Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

साधु के भेष में भीख मांगने का मामला: संदेह के आधार पर दो युवक हिरासत में

No comments Document Thumbnail

 भिलाई (जामुल)। जामुल थाना क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब साधु के भेष में घर-घर भीख मांग रहे एक व्यक्ति को स्थानीय लोगों ने संदिग्ध गतिविधियों के चलते पकड़ लिया। मामले की जानकारी मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और युवक को जामुल थाना पुलिस के हवाले कर दिया।


स्थानीय लोगों के अनुसार, साधु का भेष धारण कर तंबूरा बजाते हुए “राम-राम” और “जय श्रीराम” का उद्घोष करते हुए भीख मांग रहे व्यक्ति पर उन्हें शक हुआ। शंका के चलते लोगों ने उससे भगवान राम से जुड़े कुछ सामान्य प्रश्न पूछे, जिनका वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे सका। सवालों के दौरान वह घबरा गया और रोने लगा।

मामले की सूचना बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को दी गई, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर युवक को थाने पहुंचाया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने मोर्या टॉकीज क्षेत्र के पास से एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया है।

हिंदू संगठन से जुड़ी ज्योति शर्मा ने बताया कि पूछताछ के दौरान युवक घबरा गया और बार-बार छोड़ने की बात कहने लगा। संदेहास्पद गतिविधियों को देखते हुए उसे पुलिस के सुपुर्द किया गया। संगठन का दावा है कि यह एक अकेला व्यक्ति नहीं, बल्कि पांच लोगों का समूह हो सकता है।

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के अनुसार, पूछताछ के दौरान एक युवक ने अपना नाम हवलदार, पिता का नाम मुस्तफा बताया और खुद को मुस्लिम बताया। थाने में उसने अपना आधार कार्ड भी दिखाया है। संगठन का दावा है कि सभी युवक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।

पुलिस का पक्ष

इस पूरे मामले पर सीएसपी छावनी प्रशांत कुमार ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। फिलहाल संदेह के आधार पर दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मामला केवल भेष बदलकर भीख मांगने का है या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य है। पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक लंच पर किया संवाद

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए एक अनौपचारिक लंच का आयोजन किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह पिछले एक दशक से समय-समय पर अपने आवास पर मीडिया के साथ इस प्रकार की अनौपचारिक बैठकों का आयोजन करते रहे हैं। यह आयोजन पत्रकारों के साथ खुले और सहज संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

इस अवसर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शासन सुधार और राष्ट्रीय विकास से जुड़े समकालीन विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने विभिन्न नीतिगत पहलों, उभरते जनहित के विषयों और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए तथा अनौपचारिक सुझाव भी दिए।

संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने SHANTI अधिनियम, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) की भूमिका और देश के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण विधायी और नीतिगत विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती रहेगी।

सरकार के सुधार एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि विज्ञान सुधारों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जबकि शासन सुधार तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित हो रहे हैं। उन्होंने CPGRAMS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार तकनीक पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रशासनिक और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि देखने को मिल रही है, जिसके चलते विदेशी छात्र भारत आकर इन मॉडलों का अध्ययन कर रहे हैं।

Uploading: 1486848 of 19444783 bytes uploaded.

डॉ. जितेंद्र सिंह ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) अभियान जैसी नागरिक-केंद्रित पहलों का भी उल्लेख किया, जिससे पेंशनधारकों को बड़ी सुविधा मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसी डिजिटल सुधार पहलें सरकार की “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ वर्किंग” की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में हाल ही में घोषित ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) फंड का उल्लेख करते हुए मंत्री ने इसे भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा और विचार से प्रभाव तक की यात्रा तेज होगी।

अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे विकास पर बात करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, कृषि और नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष अनुप्रयोगों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 जैसे आगामी अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी भी साझा की, जो भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमता को और मजबूत करेंगे।

मंत्री ने लैवेंडर क्रांति जैसे विज्ञान आधारित सामाजिक-आर्थिक अभियानों का भी उल्लेख किया, जो ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और स्थानीय उद्यमिता को जोड़कर आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहे हैं।

Uploading: 743424 of 28343913 bytes uploaded.

पूरे संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने मीडिया के साथ निरंतर संवाद के महत्व पर जोर देते हुए पत्रकारों को जटिल नीतिगत पहलों और वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम जनता तक पहुँचाने में सरकार का अहम साझेदार बताया। उन्होंने सूचित जन विमर्श और रचनात्मक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका की सराहना की।

यह अनौपचारिक लंच खुले संवाद और आपसी सराहना के माहौल में संपन्न हुआ, जिसने सरकार और मीडिया के बीच पारदर्शिता, सहयोग और राष्ट्र निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) द्वारा बेंगलुरु में एक दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) ने 10 जनवरी 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक स्टेट चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एसोसिएशन (KSCAA) के सहयोग से एक दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया।

इस आउटरीच कार्यक्रम का उद्घाटन NFRA के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने देश की विकास यात्रा में चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे के पिछले कई दशकों के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने KSCAA की सराहना करते हुए कहा कि संस्था अपने सदस्यों के कौशल और क्षमताओं को सुदृढ़ करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

 गुप्ता ने इस अवसर पर इस बात पर बल दिया कि भारतीय ऑडिट फर्मों, विशेष रूप से स्मॉल एंड मीडियम प्रैक्टिशनर्स (SMPs), को अपनी दक्षताओं में निरंतर वृद्धि करनी होगी ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें, विशेषकर बड़े और जटिल संस्थानों के ऑडिट के क्षेत्र में।

बेंगलुरु में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ऑडिट प्रैक्टिशनर्स ने भाग लिया, जिनमें SMPs के साथ-साथ बड़ी ऑडिट फर्मों के पेशेवर भी शामिल थे। विभिन्न आकार की फर्मों से आए प्रतिभागियों की भागीदारी ने सार्थक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान तथा ऑडिट गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों पर गहन चर्चा को संभव बनाया, जिससे समग्र विमर्श और अधिक समृद्ध हुआ।

NFRA के पूर्णकालिक सदस्य पी. डैनियल ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने NFRA की ऑडिट निरीक्षण (इंस्पेक्शन) रूपरेखा और ऑडिट गुणवत्ता में सुधार में निरीक्षणों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि निरीक्षण से प्राप्त निष्कर्ष ऑडिट फर्मों के लिए महत्वपूर्ण फीडबैक का कार्य करते हैं और प्रणालियों, प्रक्रियाओं तथा पेशेवर विवेक को सुदृढ़ करने में सहायक होते हैं।

आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत ऑडिट प्रैक्टिस के प्रमुख तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें ऑडिट रणनीति दस्तावेजीकरण, ऑडिट सैंपलिंग, महत्वपूर्ण त्रुटि जोखिम (Risk of Material Misstatements) तथा ऑडिट का निष्कर्ष निकालने जैसे विषय शामिल थे। इन सत्रों का उद्देश्य दैनिक पेशेवर कार्यों में ऑडिट गुणवत्ता को बेहतर बनाने हेतु व्यावहारिक जानकारियाँ प्रदान करना था।

NFRA हाल के समय में “Creating Better Financial Reporting Ecosystem” थीम के अंतर्गत देशभर में ऑडिट प्रैक्टिशनर्स के लिए ऐसे आउटरीच कार्यक्रमों और कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित कर रहा है, जिसका उद्देश्य ऑडिट गुणवत्ता को सुदृढ़ करना और पेशेवर क्षमताओं का विस्तार करना है।

इस पहल के तहत NFRA द्वारा इससे पूर्व हैदराबाद (26 सितंबर 2025) और इंदौर (06 अक्टूबर 2025) में भी आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का किया शुभारंभ

सुशासन एवं नवाचारों के लिए 5 विभाग एवं 5 जिलों को मिला मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार

रायपुर- गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी नवा रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 कार्यक्रम को सम्बोधित करतेभुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 में  सुशासन एवं नवाचारों के लिए 5 विभागों एवं 5 जिलों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से अब छत्तीसगढ़ के सभी विभागों के 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जाएगी। इस पोर्टल के माध्यम से निर्माण की मंजूरी से लेकर बजट, मजदूरी, भुगतान, एमआईएस, स्ट्रक्चर लेवल सहित सभी पहलुओं की मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुड गवर्नेंस का उद्देश्य यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को बुनियादी सेवाओं के लिए भटकना न पड़े। पंचायतों में शुरू किए गए अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को आधार, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसी सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं। हमारी सरकार ने तकनीकी नवाचारों के माध्यम से नागरिकों तक सुशासन की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अनेक पहल की हैं। इसी क्रम में आज ई-प्रगति पोर्टल का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य की वृहद परियोजनाओं एवं योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। इस पोर्टल से योजनाओं की प्रगति का डेटा रियल-टाइम में उपलब्ध होगा। सभी विभागों, जिला प्रशासन तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे राज्य में ई-गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को योजनाओं का लाभ समय पर और सहज रूप से प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने सभी कलेक्टरों, सचिवों एवं संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति को नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद, श्रद्धेय अटल जी की अंत्योदय की अवधारणा और यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व से हमने सुशासन को गहराई से समझा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने देश का पहला सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया है, जो सभी योजनाओं के समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन का केंद्र है। पिछले दो वर्षों में हमने 400 से अधिक नीतिगत सुधार किए, पुराने अनुपयोगी नियम-कानून समाप्त किए और कई में संशोधन किए। इन सुधारों से प्रदेशवासियों का जीवन सरल हुआ और प्रशासन अधिक कुशल बना। आज मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के माध्यम से 5 जिलों और 5 विभागों के नवाचारी प्रयासों को सम्मानित किया गया है। इससे अच्छा कार्य करने वाले अधिकारी प्रोत्साहित होंगे। आगामी वर्ष से 8 अलग-अलग क्षेत्रों में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिनमें ई-गवर्नेंस, सेवा वितरण, ग्रामीण और शहरी विकास जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में नवाचार और सुशासन की एक सशक्त संस्कृति विकसित हो रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए “पहल” और “प्रेरणा” योजनाएँ प्रारंभ की जा रही हैं। “पहल” से नए विचारों को सहयोग मिलेगा और “प्रेरणा” से सफल योजनाओं का विस्तार होगा। शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी प्रारंभ की जाएगी, जिससे शिकायत निवारण और जनभागीदारी मजबूत होगी। सेवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है और लोक सेवा गारंटी अधिनियम को LSG-2.0 के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बदलते दौर में तकनीक जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। इसलिए हमने डिजिटल संसाधनों की शक्ति को पहचानते हुए तकनीक को सुशासन का प्रमुख हथियार बनाया है। सभी नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ई-ऑफिस ने सरकारी कामकाज में गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की हैं। अब फाइलें हफ्तों-महीनों नहीं, बल्कि एक क्लिक पर आगे बढ़ती हैं। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो रही है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है। ई-ऑफिस मंत्रालय से प्रारंभ हुआ था और अब विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू हो चुका है। आगामी कुछ महीनों में इसे सभी संभागों और जिलों में भी लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्य सचिव विकास शील द्वारा ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाना एक सराहनीय पहल है, जिससे कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। बायोमेट्रिक उपस्थिति को भी चरणबद्ध तरीके से सभी कार्यालयों में लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है, जिसके पीछे सुशासन सबसे बड़ा कारक है। डिजिटल भुगतान में भारत का विश्व में अग्रणी स्थान भी गुड गवर्नेंस का ही परिणाम है।

उन्होंने कहा कि खनिज परिवहन की परमिट व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया है, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगी है और विकास कार्यों के लिए संसाधनों की सुरक्षा हुई है। इसी तरह शासकीय खरीदी को जेम पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। उन्होंने अधिकारियों को खरीदी प्रक्रियाओं में समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रजिस्ट्री विभाग में की गई 10 क्रांतिकारी पहल से अब नागरिक घर बैठे ही रजिस्ट्री कर पा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले वर्ष 7.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से निवेशकों को तेजी से स्वीकृति और क्लियरेंस दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव जाकर 41 लाख आवेदनों का निराकरण किया गया। यह जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण है।उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों के पत्रों और आवेदनों का समय पर निराकरण होना चाहिए। अच्छे प्रशासन के लिए संवाद, समन्वय और फीडबैक आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। सरकार के निर्णयों और उपलब्धियों का सही संचार भी उतना ही जरूरी है। 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अंजोर विजन के अंतर्गत 2030 तक के लक्ष्यों की समीक्षा कर प्रदेश को समृद्ध और विकसित राज्य बनाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव  विकास शील ने पुरस्कार प्रक्रिया में भाग लेने वाली सभी टीमों को बधाई दी। 

जिला श्रेणी के विजेता नवाचार

दंतेवाड़ा जिले की “ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण” पहल एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आई। इस नवाचार के माध्यम से मैनुअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर ब्लॉकचेन आधारित छेड़छाड़-रोधी प्रणाली लागू की गई, जिससे भूमि अभिलेख प्राप्त करने का समय हफ्तों से घटाकर कुछ ही मिनटों में संभव हो सका। इस पहल से दस्तावेज़ी धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त हुई और सेवा प्रदाय में अभूतपूर्व तेजी आई, जिसने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन के लिए एक नया मानक स्थापित किया।

जशपुर जिले की “निर्माण जशपुर” पहल ने यह दर्शाया कि एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग किस प्रकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बना सकती है। 16 विभागों की 7,300 से अधिक परियोजनाओं और 444 ग्राम पंचायतों को कवर करने वाली इस प्रणाली ने रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैग्ड सत्यापन और GIS आधारित योजना को संभव बनाया, जिससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और विलंब में उल्लेखनीय कमी आई।

मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में लागू संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार ने गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से विकसित इस पोषण-घन आहार के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों में 77.5 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि साक्ष्य-आधारित पोषण हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

गरियाबंद जिले की “हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप” ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने में तकनीक की भूमिका को सशक्त रूप से सामने रखा। AI आधारित ट्रैकिंग और रियल-टाइम अलर्ट व्यवस्था के माध्यम से मानव हताहतों की संख्या लगभग शून्य तक लाई गई, साथ ही फसल क्षति और मुआवजा बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई। राज्य के बाहर भी अपनाई जा चुकी यह पहल संघर्ष-संवेदनशील शासन का एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है।

नारायणपुर जिले का “इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल” आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में डेटा एकीकरण की उपयोगिता को दर्शाता है। रियल-टाइम, जियो-स्पेशियल और पूर्वानुमान आधारित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 से अधिक नियोजित अभियानों का संचालन संभव हुआ, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितिजन्य जागरूकता को मजबूती मिली।

विभागीय श्रेणी के विजेता नवाचार

इसी तरह विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग का “विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)” डेटा-आधारित शिक्षा शासन का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। यह AI सक्षम प्लेटफॉर्म 56,000 से अधिक विद्यालयों, 2.83 लाख शिक्षकों और 57.5 लाख विद्यार्थियों की निगरानी करता है, जिससे ड्रॉपआउट की प्रारंभिक पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना संभव हो सका है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की “वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम” ने व्यवसाय सुगमता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। 16 विभागों की 136 सेवाओं को एकीकृत करते हुए इस प्रणाली ने अनुमोदन, प्रोत्साहन, शिकायत निवारण और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाया, जिससे विलंब कम हुआ और पारदर्शिता के साथ निवेशकों का विश्वास बढ़ा।

वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग की समग्र ई-गवर्नेंस सुधार पहल ने राजस्व संग्रह और अनुपालन व्यवस्था को सुदृढ़ किया।एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण, ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली और रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से विभाग ने ₹5,425 करोड़ का राजस्व अर्जित किया और पारदर्शिता तथा नियामक निगरानी के नए मानक स्थापित किए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की “FDS 2.0 – ई-कुबेर डिजिटल भुगतान प्रणाली” ने मैनुअल चेक आधारित प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूर्णतः कैशलेस, RBI एकीकृत भुगतान व्यवस्था लागू की। इसके माध्यम से ₹1,776 करोड़ से अधिक के 18 लाख लेन-देन पूर्ण हुए, जिससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित वन क्षेत्रों में भी समय पर मजदूरी भुगतान, आजीविका सुरक्षा और पारदर्शी फंड प्रवाह सुनिश्चित हुआ।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा अंतर्गत लागू QR कोड आधारित सूचना स्वप्रकटीकरण व्यवस्था ने नागरिक-केंद्रित शासन को नई मजबूती दी। QR कोड के माध्यम से ग्रामीणों को वास्तविक समय की योजना जानकारी उपलब्ध कराकर इस पहल ने मध्यस्थों पर निर्भरता कम की और 11,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया।

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीजीपी अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, एससीएस गृह मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संचालक रजत बंसल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इन सभी नवाचारों के माध्यम से यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिणामों, प्रभाव और नागरिक विश्वास पर केंद्रित एक नई प्रशासनिक संस्कृति विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के अंतर्गत सम्मानित ये जिले और विभाग सुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और जनकल्याण के नए मानक स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धियाँ न केवल राज्य के प्रशासनिक तंत्र की क्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और भविष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि को भी सुदृढ़ करती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ‘ADHYAY – The Women Who Lead’ का विमोचन

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की महिला उद्यमिता, नेतृत्व और नवाचार की प्रेरक यात्राओं को समर्पित कॉफी टेबल बुक ‘ADHYAY – The Women Who Lead’ का रायपुर स्थित श्रीराम बिज़नेस पार्क में आयोजित कॉस्मो एक्सपो के दौरान विमोचन किया।  कार्यक्रम में सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राकेश चतुर्वेदी, कॉस्मो एवं रोटरी के पदाधिकारी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। 

यह विशेष प्रकाशन छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की प्रगति, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव में योगदान देने वाली 25 महिला उद्यमियों की जीवन यात्राओं को संजोया गया है। संपादक उचित शर्मा और उनकी टीम ने इसका संपादन किया है ।

कार्यक्रम के दौरान पुस्तक में सम्मिलित सभी महिला उद्यमियों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। यह सम्मान उनके साहस, नेतृत्व, नवाचार और उद्यमशील योगदान के लिए प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर ADHYAY कॉफी टेबल बुक की सराहना करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ की महिला शक्ति, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की जीवंत गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दस्तावेज़ बनेगी। उन्होंने इस तरह के दस्तावेज़ीकरण को महिला उद्यमिता के लिए प्रेरणादायी और मार्गदर्शक बताया। इस पुस्तक का उद्देश्य उन महिलाओं को मंच देना है जिन्होंने व्यवसाय, उद्योग, सेवा, नवाचार और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है और यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएँ आज केवल उद्यम नहीं चला रहीं, बल्कि समाज और सोच को नई दिशा दे रही हैं।

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD 2026) का दूसरा दिन: युवा नेतृत्व, विचार-विमर्श और राष्ट्र निर्माण की सशक्त झलक

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- मंत्रालय युवा मामले और खेल द्वारा आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD 2026) का दूसरा दिवस आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में भव्य उद्घाटन सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे, युवा मामले विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल और अतिरिक्त सचिव नितेश कुमार मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह की शुरुआत स्वामी विवेकानंद को पुष्पांजलि अर्पित कर की गयी, जिनके युवा सशक्तिकरण, नेतृत्व और राष्ट्रीय सेवा के आदर्श देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया गया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया और इस पहल को मिले अभूतपूर्व समर्थन की सराहना की। उन्होंने बताया कि लगभग 50 लाख युवाओं ने क्विज़ के प्रारंभिक चरण में भाग लिया, जिनमें से 3 लाख युवाओं को दस चयनित विषयगत ट्रैकों पर निबंध लिखने का मौका मिला था। इन निबंधों का मूल्यांकन प्रोफेसरों द्वारा किया गया, और 30,000 युवा राज्य स्तर पर विचार प्रस्तुत करने के लिए चुने गए। इन सभी में से 3,000 युवा नेताओं को अंतिम प्रस्तुतियों के लिए चुना गया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सीधे अपने विचार रखेंगे। प्रधानमंत्री ने युवाओं में नेतृत्व क्षमता पर गहरा विश्वास व्यक्त किया है और राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओं से सीधे संवाद के लिए कई घंटे समर्पित करेंगे।

डॉ. मांडविया ने बताया कि युवा ही राष्ट्र की प्रगति की मुख्य शक्ति हैं और विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग एक ऐसा मंच है जो ग्रासरूट स्तर से नेतृत्व को विकसित करता है, बिना किसी राजनीतिक समर्थन के, और भविष्य के नेताओं को तैयार करता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार अकेले नहीं बना सकती, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही यह संभव होगा, जो राष्ट्र के लिए समर्पण, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभ के साथ लगातार प्रगति कर रहा है और कोविड के बाद बेरोज़गारी दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने अपने युवा दिनों का स्मरण करते हुए निर्णय लेने की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन और राष्ट्र की दिशा का निर्धारण प्रतिदिन लिए गए निर्णयों की गुणवत्ता से होता है। उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे निर्णय-निर्माण क्षमता को प्रारंभिक चरण से ही विकसित करें और सही विकल्प चुनने की ताकत को अपनी सर्वश्रेष्ठ शक्ति मानें। डोवाल ने इतिहास से सीख लेने, अनुशासन को रोज़मर्रा की प्रेरणा में बदलने और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का सुझाव दिया। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ इंटरएक्टिव सवाल-जवाब सत्र भी आयोजित किया, जहां उन्होंने तनाव प्रबंधन और महत्वपूर्ण परिस्थितियों में समुचित निर्णय लेने पर अपने अनुभव साझा किए।

युवा मामले विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने अपने स्वागत संबोधन में बताया कि यह संवाद लगभग पाँच महीने की राष्ट्रीय प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उत्कृष्ट युवा नेताओं का चयन हुआ। उन्होंने बताया कि VBYLD एक ऐसा मंच है जहां युवाओं की आवाज़ सुनी जाती है और उनके विचारों को डिज़ाइन थिंकिंग, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से नीति निर्माण में शामिल किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि 144 शहरों में आयोजित विकसित भारत रन ने भारतीय डायस्पोरा के समर्थन सहित देश की सॉफ्ट पावर को दर्शाया।

उद्घाटन सत्र का समापन नितेश कुमार मिश्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने मंच पर उपस्थित सभी गणमान्यों, वक्ताओं, आयोजकों और युवाओं के सक्रिय सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया और बताया कि युवा नेतृत्व को विकसित करने के लिए मंत्रालय निरंतर प्रयास कर रहा है।

उद्घाटन सत्र के पश्चात प्रतिभागी विषयगत सत्रों के लिए विभक्त हुए, जिनका आयोजन दस पहचाने गए विषयों के आधार पर किया गया। इन सत्रों का मार्गदर्शन अनुभवी मेंटर्स द्वारा किया गया, जिन्होंने प्रत्येक विषय की संरचना और उद्देश्यों का परिचय कराया, तथा विशेषज्ञों द्वारा गहन विचार-विमर्श हेतु प्रतिभागियों के साथ बातचीत की गई।

विषयगत ट्रैकों की मुख्य बातें

ट्रैक 1 – विकसित भारत के लिए युवा, लोकतंत्र और शासन:

इस ट्रैक में युवा नेताओं ने ग्राम स्तर पर प्रशासन में युवा सहभागिता, नीति एवं समस्या-समाधान इकाइयों, और संरचित नागरिक संलग्नता योजनाओं की नवीन मॉडल प्रस्तुत किए।

ट्रैक 2 – महिला नेतृत्व में विकास: विकसित भारत की कुंजी:

महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने पर चर्चा में भारत की पहली MBA सरपंच छवी राजावत, विधायक श्रेयासी सिंह, और शागुन परिहार ने अनुभव साझा किए।

ट्रैक 3 – फिट भारत, हिट भारत:

इस सत्र में लींडर पीज और पुलेला गोपीचंद ने स्वास्थ्य, खेल, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ के महत्व पर विचार साझा किए।

ट्रैक 4 – भारत को विश्व की स्टार्ट-अप राजधानी बनाना:

स्टार्ट-अप इकोसिस्टम पर चर्चा में हरिश बलrepository error truncated

भारत–ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA): व्यापार, निवेश और रोज़गार के नए अवसर

No comments Document Thumbnail

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत–ओमान CEPA वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर गतिशीलता और विनियामक सहयोग को कवर करने वाला एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है।

  • वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार USD 10.61 बिलियन रहा, जो भारत–ओमान आर्थिक साझेदारी के बढ़ते विस्तार को दर्शाता है।

  • भारत को ओमान में 98.08% टैरिफ लाइनों पर 100% शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुंच प्राप्त हुई है, जो भारत के 99.38% निर्यात मूल्य को कवर करती है—यह लाभ समझौते के पहले दिन से लागू होगा।

  • इंजीनियरिंग वस्तुओं, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों में नए निर्यात अवसर खुलेंगे।

  • संतुलित उदारीकरण और एक्सक्लूज़न लिस्ट के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए MSMEs, श्रम-प्रधान उद्योगों और क्षेत्रीय निर्यात वृद्धि को समर्थन।

परिचय

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA)

CEPA एक ऐसा व्यापक समझौता है जो केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित न रहकर सेवाओं, निवेश, सरकारी खरीद, विवाद निपटान और अन्य विनियामक पहलुओं को भी शामिल करता है। इसमें म्यूचुअल रिकग्निशन एग्रीमेंट्स (पारस्परिक मान्यता) भी शामिल हैं, जिससे विभिन्न देशों की नियामक प्रणालियों को समान परिणामों के आधार पर स्वीकार किया जाता है।

भारत–ओमान CEPA दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर गतिशीलता और नियामक सहयोग को एक समग्र ढांचे में समाहित करता है, जिससे दीर्घकालिक और स्थिर आर्थिक जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा।

भारत–ओमान आर्थिक जुड़ाव

वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार USD 10.61 बिलियन रहा, जो 2023–24 के USD 8.94 बिलियन से अधिक है।
अप्रैल–अक्टूबर 2025 के दौरान व्यापार USD 6.48 बिलियन दर्ज किया गया।

वस्तु व्यापार

  • भारत का ओमान को निर्यात: USD 4.06 बिलियन (FY 2024–25)

  • ओमान से आयात: USD 6.55 बिलियन (FY 2024–25)

सेवा व्यापार

  • भारत की सेवा निर्यात: 2020 में USD 397 मिलियन से बढ़कर 2023 में USD 617 मिलियन

  • ओमान से सेवा आयात: USD 101 मिलियन से बढ़कर USD 159 मिलियन

वस्तुओं में बाज़ार पहुंच: भारत के लाभ

CEPA के तहत भारत को ओमान में लगभग पूर्ण शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। पहले MFN व्यवस्था में जहां केवल 15.33% निर्यात मूल्य ही शून्य शुल्क पर जाता था, वहीं अब लगभग पूरा निर्यात शुल्क-मुक्त होगा। इससे भारतीय उत्पादों की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

भारत की बाज़ार पहुंच पेशकश और सुरक्षा उपाय

भारत ने 77.79% टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण की पेशकश की है, जबकि कई संवेदनशील क्षेत्रों को एक्सक्लूज़न लिस्ट में रखा गया है, जैसे—

  • परिवहन उपकरण, प्रमुख रसायन, अनाज, मसाले, चाय–कॉफी

  • डेयरी, खाद्य तेल, फल-सब्ज़ियां

  • रबर, चमड़ा, वस्त्र, पेट्रोलियम उत्पाद

इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

क्षेत्रवार प्रभाव

इंजीनियरिंग वस्तुएं

  • FY 2024–25 में निर्यात: USD 875.83 मिलियन

  • CEPA के तहत सभी इंजीनियरिंग उत्पादों पर शून्य शुल्क

  • 2030 तक निर्यात USD 1.3–1.6 बिलियन तक पहुंचने की संभावना

फार्मास्यूटिकल्स

  • ओमान का फार्मा बाज़ार 2031 तक USD 473.71 मिलियन होने का अनुमान

  • दवाओं और APIs पर शुल्क-मुक्त पहुंच

  • USFDA, EMA आदि से स्वीकृत दवाओं के लिए फास्ट-ट्रैक अनुमोदन

समुद्री उत्पाद

  • ओमान का आयात: USD 118.91 मिलियन

  • CEPA से झींगा और मछली निर्यात में वृद्धि, तटीय क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य

  • FY 2024 में भारत ओमान का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

  • बासमती चावल, अंडे, मांस, बिस्कुट, मक्खन, शहद आदि पर बड़ा लाभ

  • संवेदनशील उत्पादों के लिए चरणबद्ध शुल्क कटौती

वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, रत्न एवं आभूषण

  • इन सभी क्षेत्रों में शून्य शुल्क से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त

  • MSME आधारित उद्योगों को विशेष लाभ

सेवाएं, निवेश और पेशेवर गतिशीलता

  • 2024 में सेवा व्यापार: USD 863 मिलियन

  • ओमान ने 127 सेवा उप-क्षेत्रों में बाज़ार पहुंच प्रतिबद्धताएं दीं

  • आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, पेशेवर सेवाओं में अवसर

  • इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरीज़ (ICT) की सीमा 20% से बढ़ाकर 50%

  • सामाजिक सुरक्षा समझौते (SSA) पर भविष्य में वार्ता का प्रावधान

निष्कर्ष

भारत–ओमान CEPA एक संतुलित, व्यापक और भविष्यन्मुखी समझौता है, जो व्यापार, निवेश, रोज़गार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी, रोज़गार सृजन और क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूती प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): कौशल विकास और क्षमता निर्माण से मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला के आधुनिकीकरण, उत्पादकता बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने तथा विपणन संपर्कों की स्थापना के लिए कौशल विकास और क्षमता निर्माण को एक महत्वपूर्ण आधार मानती है। इस योजना का उद्देश्य मानव संसाधन और संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ कर मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाना है।

PMMSY के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र में विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस (10 जुलाई 2025) के अवसर पर भुवनेश्वर (ओडिशा) स्थित ICAR–केंद्रीय मीठाजल जलीय कृषि संस्थान (CIFA) में“ICAR मत्स्य संस्थानों एवं उनके क्षेत्रीय केंद्रों का प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम कैलेंडर” तथा “NFDB एवं ICAR द्वारा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण एवं एक्सपोज़र विज़िट कैलेंडर” का विमोचन किया।

यह कैलेंडर 2025–2027 की अवधि के लिए प्रशिक्षण, एक्सपोज़र विज़िट और ज्ञान-साझाकरण गतिविधियों का एक सुव्यवस्थित रोडमैप प्रदान करता है।

व्यापक कवरेज और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य मछुआरों और मत्स्य किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना, वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना तथा पर्यावरण-सम्मत कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देना है।
तेजी से विकसित हो रही जलीय कृषि तकनीकों और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए, प्रशिक्षण में पूर्व-उत्पादन, उत्पादन और उत्तर-उत्पादन चरणों को शामिल किया गया है, जिनमें—

  • हैचरी संचालन

  • उन्नत ग्रो-आउट तकनीक

  • समेकित/संयुक्त मत्स्य पालन

  • मत्स्य स्वास्थ्य प्रबंधन

  • फ़ीड निर्माण

  • समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती

  • मूल्यवर्धित मत्स्य प्रसंस्करण

पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, आधुनिक प्रणालियों जैसे रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बायोफ्लॉक, केज कल्चर और सजावटी मछली प्रजनन पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसान अपने कार्यों में विविधता और विस्तार कर सकें।
आजीविका एवं रोजगार केंद्रित प्रशिक्षण—जैसे सजावटी मत्स्य पालन, मत्स्य विपणन संपर्क तथा महिलाओं के लिए मूल्यवर्धित मत्स्य उत्पाद—भी कैलेंडर में सम्मिलित हैं।

अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित एक्सपोज़र विज़िट किसानों को उन्नत तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखने और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती हैं। साथ ही, फिश फेस्टिवल, मेले आदि के माध्यम से घरेलू मछली/झींगा उपभोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

बजट एवं कार्यान्वयन

इस उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने ₹2.93 करोड़ की वित्तीय राशि चिन्हित की है, जिसे राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB), हैदराबाद—PMMSY और PM-MKSSY के अंतर्गत प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की नोडल कार्यान्वयन एजेंसी—के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है।
मछुआरों और मत्स्य किसानों के प्रशिक्षण से संबंधित सभी व्यय विभाग द्वारा वहन किए जा रहे हैं।

प्रशिक्षण का संचालन राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों के मत्स्य विभागों, ICAR मत्स्य अनुसंधान संस्थानों एवं उनके क्षेत्रीय केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs), एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI), CIFNET और NIFPHAT द्वारा किया गया।
पिछले छह महीनों में 499 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 22,921 प्रतिभागी लाभान्वित हुए।

भविष्य की दिशा

मत्स्य पालन विभाग के नेतृत्व में यह पहल न केवल हितधारकों को सशक्त बना रही है, बल्कि मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास, लचीलापन, रोजगार सृजन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार कर रही है। यह प्रयास देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सारांश

  • क्रम सं.
  • संस्थान का नाम
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • प्रतिभागी
  • 1
  • ICAR-CIFE, मुंबई एवं क्षेत्रीय केंद्र
  • 55
  • 1830
  • 2
  • ICAR-CIFA, भुवनेश्वर
  • 27
  • 737
  • 3
  • ICAR-CIBA, चेन्नई
  • 31
  • 1207
  • 4
  • ICAR-CIFT, कोच्चि
  • 55
  • 1001
  • 5
  • ICAR-CIFRI, कोलकाता
  • 42
  • 1776
  • 6
  • ICAR–शीत जल मत्स्य अनुसंधान संस्थान, भीमताल
  • 50
  • 3040
  • 7
  • ICAR-CMFRI, कोच्चि
  • 23
  • 622
  • 8
  • ICAR-NBFGR, लखनऊ
  • 58
  • 5592
  • 9
  • ICAR-ATARI, कोलकाता
  • 48
  • 1660
  • 10
  • ICAR-ATARI, जबलपुर
  • 3
  • 75
  • 11
  • ASCI
  • 26
  • 796
  • 12
  • TSP
  • 51
  • 3185
  • 13
  • SCSP
  • 19
  • 950
  • 14
  • CIFNET
  • 11
  • 450
  • कुल

  • 499
  • 22,921




चावल निर्यातकों को दी बड़ी सौगात, मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई गई

No comments Document Thumbnail

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा 

ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है- मुख्यमंत्री साय 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के नीजि  रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने  चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात दी है। मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई है। इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान सीएम साय ने की घोषणा से चावल निर्यातकों और किसान दोनों के लिए बड़ी सौगात है। साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दंतेवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।

छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन में 12 देशों के बायर्स तथा 6 देशों के एम्बेसी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ को सोच-समझकर “धान का कटोरा” कहा था और आज प्रदेश इस नाम की सार्थकता सिद्ध कर रहा है। चावल छत्तीसगढ़ के खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसे चावलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है।  छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल भी सरकार ने दी थी, छूट दिसंबर 2025 में मंडी शुल्क में छूट की अवधि खत्म हो रही थी।

छत्तीसगढ़ से 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का किया जा रहा है निर्यात 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से वर्तमान में लगभग 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। सरकार निर्यातकों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और इस वर्ष भी खरीदी में वृद्धि की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी भी साझा की। 

मुख्यमंत्री ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया अवलोकन

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान मुख्यमंत्री साय ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, क्षेत्र विशेष में उत्पादित प्रजातियों, चावल उत्पादन में हो रहे नवाचारों तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शासकीय स्टालों का भी निरीक्षण कर चावल के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारों से चावल की पैदावार में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपिडा के चेयरमेन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल, राम गर्ग, देश भर से आये मिलर्स, चावल व्यवसायी एवं स्टेक होल्डर्स उपस्थित रहे।


विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका- मुख्यमंत्री साय

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विगत दिवस राजधानी रायपुर में रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर द्वारा आयोजित कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। व्यापार जगत की बेहतरी और ग्राहकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जीएसटी दरों में कटौती की गई, जिसका सीधा लाभ जनता को मिल रहा है। जीएसटी रिफॉर्म्स से कई वस्तुओं की कीमत में कमी आई है। जीएसटी की प्रक्रिया को काफी सुगम बनाया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई उद्योग नीति को देश-विदेश में सराहा जा रहा है। लगभग आठ लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हमें प्राप्त हो चुके हैं। हर सेक्टर में हमें ये निवेश प्रस्ताव मिले हैं जिनपर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश में रोजगार सृजन पर हमारा विशेष फोकस है। नई उद्योग नीति में एक हजार से अधिक रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमियों को विशेष इंसेंटिव प्रदान करने के प्रावधान किए गए हैं।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में रोटरी क्लब और उद्यमियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। रोटरी क्लब उद्यम के साथ ही परोपकार का भी कार्य करता है। क्लब द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्य बहुत प्रशंसनीय हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि यह एक्सपो मध्य भारत का सबसे बड़ा एक्सपो है, जिसमें 300 से अधिक स्टॉल हैं। इस विशाल आयोजन का लाभ निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ को मिलेगा।

रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि रोटरी क्लब द्वारा आयोजित इस एक्सपो का यह 16वां वर्ष है। रोटरी क्लब सेवा से जुड़ी एक संस्था है। रोटरी क्लब द्वारा पोलियो निर्मूलन के कार्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में मोबाइल आई क्लीनिक की एम्बुलेंस का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न सेक्टर्स में विशिष्ट योगदान दे रही 25 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया और इन महिला उद्यमियों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, राम गर्ग सहित रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर के सदस्यगण व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

राष्ट्रीय जंबूरी की व्यवस्थाओं पर मुहर: मुख्य राष्ट्रीय कमिश्नर डॉ. के.के. खंडेलवाल ने की छत्तीसगढ़ की खुलकर तारीफ

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : भारत स्काउट एंड गाइड के मुख्य राष्ट्रीय कमिश्नर डॉ.के.के. खंडेलवाल ने बालोद के ग्राम दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर्- रेंजर जम्बुरी में की गई व्यवस्थाओं की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने एक महीने के भीतर इतनी बेहतरीन व्यवस्था करके एक मिसाल कायम की है।


उन्होंने कहा कि मुझे अत्यंत गर्व के साथ यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत का प्रथम रोवर एंड रेंजर जम्बुरी का आयोजन बालोद के ग्राम दुधली में किया जा रहा है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह युवा शक्ति का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में देश भर से रोवर एंड रेंजर्स, ट्रेनर्स, स्काउट्स, वालंटियर्स भाग ले रहे हैं। मैंने स्वयं यहां की व्यवस्थाओं, एडवेंचर्स, भोजन व्यवस्था, टॉयलेट और प्रतिभागियों के रुकने के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया है। हर स्तर पर अनुशासन सुरक्षा और उत्कृष्ट व्यवस्था स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।मैं छत्तीसगढ़ राज्य भारत स्काउट गाइड का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।

डॉ खण्डेलवाल ने कहा कि जम्बुरी के उद्घाटन का सुंदर आयोजन था। यह ऐतिहासिक जंबूरी है। इसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमन डेका ने किया । उन्होंने अपने उद्बोधन में जिस प्रकार से व्यवस्थाओं की तारीफ की। स्काउट एंड गाइड की सेवा भावना और समर्पण की प्रसंशा की। डॉ खण्डेलवाल ने कहा कि भारत स्काउट एंड गाइड का अनुकरणीय सेवा का इतिहास रहा है।
जिस कार्य के लिए सामन्यतः दो वर्ष का समय लगता है। छत्तीसगढ़ ने इस कार्य को एक महीने के समय में किया है। यह समर्पण, अनुशासन और सेवा भावना केवल सच्चे स्काउट में ही देखने को मिलता है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026: सहस्राब्दी की दृढ़ता, आस्था और भारत के सभ्यतागत आत्मसम्मान का उत्सव

No comments Document Thumbnail

 मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (8–11 जनवरी 2026) महमूद ग़ज़नवी द्वारा 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम आक्रमण के 1,000 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित।

  • यह पर्व भारत की सभ्यतागत दृढ़ता, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10–11 जनवरी 2026 को सोमनाथ में प्रमुख स्मरणीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

  • सोमनाथ मंदिर में प्रतिवर्ष 92–97 लाख श्रद्धालु दर्शन करते हैं।

  • महिला सहभागिता: सोमनाथ ट्रस्ट के 906 कर्मचारियों में 262 महिलाएं; कुल मिलाकर लगभग 363 महिलाओं को रोजगार, जिससे प्रतिवर्ष लगभग ₹9 करोड़ की आय सृजित होती है।

परिचय

“सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालम् ओंकारममलेश्वरम्॥”

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का यह श्लोक सोमनाथ को बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान देता है, जो भारत की आध्यात्मिक भूगोल में इसके केंद्रीय महत्व को दर्शाता है। गुजरात के वेरावल के समीप प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ केवल एक उपासना स्थल नहीं, बल्कि भारत की अखंड सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक है।

स्वाभिमान पर्व: सामूहिक गौरव की राष्ट्रीय अभिव्यक्ति

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जो 1026 में हुए प्रथम आक्रमण के एक सहस्राब्दी पूर्ण होने का राष्ट्रीय स्मरण है। यह आयोजन विनाश की स्मृति नहीं, बल्कि आस्था, पुनर्निर्माण और आत्मसम्मान का उत्सव है।
देवी अहिल्याबाई होलकर जैसे असंख्य भक्तों के संकल्प से हर बार सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ—यही इसकी अमर पहचान है।

वर्ष 2026, 11 मई 1951 को स्वतंत्रता के बाद पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष भी पूर्ण करता है। इन दोनों ऐतिहासिक पड़ावों ने स्वाभिमान पर्व की आधारशिला रखी है।

चार दिनों में 72 घंटे का अखंड ओंकार जप, भजन-संकीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं—जो एकता, आस्था और राष्ट्रीय स्मृति का प्रतीक हैं।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: सहस्राब्दी की दृढ़ता

प्रभास तीर्थ का संबंध चंद्रदेव और भगवान शिव की उपासना से है। परंपरा के अनुसार, चंद्रदेव ने यहीं शिव की आराधना कर अपने श्राप से मुक्ति पाई।
जनवरी 1026 में महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के बाद भी सोमनाथ का अस्तित्व लोकचेतना में अमिट रहा। विनाश और पुनर्निर्माण का यह चक्र विश्व इतिहास में अद्वितीय है।

12 नवंबर 1947 (दीपावली) को सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। 11 मई 1951 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में मंदिर का पुनः उद्घाटन हुआ—यह भारत के सभ्यतागत आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना थी।

31 अक्टूबर 2001 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1951 के 50 वर्ष पूर्ण होने के कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें सरदार पटेल, के. एम. मुंशी सहित पुनर्निर्माण के अग्रदूतों के योगदान को स्मरण किया गया।

सोमनाथ मंदिर: वैभव, आस्था और जीवंत धरोहर

सोमनाथ आदि ज्योतिर्लिंग है। मंदिर परिसर में गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप हैं। 150 फीट ऊँचा शिखर, 10 टन का कलश, 27 फीट का ध्वजदंड, 1,666 स्वर्ण-कलश और 14,200 ध्वज इसकी भव्यता दर्शाते हैं।

वार्षिक दर्शन संख्या 92–97 लाख; बिल्व पूजा में 13.77 लाख से अधिक श्रद्धालु; महाशिवरात्रि 2025 में 3.56 लाख दर्शनार्थी।
2003 में शुरू और 2017 में उन्नत लाइट एंड साउंड शो ने पिछले तीन वर्षों में 10 लाख से अधिक दर्शक आकर्षित किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष) के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधार, अवसंरचना उन्नयन और धरोहर संरक्षण से सोमनाथ एक नए पुनरुत्थान चरण में प्रवेश कर चुका है।

आध्यात्मिक वातावरण और पदयात्रा

पर्व से पूर्व गिरनार तीर्थक्षेत्र सहित संतों ने शंख चौक से सोमनाथ मंदिर तक पदयात्रा की। डमरू, पारंपरिक वाद्य, सिद्धिविनायक ढोल समूह के 75 वादकों की गूंज और “हर हर महादेव” के जयघोष से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

महिला सशक्तिकरण और सतत विकास

2018 में “स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस” घोषित सोमनाथ में—

  • पुष्प अपशिष्ट से वर्मी-कम्पोस्ट (1,700 बिल्व वृक्ष)

  • प्लास्टिक से पावर ब्लॉक्स (मासिक 4,700)

  • वर्षा जल संचयन (मासिक 30 लाख लीटर)

  • मियावाकी वन (7,200 वृक्ष; वार्षिक ~93,000 किग्रा CO₂ अवशोषण)

  • शुद्ध अभिषेक जल से सोमगंगाजल (दिसंबर 2024 तक 1.13 लाख परिवार)

महिला रोजगार: 906 में 262 महिलाएं; बिल्व वन पूर्णतः महिलाओं द्वारा संचालित; प्रसाद व भोजन सेवाओं में व्यापक सहभागिता—कुल 363 महिलाएं, वार्षिक आय ~₹9 करोड़।

प्रधानमंत्री का दौरा और कार्यक्रम

10 जनवरी 2026: प्रधानमंत्री ओंकार मंत्र जप (72 घंटे के अखंड जप में सहभाग), ड्रोन शो।
11 जनवरी 2026: शौर्य यात्रा का नेतृत्व, दर्शन-पूजन और जनसभा को संबोधन—जहाँ सोमनाथ के सभ्यतागत महत्व, स्वाभिमान पर्व और आस्था-संकल्प का संदेश देंगे।

निष्कर्ष

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास की पुनर्पुष्टि है—विनाश पर दृढ़ता, भय पर आस्था की विजय। सौराष्ट्र के तट पर स्थित सोमनाथ विश्वभर के भारतीयों को स्मरण कराता है कि धर्म, एकता और आत्मसम्मान पर आधारित आस्था शाश्वत है।

प्रधानमंत्री द्वारा उद्धृत श्लोक—

“आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।
आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्॥
प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥”

अर्थ: आदिनाथ शिव ने समस्त प्राणियों के कल्याण हेतु प्रभास क्षेत्र को प्रकट किया—यह दिव्य प्रकाश से आलोकित भूमि मनुष्य को सिद्धि, पुण्य और मोक्ष प्रदान करती है।

वित्तीय सेवा विभाग ने 2025 में किए ऐतिहासिक सुधार, बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में भारत ने रचा नया कीर्तिमान

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने वर्ष 2025 में व्यापक और दूरगामी सुधारों के माध्यम से भारत के बैंकिंग, बीमा, पेंशन, डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन तंत्र को नई मजबूती प्रदान की है। “आपकी पूँजी, आपका अधिकार” अभियान, बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम 2025, EASE 8.0 (EASE₹ise), क्रेडिट लाइन ऑन UPI और Hello! UPI जैसे नवाचारों ने वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

बैंकिंग क्षेत्र ऐतिहासिक मजबूती की ओर

सरकार के सुधारात्मक कदमों के परिणामस्वरूप बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
सितंबर 2025 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) का सकल एनपीए घटकर 2.05% और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) का 2.30% रह गया है।
प्रावधान कवरेज अनुपात (PCR) बढ़कर SCBs में 93% से अधिक और PSBs में लगभग 95% हो गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 में SCBs ने ₹4.01 लाख करोड़ और PSBs ने ₹1.78 लाख करोड़ का अब तक का सर्वाधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया।

EASE सुधारों से बदली PSBs की तस्वीर

EASE एजेंडा के तहत डिजिटल बैंकिंग, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, ग्राहक सेवा और फिनटेक सहयोग को बढ़ावा मिला। EASE₹ise के अंतर्गत जोखिम प्रबंधन, नवाचार, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और उत्कृष्टता पर विशेष जोर दिया गया, जिससे PSBs को भविष्य के लिए तैयार किया गया।


डिजिटल भुगतान में भारत वैश्विक अग्रणी

DIGIDHAN मिशन के तहत डिजिटल लेन-देन में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई।
वर्ष 2017-18 के 2,071 करोड़ लेन-देन से बढ़कर 2024-25 में यह संख्या 22,831 करोड़ हो गई।
UPI आज देश के कुल खुदरा डिजिटल भुगतानों का लगभग 81% संभाल रहा है और वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में भारत की हिस्सेदारी लगभग 49% है।
Hello! UPI, UPI Lite X और क्रेडिट लाइन ऑन UPI ने वरिष्ठ नागरिकों, ग्रामीण क्षेत्रों और फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल भुगतान को सरल बनाया है।

वित्तीय समावेशन को नई गति

प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत 57 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें ₹2.8 लाख करोड़ से अधिक जमा है।
मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, अटल पेंशन योजना और NPS वात्सल्य ने महिलाओं, युवाओं, किसानों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है।

बीमा, NBFC और MSME को बढ़ावा

सबका बीमा, सबकी रक्षा अधिनियम 2025 के माध्यम से बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 100% कर दी गई है।
NBFCs और MSMEs के लिए नई क्रेडिट गारंटी योजनाओं से निवेश और रोजगार सृजन को बल मिला है।
SIDBI ने MSME क्लस्टरों में नए शाखा नेटवर्क का विस्तार किया है।

निष्कर्ष

वर्ष 2025 में वित्तीय सेवा विभाग के सुधारों ने भारत की वित्तीय प्रणाली को अधिक मजबूत, पारदर्शी और समावेशी बनाया है। बैंकिंग स्थिरता, डिजिटल भुगतान में वैश्विक नेतृत्व और व्यापक वित्तीय समावेशन के साथ DFS ने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है।


राष्ट्रीय युवा दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के समापन सत्र में होंगे शामिल

No comments Document Thumbnail
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर, स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 जनवरी को शाम लगभग 4:30 बजे नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के समापन सत्र में भाग लेंगे।

प्रधानमंत्री देशभर से आए लगभग 3,000 युवाओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले युवा प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। चयनित प्रतिभागी दस विषयगत ट्रैकों के अंतर्गत प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी अंतिम प्रस्तुतियाँ देंगे, जिनमें वे राष्ट्रीय महत्व के प्रमुख क्षेत्रों पर युवाओं के नेतृत्व वाले दृष्टिकोण और व्यवहारिक सुझाव साझा करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 का निबंध संकलन भी जारी करेंगे, जिसमें युवाओं द्वारा लिखे गए चयनित निबंध शामिल होंगे। ये निबंध भारत की विकासात्मक प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक राष्ट्र-निर्माण लक्ष्यों पर केंद्रित हैं।

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग, जो अब अपने दूसरे संस्करण में है, भारत के युवाओं और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच संरचित संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच है। यह पहल प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के आह्वान के अनुरूप है, जिसमें राजनीतिक दलों से परे एक लाख युवाओं को राजनीति से जोड़ने और उन्हें विकसित भारत के लिए अपने विचारों को साकार करने हेतु राष्ट्रीय मंच प्रदान करने की बात कही गई थी।

9 से 12 जनवरी 2026 तक आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 में देशभर के विभिन्न स्तरों पर 50 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी देखने को मिली है। राष्ट्रीय स्तर की चैम्पियनशिप में शामिल युवा नेताओं का चयन एक कठोर, योग्यता-आधारित तीन-चरणीय प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है, जिसमें राष्ट्रव्यापी डिजिटल क्विज़, निबंध प्रतियोगिता और राज्य-स्तरीय विज़न प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।

डायलॉग का यह दूसरा संस्करण अपने उद्घाटन संस्करण की सफलता को आगे बढ़ाते हुए कई नए आयाम जोड़ता है। इनमें डिज़ाइन फॉर भारत, टेक फॉर विकसित भारत – सामाजिक उद्देश्य के लिए हैकथॉन, विस्तारित विषयगत सहभागिता तथा पहली बार अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का समावेश शामिल है, जिससे इस पहल का दायरा और प्रभाव और अधिक सशक्त हुआ है।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.