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Kisaan School : किसान स्कूल में 5 जून से शुरू होगा सीड बॉल अभियान,सब्जी, फल फूल के बीजों से वितरण के लिए बनाई जा रही सीड बॉल

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जांजगीर-चाम्पा- जिले के एक छोटे से गांव बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल, जहां पर बनाई जा रही सब्जी, फल फूल की बीजों की सीड बॉल, जिसका वितरण लोगों को 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर किया जाएगा और सीड बॉल अभियान का शुभारम्भ किया जाएगा. इस अभियान में किसान, स्कूली बच्चे, बिहान की दीदियां, सामाजिक संगठन के लोग और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे.


इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का एक सरल एवं प्रभावी माध्यम है. वर्षा ऋतु में सीड बॉल अभियान चलाकर बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा सकता है. इस अभियान का शुभारम्भ 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुबह 10 बजे वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह से किया जाएगा. किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल बनाने के लिए उपजाऊ मिट्टी, गोबर या वर्मी कम्पोस्ट, सब्जी, फल या फूल की बीज और पानी जरुरत होती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले 5 भाग मिट्टी 2 भाग गोबर या वर्मी कम्पोस्ट आवश्यक मात्रा में बीज का मिश्रण करके गेंद बनाकर दो दिन छाया में सुखाना होता है और बारिश के मौसम में खेत, जंगल, पहाड़ी या खाली भूमि पर फेकना होता है. इसके लिए नीम, आम, जामुन, तेन्दु, करंज, गुलमोहर, इमली, मुनगा, व अन्य बीज शामिल कर सकते हैं. 

पर्यावरण में सीड बॉल का महत्व

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि पर्यावरण में सीड बॉल का बहुत ही बड़ा महत्व है. जैसे वनों की वृद्धि, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण, वायु शुद्धिकरण, जलवायु परिवर्तन नियंत्रण, कम लागत एवं आसान तकनीक आदि शामिल है, वहीं इसके लाभ के बारे में बताया कि पौधों की सुरक्षा बढ़ती है. पक्षियों और चीटियों से बीज सुरक्षित रहतीं है. पानी की कम आवश्यकता, सूखे क्षेत्रो में भी उपयोगी, सामूहिक अभियान में आसान उपयोग कर सकते हैं. 

क्या है सीड बॉल...

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि यह एक छोटी गेंद होती है, जिसे मिट्टी, गोबर वर्मी कम्पोस्ट और बीज मिलाकर बनाई जाती है. इसका उपयोग पौधों और पेड़ों के बिजों को सुरक्षित तरीके से उगाने के लिए किया जाता है. बारिश होने पर यह गेंद धीरे धीरे गल जाती है और बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाता है. इसे सीड बम भी कहा जाता है. यह प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण की एक सरल एवं कम लागत वाली तकनीक है.

लाल किला मैदान से गूंजा जनजातीय गौरव का स्वर

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राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – जनजातीय समाज दुनिया को सिखा सकता है प्रकृति संग विकास

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर राष्ट्रीय समागम में देशभर से जुटे हजारों जनजातीय प्रतिनिधि

जनजातीय भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण पर मुख्यमंत्री ने दिया विशेष जोर

जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप - मुख्यमंत्री साय 

नई दिल्ली- देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप एवं रामविचार नेताम भी उपस्थित थे। 

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

माउंट एवरेस्ट विजेता अमिता श्रीवास के स्वास्थ्य लाभ हेतु राज्य सरकार सजग : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को समन्वय कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर- जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता श्रीवास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता श्रीवास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 देशभर में सफलतापूर्वक संपन्न, 5.49 लाख अभ्यर्थी हुए शामिल

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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने आज यानी 24 मई 2026 को सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026, जिसमें भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 भी शामिल है, का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह परीक्षा देशभर के 83 शहरों में स्थित 2,072 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई।

इस परीक्षा के लिए कुल 8,19,732 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से लगभग 5.49 लाख उम्मीदवार (करीब 67 प्रतिशत) परीक्षा में उपस्थित हुए। वहीं, वर्ष 2025 की तुलना में उस वर्ष लगभग 9.5 लाख आवेदनकर्ताओं में से करीब 61 प्रतिशत उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे।

इस वर्ष आयोग ने पहली बार परीक्षा केंद्रों पर रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली लागू की, जिसका उद्देश्य नकल और पहचान संबंधी धोखाधड़ी को रोकना था। यह स्वदेशी तकनीक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) द्वारा विकसित की गई। यह प्रणाली सभी 2,072 केंद्रों पर सफलतापूर्वक लागू की गई, जिसे परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

UPSC अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने परीक्षा के सुचारू संचालन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग, NeGD और NIC की टीमों ने मिलकर इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक लागू किया। उन्होंने कहा कि फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली का निर्बाध संचालन आयोग की परीक्षा प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है।

परीक्षा दो सत्रों में आयोजित हुई—पहला सत्र सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक सामान्य अध्ययन (पेपर-I) और दूसरा सत्र दोपहर 2:30 से 4:30 बजे तक सिविल सेवा अभिक्षमता परीक्षा (CSAT) के रूप में हुआ।

सबसे अधिक उपस्थिति दिल्ली केंद्र में रही, जहां 70,885 उम्मीदवार 144 केंद्रों पर उपस्थित हुए। इसके बाद हैदराबाद में 44,209 और पटना में 39,147 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। वहीं सबसे कम उपस्थिति कारगिल में 98, पोर्ट ब्लेयर में 270 और लद्दाख के लेह में 308 उम्मीदवारों की रही।

परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, बिजली बैकअप, चिकित्सा सुविधा, छायादार प्रतीक्षालय, स्वच्छता और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए विशेष सुविधाएं सुनिश्चित की गई थीं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के तहत मोबाइल सिग्नल जैमर भी लगाए गए थे।

इस वर्ष भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ में तीन नए परीक्षा केंद्र जोड़े गए हैं, जिससे परीक्षार्थियों की भीड़ को कम करने में मदद मिलेगी।

आयोग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पहली बार परीक्षा के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर की जारी करने का निर्णय लिया है, जिस पर 31 मई 2026 तक आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी।

कुल 11,224 दिव्यांग उम्मीदवारों ने परीक्षा में भाग लिया, जिनके लिए विशेष समय और सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

UPSC ने कहा कि परीक्षा का सफल आयोजन विभिन्न संस्थाओं के समन्वय और मजबूत व्यवस्था का परिणाम है, जो देश की परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता, दक्षता और विश्वसनीयता को और मजबूत करता है।

फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 75वें संस्करण में देशभर में जबरदस्त भागीदारी, कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारियों को मिला बढ़ावा

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देशभर में “फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल” के 75वें संस्करण में आज 8,000 से अधिक स्थानों पर जबरदस्त भागीदारी देखी गई। यह आयोजन कॉमनवेल्थ गेम्स डे के अवसर पर किया गया और इसका उद्देश्य अहमदाबाद में होने वाले ऐतिहासिक कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की दिशा में उत्साह और गति बढ़ाना था।

अहमदाबाद के प्रतिष्ठित साबरमती रिवरफ्रंट से केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना ने 5,000 साइकिल चालकों, खिलाड़ियों, युवाओं, स्वयंसेवकों और फिटनेस प्रेमियों के साथ इस भव्य आयोजन का नेतृत्व किया।

इस संस्करण की थीम “A New Icon for a Fitter India – Pedalling to 2030” रखी गई थी। इसमें 5 किलोमीटर लंबी साइक्लिंग रैली, योग और ज़ुम्बा प्रदर्शन शामिल रहे, जिससे साबरमती रिवरफ्रंट एक बड़े फिटनेस और सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण कॉमनवेल्थ गेम्स थीम पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन रहा, जिसे डॉ. मांडविया ने किया। इसमें भारत की खेल उपलब्धियों, खेलो इंडिया मिशन के तहत खेल अवसंरचना के विस्तार और 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों को प्रदर्शित किया गया।

इसके अलावा पिकलबॉल, बॉक्स क्रिकेट, वॉलीबॉल, टग ऑफ वॉर और अन्य सामुदायिक खेलों ने कार्यक्रम को उत्सव जैसा माहौल दिया।

कार्यक्रम में ओलंपियन और कॉमनवेल्थ गेम्स पदक विजेता गुरजीत कौर, राजानी एटिमार्पु, सोनिका तांडी, अंजुम मौद्गिल, अंकुर मित्तल और तृप्ति मुर्गुंडे सहित कई खेल हस्तियों ने भाग लिया और युवाओं को प्रेरित किया।

इसके साथ ही आयुष्मान खुराना, भारतीय ओलंपिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय पटेल, ओलंपिक निशानेबाज और CWG पदक विजेता गगन नारंग, खेलो इंडिया के उप महानिदेशक मयंक श्रीवास्तव तथा एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अडिले सुमरिवाला जैसे कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे।

एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति में गरबा और योग का अनोखा मिश्रण भी दर्शाया गया। साथ ही मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग के डॉ. पवन कुमार ने प्रतिभागियों को स्वास्थ्य और योग पर मार्गदर्शन दिया।

देशभर में इसी तरह के कार्यक्रम SAI क्षेत्रीय केंद्रों, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों, खेलो इंडिया केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित किए गए, जहां ओलंपियन, CWG पदक विजेता और खेल सितारों ने भाग लिया। गुवाहाटी में रक्ष खडसे ने, धर्मशाला में बबीता फोगाट ने और मुंबई में सबा अंजुम ने कार्यक्रम में भाग लेकर “स्पोर्ट्स जन भागीदारी” को मजबूत किया।

यह पहल दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी और तब से अब तक यह 3.07 लाख से अधिक स्थानों तक पहुंच चुकी है, 50 लाख से अधिक साइकिल चालकों को जोड़ चुकी है और 7 करोड़ से अधिक लोगों तक डिजिटल और ऑन-ग्राउंड माध्यम से पहुंच बना चुकी है।

यह कार्यक्रम भारत को एक फिट, मजबूत और वैश्विक खेल शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, खासकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारियों के संदर्भ में।

पूर्वोत्तर में खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हाई परफॉर्मेंस सेंटर का रक्ष खडसे ने किया दौरा, खेल इकोसिस्टम की समीक्षा की

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खेल एवं युवा मामलों की राज्य मंत्री रक्ष खडसे ने आज असम स्थित खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (KISCE) और गुवाहाटी के हाई परफॉर्मेंस सेंटर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों, कोचों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों और अधिकारियों से बातचीत की तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकसित हो रहे उच्च-प्रदर्शन खेल पारिस्थितिकी तंत्र की समीक्षा की।

दौरे के दौरान मंत्री ने हाई परफॉर्मेंस सेंटर की विभिन्न प्रशिक्षण और पुनर्वास सुविधाओं का निरीक्षण किया, जिनमें खेल विज्ञान प्रयोगशालाएं, रिकवरी एवं रिहैबिलिटेशन यूनिट्स, फिजियोलॉजिकल और बायोमैकेनिकल असेसमेंट सुविधाएं तथा खिलाड़ी सहायता प्रणाली शामिल हैं। इस निरीक्षण ने भारत के खेल ढांचे में खेल विज्ञान, तकनीक और डेटा-आधारित प्रशिक्षण के बढ़ते उपयोग को दर्शाया।

मंत्री के साथ इस दौरे में कौसर जमील हिलाली (विशेष सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग), अंकुर भाराली (निदेशक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग), डी.के. मित्तल (क्षेत्रीय निदेशक, SAI गुवाहाटी), KISCE असम के हाई परफॉर्मेंस मैनेजर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए रक्ष खडसे ने उनके समर्पण और मेहनत की सराहना की और उन्हें अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प के साथ उत्कृष्टता की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने देशभर में खेल अवसंरचना को मजबूत करने और खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण वातावरण तैयार करने पर सरकार के निरंतर फोकस को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का खेल ढांचा, खिलाड़ी सहायता प्रणाली और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियां तेजी से विकसित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि Khelo India State Centre of Excellence Assam और हाई परफॉर्मेंस सेंटर जैसी संस्थाएं प्रतिभाओं को निखारने और अंतरराष्ट्रीय सफलता के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

हाई परफॉर्मेंस सेंटर इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खेल विज्ञान और पुनर्वास सुविधा के रूप में उभरा है, जिसमें चोट प्रबंधन, रिकवरी, शारीरिक परीक्षण, मोशन एनालिसिस और प्रदर्शन सुधार जैसी आधुनिक प्रणालियां मौजूद हैं।

मंत्री ने खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत चल रही खिलाड़ी विकास योजनाओं की भी समीक्षा की और पूर्वोत्तर के युवा खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

यह दौरा भारत के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें वैज्ञानिक, खिलाड़ी-केंद्रित और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, विशेष रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और उससे आगे की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए।

गांधीनगर SAI NCoE में खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई खेल सुविधाओं का उद्घाटन किया, पैरा खिलाड़ियों के लिए मजबूत इकोसिस्टम पर जोर

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केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज गांधीनगर स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCoE) में कई नई खेल अवसंरचना सुविधाओं का उद्घाटन किया। यह पहल देशभर में विश्वस्तरीय उच्च-प्रदर्शन खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराती है।

उन्होंने नव-निर्मित पैरा एथलीट हॉस्टल, सेंट्रलाइज्ड डाइनिंग हॉल, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग हॉल, मल्टीपर्पस ट्रेनिंग हॉल और मेडिटेशन पार्क का उद्घाटन किया। ये सभी सुविधाएं खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, रिकवरी, पोषण, खेल विज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य को एकीकृत रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित की गई हैं।

कार्यक्रम में खिलाड़ियों, कोचों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का खेल इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है, जिसमें खिलाड़ी-केंद्रित विकास और समावेशी खेल ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी वास्तव में हमारे पैरा एथलीट्स के ‘परम मित्र’ हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल खेल ढांचे का विस्तार किया है, बल्कि पैरा एथलीट्स को सम्मान, समान अवसर और सुलभता भी सुनिश्चित की है।”

वैश्विक खेलों में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि एशियन पैरा गेम्स में 111 पदक और पैरालिंपिक 2024 में 29 पदक भारत की बढ़ती खेल क्षमता को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियाँ केवल संयोग नहीं हैं, बल्कि खिलाड़ियों में निरंतर निवेश, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं और मजबूत आत्मविश्वास का परिणाम हैं।

डॉ. मांडविया ने बताया कि SAI NCoE गांधीनगर, जिसे पैरा खेलों के लिए नोडल सेंटर घोषित किया गया है, देश के प्रमुख उच्च-प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्रों में से एक बन रहा है। यहां वर्तमान में पैरा एथलेटिक्स, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, पावरलिफ्टिंग, स्विमिंग और फेंसिंग सहित छह पैरा खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, साथ ही हैंडबॉल, कबड्डी और खो-खो भी शामिल हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय कोचिंग कैंप में भाग ले रहे खिलाड़ियों से भी बातचीत की और कहा कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उच्च स्तरीय सुविधाएं भारत की भविष्य की अंतरराष्ट्रीय सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मंत्री ने कहा कि पैरा एथलीट हॉस्टल, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग हॉल और सेंट्रलाइज्ड डाइनिंग हॉल केवल इमारतें नहीं हैं, बल्कि भारत के भविष्य के चैंपियंस में किया गया निवेश हैं।

उन्होंने बताया कि मल्टीपर्पस ट्रेनिंग हॉल मुख्य रूप से कबड्डी प्रशिक्षण के लिए उपयोग किया जाएगा, जबकि स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग हॉल खिलाड़ियों की फिटनेस, रिकवरी और प्रदर्शन सुधार में मदद करेगा।

यह भी उल्लेख किया गया कि इन सुविधाओं को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से विकसित किया गया है, जो सरकार के समावेशी खेल विकास दृष्टिकोण को दर्शाता है।

कार्यक्रम में भारतीय खेल प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी, कोच, खिलाड़ी और खेल जगत के सदस्य उपस्थित रहे।

दंतेवाड़ा के 17 गांवों में एनएमडीसी के समर कैंप शुरू, 1700 बच्चों को मिलेगा रचनात्मक शिक्षा और खेलों का अवसर

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एनएमडीसी ने आदिवासी समुदायों के बच्चों के समग्र विकास और रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दंतेवाड़ा जिले के 17 गांवों में 20 मई से 15 जून 2026 तक विशेष समर कैंप शुरू किए हैं।

इस अनूठी पहल के तहत लगभग 1700 बच्चों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान अनुभवात्मक शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और खेलों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकांश गांवों में गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं, जबकि अधिक बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जनजागरूकता और प्रेरणा अभियान भी चलाया जा रहा है। वर्तमान में प्रत्येक गांव में एनएमडीसी समर कैंप में प्रतिदिन 30 से 40 बच्चे भाग ले रहे हैं।

इन शिविरों में बच्चे प्रतिदिन तीन से चार घंटे तक पुस्तक पठन, हस्तशिल्प, संगीत कार्यशालाओं और रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। इसके बाद वे फ्रिस्बी, कबड्डी और खो-खो जैसे खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं तथा दिन का समापन पौष्टिक अल्पाहार के साथ करते हैं।

यह पहल शिक्षा और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में कार्यरत संस्था WOSCA के सहयोग से संचालित की जा रही है। समर कैंप बस्तर क्षेत्र के बच्चों के लिए सुरक्षित, प्रेरणादायक और सकारात्मक वातावरण तैयार कर रहे हैं, जिससे वे आत्मविश्वास और नई क्षमताओं के साथ आगे बढ़ सकें।

ग्रामीण क्षेत्रों में जहां संरचित रचनात्मक शिक्षा के अवसर सीमित हैं, वहां एनएमडीसी की यह पहल बच्चों की प्रतिभा और आकांक्षाओं को नई दिशा देने का कार्य कर रही है। गांवों के विकास के प्रति अपनी व्यापक प्रतिबद्धता के तहत एनएमडीसी बच्चों में सामाजिक और व्यवहारिक कौशल विकसित कर उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी युवा बनने में मदद कर रहा है।

जिन गांवों में समर कैंप शुरू किए गए हैं वहां बच्चों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। आने वाले सप्ताहों में इस पहल के विस्तार के साथ एनएमडीसी ने परिवारों और समुदाय के लोगों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है, ताकि दंतेवाड़ा के बच्चों के लिए यह गर्मी यादगार और प्रेरणादायक बन सके।

भारतीय वायु सेना परीक्षण पायलट स्कूल के 48वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स का समापन, 17 अधिकारियों ने प्राप्त की उपाधि

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भारतीय वायु सेना परीक्षण पायलट स्कूल (AFTPS), बेंगलुरु में 23 मई 2026 को 48वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स के अंतर्गत 11 टेस्ट पायलट और छह फ्लाइट टेस्ट इंजीनियरों ने 48 सप्ताह के कठोर बहु-विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा कर स्नातक उपाधि प्राप्त की। इस वर्ष के पाठ्यक्रम में कुल 17 अधिकारी शामिल थे, जिनमें भारतीय वायु सेना के 14 अधिकारी, भारतीय सेना का एक अधिकारी तथा भारतीय नौसेना के दो अधिकारी शामिल थे। अब ये सभी अधिकारी भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठित इकाई एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट के एविएशन विंग में अपनी सेवाएँ देंगे।

इस अवसर पर वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह पीवीएसएम, एवीएसएम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वे 17वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स के विशिष्ट पूर्व छात्र भी हैं। उन्होंने सभी स्नातक अधिकारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को ट्रॉफियाँ प्रदान कीं।

इस वर्ष “सुरंजन दास ट्रॉफी” सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंड छात्र टेस्ट पायलट के रूप में स्क्वाड्रन लीडर केके सिंह, वीएम को प्रदान की गई। “चीफ ऑफ द एयर स्टाफ ट्रॉफी” सर्वश्रेष्ठ छात्र टेस्ट पायलट (फ्लाइट इवैल्यूएशन) के लिए स्क्वाड्रन लीडर आदित्य जमदग्नि को मिली। “महाराजा हनुमंथ सिंह स्वॉर्ड” सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंड छात्र फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर के रूप में विंग कमांडर अभिनव कुमार को प्रदान किया गया। विंग कमांडर प्रणव शर्मा को फ्लाइट इवैल्यूएशन में सर्वश्रेष्ठ छात्र फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर हेतु “डनलप ट्रॉफी” तथा स्क्वाड्रन लीडर पारस शर्मा को ग्राउंड विषयों में सर्वश्रेष्ठ छात्र के लिए “कपिल भार्गव ट्रॉफी” से सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए वायु सेना प्रमुख ने स्नातक अधिकारियों को निरंतर कठिन परिश्रम और पूर्ण एकाग्रता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ये अधिकारी भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता निर्माण और आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने ‘आत्मनिर्भरता’ को स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के विकास के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बताते हुए कहा कि परीक्षण दल की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि देश के स्वदेशीकरण अभियान को गति मिले और एयरोस्पेस क्षेत्र मजबूत हो सके। उन्होंने सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए डिजाइन से डिलीवरी तक की समय-सीमा को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया।

वायु सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि पेशेवर दक्षता अत्यंत आवश्यक है, ताकि विमान और प्रणालियाँ सशस्त्र सेनाओं की परिचालन आवश्यकताओं को पूरी तरह पूरा कर सकें। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, सटीकता और उत्कृष्टता जैसे मूल्यों को सदैव बनाए रखने का आह्वान किया।

राजनांदगांव बनेगा शतरंज का हब : डॉ. रमन सिंह

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव के दिग्विजय स्टेडियम में शतरंज का प्रशिक्षण ले रहे नन्हें खिलाड़यिों से आत्मीय मुलाकात की। बच्चों की असाधारण प्रतिभा, आत्मविश्वास और खेल के प्रति उनके समर्पण की सराहना करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि राजनांदगांव अंचल में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। अब शतरंज को विशेष प्राथमिकता देते हुए राजनांदगांव जिले को राज्य के चेस हब (शतरंज केंद्र) के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने शहर को इस खेल का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए एक सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने तथा खिलाडि़यों को वर्षभर निरंतर उच्च स्तरीय प्रशिक्षण व प्रतियोगिताएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।


राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार होंगे खिलाड़ी

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा, दिग्विजय स्टेडियम अब केवल एक खेल का मैदान नहीं, बल्कि भविष्य के वैश्विक चौम्पियन तैयार करने की नर्सरी बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्टेडियम में खिलाडि़यों की सुविधा के लिए लगभग 29 लाख रुपए की लागत से आवश्यक आधारभूत संरचना व खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। शतरंज जैसे बौद्धिक खेल को बढ़ावा देने से युवाओं की ऊर्जा को एक सकारात्मक और नई दिशा मिलेगी।

7 वर्षीय माहिका की प्रतिभा से हुए अभिभूत

स्टेडियम भ्रमण के दौरान डॉ. रमन सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों से सौजन्य भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। इसी कड़ी में उन्होंने कक्षा दूसरी में अध्ययनरत सात वर्षीय नन्हीं खिलाड़ी माहिका डाकलिया से विशेष मुलाकात की और उनकी खेल यात्रा की जानकारी ली। माहिका ने पूरे आत्मविश्वास के साथ बताया कि वे गत वर्ष ओडिशा के खुर्दा रोड में आयोजित राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता के अंडर-7 आयु वर्ग में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। नन्हीं खिलाड़ी की इस बड़ी उपलब्धि और अद्भुत आत्मविश्वास से अभिभूत होकर डॉ. रमन सिंह ने उनकी पीठ थपथपाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

पुलिस को मिली अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन

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 रायपुर : केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुशंसा पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई है। इसी क्रम में मुंगेली जिले को करीब 65 लाख रुपये लागत की आधुनिक सुविधाओं से लैस मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्राप्त हुई है। इस वैन के तकनीकी उपयोग और अपराध अनुसंधान में इसकी भूमिका से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अवगत कराने मुंगेली कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ‘कलेक्टर जनदर्शन सभाकक्ष’ में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। उप मुख्यमंत्री अरुण साव नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से इसमें वर्चुअली शामिल हुए। उन्होने हरी झंडी दिखाकर मोबाइल फॉरेंसिक वैन को जिले में सेवा हेतु रवाना किया।


अपराध अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला में ऑनलाइन जुड़े उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि मुंगेली जिले को मिली यह अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन कानून व्यवस्था और अपराध जांच प्रणाली को नई मजबूती प्रदान करेगी। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह वैन पुलिस को घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा देगी, जिससे अपराध अनुसंधान में तेजी आएगी और साक्ष्य संकलन अधिक प्रभावी होगा।

तकनीकी क्षमता का उठाएं पूरा लाभ

बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने कहा कि मोबाइल फॉरेंसिक वैन की तकनीकी क्षमताएं आपराधिक मामलों के त्वरित एवं वैज्ञानिक निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुंगेली पुलिस इस सुविधा का बेहतर उपयोग कर अपराधियों के खिलाफ सशक्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

निष्पक्ष न्याय में बड़ी भूमिका निभाएगी वैन मुंगेली एसएसपी भोजराम पटेल ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में सभी नागरिकों के लिए न्याय समान है। उन्होंने कहा कि न्याय भेद नहीं करता और प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष न्याय मिलना उसका अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और सटीक जांच में बड़ी मददगार साबित होगी।

आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की दी गई विस्तृत जानकारी

कार्यशाला में तकनीकी सत्र में फॉरेंसिक एक्सपर्ट ज्योत्सना लकड़ा ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और जवानों को वैन में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया, साक्ष्य सुरक्षित रखने में बरती जाने वाली सावधानियों तथा मौके पर ही प्राथमिक फॉरेंसिक जांच करने के तरीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। साथ ही बताया कि अदालत में साक्ष्यों की वैधता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से जांच और दस्तावेजीकरण अत्यंत आवश्यक है।

प्रधानमंत्री की बचत अपील का दिखा असर

कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ‘बचत’ संबंधी अपील को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव तथा बिलासपुर रेंज के आईजी श्री रामगोपाल गर्ग ने अनावश्यक खर्च से बचते हुए ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में सहभागिता की।

कार्यशाला में मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल, अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुश्री नवनीत कौर छाबड़ा, उप पुलिस अधीक्षक श्री हरविंदर सिंह, बार काउंसिल के अध्यक्ष  राजमन सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता  रविंदर सिंह छाबड़ा सहित जिले के विभिन्न थाना प्रभारी, पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।

बद्रीनाथ के पास टूटा ग्लेशियर, मलबा नीचे आने का वीडियो वायरल

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 बद्रीनाथ के पास कंचन गंगा क्षेत्र में रविवार को ग्लेशियर टूटने की घटना सामने आई। ग्लेशियर टूटने के बाद भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मलबा तेज रफ्तार से नीचे आता दिखाई दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।


स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ ग्लेशियरों का पिघलना और छोटे हिस्सों का टूटना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। लेकिन इस बार मलबे और पत्थरों की रफ्तार ने लोगों को चौंका दिया।

प्रशासन ने क्या कहा?

चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि यह हर साल होने वाली प्राकृतिक घटना है और फिलहाल किसी नुकसान की खबर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और जंगलों में लग रही आग का असर ग्लेशियरों पर पड़ रहा है।

वैज्ञानिकों की चेतावनी

वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। सर्दियों में कम बर्फबारी और गर्मियों में असामान्य बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ‘पश्चिमी विक्षोभ’ की अनियमितता इसके पीछे बड़ी वजह है।

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान के अनुसार मध्य हिमालय के कई ग्लेशियर इस समय तेजी से बदलते मौसम के प्रभाव का सामना कर रहे हैं, जिससे भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।

पाकिस्तान में ट्रेन को निशाना बनाकर सुसाइड अटैक, जोरदार धमाके में 23 की मौत; 47 घायल

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 क्वेटा। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा शहर में  रेलवे ट्रैक के पास हुए भीषण धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। ट्रेन को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में 23 लोगों की मौत हो गई, जबकि 47 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई जगह गोलियों की आवाजें भी सुनाई दीं।


रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेन क्वेटा कैंट इलाके की ओर जा रही थी, तभी चमन फाटक के पास रेलवे लाइन पर जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना भीषण था कि ट्रेन के इंजन समेत तीन डिब्बे पटरी से उतर गए, जबकि दो डिब्बे पलट गए। आसपास खड़ी करीब 10 गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं।

इमारतों के शीशे टूटे, इलाके में दहशत

धमाके का असर इतना तेज था कि आसपास की इमारतों के शीशे और खिड़कियां टूट गईं। घटना के तुरंत बाद पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया। पुलिस, सेना और रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

घायलों को क्वेटा के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालात को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

हमले की जांच जारी

बलूचिस्तान सरकार के अधिकारी बाबर यूसुफजई ने बताया कि पुलिस यह जांच कर रही है कि धमाका किस प्रकार किया गया। फिलहाल किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

बलूचिस्तान लंबे समय से हिंसा और अलगाववादी गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहां सक्रिय कई संगठन पाकिस्तान सरकार के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं और बलूचिस्तान की आजादी की मांग करते हैं।

रेल मंत्री ने की हमले की निंदा

पाकिस्तान के रेल मंत्री मोहम्मद हनीफ अब्बासी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायराना आतंकी हमला बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के हौसले को कमजोर नहीं कर सकते।

रेल मंत्री ने बताया कि फंसे यात्रियों को निकालने के लिए राहत ट्रेन और रेस्क्यू ट्रक मौके पर भेजे गए हैं। साथ ही अधिकारियों से घटना की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।

घटना के बाद एहतियात के तौर पर पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को क्वेटा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हुई हैं।

CG NEWS : पानी भरने को लेकर खूनी संघर्ष, एक ही परिवार के दो पक्ष भिड़े, 8 से ज्यादा घायल

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 दुर्ग। जिले के जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र अंतर्गत डांडेसरा गांव में शनिवार देर शाम पानी भरने को लेकर एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लाठी, रॉड और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। घटना में आठ से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।


घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पानी संकट बना विवाद की वजह

जानकारी के अनुसार, डांडेसरा गांव में भीषण गर्मी के चलते पानी का गंभीर संकट बना हुआ है। गांव में पानी के लिए सीमित संख्या में ही ट्यूबवेल उपलब्ध हैं। पानी की बर्बादी रोकने और उपयोग को लेकर ट्यूबवेल के स्टार्टर पर ताला लगा दिया गया था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ।

देखते ही देखते मामूली कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई और दोनों पक्षों ने लाठी, रॉड और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। गांव में अफरा-तफरी मच गई।

पहले से भी चल रहा था विवाद

पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले से जमीन को लेकर भी विवाद चल रहा था। आए दिन उनके बीच कहासुनी और विवाद होता रहता था, लेकिन इस तरह का खूनी संघर्ष पहली बार सामने आया है।

गांव में तनाव का माहौल

घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।

रायपुर प्रेस क्लब में “पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” की तैयारियां तेज, समितियां हुईं सक्रिय

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 रायपुर। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित किए जा रहे “पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” की तैयारियां तेज हो गई हैं। आयोजन को भव्य, व्यवस्थित एवं सार्थक बनाने के उद्देश्य से रायपुर प्रेस क्लब ने विभिन्न समितियों का गठन करते हुए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। सभी समितियों के संयोजकों एवं सहसंयोजकों को अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप कार्य प्रारंभ करने का आग्रह किया गया है।


यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उसके संघर्ष, मूल्यों, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रहेगा। उत्सव के दौरान पत्रकारिता की बदलती परिस्थितियों, मीडिया की विश्वसनीयता, लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका तथा डिजिटल दौर की चुनौतियों और संभावनाओं पर व्यापक मंथन किया जाएगा।

“पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” का शुभारंभ सत्र मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न होगा। इस अवसर पर शासन से जुड़े मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, प्रबुद्धजन एवं पत्रकारिता जगत से जुड़े अनेक विशिष्ट अतिथि भी शामिल होंगे।

आयोजन का दूसरा सत्र हिंदी प्रिंट मीडिया के 200 वर्षों के इतिहास, उसकी वैचारिक यात्रा, सामाजिक प्रभाव और लोकतांत्रिक योगदान पर केंद्रित रहेगा, जिसमें देश एवं प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और विषय विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।

वहीं तीसरा सत्र इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं न्यू मीडिया की संभावनाओं, चुनौतियों, बदलती तकनीक, सोशल मीडिया के प्रभाव तथा पत्रकारिता के भविष्य पर आधारित होगा। इस सत्र में राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के प्रतिष्ठित पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ व्यक्तित्व अपने अनुभव एवं विचार रखेंगे।

रायपुर प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया है कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों, परंपराओं और जनसरोकारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। आयोजन में प्रदेशभर के पत्रकारों, मीडिया संस्थानों, युवा पत्रकारों एवं पत्रकारिता से जुड़े विविध वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर संपर्क एवं समन्वय किया जा रहा है।

आयोजन को सफल बनाने के लिए गठित विभिन्न समितियों के संयोजक एवं सहसंयोजक निम्नानुसार हैं :-

प्रकाश शर्मा - संयोजक, संरक्षण मंडल / सलाहकार समिति
अनिल द्विवेदी - संयोजक, मुख्य आयोजन संचालन एवं समन्वय समिति
दिनेश तिवारी - संयोजक, मीडिया एवं प्रचार प्रसार समिति
अनिरुद्ध दुबे - सहसंयोजक, मीडिया एवं प्रचार प्रसार समिति
प्रदीप दुबे - सह संयोजक, मीडिया एवं प्रचार प्रसार समिति
राजेंद्र निगम - संयोजक, आयोजन एवं प्रोटोकॉल समिति ( समय सारणी , अतिथि प्रबंधन स्थल व्यवस्था )
मनीष वोरा - सहसंयोजक,आयोजन एवं प्रोटोकॉल समिति ( समय सारणी ,अतिथि प्रबंधन स्थल व्यवस्था )
अंशुमन शर्मा - सहसंयोजक,आयोजन एवं प्रोटोकॉल समिति (समय सारणी,अतिथि प्रबंधन स्थल व्यवस्था )
शंकर चंद्राकर -संयोजक, आवास एवं अतिथि सत्कार समिति
रविंद्र ठेंगड़ी -संयोजक, स्वागत एवं पंजीयन समिति
अतुल श्रीवास्तव -संयोजक, तकनीकी एवं आईटी समिति
दीपक पाण्डेय - संयोजक, प्रदर्शनी एवं आयोजन चित्रण समिति
संदीप तिवारी - संयोजक, सांस्कृतिक आयोजन एवं रचनात्मक कार्य समिति
शुभम वर्मा - संयोजक, डॉक्यूमेंट्री एवं प्रशासन समिति
अंशुमान शर्मा - संयोजक, व्याख्यान सत्र प्रबंधन समिति/ लेक्चर सेशन कमेटी
अंकिता शर्मा -संयोजक, सोशल मीडिया कैंपेन कमेटी
नीतेश गर्ग- सह संयोजक, सोशल मीडिया कैंपेन कमेटी
व्यास पाठक -संयोजक, ड्राफ्ट एवं आर्काइव समिति
गौरव शर्मा (जू.)- लोगो एवं ब्रांडिंग समिति
ज्योति ठाकुर -संयोजक, मंच एवं कार्यक्रम संचालन समिति
यशवंत धोटे, जनसंपर्क एवं शासकीय समन्वय समिति
अविनाश चौबे -संयोजक , इवेंट ऑर्गेनाइजिंग कमिटी
सनत तिवारी -संयोजक, कार्यक्रम प्रबंधन समिति
प्रदीप चंद्रवंशी -संयोजक , भोजन एवं कैटरिंग समिति
निवेदिता साहू -संयोजिका, सजावट एवं सौंदर्य करण समिति
विनय त्रिवेदी -सहसंयोजक, सजावट एवं सौंदर्य करण समिति
नवीन जैन - संयोजक, व्यवस्था एवं संसाधन कमेटी
सत्यप्रकाश सिंह - संयोजक, रिसर्च एवं कंटेंट कमेटी
गौरव शुक्ला - सहसंयोजक, रिसर्च एवं कंटेंट कमेटी
कुलदीप शर्मा - संयोजक, आमंत्रण एवं अतिथि प्रबंधन समिति

रायपुर प्रेस क्लब ने सभी पत्रकार साथियों, मीडिया संस्थानों एवं समाज के प्रबुद्धजनों से आयोजन में सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग का आग्रह किया है, ताकि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की इस ऐतिहासिक यात्रा को गौरव और गरिमा के साथ यादगार बनाया जा सके।

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