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सीएम हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ : अब एक कॉल पर सुनी जाएगी जनता की हर समस्या

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य की बहुप्रतीक्षित सीएम हेल्पलाइन 1076 का बटन दबाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन प्रणाली के आधिकारिक लोगो का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में मंत्रिपरिषद के सदस्यगण तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की समस्या सुनी जाए, उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा शासन-प्रशासन को और अधिक जवाबदेह बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान प्रदेशभर से प्राप्त शिकायतों, सुझावों और जनप्रतिसाद ने एक प्रभावी, सशक्त एवं स्थायी जनसंपर्क तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसी सोच के साथ सीएम हेल्पलाइन प्रणाली विकसित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेशवासी टोल फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे, सुझाव दे सकेंगे तथा शासन की योजनाओं और सेवाओं के संबंध में फीडबैक भी साझा कर सकेंगे। यह प्रणाली सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को नई मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ जनता और शासन के बीच विश्वास के रिश्ते को और सशक्त बनाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि डिजिटल युग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हेल्पलाइन को व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है, जिससे नागरिक मोबाइल के माध्यम से आसानी से अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली अपने व्यापक दायरे के कारण विशेष महत्व रखती है। इसमें राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे आवेदक अपने आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकेगा। यदि किसी शिकायतकर्ता को प्राप्त समाधान से संतोष नहीं होगा, तो संबंधित शिकायत स्वतः उच्च अधिकारियों के पास पुनः परीक्षण एवं जांच के लिए अग्रेषित हो जाएगी। इससे शिकायतों के सतही निराकरण की संभावना समाप्त होगी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन प्रणाली 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित रहेगी। इसके संचालन के लिए तीन शिफ्टों में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सचिव स्तर के अधिकारी डैशबोर्ड के माध्यम से इसकी नियमित निगरानी करेंगे, वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय भी इसकी सतत मॉनिटरिंग करेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं है, बल्कि जनभागीदारी को सशक्त बनाने का एक प्रभावी मंच भी है। प्रदेशवासी राज्य के विकास से जुड़े अपने सुझाव भी इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा कर सकेंगे, जिससे नीति निर्माण और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "नागरिक देवो भव" के मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार डिजिटल गवर्नेंस को लगातार मजबूत बना रही है। सीएम हेल्पलाइन शासन और जनता के बीच संवाद को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा समस्याओं के त्वरित समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव एवं सचिव, सुशासन एवं अभिसरण विभाग राहुल भगत ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन प्रणाली की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों और विशेषताओं की विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यगण, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।


राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव में तकनीक का बड़ा कदम, एनएचएआई ने शुरू की स्वचालित गड्ढा मरम्मत और यांत्रिक सफाई व्यवस्था

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नई दिल्ली- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के रखरखाव को अधिक प्रभावी, तेज और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कई तकनीक-आधारित पहल शुरू की हैं। इसके तहत शहरी और विकसित क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम की यांत्रिक सफाई तथा स्वचालित गड्ढा भराई, कॉम्पैक्टिंग एवं पैचिंग मशीनों और यांत्रिक सड़क सफाई मशीनों के उपयोग संबंधी व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों, निवारक रखरखाव उपायों और अनुबंधीय दायित्वों के सख्त पालन के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार करना है। इससे सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होगी, टिकाऊपन बढ़ेगा और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा।

मानसून से पहले ड्रेनेज सफाई पर विशेष जोर

आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के शहरी क्षेत्रों में लाइनिंग युक्त नालियों की यांत्रिक सफाई अनिवार्य कर दी है। इसके लिए हाई-फ्लो सुपर सक्शन एवं जेटिंग यूनिट, हाइड्रोलिक ग्रैब मशीन और डी-वाटरिंग पंप सेट जैसे उन्नत उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।

इन मशीनों की सहायता से जल निकासी, जमी हुई गाद को ढीला करना, कीचड़ का सक्शन तथा भारी मलबे को हटाने जैसे कार्य तेजी और प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। भविष्य के रखरखाव अनुबंधों में इस व्यवस्था को अनिवार्य प्रावधान के रूप में शामिल किया जाएगा।

स्वचालित गड्ढा मरम्मत मशीनों से होगा त्वरित सुधार

एनएचएआई ने प्रदर्शन-आधारित रखरखाव अनुबंधों (PBMC) के तहत ऑटोमैटिक पॉटहोल फिलिंग, कॉम्पैक्टिंग एवं पैचिंग मशीनों तथा मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों की तैनाती के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इन मशीनों के उपयोग से सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत तेज गति से होगी, रखरखाव प्रतिक्रिया समय कम होगा और यात्रियों को होने वाली असुविधा में कमी आएगी। समय पर मरम्मत से सड़कों की संरचनात्मक मजबूती भी बनी रहेगी।

सड़कों की सफाई होगी अधिक प्रभावी

यांत्रिक सड़क सफाई मशीनों के माध्यम से धूल, गाद और अन्य कणों को व्यवस्थित रूप से हटाया जाएगा। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग अधिक स्वच्छ रहेंगे, दृश्यता बेहतर होगी, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और धूल प्रदूषण में कमी आएगी।

इन मशीनों को वाराणसी-औरंगाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग, हंडिया-राजातालाब राष्ट्रीय राजमार्ग तथा हरियाणा, पंजाब और गुजरात की विभिन्न परियोजनाओं में पहले ही तैनात किया जा चुका है।

एनएचएआई के अनुसार यांत्रिक ड्रेनेज सफाई, स्वचालित गड्ढा मरम्मत और आधुनिक सड़क सफाई तकनीकों को अपनाने से परिचालन दक्षता बढ़ेगी, निवारक रखरखाव को मजबूती मिलेगी और देशभर में राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को बेहतर यात्रा अनुभव प्राप्त होगा।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के 10 वर्ष पूर्ण, सुरक्षित मातृत्व की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि

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नई दिल्ली- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की प्रमुख पहल प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) ने आज सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में अपनी सफल यात्रा के 10 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने “10 Years of PMSMA – A Decade of Care” थीम के तहत देशव्यापी समारोहों का शुभारंभ किया।

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि पिछले एक दशक में पीएमएसएमए ने देशभर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री द्वारा 9 जून 2016 को शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रत्येक माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच सेवाएं उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि जनवरी 2022 में शुरू की गई विस्तारित पीएमएसएमए (E-PMSMA) रणनीति के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर उनकी विशेष निगरानी की जाती है तथा प्रसव के 45 दिनों बाद तक उनका फॉलो-अप किया जाता है। एसएमएस अलर्ट और आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को और मजबूत किया गया है।

जे.पी. नड्डा ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वर्ष 1990 के बाद से मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी हासिल की है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। वहीं पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत तथा नवजात मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 90.6 प्रतिशत तथा प्रसवपूर्व देखभाल प्राप्त करने वाली माताओं का अनुपात 95.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले दस वर्षों में पीएमएसएमए के तहत 7.5 करोड़ से अधिक प्रसवपूर्व जांचें की गई हैं तथा लगभग 1.2 करोड़ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान की गई है। इससे समय पर उपचार और विशेषज्ञ हस्तक्षेप संभव हो पाया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में देशभर में 9,000 से अधिक निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पीएमएसएमए से जुड़े हुए हैं, जिससे दूरदराज और आकांक्षी जिलों में भी विशेषज्ञ सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने पीएमएसएमए के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 75 रुपये का स्मारक सिक्का तथा 5 रुपये का डाक टिकट भी जारी किया। साथ ही 9 जून 2026 से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जागरूकता एवं जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन शुरू किया गया है।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉ. यवान जे. एफ. ह्यूटिन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अहमदाबाद में खाद्य प्रसंस्करण पर दक्षिण एशियाई उच्च स्तरीय नीति संवाद का शुभारंभ, रोजगार सृजन और सतत विकास पर जोर

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अहमदाबाद- भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने विश्व बैंक समूह की अगुवाई वाली SAPLING पहल के सहयोग से अहमदाबाद, गुजरात में “रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा: दक्षिण एशिया में मूल्य संवर्धन के नए अवसर” विषय पर दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद का शुभारंभ किया।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में दक्षिण एशियाई देशों के लगभग 200 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, विकास साझेदार, नवाचारकर्ता, शोधकर्ता, स्टार्टअप्स तथा विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। सम्मेलन का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना तथा क्षेत्र में लचीली, समावेशी और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों का विकास करना है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवानने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने मूल्य संवर्धन, तकनीकी नवाचार और क्षेत्रीय सहयोग को दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था को बदलने का प्रमुख आधार बताया।

चिराग पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है, जो रोजगार सृजन, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी, किसानों की आय बढ़ाने तथा खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि भारत की नीतिगत पहलें और अवसंरचना विकास के प्रयास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

गुजरात सरकार के कृषि मंत्री जीतुभाई वघानी ने विभिन्न देशों की भागीदारी का स्वागत करते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि परिवर्तन का प्रमुख इंजन बताया। उन्होंने गुजरात में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) का परिसर स्थापित करने की वकालत की, ताकि कृषि और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

उद्घाटन सत्र में विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी, गेट्स फाउंडेशन की भारत कंट्री डायरेक्टर अर्चना व्यास तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है—

  • दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं को बढ़ावा देना

  • कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना

  • असंगठित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का औपचारिककरण

  • तकनीक आधारित नवाचार और स्मार्ट प्रोसेसिंग

  • खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता और वैश्विक मानक

  • निवेश जुटाने और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देना

  • दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और नीतिगत समन्वय

कार्यक्रम में नेस्ले, बायर, राबोबैंक, अजीनोमोटो, आईटीसी, सेवा (SEWA), नाबार्ड तथा फूड इंडस्ट्री एशिया जैसी प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन के साथ एक इनोवेशन फेयर का भी आयोजन किया गया है, जिसमें कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, टिकाऊ पैकेजिंग, स्मार्ट प्रोसेसिंग तकनीक और भंडारण प्रणालियों से जुड़ी नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा तैयार कराई गई रिपोर्ट “भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का आकलन” भी जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार देश में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर वर्ष 2016 में लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अध्ययन में फल, सब्जी और डेयरी जैसे शीघ्र नष्ट होने वाले उत्पादों में मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया गया है।

यह संवाद विश्व बैंक समूह की AgriConnect और SAPLING पहल के अनुरूप आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य नीतिगत सुधारों, निवेश और तकनीकी नवाचार के माध्यम से दक्षिण एशिया में टिकाऊ और पोषण-केंद्रित खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती मिलने, निजी निवेश को प्रोत्साहन, एमएसएमई क्षेत्र के विकास तथा खाद्य प्रसंस्करण आधारित रोजगार सृजन के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद जताई गई है।

ओमान तट के पास मिसाइल हमले का शिकार हुआ टैंकर, सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित बचाए गए

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नई दिल्ली- भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (MRCC) मुंबई को 8 जून 2026 को दोपहर लगभग 2:20 बजे सूचना मिली कि पलाऊ ध्वजवाहक तेल टैंकर एमटी मैरिवेक्स (MT Marivex), जो ओमान के मसिराह तट के निकट लंगर डाले हुए था, मिसाइल हमले का शिकार हो गया है। जहाज पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे।

सूचना मिलते ही एमआरसीसी मुंबई ने ओमान समुद्री खोज एवं बचाव केंद्र (OMSC) से संपर्क स्थापित किया और स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए ओमान की संबंधित एजेंसियों तथा अन्य हितधारकों के साथ समन्वय बनाए रखा।

शाम लगभग 5:00 बजे ओमान के ओएमएससी ने पुष्टि की कि ओमान नौसेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं तथा किसी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है।

घटना के बाद भी टैंकर एमटी मैरिवेक्स ओमान के मसिराह तट के निकट लंगर डाले हुए है।

यह सफल बचाव अभियान क्षेत्रीय समुद्री बचाव एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग की प्रभावशीलता को दर्शाता है। साथ ही यह भारतीय तटरक्षक बल की भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा समुद्री आपात स्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला आयोजित, 5 वर्षों में 30 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य

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विशाखापत्तनम- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने मत्स्य पालन विभाग तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के सहयोग से 5-6 जून 2026 को विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया। दो दिवसीय इस कार्यशाला में मूल्य संवर्धन, स्थिरता, बाजार पहुंच, नवाचार और अवसंरचना विकास के माध्यम से भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में एन. चंद्रबाबू नायडू,पीयूष गोयल,राजीव रंजन सिंह,किंजारापु राममोहन नायडू,चिराग पासवान सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार समन्वित दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात के मूल्य में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है। उन्होंने अगले पांच वर्षों में 30 अरब अमेरिकी डॉलर के समुद्री खाद्य निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार, स्थिरता और नए निर्यात बाजारों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

पीयूष गोयल ने रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक उत्पादों सहित मूल्य संवर्धित समुद्री खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्यातकों से हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से उपलब्ध वैश्विक बाजार अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में राज्य की अग्रणी भूमिका तथा समुद्री खाद्य निर्यात में उसके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने आंध्र प्रदेश को सतत जलीय कृषि और समुद्री खाद्य निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि भारत में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 198 लाख टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का समुद्री खाद्य निर्यात लगभग 73,890 करोड़ रुपये (8.46 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है। फ्रोजन श्रिम्प (झींगा) देश का प्रमुख निर्यात उत्पाद बना हुआ है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने उच्च मूल्य वाले समुद्री खाद्य निर्यात के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने समुद्री खाद्य क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और तकनीकी नवाचार की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया।

मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्खी ने निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अवसंरचना विकास, प्रमाणन, नवाचार, मूल्य संवर्धन और बाजार पहुंच को वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का प्रमुख आधार बताया।

कार्यशाला में केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न संस्थानों, समुद्री खाद्य निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों, उद्योग संगठनों, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं तथा जलीय कृषि किसानों ने भाग लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMKSSY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भी लाभ वितरित किए गए।

चर्चा सत्रों में रोग प्रबंधन, बढ़ती उत्पादन लागत, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्धता, कोल्ड चेन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और सतत मत्स्य पालन जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में ट्रेसबिलिटी सिस्टम, सतत प्रमाणन, मूल्य संवर्धन, निर्यात संवर्धन, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन तथा समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए संभावित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) ढांचे पर चर्चा हुई।

कार्यशाला का समापन समुद्री खाद्य क्षेत्र में स्थिरता, ट्रेसबिलिटी, मूल्य संवर्धन, निर्यात अवसंरचना, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को भारत के समुद्री खाद्य निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उपराष्ट्रपति से मिले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, जल संरक्षण और नदी जोड़ो परियोजनाओं की प्रगति पर हुई चर्चा

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नई दिल्ली- केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग (DoWR, RD & GR) के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से उपराष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।

बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति को जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई प्रमुख पहल “जल संचय जन भागीदारी (JSJB)” की सराहना की। उन्हें बताया गया कि JSJB 2.0 के अंतर्गत 1.55 करोड़ से अधिक जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाओं की सूचना प्राप्त हुई है, जो निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक है।

उपराष्ट्रपति को केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना,पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना,गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना जैसी प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं की प्रगति से भी अवगत कराया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजनाएं जल संकट कम करने, सूखे की समस्या से निपटने, सिंचाई क्षेत्र का विस्तार करने तथा संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसी राष्ट्रीय महत्व की जल अवसंरचना परियोजनाओं का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन ऐतिहासिक राष्ट्रनिर्माण प्रयासों को समझ सकें और उन पर गर्व कर सकें।

नदी जोड़ो अभियान के समर्थन में अपनी पूर्व पदयात्रा को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में धन की कमी मुख्य चुनौती नहीं है, बल्कि मानसिकता और राजनीतिक दृष्टिकोण से जुड़ी बाधाएं अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने राष्ट्रीय हित में दूरदर्शी और सहयोगात्मक जल प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी ने उपराष्ट्रपति को मंत्रालय के आगामी कार्यक्रमों में शामिल होने का भी आमंत्रण दिया।

प्रदेशवासियों को 24×7 शिकायत सुविधा: मुख्यमंत्री साय ने सीएम हेल्पलाइन प्रणाली का किया शुभारंभ अवलोकन

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर स्थित सीएम हेल्पलाइन कॉल सेंटर का किया अवलोकन, नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निराकरण हेतु सशक्त व्यवस्था विकसित

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (सीबीडी) स्थित सीएम हेल्पलाइन कॉल सेंटर का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान तथा सुशासन को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विकसित की गई “सीएम हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली” की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय के दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व में शुरू की गई यह व्यवस्था नागरिकों की आवाज को सीधे शासन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगी।

सीएम हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत प्रदेश का कोई भी नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 पर 24 घंटे, सातों दिन अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगा। शिकायत दर्ज होते ही शिकायतकर्ता को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की जाएगी, जो ट्रैकर के रूप में कार्य करेगी। इसके माध्यम से नागरिक अपनी शिकायत की वर्तमान स्थिति, संबंधित विभाग, जिम्मेदार अधिकारी, की गई कार्रवाई तथा समाधान में लगने वाले संभावित समय की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

यह प्रणाली वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप सहित आधुनिक मल्टी-चैनल माध्यमों से संचालित होगी, जिससे शिकायत दर्ज करने और उसके समाधान की प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और सुलभ बनेगी। नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार विभिन्न माध्यमों से शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इससे प्रदेश के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक प्रत्येक व्यक्ति की आवाज प्रभावी रूप से शासन तक पहुंचेगी और समस्याओं के निराकरण में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नागरिक-प्रथम की भावना को केंद्र में रखकर विकसित की गई यह अभिनव पहल शासन और जनता के बीच संवाद को और अधिक मजबूत बनाएगी। इससे लोगों को शिकायतों के समाधान के लिए सीधी पहुंच की सुविधा मिलेगी, पारदर्शिता बढ़ेगी तथा शासन-प्रशासन की सेवाएं अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और जनोन्मुख बन सकेंगी।

अवैध रेत उत्खनन पर बड़ी कार्रवाई : तीन चैन माउंटेन मशीन और एक हाईवा वाहन जप्त

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध लगातार जारी है अभियान

केंद्रीय खनि उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय संयुक्त टीम की कार्रवाई

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में खनिज संसाधनों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग की केंद्रीय खनि उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय संयुक्त टीम द्वारा जिला गरियाबंद में बड़ी कार्रवाई की गई है।

खनिज विभाग के सचिव और संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने दिनांक 08 जून 2026 को औचक निरीक्षण के दौरान जिला गरियाबंद के तहसील राजिम अंतर्गत ग्राम कुरुसकेरा स्थित पैरी नदी में गौण खनिज साधारण रेत के अवैध उत्खनन एवं मशीनों के माध्यम से नियम विरुद्ध रेत उत्खनन का मामला पाया। जांच के दौरान खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए तीन चैन माउंटेन मशीनों को जप्त कर सील किया गया। साथ ही खदान संचालक एवं मशीन मालिकों को जवाब प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त अवैध रेत परिवहन में संलिप्त एक हाईवा वाहन को भी जप्त कर राजिम थाना में सुरक्षार्थ खड़ा कराया गया है।

कार्रवाई के दौरान केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम तथा जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम उपस्थित रही।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिज संपदा के नियमानुसार उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। अवैध उत्खनन एवं परिवहन में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा तथा दोषियों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। खनिज साधन विभाग के सचिव ने कहा कि प्रदेश में खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सतत निगरानी की जा रही है। विभागीय अमला एवं उड़नदस्ता दलों को नियमित निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

पीपला फाउंडेशन ने रीवा में 5000 लीटर की टंकी स्थापित की, ग्रामीणों को जल संकट से मिली राहत

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 आरंग | भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच आरंग क्षेत्र के लोरिक नगर (गढ़रीवां) के ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर आई है। स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए ग्राम पंचायत के सहयोग से गांव में 5000 लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी स्थापित की है।


इस पहल से न केवल पानी की बर्बादी रुकी है, बल्कि राहगीरों और पशुओं के लिए भी पेयजल सुलभ हो गया है। दरअसल, गांव के ट्यूबवेल के पास भंडारण की व्यवस्था न होने के कारण रोजाना हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था। ग्रामीणों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।

समस्या को देखते हुए पीपला फाउंडेशन के सदस्यों ने सरपंच घसियाराम साहू के समक्ष टंकी लगाने का प्रस्ताव रखा। पंचायत ने तत्काल सहमति देते हुए टंकी के लिए पक्का चबूतरा, पाइपलाइन और नलों की व्यवस्था कराई। शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में टंकी का विधिवत शुभारंभ किया गया। अब इस सुविधा का लाभ रीवा के साथ-साथ लखौली और कुकरा के ग्रामीणों को भी मिल रहा है। मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी यह प्यास बुझाने का केंद्र बन गया है। गांव के सरपंच घसियाराम साहू का कहना है कि गांव में पानी की समस्या गंभीर थी।

संस्था और पंचायत के इस तालमेल से अब पानी सहेजने में मदद मिलेगी। हम पीपला फाउंडेशन के इस सेवाभावी कार्य का आभार व्यक्त करते हैं। इस शुभारंभ अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू और फाउंडेशन के अध्यक्ष दूजेराम धीवर, संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने इस कार्य को जनहित में मील का पत्थर बताया। इस दौरान पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष कोमल लाखोटी, सचिव अभिमन्यु साहू, संयुक्त सचिव संजय मेश्राम सहित सक्रिय सदस्य सीताराम साहू, ईश्वरी साहू, पोखराज साहू, हीराधर धीवर पंच वेदप्रकाश साहू, रमेश चंद्राकर, श्रीमती मीरा चंद्राकर, समाजसेवी अश्वनी चंद्राकर , पी के चंद्राकर, सहित ग्रामीण उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े ऐलान: ₹15 हजार सहायता से लेकर ई-बसों तक कई फैसले

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -


1. आज मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड को आईपीओ (IPO) के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किए जाने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई। इस महत्वपूर्ण निर्णय से आम नागरिकों और निवेशकों को कंपनी की विकास यात्रा में भागीदार बनने का अवसर मिलेगा तथा कंपनी की वित्तीय क्षमता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिलेगी। मंत्रिपरिषद् ने इस संबंध में आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण करने के लिए कंपनी के संचालक मंडल को अधिकृत किया है।

2. मंत्रिपरिषद् ने खरीफ-2026 से कृषक उन्नति योजना के नवीन स्वरूप को मंजूरी दी है। राज्य सरकार द्वारा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने तथा धान पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के उद्देश्य से धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलें लेने वाले किसानों एवं दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी तथा कपास की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15,000 रुपये की आदान सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

इस योजना का लाभ एकीकृत किसान पोर्टल, एग्रीस्टेक पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर दिया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश में दलहन-तिलहन एवं अन्य वैकल्पिक फसलों का रकबा बढ़ेगा, किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी साथ ही कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

3. मंत्रिपरिषद् ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को वित्तीय वर्ष 2026-27 में चना वितरण की निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक चना उपलब्ध कराने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को नेकडेक्स-ई-मार्केट (NeML) के ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिकतम 0.25 प्रतिशत या उससे कम सर्विस चार्ज पर चना क्रय करने की अनुमति दी गई है। साथ ही, वर्तमान व्यवस्था के तहत अप्रैल से जून 2026 तक तीन माह की अवधि वृद्धि का अनुमोदन भी किया गया है। इस निर्णय से खाद्य एवं पोषण सुरक्षा योजनाओं के तहत पात्र परिवारों को चना वितरण निर्बाध रूप से जारी रहेगा।

4. मंत्रिपरिषद् ने ‘योग’ विषय को समाज कल्याण विभाग से हटाकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। योग, आयुष प्रणाली का अभिन्न अंग है तथा योग शिक्षा, अनुसंधान और उससे संबंधित गतिविधियां राष्ट्रीय स्तर पर आयुष तंत्र के माध्यम से संचालित होती हैं। विषय की प्रकृति और प्रशासनिक समन्वय को ध्यान में रखते हुए इसे चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन किए जाने का निर्णय लिया गया है। इससे योग से संबंधित शैक्षणिक, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान गतिविधियों का बेहतर समन्वय और प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सकेगा।

5. मंत्रिपरिषद् ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म (PSM) स्कीम के अंतर्गत डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (DDM) की सहमति भारत सरकार को प्रेषित करने की अनुमति प्रदान की है।

इस निर्णय से रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा में स्वीकृत कुल 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। इस योजना के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल, सुरक्षित और किफायती सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।

6. मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण को आपसी सहमति से भूमि क्रय पर प्रदान की जा रही मुद्रांक शुल्क (स्टाम्प ड्यूटी) छूट की अवधि 31 मार्च 2028 तक बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय से प्राधिकरण को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में गति मिलेगी तथा नवा रायपुर अटल नगर के सुनियोजित विकास और आधारभूत संरचना के विस्तार को और अधिक मजबूती मिलेगी।

7. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भण्डारण) नियम, 2009 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इस संशोधन के तहत खनिज परिवहन करने वाले वाहनों में आरएफआईडी टैग एवं वाहन ट्रैकिंग प्रणाली को अनिवार्य किया जाएगा तथा खनिजों के ग्रेड निर्धारण और मात्रा आकलन के लिए आधुनिक तकनीक आधारित व्यवस्था लागू की जाएगी।

भण्डारण अनुज्ञापत्रधारियों से वसूल की जाने वाली भण्डारण शुल्क की राशि तथा सिक्योरिटी डिपॉजिट में वृद्धि की गई। इसके अतिरिक्त ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत लाईसेंस होल्डर को अतिरिक्त जमीन स्वीकृत किए जाने एवं दो भण्डारण लाईसेंसों को समामेलित (एकजाई) संबंधी प्रावधानों को लागू किया गया।

इस निर्णय से अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी तथा राज्य के राजस्व में वृद्धि सुनिश्चित होगी। 

निर्माणाधीन स्कूल के पास चल रहा था चिट्टे का कारोबार, युवती गिरफ्तार

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 भिलाई। नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी और बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जामुल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से करीब 10 लाख रुपये कीमत का चिट्टा (हेरोइन), नकदी और मोबाइल फोन बरामद किया है।


पुलिस के अनुसार गिरफ्तार महिला की पहचान राजविंदर कौर (25 वर्ष) निवासी एलआईजी-312, हाउसिंग बोर्ड, भिलाई, थाना जामुल, जिला दुर्ग के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया है।

मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई

पुलिस को 8 जून को सूचना मिली थी कि हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र स्थित निर्माणाधीन बीएनएस स्कूल के पास एक महिला अवैध रूप से चिट्टा रखकर उसकी बिक्री कर रही है। सूचना मिलते ही जामुल थाना पुलिस ने टीम गठित कर मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की।

बताए गए स्थान पर पुलिस ने संदिग्ध महिला को हिरासत में लिया। महिला आरक्षक की उपस्थिति में तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 49.8 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया।

नकदी और मोबाइल भी जब्त

तलाशी के दौरान पुलिस ने नशीले पदार्थ की बिक्री से प्राप्त 1,000 रुपये नकद और एक कीपैड मोबाइल फोन भी जब्त किया। पुलिस के अनुसार बरामद चिट्टे की अनुमानित कीमत 9 लाख 96 हजार रुपये है। नकदी और मोबाइल सहित जब्त सामग्री की कुल कीमत लगभग 9 लाख 97 हजार 300 रुपये आंकी गई है।

पहले भी हुई थी कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि इससे पहले पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में चिट्टा तस्करी के एक अन्य मामले में करीब 6 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया था। उस मामले में आरोपी महिला रज्जो कौर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

पुलिस का कहना है कि जिले में नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जंगली सुअर शिकार कांड में रिश्वतखोरी का आरोप, वायरल VIDEO से मचा हड़कंप

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 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल में जंगली सुअर के शिकार का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वन विभाग की कार्रवाई के बीच रिश्वतखोरी के आरोप सामने आने से मामला और अधिक चर्चाओं में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में डिप्टी रेंजर उषा सोनवानी कथित तौर पर यह कहते हुए नजर आ रही हैं कि शिकार के आरोपियों ने फॉरेस्ट गार्ड को डेढ़ से दो लाख रुपये देकर कार्रवाई से बचने की कोशिश की।


जानकारी के अनुसार मामला पसान वन परिक्षेत्र के लैंगा बीट अंतर्गत करी गांव का है। कुछ दिन पहले ग्रामीणों द्वारा जंगली सुअर का शिकार किए जाने की सूचना वन विभाग को मिली थी। बताया जाता है कि शिकार के बाद मांस पकाने की तैयारी चल रही थी, तभी फॉरेस्ट गार्ड राम कुमार कोराम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और कार्रवाई की।

वन विभाग ने दर्ज किया मामला

वन विभाग ने मौके से शिकार में उपयोग की गई सामग्री जब्त की और कई लोगों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया। हालांकि, कार्रवाई के बाद पूरे मामले में भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आने लगे हैं।

वायरल VIDEO में क्या है?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में डिप्टी रेंजर उषा सोनवानी ग्रामीणों के बीच बैठी दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कथित तौर पर कहती सुनाई दे रही हैं कि जंगली सुअर शिकार मामले में उन्हें लोगों की नाराजगी और आलोचना का सामना करना पड़ा।

वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि आरोपी फॉरेस्ट गार्ड राम कुमार कोराम को डेढ़ से दो लाख रुपये देकर बच निकले। वहीं, वीडियो में मौजूद कुछ ग्रामीण यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि इस राशि में उन्हें भी हिस्सा मिलेगा, इसलिए उन्होंने किसी को सूचना नहीं दी।

वायरल वीडियो के बाद जांच के आदेश

वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग हरकत में आ गया है। कोरबा के डीएफओ कुमार निशांत ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी पसान रेंजर मनीष सिंह को सौंपी गई है।

डीएफओ ने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिले में वन्यजीवों के शिकार के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और वन्यजीवों का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है।

8 घंटे में बदलेगा मौसम का मिजाज, 17 राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट

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 नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच मौसम विभाग (IMD) ने राहत भरी खबर दी है। भारतीय मौसम विभाग ने 9 जून को देश के 17 राज्यों में मध्यम से भारी बारिश, आंधी और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार अगले 8 घंटों के दौरान कई राज्यों में 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।


मौसम विभाग के मुताबिक बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

11-12 जून को सक्रिय होगा नया पश्चिमी विक्षोभ

आईएमडी के अनुसार 11 और 12 जून को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत के कई राज्यों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है।

मानसून ने पकड़ी रफ्तार

दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना के कुछ और हिस्सों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत के शेष क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

इन राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

आईएमडी ने अगले सात दिनों के दौरान केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पूर्वोत्तर भारत तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से 8 और 9 जून को केरल और कर्नाटक में अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

इन राज्यों में आज बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने 9 जून के लिए केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और आवश्यकता होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है।

Kisaan school : किसान स्कूल बहेराडीह में जुटेंगे प्रदेशभर के किसान, 26 जून को होगा राज्य स्तरीय 'मशरूम महोत्सव'

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 जांजगीर-चाम्पा. बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल में शुक्रवार 26 जून को राज्य स्तरीय मशरूम ( पुटू ) महोत्सव का आयोजन किया जाएगा. वरिष्ठ पत्रकार स्व कुंजबिहारी साहू की जन्म जयंती अवसर पर आयोजित इस मशरूम महोत्सव में प्रदेशभर के किसान, क़ृषि विशेषज्ञ, मशरूम उत्पादक, युवा उद्यमी और क़ृषि क्षेत्र से जुड़े लोग एवं छात्र-छात्राएं शामिल होंगे.


इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण विपणन और उद्यमिता को बढ़ावा देना है. साथ ही, किसानों, महिला एवं स्व सहायता समूहों, युवाओं और क़ृषि उद्यमियों को स्व रोजगार के नए अवसरों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.


मशरूम की प्रदर्शनी होगी आकर्षण का केंद्र

किसान स्कूल टीम के डॉ. सुरेश देवांगन, रामाधार देवांगन ने बताया कि महोत्सव के दौरान विविध प्रकार की प्राकृतिक मशरूम, कृत्रिम मशरूम की प्रदर्शनी आकर्षण का मुख्य केंद्र होगी. इसके अलावा मशरूम उत्पादन, एवं उद्यमिता विषयक तकनीकी सत्र सफल उद्यमियों का अनुभव साझा कार्यक्रम तथा राज्य स्तरीय मशरूम प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक तकनीकों, बाजार की सम्भावनाओं और मशरूम आधारित व्यवसाय के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी जाएगी.

'मशरूम मित्र सम्मान' से होंगे सम्मानित

महोत्सव के दौरान आयोजित होने वाले 'मशरूम प्रतियोगिता' में शामिल होने वाले मशरूम उत्पादकों को वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल टीम द्वारा 'मशरूम मित्र सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा. किसान स्कूल के सदस्यों ने बताया कि मशरूम उत्पादन, कम लागत में अधिक आमदनी देने वाला ब्यवसाय है.-आज के समय में यह खेती बेरोजगार युवाओं, युवतियों, बिहान से जुड़ी स्व सहायता समूह की महिलाओं के लिए स्व रोजगार का प्रभावी माध्यम से लोगों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करने के लिये प्रेरित किया जाएगा.

चार थीम पर आधारित है यह मशरूम महोत्सव

किसान स्कूल के संचालक एवं मशरूम के मास्टर ट्रेनर दीनदयाल यादव ने बताया कि किसान स्कूल में 26 जून को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय मशरूम महोत्सव, चार थीम को लेकर किया जा रहा है, जिसमें मशरूम उत्पादन समेत पोषण, रोजगार, और आत्मनिर्भरता की ओर एक सशक्त कदम रखी गई है, जो क़ृषि आधारित रोजगार और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का सन्देश देता है. यह मशरूम महोत्सव, छत्तीसगढ़ में पहली बार 'भाजी महोत्सव' की तर्ज पर किया जा रहा है.

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