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मिशन मौसम: उन्नत प्रौद्योगिकी के माध्यम से सटीक मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की दिशा में भारत का कदम

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 केंद्रीय क्षेत्र की योजना “मिशन मौसम (Mission Mausam)” का उद्देश्य देश में मौसम और जलवायु से जुड़े अवलोकन, समझ, मॉडलिंग और पूर्वानुमान क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करना है, ताकि अधिक उपयोगी, सटीक और समयबद्ध सेवाएं प्रदान की जा सकें। इस मिशन का लक्ष्य पृथ्वी प्रणाली (Earth System) दृष्टिकोण को अपनाते हुए पृथ्वी प्रणाली अवलोकन के विभिन्न घटकों को मजबूत करना है, जिससे निर्बाध मौसम और जलवायु सेवाओं के लिए सटीक पूर्वानुमान और प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित की जा सके।

मिशन मौसम के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों का विकास

  • उच्च स्थानिक एवं कालिक रेज़ोल्यूशन के साथ वायुमंडलीय अवलोकनों का विस्तार और सुदृढ़ीकरण

  • अगली पीढ़ी के डॉप्लर रडार, विंड प्रोफाइलर और उन्नत उपकरणों से युक्त उपग्रहों की तैनाती

  • उन्नत उच्च-प्रदर्शन संगणना (HPC) प्रणालियों का कार्यान्वयन

  • मौसम और जलवायु प्रक्रियाओं की समझ को बढ़ाना तथा पूर्वानुमान क्षमताओं में सुधार

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) सहित उन्नत पृथ्वी प्रणाली मॉडल और डेटा-आधारित विधियों का विकास

  • प्रभावी मौसम प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकियों और प्रोटोकॉल का निर्माण

  • अंतिम छोर तक सूचना पहुंच सुनिश्चित करने हेतु अत्याधुनिक निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) और प्रसारण प्रणाली की स्थापना

  • क्षमता निर्माण और अनुसंधान सहयोग को मजबूत करना

मिशन मौसम के कार्यान्वयन से उच्च स्थानिक और कालिक रेज़ोल्यूशन पर मौसम पूर्वानुमान की क्षमता में वृद्धि होगी, चरम मौसम घटनाओं के पूर्वानुमान में सुधार होगा तथा ‘सभी के लिए प्रारंभिक चेतावनी (Early Warning for All)’ पहल को समर्थन देने के लिए अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी।

मिशन मौसम के अंतर्गत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) में अत्याधुनिक उच्च-प्रदर्शन संगणना प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही कई डॉप्लर मौसम रडार और अन्य इन-सीटू अवलोकन नेटवर्क भी लगाए गए हैं। इन प्रगतियों से देश के मौसम निगरानी अवसंरचना को मजबूती मिली है और पूर्वानुमान मॉडलों में सुधार हुआ है, जिससे लगभग 6 किलोमीटर के स्थानिक रेज़ोल्यूशन पर मौसम पूर्वानुमान संभव हो सका है। परिणामस्वरूप, मौसम पूर्वानुमानों की सटीकता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बटसेरी, हिमाचल प्रदेश में देवदार वृक्षों ने उजागर किया हिमालय में वसंत सूखे और भू-आपदा का इतिहास

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हिमाचल प्रदेश के संगला घाटी के बटसेरी गाँव में स्थित देवदार (Deodar) पेड़ों ने छोटे हिम युग (Little Ice Age, LIA) के दौरान वसंत ऋतु में अधिक वर्षा और 1757 ईस्वी के बाद सुक्खे होते वसंत का इतिहास उजागर किया। हाल के दशकों में वसंत में सूखे की घटनाएँ बढ़ी हैं, जो उनके वृक्ष-छल्लों (Tree Rings) में दर्ज हैं।

यह अध्ययन भू-आपदा गतिविधियों के कारणों का विश्लेषण करता है और भविष्य की आपदा घटनाओं की पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली के विकास में मदद करता है।

अत्यधिक जलवायु घटनाओं और भू-आपदाओं का संबंध

हिमालय क्षेत्र में सूखा, बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियल झील प्रकोप (GLOFs), चट्टान गिरना और हिम-स्खलन जैसी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति ने यह स्पष्ट किया कि भूतपूर्व जलवायु और भू-आपदा घटनाओं का अध्ययन आवश्यक है।

वृक्ष-छल्लों का महत्व

वृक्ष-छल्ले प्रत्येक वर्ष बनने वाली लकड़ी की परतें होती हैं, जो पेड़ की उम्र और पर्यावरणीय स्थितियों का रिकॉर्ड देती हैं। देवदार के वृक्ष-छल्लों का अध्ययन (Dendroclimatology और Dendrogeomorphology) हमें वर्तमान और भविष्य के भू-आपदा जोखिमों को समझने और उनके लिए रणनीति बनाने में सक्षम बनाता है।

अध्ययन की पृष्ठभूमि

जुलाई 2021 में बटसेरी गाँव के पास एक भारी चट्टान गिरने की घटना ने बिर्बल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज (BSIP), DST के अंतर्गत वृक्ष-छल्लों के माध्यम से भूतपूर्व जलवायु और भू-आपदा अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।

अध्ययन में देंड्रो-क्लाइमेटोलॉजी और देंड्रो-जियोमोर्फोलॉजी को एकीकृत किया गया ताकि भविष्य के जोखिम मूल्यांकन और न्यूनीकरण रणनीतियाँ तैयार की जा सकें।

मुख्य निष्कर्ष

  • देवदार वृक्ष-छल्लों के अध्ययन से 378 वर्षों (1558-2021 CE) का वसंत ऋतु का नमी इतिहास और 168 वर्षों (1853-2021 CE) का चट्टान गिरने का रिकॉर्ड तैयार किया गया।

  • पेड़ की वृद्धि विशेष रूप से फरवरी से अप्रैल के महीनों की नमी पर निर्भर थी, जो पश्चिमी विक्षेप (Western Disturbances) से प्रभावित होती है।

  • कुल 53 चट्टान गिरने की घटनाओं का पता चला, जिनमें 8 उच्च तीव्रता वाली थीं। ये घटनाएँ विशेष रूप से 1960 के बाद के सूखे वसंत से संबंधित थीं।

  • वसंत में सूखे के कारण ढलानों पर विकसित वनस्पति कमज़ोर हो गई, जिससे जब मानसून में भारी वर्षा हुई, तो ढलान अधिक संवेदनशील बन गए।

स्थानीय और नीति-निर्माण पर प्रभाव

  • अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन और भू-आपदाओं के बीच के संबंध को उजागर किया।

  • इससे वन प्रबंधन, जल संसाधन प्रबंधन और ढलान सुरक्षा उपायों में सुधार की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

  • यह दृष्टिकोण सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान से बचाने, स्थानीय लोगों की आजीविका की रक्षा और आपदा तैयारी बढ़ाने में मदद करता है।

  • साथ ही, यह समुदायों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और जोखिम न्यूनीकरण में सशक्त बनाता है।

निष्कर्ष

यह अध्ययन जर्नल Catena में प्रकाशित हुआ और हिमालय क्षेत्र में वसंत और पूर्व-मॉनसून सूखे के कारण भू-आपदाओं के जोखिम को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।


डॉ. जितेंद्र सिंह ने IMD के दो Doppler Weather Radars, सौर ऊर्जा प्रणाली और मौसम विज्ञान संग्रहालय का उद्घाटन किया

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 डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के तीन प्रमुख कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। इनमें शामिल हैं: रायपुर और मंगलूरु में दो अत्याधुनिक डॉपलर वेदर राडार (DWRs), Mausam Bhawan में नई सौर ऊर्जा प्रणाली, और छात्रों एवं युवाओं के लिए मौसम विज्ञान संग्रहालय।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में IMD ‘मिशन मौसम’ परियोजना को तेजी से लागू कर रहा है, जिसे 14 जनवरी 2025 को IMD के 150 वर्षीय उत्सव पर देश को समर्पित किया गया था। उन्होंने बताया कि देश के राडार नेटवर्क को लगभग तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था। अब कुछ ही महीनों में 126 राडार स्थापित हो चुके हैं, जबकि लक्ष्य 2027 तक 47 से लगभग तीन गुना बढ़ाने का था।

रायपुर में ड्यूल पोलराइज्ड, सॉलिड-स्टेट पावर एम्पलीफायर आधारित C-बैंड डॉपलर वेदर राडार स्थापित किया गया है, जो 250 किमी की कवरेज क्षमता के साथ मानसून डिप्रेशन, निम्न दबाव प्रणाली, भारी वर्षा, तूफान, बिजली, ओले, हवाओं और उथल-पुथल का पता लगा सकता है। यह राडार छत्तीसगढ़, आंतरिक ओड़िशा, पूर्व मध्य प्रदेश, दक्षिण पश्चिम झारखंड और पूर्व उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में IMD की भविष्यवाणी क्षमताओं को मजबूत करेगा।

मंगलूरु में दूसरा C-बैंड डॉपलर वेदर राडार स्थापित किया गया है, जो कर्नाटक, गोवा, दक्षिण कोंकण, उत्तरी लक्षद्वीप और कर्नाटक, केरल, गोवा और दक्षिण महाराष्ट्र के क्षेत्रीय तूफानों और गंभीर मौसम की निगरानी करेगा। यह कर्नाटक का पहला IMD राडार है और पश्चिमी तट पर आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दोनों राडार ‘Make in India’ पहल के तहत विकसित किए गए हैं।

डॉ. सिंह ने मौसम विज्ञान संग्रहालय का भी उद्घाटन किया, जो छात्रों, शोधकर्ताओं और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। संग्रहालय में ऐतिहासिक मौसम उपकरण, ऊपरी वायु अवलोकन प्रणाली, संचार उपकरण, राडार और उपग्रह घटक प्रदर्शित किए गए हैं।

इसके अलावा, Mausam Bhawan परिसर में 771 kWp सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की गई है, जिसमें 1,315 सौर पैनल शामिल हैं। इस पहल से IMD की ऊर्जा खपत पूरी तरह से पूरी होने के बाद अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकेगी, जिससे पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ दोनों होंगे।

डॉ. सिंह ने कहा कि ये लॉन्च IMD की भूमिका को मजबूत करते हैं और देश के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देंगे। उन्होंने IMD को “विश्व बंधु” करार दिया क्योंकि यह पड़ोसी देशों को मौसम सेवाएँ और आपदा सलाह प्रणालियाँ उपलब्ध कराता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘मिशन मौसम’ की प्रगति की उच्च-स्तरीय समीक्षा की

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य महत्वाकांक्षी ‘मिशन मौसम’ पहल के अंतर्गत चल रही खरीद और स्थापना से संबंधित प्रगति की समीक्षा करना था।

मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समयसीमा में तेजी लाएँ, विशेषकर इसलिए क्योंकि यह एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है जिसकी घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है।

बैठक में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन सहित मंत्रालय और IMD के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित थे। अधिकारियों ने देश भर में लगाए जा रहे विभिन्न प्रेक्षण एवं रडार प्रणालियों की खरीद, बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता और तेज की गई स्थापना समयसीमा की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित मिशन मौसम, भारत की मौसम पूर्वानुमान और जलवायु निगरानी क्षमताओं में एक बड़ा सुधार है। उन्होंने कहा कि खरीद और स्थापना गतिविधियों का समय पर निष्पादन प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने, आपदा तैयारी को बढ़ाने और अधिक सटीक, स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मंत्री ने IMD और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया कि खरीद प्रक्रियाएँ पारदर्शी, कुशल और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप हों। उन्होंने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थापना कार्यों को तेज करने और फील्ड-स्तर की प्रगति पर नज़र रखने के लिए उन्नत ट्रैकिंग प्रणालियाँ अपनाने पर भी बल दिया।

डॉ. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि IMD और मंत्रालय के बीच समन्वित प्रयासों से मिशन मौसम के तहत निर्धारित लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर ही प्राप्त कर लिए जाएंगे।

हिमाचल प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन अवसंरचना सुदृढ़ करने पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की बैठक

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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और राज्य में मौसम पूर्वानुमान एवं आपदा तैयारी अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर चर्चा की।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया कि हिमाचल प्रदेश में डॉप्लर वेदर रडार की स्थापना की गई है, जिससे प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

हाल के बादल फटने और अचानक आई बाढ़ की घटनाओं के मद्देनज़र, मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलों, विशेष रूप से आपदा-प्रवण क्षेत्रों में अतिरिक्त डॉप्लर रडार और स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS) स्थापित करने का अनुरोध किया ताकि भविष्य में मौसम से संबंधित चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना किया जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री के इस सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार जलवायु लचीलापन और आपदा न्यूनीकरण के लिए राज्यों के प्रयासों को पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय लगातार देश के मौसम विज्ञान नेटवर्क का विस्तार कर रहा है, विशेषकर पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में, ताकि आम जनता और स्थानीय प्रशासन तक समय पर मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंच सके।

प्रधानमंत्री मोदी की शासन नीति का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2014 से सहकारी संघवाद की भावना को निरंतर सशक्त किया है और हर राज्य को समान व न्यायसंगत सहयोग प्रदान किया है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या राजनीतिक दल से संबंधित हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण राज्यों की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ कर उन्हें स्थानीय स्तर पर उभरती चुनौतियों का शीघ्र और प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाना है।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि डॉप्लर रडार और AWS जैसे उन्नत मौसम संबंधी उपकरण न केवल आपदा तैयारी में बल्कि कृषि, जलविद्युत और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इन अवसंरचनाओं के विस्तार में पूर्ण सहयोग देगी ताकि संवेदनशील क्षेत्रों को कवर किया जा सके और जन सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।

बैठक ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच वैज्ञानिक ढांचे को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया, जिससे हिमाचल प्रदेश में विकास जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ बनेगा। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राज्य प्राधिकरणों के बीच घनिष्ठ समन्वय हिमाचल प्रदेश की चरम मौसम घटनाओं से निपटने की क्षमता को और बढ़ाएगा।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का दौरा किया, बहु-आकस्मिक प्रारंभिक चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) की समीक्षा की

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का दौरा किया और विभाग द्वारा विकसित वेब-जीआईएस आधारित बहु-आकस्मिक प्रारंभिक चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (Multi-Hazard Early Warning Decision Support System – DSS) की समीक्षा की।

मंत्री ने विभाग द्वारा स्वदेशी, तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के विकास में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की, जिससे आपदा प्रबंधन की तैयारी और जनसुरक्षा को मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि इस DSS प्रणाली के माध्यम से विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता समाप्त होने और ₹5.5 करोड़ के वार्षिक रखरखाव व्यय से बचाव के कारण लगभग ₹250 करोड़ की लागत बचत हुई है, जो “आत्मनिर्भर भारत” पहल को सशक्त बनाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने “मौसमग्राम” (हर हर मौसम, हर घर मौसम) नामक नागरिक-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म की भी समीक्षा की, जो गाँव स्तर तक हाइपर-लोकल और स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान प्रदान करता है। यह प्रणाली अगले 36 घंटे तक प्रति घंटे का पूर्वानुमान, अगले 5 दिनों तक हर 3 घंटे का पूर्वानुमान और अगले 10 दिनों तक हर 6 घंटे का पूर्वानुमान देती है। नागरिक अपने क्षेत्र का मौसम विवरण पिन कोड, स्थान नाम या राज्य, ज़िला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। यह सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे देश के प्रत्येक हिस्से में नागरिकों को सटीक और समय पर मौसम जानकारी मिल सके।

IMD ने अपने पूर्वानुमान और चेतावनी निर्माण प्रक्रिया को पूरी तरह से पुनर्गठित किया है, जिससे वास्तविक समय में अलर्ट जारी किए जा सकें। अब पूर्वानुमान की सटीकता में 15–20% की वृद्धि हुई है, तैयारी समय 3 घंटे घटा है, और लीड अवधि 5 से बढ़कर 7 दिन तक हो गई है।

IMD अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने “मौसमग्राम” को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तंत्र शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बहु-आकस्मिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को और विकसित किया जाए ताकि नागरिकों को स्पष्ट, क्रियाशील और समय पर अलर्ट मिल सकें, जिससे आपदाओं को रोका जा सके और पर्याप्त तैयारी की जा सके।

मंत्री ने IMD टीम को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 जीतने पर बधाई दी, जो विशाखापट्टनम में आयोजित 28वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दौरान DSS के माध्यम से सार्वजनिक सेवा में डिजिटल तकनीक के उत्कृष्ट उपयोग के लिए प्रदान किया गया। उन्होंने विशेष स्वच्छता कार्यक्रम के तहत पुराने फ़ाइलों और ई-वेस्ट के निपटान से ₹30 लाख की आय और 600 वर्ग मीटर कार्यालय क्षेत्र खाली करने के लिए भी विभाग की सराहना की।

इससे पहले, मंत्री ने नई दिल्ली स्थित IMD मुख्यालय “मौसम भवन” में आयोजित विशेष स्वच्छता कार्यक्रम 5.0 में भाग लिया।

“एक पेड़ मां के नाम” पहल के तहत, डॉ. जितेंद्र सिंह ने IMD परिसर में पौधारोपण किया और स्वच्छता कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 50 सफाई मित्रों को सम्मानित किया।

मिशन मौसम के अंतर्गत आधुनिक मौसम उपकरणों की स्थापना और कमीशनिंग जारी है, जो 2030 तक IMD की पूर्वानुमान क्षमता को सशक्त बनाएगा। इससे 5x5 किलोमीटर स्तर तक गंभीर मौसम पूर्वानुमान, डायनेमिक इम्पैक्ट-आधारित फोरकास्टिंग और जोखिम-आधारित प्रारंभिक चेतावनियां संभव होंगी। इसका उद्देश्य है कि 2030 तक हर घर तक समय पर मौसम अलर्ट पहुँचे, जिससे “हर हर मौसम, हर घर मौसम” का विज़न साकार हो सके।

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