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सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूरे, महासमुंद में ध्वजारोहण के साथ सहकारिता सप्ताह का शुभारंभ

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 महासमुंद : भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सहकारिता सप्ताह के प्रथम दिवस में आज जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. रायपुर जिला कार्यालय महासमुंद अंतर्गत 159 सहकारी समितियों समितियों के अध्यक्ष, समिति प्रभारियों अन्य कर्मचारियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में ध्वजा रोहण कर सहकारी सप्ताह का शुभारंभ किया गया।


साथ ही जिले में 16 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक परिसर मे बैंक के कर्मचारियों और ग्राहकों की उपस्थिति मे ध्वजा रोहण किया गया।

जमीन विवाद में कांग्रेस नेता का हाईवोल्टेज ड्रामा, किसानों पर तानी पिस्टल

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 उज्जैन। जिले के महिदपुर क्षेत्र में जमीन विवाद को लेकर कांग्रेस नेता पर किसानों को पिस्टल दिखाकर धमकाने का गंभीर आरोप लगा है। मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।


जानकारी के अनुसार, Pratap Singh Gur पर आरोप है कि उन्होंने जमीन विवाद के दौरान किसानों को पिस्टल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। शिकायतकर्ता गोविंद सेन, निवासी डेलचीबुजुर्ग गांव, ने पुलिस को बताया कि 18 जून की शाम करीब 6:30 बजे वह अपने खेत पर रखे भूसे को भरने पहुंचे थे। इसी दौरान प्रताप सिंह गुर अपने दो साथियों के साथ वहां पहुंचे और जेसीबी मशीन से खेत के पास खाई खुदवाने लगे।

शिकायत के मुताबिक, जब गोविंद सेन और उनके भाई ने इसका विरोध किया तो विवाद शुरू हो गया। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंचे और समझाने का प्रयास किया। आरोप है कि इसी दौरान प्रताप सिंह गुर ने कमर से पिस्टल निकालकर परिवार की ओर तान दी और कहा कि “जेसीबी यहीं चलेगी, यहां से चले जाओ, नहीं तो जान से खत्म कर दूंगा।”

घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई। वायरल वीडियो में प्रताप सिंह गुर हाथ में पिस्टल लिए दिखाई दे रहे हैं और वीडियो बना रहे व्यक्ति का मोबाइल हटाते नजर आ रहे हैं।

हालांकि, प्रताप सिंह गुर ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि जमीन की नपती को लेकर वह पहले भी इंतजार कर चुके थे, लेकिन उनकी जमीन पर अवैध रूप से एंगल गाड़ दिए गए थे। उन्हें हटाने के लिए ही जेसीबी मंगाई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान दूसरे पक्ष ने उनके साथ अभद्रता की और राजनीतिक साजिश के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

CG NEWS : हाथियों का आतंक, कई मकानों में तोड़फोड़; ग्रामीणों में दहशत का माहौल

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 रायगढ़। रायगढ़ जिले में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला Kapu Forest Range का है, जहां देर रात जंगल से निकले दो हाथियों ने गांव में घुसकर कई कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।


वन विभाग के मुताबिक इन दिनों कापू वन परिक्षेत्र में करीब 19 हाथियों का दल अलग-अलग जंगलों में विचरण कर रहा है। इनमें से दो हाथी पिछले एक सप्ताह से अलोला गांव के आसपास डेरा जमाए हुए हैं। रात होते ही ये हाथी भोजन की तलाश में रिहायशी इलाके की ओर पहुंच जाते हैं।

कई ग्रामीणों के मकान तोड़े

शनिवार देर रात दोनों हाथी अलोला गांव की बस्ती में घुस गए और रामकुमार, लक्ष्मण सिंह, सत्य सिंह और तिलक सिंह के कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचाया। हाथियों को देखकर ग्रामीण किसी तरह घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे और शोर मचाकर उन्हें भगाने की कोशिश की।

इसके बाद दोनों हाथी टेड़ासेमर गांव पहुंच गए, जहां उन्होंने दसरिन कोरवा का कच्चा मकान और कार्तिक कोरवा की झोपड़ी भी तोड़ दी। ग्रामीणों द्वारा काफी देर तक हल्ला मचाने के बाद हाथी वापस जंगल की ओर लौट गए।

बाइक सवार को दौड़ाकर किया घायल

इसी बीच शुक्रवार शाम अलोला बीट क्षेत्र में एक और घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि 35 वर्षीय राजेंद्र सर्पराज अपने साथी सुखराम डोगीदरहा के साथ बाइक से कापू से किलकिला की ओर जा रहे थे। रास्ते में सड़क किनारे खड़े हाथियों से उनका सामना हो गया।

अचानक एक हाथी आक्रामक हो गया और दोनों बाइक सवारों को दौड़ाने लगा। सुखराम किसी तरह मौके से भागकर बच निकला, लेकिन हाथी ने राजेंद्र सर्पराज पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया।

लगातार हो रही इन घटनाओं से इलाके के ग्रामीणों में भय का माहौल है। वहीं वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।

मुंगेली : सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के 5 वर्ष पूर्ण होने पर 29 जून से 06 जुलाई तक मनाया जाएगा "सहकारी सप्ताह"

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सहकार से समृद्धि के संकल्प को सशक्त बनाने के लिए जिलेभर में होंगे विविध कार्यक्रम

मुंगेली- सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार के निर्देशानुसार 29 जून 2026 से 06 जुलाई 2026 तक पूरे देश में "सहकारी सप्ताह" का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रीय, राज्य, जिला, विकासखंड तथा प्राथमिक सहकारी समितियों के स्तर पर सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने, सहकारी संस्थाओं की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने तथा आमजन की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इसी क्रम में कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देशन में जिले में सहकारी सप्ताह के माध्यम से "सहकार से समृद्धि" की भावना को साकार करने के लिए सहकारी क्षेत्र की उपलब्धियों, नवाचारों एवं योगदान को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस अवधि में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, किसान संगोष्ठी, स्वास्थ्य शिविर, सहकारिता सम्मेलन, जागरूकता कार्यक्रम, हितधारक संवाद तथा विभिन्न जनभागीदारी आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

29 जून  को सप्ताह के प्रथम दिवस जिले की समस्त पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों में सहकारी ध्वज रोहण, सहकारिता संबंधी उद्बोधन, सहकारी शपथ एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया जाएगा। 

30 जून को सदस्यों की आय वृद्धि में दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा। जिला मुख्यालय में जिला सहकारी विकास समिति की बैठक आयोजित होगी, जिसमें जिला प्रशासन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं संबंधित विभागों के अधिकारी भाग लेंगे।

01 जुलाई  को जिला एवं विकासखंड स्तर पर कृषक संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग सहित आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। कार्यक्रम में  इफ्को  एवं  क्रीभको  का सहयोग रहेगा।

02 जुलाई को सभी पैक्स में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), रूपे केसीसी कार्ड, एटीएम सुविधा एवं बैंकिंग सेवाओं के प्रति जागरूक करते हुए संबंधित कार्यवाही भी की जाएगी।

03 जुलाई को जिलेभर में वृक्षारोपण अभियान संचालित किया जाएगा तथा जल संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही "सहकार समाचार पत्र" के प्रचार-प्रसार के माध्यम से सहकारिता की योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुँचाई जाएगी।

04 जुलाई को जिला कार्यालय में सहकारिता संगोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें सहकारी संस्थाओं की भूमिका, भविष्य की योजनाओं तथा सहकारिता के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। 

05 जुलाई को युवा वर्ग एवं आमजन में सहकारिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से "सहकार संकल्प दौड़" आयोजित की जाएगी। इसमें पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि तथा नागरिक भाग लेंगे।

06 जुलाई को प्राथमिक सहकारी समितियों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को "सहकारी प्रेरणा पुरस्कार" प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

सहकारिता विभाग ने जिले के सभी सहकारी संस्थानों, किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों तथा आम नागरिकों से अपील की है कि वे "सहकारी सप्ताह" के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाकर "सहकार से समृद्धि, सशक्त समाज, सशक्त भारत" के संकल्प को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें।

4 साल की बच्ची से दरिंदगी करने वाले को फांसी, जज बोले- "इस घिनौने अपराध के लिए फांसी भी छोटी सजा

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 पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 4 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी और उसकी बेरहमी से हत्या करने के दोषी 65 वर्षीय भीमराव कांबले (विनोद कांबले) को फांसी की सजा सुनाई है।


सोमवार (29 जून) को जज एस.आर. सालुंके ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस जघन्य अपराध के लिए उम्रकैद काफी नहीं है। दोषी को फांसी पर तब तक लटकाया जाए जब तक उसकी जान न निकल जाए।

यह मामला न्याय प्रणाली के इतिहास में अब तक की सबसे तेज कार्यवाहियों में से एक बन गया है, जहां घटना के महज दो महीने के भीतर आरोपी को पकड़कर सजा-ए-मौत तक पहुंचा दिया गया।

मुंगेली : एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में कक्षा 6वीं प्रवेश काउंसलिंग 30 जून से

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मुंगेली- एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु आयोजित प्राक्चयन परीक्षा की प्रावीण्य सूची (मेरिट लिस्ट) के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन एवं काउंसलिंग की तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विकासखंड स्तर की काउंसलिंग 30 जून एवं 01 जुलाई 2026 को आयोजित होगी। जिला स्तर की काउंसलिंग 02 जुलाई 2026 को जिले में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में संपन्न होगी।

राज्य स्तर की काउंसलिंग 3 जुलाई 2026 को जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय तथा बिलासपुर जिले के प्रयास आवासीय विद्यालय में आयोजित की जाएगी। इसी प्रकार विशेष पिछड़ी जनजाति समूह तथा प्रवेश दिशा-निर्देशों में उल्लेखित विशेष आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग 04 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। वहीं, जो अभ्यर्थी किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर काउंसलिंग में शामिल नहीं हो पाएंगे, उन्हें अंतिम अवसर के रूप में 06 जुलाई 2026 को जिले में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में आयोजित काउंसलिंग में शामिल होने का अवसर मिलेगा।


Reserve Bank of India का बड़ा प्लान: ₹10 हजार से ज्यादा ऑनलाइन ट्रांसफर तुरंत नहीं होगा

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 नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच ऑनलाइन फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए Reserve Bank of India (RBI) एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। आरबीआई ने प्रस्ताव रखा है कि यदि कोई ग्राहक ₹10,000 से अधिक का ऑनलाइन ट्रांसफर करता है, तो उस भुगतान को पूरा होने में एक घंटे का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ लग सकता है। बैंकिंग सेक्टर ने इस सुरक्षा उपाय का समर्थन किया है, लेकिन आम लोगों की सुविधा और तकनीकी चुनौतियों को लेकर चिंता भी जताई है।


₹10 हजार से ज्यादा ट्रांसफर पर 1 घंटे की देरी

आरबीआई ने अप्रैल में जारी अपने डिस्कशन पेपर में सुझाव दिया था कि जब कोई व्यक्ति, प्रोपराइटर या पार्टनरशिप फर्म ₹10,000 से अधिक का डिजिटल भुगतान शुरू करे, तो उस ट्रांजैक्शन को पूरा होने से पहले एक घंटे तक रोका जाए। यह नियम केवल पैसे भेजने वाले (पेयर) पर लागू होगा। इसका उद्देश्य ऐसे ऑनलाइन फ्रॉड को रोकना है, जिसमें ठग लोगों को बहला-फुसलाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। इसे तकनीकी भाषा में ऑथराइज्ड पुश पेमेंट (APP) फ्रॉड कहा जाता है।

बैंकों का मानना है कि यह एक घंटे की देरी ग्राहकों को सोचने और ट्रांजैक्शन की पुष्टि करने का समय देगी। हालांकि, बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि इसे हर तरह के भुगतान पर लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई ग्राहक ₹10,000 से ज्यादा कीमत का मोबाइल खरीद रहा है, तो वह भुगतान क्लियर होने के लिए एक घंटा इंतजार नहीं करना चाहेगा।

बुजुर्गों के लिए ‘ट्रस्टेड पर्सन’ की मंजूरी जरूरी

आरबीआई ने 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों की सुरक्षा के लिए एक और प्रस्ताव रखा है। इसके तहत ₹50,000 से अधिक के डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए एक ‘ट्रस्टेड पर्सन’ यानी भरोसेमंद व्यक्ति की मंजूरी जरूरी होगी।

इस व्यवस्था में बुजुर्ग द्वारा पहले से नामित व्यक्ति को भुगतान पूरा होने से पहले अतिरिक्त मंजूरी देनी होगी। यदि ट्रस्टेड पर्सन बदला जाता है, तो 24 घंटे का अनिवार्य कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू किया जाएगा।

बैंकों ने इस कदम की सराहना की है, लेकिन कहा है कि आपातकालीन स्थिति में यह नियम परेशानी खड़ी कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई बुजुर्ग अस्पताल में तत्काल भुगतान कर रहा हो और नामांकित व्यक्ति उपलब्ध न हो, तो जरूरी भुगतान भी रुक सकता है।

बैंकों पर बढ़ेगा भारी खर्च

इस नए सुरक्षा सिस्टम को लागू करने के लिए बैंकों को अपने डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव करने होंगे। इसके तहत नई ट्रांजैक्शन क्यू बनानी होगी, कूलिंग-ऑफ पीरियड के दौरान ट्रांजैक्शन कैंसिल करने का विकल्प देना होगा और सेटलमेंट सिस्टम को दोबारा कोड करना पड़ेगा।

बैंकिंग अधिकारियों के मुताबिक, इन व्यवस्थाओं को लागू करने में भारी लागत आएगी। यह चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि बैंक पहले से National Payments Corporation of India के Unified Payments Interface (UPI) पर जीरो-मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के कारण वित्तीय दबाव में हैं। व्यापारियों से यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता, जबकि पूरे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बनाए रखने के लिए सालाना करीब ₹10,000 करोड़ का निवेश करना पड़ता है।

भारत की जरूरतों के हिसाब से बनेंगे नियम

भारत दुनिया का सबसे बड़ा और तेज़ी से बढ़ता डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बन चुका है। आरबीआई ने United Kingdom, Singapore, Sweden, United States और Ireland जैसे देशों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया है।

हालांकि, भारतीय बैंकों का कहना है कि अंतिम गाइडलाइंस बनाते समय देश की जमीनी परिस्थितियों और आम ग्राहकों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। फिलहाल आरबीआई ने इस प्रस्ताव पर सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं और उम्मीद की जा रही है कि अंतिम नियमों में सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाया जाएगा।

मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को मिलेगी नई दिशा: आज लॉन्च होगा 'सुमन रोडमैप 2030'

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के 16वें सम्मेलन में 'सुमन रोडमैप 2030' (SUMAN Roadmap 2030) का शुभारंभ करेंगे। यह रोडमैप मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति है।

मुख्य बिंदु

  • वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम लाने का लक्ष्य।

  • नवजात मृत्यु दर (NMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में उल्लेखनीय कमी लाने पर जोर।

  • गर्भधारण से पहले, गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल तक संपूर्ण जीवन-चक्र आधारित स्वास्थ्य सेवाएं।

  • 13 राज्यों के 130 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में विशेष रणनीति लागू होगी, जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है।

  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, निगरानी और उपचार के लिए चार-स्तरीय प्रणाली विकसित की जाएगी।

गर्भवती महिलाओं को मिलेंगी विशेष सुविधाएं

  • समय पर पंजीकरण और सभी प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित की जाएंगी।

  • आठवें और नौवें महीने में आशा कार्यकर्ता प्रत्येक दो सप्ताह में घर जाकर स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श और सुरक्षित प्रसव की तैयारी कराएंगी।

  • कठिन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में प्रसव के लिए बेहतर एम्बुलेंस और रेफरल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

  • बर्थ वेटिंग होम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग (MCH Wing), हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) और आईसीयू जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

नई पहलें

  • सुमन पंचायत के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाई जाएगी।

  • मदर्स पिकनिक कार्यक्रम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

  • JANANI पोर्टल के जरिए डिजिटल मॉनिटरिंग और एआई आधारित लेबर रूम विकसित किए जाएंगे।

  • जलवायु परिवर्तन, हीटवेव और अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू होगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का लक्ष्य पूरे देश में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर शून्य रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु सुनिश्चित करना है। यह रोडमैप परिवार नियोजन, पोषण, किशोर स्वास्थ्य और नवजात देखभाल को एकीकृत करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाएगा।

लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम में बड़ा सुधार: पहली बार गलती करने वाले कारोबारियों को मिलेगा सुधार का मौका

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नई दिल्ली- उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 में "इम्प्रूवमेंट नोटिस (Improvement Notice)" व्यवस्था लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत पहली बार प्रक्रियागत या नियामकीय नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों को दंडात्मक कार्रवाई से पहले अपनी गलती सुधारने का अवसर दिया जाएगा।

मुख्य बातें

  • पहली बार हुई प्रक्रियागत या नियामकीय गलती पर सीधे जुर्माना या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

  • संबंधित अधिकारी पहले इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी करेंगे।

  • नोटिस में बताई गई कमियों को निर्धारित समय के भीतर सुधारने का अवसर मिलेगा।

  • समय पर सुधार करने पर अनावश्यक मुकदमेबाजी और दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सकेगा।

  • बार-बार नियमों का उल्लंघन करने या जानबूझकर धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

किन व्यवसायों को मिलेगा लाभ?

यह व्यवस्था निम्नलिखित सभी पंजीकृत एवं विनियमित संस्थाओं पर लागू होगी:

  • निर्माता (Manufacturers)

  • आयातक (Importers)

  • पैकर (Packers)

  • डीलर एवं व्यापारी

  • रिपेयरर

  • एमएसएमई (MSMEs)

  • अन्य विनियमित कारोबारी

किन मामलों में लागू होगी?

यह व्यवस्था पहली बार होने वाले निम्न प्रकार के उल्लंघनों पर लागू होगी:

  • पंजीकरण संबंधी त्रुटियां

  • रिकॉर्ड एवं दस्तावेजों का रखरखाव

  • मॉडल अप्रूवल

  • बाट एवं माप के निर्माण, बिक्री और मरम्मत

  • बाट एवं माप का आयात

  • पैकेज्ड वस्तुओं से जुड़े नियम

  • वैधानिक जानकारी एवं रिटर्न जमा करना

किन धाराओं पर लागू होगी?

इम्प्रूवमेंट नोटिस की व्यवस्था धारा 25, 27, 28, 29, 31, 32, 34, 35, 36(1), 38, 39, 41(1), 41(2), 45, 46 और 47 के तहत आने वाले निर्धारित प्रथम उल्लंघनों पर लागू होगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि इस सुधार का उद्देश्य:

  • Ease of Doing Business (EoDB) को बढ़ावा देना,

  • स्वैच्छिक अनुपालन (Voluntary Compliance) को प्रोत्साहित करना,

  • अनावश्यक मुकदमों और अनुपालन लागत को कम करना,

  • तथा "Minimum Government, Maximum Governance" की भावना के अनुरूप पारदर्शी एवं भरोसेमंद नियामकीय व्यवस्था विकसित करना है।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। धोखाधड़ी, छेड़छाड़, बार-बार नियम तोड़ने या उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में पहले की तरह कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

जशपुर-प्रकृति और सुंदर झरनों का आनंद लेने एक बार प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रानीदाह का भ्रमण जरूर करें

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जशपुरनगर- छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की हरी-भरी पहाड़ियों और घने साल के जंगलों के बीच स्थित रानीदाह जलप्रपात जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत प्रतीक है। यह झरना जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ख़ूबसूरत सड़कों से होकर जब कोई इस स्थल तक पहुँचता है, तो सामने फैली हरियाली, चट्टानों से गिरता दूधिया जल और पक्षियों की आवाज़ें मिलकर एक अविस्मरणीय दृश्य प्रस्तुत करती हैं। बरसात के मौसम में रानीदाह अपने पूरे वैभव पर होती है, जब पानी कई धाराओं में बँटकर ऊँची चट्टानों से नीचे गिरता है। गर्मी के मौसम में जल प्रवाह भले थोड़ा कम हो जाए, लेकिन आसपास की प्राकृतिक शांति और वातावरण का सौंदर्य हमेशा समान रूप से मनमोहक रहता है।

रानीदाह जलप्रपात केवल प्राकृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी लोककथाओं और रहस्यमयी कहानियों के कारण भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले ओडिशा की एक राजकुमारी, रानी शिरोमणि जशपुर की इन पहाड़ियों में आ पहुँची थीं। जब उसके पिता और पाँच भाई उनका पीछा करते हुए यहाँ पहुँचे, तो रानी ने अपमान और जबरन विवाह से बचने के लिए इसी गहरी खाई में छलांग लगा दी और अपने प्राण त्याग दिए। उसी समय से यह झरना “रानीदाह” के नाम से जाना जाने लगा, जिसका अर्थ है “रानी का जलप्रपात।” कहा जाता है कि झरने के पास स्थित कुछ चट्टानें “पाँच भैया” के नाम से जानी जाती हैं, जो रानी के भाइयों के प्रतीक माने जाते हैं। यह कथा आज भी स्थानीय लोगों के बीच पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती है और इस स्थल को एक रहस्यमयी और भावनात्मक पहचान देती है।

पर्यटकों के लिए रानीदाह जलप्रपात एक शांत और मनोरम पिकनिक स्थल है।

CG NEWS : नीचे आइसक्रीम शॉप, ऊपर लॉज में चल रहा था सेक्स रैकेट; पुलिस की रेड में 3 युवतियां समेत 6 लोग पकड़े गए

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 रायपुर । छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में आइसक्रीम पार्लर की आड़ में संचालित किए जा रहे कथित सेक्स रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस टीम ने शहर के इंद्रा मार्केट स्थित Jalaram Lodge में छापेमार कार्रवाई कर 3 युवतियों और 3 ग्राहकों को हिरासत में लिया है। सभी से पूछताछ जारी है।


मामला Kotwali Police Station Durg क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि जिस परिसर में कार्रवाई की गई, उसके नीचे मिठाई दुकान और आइसक्रीम शॉप संचालित थी, जबकि ऊपर बने लॉज में अवैध कारोबार चलाया जा रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास के लोगों को इस गतिविधि की पहले से जानकारी थी।

जानकारी के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 3 बजे पुलिस की टीम तीन वाहनों में इंद्रा मार्केट पहुंची। इसके बाद जलाराम लॉज को चारों ओर से घेरकर जांच शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दस्तावेजों की जांच की और मौके से अन्य अहम सबूत भी जुटाए। देर शाम तक पुलिस की कार्रवाई जारी रही।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यहां हर किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता था। केवल पुराने और पहचान वाले ग्राहकों को ही अंदर आने की अनुमति थी। जिन लोगों के मोबाइल नंबर पहले से दर्ज रहते थे, उन्हें ही एंट्री मिलती थी। इससे अंदेशा है कि पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था।

पुलिस ने मौके से कुछ आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है, जिसे जब्त कर जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। साथ ही दुकान संचालक को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह कारोबार कब से संचालित हो रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका है।

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एसीसीयू (ACCU) और कोतवाली थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने की। आरोपियों के खिलाफ पीटा एक्ट समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ पूरी होने के बाद पूरे मामले का आधिकारिक खुलासा किया जाएगा।

संत कबीर जयंती पर विशेष- संत कबीर ने किया रूढ़ियों पर प्रहार और दिया मानवता का संदेश

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 धनंजय राठौर- संयुक्त संचालक, (जनसंपर्क) रायपुर

संत कबीर दास भारतीय इतिहास, साहित्य और दर्शन के एक ऐसे दैदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिनकी चमक सदियां बीत जाने के बाद भी फीकी नहीं पड़ी है। हर वर्ष ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली 'कबीर जयंती' केवल एक संत के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उनके विचारों, उनकी निर्भीकता और समाज सुधार के संकल्प को याद करने का दिन है। मध्यकालीन भारत में जब समाज जात-पात, आडंबरों और संकीर्णता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, तब कबीर ने अपनी सीधी, सरल और मारक वाणी से समाज को झकझोरने का काम किया था। संत कबीर जी के सत्य, समरसता, समानता और मानवता के संदेश आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। उनके आदर्श सामाजिक सद्भाव, सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे।


कबीर का जीवन दर्शन: सादगी और समरसता

कबीरदास जी का जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ था। लोक मान्यताओं के अनुसार, उनका लालन-पालन एक जुलाहा परिवार (नीरू और नीमा) द्वारा किया गया। कबीर ने किताबी ज्ञान की अपेक्षा व्यावहारिक ज्ञान और 'आंखिन देखी' को सर्वोपरि माना। उन्होंने कहा भी है:-
"पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।"

कबीर का दर्शन किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं था। वे एक सच्चे विश्व-मानव थे, जिन्होंने ईश्वर को किसी मंदिर, मस्जिद या तीर्थ स्थान में ढूंढने के बजाय मनुष्य के भीतर ही खोजने की सलाह दी। उनके दोहे आज भी जनमानस को जीवन की सच्चाई दिखाने का काम करते हैं जैसे –
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥”

इस दोहे के माध्यम से कबीर ने अहंकार धार्मिक कट्टरता और कर्मकांडों पर तीखा व्यंग्य किया है। उनकी भाषा सरल, सहज और लोकजीवन से जुड़ी हुई थी, जिससे आम लोग भी उनकी बातों को आसानी से समझ पाते थे।
कबीरदास ने अपने समय में फैले जातिवाद, धार्मिक कट्टरता और कर्मकांडों का खुलकर विरोध किया। वह हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे, उन्होंने दोनों ही धर्मों की रूढ़ियों की आलोचना की। यही कारण है कि उनके विचारों ने सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियों को प्रभावित किया।

सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार

कबीरदास का मानना था कि ईश्वर एक ही है, चाहे कोई भी धर्म मानता हो। उन्होंने सिखाया कि बहुत सारे अनुष्ठान करना या धार्मिक रीति-रिवाजों का अंधाधुंध पालन करना व्यर्थ है। सबसे महत्वपूर्ण है ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम, ईमानदारी और सादा जीवन जीना। कबीर ने जाति व्यवस्था, मूर्ति पूजा और कठोर धार्मिक नियमों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर हमारे हृदय में निवास करता है और उसे आंतरिक भक्ति के माध्यम से पाया जा सकता है, न कि बाहरी वस्तुओं से। उनकी कविताएँ इतनी शक्तिशाली और अर्थपूर्ण थीं कि उन्हें सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल किया गया है। इससे पता चलता है कि उनका संदेश सभी लोगों के लिए था, न कि केवल एक धर्म के लिए।

कबीर दास जी एक महान समाज सुधारक थे। उन्होंने अपने समय में समाज में व्याप्त आडंबरों और संकीर्णता, धार्मिक पाखंडों, छुआछूत और अंधविश्वासों पर तीखे प्रहार किए। वे धर्म के नाम पर होने वाले दिखावे के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने बिना किसी डर के हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों की कुरीतियों पर अपनी बात रखी:-

• बाह्य आडंबर पर
"कांकर पाथर जोरि के, मस्जिद लई बनाय।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खु खुदाय ?"

• जातिवाद पर
"जाति-पाति पूछे नहिं कोई, हरि को भजै सो हरि का होई।"

आधुनिक युग में कबीर की प्रासंगिकता

आज 21वीं सदी में जब तकनीकी प्रगति के बावजूद दुनिया अक्सर वैचारिक मतभेदों, असहिष्णुता और सांप्रदायिकता से जूझ रही है, तब कबीर के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। कबीर हमें सिखाते हैं कि:
1. मानवता सबसे बड़ा धर्म है: किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके जन्म या जाति से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और उसके भीतर के प्रेम से होती है।
2. . सद्भाव और शांति: समाज में शांति बनाए रखने के लिए वाणी की मधुरता और आपसी समझ बहुत जरूरी है। जैसा कि उन्होंने कहा था—

"ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय।"

संत कबीर दास ने लोगों को अंधविश्वासों का पालन किए बिना सच्चे मन से ईश्वर से प्रेम करना सिखाया। कबीर हमेशा कहते थे कि ईश्वर एक है, चाहे आप किसी भी धर्म को मानें। उनके जीवन और शब्दों ने हिंदुओं और मुसलमानों को करीब लाया और आज भी सभी धर्मों के लोग उनके संदेश से प्रेरणा पाते हैं। उनकी शिक्षाओं ने कबीर पंथ की नींव रखी और भक्ति एवं सूफी आंदोलनों को प्रभावित किया। हिंदू, मुसलमान और सिख सभी उन्हें पूजते हैं, और उनके काव्य अपनी शाश्वत ज्ञान और सार्वभौमिक अपील के लिए प्रसिद्ध हैं।

संत कबीर दास भक्ति काल के महान कवि, समाज-सुधारक और दार्शनिक थे। उन्होंने अपने अनमोल दोहों और विचारों के माध्यम से समाज में फैले अंधविश्वासों, पाखंडों और जाति-पाति का कड़ा विरोध किया। कबीर साहेब ने हिंदू-मुस्लिम एकता और मानवता का संदेश दिया। कबीर की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए कबीर पंथ सक्रिय है, जो उनके विचारों सत्य, प्रेम, और समानता को समाज में फैलाने का कार्य कर रहा है।

संत कबीर दास जी की जयंती के इस पावन अवसर पर हमें कबीर के दोहों को केवल पढ़ने या सुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनके संदेशों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। कबीर का मार्ग प्रेम, सत्य और समानता का मार्ग है। आज के समय में समाज में व्याप्त नफरत और असमानता को मिटाने के लिए 'कबीर का विचार' ही सबसे अचूक औषधि है। आइए इस कबीर जयंती पर हम एक ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प लें जहां हर इंसान के प्रति सम्मान हो और प्रेम ही सर्वोपरि हो।

प्रधानमंत्री की 'मन की बात' विकसित भारत के संकल्प को देती है नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' की 135वीं कड़ी जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों के साथ सुनी।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 'मन की बात' आज जनता और नेतृत्व के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार देशवासियों को प्रेरित करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रत्येक कड़ी में देशभर से नवाचार, जनभागीदारी और प्रेरणादायी प्रयासों को सामने लाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक कार्यों को नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि 'मन की बात' की अनेक कड़ियों में छत्तीसगढ़ के नवाचारों और उपलब्धियों का उल्लेख होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी गणेशोत्सव के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मिट्टी से निर्मित भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला तथा वर्षा जल के प्रत्येक बूंद के संरक्षण का संदेश देते हुए जल संचय को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मेघालय के जीवित रूट ब्रिज का उल्लेख करते हुए प्रकृति और मानव के अद्भुत समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विज्ञान, तर्क और जागरूकता के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को दूर करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। असम की महिलाओं द्वारा 'हरगिला आर्मी' के माध्यम से दुर्लभ पक्षी हरगिला के संरक्षण और उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास जनजागरूकता का प्रेरक उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागालैंड में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संचालित नागालैंड बेबी लीग और नागालैंड वुमन फुटसाल लीग जैसी पहलों का उल्लेख किया। साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय एवं सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाने के प्रयासों की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि डोमिनिकन रिपब्लिक में 'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' के सदस्य वैदिक साहित्य का अध्ययन कर भारतीय संस्कृति से जुड़ रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की महिलाओं द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट से सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक बनाने की पहल स्वच्छता और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, सच्चिदानंद उपासने, अखिलेश सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर ;  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर स्थित डीडीयू ऑडिटोरियम में आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में शामिल हुए। गरिमामयी समारोह में उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया तथा आपातकाल पर आधारित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता  इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में लोकतंत्र, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है, जिसे समझने और निभाने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि यह समय भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा का काल था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को स्मरण करते हुए कहा कि उन लोगों ने जेल, यातनाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक आदर्शों को जीवित रखा।

मुख्य वक्ता  कुमार ने कहा कि इतिहास को याद रखना केवल अतीत को जानना नहीं है, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की एकता, अनुशासन और सामाजिक समरसता को मजबूत करें तथा नशामुक्त और स्वच्छ समाज के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों ने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य किया है और इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश - दुनिया में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है। उन्होंने युवाओं से “राष्ट्र प्रथम” की भावना को जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्र, ज्ञान और धर्म प्रथम की भावना ही भारत की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या सृष्टि का वह स्थान है जो सदैव पूजनीय रहेगा और सत्य व धर्म के मार्ग पर चलते हुए हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह कालखंड है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष, त्याग और जेल जीवन की कठिनाइयों को याद करते हुए कहा कि इन लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। श्री साय ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल स्मरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सचेत करना है ताकि वे समझ सकें कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र कितनी बड़ी कुर्बानियों के बाद प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से संघर्ष, संस्कृति और परंपरा की भूमि रही है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था रही है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को इतिहास से अवगत कराने के लिए इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करना प्रशंसनीय पहल है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अपने पारिवारिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में अनेक परिवारों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने कहा कि मेरे बड़े पिताजी स्वर्गीय श्री नरहरि साय 19 महीनों तक जेल में रहे और इन परिवारों की पीड़ा को करीब से देखा है। उस दौर में जब घर के मुखिया को जेल में डाल दिया जाता था, तब लोकतंत्र सेनानियों के परिवार पर जीवन निर्वाह का संकट आ गया था। श्री साय ने कहा कि इस कठिन समय में स्वयंसेवक भेष बदलकर लोकतंत्र सेनानियों के परिवार को अनाज पहुंचाने का काम करते थे ताकि कोई भूखा न रहे। उन्होंने उस दौर से जुड़ी कई और स्मृतियां भी साझा की और सभी लोकतंत्र सेनानियों का पुण्य स्मरण किया।


विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था। उन्होंने प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय लोकतंत्र की मजबूती और जागरूकता का प्रतीक बनकर सामने आया। आपातकाल हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री  तोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संघ  कैलाश सोनी, विधायक  मोतीलाल साहू, विधायक गोमती साय, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीती वर्णिका शर्मा, महामण्डलेश्वर  अजय रामदास,  अखिलेश सोनी, लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष  दिवाकर तिवारी, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  सच्चिदानंद उपासने समेत अनेक प्रबुद्धजन तथा लोकतंत्र सेनानी और उनके परिजन मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यालय स्तर पर "आपातकाल कभी विस्मृत न हो" विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल, रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें 31 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

विवेकानंद विद्यापीठ, कोरबा के श्री सूरज तांडिया को द्वितीय तथा अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल, दुर्ग के श्री अंश देशमुख तृतीय स्थान पर रहे। वहीं महाविद्यालय स्तर पर "25 जून : संविधान हत्या दिवस" विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में रायपुर की सुश्री कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय तथा दुर्ग की सुश्री खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान करते हुए लोकतंत्र और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

बारिश में दर्दनाक हादसा: जर्जर दीवार गिरने से दो सगी बहनों की मौत, बुआ गंभीर हालत में रायपुर रेफर

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 बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में लगातार बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा हो गया। पुराने कच्चे मकान की जर्जर दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से दो मासूम सगी बहनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी बुआ गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है।


यह हादसा बेमेतरा थाना क्षेत्र के राऊरपुर गांव में रविवार सुबह करीब 8:30 बजे हुआ। जानकारी के मुताबिक गांव निवासी चंद्रप्रकाश कोसले ने नया मकान बना लिया था, लेकिन पुराने कच्चे घर की करीब 7 से 8 फीट ऊंची जर्जर दीवार अब भी वहीं खड़ी थी, जिसे हटाया नहीं गया था।

बताया जा रहा है कि घटना के समय जगोना कोसले दीवार के पास बर्तन धो रही थीं, जबकि चंद्रप्रकाश की 7 और 8 साल की दो बेटियां आंगन में खेल रही थीं। इसी दौरान अचानक दीवार ढह गई और तीनों उसके नीचे दब गए।

हादसे में दोनों बच्चियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि जगोना कोसले गंभीर रूप से घायल हो गईं। चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे और मलबा हटाकर बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तीनों करीब एक घंटे तक मलबे में दबी रहीं।

सूचना मिलने पर बेमेतरा पुलिस मौके पर पहुंची। घायल महिला को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर रेफर कर दिया गया। वहीं दोनों बच्चियों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।

सिटी कोतवाली बेमेतरा की टीआई सोनल ग्वाला ने बताया कि राऊरपुर गांव में दीवार गिरने से दो मासूम सगी बहनों की मौत हुई है, जबकि उनकी बुआ गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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