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AAP छोड़ BJP में आए संदीप पाठक पर गिरफ्तारी की तलवार, पंजाब में दो केस दर्ज

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 चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पंजाब के अलग-अलग जिलों में उनके खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों मामलों में गैर-जमानती धाराएं लगाई गई हैं। वहीं, पंजाब पुलिस की टीम कार्रवाई के लिए दिल्ली पहुंची है।


सूत्रों के अनुसार, पुलिस टीम के पहुंचने से पहले ही संदीप पाठक अपने आवास से निकल चुके थे।

25 अप्रैल को BJP में हुए थे शामिल

संदीप पाठक ने 25 अप्रैल को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजेंद्र गुप्ता और स्वाति मालीवाल समेत अन्य नेताओं के साथ भाजपा का दामन थामा था।

केजरीवाल के करीबी माने जाते थे पाठक

संदीप पाठक को अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता था। जब केजरीवाल जेल में थे, तब जिन चुनिंदा लोगों को उनसे मिलने की अनुमति थी, उनमें संदीप पाठक भी शामिल थे। पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति तैयार करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। चुनाव में जीत के बाद वे पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उभरे थे। बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया।

हालांकि बाद में उन्हें पंजाब प्रभारी पद से हटाकर छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया। उनके स्थान पर मनीष सिसोदिया को पंजाब चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से वे नाराज बताए जा रहे थे।

शिक्षण क्षेत्र से राजनीति तक का सफर

छत्तीसगढ़ के रहने वाले संदीप पाठक ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। उन्होंने आईआईटी दिल्ली की नौकरी छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थामा था।

राजेंद्र गुप्ता की कंपनी पर भी कार्रवाई

इधर, आप छोड़ने वाले उद्योगपति पद्मश्री राजेंद्र गुप्ता की बरनाला स्थित ट्राइडेंट इंडस्ट्री यूनिट पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने छापा मारा था। इसके खिलाफ ट्राइडेंट ग्रुप ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

हाईकोर्ट ने मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही पीपीसीबी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि 4 मई तक कंपनी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

 
 

CG NEWS : नदी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत

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 बलरामपुर। जिले के सामरी पाठ थाना क्षेत्र अंतर्गत भुताही गांव में नदी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।


जानकारी के अनुसार, 5 और 6 वर्षीय दोनों बच्चे अपने साथियों के साथ गांव के पास स्थित नदी में नहाने गए थे। भीषण गर्मी के कारण बच्चे नदी में खेलते और नहाते समय अनजाने में गहरे पानी में चले गए, जिससे वे डूबने लगे।

साथ मौजूद अन्य बच्चों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को सूचना दी। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने तत्काल नदी में उतरकर दोनों बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे। बच्चों के शव देखकर परिवार में कोहराम मच गया। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे ग्राम पंचायत सबाग और भुताही के निवासी थे।

सूचना मिलने पर सामरी पाठ थाना प्रभारी विजय सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पंचनामा कार्रवाई के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शनिवार को दोनों बच्चों का पोस्टमार्टम कराया गया।

अमेरिका ने भारत को लौटाए 14 मिलियन डॉलर मूल्य के 657 पुरावशेष

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 नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। अमेरिका ने भारत को लगभग 14 मिलियन डॉलर मूल्य के 657 प्राचीन पुरावशेष वापस लौटाए हैं। मैनहट्टन जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने इसकी घोषणा की। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय महावाणिज्यदूत राजलक्ष्मी कदम की उपस्थिति में इन कलाकृतियों को भारत को सौंपा गया।


इन पुरावशेषों की बरामदगी अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की कई जांचों के बाद संभव हो सकी। एल्विन ब्रैग ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाने वाले तस्करी गिरोह बड़े पैमाने पर सक्रिय रहे हैं और 600 से अधिक कलाकृतियों की वापसी से यह स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा कि चोरी की गई धरोहरों को भारत वापस लाने के लिए अभी और प्रयास किए जाने बाकी हैं।

न्यूयॉर्क स्थित भारतीय महावाणिज्यदूत बिनय प्रधान ने मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निरंतर सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों की सतर्कता से सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण धरोहरों की बरामदगी और वापसी संभव हो सकी।

लौटाई गई वस्तुओं में दो मिलियन डॉलर मूल्य की कांस्य प्रतिमा ‘अवलोकितेश्वर’ भी शामिल है। यह प्रतिमा वर्ष 1939 में लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास मिली थी और 1952 तक रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई थी। बाद में यह प्रतिमा चोरी हो गई और 1982 में अमेरिका तस्करी कर दी गई।

इसके अलावा, वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश के एक मंदिर से चोरी की गई नृत्यरत भगवान गणेश की बलुआ पत्थर की प्रतिमा भी लौटाई गई कलाकृतियों में शामिल है।

CG NEWS : जादू-टोना के शक में ग्रामीण की हत्या, दो सगे भाई गिरफ्तार

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 बस्तर। जिले के दरभा थाना क्षेत्र में जादू-टोना के शक में एक ग्रामीण की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि दो सगे भाइयों ने मिलकर गांव के ही एक व्यक्ति की धारदार हथियार से हत्या कर दी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।


मिली जानकारी के अनुसार, घटना पखनार गांव की है। मृतक की पहचान Manglu Mandavi के रूप में हुई है। आरोपी Aytu Madkami और Sukhram Madkami बताए जा रहे हैं, जो आपस में सगे भाई हैं।

बताया जा रहा है कि दोनों आरोपियों को संदेह था कि मंगलू मंडावी जादू-टोना करता है। इसी शक के चलते गुरुवार दोपहर जब मंगलू अपने घर के पास आम के पेड़ के नीचे बैठा था, तभी दोनों आरोपी वहां पहुंचे और विवाद शुरू हो गया।

विवाद बढ़ने पर छोटे भाई ने चाकू से मंगलू के सीने पर हमला कर दिया। इसके बाद दूसरे आरोपी ने भी धारदार हथियार से गले पर वार किया। गंभीर चोटों के कारण मंगलू मंडावी की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

फिलहाल आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

नौकरी बदली और PF भूल गए? EPFO लाएगा नया पोर्टल, मिनटों में मिलेगा पुराने खाते का पैसा

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 नई दिल्ली। नौकरी बदलने के बाद पुराने पीएफ खाते में फंसे पैसे को निकालना अब आसान होने वाला है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए E-PRAAPTI पोर्टल लॉन्च करने की घोषणा की है। इससे लाखों कर्मचारियों को पुराने पीएफ खाते का पैसा वापस पाने में मदद मिलेगी।


केंद्रीय श्रम मंत्री Mansukh Mandaviya ने नई दिल्ली में इस पोर्टल की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म कर्मचारियों को उनके पुराने पीएफ खातों का पता लगाने और राशि को वर्तमान खाते से जोड़ने में मदद करेगा।

क्यों फंस जाता है पुराना PF पैसा?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी ने UAN सिस्टम लागू होने से पहले कई बार नौकरी बदली है, तो संभव है कि उसका कुछ पीएफ पैसा पुराने खाते में ही जमा रह गया हो।

2014 से पहले हर नई नौकरी के साथ नया पीएफ खाता खुलता था। यदि नौकरी बदलते समय राशि ट्रांसफर नहीं की गई, तो पैसा पुराने खाते में ही फंस जाता था। कई मामलों में कर्मचारियों को यह भी याद नहीं रहता कि उनका पैसा किस खाते में जमा है।

लाखों खाते पड़े हैं इनएक्टिव

देशभर में लाखों पीएफ खाते ऐसे हैं जो निष्क्रिय (इनएक्टिव) हो चुके हैं और उनमें हजारों करोड़ रुपये जमा हैं। जानकारी के अभाव और जटिल प्रक्रिया के कारण अधिकांश कर्मचारी इन खातों तक पहुंच नहीं बना पाते।

क्या है E-PRAAPTI पोर्टल?

E-PRAAPTI एक डिजिटल सिस्टम है, जो कर्मचारियों के पुराने पीएफ खातों को खोजने, ट्रैक करने और उन्हें मौजूदा UAN खाते से जोड़ने में मदद करेगा।

इस पोर्टल के जरिए पुराने दस्तावेज खोजने या लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। आधार विवरण के जरिए सिस्टम पुराने खातों की पहचान कर उन्हें लिंक करेगा।

कैसे करेगा काम?

इस पोर्टल के जरिए प्रक्रिया आसान होगी—

  • आधार से लॉगिन करना होगा
  • सिस्टम पुराने और इनएक्टिव खाते पहचान लेगा
  • यूजर जानकारी सत्यापित और अपडेट करेगा
  • पुराने खाते मौजूदा UAN से लिंक हो जाएंगे
  • इसके बाद पैसा निकालना और प्रबंधन आसान होगा

कर्मचारियों को बड़ी राहत

यदि आपने भी नौकरी बदलते समय पीएफ ट्रांसफर नहीं किया था, तो यह पोर्टल आपके लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। इससे पुराने खाते में जमा राशि तक पहुंचना पहले से कहीं आसान हो जाएगा।

 
 

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।

गरियाबंद में फिर महसूस हुए भूकंप के झटके, इलाके में दहशत का माहौल

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 गरियाबंद। जिले के देवभोग क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। शुक्रवार दोपहर करीब 2:20 बजे धरती हल्की कांपी, जिसके बाद ग्रामीण घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए।


जानकारी के अनुसार, पिछले 36 घंटों के भीतर यह तीसरी बार है जब क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इससे पहले गुरुवार शाम करीब 7:20 बजे भी धरती कांपी थी। वहीं एक दिन पहले आए झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 0.7 दर्ज की गई थी, जो बेहद हल्की श्रेणी में आती है।

हालांकि अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन बार-बार हो रही भूगर्भीय गतिविधियों से लोगों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार झटकों के कारण वे डरे हुए हैं और कई लोग रात में घरों से बाहर समय बिता रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों में विशेष रूप से भय का माहौल देखा जा रहा है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के हल्के भूकंप भूगर्भीय हलचल का संकेत हो सकते हैं। फिलहाल किसी बड़े खतरे की संभावना नहीं जताई गई है, लेकिन लगातार झटकों को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।

2 मई को करोड़ों मोबाइल पर एक साथ बजेगा सायरन, घबराएं नहीं, सरकार कर रही बड़ी तैयारी

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 नई दिल्ली। 2 मई को देशभर के करोड़ों मोबाइल फोन पर अचानक तेज सायरन सुनाई दे सकता है। हालांकि, इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह किसी खतरे का संकेत नहीं बल्कि सरकार द्वारा किया जा रहा एक परीक्षण है।


दरअसल, दूरसंचार विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) मिलकर मोबाइल आधारित डिजास्टर अलर्ट सिस्टम का टेस्ट कर रहे हैं। इस सिस्टम का मकसद आपातकालीन स्थिति में लोगों तक तुरंत चेतावनी और जरूरी जानकारी पहुंचाना है।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले दिल्ली-एनसीआर समेत कई बड़े शहरों में इस अलर्ट सिस्टम का सफल परीक्षण किया जा चुका है। अब इसे देशभर में लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर टेस्ट किया जा रहा है। सरकार ने इस सिस्टम का नाम SACHET (नेशनल डिजास्टर अलर्ट पोर्टल) रखा है।

लोगों को पहले ही SMS के जरिए सूचना दी जा चुकी है कि 2 मई को उनके क्षेत्र में ‘सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट’ का परीक्षण किया जाएगा। ऐसे में अगर मोबाइल पर सायरन बजे या अलर्ट मैसेज आए तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह केवल ट्रायल है।

कैसे काम करता है सिस्टम?

यह अलर्ट सिस्टम कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है, जिसे इंटरनेशनल टेलीकॉम यूनियन ने सुझाया है। इसके जरिए SMS और तेज सायरन के माध्यम से लोगों तक तुरंत संदेश पहुंचाया जाता है।

इसकी खास बात यह है कि अलर्ट केवल उसी क्षेत्र के लोगों को मिलेगा, जहां किसी संभावित आपदा का खतरा होगा। इसमें सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे एक साथ लाखों मोबाइल फोन पर रियल टाइम में संदेश भेजा जा सकता है।

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल - बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी

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 मन की बात' से राष्ट्रीय क्षितिज तक का सफर- प्रायः सभी प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि प्रकृति कभी भी अपना ऋण नहीं भूलती। यदि मनुष्य पूरी ईमानदारी से उसके संरक्षण की ओर एक कदम बढ़ाता है, तो प्रकृति उसे अपनी भव्यता से कई गुना वापस लौटाती है। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो सदियों से अपनी नैसर्गिक संपदा और सघन वन क्षेत्रों के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है।


छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई।


विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री  साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।

वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों (Blackbucks) का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में 'सॉफ्ट रिलीज' पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव (Stress-free) के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई।

प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष- इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) श्री धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

रामपुर ग्रासलैंड:- एक सुरक्षित भविष्य का पालना बारनवापारा अभ्यारण्य का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक 'केस स्टडी' बन सकता है। यहाँ केवल काले हिरण की प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए एक संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया। रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन वे मुख्य कारक हैं, जिन्होंने काले हिरणों को वहां फलने-फूलने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।

भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश- बारनवापारा अभ्यारण्य में गूंजती काले हिरणों की चहल-कदमी और उनकी कुलाचें इस बात का जीवंत साक्ष्य हैं कि यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी समझ ले, तो खोई हुई धरोहर को फिर से लौटाया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक 'लिविंग लैबोरेटरी' (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप में कार्य करेगी, जहाँ वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगी।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय का मानना है कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' ने हमारे नवाचारों को एक वैश्विक मंच प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रही है, जहाँ मनुष्य और वन्यजीव दोनों सुरक्षित हों।आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरणों को देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं मुस्कुराते हुए छत्तीसगढ़ के इस सराहनीय प्रयास को अपना आशीर्वाद दे रही है। यह छत्तीसगढ़ के गौरव का वह उत्कर्ष है, जिसकी चमक अब पूरे देश को प्रेरित कर रही है।

धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक
अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

गैंगरेप कांड: शादी से लौट रही 2 नाबालिगों से दरिंदगी, 8 आरोपी गिरफ्तार

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 अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में दो नाबालिग लड़कियों से सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना 24 अप्रैल की बताई जा रही है, जब चार सहेलियां शादी समारोह से देर रात लौट रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार युवकों के एक समूह ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।


बताया जा रहा है कि चार में से दो लड़कियां किसी तरह मौके से भाग निकलीं, जबकि दो नाबालिगों को आरोपी अपने साथ खेत की ओर ले गए, जहां उनके साथ दुष्कर्म किया गया।

दोनों पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कराया गया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई है।

पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 4 नाबालिग शामिल हैं। शेष आरोपियों की तलाश जारी है।

इस मामले में पहले सीतापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की रिपोर्ट में विरोधाभास सामने आया था। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने संबंधित डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाल कल्याण समिति (CWC) पीड़िताओं के बयान दर्ज करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

West Bengal : आधी रात सियासी संग्राम: स्ट्रांग रूम पहुंचीं ममता, EVM छेड़छाड़ के आरोपों पर हंगामा

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 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले राज्य में सियासी तनाव चरम पर पहुंच गया। गुरुवार देर रात कोलकाता के भवानीपुर स्थित सखावत मेमोरियल स्कूल में बनाए गए स्ट्रांग रूम और काउंटिंग सेंटर पर भारी हंगामा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंचीं। उन्होंने EVM मशीनों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।


ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि स्ट्रांग रूम में रखी EVM मशीनों के साथ हेरफेर की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि वोटों से छेड़छाड़ की गई तो वह आखिरी सांस तक इसके खिलाफ लड़ेंगी। दक्षिण कोलकाता स्थित काउंटिंग सेंटर में वह करीब चार घंटे रहीं और रात करीब 12 बजे बाहर निकलीं।

भवानीपुर सीट इस चुनाव की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है, जहां तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, शुरुआती दौर में ममता बनर्जी को स्ट्रांग रूम परिसर में प्रवेश से रोका गया, लेकिन बाद में उन्हें अंदर जाने की अनुमति दे दी गई। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) से मुलाकात कर चुनाव नियमों का हवाला दिया। नियमों के अनुसार उम्मीदवार और अधिकृत चुनाव एजेंट सील किए गए कमरे तक जा सकते हैं, लेकिन भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं होती।

बाहर पत्रकारों से चर्चा करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और एजेंटों से अपील की कि वे मतगणना केंद्रों पर सतर्क रहें, लेकिन किसी प्रकार का विवाद न करें।

इस दौरान काउंटिंग सेंटर के बाहर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के बीच भी तनावपूर्ण स्थिति बन गई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस के झंडे लगी एक मिनी ट्रक को रोकते हुए आरोप लगाया कि वाहन में नकली EVM मशीनें लाई जा रही हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

इधर, उत्तरी कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र के बाहर भी तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और EVM सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।

4 मई को होने वाली मतगणना से पहले बंगाल में राजनीतिक माहौल बेहद गरमाया हुआ है। सभी दल स्ट्रांग रूम की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नजर बनाए हुए हैं।

1 मई से महंगाई का बड़ा झटका: कमर्शियल LPG सिलेंडर 993 रुपये महंगा, नए रेट जारी

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 नई दिल्ली। मई महीने की शुरुआत के साथ ही कमर्शियल उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। 1 मई से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा जारी नई दरों के अनुसार 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी की गई है।


इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,078.50 रुपये से बढ़कर 3,071.50 रुपये हो गई है। होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए यह बड़ा आर्थिक झटका माना जा रहा है।

घरेलू उपभोक्ताओं को राहत

वहीं, आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर अब भी 913 रुपये के पुराने रेट पर उपलब्ध है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों को फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

प्रमुख शहरों में नए रेट

नई कीमतों के अनुसार देश के बड़े शहरों में कमर्शियल सिलेंडर के दाम इस प्रकार हैं—

दिल्ली: 3,071.50 रुपये (₹993 की बढ़ोतरी)
मुंबई: 3,024 रुपये (₹993 की बढ़ोतरी)
कोलकाता: 3,202 रुपये (लगभग ₹994 की बढ़ोतरी)
चेन्नई: 3,237 रुपये (पहले ₹2,246.50)

कारोबारियों की बढ़ी चिंता

कीमतों में इस बड़ी बढ़ोतरी से होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों की लागत बढ़ना तय है। इसका असर आने वाले दिनों में खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण आगे भी LPG के दाम प्रभावित हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘अविस्मरणीय यात्रा’ पुस्तक का किया विमोचन

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महिला पत्रकारों ने नारी शक्ति वंदन के संकल्प को महिला सशक्तिकरण की ओर बताया ऐतिहासिक कदम

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित  कार्यालय कक्ष में पत्रकार नीरा साहू द्वारा गुजरात यात्रा पर लिखी गई पुस्तक ‘अविस्मरणीय यात्रा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने  नीरा साहू को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र एवं शासकीय संकल्प के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा-वृत्तांत पर्यटन प्रेमियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होगा।

इस अवसर पर निशा द्विवेदी, चित्रा पटेल, लवलीना शर्मा, जनसंपर्क विभाग की उप संचालक डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक संगीता लकड़ा एवं आमना खातून सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए डबल इंजन सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में  संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान, समग्र विकास और सशक्तिकरण के लिए संसद और सभी विधानसभाओं में उनके लिए एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुदृढ़ करेगी, बल्कि समाज में समान अवसर और संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा में भी एक नई ऊर्जा प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रयासों से देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में सशक्त भूमिका मिलेगी और विकास अधिक समावेशी एवं प्रभावी बनेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह पावन धरती माता शबरी, मां दंतेश्वरी और मां महामाया की भूमि है, जहां नारी को सदैव शक्ति के रूप में सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी केवल सम्मान की पात्र नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति की आधारशिला है। नवरात्रि में जिस शक्ति की हम पूजा करते हैं, वही शक्ति समाज में मातृरूप में विद्यमान है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे शास्त्रों में वर्णित “या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता…” केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का मूल तत्व है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर भक्त माता कर्मा, तीजन बाई, उषा बारले जैसी विभूतियों ने अपनी प्रतिभा और समर्पण से प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया है। साथ ही, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती और अवंती बाई जैसी वीरांगनाओं के योगदान को भी उन्होंने प्रेरणास्रोत बताया। आधुनिक युग में कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महिलाओं ने देश का गौरव वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व का विस्तार समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के कार्यक्षेत्र के विस्तार और जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए समय-समय पर व्यवस्थागत सुधार और संतुलन पर विचार करना महत्वपूर्ण है, जिससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनसरोकारों के अनुरूप बन सके।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश में महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। स्वच्छता, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। इन प्रयासों ने महिलाओं की गरिमा और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देना और उनके सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता, स्वरोजगार के अवसर और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि वे समाज की मुख्यधारा से भी अधिक मजबूती से जुड़ रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास, पेयजल, आजीविका और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाने का एक सशक्त उदाहरण है। बड़ी संख्या में महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में नेतृत्व कर रही हैं और स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को परिवार और समाज में सशक्त बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक पहल की जा रही हैं, जिससे वे निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मातृशक्ति का सशक्तिकरण केवल एक नीति का विषय नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास का आधार है। उन्होंने सभी वर्गों से इस दिशा में सहयोग और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया, ताकि एक समतामूलक, सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सके।

सफलता की कहानी-पलाश फूल से बढ़ती आजीविका और समृद्धि

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रायपुर- पलाश (टेसू या ढाक) का फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और स्वास्थ्य के लिए एक बहुमूल्य संसाधन है। इसके नारंगी-लाल फूलों को जंगल की आग भी कहा जाता है, जो वसंत ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाते हैं। पलाश के फूल, बीज और गोंद (कमरकस) आयुर्वेद में चर्म रोग, पेट के कीड़े, डायबिटीज, और यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रयुक्त होते हैं। इन औषधीय उत्पादों को बेचकर भी ग्रामीण अपनी आय बढ़ाते हैं।

औषधीय और सांस्कृतिक फूल है पलाश

पलाश फूल (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा), जिसे टेसू, ढाक या “जंगल की आग” (फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट) भी कहा जाता है, भारत का एक महत्वपूर्ण औषधीय और सांस्कृतिक फूल है। बसंत ऋतु में खिलने वाले इसके आकर्षक नारंगी फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि औषधीय उपयोग, प्राकृतिक होली रंग और त्वचा की देखभाल में भी काम आते हैं। छत्तीसगढ़ के वन मण्डल कटघोरा में पलाश के वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, कटघोरा, चौतमा और पाली जैसे क्षेत्रों में इसकी भरपूर उपलब्धता है। यहां के आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए लघु वनोपज संग्रहण आजीविका का प्रमुख साधन है। पलाश फूल का संग्रहण मुख्यत मार्च-अप्रैल माह में किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया। यह दर संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में मददगार साबित हुई है।

कटघोरा वनमण्डल में पलाश फूल का संग्रहण लगातार बढ़ रहा है

वर्ष 2022-23 में 116 संग्राहकों से 402 क्विंटल, वर्ष 2023-24 में 40 संग्राहकों से 58 क्विंटल,वर्ष 2024-25 में 107 संग्राहकों से 147 क्विंटल और वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों से 76 क्विंटल संग्रहण किया गया इसके साथ ही साथ पलाश के मूल्य में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में 900 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला पलाश वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके बाद संघ मुख्यालय द्वारा इसे 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जिससे संग्राहकों को बेहतर लाभ मिला।

20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान

वन धन विकास केंद्र पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसियां और मानिकपुर के माध्यम से संग्रहण कार्य को संगठित रूप दिया गया है। इन केंद्रों ने स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, संग्रहण और विपणन में सहयोग प्रदान किया। वर्ष 2025-26 में पलाश फूल संग्रहण करने वाले 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सुधार आया। यह पहल शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें लघु वनोपज के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं।

ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन पलाश के फूल

पलाश के फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इन्हें पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इन्हें तिजोरी में रखने से धन-समृद्धि बढ़ती है। पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने शादियों और अन्य आयोजनों में इको.फ्रेंडली विकल्प के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं, जो ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन है। आगामी सीजन में कटघोरा वनमण्डल के सभी समितियों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को पलाश फूल संग्रहण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल आजीविका के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वन संसाधनों का सतत और समुचित उपयोग भी सुनिश्चित होगा। पलाश सिर्फ फूलों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता,आजीविका और समृद्धि की नई उड़ान की कहानी है।

पलाश के फूलों से प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग 

पलाश के फूलों का सबसे बड़ा व्यावसायिक उपयोग होली के लिए प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग बनाने में होता है। आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं पलाश ब्रांड के माध्यम से इन फूलों से इको-फ्रेंडली रंग तैयार कर अपनी आजीविका बढ़ा रही हैं।

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