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बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़ता भारत: रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से खुलेगा तरक्की का द्वार

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 धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक/ सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक


रायपुर : भारत आज तीव्र गति से आधुनिक बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और सुदृढ़ आर्थिक नेटवर्क के निर्माण की दिशा में अग्रसर है। सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स को एकीकृत करते हुए देश को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास निरंतर जारी है। विकास के इसी दूरदर्शी दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह ष्नए भारत की नई रफ्तारष् का प्रतीक है, जो उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए क्षितिज खोलने जा रहा है।


मध्य-पूर्वी समुद्री तट को जोड़ने वाला महामार्ग
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर देश के मध्य भाग को पूर्वी समुद्री तट से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक मार्ग है। यह छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी (संपर्क) स्थापित करेगा, जिससे सड़क परिवहन, लॉजिस्टिक नेटवर्क और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इस परियोजना को प्रधानमंत्री की “गति शक्ति” और “आत्मनिर्भर भारत” की सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

विकास का मूलमंत्र
किसी भी राज्य या देश के विकास का सबसे मजबूत आधार उसका इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। जहां विश्वस्तरीय सड़कें, सुगम परिवहन और अत्याधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाएं होती हैं, वहां उद्योगों का तेजी से विस्तार होता है और निवेश आकर्षित होता है। यह कॉरिडोर माल परिवहन को अधिक तीव्र, सुरक्षित और लागत प्रभावी (कम खर्चीला) बनाएगा। इसके परिणामस्वरूप उद्योगों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा और तैयार उत्पाद कम से कम समय में बाजार तक पहुंच सकेंगे।

चूंकि विशाखापट्टनम बंदरगाह देश के प्रमुख समुद्री द्वारों में से एक है, इसलिए इस कॉरिडोर के माध्यम से छत्तीसगढ़ को सीधे पोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राज्य के उद्योगों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच स्थापित होगी, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी।

छत्तीसगढ़ को मिलने वाले प्रमुख लाभ
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। छत्तीसगढ़ खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, कृषि और वनोपज से समृद्ध राज्य है। यहाँ लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और स्टील उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। पूर्व में बेहतर परिवहन और लॉजिस्टिक नेटवर्क के अभाव के कारण उद्योग अपनी पूरी क्षमता का लाभ नहीं उठा पाते थे, परंतु यह कॉरिडोर इन चुनौतियों को समूल समाप्त कर देगा।

औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन
कॉरिडोर के निर्माण से रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी, कांकेर और जगदलपुर जैसे क्षेत्रों में नए औद्योगिक क्लस्टर्स विकसित होंगे। स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और एमएसएमई (लघु उद्योगों) को एक नई ऊर्जा मिलेगी, जिससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का रुझान इस क्षेत्र की ओर तेजी से बढ़ेगा।

रोजगार के नए अवसरों का सृजन
इतनी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना के आने से रोजगार के अवसर भी आनुपातिक रूप से बढ़ते हैं। सड़क निर्माण, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क्स, नई औद्योगिक इकाइयों और परिवहन सेवाओं के माध्यम से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में जीविकोपार्जन के साधन मिलने से पलायन की समस्या पर काफी हद तक रोक लगेगी।

बस्तर क्षेत्र का कायाकल्प
यह कॉरिडोर बस्तर संभाग के लिए विशेष रूप से परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से कटे क्षेत्रों में बेहतर सड़क और व्यापारिक संपर्क स्थापित होगा। बस्तर के बहुमूल्य वन उत्पाद, अनूठे हस्तशिल्प, कृषि उपज और लघु उद्योगों को बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे आदिवासी समुदायों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी।

कृषि और वनोपज को सही मूल्य
छत्तीसगढ़ देश में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त यहाँ मक्का, दलहन, फल और लघु वनोपज का भी प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है। बेहतर परिवहन व्यवस्था से किसानों और वनोपज संग्राहकों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में सुगमता होगी। परिवहन लागत घटने से सीधे तौर पर किसानों का मुनाफा बढ़ेगा।

पर्यटन उद्योग को नई उड़ान
चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर और बस्तर के सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होने से राज्य में पर्यटन उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा। इससे होटल, गाइड, स्थानीय परिवहन और हस्तशिल्प व्यवसायियों की आय दोगुनी होगी।

व्यापार और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि
विशाखापट्टनम पोर्ट तक आसान और तेज पहुंच से छत्तीसगढ़ के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (कॉम्पिटिटिवनेस) बढ़ेगी। संक्षेप में कहें तो, रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर महज एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया महामार्ग है। यह छत्तीसगढ़ को देश के एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक हब के रूप में स्थापित करने का सामर्थ्य रखता है।

मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही सशक्त अर्थव्यवस्था की नींव होता है, और यही परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। नए भारत की नई रफ्तार का यह कॉरिडोर देश के हर कोने को प्रगति की साझा मुख्यधारा से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम है।

सीएम साय कल लेंगे कैबिनेट बैठक, कई अहम फैसलों पर लग सकती है मुहर

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को मंत्रिमंडल की अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक शाम 6 बजे मंत्रालय में आयोजित होगी। प्रदेश में चल रहे सुशासन तिहार के बीच होने वाली यह पहली कैबिनेट बैठक मानी जा रही है।


जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में सुशासन तिहार के दौरान मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित नहीं हुई थी। ऐसे में इस बार की बैठक को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर चर्चा हो सकती है। खास तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के हालिया बस्तर दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों और मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास के दौरान हुई बैठकों के आधार पर कुछ अहम निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

नई तबादला नीति पर भी हो सकती है चर्चा

सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश की तर्ज पर नई तबादला नीति को लेकर भी कैबिनेट में चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि सरकार प्रशासनिक कसावट और सुशासन को मजबूत करने के लिए कुछ बड़े फैसले ले सकती है।


शासन की पहल से डुबान क्षेत्र के घर में लौटी रोशनी, सियाराम मरकाम परिवार को गर्मी से मिली राहत

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 रायपुर : राज्य शासन की संवेदनशील पहल और दूरस्थ अंचलों तक बिजली सुविधाओं की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता ने धमतरी जिले के गंगरेल डुबान क्षेत्र स्थित ग्राम तुमाखुर्द निवासी सियाराम मरकाम के परिवार के जीवन में फिर से रोशनी लौटा दी है। वर्षों पहले स्थापित सोलर होम लाइट सिस्टम के खराब हो जाने से उनका परिवार लंबे समय से परेशान था। भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली और पंखे की सुविधा बंद होने से दैनिक जीवन कठिन हो गया था।


राज्य शासन की मंशा के अनुरूप यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी बिजली की उपलब्धता बनी रहे तथा गर्मियों के कठिन समय में लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी संवेदनशील दृष्टिकोण के तहत समस्या की जानकारी मिलते ही क्रेडा के तकनीकी अमले ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोलर होम लाइट सिस्टम की मरम्मत की और नई बैटरी स्थापित कर उसे पुनः चालू किया।

सिस्टम के पुनः कार्यशील होते ही श्री मरकाम के घर में फिर से उजाला फैल गया। अब उनका घर रात में रोशन रहने लगा है और पंखे की सुविधा बहाल होने से परिवार को गर्मी से राहत मिली है। दूरस्थ डुबान क्षेत्र में रहने वाले इस परिवार के लिए यह सुविधा बड़ी राहत लेकर आई है।

श्री सियाराम मरकाम ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय से वे इस समस्या से परेशान थे, लेकिन अब उनके परिवार को बड़ी सुविधा मिल गई है और घर में फिर से सामान्य जीवन लौट आया है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना “सौभाग्य” सहित विभिन्न विद्युत एवं सौर ऊर्जा आधारित योजनाओं के माध्यम से राज्य शासन लगातार यह प्रयास कर रहा है कि अंतिम छोर तक रहने वाले परिवारों को भी भरोसेमंद और सतत ऊर्जा सुविधा मिल सके। दूरस्थ क्षेत्रों में सोलर आधारित विद्युत व्यवस्था इसी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह पहल दर्शाती है कि राज्य शासन की प्राथमिकता केवल बिजली पहुंचाना ही नहीं, बल्कि उसकी निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है, ताकि हर घर रोशन रहे और लोगों का जीवन सुगम बन सके।

भीषण गर्मी के बीच जल्द दस्तक दे सकता है मॉनसून, केरल में भारी बारिश के संकेत

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 नई दिल्ली। देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मॉनसून के जल्द आने की उम्मीद बढ़ गई है। केरल में लगातार हो रही भारी बारिश ने संकेत दिए हैं कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून समय से पहले दस्तक दे सकता है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है।


मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के अरब सागर के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व हिस्सों, कोमोरिन क्षेत्र, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। सामान्य तौर पर केरल में मॉनसून 1 जून तक पहुंचता है, लेकिन इस बार इसके पहले आने की संभावना जताई जा रही है।

केरल में कई जिलों में येलो अलर्ट

IMD ने केरल के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। 25 मई को पतनमतिट्टा, आलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड में अलर्ट जारी किया गया।

वहीं 26 मई को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, आलाप्पुझा और एर्नाकुलम में चेतावनी जारी रहेगी। 27 मई को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और आलाप्पुझा जिलों में अलर्ट रहेगा। इसके बाद 28 मई को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पतनमतिट्टा, आलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम और इडुक्की में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने 28 मई से 3 जून के बीच केरल के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान भी जताया है।

कई राज्यों में जारी है भीषण गर्मी

देश के कई हिस्सों में रविवार को भीषण गर्मी का असर जारी रहा। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी 47.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश का सबसे गर्म स्थान दर्ज किया गया।

IMD ने अनुमान जताया है कि 29 मई के बाद गर्मी से धीरे-धीरे राहत मिल सकती है। विभाग के अनुसार, अगले सात दिनों तक मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में तथा अगले 3 से 5 दिनों तक पूर्वी और प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में लू से लेकर भीषण लू चलने की संभावना बनी रहेगी।

राजस्थान में 47 डिग्री तक पहुंच सकता है पारा

जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले तीन से चार दिनों तक राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा। पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में 26 और 27 मई को तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

वहीं आंध्र प्रदेश में मौसम का अलग असर देखने को मिल रहा है। कुछ जिलों में भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि कई क्षेत्रों में आने वाले दिनों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अगले तीन दिनों तक भीषण लू की चेतावनी जारी की है।

 
 

गवर्नेंस समिट 2026 : विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारतीय स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के भारती सार्वजनिक नीति संस्थान के सहयोग से 23 मई 2026 को आईएसबी मोहाली परिसर में “गवर्नेंस समिट 2026 : विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)” का आयोजन किया।

शिखर सम्मेलन के चौथे संस्करण की शुरुआत उद्घाटन मुख्य भाषण से हुई, जिसे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने संबोधित किया। उन्होंने ऐसे एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के अंतिम छोर पर मौजूद प्रत्येक नागरिक की सेवा कर सके।

उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के लिए उत्पादकता बढ़ाने, शासन व्यवस्था में सुधार करने तथा स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विनिर्माण और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में पहुंच का विस्तार करने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रस्तुत करती है।” उन्होंने यह भी कहा कि एआई के कारण बौद्धिक कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन भारत समावेशी विकास के लिए इस तकनीक का उपयोग करने की विशिष्ट स्थिति में है।

पूरे दिन चले इस कार्यक्रम में चार विषयगत पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें डिजिटल वाणिज्य में एआई की भूमिका, महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और वहनीयता, तथा रोजगार सृजन और डिजिटल उद्यमिता जैसे विषय शामिल थे। इसके साथ ही एक समानांतर गोलमेज चर्चा में राज्य सरकारों से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक अंतिम छोर तक सार्वजनिक सेवा वितरण में एआई के क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया गया।

अपने उद्घाटन संबोधन में भारती सार्वजनिक नीति संस्थान, आईएसबी के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अश्विनी छत्रे ने एआई से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को प्रभावी प्रशासनिक ढांचे में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एआई को एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा।”

उन्होंने असमानता, तकनीकी छलांग लगाने के अवसर और भविष्य के रोजगार को उभरते एआई परिदृश्य के प्रमुख आयाम बताया। प्रोफेसर छत्रे ने यह भी कहा कि एआई से जुड़े अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त सुरक्षा उपाय, सामाजिक सुरक्षा तंत्र और सकारात्मक नीतिगत कदम आवश्यक हैं।

इस शिखर सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के सदस्यों ने भाग लिया। सम्मेलन में रिलायंस रिटेल, मास्टरकार्ड, अपोलो हॉस्पिटल्स, आईआईटी मद्रास, यूनिसेफ इंडिया, पंजाब पुलिस तथा कई केंद्रीय और राज्य सरकारी मंत्रालयों की भागीदारी रही।

आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) में अत्याधुनिक लिनियर एक्सेलेरेटर का शुभारंभ

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Army Hospital (Research & Referral) के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में 25 मई 2026 को एक अत्याधुनिक रिंग गैन्ट्री-आधारित लिनियर एक्सेलेरेटर (Linear Accelerator) का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित रहे।

यह उन्नत तकनीक Army Hospital (R&R) में कैंसर उपचार सेवाओं को और मजबूत करेगी तथा सेवारत सैन्य कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को आधुनिक रेडियोथेरेपी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी। इससे अस्पताल में बढ़ते मरीजों के उपचार की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

यह लिनियर एक्सेलेरेटर आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीकों जैसे —

  • वॉल्यूमेट्रिक मॉड्यूलेटेड आर्क थेरेपी (VMAT)

  • इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी (IMRT)

  • इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी (IGRT)

  • स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी (SBRT)

  • स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी (SRS)

को संचालित करने में सक्षम है।

यह तकनीक ट्यूमर वाले हिस्सों पर अत्यंत सटीक तरीके से रेडिएशन पहुंचाती है, जबकि आसपास के सामान्य ऊतकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचता है। इससे उपचार के परिणाम बेहतर होने और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता बढ़ने में मदद मिलेगी।

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (AFMS) के अंतर्गत इस नए लिनियर एक्सेलेरेटर की खरीद, पहले इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण की तुलना में एक बड़ा तकनीकी उन्नयन है, जिसे अब सेवा से हटा दिया गया है। यह कदम AFMS के ऑन्कोलॉजी सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AFMS के अन्य कैंसर उपचार केंद्रों को भी चरणबद्ध तरीके से उन्नत किया जा रहा है।

इस अवसर पर DG AFMS Arti Sarin, Armed Forces Medical Services के वरिष्ठ अधिकारी तथा अविनाश दास सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में महंगा हुआ सफर, पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने बिगाड़ा आम लोगों का बजट

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। 25 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में ₹2.61 और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की वृद्धि कर दी। इसके बाद प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल की कीमत ₹109 प्रति लीटर के पार पहुंच गई है।


राजधानी रायपुर में पेट्रोल अब ₹107.96 प्रति लीटर बिक रहा है। हालांकि बड़े शहरों की तुलना में यहां थोड़ी राहत है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं का बजट प्रभावित कर दिया है।

बस्तर और सरगुजा संभाग में सबसे ज्यादा असर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बस्तर और सरगुजा संभाग में ईंधन की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नारायणपुर में पेट्रोल ₹109.65, जगदलपुर में ₹109.64, दंतेवाड़ा में ₹109.60 और बीजापुर में ₹109.59 प्रति लीटर पहुंच गया है।

वहीं सरगुजा संभाग में जशपुर में पेट्रोल ₹109.52, सूरजपुर में ₹109.39 और अंबिकापुर में ₹109.09 प्रति लीटर बिक रहा है। रायगढ़ में भी पेट्रोल की कीमत ₹109.03 प्रति लीटर दर्ज की गई है।

दुर्ग में पेट्रोल ₹108.29, धमतरी में ₹108.45, महासमुंद में ₹108.64 और बिलासपुर में ₹108.65 प्रति लीटर पहुंच चुका है।

कोरबा में सबसे सस्ता पेट्रोल

प्रदेश में सबसे कम पेट्रोल कीमत कोरबा में दर्ज की गई है, जहां पेट्रोल ₹107.63 प्रति लीटर बिक रहा है। इसके अलावा जांजगीर में ₹108.21 और कवर्धा में ₹108.86 प्रति लीटर रेट दर्ज किए गए हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

जानकारों के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन लागत अधिक होने के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा रहती हैं। वहीं बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में सप्लाई बेहतर होने से कुछ राहत मिलती है।

बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की खबरें सामने आई हैं, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग लागत, एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट के आधार पर तय होती हैं।

ट्रांसपोर्ट और आम जनता पर असर

लगातार बढ़ते ईंधन दामों का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई और यात्री किराए में बढ़ोतरी हो सकती है।

इधर, संभावित कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। रायपुर कलेक्टर ने अधिक कीमत वसूली और अवैध बिक्री की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। नागरिक 9977222564, 9977222574, 9977222584 और 9977222594 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सरकारी तेल कंपनियां प्रतिदिन सुबह 6 बजे पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी करती हैं।

CG NEWS : गांव में चल रही थी प्रार्थना सभा, धर्मांतरण की शिकायत पर पहुंची पुलिस

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 रायपुर : बिलासपुर जिले में एक बार फिर कथित धर्मांतरण का मामला सामने आया है। सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम मोहरा में आयोजित एक प्रार्थना सभा को लेकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ के बाद तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता सुमित यादव ने पुलिस को दी गई रिपोर्ट में बताया कि 24 मई 2026 की सुबह करीब 9 बजे उन्हें सूचना मिली थी कि ग्राम मोहरा में राम स्वरूप सूर्यवंशी के घर के आंगन में टीन शेड के नीचे प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही है। आरोप है कि सभा के दौरान ईसाई धर्म का प्रचार करते हुए लोगों को कथित रूप से प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

शिकायत के बाद सुमित यादव अपने साथियों धीरज भोई, सुभाष साहू और शुभांशु भोई के साथ मौके पर पहुंचे। वहां राम स्वरूप सूर्यवंशी, जितेंद्र सूर्यवंशी और बिलासपुर निवासी पंकज कुमार करियारे मौजूद मिले।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सभा में शामिल लोगों को बेहतर सुविधाएं, अच्छे घर में विवाह और निःशुल्क इलाज जैसी बातें कहकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। मौके पर बाइबल और नाश्ते की व्यवस्था होने की बात भी कही गई है।

इसके अलावा शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सभा के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के प्रति आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 तथा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

इबोला वायरस को लेकर भारत अलर्ट, फ्रीकी देशों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह

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 EBOLA VIRUS : एक बार फिर दुनिया में खतरनाक महामारी का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। अफ्रीका के कई देशों में इबोला वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। इसके बाद भारत सरकार भी सतर्क हो गई है और नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।


केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इन देशों में इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जो भारतीय नागरिक इन देशों में रह रहे हैं या यात्रा कर रहे हैं, वे स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

वहीं, अफ्रीका CDC ने भी कांगो और युगांडा में फैल रहे Bundibugyo स्ट्रेन इबोला वायरस को महाद्वीपीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्ट्रेन तेजी से फैल सकता है और फिलहाल इसके लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में अभी तक Bundibugyo स्ट्रेन इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है इबोला वायरस?

इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जिसमें तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, शरीर में दर्द, उल्टी, दस्त और कई मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है और गंभीर स्थिति में जानलेवा साबित हो सकता है।

सरकार की अपील

भारत सरकार ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही विदेश यात्रा से पहले स्वास्थ्य संबंधी सलाह और दिशा-निर्देशों की जानकारी लेने को कहा गया है।

Petrol-Diesel Price Hike: 10 दिनों में चौथा झटका! पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी

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Petrol-Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार, 25 मई 2026 को एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। नई दरें सुबह 6 बजे से लागू हो गईं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 2.61 रुपये महंगा होकर 102.12 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल 2.71 रुपये बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है।


पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को करीब 3 रुपये, 19 मई को लगभग 90 पैसे और 23 मई को फिर करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। अब 25 मई को फिर बड़ा इजाफा हुआ है। कुल मिलाकर पिछले 10 दिनों में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।

दिल्ली में नई कीमतें

कीमतों में ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में डीजल का दाम 92.49 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं पेट्रोल 99.51 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।

सामान्य पेट्रोल-डीजल के साथ प्रीमियम ईंधनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। XP95 पेट्रोल 106.63 रुपये से बढ़कर 109.24 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि XG की कीमत 97.81 रुपये से बढ़कर 100.52 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।

मुंबई में भी बढ़े दाम

मुंबई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 111.21 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो एक दिन पहले 108.45 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं डीजल के दाम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम

  • नोएडा : डीजल 95.56 रुपये, पेट्रोल 102.12 रुपये, XP95 110.68 रुपये, XG 101.17 रुपये प्रति लीटर
  • भोपाल : डीजल 99.64 रुपये, पेट्रोल 114.57 रुपये, XP95 123.88 रुपये, XG 104.90 रुपये प्रति लीटर
  • चंडीगढ़ : डीजल 89.47 रुपये, पेट्रोल 101.51 रुपये, XG 94.65 रुपये प्रति लीटर
  • गांधीनगर : डीजल 98.13 रुपये, पेट्रोल 102.01 रुपये, XP95 110.57 रुपये, XG 103.37 रुपये प्रति लीटर
  • गुवाहाटी : डीजल 97.23 रुपये, पेट्रोल 105.73 रुपये, XP95 114.68 रुपये प्रति लीटर
  • जयपुर : डीजल 97.78 रुपये, पेट्रोल 112.69 रुपये, XP95 121.97 रुपये, XG 103.23 रुपये प्रति लीटर
  • पटना : डीजल 99.36 रुपये, पेट्रोल 113.37 रुपये, XP95 122.25 रुपये प्रति लीटर

लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों से आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।

 
 

 

200 साल की हिंदी पत्रकारिता का जश्न, रायपुर प्रेस क्लब मनाएगा ‘पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव’

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 रायपुर। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रायपुर प्रेस क्लब द्वारा 30 मई को आयोजित किए जा रहे “पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” की तैयारियों को लेकर आज प्रेस क्लब परिसर में महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं।


रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने सबसे पहले प्रेस क्लब कार्यकारिणी की विस्तारित बैठक ली। बैठक में कार्यकारिणी के नव नियुक्त सात सदस्यों के साथ विभिन्न मोर्चा एवं प्रकोष्ठों के विशेष आमंत्रित संयोजक तथा सलाहकार सदस्य के रूप में प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व महासचिव भी उपस्थित रहे।

कार्यकारिणी की बैठक के पश्चात “पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” के सफल आयोजन हेतु गठित विभिन्न समितियों की अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में संरक्षक एवं सलाहकार मंडल के सदस्यों ने विभिन्न समितियों के संयोजकों के साथ आयोजन की रूपरेखा, कार्यक्रम के स्वरूप तथा आयोजन की सफलता को लेकर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित यह विशेष उत्सव दिनभर चार सत्रों में संपन्न होगा।

कार्यक्रम का प्रथम सत्र शुभारंभ सत्र होगा, जिसमें मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल के सदस्य एवं जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। द्वितीय सत्र हिंदी प्रिंट मीडिया की 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा एवं उसकी भूमिका पर केंद्रित रहेगा। तृतीय सत्र इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं न्यू मीडिया की संभावनाओं और चुनौतियों पर आधारित होगा, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ एवं विभिन्न संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे।

इसके अतिरिक्त रायपुर प्रेस क्लब द्वारा इस अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें पत्रकार साथियों की प्रस्तुतियों के साथ संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बैठक में प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े सहित कार्यकारिणी एवं विभिन्न समितियों के सदस्य उपस्थित रहे,

रायपुर प्रेस क्लब ने सभी पत्रकार साथियों, मीडिया संस्थानों एवं नागरिकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागिता निभाने की अपील की है।

Kisaan School : किसान स्कूल में 5 जून से शुरू होगा सीड बॉल अभियान,सब्जी, फल फूल के बीजों से वितरण के लिए बनाई जा रही सीड बॉल

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जांजगीर-चाम्पा- जिले के एक छोटे से गांव बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल, जहां पर बनाई जा रही सब्जी, फल फूल की बीजों की सीड बॉल, जिसका वितरण लोगों को 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर किया जाएगा और सीड बॉल अभियान का शुभारम्भ किया जाएगा. इस अभियान में किसान, स्कूली बच्चे, बिहान की दीदियां, सामाजिक संगठन के लोग और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे.


इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का एक सरल एवं प्रभावी माध्यम है. वर्षा ऋतु में सीड बॉल अभियान चलाकर बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा सकता है. इस अभियान का शुभारम्भ 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुबह 10 बजे वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह से किया जाएगा. किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल बनाने के लिए उपजाऊ मिट्टी, गोबर या वर्मी कम्पोस्ट, सब्जी, फल या फूल की बीज और पानी जरुरत होती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले 5 भाग मिट्टी 2 भाग गोबर या वर्मी कम्पोस्ट आवश्यक मात्रा में बीज का मिश्रण करके गेंद बनाकर दो दिन छाया में सुखाना होता है और बारिश के मौसम में खेत, जंगल, पहाड़ी या खाली भूमि पर फेकना होता है. इसके लिए नीम, आम, जामुन, तेन्दु, करंज, गुलमोहर, इमली, मुनगा, व अन्य बीज शामिल कर सकते हैं. 

पर्यावरण में सीड बॉल का महत्व

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि पर्यावरण में सीड बॉल का बहुत ही बड़ा महत्व है. जैसे वनों की वृद्धि, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण, वायु शुद्धिकरण, जलवायु परिवर्तन नियंत्रण, कम लागत एवं आसान तकनीक आदि शामिल है, वहीं इसके लाभ के बारे में बताया कि पौधों की सुरक्षा बढ़ती है. पक्षियों और चीटियों से बीज सुरक्षित रहतीं है. पानी की कम आवश्यकता, सूखे क्षेत्रो में भी उपयोगी, सामूहिक अभियान में आसान उपयोग कर सकते हैं. 

क्या है सीड बॉल...

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि यह एक छोटी गेंद होती है, जिसे मिट्टी, गोबर वर्मी कम्पोस्ट और बीज मिलाकर बनाई जाती है. इसका उपयोग पौधों और पेड़ों के बिजों को सुरक्षित तरीके से उगाने के लिए किया जाता है. बारिश होने पर यह गेंद धीरे धीरे गल जाती है और बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाता है. इसे सीड बम भी कहा जाता है. यह प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण की एक सरल एवं कम लागत वाली तकनीक है.

लाल किला मैदान से गूंजा जनजातीय गौरव का स्वर

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राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – जनजातीय समाज दुनिया को सिखा सकता है प्रकृति संग विकास

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर राष्ट्रीय समागम में देशभर से जुटे हजारों जनजातीय प्रतिनिधि

जनजातीय भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण पर मुख्यमंत्री ने दिया विशेष जोर

जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप - मुख्यमंत्री साय 

नई दिल्ली- देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप एवं रामविचार नेताम भी उपस्थित थे। 

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

माउंट एवरेस्ट विजेता अमिता श्रीवास के स्वास्थ्य लाभ हेतु राज्य सरकार सजग : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को समन्वय कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर- जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता श्रीवास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता श्रीवास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 देशभर में सफलतापूर्वक संपन्न, 5.49 लाख अभ्यर्थी हुए शामिल

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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने आज यानी 24 मई 2026 को सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026, जिसमें भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 भी शामिल है, का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह परीक्षा देशभर के 83 शहरों में स्थित 2,072 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई।

इस परीक्षा के लिए कुल 8,19,732 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से लगभग 5.49 लाख उम्मीदवार (करीब 67 प्रतिशत) परीक्षा में उपस्थित हुए। वहीं, वर्ष 2025 की तुलना में उस वर्ष लगभग 9.5 लाख आवेदनकर्ताओं में से करीब 61 प्रतिशत उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे।

इस वर्ष आयोग ने पहली बार परीक्षा केंद्रों पर रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली लागू की, जिसका उद्देश्य नकल और पहचान संबंधी धोखाधड़ी को रोकना था। यह स्वदेशी तकनीक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) द्वारा विकसित की गई। यह प्रणाली सभी 2,072 केंद्रों पर सफलतापूर्वक लागू की गई, जिसे परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

UPSC अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने परीक्षा के सुचारू संचालन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग, NeGD और NIC की टीमों ने मिलकर इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक लागू किया। उन्होंने कहा कि फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली का निर्बाध संचालन आयोग की परीक्षा प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है।

परीक्षा दो सत्रों में आयोजित हुई—पहला सत्र सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक सामान्य अध्ययन (पेपर-I) और दूसरा सत्र दोपहर 2:30 से 4:30 बजे तक सिविल सेवा अभिक्षमता परीक्षा (CSAT) के रूप में हुआ।

सबसे अधिक उपस्थिति दिल्ली केंद्र में रही, जहां 70,885 उम्मीदवार 144 केंद्रों पर उपस्थित हुए। इसके बाद हैदराबाद में 44,209 और पटना में 39,147 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। वहीं सबसे कम उपस्थिति कारगिल में 98, पोर्ट ब्लेयर में 270 और लद्दाख के लेह में 308 उम्मीदवारों की रही।

परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, बिजली बैकअप, चिकित्सा सुविधा, छायादार प्रतीक्षालय, स्वच्छता और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए विशेष सुविधाएं सुनिश्चित की गई थीं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के तहत मोबाइल सिग्नल जैमर भी लगाए गए थे।

इस वर्ष भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ में तीन नए परीक्षा केंद्र जोड़े गए हैं, जिससे परीक्षार्थियों की भीड़ को कम करने में मदद मिलेगी।

आयोग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पहली बार परीक्षा के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर की जारी करने का निर्णय लिया है, जिस पर 31 मई 2026 तक आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी।

कुल 11,224 दिव्यांग उम्मीदवारों ने परीक्षा में भाग लिया, जिनके लिए विशेष समय और सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

UPSC ने कहा कि परीक्षा का सफल आयोजन विभिन्न संस्थाओं के समन्वय और मजबूत व्यवस्था का परिणाम है, जो देश की परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता, दक्षता और विश्वसनीयता को और मजबूत करता है।

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