Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

पौष पूर्णिमा आज, जानें शुभ मुहूर्त, स्नान-दान के नियम और धार्मिक महत्व

No comments Document Thumbnail

 Paush Purnima 2026 : पौष पूर्णिमा दान, स्नान, व्रत, तप और पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। यह तिथि न केवल व्यक्तिगत जीवन बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2026 में पौष पूर्णिमा आज 3 जनवरी, शनिवार को मनाई जा रही है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त और शुभ योग का संयोग बन रहा है, जो इसे धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से और भी फलदायी बनाता है।


शास्त्रों में इस दिन को पुण्य, मोक्ष और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्ति का श्रेष्ठ अवसर बताया गया है।

पौष पूर्णिमा 2026 की तिथि (वैदिक पंचांग अनुसार)

  • तिथि प्रारंभ: 2 जनवरी 2026 (शुक्रवार), शाम 06:53 बजे
  • तिथि समाप्त: 3 जनवरी 2026 (शनिवार), दोपहर 03:32 बजे
  • उदया तिथि अनुसार पूर्णिमा: 3 जनवरी 2026 (शनिवार)
  • पूर्ण चंद्र दर्शन: 2 जनवरी 2026 की रात
  • स्नान, दान और व्रत का मुख्य दिन: 3 जनवरी 2026

शास्त्रों के अनुसार उदया तिथि में व्रत रखना श्रेष्ठ माना गया है, इसलिए इस वर्ष पौष पूर्णिमा का व्रत 3 जनवरी को करना शुभ है।

पौष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

  • इस दिन से माघ स्नान और कल्पवास की परंपरा आरंभ होती है।
  • प्रमुख तीर्थस्थल— प्रयागराज, हरिद्वार, काशी, उज्जैन, नासिक—में श्रद्धालु स्नान-दान करते हैं।
  • पवित्र नदियों में स्नान से पापों का क्षय और पुण्य की वृद्धि होती है।

पुराणों में उल्लेख

पद्म पुराण, विष्णु पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार पौष पूर्णिमा पर किया गया दान सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना पुण्यदायी होता है। यह तिथि पितृ शांति, गृहस्थ जीवन की समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है।

पौष पूर्णिमा के लाभ

  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: पूजा, ध्यान और दान से मानसिक व आध्यात्मिक शांति
  • पितृ शांति: पितृ तर्पण व जलदान से पितृ दोष से मुक्ति
  • धन-धान्य की प्राप्ति: लक्ष्मी-नारायण की पूजा से वैभव में वृद्धि
  • स्वास्थ्य और मोक्ष: सूर्योपासना और नदी स्नान से आरोग्य व मोक्ष की प्राप्ति

शुभ योग और अभिजीत मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:44 बजे से 12:26 बजे तक
  • इस मुहूर्त में दान, पूजा, जप और संकल्प अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।
  • पूर्ण चंद्रमा की उपस्थिति से मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है।

स्नान का महत्व और विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान सर्वोत्तम माना गया है।
  • गंगा, यमुना, सरस्वती या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
  • घर पर स्नान करते समय जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ फल देता है।
  • स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अवश्य दें।

स्नान-दान और व्रत के नियम

स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • दान में अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, घी, कंबल और तांबे के पात्र देना श्रेष्ठ माना गया है।
  • जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान करने से पुण्य में वृद्धि होती है।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से संचालित है भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’: डॉ. जितेंद्र सिंह

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री; तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से संचालित हो रही है, जिसमें तकनीक शासन, प्रशासन और आर्थिक परिवर्तन की केंद्रीय शक्ति के रूप में कार्य कर रही है।

वर्ष 2025 के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की उपलब्धियों पर दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि आने वाले दो दशकों में भारत की विकास यात्रा का नेतृत्व अंतरिक्ष, महासागर, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे नवाचार-आधारित क्षेत्र करेंगे।

इस अवसर पर भारत की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं के शीर्ष नेतृत्व उपस्थित थे, जिनमें भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ए. के. सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज सरकार द्वारा किए जा रहे प्रत्येक बड़े सुधार—चाहे वह किसी भी मंत्रालय या विभाग से संबंधित हों—तकनीक-सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि यह परिवर्तन 2014 से राष्ट्रीय नीति-निर्माण में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को निरंतर प्राथमिकता देने का परिणाम है। प्रधानमंत्री के 2014 के बाद से प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस संबोधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की झलक मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे सरकार की दीर्घकालिक सोच और वैश्विक दृष्टि का प्रतिबिंब बताया।

मंत्री ने डीप ओशन मिशन और गगनयान जैसे प्रमुख मिशनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत एक साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान और गहरे समुद्र अन्वेषण की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 में जहां एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाएगा, वहीं भारत 6,000 मीटर गहराई तक मानव-युक्त पनडुब्बी भी भेजेगा—जो एक ऐतिहासिक दोहरी उपलब्धि होगी।

उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड को वर्ष की प्रमुख उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसके तहत सरकार निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास को प्रत्यक्ष समर्थन दे रही है, जो वैश्विक स्तर पर एक अभूतपूर्व कदम है। इसके साथ ही अनुसंधान निधि के लोकतंत्रीकरण और उद्योग व परोपकार सहित गैर-सरकारी स्रोतों से 50–60% संसाधन जुटाने के उद्देश्य से अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना की गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नेशनल क्वांटम मिशन, NIDHI, PRERNA/PURSE और VAIBHAV कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहलें स्टार्टअप्स, अनुसंधान अवसंरचना और वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को सशक्त बना रही हैं, साथ ही भारतीय वैज्ञानिक प्रवासी समुदाय के साथ संरचित सहभागिता को बढ़ावा दे रही हैं।

सीएसआईआर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने स्टील स्लैग से बनी टिकाऊ सड़कों, स्वदेशी पैरासिटामोल उत्पादन, भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, मिलेट आधारित खाद्य नवाचारों और पीपीपी मॉडल पर विकसित हंसा-एनजी प्रशिक्षण विमान जैसी वैश्विक स्तर पर मान्य नवाचारों को रेखांकित किया। उन्होंने इसे “स्वदेशी नवाचार को विदेशी बाजारों की स्वीकृति” का उदाहरण बताया। छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने हेतु ‘वन डे ऐज़ ए साइंटिस्ट’ जैसे जन-संपर्क कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया।

पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में मंत्री ने आईएमडी की ‘नाउकास्टिंग’ क्षमता के माध्यम से तीन घंटे पूर्व सटीक मौसम पूर्वानुमान में हुई प्रगति, लक्षद्वीप में समुद्री संसाधनों से सतत मीठे पानी के उत्पादन हेतु स्थापित अलवणीकरण संयंत्र, महासागरीय ऊर्जा, समुद्री अवलोकन प्रणालियों और जलवायु अनुकूलन में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला।

समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब उच्च तकनीक—जैसे टीके और चिकित्सा उपकरण—का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बन चुका है और भारत की बायोइकोनॉमी एक प्रमुख विकास चालक के रूप में उभर रही है। उन्होंने कहा, “सबसे अच्छा अभी आना बाकी है,” और विश्वास जताया कि विज्ञान-आधारित सुधार भारत को 2047 से पहले ही विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर देंगे।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम पुस्तक मेले को बताया “ज्ञान का तीर्थ”

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री (MoPSW) सर्बानंद सोनोवाल ने आज गुवाहाटी के खानापारा में आयोजित असम पुस्तक मेले का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक मेलों को “ज्ञान के तीर्थ” बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बौद्धिक विकास को बढ़ावा देते हैं और एक विचारशील समाज का निर्माण करते हैं।

पुस्तक मेले में आगंतुकों और प्रकाशकों को संबोधित करते हुए सोनोवाल ने कहा, “पुस्तकें मन को आलोकित करती हैं, विचारों को परिष्कृत करती हैं और पीढ़ियों तक समाज को समृद्ध करती हैं। साहित्य का समग्र संसार किसी समाज की अंतरात्मा, सृजनात्मकता और कल्पनाशीलता को प्रतिबिंबित करता है तथा एक बौद्धिक रूप से प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “पठन-पाठन को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया हर कदम जनता के बौद्धिक उत्थान की दिशा में एक सशक्त कदम है।”सोनोवाल ने युवा पीढ़ी से पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया और कहा कि मेले में पाठकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि असम एक समाज के रूप में सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुस्तकें ऐसे उपहार हैं जिन्हें बार-बार खोला जा सकता है और हर बार वे नई समझ और दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। उन्होंने असम के उन महान सांस्कृतिक और साहित्यिक विभूतियों की विरासत को याद किया, जिन्होंने अपने शब्दों और विचारों के माध्यम से असमिया समाज की पहचान को आकार दिया और असम की आवाज़ को विश्व पटल पर पहुँचाया।

दार्शनिक फ्रांसिस बेकन के कथन “पठन मनुष्य को पूर्ण बनाता है” का उल्लेख करते हुए सोनोवाल ने गहन अध्ययन के स्थान पर क्षणिक डिजिटल उपभोग को अपनाने की प्रवृत्ति के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा, “हम चाहे जितना भी सोशल मीडिया कंटेंट देख लें, लेकिन हमें पूर्णता केवल पुस्तकों से ही मिल सकती है। केवल पठन से ही गहराई, कल्पनाशीलता और आलोचनात्मक चिंतन विकसित होता है।”

साथ ही, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रौद्योगिकी ने पठन की आदतों को बदला है। ई-बुक्स, ऑडियोबुक्स और डिजिटल लाइब्रेरी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक पठन के पूरक बन सकते हैं और ज्ञान को अधिक सुलभ बना सकते हैं। असली चुनौती, उन्होंने कहा, विशेषकर युवाओं के लिए पढ़ने को फिर से आनंददायक बनाना है।

सोनोवाल ने छोटे शहरों में पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा असमिया साहित्य को समकालीन और पाठक-अनुकूल स्वरूपों में अधिक सुलभ बनाने की बात कही। उन्होंने युवाओं के सामने आधुनिक सफलता की आकांक्षाओं और मातृभाषा से जुड़ाव के बीच चल रहे मौन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रगति का अर्थ अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों से दूरी बनाना नहीं है।

दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रकाशकों और पाठकों से संवाद किया तथा कई पुस्तकें खरीदीं। इनमें बनलता पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित प्रो. भवानी पेगु की मृतो ईश्वर सहित अनुराधा शर्मा पुजारी की भारत रत्न भूपेन हजारिका, हरेन गोगोई की बोधिद्रुम–2, देबजीत भुइयां की मायाबिनी रातिर बुकुत — जुबीनर जीवन आरु गान और बाबुल कुमार बरुआ की मुर जेल यात्रार कहानी शामिल हैं। इन पुस्तकों की खरीद असमिया साहित्य के पठन और प्रचार के प्रति उनकी गहरी आस्था और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु डिजिटल नवाचार की दिशा में बड़ा कदम: SIH 2025 के तहत AI-आधारित FRA एटलस और WebGIS DSS पर फील्ड-आधारित पहल

No comments Document Thumbnail

वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए एकीकृत, एंड-टू-एंड डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास से संबंधित जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्णयों के अनुसरण में, मंत्रालय FRA प्रशासन के लिए डिजिटलीकरण, भू-स्थानिक (Geospatial) एकीकरण और निर्णय-समर्थन प्रणालियों को आगे बढ़ाने हेतु नवाचार-आधारित पहलों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।

इसी क्रम में, शिक्षा मंत्रालय की इनोवेशन सेल ने स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (SIH) 2025 के 8वें संस्करण का शुभारंभ किया है। यह एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य छात्रों की नवाचार क्षमता का उपयोग करते हुए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों के माध्यम से जटिल प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान करना है। सॉफ्टवेयर श्रेणी के अंतर्गत, जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) ने एआई-संचालित FRA एटलस और वेब-GIS आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) के विकास के लिए एक समस्या विवरण प्रस्तुत किया है। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत वन अधिकार (IFR), सामुदायिक अधिकार (CR) और सामुदायिक वन संसाधन (CFR) अधिकारों की एकीकृत निगरानी को सक्षम बनाना है, जो FRA रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण, जियो-टैगिंग और अभिसरण से संबंधित मंत्रालय की व्यापक कार्ययोजना के अनुरूप है।

हैकाथॉन के बाद की सहभागिता कार्यक्रम के तहत, तथा उपर्युक्त निर्णयों को मैदानी स्तर पर सत्यापन के माध्यम से क्रियान्वित करने के उद्देश्य से, 2 जनवरी 2026 को कलेक्टर कार्यालय, नासिक में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनजातीय कार्य मंत्रालय, महाराष्ट्र राज्य जनजातीय विकास विभाग के अधिकारी तथा पुणे, कुरनूल और इंदौर से आए SIH में भाग लेने वाले छात्र दल शामिल हुए। बैठक के दौरान राज्य सरकार द्वारा महाराष्ट्र FRA पोर्टल का प्रदर्शन किया गया, जिसमें उसकी कार्यात्मक संरचना, FRA के क्रियान्वयन और निगरानी में उसकी व्यावहारिक उपयोगिता तथा राज्य से उभर रही सर्वोत्तम प्रथाओं को रेखांकित किया गया। इसमें मान्यता प्राप्त पट्टा धारकों की सफलता की कहानियां और महाराष्ट्र में FRA क्रियान्वयन की समग्र स्थिति भी प्रस्तुत की गई।

प्रस्तावित राष्ट्रीय FRA डिजिटल प्लेटफॉर्म के साक्ष्य-आधारित डिजाइन को और मजबूत करने के लिए, भाग लेने वाले छात्र दलों के लिए नासिक जिले के चयनित FRA-क्रियान्वित गांवों में दो दिवसीय फील्ड विजिट निर्धारित की गई है। इस मैदानी अभ्यास से छात्र दलों को ग्राम सभा सदस्यों और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिलेगा तथा जमीनी स्तर के डेटा, कार्यप्रवाह (वर्कफ्लो) और क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों के संग्रह एवं दस्तावेजीकरण में सहायता मिलेगी। इन इनपुट्स का उपयोग SIH 2025 के अंतर्गत परिकल्पित एआई-सक्षम FRA एटलस और वेब-GIS आधारित DSS के परिष्करण में किया जाएगा, ताकि ये समाधान मैदानी वास्तविकताओं और वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हों।

इसके पश्चात, भाग लेने वाले छात्र दल नई दिल्ली जाएंगे, जहां राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान (NTRI) में दो दिवसीय हैकाथॉन का आयोजन किया जाएगा। इस चरण के दौरान, छात्र दल जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव के मार्गदर्शन में FRA वेब पोर्टल के कार्यात्मक डिजाइन और विशेषताओं को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करेंगे।

यह पोस्ट-SIH सहभागिता FRA के डिजिटलीकरण से संबंधित नीतिगत निर्णयों को कार्यान्वयन योग्य, मैदानी स्तर पर सत्यापित डिजिटल समाधानों में रूपांतरित करने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह समावेशी विकास और सशक्त जनजातीय समुदायों के माध्यम से विकसित भारत के माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप है। साथ ही, यह माननीय केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री के उस फोकस को भी सुदृढ़ करती है, जिसमें डेटा-आधारित शासन, पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर बल दिया गया है तथा सरकार, शिक्षाविदों और जनजातीय समुदायों के बीच सहयोगात्मक सीख को बढ़ावा देकर वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और समावेशी एवं सतत जनजातीय विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है।


सांसद से मिले व्यापारी संघ,दिये नए साल की बधाई

No comments Document Thumbnail

आरंग- व्यापारी संघ नें सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिलकर नये वर्ष की बधाई व शुभकामना दिए व अपनी समस्यओ से अवगत करवाये इस बीच व्यापारी संघ अध्यक्ष सूरज शर्मा नें बताया कि सर्व प्रथम आरंग नगर की बहु प्रतिछित मांग एक्सप्रेस ट्रैन की स्टापेज जिनमे विभीन्न ट्रैन जैसे कोरबा विशाखापत्तनम, लिंक एक्सप्रेस,समता एक्सप्रेस,अहमदाबाद पूरी जैसे ट्रैनओ का ठहराव हों चुकी नगर का विस्तार अब palika के रूप मे ही गया है छेत्र 150 से अधिज पंचायते है ओद्योगिक दृष्टि से व शैकछनिक दृष्टि से भी बढ़ रहा है  इसलिए एक्सप्रेस ट्रैन का ठहराव आवश्यक है व बैंक ऑफ बड़ोदा की नई शाखा खोलने जिससे वर्तमान शाखा पे दबाव कम हों जिस पऱ आगे कार्यवाही हेतु आश्वात किये इसके साथ नगर की राजनीतिक़ गतिविधियों पऱ भी सार्थक चर्चा हुई व्यापारीप्रतिनिधि मण्डल मे अध्यक्ष  सूरज शर्मा उपाध्यक्ष पंकज शुक्ला. दीपक सोनी.बाके बिहारी अग्रवाल. अंगद साहू. उपस्थित रहे |


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर किया नमन

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका महान समाज सुधारक एवं नारी सशक्तिकरण की अग्रदूत स्वर्गीय सावित्रीबाई फुले की जयंती (3 जनवरी) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिला शिक्षा की अलख जगाई, जब समाज में अनेक कुरीतियाँ और बंधन व्याप्त थे। उन्होंने न केवल महिलाओं को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर उन्हें शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। छुआछूत, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक असमानताओं के विरुद्ध उनका संघर्ष साहस, संकल्प और सामाजिक चेतना का अद्वितीय प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्त्री अधिकारों, समानता और शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले का योगदान अमूल्य तथा अविस्मरणीय है। उनके विचार और कर्म आज भी समाज को प्रगतिशील दिशा देने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सावित्रीबाई फुले के जीवन से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को छेरछेरा पर्व की दी हार्दिक बधाई

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकपर्व छेरछेरा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छेरछेरा महादान, सामाजिक समरसता और दानशीलता का प्रतीक पर्व है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध, गौरवशाली और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत परंपरा को सजीव रूप में अभिव्यक्त करता है। नई फसल घर आने की खुशी में यह पर्व पौष मास की पूर्णिमा को बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दिन मां शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है, जो अन्न, प्रकृति और जीवन के संरक्षण का संदेश देती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा ग्रहण की थी। इसी परंपरा के अनुरूप छेरछेरा पर्व पर धान के साथ-साथ साग-भाजी, फल एवं अन्य अन्न का दान कर लोग परस्पर सहयोग, करुणा और मानवता का परिचय देते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छेरछेरा पर्व हमें समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और साझा समृद्धि की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से इस लोकपर्व को सद्भाव, उल्लास और पारंपरिक मूल्यों के साथ मनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने एक दिवसीय दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान आज बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के पावन मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री साय ने मां  दंतेश्वरी के चरणों में नमन करते हुए समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और सर्वांगीण कल्याण की मंगलकामनाएँ कीं।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी,  संस्कृति सचिव रोहित यादव, आईजी बस्तर सुंदरराज पी., डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं को समर्पित बस्तर पंडुम 2026 के लोगो एवं थीम गीत का विमोचन

No comments Document Thumbnail

बस्तर पंडुम हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच - मुख्यमंत्री साय

बस्तर पंडुम 2026 बनेगा विश्व–स्तरीय सांस्कृतिक आयोजन

रायपुर- बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य एवं आकर्षक रूप में किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की  सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का  सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहाँ बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया गया है। बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले वर्ष हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी। समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस वर्ष हम राष्ट्रपति , केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर बस्तरवासियों का जो उत्साह और जोश देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। इस बार हम इसे और अधिक भव्य बना रहे हैं, ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धाओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा।

उन्होंने बस्तरवासियों एवं सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से बस्तर का गौरव बढ़ाएँ और अधिक से अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लें। 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है। बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाए जाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा रही है। इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से की जा रही है। बस्तर समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत और खानपान को समाहित कर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं। मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त होकर रहेगा।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है। 

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बस्तर क्षेत्र की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता मांझियों और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएँ होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत में विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है।

प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग के रूप में नामित किया गया है।

इस अवसर पर सांसद महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, बस्तर आईजी सुंदरराज पी., संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

भारत में देशी मछली प्रजातियों के संवर्धन और मछली पालन में विविधीकरण को बढ़ावा

No comments Document Thumbnail

भारत की विविध जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, जो हिमालयी नदियों से लेकर भारतीय महासागर के तटीय जल तक फैली हुई है, में कई स्थानीय (देशी) मछली प्रजातियां पाई जाती हैं। ये प्रजातियां न केवल देश की पारिस्थितिकी संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत मूल्यवान हैं। इन देशी मछली प्रजातियों को बढ़ावा देना आवश्यक है, क्योंकि यह मछली पालन की स्थिरता, खाद्य सुरक्षा, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन और जैव विविधता संरक्षण में योगदान देता है। बढ़ती मछली उत्पादों की मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए, इन देशी प्रजातियों का रणनीतिक संवर्धन इन लक्ष्यों को प्राप्त करने का मार्ग प्रदान करता है और देश की जलीय विरासत को संरक्षित करता है।

देशी मछली प्रजातियां, जिन्हें स्थानीय या मूल प्रजातियां भी कहा जाता है, वे प्रजातियां हैं जो विशेष भौगोलिक क्षेत्रों और जलीय वातावरण में विकसित और अनुकूलित हुई हैं। भारत में इन प्रजातियों में ताजा पानी, खारी पानी और समुद्री मछलियों की विस्तृत विविधता शामिल है, जिनका पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व अद्वितीय है। अब तक 2800 से अधिक देशी मछली और शेलफिश प्रजातियां पहचानी जा चुकी हैं, जिनमें 917 ताजा पानी, 394 खारी पानी और 1548 समुद्री प्रजातियां शामिल हैं (स्रोत: ICAR-NBFGR)।

देश में अब तक 80 से अधिक वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण मछली/शेलफिश प्रजातियों के लिए प्रजनन और बीज उत्पादन तकनीक विकसित की गई है। हालांकि, भारत के मछली पालन उत्पादन का बड़ा हिस्सा कुछ चयनित प्रजातियों से ही आता है। तीन प्रमुख कॉर्प मछलियां – रोहु (Labeo rohita), कतला (Catla catla) और मृगल (Cirrhinus mrigala) और जायंट फ्रेशवाटर प्रॉन (Macrobrachium rosenbergii) भारतीय ताजे पानी के मछली पालन की रीढ़ हैं। इस कारण, 19.50 मिलियन टन ताजे पानी की मछली उत्पादन में तीन-चौथाई हिस्सेदारी भारतीय प्रमुख कॉर्प मछलियों की है।

खारी पानी में, वर्तमान उत्पादन का अधिकांश हिस्सा एक विदेशी झींगा प्रजाति (Penaeus vannamei) से आता है, जबकि देशी ब्लैक टाइगर झींगा (Penaeus monodon) का योगदान छोटा है। समुद्री मछली पालन अभी प्रारंभिक अवस्था में है।

मछली पालन में विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए यह आवश्यक है कि ताजे पानी, खारी पानी और समुद्री पर्यावरण में आर्थिक महत्व वाली संभावित देशी मछली प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए। प्रारंभिक रूप से जिन देशी प्रजातियों को चुना गया है, वे इस प्रकार हैं:

  1. फ्रिंज्ड-लिप्ड कॉर्प (Labeo fimbriatus)

  2. ऑलिव बार्ब (Systomus sarana)

  3. पेंगबा (Osteobrama belangiri)

  4. स्ट्राइप्ड मुर्रेल (Channa striata)

  5. पबड़ा (Ompok spp.)

  6. सिंगही (Heteropneustes fossilis)

  7. एशियन सीबास (Lates calcarifer)

  8. पर्लस्पॉट (Etroplus suratensis)

  9. पॉम्पानो (Trachinotus spp.)

  10. मड क्रैब (Scylla spp.)

  11. Penaeus indicus

इन प्रजातियों को मछली पालन के लिए उत्कृष्ट उम्मीदवार माना गया है, और इनके प्रजनन, बड़े पैमाने पर बीज उत्पादन और फार्मिंग तकनीकें उपलब्ध हैं। ये प्रजातियां स्थानीय समुदायों और उनके जलीय वातावरण के बीच गहरे संबंध को दर्शाती हैं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद करती हैं। ये प्रजातियां न केवल सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये स्थानीय और क्षेत्रीय बाजारों में उच्च मूल्य रखती हैं। ये लाखों लोगों के आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और मछली पालन उत्पादन और आय में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

अक्सर देशी मछली प्रजातियों के लाभों के प्रति जागरूकता और तकनीकी ज्ञान की कमी होती है। इस कमी के कारण इन्हें मछली पालन प्रणालियों में पूरी तरह से शामिल करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए हितधारकों को देशी प्रजातियों के प्रजनन, बीज उत्पादन और फार्मिंग तकनीकों के लाभों और तरीकों पर प्रशिक्षण देना आवश्यक है।

भारत में ताजा पानी और मछली पालन उत्पादन कुल मछली उत्पादन का 75% से अधिक योगदान देते हैं, जो दर्शाता है कि फार्मिंग सिस्टम पकड़ मछली (कैप्चर फिशरीज) पर हावी हैं। इस दिशा में, मछली पालन विभाग (DoF), भारत सरकार, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), नया उप-योजना प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMMKSSY) और फिशरीज एवं एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज और फीड की आपूर्ति को बढ़ावा देने, तकनीकी ज्ञान का प्रसार करने और प्रशिक्षण देने का कार्य कर रहा है।

PMMSY योजना का उद्देश्य मछली पालन उत्पादन बढ़ाना, मछुआरों की आजीविका सुधारना और जलीय संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है। यह योजना अक्वाकल्चर का विस्तार, प्रजातियों का विविधीकरण और आनुवंशिक सुधार पर केंद्रित है।

ICAR विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से देशी मछली प्रजातियों पर अनुसंधान करता है, जिसमें उनकी जीवविज्ञान, प्रजनन आदतें, वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण मछली और शेलफिश प्रजातियों के आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम और आवास आवश्यकताओं का अध्ययन शामिल है। ICAR संकटग्रस्त और लुप्तप्राय देशी मछली प्रजातियों के संरक्षण के प्रयासों में भी लगा हुआ है।

DoF ने ICAR के साथ परामर्श कर कुछ देशी प्रजातियों का आनुवंशिक सुधार हेतु चयन किया और गुणवत्तापूर्ण और स्वस्थ बीज उत्पादन के लिए वित्तीय सहायता दी। चयनित प्रजातियां हैं:

  1. स्कैम्पी

  2. रोहु

  3. कतला

  4. मुर्रेल

  5. Penaeus indicus

  6. Penaeus monodon

  7. भारतीय पॉम्पानो

इसके अलावा, PMMSY के तहत ICAR-CIFA, भुवनेश्वर में ताजे पानी की प्रजातियों के लिए न्यूक्लियस ब्रीडिंग सेंटर और ICAR-CMFRI, मंडपम में समुद्री प्रजातियों के लिए न्यूक्लियस ब्रीडिंग सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी गई है।

DoF ने क्षेत्रीय महत्व के आधार पर देशी प्रजातियों के उत्पादन और प्रसंस्करण क्लस्टर भी स्थापित किए हैं, जिनका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, मूल्य श्रृंखला मजबूत करना, पश्चात-उत्पादन नुकसान कम करना और ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को रोजगार प्रदान करना है। कुल 34 क्लस्टर की घोषणा की गई है, जिनमें शामिल हैं:

  • ओडिशा: स्कैम्पी क्लस्टर

  • तेलंगाना: मुर्रेल क्लस्टर

  • त्रिपुरा: पबड़ा क्लस्टर

  • मणिपुर: पेंगबा क्लस्टर

  • जम्मू-कश्मीर: ट्राउट क्लस्टर

  • लद्दाख: ट्राउट क्लस्टर

  • केरल: पर्लस्पॉट क्लस्टर

  • कर्नाटक: समुद्री देशी प्रजातियों का केज कल्चर

  • मदुरै: ऑर्नामेंटल फिशरीज क्लस्टर

ये प्रयास भारत में देशी मछली प्रजातियों के संवर्धन, उत्पादन और सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

MeitY ने ECMS के तहत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी, 41,863 करोड़ रुपये के निवेश और 33,791 रोजगार सृजन की उम्मीद

No comments Document Thumbnail

पूर्व में घोषित 24 प्रस्तावों के लिए 12,704 करोड़ रुपये की मंजूरी के क्रम में, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 और प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रस्तावों में अनुमानित निवेश 41,863 करोड़ रुपये और अनुमानित उत्पादन 2,58,152 करोड़ रुपये का है। इन अनुमोदनों से लगभग 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

ये अनुमोदन 11 लक्षित उत्पादों के निर्माण से संबंधित हैं, जिनका उपयोग मोबाइल निर्माण, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, स्ट्रैटेजिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर उत्पादों सहित कई क्षेत्रों में होता है। ये 11 उत्पाद इस प्रकार हैं:

1. पांच बेसिक कंपोनेंट्स: PCB, कैपेसिटर, कनेक्टर्स, एन्क्लोज़र और Li-ion सेल
2. तीन सब-असेंबली: कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर
3. तीन सप्लाई चेन आइटम्स: एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न, एनोड मैटेरियल और लैमिनेट (कॉपर क्लैड)

मुख्य अनुमोदन विवरण:

  • PCB (HDI सहित): 9 कंपनियों को मंजूरी—India Circuits Pvt Ltd, Vital Electronics Pvt Ltd, Signum Electronics Ltd, Epitome Components Pvt Ltd, BPL Ltd, AT & S India Pvt Ltd, Ascent-K Circuit Pvt Ltd, CIPSA TEC India Pvt Ltd, Shogini Technoarts Pvt Ltd

  • कैपेसिटर: Deki Electronics Ltd और TDK India Pvt Ltd

  • हाई-स्पीड कनेक्टर्स: Amphenol High Speed Technology India Pvt Ltd

  • एन्क्लोज़र: Yuzhan Technology (India) Pvt Ltd, Motherson Electronic Components Pvt Ltd, Tata Electronics Pvt Ltd

  • Li-ion सेल: ATLbattery Technology (India) Pvt Ltd

सब-असेंबली:

  • ऑप्टिकल ट्रांससीवर (SFP): Dixon Electroconnect Pvt Ltd

  • कैमरा मॉड्यूल: Kunshan Q Tech Microelectronics (India) Pvt Ltd

  • डिस्प्ले मॉड्यूल: Samsung Display Noida Pvt Ltd

सप्लाई चेन सामग्री:

  • एनोड मैटेरियल: NPSPL Advanced Materials Pvt Ltd

  • लैमिनेट (कॉपर क्लैड): Wipro Global Engineering and Electronic Materials Pvt Ltd

  • एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न: Hindalco Industries Ltd

भौगोलिक वितरण: अनुमोदित इकाइयाँ आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में फैली हैं। अब तक ECMS के तहत कुल 46 आवेदन मंजूर हो चुके हैं, जिनमें 11 राज्यों में कुल निवेश 54,567 करोड़ रुपये और लगभग 51,000 प्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित हुए हैं।

अश्विनी वैष्णव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाता है और घरेलू मांग के बड़े हिस्से को स्थानीय उत्पादन से पूरा करने में मदद करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत 2047 तक युवा जनसांख्यिकी बनाए रखेगा और 2100 तक आर्थिक वृद्धि जारी रहेगी, इसलिए इस क्षेत्र के लिए सभी संरचनात्मक आधार स्थापित करना आवश्यक है।

जितिन प्रसाद, राज्य मंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी ने कहा कि भारत अगली बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण दिशा के रूप में उभर रहा है और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक भरोसेमंद साझेदार बन रहा है।

एस. कृष्णन, सचिव MeitY ने कहा कि इस ताजे अनुमोदन चरण में चयनित प्रस्ताव देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं और ECMS के महत्वपूर्ण लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद करेंगे।

ये अनुमोदन घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे, महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए आयात पर निर्भरता कम करेंगे और भारत में उच्च-मूल्य वाले निर्माण क्षमताओं के विकास का समर्थन करेंगे।

ECMS के तहत ये अनुमोदन भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण हब बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप एक साहसी और दूरदर्शी कदम को दर्शाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 जनवरी 2026 को पिपरहवा बुद्ध अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी का करेंगे उद्घाटन

No comments Document Thumbnail

संस्कृति मंत्रालय द्वारा हाल ही में भारत वापस लाए गए पिपरहवा अवशेषों, अवशेष पात्रों (रिलिक्वेरीज़) और रत्न अवशेषों को प्रदर्शित करने के लिए राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में एक ऐतिहासिक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3 जनवरी 2026 को प्रातः 11.00 बजे किया जाएगा।

यह ऐतिहासिक अवसर 127 वर्षों बाद भगवान बुद्ध के पिपरहवा रत्न अवशेषों के पुनः एकत्रीकरण का प्रतीक है, जिन्हें पिपरहवा स्थल पर 1898 तथा बाद में 1971–1975 के उत्खननों में प्राप्त अवशेषों, रत्न अवशेषों और अवशेष पात्रों के साथ एक साथ प्रदर्शित किया जा रहा है।

“द लाइट एंड द लोटस: द रिलिक्स ऑफ द अवेकेंड वन” शीर्षक से आयोजित यह प्रदर्शनी संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों से संबंधित प्रासंगिक पुरावशेषों और कलाकृतियों को विषयगत रूप से प्रस्तुत करती है। ये अवशेष भगवान बुद्ध से संबद्ध सबसे व्यापक संग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो गहन दार्शनिक अर्थ, उत्कृष्ट शिल्पकला और वैश्विक आध्यात्मिक महत्व के प्रतीक हैं। प्रदर्शनी में छठी शताब्दी ईसा पूर्व से वर्तमान काल तक की अवधि के 80 से अधिक वस्तुएं प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनमें मूर्तियां, पांडुलिपियां, थंका चित्र और अनुष्ठानिक वस्तुएं शामिल हैं।

यह अभूतपूर्व आयोजन जुलाई 2025 में संस्कृति मंत्रालय द्वारा पिपरहवा अवशेषों की सफल स्वदेश वापसी को स्मरण करता है, जिसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से और सॉथबीज़, हांगकांग में प्रस्तावित नीलामी को रोकते हुए संभव बनाया गया। 1898 के उत्खनन के बाद पहली बार, इस प्रदर्शनी में निम्नलिखित को एक साथ प्रस्तुत किया जा रहा है:

  • 1898 के कपिलवस्तु उत्खनन से प्राप्त अवशेष

  • 1972 के उत्खननों से प्राप्त निधियां

  • भारतीय संग्रहालय, कोलकाता से अवशेष पात्र और जड़ाऊ रत्न

  • पेप्पे परिवार के संग्रह से हाल ही में स्वदेश लौटाए गए अवशेष

  • वह एकाश्म पत्थर का संदूक, जिसमें मूल रूप से रत्न अवशेष और अवशेष पात्र पाए गए थे

पवित्र बुद्ध अवशेषों की खोज 1898 में विलियम क्लैक्टन पेप्पे द्वारा प्राचीन कपिलवस्तु स्तूप में की गई थी। खोज के पश्चात इनका एक हिस्सा सियाम (वर्तमान थाईलैंड) के राजा को भेंट किया गया, एक हिस्सा इंग्लैंड ले जाया गया और तीसरा हिस्सा भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में संरक्षित रहा। 2025 में, संस्कृति मंत्रालय के निर्णायक हस्तक्षेप और विश्वभर के बौद्ध समुदायों के समर्थन से पेप्पे परिवार के पास रहे अवशेषों को भारत वापस लाया गया।

यह प्रदर्शनी बौद्ध धर्म की जन्मभूमि के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करती है और वैश्विक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक नेतृत्व में उसकी स्थिति को और सुदृढ़ करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक सहभागिता में उसकी सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का विशेष महत्व उभरकर सामने आया है। अब तक 642 पुरावशेषों की भारत में वापसी हो चुकी है, जिनमें पिपरहवा अवशेषों की वापसी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्रीगण, राजदूत एवं राजनयिक समुदाय के सदस्य, वंदनीय बौद्ध भिक्षु, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विद्वान, विरासत विशेषज्ञ, कला जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां, कला प्रेमी, बौद्ध धर्म के अनुयायी और छात्र भाग लेंगे।

यह प्रदर्शनी विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक नेतृत्व के प्रति संस्कृति मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है तथा भारत की आध्यात्मिक विरासत और बुद्ध धम्म की जन्मभूमि के रूप में उसके वैश्विक महत्व का उत्सव मनाती है। यह भारत की उस सतत प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है, जिसके तहत वह अपनी सभ्यतागत धरोहर को संरक्षित कर विश्व के साथ साझा करता रहा है।


दिसंबर 2025 में कैप्टिव एवं वाणिज्यिक कोयला खदानों के उत्पादन और प्रेषण में निरंतर वृद्धि दर्ज

No comments Document Thumbnail

वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान दिसंबर 2025 में कैप्टिव एवं वाणिज्यिक कोयला खदानों से कोयला उत्पादन और प्रेषण में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में कोयला उत्पादन 19.48 मिलियन टन (MT) रहा, जबकि कोयला प्रेषण 18.02 मिलियन टन दर्ज किया गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्पादन में 5.75 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही (Q3) के दौरान कैप्टिव एवं वाणिज्यिक खदानों से कुल कोयला उत्पादन 54.14 मिलियन टन रहा, जबकि प्रेषण 50.61 मिलियन टन दर्ज किया गया। इस तिमाही में उत्पादन में 5.35 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र में निरंतर परिचालन गति को दर्शाती है।

समग्र रूप से, वित्त वर्ष 2025–26 में दिसंबर तक की अवधि के दौरान इस क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इस अवधि में कोयला उत्पादन में 9.72 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई, जबकि प्रेषण में 6.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय है। ये उत्साहजनक रुझान बेहतर परिचालन दक्षता और खनन क्षमता के अधिक प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।

संलग्न ग्राफ उत्पादन और प्रेषण—दोनों में निरंतर सुधार और मजबूत वृद्धि को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है।

मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय रणनीतिक नीतिगत उपायों, कठोर निगरानी और हितधारकों को निरंतर सहयोग को जाता है। इन प्रयासों से परिचालन अनुमोदनों में तेजी आई है और उत्पादन क्षमताओं का विस्तार हुआ है, जिससे कोयला उत्पादन और प्रेषण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कोयला मंत्रालय कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए एक स्थिर और प्रदर्शन-आधारित वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। निरंतर नीतिगत सुविधा, निकट प्रदर्शन निगरानी और हितधारकों के साथ समन्वित सहभागिता के माध्यम से मंत्रालय का उद्देश्य विश्वसनीय कोयला उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों में निर्बाध संचालन को समर्थन देना और देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है। ये प्रयास विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद फ्लावर शो की सराहना की, रचनात्मकता और जन-भागीदारी को बताया प्रेरणादायी

No comments Document Thumbnail

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद फ्लावर शो की सराहना करते हुए इसे रचनात्मकता, सततता और जन-भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन शहर की जीवंत भावना और प्रकृति के प्रति उसके गहरे प्रेम को सुंदरता से प्रदर्शित करता है।

फ्लावर शो के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम वर्षों के साथ अपने स्वरूप, भव्यता और कल्पनाशीलता में निरंतर विस्तार करता गया है और आज यह अहमदाबाद की सांस्कृतिक समृद्धि तथा पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक बन चुका है।

गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:

“अहमदाबाद का फ्लावर शो हर किसी का मन मोह लेने वाला है! यह क्रिएटिविटी के साथ-साथ जन भागीदारी का अद्भुत उदाहरण है। इससे शहर की जीवंत भावना के साथ ही प्रकृति से उसका लगाव भी खूबसूरती से प्रदर्शित हो रहा है। यहां यह देखना भी उत्साह से भर देता है कि कैसे इस फ्लावर शो की भव्यता और कल्पनाशीलता हर साल निरंतर बढ़ती जा रही है। इस फ्लावर शो की कुछ आकर्षक तस्वीरें…”

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी अहमदाबाद फ्लावर शो की बढ़ती लोकप्रियता, रचनात्मक प्रस्तुति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को रेखांकित करती है।





उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नई के 34वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित

No comments Document Thumbnail

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नई के 34वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।

नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए उपराष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन के एक नए चरण की शुरुआत है, जिसमें अधिक जिम्मेदारियां और नए अवसर निहित हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्नातक अपने पेशेवर कौशल, करुणा और प्रतिबद्धता के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान देंगे।

तमिलनाडु की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि यह राज्य ज्ञान और समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के व्यापारियों ने भारत के विचार, नैतिक मूल्य और संस्कृति को विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया, जो भारत की आत्मविश्वासी सभ्यतागत परंपरा और सीखने व आदान-प्रदान के प्रति खुलेपन को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत विकसित भारत @2047 के विजन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने का आह्वान किया।

तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती तकनीकें सभी क्षेत्रों को रूपांतरित कर रही हैं। उन्होंने निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल दिया और छात्रों से नियमित रूप से अपने कौशल को उन्नत करने, आजीवन सीखने की मानसिकता अपनाने तथा अपने मुख्य विषयों से परे नई तकनीकों से जुड़ने का आग्रह किया।

मूल्य-आधारित शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता का आधार नैतिकता, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व होना चाहिए।

परिसर से बाहर के जीवन के लिए विद्यार्थियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और दोनों का सामना संतुलन, दृढ़ता और मानसिक शक्ति के साथ करना चाहिए। उन्होंने शॉर्टकट अपनाने और अस्वस्थ तुलना से बचने की सलाह दी तथा स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रगति करने और अपनी विशिष्ट क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से उद्देश्यपूर्ण और सेवा-भाव से युक्त जीवन जीने तथा व्यक्तिगत उत्कृष्टता के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मा. सुब्रमणियन, डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान के चांसलर डॉ. ए. सी. शन्मुगम तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.