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गवर्नेंस समिट 2026 : विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारतीय स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के भारती सार्वजनिक नीति संस्थान के सहयोग से 23 मई 2026 को आईएसबी मोहाली परिसर में “गवर्नेंस समिट 2026 : विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)” का आयोजन किया।

शिखर सम्मेलन के चौथे संस्करण की शुरुआत उद्घाटन मुख्य भाषण से हुई, जिसे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने संबोधित किया। उन्होंने ऐसे एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के अंतिम छोर पर मौजूद प्रत्येक नागरिक की सेवा कर सके।

उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के लिए उत्पादकता बढ़ाने, शासन व्यवस्था में सुधार करने तथा स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विनिर्माण और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में पहुंच का विस्तार करने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रस्तुत करती है।” उन्होंने यह भी कहा कि एआई के कारण बौद्धिक कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन भारत समावेशी विकास के लिए इस तकनीक का उपयोग करने की विशिष्ट स्थिति में है।

पूरे दिन चले इस कार्यक्रम में चार विषयगत पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें डिजिटल वाणिज्य में एआई की भूमिका, महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और वहनीयता, तथा रोजगार सृजन और डिजिटल उद्यमिता जैसे विषय शामिल थे। इसके साथ ही एक समानांतर गोलमेज चर्चा में राज्य सरकारों से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक अंतिम छोर तक सार्वजनिक सेवा वितरण में एआई के क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया गया।

अपने उद्घाटन संबोधन में भारती सार्वजनिक नीति संस्थान, आईएसबी के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अश्विनी छत्रे ने एआई से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को प्रभावी प्रशासनिक ढांचे में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एआई को एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा।”

उन्होंने असमानता, तकनीकी छलांग लगाने के अवसर और भविष्य के रोजगार को उभरते एआई परिदृश्य के प्रमुख आयाम बताया। प्रोफेसर छत्रे ने यह भी कहा कि एआई से जुड़े अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त सुरक्षा उपाय, सामाजिक सुरक्षा तंत्र और सकारात्मक नीतिगत कदम आवश्यक हैं।

इस शिखर सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के सदस्यों ने भाग लिया। सम्मेलन में रिलायंस रिटेल, मास्टरकार्ड, अपोलो हॉस्पिटल्स, आईआईटी मद्रास, यूनिसेफ इंडिया, पंजाब पुलिस तथा कई केंद्रीय और राज्य सरकारी मंत्रालयों की भागीदारी रही।

आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) में अत्याधुनिक लिनियर एक्सेलेरेटर का शुभारंभ

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Army Hospital (Research & Referral) के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में 25 मई 2026 को एक अत्याधुनिक रिंग गैन्ट्री-आधारित लिनियर एक्सेलेरेटर (Linear Accelerator) का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित रहे।

यह उन्नत तकनीक Army Hospital (R&R) में कैंसर उपचार सेवाओं को और मजबूत करेगी तथा सेवारत सैन्य कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को आधुनिक रेडियोथेरेपी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी। इससे अस्पताल में बढ़ते मरीजों के उपचार की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

यह लिनियर एक्सेलेरेटर आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीकों जैसे —

  • वॉल्यूमेट्रिक मॉड्यूलेटेड आर्क थेरेपी (VMAT)

  • इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी (IMRT)

  • इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी (IGRT)

  • स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी (SBRT)

  • स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी (SRS)

को संचालित करने में सक्षम है।

यह तकनीक ट्यूमर वाले हिस्सों पर अत्यंत सटीक तरीके से रेडिएशन पहुंचाती है, जबकि आसपास के सामान्य ऊतकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचता है। इससे उपचार के परिणाम बेहतर होने और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता बढ़ने में मदद मिलेगी।

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (AFMS) के अंतर्गत इस नए लिनियर एक्सेलेरेटर की खरीद, पहले इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण की तुलना में एक बड़ा तकनीकी उन्नयन है, जिसे अब सेवा से हटा दिया गया है। यह कदम AFMS के ऑन्कोलॉजी सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AFMS के अन्य कैंसर उपचार केंद्रों को भी चरणबद्ध तरीके से उन्नत किया जा रहा है।

इस अवसर पर DG AFMS Arti Sarin, Armed Forces Medical Services के वरिष्ठ अधिकारी तथा अविनाश दास सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में महंगा हुआ सफर, पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने बिगाड़ा आम लोगों का बजट

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। 25 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में ₹2.61 और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की वृद्धि कर दी। इसके बाद प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल की कीमत ₹109 प्रति लीटर के पार पहुंच गई है।


राजधानी रायपुर में पेट्रोल अब ₹107.96 प्रति लीटर बिक रहा है। हालांकि बड़े शहरों की तुलना में यहां थोड़ी राहत है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं का बजट प्रभावित कर दिया है।

बस्तर और सरगुजा संभाग में सबसे ज्यादा असर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बस्तर और सरगुजा संभाग में ईंधन की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नारायणपुर में पेट्रोल ₹109.65, जगदलपुर में ₹109.64, दंतेवाड़ा में ₹109.60 और बीजापुर में ₹109.59 प्रति लीटर पहुंच गया है।

वहीं सरगुजा संभाग में जशपुर में पेट्रोल ₹109.52, सूरजपुर में ₹109.39 और अंबिकापुर में ₹109.09 प्रति लीटर बिक रहा है। रायगढ़ में भी पेट्रोल की कीमत ₹109.03 प्रति लीटर दर्ज की गई है।

दुर्ग में पेट्रोल ₹108.29, धमतरी में ₹108.45, महासमुंद में ₹108.64 और बिलासपुर में ₹108.65 प्रति लीटर पहुंच चुका है।

कोरबा में सबसे सस्ता पेट्रोल

प्रदेश में सबसे कम पेट्रोल कीमत कोरबा में दर्ज की गई है, जहां पेट्रोल ₹107.63 प्रति लीटर बिक रहा है। इसके अलावा जांजगीर में ₹108.21 और कवर्धा में ₹108.86 प्रति लीटर रेट दर्ज किए गए हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

जानकारों के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन लागत अधिक होने के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा रहती हैं। वहीं बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में सप्लाई बेहतर होने से कुछ राहत मिलती है।

बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की खबरें सामने आई हैं, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग लागत, एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट के आधार पर तय होती हैं।

ट्रांसपोर्ट और आम जनता पर असर

लगातार बढ़ते ईंधन दामों का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई और यात्री किराए में बढ़ोतरी हो सकती है।

इधर, संभावित कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। रायपुर कलेक्टर ने अधिक कीमत वसूली और अवैध बिक्री की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। नागरिक 9977222564, 9977222574, 9977222584 और 9977222594 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सरकारी तेल कंपनियां प्रतिदिन सुबह 6 बजे पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी करती हैं।

CG NEWS : गांव में चल रही थी प्रार्थना सभा, धर्मांतरण की शिकायत पर पहुंची पुलिस

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 रायपुर : बिलासपुर जिले में एक बार फिर कथित धर्मांतरण का मामला सामने आया है। सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम मोहरा में आयोजित एक प्रार्थना सभा को लेकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ के बाद तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता सुमित यादव ने पुलिस को दी गई रिपोर्ट में बताया कि 24 मई 2026 की सुबह करीब 9 बजे उन्हें सूचना मिली थी कि ग्राम मोहरा में राम स्वरूप सूर्यवंशी के घर के आंगन में टीन शेड के नीचे प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही है। आरोप है कि सभा के दौरान ईसाई धर्म का प्रचार करते हुए लोगों को कथित रूप से प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

शिकायत के बाद सुमित यादव अपने साथियों धीरज भोई, सुभाष साहू और शुभांशु भोई के साथ मौके पर पहुंचे। वहां राम स्वरूप सूर्यवंशी, जितेंद्र सूर्यवंशी और बिलासपुर निवासी पंकज कुमार करियारे मौजूद मिले।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सभा में शामिल लोगों को बेहतर सुविधाएं, अच्छे घर में विवाह और निःशुल्क इलाज जैसी बातें कहकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। मौके पर बाइबल और नाश्ते की व्यवस्था होने की बात भी कही गई है।

इसके अलावा शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सभा के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के प्रति आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 तथा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

इबोला वायरस को लेकर भारत अलर्ट, फ्रीकी देशों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह

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 EBOLA VIRUS : एक बार फिर दुनिया में खतरनाक महामारी का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। अफ्रीका के कई देशों में इबोला वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। इसके बाद भारत सरकार भी सतर्क हो गई है और नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।


केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इन देशों में इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जो भारतीय नागरिक इन देशों में रह रहे हैं या यात्रा कर रहे हैं, वे स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

वहीं, अफ्रीका CDC ने भी कांगो और युगांडा में फैल रहे Bundibugyo स्ट्रेन इबोला वायरस को महाद्वीपीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्ट्रेन तेजी से फैल सकता है और फिलहाल इसके लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में अभी तक Bundibugyo स्ट्रेन इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है इबोला वायरस?

इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जिसमें तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, शरीर में दर्द, उल्टी, दस्त और कई मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है और गंभीर स्थिति में जानलेवा साबित हो सकता है।

सरकार की अपील

भारत सरकार ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही विदेश यात्रा से पहले स्वास्थ्य संबंधी सलाह और दिशा-निर्देशों की जानकारी लेने को कहा गया है।

Petrol-Diesel Price Hike: 10 दिनों में चौथा झटका! पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी

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Petrol-Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार, 25 मई 2026 को एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। नई दरें सुबह 6 बजे से लागू हो गईं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 2.61 रुपये महंगा होकर 102.12 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल 2.71 रुपये बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है।


पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को करीब 3 रुपये, 19 मई को लगभग 90 पैसे और 23 मई को फिर करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। अब 25 मई को फिर बड़ा इजाफा हुआ है। कुल मिलाकर पिछले 10 दिनों में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।

दिल्ली में नई कीमतें

कीमतों में ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में डीजल का दाम 92.49 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं पेट्रोल 99.51 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।

सामान्य पेट्रोल-डीजल के साथ प्रीमियम ईंधनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। XP95 पेट्रोल 106.63 रुपये से बढ़कर 109.24 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि XG की कीमत 97.81 रुपये से बढ़कर 100.52 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।

मुंबई में भी बढ़े दाम

मुंबई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 111.21 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो एक दिन पहले 108.45 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं डीजल के दाम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम

  • नोएडा : डीजल 95.56 रुपये, पेट्रोल 102.12 रुपये, XP95 110.68 रुपये, XG 101.17 रुपये प्रति लीटर
  • भोपाल : डीजल 99.64 रुपये, पेट्रोल 114.57 रुपये, XP95 123.88 रुपये, XG 104.90 रुपये प्रति लीटर
  • चंडीगढ़ : डीजल 89.47 रुपये, पेट्रोल 101.51 रुपये, XG 94.65 रुपये प्रति लीटर
  • गांधीनगर : डीजल 98.13 रुपये, पेट्रोल 102.01 रुपये, XP95 110.57 रुपये, XG 103.37 रुपये प्रति लीटर
  • गुवाहाटी : डीजल 97.23 रुपये, पेट्रोल 105.73 रुपये, XP95 114.68 रुपये प्रति लीटर
  • जयपुर : डीजल 97.78 रुपये, पेट्रोल 112.69 रुपये, XP95 121.97 रुपये, XG 103.23 रुपये प्रति लीटर
  • पटना : डीजल 99.36 रुपये, पेट्रोल 113.37 रुपये, XP95 122.25 रुपये प्रति लीटर

लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों से आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।

 
 

 

200 साल की हिंदी पत्रकारिता का जश्न, रायपुर प्रेस क्लब मनाएगा ‘पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव’

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 रायपुर। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रायपुर प्रेस क्लब द्वारा 30 मई को आयोजित किए जा रहे “पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” की तैयारियों को लेकर आज प्रेस क्लब परिसर में महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं।


रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने सबसे पहले प्रेस क्लब कार्यकारिणी की विस्तारित बैठक ली। बैठक में कार्यकारिणी के नव नियुक्त सात सदस्यों के साथ विभिन्न मोर्चा एवं प्रकोष्ठों के विशेष आमंत्रित संयोजक तथा सलाहकार सदस्य के रूप में प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व महासचिव भी उपस्थित रहे।

कार्यकारिणी की बैठक के पश्चात “पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” के सफल आयोजन हेतु गठित विभिन्न समितियों की अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में संरक्षक एवं सलाहकार मंडल के सदस्यों ने विभिन्न समितियों के संयोजकों के साथ आयोजन की रूपरेखा, कार्यक्रम के स्वरूप तथा आयोजन की सफलता को लेकर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित यह विशेष उत्सव दिनभर चार सत्रों में संपन्न होगा।

कार्यक्रम का प्रथम सत्र शुभारंभ सत्र होगा, जिसमें मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल के सदस्य एवं जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। द्वितीय सत्र हिंदी प्रिंट मीडिया की 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा एवं उसकी भूमिका पर केंद्रित रहेगा। तृतीय सत्र इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं न्यू मीडिया की संभावनाओं और चुनौतियों पर आधारित होगा, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ एवं विभिन्न संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे।

इसके अतिरिक्त रायपुर प्रेस क्लब द्वारा इस अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें पत्रकार साथियों की प्रस्तुतियों के साथ संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बैठक में प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े सहित कार्यकारिणी एवं विभिन्न समितियों के सदस्य उपस्थित रहे,

रायपुर प्रेस क्लब ने सभी पत्रकार साथियों, मीडिया संस्थानों एवं नागरिकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागिता निभाने की अपील की है।

Kisaan School : किसान स्कूल में 5 जून से शुरू होगा सीड बॉल अभियान,सब्जी, फल फूल के बीजों से वितरण के लिए बनाई जा रही सीड बॉल

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जांजगीर-चाम्पा- जिले के एक छोटे से गांव बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल, जहां पर बनाई जा रही सब्जी, फल फूल की बीजों की सीड बॉल, जिसका वितरण लोगों को 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर किया जाएगा और सीड बॉल अभियान का शुभारम्भ किया जाएगा. इस अभियान में किसान, स्कूली बच्चे, बिहान की दीदियां, सामाजिक संगठन के लोग और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे.


इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का एक सरल एवं प्रभावी माध्यम है. वर्षा ऋतु में सीड बॉल अभियान चलाकर बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा सकता है. इस अभियान का शुभारम्भ 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुबह 10 बजे वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह से किया जाएगा. किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल बनाने के लिए उपजाऊ मिट्टी, गोबर या वर्मी कम्पोस्ट, सब्जी, फल या फूल की बीज और पानी जरुरत होती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले 5 भाग मिट्टी 2 भाग गोबर या वर्मी कम्पोस्ट आवश्यक मात्रा में बीज का मिश्रण करके गेंद बनाकर दो दिन छाया में सुखाना होता है और बारिश के मौसम में खेत, जंगल, पहाड़ी या खाली भूमि पर फेकना होता है. इसके लिए नीम, आम, जामुन, तेन्दु, करंज, गुलमोहर, इमली, मुनगा, व अन्य बीज शामिल कर सकते हैं. 

पर्यावरण में सीड बॉल का महत्व

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि पर्यावरण में सीड बॉल का बहुत ही बड़ा महत्व है. जैसे वनों की वृद्धि, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण, वायु शुद्धिकरण, जलवायु परिवर्तन नियंत्रण, कम लागत एवं आसान तकनीक आदि शामिल है, वहीं इसके लाभ के बारे में बताया कि पौधों की सुरक्षा बढ़ती है. पक्षियों और चीटियों से बीज सुरक्षित रहतीं है. पानी की कम आवश्यकता, सूखे क्षेत्रो में भी उपयोगी, सामूहिक अभियान में आसान उपयोग कर सकते हैं. 

क्या है सीड बॉल...

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि यह एक छोटी गेंद होती है, जिसे मिट्टी, गोबर वर्मी कम्पोस्ट और बीज मिलाकर बनाई जाती है. इसका उपयोग पौधों और पेड़ों के बिजों को सुरक्षित तरीके से उगाने के लिए किया जाता है. बारिश होने पर यह गेंद धीरे धीरे गल जाती है और बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाता है. इसे सीड बम भी कहा जाता है. यह प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण की एक सरल एवं कम लागत वाली तकनीक है.

लाल किला मैदान से गूंजा जनजातीय गौरव का स्वर

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राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – जनजातीय समाज दुनिया को सिखा सकता है प्रकृति संग विकास

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर राष्ट्रीय समागम में देशभर से जुटे हजारों जनजातीय प्रतिनिधि

जनजातीय भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण पर मुख्यमंत्री ने दिया विशेष जोर

जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप - मुख्यमंत्री साय 

नई दिल्ली- देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप एवं रामविचार नेताम भी उपस्थित थे। 

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

माउंट एवरेस्ट विजेता अमिता श्रीवास के स्वास्थ्य लाभ हेतु राज्य सरकार सजग : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को समन्वय कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर- जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता श्रीवास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता श्रीवास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 देशभर में सफलतापूर्वक संपन्न, 5.49 लाख अभ्यर्थी हुए शामिल

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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने आज यानी 24 मई 2026 को सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026, जिसमें भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 भी शामिल है, का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह परीक्षा देशभर के 83 शहरों में स्थित 2,072 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई।

इस परीक्षा के लिए कुल 8,19,732 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से लगभग 5.49 लाख उम्मीदवार (करीब 67 प्रतिशत) परीक्षा में उपस्थित हुए। वहीं, वर्ष 2025 की तुलना में उस वर्ष लगभग 9.5 लाख आवेदनकर्ताओं में से करीब 61 प्रतिशत उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे।

इस वर्ष आयोग ने पहली बार परीक्षा केंद्रों पर रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली लागू की, जिसका उद्देश्य नकल और पहचान संबंधी धोखाधड़ी को रोकना था। यह स्वदेशी तकनीक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) द्वारा विकसित की गई। यह प्रणाली सभी 2,072 केंद्रों पर सफलतापूर्वक लागू की गई, जिसे परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

UPSC अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने परीक्षा के सुचारू संचालन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग, NeGD और NIC की टीमों ने मिलकर इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक लागू किया। उन्होंने कहा कि फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली का निर्बाध संचालन आयोग की परीक्षा प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है।

परीक्षा दो सत्रों में आयोजित हुई—पहला सत्र सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक सामान्य अध्ययन (पेपर-I) और दूसरा सत्र दोपहर 2:30 से 4:30 बजे तक सिविल सेवा अभिक्षमता परीक्षा (CSAT) के रूप में हुआ।

सबसे अधिक उपस्थिति दिल्ली केंद्र में रही, जहां 70,885 उम्मीदवार 144 केंद्रों पर उपस्थित हुए। इसके बाद हैदराबाद में 44,209 और पटना में 39,147 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। वहीं सबसे कम उपस्थिति कारगिल में 98, पोर्ट ब्लेयर में 270 और लद्दाख के लेह में 308 उम्मीदवारों की रही।

परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, बिजली बैकअप, चिकित्सा सुविधा, छायादार प्रतीक्षालय, स्वच्छता और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए विशेष सुविधाएं सुनिश्चित की गई थीं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के तहत मोबाइल सिग्नल जैमर भी लगाए गए थे।

इस वर्ष भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ में तीन नए परीक्षा केंद्र जोड़े गए हैं, जिससे परीक्षार्थियों की भीड़ को कम करने में मदद मिलेगी।

आयोग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पहली बार परीक्षा के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर की जारी करने का निर्णय लिया है, जिस पर 31 मई 2026 तक आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी।

कुल 11,224 दिव्यांग उम्मीदवारों ने परीक्षा में भाग लिया, जिनके लिए विशेष समय और सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

UPSC ने कहा कि परीक्षा का सफल आयोजन विभिन्न संस्थाओं के समन्वय और मजबूत व्यवस्था का परिणाम है, जो देश की परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता, दक्षता और विश्वसनीयता को और मजबूत करता है।

फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 75वें संस्करण में देशभर में जबरदस्त भागीदारी, कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारियों को मिला बढ़ावा

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देशभर में “फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल” के 75वें संस्करण में आज 8,000 से अधिक स्थानों पर जबरदस्त भागीदारी देखी गई। यह आयोजन कॉमनवेल्थ गेम्स डे के अवसर पर किया गया और इसका उद्देश्य अहमदाबाद में होने वाले ऐतिहासिक कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की दिशा में उत्साह और गति बढ़ाना था।

अहमदाबाद के प्रतिष्ठित साबरमती रिवरफ्रंट से केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना ने 5,000 साइकिल चालकों, खिलाड़ियों, युवाओं, स्वयंसेवकों और फिटनेस प्रेमियों के साथ इस भव्य आयोजन का नेतृत्व किया।

इस संस्करण की थीम “A New Icon for a Fitter India – Pedalling to 2030” रखी गई थी। इसमें 5 किलोमीटर लंबी साइक्लिंग रैली, योग और ज़ुम्बा प्रदर्शन शामिल रहे, जिससे साबरमती रिवरफ्रंट एक बड़े फिटनेस और सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण कॉमनवेल्थ गेम्स थीम पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन रहा, जिसे डॉ. मांडविया ने किया। इसमें भारत की खेल उपलब्धियों, खेलो इंडिया मिशन के तहत खेल अवसंरचना के विस्तार और 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों को प्रदर्शित किया गया।

इसके अलावा पिकलबॉल, बॉक्स क्रिकेट, वॉलीबॉल, टग ऑफ वॉर और अन्य सामुदायिक खेलों ने कार्यक्रम को उत्सव जैसा माहौल दिया।

कार्यक्रम में ओलंपियन और कॉमनवेल्थ गेम्स पदक विजेता गुरजीत कौर, राजानी एटिमार्पु, सोनिका तांडी, अंजुम मौद्गिल, अंकुर मित्तल और तृप्ति मुर्गुंडे सहित कई खेल हस्तियों ने भाग लिया और युवाओं को प्रेरित किया।

इसके साथ ही आयुष्मान खुराना, भारतीय ओलंपिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय पटेल, ओलंपिक निशानेबाज और CWG पदक विजेता गगन नारंग, खेलो इंडिया के उप महानिदेशक मयंक श्रीवास्तव तथा एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अडिले सुमरिवाला जैसे कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे।

एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति में गरबा और योग का अनोखा मिश्रण भी दर्शाया गया। साथ ही मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग के डॉ. पवन कुमार ने प्रतिभागियों को स्वास्थ्य और योग पर मार्गदर्शन दिया।

देशभर में इसी तरह के कार्यक्रम SAI क्षेत्रीय केंद्रों, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों, खेलो इंडिया केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित किए गए, जहां ओलंपियन, CWG पदक विजेता और खेल सितारों ने भाग लिया। गुवाहाटी में रक्ष खडसे ने, धर्मशाला में बबीता फोगाट ने और मुंबई में सबा अंजुम ने कार्यक्रम में भाग लेकर “स्पोर्ट्स जन भागीदारी” को मजबूत किया।

यह पहल दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी और तब से अब तक यह 3.07 लाख से अधिक स्थानों तक पहुंच चुकी है, 50 लाख से अधिक साइकिल चालकों को जोड़ चुकी है और 7 करोड़ से अधिक लोगों तक डिजिटल और ऑन-ग्राउंड माध्यम से पहुंच बना चुकी है।

यह कार्यक्रम भारत को एक फिट, मजबूत और वैश्विक खेल शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, खासकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारियों के संदर्भ में।

पूर्वोत्तर में खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हाई परफॉर्मेंस सेंटर का रक्ष खडसे ने किया दौरा, खेल इकोसिस्टम की समीक्षा की

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खेल एवं युवा मामलों की राज्य मंत्री रक्ष खडसे ने आज असम स्थित खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (KISCE) और गुवाहाटी के हाई परफॉर्मेंस सेंटर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों, कोचों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों और अधिकारियों से बातचीत की तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकसित हो रहे उच्च-प्रदर्शन खेल पारिस्थितिकी तंत्र की समीक्षा की।

दौरे के दौरान मंत्री ने हाई परफॉर्मेंस सेंटर की विभिन्न प्रशिक्षण और पुनर्वास सुविधाओं का निरीक्षण किया, जिनमें खेल विज्ञान प्रयोगशालाएं, रिकवरी एवं रिहैबिलिटेशन यूनिट्स, फिजियोलॉजिकल और बायोमैकेनिकल असेसमेंट सुविधाएं तथा खिलाड़ी सहायता प्रणाली शामिल हैं। इस निरीक्षण ने भारत के खेल ढांचे में खेल विज्ञान, तकनीक और डेटा-आधारित प्रशिक्षण के बढ़ते उपयोग को दर्शाया।

मंत्री के साथ इस दौरे में कौसर जमील हिलाली (विशेष सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग), अंकुर भाराली (निदेशक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग), डी.के. मित्तल (क्षेत्रीय निदेशक, SAI गुवाहाटी), KISCE असम के हाई परफॉर्मेंस मैनेजर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए रक्ष खडसे ने उनके समर्पण और मेहनत की सराहना की और उन्हें अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प के साथ उत्कृष्टता की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने देशभर में खेल अवसंरचना को मजबूत करने और खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण वातावरण तैयार करने पर सरकार के निरंतर फोकस को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का खेल ढांचा, खिलाड़ी सहायता प्रणाली और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियां तेजी से विकसित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि Khelo India State Centre of Excellence Assam और हाई परफॉर्मेंस सेंटर जैसी संस्थाएं प्रतिभाओं को निखारने और अंतरराष्ट्रीय सफलता के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

हाई परफॉर्मेंस सेंटर इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खेल विज्ञान और पुनर्वास सुविधा के रूप में उभरा है, जिसमें चोट प्रबंधन, रिकवरी, शारीरिक परीक्षण, मोशन एनालिसिस और प्रदर्शन सुधार जैसी आधुनिक प्रणालियां मौजूद हैं।

मंत्री ने खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत चल रही खिलाड़ी विकास योजनाओं की भी समीक्षा की और पूर्वोत्तर के युवा खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

यह दौरा भारत के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें वैज्ञानिक, खिलाड़ी-केंद्रित और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, विशेष रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और उससे आगे की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए।

गांधीनगर SAI NCoE में खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई खेल सुविधाओं का उद्घाटन किया, पैरा खिलाड़ियों के लिए मजबूत इकोसिस्टम पर जोर

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केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज गांधीनगर स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCoE) में कई नई खेल अवसंरचना सुविधाओं का उद्घाटन किया। यह पहल देशभर में विश्वस्तरीय उच्च-प्रदर्शन खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराती है।

उन्होंने नव-निर्मित पैरा एथलीट हॉस्टल, सेंट्रलाइज्ड डाइनिंग हॉल, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग हॉल, मल्टीपर्पस ट्रेनिंग हॉल और मेडिटेशन पार्क का उद्घाटन किया। ये सभी सुविधाएं खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, रिकवरी, पोषण, खेल विज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य को एकीकृत रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित की गई हैं।

कार्यक्रम में खिलाड़ियों, कोचों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का खेल इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है, जिसमें खिलाड़ी-केंद्रित विकास और समावेशी खेल ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी वास्तव में हमारे पैरा एथलीट्स के ‘परम मित्र’ हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल खेल ढांचे का विस्तार किया है, बल्कि पैरा एथलीट्स को सम्मान, समान अवसर और सुलभता भी सुनिश्चित की है।”

वैश्विक खेलों में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि एशियन पैरा गेम्स में 111 पदक और पैरालिंपिक 2024 में 29 पदक भारत की बढ़ती खेल क्षमता को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियाँ केवल संयोग नहीं हैं, बल्कि खिलाड़ियों में निरंतर निवेश, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं और मजबूत आत्मविश्वास का परिणाम हैं।

डॉ. मांडविया ने बताया कि SAI NCoE गांधीनगर, जिसे पैरा खेलों के लिए नोडल सेंटर घोषित किया गया है, देश के प्रमुख उच्च-प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्रों में से एक बन रहा है। यहां वर्तमान में पैरा एथलेटिक्स, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, पावरलिफ्टिंग, स्विमिंग और फेंसिंग सहित छह पैरा खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, साथ ही हैंडबॉल, कबड्डी और खो-खो भी शामिल हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय कोचिंग कैंप में भाग ले रहे खिलाड़ियों से भी बातचीत की और कहा कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उच्च स्तरीय सुविधाएं भारत की भविष्य की अंतरराष्ट्रीय सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मंत्री ने कहा कि पैरा एथलीट हॉस्टल, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग हॉल और सेंट्रलाइज्ड डाइनिंग हॉल केवल इमारतें नहीं हैं, बल्कि भारत के भविष्य के चैंपियंस में किया गया निवेश हैं।

उन्होंने बताया कि मल्टीपर्पस ट्रेनिंग हॉल मुख्य रूप से कबड्डी प्रशिक्षण के लिए उपयोग किया जाएगा, जबकि स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग हॉल खिलाड़ियों की फिटनेस, रिकवरी और प्रदर्शन सुधार में मदद करेगा।

यह भी उल्लेख किया गया कि इन सुविधाओं को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से विकसित किया गया है, जो सरकार के समावेशी खेल विकास दृष्टिकोण को दर्शाता है।

कार्यक्रम में भारतीय खेल प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी, कोच, खिलाड़ी और खेल जगत के सदस्य उपस्थित रहे।

दंतेवाड़ा के 17 गांवों में एनएमडीसी के समर कैंप शुरू, 1700 बच्चों को मिलेगा रचनात्मक शिक्षा और खेलों का अवसर

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एनएमडीसी ने आदिवासी समुदायों के बच्चों के समग्र विकास और रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दंतेवाड़ा जिले के 17 गांवों में 20 मई से 15 जून 2026 तक विशेष समर कैंप शुरू किए हैं।

इस अनूठी पहल के तहत लगभग 1700 बच्चों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान अनुभवात्मक शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और खेलों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकांश गांवों में गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं, जबकि अधिक बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जनजागरूकता और प्रेरणा अभियान भी चलाया जा रहा है। वर्तमान में प्रत्येक गांव में एनएमडीसी समर कैंप में प्रतिदिन 30 से 40 बच्चे भाग ले रहे हैं।

इन शिविरों में बच्चे प्रतिदिन तीन से चार घंटे तक पुस्तक पठन, हस्तशिल्प, संगीत कार्यशालाओं और रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। इसके बाद वे फ्रिस्बी, कबड्डी और खो-खो जैसे खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं तथा दिन का समापन पौष्टिक अल्पाहार के साथ करते हैं।

यह पहल शिक्षा और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में कार्यरत संस्था WOSCA के सहयोग से संचालित की जा रही है। समर कैंप बस्तर क्षेत्र के बच्चों के लिए सुरक्षित, प्रेरणादायक और सकारात्मक वातावरण तैयार कर रहे हैं, जिससे वे आत्मविश्वास और नई क्षमताओं के साथ आगे बढ़ सकें।

ग्रामीण क्षेत्रों में जहां संरचित रचनात्मक शिक्षा के अवसर सीमित हैं, वहां एनएमडीसी की यह पहल बच्चों की प्रतिभा और आकांक्षाओं को नई दिशा देने का कार्य कर रही है। गांवों के विकास के प्रति अपनी व्यापक प्रतिबद्धता के तहत एनएमडीसी बच्चों में सामाजिक और व्यवहारिक कौशल विकसित कर उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी युवा बनने में मदद कर रहा है।

जिन गांवों में समर कैंप शुरू किए गए हैं वहां बच्चों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। आने वाले सप्ताहों में इस पहल के विस्तार के साथ एनएमडीसी ने परिवारों और समुदाय के लोगों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है, ताकि दंतेवाड़ा के बच्चों के लिए यह गर्मी यादगार और प्रेरणादायक बन सके।

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