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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों के अनुपालन में अवैध खनन एवं परिवहन पर लगातार कार्यवाही

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अवैध खनन पर शासन-प्रशासन सख्त : केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की कार्रवाई में 4 हाईवा जब्त

राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अवैध खनन और परिवहन पर हो रही कड़ी निगरानी

गहन समीक्षा, प्रशासनिक चौकसी और खनिज विभाग की सक्रियता से अवैध गतिविधियों पर लग रहा अंकुश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े और स्पष्ट निर्देशों तथा राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज विभाग का मैदानी अमला लगातार सक्रियता के साथ कार्यवाही कर रहा है। शासन स्तर पर की जा रही गहन समीक्षा, सख्त निगरानी और प्रशासनिक चौकसी के परिणामस्वरूप अवैध खनिज गतिविधियों पर लगातार अंकुश लगा है।



खनिज विभाग के सचिव एवं संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता तथा जिला स्तरीय टीमों द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण और संयुक्त कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 27 मई 2026 को केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने जिला रायपुर, महासमुंद एवं गरियाबंद क्षेत्र अंतर्गत सघन निरीक्षण अभियान चलाया।

निरीक्षण के दौरान रायपुर जिले के विधानसभा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिरदा एवं घिवरा में गौण निम्न श्रेणी चूनापत्थर से भरे 01 हाईवा तथा रेत के 03 हाईवा को वैध अभिवहन पास एवं अनुमति के बिना खनिज परिवहन करते पाए जाने पर अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया गया। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए चारों हाईवा वाहनों को जब्त कर संबंधित वाहन चालकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। जब्त वाहनों को आगामी आदेश तक रायपुर जिले के समीपस्थ विधानसभा एवं खरोरा थाना परिसर में अभिरक्षा में खड़ा कराया गया है। जांच के दौरान केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार राज्य में अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। शासन-प्रशासन की सख्ती, बढ़ी चौकसी और सतत निगरानी के कारण अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाही सुनिश्चित की जा रही है।

त्रिपुरा के उदयपुर में क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम: 4,577 लाभार्थियों को ₹105.40 करोड़ के ऋण वितरित

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26 मई 2026 को त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर में एक क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय के सचिव एम. नगराजू ने की।

इस कार्यक्रम के दौरान उदयपुर में विभिन्न बैंकों द्वारा 4,577 लाभार्थियों को ₹105.40 करोड़ के ऋण वितरित किए गए। NABARD और SIDBI ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए ₹2 करोड़ से अधिक की मंजूरी की घोषणा की। बैंकों ने स्कूलों और आंगनवाड़ियों के बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए CSR गतिविधियों के तहत भी सहायता स्वीकृत की। MSME क्षेत्र को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय उधारकर्ताओं को समर्थन देने के लिए उदयपुर में SIDBI की एक क्लस्टर डेवलपमेंट शाखा का उद्घाटन किया गया, जबकि DFS द्वारा “Financial Inclusion 2.0 Vision Document” भी जारी किया गया।

कार्यक्रम में वित्तीय समावेशन पर बोलते हुए सचिव (DFS) ने कहा कि वित्तीय समावेशन केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। उन्होंने ऋण के उत्पादक उपयोग और उद्यमिता आधारित रोजगार सृजन के महत्व पर जोर दिया और लाभार्थियों से अपील की कि वे ऋण का सही उपयोग करें ताकि उनके खाते NPA (Non-Performing Assets) में न बदलें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी और बैंकिंग योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को व्यवहार्य आर्थिक गतिविधियाँ स्थापित करनी चाहिए और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

इस कार्यक्रम में त्रिपुरा के वित्त सचिव प्रशांत गोयल, SBI के MD अश्विनी कुमार तिवारी, PNB के ED एम. परमसिवम, NABARD के DMD जी. रावत सहित DFS, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

भारतीय तटरक्षक बल और ATS की संयुक्त कार्रवाई में मुंद्रा तट के पास 115 किग्रा कोकीन जब्त, कीमत लगभग 1150 करोड़ रुपये

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भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने समुद्री मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए लगभग 115 किलोग्राम कोकीन जब्त की है। यह कार्रवाई 25–26 मई 2026 के दौरान गुजरात के मुंद्रा तट के पास एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) गुजरात के साथ संयुक्त खुफिया आधारित ऑपरेशन में की गई। जब्त किए गए मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 1150 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ATS गुजरात द्वारा दी गई विशिष्ट और सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय तटरक्षक बल की इंटरसेप्टर नौकाओं ने ATS कर्मियों के साथ मुंद्रा एंकरज क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एक कंटेनर जहाज पर संदिग्ध गतिविधि देखी गई। त्वरित कार्रवाई और दोनों एजेंसियों के बीच उत्कृष्ट समन्वय का प्रदर्शन करते हुए टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर समुद्र से पांच बैग बरामद किए।

जांच के दौरान इन बैगों में सफेद पाउडर जैसा पदार्थ पाया गया, जिसकी जांच में कोकीन होने की पुष्टि हुई। कुल 115 पैकेट, प्रत्येक लगभग एक किलोग्राम वजन के, यानी लगभग 115 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया गया। इसके बाद संबंधित जहाज को आगे की जांच के लिए बंदरगाह पर लाया गया।

यह पिछले पांच वर्षों में भारतीय तटरक्षक बल और ATS द्वारा किया गया 15वां सफल संयुक्त मादक पदार्थ विरोधी अभियान है, जो समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और “नशा मुक्त भारत” के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कनाडा दौरे पर पीयूष गोयल ने निवेश, तकनीक और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर, 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य पर सहमति

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने कनाडा दौरे के दूसरे दिन टोरंटो में वरिष्ठ कनाडाई व्यापार नेताओं और संस्थागत निवेशकों के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इस दौरे का उद्देश्य भारत–कनाडा द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना तथा निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी को रणनीतिक क्षेत्रों में बढ़ावा देना है।

दिन की शुरुआत उन्होंने कनाडा–इंडिया “बिल्डिंग ब्रिजेस” कार्यक्रम में मुख्य भाषण के साथ की, जिसे ग्लोबल अफेयर्स कनाडा, CII और ASSOCHAM द्वारा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर टोरंटो में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में 150 से अधिक व्यापार प्रतिनिधियों, निवेश समूहों और उद्योग संगठनों ने भाग लिया, जिनमें उन्नत विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ तकनीक, ऊर्जा तथा तेल एवं गैस क्षेत्र शामिल थे।

इसके बाद गोयल और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनींदर सिद्धू के बीच एक फायरसाइड चैट हुई। इसमें गोयल ने भारत और कनाडा के बीच बढ़ती पूरकताओं पर प्रकाश डालते हुए मजबूत और पूर्वानुमान योग्य व्यापारिक माहौल की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री सिद्धू ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई और कनाडा के अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति की सराहना की। उन्होंने नवंबर में भारत के लिए “टीम कनाडा ट्रेड मिशन” की घोषणा की, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के अवसर तलाशना है।

दोनों पक्षों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने और वर्ष के अंत तक CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) वार्ता को पूरा करने के साझा लक्ष्य की पुष्टि की।

इसके बाद भारत–कनाडा निवेश गोलमेज बैठक आयोजित हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता दोनों मंत्रियों ने की। इसमें कनाडा के प्रमुख पेंशन फंड्स, बैंक और निवेश संस्थान शामिल हुए। चर्चा का केंद्र भारत सरकार की बुनियादी ढांचा विकास, वित्तीय क्षेत्र सुधार और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीतियाँ रहीं, जो वैश्विक निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। गोयल ने निवेशकों को स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई, विनिर्माण और सप्लाई चेन विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने कनाडा की कई प्रमुख कंपनियों और वित्तीय निवेशकों के साथ व्यक्तिगत बैठकें भी कीं, जिनमें बीमा, खाद्य प्रसंस्करण, बैंकिंग और महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण क्षेत्र शामिल थे। इन बैठकों में भारत के मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक, व्यापार समझौतों पर बढ़ता फोकस, उच्च-विकास क्षेत्रों के अवसर, STEM प्रतिभा और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की वृद्धि, PLI योजनाएँ तथा भारत के बेहतर होते नियामक ढांचे पर चर्चा हुई।

इसके बाद गोयल ने टोरंटो के Humber Bay Park स्थित कनिष्क स्मारक का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित की और एयर इंडिया फ्लाइट AI-182 आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी।

दिन का समापन ब्रैम्पटन स्थित पियर्सन कन्वेंशन सेंटर में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित स्वागत समारोह के साथ हुआ। यहाँ भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कनाडा में भारतीय समुदाय की भूमिका और भारत–कनाडा व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को रेखांकित किया।

गोयल इस दौरे पर 100 से अधिक भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह तीन दिवसीय यात्रा भारत–कनाडा आर्थिक संबंधों को पुनर्जीवित करने और CEPA वार्ता को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



SECL दौरे में कोयला उत्पादन, डिजिटलीकरण और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर, छत्तीसगढ़ सीएम से हुई अहम चर्चा

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केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री, भारत सरकार, सतीश चंद्र दुबे ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) का एक दिवसीय दौरा किया, जिसके दौरान उन्होंने कंपनी के परिचालन प्रदर्शन, बुनियादी ढांचा पहलों और भविष्य की विकास योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी मुलाकात की, जिसमें कोयला उत्पादन, अवसंरचना विकास, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और राज्य में औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने, प्रमुख विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने, संचालन को सुगम बनाने और कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में आर्थिक विकास तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोयला क्षेत्र के विकास में दिए जा रहे निरंतर सहयोग की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण राज्य की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान को और मजबूत करेगा।

SECL मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने कोयला उत्पादन, डिस्पैच, गुणवत्ता प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटलीकरण, पर्यावरणीय स्थिरता उपायों, कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं, माइन क्लोजर गतिविधियों, CSR पहलों और कंपनी की भविष्य की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की। इस बैठक में SECL के सीएमडी हरिश दुहन, कार्यकारी निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी, कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और SECL के अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री ने सुरक्षित और सतत खनन प्रक्रियाओं, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि SECL भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और उत्पादन, गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों तथा पर्यावरण प्रबंधन में कंपनी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि CSR गतिविधियों को कोयला क्षेत्र में रहने वाले लोगों के समावेशी विकास और कल्याण पर केंद्रित रहना चाहिए।

इस अवसर पर SECL के सीएमडी हरिश दुहन ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में SECL ने कोल इंडिया के 100 मिलियन टन के संचयी उत्पादन लक्ष्य में 26.86 मिलियन टन का सर्वाधिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि कंपनी कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

SECL की डिजिटल परिवर्तन पहल के तहत मंत्री ने ई-डैडास (e-DADAS – Design and Drawings Approval in SECL) पोर्टल और अस्पताल प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (HMIS) पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-डैडास पोर्टल प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित इंजीनियरिंग डिज़ाइन और ड्रॉइंग के ऑनलाइन मूल्यांकन, निगरानी और अनुमोदन को सुगम बनाएगा, जिससे पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा। वहीं HMIS पोर्टल अस्पतालों में मरीजों के रिकॉर्ड और प्रबंधन प्रणाली के डिजिटलीकरण के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा।

दौरे के दौरान दुबे ने बिलासपुर स्थित इंदिरा विहार स्वास्थ्य केंद्र में अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइज़र यूनिट का भी उद्घाटन किया। यह उन्नत स्वचालित परीक्षण क्षमता से युक्त मशीन तेज और अधिक सटीक रक्त परीक्षण सुनिश्चित करेगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की निदान दक्षता को बढ़ाएगी। मंत्री ने स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं की समीक्षा भी की और SECL द्वारा चिकित्सा अवसंरचना एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की।



भारत में 2025–26 में अब तक का सर्वाधिक 376.56 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान, कृषि मंत्रालय ने जारी किए तृतीय अग्रिम आंकड़े

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वर्ष 2025–26 के प्रमुख कृषि फसलों के उत्पादन के तृतीय अग्रिम अनुमान (Third Advance Estimates) जारी किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब रिकॉर्ड कृषि उत्पादन के रूप में दिखाई दे रहा है।

इन अनुमानों के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष के 357.732 मिलियन टन की तुलना में लगभग 18.8 मिलियन टन (5.3%) अधिक है। यह देश के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक खाद्यान्न उत्पादन है। मंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए देश के किसानों को बधाई दी।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी तृतीय अग्रिम अनुमान भारत की कृषि प्रगति की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। फसलवार आंकड़ों के अनुसार चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 154.024 मिलियन टन, गेहूं 120.657 मिलियन टन और मक्का 55.093 मिलियन टन अनुमानित है। श्री अन्न का उत्पादन 17.584 मिलियन टन, अरहर 3.592 मिलियन टन, चना 12.514 मिलियन टन तथा मसूर 1.762 मिलियन टन अनुमानित है।

इसी प्रकार कुल तिलहन उत्पादन 43.059 मिलियन टन अनुमानित है। मूंगफली का उत्पादन रिकॉर्ड 13.074 मिलियन टन, सोयाबीन 12.596 मिलियन टन तथा सरसों एवं राई 13.768 मिलियन टन (रिकॉर्ड) अनुमानित है। गन्ने का उत्पादन 500.063 मिलियन टन (रिकॉर्ड), कपास 29.024 मिलियन गांठें तथा जूट 9.176 मिलियन गांठें अनुमानित हैं।

मंत्री चौहान ने बताया कि विस्तृत आंकड़ों के अनुसार चावल उत्पादन पिछले वर्ष के 150.184 मिलियन टन की तुलना में बढ़कर 154.024 मिलियन टन हो गया है। गेहूं उत्पादन 117.945 मिलियन टन से बढ़कर 120.657 मिलियन टन अनुमानित है। मक्का उत्पादन 43.409 मिलियन टन से बढ़कर 55.093 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। श्री अन्न सहित मोटे अनाजों का कुल उत्पादन 74.472 मिलियन टन अनुमानित है।

दलहन फसलों में अरहर का उत्पादन लगभग पिछले वर्ष के समान 3.592 मिलियन टन अनुमानित है। चना उत्पादन 11.114 मिलियन टन से बढ़कर 12.514 मिलियन टन हो गया है। मसूर का उत्पादन 1.762 मिलियन टन अनुमानित है।

तिलहन में कुल उत्पादन 43.059 मिलियन टन अनुमानित है। मूंगफली उत्पादन 11.942 मिलियन टन से बढ़कर 13.074 मिलियन टन, सोयाबीन 12.596 मिलियन टन तथा सरसों एवं राई 12.667 मिलियन टन से बढ़कर 13.768 मिलियन टन अनुमानित है।

व्यावसायिक फसलों में गन्ना उत्पादन 454.611 मिलियन टन से बढ़कर 500.063 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कपास उत्पादन 29.024 मिलियन गांठें (प्रत्येक 170 किलोग्राम) तथा जूट उत्पादन 9.176 मिलियन गांठें (प्रत्येक 180 किलोग्राम) अनुमानित है।

मंत्री ने कहा कि ये तृतीय अग्रिम अनुमान स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि देश में खाद्यान्न, प्रमुख अनाज, तिलहन और व्यावसायिक फसलों का उत्पादन मजबूत स्थिति में है और कई फसलों में रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और उसके संस्थानों द्वारा किए गए अनुसंधान ने उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें जलवायु-लचीली फसल किस्मों का विकास, वर्षा आधारित कृषि तकनीकें और किसानों तक वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रसार शामिल है।

पिछले वर्ष आयोजित विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत वैज्ञानिकों ने सीधे किसानों से संपर्क कर कृषि पद्धतियों को मजबूत किया। किसानों को जलवायु-लचीली तकनीक, बेहतर उत्पादन विधियाँ और वैज्ञानिक सलाह प्रदान की गई।

वर्ष 2025–26 में ICAR ने विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए 339 फसल किस्में विकसित कीं, जिनमें अनाज, तिलहन, दलहन, व्यावसायिक फसलें और चारा फसलें शामिल हैं।

वर्ष 2024–25 में प्रजनक बीज उत्पादन 109,370.2 क्विंटल तथा गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन 433,114.7 क्विंटल रहा। मृदा एवं जल संसाधन प्रबंधन, जलवायु-स्मार्ट कृषि, डिजिटल मृदा विश्लेषण और सतत कृषि तकनीकों में नवाचारों ने भी उत्पादन वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 का मुख्य समारोह कोलकाता में, “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” होगी थीम

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 का मुख्य समारोह 21 जून को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित किया जाएगा। इसकी घोषणा केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing) रखी गई है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और स्वस्थ उम्र बढ़ने में योग की भूमिका को रेखांकित करती है।

यह घोषणा खजुराहो स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, पश्चिमी मंदिर समूह में आयोजित योग महोत्सव 2026 के दौरान की गई, जो IDY 2026 के 25 दिन के काउंटडाउन की शुरुआत का प्रतीक है। इस कार्यक्रम का आयोजन आयुष मंत्रालय के अधीन मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) द्वारा किया गया, जिसमें हजारों योग प्रेमियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) के सामूहिक प्रदर्शन में भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि कोलकाता, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का केंद्र है, IDY 2026 के मुख्य समारोह की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” विषय जीवन के बढ़ते चरण में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि खजुराहो अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के कारण भारत की प्राचीन परंपराओं और स्वास्थ्य अभ्यासों के सामंजस्य का प्रतीक है और यह भविष्य में वैश्विक योग एवं वेलनेस केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

मंत्री जाधव ने कहा कि योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए और आयुष मंत्रालय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, योग को गाँव-गाँव, घर-घर, स्कूलों, कार्यालयों और समुदायों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि योग और आयुष आहार जैसी पहलें संतुलित पोषण, अनुशासित जीवन और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने योग संगम पोर्टल को पुनः लॉन्च किया, जिससे ऑनलाइन पंजीकरण और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही योग पार्क पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जो राज्यों और संस्थानों में योग स्थानों के विकास में मदद करेगा। उन्होंने नया डिज़ाइन किया गया योग टी-शर्ट भी प्रस्तुत किया, जो योग, स्वास्थ्य और कल्याण का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि योग 365 अभियान के तहत 100 दिन के निःशुल्क योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में दो लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया है और उन्हें योग मित्र प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि योग और खजुराहो भारत की सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी तेजी से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रही है, जिससे समाज अधिक स्वस्थ और जागरूक बन रहा है।

मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि योग और आयुर्वेद केवल अभ्यास नहीं बल्कि भारत की समृद्ध परंपराओं पर आधारित जीवन शैली हैं। उन्होंने शिक्षा और योग के संयोजन को स्वस्थ समाज निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मध्य प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत मूल्यों को दर्शाता है तथा जनमानस में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है और अब यह लगभग 190 देशों में अपनाया जा रहा है।

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दाश ने कहा कि आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में योग समग्र स्वास्थ्य के लिए सरल और स्थायी समाधान प्रदान करता है। उन्होंने नागरिकों से ‘योग मित्र’ बनने और 14 जून 2026 को होने वाले गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रयास में भाग लेने की अपील की।

कार्यक्रम में हजारों योग प्रेमियों ने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) काशीनाथ सामगंडी के नेतृत्व में कॉमन योग प्रोटोकॉल का सामूहिक प्रदर्शन किया। यह प्रोटोकॉल सभी आयु वर्ग के लोगों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई योग अभ्यासों की मानकीकृत श्रृंखला है।

यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ और योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता है।



आयुष मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में ASU चिकित्सा प्रणाली के लिए वैश्विक कोडिंग ढांचे के विकास पर चर्चा

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भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने 25–26 मई 2026 को ऑनलाइन माध्यम से आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (ASU) चिकित्सा प्रणालियों के लिए इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेल्थ इंटरवेंशन्स (ICHI) तथा नेशनल हेल्थ इंटरवेंशन कोड्स (NHIC) के विकास पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक और परामर्श चर्चा का आयोजन किया।

World Health Organization के साथ हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) और डोनर एग्रीमेंट के बाद यह पहल पारंपरिक चिकित्सा हस्तक्षेपों को WHO के ICHI फ्रेमवर्क में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (ASU) चिकित्सा हस्तक्षेपों के लिए एक वैश्विक स्तर पर मानकीकृत और वैज्ञानिक रूप से मजबूत कोडिंग शब्दावली विकसित करना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा का आदान-प्रदान, नैदानिक अनुसंधान को बढ़ावा और स्वास्थ्य प्रणालियों की अंतर-संचालनीयता (interoperability) सुनिश्चित की जा सके, साथ ही बीमा एकीकरण में भी सहायता मिले।

इस बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित हस्तक्षेप वर्गीकरण पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करने, दस्तावेज़ीकरण को मजबूत करने तथा डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में अंतर-संचालनीयता बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उद्घाटन एवं तकनीकी सत्र

उद्घाटन सत्र में Central Council for Research in Ayurvedic Sciences के उपमहानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत ने स्वागत संबोधन दिया। संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने अपने प्रारंभिक वक्तव्य में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को साक्ष्य-आधारित बनाने के लिए मानकीकृत हस्तक्षेप शब्दावली के महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके बाद World Health Organization के प्रतिनिधियों, जिनमें डॉ. पवन गोडतवार (WHO-SEARO) और डॉ. गीता कृष्णन (GTMC जामनगर) शामिल थे, ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

चार-स्तरीय (four-level) श्रेणीबद्ध कोडिंग ढांचों पर विस्तृत तकनीकी प्रस्तुतियाँ संबंधित अनुसंधान परिषदों द्वारा दी गईं:

  • आयुर्वेद (NHICA): प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक, CCRAS

  • सिद्ध (NHICS): प्रो. डॉ. एन. जे. मुथुकुमार, महानिदेशक, CCRS

  • यूनानी (NHICUM): डॉ. एन. ज़हीर अहमद, महानिदेशक, CCRUM

Dr. Nenad Kostanjsek सहित World Health Organization की डेटा स्टैंडर्ड्स एवं इन्फॉर्मेटिक्स टीम के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने ASU हस्तक्षेप वर्गीकरण को वैश्विक स्वास्थ्य सूचना मानकों के अनुरूप बनाने हेतु भविष्य की रूपरेखा और तकनीकी आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया।

दो दिवसीय बैठक में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए अलग-अलग ब्रेकआउट सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें ड्राफ्ट दस्तावेजों की विस्तृत तकनीकी समीक्षा, परीक्षण और विशेषज्ञ परामर्श किया गया। इस बैठक में लगभग 30 वैज्ञानिकों के साथ-साथ Institute of Teaching and Research in Ayurveda, All India Institute of Ayurveda, National Institute of Unani Medicine तथा अन्य प्रमुख आयुष राष्ट्रीय संस्थानों के संकाय सदस्यों ने भाग लिया।

यह अंतिम रूप दिया गया ढांचा जुलाई 2026 में प्रस्तावित WHO-ICHI ASU अल्फा ड्राफ्ट संपादकीय कार्यशाला का आधार बनेगा।

बारनवापारा के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी,वन मंत्री केदार कश्यप ने दी बधाई

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जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

रायपुर- छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं।

देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति

बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की।

विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत

विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका  (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है।

कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति

यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है।

बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता

वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


छत्तीसगढ़ में अनुपयोगी सरकारी जमीनों का होगा कायाकल्प- तैयार होगी रिडेव्हलपमेंट कार्ययोजना

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विभागों, निगम-मंडलों और बोर्ड की खाली जमीनों का होगा व्यवस्थित विकास, बनेगा डिजिटल लैंड बैंक

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में शासकीय विभागों, निगम-मंडलों, कंपनियों और बोर्डों के स्वामित्व वाली अनुपयोगी व खाली जमीनों के व्यवस्थित विकास और सदुपयोग के लिए एक व्यापक रिडेव्हलपमेंट कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर आज मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों से चिन्हित की गई भूमियों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि वर्तमान में अनुपयोगी पड़ी सरकारी जमीनों से न तो शासन को कोई आय हो रही है और न ही जनता को इसका लाभ मिल रहा है। इस रिडेव्हलपमेंट योजना से जहां शहरों को एक नियोजित विकास मिलेगा, वहीं शासकीय परिसंपत्तियों का मूल्य भी कई गुना बढ़ जाएगा।

डिजिटल लैंड बैंक और जीआईएस मैपिंग से होगी निगरानी

बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्षों से खाली पड़ी या अतिक्रमण की आशंका वाली सरकारी जमीनों को चिन्हित कर उनका व्यावसायिक व जनहित में बेहतर उपयोग किया जाएगा। शासकीय विभागों के अंतर्गत आने वाली सभी खाली जमीनों का एक केंद्रीय डिजिटल लैंड बैंक तैयार किया जाएगा। मैपिंग के जरिए हर प्लॉट की सटीक लोकेशन, रकबा (क्षेत्रफल) और वर्तमान स्थिति का डेटा जीआईएस (GIS) मैपिंग ऑनलाइन दर्ज होगा। शहरों में प्राइम लोकेशन पर स्थित खाली जमीनों पर आवासीय योजनाएं, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, पार्किंग और नए सरकारी कार्यालय बनाए जाएंगे। बड़ी जमीनों के विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को राजस्व भी मिलेगा।  बड़ी जमीनों के विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को राजस्व भी मिलेगा।  

ग्रामीण क्षेत्रों का विकास

ग्रामीण इलाकों की जमीनों पर कृषि, उद्यानिकी, आधुनिक वेयरहाउस या कौशल विकास केंद्र (Skill Development Centers) प्रस्तावित किए जाएंगे। बड़ी जमीनों के सुनियोजित विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी।

जर्जर भवनों को ढहाकर होगा नवनिर्माण, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

योजना के तहत ऐसे शासकीय भवनों और परिसरों को चिन्हित किया जाएगा जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और जिनकी मरम्मत करना वित्तीय दृष्टि से फायदेमंद नहीं है। ऐसी जगहों पर पुरानी संरचनाओं को हटाकर शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सरकारी विभागों या उनके उपक्रमों के लिए नए और आधुनिक निर्माण किए जाएंगे।  सुरक्षा के लिहाज से चिन्हित जमीनों पर तत्काल फेंसिंग (घेराबंदी) की जाएगी और शासकीय स्वामित्व का बोर्ड लगाया जाएगा। इन जमीनों पर अवैध कब्जे रोकने के लिए राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से निगरानी रखेंगे।

इस महत्वपूर्ण बैठक में विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, आयुक्त छत्तीसगढ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडलअवनीश शरण, एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी संभागायुक्त व कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।

भीषण गर्मी में सतर्कता और संवेदनशीलता बरतें, जरूरतमंदों का सहारा बनें - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक हिस्सों में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी के मद्देनजर प्रदेशवासियों से सतर्कता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ इस चुनौतीपूर्ण समय का सामना करने की अपील की है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि अत्यधिक गर्मी के इस दौर में प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से पर्याप्त पानी पीने, बाहर निकलते समय पानी साथ रखने तथा अनावश्यक रूप से तेज धूप में जाने से बचने का आग्रह करते हुए कहा कि छोटी-सी सावधानी स्वयं और परिवार को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो घर, दुकान, कार्यालय अथवा सार्वजनिक स्थानों के आसपास राहगीरों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था अवश्य की जाए, क्योंकि संवेदना का यह छोटा प्रयास किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए राहत और संबल बन सकता है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बच्चों, बुज़ुर्गों, श्रमिक साथियों तथा खुले में कार्य करने वाले लोगों का ध्यान रखने की अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ती दिखाई दे, तो उसे तुरंत छायादार या ठंडी जगह पर ले जाकर पानी, ओआरएस अथवा अन्य तरल पदार्थ उपलब्ध कराए जाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता भी सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री साय ने पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील होने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि घर, आंगन, छत, दुकान अथवा आसपास पानी का एक छोटा पात्र रखने जैसी छोटी पहल इस भीषण गर्मी में किसी जीव के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह समय सेवा, संवेदना, सजगता और सामाजिक सहयोग की भावना को मजबूत करने का है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि सभी एक-दूसरे का संबल बनें और मानवता के इस दायित्व को मिलकर निभाएं।

प्राकृतिक आपदा के दो मामलों में मृतकों के परिजनों को 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने की दिशा में लगातार सहायता प्रदान की जा रही है। राजस्व पुस्तक परिपत्र (आर.बी.सी.) 6-4 के प्रावधानों के तहत जशपुर जिले में प्राकृतिक आपदा से हुई जनहानि के दो मामलों में कुल 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है।


अपर कलेक्टर प्रदीप साहू से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जशपुर तहसील के ग्राम पाकरटोली निवासी अनूप पवन खलखो की सर्पदंश से मृत्यु हो गई थी। इस प्रकरण में उनकी पत्नी श्रीमती संजीता खलखो को 4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है।

इसी प्रकार कुनकुरी तहसील के ग्राम हस्तिनापुर निवासी विकास कुमार की आकाशीय बिजली गिरने से मृत्यु हो जाने पर उनकी माता बालमती मलार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
जिला प्रशासन द्वारा प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं प्राथमिकता के साथ पूर्ण की जा रही हैं, ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता मिल सके।

भीषण गर्मी को लेकर PM मोदी की अपील: ज्यादा पानी पिएं, लू के लक्षणों को नजरअंदाज न करें

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 नई दिल्ली। देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि इस मौसम में पर्याप्त पानी पीना सबसे जरूरी है और लोगों को खुद के साथ-साथ दूसरों का भी ध्यान रखना चाहिए।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग और धूप में काम करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। समय रहते ध्यान नहीं देने पर स्थिति ‘लू लगने’ यानी हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में समय पर देखभाल और सतर्कता किसी की जान बचा सकती है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखने और जरूरतमंदों को भी पानी उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस तरह की संवेदनशीलता और करुणा भीषण गर्मी के दौरान बेहद मायने रखती है।

उन्होंने नागरिकों को चक्कर आना, मतली, सिरदर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षणों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अस्वस्थ महसूस करे या कमजोरी दिखाई दे तो उसे तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाकर पानी और ओआरएस उपलब्ध कराना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपने बुजुर्ग माता-पिता, दादा-दादी और अन्य परिजनों का नियमित हालचाल लेने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि उन्हें पर्याप्त पानी पीने, दोपहर में घर से बाहर नहीं निकलने और पर्याप्त आराम करने की सलाह दें।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने पशु-पक्षियों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि घर, बालकनी, छत, दुकान या कार्यालय के बाहर पानी से भरा एक छोटा बर्तन रखना किसी प्यासे पक्षी के लिए जीवनदान साबित हो सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में करुणा और सतर्कता ही सबसे बड़ी जरूरत है।

छत्तीसगढ़ में बकरीद को लेकर अलर्ट: खुले में कुर्बानी पर रोक, डीजे बजाने पर होगी कार्रवाई

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर प्रशासन और वक्फ बोर्ड अलर्ट मोड पर हैं। त्योहार के दौरान कानून व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और स्वच्छता बनाए रखने के लिए राज्यभर में सख्त गाइडलाइन जारी की गई है। खुले में कुर्बानी, तेज आवाज में डीजे बजाने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। वहीं नमाज शिफ्ट में अदा कराई जाएगी।


छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने बताया कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पिछले साल से शिफ्ट में नमाज अदा कराने की व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 50 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

सुबह 6 से 11 बजे तक होगी नमाज

राज्यभर की प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में बकरीद की नमाज सुबह 6 बजे से 11 बजे के बीच अलग-अलग शिफ्ट में अदा कराई जाएगी। प्रशासन के अनुसार इससे ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था संभालने में आसानी होगी।

खुले में कुर्बानी पर सख्त रोक

वक्फ बोर्ड और प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, मैदानों और खुले इलाकों में कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी। कुर्बानी केवल अधिकृत स्लॉटर हाउस या निजी परिसरों में ही की जा सकेगी।

प्रशासन का कहना है कि यह फैसला स्वच्छता बनाए रखने और सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करने के उद्देश्य से लिया गया है। नगर निगम की टीमों को त्योहार के दौरान विशेष सफाई अभियान चलाने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

डीजे और तेज आवाज पर भी सख्ती

त्योहार के दौरान तेज आवाज में डीजे और साउंड सिस्टम बजाने पर भी प्रशासन सख्त रहेगा। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा कि निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में साउंड सिस्टम बजाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीमें लगातार निगरानी करेंगी।

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जरूरी, सुप्रीम कोर्ट ने ECI के SIR को सही ठहराया

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 नई दिल्ली, 27 मई। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वैध ठहराते हुए कहा कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक आवश्यकता को मजबूत करती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि SIR कराना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसे गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता।


मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि निर्वाचन आयोग ने SIR के जरिए अपने वैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण किया है। अदालत ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद है, इसलिए इस तरह का पुनरीक्षण स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयोग द्वारा उठाया गया कदम केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना था। अदालत ने माना कि लंबे समय से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम जुड़ने और हटने, शहरीकरण, प्रवासन और दोहराव जैसी समस्याओं को देखते हुए SIR जरूरी था।

दरअसल, SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं में दावा किया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत चुनाव आयोग को इतने व्यापक स्तर पर विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का अधिकार नहीं है। इन याचिकाओं में NGO ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) की याचिका भी शामिल थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया “NRC जैसी” है, जिसमें चुनाव आयोग नागरिकता की जांच कर रहा है, जबकि यह अधिकार केंद्र सरकार के पास है। वहीं निर्वाचन आयोग ने दलील दी थी कि आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जा सकते।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। बिहार में SIR अभियान का पहला चरण पहले ही पूरा किया जा चुका है। आयोग ने इस प्रक्रिया के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 65 लाख लोगों के नाम भी सार्वजनिक किए थे।

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