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अवैध अफीम खेती पर सख्त हुए CM साय, 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश

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 रायपुर : प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती का मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है।

बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है।

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए।

उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है।

योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी।

इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

आधार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा आत्मनिर्भर बनी संगीता सिंह

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 धनंजय राठौर सयुक्त संचालक, जनसंपर्क

लोकेश्वर सिंह सहायक जनसंपर्क अधिकारी
रायपुर : स्वयं सहायता समूहों को कम ब्याज दर पर ऋण और कौशल विकास के अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे महिलाएं छोटी-छोटी आजीविका गतिविधियां (जैसे- खेती, पशुपालन, सिलाई, आधार से जुड़ी सेवाएं ) शुरू कर सकें। इस मिशन के अंतर्गत महिलाएं सशक्त बनकर न केवल परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर होकर सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार और प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जब महिलाओं को सही अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन में बदलाव लाती हैं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जिला मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम दुधाशी की निवासी संगीता सिंह की कहानी भी महिला सशक्तिकरण की ऐसी ही प्रेरक मिसाल है, जिन्होंने अपने परिश्रम और आत्मविश्वास से एक नई पहचान बनाई है।

बीसी सखी के रूप में शुरू हुआ सफ

संगीता सिंह ने वर्ष 2021 में बीसी सखी के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की। उनके माध्यम से गांव के लोगों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिलने लगा। पहले जहां ग्रामीणों को पैसे निकालने या बैंक से जुड़े कार्यों के लिए दूर शहर या ब्लॉक मुख्यालय तक जाना पड़ता था, वहीं अब यह सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध होने लगीं। इससे ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बचने लगा और गांव के लोगों को बड़ी सुविधा मिली।

स्वयं सहायता समूह से मिली आर्थिक मजबूती

संगीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने बिहान योजना के अंतर्गत अपने स्वयं सहायता समूह से 68 हजार रुपये का ऋण लिया था। इसी आर्थिक सहयोग से उन्होंने बीसी सखी के रूप में अपना कार्य शुरू किया। शुरुआत में कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन अपनी मेहनत, लगन और सेवा भावना से उन्होंने धीरे-धीरे गांव के लोगों का विश्वास जीत लिया। आज गांव के लोग उन्हें भरोसे के साथ अपनी बैंकिंग सेवाओं के लिए संपर्क करते हैं।

उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला आधार किट

संगीता सिंह के समर्पण और उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन को देखते हुए मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर के जिला प्रशासन ने उन्हें नई जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया। आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में आधार सेवाओं के विस्तार के उद्देश्य से जिले में पांच नए आधार केंद्र खोले जा रहे हैं। इसी पहल के तहत संगीता सिंह को लैपटॉप सहित आधार किट प्रदान की गई। जिला प्रशासन की ओर से ईडीएम श्री नारायण केवर्त ने उन्हें यह आधार किट सौंपा।

अब गांव में ही मिलेंगी आधार सेवाएं

आधार किट मिलने के बाद संगीता सिंह अब अपने गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आधार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी। इनमें नया आधार पंजीयन, आधार अपडेट तथा अन्य आवश्यक कार्य शामिल हैं। इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए शहर या ब्लॉक मुख्यालय तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें अपने गांव के पास ही सुविधाएं मिल सकेंगी।

अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

संगीता सिंह की सफलता की कहानी पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को अवसर और सहयोग मिले तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उनकी उपलब्धि यह भी साबित करती है कि महिलाएं केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम

जिला प्रशासन की यह पहल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत कर रही है। संगीता सिंह जैसी महिलाएं आज ग्रामीण भारत में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि आत्मविश्वास, परिश्रम और सही अवसर मिल जाए तो कोई भी महिला अपने सपनों को साकार कर सकती है। बिहान योजना का उद्देश्य गरीबों, विशेष रूप से महिलाओं के लिए मजबूत संस्थाएं बनाकर और उन्हें वित्तीय और आजीविका सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंच प्रदान करके गरीबी कम करने को बढ़ावा देना है।

प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने सौजन्य मुलाकात की।


मुख्यमंत्री साय ने सभी प्रशिक्षु न्यायाधीशों को न्यायिक सेवा में चयन के लिए बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण और सशक्त स्तंभ है। आने वाले समय में आप सभी के कंधों पर समाज और न्याय व्यवस्था से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आप सभी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए इन जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि न्यायपालिका आमजन के अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।

इस अवसर पर विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सांवत, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की संचालक निधि शर्मा तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

बिहान से बदली महिलाओं की जिंदगी, आर्थिक सशक्तिकरण की राह पर बढ़ रहीं ‘लखपति दीदी

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 रायपुर : राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं का प्रभाव अब गांव-गांव में दिखाई देने लगा है।


राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार और समूह आधारित गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं।

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड के ग्राम पोड़ीदल्हा की निवासी श्रीमती पुष्पलता साहू इसका प्रेरक उदाहरण हैं। पहले उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाता था।

साहू बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर माह मिलने वाली सहायता राशि से परिवार की आर्थिक स्थिति में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है। इस राशि से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी मिली। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में शामिल हुईं। समूह की ताकत और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने अपनी आय में लगातार वृद्धि की और आज वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।

पुष्पलता साहू न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आजीविका गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और उन्हें मार्गदर्शन भी देती हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं ने महिलाओं को गरीबी से बाहर निकलकर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया है। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला है।

14 मार्च को लगेगी नेशनल लोक अदालत, आपसी सुलह से निपटेंगे हजारों मामले

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 रायपुर : आपसी सुलह (राजीनामा) के जरिए मामलों का निपटारा करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के तत्वावधान में शनिवार 14 मार्च 2026 को देशव्यापी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) बिलासपुर द्वारा प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों एवं व्यवहार न्यायालयों में भी लोक अदालत आयोजित किए जाएंगे। यह कैलेण्डर वर्ष 2026 की पहली लोक अदालत होगी।


लोक अदालत के दिन जिला न्यायालय एवं तालुका न्यायालय (व्यवहार न्यायालय) में लंबित शमनीय अपराध के प्रकरण मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित प्रकरण, 138 एनआई एक्ट, के अंतर्गत चेक बाउंस का प्रकरण धारा 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता तथा मेट्रोमोनियल डिस्प्युट के अलावा जल कर, संपत्ति कर, राजस्व संबंधी प्रकरण ट्रैफिक चालान, भाड़ा नियंत्रण आबकारी से संबंधित प्रकरणों के निराकरण किया जाएगा। इसी प्रकार बैंक विद्युत संबंधी प्री-लिटिगेशन प्रकरण, राजस्व न्यायालय खंडपीठ में खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे, वारिसों के मध्य बटवारे का निराकरण किया जाएगा। न्यायालयों में बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों में कमी लाने के उद्देश्य से तथा प्रभावित पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में नेशनल लोक अदालत एक प्रभावशाली कदम है।

नेशनल लोक अदालत के लिए खण्डपीठों का गठन कर विभिन्न प्रकरणों तथा प्री.लिटिगेशन का निराकरण किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय में राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरणों धारा. 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों, बैंक रिकवरी प्रकरण, सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, विद्युत संबंधी मामलों तथा पारिवारिक विवाद के मामलों का निराकरण किया जाता हैं। इसके अतिरिक्त राजस्व, बैंक, विद्युत विभाग दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री.लिटिगेशन प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत किए जाएंगे। विधिवत पंजीयन उपरांत संबंधित पक्षकारों के प्रकरण लोक अदालत खण्ड पीठ में निराकृत किए जाएंगे।

इस तरह पक्षकार अपने न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से करा सकते हैं। इसके अलावा लोक अदालत में दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद् में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री-लिटिगेशन प्रकरण, याददाश्त के आधार पर बंटवारा, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक रिकवरी प्रकरण, कब्जे के आधार पर बंटवारा से संबंधित प्रक्ररणों को निराकृत किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) के अंतर्गत कार्यवाही के मामले, रेन्ट कंट्रोल एक्ट, सूखाधिकार से संबंधित मामलों के साथ-साथ विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण के मामले तथा अन्य प्रकृति के सभी मामले सम्मिलित और चिन्हांकित कर आपसी राजीनामा के आधार पर नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में कमर्शियल LPG सप्लाई सीमित, होटल-रेस्टोरेंट पर असर; घरेलू गैस का पर्याप्त स्टॉक

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 रायपुर। अंतरराष्ट्रीय हालातों के मद्देनज़र Chhattisgarh में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति फिलहाल सीमित कर दी गई है। Israel, United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव के चलते यह कदम उठाया गया है। इसका असर मुख्य रूप से होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ रहा है। हालांकि राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।


राज्य में गैस और ईंधन की उपलब्धता की समीक्षा के लिए Mahanadi Bhawan में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव Reena Baba Saheb Kangale ने ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी पांच एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और इसकी आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।

अस्पताल और स्कूलों को प्राथमिकता

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि फिलहाल कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। परीक्षा अवधि को देखते हुए स्कूलों और छात्रावासों में गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर होटलों और अन्य संस्थानों को लगभग 15 प्रतिशत तक कमर्शियल सप्लाई दी जा सकती है।

कालाबाजारी रोकने के निर्देश

सरकार ने एलपीजी गैस के दुरुपयोग और अवैध रिफिलिंग को रोकने के लिए जिलों में सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन को Essential Commodities Act के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है, ताकि कालाबाजारी या अनियमितता पर रोक लगाई जा सके।

डीजल-पेट्रोल का भी पर्याप्त स्टॉक

बैठक में डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के सभी डिपो में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर

खाद्य सचिव रीना कंगाले ने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य में एलपीजी गैस और अन्य ईंधनों की कोई कमी नहीं है। यदि किसी उपभोक्ता को गैस आपूर्ति में समस्या आती है तो वह टोल-फ्री नंबर 1800-233-3663 पर शिकायत दर्ज करा सकता है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है।

विधानसभा में सड़क हादसों पर सरकार घिरी, मंत्री ने बताए कार्रवाई के आंकड़े

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उनमें हो रही मौतों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। Raghvendra Singh ने सड़क हादसों के प्रमुख कारणों, मृत्यु दर और बड़े व हल्के वाहनों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।


सड़क एवं परिवहन मंत्री Kedar Kashyap ने सदन को बताया कि वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि और लोगों की लापरवाही सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने Janjgir-Champa जिले का उदाहरण देते हुए कार्रवाई के आंकड़े साझा किए।

मंत्री के अनुसार,

  • वर्ष 2023 में 29,104 वाहनों पर कार्रवाई की गई।
  • वर्ष 2024 में 39,000 वाहनों पर कार्रवाई हुई।
  • वर्ष 2025 में 41,000 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

इस दौरान विधायक राघवेंद्र सिंह ने बड़े वाहनों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाने और प्रमुख बायपास मार्गों पर ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की मांग की।

वहीं भाजपा विधायक Ajay Chandrakar ने स्मार्ट सिटी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अंतर्विभागीय समिति गठित करने और जिम्मेदारी तय करने का सुझाव दिया। इस पर मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सभी संबंधित विभागों के समन्वय से इस दिशा में सुधार लाने के प्रयास किए जाएंगे।

सदन में नेता प्रतिपक्ष ने भी ट्रॉमा सेंटर और क्रिटिकल केयर यूनिट की जल्द स्थापना पर जोर दिया, जिस पर मंत्री केदार कश्यप ने आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

वैज्ञानिकों ने मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स में ऊष्मा प्रवाह का रहस्य सुलझाया

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वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स में ऊष्मा (हीट) किस प्रकार प्रवाहित होती है। यह खोज स्पिन्ट्रॉनिक्स, मैग्नेटिक मेमोरी और क्वांटम डिवाइस जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस अध्ययन ने ठोस अवस्था भौतिकी (Condensed Matter Physics) में लगभग एक दशक पुराने रहस्य को सुलझाया है और उच्च प्रदर्शन वाले इलेक्ट्रॉनिक तथा मैग्नेटिक सिस्टम में उन्नत थर्मल प्रबंधन की नई संभावनाएँ खोली हैं।

सामान्य सेमीकंडक्टर्स में तापमान बढ़ने के साथ थर्मल कंडक्टिविटी घटती है, क्योंकि ऊष्मा को वहन करने वाले लैटिस कंपन (फॉनॉन) अधिक बिखरने लगते हैं। लेकिन कुछ मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स इस नियम का पालन नहीं करते और अपने मैग्नेटिक ट्रांज़िशन तापमान से ऊपर थर्मल कंडक्टिविटी में असामान्य वृद्धि दिखाते हैं। क्रोमियम नाइट्राइड (CrN) ऐसा ही एक मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर है, जिसका उपयोग कोटिंग और इलेक्ट्रॉनिक अनुप्रयोगों में किया जाता है। अब तक इस असामान्य व्यवहार का सूक्ष्म कारण स्पष्ट नहीं था।

जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बेंगलुरु के प्रोफेसर बिवास साहा के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने इस रहस्य को सुलझाने में सफलता प्राप्त की है। यह संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। अध्ययन में यह प्रमाणित किया गया कि फॉनॉन और मैग्नेटिक स्पिन फ्लक्चुएशन्स के बीच मजबूत युग्मन (coupling) मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स में ऊष्मा परिवहन को नियंत्रित करता है।

शोधकर्ताओं ने उन्नत तापमान-निर्भर इनएलास्टिक एक्स-रे स्कैटरिंग तकनीक का उपयोग करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले CrN थिन फिल्म्स में फॉनॉन के जीवनकाल को मापा। इससे यह समझने में मदद मिली कि जैसे-जैसे पदार्थ क्रमबद्ध मैग्नेटिक अवस्था से अव्यवस्थित अवस्था में परिवर्तित होता है, वैसे-वैसे लैटिस कंपन और मैग्नेटिक उत्तेजनाओं के बीच किस प्रकार अंतःक्रिया होती है।

अध्ययन में पाया गया कि ध्वनिक फॉनॉन (Acoustic Phonons), जो ऊष्मा के मुख्य वाहक होते हैं, नील तापमान (Néel Temperature) के आसपास मैग्नेटिक स्पिन फ्लक्चुएशन्स के साथ मजबूत अंतःक्रिया के कारण अत्यधिक प्रभावित होते हैं। लेकिन तापमान और बढ़ने पर जब मैग्नेटिक क्रम कमजोर होने लगता है, तब फॉनॉन का जीवनकाल असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप उच्च तापमान पर भी थर्मल कंडक्टिविटी बढ़ जाती है, जो सामान्य नियमों के विपरीत है।

इसके विपरीत ऑप्टिकल फॉनॉन सामान्य तापमान-निर्भर व्यवहार का पालन करते पाए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ऊष्मा परिवहन में स्पिन फ्लक्चुएशन्स की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इन निष्कर्षों की पुष्टि उन्नत एटोमिस्टिक स्पिन-डायनामिक्स सिमुलेशन और फर्स्ट-प्रिंसिपल कैलकुलेशन से भी हुई, जिससे मैग्नेटिक फ्लक्चुएशन्स और असामान्य ऊष्मा संचरण के बीच स्पष्ट सूक्ष्म तंत्र स्थापित हुआ।

प्रोफेसर बिवास साहा ने कहा कि यह अध्ययन पहली बार प्रत्यक्ष प्रयोगात्मक प्रमाण प्रस्तुत करता है, जो मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर्स में स्पिन फ्लक्चुएशन्स और बढ़ी हुई थर्मल कंडक्टिविटी के बीच संबंध को दर्शाता है। इससे स्पिन्ट्रॉनिक्स, मैग्नेटिक और क्वांटम उपकरणों में बेहतर हीट मैनेजमेंट के नए रास्ते खुल सकते हैं।

इस खोज के व्यापक तकनीकी प्रभाव हो सकते हैं, क्योंकि उच्च शक्ति वाले स्पिन्ट्रॉनिक उपकरणों, मैग्नेटिक मेमोरी और भविष्य की क्वांटम तकनीकों के विश्वसनीय संचालन के लिए प्रभावी ऊष्मा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। मैग्नेटिक गुणों के माध्यम से थर्मल ट्रांसपोर्ट को नियंत्रित करने की क्षमता भविष्य में अधिक तेज और ऊर्जा-कुशल उपकरणों के विकास में मदद कर सकती है।

यह शोध JNCASR, IISER तिरुवनंतपुरम, लिंकॉपिंग यूनिवर्सिटी (स्वीडन) तथा अंतरराष्ट्रीय सिंक्रोट्रॉन सुविधाओं SPring-8 (जापान) और DESY (जर्मनी) के सहयोग से किया गया। यह अध्ययन हाल ही में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Science Advances में प्रकाशित हुआ है, जो उन्नत सामग्री अनुसंधान में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर सीएसआईआर-सीआरआरआई और एएमएनएस इंडिया के बीच अनुसंधान समझौता

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर सीएसआईआर–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और इस्पात क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AMNS India) के बीच एक अनुसंधान एवं विकास (R&D) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स (Iron Ore Tailings) के उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन करना है।

इस अवसर पर सीएसआईआर की महानिदेशक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स का उपयोग “खनन अपशिष्ट से हरित सड़कें (Mine Waste to Green Roads)” बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने बताया कि देश में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित विभिन्न आयरन ओअर बेनिफिशिएशन संयंत्रों से हर वर्ष लगभग 18–20 मिलियन टन आयरन ओअर टेलिंग्स उत्पन्न होते हैं। इन टेलिंग्स को आमतौर पर बड़े बांधों में संग्रहित किया जाता है और इन्हें स्लाइम्स भी कहा जाता है, जो पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से चुनौतियां पैदा करते हैं।

इस R&D समझौते का उद्देश्य आयरन ओअर टेलिंग्स के प्रबंधन की समस्या का समाधान करना और सड़क निर्माण में प्राकृतिक एग्रीगेट्स की मांग को कम करना है। इस पहल के अंतर्गत CSIR-CRRI के वैज्ञानिक प्रयोगशाला परीक्षण, सामग्री का विश्लेषण और पेवमेंट डिज़ाइन अध्ययन करेंगे, ताकि सड़क की विभिन्न परतों में आयरन ओअर टेलिंग्स की उपयोगिता का आकलन किया जा सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अरविंद बोधंकर, मुख्य सततता अधिकारी (Chief Sustainability Officer), AMNS इंडिया थे। उन्होंने कहा कि उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और टिकाऊ अवसंरचना के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह साझेदारी औद्योगिक उप-उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देकर देश के विकास में योगदान देगी।

सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. च. रवि शेखर ने कहा कि संस्थान अगली पीढ़ी की टिकाऊ सड़क प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि AMNS इंडिया के साथ यह सहयोग सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स के वैज्ञानिक परीक्षण और फील्ड प्रदर्शन को संभव बनाएगा, जिससे भारत सतत पेवमेंट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका और मजबूत करेगा।

इस पहल का नेतृत्व सीएसआईआर-सीआरआरआई के फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख श्री सतीश पांडे कर रहे हैं, जो स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी के आविष्कारक भी हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और प्रयोगशाला विश्लेषण के माध्यम से आयरन ओअर टेलिंग्स को सड़क निर्माण में अच्छी मिट्टी और प्राकृतिक एग्रीगेट्स के विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह के दौरान सतत परिवहन अवसंरचना से संबंधित कई नवीन तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया। इनमें कृषि अपशिष्ट आधारित बायो-बिटुमेन, स्टील स्लैग आधारित ECOFIX त्वरित गड्ढा मरम्मत तकनीक, स्लैग और फ्लाई ऐश आधारित TERASURFACING तकनीक, तथा वेस्ट प्लास्टिक आधारित मॉड्यूलर जियोसेल जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य सड़क निर्माण में परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में AMNS इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों, CSIR-CRRI के वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और सड़क एवं इस्पात क्षेत्र से जुड़े कई हितधारकों ने भाग लिया। इस आयोजन ने भारत में सतत अवसंरचना विकास के लिए विज्ञान आधारित समाधानों के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) स्थापना दिवस समारोह में सौर ऊर्जा की वैश्विक भूमिका पर जोर

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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सौर ऊर्जा के बढ़ते वैश्विक महत्व और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने 11 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित ISA स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह गठबंधन साझा दृष्टि और वैश्विक साझेदारी की शक्ति को दर्शाता है, जो सौर ऊर्जा के माध्यम से सतत विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मंत्री ने कहा कि लगभग एक दशक पहले भारत और फ्रांस ने मिलकर एक दूरदर्शी पहल की थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक विकास के केंद्र में सूर्य की ऊर्जा को स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल एक वैश्विक आंदोलन में बदल गई।

120 से अधिक देशों का वैश्विक गठबंधन

मंत्री  जोशी ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 120 से अधिक देशों के वैश्विक गठबंधन के रूप में विकसित हो चुका है, जो मिलकर सौर ऊर्जा के प्रसार को तेज करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ISA ने सौर ऊर्जा के वादे को वास्तविक और जीवन बदलने वाले प्रभाव में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ISA के प्रयासों के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों का सौर ऊर्जा से संचालन, किसानों को सौर सिंचाई और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना तथा स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना संभव हुआ है। इसके अलावा स्टार्टअप, युवा पेशेवरों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देकर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसर और रोजगार सृजित किए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि ISA की स्थापना भारतीय दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना पर आधारित है, जो यह मानता है कि पूरा विश्व एक परिवार है और सभी देशों को मिलकर स्वच्छ ऊर्जा के लाभों को समान रूप से साझा करना चाहिए।

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि

मंत्री जोशी ने भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 136 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लगभग आधा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मजबूत नीतिगत प्रतिबद्धता और नवाचार का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना जैसे कार्यक्रम लाखों परिवारों को अपनी स्वच्छ बिजली स्वयं उत्पन्न करने का अवसर दे रहे हैं, जबकि पीएम-कुसुम योजना किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से सशक्त बना रही है।

विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा का तेज विस्तार

मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। जहां दुनिया को पहली 1000 गीगावाट सौर क्षमता स्थापित करने में लगभग 25 वर्ष लगे, वहीं अगली 1000 गीगावाट क्षमता इससे कहीं कम समय में स्थापित होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र अब तेजी से ग्लोबल साउथ की ओर बढ़ रहा है, जहां ऊर्जा की बढ़ती मांग और प्रचुर सौर संसाधन पारंपरिक ऊर्जा मार्गों को पीछे छोड़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सरकारों, विकास साझेदारों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र को एक साथ लाकर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका

मंत्री जोशी ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने ISA द्वारा संचालित ग्लोबल मिशन ऑन AI फॉर एनर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य नवाचार के माध्यम से अधिक स्मार्ट और लचीली ऊर्जा प्रणालियां विकसित करना है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परिवर्तन केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास, लचीलापन और समृद्धि के नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि सौर ऊर्जा आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों में से एक बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में मजबूत नीतिगत ढांचा और प्रभावी कार्यान्वयन प्रणाली के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना ने कहा कि ISA आज 125 सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देशों का एक वैश्विक गठबंधन बन चुका है, जो यह मानते हैं कि दुनिया के सबसे प्रचुर ऊर्जा स्रोत को सबसे लोकतांत्रिक भी होना चाहिए।

इस अवसर पर ग्रीन हाइड्रोजन और स्टोरेज स्टार्टअप चैलेंज 2026 की भी घोषणा की गई। इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर काम करने वाले नवाचारी स्टार्टअप्स की पहचान करना और उन्हें सहयोग प्रदान करना है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने एक नई उन्नत वेबसाइट भी लॉन्च की, जो सदस्य देशों और भागीदारों को ज्ञान, कार्यक्रमों और अवसरों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना भारत और फ्रांस द्वारा 2015 में पेरिस में आयोजित COP21 जलवायु सम्मेलन के दौरान की गई थी। यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी मंच है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देना और सतत विकास को गति देना है।

आज ISA अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों में ऊर्जा पहुंच बढ़ाने, आजीविका मजबूत करने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मृत्यु कम करने के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला

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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन ने वन्यजीव संस्थान, देहरादून (Wildlife Institute of India – WII) के सहयोग से 10-11 मार्च 2026 को देहरादून में “रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मृत्यु को कम करने हेतु नीति कार्यान्वयन” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यक्रम में लगभग 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें MoEFCC के प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन, रेल मंत्रालय, हाथी क्षेत्र वाले राज्यों के वन विभागों और प्रमुख संरक्षण वैज्ञानिकों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। कार्यशाला में ईस्ट सेंट्रल रेलवे, ईस्ट कोस्ट रेलवे, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे, नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे, नॉर्दर्न रेलवे, साउथ ईस्टर्न रेलवे, साउदर्न रेलवे और साउथ वेस्टर्न रेलवे के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

भारत में विश्व की कुल एशियाई हाथी आबादी का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पाया जाता है। इनके प्रमुख आवास पूर्वी, उत्तर-पूर्वी, दक्षिणी और मध्य भारत में फैले हुए हैं। लेकिन आवासों के खंडित होने और हाथी क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क के विस्तार के कारण कई राज्यों—असम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़ और झारखंड—में रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मृत्यु के मामलों में वृद्धि हुई है। इस कार्यशाला का उद्देश्य संरक्षण और अवसंरचना क्षेत्रों के बीच समन्वय को मजबूत करना तथा वैज्ञानिक आधार पर समाधान विकसित करना था।

वन्यजीव मृत्यु की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए MoEFCC ने WII और रेल मंत्रालय के सहयोग से हाथी क्षेत्रों में 110 संवेदनशील रेलवे खंड तथा दो बाघ क्षेत्रों में 17 अतिरिक्त खंडों की पहचान की है। प्रोजेक्ट एलीफेंट, WII, राज्य वन विभागों और भारतीय रेल की संयुक्त टीमों द्वारा किए गए विस्तृत फील्ड सर्वेक्षणों में प्रत्येक स्थान की पारिस्थितिक परिस्थितियों का अध्ययन कर स्थान-विशिष्ट समाधान सुझाए गए।

कुल 127 रेलवे खंडों (3,452.4 किमी) के विस्तृत आकलन के आधार पर 14 राज्यों में 77 खंड (1,965.2 किमी) को प्राथमिकता दी गई है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही और दुर्घटना जोखिम को देखते हुए विशेष उपाय किए जाएंगे। इन प्राथमिक खंडों के लिए 705 शमन संरचनाओं की सिफारिश की गई है, जिनमें 503 रैंप और लेवल क्रॉसिंग, 72 पुलों का विस्तार या संशोधन, 39 फेंसिंग/ट्रेंच संरचनाएं, 4 एग्जिट रैंप, 65 नए अंडरपास और 22 ओवरपास शामिल हैं, ताकि वन्यजीव सुरक्षित रूप से रेलवे लाइन पार कर सकें।

कई नई रेलवे परियोजनाओं और ट्रैक विस्तार योजनाओं में भी वन्यजीव-अनुकूल संरचनाएं शामिल की गई हैं। उदाहरण के तौर पर छत्तीसगढ़ के अचनाकमार-अमरकंटक हाथी कॉरिडोर से गुजरने वाली गेवरा रोड–पेंड्रा रोड रेलवे लाइन, महाराष्ट्र की दरेकासा–सालेकासा ट्रैक ट्रिपलिंग परियोजना, नागभीड–इतवारी गेज परिवर्तन परियोजना और वडसा–गडचिरोली रेलवे लाइन (जो कान्हा–नवेगांव–ताडोबा–इंद्रावती टाइगर कॉरिडोर को काटती है) में ऐसे प्रावधान किए गए हैं।

असम के अजारा–कामाख्या रेलवे खंड के 3.5 किमी लंबे संवेदनशील हिस्से में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप प्रस्तावित है। यह हिस्सा रानी–गढ़भंगा–दीपोर बील हाथी कॉरिडोर से गुजरता है, जहां पहले कई हाथियों की मृत्यु हुई है। इस क्षेत्र में रेलवे लाइन को ऊंचा (एलीवेटेड) बनाया जाएगा ताकि हाथी सुरक्षित रूप से कॉरिडोर पार कर सकें।

तकनीकी समाधानों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में Distributed Acoustic System (DAS) आधारित Intrusion Detection System (IDS) लगाया जा रहा है, जो हाथियों की गतिविधि का पता लगाकर चेतावनी देता है। इसका पायलट प्रोजेक्ट नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के चार खंडों में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है, जो असम में कुल 64.03 किमी हाथी कॉरिडोर और 141 किमी रेलवे ब्लॉक सेक्शन को कवर करता है। इस प्रणाली को अब उत्तर बंगाल और ओडिशा के संवेदनशील रेलवे क्षेत्रों में भी लागू किया जा रहा है।

इसके अलावा तमिलनाडु के मदुक्करई क्षेत्र में एक AI आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली भी लागू की गई है। इसमें 12 टावरों पर लगे थर्मल और मोशन-सेंसिंग कैमरे हाथियों की गतिविधि को ट्रैक करते हैं और ट्रैक से 100 मीटर के भीतर हाथियों के आने पर वन और रेलवे अधिकारियों को तुरंत सूचना देते हैं, जिससे ट्रेन की गति कम की जा सके और हाथियों को सुरक्षित पार करने का अवसर मिल सके।

कार्यशाला में हाथियों की पारिस्थितिकी, अवसंरचना योजना और जैव विविधता संरक्षण पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों ने राज्यों के आंकड़ों, केस स्टडी और दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों—जैसे आवास विखंडन, भूमि उपयोग परिवर्तन, तेज ट्रेन गति, रात में संचालन और हाथियों की मौसमी आवाजाही—पर चर्चा की।

क्षेत्रीय कार्य समूहों ने विभिन्न परिदृश्यों (शिवालिक-गंगा मैदान, मध्य भारत एवं पूर्वी घाट, उत्तर-पूर्व भारत और पश्चिमी घाट) में चल रहे प्रयासों की समीक्षा की और क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियां सुझाईं। बेहतर प्रथाओं में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, सेंसर और AI आधारित पहचान तकनीक, GIS निगरानी और सामुदायिक चेतावनी एवं गश्त नेटवर्क शामिल रहे।

कार्यशाला में रेलवे प्राधिकरणों, वन विभागों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही जोखिम मूल्यांकन, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए मानकीकृत प्रोटोकॉल विकसित करने तथा डेटा साझाकरण को मजबूत करने की सिफारिश की गई। प्रतिभागियों ने AI आधारित पहचान, रिमोट सेंसिंग और अन्य शोध क्षेत्रों को भी प्राथमिकता देते हुए प्रोजेक्ट एलीफेंट और रेल मंत्रालय के तहत एक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया, ताकि वैज्ञानिक और सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से हाथी-ट्रेन टकराव की घटनाओं को कम किया जा सके।

जयशंकर की कूटनीति का असर: होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को मिली हरी झंडी

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 Strait of Hormuz : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच हुई अहम बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से नई दिल्ली को बड़ी राहत मिली है।


यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और दुनिया के तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

भारत पहुंचा पहला तेल टैंकर

बुधवार (11 मार्च) को लाइबेरियाई ध्वज वाला टैंकर Shenlong Suezmax सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर Mumbai Port पहुंच गया। यह जहाज शत्रुता शुरू होने के बाद भारत पहुंचने वाली कच्चे तेल की पहली खेप लेकर आया है।

यह टैंकर 1 मार्च को Ras Tanura Port से 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चे तेल के साथ रवाना हुआ था। 8 मार्च को इसने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश किया और कुछ समय के लिए ट्रैकिंग रडार से गायब हो गया। बाद में 9 मार्च को यह दोबारा दिखाई दिया और सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज का कुछ समय के लिए रडार से ओझल होना सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि उन जलक्षेत्रों से सुरक्षित निकला जा सके जहां हाल के दिनों में ईरान ने कुछ व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य

Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा चोकपॉइंट्स में गिना जाता है।

दुनिया के कच्चे तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यदि इस रास्ते में लंबे समय तक बाधा आती है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

ईरान की ओर से भारतीय जहाजों को दी गई अनुमति को कूटनीतिक स्तर पर भारत की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति को फिलहाल राहत मिली है।

भाजपा छत्तीसगढ़ में मीडिया विभाग में फेरबदल, प्रवक्ता और मीडिया पैनलिस्ट की नई सूची जारी

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 रायपुर। भाजपा की छत्तीसगढ़ इकाई ने संगठन में फेरबदल करते हुए मीडिया विभाग में नई नियुक्तियों की घोषणा की है। पार्टी की ओर से प्रदेश स्तर पर प्रवक्ताओं और मीडिया पैनलिस्ट की सूची जारी की गई है।


जारी सूची के अनुसार सीए प्रवीण साहू, गोविंदा गुप्ता और राहुल राय को मीडिया विभाग में सह-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं गौरीशंकर श्रीवास सहित कुल 10 नेताओं को प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। ये प्रवक्ता पार्टी की नीतियों और गतिविधियों को मीडिया और जनता के बीच रखने का कार्य करेंगे।


पार्टी संगठन का कहना है कि मीडिया विभाग में किए गए इस फेरबदल से संगठन की संवाद व्यवस्था और जनसंपर्क को और मजबूत किया जाएगा। नई टीम पार्टी की नीतियों, कार्यक्रमों और सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से आम जनता तक पहुंचाने का काम करेगी।

पार्टी नेतृत्व ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई है कि वे संगठन को और अधिक सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

कांग्रेस का नया प्लान: भाजपा कार्यालय की जगह अब विधानसभा घेराव की तैयारी

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में कांग्रेस के प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम को लेकर नया अपडेट सामने आया है। Chhattisgarh Pradesh Congress Committee के नए निर्देश के बाद भाजपा कार्यालय घेराव का कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।


पार्टी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक अब 17 मार्च को विधानसभा घेराव का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी वजह से पहले तय किया गया भाजपा कार्यालय घेराव कार्यक्रम टालने का फैसला लिया गया है।

कांग्रेस नेताओं ने सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से अपील की है कि कार्यक्रम स्थगित होने की जानकारी अपने-अपने क्षेत्रों में साथियों तक पहुंचा दें।

साथ ही यह भी बताया गया है कि 17 मार्च को होने वाले विधानसभा घेराव के विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी जल्द ही अलग से जारी की जाएगी।

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