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मुख्यधारा की ओर लौटता विश्वास: दक्षिण बस्तर में 51 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ का इनाम घोषित था।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हथियारों का परित्याग कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि सुरक्षा, सुशासन और समावेशी प्रगति ही किसी भी क्षेत्र के दीर्घकालिक भविष्य की सुदृढ़ नींव होते हैं। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक और ठोस परिणाम है। बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इस विकासात्मक पहल ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, माननीय अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर एक विकसित, शांत और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान स्थापित करेगा।

प्रेस क्लब में राजेश शर्मा को भावभीनी शब्दांजलि और स्वरांजलि

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 महासमुंद । प्रेस क्लब महासमुंद में वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब के भूतपूर्व अध्यक्ष राजेश शर्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। यह आयोजन भावुक करने वाला और ऐतिहासिक रहा। प्रेस क्लब में पहली बार शब्दांजलि के साथ स्वरांजलि भी गूंजी। अंत में दो मिनट का मौन रखकर शोक सभा संपन्न हुई। उल्लेखनीय है कि राजेश शर्मा (82) का 6 फरवरी की सुबह एम्स रायपुर में निधन हो गया। मुक्तिधाम महासमुंद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। 7 फरवरी को प्रेस क्लब में शोक सभा आयोजित हुई।


प्रेस क्लब अध्यक्ष रत्नेश सोनी ने शब्दांजलि की शुरुआत की। उन्होंने श्री शर्मा से अपने आत्मीय संबंधों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि कुछ नीतिगत मामलों में मतभेद के बावजूद उनका स्वभाव स्नेहिल था। वे रिश्तों को जीवन भर निभाते रहे। उनका जाना अपूरणीय क्षति है। वे पत्रकारिता के वटवृक्ष थे। उनकी कलम में सरस्वती का वास था। वे विचारों में हमेशा जीवित रहेंगे।



भूतपूर्व अध्यक्ष आनंदराम पत्रकारश्री ने कहा कि कर्मयोगी कलमकार से बिछुड़ना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने श्री शर्मा की अंतिम पंक्तियां याद कीं—
“कौन कहता है कि जाऊंगा, तो गुजर जाऊंगा।
मैं तो खुशबू हूं, हवाओं में बिखर जाऊंगा।”
उन्होंने कहा कि उनकी जीवटता और कर्मठता हम सबके लिए प्रेरणा है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग के लिए लिखा।
उनके दिखाए जनसेवा के मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने ‘राष्ट्रीय अभियोजक’ को मिलकर आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

भूतपूर्व अध्यक्ष बाबूलाल साहू ने संघर्ष के दिनों को याद किया।
उन्होंने कहा कि कोरियर सेवा से लेकर किराए के एक कमरे में पत्रकारिता की 21 वर्षों की यात्रा अद्भुत है। यह उनकी कलम साधना और समर्पण का प्रमाण है। कोविड काल में भी अखबार निर्बाध निकला। बीमारी में भी उन्होंने संपादन किया। अस्पताल में भर्ती होने तक वे अखबार निकालते रहे।

पूर्व अध्यक्ष श्रीमती उत्तरा विदानी ने भावुक शब्दों में श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राजेश काका ने उन्हें सबसे बड़ी बेटी जैसा स्नेह दिया। उनके जाने से पिता का साया उठने का अहसास हो रहा है। वे पढ़ने के शौकीन थे। उनकी एक पुस्तक उन्होंने धरोहर के रूप में सहेज कर रखी है। प्रेस क्लब के भूतपूर्व अध्यक्ष व संरक्षक सदस्य श्रीरामकुमार तिवारी ‘सुमन’ ने कहा कि 26 वर्षों का साथ अविस्मरणीय है।
उन्होंने एक सच्चा मित्र खो दिया है। उनकी पत्रकारिता और प्रेस क्लब को लेकर चिंताएं हमेशा याद आएंगी। मन कहता है कि वे आज भी हमारे आसपास हैं।

वरिष्ठ पत्रकार के. पी. साहू ने कहा कि उनका मार्गदर्शन अमूल्य था। हर खबर पर उनकी पैनी नजर काबिले तारीफ थी।
किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि वे इस बार मौत से जंग हार गए।

विक्रम साहू, राकेश झाबक, विजय चौहान, अनिल चौधरी, संजय यादव, प्रज्ञा चौहान सहित अनेक पत्रकारों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
युवा पत्रकार व कलाकार अमित हिषीकर ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया—
“चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…” गा कर स्वरांजलि दी। इससे पूरा सभागार भाव-विभोर हो उठा।
इस तरह शब्दांजलि, स्वरांजलि और दो मिनट के मौन के साथ शोक सभा संपन्न हुई।

डंके की चोट पर बोले पीयूष गोयल - किसानों, MSME और देसी उद्योगों के हित पूरी तरह सुरक्षित

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 नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील की रूपरेखा को लेकर जारी संयुक्त बयान के बाद देश में उठ रही आशंकाओं पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि यह समझौता पूरी तरह भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया गया है और इसमें किसानों, MSME, हैंडीक्राफ्ट व हैंडलूम सेक्टर के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है।


पीयूष गोयल ने कहा,

“डंके की चोट पर मैं कह सकता हूं कि इस ट्रेड डील में भारत के किसानों, डेयरी सेक्टर, MSME और देसी उद्योगों के हितों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है। GM फूड, मीट और डेयरी उत्पादों पर किसी भी तरह की रियायत नहीं दी गई है।”

भारत को अमेरिका में बेहतर मार्केट एक्सेस

ट्रेड डील की रूपरेखा के बाद देश में जताई जा रही चिंताओं के बीच गोयल ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अमेरिका में कम टैरिफ पर बेहतर मार्केट एक्सेस मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए भारत का बाजार केवल कुछ सीमित उत्पादों के लिए ही खोला गया है।

कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित

केंद्रीय मंत्री ने कहा,
“जिस तरह से हमारे किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों की रक्षा की गई है, वह सराहनीय है। भारत-अमेरिका के बीच देर रात फाइनल हुआ साझा बयान देश के हर कोने में सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।”

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एक हैंडीक्राफ्ट कारीगर ने टैरिफ घटने से मिलने वाले फायदों को लेकर उम्मीद जताई है। कारीगर के अनुसार, 18 प्रतिशत टैरिफ होने से नए ऑर्डर मिलेंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

18% टैरिफ, कई उत्पादों पर 0 ड्यूटी

गोयल ने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाया गया 50 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह दर भारत के पड़ोसी देशों और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि कई अहम सेक्टर ऐसे हैं, जहां अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर 0 प्रतिशत ड्यूटी जारी रहेगी, जिनमें शामिल हैं—

  • रत्न और हीरे
  • फार्मास्युटिकल उत्पाद
  • स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स

कृषि उत्पादों को भी बड़ी राहत

कृषि क्षेत्र में भी कई भारतीय उत्पाद अमेरिका में 0 रेसिप्रोकल टैरिफ के साथ निर्यात किए जाएंगे। इनमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल व नारियल तेल, वेजिटेबल वैक्स, सुपारी, काजू, चेस्टनट, ब्राजील नट के साथ कई फल और सब्जियां शामिल हैं।

2047 के विकसित भारत की दिशा में अहम कदम

पीयूष गोयल ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह ट्रेड डील बेहद अहम है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को सालाना 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने के उद्देश्य से फरवरी 2024 में बातचीत शुरू हुई थी।

उन्होंने कहा,
“टेक्सटाइल और ऐपेरल सेक्टर में भारत को बड़ा फायदा होगा। यह समझौता संतुलित है और दोनों देशों के नेताओं की दूरदृष्टि को दर्शाता है।”

ट्रेड डील की प्रमुख बातें

  • अमेरिका भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करेगा
  • भारत कुछ अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाएगा या समाप्त करेगा
  • अगले 5 वर्षों में भारत 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा, विमान, तकनीक और कोकिंग कोल खरीदने का इरादा रखता है
  • रूसी तेल खरीद पर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क हटाया गया

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगा और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ भारत के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।

राष्ट्रपति के समक्ष बास्तानार के युवाओं ने ‘गौर नृत्य’ से बिखेरे अद्भुत लोक-रंग

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 रायपुर : शनिवार का दिन बस्तर के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब संभाग स्तरीय ‘बस्तर पण्डुम’ के शुभारंभ अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की आदिम संस्कृति का सजीव और जीवंत स्वरूप प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस गरिमामयी अवसर पर बास्तानार क्षेत्र के आदिवासी युवाओं द्वारा प्रस्तुत विश्व-प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ ने पूरे परिसर को ढोल की थाप और घुंघरुओं की झनकार से गुंजायमान कर दिया। राष्ट्रपति ने इस मनोहारी प्रस्तुति का तन्मयता से अवलोकन करते हुए बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से महसूस किया।


बास्तानार के युवाओं द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि ‘दंडामी माड़िया’ (बाइसन हॉर्न माड़िया) जनजाति की परंपराओं, जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत दस्तावेज था। जैसे ही नर्तक दल मंच पर उतरा, उनकी विशिष्ट वेशभूषा ने उपस्थित जनसमूह का ध्यान सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लिया। पुरुष नर्तकों के सिर पर सजे गौर के सींगों वाले मुकुट, जिन्हें कौड़ियों और मोरपंखों से अलंकृत किया गया था, बस्तर की वन्य संस्कृति तथा गौर पशु के प्रति आदिवासी समाज के गहरे सम्मान और श्रद्धा को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त कर रहे थे। वहीं पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों से सुसज्जित महिला नर्तकियों ने जब अपने हाथों में थमी ‘तिरूडुडी’ (लोहे की छड़ी) को भूमि पर पटकते हुए ताल दी, तो एक अद्भुत, गूंजती और लयबद्ध ध्वनि ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।


नृत्य के दौरान पुरुष नर्तकों ने गले में टंगे भारी ‘मांदरी’ (ढोल) को बजाते हुए जंगली भैंसे की आक्रामक, चंचल और ऊर्जावान मुद्राओं की प्रभावशाली नकल प्रस्तुत की। यह दृश्य दर्शकों को ऐसा अनुभव करा रहा था, मानो वे जंगल के सजीव और प्राकृतिक परिवेश के प्रत्यक्ष साक्षी बन गए हों। उल्लास और आनंद से परिपूर्ण इस नृत्य में माड़िया जनजाति की शिकार-परंपरा, साहस और अदम्य ऊर्जा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती रही। गोलाकार घेरे में थिरकते युवक और उनके कदम से कदम मिलाती युवतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी बस्तर ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पूरी निष्ठा और गर्व के साथ संजोकर रखा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में बास्तानार के कलाकारों द्वारा दी गई यह सशक्त और भावपूर्ण प्रस्तुति न केवल बस्तर पण्डुम की भव्य सफलता का प्रतीक बनी, बल्कि इसने बस्तर की लोक-कला, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव को राष्ट्रीय पटल पर पुनः प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया।

नक्सलियों की रीढ़ टूटी! गरियाबंद के पहाड़ों से हथियारों का जखीरा बरामद

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 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। थाना मैनपुर क्षेत्र के अंतर्गत ओडिशा सीमा से सटे ग्राम भालूडिग्गी और मेटाल की दुर्गम पहाड़ियों में छिपाकर रखे गए नक्सलियों के भारी हथियारों और विस्फोटक सामग्री का जखीरा संयुक्त पुलिस बल ने बरामद किया है।


यह कार्रवाई जिला पुलिस बल गरियाबंद की ई-30 ऑप्स टीम द्वारा की गई, जिसमें डीजीएन डिवीजन के माओवादियों द्वारा अलग-अलग 06 स्थानों पर डम्प किए गए हथियार बरामद किए गए।

 बरामद सामग्री में शामिल

  • 02 नग INSAS रायफल
  • 01 नग .303 रायफल
  • 02 नग 12 बोर बंदूक
  • 01 देशी कट्टा
  • भारी मात्रा में BGL सेल

हथियार निर्माण में उपयोग होने वाले औजार और उपकरण

गुप्त हथियार वर्कशॉप से संबंधित सामग्री

 मारे गए शीर्ष नक्सलियों से जुड़ा था नेटवर्क

पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि यह पूरा हथियार निर्माण और भंडारण नेटवर्क ओडिशा स्टेट कमेटी के अंतर्गत संचालित हो रहा था।
इस वर्कशॉप की निगरानी मारे जा चुके तीन सेंट्रल कमेटी सदस्यों—चलपति, मनोज और गणेश उईके द्वारा की जाती थी। ये सभी नक्सली संगठन के तकनीकी दस्ते को निर्देश देते थे।

 नक्सल हिंसा की साजिश नाकाम

संयुक्त पुलिस बल की इस कार्रवाई से गरियाबंद क्षेत्र में बड़ी नक्सल हिंसा की साजिश पूरी तरह विफल हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन हथियारों का उपयोग आगामी दिनों में बड़ी वारदातों के लिए किया जाना था।

 आंकड़ों में पुलिस की बड़ी सफलता

जनवरी 2025 से अब तक

  • 28 ग्रेडेड ऑटोमैटिक हथियार
  • 29 अन्य हथियार
  • कुल 57 हथियार
  • लगभग 300 कारतूस
  • भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री

बरामद की जा चुकी है।

 नक्सल प्रभाव क्षेत्र सिमटता जा रहा

लगातार हो रही सटीक और खुफिया-आधारित कार्रवाइयों से साफ है कि गरियाबंद और सीमावर्ती इलाकों में नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ चुका है। सुरक्षा बलों की इस सफलता को नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है।

रेरा प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में छत्तीसगढ़ रेरा का महत्वपूर्ण कदम, 14 बैंकों को फाइनल एम्पैनलमेंट किया गया

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन तथा रियल एस्टेट अधिनियम, 2016 के प्रभावी अनुपालन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 14 बैंकों को अंतिम पैनल (फाइनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया है।


रेरा अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ रेरा द्वारा 03 अप्रैल 2025 को 17 बैंकों को अस्थायी पैनल (प्रोविजनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया गया था। निर्धारित प्रक्रियाओं, आवश्यक शर्तों एवं मापदंडों की पूर्ति के उपरांत अब इनमें से 14 बैंकों को अंतिम पैनल में सम्मिलित किया गया है।

अंतिम पैनल में शामिल बैंकों में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, केनरा बैंक, डीसीबी बैंक, फेडरल बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, कर्नाटक बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एवं सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा यूको बैंक शामिल हैं।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रेरा अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं से संबंधित पृथक रेरा खाते केवल उन्हीं बैंकों में संचालित किए जाएं, जो रेरा नियमों एवं दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करते हों। इससे परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन स्थापित होगा, निधियों के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा घर खरीदारों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

इस संबंध में छत्तीसगढ़ रेरा के अध्यक्ष संजय शुक्ला ने कहा कि रेरा के अंतर्गत पंजीकृत परियोजनाओं में वित्तीय अनुशासन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बैंकों के अंतिम पैनल में शामिल होने से परियोजना खातों की निगरानी एवं नियंत्रण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, जिससे घर खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा और राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र अधिक व्यवस्थित एवं विश्वसनीय बनेगा।

छत्तीसगढ़ रेरा ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र को पारदर्शी, व्यवस्थित एवं भरोसेमंद बनाने के लिए इस प्रकार की पहलें भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगी।

राहुल गांधी पर नवजोत कौर सिद्धू का विस्फोट- ‘पप्पू’ का ठप्पा उन्होंने खुद लगवाया!

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 नई दिल्ली/चंडीगढ़। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपनी ही पार्टी के भीतर तीखे हमले के घेरे में आ गए हैं। पंजाब की पूर्व विधायक और सामाजिक कार्यकर्ता नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए राहुल गांधी पर तीखा और व्यक्तिगत हमला बोला है। सिद्धू ने साफ शब्दों में कहा कि राहुल गांधी को मिला ‘पप्पू’ का ठप्पा किसी विरोधी ने नहीं, बल्कि उन्होंने खुद अपनी कार्यशैली से लगवाया है।


नवजोत कौर सिद्धू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज सुनने को तैयार नहीं हैं और पार्टी के भीतर वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने का उनके पास न समय है, न इच्छाशक्ति। उन्होंने लिखा कि एक ऐसा नेता, जो खुद को सबसे ईमानदार और सर्वज्ञ समझता है, वह जमीनी सच्चाइयों से पूरी तरह अनजान है।

सिद्धू ने अपने पोस्ट में कहा,

“आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने में उन्हें छह महीने लग जाते हैं—तब तक नुकसान हो चुका होता है। टिकट पहले ही बिक जाते हैं और फैसले बहुत देर से आते हैं।”

उन्होंने राहुल गांधी के करीबी नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके आसपास ऐसे लोग हैं जो सत्ता और सुविधाओं का आनंद लेते हुए पार्टी को भीतर से खोखला कर रहे हैं। सिद्धू ने दावा किया कि राहुल गांधी के कई तथाकथित समर्थक अब भाजपा कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

‘अपने बनाए स्वर्ग में रहते हैं राहुल’

नवजोत कौर सिद्धू ने बेहद तीखे शब्दों में लिखा कि राहुल गांधी अपने बनाए एक काल्पनिक “स्वर्ग” में रहना पसंद करते हैं, जहां जमीनी संघर्ष और आम कार्यकर्ता की पीड़ा की कोई जगह नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे नेता को पंजाब जैसे राज्य की जमीनी राजनीति की समझ हो सकती है?

भाजपा का जिक्र, कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल

अपने बयान में सिद्धू ने यह भी कहा कि भाजपा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और 2012 में सर्वे के आधार पर उन्हें विधायक का टिकट दिया। डॉक्टर होने के नाते उन्हें जिम्मेदारी और स्वतंत्रता मिली, जबकि कांग्रेस में ईमानदारी और मेहनत करने वालों को लगातार नजरअंदाज किया जाता है।

उन्होंने कहा,

“ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की बात करने का कोई मतलब नहीं, जब पार्टी में भ्रष्ट नेताओं को सम्मानित किया जाता हो।”

‘मेरा समय सिर्फ पंजाब के लिए’

नवजोत कौर सिद्धू ने साफ कर दिया कि उनका समय और ऊर्जा केवल पंजाब की जनता के लिए है। उन्होंने कहा कि वे राजनीति से बाहर रहकर भी सामाजिक कार्य और जनसेवा कर सकती हैं, लेकिन ऐसे नेतृत्व के साथ नहीं चल सकतीं जो सच सुनने का साहस न रखता हो।

कांग्रेस में बढ़ता अंतर्विरोध

नवजोत कौर सिद्धू का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस पहले से ही नेतृत्व संकट और आंतरिक असंतोष से जूझ रही है। उनके इस हमले ने पार्टी के भीतर की खाई को और गहरा कर दिया है और एक बार फिर राहुल गांधी की नेतृत्व शैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

बस्तर पंडुम 2026 का भव्य आगाज़, राष्ट्रपति बोलीं- छत्तीसगढ़ मेरा अपना घर

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 रायपुर/जगदलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज जगदलपुर के लाल बाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम 2026 का भव्य शुभारंभ किया। राष्ट्रपति सुबह करीब साढ़े 10 बजे जगदलपुर पहुंचीं और बस्तर अंचल के इस महापर्व का उद्घाटन किया।


जनजातीय कला, संस्कृति और परंपरा को समर्पित इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें अपने घर आने जैसा महसूस होता है। उन्होंने बस्तर और छत्तीसगढ़ की संस्कृति, वीरता और प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश की सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य हिस्सा है।


‘बस्तर पंडुम केवल आयोजन नहीं, एक जीवंत उत्सव’

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि छत्तीसगढ़ वीरों की धरती है, जहां के लोगों ने देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।
उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति प्राचीन होने के साथ-साथ अत्यंत मधुर और समृद्ध है।

राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम को सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की जीवंत संस्कृति और परंपराओं का उत्सव बताते हुए कहा कि यह महोत्सव जनजातीय समाज की पहचान और गौरव का प्रतीक है।

नक्सलवाद पर बोलीं राष्ट्रपति—बस्तर तेजी से बदल रहा है

राष्ट्रपति ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद के कारण आदिवासी समाज को भारी नुकसान झेलना पड़ा, लेकिन अब बस्तर नक्सलमुक्त होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, जो सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
आज बस्तर के गांव-गांव तक स्कूल, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं और विकास की नई तस्वीर उभर रही है।

जनसेवा करने वालों को दी बधाई

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए चिकित्सक दंपती, डॉ. बुधरी ताती समेत जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई दी और उनके कार्यों की प्रशंसा की।

प्रदर्शनी स्टॉलों का किया निरीक्षण

राष्ट्रपति मुर्मू ने जगदलपुर पहुंचने के बाद महोत्सव स्थल पर लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का निरीक्षण भी किया। यहां बस्तर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला, जनजातीय वेशभूषा, लोक संगीत, नृत्य और स्थानीय उत्पादों की आकर्षक झलक देखने को मिली।

आदिवासी संस्कृति की पहचान है बस्तर पंडुम

बस्तर पंडुम आदिवासी समाज की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करने वाला महोत्सव है। इसमें लोक कला, पारंपरिक खान-पान, गीत-संगीत और नृत्य का समावेश होता है।
यह आयोजन पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जनजातीय विरासत को संरक्षित रखने का एक प्रभावी माध्यम माना जा रहा है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया जा रहा है।

तीन स्तरों पर हो रहा आयोजन

इस वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन तीन चरणों में किया जा रहा है—

  • ग्राम पंचायत स्तर
  • जिला स्तर
  • संभाग/राज्य स्तर

कार्यक्रम में 12 पारंपरिक विधाओं की प्रस्तुतियां शामिल हैं, जिनमें लोक नृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनें और जनजातीय संस्कृति की विविध झलकियां देखने को मिल रही हैं।

अमेरिका ने बदल दी लाइनें: US ट्रेड डील में INDIA का पूरा नक्शा जारी

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 India-US Trade Deal: नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच शनिवार को हुए अंतरिम व्यापार समझौते से ज्यादा चर्चा इस बार उसके साथ जारी किए गए भारत के आधिकारिक नक्शे को लेकर हो रही है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी इस नक्शे ने न केवल सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है, बल्कि कूटनीतिक हलकों में भी बड़े संकेत दे दिए हैं।


अमेरिका के यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) कार्यालय की ओर से जारी दस्तावेज़ों में भारत का जो नक्शा प्रकाशित किया गया है, उसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

नक्शे में क्या है खास

आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय मंचों और पश्चिमी देशों के सरकारी नक्शों में जम्मू-कश्मीर के विवादित हिस्सों को अलग रंग या डॉटेड लाइन से दिखाया जाता रहा है।
लेकिन इस बार जारी नक्शा इस परंपरा से बिल्कुल अलग नजर आया।

▪ संपूर्ण जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा
नक्शे में पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग दर्शाया गया है। इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भी भारतीय सीमा के भीतर दिखाया गया है।

▪ अक्साई चिन भी भारत में शामिल
सबसे अहम बात यह है कि इस नक्शे में अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दर्शाया गया है, जिस पर वर्तमान में चीन का नियंत्रण है और जिसे वह अपना क्षेत्र बताता रहा है।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

जैसे ही ट्रेड डील से जुड़े दस्तावेज़ों के साथ यह नक्शा सामने आया, यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
भारतीय यूज़र्स इसे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर देख रहे हैं।

कई लोगों का कहना है कि यह अमेरिका की ओर से भारत की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक समझौते के दौरान इस तरह का नक्शा जारी होना किसी तकनीकी भूल की बजाय एक सोची-समझी रणनीतिक पहल हो सकती है।

इस कदम के क्या मायने हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका का यह कदम कई स्तरों पर अहम माना जा रहा है—

यह संकेत देता है कि रक्षा के बाद अब व्यापार और राजनीति में भी अमेरिका भारत के रुख के करीब आता दिख रहा है

अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाकर अमेरिका ने चीन को स्पष्ट संदेश दिया है

PoK को भारतीय सीमा में दर्शाना पाकिस्तान के उस नैरेटिव को कमजोर करता है, जिसे वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है

कुल मिलाकर, यह नक्शा भारत-अमेरिका संबंधों में रणनीतिक गहराई और क्षेत्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों की ओर इशारा करता है।

Durg गैंगरेप केस अपडेट: यूपी में छिपा था आरोपी, पुलिस ने दबोचा

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 दुर्ग में सामने आए सामूहिक दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले के मुख्य आरोपी को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे जांच को निर्णायक दिशा मिलने की उम्मीद है।


पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजू कश्यप उर्फ कृपा शंकर के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का निवासी है। पीडब्ल्यूडी में नौकरी लगने के बाद वह अपने परिवार के साथ दुर्ग में रह रहा था।

मामला दर्ज होने के बाद आरोपी पुलिस से बचने के लिए गोरखपुर में रिश्तेदारों के यहां छिप गया था। सूचना मिलते ही दुर्ग पुलिस ने कार्रवाई तेज की और आरोपी की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गईं।

पुलिस ने सीडीआर, मोबाइल टॉवर लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए आरोपी की लगातार ट्रैकिंग की। जैसे ही मोबाइल लोकेशन उत्तर प्रदेश में कन्फर्म हुई, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

फिलहाल पुलिस टीम आरोपी को उत्तर प्रदेश से दुर्ग लाने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। आरोपी से पूछताछ के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में दो अन्य आरोपी—बी.एन. पांडेय और संजय पंडित—अब भी फरार हैं। पुलिस लगातार उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और तलाश तेज कर दी गई है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2018 में पीड़िता अपनी मां के साथ रोजगार की तलाश में बिलासपुर से दुर्ग पहुंची थी। रिश्तेदारों के माध्यम से उनकी मुलाकात गोविंद सिंह ठाकुर से हुई, जिसने उन्हें सिविल लाइन क्षेत्र स्थित PWD क्वार्टर में ठहराया।

पीड़िता की मां को झाड़ू-पोंछा का काम मिला। इसी दौरान नाबालिग पीड़िता के साथ लगातार दुष्कर्म किया गया। आरोपियों ने उसके फोटो और वीडियो बना लिए और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक शोषण किया।

सरकारी क्वार्टर, दफ्तर और अन्य निजी स्थानों पर पीड़िता के साथ अत्याचार जारी रहा। साल 2025 में, जब पीड़िता की शादी तय हुई, तो उसकी शादी तुड़वाने की साजिश भी रची गई। पीड़िता के शरीर पर दांत से काटने के निशान तक पाए गए।

आखिरकार पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर अपनी मां को पूरी आपबीती बताई, जिसके बाद महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति का प्रधानमंत्री मोदी ने किया स्वागत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) की रूपरेखा पर सहमति का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के लिए बड़ी और सकारात्मक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत–अमेरिका संबंधों की बढ़ती मजबूती, आपसी विश्वास और गतिशील साझेदारी को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह रूपरेखा भारत–अमेरिका साझेदारी की गहराई और व्यापकता को प्रतिबिंबित करती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और मजबूती प्रदान करेगा तथा किसानों, उद्यमियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्ट-अप नवोन्मेषकों और मछुआरों के लिए नए अवसर खोलेगा। साथ ही, इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यह रूपरेखा निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी को गहरा करेगी, विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं को सशक्त बनाएगी तथा वैश्विक आर्थिक विकास में योगदान देगी।

विकसित भारत के निर्माण के भारत के संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भविष्य-उन्मुख वैश्विक साझेदारियों के लिए प्रतिबद्ध है, जो लोगों को सशक्त बनाएं और साझा समृद्धि को बढ़ावा दें।

इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर किए गए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा:

“भारत और अमेरिका के लिए शानदार समाचार!
हमने अपनी दो महान राष्ट्रों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है। मैं हमारे देशों के बीच मजबूत संबंधों के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए उनका धन्यवाद करता हूँ।

यह रूपरेखा हमारी साझेदारी की बढ़ती गहराई, विश्वास और गतिशीलता को दर्शाती है। यह भारत के मेहनती किसानों, उद्यमियों, MSMEs, स्टार्ट-अप नवोन्मेषकों, मछुआरों और अन्य के लिए नए अवसर खोलकर ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती प्रदान करेगी। इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।

भारत और अमेरिका नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह रूपरेखा निवेश एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी को और गहरा करेगी।

यह समझौता मजबूत और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा और वैश्विक विकास में योगदान देगा। विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए, हम भविष्य-उन्मुख वैश्विक साझेदारियों के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो हमारे लोगों को सशक्त बनाएं और साझा समृद्धि को बढ़ावा दें।”


भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति

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संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और भारत को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि दोनों देशों ने पारस्परिक और परस्पर लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते (इंटरिम एग्रीमेंट) के लिए एक रूपरेखा पर सहमति प्राप्त कर ली है। यह रूपरेखा आज उस व्यापक भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) वार्ताओं के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है, जिनकी शुरुआत 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इस बीटीए में अतिरिक्त बाज़ार पहुँच प्रतिबद्धताएँ शामिल होंगी तथा अधिक सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन मिलेगा।

संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच यह अंतरिम समझौता हमारी साझेदारी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करेगा, जो पारस्परिक हितों और ठोस परिणामों पर आधारित संतुलित एवं प्रत्युत्तरात्मक व्यापार के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत–अमेरिका अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तें निम्नलिखित होंगी:

• भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों तथा अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार हेतु रेड सॉरघम, वृक्ष मेवे, ताजे एवं प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन एवं स्पिरिट्स तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका, 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 (बड़े और लगातार वार्षिक अमेरिकी वस्तु व्यापार घाटे में योगदान देने वाली व्यापार प्रथाओं को सुधारने हेतु प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के अंतर्गत आयात विनियमन), यथा संशोधित, के अंतर्गत भारत से उत्पन्न वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की प्रत्युत्तरात्मक शुल्क दर लागू करेगा। इनमें वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते, प्लास्टिक एवं रबर, जैविक रसायन, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं।

अंतरिम समझौते के सफल निष्कर्ष के अधीन, संयुक्त राज्य अमेरिका 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 (समान सोच वाले भागीदारों के लिए प्रत्युत्तरात्मक शुल्क के दायरे में संशोधन) के अंतर्गत सूचीबद्ध कई वस्तुओं पर प्रत्युत्तरात्मक शुल्क हटाएगा। इनमें जेनेरिक दवाइयाँ, रत्न एवं हीरे तथा विमान पुर्जे शामिल हैं।

• संयुक्त राज्य अमेरिका भारत से आने वाले कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर लगाए गए शुल्क भी हटाएगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित घोषणाओं के अंतर्गत लगाए गए थे—जिनमें एल्यूमिनियम (घोषणा 9704), स्टील (घोषणा 9705) और तांबा (घोषणा 10962) शामिल हैं।

इसी प्रकार, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को ऑटोमोबाइल एवं ऑटोमोबाइल पुर्जों पर लागू शुल्क के अंतर्गत एक अधिमान्य शुल्क-कोटा प्रदान किया जाएगा।
फार्मास्यूटिकल्स और उनके अवयवों पर अमेरिकी सेक्शन 232 जांच के निष्कर्षों के अधीन, भारत को जेनेरिक दवाओं और उनके अवयवों के संबंध में वार्तित परिणाम प्राप्त होंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत, दोनों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक-दूसरे को स्थायी आधार पर अधिमान्य बाज़ार पहुँच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश ऐसे उत्पत्ति नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) स्थापित करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित हो कि समझौते का लाभ मुख्य रूप से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका को ही प्राप्त हो।

• भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दोनों देश संबोधित करेंगे। भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार से जुड़ी दीर्घकालिक बाधाओं को दूर करने, अमेरिकी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों पर लागू प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने तथा समझौते के लागू होने के छह माह के भीतर यह निर्धारित करने पर सहमत है कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानक (परीक्षण आवश्यकताओं सहित) भारतीय बाज़ार में स्वीकार्य हैं या नहीं।

इसके अतिरिक्त, भारत अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों से जुड़ी दीर्घकालिक गैर-शुल्क बाधाओं को भी संबोधित करने पर सहमत है।

• तकनीकी विनियमों के अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से, दोनों देश पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों में अपने मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे।

• यदि किसी भी देश द्वारा सहमत शुल्कों में परिवर्तन किया जाता है, तो दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं में समुचित संशोधन कर सकता है।

• दोनों देश बीटीए वार्ताओं के माध्यम से बाज़ार पहुँच के अवसरों को और विस्तार देने की दिशा में कार्य करेंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका यह भी पुष्टि करता है कि बीटीए वार्ताओं के दौरान वह भारतीय वस्तुओं पर शुल्क कम करने के भारत के अनुरोध पर विचार करेगा।

• दोनों देश आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वय को सुदृढ़ करेंगे, ताकि आपूर्ति शृंखला की लचीलापन और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके। इसमें तीसरे पक्ष की गैर-बाज़ार नीतियों से निपटने हेतु समन्वित कदम, निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण में सहयोग शामिल होगा।

• भारत अगले पाँच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों, विमानों एवं विमान पुर्जों, कीमती धातुओं, प्रौद्योगिकी उत्पादों और कोकिंग कोयले की लगभग 500 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीद करने का इरादा रखता है। दोनों देश डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले जीपीयू सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों के व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे।

• संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत डिजिटल व्यापार से जुड़ी भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रथाओं और अन्य बाधाओं को संबोधित करने तथा बीटीए के अंतर्गत मजबूत, महत्वाकांक्षी और परस्पर लाभकारी डिजिटल व्यापार नियमों के लिए एक स्पष्ट मार्ग निर्धारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

• दोनों देश इस रूपरेखा को शीघ्र लागू करेंगे और संदर्भ शर्तों (Terms of Reference) में निर्धारित रोडमैप के अनुरूप एक परस्पर लाभकारी बीटीए के निष्कर्ष की दिशा में अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने हेतु कार्य करेंगे।


CG NEWS : फर्जी लूट का 24 घंटे में खुलासा, बीमा राशि पाने के लिए सर्राफा कारोबारी ने रची साजिश

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 दुर्ग। बीमा और मुआवजा राशि पाने के लालच में एक सर्राफा कारोबारी अपराध की राह पर चल पड़ा। दुर्ग जिले के कुम्हारी थाना क्षेत्र में ज्वेलरी कारोबारी द्वारा रची गई फर्जी लूट की साजिश का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया।


मामला ग्राम कुगदा निवासी सर्राफा कारोबारी नितेश देवांगन से जुड़ा है, जिसने 5 फरवरी को कुम्हारी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अज्ञात बदमाशों ने उससे सोने की ज्वेलरी और नकदी की लूट कर ली है। प्रार्थी ने बताया था कि वह ज्वेलरी खरीदकर लौट रहा था, तभी कुगदा रोड स्थित सार्थक होम के पास तीन बदमाशों ने धारदार हथियार दिखाकर लूट की वारदात को अंजाम दिया।

सूचना मिलते ही कुम्हारी पुलिस और ACCU टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांच की, लेकिन प्रार्थी द्वारा बताए गए हुलिए के किसी भी संदिग्ध या लूट की घटना का कोई फुटेज नहीं मिला। सबूतों के अभाव में पुलिस को पूरे मामले पर संदेह हुआ।

इसके बाद जब पुलिस ने नितेश देवांगन से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसकी कहानी में लगातार विरोधाभास सामने आने लगे। आखिरकार आरोपी ने स्वीकार कर लिया कि उसने व्यापार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए बीमा और मुआवजा राशि प्राप्त करने के उद्देश्य से फर्जी लूट की कहानी गढ़ी थी।

आरोपी ने यह भी कबूल किया कि कथित रूप से लूटी गई ज्वेलरी उसने अपनी ही दुकान में छिपाकर रखी थी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने दुकान से करीब 30 ग्राम (लगभग 3 तोला) सोने की ज्वेलरी बरामद की, जिसमें 7 जोड़ी टाप्स और 5 जोड़ी बालियां शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ लोक सेवक को जानबूझकर झूठी सूचना देने का अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में सुशासन और अंत्योदय का संकल्प हो रहा सिद्ध : किरण देव

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 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मात्र 10 माह 4 दिनों की अल्प अवधि में 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कर देश में सर्वाधिक आवास बनाने का राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करने पर छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को बधाई दी है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रभावी नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि बताया।


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने औसतन प्रतिदिन 1600 से अधिक आवासों का निर्माण कर देश के सामने एक नई मिसाल पेश की है। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रारंभ से अब तक पहली बार छत्तीसगढ़ ने किसी एक वित्तीय वर्ष में इतनी बड़ी संख्या में गरीब परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराई है। यह राज्य सरकार की स्पष्ट नीति, मजबूत प्रशासनिक समन्वय और जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की कड़ी मेहनत का परिणाम है।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना में जिलों और जनपद पंचायतों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए बताया कि बिलासपुर जिले में 29,235, महासमुंद में 27,224, बलरामपुर में 27,012, कोरबा में 26,839 और रायगढ़ में 26,707 आवासों का निर्माण किया गया। वहीं मस्तूरी, आरंग, डभरा, बिल्हा, पाली और जैजैपुर जैसी जनपद पंचायतों का योगदान भी उल्लेखनीय रहा, जहां प्रत्येक जनपद में 7,500 से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं।

किरण देव ने इस उपलब्धि को गरीबों के सम्मान और समावेशी विकास का प्रतीक बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार के लिए प्रधानमंत्री आवास केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि गरीब परिवारों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की नींव है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने आवास निर्माण को आजीविका, कौशल प्रशिक्षण और महिला सशक्तीकरण से जोड़कर इसे समग्र विकास का सशक्त माध्यम बनाया है।

उन्होंने कहा कि यह कीर्तिमान छत्तीसगढ़ की सुशासन आधारित विकास नीति की सफलता को दर्शाता है। पूर्व की बाधाओं को पार करते हुए साय सरकार ने ‘अंत्योदय’ के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिसके परिणामस्वरूप आज छत्तीसगढ़ समावेशी और सतत विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

Jaivik Kheti Abhiyan : जैविक खेती से स्वस्थ भविष्य की ओर कदम: कुटरा स्कूल में किसान स्कूल बहेराडीह का जागरूकता कार्यक्रम

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 जांजगीर-चाम्पा. बहेराडीह गांव में स्थित देश के पहले वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल द्वारा 'जैविक खेती अभियान' चलाया जा रहा है. किसान स्कूल की टीम द्वारा गांवों की चौपाल, स्कूल और कॉलेज में पहुंचकर ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं को जैविक खेती के लाभ और रासायनिक खाद के नुकसान से अवगत कराया जाता है.


इस दौरान सभी को जैविक खेती के महत्व से अवगत कराकर जागरूक किया जाता है. इसी के तहत किसान स्कूल की टीम, कुटरा गांव के पं. रामसरकार पांडेय शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंची और 'जैविक खेती अभियान' के तहत छात्र-छात्राओं के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर जैविक खेती से होने वाले लाभ के बारे में बताया.


इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने छात्र-छात्राओं को जैविक खेती के हर पहलू से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि आज जैविक खेती बहुत आवश्यक है, क्योंकि रासायनिक खाद के अंधा-धुंध इस्तेमाल से उत्पादित खाद्य पदार्थों में भी रासायनिक खाद का प्रभाव रहता है और इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है. जैविक खेती से इन सभी समस्याओं को खत्म किया जा सकता है, क्योंकि जैविक खेती से उत्पादित खाद्य पदार्थ, मानव शरीर के लिए फायदेमंद साबित होता है. इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने 'जैविक खेती' को लेकर सवाल भी पूछे, जिसका किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने सार्थक जवाब देकर छात्र-छात्राओं को संतुष्ट किया.


इस मौके पर नवाचारी किसान रामाधार देवांगन ने छात्र-छात्राओं को 'वेस्ट से बेस्ट' के बारे में बताया और किसान स्कूल बहेराडीह में किए गए अनोखे नवाचार केले की शाखा के रेशे और भिंडी, अलसी, अमारी भाजी के डंठल के रेशे के साथ ही इससे बने कपड़ों के बारे बारीकी से जानकारी दी. यहां इन नवाचार को छात्र-छात्राओं देखा तो वे हैरत में पड़ गए और इन नवाचार को जानने उनकी जिज्ञासा बढ़ गई. इस पर रामाधार देवांगन ने रेशे निकालने और कपड़ा बनाने में होने वाली प्रक्रिया के बारे में भी बताया.


इस दौरान किसान स्कूल के सदस्य राजकुमार साहू ने किसान स्कूल की स्थापना, किसानों को निःशुल्क ट्रेनिंग और अनेक नवाचार के साथ ही 'जैविक खेती अभियान' के उद्देश्य के बारे में बताया. यहां पराली नहीं जलाने और जल संरक्षण का भी संदेश दिया गया. साथ ही, जैविक खेती अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाने की भी अपील की गई.

कार्यक्रम में पत्रकार हिमांशु साहू, स्कूल के प्राचार्य संदीप श्रीवास्तव, अनुराग तिवारी व्याख्याता, अवधेश शर्मा, महावीर विजर्सन, श्रीमती काजल कर, उमेश चौबे, दीनानाथ उपाध्याय, खिलेंद्र तिवारी, कमल किशोर कौशिक, श्रीमती नीलिमा पाठक, श्रीमती चंद्रावती रात्रे, श्रीमती काजल कहरा, सुरेश कुमार हंस, शेखर साहू, हेमेश्वर नर्मदा, मकरम कमलाकर, भृत्य संदीप कश्यप मौजूद थे.

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