्यम से नई दवाएं विकसित कर रहा है। हाल ही में दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए विकसित भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक इसका प्रमाण है।

जैव प्रौद्योगिकी और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में तेजी

डॉ. सिंह ने बताया कि BioE3 नीति और Bio-RIDE मिशन के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थकेयर इनोवेशन को नई गति मिल रही है। वहीं भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीक विकसित कर रहा है।

आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ नेटवर्क की सराहना

उन्होंने आयुष्मान भारत को दुनिया की सबसे समावेशी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीमेडिसिन ने देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को काफी मजबूत किया है।

रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य में डायबिटीज, कैंसर और फैटी लिवर जैसी गैर-संचारी बीमारियों से निपटने के लिए समय पर जांच, नियमित स्क्रीनिंग, जन-जागरूकता और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान में निरंतर निवेश तथा सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी भारत को अगली पीढ़ी की स्वास्थ्य सेवाओं का वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाएगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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