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प्रधानमंत्री ने असम को दी बड़ी सौगात: काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमि पूजन, विकास और संरक्षण का अद्भुत संगम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के कालियाबोर में लगभग ₹6,950 करोड़ की लागत से बनने वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (एनएच-715 के कालियाबोर–नुमालीगढ़ खंड के 4-लेनिंग कार्य) का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों के स्नेह और आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त किया तथा कहा कि काजीरंगा की यात्रा हमेशा उन्हें विशेष आनंद और आत्मीयता से भर देती है।

प्रधानमंत्री ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में अपने पूर्व प्रवास को याद करते हुए कहा कि यहां बिताया गया समय उनके जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक रहा है। हाथी सफारी के दौरान उन्होंने काजीरंगा की प्राकृतिक सुंदरता को बहुत निकट से अनुभव किया था। उन्होंने असम को वीरों की धरती बताते हुए कहा कि यहां के लोग हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में गुवाहाटी में आयोजित बागुरुंबा द्वौ उत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि 10,000 से अधिक कलाकारों की ऊर्जा, खाम की लय और सिफुंग की मधुर ध्वनि ने पूरे देश को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बोडो समाज की बेटियों सहित सभी कलाकारों को इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के लिए बधाई दी और सोशल मीडिया व मीडिया के योगदान की भी सराहना की।

विकास भी, विरासत भी का सशक्त उदाहरण

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम में लगातार हो रहे विकास कार्य सरकार के “विकास भी, विरासत भी” के संकल्प को सशक्त करते हैं। उन्होंने हाल ही में गुवाहाटी एयरपोर्ट के नए टर्मिनल और नामरूप में अमोनिया-यूरिया संयंत्र की आधारशिला का भी उल्लेख किया।

कालियाबोर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वही भूमि है जहां से वीर योद्धा लाचित बोरफुकन ने मुगलों के विरुद्ध रणनीति बनाई थी। आज वही कालियाबोर आधुनिक कनेक्टिविटी और विकास का केंद्र बन रहा है।

काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: पर्यावरण और प्रगति का संतुलन

प्रधानमंत्री ने बताया कि 86 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 35 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर शामिल है, जिससे वाहन ऊपर से गुजरेंगे और नीचे वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही बनी रहेगी। यह परियोजना गैंडों, हाथियों और बाघों के पारंपरिक मार्गों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और यात्रा समय घटेगा।

यह परियोजना नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगी तथा अपर असम, विशेषकर डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया की कनेक्टिविटी को मजबूती देगी। जाखलबंधा और बोकाखाट में बाइपास निर्माण से शहरी यातायात सुगम होगा और लोगों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी।

रेल कनेक्टिविटी को नई गति

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई—गुवाहाटी (कामाख्या)–रोहतक और डिब्रूगढ़–लखनऊ (गोमती नगर)। इसके साथ ही गुवाहाटी–कोलकाता वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की घोषणा भी की गई। इन सेवाओं से उत्तर पूर्व और उत्तर भारत के बीच संपर्क मजबूत होगा, व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में असम के लिए रेल बजट में पांच गुना वृद्धि की गई है, जिससे नई रेल लाइनें, दोहरीकरण और विद्युतीकरण संभव हुआ है।

प्रकृति संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों से 2025 में एक भी गैंडे के अवैध शिकार की घटना नहीं हुई, जो असम की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने “वन दुर्गा” जैसी पहलों और आधुनिक निगरानी व्यवस्था की सराहना की। साथ ही कहा कि प्रकृति के संरक्षण से पर्यटन बढ़ा है और स्थानीय युवाओं को होमस्टे, गाइड सेवा और हस्तशिल्प के माध्यम से रोजगार मिल रहा है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम और पूरा उत्तर पूर्व अब विकास की मुख्यधारा में मजबूती से जुड़ चुका है। काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं यह प्रमाण हैं कि भारत आज दुनिया को दिखा रहा है कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी साथ-साथ आगे बढ़ सकती हैं। अंत में उन्होंने असमवासियों को इन ऐतिहासिक परियोजनाओं के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, पबित्र मार्गेरिटा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

गुवाहाटी एयरपोर्ट का नया टर्मिनल: असम और पूर्वोत्तर के विकास का नया द्वार

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गुवाहाटी/नई दिल्ली- असम की कनेक्टिविटी, आर्थिक विस्तार और वैश्विक जुड़ाव में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुवाहाटी स्थित लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने इसे असम और पूरे पूर्वोत्तर के लिए “विकास और प्रगति का उत्सव” बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब विकास की रोशनी आम लोगों तक पहुंचती है, तो जीवन के हर मार्ग पर नई ऊंचाइयां छूने की शुरुआत होती है। उन्होंने असम की धरती से अपने गहरे जुड़ाव, यहां के लोगों के स्नेह और विशेष रूप से माताओं-बहनों के अपनत्व को अपनी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि आज असम के विकास में एक और नया अध्याय जुड़ रहा है।

भारत रत्न भूपेन हज़ारिका की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रह्मपुत्र के तट चमकेंगे, अंधकार की हर दीवार टूटेगी—और यह संकल्प आज साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ब्रह्मपुत्र की धारा कभी नहीं रुकती, वैसे ही केंद्र और राज्य सरकारों के नेतृत्व में असम में विकास की धारा भी निरंतर बह रही है।

प्रधानमंत्री ने कुछ समय पहले असम के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई की प्रतिमा के अनावरण का उल्लेख करते हुए कहा कि बोरदोलोई जी ने असम की पहचान, भविष्य और हितों से कभी समझौता नहीं किया। उनकी प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को असम पर गर्व करना सिखाएगी।

आधुनिक कनेक्टिविटी, नए अवसर

प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक हवाई अड्डे और उन्नत कनेक्टिविटी किसी भी राज्य के लिए नए अवसरों के द्वार खोलते हैं। उन्होंने कहा कि जब असम में भव्य हाइवे और एयरपोर्ट बनते हैं, तो लोगों को यह भरोसा होता है कि अब असम के साथ वास्तविक न्याय हो रहा है। उन्होंने पिछली सरकारों पर असम और पूर्वोत्तर की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि दशकों तक इस क्षेत्र को विकास से वंचित रखा गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में असम और पूर्वोत्तर में लाखों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं शुरू हुई हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि असम भारतीय न्याय संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है और 50 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि आज युवाओं को बिना रिश्वत और सिफारिश के नौकरियां मिल रही हैं।

संस्कृति और विकास का संगम

प्रधानमंत्री ने असम की संस्कृति के संरक्षण और प्रचार पर जोर देते हुए 13 अप्रैल 2023 को एक साथ 11 हजार से अधिक कलाकारों द्वारा किए गए बिहू नृत्य को याद किया, जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास असम को नई पहचान दिला रहे हैं।

नए टर्मिनल की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि इससे गुवाहाटी और असम की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और सालाना 1.25 करोड़ से अधिक यात्री लाभान्वित होंगे। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और मां कामाख्या के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि यह टर्मिनल “विकास के साथ विरासत” के मंत्र का सजीव उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि यह देश का पहला प्रकृति-थीम आधारित एयरपोर्ट टर्मिनल है, जिसमें हरियाली, इनडोर फॉरेस्ट और असम की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। बांस के व्यापक उपयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बांस असम के जीवन का अभिन्न हिस्सा है और 2017 में बांस को ‘घास’ की श्रेणी में लाने के फैसले से आज यह भव्य संरचना संभव हो सकी है।

असम बनेगा भारत का ईस्टर्न गेटवे

प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योगों को बढ़ावा देता है, निवेशकों का भरोसा मजबूत करता है और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि आज असम असीम संभावनाओं की उड़ान भर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रहा है और इसमें हर राज्य की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत असम आज भारत का ईस्टर्न गेटवे बन रहा है और ASEAN देशों से भारत को जोड़ने वाला सेतु बनकर उभर रहा है।

प्रधानमंत्री ने ब्रह्मपुत्र पर बने नए पुलों, रेलवे कनेक्टिविटी, वंदे भारत एक्सप्रेस, जलमार्गों और गंगा विलास क्रूज जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे असम की रणनीतिक और आर्थिक ताकत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि जहां कभी हिंसा और पिछड़ापन था, वहां आज 4G-5G कनेक्टिविटी और विकास पहुंच रहा है।

नई शुरुआत का संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर की पहचान और संस्कृति की रक्षा के साथ विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से सतर्क और एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि असम का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने नए टर्मिनल के उद्घाटन पर असमवासियों को बधाई दी और विश्वास जताया कि असम और पूरा पूर्वोत्तर विकसित भारत की यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

पृष्ठभूमि

करीब 1.4 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला यह नया एकीकृत टर्मिनल सालाना 1.3 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम है। “बैंबू ऑर्किड्स” थीम पर आधारित इस टर्मिनल में पूर्वोत्तर के स्थानीय बांस, काजीरंगा से प्रेरित हरियाली, जपी आकृतियां, गैंडे के प्रतीक और ऑर्किड से प्रेरित स्तंभ शामिल हैं। अत्याधुनिक सुरक्षा, डिजी यात्रा, स्वचालित बैगेज हैंडलिंग और एआई आधारित संचालन इसे यात्रियों के लिए सुविधाजनक और भविष्य के अनुरूप बनाते हैं।

नामरूप में चौथे उर्वरक संयंत्र की आधारशिला से पहले केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तैयारियों की समीक्षा की

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 नई दिल्ली — केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री (MoPSW) सर्बानंद सोनोवाल ने आज असम के डिब्रूगढ़ जिले स्थित नामरूप उर्वरक परिसर का दौरा किया। उन्होंने 21 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित यात्रा से पहले जमीनी तैयारियों की समीक्षा की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नामरूप में चौथे उर्वरक संयंत्र की आधारशिला रखेंगे।

नया ब्राउनफील्ड अमोनिया-यूरिया संयंत्र ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइज़र कॉरपोरेशन लिमिटेड (BVFCL) के मौजूदा परिसर में स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना पर ₹10,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया जाएगा। इसे असम के औद्योगिक आधार को सशक्त बनाने और पूर्वोत्तर तथा पूर्वी भारत में उर्वरक उपलब्धता सुधारने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

दौरे के दौरान सोनोवाल ने लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं, सुरक्षा तैयारियों और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से जुड़ी समग्र तैयारियों का आकलन किया। उन्होंने प्रारंभिक कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की और अधिकारियों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि आधारशिला कार्यक्रम की सभी तैयारियां समयबद्ध और सुचारु रूप से पूरी हों।

सोनोवाल ने कहा, “यह परियोजना असम के लोगों की एक लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा की पूर्ति है।” उन्होंने उल्लेख किया कि नामरूप में चौथे उर्वरक संयंत्र की मांग दशकों से की जा रही थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इस परियोजना को स्वीकृति देना पूर्वोत्तर के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता और भारत की कृषि एवं औद्योगिक पारिस्थितिकी को मजबूत करने के संकल्प को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी और निर्णायक नेतृत्व में असम के लोगों की दशकों पुरानी मांग आज पूरी हुई है। नामरूप का चौथा उर्वरक संयंत्र पूर्वोत्तर के प्रति प्रधानमंत्री की गहरी प्रतिबद्धता और भारत की कृषि एवं औद्योगिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के उनके संकल्प का प्रतीक है।”

परियोजना के चालू होने के बाद, यह नया उर्वरक संयंत्र पूर्वोत्तर क्षेत्र में यूरिया और संबंधित उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला को काफी मजबूत करेगा, दूर-दराज के उत्पादन केंद्रों पर निर्भरता कम करेगा और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद करेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 12.5 लाख मीट्रिक टन होगी और इससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

सोनोवाल ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में असम और पूरे पूर्वोत्तर में हो रहे व्यापक विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने संपर्क, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षमता में किए गए बड़े निवेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के युवाओं, किसानों और श्रमिकों के लिए नए अवसर सृजित हुए हैं।

निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री के साथ वरिष्ठ राज्य मंत्री, स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन के अधिकारी और विभिन्न नागरिक एवं विकास संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि प्रधानमंत्री की यात्रा और आधारशिला कार्यक्रम का सफल आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।

सोनोवाल ने कहा, “21 दिसंबर को प्रधानमंत्री की नामरूप यात्रा असम के लिए गर्व का क्षण है। हम पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं ताकि आधारशिला कार्यक्रम त्रुटिरहित रूप से संपन्न हो और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवर्तनकारी विकास एजेंडे तथा पूर्वोत्तर पर उनके विशेष फोकस को प्रतिबिंबित करे।”

नामरूप परियोजना से असम के औद्योगिक विकास में एक नया अध्याय शुरू होने, पूर्वोत्तर में उर्वरक सुरक्षा को मजबूती मिलने और कृषि उत्पादकता तथा किसानों की आय बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति मिलने की उम्मीद है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री के साथ असम सरकार के मंत्री प्रशांत फुकन और जोगेन मोहन; विधायक तरंगा गोगोई, बिनोद हजारिका, चक्रधर गोगोई, तेराश गोवाला, भास्कर शर्मा और धर्मेश्वर कोनवार; असम पर्यटन विकास निगम (ATDC) के अध्यक्ष ऋतुपर्णा बरुआह; डिब्रूगढ़ नगर निगम (DMC) के मेयर सैकत पात्रा और उप-मेयर उज्ज्वल फुकन; डिब्रूगढ़ विकास प्राधिकरण (DDA) के अध्यक्ष असीम हजारिका; सोनवाल कचारी स्वायत्त परिषद (SKAC) के मुख्य कार्यकारी सदस्य टंकश्वर सोनोवाल; तथा डिप्टी कमिश्नर विक्रम कैरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

भारत में इनलैंड वाटरवेज़ के विकास के लिए असम में महत्वपूर्ण समझौते: IWAI ने APL और असम सरकार के साथ किए MoU

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इंडियन इनलैंड वाटरवेज़ अथॉरिटी (IWAI), जो पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज़ मंत्रालय (MoPSW) के तहत इनलैंड वाटरवेज़ के विकास की मुख्य एजेंसी है, ने असम के इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौते (MoU) किए हैं। इनमें पहला MoU असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (APL) के साथ और दूसरा असम सरकार के साथ किया गया है। इन समझौतों का उद्देश्य राज्य की व्यापक नदी प्रणालियों के माध्यम से माल और यात्रियों की आवाजाही को बढ़ावा देना और सतत कनेक्टिविटी तथा क्षेत्रीय विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है।

केंद्र सरकार के बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सरबानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक में असम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में चल रहे परियोजनाओं का अवलोकन किया गया। इसमें केंद्रीय क्षेत्र योजना (CSS) के तहत परियोजनाएँ भी शामिल थीं।

पहला MoU – IWAI और APL:

इस MoU के तहत APL की मिथेनॉल और फॉर्मेलिन का परिवहन इंडो-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट (IBPR) और नेशनल वाटरवेज़ (NW) के माध्यम से किया जाएगा। इससे न केवल बांग्लादेश और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए निर्यात में वृद्धि होगी, बल्कि घरेलू आपूर्ति श्रृंखला भी मजबूत होगी। इस परियोजना का कुल निवेश ₹400 करोड़ निर्धारित है, जिसमें टैंकर जहाजों और संबंधित अवसंरचना का निर्माण शामिल है। IWAI तकनीकी और संचालन संबंधी सहायता प्रदान करेगा, जिसमें बोगीबील, पांडू और जोगीघोपा टर्मिनलों की सुविधाएँ, नेविगेशन सहायता, बंकिंग और अग्निशमन प्रणाली शामिल हैं।

दूसरा MoU – IWAI और असम सरकार:

यह समझौता तेजपुर, गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ में शहरी जल परिवहन (UWT) प्रणाली या वाटर मेट्रो के विकास पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य ब्रह्मपुत्र नदी के स्थायी जल आधारित परिवहन नेटवर्क स्थापित करना है, जिसे सड़क, रेलवे और बस प्रणाली के साथ जोड़ा जाएगा। परियोजना में इलेक्ट्रिक हाइब्रिड पैसेंजर बोट्स, फेयरवे, नेविगेशन एयड्स और टर्मिनल का विकास शामिल है। अनुमानित लागत ₹1,000 करोड़ है, भूमि लागत को छोड़कर।

अन्य महत्वपूर्ण पहलें:

  • Heritage River Journeys Pvt. Ltd. के साथ करार, जिससे नेशनल वाटरवेज़ पर नए क्रूज जहाजों का विकास और संचालन होगा (₹500 करोड़)।

  • DGLL के साथ MoU, NW-2 में नदी लाइटहाउस और पर्यटन अवसंरचना विकसित करने के लिए।

  • Rhenus Logistics के साथ ₹1,000 करोड़ का MoU, जिससे गंगा और ब्रह्मपुत्र में आधुनिक टग-बर्ज़ के माध्यम से माल परिवहन क्षमता बढ़ेगी।

  • डिब्रूगढ़ में Regional Centre of Excellence का विकास (₹188 करोड़) और गुवाहाटी में प्रमुख भूमि विकास (₹55 करोड़)।

पूर्वोत्तर राज्यों में प्रगति:

  • मिजोरम: त्लावंग और छिम्तुईपुई नदी पर IWT अवसंरचना का अध्ययन; लुंगलेई में 9.82 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू।

  • नागालैंड: डॉयंग लेक और नॉउन व शिल्लोई लेक में IWT और जलक्रीड़ा विकास।

  • मणिपुर: बारक नदी और इसके उपनदियों पर IWT विकास का तकनीकी-आर्थिक अध्ययन।

  • मेघालय: उमियाम लेक और उमन्गोट नदी पर DPR निर्माण।

  • त्रिपुरा: गुम्ती नदी का विकास और मेघना नदी प्रणाली से कनेक्टिविटी; डुम्बूर लेक में क्रूज सेवा अध्ययन।

  • अरुणाचल प्रदेश: सियांग नदी पर IWT अवसंरचना विकास, टर्मिनल, शेड, सौर ऊर्जा और फेयरवे नेविगेशन।

सरबानंद सोनोवाल ने कहा कि “इन परियोजनाओं के माध्यम से मोदी सरकार का उद्देश्य क्षेत्र में आधुनिक IWT अवसंरचना के जरिए आर्थिक अवसरों का सृजन करना और उत्तरपूर्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ जोड़ना है। आने वाले वर्षों में ₹5,000 करोड़ से अधिक निवेश का लक्ष्य है। यह इनलैंड वाटरवेज़ को हमारे लोगों के लिए अवसर की धारा बना देगा।”

ये पहलें उत्तरपूर्व के नदी परिवहन और पर्यटन को नई दिशा देने और क्षेत्रीय विकास को गति देने में मील का पत्थर साबित होंगी।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने IIT गुवाहाटी में NEST क्लस्टर का शुभारंभ किया, असम में ₹635 करोड़ की परियोजनाओं की आधारशिला रखी

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केंद्रीय संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी में “नॉर्थ ईस्टर्न साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NEST) क्लस्टर” का शुभारंभ किया और असम में ₹635 करोड़ की कई परिवर्तनकारी विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

यह आयोजन असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा वैज्ञानिक और उद्यमी समुदाय की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

असम में ₹635 करोड़ की विकास परियोजनाओं की आधारशिला

सिंधिया ने कहा कि “असम उभरते हुए उत्तर-पूर्व का धड़कता दिल है, जहाँ ब्रह्मपुत्र नदी निरंतरता, साहस और सृजनशीलता का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि असम अब भारत के पूर्वोत्तर पुनर्जागरण का द्वार होने के साथ-साथ नवाचार और संपर्कता का केंद्र बन रहा है।

इन परियोजनाओं में प्रमुख हैं:

  • 65 नए माध्यमिक विद्यालय भवनों का निर्माण – ₹455 करोड़

  • चायगांव–उकियुम सड़क का उन्नयन – ₹102.69 करोड़

  • सिलोंजन–धनसिरी पर घाट पर RCC पुल का निर्माण – ₹20.59 करोड़

  • रामफलबिल (कोकराझार) में औद्योगिक एस्टेट का विकास – ₹14.40 करोड़

  • लखीबाजार (बक्सा) में औद्योगिक एस्टेट का विकास – ₹18.40 करोड़

उन्होंने कहा, “हर ईंट जो रखी जा रही है, हर कक्षा जो बन रही है — यह आकांक्षाओं की पूर्ति के प्रति एक वादा है।”

IIT गुवाहाटी में “NEST क्लस्टर” — पूर्वोत्तर का नवाचार केंद्र

₹22.98 करोड़ की लागत से स्थापित NEST क्लस्टर पूर्वोत्तर भारत के नवाचार तंत्र का केंद्रीय केंद्र बनेगा। यह चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा —

  1. ग्रासरूट इनोवेशन (स्थानीय नवाचार)

  2. सेमीकंडक्टर एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)

  3. बाँस आधारित प्रौद्योगिकियाँ

  4. बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक

यह क्लस्टर, DoNER मंत्रालय की युवा-केंद्रित पहलों जैसे NE-SPARKS और अष्टलक्ष्मी दर्शन के पूरक के रूप में कार्य करेगा, जिसके तहत देशभर के 3,200 छात्र पूर्वोत्तर का दौरा करेंगे, जबकि 800 पूर्वोत्तर छात्र ISRO जैसी वैज्ञानिक संस्थाओं में शैक्षणिक भ्रमण करेंगे।

अनुसंधान और नवाचार की नई दिशा

IIT गुवाहाटी के प्रदर्शनी क्षेत्र का दौरा करते हुए मंत्री ने छात्रों और शोधकर्ताओं से बातचीत की, जिन्होंने 6G संचार, बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर, बाँस ऊतक संवर्धन और कम लागत वाले MRI सिस्टम जैसी परियोजनाएँ प्रस्तुत कीं।

उन्होंने बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर परियोजना की प्रशंसा करते हुए कहा —
“यदि आप इसे आगे बढ़ा लेते हैं, तो यही भविष्य होगा।”

कार्यक्रम में कामरूप जिले की 30 ग्रामीण महिलाओं को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल खिलौने बनाने का प्रशिक्षण पूरा किया है।

असम में मोदी युग का परिवर्तन

सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर-पूर्व का कायाकल्प हुआ है —
“लैंडलॉक्ड से लैंड-लिंक्ड” बनकर यह क्षेत्र अब भारत के विकास का अग्रदूत बन चुका है।

उन्होंने बताया कि 10% ग्रॉस बजटरी सपोर्ट नीति के माध्यम से क्षेत्र में ₹6.2 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है, जिससे विकास, उद्यमिता और सशक्तिकरण को बल मिला है।

उन्होंने बोगीबील ब्रिज, भूपेन हजारिका सेतु, सेला टनल और जोगीघोपा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिन्होंने असम की कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है।

विकसित पूर्वोत्तर, विकसित भारत

मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर अब भारत का “पूर्वी द्वार” बन चुका है।
उन्होंने असम के लोकाचार — “Xobhe xokolore loi thoka xomaj” (सबको साथ लेकर चलने वाला समाज) — की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज शुरू की गई हर परियोजना उस भावना को और मजबूत करती है।

माँ कामाख्या के आशीर्वाद का स्मरण करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि असम शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता के बल पर विकसित भारत @2047 की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

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