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विकसित छत्तीसगढ़ की ओर बड़ा कदम, 23 जिलों में शुरू होगा ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार केवल अधोसंरचना विकास नहीं, बल्कि शासन की योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचाना है।


मुख्यमंत्री ने बताया कि Niyad Nellanar Yojana की सफलता को आगे बढ़ाते हुए इस अभियान के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में राज्य सरकार की 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का संतृप्तिकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र हितग्राही सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।


उन्होंने कहा कि अभियान के संचालन में तकनीक आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जवाबदेह कार्यप्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे सेवा प्रदाय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री साय के अनुसार, राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक परिवार तक सुशासन की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है, ताकि विकास और समृद्धि की नई संभावनाओं का विस्तार हो सके। उन्होंने कहा कि जब शासन की हर योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी, तभी ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का सपना वास्तविक रूप से साकार होगा।
राज्य सरकार का मानना है कि यह अभियान न केवल योजनाओं के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करते हुए प्रदेश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

12 वर्षों में बदली भारत की आतंकवाद-रोधी तस्वीर: जीरो टॉलरेंस नीति से मजबूत हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र

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नई दिल्ली- पिछले 12 वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को एक नई दिशा देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में व्यापक बदलाव किए हैं। केंद्र सरकार की "आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance)" नीति के तहत कानूनी सुधार, संस्थागत सशक्तीकरण, खुफिया समन्वय, सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश में आतंकवादी घटनाओं और उनसे होने वाली जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है।

2014 में चुनौतीपूर्ण सुरक्षा परिदृश्य

वर्ष 2014 में देश को आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ, आतंकवादी गतिविधियां और पत्थरबाजी की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। वहीं, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए कट्टरपंथी विचारधाराओं का प्रसार भी नई चुनौती बनकर उभरा था।

कानूनी सुधारों से मिली नई ताकत

सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनों में संशोधन किए।

  • यूएपीए (UAPA) संशोधन 2019 के तहत व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान किया गया।

  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) संशोधन अधिनियम 2019 से एजेंसी की जांच शक्तियों का विस्तार हुआ।

  • धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) को मजबूत कर आतंकियों की वित्तीय आपूर्ति पर शिकंजा कसा गया।

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में पहली बार आतंकवाद और संगठित अपराध की स्पष्ट परिभाषा दी गई।

  • आर्म्स संशोधन अधिनियम 2019 के जरिए अवैध हथियार तस्करी और आतंकी नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया गया।

NIA और खुफिया तंत्र हुआ और मजबूत

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का बजट 2014-15 के ₹91 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹394 करोड़ से अधिक हो गया। देशभर में विशेष NIA अदालतों की स्थापना की गई तथा 21 शाखा कार्यालय खोले गए।

वहीं, मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC), NATGRID और CCTNS जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था विकसित की गई। हाल ही में साइबर खतरों से निपटने के लिए Cyber Multi Agency Centre (CyMAC) की भी स्थापना की गई है।

आतंकवाद के खिलाफ बदली रणनीति

पिछले दशक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को अधिक आक्रामक और जवाबी बनाया।

  • 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक ने आतंकियों के लॉन्च पैड पर सीधा प्रहार किया।

  • 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक ने सीमा पार आतंकी ढांचे को निशाना बनाया।

  • 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के स्रोत पर कार्रवाई की गई।

इन अभियानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब आतंकवादी हमलों का जवाब निर्णायक तरीके से देगा।

वैश्विक मंच पर भी बढ़ी भारत की भूमिका

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया है। FATF, संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न द्विपक्षीय मंचों पर भारत ने आतंकवाद के वित्तपोषण और संरक्षण के खिलाफ प्रभावी आवाज उठाई। 2019 में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाना और 2025 में तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियां रहीं।

जम्मू-कश्मीर में दिखा सकारात्मक बदलाव

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 2004-2014 के दौरान 7,217 आतंकवादी घटनाएं हुई थीं, जबकि 2014-2024 के बीच यह संख्या घटकर 2,242 रह गई।

  • पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।

  • आतंकवादी हमलों में नागरिक और सुरक्षा बलों की हताहतों की संख्या में भारी कमी आई है।

  • 2024 में जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड 2.3 करोड़ पर्यटक पहुंचे।

  • निवेश और विकास परियोजनाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

सुरक्षित और आत्मविश्वासी भारत की ओर

सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में अपनाई गई व्यापक और बहुआयामी रणनीति ने भारत को आतंकवाद के खिलाफ अधिक सक्षम, आधुनिक और सशक्त बनाया है। कानूनी सुधारों, तकनीकी नवाचारों, मजबूत संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बल पर देश की आंतरिक सुरक्षा को नई मजबूती मिली है और नागरिकों का विश्वास भी बढ़ा है।

आतंकवाद के खिलाफ यह परिवर्तन केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


VB–G RAM G अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन हेतु देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती

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विकसित भारत–गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] अधिनियम, 2025 के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अधिनियम के 1 जुलाई 2026 से लागू होने से पहले देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों (Area Officers) की तैनाती का निर्णय लिया है।

ये क्षेत्रीय अधिकारी अधिनियम के क्रियान्वयन के प्रारंभिक चरण में सुविधादाता (Facilitator) और संसाधन व्यक्ति (Resource Person) के रूप में कार्य करेंगे। वे राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्यान्वयन में सहयोग, स्थानीय क्षमताओं को सुदृढ़ करने, ज्ञान एवं अनुभव साझा करने, संचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान तथा श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने में सहायता प्रदान करेंगे।

इस भूमिका के लिए अधिकारियों को तैयार करने हेतु ग्रामीण विकास विभाग ने एक विशेष अभिमुखीकरण (Orientation) कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं, कार्यान्वयन ढाँचे, संस्थागत व्यवस्थाओं, प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक प्रणालियों तथा राज्यों एवं जिलों को उपलब्ध सहायता तंत्रों की जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल ने की, जबकि संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे ने कार्यक्रम का संचालन किया।

अपने दौरों के दौरान क्षेत्रीय अधिकारी राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और जमीनी स्तर के कर्मचारियों से संवाद करेंगे ताकि कार्यान्वयन संबंधी आवश्यकताओं को समझा जा सके, अनुभवों एवं श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान हो सके, क्षमता निर्माण गतिविधियों को समर्थन मिल सके और संचालन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सके। उनका यह सहयोग विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करेगा और नए ढाँचे में प्रभावी संक्रमण सुनिश्चित करेगा।

यह पहल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संस्थागत सहयोग प्रदान करते हुए VB–G RAM G अधिनियम के सुचारु और प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

VB–G RAM G अधिनियम, 2025 की प्रमुख विशेषताएँ

यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सतत और समावेशी ग्रामीण विकास का आधार बनाने का प्रयास करता है। इसके अंतर्गत:

  • गारंटीकृत मजदूरी आधारित रोजगार को आजीविका संवर्धन से जोड़ा जाएगा।

  • जलवायु अनुकूलन एवं लचीलापन (Climate Resilience) को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • ग्रामीण आधारभूत संरचना का निर्माण किया जाएगा।

  • प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी।

  • विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPPs), GIS-आधारित योजना निर्माण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण (Convergence) के माध्यम से विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।

मंत्रालय द्वारा की गई प्रमुख तैयारियाँ

मंत्रालय ने देशव्यापी तैयारी सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए ₹95,692 करोड़ की अंतरिम स्वीकृति।

  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को DBT-SPARSH प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ना।

  • सक्रिय श्रमिकों में लगभग 93% ई-केवाईसी (e-KYC) पूर्ण करना।

  • फेस ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली का देशभर में कार्यान्वयन।

  • समर्पित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का विकास।

  • बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रमों का संचालन।

वर्तमान प्रगति

  • 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अधिनियम के कार्यान्वयन हेतु अपने बजट में प्रावधान कर दिए हैं।

  • 6 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने VB–G RAM G ढाँचे के अंतर्गत अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित कर दिया है।

  • शेष राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी योजनाओं को अंतिम रूप देने की उन्नत अवस्था में हैं।

इस प्रकार, क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती और व्यापक तैयारी के माध्यम से सरकार VB–G RAM G अधिनियम, 2025 को सफलतापूर्वक लागू करने और ग्रामीण भारत के समग्र विकास को गति देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

होर्मुज खुलते ही भारत पहुंचा LNG टैंकर, ईरान-अमेरिका समझौते के बाद मिली बड़ी राहत

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 Strait Of Hormuz Reopening: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव थमने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर लगा अवरोध हटा दिया गया है। खाड़ी के इस अहम व्यापारिक मार्ग के खुलते ही प्राकृतिक गैस (LNG) से लदा पहला टैंकर भारत पहुंच गया है। करीब 110 दिनों से जारी तनाव के बीच भारत के लिए यह बड़ी राहत की खबर है।


62 हजार मीट्रिक टन LNG लेकर पहुंचा जहाज

लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से भरा एक जहाज गुरुवार को गुजरात के भरूच जिले स्थित दहेज LNG टर्मिनल पहुंचा। यह जहाज अपने साथ 62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर आया है, जिसे भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

MOU के बाद लिया गया बड़ा फैसला

ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही से जुड़ी मंजूरी प्रक्रिया को तुरंत निपटाने का आदेश जारी किया है। यह फैसला तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MOU) के बाद लिया गया।

अमेरिका-ईरान के बीच समझौता

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) ने घोषणा की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के संचालन को लेकर नए बदलाव लागू किए जा रहे हैं। यह बयान उस समय आया जब ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से MOU पर हस्ताक्षर किए।

ईरान ने दी बड़ी राहत

SNSC के मुताबिक समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसका पूरा खर्च ईरान सरकार उठाएगी। जहाजों को अपने अनुरोध Persian Gulf Strait Authority को भेजने होंगे। ईरान ने भरोसा दिलाया है कि इस अहम समुद्री मार्ग पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य किया जाएगा, जबकि तकनीकी और संचालन संबंधी दिशा-निर्देश PGSA जल्द जारी करेगा।

छत्तीसगढ़ समेत 9 राज्यों में मौसम का कहर, आंधी-तूफान और बारिश का अलर्ट

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 रायपुर/नई दिल्ली। देशभर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। एक ओर कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी, लू और धूल भरी आंधी को लेकर चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल कमजोर बनी हुई है, जिससे कई राज्यों में बारिश का इंतजार अभी जारी है।


मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक Tamil Nadu, Kerala, West Bengal और Assam के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी बारिश भी दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा Chhattisgarh, Madhya Pradesh, Telangana, Andhra Pradesh, दक्षिण कर्नाटक, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार और पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है।

वहीं Odisha, विदर्भ, दक्षिण-पूर्व राजस्थान, दक्षिण और पूर्वी गुजरात तथा कोंकण-गोवा क्षेत्र में कहीं-कहीं हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि यह बारिश छिटपुट होगी और लंबे समय तक लगातार नहीं रहेगी।

उत्तर भारत में धूल भरी आंधी और तेज हवाओं की चेतावनी

मौसम विभाग ने Punjab, Haryana, Rajasthan और Delhi समेत उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ धूल भरी आंधी चलने की संभावना जताई है। तेज हवाओं के कारण तापमान में अचानक बदलाव और मौसम में अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

इसके अलावा Uttar Pradesh के कुछ हिस्सों में हीटवेव यानी लू की स्थिति बनने की संभावना है। दिन के समय तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

कमजोर पड़ा मानसून, कई राज्यों में बारिश की कमी

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल दो प्रमुख स्थानों पर अटकी हुई है। इसका पश्चिमी छोर महाराष्ट्र के हरनाई क्षेत्र के पास जबकि पूर्वी छोर बिहार के मुजफ्फरपुर के आसपास स्थिर बना हुआ है। इसी वजह से देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार थम गई है और बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं।

सबसे ज्यादा असर मध्य भारत में देखा जा रहा है, जहां कई इलाकों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं है, जो मानसून को आगे बढ़ाने में मदद कर सके। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम का यह अस्थिर दौर जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल देश के कई हिस्सों में लोगों को गर्मी, लू, आंधी और बारिश जैसे मिश्रित मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

EPFO खाताधारकों को बड़ी राहत, सरकार ने 8.25% ब्याज दर को दी मंजूरी, जल्द खातों में आएगा पैसा

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 नई दिल्ली। देशभर के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) पर मिलने वाली ब्याज दर 8.25 प्रतिशत बनाए रखने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से करीब 7 करोड़ से ज्यादा Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) सदस्यों को फायदा मिलेगा।


सरकार ने दी ब्याज दर को मंजूरी

जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ जमा राशि पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। यह फैसला EPFO की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की सिफारिश के बाद लिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।

लगातार तीसरे साल नहीं बदली ब्याज दर

गौरतलब है कि 2 मार्च को केंद्रीय श्रम मंत्री Mansukh Mandaviya की अध्यक्षता में हुई CBT बैठक में वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज दर तय करने का निर्णय लिया गया था। यह लगातार तीसरा साल है जब EPF पर ब्याज दर को 8.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।

जल्द खातों में क्रेडिट होगी राशि

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस महीने करीब 7 करोड़ EPFO सदस्यों के खातों में ब्याज की राशि जमा किए जाने की संभावना है। इससे कर्मचारियों को उनके रिटायरमेंट फंड पर बेहतर रिटर्न मिलेगा।

बता दें कि वित्त वर्ष 2024-25 और 2023-24 में भी ब्याज दर 8.25 प्रतिशत रखी गई थी, जबकि इससे पहले 2022-23 में यह दर 8.15 प्रतिशत थी। सरकार के इस फैसले से निजी और सरकारी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।

राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे पर केदार कश्यप का हमला, बोले- कांग्रेस की हताशा का प्रतीक है यह दौरा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के वनमंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह दौरा कांग्रेस की बढ़ती राजनीतिक हताशा, संगठनात्मक बिखराव और लगातार कमजोर होते जनाधार का प्रतीक है।


केदार कश्यप ने कहा कि जिस कांग्रेस ने अपने शासनकाल में भ्रष्टाचार, घोटालों और जनविश्वास के साथ खिलवाड़ किया, वही आज जनता के बीच जाकर दोबारा भरोसा मांगने की कोशिश कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस अपने शीर्ष नेतृत्व को खुश करने के लिए हमेशा नए-नए प्रयोग करती रही है।

उन्होंने कहा कि पिछली बार जब Priyanka Gandhi Vadra छत्तीसगढ़ आई थीं, तब कांग्रेस नेताओं ने स्वागत के लिए गुलाब की पंखुड़ियों की सड़क बिछाई थी। अब राहुल गांधी के आगमन पर कांग्रेस को अपने शासनकाल की सबसे चर्चित पहचान रहे कथित शराब घोटाले को याद करते हुए “दारू से चरण धोकर स्वागत” करना चाहिए।

घोटालों पर जवाब मांगे जनता को

मंत्री कश्यप ने कहा कि राहुल गांधी को छत्तीसगढ़ आने से पहले प्रदेश की जनता को यह बताना चाहिए कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान सामने आए कथित शराब घोटाले, कोयला घोटाले, भर्ती घोटालों और विभिन्न योजनाओं में अनियमितताओं पर उनकी क्या राय है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी इन सवालों से बचने की कोशिश कर रही है, जबकि जनता जवाब चाहती है।

कांग्रेस शासन पर उठाए सवाल

केदार कश्यप ने कहा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस के शासनकाल को भूली नहीं है। किसानों से किए गए वादे, युवाओं को रोजगार देने के दावे, महिलाओं और आदिवासी समाज के विकास के बड़े-बड़े वादे अंततः घोषणाओं तक सीमित रह गए। यही वजह रही कि जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया।

भाजपा सरकार के काम गिनाए

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व और मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए अध्याय लिख रहा है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, जनजातीय विकास और नक्सल उन्मूलन के क्षेत्र में लगातार काम हो रहे हैं।

मंत्री कश्यप ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को केवल चुनाव या राजनीतिक संकट के समय जनता की याद आती है। राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक पर्यटन से ज्यादा कुछ नहीं दिखता। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब विकास और सुशासन की राजनीति को स्वीकार कर चुकी है और कांग्रेस के ऐसे दौरों से राज्य की राजनीतिक दिशा बदलने वाली नहीं है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने हज-2026 की समीक्षा और हज-2027 की तैयारियों पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की

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अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 18 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र (DAIC) में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य एवं संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू की अध्यक्षता में हज समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य हज-2026 के संचालन की समीक्षा करना और हज-2027 की रूपरेखा पर विचार-विमर्श करना था।

बैठक में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्ण, विदेश मंत्रालय की सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन, अल्पसंख्यक कार्य, विदेश, नागरिक उड्डयन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा गृह मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, हज समिति ऑफ इंडिया, बीआईएसएजी-एन तथा अन्य संबंधित हितधारकों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने हज-2026 के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि लगभग 1.75 लाख भारतीय हज यात्रियों ने इस वर्ष हज संपन्न किया। उन्होंने इसकी सफलता का श्रेय सभी संबंधित मंत्रालयों, विभागों, हज समिति ऑफ इंडिया, राज्य हज समितियों, सऊदी अरब में भारतीय हज मिशन और सऊदी अधिकारियों के समन्वित प्रयासों को दिया।

भारतीय हज मिशन को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, भारतीय हज मिशन को सऊदी अरब के हज एवं उमरा मंत्रालय द्वारा ‘बेस्ट हज कोऑर्डिनेशन एंड कम्युनिकेशन’ श्रेणी में दो ‘लब्बैतुम पुरस्कार’ (Labbaytum Awards) प्रदान किए गए। यह सम्मान हज-2026 के दौरान भारतीय यात्रियों को दी गई उत्कृष्ट सेवाओं और कल्याणकारी व्यवस्थाओं की मान्यता है।

हज-2026 में यात्रियों की सुविधा के लिए कई नई पहलें

हज-2026 के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए:

  • मीना में यात्रियों के लिए सोफा-कम-बेड की व्यवस्था।

  • लगभग 62,500 यात्रियों ने मक्का से मदीना तक हाई-स्पीड रेलवे से यात्रा की।

  • मक्का में होटल-शैली आवास की सुविधा।

  • 20-दिवसीय शॉर्ट हज पैकेज की शुरुआत, जिसका लाभ लगभग 10,500 यात्रियों ने उठाया, जिनमें अधिकांश कामकाजी पेशेवर थे।

  • मदीना में सभी भारतीय यात्रियों को मरकज़िया क्षेत्र में ठहराया गया, जिससे आवागमन और सुविधाओं तक पहुंच आसान हुई।

तकनीक आधारित सुधारों पर विशेष जोर

हज-2026 में पारदर्शिता, सुरक्षा और सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए कई तकनीकी सुधार लागू किए गए, जिनमें शामिल हैं:

  • सऊदी नुसुक (Nusuk) प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण।

  • ऑनलाइन उड़ान बुकिंग सुविधा।

  • डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत बनाना।

बैठक में भविष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित समाधानों पर भी चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • हिंदी, उर्दू और अन्य प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में 24×7 बहुभाषी वॉइस सपोर्ट सिस्टम।

  • एआई आधारित आवेदन और दस्तावेज सत्यापन।

  • विभिन्न प्रस्थान केंद्रों के लिए उड़ान आवंटन का मांग-आधारित मॉडल।

  • शिकायतों की रीयल-टाइम निगरानी और समाधान प्रणाली।

इन पहलों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।

हज-2027 की तैयारियां शुरू करने के निर्देश

किरण रिजिजू ने सभी संबंधित मंत्रालयों, एजेंसियों, हज समिति ऑफ इंडिया और अन्य हितधारकों को हज-2027 की तैयारियां प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कोटा आवंटन, पात्रता और स्वास्थ्य आवश्यकताओं, हवाई यात्रा, आवास, परिवहन, मीना की सुविधाओं, चिकित्सा तैयारियों और तकनीक के व्यापक उपयोग पर विशेष ध्यान देने को कहा।

उन्होंने बताया कि भारत और सऊदी अरब के बीच हज-2027 के लिए द्विपक्षीय समझौते पर 7 नवंबर 2026 को हस्ताक्षर किए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि हज नीति-2027 शीघ्र घोषित की जाएगी, जिसके बाद हज समिति ऑफ इंडिया संभावित यात्रियों से आवेदन आमंत्रित करेगी।

उन्होंने दोहराया कि भारत सरकार प्रत्येक भारतीय हज यात्री को सुरक्षित, सुविधाजनक, पारदर्शी और सम्मानजनक हज यात्रा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में अमेरिका के भारत स्थित राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अमित शाह ने कहा:

“आज नई दिल्ली में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की। सुरक्षा के क्षेत्र में, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी और मादक पदार्थों की तस्करी-रोधी सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।”

उन्होंने आगे कहा:

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि दोनों देशों के लोग इस द्विपक्षीय संबंध से लाभान्वित हों।”

बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ बनाने, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों तथा मादक पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण के लिए सहयोग बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने तथा दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में जैबिल की उन्नत विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 17 जून 2026 को पुणे के रंजनगांव में जैबिल इंक. (Jabil Inc.) की अत्याधुनिक उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) इकाई का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ नेता दिलीप वलसे पाटिल, युवा नेता ज्ञानेश्वर काटके, जैबिल सर्किट्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी एंडी प्रीस्टली सहित महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और जैबिल की टीम उपस्थित रही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैश्विक प्रगति का एक प्रमुख इंजन बन चुकी है और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का देश में विकास करना रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एआई डेटा सेंटर आज दुनिया भर में तीव्र विकास के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण के तहत यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन डेटा सेंटरों में उपयोग होने वाले प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक घटकों का निर्माण भारत में ही हो।

उन्होंने बताया कि जैबिल अपनी आधुनिक और उच्च-तकनीकी सुविधा के माध्यम से पुणे में डेटा सेंटरों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों का निर्माण करेगी। यह संयंत्र भारत की घरेलू तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में निर्यात को भी बढ़ावा देगा।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण की सराहना की, जिसके कारण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक बन गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की लक्षित नीतियों के परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है और आज यह भारत के निर्यात की तीसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन चुका है।

जैबिल की अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमताएं

जैबिल की यह नई सुविधा अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तकनीकों से सुसज्जित है। यहां निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित उत्पादों का निर्माण किया जाएगा:

  • एआई आधारित डेटा सेंटर उपकरण (AI Systems)

  • 5G प्रौद्योगिकी उपकरण

  • उच्च स्तरीय नेटवर्किंग उपकरण

  • औद्योगिक विद्युत प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स

  • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स

यह उच्च-प्रौद्योगिकी संयंत्र घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक निर्यात बाजारों की आवश्यकताओं को भी पूरा करने में सक्षम होगा।

इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर 11,000 तक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। साथ ही, यह घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात की वर्तमान उपलब्धियों की कल्पना भी कठिन थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की स्पष्ट और दूरदर्शी नीति ने भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण भागीदार बना दिया है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग का मूल्य: ₹13 लाख करोड़

  • निर्यात में प्रगति: इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात श्रेणी 9वें स्थान से बढ़कर 7वें, 5वें, 4वें और फिर 3वें स्थान पर पहुंची।

  • 2025 में उपलब्धि: इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनी।

  • अगला लक्ष्य: इलेक्ट्रॉनिक्स को भारत की दूसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनाना।

अश्विनी वैष्णव ने आश्वासन दिया कि सरकार प्रतिभा विकास, कौशल निर्माण, प्रशिक्षण तथा उच्च-सटीकता वाले यांत्रिक पुर्जों के विनिर्माण के लिए विशेष पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के व्यापक स्थानीयकरण के लिए वैश्विक नवप्रवर्तकों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट-यूजी पुनर्परीक्षा 2026 की तैयारियों की समीक्षा की

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज 21 जून 2026 को आयोजित होने वाली नीट-यूजी पुनर्परीक्षा की तैयारियों का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में शिक्षा मंत्रालय, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों और पदाधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी तथा एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह भी उपस्थित रहे।

बैठक को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा प्रक्रिया में ईमानदारी, पारदर्शिता और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने और पूर्ण तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुनर्परीक्षा के निष्पक्ष और सुचारु आयोजन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।

मंत्री ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा नामित अधिकारी सभी राज्यों में जाकर पुनर्परीक्षा से संबंधित गतिविधियों का समन्वय करेंगे और एनटीए महानिदेशक की अध्यक्षता वाले कमांड सेंटर को रिपोर्ट देंगे। उन्होंने राज्य सरकारों के नामित नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों को तनावमुक्त वातावरण में परीक्षा देने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने कहा कि छात्रों को परीक्षा में सहज महसूस कराने के लिए परीक्षा शुरू होने से पहले बैठने की व्यवस्था, पेयजल सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने राज्यों के नोडल अधिकारियों से इस संबंध में पर्याप्त कदम उठाने का आग्रह किया।

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी ने कहा कि पुनर्परीक्षा तक का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सक्रिय समन्वय, समय पर निर्देशों के प्रसार तथा निर्धारित प्रोटोकॉल के कड़ाई से पालन की आवश्यकता पर बल दिया।

एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि एनटीए जिला स्तर की समन्वय समितियों, राज्य पुलिस विभागों और खुफिया एजेंसियों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, ताकि पुनर्परीक्षा का आयोजन सुचारु रूप से किया जा सके।

बैठक में परीक्षा तैयारियों, समन्वय तंत्र, सुरक्षा प्रोटोकॉल, लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं, शिकायत निवारण प्रणाली तथा परीक्षा दिशानिर्देशों के अनुपालन पर विस्तृत चर्चा की गई। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सभी हितधारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने की सलाह दी गई, ताकि पुनर्परीक्षा का संचालन पारदर्शी, सुचारु और निर्बाध रूप से सुनिश्चित किया जा सके।

हाइब्रिड मोड में आयोजित इस बैठक में कुल 222 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय वित्तपोषित संस्थानों के नोडल अधिकारी, विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों के निदेशक शामिल थे। सभी प्रतिभागियों ने परीक्षा के सुचारु संचालन और अभ्यर्थियों को परेशानी-मुक्त अनुभव उपलब्ध कराने के लिए पूर्ण सहयोग और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

भारतीय तटरक्षक बल में स्वदेशी एयर कुशन वाहन (होवरक्राफ्ट) शामिल, समुद्री सुरक्षा को मिलेगा बल

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भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित छह स्वदेशी एयर कुशन वाहनों (ACVs)/होवरक्राफ्ट में से पहले वाहन को 18 जून 2026 को गोवा में सेवा में शामिल किया गया।

यह होवरक्राफ्ट समुद्री सुरक्षा, निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों सहित विभिन्न समुद्री दायित्वों में भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाएगा तथा उभरती चुनौतियों का सामना करने की उसकी क्षमता को मजबूत करेगा।

इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म का शामिल होना आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के साथ-साथ देश के समुद्री औद्योगिक आधार की बढ़ती क्षमता और मजबूती का भी प्रतीक है।

इस अवसर पर आयोजित समारोह में भारतीय तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी तथा जहाज निर्माण उद्योग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह शामिलीकरण संगठन द्वारा आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि पर दिए जा रहे निरंतर जोर को दर्शाता है, जिससे देश के समुद्री हितों की सुरक्षा के उसके दायित्व को और सशक्त बनाया जा सके।

भारतीय तटरक्षक बल के लिए छह एयर कुशन वाहनों की खरीद का अनुबंध रक्षा मंत्रालय और चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के बीच 24 अक्टूबर को हस्ताक्षरित किया गया था। इन स्वदेशी होवरक्राफ्टों के शामिल होने से तटरक्षक बल की तटीय एवं समुद्री क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया और निगरानी क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारतीय सेना का दल बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘खान क्वेस्ट 2026’ में भाग लेने के लिए मंगोलिया रवाना

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भारतीय सेना का एक दल बहुराष्ट्रीय संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘खान क्वेस्ट 2026’ (Exercise KHAAN QUEST) में भाग लेने के लिए आज मंगोलिया के लिए रवाना हो रहा है। यह अभ्यास 20 जून से 3 जुलाई 2026 तक मंगोलिया की राजधानी उलानबटार स्थित फाइव हिल्स ट्रेनिंग एरिया में आयोजित किया जाएगा।

इस अभ्यास में दुनिया के विभिन्न देशों की सेनाएं भाग लेंगी और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के अंतर्गत शांति समर्थन अभियानों में सहयोग तथा पारस्परिक संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) को मजबूत करने के उद्देश्य से मिलकर कार्य करेंगी। इस अभ्यास का पिछला संस्करण जून 2025 में मंगोलिया में आयोजित किया गया था।

‘खान क्वेस्ट’ की शुरुआत वर्ष 2003 में अमेरिका और मंगोलियाई रक्षा बलों के बीच एक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी। वर्ष 2006 से इसे बहुराष्ट्रीय शांति स्थापना अभ्यास का स्वरूप दिया गया और वर्ष 2026 का आयोजन इसका 23वां संस्करण है। इस अभ्यास में भारतीय सेना की भागीदारी वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और मंगोलिया के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है।

भारतीय सेना का 40 सदस्यीय दल जाट रेजिमेंट की एक बटालियन के सैनिकों के साथ-साथ अन्य हथियार एवं सेवा शाखाओं के कर्मियों का प्रतिनिधित्व करेगा।

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भाग लेने वाले देशों की सेनाओं को बहुराष्ट्रीय वातावरण में शांति स्थापना अभियानों के लिए तैयार करना है। इसके तहत संयुक्त योजना निर्माण और विभिन्न सामरिक अभ्यासों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनमें स्थिर एवं मोबाइल चेक पोस्ट की स्थापना, घेराबंदी एवं तलाशी अभियान, गश्त, शत्रुतापूर्ण क्षेत्रों से नागरिकों की निकासी, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) निरोधक अभ्यास, युद्धक्षेत्र प्राथमिक उपचार तथा घायल सैनिकों की निकासी जैसे अभ्यास शामिल हैं।

अभ्यास खान क्वेस्ट 2026 के माध्यम से सहभागी देश संयुक्त अभियानों के संचालन के लिए अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं को साझा करेंगे। यह अभ्यास भाग लेने वाले देशों की सेनाओं के बीच परिचालन तत्परता, आपसी विश्वास, सौहार्द और सहयोग को और मजबूत बनाएगा।

उन्नत उपग्रह संचार प्रौद्योगिकियों और सेवा गुणवत्ता मानकों पर टीईसी ने आयोजित की कार्यशाला

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दूरसंचार विभाग (DoT) की तकनीकी शाखा दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (TEC) ने आज नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में “उन्नत उपग्रह संचार प्रौद्योगिकियां और सेवा गुणवत्ता मानक निर्धारण” विषय पर एक कार्यशाला का सफल आयोजन किया।

कार्यशाला में IN-SPACe, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), आईआईटी दिल्ली तथा NGSO (नॉन-जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) और GSO (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) उपग्रह ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें अमेज़न कुइपर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस लिमिटेड, वनवेब इंडिया कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड, स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड, नेल्को लिमिटेड, ह्यूजेस कम्युनिकेशंस इंडिया सहित अन्य प्रमुख संस्थाएं शामिल थीं।

यह कार्यक्रम सरकार, नियामक संस्थाओं, शिक्षाविदों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और व्यापक उपग्रह पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला महत्वपूर्ण सहयोगात्मक आयोजन रहा।

कार्यशाला में नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN), उपग्रह-एकीकृत 5G और 6G प्रणालियों, स्पेक्ट्रम प्रबंधन तथा उपग्रह और स्थलीय नेटवर्कों के बढ़ते एकीकरण जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई।

प्रमुख NGSO उपग्रह ऑपरेटरों—अमेज़न कुइपर, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस, वनवेब इंडिया और स्टारलिंक—ने उपग्रह आधारित ब्रॉडबैंड सेवाओं के विकसित होते परिदृश्य, तैनाती संबंधी चुनौतियों तथा कनेक्टिविटी विस्तार के लिए अपनाए जा रहे तकनीकी नवाचारों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला में चर्चा के प्रमुख विषय

  • उपग्रह संचार क्षेत्र में उभरते रुझान

  • उपग्रह प्रणालियों का स्थलीय 5G और 6G नेटवर्कों के साथ एकीकरण

  • स्पेक्ट्रम साझाकरण मॉडल और इंटरऑपरेबिलिटी ढांचे

  • उपग्रह ब्रॉडबैंड के वैश्विक विकास और तैनाती अनुभव

  • सेवा गुणवत्ता (QoS) और उपयोगकर्ता अनुभव गुणवत्ता (QoE) के मानक

  • उपग्रह आधारित कनेक्टिविटी से जुड़े अवसर और चुनौतियां

टीईसी ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रगति के साथ कदमताल बनाए रखने, मानकों के समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए हितधारकों के साथ नियमित संवाद अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला से प्राप्त सुझाव और अनुशंसाएं भारत के डिजिटल संचार ढांचे के विकास, भविष्य के सेवा गुणवत्ता मानकों के निर्धारण तथा एक सुदृढ़ और समावेशी उपग्रह संचार पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

टीईसी के बारे में

दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (TEC), भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) की तकनीकी शाखा है। टीईसी भारत में दूरसंचार उपकरणों और नेटवर्कों के लिए तकनीकी मानक, विनिर्देश तथा अनुरूपता मूल्यांकन आवश्यकताएं तैयार करता है, जिससे इंटरऑपरेबिलिटी, गुणवत्ता और वैश्विक मानकों के अनुरूपता सुनिश्चित की जा सके।

टीईसी अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे आईटीयू-टी (ITU-T) और आईटीयू-आर (ITU-R) में भारत का प्रतिनिधित्व करता है तथा वैश्विक मानकीकरण गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय कार्य समूहों का समन्वय भी करता है।

भारत बिल्डकॉन 2026 का नई दिल्ली में शुभारंभ, 90 से अधिक देशों की भागीदारी

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निर्माण सामग्री और निर्माण उद्योग को समर्पित प्रदर्शनी ‘भारत बिल्डकॉन 2026 – वन नेशन, वन एक्सपो’ का आज नई दिल्ली स्थित यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल तथा सांसद पुरुषोत्तम रूपाला उपस्थित रहे। कार्यक्रम में निर्माण और भवन निर्माण सामग्री उद्योग से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

प्रदर्शनी के उद्घाटन दिवस पर 25,000 से अधिक आगंतुकों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन भारत और विदेशों से आए वास्तुकारों, बिल्डरों, डेवलपर्स, ठेकेदारों, निर्माताओं, व्यापारियों, नीति-निर्माताओं, उद्योग संघों तथा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को एक मंच पर लाता है, जिससे उद्योग जगत के बीच संवाद और व्यावसायिक सहयोग को बढ़ावा मिलता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आर्थिक विकास और भारतीय उद्योगों के लिए वैश्विक बाजारों में अवसर बढ़ाने में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत–ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा और भारतीय निर्माताओं तथा निर्यातकों के लिए नए अवसर प्रदान करेगा।

जितिन प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया, जिसके तहत गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण और सोर्सिंग केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि निर्माण और भवन निर्माण सामग्री सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने की क्षमता और संसाधन रखता है।

उन्होंने कहा कि भारत बिल्डकॉन जैसे मंच निर्माताओं, नवप्रवर्तकों, खरीदारों, नीति-निर्माताओं और उद्योग से जुड़े अन्य हितधारकों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करते हैं तथा क्षेत्र में सहयोग और व्यापारिक अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत बिल्डकॉन 2026 में 90 से अधिक देशों और भारत के 100 से अधिक शहरों की भागीदारी है। प्रदर्शनी में 24 विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित उत्पादों, तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इनमें सिरेमिक एवं स्टोन, हार्डवेयर, सीमेंट एवं स्टील, प्लाईवुड एवं लैमिनेट्स, फर्नीचर, सैनिटरीवेयर, विद्युत उपकरण, पेंट्स, निर्माण प्रौद्योगिकी तथा अन्य संबद्ध क्षेत्र शामिल हैं।

यह प्रदर्शनी आगामी दिनों तक जारी रहेगी और उद्योग जगत को तकनीकी नवाचारों के प्रदर्शन, व्यावसायिक सहयोग तथा नए व्यापारिक अवसरों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराएगी।

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