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महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 5 करोड़ रुपये का गांजा किया गया स्वाहा, शासन की गाइडलाइन के तहत हुआ नष्टीकरण

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महासमुंद- नशीले पदार्थों के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम के तहत महासमुंद पुलिस ने शनिवार को अवैध मादक पदार्थ गांजा के नष्टीकरण की बड़ी कार्यवाही की है। जिला स्तरीय ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी की मौजूदगी में लगभग 05 करोड़ 02 लाख 50 हजार रुपये कीमत का गांजा जलाकर नष्ट किया गया।

​शासन की गाइडलाइन का पालन 

​यह पूरी कार्यवाही शासन द्वारा निर्धारित कड़े दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपन्न हुई। जिला स्तरीय ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी के अध्यक्ष पुलिस अधीक्षक महासमुंद, सदस्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और जिला आबकारी अधिकारी की उपस्थिति में पहले मादक पदार्थ का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसके बाद उसे नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

​ 10 क्विंटल के करीब था गांजा 

​पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, कोमाखान थाने में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के तीन अलग-अलग बड़े मामलों में यह गांजा जप्त किया गया था। नष्ट किए गए गांजे का कुल वजन 09 क्विंटल 96 किलो 660 ग्राम है।

​ नष्टीकरण की मुख्य बातें: 

 ​स्थान: बालाजी प्लांट, बेलसोंडा (महासमुंद)।

 ​कुल वजन: 996.660 किलोग्राम।

​ बाजार मूल्य: ₹5,02,50,000 (लगभग 5 करोड़ 2 लाख रुपये)।

​ शामिल मामले: कोमाखान थाने के वर्ष 2025 का एक और वर्ष 2026 के दो बड़े प्रकरण।

​ अपराधियों में खौफ, पुलिस की मुस्तैदी 

​महासमुंद जिला ओडिशा सीमा से लगा होने के कारण तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। पुलिस द्वारा जप्त किए गए इस भारी मात्रा में गांजे को सार्वजनिक रूप से नष्ट करना यह दर्शाता है कि प्रशासन अवैध नशे के कारोबार की कमर तोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

महासमुंद: खट्टी जंगल 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा; पुरानी रंजिश में हुई थी प्रकाश की हत्या, 3 आरोपी गिरफ्तार

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महासमुंद- जिला पुलिस ने खट्टी जंगल में मिली युवक की लाश की गुत्थी सुलझाते हुए एक सनसनीखेज अंधे कत्ल (ब्लाइंड मर्डर) का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में उड़ियापारा रावणभांठा निवासी तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हत्या की वजह पुरानी रंजिश और गाली-गलौज को बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला? 

​बीती 6 अप्रैल 2026 को ग्राम खट्टी के जंगल में एक अज्ञात युवक का शव संदेहास्पद स्थिति में मिला था। मृतक की पहचान प्रकाश पटेल (23 वर्ष), निवासी खैराभांठा के रूप में हुई। प्रकाश के शरीर पर चोट के गहरे निशान थे और गले में गमछा लिपटा हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने धारा 103(1) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

शराब पार्टी के दौरान गाली-गलौज बनी मौत का कारण 

​पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित टीम ने जब मृतक के दोस्तों से पूछताछ की, तो परतें खुलने लगीं। जांच में सामने आया कि मृतक प्रकाश और आरोपी (जलांधर, काजू और गोपाल) आपस में दोस्त थे।

​पिछले महीने शराब पीने के दौरान प्रकाश ने नशे की हालत में आरोपियों को मां-बहन की गालियां दी थीं। इसी अपमान का बदला लेने के लिए तीनों ने उसकी हत्या की साजिश रची।

 ​फिल्मी अंदाज में दिया वारदात को अंजाम 

अपहरण और हमला: 5 अप्रैल की रात आरोपियों को सूचना मिली कि प्रकाश गायत्री मंदिर के पास है। आरोपी काजू और गोपाल वहां पहुंचे, प्रकाश के साथ मारपीट की और उसे जबरन बाइक पर बैठाकर खट्टी जंगल ले गए।

जघन्य हत्या: जंगल के सन्नाटे में आरोपियों ने कांच की बोतल और पत्थर से प्रकाश पर ताबड़तोड़ हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

फरारी की साजिश: हत्या के बाद आरोपियों ने अपने साथी जलांधर सोनवानी को इसकी जानकारी दी। जलांधर ने उन्हें पैसे और अपनी स्प्लेंडर बाइक (CG 04 QQ 6845) देकर गरियाबंद भागने और 'अंडरग्राउंड' होने की सलाह दी।

​पुलिस की मुस्तैदी से दबोचे गए हत्यारे 

​महासमुंद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की मदद से घेराबंदी की। लगातार दबिश देकर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम: 

​चंद्रहास नेताम उर्फ काजू (21 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​गोपाल प्रधान (20 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​जालंधर सोनवानी (21 वर्ष) - निवासी वार्ड नं. 30, नया रावणभांठा।

​पुलिस ने तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

भारत फार्मा 2026: दवा क्षेत्र में नवाचार और वैश्विक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत औषधि विभाग (Department of Pharmaceuticals) द्वारा इंडिया फार्मा 2026 (9वां संस्करण) का आयोजन 13-14 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित फिक्की (FICCI) हाउस में किया जा रहा है। यह आयोजन FICCI और Indian Pharmaceutical Alliance (IPA) के सहयोग से आयोजित हो रहा है।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल द्वारा किया जाएगा।

थीम

इस वर्ष का विषय है:
"Discover in India: Leapfrogging Life-Sciences Innovation"
यह थीम भारत को एक वैश्विक फार्मा नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।

आयोजन के प्रमुख उद्देश्य

  • भारत की फार्मा क्षमता और R&D को बढ़ावा देना

  • वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करना

  • दवा उद्योग को वॉल्यूम से वैल्यू और इनोवेशन आधारित मॉडल की ओर ले जाना

प्रमुख प्रतिभागी

इस दो दिवसीय कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग विशेषज्ञ शामिल होंगे:

  • मनोज जोशी (सचिव, औषधि विभाग)

  • पुण्य सलिला श्रीवास्तव (सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय)

  • प्रो. विनोद के. पॉल (सदस्य, नीति आयोग)

  • डॉ. रेणु स्वरूप, डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन (विशेषज्ञ)

  • DCGI, CDSCO और US FDA के प्रतिनिधि

साथ ही उद्योग जगत के प्रमुख नाम:

  • दिलीप सांघवी (Sun Pharma)

  • पंकज पटेल (Zydus Lifesciences)

  • सिप्ला, मैनकाइंड, एबॉट, एलि लिली जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि

मुख्य सत्र

कार्यक्रम में 6 प्रमुख प्लेनरी सेशन होंगे:

  • नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियां

  • नियामक प्रणाली को सशक्त बनाना

  • AI और नई तकनीकों का उपयोग

  • CRDMO क्षमता का विकास

  • फार्मा फाइनेंसिंग इकोसिस्टम

  • नवाचार को आगे बढ़ाने की रणनीतियां

इसके अलावा स्टार्टअप शोकेस भी आयोजित किया जाएगा।

महत्व

भारत पहले से ही सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं का वैश्विक आपूर्तिकर्ता है। यह आयोजन देश को फार्मा इनोवेशन हब बनाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत में डिजिटल भुगतान क्रांति: UPI ने बदली वित्तीय लेन-देन की तस्वीर

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कुछ समय पहले तक भारत में पैसे का लेन-देन समय लेने वाला और जटिल प्रक्रिया हुआ करता था। बिल भुगतान के लिए लंबी कतारें, पैसे भेजने के लिए बैंक जाना और कई दिनों तक इंतजार करना आम बात थी। लेकिन आज डिजिटल तकनीक ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है।

डिजिटल परिवर्तन की शुरुआत

भारत में भुगतान प्रणाली का विकास बार्टर सिस्टम से लेकर नकद, चेक और डिजिटल माध्यमों तक हुआ है। 2000 के दशक में RBI ने RTGS (2004) और IMPS (2010) जैसी सेवाएं शुरू कीं, जिससे तेज ट्रांसफर संभव हुआ, लेकिन इनकी पहुंच सीमित थी।

JAM ट्रिनिटी: बड़ा बदलाव

डिजिटल क्रांति की असली नींव JAM ट्रिनिटी (जनधन, आधार और मोबाइल) ने रखी:

  • जनधन योजना: करोड़ों लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा

  • आधार: डिजिटल पहचान और पारदर्शिता सुनिश्चित

  • मोबाइल: आसान और त्वरित लेन-देन का माध्यम

इससे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को मजबूती मिली और लोगों में डिजिटल भुगतान के प्रति भरोसा बढ़ा।

UPI: एक क्रांतिकारी नवाचार

2016 में लॉन्च हुआ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भारत की भुगतान प्रणाली में बड़ा बदलाव लेकर आया:

  • मोबाइल नंबर या UPI ID से तुरंत भुगतान

  • 24x7 रियल-टाइम ट्रांजैक्शन

  • सभी बैंकों और ऐप्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी

  • सुरक्षित और आसान उपयोग

UPI की उपलब्धियां

  • जनवरी 2026 में 21.7 अरब ट्रांजैक्शन

  • ₹28.33 लाख करोड़ का लेन-देन

  • भारत के 81% डिजिटल रिटेल भुगतान में हिस्सेदारी

  • वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में 49% हिस्सा

वित्तीय समावेशन को बढ़ावा

UPI ने सिर्फ भुगतान आसान नहीं किया, बल्कि:

  • छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों को डिजिटल बनाया

  • ग्रामीण और शहरी अंतर को कम किया

  • क्रेडिट, बीमा और बचत तक पहुंच बढ़ाई

आज ऑटो ड्राइवर, दुकानदार, किसान—सभी QR कोड से भुगतान ले रहे हैं।

सुरक्षा और विश्वास

  • RBI द्वारा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू (1 अप्रैल 2026 से)

  • सुरक्षित और भरोसेमंद लेन-देन

  • आसान शिकायत निवारण प्रणाली

वैश्विक पहचान

भारत का UPI अब दुनिया में मिसाल बन चुका है:

  • IMF और World Bank ने सराहा

  • कई देशों (UAE, सिंगापुर, नेपाल, फ्रांस आदि) में विस्तार

  • दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम

निष्कर्ष

UPI ने भारत में वित्तीय लेन-देन को तेज, सरल, पारदर्शी और समावेशी बना दिया है। यह सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं, बल्कि जन-जन का प्लेटफॉर्म बन गया है, जिसने देश की आर्थिक प्रगति को नई दिशा दी है।


भारत-नेपाल व्यापार को नई रफ्तार देगा NH-927 हाईवे परियोजना

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भारत और नेपाल दक्षिण एशिया के सबसे सक्रिय स्थलीय व्यापारिक साझेदारों में से हैं। नेपाल के कुल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 60% से अधिक है, जो दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक संबंधों को दर्शाती है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा NH-927 के बाराबंकी–बहराइच 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे को मंजूरी मिलने से भारत-नेपाल व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना रूपईडीहा लैंड पोर्ट और नेपालगंज से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे सीमा पार व्यापार और आर्थिक सहयोग मजबूत होगा।

प्रमुख लाभ:

व्यापार में तेजी

  • रूपईडीहा–नेपालगंज बॉर्डर भारत से नेपाल निर्यात का प्रमुख मार्ग है।

  • बेहतर सड़क से तेज और सुगम परिवहन संभव होगा, जिससे व्यापार बढ़ेगा।

कृषि और खाद्य आपूर्ति को बढ़ावा

  • चावल, गेहूं, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और पशु चारा नियमित रूप से नेपाल भेजे जाते हैं।

  • यात्रा समय 150 मिनट से घटकर 75 मिनट हो जाएगा।

  • खराब होने वाले उत्पादों की बर्बादी कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा।

आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति

  • दवाइयां और उपभोक्ता सामान की सप्लाई बेहतर होगी।

  • ट्रैफिक जाम और देरी कम होने से लागत घटेगी और आपूर्ति स्थिर रहेगी।

लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बढ़ावा

  • रूपईडीहा में ट्रकों की आवाजाही बढ़ेगी।

  • वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स व्यवसाय में नए अवसर पैदा होंगे।

सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास

  • बहराइच और आसपास के इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

  • होटल, ढाबे, छोटे व्यापार और रिटेल सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।

  • स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

आम लोगों पर प्रभाव:

  • ट्रक ड्राइवर, किसान और छोटे व्यापारियों की आय बढ़ेगी

  • परिवहन लागत कम होगी

  • आय के स्थायी अवसर बढ़ेंगे

यह परियोजना न केवल व्यापार को मजबूत करेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



उद्योग और श्रम विभाग के आपसी समन्वय से संवर रहा है- छत्तीसगढ़

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रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जिस स्पष्ट नीति के साथ श्रमिकों और उद्योगों के समन्वित विकास को प्राथमिकता दी है, वह आज ठोस परिणामों के रूप में सामने आ रही है। श्रम विभाग की योजनाओं में यह भावना स्पष्ट झलकती है कि श्रमिक केवल आर्थिक इकाई नहीं, बल्कि समाज की आधारशिला हैं। उनके जीवन में स्थायित्व, सम्मान और सुरक्षा लाना ही सच्चे विकास का संकेत है। 12 अप्रैल का यह विशेष अवसर उद्योग तथा श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के समर्पण, कार्यक्षमता और जनसेवा की भावना को याद करने का दिन है। आपके कुशल नेतृत्व से ही छत्तीसगढ़ प्रगति, समृद्धि और समान अवसरों का आदर्श राज्य बनकर उभरा है।


2026 रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ के विकास की वर्तमान यात्रा केवल योजनाओं और घोषणाओं की कहानी भर नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे नेतृत्व की कथा है जिसने श्रमिक, युवा, उद्यमी और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। इस परिवर्तनकारी दौर में उद्योग व श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनका कार्य केवल प्रशासनिक दक्षता तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का जीवंत उदाहरण है। छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 वर्ष की अल्प आयु में उद्योग के क्षेत्र में जो एक नया इतिहास रचने का संकल्प लिया है वह किसी से छिपा नहीं है। उद्योग के क्षेत्र में आज छत्तीसगढ़ की अपनी एक अलग पहचान है।

नई उद्योग नीति (2024-2030) में छत्तीसगढ़ के समावेशी विकास पर जोर दिया गया है।

श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों में सबसे प्रेरणादायक पहल श्रमिकों के बच्चों को उत्कृष्ट विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि परिवर्तन का वह मार्ग है जिससे कि आने वाली नई पीढ़ी ज्ञान और अवसरों के माध्यम से अपना सुनहरा और सुरक्षित भविष्य स्वयं गढ़ सके। आज के संदर्भ में श्रमिक परिवारों के बच्चों का राज्य के प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करना, एक नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर प्रस्तुत करता है। इसके साथ ही मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को लाखों रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करना सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें प्रतिभा का सम्मान सर्वाेपरि है। यह न केवल उन बच्चों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि पूरे श्रमिक समाज के लिए आत्मविश्वास का स्त्रोत भी है।

उद्योग और श्रम विभाग से आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले दो वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये सीधे श्रमिकों के खातों में हस्तांतरित किए गए हैं, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ भी सुनिश्चित हुआ है। प्रतिदिन हजारों श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलना इस बात का प्रमाण है कि शासन की नीतियां धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं। श्रमिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए आवास सहायता, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना, दुर्घटना में त्वरित आर्थिक सहयोग जैसी पहलें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से ’श्रम अन्न योजना’ के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन। ’श्रम अन्न योजना’ के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, एक मानवीय और संवेदनशील शासन का परिचायक है।

औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी मंत्री लखनलाल देवांगन के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने नई ऊंचाईयों को छुआ है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के माध्यम से राज्य में निवेशको को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। करोड़ों रुपये के निवेश प्रस्ताव, सैकड़ों नए उद्योगों की स्थापना और हजारों युवाओं को रोजगार मिलना इस नीति की सफलता को प्रमाणित करता है।

नवा रायपुर में देश का पहला एआई डाटा सेंटर स्थापित करने की दिशा में बढ़ता कदम, सेमीकंडक्टर और आईटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश, तथा स्टार्टअप नीति का क्रियान्वयन ये सभी पहलें छत्तीसगढ़ को पारंपरिक अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर आधुनिक तकनीकी युग में स्थापित कर रही हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना को भी नई दिशा देने वाला है। प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में ई-निविदा प्रणाली और सिंगल विंडो सिस्टम जैसे कदमों ने पारदर्शिता को बढ़ाया है जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है और राज्य में व्यापार करने की प्रक्रिया सरल बनी है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ आज निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है।

सामाजिक समावेशन को छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और दूरस्थ क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की योजनाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। सामाजिक समावेश नही किसी भी राज्य की वास्तविक प्रगति का आधार होता है।

उद्योग तथा श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने अपने गंभीर व दूर-दृष्टि सोच एवं विभागीय दायित्वों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि यदि नेतृत्व में संवेदनशीलता और स्पष्ट दृष्टि हो, तो विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है। वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सरकार के मार्गदर्शन में यह परिवर्तन और अधिक सशक्त और व्यापक रूप ले रहा है।

 छगन लाल लोन्हारे (उप संचालक जनसम्पर्क)


सीएम साय का बदला काफिला! फॉर्च्यूनर की जगह दौड़ी नई स्कॉर्पियो

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 रायपुर। सीएम साय के काफिले में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जिसने प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अब तक काफिले में शामिल Toyota Fortuner की जगह नई Mahindra Scorpio गाड़ियां नजर आईं, जिसे लेकर मौके पर उत्सुकता का माहौल रहा।


जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री अब तक पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel के कार्यकाल में खरीदी गई फॉर्च्यूनर का उपयोग कर रहे थे। हालांकि, वाहनों की स्थिति और लगातार उपयोग को देखते हुए इन्हें बदलने का निर्णय लिया गया।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के काफिले में कुल छह नई स्कॉर्पियो गाड़ियां शामिल की गई हैं। इनमें से एक बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो में स्वयं मुख्यमंत्री सफर करेंगे। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।

काफिले में हुए इस बदलाव को लेकर भाजपा नेताओं और मीडिया के बीच खासा उत्साह देखा गया। कई लोग नई गाड़ियों के बारे में जानकारी लेते नजर आए, वहीं इस बदलाव को लेकर चर्चा भी तेज रही।

इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पुराने वाहन काफी समय से उपयोग में थे और उनकी स्थिति पहले जैसी नहीं रही थी। उन्होंने बताया कि कई बार रास्ते में गाड़ियां खराब हो जाती थीं, जिससे परेशानी होती थी। इन्हीं कारणों से अब नए वाहनों को काफिले में शामिल किया गया है।

संसद में दिखी सियासी सौहार्द की तस्वीर! PM मोदी और राहुल गांधी की बातचीत ने खींचा ध्यान

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 नई दिल्ली: संसद भवन परिसर में एक खास और सकारात्मक तस्वीर देखने को मिली। नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई।


यह मुलाकात महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान हुई। कार्यक्रम में मौजूद नेताओं के बीच दोनों नेताओं ने कुछ समय रुककर आपस में बातचीत की।

करीब डेढ़ मिनट के वीडियो में दोनों नेता बातचीत करते नजर आए, वहीं आसपास भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। इस दौरान का दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

हाल ही में संपन्न संसद सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी। ऐसे में इस मुलाकात को कई लोग लोकतांत्रिक परंपरा और आपसी संवाद का सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

सरगुजा में महिला की हत्या का खुलासा: 6 साल के संबंध में शक बना वजह, आरोपी गिरफ्तार

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 सरगुजा/अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक महिला की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। आरोपी को चिरमिरी से गिरफ्तार किया गया है।


पुलिस के अनुसार, आरोपी मिथुन उर्फ पंडा का मृतका के साथ करीब 6 साल से संबंध था। दोनों साथ रहते थे और कबाड़ बीनने का काम करते थे। आरोपी को महिला के किसी अन्य युवक से संबंध होने का शक था, जिसे लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ और इसी दौरान आरोपी ने हत्या की वारदात को अंजाम दिया।

क्या है पूरा मामला?

घटना अंबिकापुर के कोतवाली थाना क्षेत्र की है। 3 अप्रैल को महामाया प्रवेश द्वार के पास रिंग रोड किनारे एक महिला का शव संदिग्ध अवस्था में मिला था। सूचना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी की तलाश की गई।

आरोपी की गिरफ्तारी

वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था। वह ट्रेन से नागपुर की ओर गया और फिर चिरमिरी पहुंचकर रिश्तेदार के यहां छिपा हुआ था। पुलिस ने उसे संदिग्ध स्थिति में घूमते हुए पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपराध कबूल कर लिया।

जांच और खुलासा

पुलिस ने आरोपी को घटना स्थल पर ले जाकर क्राइम सीन का पुनर्निर्माण (री-क्रिएशन) कराया। प्रारंभिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में महिला की मौत गंभीर चोटों के कारण होना सामने आया है। मामले की विस्तृत जानकारी आज पुलिस अधिकारियों द्वारा साझा की जाएगी।

बताया जा रहा है कि महिला अपने पति की मृत्यु के बाद अकेले रह रही थी और उसका एक बेटा भी है। महिला और आरोपी के बीच लंबे समय से संबंध थे, लेकिन आपसी विवाद और शक ने इस घटना को जन्म दिया।

आयुष्मान योजना में बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ के 59 अस्पतालों पर गिरी गाज, 33 सस्पेंड

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 रायपुर: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत छत्तीसगढ़ में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर 59 निजी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं।


इनमें से 33 अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है, जबकि 26 अस्पतालों के भुगतान और प्री-ऑथराइजेशन (Pre-Auth) पर रोक लगा दी गई है।

 कार्रवाई के प्रमुख कारण

आवेदन नहीं किया: 21 अस्पतालों ने HEM 2.0 पोर्टल पर आवेदन ही नहीं किया, इन्हें सस्पेंड किया गया।

जानकारी अपडेट नहीं की: 12 अस्पतालों ने क्वेरी का जवाब नहीं दिया, इन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित किया गया।
अपूर्ण आवेदन: 26 अस्पतालों के आवेदन अधूरे पाए गए, इसलिए उनका भुगतान और प्री-ऑथ रोक दिया गया।

 राजधानी रायपुर सबसे आगे

कार्रवाई में सबसे ज्यादा लापरवाही रायपुर में सामने आई, जहां कुल 44 अस्पताल प्रभावित हुए। इससे स्पष्ट है कि राजधानी में ही नियमों का सबसे ज्यादा उल्लंघन हो रहा था।

 क्या था नियम?

NHA के निर्देशानुसार सभी आयुष्मान पंजीकृत अस्पतालों को HEM 2.0 पोर्टल पर अपनी पूरी जानकारी अपडेट करना और जरूरी दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य था। इसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तय की गई थी। कई बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद अस्पतालों ने नियमों का पालन नहीं किया।

खून से सने बैग- जूते… ‘मिनाब 168’ के साथ पाकिस्तान पहुँचा ईरानी प्रतिनिधिमंडल, वार्ता से पहले दिया भावुक संदेश

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 इस्लामाबाद/तेहरान। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुँच गया है। लेकिन इस कूटनीतिक यात्रा से पहले एक भावुक और प्रतीकात्मक संदेश ने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींच लिया है।


ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ ने विमान के अंदर की एक तस्वीर साझा की, जिसमें खाली सीटों पर स्कूली बच्चों की तस्वीरें रखी गई थीं। इन बच्चों की मौत मिनाब स्कूल हमले में हुई थी। ग़ालिबफ़ ने इस तस्वीर के साथ लिखा— “इस उड़ान में मेरे साथी, मिनाब 168।”

बताया जा रहा है कि यह कदम दुनिया को उस हमले की याद दिलाने और पीड़ितों के लिए न्याय की मांग को दोहराने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मिनाब स्कूल हमला क्या था

मिनाब में स्थित ‘शजरेह तैय्येबाह’ स्कूल पर मिसाइल हमला उस समय हुआ था जब क्षेत्र में अमेरिका-इज़रायल-ईरान संघर्ष की शुरुआत हुई थी। इस हमले में 168 बच्चों की मौत हो गई थी।

अमेरिका ने दावा किया था कि निशाना स्कूल के पास मौजूद सैन्य ठिकाना था, लेकिन ईरान ने इसे सोची-समझी रणनीति बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी।

UN में उठा मामला

ईरान ने इस हमले का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाया है। संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका से मामले की जांच पूरी कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।

पाकिस्तान में अहम वार्ता

इस्लामाबाद में हो रही वार्ता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ग़ालिबफ़ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची, केंद्रीय बैंक गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

ईरान ने वार्ता से पहले ही अमेरिका पर अविश्वास जताया है। ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत का अनुभव “टूटे हुए वादों” से भरा रहा है।

ईरान की शर्तें और चेतावनी

ईरान लेबनान में युद्धविराम और अपनी संपत्तियों को अनफ्रीज करने की मांग कर रहा है। साथ ही उसने चेतावनी दी है कि यदि उसकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो वह समझौते से पीछे हट सकता है।

वहीं, अमेरिका ने भी सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह बातचीत में किसी तरह का “खेल” न करे।

एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर ‘मिनाब 168’ का प्रतीकात्मक संदेश यह दिखाता है कि जख्म अभी भी ताजा हैं और भरोसे की राह आसान नहीं है।

दरिंदगी की हद पार: 5 साल की मासूम से दुष्कर्म, बोरे में बंद कर फेंका, आरोपी गिरफ्तार

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां एक 5 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसे बोरे में बंद कर कुएं के पास फेंक दिया गया। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पड़ोसी युवक को गिरफ्तार कर लिया है।


चॉकलेट का लालच देकर ले गया

जानकारी के अनुसार, बच्ची दोपहर करीब 12 बजे घर के पास स्थित दुकान पर चॉकलेट लेने गई थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया, जहां उसने बच्ची के साथ दरिंदगी की।

बोरे में बंद कर फेंका

घटना के बाद आरोपी ने बच्ची का मुंह कपड़े से बांध दिया, ताकि वह शोर न मचा सके। इसके बाद उसे बोरे में डालकर घर के पीछे खंडहर के पास स्थित कुएं के किनारे फेंक दिया।

हिलते बोरे ने बचाई जान

दोपहर करीब 2 बजे गांव के दो युवकों की नजर कुएं के पास पड़े एक बोरे पर पड़ी, जो हल्का हिल रहा था। शक होने पर जब उन्होंने बोरा खोला तो अंदर बच्ची को देख दंग रह गए। बच्ची की हालत गंभीर थी और वह सांस लेने के लिए संघर्ष कर रही थी। युवकों ने तत्परता दिखाते हुए उसे तुरंत बाहर निकाला और परिजनों को सूचना दी।

गांव में आक्रोश, थाने का घेराव

घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। सैकड़ों की संख्या में लोग उतई थाने पहुंच गए और आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग करने लगे। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

POCSO Act के तहत कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। बच्ची का इलाज जारी है और उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा मामला

पुलिस का कहना है कि इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा जाएगा ताकि पीड़िता (Rape of a Girl Child) को जल्द न्याय मिल सके और आरोपी को कड़ी सजा दी जा सके।

कर्म ही सच्ची पूजा का संदेश देता है श्रीमद्भागवत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री, प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। उन्होंने व्यास पीठ पर विराजमान श्री हिमांशु कृष्ण भारद्वाज जी द्वारा कही जा रही श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रीमद्भागवत का मूल संदेश यही है कि कर्म ही सच्ची पूजा है। उन्होंने कहा कि हमें सच्चाई और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहकर मानव जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।


मुख्यमंत्री साय ने श्रीराम मंदिर में भगवान के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की बाललीला के अंतर्गत माखनचोरी के प्रसंग का भक्तिभाव के साथ श्रवण किया। उल्लेखनीय है कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन श्री राम मंदिर परिसर में 6 अप्रैल से 12 अप्रैल तक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कथा के समापन अवसर पर भगवान बांके बिहारीलाल की आरती-पूजन में भी शामिल हुए।

मानव जीवन दुर्लभ, सेवा से ही सार्थकता : मुख्यमंत्री

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है।  उन्होंने कहा कि हमें दूसरों के लिए जीते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्री राम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। प्रभु श्री राम ने अपने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में बिताया। उन्होंने कहा कि लगभग पांच हजार वर्ग किलोमीटर में फैला अबूझमाड़ का जंगल ही दंडकारण्य क्षेत्र है और शिवरीनारायण माता शबरी की पावन भूमि है। गुरु घासीदास जैसे महान संतों की जन्मभूमि होने के कारण छत्तीसगढ़ एक धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध प्रदेश है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ईश्वर के आशीर्वाद से आज छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त हो रहा है और निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। 

रामलला दर्शन योजना से हजारों श्रद्धालुओं को लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित प्रभु श्री रामलला दर्शन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम के दर्शन कराए जा रहे हैं। अब तक लगभग 42 हजार भक्त रामलला के दर्शन कर चुके हैं तथा 5 हजार से अधिक बुजुर्गजन देश के विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन कर चुके हैं।

धार्मिक संरक्षण और गौसेवा के लिए सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया गया है। इस कानून के अंतर्गत देश के अन्य राज्यों की तुलना में कठोर प्रावधान किए गए हैं, जिससे निश्चित रूप से अवैध धर्मांतरण पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुरभि गौधाम योजना लागू की गई है, जिसके तहत गौधामों में गौमाता के लिए चारा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक पुरंदर मिश्रा, हिमांशु द्विवेदी, सुनील रामदास अग्रवाल सहित श्रीमद्भागवत कथा के आयोजक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

मत्स्य पालन विभाग ने नई दिल्ली में ‘सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026’ का किया आयोजन

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मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग ने अंबेडकर भवन, नई दिल्ली में सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026 का आयोजन किया। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस मीट का उद्देश्य सरकार और उद्योग के बीच संवाद स्थापित करना, निर्यातकों की समस्याओं को समझना तथा बाजार विस्तार, मूल्य संवर्धन और निर्यात बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करना था।

प्रमुख बिंदु:

  • केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने निर्यातकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के सीफूड निर्यात में मजबूत वृद्धि हुई है।

  • उन्होंने नए बाजारों की खोज, उत्पाद विविधीकरण और सख्त गुणवत्ता मानकों (जैसे एंटीबायोटिक प्रतिबंध और ट्रेसबिलिटी) के पालन पर जोर दिया।

  • अंडमान-निकोबार, EEZ और गहरे समुद्र में टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।

  • बेहतर कोल्ड-चेन, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई।

  • निर्यातकों को ₹1 लाख करोड़ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मत्स्य क्षेत्र को उच्च मूल्य और उच्च मांग वाले सेक्टर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

  • सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्खी ने बताया कि लगभग 40 देशों के साथ मार्केट डाइवर्सिफिकेशन रणनीति पर काम किया जा रहा है।

  • रेडी-टू-ईट और वैल्यू एडेड उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

चुनौतियां और सुझाव:

  • निर्यातकों ने मार्केट एक्सेस, उच्च अनुपालन लागत, कोल्ड-चेन की कमी और लॉजिस्टिक्स समस्याओं को प्रमुख चुनौतियां बताया।

  • कैच सर्टिफिकेट प्रक्रिया को सरल बनाने, समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती को बढ़ावा देने और फिश फीड उत्पादन में सुधार की मांग उठाई गई।

पृष्ठभूमि:

  • भारत का सीफूड निर्यात पिछले 11 वर्षों में औसतन 7% वार्षिक वृद्धि के साथ बढ़ा है।

  • 2013-14 में ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹62,408 करोड़ हो गया।

  • झींगा (श्रिम्प) निर्यात का इसमें सबसे बड़ा योगदान है।

  • भारत लगभग 130 देशों में 350 से अधिक उत्पाद निर्यात करता है।

यह बैठक भारत के सीफूड निर्यात को और मजबूत करने तथा वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

प्रकृति में जनजातीयों की अटूट आस्था, देवी-देवताओं के वास से जल जंगल का हो रहा संरक्षण व संवर्धन : रामविचार नेताम

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 रायपुर : आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि देश के लगभग सभी राज्यों में जनजातीय समुदाय के लोग निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीयों का जल, जंगल, जमीन, नदी-नालों और पहाड़ों में अटूट आस्था है। जनजातीय समुदाय पेड़ पौधों, नदी-नालों में देवी-देवताओं का वास मानते हैं और इन्ही संस्कृति और परंपराओं के कारण वनवासी समुदाय प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन में पहले पायदान पर है।


मंत्री नेताम ने आज नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राज्य-स्तरीय संवाद सम्मेलन ’छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गहन मंथन हुआ है। इस मंथन में जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसकी उपयोगिता नीति निर्माण और जनहित में कैसी होगी इसके लिए हमारी सरकार तत्परता के साथ काम करेगी।


मंत्री नेताम कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदायों के विभिन्न समस्याओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। इस टास्क फोर्स की संवेदनशीलता और महत्व को देखते हुए इसकी कमान स्वयं मुख्यमंत्री संभालेंगे, जो इसके अध्यक्ष होंगे। नीतिगत निर्णयों के धरातल पर प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष कार्यान्वयन समिति भी बनाई जाएगी, जो बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी ।

नेताम ने कहा कि पेसा (पंचायत उपबंध अधिनियम) और एफआरए (वनाधिकार अधिनियम) के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, विशेष रूप से सीमाओं के निर्धारण (डिमार्केशन ऑफ बॉउंड्रिस) जैसी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जागृत करते हुए कहा, “हम केवल इन साझा संसाधनों के उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि इनके संरक्षक भी हैं, और हमारा उपभोग केवल अपनी वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित होना चाहिए”। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में जनजातीय कल्याण से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और समुदायों को उनके अधिकार दिलाना है ।

आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कहा कि यह टास्क फोर्स विशेष रूप से पेसा और वनाधिकार अधिनियम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत में जनजातीय बोली, भाषा, समुदायिक नेतृत्व समृद्ध है। जल, जंगल, जमीन के संरक्षण व संवर्धन में इन जनजातीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति उनके ज्ञान, उनका उद्देश्य, जल जंगल से जुड़े हुए हैं। उनका रिश्ता प्रकृति से है। वे प्रकृति को मां के रूप में, देवता के रूप में पूजते हैं। उनके दैनिक क्रियाकलापों से लेकर मृत्यु तक के उत्सव प्रकृति के संरक्षण में सहायक सिद्ध होती है।

प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि इन दो दिनों तक चले अधिवेशन में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के 300 से अधिक प्रतिभागियों, नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और ग्राम प्रमुखों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र राज्य की 70 लाख एकड़ ’कॉमन्स’ भूमि (जंगल, चारागाह और जल निकाय) रही, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी की जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना, धरतीआबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, नियद नेल्ला नार जैसे विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों एवं जनजातीय समुदाय के सम्पूर्ण विकास के साथ ही प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं। आगे भी सामुदायिक सहयोग से बेहतर दिशा में काम किया जाएगा।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री वी. श्रीनिवास राव ने जोर दिया कि सामुदायिक सहयोग के बिना विशाल वनों और जैव विविधता की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की वन नीतियां प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि विनियामक हैं।

मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने कहा कि जल संरक्षण जनजातीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने मनरेगा के माध्यम से वंचित समुदायों को जल प्रबंधन में जोड़ने पर बल दिया। रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने रेखांकित किया कि जल संरक्षण कोई ’रॉकेट साइंस’ नहीं है, बल्कि यह सदियों के अनुभव से उपजा सामुदायिक ज्ञान है।

संवाद सम्मेलन में यह बात उभर कर आई कि कॉमन्स केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आधार हैं। इस अवसर पर सोनमणि बोरा ने जनजातीय लोक गीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के दस्तावेजीकरण और कॉपीराइट संरक्षण के लिए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना साझा की। सम्मेलन में नेल्सन मंडेला पुरस्कार विजेता श्री शेर सिंह आंचला, पद्म पांडी राम मंडावी, पद्मश्री जगेेश्वर यादव और गौर मारिया कलाकार लक्ष्मी सोरी, इंदु नेताम ने भी अपने अनुभव साझा किए और संसाधनों के संरक्षण की अपील की।

कार्यक्रम को सफल बनाने में अपर संचालक संजय गौड़, टीआरटीआई की संयुक्त संचालक गायत्री नेताम की विशेष योगदान रही। यह कार्यक्रम आदिम जाति विकास विभाग, टीआरटीआई और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स पहल के तहत संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें यूएनडीपीए आईआईटी-भिलाई, बीआरएलएफ, एक्सिस बैंक फाउंडेशन और अन्य प्रमुख संस्थान सहयोगी रहे।

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