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एपीडा ने कर्नाटक के नीलम और तोतापुरी आमों की पहली हवाई खेप मालदीव भेजी, किसानों को मिला 50% से अधिक लाभ

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नई दिल्ली- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने कर्नाटक से नीलम और तोतापुरी आमों की पहली हवाई खेप सफलतापूर्वक मालदीव भेजकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 30 जुलाई 2026 को रवाना की गई यह खेप कर्नाटक की देर से पकने वाली आम की किस्मों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है।

इस खेप को एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव (आईएएस) ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने निर्यातक, किसान उत्पादक कंपनी (FPC), किसानों और इस पहल से जुड़े सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास भारतीय आमों के लिए नए वैश्विक बाजार खोलने, देर से पकने वाली किस्मों के निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों की आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह निर्यात खेप एक मीट्रिक टन नीलम और तोतापुरी आमों की थी, जिसे कर्नाटक के कोलार जिले के केजीएफ तालुक स्थित एम/एस प्रकृतिमाया फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़े किसानों से सीधे खरीदा गया। इस खेप का निर्यात एम/एस अहल्या देवी वेंचर्स की निदेशक अश्विनी ए. द्वारा किया गया, जो एक नवपंजीकृत महिला उद्यमी एवं निर्यातक हैं। यह भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है।

नीलम आम अपने मीठे, रसीले गूदे, सुगंध और डेजर्ट, स्मूदी तथा पेय पदार्थों में उपयोग के लिए प्रसिद्ध है। वहीं तोतापुरी आम अपनी विशिष्ट आकृति, मीठे-खट्टे स्वाद और ताजा सेवन के साथ-साथ प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त होने के कारण लोकप्रिय है। जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के अंत तक उपलब्ध रहने वाली ये किस्में भारत के आम निर्यात सीजन को आगे बढ़ाने और वैश्विक मांग को पूरा करने का अवसर प्रदान करती हैं।

यह हवाई निर्यात कर्नाटक के बागवानी क्षेत्र की बढ़ती निर्यात क्षमता को दर्शाता है। साथ ही यह भी साबित करता है कि किसान उत्पादक कंपनियां (FPC) संगठित संग्रहण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निर्यातोन्मुख आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इस पहल के माध्यम से किसान उत्पादक कंपनी से जुड़े किसानों को पारंपरिक बाजारों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त लाभ प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि प्रत्यक्ष खरीद, निर्यात बाजारों से जुड़ाव और संगठित विपणन व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करती है तथा किसानों को निर्यातोन्मुख खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

यह निर्यात कर्नाटक के आम निर्यात क्षेत्र के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है और इससे किसान उत्पादक संगठन (FPO), किसान उत्पादक कंपनियां (FPC), निर्यातक तथा कृषि उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम बागवानी उत्पादों के निर्यात के लिए नई प्रेरणा मिलेगी।

एपीडा राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, किसान उत्पादक कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर निर्यात अवसंरचना को मजबूत करने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान बनाने तथा भारत के उच्च गुणवत्ता वाले फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। ऐसे प्रयास भारत के कृषि निर्यात में विविधता लाने के साथ-साथ किसानों और बागवानी क्षेत्र के लिए स्थायी आर्थिक अवसर भी सृजित कर रहे हैं।


झारखंड से ताज़े आमों की पहली वाणिज्यिक खेप यूनाइटेड किंगडम रवाना, कृषि निर्यात को मिला नया आयाम

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कृषि निर्यात के क्षेत्र में झारखंड के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (एपीडा) ने राज्य से ताज़े आमों की पहली वाणिज्यिक खेप को यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना किया। इस अवसर पर 4 जून 2026 को कोलकाता में फ्लैग-ऑफ समारोह आयोजित किया गया।

यह खेप 1.5 मीट्रिक टन ताज़े अमरपाली आमों की है, जिन्हें झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित महिला संचालित किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से प्राप्त किया गया है। इस खेप का निर्यात कोलकाता स्थित एम/एस जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लंदन, यूनाइटेड किंगडम भेजा जा रहा है।

इस निर्यात की पृष्ठभूमि में एपीडा द्वारा 5 मई 2026 को सिमडेगा जिले के किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) तथा प्रगतिशील किसानों के लिए आयोजित एक निर्यातोन्मुखी क्षमता निर्माण कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम में निर्यात संबंधी आवश्यकताओं, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक बाजार अवसरों की जानकारी प्रदान की गई।

इसके बाद एपीडा ने बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और एम/एस जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के बीच समन्वय स्थापित कर जिले से निर्यात गुणवत्ता वाले आमों की खरीद सुनिश्चित कराई। वर्तमान खेप इसी पहल का परिणाम है।

इस पहल से किसान उत्पादक कंपनी की निर्यात मूल्य श्रृंखला में प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित हुई है तथा इसके सदस्य किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्राप्त हुई है। एफपीसी से जुड़े किसानों को अपने उत्पाद के लिए घरेलू बाजार की तुलना में बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ।

यह पहल क्षेत्र के किसान समूहों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पद्धतियों को अपनाने, फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन के लिए प्रोत्साहित करेगी।

झारखंड की अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियां बागवानी फसलों के उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं। राज्य में उत्पादित अमरपाली आम अपनी गुणवत्ता और बाजार में स्वीकृति के लिए प्रसिद्ध हैं। इस खेप के साथ झारखंड भी उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो ताज़े फलों का निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कर रहे हैं।

एपीडा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बाजार विकास, क्षमता निर्माण, गुणवत्ता सुधार, ट्रेसबिलिटी प्रणाली तथा निर्यात प्रोत्साहन गतिविधियों के माध्यम से सहयोग प्रदान करता है। साथ ही, यह महिला एवं जनजातीय किसान उत्पादक संगठनों सहित विभिन्न किसान समूहों की कृषि निर्यात में भागीदारी को भी प्रोत्साहित करता है।

झारखंड से ताज़े आमों की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप राज्य के किसान उत्पादक संगठनों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

BIOFACH 2026 में भारत बना “कंट्री ऑफ द ईयर”, ऑर्गेनिक कृषि क्षेत्र को मिली वैश्विक पहचान

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न्यूरेम्बर्ग, जर्मनी- भारत को दुनिया के सबसे बड़े ऑर्गेनिक उत्पाद व्यापार मेले BIOFACH 2026 में “कंट्री ऑफ द ईयर” घोषित किया गया है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी 10 से 13 फरवरी 2026 तक जर्मनी के न्यूरेम्बर्ग में आयोजित की जा रही है।

भारत की भागीदारी का आयोजन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा किया जा रहा है। इस आयोजन में भारत अपनी समृद्ध कृषि विरासत और वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति प्रदर्शित करेगा।

BIOFACH जर्मनी विश्व का सबसे बड़ा और प्रभावशाली ऑर्गेनिक खाद्य और कृषि प्रदर्शनी मंच है। APEDA पिछले एक दशक से इस आयोजन में लगातार भाग ले रहा है और भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता रहा है।

BIOFACH 2026 में भारत की भागीदारी पिछले वर्षों की तुलना में काफी बड़े स्तर पर हो रही है, जो भारतीय ऑर्गेनिक उत्पादों के बढ़ते निर्यात, वैश्विक मांग और निर्यातकों तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। 14 वर्षों के बाद एक बार फिर भारत का ऑर्गेनिक कृषि क्षेत्र इस मंच पर केंद्र में रहेगा।

इंडिया कंट्री पवेलियन की खासियत

APEDA द्वारा स्थापित इंडिया कंट्री पवेलियन 1,074 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला होगा, जिसमें 67 सह-प्रदर्शक भाग लेंगे। इनमें ऑर्गेनिक उत्पाद निर्यातक, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी संस्थाएं, ऑर्गेनिक लैब, राज्य सरकारी संस्थाएं और कमोडिटी बोर्ड शामिल हैं।

पवेलियन में चावल, तिलहन, जड़ी-बूटियां, मसाले, दालें, काजू, अदरक, हल्दी, बड़ी इलायची, दालचीनी, आम प्यूरी और आवश्यक तेल जैसे कई ऑर्गेनिक उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे।

देश के 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रदर्शक भाग ले रहे हैं, जिनमें असम, मेघालय, मणिपुर, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड शामिल हैं।

भारतीय स्वाद और GI टैग चावल की प्रस्तुति

इंडिया पवेलियन में आगंतुकों को भारतीय ऑर्गेनिक उत्पादों का स्वाद चखाया जाएगा। ऑर्गेनिक बासमती चावल और मसालों से बनी खुशबूदार बिरयानी का लाइव टेस्टिंग भी आयोजित होगी। इसके अलावा इंड्रायणी चावल, नवारा चावल, गोबिंदभोग चावल, रेड राइस और चक-हाओ (ब्लैक राइस) जैसे GI टैग प्राप्त चावल भी प्रस्तुत किए जाएंगे।

वैश्विक ऑर्गेनिक बाजार में भारत की मजबूत स्थिति

BIOFACH 2026 में कंट्री ऑफ द ईयर बनने से वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक कृषि में भारत की अग्रणी भूमिका और मजबूत हुई है। APEDA भारतीय निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और भारत को दुनिया का ऑर्गेनिक फूड बास्केट बनाने के लिए लगातार सहयोग कर रहा है।


APEDA ने Gulfood 2026 में भारत की मजबूत और विस्तारित उपस्थिति के साथ बढ़ाई वैश्विक कृषि-खाद्य व्यापार में प्रतिष्ठा

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नई दिल्ली- कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत, Gulfood 2026 में एक विस्तृत और प्रभावशाली उपस्थिति के साथ भाग ले रहा है। इस बार भारत Gulfood 2026 का Partner Country है, जो भारत की वैश्विक कृषि-खाद्य व्यापार में बढ़ती भूमिका, विश्वसनीय स्रोत देश के रूप में प्रतिष्ठा और वैश्विक खाद्य सुरक्षा एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।

भारत की भागीदारी में बड़ा विस्तार

Gulfood 2026 में भारत की भागीदारी पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना बढ़ी है। भारतीय पवेलियन का आकार दोगुना हो गया है, जो भारतीय कृषि-खाद्य निर्यात के विस्तार, वैश्विक मांग में वृद्धि और निर्यातकों, संस्थानों एवं स्टार्टअप्स की भागीदारी में वृद्धि का संकेत है।

  • कुल प्रदर्शनी क्षेत्र: 1,434 वर्ग मीटर

  • प्रदर्शक: 161

  • श्रेणियाँ: प्रसंस्कृत खाद्य, ताजा और जमे हुए उत्पाद, दालें, अनाज, बीवरेज, वैल्यू-एडेड फूड, और कृषि-एक्सपोर्ट स्टार्टअप

25 राज्यों/क्षेत्रों से भागीदारी

भारत की विविध कृषि और क्षेत्रीय पहचान को प्रदर्शित करते हुए 25 राज्यों/क्षेत्रों के उत्पाद Gulfood 2026 में दिखाए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि।

इनमें GI-tagged, ऑर्गेनिक और वैल्यू-एडेड उत्पादों की भी प्रमुख प्रदर्शनी है, जो भारत के कृषि-उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता को दर्शाती है।

राष्ट्रीय संस्थानों और सरकारी निकायों की भागीदारी

APEDA के साथ कई प्रमुख संस्थान और सरकारी निकाय भी Gulfood 2026 में शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • NAFED

  • National Cooperative Exports Limited

  • Spices Board India

  • Tea Board of India

  • National Turmeric Board

  • Indian Rice Exporters Federation (IREF)

  • IOPEPC

  • CAMPCO
    और कई अन्य संस्थाएँ।

BHARATI Pavilion: स्टार्टअप्स का प्रमुख मंच

APEDA का प्रमुख प्रयास BHARATI Pavilion है, जो Gulfood 2026 के Startup Zone में स्थित है। यह भारत के कृषि-खाद्य और कृषि-टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच पर लाने का प्रयास है।

  • 8 स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया से चुना गया

  • 100+ आवेदकों में से चयन

  • स्टार्टअप्स अपनी नवोन्मेषी उत्पाद, टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान और निर्यात-सक्षम उत्पाद प्रस्तुत कर रहे हैं

कुलिनरी एरिया: भारतीय व्यंजनों की प्रस्तुति

भारतीय पवेलियन में एक विशेष Culinary Area भी है, जहां प्रसिद्ध शेफ लाइव कुकिंग डेमो के माध्यम से भारतीय व्यंजनों और मसालों की विविधता दिखा रहे हैं। यह क्षेत्र खरीदारों को भारत के स्वाद, संस्कृति और खाद्य परंपरा से जोड़ने का प्रमुख माध्यम है।

दाल, अनाज और अनाज-श्रेणी का विस्तृत प्रदर्शन

Gulfood 2026 में भारत के पल्सेस, ग्रेन्स और सीरियल्स का विशेष सेक्शन भी है, जिसमें भारत की विविध किस्में और गुणवत्ता प्रदर्शित की जा रही हैं। इससे भारत की वैश्विक बाजार में नेतृत्व स्थिति और आपूर्ति क्षमता का स्पष्ट संकेत मिलता है।

दो प्रमुख स्थानों पर भारत की मजबूत उपस्थिति

Gulfood 2026 दो प्रमुख स्थलों पर आयोजित हो रहा है:

  • Dubai Expo City (World Food Hall, Pulses, Grains & Cereals Hall, Gulfood Green)

  • Dubai World Trade Centre (DWTC) (Beverage Hall, Startup Hall और BHARATI Pavilion)

CEPA से बढ़ी संभावनाएँ

India–UAE CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) के तहत भारत और UAE के व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं। Gulfood 2026 में भारत की भागीदारी इस समझौते के अवसरों को और अधिक बढ़ा रही है, जिससे भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों की बाजार पहुंच और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी।

ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार

APEDA ने भारत की Partner Country स्थिति को ध्यान में रखते हुए दुबई में व्यापक ब्रांडिंग की है, जिसमें शामिल हैं:

  • मेट्रो स्टेशन ब्रांडिंग

  • बसों पर विज्ञापन

  • गैस स्टेशन पर ब्रांडिंग

  • पैनल विज्ञापन
    और अन्य प्रमुख आउटडोर स्थानों पर प्रचार

निष्कर्ष

Gulfood 2026 में भारत की विस्तारित और प्रभावशाली उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत वैश्विक कृषि-खाद्य बाजार में एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बन चुका है। APEDA के नेतृत्व में यह पहल भारतीय किसानों, निर्यातकों, और स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच पर अवसर प्रदान कर रही है और भारत के ‘Farm to Foreign’ दृष्टिकोण को साकार कर रही है।

यदि आप चाहें तो मैं इसी समाचार के लिए हैडलाइन, संक्षिप्त संस्करण (short news), या सोशल मीडिया पोस्ट भी बना सकता हूँ।

एपीडा द्वारा गुवाहाटी में असम ऑर्गेनिक कॉन्क्लेव सह बायर-सेलर मीट का आयोजन

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गुवाहाटी- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने असम सरकार के सहयोग से गुवाहाटी में ऑर्गेनिक कॉन्क्लेव-सह-बायर सेलर मीट का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य असम के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए निर्यात संपर्कों को सुदृढ़ करना और बाजार तक पहुंच को बढ़ाना था।

इस कॉन्क्लेव में 30 से अधिक निर्यातकों, 9 आयातकों तथा असम की लगभग 50 किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) ने भाग लिया। बायर-सेलर मीट ने व्यवसाय-से-व्यवसाय संवाद के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया, जिससे हितधारकों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ व्यापारिक अवसरों की खोज और दीर्घकालिक साझेदारियां स्थापित करने का अवसर मिला।

समृद्ध कृषि-जलवायु विविधता वाला असम कई निर्यात-क्षमता वाले उत्पादों का उत्पादन करता है। असम जोहा चावल और अन्य गैर-बासमती विशेष चावल किस्मों के अलावा केला, अनानास, संतरा, असम नींबू, जैविक अदरक, हल्दी, काली मिर्च तथा विभिन्न बागवानी और अन्य जैविक उत्पाद राज्य की वैश्विक कृषि बाजारों में उपस्थिति को मजबूत करने की व्यापक संभावनाएं रखते हैं।

कॉन्क्लेव के दौरान राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के 8वें संस्करण पर एक जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें नियामक ढांचे और लेबलिंग आवश्यकताओं की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), एफपीसी और उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और प्रमाणन मानकों के अनुपालन के प्रति जागरूक करना था। बायर-सेलर मीट के माध्यम से उत्पादकों, निर्यातकों और खरीदारों के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हुआ, जिससे नए व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिला।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए असम सरकार के कृषि, बागवानी एवं आबकारी मंत्रीअतुल बोरा ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र उच्च गुणवत्ता वाले, जैविक रूप से उत्पादित कृषि और बागवानी उत्पादों का समृद्ध भंडार है, जिनमें जोहा चावल, विशेष चावल किस्में, मसाले, फल और स्वदेशी उत्पाद शामिल हैं, जिनकी वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एपीडा के सहयोग से एकत्रीकरण, प्रमाणन, आधारभूत संरचना और बाजार पहुंच पर केंद्रित प्रयासों के जरिए राज्य किसानों की आजीविका सुनिश्चित करते हुए अपने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

असम सरकार की आयुक्त एवं सचिव-सह-कृषि उत्पादन आयुक्त अरुणा राजोरिया, आईएएस ने कहा कि असम के पास भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग वाले और जैविक रूप से उत्पादित कृषि उत्पाद हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मांग है। उन्होंने एपीडा के साथ मिलकर एकत्रीकरण, प्रमाणन और बाजार संपर्कों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।

एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने अपने संबोधन में निर्यात संवर्धन गतिविधियों में असम सरकार के सहयोग की सराहना की। उन्होंने बताया कि संशोधित एनपीओपी में किसान-हितैषी प्रावधानों, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के साथ जैविक म्यूचुअल रिकग्निशन समझौतों तथा यूनाइटेड किंगडम, ओमान और ईएफटीए देशों के साथ हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों से असम के कृषि, बागवानी और जैविक उत्पादों के निर्यात की व्यापक संभावनाएं खुली हैं।

उद्घाटन सत्र में असम सरकार के कृषि, बागवानी एवं आबकारी मंत्री अतुल बोरा, कृषि उत्पादन आयुक्त अरुणा राजोरिया, आईएएस; एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव तथा असम सरकार के कृषि निदेशक उदय प्रवीन, आईएएस उपस्थित रहे।

असम ऑर्गेनिक कॉन्क्लेव-सह-बायर सेलर मीट भारत की कृषि निर्यात विकास यात्रा में क्षेत्रीय क्षमताओं को जोड़ने और असम को उच्च मूल्य एवं सतत कृषि निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एपीडा के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का मेघालय में भव्य शुभारंभ, पूर्वोत्तर भारत के ऑर्गेनिक उत्पादों को वैश्विक पहचान देने पर जोर

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शिलांग के कोर्टयार्ड बाय मैरियट में आज चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम — APEDA बायर–सेलर मीट, पहला नॉर्थईस्ट इंडिया ऑर्गेनिक वीक, और चौथा IFOAM वर्ल्ड ऑर्गेनिक यूथ समिट (28 नवंबर – 1 दिसंबर 2025) — का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

यह कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, मेघालय सरकार द्वारा MEGNOLIA, APEDA, IFOAM–ऑर्गेनिक्स एशिया के सहयोग से तथा NERAMAC की सहायता से आयोजित किया गया। इसमें कई देशों के अंतरराष्ट्रीय खरीदार, आयातक, ऑर्गेनिक विशेषज्ञ तथा युवाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम में शामिल प्रमुख अतिथि

उद्घाटन समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:

  •  सतिंदर कुमार भल्ला, सचिव, नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल

  • डॉ. विजय कुमार डी, आयुक्त एवं सचिव, मेघालय सरकार

  • अभिषेक देव, चेयरमैन, APEDA

  • डॉ. शकील पी. अहमद, मुख्य सचिव, मेघालय

  • स्मिता सलोनी वर्मा, उप सचिव, मेघालय सरकार

  • ब्रेंडन होयर, सलाहकार, IFOAM

  • जेनिफर चांग, कार्यकारी निदेशक, IFOAM एशिया

  •  भास्कर बरुआ, प्रबंध निदेशक, NERAMAC

  • डॉ. सस्वती बोस, महाप्रबंधक, APEDA

  • मैथ्यू जॉन, अध्यक्ष, IFOAM एशिया

  • स्मिता प्रियंका उदय, एसोसिएट डायरेक्टर, CRISIL

पूर्वोत्तर के ऑर्गेनिक उत्पादों को वैश्विक मंच पर ले जाने पर जोर

उद्घाटन में बोलते हुए अभिषेक देव, चेयरमैन APEDA, ने पूर्वोत्तर भारत के ऑर्गेनिक उत्पादों की वैश्विक दृश्यता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा:

“पूर्वोत्तर भारत ऑर्गेनिक उत्पादन का उभरता हुआ केंद्र है। इस पहले आयोजन में 22 देशों के हितधारकों की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं में गहरी रुचि है।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम को हर वर्ष पूर्वोत्तर के किसी राज्य में आयोजित किए जाने की योजना है, जिससे क्षेत्रीय ऑर्गेनिक मूल्य श्रृंखलाओं को विश्व स्तर पर अधिक मजबूती मिल सके। साथ ही उन्होंने मेघालय के किसानों और FPOs को आगामी BIOFACH में भाग लेने का आग्रह किया, जिसमें भारत भागीदार देश है।

कार्यक्रम का उद्देश्य

यह आयोजन पूर्वोत्तर भारत के ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार संपर्कों को मजबूत करना,

  • सतत एवं पुनर्योजी कृषि को प्रोत्साहित करना,

  • युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास,

  • तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के दौरान B2B सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और फील्ड विज़िट्स भी आयोजित किए जा रहे हैं, जो मेघालय और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की ऑर्गेनिक क्षमता को प्रदर्शित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

खाद्य खुराक 2025, गांधीनगर में जी20 सफलताओं का प्रदर्शन कर रहा है एपीडा

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भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP के 7.97% तक घटी

IPRS 3.0, जिसे एशियाई विकास बैंक के साथ विकसित किया गया है, औद्योगिक पार्कों को स्थिरता, हरित बुनियादी ढाँचा, कनेक्टिविटी, डिजिटल तत्परता और कौशल विकास के आधार पर रेटिंग देता है।
SMILE कार्यक्रम के तहत 8 राज्यों के 8 पायलट शहरों में लॉजिस्टिक्स योजनाएँ शुरू की गई हैं, ताकि मौजूदा लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का आकलन किया जा सके और दक्षता बढ़ाते हुए लागत कम की जा सके।

भारत की लॉजिस्टिक्स कहानी का नया अध्याय

भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है और खुद को तेज, स्मार्ट और वैश्विक प्रतिस्पर्धी प्रणाली में बदल रहा है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म जो माल ढुलाई को सरल बनाते हैं, आधुनिक अवसंरचना जो देश के हर हिस्से को जोड़ती है — इन सबके माध्यम से अगली पीढ़ी का लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम तेजी से आकार ले रहा है। लक्षित नीति सुधारों, संस्थागत पुनर्गठन और तकनीक-आधारित समाधानों के साथ सरकार लॉजिस्टिक्स को भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक व्यापार स्थिति का प्रमुख इंजन बना रही है।

संरचनात्मक बदलावों की श्रृंखला इस बात को बदल रही है कि देशभर में लॉजिस्टिक्स की योजना कैसे बनाई जाती है, उसे कैसे लागू किया जाता है और कैसे बढ़ाया जाता है।
ULIP (Unified Logistics Interface Platform) जैसे प्लेटफ़ॉर्म विभागों के बीच डेटा को एकीकृत कर रहे हैं, जबकि LDB (Logistics Data Bank) 2.0 लाखों कंटेनरों की वास्तविक समय निगरानी प्रदान करता है।
हर HSN कोड को उसकी संबंधित लाइन मंत्रालय से जोड़ा गया है, जिससे जवाबदेही और नीति निर्माण दोनों मजबूत हुए हैं।

SMILE कार्यक्रम के तहत शहर एवं राज्य स्तर की लॉजिस्टिक्स योजनाएँ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप लाई जा रही हैं।
पिछले वर्ष अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से 145.84 मिलियन टन कार्गो का रिकॉर्ड परिवहन हुआ। रेल जाम को समर्पित मालवाहक गलियारों से कम किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में NICDC के प्लग-एंड-प्ले पार्क निवेशकों को तैयार अवसंरचना प्रदान कर रहे हैं।

जमीनी स्तर पर, GST और ई-वे बिल जैसी सुधारों ने अंतरराज्यीय परिवहन से दशकों पुरानी रुकावटों को दूर किया है।
इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य स्पष्ट है— लॉजिस्टिक्स लागत कम करना, दक्षता बढ़ाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना।

गंगा के मैदान में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स

भारत गंगा के मैदान में एकीकृत मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित कर रहा है, जो सड़क, रेल और जलमार्गों को जोड़कर परिवहन को तेज, सस्ता और हरित बना रहा है।

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC), एक उच्च गति रेल माल लाइन, ने वैगन टर्नअराउंड समय को 15–16 दिनों से घटाकर 2–3 दिन कर दिया है और ट्रांजिट समय को 60+ घंटे से घटाकर 35–38 घंटे कर दिया है।
प्रयागराज में केंद्रीय नियंत्रण केंद्र के माध्यम से माल संचालन संचालित किए जा रहे हैं।
EDFC का वाराणसी में गंगा जलमार्ग से जुड़ना निर्माताओं को हल्दिया जैसे पूर्वी बंदरगाहों तक कार्गो पहुंचाने में अधिक सुविधा दे रहा है।

वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का तेजी से विकास रोजगार सृजन, बेहतर इनवेंटरी प्रबंधन और समयबद्ध उत्पादन एवं निर्यात में सहायता कर रहा है।
इन परियोजनाओं में विश्व बैंक द्वारा $1.96 बिलियन (EDFC और रेल लॉजिस्टिक्स) और $375 मिलियन (गंगा जलमार्ग) का निवेश शामिल है।

लॉजिस्टिक्स पहले से अधिक क्यों महत्वपूर्ण

भारत की विकास यात्रा अब कुशल लॉजिस्टिक्स पर अधिक निर्भर है।
नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और पीएम गतिशक्ति ने इस परिवर्तन को तेज किया है। परंतु रणनीति को सटीकता की आवश्यकता होती है — और वह शुरू होती है लॉजिस्टिक्स लागत के वास्तविक आंकड़ों से।

पहली बार—
DPIIT और NCAER की व्यापक वैज्ञानिक रिपोर्ट ने भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के 7.97% पर रखा है।

यह अध्ययन 3,500+ उद्योग हितधारकों के प्राथमिक डेटा और MOSPI, RBI, GSTN जैसे स्रोतों के द्वितीयक डेटा पर आधारित है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष:

  • लॉजिस्टिक्स लागत: ₹24.01 लाख करोड़

  • नॉन-सर्विसेज आउटपुट के मुकाबले: 9.09%

रिपोर्ट दर्शाती है कि छोटी कंपनियों पर लॉजिस्टिक्स लागत का बोझ अधिक है।
अध्ययन विभिन्न परिवहन मोड्स के लिए प्रति टन-किमी लागत भी प्रदान करता है।

यह स्पष्ट करता है कि लगभग 600 किमी की यात्रा में पहले और अंतिम 50 किमी में सुधार से कुल लागत काफी घट सकती है।
इससे अंतिम-मील संपर्क और मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन का महत्व बढ़ जाता है।

नया इंटरैक्टिव डैशबोर्ड नीति-निर्माताओं और उद्योग दोनों को वास्तविक समय विश्लेषण और बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा।

2025: भारत की सप्लाई चेन को सुपरचार्ज करना

2025 में कई नई पहलें शुरू की गईं—
मापांकन, स्थानीय योजना, अवसंरचना और डेटा एकीकरण को मजबूत करने के लिए।

1. PM GatiShakti — एकीकृत योजना को गति

इस वर्ष निम्न प्रमुख लॉन्च किए गए:

  • सभी 112 आकांक्षी जिलों के लिए जिला मास्टर प्लान

  • PM GatiShakti – Offshore (समुद्री परियोजनाओं के लिए भू-स्थानिक डेटा एकीकरण)

  • PM GatiShakti Public: 230 datasets का सार्वजनिक उपयोग

  • National Master Plan Dashboard और Data Uploading System

  • Compendium Volume-3

  • LEAPS 2025 — लॉजिस्टिक्स नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए DPIIT पहल

2. SMILE — शहर स्तर पर लॉजिस्टिक्स योजना

ADB के सहयोग से विकसित SMILE कार्यक्रम
राज्य और शहर स्तर पर लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करता है।

8 राज्यों के 8 पायलट शहरों में—

  • ट्रंक रूट्स

  • आर्थिक गलियारे

  • लॉजिस्टिक्स गेटवे

  • शहरी माल ढुलाई

  • वेयरहाउस क्लस्टर

  • लास्ट-माइल कॉरिडोर

को एकीकृत ढंग से योजना में शामिल किया जा रहा है।

उद्देश्य:
तेज, सस्ता, स्वच्छ और संगठित शहरी लॉजिस्टिक्स प्रणाली।

3. LEADS 2025 — राज्यों की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस रैंकिंग

LEADS अब धारणा-आधारित और वस्तुनिष्ठ दोनों प्रकार के डेटा को जोड़कर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन करता है।
API-आधारित टूल्स वास्तविक समय में सड़क गति, यात्रा समय और प्रतीक्षा समय को ट्रैक करते हैं।

4. LDB 2.0 — बाजारों को गति देने वाली दृश्यता

ULIP के साथ एकीकृत LDB 2.0:

  • वास्तविक समय कंटेनर ट्रैकिंग

  • रोड, रेल, समुद्र और हाई-सीज ट्रैकिंग

  • लाइव कंटेनर देरी हीटमैप

  • कंटेनर नंबर, वाहन नंबर, रेलवे FNR से ट्रैकिंग

5. IPRS 3.0 — औद्योगिक पार्कों की रैंकिंग

IPRS 3.0 पार्कों को तीन श्रेणियों में रैंक करता है:
Leader, Challenger, Aspirer

20 प्लग-एंड-प्ले पार्क NICDC के तहत विकसित हो रहे हैं।

6. HSN कोड गाइडबुक

12,167 HSN कोड्स को 31 मंत्रालयों से मैप किया गया है, जिससे उद्योग और सरकार दोनों के लिए स्पष्टता बढ़ी है।

निष्कर्ष

लॉजिस्टिक्स अब परदे के पीछे का तंत्र नहीं है —
भारत इसे अपनी प्रतिस्पर्धात्मक ताकत में बदल रहा है।

PM GatiShakti Public/Offshore, SMILE, LEAPS 2025, LEADS 2025, IPRS 3.0, LDB 2.0 जैसी पहलों के साथ भारत अपने लॉजिस्टिक्स को लागत केंद्र से वैश्विक प्रतिस्पर्धा की शक्ति में बदल रहा है।

विकास इंजन से वैश्विक नेतृत्व की ओर यात्रा शुरू हो चुकी है।


APEDA द्वारा छत्तीसगढ़ से कोस्टा रिका के लिए 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की पहली खेप का सफल निर्यात

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वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने छत्तीसगढ़ से कोस्टा रिका के लिए 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की पहली खेप के निर्यात को संभव बनाया है।

यह पहल माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी कार्यक्रम “कुपोषण मुक्त भारत” के अनुरूप है, जिसे पोषण अभियान के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है। इसके माध्यम से भारतीय खाद्य निगम (FCI) देशभर में फोर्टिफाइड चावल का वितरण कर रहा है। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल का यह निर्यात भारत के घरेलू पोषण मिशन को वैश्विक स्तर से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ राज्य ने चावल और फोर्टिफाइड चावल उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं, जिससे राज्य के किसानों, मिलर्स और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान मिल रही है। कोस्टा रिका को FRK के सफल निर्यात ने पोषण-संवर्धित खाद्य उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में छत्तीसगढ़ की बढ़ती भूमिका को उजागर किया है।

इस अवसर पर APEDA के अध्यक्ष अभिषेक देव ने इस उपलब्धि से जुड़े सभी निर्यातकों और हितधारकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत से फोर्टिफाइड चावल का निर्यात न केवल देश के कृषि निर्यात पोर्टफोलियो को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत विज्ञान-आधारित और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त खाद्य समाधानों के माध्यम से कुपोषण के समाधान के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि APEDA निर्यातकों को फोर्टिफाइड और वैल्यू-ऐडेड खाद्य उत्पादों के बाजार विस्तार में निरंतर सहयोग प्रदान करेगा।

छत्तीसगढ़ राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TREA-CG) के अध्यक्ष मुकेश जैन ने इस निर्यात कार्य में सहयोग देने के लिए APEDA का आभार व्यक्त किया और बताया कि आने वाले दिनों में FRK के नए गंतव्यों के लिए निर्यात की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ से कृषि निर्यात बढ़ाने में APEDA के निरंतर सहयोग का भी अनुरोध किया।

फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) चावल के आटे को लोहा, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ मिश्रित करके तैयार किया जाता है। इन पोषक तत्वों को एक्सट्रूड कर चावल के समान आकार दिया जाता है, जिसे बाद में सामान्य चावल के साथ एक निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है ताकि मुख्य खाद्य पदार्थ के पोषण मूल्य में वृद्धि की जा सके। FRK का निर्यात भारत की खाद्य फोर्टिफिकेशन में तकनीकी क्षमता और वैश्विक खाद्य सुरक्षा एवं पोषण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

छत्तीसगढ़ से फोर्टिफाइड राइस कर्नेल की पहली खेप के सफल प्रेषण ने भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। यह APEDA, छत्तीसगढ़ सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है, जो भारत को पोषण-संवर्धित और उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पादों का विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।

भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2025: भारत मंडपम में 30-31 अक्टूबर को होगा आयोजन, वाणिज्य विभाग और एपीडा देंगे गैर-वित्तीय सहयोग

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भारत सरकार प्रत्येक आर्थिक क्षेत्र में सहभागी निर्णय लेने और व्यापार संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से सभी हितधारकों के साथ संवाद करती है। चावल भारत का प्रमुख कृषि निर्यात उत्पाद है — वर्ष 2024-25 में भारत का चावल निर्यात लगभग 12.95 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है, और भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनने की दिशा में अग्रसर है। इस क्षेत्र के महत्व को ध्यान में रखते हुए, वाणिज्य विभाग अन्य संबंधित मंत्रालयों/विभागों के साथ मिलकर भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन (Bharat International Rice Conference - BIRC) 2025 को गैर-वित्तीय सहयोग प्रदान कर रहा है।

BIRC 2025 का आयोजन 30–31 अक्टूबर 2025 को भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस सम्मेलन का आयोजन इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) द्वारा किया जा रहा है, जो चावल क्षेत्र से संबंधित एक निजी व्यापारिक संस्था है। इसके सदस्य चावल निर्यातक एवं चावल पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े अन्य हितधारक हैं। वाणिज्य विभाग का IREF के अध्यक्ष या सदस्यों की नियुक्ति में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।

IREF के अलावा, भारत के अन्य प्रमुख चावल निर्यातक संगठन — द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ (TREA-CG) और द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TREA), काकीनाडा — भी इस कार्यक्रम में सह-भागीदार हैं।

एपीडा (APEDA), जो कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संवर्धन की जिम्मेदारी निभाती है, इस कार्यक्रम को सहयोग दे रही है। इसका उद्देश्य संबंधित मंत्रालयों/विभागों को एक मंच पर लाकर चावल निर्यात के विस्तार और संवर्धन के लिए समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

सम्मेलन के आयोजन में लगने वाले सभी व्यय — जैसे स्थल किराया, लॉजिस्टिक व्यवस्था, खरीदारों की मेजबानी (यात्रा, आवास आदि), प्रदर्शनी, खरीदार-विक्रेता बैठक, तकनीकी सत्र, वीडियो, बैनर, पोस्टर, प्रदर्शन सामग्री आदि — पूरी तरह IREF और उसके सह-भागीदारों द्वारा अपनी निधियों या निजी प्रायोजन से वहन किए जा रहे हैं।

जहां तक IREF के राष्ट्रीय अध्यक्ष या संस्थान के संचालन से संबंधित प्रेस में प्रकाशित विशिष्ट आरोपों का प्रश्न है, वाणिज्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक निजी संस्था का आंतरिक मामला है और इस पर टिप्पणी करना विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

छत्तीसगढ़ के किसानों, उद्यमियों और निर्यातकों को अब मिलेगा वैश्विक बाजार का सीधा लाभ,रायपुर में खुलेगा APEDA का क्षेत्रीय कार्यालय

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रायपुर- कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात को प्रोत्साहन देने की दिशा में छत्तीसगढ़ को एक बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों एवं उद्योग विभाग की सक्रिय पहल के फलस्वरूप भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने रायपुर में APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने की स्वीकृति प्रदान की है।

इस क्षेत्रीय कार्यालय के प्रारंभ होने से छत्तीसगढ़ के किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों को अनेक लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे। अब उन्हें ट्रेनिंग, प्रमाणन, पैकेजिंग, मानकीकरण और निर्यात संबंधी सेवाओं के लिए अन्य राज्यों के कार्यालयों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

स्थानीय स्तर पर मिलेगी वैश्विक गुणवत्ता की सुविधा

राज्य में APEDA  कार्यालय की स्थापना से अब फाइटो-सेनेटरी प्रमाणपत्र, गुणवत्ता प्रमाणन, लैब टेस्टिंग, और निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाएं यहीं पूरी की जा सकेंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि किसानों और निर्यातकों की लागत में भी कमी आएगी।

छत्तीसगढ़ के उत्पादों को मिलेगी ब्रांडिंग और वैश्विक पहचान

APEDA  कार्यालय से फल, सब्ज़ियाँ, चावल, GI टैग वाले उत्पाद, मिलेट्स और अन्य कृषि उत्पादों का सीधे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में निर्यात आसान होगा। इससे उत्पादों को उचित दाम, व्यापारियों को नए बाज़ार, और राज्य को वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।

किसानों की आय और ज्ञान दोनों में वृद्धि

निर्यात से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, नई तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग की जानकारी और प्रशिक्षण उन्हें स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा।

निर्यात बुनियादी ढांचे को मिलेगा प्रोत्साहन

APEDA न केवल प्रमाणन और ब्रांड प्रमोशन में सहयोग करता है, बल्कि निर्यात बुनियादी ढांचे के निर्माण और रख-रखाव में भी सहायता करता है। इससे राज्य में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस जैसे सुविधाओं का विकास होगा, जिससे कृषि व्यापार को नई गति मिलेगी।

विशेष योजनाएं और सब्सिडी का लाभ राज्य को मिलेगा

APEDA  द्वारा चलाए जा रहे एक्सपोर्ट प्रमोशन, स्किल डेवलपमेंट और सब्सिडी योजनाओं का लाभ अब छत्तीसगढ़ के किसान, स्टार्टअप और MSMEs को सहजता से मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों और उत्पादकों को अब वैश्विक बाजार से जोड़ने का मजबूत माध्यम मिल गया है। यह कार्यालय न केवल कृषि निर्यात को प्रोत्साहन देगा, बल्कि राज्य की आर्थिक समृद्धि की दिशा में भी एक निर्णायक कदम सिद्ध होगा। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को ‘वोकल फॉर लोकल टू ग्लोबल’ की दिशा में एक अग्रणी राज्य बनाएगी और समृद्ध कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोलेगी।


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