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रविवार को 35.98 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की दो बूंद

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 रायपुर : देश भर में रविवार को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ ने भी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अभियान के तहत राज्य के पांच वर्ष तक के 35 लाख 98 हजार 904 बच्चों को पोलियो से बचाव हेतु दवा की दो बूंद पिलाई जाएगी।


अभियान के संचालन हेतु 28,791 टीमों के साथ 57 हजार से अधिक वैक्सीनेटर तैनात किए गए हैं। बूथ दिवस के बाद 29 एवं 30 जून को टीमें घर-घर पहुंचकर ऐसे बच्चों को भी पोलियो की खुराक पिलाएंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच पाए।

अभियान के सफल संचालन के लिए राज्य के सभी 33 जिलों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला एवं विकासखंड स्तर पर टास्क फोर्स की बैठकें आयोजित कर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों और टीकाकरण दलों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। माइक्रोप्लान का सत्यापन, वैक्सीन की उपलब्धता, कोल्ड चेन प्रबंधन तथा आवश्यक लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

इस अभियान में दूरस्थ गांवों, वनांचल क्षेत्रों, शहरी बस्तियों, ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों तथा प्रवासी और घुमंतू परिवारों के बच्चों तक विशेष रूप से पहुंच बनाई जाएगी। बूथ दिवस के बाद टीमें घर-घर भ्रमण कर उन बच्चों को पोलियो की खुराक देंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच पाएंगे।

राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. वी. आर. भगत ने बताया, "राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की सभी तैयारियां समयबद्ध रूप से पूर्ण कर ली गई हैं। अभियान के दौरान बूथों के साथ-साथ घर-घर भ्रमण कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जन्म से पांच वर्ष तक का कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। अभिभावक अपने बच्चों को निर्धारित बूथों पर अवश्य लेकर आएं। यदि किसी कारणवश वे बूथ तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो घर पहुंचने वाली स्वास्थ्य टीम को सहयोग करें। पोलियो मुक्त भारत की उपलब्धि को बनाए रखने में प्रत्येक परिवार की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे जन्म से पांच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को, चाहे उसे पहले नियमित टीकाकरण अथवा पल्स पोलियो अभियान में दवा मिल चुकी हो, इस अभियान में भी पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाएं। पोलियो मुक्त भारत की उपलब्धि को बनाए रखने के लिए प्रत्येक बच्चे तक पहुंचना आवश्यक है।

CM साय की सख्ती का असर: अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, 3 जेसीबी और 3 ट्रैक्टर जब्त

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन के निर्देश पर जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 जेसीबी मशीन तथा 3 ट्रैक्टर वाहनों को जप्त किया है। यह कार्रवाई राज्य सरकार की शून्य सहिष्णुता की नीति को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किए जाने का प्रमाण है।


जिले के देवराजपारा-सधवानी तथा बंधी-बचरवार क्षेत्र में खनिज मुरूम एवं मिट्टी के अवैध उत्खनन की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल जांच कराई गई। वहीं सिलपहरी क्षेत्र में खनिज रेत के अवैध परिवहन की सूचना पर भी खनिज विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहनों को जप्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान देवराजपारा-सधवानी क्षेत्र से दो जेसीबी, बंधी-बचरवार क्षेत्र से एक जेसीबी तथा सिलपहरी क्षेत्र से रेत परिवहन में लगे तीन ट्रैक्टर वाहनों को जब्त कर सुरक्षित रूप से पुलिस लाइन अमरपुर में रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि सधवानी के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1076 तथा कलेक्टर के समक्ष अवैध उत्खनन की शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री की जनहितकारी शिकायत निवारण व्यवस्था के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए खनिज विभाग को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला प्रशासन की सक्रियता और खनिज विभाग की तत्परता से शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई, जिससे आमजन का शासन-प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हुआ है।

कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने स्पष्ट किया है कि जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन अथवा भंडारण जैसी किसी भी गतिविधि को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित निगरानी, सतत निरीक्षण तथा शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जिले की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण हो सके और शासन को राजस्व की क्षति न पहुंचे।

खनिज विभाग के अनुसार जप्त किए गए सभी वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। नियमानुसार अर्थदंड एवं समझौता राशि निर्धारित खनिज मद में जमा कराने के बाद ही संबंधित वाहनों को मुक्त किया जाएगा।

इस कार्रवाई में सहायक खनिज अधिकारी आदित्य मानकर, खनिज निरीक्षक सुजीत कंवर, खनिज सिपाही शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक सतीश साहू सहित जिला खनिज उड़नदस्ता दल के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार अवैध खनन के विरुद्ध कठोर रुख अपनाते हुए जनशिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है।

पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

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 रायपुर : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा नारायणपुर प्रवास के दौरान पुनर्वास केंद्र पहुंचकर हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा से जुड़े युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने युवाओं से पुनर्वास केंद्र में मिल रही सुविधाओं, प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की और उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।


दस्तावेज और सुविधाओं की ली जानकारी

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने युवाओं से आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों और शासकीय सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य हर पुनर्वासित युवक-युवती को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी सुविधाएं देना है।


पूर्व साथियों को प्रेरित करने की अपील

गृह मंत्री शर्मा ने युवाओं से कहा कि वे जेल में बंद अपने पूर्व साथियों से मिलकर उन्हें भी पुनर्वास योजना का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विकास और शांति का रास्ता ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।

कौशल विकास की सराहना, सिंचाई के निर्देश

उप मुख्यमंत्री ने केंद्र में चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण की जानकारी ली। महिलाओं द्वारा मोटर वाहन ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में दिखाई जा रही भागीदारी की सराहना की।

सर्वे कराकर खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था कराएं

चर्चा के दौरान युवाओं ने खेतों में सिंचाई के लिए बोर की जरूरत बताई। इस पर श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहीदों के परिवारों और पुनर्वासित युवाओं का सर्वे कराकर उनके खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि वे खेती से स्थायी आजीविका कमा सकें।

पेसा अधिनियम को और सशक्त बना रही सरकार

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पेसा अधिनियम को और प्रभावी बनाने का काम लगातार हो रहा है। बस्तर के जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज से हैं और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने को कहा। साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

बस्तर को शांति-विकास की नई दिशा देने का समय: केदार कश्यप

वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बस्तर के निर्माण तक आदिवासी समाज का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। अब समय बस्तर को शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा देने का है। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने वाले युवाओं ने इस बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब सभी को मिलकर क्षेत्र और समाज के समग्र विकास के लिए काम करना चाहिए।

इस मौके पर पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कांग्रेस शिविर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने उठाए प्रशिक्षण की मंशा पर सवाल

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के हालिया बयानों को लेकर अब भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से मजबूत करने के बजाय पार्टी के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने की रणनीति सिखाने का माध्यम बन गया है।


रायपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान पुरंदर मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता अमरजीत भगत लगातार भाजपा सरकार पर निशाना साध रहे हैं, लेकिन उन्हें पहले अपने कार्यकाल का मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमरजीत भगत उनके “प्रिय छोटे भाई” हैं और जिस तरह वह कांग्रेस में खुलकर अपनी बात रखते हैं, उसी तरह वे भी भाजपा में अपनी राय बेबाकी से रखते हैं।

भाजपा विधायक ने दावा किया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार के पांच साल और भाजपा सरकार के मौजूदा कार्यकाल की तुलना खुद कर सकती है। उनके मुताबिक विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों के आधार पर दोनों सरकारों के कामकाज में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस के संगठनात्मक प्रशिक्षण शिविर की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस शिविर का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना नहीं, बल्कि पार्टी के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने के तरीकों पर चर्चा करना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस की बैठकों में कार्यकर्ताओं को यह सिखाया जा रहा है कि पार्टी के लिए चंदा कैसे एकत्र किया जाए और आर्थिक व्यवस्था को कैसे मजबूत बनाया जाए।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस संगठन इस समय आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है और पार्टी के कई नेता बड़ी जिम्मेदारियों की दौड़ में सक्रिय हैं। मिश्रा का दावा है कि अमरजीत भगत भी संगठन में बड़ी भूमिका पाने की कोशिश कर रहे हैं और इसी वजह से भाजपा सरकार पर लगातार आक्रामक बयान देकर पार्टी नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

भाजपा विधायक ने कहा कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर राजनीतिक विचारधारा से ज्यादा राजनीतिक रणनीति और संसाधन जुटाने पर केंद्रित दिखाई देता है। उनके अनुसार जनता अब राजनीतिक दलों के दावों और जमीनी हकीकत के बीच फर्क समझने लगी है, जिसका असर आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों पर भी दिखेगा।

दरअसल, इससे पहले अमरजीत भगत ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि सत्ता पक्ष के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। उनका दावा था कि भाजपा नेतृत्व के पास ऐसी रिपोर्टें हैं, जिनमें सरकार की दोबारा वापसी को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

CG NEWS : मासूम को कुचलकर भागा ट्रक चालक… बैरिकेड्स तोड़े, जवानों को रौंदने की कोशिश

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 मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के गुंडरदेही गांव के पास सड़क किनारे खेल रहे 10 वर्षीय मासूम को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया। हादसे में बच्चे की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी चालक ट्रक लेकर मौके से फरार हो गया।



सूचना मिलते ही पुलिस ने ट्रक को रोकने के लिए नाकेबंदी की, लेकिन चालक ने पुलिस को चुनौती देते हुए बैरिकेड्स तोड़ दिए और महाराष्ट्र बॉर्डर की ओर भाग निकला। पहले मोहला में ट्रक रोकने की कोशिश की गई, लेकिन आरोपी बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ गया। इसके बाद मानपुर में भी उसे रोकने का प्रयास किया गया, फिर भी चालक नहीं रुका।

भागने के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और राहगीरों में दहशत फैल गई। पुलिस लगातार पीछा करती रही। आखिरकार कोहका के पास ट्रक सड़क से नीचे उतर गया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी चालक को पकड़ लिया।

घटना के दौरान चालक को भी चोटें आईं, जिसके चलते उसे इलाज के लिए मानपुर अस्पताल भेजा गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि हादसे के समय चालक नशे की हालत में था या नहीं। शुरुआती जांच के आधार पर चालक के खिलाफ हिट एंड रन, लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इधर, हादसे से नाराज ग्रामीणों ने गुंडरदेही गांव में बच्चे का शव सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। ग्रामीण आरोपी चालक पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। बाद में बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए अंबागढ़ चौकी अस्पताल भेज दिया गया।

महासमुंद : गुरु-शिष्य के रिश्ते को किया शर्मसार, छात्रा से बैड टच करने वाले शिक्षक को 5 साल की सजा

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 महासमुंद। नाबालिग छात्रा के साथ अशोभनीय हरकत और बैड टच करने के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने आरोपी शिक्षक को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि आरोपी ने अपने पद और गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते का गंभीर दुरुपयोग किया।


अपर सत्र न्यायाधीश मोनिका जायसवाल की अदालत ने आरोपी शिक्षक गणेशराम चंद्राकर को पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत दोषी मानते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माना राशि जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

इसके अलावा न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 के तहत भी दोषी पाते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इस जुर्माने का भुगतान नहीं करने पर तीन माह की अतिरिक्त कैद का प्रावधान रखा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं एक साथ प्रभावी रहेंगी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 जनवरी 2025 को पीड़ित छात्रा ने महासमुंद थाने पहुंचकर आरोपी शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। छात्रा ने अपनी शिकायत में बताया कि गणित की कक्षा के दौरान शिक्षक ने कथित रूप से नशे की हालत में उसके साथ अनुचित स्पर्श किया और अशोभनीय हरकत की।

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद आरोपी शिक्षक के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा संस्थानों में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

शराबी शिक्षक ने स्कूल को बनाया ‘मयखाना’! बच्चों के बीच शराब पीने का वीडियो वायरल, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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 कवर्धा। Kabirdham district जिले के पंडरिया विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्र ग्राम तेलियापानी लेदरा से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शासकीय स्कूल के शिक्षक का स्कूल परिसर में कथित रूप से शराब सेवन करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।


जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो में एक शिक्षक स्कूल भवन के भीतर कमरे में बैठकर शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कमरे के अंदर शराब की बोतलें और खाने-पीने का सामान भी नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह घटना स्कूल समय के दौरान की है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।


वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर बच्चों के भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी होती है, वहां इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ अनुशासनहीनता है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

मामले की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एफ.आर. वर्मा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित प्रधान पाठक से विस्तृत प्रतिवेदन तलब किया है। उन्होंने कहा है कि वायरल वीडियो की सत्यता, समय और स्थान की गंभीरता से जांच की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि वीडियो वास्तव में स्कूल परिसर का ही है या नहीं।

डीईओ ने साफ कहा है कि प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच जारी है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर की महिलाएं बनेंगी 'ड्रोन दीदी'

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में जशपुर जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं नई पहचान बना रही हैं। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत जिले की चयनित महिलाएं इन दिनों रायपुर स्थित आईटीएम विश्वविद्यालय में ड्रोन संचालन एवं रिमोट पायलटिंग का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।


यह प्रशिक्षण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ उन्हें कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं देने के लिए दक्ष बन रही हैं।


प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन दीदियों को ड्रोन की तकनीकी संरचना, सुरक्षित उड़ान संचालन, रिमोट पायलटिंग, फसलों में उर्वरक एवं कीटनाशकों का वैज्ञानिक छिड़काव, ड्रोन के रखरखाव तथा कृषि क्षेत्र में उसके व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये ड्रोन दीदियां जशपुर जिले के किसानों को ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य कृषि कार्यों की सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे कृषि कार्य कम समय में, कम लागत पर और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। साथ ही वैज्ञानिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान प्रशिक्षण के लिए रवाना हो रही ड्रोन दीदियों की बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इससे पूर्व 17 अप्रैल 2026 को रणजीता स्टेडियम में आयोजित 'लखपति दीदी' कार्यक्रम के दौरान ड्रोन दीदी एवं उन्नत सॉयल टेस्टिंग मशीन भी प्रदान की गई थी।

उप संचालक कृषि, जशपुर के अनुसार प्रशिक्षण के बाद ड्रोन दीदियां जिले के विभिन्न विकासखंडों में किसानों को तकनीक आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे खेती में समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग का विश्वास है कि यह पहल जशपुर में तकनीक आधारित कृषि को नई गति देने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक सशक्तता और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

​'जनता के द्वार, डिजिटल सरकार': छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना ‘सेवा सेतु’

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धमतरी की लोमेश्वरी साहू की जुबानी, डिजिटल सशक्तिकरण और भरोसे की अनकही कहानी

रायपुर- आधुनिक युग में जब तकनीक आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने का माध्यम बन जाए, तो वह सुशासन की सबसे बड़ी सफलता कहलाती है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आज कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। यह पोर्टल प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाओं को घर बैठे एक क्लिक पर समेट दिया है।

इस डिजिटल क्रांति की एक जीवंत मिसाल बनी हैं धमतरी जिले के कुरूद तहसील के ग्राम करेली की रहने वाली कु. लोमेश्वरी साहू। लोमेश्वरी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे ‘सेवा सेतु’ ने आमजन के समय, श्रम और धन की बचत कर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया है।

चक्कर काटने के दौर से ‘क्लिक’ के सफर तक

अपने बीते अनुभवों को साझा करते हुए लोमेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण पत्र को बनवाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। उन्हें और उनके जैसे कई ग्रामीणों को तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।

पहले आवेदन करने के लिए बस का किराया लगाकर शहर जाओ, फिर दफ्तरों के चक्कर काटो। कई बार जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी न होने के कारण काम अटक जाता था। इससे समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था।

घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्र, एसडीएम ने सौंपा

लोमेश्वरी के लिए ‘सेवा सेतु’ पोर्टल एक वरदान साबित हुआ। जब उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने किसी कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय घर बैठे ही सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। बेहद सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने मोबाइल से ही आवेदन की स्थिति (Status) को ट्रैक करती रहीं। ​नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भाग-दौड़ के, निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। कुरूद के एसडीएम ने उन्हें यह प्रमाण पत्र सौंपा। लोमेश्वरी कहती हैं कि इस पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें दफ्तरों की कतारों और आवागमन के खर्च, दोनों से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दी।

​डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ हुआ 'जन-विश्वास'

सेवा सेतु पोर्टल ने पारंपरिक शासकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इसके जरिए अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनके समय और श्रम की भारी बचत हो रही है। घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से न केवल आवागमन का खर्च बंद हुआ है, बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होने से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत भी मिली है। इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता है, जिसके तहत आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पोर्टल समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करता है, जिससे सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और शासकीय लाभ तय समय-सीमा के भीतर सीधे नागरिकों तक पहुँच रहे हैं।

लोमेश्वरी साहू का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था ने शासकीय सेवाओं को न केवल सुलभ बनाया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में गजब की पारदर्शिता ला दी है। अब नागरिकों को अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर

धमतरी जिले की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शासकीय सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को कितना बेहतर किया जा सकता है। आज ‘सेवा सेतु’ पोर्टल त्वरित, पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर “जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” की परिकल्पना को धरातल पर सच कर रहा है। छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल वाकई एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

​सुशासन की नई मिसाल: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 'सुशासन तिहार' बना लाचारों का मजबूत सहारा

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​मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ

शिविरों के माध्यम से समाज कल्याण विभाग ने 169 को दिए सहायक उपकरण, 248 को दी नई पेंशन की सौगात

रायपुर- राज्य शासन की मंशानुसार जब प्रशासनिक तंत्र संवेदनशीलता के साथ जनता के द्वार पर पहुँचता है, तो सुशासन की परिभाषा ज़मीनी हकीकत में बदल जाती है। कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व नज़ारा छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ में देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विजन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ ने जिले के सैकड़ों दिव्यांगजनों, वृद्धजनों और निराश्रितों के जीवन में उम्मीद का एक नया सवेरा लाया है।

मई से 10 जून तक जिले के दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों में सजे विभागों के स्टॉल सिर्फ शिकायतें दर्ज करने के केंद्र नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित और मौके पर समाधान का माध्यम बने।

​आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: 169 को मिले सहायक उपकरण

शिविरों के दौरान समाज कल्याण विभाग ने सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। विभाग द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी कर अत्यंत कम समय में 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण वितरित किए गए।​इनमें प्रमुख रूप से ​11 वृद्धजनों को सहारा देने वाली वॉकिंग स्टिक (छड़ी),​04 दिव्यांगजनों को नई व्हीलचेयर,​03 दिव्यांगजनों को गति देने वाली ट्राइसाइकिल,​02 हितग्राहियों को बैशाखी,​01 हितग्राही को दुनिया की आवाज़ सुनने के लिए श्रवण यंत्र (हियरिंग एड)  शामिल हैं।

इन उपकरणों की मदद से अब बुजुर्ग और दिव्यांगजन बिना किसी दूसरे पर निर्भर रहे अपने दैनिक कार्यों को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान शासन के प्रयासों की सफलता को बयां कर रही है।

​आर्थिक सुरक्षा का कवच: 248 नवीन पेंशनों को तत्काल स्वीकृति

सुशासन तिहार का सबसे बड़ा असर सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर दिखा। शिविरों में आए आवेदनों का ऑन-द-स्पॉट परीक्षण कर 248 पात्र हितग्राहियों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन की स्वीकृति जारी की गई। अब इन वृद्ध, बेसहारा और दिव्यांग नागरिकों को हर महीने नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।

सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित इन विशेष शिविरों में जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के आपसी समन्वय से उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है। मई महीने से शुरू होकर 10 जून 2026 तक चले इस अभियान के दौरान ज़मीनी स्तर पर बड़े फैसले लिए गए। इसके तहत जहाँ एक ओर 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए गए, वहीं दूसरी ओर 248 पात्र नागरिकों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन को भी तत्काल स्वीकृति दी गई, जिससे अब उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल सकेगा।

"योजनाएं अब कागजों पर नहीं, हमारे हाथों में हैं"

प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय कार्यप्रणाली से अभिभूत होकर लाभांवित हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह 'सुशासन तिहार' उनके लिए राहत और अटूट विश्वास का केंद्र बनकर उभरा है। साय सरकार का सुशासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को सुगम और गरिमामय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।

147 बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेंगे निःशुल्क कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण

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​रायपुर- जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में  जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केन्द्र में एक विशेष पहल की गई। कलेक्टर के मार्गदर्शन में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराने हेतु पंजीयन, चिन्हांकन एवं मापन शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद हितग्राहियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके जीवन को सुगम बनाना है।

​एलिम्को के विशेषज्ञों ने किया परीक्षण

शिविर में भारत सरकार के मिनीरत्न उपक्रम, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं। जनपद पंचायत धमतरी, कुरूद सहित नगर पालिक निगम धमतरी और विभिन्न नगर पंचायतों (कुरूद, आमदी, भखारा) से बड़ी संख्या में लोग जांच के लिए पहुंचे।

​विशेषज्ञों द्वारा बारीकी से किए गए परीक्षण और मापन के बाद कुल 147 हितग्राहियों को पात्र पाया गया, जिन्हें आने वाले दिनों में निःशुल्क कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण बांटे जाएंगे। इसके साथ ही मौके पर ही 16 दिव्यांगजनों के यूडीआईडी (UDID) कार्ड भी बनाए गए।

नशामुक्त समाज के निर्माण का लिया संकल्प

सहायक उपकरणों के मापन के साथ-साथ शिविर में सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया गया। समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक ने उपस्थित सभी लोगों को जीवनभर नशामुक्त रहने की शपथ दिलाई। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सशक्त बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

​शिविर में एलिम्को की तकनीकी टीम, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण व नागरिक उपस्थित थे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने वाले ही भविष्य का नेतृत्व करेंगे : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

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एआई से डरने की नहीं, उसे अवसर में बदलने की है जरूरत

वित्त मंत्री ने मैक कॉलेज के राष्ट्रीय सम्मेलन में युवाओं से कहा- बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को करें तैयार

रायपुर- वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज (एमएआईसी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "Artificial Intelligence & Digital Transformation: Opportunities, Challenges and Future Impact" में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर युवाओं का आह्वान किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई तकनीकों से भयभीत होने के बजाय उन्हें अपने भविष्य के निर्माण का सबसे बड़ा अवसर मानें।

अपने संबोधन में मंत्री चौधरी ने कहा कि आज पूरी दुनिया तेजी से ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। भारत का स्वर्णिम इतिहास भी ज्ञान, शिक्षा और नवाचार की नींव पर खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत लगभग 1600 वर्षों तक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इसलिए रहा क्योंकि यहां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च स्थान दिया गया।

मंत्री चौधरी ने युवाओं से कहा कि आज दुनिया के सबसे सफल उद्योगपति और उद्यमी वे हैं जिन्होंने नए विचारों और नवाचार के बल पर अपनी पहचान बनाई है। एलन मस्क, एनवीडिया और एप्पल जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज तकनीक की शक्ति इतनी बड़ी हो चुकी है कि कई टेक्नोलॉजी कंपनियों का मूल्यांकन अनेक देशों की अर्थव्यवस्था से भी अधिक है। इसलिए युवाओं को समय रहते तकनीकी परिवर्तन को समझकर स्वयं को उसके अनुरूप तैयार करना होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि "जो एआई को अपनाएगा वही भविष्य का नेतृत्व करेगा। जो इससे दूर भागेगा, वह प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएगा।" उन्होंने कहा कि हर तकनीकी परिवर्तन चुनौतियां लेकर आता है, लेकिन वही परिवर्तन नए अवसर भी पैदा करता है। आवश्यकता इस बात की है कि युवा इन अवसरों का लाभ उठाएं।

उन्होंने कहा कि एआई कई कार्यों को सरल बना सकता है, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता, करुणा और मानवीय स्पर्श का विकल्प कभी नहीं बन सकता। इसलिए युवाओं को ऐसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए जहां मानवीय मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, नर्सिंग और अन्य सेवा क्षेत्र।

मंत्री चौधरी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ें तथा विश्वस्तरीय स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियां स्थापित करने का लक्ष्य रखें। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और पूरी दुनिया में भारतीय तकनीकी नेतृत्व का लोहा माना जाता है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ सरकार भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में "छत्तीसगढ़ अंजोर विजन @2047" पर कार्य कर रही है। इस दिशा में नवा रायपुर को उभरते तकनीकी और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां सेमीकंडक्टर यूनिट, एआई डाटा सेंटर तथा ट्रिपल आईटी में अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है।

कार्यक्रम के अंत में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज प्रबंधन, आयोजकों एवं सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के युवा नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच को साकार कर रहा टेक्सटाइल पार्क, स्थानीय रोजगार को मिलेगी नई उड़ान

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मुख्यमंत्री की पहल पर नवा रायपुर के टेक्सटाइल पार्क में लग रही पहली यूनिट, 235 करोड़ का निवेश, 4600 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार

81 एकड़ में विकसित हो रहा टेक्सटाइल पार्क, निवेशकों के लिए तैयार की जा रही सभी जरूरी अधोसंरचनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नवा रायपुर को देश के प्रमुख टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि नवा रायपुर का टेक्सटाइल पार्क प्रदेश के युवाओं और महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का मजबूत आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार टेक्सटाइल पार्क में निवेशकों को विश्वस्तरीय अधोसंरचना और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय की गंभीर कोशिशों से नवा रायपुर के टेक्सटाइल पार्क में पहली यूनिट लगने जा रही है। 235 करोड़ रुपए के निवेश से लगने वाली इस यूनिट से 4600 से अधिक लोगों को रोजगार का मौका मिलेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 25 जून को टेक्सटाइल पार्क की पहली गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भूमिपूजन किया। तमिलनाडु की स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड यहां अपनी मेन्युफेक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही है। कंपनी मुख्य रूप से बच्चों के कपड़े (किड्सवियर) और यूरोपीय व अमेरिकी बाजारों में निर्यात पर ध्यान केंद्रित करते हुए निट गारमेंट्स और कपड़े बनाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के टेक्सटाइल व गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश-विदेश में नई पहचान दिलाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर तैयार करने के विजन को साकार करने नवा रायपुर में 81 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। यहां टेक्सटाइल, गारमेंट, तकनीकी वस्त्र तथा सहायक उद्योगों के लिए सभी आवश्यक अधोसंरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इस टेक्सटाइल पार्क में स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ ही पुनीत क्रिएशन्स और दृष्टि डिजाइन्स एलएलपी को भी भूमि आबंटित की जा चुकी है। इन तीनों इकाईयों द्वारा लगभग 445 करोड़ रुपए के निवेश से 11 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा नवा रायपुर में सर्वसुविधायुक्त टेक्सटाइल पार्क के लिए डामरीकृत पक्की सड़कों, नाली एवं जल निकासी व्यवस्था, पॉवर सब-स्टेशन, जल प्रदाय व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, प्रशासनिक भवन, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अच्छी कनेक्टीविटी, आधुनिक अधोसंरचना और सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ नवा रायपुर का यह टेक्सटाइल पार्क वस्त्र उद्योगों को एक आदर्श निवेश स्थल के रूप में आकर्षित कर रहा है।

राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में टेक्सटाइल एवं रेडीमेड गारमेंट्स को थ्रस्ट सेक्टर के रूप में विशेष प्राथमिकता दी है। रोजगार सृजन को बढ़ावा देने महिला कर्मचारियों हेतु 6 हजार रुपए तथा पुरुष कर्मचारियों हेतु 5 हजार रुपए प्रतिमाह की रोजगार सहायता पांच वर्षों तक देने का प्रावधान किया गया है। नई औद्योगिक नीति के प्रभाव से प्रदेश में पिछले 18 महीनों में 8 लाख करोड़ रुपु से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 1.6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

टेक्सटाइल और कपड़ों के अलावा राज्य ने डेटा सेंटर, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। यह छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

"नवा रायपुर का टेक्सटाइल पार्क छत्तीसगढ़ के युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का मजबूत माध्यम बनेगा। हमारी सरकार यहां निवेशकों को विश्वस्तरीय अधोसंरचना और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार, आर्थिक गतिविधियों और प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। हम छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे है। - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय"

CG NEWS : दिनदहाड़े युवती की गोली मारकर हत्या, बाइक सवार आरोपी फरार

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 सक्ती। सक्ती जिले के जोंगरा गांव में शुक्रवार को दिनदहाड़े एक युवती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात को अंजाम देने के बाद दो नकाबपोश बाइक सवार हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और दहशत का माहौल बन गया।


मृतका की पहचान पूर्णिमा चौहान के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, वह Herbalife उत्पादों के व्यवसाय से जुड़ी हुई थीं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो युवक बाइक पर सवार होकर मौके पर पहुंचे। दोनों ने अपने चेहरे नकाब से ढके हुए थे। कुछ ही देर में आरोपियों ने पूर्णिमा चौहान पर ताबड़तोड़ गोली चला दी। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही गिर पड़ीं। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी तेजी से फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं।

पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

फिलहाल हत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस व्यक्तिगत रंजिश, कारोबारी विवाद समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच में जुटी हुई है।

इस सनसनीखेज वारदात के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख भवनों का होगा सुरक्षा ऑडिट

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रायपुर- हाल ही में देश में हुई अग्नि दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यभर के सभी प्रमुख सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और भविष्य में संभावित हादसों को रोकना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक परिसरों, भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक भवनों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाए। साथ ही जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ऑडिट के दौरान फायर सेफ्टी उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों (Emergency Exits), फायर अलार्म सिस्टम, बिजली व्यवस्था तथा अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों को सुधारात्मक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सुरक्षा ऑडिट पूरा कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि यह अभियान न केवल अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाएगा। इससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां बेहतर होंगी और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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