Media24Media.com: थाईलैंड में लघु-स्तरीय मत्स्य सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रखा पक्ष

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थाईलैंड में लघु-स्तरीय मत्स्य सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रखा पक्ष

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डॉ. अभिलक्ष लिखी सचिव, मत्स्य विभाग, भारत सरकार, ने 27 से 30 अप्रैल 2026 तक हुआ हिन में आयोजित 5वें विश्व लघु-स्तरीय मत्स्य कांग्रेस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस सम्मेलन का आयोजन Food and Agriculture Organization (FAO) और TBTI ग्लोबल द्वारा किया गया। सम्मेलन का विषय “न्यायपूर्ण समन्वय, युवा भविष्य और पुनर्योजी ज्ञान के लिए लघु-स्तरीय मत्स्य” रहा।

अपने संबोधन में डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि लघु-स्तरीय मत्स्य और जलीय कृषि सामाजिक-आर्थिक विकास, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जहां 19.7 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। साथ ही, आधुनिक तकनीक और निवेश के कारण समुद्री उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने सतत और ट्रेसएबल मत्स्य पालन, डिजिटल परिवर्तन तथा सामुदायिक भागीदारी आधारित दृष्टिकोण पर जोर दिया। साथ ही बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही, जिसमें भारत वर्तमान में अध्यक्ष है।

डॉ. लिखी ने FAO द्वारा आयोजित एक पैनल चर्चा में भी भाग लिया, जिसमें राष्ट्रीय कार्ययोजना (NPOA-SSF) के माध्यम से लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, आजीविका, सांस्कृतिक पहचान और तटीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

चर्चा में यह बात सामने आई कि लघु-स्तरीय मछुआरों की संस्थागत और तकनीकी क्षमता बढ़ाना, वित्त और बुनियादी ढांचे तक पहुंच सुनिश्चित करना तथा नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। साथ ही, सतत और समावेशी मत्स्य प्रबंधन के लिए सामुदायिक आधारित और पारिस्थितिकी तंत्र आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया।

वैश्विक स्तर पर लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र लगभग 90% मछुआरों को रोजगार देता है और कुल मछली उत्पादन का लगभग 40% योगदान करता है। एशिया में यह क्षेत्र करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है, लेकिन इसे जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और औद्योगिक मत्स्य से प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में लगभग 40 लाख समुद्री मछुआरे इस क्षेत्र से जुड़े हैं, जो मुख्यतः 12 समुद्री मील के भीतर कार्य करते हैं। सरकार द्वारा Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) जैसी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत सरकार ने 2015 से अब तक मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 39,272 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। इन पहलों का उद्देश्य मछुआरों की आय बढ़ाना, संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।

यह सम्मेलन लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।

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