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जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा को अंजाम दिया, वही प्रशिक्षण लेकर सीख रहे हुनर

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 तारा शंकर सहायक (संचालक जनसंपर्क)


रायपुर : अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा मन में हो तो जीवन में हर काम आसान हो जाता है। इस कथन को आत्मसमर्पित माओवादियों ने चरितार्थ किया है। जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की राह अख्तियार किया था, आज उन्हीं हाथों को राज्य की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कुशल और दक्ष बनाने की कवायद जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। शासन की मंशानुसार ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण देकर ’हिंसा से हुनर’ की ओर लौटे माओवादियों को नया जीवनदान मिल रहा है।

आजीविका मूलक गतिविधियों का दिया जा रहा है प्रशिक्षण

कभी माओवाद गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियों को अब ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न ट्रेड में सतत् प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे समाज की मुख्य धारा में लौटने के बाद आजीविका मूलक गतिविधियों में कुशल होकर बेहतर ढंग से सम्मान पूर्वक जीवन निर्वाह कर सके।

चौगेल कैंप परिसर बना कौशलगढ़

वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर शनैः-शनैः आगे बढ़ रहा है और माओवाद का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। छत्तीसगढ़ सहित देश को माओवाद से मुक्ति दिलाने केंद्र सरकार के संकल्प को पूरा करने प्रदेश सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। वहीं हथियार उठाने वालों को भविष्य गढ़ने का सुनहरा अवसर भी सरकार द्वारा दिया जा रहा है। आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत उन्हें विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) का बीएसएफ कैम्प परिसर ‘कौशलगढ़’ बन गया है, जहां समाज की मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, साथ ही उन्हें शिक्षित भी किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रमों का नियमित अध्ययन कराया जा रहा है, जिसमें रूचि लेते हुए सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपने भविष्य को पूरी शिद्दत से गढ़ने में संलग्न हैं। 20-20 का बैच बनाकर उन्हें हुनरमंद बनाने के सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

ड्राइविंग सीखने का शौक अब पूरा हो रहा- मनहेर तारम

चारपहिया वाहन चालन का प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित माओवादी 40 वर्षीय श्री मनहेर तारम ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से उन्हें ड्रायविंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसे वे पूरी रूचि के साथ सीख रहे हैं। ट्रेनर द्वारा स्टेयरिंग थामने से लेकर क्लच, ब्रेक व एक्सिलरेटर का प्रयोग करना सिखाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ड्रायविंग सीखने की चाहत अब पूरी हो रही है। इसके अलावा सिलाई और काष्ठशिल्प का प्रशिक्षण कैम्प में दिया जा रहा है। इसी तरह श्री नरसिंह नेताम ने बताया कि वह भी फोरव्हीलर की ड्रायविंग में अपना हाथ आजमा रहे हैं तथा यहां आकर ऐसी गतिविधियों से जुड़ रहे हैं, जिससे आगे का जीवन बेहतर हो सके। 19 साल के सुकदू पद्दा ने बताया कि यहां पिछले तीन महीने से ट्रेनिंग ले रहे हैं और खुद को आजीविका मूलक कार्यों से जोड़ रहे हैं, जबकि वह निरक्षर है। वहीं 19 वर्ष की कु. काजल वेड़दा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां आकर अलग-अलग पाठ्यक्रमों में नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें बचपन से कपड़ों की सिलाई करने की इच्छा थी, यहां आकर वह भी पूरी हो रही है। वहीं शिक्षकां के द्वारा प्राथमिक शिक्षा का भी वह लाभ ले रही हैं। इसी तरह कैंप में रह रहे जगदेव कोमरा, राजू नुरूटी, बीरसिंह मण्डावी, मैनू नेगी, सनऊ गावड़े, मानकी नेताम, सामको नुरूटी, उंगी कोर्राम, रमोती कवाची, मानकेर हुपेंडी, डाली सलाम, गेंजो हुपेंडी सहित सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपनी रूचि अनुसार ड्राईविंग, काष्ठशिल्प कला, सिलाई मशीन तथा सहायक इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में बेहतर ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनका नियमितरूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है।

पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी श्री विनोद अहिरवार ने बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विभिन्न पाठ्यक्रमों में 20-20 के बैच में चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और सभी को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित किया जा रहा है। भविष्य में मशरूम उत्पादन, बागवानी सहित विभिन्न सृजनात्मक एवं स्वरोजगार मूलक पाठ्यक्रमों में जल्द ही प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस तरह आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे माओवादियों को राज्य शासन द्वारा अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर तथा स्वरोजगारमूलक सकारात्मक कार्यों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करने का मौका मिल सके।

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु 7 फरवरी को ‘बस्तर पंडुम-2026‘ का करेंगी शुभारंभ

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 रायपुर : राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ ‘बस्तर पण्डुम-2026‘ का 7 फरवरी 2026 को शुभारंभ करेंगी। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 9 फरवरी तक आयोजित होगा। जनजातीय समाज के इस तीन दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ जनजातीय जीवनशैली, मान्यताओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत सहेजने और प्रदर्शित करने का पर्व है। बस्तर पण्डुम लोककला और संस्कृति तथा स्थानीय परंपराओं से जुड़ा उत्सव है। यह उत्सव बस्तर जनजातीय बस्तर पण्डुम जानजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और उनकी समृद्ध परंपरा को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। इस उत्सव के माध्यम से बस्तर अंचल की सांस्कृतिक को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।


छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय एवं लोक संस्कृति महोत्सव “बस्तर पंडुम 2026” का शुभारंभ समारोह 7 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे जगदलपुर में होगा। समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री द्वय अरुण साव और विजय शर्मा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप विशेष रूप से शामिल होंगे।

बस्तर अंचल में पण्डुम पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव में जनजातीय समाज की जीवनशैली के दर्शन होते है। इस बार पण्डुम पूरी भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 12 विधाओं की प्रस्तुति दी जाएगी। युवा कलाकारों के माध्यम से बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा व आभूषण, पूजा पद्धति, बस्तर शिल्प, जनजातीय चित्रकला का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य एवं बस्तर वन औषधि पर भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

कार्यक्रम में सांसद द्वय भोजराज नाग और महेश कश्यप, विधायक किरण सिंहदेव, लता उसेण्डी, विक्रम उसेण्डी, नीलकण्ठ टेकाम, आशाराम नेताम, चैतराम अटामी, विनायक गोयल, सावित्री मनोज मंडावी, लखेश्वर बघेल, विक्रम मंडावी तथा महापौर संजय पाण्डेय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल होंगे।

आत्मानंद स्कूल में चाकू कांड: वीडियो वायरल होते ही पुलिस एक्शन, मुख्य आरोपी छात्र गिरफ्तार

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के मोवा स्थित आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय में कक्षा के भीतर चाकू लहराने का मामला सामने आते ही हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर लिया है।


थाना पंडरी पुलिस ने बताया कि वायरल वीडियो में चाकू लहराने वाला छात्र सुशांत प्रधान (19), कक्षा 12वीं का छात्र है। आरोपी एक माह पहले स्कूल परिसर में अवैध रूप से चाकू लेकर पहुंचा था और कक्षा के भीतर दोस्तों को दिखा रहा था। इसी दौरान अन्य छात्रों ने वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वीडियो सामने आते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और त्वरित जांच के आदेश दिए। पूछताछ में आरोपी ने स्कूल में चाकू लाने की बात कबूल की। उसकी निशानदेही पर चाकू बरामद कर जब्त कर लिया गया है।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना पंडरी में अपराध क्रमांक 33/2026 के तहत धारा 25 आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज किया है।

वहीं वीडियो में दिखाई दे रहे तीन अन्य छात्र नाबालिग पाए गए हैं। उनकी भूमिका गौण होने के चलते उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट तैयार कर बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया है।

घटना के बाद स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस और शिक्षा विभाग पूरे मामले की गहन समीक्षा में जुटे हैं।

पश्चिमी वायु कमान में ऑल डोमेन जॉइंट ऑपरेशंस अभ्यास 2026 के तहत संयुक्त संचालन सम्मेलन आयोजित

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मुख्यालय पश्चिमी वायु कमान ने ऑल डोमेन जॉइंट ऑपरेशंस (ADJO) अभ्यास 2026 के ढांचे के अंतर्गत 05 एवं 06 फरवरी 2026 को एक उच्चस्तरीय संयुक्त संचालन सम्मेलन (Joint Operations Conclave) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य युद्ध के संचालनात्मक स्तर पर सेवाओं के भीतर तथा सेवाओं के बीच समन्वय और संवाद को सुदृढ़ करना था, ताकि लगातार जटिल होते बहु-डोमेन परिवेश में भारतीय रक्षा बलों की संयुक्त संचालन क्षमताओं को और मजबूत किया जा सके।

इस सम्मेलन में मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (IDS), भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA) तथा रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय वायु सेना के शीर्ष नेतृत्व ने भाग लिया।

उद्घाटन संबोधन में एयर मार्शल जे. एस. मान, वरिष्ठ वायु स्टाफ अधिकारी, पश्चिमी वायु कमान ने वर्तमान और भविष्य के संघर्षों में संयुक्तता (Jointness) और एकीकृत युद्ध संचालन (Integrated Warfighting) के सर्वोपरि महत्व पर बल दिया। उन्होंने वायु, थल, जल, अंतरिक्ष और साइबर डोमेन के बीच निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित करने वाले ऑल-डोमेन संचालन दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित किया, जिससे विवादित और निषेधित वातावरण में निर्णायक परिणाम प्राप्त किए जा सकें। उन्होंने सेवाओं के बीच अंतःक्रियाशीलता बढ़ाने, डोमेन-निरपेक्ष निर्णय प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करने, सेंसर-टू-शूटर लिंक को सुदृढ़ करने तथा अधिक दक्षता और प्रभावशीलता के लिए संचालन प्रक्रियाओं के परिष्करण पर भी जोर दिया।

चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने ADJO 2026 सम्मेलन को संबोधित करते हुए एकीकृत योजना, खुफिया जानकारी के साझा उपयोग और क्षमता प्राथमिकता निर्धारण के लिए संयुक्त तंत्रों को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सेवाओं के बीच समन्वित प्रतिक्रियाओं और क्षमता अंतरालों की संरचित पहचान की आवश्यकता को रेखांकित किया, जिससे भविष्य की किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए समग्र संचालनात्मक तैयारी को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने सभी डोमेनों में एकीकरण को आगे बढ़ाकर सेवाओं के बीच समन्वित प्रभाव उत्पन्न करने और एकीकृत संचालनात्मक परिणाम प्राप्त करने के महत्व पर बल दिया। एयर मार्शल दीक्षित ने त्वरित सिद्धांतात्मक विकास और त्रि-सेवा संसाधन समन्वय का समर्थन किया, ताकि एक मजबूत संयुक्त संचालन क्षमता और दीर्घकालिक रणनीतिक तत्परता सुनिश्चित की जा सके।

सम्मेलन के समापन पर एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी वायु कमान ने व्यापक संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से प्राप्त महत्वपूर्ण सीखों और भविष्य के युद्ध संचालन पर उनके दूरगामी प्रभावों का विश्लेषण किया। उन्होंने निर्णायक रणनीतिक प्रभाव उत्पन्न करने में वायु शक्ति की केंद्रीय भूमिका, सतही युद्धाभ्यास को आक्रामक वायु अभियानों के साथ समन्वित करने की अनिवार्यता तथा स्टैंड-ऑफ हथियारों के उपयोग से मिलने वाले रणनीतिक लाभ को रेखांकित किया।

एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने 1971 युग की क्षरण-आधारित (Attrition-Based) युद्ध अवधारणाओं तथा पारंपरिक इफेक्ट्स-बेस्ड ऑपरेशंस मॉडल से आगे बढ़ते हुए अधिक चुस्त, अनुकूलनीय और पूर्णतः एकीकृत संयुक्त युद्ध प्रणाली अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मौजूदा क्षमता अंतरालों की पहचान और उन्हें पाटने, सभी डोमेनों में अभिसरण को मजबूत करने तथा ऑल-डोमेन युद्धक्षेत्र में समन्वित और प्रभाव-आधारित प्रतिक्रियाओं के लिए सुदृढ़ आधार तैयार करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

ऑल डोमेन जॉइंट ऑपरेशंस अभ्यास 2026 एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा, जो आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के संपूर्ण परिदृश्य में प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम, एक वास्तविक रूप से अंतःक्रियाशील और भविष्य-तैयार संयुक्त बल के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह पहल राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु संयुक्तता, संचालनात्मक समन्वय और निरंतर अनुकूलन के सिद्धांतों के प्रति भारतीय रक्षा बलों की अटूट प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करती है।



सीपीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए DAKSH नेतृत्व कार्यक्रम के दूसरे बैच का नई दिल्ली में शुभारंभ

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केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसई) के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए प्रमुख नेतृत्व विकास कार्यक्रम DAKSH (Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony) के दूसरे बैच के उद्घाटन सत्र का आयोजन आज नई दिल्ली के स्कोप कन्वेंशन सेंटर में किया गया। यह कार्यक्रम क्षमता निर्माण आयोग (CBC) और स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (SCOPE) द्वारा संयुक्त रूप से मिशन कर्मयोगी के व्यापक ढांचे के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन समारोह में भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. पी. के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव;  के. मोसेस चालई, सचिव, सार्वजनिक उद्यम विभाग; रचना शाह, सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग;  एस. राधा चौहान, अध्यक्ष, क्षमता निर्माण आयोग; के. पी. महादेवस्वामी, अध्यक्ष, स्कोप;अतुल सोबती, महानिदेशक, स्कोप; तथा अलका मित्तल, सदस्य (प्रशासन), क्षमता निर्माण आयोग शामिल थे।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अतुल सोबती, महानिदेशक, स्कोप ने कहा कि DAKSH कार्यक्रम नेताओं को आत्ममंथन, तैयारी और स्वयं के रूपांतरण में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम नेतृत्व उभरने, रणनीतिक विकास और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के अवसर प्रदान करेगा।

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए अलका मित्तल, सदस्य, क्षमता निर्माण आयोग ने DAKSH के डिजाइन और उद्देश्यों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम 12 माह की एक परिवर्तनकारी नेतृत्व यात्रा के रूप में संरचित है, जिसमें डिजिटल लर्निंग, प्रमुख संस्थानों में कक्षा आधारित प्रशिक्षण, एक्जीक्यूटिव कोचिंग, लाइव एक्शन लर्निंग प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र शामिल हैं। उन्होंने जानकारी दी कि DAKSH के पहले बैच में 73 वरिष्ठ सीपीएसई अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया था, जबकि दूसरे बैच में ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं रक्षा, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, खनन एवं खनिज, विनिर्माण और निर्माण जैसे विविध क्षेत्रों से 72 प्रतिभागी शामिल हैं।

उन्होंने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रमुख उपलब्धियों को भी रेखांकित किया, जिनमें iGOT डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिकारियों का बड़े पैमाने पर ऑनबोर्डिंग, कर्मयोगी सप्ताह जैसे पहलों के माध्यम से आजीवन सीखने की संस्कृति का संस्थानीकरण, कर्मयोगी दक्षता मॉडल का विकास, प्रशिक्षण संस्थानों का प्रत्यायन तथा भारत-केंद्रित केस स्टडीज़ के राष्ट्रीय भंडार अमृत ज्ञान कोष का निर्माण शामिल है। सीपीएसई के लिए नेतृत्व विकास, दक्षता आधारित वृद्धि, प्रतिभा गतिशीलता और प्रौद्योगिकी-सक्षम अधिगम को प्राथमिक सुधार क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया।

मुख्य संबोधन देते हुए डॉ. पी. के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने भारत की विकास यात्रा में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के निर्माण में सीपीएसई ने आधारभूत भूमिका निभाई, जिससे आर्थिक वृद्धि, वित्तीय स्थिरता और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की नींव पड़ी। उन्होंने कहा कि कई दशकों तक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम भारत की विकास रणनीति की रीढ़ रहे।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि समय के साथ वैश्वीकरण, तकनीकी परिवर्तन और आर्थिक सुधारों ने वैश्विक एवं घरेलू आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बनाम निजी क्षेत्र के वर्चस्व पर होने वाली बहस अब एक समन्वित दृष्टिकोण में बदल गई है, जहां प्रतिस्पर्धा, दक्षता और नवाचार केंद्र में हैं। इस बदलते परिदृश्य में सीपीएसई से अपेक्षाएँ भी विकसित हुई हैं और उनसे अधिक चुस्ती के साथ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की सेवा करने की अपेक्षा की जाती है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत मुक्त व्यापार समझौतों और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था में गहराई से एकीकृत हो रहा है, सीपीएसई को न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम अनिश्चितता के समय में आर्थिक विकास में रणनीतिक भूमिका निभाते रहते हैं।

डॉ. मिश्रा ने वर्ष 2021 की सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें सीपीएसई को रणनीतिक और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां निजी उद्यमों की भूमिका बढ़ रही है, वहीं ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना और वित्त जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित, स्थिरता और लचीलेपन के लिए आवश्यक बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम उन बाजारों में संतुलनकारी भूमिका निभाते हैं जहां बाजार पूर्ण नहीं होते और जहां सार्वजनिक हित व राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू जुड़े होते हैं।

प्रौद्योगिकी और नवाचार के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि सीपीएसई को प्रौद्योगिकी उन्मुख और नवाचार प्रेरित बने रहना होगा। उन्होंने भारत के वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का उल्लेख करते हुए यूपीआई, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रौद्योगिकी अपनाने में सुधार और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, डेटा गवर्नेंस और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम नेतृत्व करने की बेहतर स्थिति में हैं, जहां राष्ट्रीय विश्वास और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता आवश्यक है।

नेतृत्व और मानव संसाधन पर जोर देते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि किसी भी संस्था की सफलता अंततः उसके नेतृत्व की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने निरंतर सीखने, अनुकूलन क्षमता और रणनीतिक सोच के महत्व पर बल दिया, विशेषकर तीव्र तकनीकी परिवर्तन के इस दौर में। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे DAKSH कार्यक्रम का उपयोग संगठनात्मक सीमाओं से परे दृष्टिकोण विकसित करने, निर्णय क्षमता मजबूत करने, सहयोगात्मक ढंग से कार्य करने और साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप टीम निर्माण के लिए करें।

इससे पहले के. मोसेस चालई, सचिव, सार्वजनिक उद्यम विभाग ने सीपीएसई के पैमाने और आर्थिक योगदान पर संक्षेप में प्रकाश डाला। उन्होंने जीडीपी में योगदान और केंद्रीय राजकोष में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक और घरेलू परिवर्तनों के बीच इस योगदान को बनाए रखने के लिए भविष्य के लिए तैयार नेतृत्व विकसित करना आवश्यक है, और DAKSH इस दिशा में एक समयोचित पहल है।

कार्यक्रम के अंत में जगदीप गुप्ता, सचिव, क्षमता निर्माण आयोग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और मिशन कर्मयोगी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए आयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।

DAKSH नेतृत्व कार्यक्रम को वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च नेतृत्व भूमिकाओं के लिए तैयार करने तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से परिकल्पित किया गया है।



डॉ. मनसुख मांडविया ने बीएमएस के अखिल भारतीय त्रैवार्षिक सम्मेलन में श्रमिक कल्याण को बताया विकसित भारत की आधारशिला

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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज ओडिशा के पुरी में आयोजित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के अखिल भारतीय त्रैवार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने दोहराया कि श्रमिकों का कल्याण, गरिमा और सुरक्षा सरकार की राष्ट्रीय विकास की परिकल्पना के केंद्र में है।

डॉ. मांडविया ने कहा,

“मुझे श्रम शक्ति और युवा शक्ति के लिए कार्य करने का सौभाग्य मिला है। ये दोनों शक्तियाँ भारत की प्रगति की आधारशिला हैं और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।”

मंत्री ने कहा कि बीएमएस न केवल भारत का सबसे बड़ा ट्रेड यूनियन है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बीएमएस ने श्रमिकों के कल्याण, देश के श्रमबल को न्याय दिलाने और उन्हें राष्ट्रीय विकास व आर्थिक वृद्धि में भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह जोर देते हुए कि आर्थिक विकास के लिए श्रमिक और उद्योग—दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, मंत्री ने कहा कि एक मजबूत और सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए दोनों के बीच सामंजस्य और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसी संतुलन को मजबूत करने, श्रमिकों के लिए कल्याण और सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने तथा उद्योगों के लिए अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को लागू किया है।

उन्होंने कहा,

“मैं बीएमएस को बधाई देता हूँ कि उसने 15 अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ श्रम संहिताओं का स्वागत किया, श्रमिकों में जागरूकता फैलाई और दुष्प्रचार का मुकाबला किया। यह जिम्मेदार और रचनात्मक नेतृत्व को दर्शाता है, जिसमें संगठनात्मक हितों से ऊपर श्रमिकों के हितों को रखा गया है।”

श्रम संहिताओं के सक्षम प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने अनिवार्य नियुक्ति पत्र, पुरुषों और महिलाओं के लिए समान अवसर, वार्षिक स्वास्थ्य जांच तथा खतरनाक उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का उल्लेख किया।

सामाजिक सुरक्षा पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने लगातार कवरेज बढ़ाने और श्रमिकों के लिए संस्थागत समर्थन को मजबूत करने का कार्य किया है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार लगभग 94 करोड़ लोग अब सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत आ चुके हैं और वर्ष 2026 तक 100 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का लक्ष्य है।

उन्होंने आगे कहा कि ईएसआईसी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अब श्रमिकों के बच्चों के लिए मेडिकल शिक्षा में आरक्षण की सुविधा दी जा रही है, जिससे वित्तीय बोझ कम होगा और उच्च शिक्षा की उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

डॉ. मांडविया ने कहा कि बीएमएस ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की वेतन सीमा बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी (फ्लोर वेज) पर निर्णय लेने तथा ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन सभी विषयों पर श्रमिकों के हित में गंभीरता से विचार किया जाएगा और शीघ्र निर्णय लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा,

“देश की प्रगति श्रमिकों के कल्याण से अलग नहीं की जा सकती। जब श्रमिक समृद्ध होते हैं, तब देश समृद्ध होता है।”

‘नया भारत’ के निर्माण में श्रमिकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार श्रमिक कल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाकर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार उन संगठनों का निरंतर समर्थन करेगी जो ईमानदारी से श्रमिकों के कल्याण, सशक्तिकरण और संरक्षण के लिए कार्य करते हैं।

डॉ. मांडविया ने सभी हितधारकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,
“हमें सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने होंगे, हर श्रमिक को आगे बढ़ाना होगा और उन्हें अपनी पूरी क्षमता को साकार करने के लिए सशक्त बनाना होगा।”

इस सम्मेलन ने श्रम सुधारों, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक सशक्तिकरण पर संवाद के लिए एक मंच प्रदान किया, जिसमें देशभर से श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें हिरणमय पंड्या, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीएमएस; रविंद्र हिमते, राष्ट्रीय महामंत्री, बीएमएस; सर्गेई चेर्नोगायेव, अध्यक्ष, एफएनपीआर, रूस; मा. भागैया, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, आरएसएस; तथा युकी ओत्सुजी, वर्कर स्पेशलिस्ट, दक्षिण एशिया एवं कंट्री ऑफिस, आईएलओ, नई दिल्ली शामिल थे।


एनएमडीसी ने बस्तर के 80 युवाओं को किया सम्मानित, 100% प्लेसमेंट के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

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नई दिल्ली/छत्तीसगढ़- देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी एनएमडीसी लिमिटेड ने बस्तर संभाग के 80 युवाओं के पहले बैच का स्वागत और सम्मान किया, जिन्होंने रोज़गारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर 100 प्रतिशत प्लेसमेंट हासिल किया है। यह पहल छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और कौशल विकास, समावेशी विकास एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह कार्यक्रम एनएमडीसी की कौशल विकास पहल के तहत, उसकी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) गतिविधियों के अंतर्गत, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CIPET) के सहयोग से संचालित किया गया। इसका उद्देश्य बस्तर के बेरोज़गार और वंचित आदिवासी युवाओं को उद्योग-उपयोगी कौशल प्रदान कर स्थायी आजीविका से जोड़ना है।

सम्मान समारोह में एनएमडीसी का शीर्ष नेतृत्व रहा उपस्थित

सम्मान एवं संवाद सत्र में एनएमडीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी, निदेशक (तकनीकी) एवं निदेशक (वाणिज्य – अतिरिक्त प्रभार) विनय कुमार, निदेशक (उत्पादन) एवं निदेशक (कार्मिक – अतिरिक्त प्रभार) जॉयदीप दासगुप्ता, महाप्रबंधक (सीएसआर)  पी. श्याम तथा CIPET के प्रिंसिपल डायरेक्टर बी. रवि सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

बस्तर के युवाओं की बदली ज़िंदगी

दंतेवाड़ा, बस्तर, सुकमा, नारायणपुर, कोंडागांव और बीजापुर जैसे जिलों से आए इन युवाओं ने बताया कि सीमित अवसरों और संसाधनों के बीच यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके लिए नई शुरुआत साबित हुआ। यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि अपने घरों से बाहर निकलकर आत्मविश्वास के साथ जीवन शुरू करने का साहस भी लेकर आया।

बस्तर के 12वीं पास युवक सुखराम ने बताया कि बचपन से संघर्षों में पले-बढ़े उनके लिए नौकरी मिलना परिवार की किस्मत बदलने जैसा है। उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं पता था कि मैं कभी अपने गांव से बाहर काम के लिए जा पाऊंगा। आज मैं कमाने जा रहा हूं।”

एनएमडीसी नेतृत्व का संदेश

इस अवसर पर एनएमडीसी के चेयरमैन अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि बस्तर के युवाओं को औपचारिक रोज़गार में कदम रखते देखना यह दिखाता है कि अवसर कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा,
“यह सिर्फ नौकरी की बात नहीं है, यह इस एहसास की बात है कि ये युवा देश की विकास यात्रा का हिस्सा हैं। यही आत्मनिर्भर बस्तर और समावेशी विकसित भारत की नींव है।”

निदेशक विनय कुमार ने छत्तीसगढ़ के वर्षों में हुए परिवर्तन की सराहना करते हुए कहा कि एनएमडीसी इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा रही है और युवाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

निदेशक जॉयदीप दासगुप्ता ने इन नियुक्तियों को युवाओं के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए उन्हें आगे भी सीखते रहने और भविष्य में उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया।

समावेशी पात्रता, पूर्ण सफलता

इस कार्यक्रम में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कक्षा 8वीं रखी गई, ताकि स्कूल छोड़ चुके और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवा भी इससे वंचित न रहें। पहले बैच के सभी 80 प्रायोजित छात्रों का 100% प्लेसमेंट इस पहल की सफलता को दर्शाता है।

एनएमडीसी–CIPET कौशल विकास कार्यक्रम

एनएमडीसी ने अपने CSR कार्यक्रम के तहत CIPET के साथ साझेदारी कर दंतेवाड़ा और बस्तर जिलों के 500 युवाओं को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है। एनएमडीसी द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित यह कार्यक्रम ऑपरेटर स्तर के अल्पकालिक पाठ्यक्रमों से लेकर डिप्लोमा एवं स्नातकोत्तर डिप्लोमा तक उद्योग-उपयोगी प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे स्थानीय कार्यबल सशक्त हो और रोजगार क्षमता बढ़े।

यह पहल बस्तर के युवाओं के लिए न सिर्फ रोज़गार, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर एक सशक्त कदम है।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ वर्ल्ड डिफेंस शो 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे

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नई दिल्ली- रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ 8–9 फरवरी 2026 को सऊदी अरब के किंगडम में आयोजित होने वाले तीसरे वर्ल्ड डिफेंस शो (WDS) 2026 में भाग लेने के लिए एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस वैश्विक रक्षा प्रदर्शनी में 700 से अधिक प्रदर्शकों और लगभग 400 आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों के शामिल होने की संभावना है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में रक्षा उत्पादन विभाग और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

भारत की भागीदारी के तहत रक्षा राज्य मंत्री वर्ल्ड डिफेंस शो में पहली बार भारत पवेलियन का उद्घाटन करेंगे। लगभग 400 वर्ग मीटर में फैले इस पवेलियन में रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की स्वदेशी क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा।

भारत पवेलियन में देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियाँ भाग लेंगी, जिनमें आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL), एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL), म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) शामिल हैं। ये कंपनियाँ टैंक, आर्टिलरी गन सिस्टम, मिसाइलें, गोला-बारूद, रडार सहित अपने उन्नत उत्पादों का प्रदर्शन करेंगी।

WDS 2026 के दौरान, रक्षा राज्य मंत्री और उनके सऊदी अरब समकक्ष के बीच एक द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इसके अलावा, संजय सेठ सऊदी अरब के प्रमुख औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत किया जा सके।

वर्ल्ड डिफेंस शो सऊदी अरब द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनी है। यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मंच है, जहाँ भारत की आत्मनिर्भर रक्षा पहल, उन्नत तकनीकों और विनिर्माण क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारियों को बढ़ावा मिलता है।

भारत–ऑस्ट्रेलिया बिज़नेस केस स्टडीज़ संकलन का शुभारंभ: 100 अरब डॉलर की साझेदारी की ओर मजबूत कदम

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नई दिल्ली- भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी), दिल्ली परिसर में “Pitch Perfect Australia-India: Perfect Conditions for a $100 Billion Partnership” शीर्षक से भारत–ऑस्ट्रेलिया बिज़नेस केस स्टडीज़ संकलन का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर नीति-निर्माता, राजनयिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और शिक्षाविद एकत्र हुए और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के अगले चरण पर विचार-विमर्श किया गया।

यह संकलन भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) और न्यू लैंड ग्लोबल ग्रुप द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया है। इसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक यात्राओं को संकलित किया गया है। प्रकाशन में 30 संगठनों के अनुभव शामिल हैं, जिन्होंने दोनों बाजारों में सफलतापूर्वक प्रवेश किया, विस्तार किया और व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह संकलन नीति, उद्योग और अकादमिक जगत के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा,

“ये केस स्टडीज़ इस बात का प्रमाण हैं कि व्यापार समझौते किस प्रकार वास्तविक अवसरों में बदले हैं और व्यवसायों ने उन्हें अपनी वृद्धि के लिए कैसे उपयोग किया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल भारत–ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) से होने वाले लाभों को और सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन (OAM) ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि अकादमिक, सरकार और उद्योग को एक मंच पर लाने वाली ऐसी पहलें भारत-ऑस्ट्रेलिया के मजबूत रणनीतिक संबंधों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

संयुक्त सचिव पेटल ढिल्लन ने भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंधों में बढ़ती गति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आईआईएफटी ने शोध-आधारित अंतर्दृष्टि विकसित करने और ईसीटीए के बेहतर उपयोग को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आईआईएफटी के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने वास्तविक व्यावसायिक अनुभवों को सीखने के संसाधनों में बदलने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सहयोग शोध और व्यवहार के बीच सेतु बनाने तथा वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका को समर्थन देने के आईआईएफटी के संकल्प को दर्शाते हैं।

न्यू लैंड ग्लोबल ग्रुप, ऑस्ट्रेलिया के संस्थापक एवं सीईओ दीपेन रुघानी ने द्विपक्षीय जुड़ाव को गहरा करने में व्यावसायिक केस स्टडीज़ की भूमिका पर बल दिया। वहीं, कार्यकारी निदेशक नताशा झा भास्कर ने दोनों बाजारों में कार्यरत कंपनियों की सफलता की कहानियां और उनसे मिले सबक प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का समापन सरकार, व्यापार संगठनों और दोनों देशों में कार्यरत कंपनियों के प्रतिनिधियों की सहभागिता वाली पैनल चर्चा तथा नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ।

राजदूत अनिल वाधवा ने इस केस संकलन की सराहना करते हुए इसे भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक संबंधों को और गहरा करने की दिशा में यह संकलन व्यवसायों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए एक व्यावहारिक संसाधन के रूप में कार्य करेगा, जो अवसरों की पहचान, चुनौतियों के समाधान और सफल सीमा-पार सहयोग को उजागर करेगा।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) की स्थापना वर्ष 1963 में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत की गई थी। वर्ष 2002 में इसे डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त हुआ। यह संस्थान शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में क्षमता निर्माण के लिए समर्पित एक प्रमुख संस्था है।

अबूझमाड़ में सुरक्षाबलों-नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 3 नक्सलियों के मारे जाने की खबर

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 बीजापुर। छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर स्थित अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों में शुक्रवार सुबह से सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है। एंटी-नक्सल ऑपरेशन के दौरान अब तक तीन नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है। मौके से एक AK-47 और एक इंसास राइफल बरामद होने की खबर भी सामने आई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र पुलिस के विशेष दस्ता C-60 द्वारा अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्चिंग और एरिया डोमिनेशन ऑपरेशन चलाया जा रहा था। इसी दौरान नक्सलियों की मौजूदगी के पुख्ता संकेत मिलने पर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। दोनों ओर से रुक-रुक कर फायरिंग जारी है।

सूत्रों के मुताबिक, मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला-बारूद के कुछ अन्य सामान भी बरामद किए गए हैं। फिलहाल सुरक्षाबलों की ओर से किसी प्रकार का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि अबूझमाड़ इलाका लंबे समय से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। घने जंगल, पहाड़ी भूभाग और सीमावर्ती स्थिति के चलते यहां ऑपरेशन चलाना सुरक्षाबलों के लिए चुनौतीपूर्ण रहता है। इसी को देखते हुए छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र पुलिस के जवान संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं।

मुठभेड़ के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है और सघन सर्च ऑपरेशन जारी है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके की घेराबंदी कर अन्य नक्सलियों, हथियारों के जखीरे और संभावित ठिकानों की तलाश कर रही हैं।

परीक्षा पे चर्चा: पीएम मोदी बोले- सबकी सलाह सुनो, लेकिन पढ़ाई अपने पैटर्न से ही करो

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 Pariksha Pe Charcha : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान छात्रों को पढ़ाई से जुड़ा एक अहम मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि हर छात्र की अपनी सीखने की शैली और गति होती है, इसलिए पढ़ाई अपने पैटर्न के अनुसार ही करनी चाहिए। सभी की सलाह जरूर सुननी चाहिए, लेकिन अपना तरीका तभी बदलें जब आपको खुद लगे कि उससे लाभ हो रहा है।


कार्यक्रम के पहले अध्याय ‘आपकी शैली, आपकी गति’ के दौरान गुजरात की एक छात्रा ने पीएम मोदी से सवाल किया कि परीक्षा के समय शिक्षक और अभिभावक अलग-अलग तरीकों से पढ़ने की सलाह देते हैं, जिससे छात्र भ्रम में पड़ जाते हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्थिति केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवनभर चलती रहती है।

पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा,
“मैं प्रधानमंत्री हूं, फिर भी लोग मुझे अलग-अलग तरीके से काम करने की सलाह देते रहते हैं। लेकिन हर व्यक्ति का अपना तरीका होता है।”

उन्होंने इसे रोजमर्रा के जीवन से जोड़ते हुए कहा कि जैसे एक ही थाली में बैठकर खाने के बावजूद हर व्यक्ति का खाने का तरीका अलग होता है—कोई दाल से शुरू करता है, कोई सब्जी से और कोई सब कुछ मिलाकर खाता है। जब लोग अपने तरीके से करते हैं, तभी उन्हें संतोष और आनंद मिलता है।

छात्रों को पढ़ाई का मंत्र देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ छात्र सुबह बेहतर पढ़ पाते हैं, तो कुछ रात में। इसलिए अपनी क्षमता और समय को पहचानना जरूरी है।
उन्होंने कहा,
“सलाह जरूर लो, लेकिन उसे तभी अपनाओ जब वह तुम्हारे अनुभव से जुड़ती हो। सिर्फ किसी के कहने पर अपना तरीका मत बदलो।”

प्रधानमंत्री ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि जब यह पहल शुरू हुई थी, तब इसका एक निश्चित प्रारूप था। समय के साथ इसमें बदलाव किए गए और इस बार अलग-अलग राज्यों में जाकर छात्रों से संवाद किया गया।
उन्होंने कहा,
“मैंने भी समय के साथ कुछ बदलाव किए, लेकिन अपना मूल तरीका नहीं छोड़ा।”

प्रधानमंत्री के इस संदेश को छात्रों ने काफी प्रेरणादायक बताया। यह संदेश न सिर्फ परीक्षा की तैयारी, बल्कि जीवन में आत्मविश्वास और संतुलन बनाए रखने की सीख भी देता है।

अंधविश्वास बना जानलेवा, भतीजे ने चाचा की कुल्हाड़ी से हत्या

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 दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है। जादू-टोना के शक में एक भतीजे ने अपनी मां की मौत का बदला लेने की भावना से अपने ही चाचा की टंगिया (कुल्हाड़ी) से बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।


मां की मौत का शक बना हत्या की वजह

घटना 3 फरवरी 2026 की है। मृतक की पहचान कोसा मंडावी (50 वर्ष) निवासी ग्राम पोंदुम-2, गोटखुटापारा के रूप में हुई है। आरोपी भतीजा मुड़ा उर्फ मनकू मंडावी (27) को शक था कि उसकी मां सुकड़ी मंडावी की मौत जादू-टोना के कारण हुई है और इसके पीछे उसके चाचा कोसा मंडावी का हाथ है।

इसी संदेह को लेकर आरोपी और मृतक के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।

टंगिया से ताबड़तोड़ वार कर की हत्या

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बदला लेने की नीयत से हत्या की साजिश रची। 3 फरवरी को वह मौका पाकर अपने चाचा के घर पहुंचा और टंगिया से सिर, कंधे और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ वार कर उनकी मौके पर ही हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी फरार हो गया।

जांच में जुटी पुलिस, जंगल से पकड़ा गया आरोपी

घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। घर के आंगन में मृतक का शव खून से लथपथ मिला। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी ग्राम पोंदुम और जारम के बीच जंगल में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस और डीआरजी की संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को हिरासत में ले लिया।

 जुर्म कबूल, हथियार बरामद

पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से

  • हत्या में प्रयुक्त टंगिया (कुल्हाड़ी)
  • खून से सना हाफ नेकर

जब्त किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

 पुलिस का बयान

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आर.के. बर्मन ने बताया कि यह जघन्य वारदात जादू-टोना के अंधविश्वास के चलते की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है।

Accident: स्कूल जाते वक्त मौत, पुलिस टो-ट्रक की टक्कर से छात्र की जान गई

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 रायपुर : रायपुर के छत्तीसगढ़ क्लब के पास आज शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूल जा रहे स्कूटी सवार छात्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथ मौजूद छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसा सेंट्रल बैंक रोड के एक अंधे मोड़ पर हुआ।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ्तार में आ रहे पुलिस के क्रेन वाहन (टो-ट्रक) ने स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी।

 स्कूल जाते वक्त हादसा

बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे स्कॉलर्स स्कूल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान विपरीत दिशा से आ रहे टो-ट्रक ने ओवरटेक करते हुए स्कूटी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि छात्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छात्रा सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।

 चालक फरार, पुलिस जांच में जुटी

प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि हादसे के बाद टो-ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्रा को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज जारी है।

पुलिस ने बताया कि वाहन और चालक की पहचान की जा रही है और जल्द ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हृदयविदारक हादसे के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। साथ ही स्कूल जाते बच्चों की सुरक्षा और पुलिस वाहनों की तेज रफ्तार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Chhattisgarh : रजिस्ट्री सेवाएं होंगी आसान, राज्य में खुलेंगे 4 नए कार्यालय

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 Chhattisgarh Sub Registrar Office : आम नागरिकों को रजिस्ट्री और पंजीयन सेवाएं सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने चार नए उप पंजीयक कार्यालय खोलने की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। यह फैसला रजिस्ट्रीकरण अधिनियम–1908 के तहत लिया गया है।


 इन क्षेत्रों में खुलेंगे नए कार्यालय

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नए उप पंजीयक कार्यालय निम्न स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे—

  • धमतरी जिला : भखारा
  • बलौदाबाजार-भाटापारा जिला : तहसील मुख्यालय लवन
  • बिलासपुर जिला : सकरी
  • बिलासपुर जिला : राजकिशोर नगर

इन कार्यालयों के शुरू होने से स्थानीय नागरिकों को रजिस्ट्री और पंजीयन कार्यों के लिए जिला मुख्यालयों तक लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।

 समय और धन दोनों की बचत

सरकार का मानना है कि इस पहल से

  • नागरिकों का समय और खर्च बचेगा
  • पंजीयन कार्यालयों में भीड़ कम होगी
  • प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी
  • स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि शासन की सेवाएं नागरिकों तक उनके निकटतम स्तर पर उपलब्ध हों। नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति से आम जनता को पंजीयन से जुड़े कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी।

10 डिजिटल सुविधाओं का लाभ

वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि नागरिक सुविधाओं का विस्तार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पंजीयन विभाग द्वारा पहले ही

  • ऑटो डीड जनरेशन
  • आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन
  • घर बैठे रजिस्ट्री
  • स्वतः नामांतरण
  • कैशलेस भुगतान
  • डिजिलॉकर एकीकरण

सहित 10 डिजिटल नवाचार लागू किए जा चुके हैं। अब इन नई जगहों के नागरिकों को भी इन सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा।

कौवों की रहस्यमयी मौत, H5N1 वायरस की पुष्टि से अलर्ट

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 H5N1 virus scare : तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शहर के अलग-अलग इलाकों में सैकड़ों कौवे मृत पाए गए। लैब जांच में इन पक्षियों में H5N1 (एवियन इन्फ्लूएंजा) वायरस की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।


अचानक हुई इन मौतों ने इलाके में बर्ड फ्लू फैलने की आशंका बढ़ा दी है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और एहतियाती निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

 एडवाइजरी जारी, सख्त निर्देश

स्वास्थ्य अधिकारियों ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि

  • मरे हुए कौवों और पोल्ट्री पक्षियों के शवों को बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत नष्ट किया जाए
  • शवों को या तो जलाया जाए या गहरे गड्ढे में दफनाया जाए
  • आम लोग मरे हुए पक्षियों को छूने या उठाने से बचें
  • किसी भी नए मामले की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को दें

इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल और व्यापक फील्ड सर्विलांस के निर्देश दिए हैं।

H5N1 क्या है?

H5N1, इन्फ्लूएंजा-A वायरस का एक खतरनाक प्रकार है, जिसे बर्ड फ्लू के नाम से जाना जाता है। यह वायरस मुख्य रूप से पक्षियों, खासकर पोल्ट्री को संक्रमित करता है।

हालांकि यह बीमारी आम तौर पर पक्षियों तक सीमित रहती है, लेकिन संक्रमित पक्षियों, उनके मल, लार या दूषित सतहों के सीधे संपर्क में आने से इंसान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

कितना खतरनाक है H5N1?

पक्षियों में यह वायरस तेजी से फैलता है और बड़ी संख्या में मौतों का कारण बन सकता है

  • इंसानों में संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन जब होता है तो गंभीर निमोनिया और सांस की तकलीफ हो सकती है
  • पिछले प्रकोपों में H5N1 की मृत्यु दर सामान्य फ्लू से कहीं अधिक पाई गई है
  • फिलहाल स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की गई है।
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