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दिल्ली में पेंशन अदालत का आयोजन, पेंशनभोगियों की शिकायतों का हुआ समाधान

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नई दिल्ली- प्रधान मुख्य नियंत्रक संचार लेखा (Pr. CCA), दिल्ली कार्यालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के लिए आज सफलतापूर्वक पेंशन अदालत (Pension Adalat) का आयोजन किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त सीसीए (पेंशन) रजत त्रिपाठी ने की, जबकि सहायक सीसीए (पेंशन) श्याम लाल दास भी उपस्थित रहे।

इस दौरान BSNL, MTNL और दूरसंचार विभाग (DoT) के पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनभोगियों की विभिन्न शिकायतों को सुना गया और उनका समाधान किया गया। पेंशन भुगतान, कम्यूटेशन (पेंशन रूपांतरण), पारिवारिक पेंशन तथा अन्य लाभों से जुड़े मामलों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी मंच

पेंशन अदालत ने पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को अपनी समस्याएं सीधे अधिकारियों के समक्ष रखने का अवसर प्रदान किया। पेंशन स्वीकृति, पेंशन संशोधन, पारिवारिक पेंशन और अन्य संबंधित मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई।

कार्यवाही के दौरान कई मामलों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को शीघ्र समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया।

पेंशनभोगियों के हित में जारी रहेंगे ऐसे आयोजन

प्रधान मुख्य नियंत्रक संचार लेखा, दिल्ली कार्यालय ने कहा कि वह पेंशनभोगियों को समयबद्ध और प्रभावी सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यालय भविष्य में भी पेंशनभोगियों के कल्याण और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए इस प्रकार की पेंशन अदालतों का नियमित आयोजन करता रहेगा।

"दिल्ली में आयोजित पेंशन अदालत में BSNL, MTNL और DoT के पेंशनभोगियों की शिकायतों का समाधान किया गया। पेंशन भुगतान, पारिवारिक पेंशन और अन्य लाभों से जुड़े मामलों पर अधिकारियों ने सुनवाई की।"


डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम: SAMPANN पेंशन पोर्टल का DigiLocker से एकीकरण

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प्रधान नियंत्रक संचार लेखा (Pr CCA), दिल्ली के कार्यालय ने दूरसंचार विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी पेंशनरों को सूचित किया है कि SAMPANN पेंशन पोर्टल का DigiLocker प्लेटफॉर्म के साथ सफलतापूर्वक एकीकरण कर दिया गया है। यह पहल भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप है।

इस एकीकरण के माध्यम से पेंशनर अब SAMPANN से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज—जैसे पेंशन भुगतान आदेश (e-PPO), ग्रेच्युटी स्वीकृति आदेश, कम्यूटेशन स्वीकृति आदेश और फॉर्म-16—को सीधे अपने DigiLocker खाते से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा मोबाइल या डेस्कटॉप के माध्यम से कभी भी और कहीं से भी उपलब्ध है, जिससे सुरक्षित, पेपरलेस और पारदर्शी सेवाएं सुनिश्चित होती हैं। इससे बैंकिंग, चिकित्सा प्रतिपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं में भी सुविधा मिलेगी।

इस अवसर पर आशीष जोशी, प्रधान नियंत्रक संचार लेखा, दिल्ली ने कहा कि यह पहल भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता को समाप्त करती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम पेंशनरों को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाता है और सरकार के पेपरलेस डिजिटल गवर्नेंस के विजन को साकार करता है।

पेंशनर इस सेवा का लाभ उठाने के लिए https://digilocker.gov.in पर आधार के माध्यम से लॉग इन कर सकते हैं, अपना PPO नंबर लिंक कर सकते हैं और आवश्यक दस्तावेज तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं। सहायता के लिए समर्पित हेल्पलाइन और SAMPANN पोर्टल उपलब्ध हैं। DigiLocker और SAMPANN सेवाओं से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) नीचे दिए गए हैं।

SAMPANN के बारे में

SAMPANN (System for Accounting and Management of Pension) दूरसंचार विभाग की एक प्रमुख डिजिटल पहल है, जिसे नियंत्रक जनरल संचार लेखा कार्यालय द्वारा विकसित, स्वामित्व और संचालित किया गया है। इसे 29 दिसंबर 2018 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह प्रणाली पेंशन प्रशासन को प्रणाली-केंद्रित से पेंशनर-केंद्रित बनाती है।

SAMPANN ने पेंशन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज़ कर दिया है—मामलों की शुरुआत से लेकर e-PPO जारी करने, भुगतान, लेखा, ऑडिट, शिकायत निवारण तक। अब पेंशन सीधे बैंक खातों में जमा होती है। पेंशनर घर बैठे भुगतान की स्थिति देख सकते हैं, जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं, विवरण अपडेट कर सकते हैं और शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही हैं।

FAQ: DigiLocker के माध्यम से SAMPANN सेवाएं

1. DigiLocker क्या है?

DigiLocker भारत सरकार का सुरक्षित क्लाउड प्लेटफॉर्म है, जहां नागरिक अपने महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं और साझा कर सकते हैं। यह डिजिटल वॉलेट की तरह कार्य करता है और कागजी दस्तावेजों की आवश्यकता को समाप्त करता है।

2. DigiLocker तक कैसे पहुंचें?

  • वेब पोर्टल: https://digilocker.gov.in

  • मोबाइल ऐप: Google Play Store (Android) या Apple Store (iOS) से DigiLocker ऐप डाउनलोड करें।

3. पंजीकरण और लॉग-इन कैसे करें?

  • मोबाइल नंबर/आधार से रजिस्ट्रेशन करें

  • OTP सत्यापन के बाद MPIN सेट करें

  • MPIN या OTP से लॉग-इन करें

4. DigiLocker पर सेवाएं कैसे खोजें?

लॉग-इन के बाद “Search Documents” विकल्प का उपयोग करें।
SAMPANN से जुड़ी सेवाओं को SAMPANN, DoT, Pension, Gratuity, Commutation जैसे कीवर्ड से खोजा जा सकता है।

5. DigiLocker पर उपलब्ध SAMPANN सेवाएं:

  • e-PPO

  • ग्रेच्युटी भुगतान आदेश

  • कम्यूटेशन भुगतान आदेश

  • फॉर्म-16

पेंशनर संबंधित सेवा में अपना PPO नंबर दर्ज कर “Get Document” पर क्लिक करके दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं।

यह पहल पेंशनरों के लिए सुविधा, पारदर्शिता और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दूरसंचार धोखाधड़ी पर सख्त प्रावधान, ‘संचार साथी’ से नागरिकों की भागीदारी बढ़ी: डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर

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संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने आज लोकसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 की उप-धारा 42(3)(e) के तहत धोखाधड़ी, छल या व्यक्ति-भेषण (Personation) के माध्यम से सिम कार्ड या अन्य दूरसंचार पहचानकर्ता प्राप्त करना दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं।

मंत्री ने बताया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 की उप-धारा 42(3)(c) और 42(3)(f) के अंतर्गत दूरसंचार पहचानकर्ताओं के साथ छेड़छाड़ करना तथा यह जानते हुए भी ऐसे रेडियो उपकरणों को रखना या उपयोग करना, जिनमें अनधिकृत या छेड़छाड़ किए गए पहचानकर्ता हों, अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अतिरिक्त, टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम किसी भी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर दूरसंचार उपकरण की विशिष्ट पहचान संख्या को हटाने, बदलने या उसमें छेड़छाड़ करने तथा ऐसे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर को रखने या उपयोग करने पर रोक लगाते हैं, जिनके बारे में जानकारी हो कि वे अवैध रूप से कॉन्फ़िगर किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने लाइसेंस शर्तों के माध्यम से यह अनिवार्य किया है कि सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाता (TSPs) किसी भी ग्राहक को सब्सक्राइबर के रूप में जोड़ने से पहले उसकी उचित पहचान और सत्यापन सुनिश्चित करें।

डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि DoT ने नागरिक-केंद्रित ‘संचार साथी’ पोर्टल और ऐप विकसित किया है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल हैंडसेट की प्रामाणिकता अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (IMEI) के जरिए जांच सकते हैं। दूरसंचार धोखाधड़ी को रोकने और डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘संचार साथी’ पहल के तहत व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। IMEI सत्यापन से जुड़े व्याख्यात्मक वीडियो और इन्फोग्राफिक्स DoT के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए गए हैं।

इसके साथ ही, ‘संचार मित्र’ योजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत छात्र स्वयंसेवकों को डिजिटल सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और संचार साथी पोर्टल व ऐप के उपयोग के बारे में नागरिकों को जागरूक करने के लिए जोड़ा गया है। स्थानीय भाषाओं में संवाद के माध्यम से यह पहल जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने में मदद कर रही है।

नागरिकों तक पहुंच के लिए बहुभाषी समाचार लेख, विज्ञापन, सार्वजनिक स्थलों पर डिजिटल स्क्रीन और होर्डिंग्स, टीवी और रेडियो संदेश, DoT की फील्ड इकाइयों द्वारा स्थानीय गतिविधियां, टेलीकॉम कंपनियों के साथ एसएमएस अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि ‘संचार साथी’ जनभागीदारी को भी बढ़ावा देता है, जिसके तहत नागरिक साइबर धोखाधड़ी में दूरसंचार संसाधनों के संदिग्ध दुरुपयोग की रिपोर्ट कर सकते हैं। इससे अधिकारी और टेलीकॉम ऑपरेटर संदिग्ध नंबरों और फर्जी कनेक्शनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर पाते हैं, जिससे दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके और निर्दोष उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

IMEI पंजीकरण और छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई: दूरसंचार अधिनियम 2023 व साइबर सुरक्षा नियमों के अनुपालन हेतु DoT की सलाह

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भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ दूरसंचार उपकरण हैं। दूरसंचार नेटवर्क को सुरक्षित रखने और नकली उपकरणों को रोकने के लिए, भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान संख्या (IMEI) के पंजीकरण और छेड़छाड़ पर सख़्त नियम लागू किए हैं, जो दूरसंचार अधिनियम, 2023 और टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम, 2024 के तहत अनिवार्य हैं।

दूरसंचार विभाग (DoT) सभी निर्माताओं, ब्रांड मालिकों, आयातकों और विक्रेताओं को विधिक प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करने की सलाह देता है।

मुख्य कानूनी प्रावधान:

  • दूरसंचार अधिनियम, 2023 दूरसंचार पहचानकर्ताओं, जिसमें IMEI शामिल है, के साथ छेड़छाड़ पर कड़ी सज़ा का प्रावधान करता है।

  • धारा 42(3)(c) दूरसंचार पहचानकर्ताओं में छेड़छाड़ पर रोक लगाता है।

  • धारा 42(3)(f) जानबूझकर ऐसे रेडियो उपकरण (मोबाइल हैंडसेट, मॉडेम, मॉड्यूल, SIM बॉक्स आदि) रखने को अपराध घोषित करता है, जिनमें अनधिकृत या छेड़छाड़ किए हुए पहचानकर्ता उपयोग किए गए हों।

  • उल्लंघन पर तीन वर्ष तक की कैद, ₹50 लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

  • ये अपराध संज्ञेय (cognizable) और ग़ैर-जमानती (non-bailable) हैं (धारा 42(7)).

  • धारा 42(6) ऐसे अपराधों को बढ़ावा देने या सहायता करने वालों को भी समान दंड का पात्र बताता है।



    मुख्य नियामक आवश्यकताएँ:

1. टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम, 2024 के अनुसार:

a. निर्माता

भारत में निर्मित प्रत्येक उपकरण (मोबाइल हैंडसेट, मॉड्यूल, मॉडेम, SIM बॉक्स आदि) का IMEI नंबर पहली बिक्री, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास (R&D) या किसी भी उपयोग से पहले Device Setu – ICDR पोर्टल पर पंजीकृत करना अनिवार्य है:

b. आयातक

भारत में आयात किए जाने वाले सभी IMEI युक्त उपकरणों का IMEI आयात से पूर्व Device Setu – ICDR पोर्टल पर पंजीकृत करना अनिवार्य है।

2. टेलीकॉम साइबर सुरक्षा संशोधन नियम, 2025

केंद्र सरकार निर्माताओं को यह निर्देश दे सकती है कि वे भारत के दूरसंचार नेटवर्क में पहले से उपयोग किए जा रहे IMEI को नए उपकरणों में आवंटित न करें।

3. काला सूचीबद्ध (blacklisted) या छेड़छाड़ किए IMEI का केंद्रीय डेटाबेस

  • सरकार ऐसे सभी IMEI का केंद्रीय डेटाबेस रखती है।

  • प्रयुक्त (used) मोबाइल उपकरणों का लेन-देन करने वाले सभी संस्थानों को लेन-देन से पहले इस डेटाबेस की जाँच करना अनिवार्य है।

  • IMEI सत्यापन के प्रति IMEI शुल्क निर्धारित है।

  • सभी IMEI युक्त उपकरणों (स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, डोंगल, मॉडेम, लैपटॉप, SIM बॉक्स आदि) का पंजीकरण Device Setu – ICDR पोर्टल पर अनिवार्य है।

4. नियम 8(3), टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम, 2024

जानबूझकर किसी भी दूरसंचार उपकरण की पहचान संख्या को हटाना, बदलना, मिटाना, संशोधित करना, या छेड़छाड़ किए गए/कॉन्फ़िगरेबल IMEI वाले हार्डवेयर या सॉफ़्टवेयर का उपयोग/उत्पादन/तस्करी/संग्रह सख्त रूप से प्रतिबंधित है।

IMEI बदलने योग्य (programmable IMEI) उपकरणों का उपयोग भी IMEI छेड़छाड़ माना जाएगा।

5. नियम 5, टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम, 2024

केंद्र सरकार दूरसंचार संस्थाओं को ऐसे उपकरणों को नेटवर्क में ब्लॉक करने का निर्देश दे सकती है, जिनके IMEI छेड़छाड़ किए गए हों।

DoT का संदेश

इन नियमों का उद्देश्य दूरसंचार साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना, नकली उपकरणों को रोकना, कानून प्रवर्तन में सहायता करना तथा कर संग्रह को सक्षम बनाना है। नियमों के पालन से देश के दूरसंचार नेटवर्क को सुरक्षित रखा जा सकता है। उल्लंघन पर सख़्त कानूनी कार्रवाई होगी।

पंजीकरण पोर्टल और प्रक्रिया

सभी पंजीकरण Device Setu – ICDR पोर्टल पर किए जाएंगे:

प्रक्रिया में शामिल हैं:

  • कंपनी पंजीकरण

  • GSMA TAC से लिंक ब्रांड पंजीकरण

  • डिवाइस मॉडल पंजीकरण

  • IMEI पंजीकरण

  • कस्टम क्लियरेंस के लिए प्रमाणपत्र जारी करना

महत्वपूर्ण लिंक:

दूरसंचार अधिनियम, 2023; टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम, 2024; और टेलीकॉम साइबर सुरक्षा संशोधन नियम, 2025:

DoT के सोशल मीडिया हैंडल:


TRAI ने DoT के बैक-रेफरेंस पर जारी किया औपचारिक जवाब

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भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने आज दूरसंचार विभाग (DoT), संचार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 29 अगस्त 2025 को भेजे गए बैक-रेफरेंस पर अपना आधिकारिक उत्तर जारी किया है। यह बैक-रेफरेंस TRAI की 18 नवंबर 2022 की उन अनुशंसाओं से संबंधित था, जो ‘भारत में डेटा सेंटर, कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क और इंटरकनेक्ट एक्सचेंज की स्थापना के माध्यम से डेटा अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने’ पर केंद्रित थीं।

DoT ने अपने बैक-रेफरेंस में बताया था कि ‘डेटा एथिक्स और ओनरशिप’ से संबंधित अनुशंसाएँ 6.39 और 6.40 पर सरकार ने विचार किया है और इन्हें DoT द्वारा व्यक्त विचारों के आलोक में TRAI द्वारा पुनर्विचार किए जाने की आवश्यकता है।

DoT के विचारों की विस्तृत समीक्षा करने के बाद TRAI ने इन अनुशंसाओं पर अपना अंतिम उत्तर तैयार कर लिया है। यह उत्तर TRAI की आधिकारिक वेबसाइट (www.trai.gov.in) पर उपलब्ध करा दिया गया है।

किसी भी स्पष्टीकरण या जानकारी के लिए, TRAI के सलाहकार (ब्रॉडबैंड एवं नीति विश्लेषण) अब्दुल कय्यूम से +91-11-20907757 पर संपर्क किया जा सकता है।


ESTIC 2025 में ‘डिजिटल संचार’ सत्र का नेतृत्व करते हुए दूरसंचार सचिव डॉ. नीरेज मित्तल ने किया भारत की 6G दृष्टि पर बल

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दूरसंचार विभाग (DoT) ने 3 से 5 नवम्बर, 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित उभरती विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार संगोष्ठी (ESTIC) 2025 में भाग लिया। प्रमुख आयोजकों में से एक के रूप में, दूरसंचार विभाग ने 5 नवम्बर 2025 को ‘डिजिटल संचार (Digital Communication)’ विषय पर एक थीम आधारित सत्र का नेतृत्व किया।

इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. neeraj मित्तल, सचिव (दूरसंचार) एवं अध्यक्ष, डिजिटल कम्युनिकेशन्स कमीशन ने की। इसमें भारत के दूरसंचार एवं डिजिटल नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े प्रमुख शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्र में अशोक कुमार, उप महानिदेशक, दूरसंचार विभाग एवं उपाध्यक्ष, IEG, WTPF, ITU भी उपस्थित रहे।

अपने उद्घाटन भाषण में डॉ. neeraj मित्तल ने कहा कि “टेलीकॉम केवल अर्थव्यवस्था का ही नहीं, बल्कि उन सभी प्रौद्योगिकियों का भी सक्षम माध्यम बन गया है जो विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रही हैं।” उन्होंने कनेक्टिविटी की परिवर्तनकारी शक्ति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीव्र विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “यह क्षेत्र हम सभी के लिए असंभव को संभव बनाने का नया अवसर लेकर आया है।”

डॉ. मित्तल ने कहा कि कनेक्टिविटी सभी उत्पादक गतिविधियों की आधारशिला है, और भारत की दूरसंचार क्रांति का सीधा प्रभाव राष्ट्रीय आर्थिक वृद्धि पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री जी के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत ने विश्व के सबसे तेज़ 5G रोलआउट्स में से एक को पूरा किया है, तथा देशभर में 100 5G लैब्स स्थापित की गई हैं, जो उपयोग मामलों (use cases) के विकास और 6G प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेतृत्व के लिए राष्ट्र को तैयार कर रही हैं।

सचिव (दूरसंचार) ने बताया कि सरकार की अगली पीढ़ी की संचार तकनीक के प्रति रणनीति बहुआयामी है — जो अनुसंधान एवं विकास को समर्थन देती है, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करती है, और अकादमिक जगत, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत पुल बनाती है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में 6G से संबंधित 100 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया जा रहा है, जिनमें Open RAN, स्वदेशी चिपसेट्स, AI आधारित बुद्धिमान नेटवर्क, और रेगुलेटरी सैंडबॉक्स जैसी नवाचार पहलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

डॉ. मित्तल ने भारत 6G एलायंस (Bharat 6G Alliance) का भी उल्लेख किया — जो प्रधानमंत्री जी की दृष्टि से प्रेरित एक अग्रणी पहल है। इसने अब तक 10 अंतरराष्ट्रीय 6G संस्थाओं के साथ सहयोग समझौते किए हैं और इसका लक्ष्य है कि 2030 तक विश्व के कुल 6G पेटेंट्स में भारत का योगदान 10% हो।

सत्र में “भारत के लिए 6G दृष्टि को साकार कैसे करें” विषय पर मुख्य वक्तव्य प्रो. किरण कुमार कुचि (विभागाध्यक्ष, विद्युत अभियांत्रिकी, IIT हैदराबाद एवं संस्थापक, WiSig Networks) ने दिया। अन्य वक्ताओं में रामु श्रीनिवासैया (संस्थापक एवं निदेशक, लेखा वायरलेस सॉल्यूशंस, बेंगलुरु) जिन्होंने “प्राइवेट नेटवर्क्स का नया रूप: 6G नेटवर्क डिज़ाइन में ORAN की भूमिका” पर बात की, और डॉ. कुमार एन. शिवराजन (सह-संस्थापक एवं सीटीओ, तेजस नेटवर्क्स, बेंगलुरु) जिन्होंने “2030 तक भारत को वैश्विक दूरसंचार क्षेत्र में अग्रणी बनाना” विषय पर विचार साझा किए।

एक पैनल चर्चा “स्वदेशी तकनीकों को अगले स्तर तक ले जाना” विषय पर आयोजित की गई, जिसका संचालन डॉ. राजकुमार उपाध्याय, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सी-डॉट (C-DOT) ने किया। इसमें प्रो. राधाकृष्णा गंती (IIT मद्रास), प्रो. पंगनमला विजय कुमार (IISc बेंगलुरु),ए. रॉबर्ट जेरार्ड रवि (अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, BSNL) और डॉ. पराग नाइक (मुख्य वैज्ञानिक, तेजस नेटवर्क्स, एवं पूर्व सीईओ, सांख्य लैब्स) ने भाग लिया।

पैनल में भारत में 5G पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार, NavIC L1 सिग्नल के माध्यम से स्वदेशी PNT (Positioning, Navigation & Timing) के विकास, तथा D2M से लेकर 6G तक के विघटनकारी प्रौद्योगिकी स्टैक्स के निर्माण पर चर्चा की गई।

ESTIC 2025, जिसका विषय था “विकसित भारत 2047 – सतत नवाचार, प्रौद्योगिकी उन्नति और सशक्तिकरण का मार्ग”, का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवम्बर 2025 को किया। यह आयोजन भारत सरकार के 13 मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के मार्गदर्शन में संयुक्त रूप से किया गया। इस संगोष्ठी में 3000 से अधिक प्रतिभागियों — शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग, सरकार, नोबेल पुरस्कार विजेताओं, वैज्ञानिकों, नवाचारकर्ताओं और नीति निर्माताओं — ने भाग लिया।

चर्चा का केंद्र 11 प्रमुख क्षेत्र रहे, जिनमें उन्नत सामग्री एवं विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-उत्पादन (Bio-Manufacturing), ब्लू इकॉनमी, डिजिटल कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर निर्माण, उभरती कृषि तकनीकें, ऊर्जा, पर्यावरण एवं जलवायु, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी, क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, और अंतरिक्ष तकनीकें शामिल हैं।

दूरसंचार विभाग ने जारी किया नया ढांचा: अब एक M2M सेवा प्रदाता से दूसरे को M2M सिम स्वामित्व हस्तांतरण होगा आसान और निर्बाध

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दूरसंचार विभाग (DoT), संचार मंत्रालय ने एक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum - O.M.) जारी करते हुए एक मशीन-से-मशीन (M2M) सेवा प्रदाता/लाइसेंसी से दूसरे M2M सेवा प्रदाता/लाइसेंसी को M2M सिम स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए एक ढांचा (Framework) अधिसूचित किया है।

वर्तमान दिशानिर्देशों के तहत M2M सिम के स्वामी के नाम में परिवर्तन का कोई प्रावधान नहीं था। इस कारण, जब भी किसी कारणवश M2M सेवा प्रदाता में बदलाव आवश्यक होता है, तो अंतिम उपभोक्ताओं की सेवाएँ बाधित हो सकती थीं।

नया ढांचा इस समस्या को दूर करते हुए M2M सिम स्वामित्व के हस्तांतरण की औपचारिक और सुव्यवस्थित प्रक्रिया स्थापित करता है, जिससे सेवा निरंतरता बनी रहे और सभी नियामकीय प्रावधानों का पालन हो। यह सभी M2M सेवा प्रदाताओं (M2MSPs)/लाइसेंसधारकों पर लागू होगा।

M2M सिम स्वामित्व हस्तांतरण की प्रमुख प्रक्रिया

  1. हस्तांतरण अनुरोध (Transfer Request)
    M2M सेवा उपयोगकर्ता या किसी तीसरे पक्ष को मौजूदा M2M सेवा प्रदाता/लाइसेंसी (जिसे ‘ट्रांसफरर’ कहा जाएगा) को एक औपचारिक लिखित अनुरोध देना होगा, जिसमें हस्तांतरित की जाने वाली M2M सिमों और नए M2M सेवा प्रदाता/लाइसेंसी (ट्रांसफरी) का विवरण शामिल होगा।

  2. एनओसी जारी करना (No Objection Certificate - NOC)
    ट्रांसफरर (मौजूदा M2M सेवा प्रदाता/लाइसेंसी) को अनुरोध प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर एनओसी जारी करनी होगी, बशर्ते कि उपयोगकर्ता पर कोई बकाया न हो। यह एनओसी संबंधित एक्सेस सेवा प्रदाताओं (ASP) को भेजी जाएगी।

  3. ट्रांसफरी द्वारा घोषणा (Undertaking by Transferee)
    नया M2M सेवा प्रदाता/लाइसेंसी (ट्रांसफरी) को एक औपचारिक घोषणा/अंडरटेकिंग देनी होगी जिसमें यह उल्लेख हो कि वह सभी दायित्वों, उत्तरदायित्वों और अनुपालन (जैसे KYC और अन्य दिशा-निर्देश) की जिम्मेदारी लेता है।

  4. सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट (Verification & Record Update)
    एक्सेस सेवा प्रदाता (ASP) उपयोगकर्ता के अनुरोध, ट्रांसफरर की एनओसी और ट्रांसफरी की अंडरटेकिंग की जांच करेगा। सफल सत्यापन के बाद ASP को पुनः KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी और नए स्वामित्व के अनुसार ग्राहक रिकॉर्ड को अपडेट करना होगा।

हर समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक M2M सिम किसी न किसी M2M सेवा प्रदाता/लाइसेंसी से जुड़ी रहे और उपयोगकर्ता की सेवा बाधित न हो।

पूरी जानकारी, आवेदन प्रपत्र, एनओसी और अंडरटेकिंग के प्रारूप DoT की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं:

इस ढांचे की शुरुआत दूरसंचार विभाग (DoT) के इस निरंतर प्रयास को दर्शाती है कि अंतिम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए सेवा प्रदाताओं को परिचालन लचीलापन दिया जाए और भारत के M2M व IoT सेवाओं को विश्वसनीय व भविष्य के लिए तैयार रखा जाए।

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