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किसानों की समृद्धि के लिए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना आवश्यक : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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लंबे समय से अधूरे सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने को लेकर मुख्यमंत्री सख्त

मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा की

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों, संचालित परियोजनाओं तथा प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े निर्णय ले रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। खेती के बढ़ते रकबे और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई को प्रभावी ढंग से संचालित होते देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई क्षेत्र में बेहतर नवाचार किए जा रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों का भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत हो सकें।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने की योजना है, जिससे लगभग 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई माह में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं।

इसी प्रकार अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिनके माध्यम से लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा।

बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा की गई। आगामी तीन वर्षों में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र तथा समक्का बैराज से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर सहमति बनी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके।

बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राडा ऑटो एक्सपो-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में हुए शामिल

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के श्रीराम बिजनेस पार्क में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित राडा ऑटो एक्सपो-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर क्षेत्र में निरंतर विकास के लिए प्रयासरत है। राज्य में आम नागरिकों की परचेसिंग पावर बढ़ी है, जिसके चलते बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए लोगों से ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की।



मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम के दौरान यामाहा एक्सएसआर-155, टाटा सिएरा तथा महिंद्रा 7 एक्सओ वाहनों की लॉन्चिंग की। इसके साथ ही उन्होंने “मनी मैटर्स” पुस्तक का भी विमोचन किया।

राडा ऑटो एक्सपो-2026 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विगत दो वर्षों में राज्य के किसानों को धान का उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी की दरों में किए गए सुधारों से कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर लोगों से चर्चा के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि जीएसटी दरों में कमी से बाइक की कीमत में लगभग 15 से 25 हजार रुपए तक का लाभ हो रहा है। वहीं, एक व्यक्ति ने बताया कि हार्वेस्टर की कीमत में करीब 2 लाख रुपए तक की कमी आई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसकी देश-विदेश में सराहना हो रही है। पिछले एक वर्ष में लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और कई परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी उन्हें ऑटो एक्सपो में आने का अवसर मिला था, उस समय भी सरकार द्वारा रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी गई थी, जिसका व्यापक लाभ मिला। उस दौरान 25 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लगभग 29 हजार वाहनों का विक्रय हुआ। इससे सरकार को करीब 800 करोड़ रुपए का जीएसटी तथा परिवहन विभाग को 129 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। आम नागरिकों को भी ऑटो एक्सपो का प्रत्यक्ष लाभ मिला।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष राडा ऑटो एक्सपो का आयोजन और अधिक वृहद स्तर पर किया गया है। एक्सपो का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है तथा इसमें 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। पूरे प्रदेश से उद्यमी और विभिन्न कंपनियां इसमें सहभागिता कर रही हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि पहले ही दिन लगभग 2000 वाहनों का पंजीयन हो चुका है और उन्हें विश्वास है कि इस वर्ष 50 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य भी अवश्य पूरा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑटो एक्सपो का आयोजन प्रतिवर्ष इसी तरह किया जाना चाहिए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि राडा ऑटो एक्सपो का यह नौवां संस्करण केवल वाहनों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में रोजगार सृजन और ऑटो सेक्टर की प्रगति का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रोड टैक्स में दी जा रही 50 प्रतिशत छूट से ग्राहकों के साथ-साथ प्रदेश के छोटे और मध्यम व्यवसायियों को भी लाभ मिल रहा है। राज्य में सड़कों का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे कनेक्टिविटी बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ में ऑटो सेक्टर लगातार आगे बढ़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि मंत्रिपरिषद द्वारा राजधानी रायपुर में 20 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक आयोजित 9वें ऑटो एक्सपो के दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह छूट एक्सपो में वाहन बिक्री के पश्चात पंजीकरण के समय लागू होगी, जिससे मोटरयान कर में एकमुश्त 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। इस निर्णय का लाभ पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं को मिलेगा, इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ऑटो एक्सपो में सड़क सुरक्षा शपथ पर हस्ताक्षर किए और आमजन से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने आगामी महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली नारी मैराथन के पोस्टर का भी विमोचन किया।

इस अवसर पर परिवहन सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, कैट के वाइस चेयरमैन अमर परवानी, राजकुमार सिंघानिया, रविन्द्र भसीन, विवेक गर्ग सहित बड़ी संख्या में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के सदस्यगण उपस्थित थे।

रायपुर साहित्य उत्सव का भव्य शुभारंभ कल, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश मुख्य अतिथि, मुख्यमंत्री साय करेंगे अध्यक्षता

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 रायपुर : रायपुर साहित्य उत्सव का भव्य शुभारंभ राजधानी रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में 23 जनवरी को राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय करेंगे। शुभारंभ समारोह विनोद कुमार शुक्ल मंडप में सुबह 10.30 बजे से होगा। कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह होंगे। उपमुख्यमंत्री द्वय अरूण साव और विजय शर्मा एवं महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा और रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।


रायपुर साहित्य महोत्सव में छत्तीसगढ़ और देश के जाने-माने साहित्यकार, पत्रकार, कवि हिस्सा लेंगे। साहित्य महोत्सव के दौरान राष्ट्रीय पुस्तक मेला, इंगेजमेंट जोन, ओपन टैलेंट मंच, पेंटिंग कार्यशाला एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। महोत्सव में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए फूड जोन भी बनाया गया है। मुख्य मंडप विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति में तैयार किया गया है, जहां महत्वपूर्ण मंचीय कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अलावा साहित्यिक परिचर्चा एवं गोष्ठी के आयोजनों के लिए लाला जगदलपुरी मंडप, श्याम लाल चतुर्वेदी मंडप, अनिरूद्ध नीरव मंडप तैयार किए गए है। साहित्य उत्सव में प्रतिदिन चार सत्रों का आयोजन होगा। प्रथम सत्र 12.30 बजे से, द्वितीय सत्र 2.15. बजे से, तृतीय सत्र 3.45 बजे से तथा चतुर्थ सत्र 5.15 बजे से 6.30 बजे तक होगा। 23 एवं 24 जनवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा।

23 जनवरी को प्रथम सत्र- लाला जगदलपुरी मंडप में समकालीन महिला लेखन, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में संवाद वन्देमातरम के अंतर्गत भारत के स्व जागरण का प्रवाह, अनिरूद्ध नीरव मंडप में डिजिटल साहित्य पर परिचर्चा के अंतर्गत प्रकाशकों के लिए चुनौती विषय पर परिचर्चा होगी।

द्वितीय सत्र - लाला जगदलपुरी मंडप में वाचिक परम्परा में साहित्य, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में कविता की नई चाल पर परिचर्चा, अनिरूद्ध नीरव मंडप में संवाद का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश शामिल होंगे।

तृतीय सत्र -लाला जगदलपुरी मंडप में काला पादरी में जनजाति विमर्श और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में छत्तीसगढ़ का साहित्य अवदान विषय पर परिचर्चा होगी। अनिरूद्ध नीरव मंडप में स्मृति शेष स्व. विनोद कुमार शुक्ल साहित्य की खिड़कियां पर परिचर्चा होगी।

चतुर्थ सत्र- लाला जगदलपुरी मंडप में पुरातत्व: मौन साहित्य पर परिचर्चा और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में समय की समस्या: सेक्युलरिज्म पर संवाद होगा। अनिरूद्ध नीरव मंडप में काव्य पाठ राष्ट्रीय कवि संगम का आयोजन होगा। सांस्कृतिक संध्या के अंतर्गत विनोद कुमार शुक्ल मंडप में शाम 7 बजे से मनोज जोशी के चाणक्य नाटक का मंचन होगा।

24 जनवरी को प्रथम सत्र - विनोद कुमार शुक्ल मंडप में राष्ट्र सेवा के सौ वर्ष पर संवाद और लाला जगदलपुरी मंडप में छत्तीसगढ़ के लोक गीत पर परिचर्चा आयोजित होगी।

द्वितीय सत्र - धार्मिक फिल्में और टेली धारावाहिकों का दौर पर संवाद और श्यामलाल चतुर्वेदी एकात्म मानवदर्शन समाज परिवर्तन का सूत्रधार पर परिचर्चा होगी।

तृतीय सत्र -विनोद कुमार शुक्ल मंडप में भारत का बौद्धिक विमर्श पर संवाद, लाला जगदलपुरी मंडप में राष्ट्रीय मीडिया में बहस के मुद्दे, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया और अनिरूद्ध नीरव मंडप पर साहित्य: उपनिषद से एआई तक पर परिचर्चा होगी।

चतुर्थ सत्र- विनोद कुमार शुक्ल मंडप में भारतीय ज्ञान परंपरा पर संवाद, लाला जगदलपुरी मंडप में 'डिजिटल युग के लेखक और पाठक' और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में 'साहित्य के झरोखे से इतिहास' पर परिचर्चा होगी।

पंचम सत्र -विनोद कुमार शुक्ल मंडप में 'माओवादी आतंक और लोकतंत्र', लाला जगदलपुर मंडप में 'डॉ. अंबेडकर - विचारपुंज की आभा', श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में शैक्षणिक संस्थानों में भाषा और साहित्य का स्तर और अनिरूद्ध नीरव मंडप में लुप्त होता बाल साहित्य पर चर्चा होगी। विनोद कुमार शुक्ल मंडप में सांस्कृतिक कार्यक्रम स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में काव्य पाठ होगा।

25 जनवरी को प्रथम सत्र - विनोद कुमार शुक्ल मंडप में संविधान और भारतीय मूल्य पर संवाद, लाला जगदलपुरी मंडप में ट्रेवल ब्लॉग:पर्यटन के प्रेरक और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप पर नवयुग में भारत बोध पर परिचर्चा होगी।

द्वितीय सत्र - लाला जगदलपुरी मंडप में पत्रकारिता और साहित्य पर परिचर्चा, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में नाट्यशास्त्र और कला परंपरा पर संवाद किया जाएगा।

तृतीय सत्र - विनोद कुमार शुक्ल मंडप में सिनेमा और समाज तथा लाला जगदलपुरी मंडप में शासन और साहित्य पर परिचर्चा और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में छत्तीसगढ़ी काव्य पाठ का आयोजन होगा।

प्रेम-विवाह विवाद में छालीवुड अभिनेता पर मारपीट के आरोप, जांच शुरू

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 रायपुर। राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है। छालीवुड अभिनेता मोहित साहू पर एक युवती के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरोपी और पीड़ित युवती दिखाई दे रहे हैं। मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।


शादी और प्रेम प्रसंग को लेकर विवाद

पीड़ित युवती ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया है कि मोहित साहू पहले से शादीशुदा है, इसके बावजूद उसने उसे जबरन उज्जैन ले जाकर शादी की। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गया।

मारपीट में युवती गंभीर रूप से घायल

आरोप है कि विवाद के दौरान मोहित साहू ने युवती के साथ जमकर मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। मारपीट के दौरान युवती लहूलुहान हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी

घटना की जानकारी मिलते ही पुरानी बस्ती थाना पुलिस सक्रिय हुई और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस वीडियो फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

छालीवुड से जुड़े नाम के कारण यह मामला अब काफी तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

श्मशान घाट में शर्मनाक घटना: अस्थियां लेकर गईं महिलाएं, मामला दर्ज, पढ़े पूरी खबर

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 बिलासपुर। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में श्मशान घाट से अस्थियां चोरी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि संपत्ति विवाद के चलते मृतक की पत्नी और बहन ने अंतिम संस्कार की परंपराओं में बाधा डालते हुए श्मशान घाट से अस्थियां समेटकर अपने साथ ले गईं। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें दोनों महिलाएं अस्थियां ले जाती दिखाई दे रही हैं।


15 जनवरी को हुआ था ठेकेदार का निधन

मामले के अनुसार भारतीय नगर निवासी ठेकेदार आलोक ठाकरे का 15 जनवरी को निधन हो गया था। उनके माता-पिता का पहले ही देहांत हो चुका है। आलोक के निधन के बाद उनके बेटे प्रथमेश ठाकुर ने मोहल्ले के लोगों और केयरटेकर मयंक वर्मा की मदद से भारतीय नगर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार कराया। उस समय परिवार का कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था।

अस्थि संचय से पहले पहुंचीं पत्नी और बहन

17 जनवरी को जब परिजन और मोहल्लेवासी अस्थि संचय के लिए मुक्तिधाम जाने की तैयारी कर रहे थे, उससे पहले ही मृतक की पत्नी खुशबू ठाकुर और बहन ज्योति पाण्डेय वहां पहुंच गईं। आरोप है कि दोनों ने ठंडी पड़ चुकी चिता से अस्थियों को समेटा और उन्हें झोले में भरकर अपने साथ ले गईं।

CCTV फुटेज में कैद हुई पूरी घटना

जब प्रथमेश अपने साथियों के साथ मुक्तिधाम पहुंचे तो अस्थियां गायब मिलीं। इसके बाद परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई, जिसमें दोनों महिलाएं अस्थियां ले जाती साफ नजर आ रही हैं।

अस्थियां लौटाने से इनकार

मृतक के बच्चों ने गंगा में विसर्जन के लिए अपनी मां और बुआ से अस्थियां लौटाने की मांग की, लेकिन आरोप है कि उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इससे आहत होकर प्रथमेश और उसके छोटे भाई-बहन खाली कलश लेकर मोहल्लेवालों के साथ सिविल लाइन थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।

संपत्ति विवाद का आरोप

प्रथमेश ठाकुर ने पुलिस को बताया कि उनकी मां करीब तीन साल पहले उन्हें छोड़कर चली गई थीं, जबकि पिता ने ही बच्चों का पालन-पोषण किया। बुआ भी परिवार से अलग रह रही थीं। आरोप है कि पिता की मृत्यु के बाद दोनों महिलाएं संपत्ति हड़पने की नीयत से लौटीं और अंतिम संस्कार की परंपराओं में बाधा डाल रही हैं।

पुलिस जांच में जुटी

पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामला दर्ज कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जा रही है और पूरे घटनाक्रम की कानूनी समीक्षा की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं के साथ युवाओं को मिलेगा रोजगार: नवा रायपुर बनेगा सेंट्रल इंडिया का हेल्थकेयर हब - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : नवा रायपुर को देश के प्रमुख हेल्थकेयर हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में देश के प्रतिष्ठित बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर और नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के मध्य 15 एकड़ भूमि के लीज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता नवा रायपुर में प्रस्तावित मेडिसिटी के विकास को नई गति देगा।


यह परियोजना न केवल राज्य के हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करेगी, बल्कि निवेश के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की तेज़ और भरोसेमंद प्रशासनिक कार्यप्रणाली का भी उदाहरण बनेगी। राज्य सरकार द्वारा 24 सितंबर 2025 को निवेश आमंत्रण जारी किए जाने के बाद मात्र चार माह के भीतर भूमि चिन्हांकन, आवश्यक स्वीकृतियां और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जो अपने आप में एक नया बेंचमार्क है।

नवा रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा आबंटित 15 एकड़ भूमि पर बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा लगभग ₹680 करोड़ की लागत से 300 बिस्तरों का अत्याधुनिक मल्टी सुपर-स्पेशलिटी हॉस्पिटल स्थापित किया जाएगा। यह अस्पताल ट्रस्ट का देश में चौथा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल होगा। इससे पूर्व मुंबई, इंदौर और जयपुर में ट्रस्ट के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।

बॉम्बे हॉस्पिटल के माध्यम से कार्डियक साइंसेज, कैंसर उपचार, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, क्रिटिकल केयर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट सहित कई उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके प्रारंभ होने से छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मुंबई या दिल्ली जैसे महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।

इस परियोजना से 500 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है, जिनमें डॉक्टर, सर्जन, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और मेडिकल टेक्नीशियन शामिल होंगे। इसके साथ ही हेल्थकेयर सप्लाई चेन, सेवाओं और सहयोगी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोजगार भी उत्पन्न होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि बॉम्बे हॉस्पिटल की स्थापना से नवा रायपुर में मेडिसिटी का सपना साकार होने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के नागरिकों को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के निरंतर विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। बॉम्बे हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का नवा रायपुर में निवेश करना राज्य की नीतिगत स्थिरता, तेज़ निर्णय क्षमता और निवेशक-अनुकूल वातावरण पर विश्वास का प्रमाण है।

यह परियोजना छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत स्वास्थ्य जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को दिए जा रहे विशेष प्रोत्साहनों और समयबद्ध क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इससे नवा रायपुर को सेंट्रल इंडिया के प्रमुख हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ चंदन कुमार, बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं चेयरमैन भरत तापड़िया, सचिव श्याम सहित ट्रस्ट एवं शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नक्सल छाया के बीच उम्मीद की फसल, धान बेचकर ट्रैक्टर तक पहुँचा किसान कोयना का सपना

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 रायपुर : बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है, जहाँ अब गोलियों की गूँज की जगह ट्रैक्टरों की आवाज़ और फूलों-फलों की महक फैल रही है, क्योंकि किसान आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं से जुड़कर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं, जिससे क्षेत्र में खुशहाली आ रही है।


बस्तर संभाग के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में अब गोलियों की गूँज नहीं, बल्कि खेतों में दौड़ते ट्रैक्टरों की आवाज़ विकास की नई इबारत लिख रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के 'नक्सल मुक्त बस्तर' (लक्ष्य: 31 मार्च 2026) के संकल्प और सुदृढ़ कृषि नीतियों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। सुकमा के ग्राम चिपुरपाल के किसान कोयना बघेल की कहानी इस बदलाव का जीवंत प्रमाण बन गई है।

48 घंटे में भुगतान: सुशासन का सीधा लाभ

छिंदगढ़ जनपद के किसान कोयना बघेल ने जैसे ही बिरसठपाल केंद्र में 50 क्विंटल धान बेचा, 3100 रुपया प्रति क्विंटल की दर से उनकी मेहनत की पूरी कमाई मात्र 48 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में पहुँच गई। बिचौलियों की समाप्ति और समयबद्ध भुगतान ने किसान को इतना सशक्त बनाया कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी से नया 'मैसी फर्गुसन' ट्रैक्टर ट्राली के साथ खरीद लिया।

हितग्राही कोयना ने कहा कि धान खरीदी व्यवस्था बहुत अच्छी

हितग्राही कोयना बघेल ने बताया कि शासन की 31 सौ रुपये में धान खरीदी व्यवस्था बहुत अच्छी है। इससे हम जैसे छोटे मध्यमवर्गीय किसानों को बहुत लाभ मिल रहा है। समर्थन मूल्य में धान खरीदी के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को दिल से धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

बहुआयामी विकास: खेती भी और स्वरोजगार भी

यह बदलाव केवल खेती तक सीमित नहीं है। ट्रैक्टर से कृषि कार्य तेज़ हुए हैं, वहीं किसान पीएम आवास निर्माण में ईंट-बालू की आपूर्ति कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे राजूराम नाग जैसे किसान आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

किसान की सफलता पर कलेक्टर का भरोसा

सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित जिले में किसान की यह सफलता मेहनत, धैर्य और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन का प्रमाण है। छत्तीसगढ सरकार किसानों को आधुनिक कृषि संसाधनों और योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है। जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि धान खरीदी केंद्रों पर किसानों को पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान और पूरी सुविधा मिले।

प्रशासनिक मुस्तैदी: कलेक्टर की सीधी निगरानी

कलेक्टर के नेतृत्व में सुकमा प्रशासन ने धान खरीदी केंद्रों को 'सुविधा केंद्रों' में बदल दिया है। जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता के कारण किसानों को टोकन से लेकर भुगतान तक कहीं भटकना नहीं पड़ रहा है। कलेक्टर के अनुसार, शासन-प्रशासन और किसानों का समन्वय ही ज़मीनी बदलाव की असली चाबी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर जैसे इलाके, जो कभी नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाने जाते थे, अब कृषि क्रांति देख रहे हैं, जहाँ कृषि विभाग की योजनाओं, जल संरक्षण और तकनीकी सहायता ने खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राडा ऑटो एक्सपो-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में हुए शामिल

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20 जनवरी से 5 फरवरी तक वाहनों की बिक्री पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट

मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटनाएं रोकने ट्रैफिक नियमों के पालन की अपील की

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के श्रीराम बिजनेस पार्क में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित राडा ऑटो एक्सपो-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर क्षेत्र में निरंतर विकास के लिए प्रयासरत है। राज्य में आम नागरिकों की परचेसिंग पावर बढ़ी है, जिसके चलते बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए लोगों से ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम के दौरान यामाहा एक्सएसआर-155, टाटा सिएरा तथा महिंद्रा 7 एक्सओ वाहनों की लॉन्चिंग की। इसके साथ ही उन्होंने “मनी मैटर्स” पुस्तक का भी विमोचन किया।

राडा ऑटो एक्सपो-2026 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विगत दो वर्षों में राज्य के किसानों को धान का उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी की दरों में किए गए सुधारों से कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर लोगों से चर्चा के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि जीएसटी दरों में कमी से बाइक की कीमत में लगभग 15 से 25 हजार रुपए तक का लाभ हो रहा है। वहीं, एक व्यक्ति ने बताया कि हार्वेस्टर की कीमत में करीब 2 लाख रुपए तक की कमी आई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसकी देश-विदेश में सराहना हो रही है। पिछले एक वर्ष में लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और कई परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी उन्हें ऑटो एक्सपो में आने का अवसर मिला था, उस समय भी सरकार द्वारा रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी गई थी, जिसका व्यापक लाभ मिला। उस दौरान 25 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लगभग 29 हजार वाहनों का विक्रय हुआ। इससे सरकार को करीब 800 करोड़ रुपए का जीएसटी तथा परिवहन विभाग को 129 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। आम नागरिकों को भी ऑटो एक्सपो का प्रत्यक्ष लाभ मिला।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष राडा ऑटो एक्सपो का आयोजन और अधिक वृहद स्तर पर किया गया है। एक्सपो का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है तथा इसमें 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। पूरे प्रदेश से उद्यमी और विभिन्न कंपनियां इसमें सहभागिता कर रही हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि पहले ही दिन लगभग 2000 वाहनों का पंजीयन हो चुका है और उन्हें विश्वास है कि इस वर्ष 50 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य भी अवश्य पूरा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑटो एक्सपो का आयोजन प्रतिवर्ष इसी तरह किया जाना चाहिए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि राडा ऑटो एक्सपो का यह नौवां संस्करण केवल वाहनों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में रोजगार सृजन और ऑटो सेक्टर की प्रगति का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रोड टैक्स में दी जा रही 50 प्रतिशत छूट से ग्राहकों के साथ-साथ प्रदेश के छोटे और मध्यम व्यवसायियों को भी लाभ मिल रहा है। राज्य में सड़कों का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे कनेक्टिविटी बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ में ऑटो सेक्टर लगातार आगे बढ़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि मंत्रिपरिषद द्वारा राजधानी रायपुर में 20 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक आयोजित 9वें ऑटो एक्सपो के दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह छूट एक्सपो में वाहन बिक्री के पश्चात पंजीकरण के समय लागू होगी, जिससे मोटरयान कर में एकमुश्त 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। इस निर्णय का लाभ पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं को मिलेगा, इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ऑटो एक्सपो में सड़क सुरक्षा शपथ पर हस्ताक्षर किए और आमजन से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने आगामी महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली नारी मैराथन के पोस्टर का भी विमोचन किया।

इस अवसर पर परिवहन सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, कैट के वाइस चेयरमैन अमर परवानी, राजकुमार सिंघानिया, रविन्द्र भसीन, विवेक गर्ग सहित बड़ी संख्या में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के सदस्यगण उपस्थित थे।

राष्ट्रीय पटल पर चमका छत्तीसगढ़, 'मॉडल यूथ ग्राम सभा' में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने हासिल किया प्रथम स्थान

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पंचायती राज मंत्रालय 28 जनवरी को छत्तीसगढ़ के युवा लीडर्स को सहभागितापूर्ण शासन में उत्कृष्टता के लिए करेगा पुरस्कृत

रायपुर- छत्तीसगढ़ के लिए बड़े गौरव के क्षण में, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS), कोसमबुड़ा ने अपनी तरह की पहली ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ (MYGS) प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता बनकर उभरने का गौरव प्राप्त किया है। पंचायती राज मंत्रालय आगामी 28 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में छत्तीसगढ़ की इस विजेता टीम को औपचारिक रूप से सम्मानित करेगा।

छत्तीसगढ़ की जनजातीय शिक्षा प्रणाली की बड़ी जीत देश भर के 800 से अधिक स्कूलों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए, ईएमआरएस कोसमबुड़ा के छात्रों ने ग्रामीण शासन की असाधारण समझ का प्रदर्शन किया। 30 अक्टूबर 2025 को जनजातीय कार्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य युवाओं को मॉक ग्राम सभा सत्रों के माध्यम से जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करना था। छत्तीसगढ़ का शीर्ष स्थान यह दर्शाता है कि राज्य ने अपनी जनजातीय आवासीय स्कूल प्रणाली के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों को कितनी मजबूती से आत्मसात किया है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ईएमआरएस कोसमबुड़ा के प्राचार्य, डॉ. कमलाकांत यादव ने कहा:"मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) पहल में हमारे विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना हर्ष का विषय है। यह सफलता हमारे विद्यार्थियों के कड़े परिश्रम और ग्रामीण विकास से जुड़ी समस्याओं के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाती है। पंचायती राज मंत्रालय और केंद्र सरकार की यह दूरदर्शी पहल छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सहभागी शासन से जोड़ने का एक प्रभावी मंच है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला है। हम आगामी 28 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले सम्मान समारोह में सहभागिता को लेकर उत्साहित हैं।"

युवा सहभागिता के लिए दूरदर्शी पहल ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ को 30 अक्टूबर 2025 को लॉन्च किया गया था। इस कार्यक्रम ने तीन महीने से भी कम समय में भारत के 800 से अधिक स्कूलों तक पहुँच बनाकर युवाओं में सहभागी शासन की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। देश भर से शॉर्टलिस्ट की गई शीर्ष 6 टीमों में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने ग्राम सभा के संचालन में अनुशासन और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान के लिए नए मानक स्थापित किए हैं। 28 जनवरी को होने वाला सम्मान समारोह लोकतंत्र के इन युवा राजदूतों की उपलब्धि का उत्सव मनाएगा, जो भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

बलौदाबाजार स्पंज आयरन फैक्ट्री हादसे पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक

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रायपुर- बलौदा बाजार जिले के बकुलाही स्थित स्पंज आयरन फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट की घटना को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक बताया है। इस दर्दनाक हादसे में 6 श्रमिकों की असमय मृत्यु हो गई, जबकि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें बेहतर एवं उच्च स्तरीय उपचार के लिए बिलासपुर रेफर किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और मजबूती से खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शोकाकुल परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न हो तथा उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, हादसे के कारणों की तथ्यपरक जांच सुनिश्चित करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

https://x.com/i/status/2014261590028390890

DRDO की नई उपलब्धि: 77वें गणतंत्र दिवस पर दिखाएगा हाई-टेक रक्षा सिस्टम

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डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) 77वें गणतंत्र दिवस पर Kartavya Path पर Parade और Bharat Parv 2026 में देश की सुरक्षा के लिए विकसित अपनी प्रमुख तकनीकों को प्रदर्शित करेगा।

DRDO द्वारा प्रदर्शित प्रमुख प्रणालियाँ हैं:

Long Range Anti-Ship Hypersonic Missile (LR-AShM)
DRDO Tableau: ‘Naval Technologies for Combat Submarines’

LR-AShM (Kartavya Path पर प्रदर्शित)

DRDO LR-AShM को लॉन्चर के साथ परेड में दिखाएगा। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल

  • स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम

  • Mach 10 से शुरू होकर औसत Mach 5 की गति

  • क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी और कई “स्किप”

  • लो-एल्टीट्यूड पर उड़ान, जिससे रडार द्वारा पहचान कठिन

  • स्वदेशी एवियोनिक्स और हाई-एक्यूरेसी सेंसर

  • दो-स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन

    • Stage 1 अलग हो जाती है

    • Stage 2 के बाद मिसाइल ग्लाइड करके लक्ष्य पर हमला करती है

DRDO Tableau (Bharat Parv, Red Fort)

DRDO का टेबलो 26 से 31 जनवरी 2026 तक Bharat Parv में प्रदर्शित होगा।

थीम:“Naval Technologies for Combat Submarines”

प्रदर्शित सिस्टम:

  1. Integrated Combat Suite (ICS)

  2. Wire Guided Heavy Weight Torpedo (WGHWT)

  3. Air Independent Propulsion (AIP)

Integrated Combat Suite (ICS)

  • नई पीढ़ी का सबमरीन-आधारित रक्षा प्रणाली

  • सिचुएशनल अवेयरनेस और युद्ध-तैयारी में मदद

  • 8 DRDO प्रयोगशालाओं एवं 150+ इंडस्ट्री पार्टनर्स का सहयोग

Wire Guided Heavy Weight Torpedo (WGHWT)

  • आधुनिक जहाज और सबमरीन खतरों को रोकने हेतु

  • उच्च गति और अधिक दूरी की क्षमता

  • भारतीय नौसेना के लिए मुख्य हथियार

Air Independent Propulsion (AIP)

  • सबमरीन को लंबे समय तक पानी के भीतर रहकर चलने की क्षमता

  • फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल और ऑनबोर्ड हाइड्रोजन जनरेटर

  • शांत और स्टील्थ संचालन

  • भविष्य की सबमरीन के लिए मॉड्यूलर डिज़ाइन

परेड में अन्य DRDO प्रणालियाँ

Kartavya Path पर Armed Forces contingents में DRDO के और भी कई सिस्टम प्रदर्शित होंगे, जैसे:

  • Arjun Main Battle Tank

  • Nag Missile System (NAMIS-II)

  • Advanced Towed Artillery Gun System

  • BrahMos Missile

  • Akash

  • Battlefield Surveillance Radar

  • Anti Tank Guided Missile

Aatmanirbhar Bharat की दिशा में DRDO का योगदान

DRDO ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए अकादमिक, उद्योग और सेवा संस्थाओं के साथ मिलकर कई उन्नत रक्षा प्रणालियाँ विकसित की हैं।
यह कदम रक्षा तकनीक में स्वदेशी विकास और Aatmanirbhar Bharat के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता है।


भारत में रंगमंच का महाकुंभ: NSD आयोजित करेगा 25वां भारत रंग महोत्सव 2026 (27 जनवरी–20 फरवरी)

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नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) द्वारा आयोजित किया जाने वाला भारत रंग महोत्सव (BRM) 2026 27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह विश्व का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव है और इस बार यह अपनी सबसे व्यापक और समावेशी प्रस्तुति के साथ सामने आ रहा है।

इस बार महोत्सव देशभर में 40 स्थानों पर आयोजित होगा और सातों महाद्वीपों से कम से कम एक-एक अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुति शामिल होगी, जिससे इसका वैश्विक प्रभाव और भी बढ़ जाएगा।

प्रमुख आकर्षण

  • 277 भारतीय प्रस्तुतियाँ (136 चयनित और आमंत्रित नाट्य प्रस्तुतियाँ)

  • 12 अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ

  • 228 भारतीय और विदेशी भाषाओं/उपभाषाओं में प्रदर्शन

  • 817 राष्ट्रीय और 34 अंतरराष्ट्रीय आवेदन में से चयनित

  • 19 विश्वविद्यालयों और 14 स्थानीय प्रस्तुतियों का समावेश

भाषाई और सांस्कृतिक विविधता

इस संस्करण में भाषा और संस्कृति का विस्तार कर मैथिली, भोजपुरी, तुलु, उर्दू, संस्कृत, ताई खामती, न्युशी सहित कई भाषाओं और जनजातीय/लुप्तप्राय भाषाओं को मंच मिलेगा।

नए केंद्र और पहुंच

पहली बार नए केंद्रों में शामिल हैं:लद्दाख, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव, आइजॉल (मिज़ोरम), तुरा (मेघालय), नागांव (असम), मंडी (हिमाचल प्रदेश) और रोहतक (हरियाणा)

समावेशिता और समाज

इस महोत्सव में पहली बार ट्रांसजेंडर समुदाय, सेक्स वर्कर्स, वरिष्ठ नागरिक और अन्य अल्पप्रतिनिधित समूहों की प्रस्तुतियाँ भी शामिल होंगी।

विविध कार्यक्रम

  • आदिरंग महोत्सव (जनजातीय रंगमंच, नृत्य, शिल्प)

  • जश्ने बचपन (बाल रंगमंच)

  • बाल संगम (बच्चों द्वारा लोक नृत्य और नाटक)

  • पूर्वोत्तर नाट्य समारोह

  • कठपुतली, नृत्य नाटक, संस्कृत नाट्य महोत्सव

  • माइक्रो ड्रामा फेस्टिवल

साहित्य और संगोष्ठी

  • 17 किताबें लॉन्च होंगी (श्रुति पहल के तहत)

  • थिएटर बाजार में नए नाटकों को बढ़ावा

  • 33 प्रस्तुतियाँ महिला निर्देशकों द्वारा निर्देशित

सम्मान और श्रद्धांजलि

महोत्सव में भगवान बिरसा मुंडा, लोक माता अहिल्या बाई, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। साथ ही रतन थियाम, दया प्रकाश सिन्हा, बंसी कौल, अलोक चटर्जी जैसे रंगमंच दिग्गजों को भी सम्मानित किया जाएगा।

भारत में भूजल प्रबंधन में नई क्रांति: सतत जल सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें तेज़ी से आगे बढ़ीं

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भारत में भूजल (Groundwater) प्रबंधन के क्षेत्र में कई प्रमुख पहलों ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। देश में भूजल की सतत उपलब्धता और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई वैज्ञानिक, नीतिगत और समुदाय-आधारित कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

भूजल भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश की कृषि, पीने के पानी और उद्योगों की मुख्य आधारशिला है। भारत में लगभग 62% सिंचाई, 85% ग्रामीण जल और 50% शहरी जल की मांग भूजल से पूरी होती है। बढ़ती जनसंख्या, कृषि विस्तार, औद्योगिक विकास और शहरीकरण के कारण भूजल पर दबाव बढ़ा है। अतः भूजल के संरक्षण और संतुलित उपयोग के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन अनिवार्य हो गया है।

मुख्य तथ्य (Key Takeaways):

  • भारत में 43,228 भूजल स्तर निगरानी स्टेशन, 712 जल शक्ति केंद्र, और 53,264 जल गुणवत्ता निगरानी स्टेशन कार्यरत हैं।

  • जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR), जल संचय जन भागीदारी (JSJB), अटल भूजल योजना, और मिशन अमृत सरोवर जैसी योजनाओं ने भूजल प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई है।

  • भूजल प्रबंधन सतत विकास लक्ष्यों (SDG 6, SDG 11, SDG 12) की दिशा में अहम भूमिका निभाता है।

सरकारी पहलें और उनकी प्रगति:

1. मॉडल ग्राउंडवाटर बिल (Model Groundwater Bill):

केंद्र सरकार ने भूजल संरक्षण, नियंत्रण और प्रबंधन हेतु मॉडल बिल तैयार किया है, जिसे 21 राज्य/संघ शासित प्रदेशों ने अपनाया है। इस बिल के माध्यम से राज्य स्तर पर भूजल की अंधाधुंध निकासी पर नियंत्रण और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

2. जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR):

यह अभियान 22 मार्च 2021 को World Water Day के अवसर पर शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पानी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल निकायों की पहचान एवं जीओ-टैगिंग, और जागरूकता बढ़ाना है।

3. जल संचय जन भागीदारी (JSJB):

यह पहल 6 सितंबर 2024 को शुरू हुई और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देती है।
22 जनवरी 2026 तक कुल 39,60,333 कृत्रिम भूजल पुनर्भरण और जल संचयन कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

4. राष्ट्रीय एक्विफर मैपिंग और प्रबंधन कार्यक्रम (NAQUIM 2.0):

यह कार्यक्रम उच्च-स्तरीय डेटा और वैज्ञानिक inputs प्रदान करता है। इसका लक्ष्य पंचायत स्तर तक जल-स्तर और गुणवत्ता की जानकारी पहुंचाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।

5. अटल भूजल योजना (Atal Jal):

7 राज्यों में सामुदायिक नेतृत्व वाली भूजल प्रबंधन पहल के तहत जल उपयोग में दक्षता और डिजिटल निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं।
20 जनवरी 2026 तक 6,68,683 हेक्टेयर क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता बढ़ी है और 6,271 डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर स्थापित किए गए हैं।

6. मिशन अमृत सरोवर:

24 अप्रैल 2022 को शुरू इस मिशन के तहत प्रत्येक जिले में कम से कम 1 एकड़ के अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। यह न केवल जल संरक्षण बढ़ाता है बल्कि भूजल स्तर में सुधार भी करता है।

निष्कर्ष:

भूजल भारत की जल सुरक्षा का मुख्य आधार है, लेकिन इसकी स्थिति में लगातार गिरावट और गुणवत्ता में गिरावट चिंता का विषय है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने वैज्ञानिक, नीतिगत और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित एक समग्र रणनीति अपनाई है।
मॉडल बिल, JSA: CTR, JSJB, NAQUIM 2.0, अटल भूजल योजना और मिशन अमृत सरोवर जैसी पहलें भूजल संरक्षण, पुनर्भरण, निगरानी और समुचित उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं।
इन प्रयासों से भारत जल-संरक्षण, जल-प्रबंधन और सतत विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV के तहत 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी, ग्रामीण कनेक्टिविटी में नया मील का पत्थर

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV (PMGSY-IV) के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम सहित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह कदम ग्रामीण विकास विभाग की विकसित भारत की दिशा में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


कनेक्टिविटी से ग्रामीण विकास को नई दिशा

इन सड़कों का निर्माण केवल बुनियादी ढांचा नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम है। इन परियोजनाओं से लगभग 3,270 पहले असंयोजित बस्तियों को पहली बार कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुँच आसान होगी और ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

PMGSY-IV: लक्ष्य और दायरा

PMGSY-IV के तहत कुल 25,000 असंयोजित बस्तियों को कनेक्ट करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • मैदानी इलाकों में 500+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

  • उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों/UTs में 250+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

  • विशेष श्रेणी क्षेत्र (जनजातीय क्षेत्र, आकांक्षी जिले/ब्लॉक, रेगिस्तानी क्षेत्र)

  • LWE प्रभावित जिलों में 100+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

योजना की विशेषताएँ

  • 62,500 किलोमीटर की ऑल-वेदर सड़कें बनाई जाएंगी

  • सड़क मार्गों के साथ आवश्यक पुलों का निर्माण भी सुनिश्चित किया जाएगा

वित्तीय एवं कार्यान्वयन ढांचा

केंद्र सरकार ने 11 सितंबर 2024 को PMGSY-IV की कार्यावधि (FY 2024-25 से 2028-29) को मंजूरी दी थी।

  • कुल अनुमानित लागत: ₹70,125 करोड़

  • केंद्र की हिस्सेदारी: ₹49,087.50 करोड़

  • राज्य की हिस्सेदारी: ₹21,037.50 करोड़


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