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ज्ञान की ये चार बातें बदल सकती है आपकी लाइफ स्टाइल, आप कभी नहीं होंगे नकारात्मक

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महासमुन्द। यदि आप नकारात्मक सोच से परेशान हैं। जीवन यात्रा में सबकुछ आपके सोच के प्रतिकूल हो रहा है। आप निराशा और तनावग्रस्त महसूस करते हैं। तो यह खबर खासकर आपके लिए है। ज्ञान की इन चार बातों को आत्मसात कर लें, तो जीवन जीने का नजरिया ही बदल जाएगा। आगे जानेंगे क्या है वह चार बातें-

बीके वीरेंद्र भाई और सूरज भाई के साथ संपादक आनंदराम पत्रकारश्री

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय महासमुन्द नयापारा स्थित उपकार भवन में आज ज्ञान की पाठशाला हुई। मधुबन (आबू रोड) से यहाँ पहुंचे ब्रम्हाकुमार वीरेंद्र भाई और सूरज भाई ने ईश्वरीय परिवार को संबोधित किया।

ईश्वरीय परिवार को संबोधित करते हुए बीके प्रीति बहन

महासमुन्द केंद्र प्रमुख ब्रम्हाकुमारी प्रीति बहन के सानिध्य में ईश्वरीय ज्ञान की चार बातें वीरेंद्र भाई ने कंठस्थ कराई। उन्होंने कहा कि पुरुषार्थ से सबकुछ संभव है। जो भी व्यक्ति, सर्वशक्तिमान परमात्मा (शिव बाबा) के नशे में रहते हैं, उनके सामने कोई विघ्न नहीं टिकती है। विषम परिस्थितियां आ ही नहीं सकती। जो सर्वशक्तिमान की हमेशा याद में रहते हैं, सफलता उनकी कदम चूमती है। हमें यह हमेशा याद रखने की आवश्यकता है कि "मैं सर्वशक्तिमान आत्मा हूँ, सफलता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है।" इससे जीवन के हर पड़ाव पर सफलता सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि जो आत्मा सर्वशक्तिमान के नशे में रहती हैं, वह संकल्प शक्ति से जो चाहें, कर सकते हैं। मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। और जो आत्मा सर्वशक्तिमान के नशे में रहती हैं, सारा संसार उनका सम्मान करता है। प्रकृति भी उनका सम्मान करती है।

ज्ञान चर्चा में उपस्थित ब्रम्हकुमारी बहनें

बीके वीरेंद्र भाई ने ज्ञान की पाठशाला में भेंट मुलाकात के दौरान प्रातः स्मरण के लिए चार मूलमंत्र दिए। जिसका प्रयोग नियमित रूप से करके हम स्वस्थ, सुखी, धनवान और पवित्र रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि ब्रम्ह मुहूर्त में जागकर इन चार वाक्यों का प्रतिदिन स्मरण (ध्यान) करना चाहिए:-

1. मैं सर्वशक्तिमान आत्मा हूँ, मैं बहुत सुखी हूँ।

2. मैं सर्वशक्तिमान आत्मा हूँ, मैं सफल हूँ, मैं बहुत धनवान हूँ।

3. मैं सर्वशक्तिमान आत्मा हूँ, मैं पवित्र हूँ।

4. मैं सर्वशक्तिमान आत्मा हूँ, मैं एकदम स्वस्थ हूँ।

इस मूल मंत्र से देह अभिमान से मुक्ति मिलती है। सुख, धन धान्य, सफलता, पवित्रता और बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। निरंतर अभ्यास करें, जीवन में अमूलचूल बदलाव महसूस करेंगे।

Mahasamund : बहुत कुछ कहते-कहते अलविदा कह गए अग्नि चंद्राकर, नाम के विपरित था स्वभाव

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नाम अग्नि था, नाम के विपरीत स्वभाव में गजब की शीतलता। शांत, सरल और हमेशा विनम्रतापूर्वक बातचीत करना उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष रहे तथा महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अग्नि चंद्राकर का आज रविवार शाम रायपुर के एक निजी अस्पताल में देहावसान हो गया। उनके निधन के समाचार समूचे छत्तीसगढ़ अंचल में शोक की लहर है। 

अग्नि चंद्राकर

सोमवार 24 जून को सुबह 10 बजे उनका पार्थिव शरीर रायपुर से महासमुंद लाया जाएगा। स्टेशन रोड महासमुन्द स्थित उनके निज निवास और कांग्रेस भवन में आमजनों के दर्शनार्थ रखा जाएगा। नगर भ्रमण पश्चात उनका पार्थिव शरीर उनके गृहग्राम लभराकला ले जाएगा, जहां दोपहर 1 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

चालीस साल का राजनीतिक सफर

करीब 40 साल तक राजनीति में सक्रिय रहे अग्नि चंद्राकर अपने सरल, सहज स्वभाव, साफ सुथरी राजनीति और सेवा भावना के कारण पक्ष-विपक्ष में समान रूप से लोकप्रिय रहे। महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक चुना जाना उनकी जन-स्वीकार्यता और लोकप्रियता का प्रमाण है। विकासखंड फिंगेश्वर के ग्राम सोरिद में दाऊ रमनलाल चंद्राकर के घर 1 जनवरी 1954 को जन्मे और  बी. कॉम., एल.एल.बी. उच्च शिक्षित अग्नि चंद्राकर ने व्यवसाय के रूप में कृषि को ही अपनाया। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत सन् 1986 में हुई,जब वे ग्राम पंचायत धनसुली के निर्विरोध सरपंच बने। सन् 1993 में महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से प्रथम बार निर्वाचित हुए। इसके बाद सन् 1998 में पुनः महासमुंद के विधायक बने। सन् 2000 से 2003 तक भूमि विकास बैंक अध्यक्ष रहे। सन् 2008 में तृतीय बार महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। सन् 2021 में अध्यक्ष, छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लि. रायपुर मनोनीत किए गए। साथ ही उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया था। 

बुनियादी सुविधाओं के लिए समर्पित रहा कार्यकाल

विधायक के रूप में  अग्नि चंद्राकर ने महासमुंद क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए पूरी तरह समर्पित रहे। पासिद जलाशय, निसदा डायवर्सन सहित क्षेत्र की अधिकतर सिंचाई परियोजनाएं उनके प्रयासों से साकार हुई हैं। 

यादगार लम्हें:- लाफिनकला गांव में एक कार्यक्रम के दौरान अग्नि चंद्राकर जी को 'श्रीपुर एक्सप्रेस' की प्रतियां भेंट करते हुए संपादक आनंदराम पत्रकारश्री और शिक्षक महेंद्र पटेल (छाया: महेंद्र कुमार पटेल)


अपने ही सरकार के खिलाफ धरना में बैठे

महासमुंद जिला निर्माण में उनका बड़ा योगदान रहा। यहां की जनता महासमुंद जिला की मांग कर रही थी, लेकिन 1998 में अविभाजित मध्यप्रदेश में नए जिलों की घोषणा हुई तो उसमें महासमुंद का नाम नहीं था। रायपुर को विभाजित कर धमतरी को जिला बनाया गया, लेकिन महासमुंद की मांग अनसुनी कर दी गई। जन-आकांक्षा की अनदेखी से क्षुब्ध अग्नि चंद्राकर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को अपने विधायक पद से इस्तीफा भेजकर अपनी ही सरकार के खिलाफ अनवरत धरना में बैठ गए। सरकार को झुकना पड़ा और अंततः महासमुंद जिला निर्माण की घोषणा की गई। 

राजनीति में अपूरणीय क्षति

महासमुंद जिला निर्माण के बाद सन् 1998 से 2006 तक वे कांग्रेस के प्रथम महासमुंद जिलाध्यक्ष भी रहे। कृषि उनका व्यवसाय था और बीज निगम अध्यक्ष के रूप में उन्होंने प्रदेश भर के किसानों के हित में कई कार्य किए। उनका निधन महासमुंद विधानसभा ही नहीं, सम्पूर्ण महासमुंद जिला और पूरे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है।

Charcha Chaurahe Par : सोशल मीडिया पर ऐसा वार, महादेव की कृपा से सब काम हो रहा है,उधारी की गारंटी नहीं- नगदी में बात करो

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इस कालम का संपादन वरिष्ठ पत्रकार व श्रीपुर एक्सप्रेस और मीडिया24मीडिया समूह के प्रधान संपादक श्री आनंदराम पत्रकारश्री कर रहे हैं। इसमें उल्लेखित तथ्यों की जानकारी संचार के विभिन्न माध्यमों, जन चर्चा और कानाफूसी पर आधारित है। व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत आलेख से किसी की भी मानहानि नहीं होगी, इसका विशेष ख्याल रखा गया है। आलेख में किसी व्यक्ति विशेष, संस्था अथवा दल विशेष पर कटाक्ष नहीं है। किसी घटना अथवा कड़ी का आपस में जुड़ जाना महज एक संयोग होगा। इस संबंध में कोई दावा-आपत्ति स्वीकार्य नहीं है। 


(यद्यपि हमारा ध्येय स्वस्थ पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना है। तथापि यदि संयोगवश किसी विषयवस्तु से किसी की भावना को ठेस पहुंचती है, तो अपनी अभिव्यक्ति सीधे प्रधान संपादक तक मोबाइल नंबर- 9669140004 पर व्हाट्सएप्प करके अथवा anand.media24media@gmail.com पर ई-मेल संदेश भेज सकते हैं। हम सुधि पाठकों के भावनाओं का विशेष ध्यान रखेंगे। )

# सोशल मीडिया पर ऐसा 'वार'


इन दिनों देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहा है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता में अनेक सख्तियां बरती जा रही है। इसका तोड़ राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर 'पोस्टर वार' से निकाल रहे हैं। 'चर्चा चौराहे पर' के स्तम्भकार को एक सुधि पाठक ने व्हाट्सएप्प पर वायरल एक 'कार्टून पर्चा' भेजा है। जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह से स्वागत को चुटीले अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। देखिए सोशल मीडिया पर कैसा 'वार' चल रहा है। वायरल पर्चा को हम मूलतः यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं। आप भी गौर फरमाइए और मंद-मंद मुस्कुराइये.....
सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा यह पोस्टर


# कांव-कांव अउ खांव-खांव


एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यकर्ता सह कथित मीडिया प्रभारी को उनके ही दल के लोग 'कौआ' संबोधित करते हैं। श्यामवर्ण के होने से इस उपनाम की उत्पति होना माना जा रहा है। किसी भी मसले पर जहाँ-तहां 'कांव-कांव' करने के स्वभाव के कारण पार्टी के लोग उन्हें इस उपनाम से संबोधित करने लगे हैं। चौराहे पर चर्चा हो रही थी कि पार्टी ने 'मीडिया मैनेजमेंट' की महती जिम्मेदारी उन्हें दी है। बड़ा फण्ड भी दिया है। आदत से लाचार ये नेता कलमकारों के हिस्से के धन को भी गटक रहे हैं। इससे अनेक कलमकार नाराज हो गए हैं। ऊपर से (हाई कमान) जब कलम के सिपाहियों के सम्मान में लोकतंत्र के उत्सव में भागीदारी के लिए 'सम्मान निधि' भेजी जा रही है। तब सवाल यह है कि छिछोरे किस्म के इन 'कांव-कांव' करने वाले नेता को खांव-खांव करने का अधिकार किसने दे दिया ?

# 'महादेव' की कृपा से सब काम हो रहा है !


छत्तीसगढ़ के महासमुन्द विधानसभा क्षेत्र में 'महादेव' की खूब चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि एक उम्मीदवार को 'महादेव' की कृपा से टिकट मिली है। तो जीत भी महादेव ही दिलाएंगे। यह सोचकर 'रामजी' सहित प्रायः सभी कार्यकर्ता काम करना बंद कर दिए हैं। 
जब महादेव की कृपा से ही सबकुछ होना है, तो हमारी क्या जरूरत है? ऐसा सवाल कर्मठ कार्यकर्ता कर रहे हैं। जीवन में पंच तक का चुनाव नहीं लड़े व्यक्ति को पार्टी ने क्या सोचकर टिकट दी है, यह तो संगठन के लोग ही जानें। इतना जरूर है कि जनता 'महादेव' का मतलब जानने आतुर हैं। कहीं यहाँ भी 'महादेव एप' की कृपा से सब काम तो नहीं हो रहा है?


# उधारी की नहीं गारंटी, नगदी में बात करो !


एक दल के उम्मीदवार 'महतारी वंदन योजना' का फार्म भरा रहे हैं। गांव-गांव में महिलाओं की टोली घूमकर प्रलोभन दे रही हैं। जागरूक जनता ने इस राजनीतिक फंडा को नकार दिया है। चौक पर चर्चा हो रही थी कि उधारी की योजना की गारंटी नहीं है, फार्म भरने के लिए पहले प्रति फार्म एक हजार रुपये दें। तब विश्वास होगा कि हर महीने एक हजार रुपये उन्हें मिलने वाला है। अब यह योजना उम्मीदवार के गले की हड्डी बन गई है। महिलाएं कह रही हैं-

 "उधारी से काम नहीं चलेगा, नगदी देना है तो बात करो।
21वीं सदी की समझदार नारी हैं हम, बाबा जी हमें माफ करो।"

इस तरह के वाक्या से गुजरते हुए दिन बीत गया और शाम को रिटर्निंग ऑफिसर ने संबंधित उम्मीदवार को नोटिस भेज दिया। आज दो बजे तक जवाब दो, वर्ना खैर नहीं। अब देखना होगा कि किसकी वंदन होती है। 



नहीं रहे पटेवा के समाजसेवी, व्यवसायी नरेश अग्रवाल, अंतिम संस्कार आज

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पटेवा. व्यापारी संघ के सचिव नरेश अग्रवाल (55) का 15 जून की रात असामयिक निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार गृहग्राम पटेवा में होगा। आज सभी व्यापारी अपना प्रतिष्ठान बंद रखेंगे और अंत्येष्टि कार्यक्रम में शामिल होंगे। मिलनसार और सेवाभावी नरेश अग्रवाल के निधन से सभी स्तब्ध हैं। 

स्व. नरेश अग्रवाल, पटेवा
जन्म- 3 जुलाई 1968.                           देहावसान- 15 जून 2023.



वे व्यापारी संघ पटेवा के सचिव के साथ-साथ, सचिव पतई माता मंदिर समिति, अध्यक्ष जनभागीदारी हायर सेकेंडरी स्कूल पटेवा, प्रदेश सचिव कांग्रेस व्यापारी प्रकोष्ठ, सदस्य नवीन महाविद्यालय चिरको और वार्ड पंच ग्राम पंचायत जोगीडीपाजैसे छोटे-बड़े अनेक सामाजिक, राजनीतिक, व्यापारिक दायित्वों को सेवा भाव से बखूबी निभा रहे थे। करीब डेढ़ महीने पहले उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था। राजधानी रायपुर के नामी अस्पतालों में उपचार के बावजूद स्वास्थ्य में सुधार नहीं आया, देर रात देहावसान हो जाने की खबर आयी। नरेश अग्रवाल के देहावसान से जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। वे बहुत ही लोकप्रिय जनसेवक और क्रियाशील व्यक्तित्व के धनी थे। हसमुख स्वभाव से सभी से बहुत जल्दी घुल मिल जाते थे। 

किसान पहुंचे संसदीय सचिव निवास, किया अभिनंदन

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महासमुंद। क्षेत्र के किसानों ने सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय तक नहर के लिए बजट में राशि का प्रावधान होने पर खुशी जताते हुए संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर का आभार जताते हुए अभिनंदन किया। आज गुरूवार को सरपंच अन्नू चंद्राकर के नेतृत्व में किसान देवनारायण साहू, हृदय लाल साहू, टुकेश साहू, जोहनराम साहू, मोहनराम साहू, हरिशंकर साहू, लक्ष्मीनारायण साहू, किशलाल साहू, गोपाल साहू, शिव साहू, जीवराखन साहू, नागेश्वर साहू, संतराम साहू, हेमलाल साहू, दाउलाल साहू, बलीराम साहू, मनोज साहू, होरीलाल साहू, गंगूराम साहू, शंकरलाल साहू आदि संसदीय सचिव निवास पहुंचे और संसदीय सचिव श्री चंद्राकर से मुलाकात की।

इस दौरान उन्होंने सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय तक नहर निर्माण के लिए बजट में राशि का प्रावधान कराने में की गई पहल को किसानों के वरदान बताते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से सिंचाई को लेकर किसानों की चिंता दूर हो सकेगी। इसके लिए लंबे समय से मांग की जा रही थी। जिसे संसदीय सचिव श्री चंद्राकर ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने मुलाकात के दौरान संसदीय सचिव श्री चंद्राकर का आभार जताते हुए अभिनंदन किया।

बावनकेरा में विकास कार्यों की सौगात, जताया आभार

संसदीय सचिव व विधायक श्री चंद्राकर की पहल पर बावनकेरा में विकास कार्यों की सौगात मिलने पर मुस्लिम जमात के गुलजार खान, शेख हनीफ, फरीद खान, अरमान खान, राजा खान, हसन खान, सलीम अशरफी आदि ने आभार जताया है।

स्कूल छोड़ जीवन बीमा करने में व्यस्त रहते हैं ये शिक्षक, गणतंत्र दिवस पर हुआ सम्मान !

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आनंदराम साहू 

महासमुंद। हजारों रुपये वेतन मिलने के बावजूद शिक्षकीय दायित्व नहीं निभाने वाले कतिपय शिक्षकों की वजह से महकमा बदनाम हो रहा है। कुछ शिक्षक तो अब सारी हदें पार कर चुके हैं। राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर भी स्कूल नहीं गए।  भारतीय जीवन बीमा निगम कार्यालय के समारोह में पहुंचे। इतना ही नहीं वहां जमकर भाषणबाजी भी किया। हद तो यह भी है कि पत्नी के नाम पर बीमा एजेंट का काम करने और लाखों रुपये कमीशन लेने वाले एक शासकीय सेवक को सार्वजनिक रूप से खुलेआम सम्मान भी दिया गया। 

बीमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रशस्ति पत्र और मैडल देकर स!म्मानित किया गया। इसका फोटो वायरल होने के बाद इस संबंध में 'मीडिया24मीडिया' द्वारा सवाल करने पर एलआईसी के शाखा प्रबंधक बगलें झांकने लगे हैं। यह न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली बल्कि एलआईसी प्रबंधन को भी कटघरे में खड़ी करने वाला कृत्य है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार व्याख्याता (एलबी) हेमंत डड़सेना शासकीय बालक आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महासमुंद में पदस्थ हैं। स्कूल समय में घूम-घूमकर बीमा व्यवसाय करना उनके दिनचर्या का हिस्सा है। बच्चों को नहीं पढ़ाने की शिकायत पर उन्हें बिरकोनी हाई स्कूल से हटाकर जिला मुख्यालय में पदस्थ किया गया। पत्नी शोभा डडसेना के नाम पर जीवन बीमा निगम में एजेंट का काम करते हैं। इसके लिए स्कूल छोड़ कर अक्सर एलआईसी ऑफिस में दिखते हैं। सीसीटीवी कैमरे से भी इसकी पुष्टि हुई है। 

सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का....

बताया जाता है कि हर महीने करीब दो लाख रुपये कमीशन एलआईसी से बीमा व्यवसाय के एवज में मिलता है। इसमें से मोटी रकम शिक्षा विभाग के अफसरों को भी दिया जाता है, ऐसी अपुष्ट जानकारी है। इस वजह से सबकुछ जानते हुए भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। खुलेआम संरक्षण दिया जा रहा है। अक्सर विद्यालय से अनुपस्थित रहना और दिनभर जीवन बीमा का काम करना इनके दिनचर्या का हिस्सा है। ज्यादातर समय जीवन बीमा कार्यलय में देखा जा सकता है। शासकीय सेवक होकर जीवन बीमा का काम करते हुए अनुचित ढंग से दोहरा लाभ ले रहे हैं। बावजूद, इस पर कार्यवाही करने के बजाय सार्वजनिक तौर पर सम्मानित करने से यह स्वप्रमाणित हो चुका है कि सैंया भये कोतवाल तब डर काहे का।

सोशल मीडिया में वायरल इस फोटो में लाल कुर्ता, सफेद पैजामा और काला जैकेट पहने हुए सख्श की पहचान हेमंत डड़सेना के रूप में की गई है। जिन्हें एलआईसी के शाखा प्रबंधक वासुदेव पंसारी मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर बाकायदा सम्मानित कर रहे हैं। इस मामले की शिकायत कलेक्टर और उच्चाधिकारियों से भी की गई है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी है कि दोहरा लाभ अर्जित कर सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन करने वाले पर क्या कार्रवाई की जाती है?

Mahasamund Crime : जोबा में मां-बेटी-बेटा की हत्या, जमीन विवाद बना काल

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महासमुन्द: जिला मुख्यालय महासमुन्द से 17 किमी दूर जोबा गांव में आज सुबह तीन लोगों की हत्या कर दी गई। मृतकों में माँ-बेटी और बेटा शामिल हैं। हत्या की वजह जमीन विवाद है। वहीं चार अन्य घायल हैं। मृतक और घायल सभी एक ही परिवार के हैं। घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव लाया गया । जहां प्राथमिक उपचार किया गया। बीएमओ डॉ विपिन रॉय ने बताया कि घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए रायपुर रेफर किया जा रहा है।





आरोपी













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तुमगांव थाना क्षेत्र के जोबा गांव की यह घटना है। आज सुबह जब ग्रामीण नींद से जागे तो लहूलुहान पड़े लोगों को देखा। पुलिस को सूचित किया। घायलों को 108 से तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। पारिवारिक जमीन विवाद पर हत्या की यह वारदात हुई है। 40 वर्षीय जागृति पति ओस कुमार, उसकी 16 साल की बेटी टीना और नौ साल का बेटा मनीष को मार डाला गया है। धारदार हथियार से गले में वार कर मौत के घाट उतार दिया है। पुलिस गांव के ही परस गायकवाड़ (62) और ब्रिजसेन गायकवाड़ (27) को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस बल बड़ी संख्या में घटनास्थल पर तैनात किया गया है।





एक ही परिवार के चार घायल





मरने वाले परिवार के ही चार सदस्य घायल हैं। इनमें मृतक जागृति के पति ओस कुमार (43), ओस कुमार की बुजुर्ग माता अनार बाई (65), और ओस कुमार के दो संतान ओमन (20) और गीतांजलि उर्फ कोंदी (18) घायल हैं। इनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर किया जा रहा है।





















जागृति के पहले पति की हुई थी हत्या





गांव के जानकार सूत्रों का कहना है कि मृतका जागृति (40) की ओस कुमार दूसरा पति है। उसके पहले पति की भी हत्या हुई थी। जमीन-जायदाद को लेकर किस तरह का विवाद था? आए दिन आपस में झगड़ा होता था। सभी पहलुओं की पुलिस जांच कर रही है। बहरहाल, पुलिस मार्ग कायम कर विवेचना कर रही है।


Godhan Nyay Yojna : किसान ने 15 दिन में गोबर बेच कर कमाया 44000 रूपये

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महासमुंद । छत्तीसगढ़

खेती किसानी और पशुपालन करने वाले लिंगराज आज खुशी से झूम रहा है। यह खुशी उसे गोधन न्याय योजना के जरिए मिली है। महासंमुद जिले के दूरस्थ गांव छिबर्रा के रहने वाले और खेती किसानी के साथ पशुपालन का काम करने वाले लिंगराज ने गोधन न्याय योजना के शुभारंभ 20 जुलाई से 4 अगस्त तक 15 दिनों में 221 क्विंटल गोबर बेचा। आज किसान के खाते में 44200 रूपए आने की सूचना उसे मोबाइल पर  एसएमएस (अलर्ट टोन्स) से मिली। तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। लिंगराज ने सपने में भी नहीं सोचा था कि गोबर बेचने से 15 दिन में इतने पैसे मिल सकते हैं।

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लेकिन यह सब मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल की इस महात्वाकांक्षी योजना ने उसके और उसके जैसे हजारों पशुपालकों के सपने को साकार कर दिया। राज्य सरकार दो रूपये प्रतिकिलो की दर से गौठानों में पशुपालकों से गोबर खरीद रही है और वायदे के मुताबित 15 दिन के भीतर उसका भुगतान भी कर दिया। किसान गोपालक लिंगराज के पास खेती के अलावा 25 गाय है। जिसका दूध वह  आसपास के बाजार में बेचता है। लेकिन लाॅकडाउन के चलते उसका दूध ज्यादा नहीं बिक रहा था।  अब गोबर बेचने से उसकी दूध नहीं बिकने की भरपायी जरूर हो गयी है। इससे वह राहत महसूस कर रहा है।

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ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ सरकार की ‘‘गोधन न्याय योजना‘‘ का हरेली पर्व 20 जुलाई को शुरूआत हुई थी। जिले में इस योजना के शुरू होने से अब तक  15 दिन के भीतर जिले के 84 गौठानों में 1635 किसान, पशुपालकों ने 45551क्विंटल गोबर बेचा (विक्रय) किया है । इक्यासी (81) गौठान समिति द्वारा इसके एवज में 911186 रूपए का भुगतान जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक द्वारा पब्लिक फायनेंसीयल मेनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) से सभी 1635 किसान, पशुपालक को किया गया है ।

पीएफएमएस एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसके द्वारा ई-पेमेन्ट सब्सिडी का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर (डीबीटी) से होता है। आपको बतादें कि जिले में 84 गौठानों में 78 ग्रामीण क्षेत्र के तथा 6 नगरीय निकाय क्षेत्र के है। इनमें अब तक  4 अगस्त कुल 1935 किसान, पशुपालक हितग्राहियों ने गोबर बेचने के लिए पंजीयन कराया है।

रियलिटी चेक:- जनसंपर्क अधिकारी जिला महासमुन्द की ओर से जारी इस खबर के तथ्यों की पड़ताल करने पर ज्ञात हुआ कि किसान लिंगराज ने पन्द्रह दिनों में 221 क्विंटल गोबर बेचा है।  जिसके एवज में उसे 2 रुपये प्रतिकिलो की दर से ऑनलाइन भुगतान किया गया है। चूंकि किसान के पास 25 मवेशी होने का खबर में उल्लेख है। जिसके अनुसार एक मवेशी प्रतिदिन करीब उनसठ किलो गोबर कैसे दे सकता है। जो आश्चर्यजनक और अविश्वसनीय है। इस संबंध में पूछने पर जनसंपर्क विभाग के महासमुन्द सहायक संचालक शशिरत्न पराशर का कहना हैं कि कृषि विभाग के उपसंचालक के द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार खबर प्रसारित किया गया हैं। संभवतः किसान ने महीनेभर का गोबर एकत्र करके अथवा पड़ोसियों का भी गोबर को  मिलाकर बेचा होगा। 
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