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नक्सल छाया के बीच उम्मीद की फसल, धान बेचकर ट्रैक्टर तक पहुँचा किसान कोयना का सपना

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 रायपुर : बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है, जहाँ अब गोलियों की गूँज की जगह ट्रैक्टरों की आवाज़ और फूलों-फलों की महक फैल रही है, क्योंकि किसान आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं से जुड़कर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं, जिससे क्षेत्र में खुशहाली आ रही है।


बस्तर संभाग के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में अब गोलियों की गूँज नहीं, बल्कि खेतों में दौड़ते ट्रैक्टरों की आवाज़ विकास की नई इबारत लिख रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के 'नक्सल मुक्त बस्तर' (लक्ष्य: 31 मार्च 2026) के संकल्प और सुदृढ़ कृषि नीतियों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। सुकमा के ग्राम चिपुरपाल के किसान कोयना बघेल की कहानी इस बदलाव का जीवंत प्रमाण बन गई है।

48 घंटे में भुगतान: सुशासन का सीधा लाभ

छिंदगढ़ जनपद के किसान कोयना बघेल ने जैसे ही बिरसठपाल केंद्र में 50 क्विंटल धान बेचा, 3100 रुपया प्रति क्विंटल की दर से उनकी मेहनत की पूरी कमाई मात्र 48 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में पहुँच गई। बिचौलियों की समाप्ति और समयबद्ध भुगतान ने किसान को इतना सशक्त बनाया कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी से नया 'मैसी फर्गुसन' ट्रैक्टर ट्राली के साथ खरीद लिया।

हितग्राही कोयना ने कहा कि धान खरीदी व्यवस्था बहुत अच्छी

हितग्राही कोयना बघेल ने बताया कि शासन की 31 सौ रुपये में धान खरीदी व्यवस्था बहुत अच्छी है। इससे हम जैसे छोटे मध्यमवर्गीय किसानों को बहुत लाभ मिल रहा है। समर्थन मूल्य में धान खरीदी के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को दिल से धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

बहुआयामी विकास: खेती भी और स्वरोजगार भी

यह बदलाव केवल खेती तक सीमित नहीं है। ट्रैक्टर से कृषि कार्य तेज़ हुए हैं, वहीं किसान पीएम आवास निर्माण में ईंट-बालू की आपूर्ति कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे राजूराम नाग जैसे किसान आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

किसान की सफलता पर कलेक्टर का भरोसा

सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित जिले में किसान की यह सफलता मेहनत, धैर्य और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन का प्रमाण है। छत्तीसगढ सरकार किसानों को आधुनिक कृषि संसाधनों और योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है। जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि धान खरीदी केंद्रों पर किसानों को पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान और पूरी सुविधा मिले।

प्रशासनिक मुस्तैदी: कलेक्टर की सीधी निगरानी

कलेक्टर के नेतृत्व में सुकमा प्रशासन ने धान खरीदी केंद्रों को 'सुविधा केंद्रों' में बदल दिया है। जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता के कारण किसानों को टोकन से लेकर भुगतान तक कहीं भटकना नहीं पड़ रहा है। कलेक्टर के अनुसार, शासन-प्रशासन और किसानों का समन्वय ही ज़मीनी बदलाव की असली चाबी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर जैसे इलाके, जो कभी नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाने जाते थे, अब कृषि क्रांति देख रहे हैं, जहाँ कृषि विभाग की योजनाओं, जल संरक्षण और तकनीकी सहायता ने खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राडा ऑटो एक्सपो-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में हुए शामिल

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20 जनवरी से 5 फरवरी तक वाहनों की बिक्री पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट

मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटनाएं रोकने ट्रैफिक नियमों के पालन की अपील की

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के श्रीराम बिजनेस पार्क में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित राडा ऑटो एक्सपो-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर क्षेत्र में निरंतर विकास के लिए प्रयासरत है। राज्य में आम नागरिकों की परचेसिंग पावर बढ़ी है, जिसके चलते बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए लोगों से ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम के दौरान यामाहा एक्सएसआर-155, टाटा सिएरा तथा महिंद्रा 7 एक्सओ वाहनों की लॉन्चिंग की। इसके साथ ही उन्होंने “मनी मैटर्स” पुस्तक का भी विमोचन किया।

राडा ऑटो एक्सपो-2026 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विगत दो वर्षों में राज्य के किसानों को धान का उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी की दरों में किए गए सुधारों से कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर लोगों से चर्चा के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि जीएसटी दरों में कमी से बाइक की कीमत में लगभग 15 से 25 हजार रुपए तक का लाभ हो रहा है। वहीं, एक व्यक्ति ने बताया कि हार्वेस्टर की कीमत में करीब 2 लाख रुपए तक की कमी आई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसकी देश-विदेश में सराहना हो रही है। पिछले एक वर्ष में लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और कई परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी उन्हें ऑटो एक्सपो में आने का अवसर मिला था, उस समय भी सरकार द्वारा रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी गई थी, जिसका व्यापक लाभ मिला। उस दौरान 25 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लगभग 29 हजार वाहनों का विक्रय हुआ। इससे सरकार को करीब 800 करोड़ रुपए का जीएसटी तथा परिवहन विभाग को 129 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। आम नागरिकों को भी ऑटो एक्सपो का प्रत्यक्ष लाभ मिला।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष राडा ऑटो एक्सपो का आयोजन और अधिक वृहद स्तर पर किया गया है। एक्सपो का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है तथा इसमें 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। पूरे प्रदेश से उद्यमी और विभिन्न कंपनियां इसमें सहभागिता कर रही हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि पहले ही दिन लगभग 2000 वाहनों का पंजीयन हो चुका है और उन्हें विश्वास है कि इस वर्ष 50 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य भी अवश्य पूरा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑटो एक्सपो का आयोजन प्रतिवर्ष इसी तरह किया जाना चाहिए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि राडा ऑटो एक्सपो का यह नौवां संस्करण केवल वाहनों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में रोजगार सृजन और ऑटो सेक्टर की प्रगति का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रोड टैक्स में दी जा रही 50 प्रतिशत छूट से ग्राहकों के साथ-साथ प्रदेश के छोटे और मध्यम व्यवसायियों को भी लाभ मिल रहा है। राज्य में सड़कों का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे कनेक्टिविटी बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ में ऑटो सेक्टर लगातार आगे बढ़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि मंत्रिपरिषद द्वारा राजधानी रायपुर में 20 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक आयोजित 9वें ऑटो एक्सपो के दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह छूट एक्सपो में वाहन बिक्री के पश्चात पंजीकरण के समय लागू होगी, जिससे मोटरयान कर में एकमुश्त 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। इस निर्णय का लाभ पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं को मिलेगा, इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ऑटो एक्सपो में सड़क सुरक्षा शपथ पर हस्ताक्षर किए और आमजन से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने आगामी महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली नारी मैराथन के पोस्टर का भी विमोचन किया।

इस अवसर पर परिवहन सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, कैट के वाइस चेयरमैन अमर परवानी, राजकुमार सिंघानिया, रविन्द्र भसीन, विवेक गर्ग सहित बड़ी संख्या में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के सदस्यगण उपस्थित थे।

राष्ट्रीय पटल पर चमका छत्तीसगढ़, 'मॉडल यूथ ग्राम सभा' में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने हासिल किया प्रथम स्थान

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पंचायती राज मंत्रालय 28 जनवरी को छत्तीसगढ़ के युवा लीडर्स को सहभागितापूर्ण शासन में उत्कृष्टता के लिए करेगा पुरस्कृत

रायपुर- छत्तीसगढ़ के लिए बड़े गौरव के क्षण में, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS), कोसमबुड़ा ने अपनी तरह की पहली ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ (MYGS) प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता बनकर उभरने का गौरव प्राप्त किया है। पंचायती राज मंत्रालय आगामी 28 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में छत्तीसगढ़ की इस विजेता टीम को औपचारिक रूप से सम्मानित करेगा।

छत्तीसगढ़ की जनजातीय शिक्षा प्रणाली की बड़ी जीत देश भर के 800 से अधिक स्कूलों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए, ईएमआरएस कोसमबुड़ा के छात्रों ने ग्रामीण शासन की असाधारण समझ का प्रदर्शन किया। 30 अक्टूबर 2025 को जनजातीय कार्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य युवाओं को मॉक ग्राम सभा सत्रों के माध्यम से जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करना था। छत्तीसगढ़ का शीर्ष स्थान यह दर्शाता है कि राज्य ने अपनी जनजातीय आवासीय स्कूल प्रणाली के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों को कितनी मजबूती से आत्मसात किया है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ईएमआरएस कोसमबुड़ा के प्राचार्य, डॉ. कमलाकांत यादव ने कहा:"मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) पहल में हमारे विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना हर्ष का विषय है। यह सफलता हमारे विद्यार्थियों के कड़े परिश्रम और ग्रामीण विकास से जुड़ी समस्याओं के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाती है। पंचायती राज मंत्रालय और केंद्र सरकार की यह दूरदर्शी पहल छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सहभागी शासन से जोड़ने का एक प्रभावी मंच है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला है। हम आगामी 28 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले सम्मान समारोह में सहभागिता को लेकर उत्साहित हैं।"

युवा सहभागिता के लिए दूरदर्शी पहल ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ को 30 अक्टूबर 2025 को लॉन्च किया गया था। इस कार्यक्रम ने तीन महीने से भी कम समय में भारत के 800 से अधिक स्कूलों तक पहुँच बनाकर युवाओं में सहभागी शासन की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। देश भर से शॉर्टलिस्ट की गई शीर्ष 6 टीमों में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने ग्राम सभा के संचालन में अनुशासन और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान के लिए नए मानक स्थापित किए हैं। 28 जनवरी को होने वाला सम्मान समारोह लोकतंत्र के इन युवा राजदूतों की उपलब्धि का उत्सव मनाएगा, जो भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

बलौदाबाजार स्पंज आयरन फैक्ट्री हादसे पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक

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रायपुर- बलौदा बाजार जिले के बकुलाही स्थित स्पंज आयरन फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट की घटना को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक बताया है। इस दर्दनाक हादसे में 6 श्रमिकों की असमय मृत्यु हो गई, जबकि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें बेहतर एवं उच्च स्तरीय उपचार के लिए बिलासपुर रेफर किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और मजबूती से खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शोकाकुल परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न हो तथा उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, हादसे के कारणों की तथ्यपरक जांच सुनिश्चित करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

https://x.com/i/status/2014261590028390890

DRDO की नई उपलब्धि: 77वें गणतंत्र दिवस पर दिखाएगा हाई-टेक रक्षा सिस्टम

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डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) 77वें गणतंत्र दिवस पर Kartavya Path पर Parade और Bharat Parv 2026 में देश की सुरक्षा के लिए विकसित अपनी प्रमुख तकनीकों को प्रदर्शित करेगा।

DRDO द्वारा प्रदर्शित प्रमुख प्रणालियाँ हैं:

Long Range Anti-Ship Hypersonic Missile (LR-AShM)
DRDO Tableau: ‘Naval Technologies for Combat Submarines’

LR-AShM (Kartavya Path पर प्रदर्शित)

DRDO LR-AShM को लॉन्चर के साथ परेड में दिखाएगा। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल

  • स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम

  • Mach 10 से शुरू होकर औसत Mach 5 की गति

  • क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी और कई “स्किप”

  • लो-एल्टीट्यूड पर उड़ान, जिससे रडार द्वारा पहचान कठिन

  • स्वदेशी एवियोनिक्स और हाई-एक्यूरेसी सेंसर

  • दो-स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन

    • Stage 1 अलग हो जाती है

    • Stage 2 के बाद मिसाइल ग्लाइड करके लक्ष्य पर हमला करती है

DRDO Tableau (Bharat Parv, Red Fort)

DRDO का टेबलो 26 से 31 जनवरी 2026 तक Bharat Parv में प्रदर्शित होगा।

थीम:“Naval Technologies for Combat Submarines”

प्रदर्शित सिस्टम:

  1. Integrated Combat Suite (ICS)

  2. Wire Guided Heavy Weight Torpedo (WGHWT)

  3. Air Independent Propulsion (AIP)

Integrated Combat Suite (ICS)

  • नई पीढ़ी का सबमरीन-आधारित रक्षा प्रणाली

  • सिचुएशनल अवेयरनेस और युद्ध-तैयारी में मदद

  • 8 DRDO प्रयोगशालाओं एवं 150+ इंडस्ट्री पार्टनर्स का सहयोग

Wire Guided Heavy Weight Torpedo (WGHWT)

  • आधुनिक जहाज और सबमरीन खतरों को रोकने हेतु

  • उच्च गति और अधिक दूरी की क्षमता

  • भारतीय नौसेना के लिए मुख्य हथियार

Air Independent Propulsion (AIP)

  • सबमरीन को लंबे समय तक पानी के भीतर रहकर चलने की क्षमता

  • फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल और ऑनबोर्ड हाइड्रोजन जनरेटर

  • शांत और स्टील्थ संचालन

  • भविष्य की सबमरीन के लिए मॉड्यूलर डिज़ाइन

परेड में अन्य DRDO प्रणालियाँ

Kartavya Path पर Armed Forces contingents में DRDO के और भी कई सिस्टम प्रदर्शित होंगे, जैसे:

  • Arjun Main Battle Tank

  • Nag Missile System (NAMIS-II)

  • Advanced Towed Artillery Gun System

  • BrahMos Missile

  • Akash

  • Battlefield Surveillance Radar

  • Anti Tank Guided Missile

Aatmanirbhar Bharat की दिशा में DRDO का योगदान

DRDO ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए अकादमिक, उद्योग और सेवा संस्थाओं के साथ मिलकर कई उन्नत रक्षा प्रणालियाँ विकसित की हैं।
यह कदम रक्षा तकनीक में स्वदेशी विकास और Aatmanirbhar Bharat के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता है।


भारत में रंगमंच का महाकुंभ: NSD आयोजित करेगा 25वां भारत रंग महोत्सव 2026 (27 जनवरी–20 फरवरी)

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नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) द्वारा आयोजित किया जाने वाला भारत रंग महोत्सव (BRM) 2026 27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह विश्व का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव है और इस बार यह अपनी सबसे व्यापक और समावेशी प्रस्तुति के साथ सामने आ रहा है।

इस बार महोत्सव देशभर में 40 स्थानों पर आयोजित होगा और सातों महाद्वीपों से कम से कम एक-एक अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुति शामिल होगी, जिससे इसका वैश्विक प्रभाव और भी बढ़ जाएगा।

प्रमुख आकर्षण

  • 277 भारतीय प्रस्तुतियाँ (136 चयनित और आमंत्रित नाट्य प्रस्तुतियाँ)

  • 12 अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ

  • 228 भारतीय और विदेशी भाषाओं/उपभाषाओं में प्रदर्शन

  • 817 राष्ट्रीय और 34 अंतरराष्ट्रीय आवेदन में से चयनित

  • 19 विश्वविद्यालयों और 14 स्थानीय प्रस्तुतियों का समावेश

भाषाई और सांस्कृतिक विविधता

इस संस्करण में भाषा और संस्कृति का विस्तार कर मैथिली, भोजपुरी, तुलु, उर्दू, संस्कृत, ताई खामती, न्युशी सहित कई भाषाओं और जनजातीय/लुप्तप्राय भाषाओं को मंच मिलेगा।

नए केंद्र और पहुंच

पहली बार नए केंद्रों में शामिल हैं:लद्दाख, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव, आइजॉल (मिज़ोरम), तुरा (मेघालय), नागांव (असम), मंडी (हिमाचल प्रदेश) और रोहतक (हरियाणा)

समावेशिता और समाज

इस महोत्सव में पहली बार ट्रांसजेंडर समुदाय, सेक्स वर्कर्स, वरिष्ठ नागरिक और अन्य अल्पप्रतिनिधित समूहों की प्रस्तुतियाँ भी शामिल होंगी।

विविध कार्यक्रम

  • आदिरंग महोत्सव (जनजातीय रंगमंच, नृत्य, शिल्प)

  • जश्ने बचपन (बाल रंगमंच)

  • बाल संगम (बच्चों द्वारा लोक नृत्य और नाटक)

  • पूर्वोत्तर नाट्य समारोह

  • कठपुतली, नृत्य नाटक, संस्कृत नाट्य महोत्सव

  • माइक्रो ड्रामा फेस्टिवल

साहित्य और संगोष्ठी

  • 17 किताबें लॉन्च होंगी (श्रुति पहल के तहत)

  • थिएटर बाजार में नए नाटकों को बढ़ावा

  • 33 प्रस्तुतियाँ महिला निर्देशकों द्वारा निर्देशित

सम्मान और श्रद्धांजलि

महोत्सव में भगवान बिरसा मुंडा, लोक माता अहिल्या बाई, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। साथ ही रतन थियाम, दया प्रकाश सिन्हा, बंसी कौल, अलोक चटर्जी जैसे रंगमंच दिग्गजों को भी सम्मानित किया जाएगा।

भारत में भूजल प्रबंधन में नई क्रांति: सतत जल सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें तेज़ी से आगे बढ़ीं

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भारत में भूजल (Groundwater) प्रबंधन के क्षेत्र में कई प्रमुख पहलों ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। देश में भूजल की सतत उपलब्धता और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई वैज्ञानिक, नीतिगत और समुदाय-आधारित कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

भूजल भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश की कृषि, पीने के पानी और उद्योगों की मुख्य आधारशिला है। भारत में लगभग 62% सिंचाई, 85% ग्रामीण जल और 50% शहरी जल की मांग भूजल से पूरी होती है। बढ़ती जनसंख्या, कृषि विस्तार, औद्योगिक विकास और शहरीकरण के कारण भूजल पर दबाव बढ़ा है। अतः भूजल के संरक्षण और संतुलित उपयोग के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन अनिवार्य हो गया है।

मुख्य तथ्य (Key Takeaways):

  • भारत में 43,228 भूजल स्तर निगरानी स्टेशन, 712 जल शक्ति केंद्र, और 53,264 जल गुणवत्ता निगरानी स्टेशन कार्यरत हैं।

  • जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR), जल संचय जन भागीदारी (JSJB), अटल भूजल योजना, और मिशन अमृत सरोवर जैसी योजनाओं ने भूजल प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई है।

  • भूजल प्रबंधन सतत विकास लक्ष्यों (SDG 6, SDG 11, SDG 12) की दिशा में अहम भूमिका निभाता है।

सरकारी पहलें और उनकी प्रगति:

1. मॉडल ग्राउंडवाटर बिल (Model Groundwater Bill):

केंद्र सरकार ने भूजल संरक्षण, नियंत्रण और प्रबंधन हेतु मॉडल बिल तैयार किया है, जिसे 21 राज्य/संघ शासित प्रदेशों ने अपनाया है। इस बिल के माध्यम से राज्य स्तर पर भूजल की अंधाधुंध निकासी पर नियंत्रण और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

2. जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR):

यह अभियान 22 मार्च 2021 को World Water Day के अवसर पर शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पानी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल निकायों की पहचान एवं जीओ-टैगिंग, और जागरूकता बढ़ाना है।

3. जल संचय जन भागीदारी (JSJB):

यह पहल 6 सितंबर 2024 को शुरू हुई और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देती है।
22 जनवरी 2026 तक कुल 39,60,333 कृत्रिम भूजल पुनर्भरण और जल संचयन कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

4. राष्ट्रीय एक्विफर मैपिंग और प्रबंधन कार्यक्रम (NAQUIM 2.0):

यह कार्यक्रम उच्च-स्तरीय डेटा और वैज्ञानिक inputs प्रदान करता है। इसका लक्ष्य पंचायत स्तर तक जल-स्तर और गुणवत्ता की जानकारी पहुंचाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।

5. अटल भूजल योजना (Atal Jal):

7 राज्यों में सामुदायिक नेतृत्व वाली भूजल प्रबंधन पहल के तहत जल उपयोग में दक्षता और डिजिटल निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं।
20 जनवरी 2026 तक 6,68,683 हेक्टेयर क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता बढ़ी है और 6,271 डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर स्थापित किए गए हैं।

6. मिशन अमृत सरोवर:

24 अप्रैल 2022 को शुरू इस मिशन के तहत प्रत्येक जिले में कम से कम 1 एकड़ के अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। यह न केवल जल संरक्षण बढ़ाता है बल्कि भूजल स्तर में सुधार भी करता है।

निष्कर्ष:

भूजल भारत की जल सुरक्षा का मुख्य आधार है, लेकिन इसकी स्थिति में लगातार गिरावट और गुणवत्ता में गिरावट चिंता का विषय है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने वैज्ञानिक, नीतिगत और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित एक समग्र रणनीति अपनाई है।
मॉडल बिल, JSA: CTR, JSJB, NAQUIM 2.0, अटल भूजल योजना और मिशन अमृत सरोवर जैसी पहलें भूजल संरक्षण, पुनर्भरण, निगरानी और समुचित उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं।
इन प्रयासों से भारत जल-संरक्षण, जल-प्रबंधन और सतत विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV के तहत 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी, ग्रामीण कनेक्टिविटी में नया मील का पत्थर

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV (PMGSY-IV) के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम सहित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह कदम ग्रामीण विकास विभाग की विकसित भारत की दिशा में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


कनेक्टिविटी से ग्रामीण विकास को नई दिशा

इन सड़कों का निर्माण केवल बुनियादी ढांचा नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम है। इन परियोजनाओं से लगभग 3,270 पहले असंयोजित बस्तियों को पहली बार कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुँच आसान होगी और ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

PMGSY-IV: लक्ष्य और दायरा

PMGSY-IV के तहत कुल 25,000 असंयोजित बस्तियों को कनेक्ट करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • मैदानी इलाकों में 500+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

  • उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों/UTs में 250+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

  • विशेष श्रेणी क्षेत्र (जनजातीय क्षेत्र, आकांक्षी जिले/ब्लॉक, रेगिस्तानी क्षेत्र)

  • LWE प्रभावित जिलों में 100+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

योजना की विशेषताएँ

  • 62,500 किलोमीटर की ऑल-वेदर सड़कें बनाई जाएंगी

  • सड़क मार्गों के साथ आवश्यक पुलों का निर्माण भी सुनिश्चित किया जाएगा

वित्तीय एवं कार्यान्वयन ढांचा

केंद्र सरकार ने 11 सितंबर 2024 को PMGSY-IV की कार्यावधि (FY 2024-25 से 2028-29) को मंजूरी दी थी।

  • कुल अनुमानित लागत: ₹70,125 करोड़

  • केंद्र की हिस्सेदारी: ₹49,087.50 करोड़

  • राज्य की हिस्सेदारी: ₹21,037.50 करोड़


भारत के राष्ट्रीय विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क ने रचा इतिहास: 5 लाख सर्किट किलोमीटर का आँकड़ा पार

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भारत का राष्ट्रीय विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 5,00,000 सर्किट किलोमीटर (ckm) से अधिक की उच्च वोल्टेज (220 kV और उससे ऊपर) ट्रांसमिशन लाइनों के साथ-साथ 1,407 GVA से अधिक की परिवर्तन क्षमता (220 kV और उससे ऊपर) भी प्राप्त कर ली है।

विश्व के सबसे बड़े सिंक-क्रोनस राष्ट्रीय ग्रिड ने यह उपलब्धि 14 जनवरी 2026 को राजस्थान के भडला II से सीकर II सबस्टेशन तक 765 kV क्षमता वाली 628 सर्किट किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन के संचालन से हासिल की। यह लाइन राजस्थान के भडला, रामगढ़ और फतेहगढ़ सोलर पावर कॉम्प्लेक्स के नवीकरणीय ऊर्जा (RE) क्षेत्र से अतिरिक्त 1100 मेगावाट बिजली को कुशलतापूर्वक ग्रिड में भेजने में सक्षम बनाएगी।

ट्रांसमिशन नेटवर्क का विकास

  • अप्रैल 2014 से अब तक भारत के ट्रांसमिशन नेटवर्क में 71.6% वृद्धि हुई है।

  • इस दौरान 2.09 लाख सर्किट किलोमीटर अतिरिक्त ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण हुआ है।

  • ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में 876 GVA का इजाफा हुआ है।

अब इंटर-रीजनल पावर ट्रांसफर कैपेसिटी 1,20,340 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिससे देश भर में बिजली के निर्बाध आदान–प्रदान को साकार करते हुए “एक राष्ट्र—एक ग्रिड—एक आवृत्ति” के विजन को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है।

आगामी ट्रांसमिशन परियोजनाएँ

वर्तमान में कई Interstate Transmission परियोजनाएँ प्रगति पर हैं, जिनसे अनुमानित 40,000 ckm ट्रांसमिशन लाइनों और 399 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में और वृद्धि होगी। इसके अलावा Intra-State Transmission परियोजनाएँ भी लगभग 27,500 ckm ट्रांसमिशन लाइनों और 134 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता को जोड़ेंगी। ये परियोजनाएँ ग्रिड की विश्वसनीयता और पावर निकासी क्षमता को और सुदृढ़ करेंगी।

नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को समर्थन

ये क्षमता वृद्धि विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से इंटीग्रेशन का समर्थन करेगी, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 GW से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।

यह 5,00,000 सर्किट किलोमीटर का माइलस्टोन भारत सरकार के निरंतर प्रयासों और सतत निवेश का परिणाम है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में भरोसेमंद, किफायती और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से जोड़ना भी है।


उत्तर प्रदेश दिवस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन’ योजना का करेंगे शुभारंभ

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शनिवार, 24 जनवरी को लखनऊ में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर आयोजित किया जाएगा।

समारोह के दौरान अमित शाह ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन’ (ODOC) योजना का शुभारंभ करेंगे। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले की विशिष्ट पारंपरिक व्यंजनों की पहचान कर उन्हें गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ा जाएगा, ताकि स्थानीय स्वादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिल सके।

इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री ‘सरदार पटेल औद्योगिक क्षेत्र कार्यक्रम’ का भी उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना (CM YUVA) के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, वर्ष 2025–26 के लिए ‘उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान’ भी प्रदान किए जाएंगे।

यह आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, उद्यमिता और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत में स्ट्रोक उपचार में ऐतिहासिक पहल: आईसीएमआर ने असम को सौंपे मोबाइल स्ट्रोक यूनिट

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भारत में स्ट्रोक मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। स्ट्रोक के मामलों में हर मिनट बेहद अहम होता है—इलाज में देरी होने पर हर मिनट लगभग 1.9 अरब मस्तिष्क कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं। ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर समय पर उपचार से मृत्यु और आजीवन विकलांगता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, स्ट्रोक उपचार की सबसे बड़ी चुनौती मरीजों का समय पर स्ट्रोक-सुविधायुक्त अस्पताल तक पहुँचना है।

इसी चुनौती का समाधान करते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने असम सरकार को दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (MSU) सौंपे। यह पहल उस मॉडल में एक बड़ा बदलाव दर्शाती है, जिसमें अब मरीजों को अस्पताल तक पहुँचने के बजाय अस्पताल मरीज तक पहुँच रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के मार्गदर्शन में विकसित यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ दूरदराज़, वंचित और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों—विशेषकर महिलाओं—तक पहुँचाई जा रही हैं।

एमएसयू को असम सरकार को सौंपते हुए, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा,

“मोबाइल स्ट्रोक यूनिट की शुरुआत जर्मनी में हुई थी और बाद में प्रमुख वैश्विक शहरों में इसका मूल्यांकन किया गया। भारत ने पहली बार ग्रामीण, दूरस्थ और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले पूर्वोत्तर क्षेत्र में इसका सफल मूल्यांकन किया है। हम दुनिया का दूसरा देश हैं जिसने ग्रामीण तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक मरीजों के उपचार के लिए एमएसयू को आपातकालीन सेवाओं के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया है।”

असम सरकार की ओर से अनुभव साझा करते हुए, पी. अशोक बाबू, सचिव एवं आयुक्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, असम ने कहा कि यह हस्तांतरण राज्य की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करता है और इस जीवनरक्षक सेवा की निरंतरता को राज्य के स्वामित्व में सुनिश्चित करता है। उन्होंने बताया कि ICMR के साथ सहयोग से तेज़ उपचार, बेहतर समन्वय और बेहतर परिणाम संभव हुए हैं, जो भविष्य में विस्तार के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

मोबाइल स्ट्रोक यूनिट एक चलती-फिरती अस्पताल व्यवस्था है, जिसमें सीटी स्कैन, विशेषज्ञों से टेली-परामर्श, पॉइंट-ऑफ-केयर लैब और क्लॉट-बस्टिंग दवाएँ उपलब्ध हैं। इससे मरीज के घर या उसके निकट ही स्ट्रोक का शीघ्र निदान और उपचार संभव हो पाता है। यह नवाचार विशेष रूप से उन दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ अस्पताल तक पहुँचने में कई घंटे लग सकते हैं।

पूर्वोत्तर भारत में स्ट्रोक का बोझ अपेक्षाकृत अधिक है। कठिन भू-भाग, लंबी दूरी और विशेष चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण समय पर उपचार चुनौतीपूर्ण रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए ICMR ने डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट-नेतृत्व वाला स्ट्रोक यूनिट और तेज़पुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल तथा बैपटिस्ट क्रिश्चियन अस्पताल, तेज़पुर में चिकित्सक-नेतृत्व वाले स्ट्रोक यूनिट स्थापित किए। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को इसी प्री-हॉस्पिटल स्ट्रोक केयर प्रणाली में जोड़ा गया।

इसके परिणाम अत्यंत प्रभावशाली रहे हैं। इस मॉडल से उपचार में लगने वाला समय लगभग 24 घंटे से घटकर करीब 2 घंटे रह गया, मृत्यु दर में एक-तिहाई की कमी आई और विकलांगता में आठ गुना तक कमी दर्ज की गई। वर्ष 2021 से अगस्त 2024 के बीच एमएसयू को 2,300 से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुईं। प्रशिक्षित नर्सों ने 294 संदिग्ध स्ट्रोक मामलों की जाँच की, जिनमें से 90% मरीजों का उपचार सीधे उनके घर से किया गया। 108-आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के साथ एकीकरण से इसकी पहुँच 100 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ी।

इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी तथा ICMR नेतृत्व उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. क्रिस्टीना जेड. चोंगथु (सचिव, स्वास्थ्य, तेलंगाना सरकार), डॉ. संघमित्रा पति (अपर महानिदेशक, ICMR), डॉ. अलका शर्मा (अपर महानिदेशक, ICMR), मनीषा सक्सेना (वरिष्ठ उप महानिदेशक–प्रशासन) और डॉ. आर.एस. ढालीवाल (प्रमुख, एनसीडी) शामिल थे।


भारत सरकार ने भारतीय कार्बन बाजार के तहत नए क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लक्ष्य अधिसूचित किए

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भारत सरकार ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के तहत अतिरिक्त कार्बन-गहन क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (GEI) लक्ष्य अधिसूचित किए हैं। 13 जनवरी 2026 को जारी इस अधिसूचना के तहत पेट्रोलियम रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र (टेक्सटाइल) और सेकेंडरी एल्युमिनियम क्षेत्रों को भारतीय कार्बन बाजार (ICM) के अनुपालन तंत्र में शामिल किया गया है।


इन क्षेत्रों के 208 बाध्यकारी इकाइयों (Obligated Entities) को अब निर्धारित उत्सर्जन-तीव्रता घटाने के लक्ष्यों को पूरा करना होगा। इस विस्तार के साथ ICM का अनुपालन तंत्र अब भारत के सबसे अधिक उत्सर्जन-गहन उद्योगों की कुल 490 बाध्यकारी इकाइयों को कवर करता है। इससे पहले, अक्टूबर 2025 में सरकार ने एल्युमिनियम, सीमेंट, क्लोर-एल्कली और पल्प व पेपर क्षेत्रों के लिए GEI लक्ष्य अधिसूचित किए थे, जिनमें 282 बाध्यकारी इकाइयाँ शामिल थीं।

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को 2023 में अधिसूचित किया गया था, जो भारतीय कार्बन बाजार के संचालन का समग्र ढांचा प्रदान करती है। CCTS का उद्देश्य कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्रों के व्यापार-आधारित तंत्र के माध्यम से उत्सर्जन की कीमत तय कर भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना या उससे बचाव करना है।

CCTS दो तंत्रों के माध्यम से संचालित होती है—अनुपालन तंत्र (Compliance Mechanism) और ऑफसेट तंत्र (Offset Mechanism)। अनुपालन तंत्र के तहत, उत्सर्जन-गहन उद्योगों को बाध्यकारी इकाइयों के रूप में नामित किया जाता है और उन्हें निर्धारित GEI लक्ष्यों को पूरा करना अनिवार्य होता है। जो इकाइयाँ अपने लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र प्राप्त होते हैं, जिन्हें वे उन इकाइयों के साथ व्यापार कर सकती हैं जो अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पातीं।

यह प्रगति उद्योग के साथ वर्षों की सतत सहभागिता, कठोर तकनीकी आकलन तथा विभिन्न संस्थानों और हितधारकों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। जैसे-जैसे क्षेत्रीय कवरेज बढ़ रहा है और अनुपालन तंत्र परिपक्व हो रहा है, भारतीय कार्बन बाजार (ICM) भारत के दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों और नेट-ज़ीरो मार्ग के अनुरूप औद्योगिक विकास को साधने में एक केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

मेडिकल वैल्यू ट्रैवल में भारत की वैश्विक उड़ान: आयुष आधारित समग्र स्वास्थ्य से बढ़ता अंतरराष्ट्रीय विश्वास

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भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) के क्षेत्र में तेजी से उभरते हुए वैश्विक गंतव्यों में शामिल हो रहा है। विश्वस्तरीय चिकित्सा अवसंरचना, अत्यधिक कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों, किफायती उपचार लागत और आयुष आधारित पारंपरिक व समग्र स्वास्थ्य प्रणालियों की विशिष्ट शक्ति के साथ भारत आज अंतरराष्ट्रीय रोगियों के लिए एक भरोसेमंद और आकर्षक स्वास्थ्य केंद्र बनता जा रहा है।

जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं से लेकर दीर्घकालिक वेलनेस थैरेपी तक, भारत एक एकीकृत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है। यहां वैश्विक मानकों के अनुरूप अस्पतालों में अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा उपचार किया जाता है, वहीं आयुष प्रणालियां—आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—रोकथाम, पुनर्वास और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

वन अर्थ, वन हेल्थ – एडवांटेज हेल्थकेयर इंडिया 2023 में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था कि “भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल और हेल्थ वर्कफोर्स मोबिलिटी को स्वस्थ ग्रह के लिए महत्वपूर्ण मानता है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं—योग, ध्यान, आयुर्वेद और मोटे अनाज आधारित पारंपरिक आहार—आज की जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और तनाव से निपटने में दुनिया को समाधान प्रदान करती हैं।

वैश्विक विश्वास और गुणवत्ता आश्वासन को और सुदृढ़ करने के लिए प्रधानमंत्री ने 19 दिसंबर 2025 को भारत मंडपम में आयोजित द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दौरान ‘आयुष क्वालिटी मार्क’ का शुभारंभ किया। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणन ढांचा आयुष उत्पादों और सेवाओं में विश्वसनीयता और मानकीकरण को बढ़ाता है।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि भारत की ताकत उसकी एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली में है। “मेडिकल वैल्यू ट्रैवल केवल किफायत नहीं, बल्कि विश्वास, गुणवत्ता और परिणामों से जुड़ा है। आयुष प्रणालियां पारंपरिक चिकित्सा के साथ मिलकर समग्र स्वास्थ्य समाधान प्रदान करती हैं,” उन्होंने कहा।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि के लिए मानकीकरण और विश्वसनीयता को अहम बताया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता आश्वासन, डिजिटल सुविधा और वैश्विक मानकों के माध्यम से भारत एक भरोसेमंद वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में स्थापित हो रहा है।

आंकड़े इस बढ़ती प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं। 2020 में 1.82 लाख अंतरराष्ट्रीय मरीजों की तुलना में 2024 में 6.44 लाख विदेशी मरीज भारत आए। योग, आयुर्वेद और वेलनेस आधारित उपचार इस वृद्धि के प्रमुख आधार बने हैं।

भारत की मेडिकल वैल्यू ट्रैवल नीति में सार्वजनिक–निजी भागीदारी, चिकित्सा अवसंरचना में 100% एफडीआई, चिकित्सा सेवाओं के निर्यात को प्रोत्साहन और वैश्विक आउटरीच की अहम भूमिका रही है। आयुष आधारित मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को बढ़ावा देने के लिए 27 जुलाई 2023 को आयुष वीज़ा की शुरुआत की गई, जिससे विदेशी रोगियों और उनके परिजनों को उपचार के लिए सुविधा मिली।

मानकीकरण की दिशा में, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के लिए ISO 22525 को अपनाया है। साथ ही, लगभग 27 बीमा कंपनियां अब आयुष उपचारों को कवर कर रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मरीजों का भरोसा और बढ़ा है।

आयुष मंत्रालय ने मुंबई (2024) और चेन्नई (2025) में आयोजित वैश्विक सम्मेलनों के माध्यम से मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को प्रमुख विषय के रूप में आगे बढ़ाया है। कौशल विकास के लिए हेल्थ सेक्टर स्किल काउंसिल के तहत आयुष उप-परिषद की स्थापना की गई, जिसके अंतर्गत अब तक 37,000 से अधिक लोगों को प्रमाणित किया जा चुका है।

नीतिगत समर्थन, वीज़ा सुविधा, बीमा कवरेज और गुणवत्ता मानकों के समन्वय के साथ, भारत की मेडिकल वैल्यू ट्रैवल यात्रा अब केवल लागत लाभ तक सीमित नहीं रही, बल्कि एकीकृत, समग्र और प्रमाण-आधारित वैश्विक स्वास्थ्य विश्वास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।

वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष: राजीव चौक में भारतीय वायु सेना बैंड की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति

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 भारत देश अपने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। इस अवसर पर सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सैन्य बैंड प्रस्तुतियों का आयोजन देश के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर किया जा रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय गौरव, एकता और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है।

इन्हीं समारोहों के अंतर्गत 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राजीव चौक स्थित एम्फीथिएटर में भारतीय वायु सेना (IAF) बैंड द्वारा एक भव्य संगीतमय प्रस्तुति दी गई। 31 संगीतकारों से युक्त इस बैंड ने लगभग 45 मिनट की प्रस्तुति में ब्रास, रीड, स्ट्रिंग और इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्रों के संयोजन से 11 मनमोहक धुनें प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में ‘वंदे मातरम्’ की भावपूर्ण प्रस्तुति तथा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के पराक्रम को समर्पित गीत ‘सिंदूर’ शामिल रहे।

सदियों से संगीत भारतीय संस्कृति का एक अमूल्य रत्न रहा है और यह भारत की समृद्ध सैन्य परंपरा का भी अभिन्न अंग है, जो एकता को प्रोत्साहित करता है और वीरता की प्रेरणा देता है। वर्ष 1944 में स्थापना के बाद से भारतीय वायु सेना बैंड, भारतीय और पाश्चात्य संगीत के अपने विविध संग्रह के माध्यम से देश की सैन्य परंपराओं का सशक्त प्रतीक बना हुआ है।

भारतीय वायु सेना बैंड का उद्देश्य अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से देशवासियों में देशभक्ति की भावना को जागृत करना और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।


23 जनवरी से बदलेगी राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था, साय कैबिनेट की मुहर

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 21 जनवरी को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में रायपुर पुलिस कमिश्नरी प्रणाली को औपचारिक मंजूरी दे दी गई। अधिसूचना जारी होने के साथ यह व्यवस्था 23 जनवरी 2026 से प्रभावशील होगी।


कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के बाद रायपुर पुलिस को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत मजिस्ट्रेटी अधिकार प्राप्त होंगे। इससे आपात स्थितियों में त्वरित निर्णय संभव हो सकेगा और शहर की सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी।

पांच राज्यों के मॉडल पर आधारित नई व्यवस्था


रायपुर के लिए तैयार की गई पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था देश के पांच राज्यों के सात प्रमुख महानगरों की पुलिसिंग प्रणाली के अध्ययन के बाद विकसित की गई है। इसमें अपराध नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और वीवीआईपी सुरक्षा के लिए आधुनिक संसाधनों एवं त्वरित निर्णय प्रणाली को शामिल किया गया है।

रायपुर आईजी रेंज का होगा पुनर्गठन

कमिश्नरी लागू होने के बाद रायपुर आईजी रेंज का स्वरूप भी बदलेगा। धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद और बलौदाबाजार को मिलाकर एक नया आईजी रेंज गठित किया जाएगा। पुलिस आयुक्त केवल रायपुर शहर की कानून-व्यवस्था के लिए उत्तरदायी होंगे, जबकि अन्य जिलों की जिम्मेदारी नए आईजी रेंज के पास रहेगी।

आपात स्थितियों में पुलिस को त्वरित निर्णय की शक्ति

कमिश्नरी प्रणाली के अंतर्गत पुलिस को लाठीचार्ज, धारा 144 लागू करने और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।

23 जनवरी से नई पुलिसिंग व्यवस्था

कैबिनेट निर्णय के बाद 21 जनवरी को पुलिस आयुक्त की नियुक्ति की घोषणा की जाएगी।

23 जनवरी से रायपुर में कमिश्नरी प्रणाली लागू होगी।

कमिश्नरी क्षेत्र में 28 थाना क्षेत्र शामिल होंगे। रायपुर जिले के कुल 32 थानों में से 28 थाने, नवा रायपुर क्षेत्र और ट्रैफिक पुलिस कमिश्नरी के अधीन रहेंगे।

मंत्रालय, विधानसभा और राजभवन जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों के कारण नवा रायपुर को इस प्रणाली का प्रमुख केंद्र बनाया गया है।

नई व्यवस्था में पहली बार रायपुर में दो संयुक्त पुलिस आयुक्त तैनात किए जाएंगे, जिनमें से एक पद पर महिला आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की तैयारी है।

ग्रामीण क्षेत्र अलग रहेंगे। तिल्दा, आरंग और खरोरा जैसे क्षेत्रों को कमिश्नरी से बाहर रखकर अलग आईजी रेंज के अधीन रखा गया है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रायपुर में पुलिस कमिश्नरी लागू करना सरकार की घोषणा का हिस्सा था। अधिसूचना जारी कर दी गई है और यह व्यवस्था 23 जनवरी 2026 से लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे राजधानी में कानून-व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और अपराध रोकथाम को नई मजबूती मिलेगी।

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