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'चिरायु' की सतर्कता से थमी नहीं त्रिशांत के दिल की धड़कन; आरबीएसके ने मासूम को दिया नया जीवन

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धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत का हुआ सफल और पूर्णतः निःशुल्क हृदय ऑपरेशन

लाडले को स्वस्थ देख परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू

​रायपुर- कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित 'चिरायु योजना' धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।

स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत

​धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease - CHD) पनप रहा है। ​तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।

जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन

चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

​पहचान से लेकर घर वापसी तक

इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। ​राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 'चिरायु टीम' की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।

परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है निःशुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णतः निःशुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।"

लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां

त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।

सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है 'आरबीएसके'

धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णतः ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने लॉन्च कीं कई नई डिजिटल स्वास्थ्य पहलें, देश की हेल्थ सेवाओं को मिलेगा बड़ा डिजिटल बूस्ट

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज भारत के डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए कई नई डिजिटल स्वास्थ्य पहलों का शुभारंभ किया। इन पहलों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी, एकीकृत और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

लॉन्च की गई प्रमुख डिजिटल पहलें

  • आरोग्य सेतु 2.0 (Aarogya Setu 2.0)

  • आयुष्मान ऐप (Ayushman App)

  • आयुष्मान सारथी व्हाट्सएप चैटबॉट

  • नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX)

  • यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI)

  • ई-सुश्रुत क्लिनिक

  • ड्रग रजिस्ट्री

  • भारत हेल्थ टर्मिनोलॉजी सर्विस (BHTS)

  • कॉमन LOINC कोड्स फॉर इंडिया (CLCI)

क्या होगा फायदा?

  • देशभर में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच।

  • मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का सुरक्षित और निर्बाध आदान-प्रदान।

  • अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, दक्षता और निरंतरता बढ़ेगी।

  • डॉक्टरों, मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलेगा।

एबीडीएम (ABDM) की बड़ी उपलब्धि

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत अब तक:

  • 90 करोड़ से अधिक ABHA (आभा) खाते बनाए जा चुके हैं।

  • 100 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए जा चुके हैं।

  • भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में शामिल हो चुका है।

एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

सरकार ने SAHI और BODHI जैसे एआई आधारित प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक स्मार्ट, तेज और प्रभावी बनाना है।

राज्यों से अपील

जगत प्रकाश नड्डा ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू करने का आग्रह करते हुए कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार बेहद आवश्यक है।

महिलाओं और स्वास्थ्यकर्मियों को होगा लाभ

केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड से महिलाओं को देश के किसी भी हिस्से में आसानी से उपचार मिलेगा। साथ ही, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशासनिक बोझ भी कम होगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

प्रिसिजन मेडिसिन और जीन थेरेपी से बदलेगा स्वास्थ्य सेवा का भविष्य, भारत बनेगा वैश्विक हेल्थकेयर इनोवेशन हब: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- डॉक्टर्स डे की पूर्व संध्या पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine), जीन थेरेपी, न्यूक्लियर मेडिसिन और अन्य उभरती तकनीकें भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बदल देंगी। उन्होंने कहा कि भारत स्वदेशी अनुसंधान के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान विकसित कर रहा है और तेजी से विश्वस्तरीय हेल्थकेयर इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है।

डॉक्टर्स डे कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की विशाल आनुवंशिक (Genetic) विविधता, विभिन्न प्रकार की बीमारियों का व्यापक स्वरूप और मजबूत होता वैज्ञानिक ढांचा देश को "भारतीय मरीजों के लिए भारतीय डेटा आधारित भारतीय उपचार" विकसित करने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। इससे न केवल देश की स्वास्थ्य जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि दुनिया को भी किफायती और प्रभावी चिकित्सा समाधान मिलेंगे।

प्रिसिजन मेडिसिन से बदलेगा इलाज का तरीका

उन्होंने कहा कि भविष्य में इलाज मरीज के जीन, जीवनशैली और पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर तय होगा। इससे रोगों का अधिक सटीक निदान, लक्षित उपचार और बेहतर परिणाम संभव होंगे।

जीनोम इंडिया मिशन बना मजबूत आधार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जीनोम इंडिया मिशन के तहत अब तक 10,000 से अधिक लोगों का जीनोम सीक्वेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है और भारत दुनिया के सबसे बड़े जीनोमिक डाटाबेस में से एक तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे दुर्लभ आनुवंशिक रोगों और व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) पर शोध को नई गति मिलेगी।

जीन थेरेपी और न्यूक्लियर मेडिसिन में बड़ी उपलब्धियां

उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने हाल ही में हीमोफीलिया के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल प्रदर्शन किया है, जो देश की चिकित्सा अनुसंधान क्षमता का बड़ा उदाहरण है। साथ ही न्यूक्लियर मेडिसिन कैंसर सहित गंभीर बीमारियों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की बढ़ती भूमिका

डॉ. सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज जीनोम विश्लेषण, रोगों की पहचान, मेडिकल शिक्षा, बायोमेडिकल रिसर्च और टेलीमेडिसिन जैसे क्षेत्रों में तेजी से उपयोग हो रहा है। इससे जटिल चिकित्सा डेटा का विश्लेषण तेजी से संभव हो रहा है और दूरदराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं।

स्वदेशी दवा अनुसंधान में भारत आगे

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल विदेशों में विकसित दवाओं का निर्माण करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान, क्लिनिकल ट्रायल और नवाचार के माध्यम से नई दवाएं विकसित कर रहा है। हाल ही में दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए विकसित भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक इसका प्रमाण है।

जैव प्रौद्योगिकी और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में तेजी

डॉ. सिंह ने बताया कि BioE3 नीति और Bio-RIDE मिशन के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थकेयर इनोवेशन को नई गति मिल रही है। वहीं भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीक विकसित कर रहा है।

आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ नेटवर्क की सराहना

उन्होंने आयुष्मान भारत को दुनिया की सबसे समावेशी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीमेडिसिन ने देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को काफी मजबूत किया है।

रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य में डायबिटीज, कैंसर और फैटी लिवर जैसी गैर-संचारी बीमारियों से निपटने के लिए समय पर जांच, नियमित स्क्रीनिंग, जन-जागरूकता और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान में निरंतर निवेश तथा सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी भारत को अगली पीढ़ी की स्वास्थ्य सेवाओं का वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाएगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), PM-ABHIM और अन्य प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की।

बैठक में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी उन्मूलन, वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम, गैर-संचारी रोगों (NCDs) की शुरुआती जांच और सरकारी अस्पतालों में दवाइयों व जांच सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया गया।

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पश्चिम बंगाल को 3505.59 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें से पहली किस्त के रूप में 527.58 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। साथ ही PM-ABHIM और 15वें वित्त आयोग के स्वास्थ्य अनुदान का शीघ्र उपयोग करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में “टीबी मुक्त भारत अभियान” को तेज करने, HPV वैक्सीनेशन शुरू करने और खसरा-रूबेला उन्मूलन अभियान को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मातृ मृत्यु दर (MMR), नवजात मृत्यु दर (NMR) और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) में सुधार के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के विस्तार, गांव स्तर पर स्वास्थ्य जांच बढ़ाने और आयुष्मान भारत PM-JAY योजना को जल्द लागू करने पर जोर दिया। इस योजना से राज्य के लगभग 1.45 करोड़ परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

बैठक में कालाजार, डेंगू, मलेरिया और लिम्फेटिक फाइलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए सतर्क निगरानी और समय पर कार्रवाई पर भी चर्चा हुई।

सुवेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया तथा राज्य में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने पश्चिम बंगाल के उत्तर क्षेत्र में एक नए AIIMS संस्थान और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए केंद्र से सहयोग की मांग भी की।

इंडियाAI मिशन और NHA ने AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया

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इंडियाAI मिशन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के सहयोग से 9 मई 2026 को IISc बेंगलुरु में AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया। यह आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के शोकेस का समापन था, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को प्रदर्शित किया गया।

यह हैकाथॉन NHA और IISc बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य दावों (क्लेम्स) के निपटान की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनाना तथा धोखाधड़ी (फ्रॉड) की पहचान को मजबूत करना था।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ सुनील कुमार बर्नवाल, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह, NHA की संयुक्त सचिव ज्योति यादव तथा MeitY की संयुक्त निदेशक शिखा दहिया ने उन नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया, जिनके समाधान AI आधारित क्लेम प्रोसेसिंग को बदलने की क्षमता रखते हैं।

यह हैकाथॉन आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अंतर्गत तीन प्रमुख समस्या क्षेत्रों पर केंद्रित था, जो दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत प्रतिदिन 1900+ उपचार पैकेजों के लिए बड़ी संख्या में क्लेम प्रोसेस किए जाते हैं।

हैकाथॉन विजेता

समस्या विवरण 1: क्लिनिकल डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन एवं STG अनुपालन

अलग-अलग गुणवत्ता वाले मेडिकल दस्तावेजों को पढ़कर महत्वपूर्ण डेटा निकालना, आवश्यक विज़ुअल तत्वों की पहचान करना और NHA द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस (STG) के अनुपालन की जांच करना।

  • विजेता: विनय बाबू उल्ली

  • रनर-अप:  खुशी सिंह

  • द्वितीय रनर-अप: विजय बालाजी

समस्या विवरण 2: रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित रोग पहचान एवं रिपोर्ट मिलान

एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों की इमेज का विश्लेषण कर उन्हें रिपोर्ट से मिलाकर सही तरीके से क्लेम का सत्यापन करना।

  • विजेता: हरीश कुमार

  • रनर-अप:  भरत वर्मा संगाराजू

  • द्वितीय रनर-अप: अर्नोल्ड सचित

समस्या विवरण 3: डॉक्यूमेंट फर्जीवाड़ा एवं डीपफेक पहचान

फर्जी या AI-जनरेटेड दस्तावेजों, जैसे कि नकली डिस्चार्ज समरी, बिल में छेड़छाड़ और फर्जी पहचान की पहचान करना।

  • विजेता: प्रवीण श्रीधर

  • रनर-अप: निकिलेश्वर राव सुलाके

  • द्वितीय रनर-अप: सुमंत नायडू माथिरेड्डी

विजेता टीमों को क्रमशः ₹5 लाख, ₹3 लाख और ₹2 लाख की नकद राशि प्रदान की गई। अधिकारियों ने बताया कि चयनित समाधान भविष्य में AB PM-JAY प्रणाली में लागू किए जा सकते हैं।

भारत में AB PM-JAY ऑटो-अडजुडिकेशन हैकाथॉन 2026 का सफल समापन

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने इंडिया एआई मिशन और भारतीय विज्ञान संस्थान के सहयोग से AB PM-JAY ऑटो-अडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया।

यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत स्वास्थ्य बीमा दावों की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

3,500 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी

इस हैकाथॉन में देशभर से स्टार्टअप, छात्र, शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। 3,500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और उनके समाधानों का मूल्यांकन विशेषज्ञ जूरी द्वारा किया गया।

प्रमुख श्रेणियों में विजेता

तीन प्रमुख समस्या क्षेत्रों में विजेताओं का चयन किया गया—

1. क्लिनिकल डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और STG अनुपालन

  • विजेता: टीम निर्णय (विनय बाबू उल्ली)

  • रनर-अप: आईआईआईटी ग्वालियर की टीम

  • द्वितीय रनर-अप: विदाल हेल्थ टीम

2. रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित डिटेक्शन

  • विजेता: टीम बिल्टआईक्यू एआई (हरिश कुमार)

  • रनर-अप:टीम कण्टक शोधना

  • द्वितीय रनर-अप: टीम अर्नोल्ड सचिथ एवं डॉ. स्मिता राव

3. डॉक्यूमेंट फ्रॉड / डीपफेक डिटेक्शन

  • विजेता: टीम सोपा क्लेम्स (प्रवीण श्रीधर, स्नेहल जोशी)

  • रनर-अप: आरजीयूकेटी-नुज़विद की टीम फॉरेंसिक

  • द्वितीय रनर-अप: टीम सुश्रुत हेल्थ एआई

पुरस्कार राशि

  • विजेता: ₹5 लाख

  • रनर-अप: ₹3 लाख

  • द्वितीय रनर-अप: ₹2 लाख

AI और डिजिटल स्वास्थ्य पर चर्चा

कार्यक्रम में “दावों के निपटान (क्लेम्स एडजुडिकेशन) का भविष्य” और “एआई के युग में धोखाधड़ी, अपव्यय और दुरुपयोग” जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। इसमें एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य बीमा में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन पर फोकस

एक विशेष राउंडटेबल में बड़े अस्पतालों के साथ  आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) को लागू करने पर चर्चा हुई, जिसमें डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ABHA और इंटरऑपरेबल सिस्टम जैसे विषय शामिल रहे।

निष्कर्ष

NHA ने कहा कि यह पहल भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ाकर दावों की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

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भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में आयोजित तीसरी संयुक्त समिति बैठक (Joint Committee Meeting - JCM) आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में सम्पन्न हुई।

इस बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और जापान की स्वास्थ्य नीति मंत्री किमी ओनोदा ने की।

बैठक का आयोजन भारत-जापान स्वास्थ्य सहयोग समझौते (MoC) के तहत किया गया, जो दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, सम्मान और साझी विकास दृष्टि पर आधारित सहयोग को मजबूत करता है।

स्वास्थ्य सचिव पुन्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि यह मंच दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग और संवाद को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

बैठक में गैर-संचारी रोगों (NCDs), दवाओं व चिकित्सा उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल स्वास्थ्य और मानव संसाधन विकास जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

भारत ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अपने डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को प्रस्तुत किया, जबकि जापान ने एआई और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में अपने अनुभव साझा किए।

बैठक में यह भी कहा गया कि भारत और जापान की साझेदारी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

‘SMILE’ योजना—हाशिए से सम्मान की ओर एक सशक्त पहल

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नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा शुरू की गई SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना आज देश के सबसे वंचित वर्गों—ट्रांसजेंडर समुदाय और भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों—के जीवन में बदलाव की एक नई कहानी लिख रही है। 12 फरवरी 2022 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लॉन्च की गई यह योजना सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

₹390 करोड़ का निवेश, बदलाव की मजबूत नींव

वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक इस योजना के लिए कुल ₹390 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए ₹265 करोड़ और भिक्षावृत्ति पुनर्वास के लिए ₹125 करोड़ आवंटित किए गए हैं। हर वर्ष बढ़ते बजट से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जमीनी स्तर पर असर—हजारों को मिला नया जीवन

मार्च 2026 तक भिक्षावृत्ति उप-योजना के तहत 31,055 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से 9,935 व्यक्तियों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया जा चुका है। इसके अलावा, देश के 17 राज्यों में 21 ‘गरिमा गृह’ संचालित हो रहे हैं, जहाँ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सुरक्षित आवास, भोजन और कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए समग्र सहयोग

SMILE योजना, Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 के अनुरूप, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक सहायता देती है। इसके तहत छात्रों को छात्रवृत्ति, कौशल विकास प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में, आयुष्मान भारत TG प्लस के तहत हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ₹5 लाख तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवर मिलता है, जिसमें जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी और हार्मोन थेरेपी भी शामिल हैं।

भिक्षावृत्ति से आत्मनिर्भरता की ओर

इस योजना के अंतर्गत, भिक्षावृत्ति में लगे लोगों की पहचान कर उन्हें आश्रय, परामर्श और कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है, ताकि वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और समाज की मुख्यधारा में वापस लौट सकें।

‘SMILE’—सिर्फ योजना नहीं, बदलाव की सोच

SMILE योजना का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे हालात बनाना है जहाँ व्यक्ति को किसी सहायता की जरूरत ही न पड़े। यह योजना समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है।

निष्कर्ष

SMILE योजना आज एक ऐसी पहल बनकर उभरी है, जो न केवल जीवन बदल रही है, बल्कि समाज में समानता और गरिमा के मूल्यों को भी मजबूत कर रही है। यह योजना साबित करती है कि सही नीतियों और प्रतिबद्धता के साथ, हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा सकता है।

आयुष्मान भारत योजना में डिजिटल बदलाव को बढ़ावा देने के लिए ‘ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन 2026’ का आयोजन

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नई दिल्ली- National Health Authority द्वारा संचालित Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (AB PM-JAY) के तहत देश में डिजिटल हेल्थ ट्रांसफॉर्मेशन को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह योजना प्रतिदिन लगभग 50,000 क्लेम्स को प्रोसेस करती है, जो 1900 से अधिक उपचार पैकेजों से जुड़े होते हैं।

इतनी बड़ी संख्या में क्लेम्स को देखते हुए, तेज़, सटीक और पारदर्शी क्लेम निपटान (adjudication) बेहद आवश्यक हो गया है। वर्तमान में लगभग 15–20% क्लेम्स ही ऑटोमैटिक तरीके से निपटाए जा रहे हैं, जबकि एक स्केलेबल और सभी पैकेजों पर लागू होने वाली प्रणाली की जरूरत महसूस की जा रही है।

हैकाथॉन का उद्देश्य

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए NHA ने AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन 2026 की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य ऐसे डिजिटल समाधान विकसित करना है जो:

  • मौजूदा सिस्टम के साथ सहजता से जुड़ सकें

  • मैनुअल कार्यभार को कम करें

  • क्लेम प्रोसेसिंग को तेज और पारदर्शी बनाएं

  • AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन और रियल-टाइम वेरिफिकेशन को सक्षम बनाएं

प्रतिभागियों की बड़ी भागीदारी

इस हैकाथॉन को देशभर से शानदार प्रतिक्रिया मिली है, अब तक 2600 से अधिक प्रतिभागी रजिस्टर कर चुके हैं। इसमें छात्र, शोधकर्ता, डेवलपर्स, स्टार्टअप्स और प्रोफेशनल्स शामिल हैं।

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 13 अप्रैल 2026
इच्छुक प्रतिभागी आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

मास्टरक्लास सीरीज की शुरुआत

प्रतिभागियों को मार्गदर्शन देने के लिए NHA द्वारा 3 विशेष मास्टरक्लास सत्र आयोजित किए जा रहे हैं:

  • सत्र 1: 13 अप्रैल 2026 (दोपहर 2:00 – 4:00 बजे)

  • सत्र 2: 15 अप्रैल 2026 (दोपहर 2:00 – 4:00 बजे)

  • सत्र 3: 16 अप्रैल 2026 (दोपहर 2:00 – 4:00 बजे)

ये सभी सत्र NHA के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किए जाएंगे।

IISc बेंगलुरु में ग्रैंड फिनाले

हैकाथॉन का ग्रैंड फिनाले 8-9 मई 2026 को Indian Institute of Science में आयोजित होगा। इसमें चयनित टीमें अपने समाधान प्रस्तुत करेंगी, जिनका मूल्यांकन हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी और पब्लिक पॉलिसी के विशेषज्ञों की जूरी द्वारा किया जाएगा।

आकर्षक पुरस्कार

विजेताओं को प्रत्येक समस्या के लिए:

  • प्रथम पुरस्कार: ₹5 लाख

  • द्वितीय पुरस्कार: ₹3 लाख

  • तृतीय पुरस्कार: ₹2 लाख

साथ ही NHA के साथ भविष्य में सहयोग का अवसर भी मिलेगा।

डिजिटल हेल्थ के भविष्य की दिशा

इस पहल के माध्यम से NHA ने स्पष्ट किया है कि वह नवाचार और सहयोग के जरिए देश में एक मजबूत, पारदर्शी और प्रभावी डिजिटल हेल्थ सिस्टम विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे लाभार्थियों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं दोनों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वृंदावन में रामकृष्ण मिशन के ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन किया

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द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 मार्च 2026) “रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, वृंदावन” में नंद किशोर सोमानी ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि रामकृष्ण मिशन आध्यात्मिक चेतना और मानवीय सेवा के संगम का एक सशक्त प्रतीक है। रामकृष्ण परमहंस की गहन भक्ति ने एक शक्तिशाली धारा को जन्म दिया, जिसे उनके प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद ने मानव कल्याण के लिए संस्थागत रूप दिया। रामकृष्ण मिशन ने निरंतर यह संदेश दिया है कि प्रेम, सेवा और करुणा ही ईश्वर की प्राप्ति का सर्वोच्च मार्ग हैं। इस मिशन ने यह भी दिखाया है कि निस्वार्थ सेवा और करुणा ही सच्ची आध्यात्मिकता की वास्तविक अभिव्यक्ति हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि कैंसर सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। समय पर बीमारी का पता लगना और उच्च गुणवत्ता वाला उपचार किसी मरीज का जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, कई परिवारों के लिए इस बीमारी का इलाज आर्थिक कारणों से कठिन या असंभव लगता है। ऐसे समय में सेवा भावना से प्रेरित संस्थान सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जागरूकता अभियानों और समय पर जांच की सुविधाओं के माध्यम से कैंसर की रोकथाम और प्रारंभिक उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी संभव है जब उसके नागरिक स्वस्थ हों।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजनाओं के माध्यम से लाखों नागरिकों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के अंतर्गत कैंसर उपचार को भी शामिल किया गया है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेवा भावना से प्रेरित चिकित्सा संस्थान समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं करते, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और सम्मान भी स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन ने यह सिद्ध किया है कि आधुनिक विज्ञान और मानवीय करुणा का संगम मानव कल्याण के लिए अद्भुत कार्य कर सकता है। उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम से जुड़े सभी हितधारकों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि उनका योगदान आने वाले वर्षों में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।



देहरादून में स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने संबोधित किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज देहरादून स्थित स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है और यह सेवा व जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत भी है।

मंत्री नड्डा ने छात्रों से चिकित्सा पेशे के उच्चतम आदर्शों को अपनाने, निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और मानवता की सेवा में अपने ज्ञान और कौशल को समर्पित करने का आह्वान किया।

उन्होंने पिछले 11 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई बड़ी प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में AIIMS की संख्या 6 से बढ़कर 23 हो गई है। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव दर लगभग 89% तक पहुँच गई है, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, और भारत ने वैश्विक औसत से तेज़ी से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की है।

केंद्रीय मंत्री ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान, आयुष्मान भारत योजना, आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च में कमी, टीबी और मलेरिया नियंत्रण, तथा 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना जैसी उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की असली ताकत समर्पित और संवेदनशील चिकित्सा पेशेवरों में निहित है।



फाइलेरिया उन्मूलन के लिए देशव्यापी MDA अभियान का शुभारंभ, 2027 तक बीमारी खत्म करने का लक्ष्य

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देशभर में लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (हाथीपांव) के उन्मूलन के लिए वार्षिक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान की शुरुआत की। इस अभियान में फाइलेरिया प्रभावित 12 राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

यह अभियान रोग संचरण को रोकने, बीमारी से होने वाली विकलांगता कम करने और कमजोर आबादी को निवारक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

क्या है फाइलेरिया (हाथीपांव)

लिम्फैटिक फाइलेरियासिस एक मच्छर जनित बीमारी है, जो प्रदूषित और ठहरे पानी में पनपने वाले क्यूलेक्स मच्छर से फैलती है। यह रोग लिम्फ प्रणाली को नुकसान पहुंचाकर विकलांगता, सामाजिक कलंक और आर्थिक कठिनाइयों का कारण बनता है।

भारत सरकार ने इसे 2027 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, जो वैश्विक SDG लक्ष्य 2030 से पहले है।

फाइलेरिया की वर्तमान स्थिति

  • 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 348 जिलों में फाइलेरिया स्थानिक

  • 41% जिलों (143) ने MDA सफलतापूर्वक बंद किया

  • 50% जिलों (174) में अभी वार्षिक MDA जारी

  • 2024 तक

    • 6.20 लाख लिम्फोडेमा केस

    • 1.21 लाख हाइड्रोसील केस

 MDA अभियान से मिली बड़ी सफलता

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ स्वास्थ्य लक्ष्य नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक आवश्यकता भी है।

MDA अभियान के तहत सीधे निगरानी में दवा सेवन (Directly Observed Treatment) से अच्छे परिणाम मिले हैं। उन्होंने मच्छर नियंत्रण और जन जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

मरीजों के लिए उपचार और सामाजिक सुरक्षा

  • हाइड्रोसील सर्जरी और दवाओं का वितरण

  • आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्क्रीनिंग और इलाज

  • हाइड्रोसील सर्जरी को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया गया

नई रणनीति: साल में एक बार MDA

फरवरी 2026 से भारत में साल में एक बार एकीकृत MDA अभियान शुरू किया गया है, जिससे बेहतर निगरानी, उच्च कवरेज और प्रभावी संचालन संभव होगा।

कार्यक्रम की प्रगति

  • MDA कवरेज 2014 में 75% से बढ़कर 2025 में 85%

  • TAS-1 पास करने वाले जिले 15% से बढ़कर 41%

  • 2025 अभियान में 21.71 करोड़ लोगों को लक्ष्य, 96% कवरेज

  • 18.48 करोड़ लोगों ने दवा का सेवन किया

सामुदायिक भागीदारी पर जोर

सरकार ने पंचायती राज, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, कृषि, ग्रामीण विकास सहित कई मंत्रालयों के सहयोग से जन जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।

2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत का लक्ष्य

स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे समाज और सरकार के संयुक्त प्रयासों से फाइलेरिया मुक्त भारत बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव स्मृति पुन्या सलिला श्रीवास्तव, NHM की एमडी अराधना पटनायक और संयुक्त सचिव निखिल गजराज भी उपस्थित रहे।


कोयंबटूर में स्वास्थ्य क्षेत्र के दो बड़े कार्यक्रमों में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन शामिल, ‘स्वस्थ भारत–विकसित भारत’ पर दिया जोर

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कोयंबटूर- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित दो प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन को रेखांकित किया।

उपराष्ट्रपति ने कोवाई मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल (केएमसीएच) में केएमसीएच इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज एवं ओपीडी ब्लॉक तथा केएमसीएच मेडिकल कॉलेज पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने कोडिसिया हॉल, कोयंबटूर में आयोजित रामकृष्णा हॉस्पिटल के स्वर्ण जयंती समारोह और रामकृष्णा डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

दोनों कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये संस्थान गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और करुणा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल एक सेवा क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मिशन है।

उन्होंने सरकार की पहलों के साथ तालमेल बिठाने में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सरकारी संस्थानों के साथ-साथ विश्वसनीय निजी चिकित्सा संस्थान ‘स्वस्थ भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’ की दिशा में देश की यात्रा में अहम भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार हो रहे हैं। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना बन चुकी है, जिससे लगभग 50 करोड़ नागरिकों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है और गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है। साथ ही, देशभर में स्थापित स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों ने निवारक और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती दी है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल और गैर-संचारी रोगों का प्रबंधन भी शामिल है।

चिकित्सा पेशेवरों की कमी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। पिछले एक दशक में एमबीबीएस सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वर्ष 2029 तक 75,000 और सीटें जोड़ने की योजना है। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 300 से अधिक नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जिससे चिकित्सा शिक्षा महानगरों से बाहर तक पहुंची है।

केएमसीएच इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के उद्घाटन के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां वैश्विक स्तर पर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रही हैं। अत्याधुनिक न्यूरो-नेविगेशन और रोबोटिक सर्जरी सुविधाओं से युक्त यह संस्थान समय की जरूरत को पूरा करने वाला एक दूरदर्शी कदम है।

रामकृष्णा हॉस्पिटल के स्वर्ण जयंती समारोह में उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2016 में बनाए गए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की सराहना की, जब केवल आठ घंटे में 13,206 अंगदान प्रतिज्ञाएं एकत्र की गई थीं।

भारतीय सभ्यतागत सोच का उल्लेख करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत में सदैव अच्छे स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। उन्होंने दोहराया कि “स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की नींव है” और स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को लागत नहीं, बल्कि देश के भविष्य में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने दोनों कार्यक्रमों के दौरान लोगों से संवाद किया और सभी को पोंगल पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

आयुष्मान भारत: समग्र स्वास्थ्य कवरेज, सुदृढ़ अवसंरचना और डिजिटल स्वास्थ्य की दिशा में परिवर्तनकारी पहल

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आयुष्मान भारत चार प्रमुख घटकों से मिलकर बना है:

(क) आयुष्मान आरोग्य मंदिर

आयुष्मान भारत का पहला घटक 1,50,000 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स (AB-HWCs) की स्थापना से संबंधित है, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में जाना जाता है। इसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को उन्नत कर समुदाय के निकट समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन केंद्रों का उद्देश्य समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (CPHC) प्रदान करना है, जिसके तहत प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) तथा संक्रामक रोग सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है और गैर-संचारी रोगों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा मौखिक, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच व उपचार सेवाएँ जोड़ी गई हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य, ईएनटी, नेत्र, मुख स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, उपशामक देखभाल, ट्रॉमा केयर तथा योग जैसी स्वास्थ्य संवर्धन गतिविधियाँ भी चरणबद्ध रूप से शामिल की गई हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाते हुए रोकथाम, संवर्धन, उपचार, पुनर्वास और उपशामक सेवाओं को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर तक जोड़ती है। किसी व्यक्ति की जीवन-कालीन स्वास्थ्य आवश्यकताओं का लगभग 80–90% भाग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से पूरा होता है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम एवं जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य टीम द्वारा समुदाय स्तर पर जनसंख्या सूचीकरण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, समय पर रेफरल, उपचार अनुपालन तथा फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाता है। आवश्यक दवाइयाँ एवं जांच सुविधाएँ समुदाय के निकट उपलब्ध कराकर सुदृढ़ एवं लचीली प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है।

उपलब्धियाँ (30.11.2025 तक):

  • 1,81,873 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित

  • 12 सेवाओं का विस्तारित पैकेज एवं टेली-परामर्श सुविधा

  • कुल 494.71 करोड़ लाभार्थी आगमन (फुटफॉल)

  • 41.93 करोड़ टेली-परामर्श

  • उच्च रक्तचाप की 39.50 करोड़ जांच

  • मधुमेह की 36.70 करोड़ जांच

  • मौखिक कैंसर की 32.40 करोड़ जांच

  • महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की 15.23 करोड़ जांच

  • महिलाओं में स्तन कैंसर की 8.37 करोड़ से अधिक जांच

  • 6.54 करोड़ योग/वेलनेस सत्र आयोजित

(ख) आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)

आयुष्मान भारत का दूसरा स्तंभ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है, जो विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके अंतर्गत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य कवरेज द्वितीयक एवं तृतीयक उपचार हेतु प्रदान किया जाता है।

प्रमुख तथ्य:

  • 12 करोड़ परिवार योजना के अंतर्गत आच्छादित

  • कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने संसाधनों से लाभार्थी आधार का विस्तार किया

  • फरवरी 2024 से लगभग 37 लाख आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएँ शामिल

  • 42.48 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी (1 दिसम्बर 2025 तक)

  • 10.98 करोड़ अस्पताल में भर्ती, कुल लागत ₹1.60 लाख करोड़

  • 32,574 अस्पताल (15,532 निजी सहित) पैनल में

  • महिलाओं की भागीदारी:

    • आयुष्मान कार्ड – लगभग 49%

    • अस्पताल में भर्ती – लगभग 48%

आयुष्मान वय वंदना कार्ड:

  • 29 अक्टूबर 2024 को 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉन्च

  • अनुमानित 4.5 करोड़ परिवार / 6 करोड़ व्यक्ति लाभान्वित

  • अब तक 94,19,515 पंजीकरण

डिजिटल पहल:

  • Ayushman App (एंड्रॉयड आधारित) – फेस ऑथ, OTP, आईरिस एवं फिंगरप्रिंट से सत्यापन

  • दिल्ली और ओडिशा में 2025 से योजना का विस्तार

(ग) प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)

यह आयुष्मान भारत का तीसरा स्तंभ है, जिसका कुल परिव्यय लगभग ₹64,180 करोड़ है। इसे 25 अक्टूबर 2021 को शुरू किया गया और यह FY 2021–22 से 2025–26 तक लागू है। यह देशभर में स्वास्थ्य अवसंरचना सुदृढ़ करने की सबसे बड़ी योजना है।

इस मिशन का उद्देश्य प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता बढ़ाना तथा वर्तमान एवं भविष्य की महामारियों/आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना है।

प्रमुख लक्ष्य:

  • आईटी-सक्षम रोग निगरानी प्रणाली

  • ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर सर्विलांस प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

  • प्रवेश बिंदुओं (Points of Entry) पर स्वास्थ्य इकाइयों का सुदृढ़ीकरण

  • वन हेल्थ अप्रोच के अंतर्गत अनुसंधान एवं जैव-चिकित्सीय क्षमता विकास

अवसंरचना प्रावधान:

  • 17,788 भवनरहित उप-स्वास्थ्य केंद्रों का आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में निर्माण

  • 11,024 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स

  • 3,382 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स

  • 730 जिला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ

  • 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में 50–100 बिस्तरों के क्रिटिकल केयर ब्लॉक

वर्तमान स्थिति (CSS घटक):

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों हेतु कुल आवंटन: ₹34,932.27 करोड़

  • ₹32,928.82 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति

  • 621 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 744 जिला प्रयोगशालाएँ, 9519 उप-स्वास्थ्य केंद्र AAM आदि स्वीकृत

12 केंद्रीय अस्पतालों (AIIMS, PGI, JIPMER, IMS-BHU आदि) में 150-बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्वीकृत हैं।

(घ) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

सितंबर 2021 में प्रारंभ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य नागरिक-केंद्रित, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

इसके माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड (प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट, डिस्चार्ज सारांश आदि) सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकते हैं और सहमति के आधार पर डॉक्टरों से साझा कर सकते हैं, जिससे निरंतर एवं बेहतर उपचार संभव होता है।

प्रमुख घटक:

  • ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) – नागरिकों की डिजिटल पहचान

  • HPR – स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री

  • HFR – स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री

  • ड्रग रजिस्ट्री

इंटरऑपरेबिलिटी गेटवे:

  • Health Information Consent Manager (HIE-CM)

  • National Health Claims Exchange (NHCX)

  • Unified Health Interface (UHI)

इन पहलों के माध्यम से ABDM स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की 21वीं वार्षिक दीक्षांत समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया संबोधन

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के 21वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज कुमार, उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री मयंकशवर शरण सिंह और भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद उपस्थित रहे।

नड्डा ने नए स्नातकों को बधाई दी और KGMU द्वारा चिकित्सा शिक्षा और रोगी देखभाल के क्षेत्र में किए गए योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “KGMU 2025 के NIRF रैंकिंग में 8वें स्थान पर है और इसके 12 फैकल्टी मेंबर्स स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में सूचीबद्ध हैं, जो वास्तव में प्रशंसनीय उपलब्धि है।”

केंद्रीय मंत्री ने पिछले दशक में भारत में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले सदी के अंत में देश में केवल एक AIIMS था, जबकि आज भारत में 23 AIIMS संस्थान हैं, जो हर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशिक्षण को पहुँचाने के सरकार के संकल्प को दर्शाते हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी प्रकार, स्नातक चिकित्सा सीटें 51,000 से बढ़कर 1,19,000 और पोस्टग्रेजुएट सीटें 31,000 से बढ़कर 80,000 हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशानुसार 2029 तक स्नातक और पोस्टग्रेजुएट स्तर पर अतिरिक्त 75,000 सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें से एक वर्ष में ही 23,000 से अधिक सीटें जोड़ दी गई हैं।

नड्डा ने यह भी बताया कि आज देश में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मन्दिर संचालित हैं, जो व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत – PMJAY योजना के तहत 62 करोड़ से अधिक लोग, यानी देश की 40% से अधिक आबादी, 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य कवरेज का लाभ प्राप्त कर रही है।

केंद्रीय मंत्री ने स्नातकों से आग्रह किया कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करें। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक MBBS छात्र पर 30-35 लाख रुपये खर्च करती है, इसलिए डॉक्टरों को समाज सेवा और चिकित्सा विज्ञान में उत्कृष्टता के लिए समर्पित रहना चाहिए।

इस अवसर पर, 81 छात्रों और एक फैकल्टी सदस्य को उनके शैक्षणिक, नैदानिक और शोध कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। पुरस्कारों में गोल्ड और सिल्वर मेडल, मेरिट सर्टिफिकेट, पुस्तक पुरस्कार, नकद पुरस्कार और सर्वोत्तम थीसिस तथा सर्वश्रेष्ठ निवासी के लिए पुरस्कार शामिल हैं।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि “120 से अधिक वर्षों से KGMU चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और मानव सेवा में एक मील का पत्थर रही है।” उन्होंने उत्तर प्रदेश में चिकित्सा क्षेत्र में हुए प्रगति का भी उल्लेख किया।

इस समारोह में KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यनंद (पद्म श्री पुरस्कार प्राप्त), डीन प्रो. अपजीत कौर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


महिला मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा: भारत सरकार की बहुआयामी पहल

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“जन स्वास्थ्य और स्वच्छता; अस्पताल और डिस्पेंसरी’’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में शामिल है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य भी आता है। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों, सामुदायिक देखभाल और पुनर्वास की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।

फिर भी, भारत सरकार राज्य सरकारों का समर्थन करती है और एक व्यापक, बहु-आयामी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाती है, जो अधिकार आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, टेली-मेंटल हेल्थ सेवा, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, कार्यस्थल सुरक्षा उपाय, लिंग-संवेदनशील कानून प्रवर्तन इंटरफेस और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रमों को जोड़ती है। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना, कम करना और प्रबंधित करना है।

मुख्य पहल और कार्यक्रम:

  1. केन्द्रीय मार्गदर्शन और प्रशिक्षण:

    • केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम, लिंग-संवेदनशीलता, लचीले कार्य समय और आंतरिक शिकायत तंत्र के दिशा-निर्देश।

  2. आपातकालीन सहायता और सुरक्षा:

    • महिला हेल्पलाइन (181), बाल हेल्पलाइन (1098), और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली ERSS-112।

    • ज़ीरो FIR और ई-FIR जैसी सुविधा।

  3. कानूनी और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा:

    • मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017: आत्महत्या के प्रयास को अपराधमुक्त करना, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण और निगरानी।

    • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) के तहत 767 जिलों में सेवाएँ।

    • 1.81 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अपग्रेड किया गया।

    • टेली-मेंटल हेल्थ कार्यक्रम Tele-MANAS: 53 सेल्स, 20 भाषाओं में सेवा, 29.82 लाख कॉल्स।

  4. महिला सुरक्षा और सहायता:

    • मिशन शक्ति के तहत One Stop Centres (OSC): 864 OSCs, 12.67 लाख महिलाओं को सहायता।

    • महिला हेल्प डेस्क: 14,649 पुलिस स्टेशनों में, महिला अधिकारियों द्वारा संचालित।

    • SHe-Box पोर्टल: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए केंद्रीय मंच।

  5. सुरक्षित कार्यस्थल और रोजगार:

    • चार श्रम संहिता (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा और स्वास्थ्य) लागू।

    • समान कार्य के लिए समान वेतन, रात की शिफ्ट और खतरनाक काम में महिलाओं की अनुमति सुरक्षित वातावरण के तहत।

    • कार्यदिवस 8 घंटे और 48 घंटे प्रति सप्ताह, ओवरटाइम स्वीकृति और दोगुना वेतन।

    • निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच।

  6. सामाजिक-सामर्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण:

    • कौशल भारत, उद्यमिता और जीविका कार्यक्रम।

    • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वित्तीय समावेशन, माइक्रोक्रेडिट और स्वयं-सहायता समूह।

इन सभी पहलों को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर लागू किया जाता है, जो स्वास्थ्य सेवा वितरण के मुख्य एजेंट हैं। केंद्र सरकार नीति मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण, तकनीकी दिशा-निर्देश, वित्तीय सहायता, अंतर-मंत्रालय समन्वय और निगरानी के माध्यम से समर्थन देती है।

इन उपायों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना और कम करना, समय पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करना, हिंसा और उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना और महिलाओं की गरिमा, लचीलापन और कल्याण को बढ़ावा देना है।

सूचना स्रोत: मंत्री राज्य महिला एवं बाल विकास, सवित्री ठाकुर, लोकसभा में आज दिए गए उत्तर के अनुसार।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर: भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण

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राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा एएएम पोर्टल पर रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 31.10.2025 तक उप-स्वास्थ्य केन्द्रों (SHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (PHCs) को सुदृढ़ करते हुए कुल 1,80,906 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAMs) [पूर्व में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (AB-HWCs)] बनाए जा चुके हैं।

एएएम चरणबद्ध तरीके से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की 12 सेवा पैकेज प्रदान करते हैं, जिनमें प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवाएँ, संचारी रोग, गैर-संचारी रोग (NCDs), पेलिएटिव केयर एवं वृद्धजन देखभाल, सामान्य मानसिक विकारों की देखभाल, तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ (मिर्गी, डिमेंशिया) और नशा-उपयोग विकार (तंबाकू, शराब, ड्रग्स) प्रबंधन, दंत स्वास्थ्य, ईएनटी देखभाल तथा बुनियादी आपातकालीन देखभाल शामिल हैं। इन सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक दवाओं एवं जांचों की सूची को विस्तृत किया गया है—PHC-AAMs पर 172 दवाएँ एवं 63 डायग्नॉस्टिक्स, तथा SHC-AAMs पर 106 दवाएँ एवं 14 डायग्नॉस्टिक्स उपलब्ध कराए गए हैं।

मुख्य सेवाओं में पाँच सामान्य एनसीडी—हाइपरटेंशन, डायबिटीज, मुख कैंसर, स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर—की व्यापक स्क्रीनिंग शामिल है। NP-NCD पोर्टल के अनुसार, 31.10.2025 तक SHCs एवं PHCs (ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र सहित AAMs) में कुल:

  • 38.79 करोड़ हाइपरटेंशन स्क्रीनिंग,

  • 36.05 करोड़ डायबिटीज स्क्रीनिंग,

  • 31.88 करोड़ मुख कैंसर स्क्रीनिंग,

  • 14.98 करोड़ स्तन कैंसर स्क्रीनिंग,

  • 8.15 करोड़ गर्भाशय ग्रीवा कैंसर स्क्रीनिंग की गई हैं।

इसके अतिरिक्त, सभी ऑपरेशनल एएएम में उपलब्ध टेली-कंसल्टेशन सेवाएँ लोगों को घर के नजदीक विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुँचने में सक्षम बनाती हैं, जिससे भौतिक दूरी, सेवा प्रदाताओं की कमी तथा निरंतर देखभाल से जुड़ी चुनौतियों का समाधान होता है। 31.10.2025 तक AAMs में कुल 41.14 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं।

फंड और अनुमोदन:

पिछले 3 वर्षों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत AAMs के लिए राज्यों के कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (SPIP) अनुमोदन और व्यय का विवरण इस प्रकार है (रु. करोड़ में):

  • वित्त वर्ष
  • SPIP अनुमोदन
  • व्यय
  • 2022-23
  • 4,346.60
  • 2,233.53
  • 2023-24
  • 3,909.67
  • 1,590.70
  • 2024-25
  • 3,051.15
  • 1,211.02

हेल्थ डायनेमिक्स ऑफ इंडिया (HDI) — यह एक वार्षिक प्रकाशन है, जो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट किए गए स्वास्थ्य प्रशासनिक डेटा पर आधारित है। SHCs एवं PHCs (AAMs सहित) में उपलब्ध मानव संसाधन और आधारभूत संरचना का राज्यवार विवरण HDI 2022-23 के निम्न लिंक पर उपलब्ध है:

जुलाई 2024 में, नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) ने AAM कार्यक्रम के प्रभाव और कार्यान्वयन का मूल्यांकन करने हेतु एक अध्ययन कराया। अध्ययन में कई प्रोत्साहनकारी परिणाम सामने आए, जैसे—इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, एनसीडी प्रबंधन, ओपीडी सेवाएँ, मुफ्त दवाएँ और डायग्नॉस्टिक्स उपलब्ध होने के कारण सामुदायिक फुटफॉल में वृद्धि। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की नियुक्ति से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ मजबूत हुई हैं तथा ई-संजीवनी जैसे डिजिटल टूल्स से विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुँच आसान हुई है।

हालाँकि, रिपोर्ट में मानव संसाधन उपलब्धता, कौशल आधारित प्रशिक्षण, दवाओं एवं जांचों की निरंतर उपलब्धता, डिजिटल इंटरऑपरेबिलिटी, डेटा-आधारित योजना, अंतर-विभागीय समन्वय तथा समुदाय सहभागिता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई गई है।

NHM के तहत, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रदर्शन की नियमित रूप से समीक्षा बैठकें, मध्यावधि समीक्षा, वरिष्ठ अधिकारियों के फील्ड दौरे, सेवा वितरण मानक निर्धारण एवं उपलब्धियों को पुरस्कृत करने जैसी गतिविधियों के माध्यम से निगरानी की जाती है। साथ ही, योजना की प्रगति और स्थिति के आकलन हेतु कॉमन रिव्यू मिशन (CRM) का वार्षिक आयोजन भी किया जाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री,  प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।


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