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जन जागरूकता से आएगी सड़क दुर्घटनाओं में कमी : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जन जागरूकता से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। यातायात नियमों के प्रति सजगता ही हमें जनहानि से बचा सकती है।


मुख्यमंत्री साय ने सड़क सुरक्षा का संदेश देते हुए स्वयं हेलमेट पहनकर बाइक चालकों के दल के साथ स्कूटी चलाई।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने राजधानी रायपुर के पंडरी में आधुनिक लाइसेंस सेंटर कार्यालय भवन पंडरी का भूमिपूजन और प्रदेश भर में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 12 नवीन मार्गों में 12 नवीन बसों का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मानव जीवन अनमोल है। उन्होंने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए यातायात नियमों के पालन की अपील आम नागरिकों से की जिससे वाहन दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। आज इस कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे राहगीरों, पुलिस मितान, चिकित्सकों, यातायात पुलिस कर्मियों सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया गया है। ये सभी लोग इस कार्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में किसी माता की कोख सूनी हो जाती है, कई भाई अपनी बहन से हमेशा के लिए बिछड़ जाते हैं और कई बच्चे अनाथ हो जाते हैं।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए रायपुर पुलिस ने अभिनव पहल करते हुए 4500 पुलिस मितान बनाए हैं। ये पुलिस मितान गांवों में सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगें। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम ज्यादा होता है। ऐसे में पुलिस मितान की बड़ी भूमिका होगी। हमने इन पुलिस मितान साथियों को हेलमेट और फर्स्ट ऐड किट भी वितरित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हेलमेट पहनना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में हेड इंजरी ही ज्यादा होती है। इसकी वजह से लोगों की जान जाती है। अतः हमें दुपहिया वाहनों में अनिवार्यतः हेलमेट पहनना चाहिए और चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट अवश्य लगाना चाहिए। वाहन चालक हमेशा ध्यान रखें कि वे वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात ना करें और ट्रैफिक सिग्नल ना तोड़े।

कार्यक्रम में परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आज का कार्यक्रम मात्र एक औपचारिकता ना रहे बल्कि सड़क सुरक्षा का जनांदोलन बने। सड़क दुर्घटना में तत्काल सहायता करने वाले राहगीरों को 25 हजार की राशि का प्रावधान किया गया है। सड़क दुर्घटना प्रभावितों के इलाज के लिए डेढ़ लाख के निःशुल्क इलाज की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ये महीना कई माताओं की गोद सूनी होने से बचाने का महीना है। हेलमेट पहनना अब अनिवार्य किया जाना चाहिए। एक्सीडेंट से कई परिवार उजड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। हेलमेट को अनिवार्य करने से वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात करना भी बंद होगा और लोगों की जान बचेगी।

कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा मितान साथियों को 25 हजार व 5 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई और सड़क सुरक्षा के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले चिकित्सा अधिकारियों, यातायात सिपाहियों, वाहनचालकों, भारत स्काउट गाइड के सदस्यों, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, एनएचएआई के अधिकारी तथा एनएसएस व एनसीसी कैडेट्स को भी सम्मानित किया गया ।

मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के अंतर्गत आयोजित की गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी में सड़क सुरक्षा पर स्कूल व कॉलेज के बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग और साइंस मॉडल की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक सुनील सोनी और पुरंदर मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, परिवहन सचिव एस प्रकाश, अपर परिवहन आयुक्त डी रविशंकर सहित बड़ी संख्या में स्काउट गाइड व एनसीसी कैडेट्स और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

उपनिषद से एआई तक : भाषा, ज्ञान और तकनीक पर हुआ मंथन

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 रायपुर : नवा रायपुर में आयोजित साहित्य महोत्सव 2026 के दूसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप पर साहित्य : उपनिषद से एआई तक विषय पर केंद्रित परिचर्चा आयोजित हुई। इस परिचर्चा में वक्ता के रूप में ट्रिपल आईटी नवा रायपुर के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास, वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर, वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल शामिल हुए। परिचर्चा के सूत्रधार साहित्यकार संजीव तिवारी रहे, परिचर्चा का यह सत्र कवि जगन्नाथ प्रसाद भानु को समर्पित रहा। इस अवसर पर डॉ. गोपाल कमल द्वारा लिखित पुस्तक, गुणाढ्य की गुणसूत्र कथा का विमोचन किया गया।


ट्रिपल आईटी के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास ने कहा कि एआई का जो रूप आज हम देख रहे हैं, इसके पीछे विगत 30–40 वर्षों की मेहनत है। एआई निरंतर निखरता जा रहा है। तकनीक खुद को परिमार्जित करती जाती है, यह प्रक्रिया सतत है। एआई नेट पर उपलब्ध जानकारी, आंकड़ों और सूचनाओं का विश्लेषण कर हमें डिस्क्रिप्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में समझाता है। धीरे-धीरे एआई निखरा और प्रिडिक्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में काम करने लगा। आज एआई भविष्य की चीजों को भी बताता है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2022 में पहली बार चैट जीपीटी आया। सिर्फ तीन साल में एआई का रूप कितना भव्य हुआ है, आप देखिए। हम एआई के भविष्य की अब कल्पना भी नहीं कर सकते। भाषा के मानकीकरण में एआई की क्या भूमिका होगी, यह हम सभी के बीच एक बड़ी चुनौती है।

वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर ने परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि गीता के 18 अध्यायों में सभी तरह के ज्ञान का समावेश है। एआई को लेकर लोग चिंतित हैं कि एआई का फ्यूचर क्या होगा। एआई के आधार पर जापान ने जब रोबोट बनाया तो वह स्वयं को नेगेटिव प्रॉम्प्ट देने लगा। एआई कमांड और प्रॉम्प्ट पर काम करता है। एआई वही बताता है जो नेट पर उपलब्ध है। श्री केतकर ने कहा कि हमारे ऋषि सूचना की नहीं, ज्ञान की बात करते थे। वे एआई से बहुत ज्यादा आगे थे। यदि हम मैकाले की शिक्षा पद्धति की बात करें तो उसने हमें अच्छा उत्तर लिखने वाला बना दिया। प्रश्न जितना गहरा होगा, उत्तर भी उतना ही गहरा होगा। मानव के ज्ञान का उद्देश्य प्रकृति पर विजय पाना नहीं, उसके नियमों को समझकर अपने आपको प्रकृति के अनुरूप ढालना था।

वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल ने सत्र में अपने संबोधन में कहा कि हमारे साथ में सोचने की परंपरा ऋग्वेद से आती है। हम सभी एआई में डीप लर्निंग की बात करते हैं। भाषा कहां से आती है, वह आकार कैसे लेती है, मनुष्य भाषा तक कैसे पहुंचा, इस पर होने वाले कार्य और अध्ययन को साइकोलिंग्विस्टिक के नाम से जाना जाता है। जेनेटिक कोड के जरिए ही हम नई चीजों को सीख पाते हैं। डॉ. गोपाल ने कहा कि सोमदेव ने कथासरितसागर के नाम से संस्कृत में पुस्तक लिखी, इसे हम गुणाढ्य के रूप में देख सकते हैं। संस्कृत के लगभग 3900 सूत्र हैं। महेश्वर सूत्रों से हम सभी शब्दरूप और धातुरूप बना सकते हैं। एआई में हम जीरो से एक का सहारा लेते हैं। गुणसूत्र की भाषा से एआई के संचार नेटवर्क को गढ़ा गया है।

परिचर्चा के सूत्रधार, साहित्यकार श्री संजीव तिवारी ने कहा कि मेरे समझ में उपनिषद और एआई एक जैसे हैं। वेद ज्ञान का खजाना है, जिसका भाष्य उपनिषद है। एआई भी प्रश्नोत्तर शैली में उत्तर देता है। हमारा उपनिषद एआई का मूल है। उन्होंने कहा कि ट्रिपल आईटी हैदराबाद जैसे संस्थान एआई को लेकर काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए दूसरे संस्थान भी काफी अच्छा काम कर रहे हैं, ताकि एआई में बेहतर से बेहतर रूप में छत्तीसगढ़ी भाषा निखरकर आ सके। इस अवसर पर गणमान्य साहित्यकार एवं श्रोता उपस्थित रहे।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी छत्तीसगढ़ की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को देगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ का बरसों पुराना सपना आज साकार हो गया है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि यह परियोजना राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा, निवेश के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। 


यह परियोजना आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के ग्राम माना-तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण की आधारशिला रखी। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों, फिल्म कलाकारों, निर्माता-निर्देशकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के अभिनय और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के माध्यम से प्रदेश के हजारों हुनरमंद कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। स्थानीय फिल्म निर्माताओं को फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी तकनीकी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार में प्रदेश की कला और कलाकारों को उचित सम्मान मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने भूमिपूजन के साथ ही फिल्म निर्माण और कन्वेंशन सेंटर से संबंधित विभाग को चार प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में फिल्म निर्माण गतिविधियों को नई गति मिलेगी और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को बड़े पर्दे पर स्थान मिलेगा।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज का यह अवसर छत्तीसगढ़ पर्यटन एवं फिल्म विकास उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक निर्माण परियोजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि राज्य के सांस्कृतिक, आर्थिक और रचनात्मक भविष्य की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण राज्य है और इस पहल से पर्यटन के साथ-साथ फिल्म उद्योग को भी नया आयाम मिलेगा। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ फिल्म निर्माताओं के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। हमारी स्पष्ट योजना है कि आगामी दो वर्षों के भीतर इन परियोजनाओं को पूर्ण कर राज्य को समर्पित किया जाएगा।

इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल तथा पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने फिल्म सिटी के प्रस्तावित मास्टर प्लान का किया अवलोकन

चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने परियोजना के प्रस्तावित मास्टर प्लान का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं तथा परियोजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी देखी।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन अवसर पर पर्यटन विभाग को मिले 4 प्रस्ताव

चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन के साथ ही पर्यटन विभाग को फिल्म निर्माण एवं कन्वेंशन सेंटर में इकाइयों की स्थापना हेतु चार प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। समारोह के दौरान ये प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपे गए।

गदर फिल्म के निर्माता श्री अनिल शर्मा ने अपनी आगामी फिल्म का निर्माण चित्रोत्पला फिल्म सिटी में करने का प्रस्ताव दिया। इंडिया एक्सपोजीशन मार्ट लिमिटेड के चेयरमेन श्री राकेश कुमार ने ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में इंटरनेशनल एक्जीबिशन सेंटर एवं ट्रेड मार्ट के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के चेयरमेन श्री नीरज खन्ना ने यहां वर्ल्ड क्लास हैंडीक्राफ्ट्स एंड गिफ्ट फेयर आयोजित करने का प्रस्ताव दिया। वहीं एटी फिल्म्स हॉलीवुड से श्री आशुतोष वाजपेयी ने हॉलीवुड फिल्मों एवं स्ट्रीमिंग वीडियो कंटेंट को चित्रोत्पला फिल्म सिटी में लाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा।

उल्लेखनीय है कि राज्य में फिल्म टूरिज्म की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की “कैपिटल इन्वेस्टमेंट हेतु राज्यों को विशेष सहायता – ग्लोबल स्तर के आइकॉनिक पर्यटन केंद्रों का विकास” योजना के अंतर्गत इन दोनों परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के तहत चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण हेतु 95.79 करोड़ रुपये तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण हेतु 52.03 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं का क्रियान्वयन पीपीपी (पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के अंतर्गत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निजी क्षेत्र से लगभग 300 करोड़ रुपये के निवेश की भी संभावना है। परियोजनाओं को दो वर्षों की समयावधि में पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाएंगे। फिल्म सिटी के निर्माण से छत्तीसगढ़ में स्थानीय एवं अन्य वाणिज्यिक फिल्मों और वेब सीरीज़ के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य के प्राकृतिक दृश्य, पर्यटन स्थल एवं समृद्ध संस्कृति फिल्म शूटिंग के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।

फिल्म सिटी में गांव, शहर एवं गलियों के सेट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, जेल एवं पुलिस चौकी, स्कूल-कॉलेज, मंदिर एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों के सेट, स्कल्प्चर गार्डन, शॉपिंग स्ट्रीट, प्रोडक्शन ऑफिस, स्टूडियो, प्रशासनिक भवन एवं पार्किंग विकसित की जाएगी। साथ ही पर्यटकों के लिए टॉय म्यूजियम, स्नो वर्ल्ड, होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीप्लेक्स एवं एक्सपीरियंस सेंटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में लगभग 1500 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक कन्वेंशन हॉल विकसित किया जाएगा, जिसमें मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, बैंक्वेट, रेस्टोरेंट, अतिथि कक्ष, जिम, लाइब्रेरी, स्वीमिंग पूल एवं प्रशासनिक ब्लॉक जैसी सुविधाएं होंगी।

फिल्म शूटिंग, फेस्टिवल और रोजगार के नए अवसर

उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ में न्यूटन, जहानाबाद, कौन प्रवीण तांबे, द ग्रेट इंडियन मर्डर, ग्राम चिकित्सालय जैसी फिल्मों एवं वेब सीरीज़ की शूटिंग हो चुकी है, जिससे राज्य में वाणिज्यिक फिल्म निर्माण की व्यापक संभावनाएं स्पष्ट होती हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से स्थानीय कलाकारों एवं तकनीशियनों को नए अवसर प्राप्त होंगे। फिल्म फेस्टिवल, अवॉर्ड शो एवं अन्य मनोरंजन कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं भी सुदृढ़ होंगी। इसके साथ ही राज्य के पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार होगा तथा फिल्म टूरिज्म के साथ सामान्य पर्यटन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सुप्रसिद्ध अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने की सौजन्य मुलाकात

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध फिल्म एवं टीवी अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नीतीश भारद्वाज का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट से निर्मित महुआ वृक्ष की कलाकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट की।


मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की जानकारी भी साझा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा उपस्थित थे।

स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं साधारण मनुष्य के असाधारण जीवन का दस्तावेज

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 रायपुर : नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने श्री शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया।


परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि श्री शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है।


नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि श्री शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं।

जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार श्री सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने श्री शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग श्री शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं।

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक श्री अनुभव शर्मा ने कहा कि श्री विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि श्री शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं।

अभिनेत्री टी.जे. भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार श्री विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को श्री शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं।

परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।

CG NEWS : नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 साल का सश्रम कारावास

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 दुर्ग/पाटन। दुर्ग जिले के पाटन स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है।


पाटन के अपर सत्र न्यायाधीश दुलार सिंह निर्मलकर ने मामले में आरोपी निखिल कुर्रे को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

क्या है पूरा मामला

यह घटना उस समय की है जब पीड़िता अपनी सहेली के घर से लौट रही थी। रास्ते में आरोपी निखिल कुर्रे ने उसे बहला-फुसलाकर अपने झांसे में लिया और बाइक पर बैठाकर अपने साथ ले गया। आरोपी पहले पीड़िता को रायपुर के पास अपनी दीदी के घर लेकर गया, जहां वह एक दिन रुका।

इसके बाद आरोपी पीड़िता को ट्रेन से नागपुर ले गया। नागपुर में आरोपी को पीड़िता के नाबालिग होने की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उसने जबरन उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

पुलिस ने नागपुर से किया बरामद

घटना के बाद पीड़िता के पिता ने थाना उतई में बेटी के गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़िता को नागपुर से सुरक्षित बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार किया।

संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई

जांच में सामने आया कि आरोपी को उसके परिजनों का संरक्षण मिला था। इस पर पुलिस ने आरोपी की दीदी विकेश मारकंडे, जीजा दिनेश बघेल और एक अन्य दीदी करुणा बघेल को भी गिरफ्तार किया।

कोर्ट का फैसला

पाटन पॉक्सो न्यायालय में चली सुनवाई के दौरान शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक शेखर वर्मा ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने पीड़िता, उसके परिजनों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया।

छत्तीसगढ़ के युवाओं को मिलेगा नया मंच, नवा रायपुर में बनेगी वर्ल्ड-क्लास फिल्म सिटी

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 Film City in Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अब राज्य को फिल्म उद्योग के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। राजधानी नवा रायपुर में ‘चित्रोत्पला इंटरनेशनल फिल्म सिटी’ का निर्माण किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 24 जनवरी 2026 को करेंगे।


यह फिल्म सिटी राज्य के सांस्कृतिक, आर्थिक और रचनात्मक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी फिल्म सिटी

नवा रायपुर में बनने वाली चित्रोत्पला इंटरनेशनल फिल्म सिटी को हाईटेक और वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। यहां आधुनिक फिल्म स्टूडियो, आकर्षक आउटडोर शूटिंग लोकेशन, अत्याधुनिक पोस्ट-प्रोडक्शन यूनिट, ऑडिटोरियम, होटल और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे।

प्रशिक्षण केंद्रों में एक्टिंग, ड्रामा, फिल्म प्रोडक्शन और तकनीकी कौशल से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे स्थानीय युवाओं को फिल्म और मीडिया इंडस्ट्री में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

100 एकड़ में होगा विकास, 3 साल में तैयार

यह फिल्म सिटी लगभग 100 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित की जाएगी और इसके तीन वर्षों में पूर्ण होने की उम्मीद है। इसके निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ फिल्म सिटी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी नई पहचान मिलेगी।

देश-विदेश के फिल्म निर्माता और कलाकार यहां शूटिंग के लिए आकर्षित होंगे, जिससे राज्य में पर्यटन, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

रोजगार और स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा लाभ

इस परियोजना से स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को व्यापक अवसर मिलेंगे। फिल्म, मीडिया और मनोरंजन उद्योग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में हजारों नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, चित्रोत्पला इंटरनेशनल फिल्म सिटी छत्तीसगढ़ को फिल्म उद्योग के नए हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम साबित होगी।

दंतेश्वरी मंदिर में बड़ी चोरी, सोने-चांदी के आभूषण ले उड़े चोर

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 जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर में देर रात चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। अज्ञात चोरों ने मंदिर के पीछे स्थित दरवाजे का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया और माता दंतेश्वरी के सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषण चोरी कर लिए। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश और चिंता का माहौल है।


घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मंदिर परिसर को सुरक्षित कर लिया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिसमें एक संदिग्ध चोर कैमरे में कैद होने की बात सामने आई है। इसके अलावा, शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है, ताकि चोरों की आवाजाही का पता लगाया जा सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। टीम टूटे ताले, दरवाजों और अन्य भौतिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही चोरी में शामिल आरोपियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच प्रक्रिया के चलते सुरक्षा कारणों से मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने की अपील की है।

राजधानी में दो दिन पूरी तरह बंद रहेंगी मीट दुकानें, प्रशासन ने जारी किया आदेश

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 रायपुर। गणतंत्र दिवस और महात्मा गांधी निर्वाण दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में मांस-मटन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। नगर निगम प्रशासन ने 26 जनवरी और 30 जनवरी 2026 को पूरे नगर निगम क्षेत्र में मांस-मटन की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्देशों के तहत लिया गया है।


प्रशासन के आदेश के अनुसार, इन दोनों पावन अवसरों पर शहर में किसी भी प्रकार का मांस-मटन बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सभी जोन के स्वास्थ्य अधिकारी और स्वच्छता निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी करेंगे। मांस की दुकानों के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर भी विशेष नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार से आदेश का उल्लंघन न हो।

महापौर के निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई दुकान, होटल या ढाबा प्रतिबंधित तिथियों पर मांस-मटन की बिक्री करते पाया गया, तो सामग्री जब्त कर संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नगर निगम प्रशासन ने सभी व्यापारियों, होटल संचालकों और दुकानदारों से आदेश का पालन करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय सार्वजनिक भावनाओं, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय व ऐतिहासिक अवसरों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

प्रशासन ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि रायपुर में मांस बिक्री प्रतिबंध का पालन कर शहर में शांति और सद्भाव बनाए रखने में सहयोग करें।

अस्पताल लापरवाही का मामला, इलाज के दौरान महिला की मौत, दो गिरफ्तार

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 दुर्ग। दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में अस्पताल की लापरवाही से महिला की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ अपराध दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मृतका के बेटे की शिकायत और पुलिस जांच के आधार पर की गई है।


सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि चिरज वर्मा द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें उन्होंने अपनी मां पदमाबाई वर्मा (57 वर्ष) की मौत के लिए अस्पताल की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया था।

शिकायत के अनुसार, 10 अक्टूबर 2025 को पदमाबाई वर्मा घर के आंगन में गिर गई थीं, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई और वे चलने में असमर्थ हो गईं। इसके बाद 11 अक्टूबर 2025 को उन्हें धमधा स्थित श्रेया अस्पताल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर में भर्ती कराया गया। 13 अक्टूबर को उनके पैर का ऑपरेशन किया गया।

परिजनों के अनुसार, 14 अक्टूबर को ऑपरेशन के बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ गई और सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने स्थिति गंभीर बताकर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। इसके बाद एम्बुलेंस के माध्यम से उन्हें शंकराचार्य अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिजनों ने आरोप लगाया कि रेफर करने से पहले उनकी सहमति नहीं ली गई और एम्बुलेंस में न तो डॉक्टर मौजूद था और न ही पर्याप्त चिकित्सकीय देखरेख की व्यवस्था थी। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित इलाज और निगरानी की जाती तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।

पुलिस जांच में यह पाया गया कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर द्वारा उपेक्षापूर्ण और लापरवाहीपूर्ण चिकित्सकीय कार्य किया गया, जिसके चलते महिला की मृत्यु हुई। इसके आधार पर थाना धमधा में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

डिजिटल साहित्य पर मंथन, रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में प्रकाशकों की चुनौतियों पर चर्चा

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 रायपुर : रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत “आदि से अनादि तक” थीम पर आयोजित सत्रों की श्रृंखला में अनिरुद्ध नीरव मंडप में एक विचारोत्तेजक चर्चा सत्र संपन्न हुआ। “डिजिटल साहित्य : प्रकाशकों के लिए चुनौती” विषय पर केंद्रित इस सत्र में डिजिटल युग में साहित्य प्रकाशन की बदलती प्रकृति, संभावनाओं और चुनौतियों पर गंभीर विमर्श किया गया।


सत्र में प्रभात प्रकाशन, दिल्ली के प्रतिनिधि प्रभात कुमार ने डिजिटल माध्यमों के प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि ई-बुक्स, ऑडियो बुक्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने साहित्य को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के नए अवसर प्रदान किए हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल परिवर्तन के चलते पारंपरिक प्रकाशन मॉडल को नई प्रतिस्पर्धा और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

सत्र के सूत्रधार डॉ. सुधीर शर्मा वैभव प्रकाशन, रायपुर ने डिजिटल तकनीक, कॉपीराइट संरक्षण, पाठकों की बदलती रुचियों और साहित्यिक गुणवत्ता बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर संवाद को आगे बढ़ाया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल माध्यम को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में अपनाकर नवाचार के जरिए साहित्य प्रकाशन को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

महिला पत्रकार अपने साहस से कर रहीं लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गुजरात के अध्ययन भ्रमण से लौटे महिला पत्रकारों के दल ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिला पत्रकार अपने साहस से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत कर रही हैं। मैं उन सभी महिलाओं के साहस को नमन करता हूं जो पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे में रह कर समाज में सकारात्मक योगदान दे रही हैं। 


मुख्यमंत्री को महिला पत्रकारों के दल ने गुजराती अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर पहली बार छत्तीसगढ़ से महिला पत्रकारों के दल को अन्य राज्य के अध्ययन भ्रमण पर भेजने के लिए उनका आभार जताया। महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि विगत वर्ष महिला दिवस पर उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष महिला पत्रकारों को भी अध्ययन भ्रमण पर भेजे जाने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्हें बहुत खुशी है कि मुख्यमंत्री ने उन सभी की इस इच्छा को पूरा किया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिलाओं से चर्चा के दौरान कहा कि इस अध्ययन भ्रमण के दौरान आप सभी ने गुजरात विधानसभा, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, राजकोट, पोरबंदर सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को समझा है। आने वाले समय में ये अनुभव आपकी कलम को और भी समृद्ध करेगा, जिसका लाभ पत्रकारिता जगत के साथ ही आपके पाठकों भी मिलेगा। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का यह तीसरा वर्ष है। इस वर्ष को हम महतारी गौरव वर्ष के रूप में मना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने महिला पत्रकारों से उनके अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को किताब के रूप संजोने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह ना सिर्फ आपके लिए इस भ्रमण को हमेशा के लिए यादगार बनाएगा बल्कि अन्य लोग भी आपकी किताब को पढ़कर गुजरात के बारे में अपनी जानकारी बढ़ा सकेंगे। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात एक समृद्ध और मॉडल राज्य है। गुजरात की एक खासियत यह भी है कि वहां सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। अमूल सहकारिता का एक जीवंत उदाहरण है, जिसमें मुख्यतः महिलाएं शामिल है। छत्तीसगढ़ में भी हम सहकारिता को बढ़ावा दे रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह जी देश के सहकारिता मंत्री भी हैं। उनके मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में भी सहकारिता के लिए बहुत कार्य हो रहा है। सहकारिता इस बात का प्रतीक है कि मिलकर करने से बड़ा काम भी आसान होता है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हम सभी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर रहे हैं। मंत्रालय में अब ई-फाइल प्रणाली लागू है। मुख्यमंत्री  साय ने महिला पत्रकारों से अपनी गुजरात यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि गुजरात का सीएम डैशबोर्ड देश का सबसे एडवांस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम है जिसके माध्यम से एक जगह बैठकर ही पूरे प्रदेश पर नजर रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के विकास की नींव रखी थी, हम गुजरात जैसी व्यवस्थाओं को यहां भी लागू कर रहे हैं। 

मुख्यमंत्री से महिला पत्रकारों ने गुजरात अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को साझा किया। सुश्री निशा द्विवेदी ने कहा कि इस टूर के माध्यम से उन्हें गुजरात के समृद्ध इतिहास और संस्कृति से रुबरू होने का अवसर मिला। सुश्री दामिनी बंजारे ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके 8 वर्षों के पत्रकारिता के करियर में पहली बार है जब महिलाओं का दल अध्ययन भ्रमण पर गया है। कोरिया की सुश्री नूरजहां ने बताया कि यह पहली बार है जब महिलाओं को इस रूप में प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी महिला पत्रकारों को ये मौका मिलता रहेगा। 

मुख्यमंत्री को महासमुंद की पत्रकार सुश्री उत्तरा विदानी ने बताया कि गुजरात विधानसभा के भ्रमण में बहुत अच्छा लगा। वहां की खास बात यह देखने को मिली कि बच्चों सहित आमजन को विधानसभा की कार्यवाही को सुगमता से देखने का अवसर दिया जाता है। दुर्ग की पत्रकार सुश्री कोमल धनेसर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में 25 वर्षों में यह पहला अवसर है जब महिला पत्रकारों को ऐसा मौका मिला है। उन्होंने कहा कि जब हम भ्रमण पर निकले थे तो बहुत सारे अनजाने चेहरे थे और लौटे हैं तो नए दोस्त और नई बॉन्डिंग के साथ। 

रायपुर की पत्रकार सुश्री नेहा श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को बताया कि हम सभी पत्रकार अलग- अलग संस्थानों में काम करते हैं। व्यस्तता की वजह से हमारी बात नहीं हो पाती। ये टूर रूटीन से अलग एक अनुभव रहा जिसमें नये दोस्त बने। सुश्री रचना नितेश ने मुख्यमंत्री को बताया कि ये अनुभव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध करने वाला था। उन्होंने कहा कि एक खास बात ये रही कि हमारे दल में महिला पत्रकारों की 3 पीढ़ियां शामिल थीं। हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। 

बस्तर की पत्रकार प्रियंका जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पहचान बस्तर से है। टूर पर जाते समय नए माहौल की वजह से मन में कई आशंकाएं थीं। मगर बाद में यह अनुभव बहुत सुखद रहा। कोरबा की सुश्री राजश्री गुप्ते ने बताया कि 8 दिनों के इस टूर में ऐसा लगा कि हमने अपने बचपन को फिर से जी लिया है। 

मुख्यमंत्री श्री साय को महिला पत्रकारों ने बताया कि कई लोगों की यह पहली हवाई यात्रा भी थी। जिस पर मुख्यमंत्री ने बड़ी आत्मीयता से पत्रकारों से कहा कि जो पहली बार हवाई यात्रा करते हैं उन्हें पार्टी देनी पड़ती है। मुख्यमंत्री की बात सुनकर पूरे सभागार में हंसी गूंज उठी। 

महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री  साय से एक रोचक वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया कि गुजरात भ्रमण के दौरान उनका इंटरेक्शन कुछ फ्रेंच पर्यटकों से हुआ। यह जानने पर की महिला पत्रकार छत्तीसगढ़ से हैं, फ्रेंच पर्यटक ने कहा- ओह सीएम विष्णुदेव छत्तीसगढ़ ! ये सुनकर उन्हें बहुत गर्व हुआ कि छत्तीसगढ़ राज्य को विदेशी नागरिक भी मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नाम से पहचान रहे हैं। 

महिला पत्रकारों ने जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों का भी आभार जताया जिन्होंने आठ दिवसीय इस अध्ययन भ्रमण में उनका पूरा ख्याल रखा। इस अवसर पर  आयुक्त जनसंपर्क डॉ रवि मित्तल, अपर संचालक जनसंपर्क  संजीव तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह सहित जनसंपर्क विभाग के अधिकारीगण और महिला पत्रकार उपस्थित थे।

Mahasamund : अवैध धान परिवहन पर संयुक्त टीम की कार्रवाई, कुल 230 कट्टा धान जप्त

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 महासमुंद : कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार जिले में अवैध धान परिवहन एवं भंडारण पर कार्रवाई तथा राइस मिलों का भौतिक सत्यापन कार्य सतत जारी है। इसी क्रम में बीती रात एवं आज जिले में अवैध धान परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध सघन कार्रवाई कर 230 कट्टा धान जप्त किया गया।


सरायपाली विकासखंड अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनुपमा आनंद के नेतृत्व में संयुक्त टीम द्वारा कैदवा नवागढ़ क्षेत्र में माज़दा वाहन से परिवहन किए जा रहे 80 बोरे धान को पकड़कर कार्रवाई की गई तथा धान जब्त कर संबंधित थाना के सुपुर्द किया गया।

वहीं बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत डिप्टी कलेक्टर शुभम देव के नेतृत्व में जय अम्बे राइस मिल, तेन्दूकोना का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसमें 12,887 बोरा धान कम पाया गया। मामले की जांच जारी है। इसी क्रम में तेन्दूकोना में 80 कट्टा धान जब्त कर तेन्दूकोना थाना के सुपुर्द किया गया। इसके अलावा बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम चनाट में अवैध रूप से धान परिवहन करते हुए 70 पैकेट धान पकड़े गए, जिस पर मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

 

गणतंत्र के अमृतकाल में साहित्य उत्सव का आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक: मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति  हरिवंश के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया।


उप सभापति  हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है तथा इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उप सभापति श्री हरिवंश ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है।

उपसभापति  हरिवंश ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। देश की आत्मनिर्भरता से दुनिया को नई दिशा मिली है और इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने देशभर से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है।


मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे। माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा बिलासपुर जेल में रचित पुष्प की अभिलाषा जैसी रचनाओं ने देशवासियों को प्रेरित किया। माधवराव सप्रे की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है और यही साहित्य की वास्तविक शक्ति है।

मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी। “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियाँ आज भी जनमानस को संबल देती हैं।

मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी काल के दौरान साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि आज जब बड़ी संख्या में युवा साहित्यप्रेमी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में साहित्य का वातावरण उजला और सशक्त है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय आयोजन एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को भी नमन किया।

उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया तथा भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा।

आयोजन के पश्चात अतिथियों एवं साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

रायपुर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू, संजीव शुक्ला बने पहले कमिश्नर

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 रायपुर। रायपुर की पुलिस व्यवस्था के इतिहास में गुरुवार की रात एक नया अध्याय जुड़ गया। राज्य सरकार ने बड़े प्रशासनिक फैसले के तहत राजधानी रायपुर को उसका पहला पुलिस कमिश्नर दे दिया है।


गुरुवार देर रात जारी आदेश में बिलासपुर रेंज के आईजी आईपीएस संजीव शुक्ला को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट का पहला कमिश्नर नियुक्त किया गया है। यह आदेश गृह (पुलिस) विभाग मंत्रालय के सचिव हिम शिखर गुप्ता के हस्ताक्षर से जारी हुआ।

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर और ग्रामीण एसपी की नियुक्ति

सरकार ने 2009 बैच के आईपीएस अमित तुकाराम कांबले को रायपुर का अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया है। वहीं रेल एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को रायपुर ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

एसएसपी स्तर पर तबादले

रायपुर के एसएसपी लाल उम्मेद सिंह का तबादला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर किया गया है।
वहीं जशपुर के एसएसपी शशिमोहन सिंह को रायगढ़ भेजा गया है।

आईजी और एसपी स्तर पर बड़ा फेरबदल

जारी आदेश के अनुसार—

  • दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग को बिलासपुर रेंज भेजा गया
  • अभिषेक शांडिल्य को राजनांदगांव से दुर्ग रेंज
  • बालाजी राव सोमावार को पुलिस मुख्यालय से राजनांदगांव रेंज
  • रायगढ़ एसपी दिव्यांग पटेल को रेल एसपी बनाया गया

रायपुर कमिश्नरी में डीसीपी की पदस्थापना

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में निम्न अधिकारियों को पुलिस उपायुक्त (DCP) नियुक्त किया गया है—

  • उमेश प्रसाद गुप्ता – डीसीपी (मध्य)
  • संदीप पटेल – डीसीपी (पश्चिम)
  • मयंक गुर्जर – डीसीपी (उत्तर)
  • विकास कुमार – डीसीपी (ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल)
  • स्मृतिक बघेरा – डीसीपी (क्राइम एवं साइबर)

इसके अलावा कुल 24 अधिकारियों की रायपुर कमिश्नरी में पदस्थापना की गई है।

पहले भी रायपुर में सेवाएं दे चुके हैं संजीव शुक्ला

आईपीएस संजीव शुक्ला इससे पहले रायपुर में एसपी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। स्थानीय प्रशासनिक अनुभव और मजबूत कार्यशैली के लिए उनकी पहचान है।
जनवरी 2027 में सेवानिवृत्ति के चलते उन्हें लगभग 11 माह का कार्यकाल मिलेगा, जिसमें कमिश्नरी व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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