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बिहान योजना से बदली सिवनी की रूखमणी पाण्डेय की जिंदगी, बनीं ‘लखपति दीदी’ और महिला आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ अंतर्गत लखपति दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड बलौदा अंतर्गत ग्राम सिवनी निवासी रूखमणी पाण्डेय ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। कभी पूर्णतः घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली रूखमणी पाण्डेय आज प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

कोरोना काल एवं लॉकडाउन के दौरान पशुपालन व्यवसाय में हुए आर्थिक नुकसान के बाद परिवार की आय का प्रमुख स्रोत प्रभावित हुआ, जिससे आर्थिक चुनौतियां बढ़ीं। इस कठिन समय में रूखमणी पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

आरबीके दीदी के सहयोग से ग्राम सिवनी में महिलाओं को संगठित कर उन्होंने ‘जय अम्बे महिला स्व सहायता समूह’ का गठन किया। 25 फरवरी 2020 को गठित यह समूह उन्नति महिला ग्राम संगठन सिवनी तथा बिहान महिला क्लस्टर संगठन कुरदा से संबद्ध है। समूह के माध्यम से बैंक लिंकेज के तहत एक लाख रुपये का ऋण तथा अतिरिक्त समूह ऋण प्राप्त कर उन्होंने पारंपरिक पशुपालन व्यवसाय को पुनः प्रारंभ किया। इसके साथ ही आचार, पापड़, मसाला एवं अगरबत्ती निर्माण जैसी विविध आजीविका गतिविधियों को अपनाया, जिससे उनकी आय में सतत वृद्धि हुई।

आज रूखमणी पाण्डेय न केवल अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर रही हैं, बल्कि स्व सहायता समूह की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव की अनेक महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं।

रूखमणी पाण्डेय ने कहा कि ‘लखपति दीदी पहल’ ने उन्हें आत्मविश्वास, पहचान और सम्मान प्रदान किया है। उन्होंने इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी सफलता यह प्रमाणित करती है कि प्रभावी मार्गदर्शन, समूह की सामूहिक शक्ति और सरकारी योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर समाज में सशक्त भूमिका निभा सकती हैं।

ऑनलाइन 24×7 टोकन सुविधा से धान खरीदी हुई सरल : 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा किसानों का भरोसा

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन रही है। योजना के अंतर्गत 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही धान खरीदी तथा धान उपार्जन केंद्रों पर लागू सरल, सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्थाओं ने किसानों का भरोसा और आत्मविश्वास बढ़ाया है।

प्रदेशभर में ऑनलाइन 24×7 टोकन प्रणाली लागू होने से धान विक्रय की प्रक्रिया अधिक सहज और परेशानी-मुक्त हो गई है। किसान अब घर बैठे टोकन प्राप्त कर निर्धारित समय पर उपार्जन केंद्र पहुंच रहे हैं, जिससे भीड़, लंबी कतारों और अनावश्यक प्रतीक्षा की समस्या समाप्त हो गई है।

इसी क्रम में जांजगीर जिले के ग्राम सुकली के किसान भीम गोंड़ ने धान उपार्जन केंद्र पेंड्री में 116 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के कारण पूरी प्रक्रिया आसान हो गई। निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचते ही नमी परीक्षण, तौल और विक्रय की सभी प्रक्रियाएं सहजता और पारदर्शिता के साथ पूर्ण हुईं।

किसान भीम गोंड़ ने बताया कि समय पर भुगतान मिलने से किसानों का शासन की व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि अब किसान अपनी उपज पूरे आत्मसम्मान और निश्चिंतता के साथ बेच पा रहे हैं, जो किसान-हितैषी सुशासन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि शासन की पारदर्शी व्यवस्था और आधुनिक तकनीक के उपयोग से खेती अब केवल आजीविका का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह सम्मानजनक आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन रही है।

प्रदेश में धान खरीदी कार्य प्रशासनिक निगरानी और डिजिटल व्यवस्थाओं के साथ निरंतर संचालित किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक पात्र किसान को समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल रहा है और राज्य में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।


सियादेवी जलाशय बनेगा इको-टूरिज्म केन्द्र : एडवेंचर एवं राफ्टिंग सेंटर का हुआ शुभारंभ

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रायपुर। मनोरम प्राकृतिक वादियों के बीच स्थित सियादेवी जलाशय को इको-टूरिज्म केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा। सियादेवी जलाशय का नैसर्गिक सौंदर्य, शांत वातावरण और प्राकृतिक संरचना इसे पर्यटन की दृष्टि से मनोरम स्थल है। गुरूर विकासखंड के ग्राम नारागांव स्थित सियादेवी जलाशय में नवस्थापित एडवेंचर एवं राफ्टिंग सेंटर का शुभारंभ आज कलेक्टर दिव्या मिश्रा एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में हुआ। 

कलेक्टर मिश्रा ने फीता काटकर एडवेंचर एवं राफ्टिंग सेंटर का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह केन्द्र न केवल जिले के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण बनेगा, बल्कि इससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।  

सियादेवी जलाशय क्षेत्र का विकास इको-टूरिज्म की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कलेक्टर ने ग्रामीणों से इस पर्यटन स्थल की स्वच्छता, सुरक्षा एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही, क्षेत्रीय विकास एवं नहर मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव प्रेषित किए जाने की बात कही। 

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी ने कहा कि जिला प्रशासन एवं स्थानीय समुदाय के सहयोग से प्रारंभ किया गया यह एडवेंचर एवं राफ्टिंग सेंटर इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में एक अभिनव पहल है। अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक एवं अजय किशोर लकरा ने इस पहल को जिले के पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। जनपद पंचायत गुरूर की अध्यक्ष सुनीता संजय साहू सियादेवी जलाशय क्षेत्र के समग्र विकास का आग्रह किया। 

इस अवसर पर सभी ने बैम्बू राफ्टिंग कर जलाशय के प्राकृतिक सौंदर्य का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं पर्यटक उपस्थित थेे।

पूवर्ती के ग्रामीणों की आजीविका को मिली नई उड़ान : नियद नेल्लानार योजना से बदली तस्वीर

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप सुकमा जिला प्रशासन द्वारा सुदूर एवं संवेदनशील क्षेत्रों में ग्रामीणों को आजीविकास से जोड़ने गांवों के समग्र विकास के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। कोंटा विकासखंड अंतर्गत नियद नेल्लानार योजना के तहत ग्राम पूवर्ती में ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु एक महत्वपूर्ण पहल की गई।

पशुधन विकास विभाग द्वारा पूवर्ती के ग्रामीण परिवारों को आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से 50 यूनिट उन्नत नस्ल के मुर्गी चूजों का निःशुल्क वितरण किया गया। यह पहल ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा उनकी आय के स्थायी स्रोत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि मुर्गी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है, जिससे ग्रामीण परिवार अल्प समय में नियमित आय अर्जित कर सकते हैं। पशुपालन आधारित आजीविका को प्रोत्साहन देकर ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

पूवर्ती के ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली शुरुआत बताया। कुकुट पालन के लिए ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से दिए जा रहे प्रोत्साहन से गांवों में सकारात्मक माहौल बना है। जिला प्रशासन सुकमा का कहना है कि ग्रामीणों को रोजगार व्यवसाय से जोड़ने के लिए शासन की अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं से उन्हें लाभान्वित किए जाने का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। 

बारनवापारा अभयारण्य में मिला दुर्लभ ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर, छत्तीसगढ़ में दूसरा और बारनवापारा अभयारण्य से पहला रिकॉर्ड दर्ज

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रायपुर। जैव विविधता से भरपूर बार नावापारा अभयारण्य ने नया रिकार्ड दर्ज किया है। अभयारण्य में पहली बार दुर्लभ ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर का अवलोकन दर्ज किया गया है। 29 दिसंबर 2025 की सुबह बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में बर्डर डॉ. दिलीप वर्मा द्वारा ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर का दुर्लभ और महत्वपूर्ण अवलोकन दर्ज किया गया। 

यह इस प्रजाति का बारनवापारा से पहला प्रमाणित रिकॉर्ड है, जबकि पूरे छत्तीसगढ़ में यह दूसरा पुष्ट अवलोकन माना जा रहा है। डॉ. दिलीप वर्मा द्वारा किए गए इस अवलोकन को फील्ड फोटोग्राफिक साक्ष्यों के साथ विधिवत दस्तावेजीकृत किया गया है, जिससे इसकी वैज्ञानिक पुष्टि संभव हो सकी है। यह रिकॉर्ड भविष्य में पक्षी-विविधता के अध्ययन, संरक्षण योजना निर्माण तथा अभयारण्य प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा।

उल्लेखनीय है कि ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर सामान्यतः तटीय एवं मैंग्रोव क्षेत्रों से जुड़ी एक दुर्लभ पक्षी प्रजाति मानी जाती है। आंतरिक भू-भाग में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य जैसे क्षेत्र में इसकी उपस्थिति यहाँ की पारिस्थितिक विविधता, जल-आधारित आवासों की उपलब्धता और अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों को दर्शाती है। इससे पूर्व वर्ष 2024 में इस प्रजाति को कांगेर वैली राष्ट्रीय उद्यान में क्रोकोडाइल सर्वे के दौरान दर्ज किया गया था जिसे छत्तीसगढ़ से पहला पुष्ट रिकॉर्ड माना गया था।

छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा बैठक संपन्न

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रायपुर। राज्य सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को परस्पर समन्वय के साथ कार्य करते हुए सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के दिए निर्देश। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहा है कि सुनिश्चित करे कि 108 एम्बुलेंस समय पर दुर्घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिाकरियों को इसकी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति के समुचित उपचार हेतु ट्रामा सेंटरों को सुदृढ़ किया जाए। सड़क सुरक्षा एवं स्वप्रेरणा से सुगम यातायात प्रबंधन कार्य हेतु अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

मुख्य सचिव ने सभी जिलों के कलेक्टरों केा सड़क दुर्घटनाओं को रोकने तथा सड़क सुरक्षा की लगातार मानिटरिंग करने और जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक करने के निर्देश दिए है। समीक्षा बैठक के प्रारंभ में सचिव परिवहन एस. प्रकाश के प्रारंभिक विभागीय गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। संजय शर्मा अध्यक्ष अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) ने संबंधित विभागों द्वारा संपादित कार्यों तथा अद्यतन स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने चिन्हाकित 152 ब्लैक स्पॉट्स में से 102 में सुधार कार्य पूर्ण होने और शेष 50 में सुधारात्मक उपाय शीघ्र किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। यातायात के नियमों के उल्लंघनकर्ताओं के विरूद्ध पुलिस विभाग द्वारा 8 लाख 15 हजार 954 प्रकरणों पर कार्यवाही 33 करोड 22 लाख 39 हजार 300 रूपए तथा परिवहन विभाग द्वारा राशि 38.52 करोड़ शमन शुल्क वसूल किये गए। 

वर्ष 2025 में विभिन्न जिलों में 150 सड़क सुरक्षा समितियां समीक्षा बैठक संपन्न हुई है। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार हेतु 8 जिलों अस्पताल में सीटीस्कैन की जांच, समस्त जिला अस्पतालों 24X7 एक्सरे, लेबोट्री जांच, इमरजेंसी संबंधित आवश्यक दवाईयां, इन्जेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। समस्त जिलों के विशेषज्ञ, चिकित्सा, स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस वर्ष शाला सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण में सड़क सुरक्षा से संबंधित यातायात जागरूकता के लगभग 4 लाख 47 हजार 200 प्रशिक्षण के माध्यम से तथा 7लाख 19 हजार यूट्यूब के माध्यम से शिक्षक तथा विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। समग्र शिक्षा द्वारा मुख्यमंत्री शाला सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण में 1200 स्त्रोत व्यक्ति, 46 हजार शिक्षक एवं 4 लाख छात्र-छात्राओं तथा राज्य साक्षरता मिशन द्वारा संपन्न वाद-विवाद प्रतियोगिता में सड़क सुरक्षा से 1 लाख 38 हजारशिक्षकगण/विद्यार्थी/समुदाय लाभान्वित हुए। 

यातायात जागरूकता के 15 हजार 319 कार्यक्रम, शैक्षणिक संस्थानों में संपन्न हुए। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में 3 लाख 72 हजार 406 एलईडी स्ट्रीट लाईट लगाये गये, 1 लाख 02 हजार 410 अतिरिक्त लाईट्स की स्वीकृति प्रदान की गई। प्रदेश में करीब में 5388 अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। सड़क दुर्घटनाओं के प्रभावितों के धनरहित उपचार के लिये निर्दिष्ट चिकित्सालयों का आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण, घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्तियों, गुड सेमेरिटन को यथाशीघ्र सम्मान राशि प्रदाय करने के निर्देश दिये गये। राज्य में सर्वाधिक सडक दुर्घटनाओं एवं इससे होने वाली मृत्यु एवं घायलों के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा, जगदलपुर (बस्तर) जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों की समीक्षा कर कार्ययोजना तैयार प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिये गये। 

मुख्य सचिव द्वारा जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में हिट एण्ड रन प्रकरणों के प्रभावितों को राहत के लिये गठित जिला दावा निपटान समिति को प्रकरणों को निर्धारित समय-सीमा में निराकरण तथा जी.आई. सी के अधिकारियों से संपर्क स्थापित कर दावा निपटान की प्रक्रिया में तेजी लाने, मालवाहक वाहनों में यात्री परिवहन को रोकने अन्य वैकल्पिक प्रबंध, बिना हेलमेट/सीट बेल्ट, शराब सेवन कर वाहन चलान के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही की जाए।

स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने अवगत कराया कि शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक के पाठ्यक्रमों मे सड़क सुरक्षा विषयक पाठों के परिमार्जन का कार्य पूर्ण हो चुका है, जिसे आगामी शिक्षा सत्र से लागू करने सहित प्रत्येक शैक्षणिक संस्थानों में रोड़ क्लब गठित कर नियमित गतिविधियों से सड़क सुरक्षा का वातावरण तैयार किया जायेगा। श्री एस. प्रकाश सचिव परिवहन ने व्हीकल ट्रेकिंग प्लेटफार्म कमाण्ड एवं कंट्रोल सेंटर, आटोमैटेड टेस्टिंग स्टेशन ड्रायविंग ट्रेनिंग एण्ड रिसर्च संस्थान, क्षेत्रीय ड्रायविंग प्रशिक्षण केन्द्र, पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा परिवहन सुविधा केन्द्र पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा प्रदूषण जांच केन्द्र, बस संगवारी ऐप, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट, ई-ट्रैक, इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग संहित अन्य सड़क सुरक्षा प्रयासों के संबंध में जानकारी दी गई। इसी क्रम में अवगत कराया गया कि प्रदेश में दोपहर 03 बजे से लेकर रात्रि 09 बजे के मध्य शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक दुर्घटनाएं हो रही है। इन दुर्घटनाओं में सर्वाधिक दोपहिया वाहन चालक/सवारों की मृत्यु की प्रमुख वजह बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाना है। सड़क सुरक्षा माह का आयोजन बेहतर किया जाए। शहरों के निकास पर प्रभावी प्रवर्तन हो ताकि दुर्घटनाओं में कमी आ सकें। हेलमेट एवं सीटबेल्ट लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। 

ब्लैक स्पॉट्स में जांच समिति द्वारा दिये गये सुझाव अनुरूप समय सीमा पर आवश्यक सुधार का कार्य किया जाए। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि ब्लैक स्पॉट्स में सुधारात्मक उपाय उपरांत दुर्घटनाओं में कितनी कमी आई, इसका विश्लेषण होना चाहिए। ब्लैक स्पॉट्स तय होने के पश्चात् सुधार उपाय करने से बेहतर होगा कि, पहले से रोड़ डिजाईन सही हो, यह सुनिश्चित किया जावे। एनएचएआई एवं एनएच को समय पर स्वप्रेरणा से तत्परता के साथ कार्य संपादन करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में बसवराजू, सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, डॉ. कमलप्रीत सिंह सचिव लोक निर्माण विभाग, प्रदीप गुप्ता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यातायात, नेहा चंपावत सचिव गृह विभाग सहित स्वास्थ्य सेवाएं, लोक निर्माण विभाग, परिवहन, जनसंपर्क, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, समस्त संभाग आयुक्त, तथा पुलिस महानिरीक्षक रेंज, सर्वाधिक सड़क दुर्घटना के जिला कलेक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षकगण सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सड़क सुरक्षा परिदृश्य संबंधी वर्चुअल समीक्षा बैठक मंत्रालय में संपन्न हुई।




एक चैन माउंटेन व दो ट्रैक्टर जब्त : रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामले में कार्रवाई

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रायपुर। जांजगीर-चांपा जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण हेतु गठित खनिज टास्क फोर्स द्वारा आज औचक निरीक्षण के दौरान 01 चैन माउंटेन एवं 02 ट्रैक्टर जब्त किया गया। यह कार्रवाई रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामले में की गई है। 

तहसील बम्हनीडीह अंतर्गत ग्राम बिर्रा में रेत का अवैध परिवहन करते 02 ट्रैक्टर को जब्त कर थाने के सुपुर्द किया गया। वहीं तहसील जांजगीर के केवा-नवापारा क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन कर रहे 01 चैन माउंटेन को जब्त किया गया। इस मामले में संलिप्त व्यक्तियों एवं वाहनों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 से 23 (ख) के अंतर्गत कार्रवाई की गई है। जिला प्रशासन का कहना है कि खनिजों के अवैध खनन एवं परिवहन के मामले में कार्रवाई का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। 

सहायक शिक्षक सीधी भर्ती 2023 : न्यायालयीन आदेशों के पूर्ण परिपालन के पश्चात प्रक्रिया विधिवत समाप्त

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सहायक शिक्षक पदों पर सीधी भर्ती 2023 के संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया माननीय सर्वाेच्च न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के आदेशों के अनुरूप पूर्ण पारदर्शिता एवं विधिसम्मत ढंग से संपन्न की गई है।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सहायक शिक्षक के कुल 6285 पदों पर सीधी भर्ती हेतु दिनांक 04 मई 2023 को विज्ञापन जारी किया गया था। व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षा का परिणाम 01 जुलाई 2023 को घोषित किया गया, जिसकी वैधता अवधि एक वर्ष निर्धारित थी। विज्ञापन एवं परीक्षा परिणाम जारी होने के समय बी.एड. अर्हताधारी अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक पद से पृथक रखने संबंधी कोई न्यायालयीन निर्देश प्रभावी नहीं था।

सीधी भर्ती 2023 के अंतर्गत सहायक शिक्षक पद हेतु चयन प्रक्रिया के प्रथम चार चरणों में कटऑफ रैंक में सम्मिलित अभ्यर्थियों की सूचियां विभागीय वेबसाइट पर क्रमशः 08 सितंबर 2023, 21 सितंबर 2023, 30 जनवरी 2024 तथा 04 मार्च 2024 को जारी की गईं। इन चार चरणों में कुल 5301 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की गई, जिनमें 2621 अभ्यर्थी बी.एड. अर्हताधारी थे।

माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ में दायर याचिका क्रमांक 5788/2023 में पारित आदेश 02 अप्रैल 2024 के माध्यम से बी.एड. अर्हताधारी अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक पद हेतु अपात्र घोषित किया गया। उक्त आदेश के पश्चात विभाग द्वारा आगामी चरणों की भर्ती प्रक्रिया स्थगित कर दी गई तथा सीधी भर्ती 2023 के परीक्षा परिणामों की मूल वैधता अवधि 01 जुलाई 2024 को समाप्त हो गई।

माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आदेश क्रमांक एफ 2-13/2025/20-तीन दिनांक 24 फरवरी 2025 जारी कर सहायक शिक्षक पद के 2621 पदों पर जारी चयन सूची की वैधता अवधि 01 जुलाई 2025 तक बढ़ाई गई।

उक्त आदेश के अनुपालन में विभाग द्वारा मार्च-अप्रैल 2025 के दौरान भर्ती प्रक्रिया का पांचवां चरण संपन्न किया गया। इस चरण में सेवा से हटाए गए 2621 बी.एड. अर्हताधारी अभ्यर्थियों के स्थान पर 2615 डी.एड. अर्हताधारी अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर सम्मिलित किया गया तथा सभी प्रमुख वर्गों में कटऑफ रैंक को पर्याप्त रूप से नीचे तक लाया गया।

पांचवें चरण में सम्मिलित 2615 अभ्यर्थियों में से 1316 अभ्यर्थी दस्तावेज सत्यापन में अनुपस्थित रहे अथवा अपात्र पाए गए। शेष 1299 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं। इस प्रकार विभाग द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पूर्ण पालन कर लिया गया है।

यह उल्लेखनीय है कि सीधी भर्ती 2023 के परीक्षा परिणामों की विस्तारित वैधता अवधि 01 जुलाई 2025 को समाप्त हो चुकी है। सहायक शिक्षक पद के छठवें चरण की सूची जारी करने की मांग करने वाले आंदोलनकर्ता अभ्यर्थी मेरिट सूची में निचले क्रम पर होने के कारण नियुक्ति हेतु पात्र नहीं पाए गए हैं। सभी प्रमुख श्रेणियों में कटऑफ रैंक पहले ही काफी नीचे तक जा चुकी है।

यह भी उल्लेखनीय है कि इसी भर्ती प्रक्रिया में शिक्षक एवं व्याख्याता पदों से संबंधित याचिकाओं को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त किया जा चुका है। सहायक शिक्षक पद के आंदोलनकर्ता अभ्यर्थियों की मांग स्वीकार किए जाने की स्थिति में शिक्षक एवं व्याख्याता पदों पर शेष रिक्तियों की भर्ती प्रारंभ करने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

सीधी भर्ती 2023 का विज्ञापन जारी हुए दो वर्ष से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है। इस अवधि में अनेक नवीन पात्रताधारी अभ्यर्थी आगामी शिक्षक भर्ती परीक्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन सभी तथ्यों, न्यायालयीन आदेशों एवं प्रशासनिक परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सीधी भर्ती 2023 की प्रक्रिया को समाप्त किया जाना पूर्णतः न्यायोचित, विधिसम्मत एवं प्रशासनिक रूप से आवश्यक है।


विशेष लेख : केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई जामगांव एम : ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को नया बल

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रायपुर। केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई (CPU) ग्रामीण रोजगार में वनोपज और औषधीय पौधों के संग्रह, प्रसंस्करण और मूल्य-वर्धन (value addition) के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ग्रामीणों, खासकर महिलाओं, के लिए आय और रोजगार के नए अवसर पैदा करती है। दुर्ग जिला के पाटन विकासखंड के जामगांव एम में स्थापित केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई ग्रामीण रोजगार, वनोपज प्रसंस्करण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 

छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड’ के नाम से बाजार में उपलब्ध

यह इकाई लगभग 111 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई है, जहां छत्तीसगढ़ शासन और राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित के माध्यम से वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों से वनोपज और औषधीय पौधों का क्रय, संग्रहण और प्रसंस्करण किया जा रहा है। यहां तैयार किए जा रहे हर्बल उत्पाद ‘छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड’ के नाम से बाजार में उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है।

प्रसंस्करण इकाई से मिल रहा स्थानीय लोगों को रोजगार

प्रसंस्करण इकाई क्रमांक- 01 में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं। यहां आंवला, बेल और जामुन से जूस, कैंडी, लच्छा, मुरब्बा, शरबत, पल्प और आरटीएस पेय जैसे शुद्ध हर्बल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों का विक्रय एनडब्ल्यूएफपी मार्ट और संजीवनी स्टोर के माध्यम से किया जाता है। इस इकाई ने मात्र एक वर्ष में लगभग 44 लाख रुपये मूल्य के उत्पादों का निर्माण और विक्रय कर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने में अहम योगदान दिया है।

20 हजार मीट्रिक टन क्षमता का केंद्रीय वेयरहाउस

इकाई क्रमांक- 02 में चार बड़े गोदाम बनाए गए हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 20,000 मीट्रिक टन है। यहां राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त वनोपज का सुरक्षित भंडारण किया जाता है। वर्तमान में कोदो, कुटकी, रागी, हर्रा कचरिया, चिरायता, कालमेघ, पलास फूल और साल बीज सहित विभिन्न वनोपज का संग्रह किया गया है। इन उत्पादों का विक्रय संघ मुख्यालय रायपुर द्वारा निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। इन दोनों इकाइयों के संचालन से अब तक 5,200 से अधिक मानव दिवस का रोजगार सृजित हो चुका है।

पीपीपी मॉडल पर हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट यूनिट की स्थापना

जामगांव एम में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट की स्थापना की गई है। यह यूनिट छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ और स्फेयर बायोटेक कंपनी के संयुक्त प्रयास से बनी है, जिसका लोकार्पण वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा किया गया था। लगभग 6 एकड़ क्षेत्र में बनी इस यूनिट में गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मुसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा और शतावरी जैसे औषधीय पौधों से अर्क निकाला जा रहा है। इन अर्कों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं और वेलनेस उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।

ग्रामीणों और संग्राहकों को स्थायी लाभ

हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट के माध्यम से ग्रामीण संग्राहकों से वनोपज और औषधीय पौधों का पूर्ण क्रय सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे उन्हें उचित मूल्य और नियमित आय मिल रही है। इससे वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है और नए रोजगार अवसर भी सृजित हो रहे हैं। जामगांव एम की केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई, वेयरहाउस और हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट वनोपज की मूल्यवृद्धि के साथ-साथ ग्रामीणों और संग्राहकों के लिए आजीविका के मजबूत साधन बन रहे हैं।

भव्य भोरमदेव कॉरिडोर का भूमिपूजन 01 जनवरी को : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत कॉरिडोर का करेंगे भूमिपूजन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत कबीरधाम जिले के भोरमदेव कॉरिडोर का 01 जनवरी को भूमिपूजन करेंगे। इस कॉरिडोर के लिए केन्द्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रूपए की स्वीकृति मिली है। इसके अंतर्गत ऐतिहासिक और धार्मिक केंद्र भोरमदेव मंदिर परिसर एवं आसपास के स्थलों के समग्र विकास किया जाएगा। 

भोरमदेव मंदिर परिसर में आयोजित किए जा रहे भूमिपूजन समारोह में उप मुख्यमंत्री अरूण साव और विजय शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, लोकसभा संसद संतोष पाण्डेय विधायक भावना बोहरा, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा सहित अनेक पूर्व विधायक, आयोग निगम मंडल के अध्यक्ष और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप तैयार की गई यह परियोजना धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव और पर्यटन विकास का त्रिवेणी संगम बनेगी। इसके पूरा होने से भोरमदेव क्षेत्र विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा, वहीं क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

भोरमदेव कॉरिडोर में मुख्य मंदिर से लेकर मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ और सरोदा जलाशय तक फैले ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को आपस में जोड़ते हुए उनका संरक्षण और विकास किया जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन, पुरातत्व विभाग एवं कबीरधाम जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार की है। 

भोरमदेव मंदिर परिसर का भव्य विकास के अंतर्गत मुख्य मंदिर में छह आकर्षक प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे, जिनमें नागद्वार प्रमुख होगा। परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक विशाल संग्रहालय का निर्माण, पिलर हॉल, गार्डन, चिल्ड्रन पार्क, प्रसाद मंडप, अनुष्ठान भवन, यज्ञ स्थल, और सीढ़ियों का निर्माण किया जाएगा। 

मंदिर परिसर के तालाब का सौंदर्यीकरण करने के साथ-साथ यहां म्यूजिकल फाउंटेन भी बनाया जाएगा। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए ठहरने हेतु डोम, छायायुक्त मार्ग, स्टेज और भंडारा भवन का निर्माण प्रस्तावित है। पूरे परिसर और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों को शामिल करते हुए प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, पेयजल, बिजली, ड्रेनेज सिस्टम, वृक्षारोपण और सड़क उन्नयन आदि के कार्य होंगे।

औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में संशोधन : छत्तीसगढ़ को और अधिक निवेश-अनुकूल एवं प्रतिस्पर्धी बनाने की बड़ी पहल

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन संशोधनों के माध्यम से नीति को अन्य राज्यों की तुलना में और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक, स्पष्ट एवं निवेश-अनुकूल बनाया गया है। इससे राज्य में औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के साथ-साथ रोजगार के नए अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावनाएँ सुदृढ़ हुई हैं।

मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णयों का मुख्य उद्देश्य राज्य के मूल निवासियों के लिए स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण रोजगार का सृजन सुनिश्चित करना है। इसी दृष्टि से ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा रोजगार सृजन अनुदान से संबंधित नए प्रावधान जोड़े गए हैं। अब 50 से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले विशेष सेक्टर के उद्यम — जैसे फार्मा, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी आदि के एमएसएमई इकाइयों को भी छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को दिए जाने वाले वेतन पर अनुदान प्राप्त होगा।

सेवा क्षेत्र के दायरे का विस्तार करते हुए, मंत्रिमंडल ने कंप्यूटर-आधारित टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-कॉमर्स एवं ऐप-आधारित एग्रीगेटर, तथा NABL मान्यता प्राप्त डायग्नोस्टिक लैब को भी नीति के अंतर्गत सम्मिलित किया है। इन संस्थाओं को अब औद्योगिक विकास नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन एवं अनुदान का लाभ मिलेगा।

पर्यटन एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास को गति देने के उद्देश्य से रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में पाँच सितारा होटलों तथा अन्य जिलों में तीन सितारा होटलों की स्थापना के लिए प्रोत्साहनात्मक संशोधन किए गए हैं। इसी प्रकार राज्य में बड़े निजी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता संवर्धन के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि NIRF Ranking में शीर्ष 100 में शामिल शिक्षण संस्थानों द्वारा राज्य में परिसर स्थापित किए जाने पर उन्हें नीति के अंतर्गत विशेष अनुदान प्रदान किया जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के युवाओं को विश्व-स्तरीय शिक्षा एवं बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत ये संशोधन छत्तीसगढ़ को उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन निर्णयों से राज्य में निवेश बढ़ने, व्यापक रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की गति को और अधिक तेज एवं संतुलित बनाने में सहायता मिलेगी।

स्वदेश दर्शन योजना 2.0 : भोरमदेव कॉरिडोर- हजार वर्ष पुरानी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का नया अध्याय

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कवर्धा। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत कबीरधाम जिले का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर स्थल भोरमदेव मंदिर परिसर विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। यह पहल केवल पर्यटन ढांचे के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि परंपरा और आधुनिकता के संतुलित संगम का सशक्त उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा 146 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के अंतर्गत भोरमदेव मंदिर परिसर से मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ और सरोदा जलाशय तक एक सुव्यवस्थित पर्यटन कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। यह कॉरिडोर न केवल प्रमुख धार्मिक और पुरातात्विक स्थलों को आपस में जोड़ेगा, बल्कि भोरमदेव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान भी दिलाएगा।

सहस्राब्दियों से श्रद्धा का केंद्र रहा भोरमदेव मंदिर पहली बार एक संगठित और समग्र विकास योजना के तहत संवारा जा रहा है। परियोजना में मंदिर परिसर का विस्तार, छह भव्य प्रवेश द्वार, परिधि दीवारों का सुदृढ़ीकरण, पार्कों का विकास, नागद्वार तक रैंप और सीढ़ियों की सुविधा, प्रसाद मंडप, अनुष्ठान भवन, यज्ञ स्थल तथा श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक विश्राम गृह शामिल हैं। साथ ही तालाब का सौंदर्यीकरण, म्यूजिकल फाउंटेन, कैचमेंट एरिया का संरक्षण और एक विशाल संग्रहालय परिसर को विश्वस्तरीय स्वरूप प्रदान करेंगे। मड़वा महल और छेरकी महल जैसे प्राचीन स्मारकों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। यहां प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, पेयजल व्यवस्था, विद्युत एवं प्रकाश सुविधाएं, वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण के कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिरों और स्मारकों को जोड़ने वाली सड़कों का उन्नयन, तालाबों का पुनर्निर्माण और जलाशयों का विकास पूरे क्षेत्र की सुंदरता को और निखारेगा।

यह योजना केवल संरचनात्मक विकास तक सीमित न होकर सामाजिक और आर्थिक बदलाव की आधारशिला भी बनेगी। इससे स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, पर्यटन से जुड़े युवाओं और ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए शेड, पेयजल और स्वच्छता की आधुनिक सुविधाएं उनकी यात्रा को अधिक सुगम और सुखद बनाएंगी। हरियाली, आकर्षक लैंडस्केपिंग और सुव्यवस्थित पैदल मार्ग वातावरण को शांत, पवित्र और दिव्य स्वरूप प्रदान करेंगे। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत यह परियोजना छत्तीसगढ़ के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रही है, जहां सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ आधुनिक पर्यटन आवश्यकताओं का संतुलित समन्वय किया गया है। परियोजना के पूर्ण होने पर भोरमदेव केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव, आस्था और शांति का विश्वस्तरीय केंद्र बनकर स्थापित होगा।

महासमुंद : केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का छत्तीसगढ़ दौरा कार्यक्रम

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महासमुंद। भारत के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत 01 जनवरी को छत्तीसगढ़ प्रवास पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे प्रातः 09:30 बजे स्वामी विवेकानंद विमानतल, रायपुर पहुंचेंगे। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री शेखावत 09:55 बजे रायपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान करेंगे तथा 10:05 बजे सिरपुर हेलीपैड, महासमुंद पहुंचेंगे।

सिरपुर आगमन के पश्चात केंद्रीय मंत्री शेखावत सड़क मार्ग से सर्किट हाउस, सिरपुर पहुंचेंगे, जहां वे स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके पश्चात सर्किट हाउस में दोपहर भोज के लिए समय आरक्षित रहेगा। दोपहर 01:00 बजे केंद्रीय मंत्री शेखावत सर्किट हाउस, सिरपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान करेंगे तथा 01:30 बजे भोरमदेव मंदिर के हेलीपैड, कबीरधाम पहुंचेंगे।

मंत्रिपरिषद का निर्णय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिए गएअनेक महत्वपूर्ण निर्णय -

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -


मंत्रिपरिषद की बैठक में तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से तेंदूपत्ता खरीदने के लिए वर्ष 2026 हेतु ऋण लेने के लिए राज्य शासन की गारंटी देने की अनुमति दी गई।

मंत्रिपरिषद ने कोदो, कुटकी और रागी की खरीद, प्रसंस्करण और बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को कार्यशील पूंजी प्रदाय किये जाने की अनुमति दी गई।

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के क्रय, भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए एक बार के लिए 30 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने का निर्णय लिया है।

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम द्वारा राज्य शासन की प्रत्याभूति (गारंटी) पर लिए गए ऋणों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके अंतर्गत राज्य शासन द्वारा 55.69 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कर पांच राष्ट्रीय निगमों से लिए गए ऋणों की पूर्ण राशि वापस करने का अनुमोदन किया गया। ये राष्ट्रीय निगम हैं- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम, पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम और दिव्यांग वित्त एवं विकास निगम।

वर्तमान में इन ऋणों पर राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 2.40 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान किया जा रहा है। ऋण की पूरी अदायगी होने पर यह ब्याज व्यय पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय निगमों से एनओसी (अदेय प्रमाण पत्र) प्राप्त होने पर शासन की ओर से दी गई 229.91 करोड़ रुपये की लंबित गारंटी देनदारी भी समाप्त हो जाएगी। इस निर्णय से राज्य शासन पर वित्तीय बोझ कम होगा और भविष्य में होने वाले अनावश्यक व्यय से बचत सुनिश्चित होगी।

मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया है कि - उसना मिलिंग पर प्रोत्साहन राशि 20 रू. प्रति क्विंटल से बढ़ाकर की गई 40 रू. प्रति क्विंटल सभी मिलरों के लिए प्रोत्साहन राशि की पात्रता हेतु अब न्यूनतम 03 माह की जगह न्यूनतम 02 माह की मिलिंग करनी होगी

मंत्रिपरिषद ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन का निर्णय लिया। इससे नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रचार-प्रसार, विशेषज्ञों की नियुक्ति और सेवा गतिविधि प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में विसंगतियां दूर होंगी। इन संशोधनों से राज्य में निवेश की गुणवत्ता बढ़ेगी, स्थायी रोजगार सृजन होगा और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

मंत्रिपरिषद ने राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में 20 जनवरी से 5 फरवरी तक आयोजित 9वें ऑटो एक्सपो के दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह छूट एक्सपो में वाहन बिक्री के बाद पंजीकरण के समय लागू होगी, जिससे मोटरयान कर में एकमुश्त 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं को इसका लाभ मिलेगा, इस संबंध में निर्देशित किया गया है।

मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदेश में कस्टम मिलिंग के लिए धान उपार्जन एवं परिवहन से संबंधित गतिविधियों के लिए राइस मिलर्स द्वारा दी जाने वाली बैंक गारंटी पर देय स्टाम्प शुल्क को 0.25 से घटाकर 0.05 प्रतिशत करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। 

मंत्रिपरिषद द्वारा पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़ नवा रायपुर अटल नगर में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का एक नवीन पद वेतन मेट्रिक्स लेवल-14 एक वर्ष की अवधि के लिए स्थायी रूप से निर्मित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

मंत्रिपरिषद द्वारा रायपुर महानगरीय पुलिस जिला में पुलिस आयुक्त प्रणाली को 23 जनवरी से लागू किए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की एक और बड़ी सौगात, जशपुर जिले की 10 सड़कों के लिए 31 करोड़ 91 लाख रुपये की स्वीकृति, ग्रामीणों की बहुप्रतीक्षित मांग हुई पूरी

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रायपुर। नववर्ष से ठीक पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले को विकास की बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग द्वारा जिले के ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में आवागमन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 10 महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के लिए कुल 31 करोड़ 91 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्षों से लंबित इन सड़कों की मांग पूरी होने से क्षेत्रवासियों में हर्ष का माहौल है।

स्वीकृत कार्यों में एनएच-43 रोड (मुड़ापारा) से चर्चपारा होते हुए सुकबासुपारा तक सड़क निर्माण के लिए 2 करोड़ 47 लाख 97 हजार रुपये, ग्राम पंचायत कछार से सरपंच बस्ती चौक पक्की सड़क से तिरसोठ तक के लिए 3 करोड़ 41 लाख रुपये, कांसाबेल के डांडपानी से खूटेरा पहुंच मार्ग हेतु 4 करोड़ 52 लाख रुपये तथा पाले पखना से जुनवाईंन पहुंच मार्ग के लिए 4 करोड़ 68 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इसी क्रम में कांसाबेल के सेमरकछार भट्टीटोली से लपई पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 69 लाख रुपये, ग्राम पंचायत कर्रबेवरा से पखनापारा माड़ो गुफा तक पहुंच मार्ग हेतु 1 करोड़ 88 लाख रुपये, ग्राम पंचायत घरजियाबथान के ठाकुरमुड़ा से रघुनाथपुर जोड़ा तालाब मार्ग के लिए 2 करोड़ 61 लाख रुपये, ग्राम पंचायत पाकरगांव से तुरवाआमा होते हुए चौराआमा पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 61 लाख रुपये, ग्राम पंचायत भगरपुर से भगोरा पहुंच मार्ग के लिए 4 करोड़ 60 लाख रुपये तथा अटल चौक से पंडरीपानी होते हुए तिलंगा पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 43 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।

इन सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा। इससे किसानों को कृषि उपज के परिवहन में सुविधा मिलेगी, विद्यार्थियों की शिक्षा तक पहुंच आसान होगी और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच और अधिक सुलभ होगी।

ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नए वर्ष से पूर्व जिले को यह महत्वपूर्ण विकास सौगात देकर वर्षों पुरानी मांग पूरी की है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय जशपुर जिले के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेगा।

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