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“IndiaSkills Regional Competition 2025–26 (North-East) का उद्घाटन: उत्तर-पूर्व के युवाओं को राष्ट्रीय मंच पर पहचान का अवसर”

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गुवाहाटी (असम)- कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा मंत्री,जयंत चौधरी ने आज गुवाहाटी विश्वविद्यालय में IndiaSkills Regional Competition 2025–26 (North-East) का उद्घाटन किया। इस प्रतियोगिता में उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों के युवा 26 कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगे।

यह पहली बार है जब भारत की प्रमुख कौशल प्रतियोगिता उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में आयोजित की जा रही है, जिससे यहां के युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का एक बड़ा अवसर मिल रहा है। इस आयोजन में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) ने कार्यान्वयन भागीदार के रूप में सहयोग किया।

उद्घाटन समारोह में गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नानी गोपाल महंता, असम सरकार के प्रमुख सचिव ग्यानेंद्र देव त्रिपाठी, तथा MSDE की संयुक्त सचिव हेना उस्मान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कौशल पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री की उत्तर-पूर्व पर निरंतर ध्यान और नीति प्राथमिकता ने क्षेत्र के युवाओं में आत्मविश्वास और अवसरों की नई लहर पैदा की है। उन्होंने IndiaSkills को केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि कौशल, अनुशासन और श्रम की गरिमा का उत्सव बताया।

जयंत चौधरी ने यह भी कहा कि NEP 2020 के अनुरूप शिक्षा और कौशल विकास के बीच तालमेल बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता, उद्यमिता और आजीवन सीखने के अवसर बढ़ते हैं।

यह क्षेत्रीय प्रतियोगिता उत्तर-पूर्व में कौशल विकास के मजबूत ढांचे को दर्शाती है। इस प्रतियोगिता में 162 प्रतियोगी भाग ले रहे हैं और इसमें तकनीकी, डिजिटल, परंपरागत और सेवा क्षेत्रों के विविध कौशल शामिल हैं, जैसे:

  • ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी

  • क्लाउड कंप्यूटिंग

  • मोबाइल ऐप डेवलपमेंट

  • वेब टेक्नोलॉजी

  • इलेक्ट्रॉनिक्स

  • CNC मिलिंग/टर्निंग

  • वेल्डिंग

  • फैशन टेक्नोलॉजी

  • बेकरी और पेस्ट्री

  • होटल रिसेप्शन

  • रेस्टोरेंट सर्विस

  • स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल

  • रिटेल सेल्स

  • विजुअल मर्चेंडाइजिंग

प्रतियोगिता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती हुई देखी गई, विशेषकर तकनीकी क्षेत्रों में जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, CNC, वेल्डिंग आदि। यह संकेत है कि उत्तर-पूर्व में कौशल क्षेत्र में लिंग समानता और डिजिटल-तकनीकी क्षमता का विकास हो रहा है।

IndiaSkills प्रतियोगिता एक चरणबद्ध मूल्यांकन प्रक्रिया के जरिए आयोजित की जाती है—जिला स्तर, राज्य स्तर, क्षेत्रीय स्तर, और फिर राष्ट्रीय स्तर। क्षेत्रीय विजेता IndiaSkills National Competition में भाग लेंगे, और सफल प्रतियोगियों को WorldSkills Competition 2026 (शंघाई) में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा।


IFSCA–IRDAI ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट में बोले एम. नागराजू, “2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य में गिफ्ट सिटी की अहम भूमिका”

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मुंबई में आयोजित IFSCA–IRDAI–GIFT City ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने कहा कि भारत का रीइंश्योरेंस (पुनर्बीमा) क्षेत्र परिवर्तनकारी विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि समिट की थीम “Bridging India Today, Insuring India Tomorrow – the India Evolution Roadmap” सरकार के “2047 तक सभी के लिए बीमा” के विजन से पूरी तरह मेल खाती है।

अपने संबोधन की शुरुआत में नागराजू ने IFSC गिफ्ट सिटी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की और इसे भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने की दिशा में एक मजबूत मंच बताया। उन्होंने कहा कि बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्र भारत की आर्थिक आकांक्षाओं को गति देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, विशेषकर तब जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए सचिव ने कहा कि 1.46 अरब से अधिक जनसंख्या वाला भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वैश्विक बीमा परिदृश्य पर स्विस री सिग्मा रिपोर्ट (02/2025) का हवाला देते हुए नागराजू ने बताया कि 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक बीमा उद्योग में प्रीमियम वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। इसके बावजूद, 2024 में भारत नाममात्र प्रीमियम के आधार पर दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार रहा, जिसकी वैश्विक हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत है। भारत में बीमा पैठ 3.7 प्रतिशत रही, जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा 1 प्रतिशत शामिल है, जो अभी भी बड़े अप्रयुक्त बाजार की संभावनाओं को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारतीय बीमा क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, ₹11.93 लाख करोड़ का प्रीमियम संग्रह किया, ₹8.36 लाख करोड़ के दावे निपटाए और 31 मार्च 2025 तक ₹74.44 लाख करोड़ की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां दर्ज कीं। इसी अवधि में भारत का कुल रीइंश्योरेंस बाजार ₹1.12 लाख करोड़ का रहा।

नागराजू ने सरकार और बीमा नियामक द्वारा किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत पॉलिसीधारकों की शिक्षा एवं संरक्षण कोष की स्थापना, डेटा संरक्षण कानून के अनुरूप प्रावधान और IRDAI की नियामक शक्तियों को मजबूत किया गया है।

अपने संबोधन के समापन में सचिव ने कहा कि IFSCA और गिफ्ट सिटी IFSC भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने भारतीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गिफ्ट सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाएं और सभी हितधारकों के साथ मिलकर “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को साकार करें।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 88वीं बैठक सम्पन्न, संरक्षित क्षेत्रों में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन पर जोर

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नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (SC-NBWL) की स्थायी समिति की 88वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन्यजीव संरक्षण और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाए रखने से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान समिति ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुरूप संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, टाइगर रिजर्व और इको-सेंसिटिव जोन के भीतर और आसपास स्थित कुल 70 प्रस्तावों पर विचार किया। इन प्रस्तावों में जनोपयोगी सेवाओं, रक्षा आवश्यकताओं और बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े मामले शामिल थे। समिति ने पर्यावरणीय संवेदनशीलता, वैधानिक आवश्यकताओं और स्थानीय समुदायों के लिए आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए इन प्रस्तावों पर चर्चा की।

जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े प्रमुख प्रस्तावों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, सड़कों का चौड़ीकरण, 4जी मोबाइल टावरों और विद्युत ट्रांसमिशन लाइनों से संबंधित योजनाएं शामिल रहीं। इसके अलावा मध्य प्रदेश में मध्यम सिंचाई परियोजना से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया, जिससे एक ओर बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों और घड़ियालों के लिए बेहतर जल व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।

समिति ने 17 रक्षा संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार किया, जो मुख्य रूप से लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और सिक्किम राज्य में सीमा एवं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रणनीतिक बुनियादी ढांचे से संबंधित थे। राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन प्रस्तावों की अनुशंसा की गई, साथ ही वन्यजीव संरक्षण उपायों और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के सख्त पालन पर भी जोर दिया गया।

बैठक में पिछली बैठकों में लिए गए निर्णयों और निर्देशों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) की समीक्षा भी की गई। विशेष रूप से नीतिगत सुधारों, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और परिवेश पोर्टल में सुधार से संबंधित प्रगति पर चर्चा की गई। समिति ने निर्णय लिया कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी नीतियों और कार्यक्रमों तथा SC-NBWL के निर्देशों के अनुपालन की आगे की बैठकों में प्रभावी निगरानी की जाएगी।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों और वनों के संरक्षण से जुड़े मामलों पर सरकार को परामर्श देना तथा यह सुनिश्चित करना है कि संरक्षित क्षेत्रों में विकास कार्य संतुलित और सतत तरीके से किए जाएं।


77वें गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रनिर्माताओं का सम्मान, 10 हजार विशेष अतिथि होंगे शामिल

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नई दिल्ली- 26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ, नई दिल्ली में आयोजित होने वाली 77वीं गणतंत्र दिवस परेड इस बार जनभागीदारी और राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने वाले नागरिकों के सम्मान का भव्य उदाहरण बनेगी। इस अवसर पर देशभर से लगभग 10,000 विशेष अतिथियों (पति/पत्नी सहित) को आमंत्रित किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इन विशेष अतिथियों में किसान, वैज्ञानिक, स्टार्ट-अप उद्यमी, शोधकर्ता, खिलाड़ी, महिला स्वयं सहायता समूह, कारीगर, श्रमिक, छात्र, स्वयंसेवक और समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों से जुड़े वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इनका चयन राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को सम्मानित करने और राष्ट्रीय आयोजनों में जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

विशेष अतिथियों की सूची में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के विजेता, प्राकृतिक खेती करने वाले किसान, ‘पल्सेज आत्मनिर्भरता मिशन’ के अंतर्गत उत्कृष्ट किसान, पीएम-स्माइल योजना के तहत पुनर्वासित ट्रांसजेंडर और भिक्षुक, जल जीवन मिशन, पीएम आवास योजना (ग्रामीण), पीएम फसल बीमा योजना, पीएम स्वनिधि, मुद्रा योजना, एनआरएलएम की ‘लखपति दीदी’, पीएम विश्वकर्मा योजना, खादी विकास योजना, महिला कॉयर योजना सहित कई योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं।

इसके अलावा इसरो, डीआरडीओ, डीप ओशन मिशन, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ, नवाचार एवं स्टार्ट-अप क्षेत्र के उत्कृष्ट प्रदर्शनकर्ता, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के विजेता, अटल टिंकरिंग लैब के प्रतिभाशाली छात्र, ‘वीर गाथा’ परियोजना के विजेता तथा ‘मन की बात’ के प्रतिभागी भी परेड के साक्षी बनेंगे।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कलाकार, कारीगर, खिलाड़ी, आदिवासी उद्यमी, सीमा सड़क संगठन (BRO) के निर्माण श्रमिक, स्वच्छ गंगा मिशन के ‘जल योद्धा’, एनडीएमए के स्वयंसेवक, माय भारत वॉलंटियर्स, सर्वश्रेष्ठ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के प्रतिनिधि भी विशेष रूप से आमंत्रित किए गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह आयोजन विशेष रहेगा, जहां यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम-2026 के विदेशी प्रतिनिधि, दूसरे वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन में शामिल अंतरराष्ट्रीय व भारतीय भिक्षु प्रतिनिधिमंडल तथा खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी ओलंपियाड 2025 के पदक विजेता छात्र भी शामिल होंगे।

गणतंत्र दिवस समारोह के साथ-साथ इन विशेष अतिथियों के लिए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, प्रधानमंत्री संग्रहालय और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्थलों के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। उन्हें संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से संवाद का अवसर भी प्रदान किया जाएगा।

यह पहल न केवल भारत की विविध उपलब्धियों को मंच पर लाएगी, बल्कि ‘जन भागीदारी से जन सशक्तिकरण’ के संकल्प को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगी।

छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग को नया नेतृत्व, अमिताभ जैन बने मुख्य सूचना आयुक्त

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 रायपुर । राज्यपाल रमेन डेका ने आज यहां लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन एवं राज्य सूचना आयुक्त उमेश कुमार अग्रवाल एवं डॉ. शिरीष चंद्र मिश्रा को राज्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई।


मुख्य सचिव विकास शील ने शपथ प्रक्रिया पूर्ण कराई। शपथ ग्रहण समारोह में राजस्व, खेल एवं युवा कल्याण, आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, और अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुरंदर मिश्रा, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना, मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध सिंह, राज्य शासन के विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव एवं सचिव, छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक, राज्य सूचना आयोग के आयुक्त आलोक चंद्रवंशी, राज्य सूचना आयोग के पूर्व आयुक्त मनोज त्रिवेदी, अशोक अग्रवाल, धनवेंद्र जायसवाल, राज्य सूचना आयोग के सचिव नीलम नामदेव एक्का सहित गणमान्य नागरिक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


ज्ञात हो कि नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन सेवानिवृत्त आईएएस पूर्व मुख्य सचिव रहे हैं। राज्य सूचना आयुक्त उमेश अग्रवाल सेवानिवृत्त आईएएस हैं तथा डॉ.शिरीष चंद्र मिश्रा पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026: छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना का राष्ट्रीय उत्सव

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23 से 25 जनवरी तक नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में तीन दिवसीय भव्य आयोजन

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और विचार विमर्श का एक सशक्त मंच बनेगा, जिसमें देश-प्रदेश के साहित्य प्रेमी, लेखक, विचारक और पाठक बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे।

इस तीन दिवसीय साहित्य उत्सव में देश एवं प्रदेश के लगभग 120 ख्याति प्राप्त साहित्यकारों का आगमन होगा। आयोजन के दौरान कुल 42 साहित्यिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और बौद्धिक विषयों पर गहन विमर्श किया जाएगा।

साहित्य उत्सव के सत्रों में बौद्धिक विमर्श, भारतीय ज्ञान परम्परा, संविधान, सिनेमा और समाज, देश में नव जागरण, छत्तीसगढ़ में साहित्य, इतिहास के झरौखे में साहित्य, शैक्षणिक संस्थानों में भाषा और साहित्य का स्तर जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा, जो वर्तमान समय की बौद्धिक आवश्यकताओं को संबोधित करेंगे।

इसके अतिरिक्त नाट्य शास्त्र एवं कला परम्परा, साहित्य और राजनीति, समकालीन महिला लेखन, जनजातीय साहित्य, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पर्यटन, पत्रकारिता और शासन जैसे विषयों पर भी विशद परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। साथ ही प्रकाशकों की चुनौतियां, डिजिटल युग में लेखन और पाठक जैसे समसामयिक विषय भी विमर्श के केंद्र में रहेंगे।

आयोजन की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और प्रशासन द्वारा 21 जनवरी 2026 तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन स्थल पर मंच, पंडाल, तकनीकी व्यवस्थाएं, साज-सज्जा और अन्य आवश्यक सुविधाएं तेजी से अंतिम रूप ले रही हैं।

साहित्य उत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी 2026 को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वर्धा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

साहित्य उत्सव का समापन 25 जनवरी 2026 को होगा, जिसमें राज्य सरकार के मंत्रिगणों के साथ-साथ डॉ. सच्चिदानंद जोशी एवं डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विभूतियां विशेष रूप से शामिल होंगी।

साहित्य उत्सव के दौरान 23 जनवरी को सायंकाल 7 बजे से प्रख्यात साहित्यकार एवं रंगमंच कलाकार मनोज जोशी द्वारा चर्चित ‘चाणक्य’ नाटक का विशेष मंचन किया जाएगा, जो आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा।

इसके साथ ही महाभारत धारावाहिक में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले नीतीश भारद्वाज तथा सिनेमा जगत के जाने-माने निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु भी साहित्य उत्सव में सहभागिता करेंगे।

24 जनवरी 2026 को देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विशेष काव्य-पाठ का आयोजन किया जाएगा।

साहित्यकारों की परिचर्चाओं एवं सत्रों के लिए आयोजन स्थल पर चार मंडप बनाए गए हैं। मुख्य मंडप का नामकरण ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के एकमात्र साहित्यकार स्व. विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर किया गया है।

दूसरे मंडप का नामकरण पं. श्यामलाल चतुर्वेदी, तीसरे मंडप का नामकरण बस्तर के गौरव साहित्यकार लाला जगदलपुरी तथा चौथे मंडप का नामकरण साहित्यकार अनिरुद्ध नीरव के नाम पर किया गया है।

आयोजन स्थल पर विशाल पुस्तक मेला भी लगाया जाएगा, जहां प्रभात प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, सरस्वती बुक, यशस्वी प्रकाशन, हिन्द युग्म प्रकाशन, राजपाल प्रकाशन सहित लगभग 15 राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशक अपनी पुस्तकों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों एवं स्कूली विद्यार्थियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा तथा साहित्यकारों द्वारा लिखी गई नई पुस्तकों के विमोचन की भी समुचित व्यवस्था की गई है।

आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों में हुए विकास को प्रदर्शित करने वाली आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। स्थानीय युवाओं एवं लोक कलाकारों के लिए टेलेंट ज़ोन बनाया गया है, जहां काव्य-पाठ, कहानी-पाठ, लोकनृत्य एवं गीत-संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। साथ ही प्रतिदिन क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित कर विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

पुरखौती मुक्तांगन तक पुराने रायपुर से आने-जाने के लिए प्रशासन द्वारा लगभग 20 निःशुल्क बसों का संचालन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, टाटीबंध, तेलीबांधा सहित छह मार्गों पर किया जाएगा। साहित्य उत्सव के सफल आयोजन हेतु लगभग 500 अधिकारी-कर्मचारी व्यवस्थाओं में जुटे हैं। आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों सहित स्थानीय खान-पान के लिए लगभग 15 फूड स्टॉल लगाए जा रहे हैं। कार्यक्रम स्थल में पेयजल, स्वच्छता एवं शौचालय जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026  छत्तीसगढ़ की बौद्धिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और समकालीन विचारधारा का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रदर्शन है। यह उत्सव साहित्य, संवाद और संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करेगा तथा नई पीढ़ी में अध्ययन, अभिव्यक्ति और सृजनशीलता के प्रति रुचि को और सुदृढ़ करेगा।

रेलवे कर्मचारी बहु-राज्य सहकारी समितियों के साथ सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण की अहम बैठक, संशोधित कानून के अनुरूप उपविधियों में बदलाव पर जोर

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नई दिल्ली- सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (CEA) ने 19 जनवरी 2026 को रेलवे कर्मचारियों की बहु-राज्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य बहु-राज्य सहकारी समिति (संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप समितियों की उपविधियों (Bye-laws) के समायोजन को सुगम बनाना था। इस बैठक में रेलवे कर्मचारियों की 16 बहु-राज्य सहकारी समितियों के 40 से अधिक पदाधिकारियों, जिनमें अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल थे, ने भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि 2023 के संशोधन के बाद गठित CEA को बहु-राज्य सहकारी समितियों में मतदाता सूची तैयार करने और स्वतंत्र, निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक देशभर में CEA द्वारा 220 चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराए जा चुके हैं, जबकि 70 चुनाव वर्तमान में प्रगति पर हैं।

देश में रेलवे कर्मचारियों की लगभग 18 बहु-राज्य सहकारी समितियां हैं, जिनके सदस्य 8 से 10 लाख के बीच हैं। ये समितियां मुख्य रूप से अपने सदस्यों से जमा स्वीकार करने और रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने का कार्य करती हैं। इन समितियों द्वारा संचालित जमा और ऋण का कुल अनुमानित मूल्य लगभग ₹10,000 करोड़ है, जिनमें से चार समितियों के पास बैंकिंग लाइसेंस भी हैं।

CEA द्वारा अब तक रेलवे कर्मचारियों की पांच सहकारी समितियों में चुनाव कराए जा चुके हैं, जिनमें मुंबई, कोलकाता, गोरखपुर और बीकानेर स्थित प्रमुख सहकारी बैंक और क्रेडिट सोसायटी शामिल हैं।

बैठक में संशोधित अधिनियम के अनुरूप उपविधियों में संशोधन, प्रतिनिधि सामान्य निकायों का गठन, प्रतिनिधियों का चुनाव, बोर्ड के कार्यकाल की समाप्ति से कम से कम छह माह पूर्व चुनाव प्रस्ताव प्रस्तुत करने तथा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कार्यात्मक वेबसाइट बनाए रखने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

CEA के उपाध्यक्ष आर. के. गुप्ता ने निर्वाचन प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों पर प्रस्तुति दी। वहीं केंद्रीय सहकारी रजिस्ट्रार आनंद कुमार झा और CEA की सदस्य मोनिका खन्ना ने समय पर चुनाव कराने के लिए उपविधियों में शीघ्र संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में रेल मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने CEA की सक्रिय भूमिका की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक शासन को मजबूत करने के लिए इस प्रकार की परामर्श बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए।

सी-डॉट को ‘सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन’ के लिए स्कॉच अवॉर्ड 2025, आपदा चेतावनी प्रणाली में देश को मिली बड़ी उपलब्धि

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नई दिल्ली- भारत सरकार के दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास के अग्रणी संस्थान सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) को उसकी स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन (CBS) तकनीक के लिए प्रतिष्ठित “SKOCH Award-2025” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान “Resourcing Viksit Bharat” विषय पर आयोजित 104वें स्कॉच समिट के दौरान प्रदान किया गया।

स्कॉच अवॉर्ड देशभर में शासन और विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सरकारी एवं निजी संस्थानों, परियोजनाओं और व्यक्तियों को दिया जाता है। यह पुरस्कार वित्त, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में नागरिकों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली पहलों को मान्यता देता है।

C-DOT का सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन एक अत्याधुनिक आपदा एवं आपातकालीन चेतावनी मंच है, जो भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) और भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) जैसी संस्थाओं को एकीकृत करता है। यह प्लेटफॉर्म सभी मोबाइल ऑपरेटरों, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से त्वरित चेतावनी संदेश प्रसारित करता है।

यह स्वदेशी, किफायती और पूर्णतः स्वचालित प्रणाली भौगोलिक रूप से लक्षित (Geo-targeted), बहु-आपदा और 21 भाषाओं में बहुभाषी चेतावनी देने में सक्षम है, जिससे आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र की ‘Early Warnings for All (EW4All)’, आईटीयू के कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है।

इस अवसर पर C-DOT के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि यह सम्मान नागरिकों की सुरक्षा के लिए तकनीक को समर्पित करने के C-DOT के संकल्प की पहचान है। उन्होंने कहा कि सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर जीवनरक्षक जानकारी पहुंचाकर सार्वजनिक सुरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाता है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को भी मजबूती प्रदान करती है और भारत को वैश्विक स्तर पर इस तकनीक के चुनिंदा प्रदाताओं में शामिल करती है।

C-DOT, दूरसंचार विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था है, जिसने डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में C-DOT 5G, 6G, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे भविष्य की तकनीकों पर कार्य कर रहा है।

यह पुरस्कार C-DOT के ईवीपी डॉ. पंकज डलेला ने प्राप्त किया।

अबूझमाड़ जंगल से 82 BGL सेल और IED सामग्री बरामद, नक्सलियों की बड़ी साजिश नाकाम

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 नारायणपुर। अबूझमाड़ के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की एक बड़ी हिंसक साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है। आदिंगपार–कुमेरादी क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने 82 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) सेल समेत भारी मात्रा में IED निर्माण सामग्री बरामद की है।


जानकारी के अनुसार, नक्सलियों ने इन BGL सेल को प्लास्टिक शीट में लपेटकर जमीन में दफन कर रखा था। आशंका है कि इनका इस्तेमाल सुरक्षा बलों को निशाना बनाने और बड़े हमलों को अंजाम देने के लिए किया जाना था। समय रहते बरामदगी होने से एक बड़ी घटना टल गई।

संयुक्त ऑपरेशन में मिली सफलता

यह कार्रवाई नारायणपुर पुलिस, आईटीबीपी और डीआरजी की संयुक्त टीम द्वारा की गई। खुफिया सूचना के आधार पर ओरछा, रायनार और धनोरा से लेकर आदिंगपार–कुमेरादी क्षेत्र तक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया।

इस दौरान BGL सेल के साथ-साथ IED बनाने में उपयोग होने वाली अन्य संदिग्ध सामग्री भी जब्त की गई है। बरामद विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने की प्रक्रिया जारी है।

नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस बरामदगी से नक्सलियों के हथियार और विस्फोटक नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। क्षेत्र में आगे भी सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा ताकि किसी अन्य छिपे विस्फोटक या नक्सली गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

बीजापुर में नक्सली IED धमाके में निर्दोष ग्रामीण की दर्दनाक मौत

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 बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में माओवादियों की एक और कायराना हरकत सामने आई है। जंगल में पहले से बिछाए गए प्रेशर IED की चपेट में आने से एक निर्दोष ग्रामीण की मौत हो गई।


सूत्रों के अनुसार, यह हादसा 18 जनवरी को बीजापुर जिले के ग्राम कस्तुरीपाड के जंगल क्षेत्र में हुआ। मृतक आयता कुहरामी रोजमर्रा की जरूरत के लिए लकड़ी लेने जंगल गए थे। इसी दौरान नक्सलियों द्वारा पहले से प्लांट किए गए IED पर उनका पैर पड़ गया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ।

घटनास्थल और प्राथमिक जानकारी

धमाका इतना भयंकर था कि युवक के दोनों पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जंगल और आसपास के इलाकों में IED डिटेक्शन और निष्क्रियकरण अभियान भी तेज कर दिया गया है।

भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (IICDEM) 2026 के लिए निर्वाचन आयोग पूरी तरह तैयार

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नई दिल्ली- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) 21 से 23 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले प्रथम भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (IICDEM) 2026 के लिए पूरी तरह तैयार है। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा।

IICDEM 2026 लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन के क्षेत्र में भारत द्वारा आयोजित अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन होगा। इसमें विश्व के 70 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए लगभग 100 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय संगठनों, भारत में स्थित विदेशी मिशनों तथा निर्वाचन विषय के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की भी भागीदारी होगी।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत करेंगे और सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत करेंगे।

तीन दिवसीय कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र, निर्वाचन प्रबंधन निकायों (EMBs) के नेताओं की पूर्ण बैठक, कार्य समूह बैठकों सहित कई सामान्य एवं विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें वैश्विक निर्वाचन चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय निर्वाचन मानकों, नवाचारों और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं पर विस्तृत चर्चा होगी।

सम्मेलन के दौरान 36 विषयगत समूहों द्वारा गहन मंथन किया जाएगा, जिनका नेतृत्व राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी करेंगे। इन चर्चाओं में 4 आईआईटी, 6 आईआईएम, 12 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) और भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी होगी।

निर्वाचन आयोग दुनिया भर के निर्वाचन प्रबंधन निकायों के साथ 40 से अधिक द्विपक्षीय बैठकें भी करेगा, ताकि वैश्विक स्तर पर चुनावों से जुड़ी चुनौतियों और सहयोग के अवसरों पर विचार किया जा सके। इस अवसर पर आयोग अपने एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ECINET’ का भी औपचारिक शुभारंभ करेगा।

सम्मेलन के साथ एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत में चुनाव संचालन की व्यापकता, जटिलता तथा मतदाता सूची की तैयारी और चुनाव संचालन को मजबूत करने के लिए उठाए गए हालिया कदमों को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, लोकसभा चुनाव 2024 पर आधारित डॉक्यू-सीरीज “इंडिया डिसाइड्स” का प्रदर्शन सम्मेलन के पहले दिन किया जाएगा।

IICDEM 2026 के माध्यम से भारत वैश्विक मंच पर लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

अंडमान-निकोबार की जैव विविधता पर्यावरण और आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण: डॉ. जितेंद्र सिंह

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श्री विजयपुरम- डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की जैव विविधता न केवल पर्यावरणीय बल्कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है

डॉ. जितेंद्र सिंह यह बात अंडमान एवं निकोबार क्षेत्रीय केंद्र, प्राणी सर्वेक्षण भारत (ZSI) के विजयपुरम स्थित कार्यालय के दौरे के दौरान वैज्ञानिकों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने द्वीपों को “जैव विविधता की जीवंत प्रयोगशाला” बताते हुए कहा कि यहां उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान को संरक्षण और सतत आजीविका के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है।

मंत्री ने कहा कि ZSI जैसे संस्थान प्रामाणिक वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध कराते हैं, जो जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूलन और समुद्री अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) से जुड़ी राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर ZSI क्षेत्रीय केंद्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सी. शिवपेरुमन ने मंत्री का स्वागत किया और केंद्र की गतिविधियों, अनुसंधान कार्यक्रमों तथा द्वीपों की विशिष्ट जीव-जंतुओं की पहचान, संरक्षण और निगरानी में इसके योगदान की जानकारी दी। उन्होंने टैक्सोनॉमी, डीएनए बारकोडिंग, आणविक प्रणाली विज्ञान और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया।

1977 में स्थापित अंडमान एवं निकोबार क्षेत्रीय केंद्र ने पांच दशकों की वैज्ञानिक सेवा पूरी कर ली है। यह केंद्र अब तक विभिन्न जीव समूहों पर लगभग 90 शोध परियोजनाएं पूरी कर चुका है। यहां के वैज्ञानिकों द्वारा 85 पुस्तकें और 850 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित किए जा चुके हैं, जिससे भारत के जैव विविधता ज्ञान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ZSI संग्रहालय का भी दौरा किया, जो द्वीपों का एक प्रमुख शैक्षणिक और पर्यटन केंद्र है। संग्रहालय में 22 जीव समूहों के लगभग 3,500 नमूने प्रदर्शित हैं और यहां हर वर्ष 75,000 से 1,00,000 तक पर्यटक, छात्र और शोधकर्ता आते हैं। मंत्री ने स्थानिक, संकटग्रस्त और विलुप्तप्राय प्रजातियों से जुड़े प्रदर्शनों में विशेष रुचि दिखाई।

मंत्री को बताया गया कि ZSI के वैज्ञानिकों ने 20 से अधिक नई प्रजातियों की खोज की है, जिनमें नारकोंडम ट्री श्रू जैसी दुर्लभ प्रजाति शामिल है, और अंडमान-निकोबार, भारत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया से लगभग 900 नए जीव अभिलेख दर्ज किए गए हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह को यह भी जानकारी दी गई कि ZSI पोर्ट ब्लेयर, भारत के पहले राष्ट्रीय प्रवाल भित्ति अनुसंधान संस्थान (NCRRI) का नोडल केंद्र है, जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और वैज्ञानिक निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वैज्ञानिकों से संवाद करते हुए मंत्री ने अनुसंधान, सार्वजनिक नीति, संरक्षण योजनाओं और सामुदायिक जागरूकता के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत वैज्ञानिक संस्थान भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों और सतत ब्लू इकोनॉमी को साकार करने की कुंजी हैं।

अपने दौरे को “अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव” बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने ZSI टीम की सराहना की और कहा कि सुव्यवस्थित वैज्ञानिक संग्रह न केवल शोध को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि जनता में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा करते हैं।

सीमाओं की मजबूती, विकास की रफ्तार: बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन बना भारत की रणनीतिक रीढ़

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नई दिल्ली- हिमालय की बर्फीली चोटियों से लेकर रेगिस्तानों की तपती रेत और घने जंगलों तक, जहां सामान्य पहुंच कठिन है, वहां बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने अपने परिश्रम और साहस की अमिट छाप छोड़ी है। वर्ष 1960 में स्थापित BRO आज केवल एक निर्माण एजेंसी नहीं, बल्कि भारत की सीमाओं का मूक प्रहरी और विकास का मजबूत स्तंभ बन चुका है।

‘श्रमेन सर्वं साध्यम्’ यानी कठोर परिश्रम से सब कुछ संभव है — इस मूल मंत्र के साथ BRO ने पिछले छह दशकों में देश की सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई है।

रिकॉर्ड उपलब्धियां और बढ़ता बजट

अब तक BRO देश के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में 64,100 किलोमीटर से अधिक सड़कों, 1,179 पुलों, 7 सुरंगों और 22 हवाई पट्टियों का निर्माण कर चुका है।
वित्त वर्ष 2024–25 में BRO ने ₹16,690 करोड़ का अब तक का सबसे अधिक व्यय दर्ज किया, जबकि 2025–26 के लिए ₹17,900 करोड़ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। सरकार ने इसके योगदान को देखते हुए बजट आवंटन भी बढ़ाया है।

सीमावर्ती राज्यों में रणनीतिक परियोजनाएं

अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, पूर्वोत्तर राज्यों और राजस्थान तक BRO की परियोजनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ हैं।

  • लद्दाख में अटल टनल, डीएस-डीबीओ रोड और शिंकू ला टनल जैसी परियोजनाएं सालभर संपर्क सुनिश्चित कर रही हैं।

  • अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल और नेचिफू टनल से तवांग क्षेत्र तक निर्बाध पहुंच संभव हुई है।

  • सिक्किम और जम्मू-कश्मीर में पुलों और सड़कों ने सैन्य और नागरिक आवाजाही को मजबूती दी है।

आपदा में भी सबसे आगे BRO

चाहे भूकंप हो, बाढ़ या हिमस्खलन — BRO आपदा के समय सबसे पहले टूटे संपर्क को बहाल करता है। ज़ोजिला, रोहतांग और सेला जैसे दर्रों को रिकॉर्ड समय में खोलना इसकी दक्षता का प्रमाण है। राहत और बचाव कार्यों में BRO की भूमिका जीवनरेखा साबित होती है।

पड़ोसी देशों में भी विकास का सेतु

BRO ने भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में सड़कें, पुल और हवाई अड्डे बनाकर भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और कूटनीतिक साझेदारी को मजबूत किया है। अफगानिस्तान की दिलाराम–जरंज हाईवे परियोजना आज भी भारत की विकास कूटनीति का प्रतीक मानी जाती है।

भविष्य की तैयारी

आने वाले वर्षों में BRO सीमावर्ती इलाकों में 27,000 किलोमीटर से अधिक नई सड़कों और कई सुरंगों के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है। ट्रांस-कश्मीर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट जैसे उपक्रम भारत की रणनीतिक तैयारी को नई ऊंचाई देंगे।

निष्कर्ष

छह दशकों से अधिक समय से BRO ने यह सिद्ध किया है कि कठिन से कठिन भूभाग भी मजबूत इरादों के आगे झुक जाता है। BRO केवल सड़कें नहीं बनाता, बल्कि सुरक्षा, विकास और विश्वास की नींव रखता है।
भारत की सीमाओं पर खड़ा यह संगठन आज भी उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है — रास्ता मिलेगा, नहीं तो बनाया जाएगा।

बस्तर में सामूहिक घर वापसी: 200 लोगों ने छोड़ा ईसाई धर्म

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 कांकेर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में धर्मांतरण को लेकर एक बड़ी घटना सामने आई है। कांकेर जिले के पीढ़ापाल गांव में 50 से अधिक परिवारों के करीब 200 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर सामूहिक रूप से अपने मूल धर्म में घर वापसी की है।


इस अवसर पर 25 गांवों के समाज प्रमुख, वरिष्ठजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। समाज के वरिष्ठों की उपस्थिति में पहले मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई, इसके बाद गंगाजल छिड़ककर पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक सम्मान के साथ सभी की विधिवत घर वापसी कराई गई। कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।

स्वेच्छा से लिया गया निर्णय

जानकारी के अनुसार, पीढ़ापाल, धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, किरगापाटी और तरांदुल गांवों के लोग इस पहल में शामिल रहे। बताया गया कि लंबे समय से समाज के साथ संवाद और आपसी सहमति के बाद इन परिवारों ने स्वेच्छा से अपने पारंपरिक धर्म और संस्कृति में लौटने का निर्णय लिया।

और परिवार भी करेंगे घर वापसी

सर्व समाज के सदस्य ईश्वर कावड़े ने बताया कि यह पहल समाज की एकजुटता और आपसी समझ का परिणाम है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अभी 3 से 4 परिवार और हैं, जिन्होंने भी अपने मूल धर्म में लौटने की इच्छा जताई है और वे जल्द घर वापसी करेंगे।

प्रशासन की नजर, इलाके में शांति

इतने बड़े स्तर पर हुई घर वापसी के बाद पूरे बस्तर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल इलाके में शांति बनी हुई है और समाज के लोगों में फैसले को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

सड़क किनारे खड़े TI की दर्दनाक मौत, आवारा कुत्तों के कारण हुआ हादसा

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 मुंगेली। जिले के जरहागांव थाना प्रभारी नंदलाल पैकरा की राजस्थान के भरतपुर जिले में निजी यात्रा के दौरान एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। इस हादसे से पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना प्रभारी नंदलाल पैकरा अपने साथियों के साथ निजी यात्रा पर राजस्थान गए हुए थे। भरतपुर जिले में एक ढाबे के पास वे सड़क किनारे खाना पैक करा रहे थे। इसी दौरान उनके हाथ में रखी रोटी पर अचानक आवारा कुत्तों ने झपट्टा मार दिया।

कुत्तों से बचने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया और वे पास से गुजर रहे तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आ गए। हादसा इतना गंभीर था कि वे बुरी तरह घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी

मुंगेली पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही भरतपुर पुलिस से लगातार संपर्क किया जा रहा है। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
पार्थिव देह को छत्तीसगढ़ लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

पुलिस विभाग में शोक

दिवंगत थाना प्रभारी की पत्नी तखतपुर में शिक्षिका हैं। उनके आकस्मिक निधन से न केवल मुंगेली जिला बल्कि पूरे प्रदेश के पुलिस विभाग में शोक का माहौल है। नंदलाल पैकरा को उनके कर्तव्यनिष्ठ, सरल स्वभाव और अनुशासित कार्यशैली के लिए जाना जाता था। पुलिस विभाग ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने जताया शोक

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है।

जांच शुरू, ट्रक चालक की तलाश

इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और ट्रक चालक की तलाश की जा रही है।

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