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राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 का गांधीनगर में समापन, सतत खनन और महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा पर केंद्र–राज्यों की प्रतिबद्धता

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गांधीनगर, गुजरात- राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 का समापन केंद्र और राज्यों द्वारा सतत खनन को आगे बढ़ाने तथा भारत की महत्वपूर्ण खनिज आवश्यकताओं को सुरक्षित करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। चिंतन शिविर के दूसरे दिन भारत के खनन क्षेत्र को सशक्त बनाने से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, सतत खनन पद्धतियों और दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। विचार-विमर्श में खनन मूल्य शृंखला के सभी चरणों में घरेलू क्षमताओं को समन्वित और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के सामूहिक संकल्प को प्रतिबिंबित किया गया।

विचार-विमर्श के दौरान विवेक कुमार बाजपेयी, संयुक्त सचिव, खान मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की रूपरेखा पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान, अन्वेषण एवं नीलामी रणनीतियों, घरेलू खनन और प्रसंस्करण क्षमताओं को सुदृढ़ करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण से संबंधित पहलों को रेखांकित किया।

भारतीय खान ब्यूरो के महानियंत्रक पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपशिष्ट ढेरों और टेलिंग्स से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति पर प्रस्तुति दी। उन्होंने उन्नत प्रौद्योगिकियों और द्वितीयक संसाधनों के उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जिससे पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी और परिपत्र (सर्कुलर) खनन पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए खनिज उपलब्धता में वृद्धि की जा सके।

सभा को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल, सचिव, खान मंत्रालय ने राष्ट्रीय विकास में खनन क्षेत्र के योगदान को बढ़ाने के लिए खदानों के समयबद्ध संचालन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने त्वरित और जवाबदेह प्रक्रियाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया और कहा कि खान मंत्रालय देश की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप खनन गतिविधियों को तेज करने के लिए कदम उठा रहा है।

पंजाब के खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने राज्य के खनन क्षेत्र की प्रगति और संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए आधुनिक प्रौद्योगिकियों, सतत पद्धतियों और प्रभावी नीतिगत उपायों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि इस क्षेत्र को और सुदृढ़ किया जा सके।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने समावेशी और सतत विकास की आधारशिला के रूप में खनन क्षेत्र को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने खनन से प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) निधियों के प्रभावी उपयोग, मजबूत खान समापन योजनाओं की आवश्यकता और खनिज ब्लॉकों की समयबद्ध नीलामी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने दोहराया कि खनन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने में राज्य प्रमुख भागीदार हैं और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों के अनुरूप उत्तरदायी खनन और घरेलू खनिज सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।

दो दिवसीय सम्मेलन में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, विभिन्न राज्यों के मंत्री तथा खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। आठ से अधिक राज्यों के खनन मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी ने खनन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने हेतु सहकारी संघवाद की सशक्त भावना को दर्शाया।


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