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भारत सरकार ने समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए, अंडमान-निकोबार को ब्लू इकोनॉमी हब बनाने की दिशा में पहल

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भारत सरकार अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को ब्लू इकोनॉमी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती और समुद्री मत्स्य पालन को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। इस दिशा में वैज्ञानिक तथा संस्थागत स्तर पर कई महत्त्वपूर्ण पहल की जा रही हैं।

परिषद् वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान (CSIR) के अंतर्गत केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (CSMCRI) द्वारा “अंडमान तट पर व्यावसायिक समुद्री शैवाल की पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन एवं पायलट स्तर पर खेती” परियोजना को लागू किया गया है। इस परियोजना के तहत समुद्री शैवाल खेती के लिए 25 विभिन्न स्थानों का विस्तृत अध्ययन किया गया, जिससे सर्वाधिक अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों और पोषक तत्वों वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सके।

इस अध्ययन के अंतर्गत Gracilaria edulis, Gracilaria debilis, Gracilaria salicornia तथा Kappaphycus alvarezii प्रजातियों का परीक्षण फ्लोटिंग बांस राफ्ट, ट्यूब नेट, नेट बैग और मोनो-लाइन जैसी तकनीकों से किया गया। इसके परिणामस्वरूप हाठी टापू (दक्षिण अंडमान), मायाबंदर (मध्य अंडमान) और दिगलीपुर (उत्तर अंडमान) में Gracilaria edulis और Kappaphycus alvarezii के साथ व्यावसायिक समुद्री शैवाल खेती सफलतापूर्वक स्थापित की गई है।

इसके अतिरिक्त, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) ने अंडमान सागर में पहली बार खुले समुद्र में समुद्री मत्स्य पालन और गहरे पानी में समुद्री शैवाल खेती की परियोजना प्रारंभ की है। साथ ही, CSIR द्वारा शुरू किए गए “सीवीड मिशन” का उद्देश्य समुद्री शैवाल खेती को लाभकारी, पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ और बड़े पैमाने पर अपनाने योग्य बनाना है।

सीवीड मिशन के अंतर्गत तमिलनाडु में 800 से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने Kappaphycus की खेती को आजीविका के रूप में अपनाया है। इस शोध एवं विकास के परिणामस्वरूप एक नया समुद्री शैवाल उद्योग विकसित हुआ है, जिससे रोजगार के नए अवसर और अतिरिक्त आय के स्रोत सृजित हुए हैं। समुद्री शैवाल आधारित तकनीकों को 12 कंपनियों को व्यावसायीकरण के लिए हस्तांतरित किया गया है। अब तक लगभग 5,000 मछुआरों को तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के तहत प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

सरकार ने महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के लिए लक्षित वित्तीय और संस्थागत सहायता उपलब्ध कराई है। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के माध्यम से प्रशिक्षण, प्रदर्शन, मूल्य संवर्धन, स्थानीय प्रसंस्करण और विपणन के लिए सहायता दी जा रही है। मत्स्य विभाग (DoF) द्वारा बीज/रोपण सामग्री के आयात और उत्पादन से संबंधित तकनीकी दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं, जिनमें मछुआर परिवारों और महिला SHGs को प्राथमिक लाभार्थी के रूप में मान्यता दी गई है।

सरकार ने वर्ष 2030 तक समुद्री शैवाल उत्पादन को 11.2 लाख टन तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे मुख्यतः प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत लागू किया जा रहा है। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ₹194.09 करोड़ का निवेश किया गया है, जिसमें तमिलनाडु में बहुउद्देशीय सीवीड पार्क और दमन एवं दीव में सीवीड ब्रूड बैंक की स्थापना शामिल है। इसके तहत 46,095 सीवीड राफ्ट और 65,330 मोनो-लाइन ट्यूब नेट की स्वीकृति दी जा चुकी है।

केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI), मंडपम केंद्र को समुद्री शैवाल खेती के लिए उत्कृष्टता केंद्र और नाभिकीय प्रजनन केंद्र (Nucleus Breeding Centre) के नोडल संस्थान के रूप में नामित किया गया है। इससे 20,000 से अधिक किसानों को लाभ और 5,000 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। पिछले पाँच वर्षों में CMFRI द्वारा 5,268 राफ्ट और 112 मोनो-लाइन ट्यूब नेट स्थापित किए गए तथा 14,000 से अधिक हितधारकों के लिए 169 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 5 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दी।

NE-RACE पोर्टल से सिक्किम सहित उत्तर-पूर्व के किसानों को राष्ट्रीय बाजार से सीधा लाभ

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 उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के किसानों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया नॉर्थ ईस्टर्न रीजन एग्री-कमोडिटी ई-कनेक्ट (NE-RACE) पोर्टल पूरी तरह से क्रियाशील है और किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), स्वयं सहायता समूहों (SHGs) एवं सहकारी संस्थाओं को देशभर के खरीदारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है।

23 जनवरी 2026 तक इस पोर्टल पर 6,807 विक्रेता/किसान/किसान उत्पादक कंपनियां और 735 खरीदार पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि 1,797 कृषि-उत्पाद सूचीबद्ध किए गए हैं। पोर्टल के माध्यम से अब तक कुल ₹895.56 लाख का कारोबार संभव हुआ है।

NE-RACE प्लेटफॉर्म से सिक्किम सहित उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसानों को विशेष लाभ मिला है। इस पोर्टल के जरिए सिक्किम के किसानों ने सीधे राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाते हुए 130 मीट्रिक टन कृषि-उत्पाद, जिसकी कीमत ₹54.40 लाख है, की बिक्री की है।

सिक्किम में किसानों को जोड़ने और उन्हें संचालन संबंधी सहायता देने के लिए NE-RACE के अंतर्गत बहुभाषी हेल्पडेस्क और हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है। 23 जनवरी 2026 तक 251 किसान सिक्किम से इस पोर्टल पर पंजीकृत किए जा चुके हैं।

राज्य में अब तक पांच आउटरीच एवं ऑनबोर्डिंग कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा, किसानों और खरीदारों के बीच संपर्क को और मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय खरीदार-विक्रेता बैठकों जैसे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं।

NE-RACE प्लेटफॉर्म खरीदार-विक्रेता मिलान (मैचमेकिंग) के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराता है। इसके लिए बहुभाषी हेल्पडेस्क, फील्ड-स्तरीय सहयोग और राज्य समन्वयकों की व्यवस्था की गई है, जो किसानों को पंजीकरण, समस्याओं के समाधान और संवाद में सहायता प्रदान करते हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सिक्किम के किसानों की डिजिटल बाजार तक पहुंच को मजबूत करना और उनकी बाजार तैयारी को बेहतर बनाना है।

यह जानकारी केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

न्यूयॉर्क में सामाजिक विकास आयोग के इतर भारत–ग्वाटेमाला वार्ता, द्विपक्षीय सहयोग को नई मजबूती

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न्यूयॉर्क में आयोजित सामाजिक विकास आयोग (Commission for Social Development) की बैठक के इतर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने ग्वाटेमाला की सामाजिक विकास उप-मंत्री महामहिम क्लाउडिया टेरेसा वालेंज़ुएला लोपेज़ से मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच गर्मजोशीपूर्ण और पारस्परिक लाभकारी साझेदारी को और सशक्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने महिला-नेतृत्व वाले और समावेशी विकास के लिए भारत के “समग्र सरकार दृष्टिकोण” (Whole-of-Government Approach) पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण तथा महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से जुड़ी प्रमुख पहलों की जानकारी साझा की।

सावित्री ठाकुर ने स्वयं सहायता समूह (SHG), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), पीएम-पोषण स्कूल भोजन योजना और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए इन क्षेत्रों में भारत के अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की इच्छा जताई। उन्होंने यह भी कहा कि ग्वाटेमाला का ‘शक्ति-सैट’ (ShakthiSAT) वैश्विक STEM पहल में शामिल होना, विशेष रूप से बालिकाओं के लिए, अत्यंत उत्साहजनक है।

दोनों पक्षों ने लैंगिक समानता, गरीबी उन्मूलन, समावेशी विकास और संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षीय सहयोग के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। साथ ही सामाजिक विकास, महिला सशक्तिकरण और आदिवासी समुदायों के कल्याण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने पंखुड़ी पोर्टल की जानकारी साझा की और प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि वे आंगनवाड़ी केंद्रों और बाल देखभाल गृहों के समर्थन सहित, स्वैच्छिक और परोपकारी योगदान के माध्यम से भारत के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

यह मुलाकात भारत और ग्वाटेमाला के बीच सामाजिक विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने माउंट अकोंकागुआ के लिए संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को दिखाई हरी झंडी

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 05 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली से अर्जेंटीना के माउंट अकोंकागुआ के लिए एक संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 6,961 मीटर ऊँचा माउंट अकोंकागुआ दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी है और एशिया के बाहर विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी मानी जाती है। यह संयुक्त अभियान उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) और पहलगाम स्थित जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM&WS) द्वारा किया जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने इस अभियान के लिए कर्मियों को साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मबल के साथ तैयार करने के लिए NIM और JIM&WS की सराहना की। उन्होंने दल को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस दुर्गम शिखर पर चढ़ाई केवल शारीरिक सहनशक्ति की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और मानसिक दृढ़ता की भी कसौटी है, जो भारत के श्रेष्ठ पर्वतारोहियों की पहचान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अभियान दल दक्षिण अमेरिका की सर्वोच्च चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर देश का नाम रोशन करेगा।

छह सदस्यीय इस अभियान दल में अनुभवी और प्रशिक्षित प्रशिक्षक शामिल हैं—कर्नल हेम चंद्र सिंह, कैप्टन जी. संतोष कुमार, दीप बहादुर साही, विनोद गुसाईं, नायब सूबेदार भूपिंदर सिंह और हवलदार रमेश कुमार। यह अभियान 06 फरवरी 2026 से प्रारंभ होगा और इसके महीने के अंत तक संपन्न होने की संभावना है।

माउंट अकोंकागुआ पर प्राप्त अनुभव, ज्ञान और आत्मविश्वास का सीधा लाभ देशभर के युवाओं, सशस्त्र बलों के कर्मियों और साहसिक गतिविधियों में रुचि रखने वालों के प्रशिक्षण को अधिक सुरक्षित, सशक्त और प्रभावी बनाने में मिलेगा। यह अभियान वैश्विक स्तर पर साहसिक गतिविधियों और पर्वतारोहण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती उपस्थिति का भी प्रतीक है।

श्रीलंका में पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का भव्य प्रदर्शन, भारत–श्रीलंका के आध्यात्मिक संबंध और सुदृढ़

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भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का श्रीलंका में आगमन और उनका सार्वजनिक प्रदर्शन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है। यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत पर आधारित गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को और सुदृढ़ करता है।

पवित्र अवशेष भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से श्रीलंका लाए गए, जहाँ उन्हें भारत–श्रीलंका के स्थापित प्रोटोकॉल के अनुरूप पूर्ण राजकीय सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ उपस्थित रहा। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, सरकारी अधिकारी और अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति भी शामिल थे।

यह प्रदर्शनी माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अप्रैल 2025 में श्रीलंका की राजकीय यात्रा के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप आयोजित की गई है, जो भारत की श्रीलंका के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने अनुराधापुरा में सेक्रेड सिटी कॉम्प्लेक्स परियोजना के विकास के लिए अनुदान सहायता की भी घोषणा की थी, जो वर्ष 2020 में बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिए घोषित 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान के अतिरिक्त है।

पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन 4 फरवरी 2026 को कोलंबो स्थित प्रतिष्ठित गंगारामया मंदिर में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके द्वारा किया गया। इस अवसर पर भारतीय पक्ष से गुजरात के राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गंगारामया मंदिर के मुख्य महंत वेनेरेबल डॉ. किरिंदे असाजी थेरो की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस समारोह में श्रीलंका सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हुए, जिनमें बौद्ध शासन, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्य मंत्री डॉ. हिनिदुमा सुनील सेनेवी, स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री डॉ. नलिंदा जयतिस्सा, तथा सार्वजनिक प्रशासन, प्रांतीय परिषद और स्थानीय सरकार मंत्री प्रो. ए.एच.एम.एच. अबयरत्ना प्रमुख थे।

प्रदर्शनी के अंतर्गत गंगारामया मंदिर परिसर में दो विशेष प्रदर्शनियाँ—“अनअर्थिंग द सेक्रेड पिप्रहवा” और “सेक्रेड रेलिक एंड कल्चरल एंगेजमेंट ऑफ कंटेम्पररी इंडिया”—का भी उद्घाटन किया गया।

पवित्र अवशेषों का पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ स्वागत कर उन्हें गंगारामया मंदिर में स्थापित किया गया। यह प्रदर्शनी 5 फरवरी 2026 से आम जनता के दर्शन के लिए खुली रहेगी, जिससे श्रीलंका सहित विश्वभर के श्रद्धालु भगवान बुद्ध को नमन कर सकेंगे। अवशेषों का आगमन श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुआ, जिससे इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया।

उल्लेखनीय है कि यह भारत के बाहर देवनीमोरी अवशेषों का पहला सार्वजनिक दर्शन है। इससे पहले भारत ने वर्ष 2012 में कपिलवस्तु अवशेषों और 2018 में सारनाथ अवशेषों की प्रदर्शनी श्रीलंका में आयोजित की थी।

पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के शाश्वत संदेश—करुणा, शांति और अहिंसा—का जीवंत प्रतीक है और भारत–श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों को प्रतिबिंबित करते हुए दोनों देशों के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और जन-जन के संपर्क को और मजबूत करती है।


प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका में पवित्र देवनीमोरी अवशेषों के प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति दिसानायके का आभार जताया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति महामहिम अनुरा कुमारा दिसानायके द्वारा कोलंबो स्थित पवित्र गंगारामया मंदिर में पवित्र देवनीमोरी अवशेषों के प्रदर्शन के उद्घाटन के लिए उनका आभार व्यक्त किया है।

प्रधानमंत्री ने स्मरण कराया कि अप्रैल 2025 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान यह निर्णय लिया गया था कि इन पूजनीय बौद्ध अवशेषों को श्रीलंका लाया जाएगा, ताकि वहां के लोगों को उन्हें श्रद्धापूर्वक दर्शन करने का अवसर मिल सके।

मोदी ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंध हैं, जो साझा सांस्कृतिक विरासत और आपसी आदान–प्रदान से मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का श्रीलंका आगमन दोनों देशों के बीच इस स्थायी आध्यात्मिक बंधन का सशक्त प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि भगवान बुद्ध का करुणा, शांति और सद्भाव का कालजयी संदेश मानवता को निरंतर मार्गदर्शन देता रहेगा और सीमाओं से परे एकता व आपसी समझ को बढ़ावा देगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर हिंदी, सिंहली और तमिल भाषाओं में अपने संदेश साझा करते हुए इस आयोजन को भारत–श्रीलंका मैत्री और सांस्कृतिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बताया।



कृषित औषधीय पौधों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी करने हेतु एनबीए ने शुरू किया डिजिटल पोर्टल

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए), जो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है, ने औषधीय पौधों की खेती से जुड़े हितधारकों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (Certificate of Origin) के इलेक्ट्रॉनिक निर्गमन हेतु एक डिजिटल पोर्टल विकसित कर उसे क्रियान्वित कर दिया है। यह पोर्टल उन हितधारकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) से छूट के लिए आवेदन करना चाहते हैं।

यह पोर्टल एक सिंगल-विंडो, एंड-टू-एंड ऑनलाइन प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया से लेकर प्रमाण पत्र जारी करने तक की सभी सेवाएं डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई गई हैं। हितधारक इस पोर्टल को https://absefiling.nbaindia.in/ पर एक्सेस कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 को संसद द्वारा पारित किया गया था, जिसे लोकसभा ने 25 जुलाई 2023 और राज्यसभा ने 1 अगस्त 2023 को मंजूरी दी थी। इसके बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 2024 और 2025 में जैव विविधता नियमों को अधिसूचित किया।

संशोधित अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने और आयुष क्षेत्र, बीज क्षेत्र तथा अनुसंधान संस्थानों सहित विभिन्न हितधारकों की प्रक्रियागत आवश्यकताओं को सरल बनाने के उद्देश्य से ये नियम बनाए गए हैं। संशोधित नियमों में अब कृषित औषधीय पौधों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन का इलेक्ट्रॉनिक रूप से सृजन एक निर्दिष्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जाने का प्रावधान किया गया है।

यह पहल न केवल पारदर्शिता और सुगमता को बढ़ावा देगी, बल्कि औषधीय पौधों से जुड़े व्यवसाय और अनुसंधान को भी नई गति प्रदान करेगी।

बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर पत्नी ने की प्रधान आरक्षक पति की हत्या, शव नदी किनारे रेत में दफनाया

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 बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है। यहां दूसरी पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में पदस्थ प्रधान आरक्षक की हत्या कर दी और शव को नदी किनारे रेत में दफना दिया, ताकि घटना का खुलासा न हो सके।


मामला थाना बलरामपुर क्षेत्र के ग्राम सतिसेमर का है। पुलिस जांच में सामने आया है कि महिला अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहना चाहती थी। दोनों ने पहले ही छिपकर शादी कर ली थी और इसी कारण पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।

पूर्व नियोजित योजना के तहत आरोपी बॉयफ्रेंड ने प्रधान आरक्षक को बलरामपुर बुलाया। तय स्थान पर पहुंचते ही उसने धोखे से लोहे की खुरपी से उसके सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

हत्या के बाद आरोपी ने शव को सेंदुर नदी के दूसरे किनारे ले जाकर रेत में दफना दिया। पहचान छिपाने के उद्देश्य से मृतक का मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और आधार कार्ड भी छिपा दिए गए। इसके बाद दोनों आरोपी सामान्य जीवन जीते रहे, ताकि किसी को संदेह न हो।

यह मामला 29 जनवरी 2026 को तब सामने आया, जब ग्रामीणों ने शाम के समय सेंदुर नदी किनारे रेत में दबा शव देखा और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जांच शुरू की। शव अत्यधिक सड़-गल जाने के कारण तत्काल पहचान नहीं हो सकी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई, जिससे हत्या की पुष्टि हुई। जांच के बाद 31 जनवरी 2026 को मृतक की पहचान 51 वर्षीय विश्वनाथ केरकेट्टा के रूप में हुई। वह रायगढ़ जिले के ग्राम सालियापारा का निवासी था और दंतेवाड़ा में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ था।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्वदीपक त्रिपाठी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्यों और गहन पूछताछ के आधार पर पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़ीं। जांच में यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा पाया गया।

पुलिस के अनुसार, करीब 10–12 वर्ष पूर्व बलरामपुर में पदस्थापना के दौरान विश्वनाथ ने क्लॉस्टिका केरकेट्टा से दूसरी शादी की थी। दोनों के दो बच्चे हैं। वर्ष 2024 में बच्चों की पढ़ाई के लिए क्लॉस्टिका को रायपुर भेजा गया था।

इसी दौरान वर्ष 2023 में क्लॉस्टिका की फेसबुक के माध्यम से विवेक टोप्पो नामक युवक से पहचान हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बाद में तातापानी मंदिर में छिपकर विवाह कर लिया गया। इसकी जानकारी मिलने के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया।

विवेक के बुलावे पर विश्वनाथ 12 जनवरी 2026 को छुट्टी लेकर दंतेवाड़ा से बलरामपुर पहुंचा। 14 जनवरी को उसे सेंदुर नदी किनारे बुलाया गया, जहां साजिश के तहत उसकी हत्या कर दी गई।

पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद आरोपी विवेक टोप्पो और क्लॉस्टिका केरकेट्टा को गिरफ्तार कर 3 फरवरी 2026 को न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने बताया कि त्वरित और सटीक जांच के चलते इस हत्याकांड का खुलासा संभव हो सका। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई जारी रखेगी।

नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन नजदीक, 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ दौरे पर अमित शाह

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 रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ के दौरे पर आएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार वे शनिवार रात रायपुर पहुंचेंगे। इसके बाद 8 फरवरी, रविवार को राज्य में नक्सलवाद की स्थिति को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक के बाद वे बस्तर रवाना होंगे, जहां बस्तर पंडुम महोत्सव के समापन कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम है।


अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब केंद्र सरकार द्वारा तय की गई नक्सलवाद समाप्ति की 31 मार्च 2026 की समयसीमा नजदीक आ चुकी है। इस डेडलाइन की घोषणा स्वयं केंद्रीय गृहमंत्री ने सार्वजनिक रूप से की थी। इससे पहले वे 4 अक्टूबर 2025 को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा महोत्सव में शामिल होने बस्तर पहुंचे थे।

नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और अब डेडलाइन में करीब दो महीने का समय शेष है। ऐसे में अमित शाह का यह दौरा नक्सल विरोधी अभियानों की आगे की रणनीति और दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

रायपुर में होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक को 31 मार्च की समयसीमा से पहले अंतिम सुरक्षा समीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ तेलंगाना, महाराष्ट्र और ओडिशा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा स्थिति, चल रहे अभियानों की प्रगति और खुफिया सूचनाओं पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। विशेष रूप से बस्तर संभाग में संचालित एंटी-नक्सल ऑपरेशन बैठक का मुख्य एजेंडा रहेंगे।

चरित्र विवाद में दरिंदगी, दो सहेलियों ने महिला की बेरहमी से हत्या

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 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां चरित्र पर सवाल उठाने से नाराज दो महिलाओं ने मिलकर अपनी ही सहेली की बेरहमी से हत्या कर दी। घटना मैनपुर ब्लॉक के शोभा थाना क्षेत्र की है।


2 जनवरी को ग्राम गरीबा के पास स्थित झोपड़ी में 37 वर्षीय सुमित्रा नेताम का शव मिला। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला के साथ पहले मारपीट की गई और फिर उसकी हत्या कर दी गई। मृतका और दोनों आरोपी महिलाएं आपस में सहेलियां थीं तथा एक साथ मजदूरी का काम करती थीं।

पुलिस के अनुसार सुमित्रा मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली थी। पति से अलग होने के बाद वह पिछले दो वर्षों से ग्राम गरीबा के बाहर झोपड़ी में रहकर मजदूरी कर जीवनयापन कर रही थी। इसी दौरान उसका विवाद गांव की ही सुगतिन नेताम (36) और ईतवारिन बाई (46) से चल रहा था।

आरोप है कि सुमित्रा गांव में दोनों महिलाओं के चरित्र को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करती थी, जिससे उनके पारिवारिक जीवन में तनाव बढ़ गया था। इसी रंजिश के चलते दोनों महिलाओं ने सुमित्रा को सबक सिखाने की योजना बनाई।

2 जनवरी की दोपहर दोनों आरोपी सुमित्रा की झोपड़ी पर पहुंचीं। वहां कहासुनी के बाद उन्होंने उसके हाथ-पैर बांध दिए और उसके साथ गंभीर रूप से मारपीट की। दर्द और यातना के कारण सुमित्रा की मौके पर ही मौत हो गई। झोपड़ी आबादी से दूर होने के कारण किसी को समय पर जानकारी नहीं मिल सकी। वारदात के बाद आरोपी महिलाएं मौके से फरार हो गईं।

शाम को ग्रामीणों को घटना की जानकारी मिली। पहले मामले को आपसी स्तर पर दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन विरोध बढ़ने पर 3 जनवरी को पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हृदय गति रुकना बताया गया है। डॉक्टरों के अनुसार सीने पर दबाव और अत्यधिक मारपीट के चलते हार्ट फेल हुआ। एडिशनल एसपी धीरेंद्र पटेल ने बताया कि पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया है।

फिलहाल पुलिस ने दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है। हत्या में प्रयुक्त डंडों समेत अन्य साक्ष्य जब्त किए जा रहे हैं। थाना प्रभारी नकुल सिदार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

परंपरा, पहचान और गर्व का उत्सव : बस्तर पण्डुम 2026 में दिखेगा जनजातीय वैभव

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 रायपुर : बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जो जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित व प्रदर्शित करता है। जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ/बांस/धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। यह उत्सव बस्तर की आत्म-अस्मिता का प्रतीक है, जो स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ता है। विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागियों ने बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगें।


इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन

इस वर्ष के आयोजन ने लोकप्रियता के पुराने सभी पैमाने ध्वस्त कर दिए हैं और यह केवल एक प्रतियोगिता न रहकर अब लोक संस्कृति के एक विशाल उत्सव का रूप ले चुका है। आँकड़ों पर नजर डालें तो यह आयोजन इस बार एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुँच गया है। बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने जागरूक और उत्साहित हैं। विशेष रूप से दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।


समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने तैयार

बस्तर की माटी की खुशबू और यहाँ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाी है, जिसके लिए अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इस भारी उत्साह के बीच, अब सभी की निगाहें 07 से 09 फरवरी के बीच होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला की जादू बिखरेंगे। इन तीन दिनों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज और नाटकों का मंचन ।


65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे

प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक में अपना हुनर दिखाएंगे। यह मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह बस्तर के ज्ञान, कला और स्वाद का एक अनुपम संगम होगा। जहाँ एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू बिखेरेंगेे। इसके अतिरिक्त बस्तर की दुर्लभ वन औषधियों, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराएगा।

संभाग स्तर पर 340 महिलाएं अपनी कौशल का करेंगी प्रदर्शन

इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुँचने वाली 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है, जिसमें 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहाँ की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता और जन-भागीदारी के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन की ओर अग्रसर है।

भारत-किर्गिस्तान संयुक्त विशेष बल अभ्यास “खंजर” (KHANJAR) का 13वाँ संस्करण असम के मिसमारी में शुरू

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04 से 17 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाला भारत-किर्गिस्तान संयुक्त विशेष बल अभ्यास “खंजर” (KHANJAR) का 13वाँ संस्करण असम के मिसमारी में प्रारंभ हो गया है। यह अभ्यास वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसे भारत और किर्गिस्तान में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछले संस्करण का आयोजन मार्च 2025 में किर्गिस्तान में किया गया था।

भारतीय सेना की 20 सदस्यीय टुकड़ी पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) के जवानों द्वारा प्रतिनिधित्व की गई है, जबकि किर्गिस्तान की समान संख्या में आईएलबीआरआईएस विशेष बल ब्रिगेड के जवान हिस्सा ले रहे हैं।

अभ्यास का उद्देश्य शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी और विशेष बल संचालन के सर्वोत्तम अभ्यास और अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। इसके अलावा, स्नाइपिंग, जटिल भवन अभियानों और पर्वतीय कौशल जैसे उन्नत विशेष बल प्रशिक्षण को भी विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

खंजर अभ्यास दोनों देशों को अपनी रक्षा साझेदारी को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद व उग्रवाद जैसी साझा चुनौतियों का सामना करने में सहयोग को बढ़ावा देता है। यह अभ्यास भारत और किर्गिस्तान की क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी पुष्ट करता है।

भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर किया आगमन

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भारतीय नौसेना का पाल नौसैनिक प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 02 फरवरी 2026 को ओमान के सलालाह बंदरगाह पर पहुंचा, जो उसके प्रतिष्ठित लोकायन 26 अंतरमहासागरीय अभियान का पहला अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कॉल है। ओमान में आगमन इस दस महीने लंबे अभियान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है।

आईएनएस सुदर्शिनी ने अपना अभियान कोच्चि से 20 जनवरी 2026 को शुरू किया, और अरब सागर की मौसमी हवाओं के बीच पहला चरण पूरा किया। यह पोर्ट कॉल भारत और ओमान के बीच गहरे समुद्री संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। तीन दिवसीय दौरे के दौरान, रॉयल नेवी ऑफ ओमान के साथ पेशेवर सहयोग और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, पोत को स्कूल के बच्चों और स्थानीय निवासियों के लिए खोला जाएगा, ताकि समुद्री जागरूकता और जनसंपर्क को बढ़ावा मिले।

लोकायन 26 अभियान भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति, सद्भावना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर जारी है।

जनसुविधा को प्राथमिकता: एनएच-66 पर अरिकाडी के पास अस्थायी टोल प्लाज़ा तत्काल हटाया गया

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यात्रियों की सुविधा और जनकल्याण को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने केरल के कासरगोड ज़िले में राष्ट्रीय राजमार्ग-66 (NH-66) पर अरिकाडी के पास स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया है। यह अस्थायी टोल प्लाज़ा एनएच-66 के विकास एवं रखरखाव से जुड़ी परिचालन व्यवस्थाओं के तहत स्थापित किया गया था।

इस निर्णय की औपचारिक घोषणा आज नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने की। उन्होंने कहा कि सरकार देशभर में तेज़ी से बुनियादी ढांचे का विकास करते हुए भी जनहित और नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास की प्रक्रिया को हमेशा “ईज़ ऑफ़ लिविंग” के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए।

हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि केरल में भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई की ओर से अरिकाडी स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा को लेकर स्थानीय लोगों की समस्याओं के संबंध में मंत्रालय को अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में मंत्रालय ने इस विषय पर विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक समीक्षा की।

समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अस्थायी टोल प्लाज़ा के कारण स्थानीय निवासियों को वास्तविक और गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए मंत्रालय ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का निर्णय लिया और अरिकाडी के पास स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा पर संचालन और शुल्क वसूली को तुरंत बंद करने का फैसला किया गया।

इस निर्णय की घोषणा करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सुशासन की बुनियाद संवेदनशीलता और जवाबदेही पर टिकी होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला स्थानीय नागरिकों द्वारा झेली जा रही वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में पिछले एक दशक में देश ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। सरकार ने संपर्क बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता को सशक्त करने के लिए कई परिवर्तनकारी परियोजनाएं शुरू की हैं।

हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सरकार एक ऐसे भविष्य-तैयार भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां विकास के साथ-साथ करुणा और जनकल्याण भी समान रूप से प्रतिबिंबित हों। अरिकाडी के पास अस्थायी टोल प्लाज़ा को हटाने का निर्णय जन-सुनवाई और जनहित में त्वरित कार्रवाई का एक और उदाहरण है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास का लाभ अंततः आम नागरिकों तक पहुंचे।

अनुसंधान, विकास और नवाचार को नई गति: आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल लॉन्च

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) की पहली ओपन कॉल का शुभारंभ किया। यह पहल अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को संरचित और दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान कर भारत के नवाचार पारितंत्र को सुदृढ़ बनाना है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल पारंपरिक सरकारी वित्तपोषण मॉडल से एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ बदलाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब तक सरकारें मुख्यतः परोपकार या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से निजी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करती रही हैं, जबकि निजी नवाचार को सीधे सरकारी वित्तीय समर्थन सीमित रहा है। आरडीआई फंड इस अंतर को पाटने का प्रयास है, जिससे निजी उद्यमों को उन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों को विस्तार देने में सहायता मिलेगी, जो अब तक मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित थे।

मंत्री ने बताया कि अंतरिक्ष और परमाणु जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने से दशकों पुरानी परंपराओं में बदलाव आया है। आरडीआई फंड इसी परिवर्तन को समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है, जो वित्तीय जोखिम को कम करते हुए जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है। यह फंड दीर्घकालिक, किफायती वित्तपोषण प्रदान करता है और इसमें जोखिम साझा करने के लिए इक्विटी-लिंक्ड विकल्प भी शामिल हैं, जिससे जिम्मेदार व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि आरडीआई फंड का कुल कोष ₹1 लाख करोड़ है। इसके अंतर्गत लगभग 2 से 4 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर 15 वर्ष तक की अवधि के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें मोरेटोरियम का प्रावधान भी शामिल है। यह ढांचा प्रौद्योगिकी डेवलपर्स के लिए पूंजी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है।

पहली कॉल के तहत प्राप्त प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि लगभग 191 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश निजी क्षेत्र से आए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया नवाचार-आधारित विकास को समर्थन देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर निजी उद्योग के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आवेदनों को योजना की मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए और धनराशि का उपयोग वास्तविक प्रौद्योगिकी विकास और विस्तार के लिए किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पारितंत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और हितधारक उपस्थित रहे। मंच पर प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश पाठक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में बताया गया कि आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली कॉल उन परियोजनाओं पर केंद्रित है, जो टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 4 या उससे ऊपर की अवस्था में हैं। वित्तीय सहायता सेकेंड लेवल फंड मैनेजर्स (SLFMs) के माध्यम से ऋण, इक्विटी या हाइब्रिड साधनों के रूप में प्रदान की जाएगी। किसी भी परियोजना के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत तक का वित्तपोषण उपलब्ध होगा, जबकि शेष राशि कंपनियों या निजी निवेशकों द्वारा वहन की जाएगी।

इस फंडिंग व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की जमानत, व्यक्तिगत या कॉर्पोरेट गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी। प्रस्तावों का मूल्यांकन वैज्ञानिक, तकनीकी, वित्तीय और व्यावसायिक आधार पर किया जाएगा तथा मूल्यांकन और धनराशि निर्गमन के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। यह योजना अनुदान (ग्रांट) आधारित नहीं है, बल्कि टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों के विस्तार पर केंद्रित है।

उल्लेखनीय है कि आरडीआई फंड को जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी और नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शुभारंभ किया था। यह पहल स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के निर्माण और भारत की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है।

कार्यक्रम के दौरान आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल का औपचारिक शुभारंभ किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवोन्मेषकों, उद्योग जगत और मीडिया से आह्वान किया कि वे इस पहल की जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित करें, ताकि देशभर के पात्र उद्यम भारत की प्रौद्योगिकी विकास यात्रा में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।

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