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भिलाई में CBI की बड़ी कार्रवाई: CGPSC भर्ती घोटाले में पूर्व सचिव जे.के. ध्रुव के घर छापा, दस्तावेजों की जांच जारी

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 भिलाई। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती अनियमितता मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बुधवार सुबह भिलाई में बड़ी कार्रवाई की। CBI की टीम ने आयोग के पूर्व सचिव जीवन किशोर (जे.के.) ध्रुव के सेक्टर-10 स्थित निवास पर दबिश देकर दस्तावेजों की जांच शुरू की।


जानकारी के अनुसार, सुबह तड़के CBI की दो अलग-अलग टीमें ध्रुव के घर पहुंचीं। टीम के अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से पूछताछ की तथा मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। ध्रुव की गिरफ्तारी के बाद यह दूसरा अवसर है जब जांच एजेंसी उनके निवास पर पहुंची है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चर्चित CGPSC भर्ती मामले में अब तक 29 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। इनमें पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक सहित कई अधिकारी और अभ्यर्थी शामिल हैं।

यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कार प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि प्रभावशाली व्यक्तियों के रिश्तेदारों और परिचितों को लाभ पहुंचाने के लिए योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी की गई। इसके चलते डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर हुए चयन सवालों के घेरे में आ गए थे।

राज्य में सरकार परिवर्तन के बाद जुलाई 2023 में मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी। इसके बाद एजेंसी ने जांच तेज करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की कार्रवाई की।

CBI की जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने कथित रूप से नियमों में बदलाव कर अपने परिजनों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया। जांच एजेंसी के अनुसार, चयन प्रक्रिया में "रिश्तेदार" शब्द को "परिवार" से बदलने सहित अन्य अनियमितताओं के आरोप जांच के दायरे में हैं। प्रश्नपत्र लीक कर परीक्षा में लाभ पहुंचाने संबंधी आरोपों की भी जांच की जा रही है।

मामले में तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप नियंत्रक ललित गणवीर सहित अन्य अधिकारियों पर पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल मामले के कई प्रमुख आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध हैं।

CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में टामन सिंह सोनवानी के अलावा बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के निदेशक श्रवण कुमार गोयल, उनके पुत्र शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार, उप नियंत्रक ललित गणवीर, निशा कोसले, दीपा आदिल, सुमित ध्रुव समेत कई अन्य नाम शामिल हैं। इनमें से कुछ आरोपियों को न्यायालय से जमानत भी मिल चुकी है।

फिलहाल CBI की जांच और छानबीन जारी है तथा एजेंसी मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।

मां और दामाद के कथित संबंधों के विवाद में किशोरी की मौत, मां और पति गिरफ्तार

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 अररिया। बिहार के अररिया जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 16 वर्षीय एक किशोरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उसकी मां और पति पर गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने मामले में मृतका की मां और पति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।


मृतका की पहचान साजिदा परवीन (16) के रूप में हुई है। घटना प्रेम नगर वार्ड क्रमांक 16 की बताई जा रही है। परिजनों का आरोप है कि किशोरी की मां और उसके पति के बीच कथित संबंधों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।

मृतका के पिता मुदशीर ने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व उनकी बेटी का विवाह अब्बू नसर (35) से कराया गया था। उनके अनुसार, बेटी इस विवाह के पक्ष में नहीं थी और उम्र के बड़े अंतर को लेकर आपत्ति जता रही थी। बावजूद इसके परिवार के दबाव में विवाह संपन्न कराया गया।

पिता ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी शाइस्ता परवीन और दामाद अब्बू नसर के बीच कई वर्षों से कथित संबंध थे। उनका कहना है कि विवाह के बाद भी दोनों का संपर्क बना रहा, जिसका विरोध साजिदा करती थी। इसी बात को लेकर परिवार में अक्सर विवाद होता था।

परिजनों के अनुसार, साजिदा ने अपनी मां और पति के कथित संबंधों का विरोध किया था। आरोप है कि इसी कारण उसे प्रताड़ित किया गया और बाद में उसकी मौत हो गई। पिता का दावा है कि घटना के बाद मामले को छिपाने की भी कोशिश की गई।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

अररिया आरएस थाना प्रभारी अंकुर कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच और परिजनों के आरोपों के आधार पर मृतका की मां शाइस्ता परवीन और पति अब्बू नसर को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों से पूछताछ की जा रही है तथा मामले की सभी पहलुओं से जांच जारी है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मां और दामाद के कथित संबंधों का एंगल सामने आया है। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

डील नहीं, अब जंग के संकेत? बहरीन-कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी हमला

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 वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। शांति समझौते की संभावनाओं के बीच बुधवार को ईरान ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप समेत कई रणनीतिक ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की।


अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई अधिकांश मिसाइलें अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं या रास्ते में ही नष्ट कर दी गईं। वहीं बहरीन की ओर दागी गई तीन मिसाइलों को अमेरिका और बहरीन की संयुक्त वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया।

CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा अमेरिकी 5वीं फ्लीट के मुख्यालय और क्षेत्र में स्थित एयरबेस पर हमले के दावे किए गए हैं, लेकिन अमेरिकी सेना पर किया गया कोई भी हमला सफल नहीं रहा। अमेरिकी सेना पूरी तरह सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार है।

हमलों के बाद कुवैत में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। देश के कई हिस्सों में अलार्म बजाए गए और नागरिकों को सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई। कुवैती सेना ने एक्स पर जारी संदेश में कहा कि वायु रक्षा प्रणाली मिसाइल और ड्रोन हमलों को निष्क्रिय करने में जुटी हुई है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो यह टकराव पूरे पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता का कारण बन सकता है।

’विकास, विश्वास और सुशासन का सेतु बना कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज’

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 रायपुर : जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है। प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।

’कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक’

भारतीय सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

’बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक’

उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।

’बदलते बस्तर की नई पहचान’

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे बीजापुर के सुदूर गांव कोण्डापल्ली : चौपाल में सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं

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 रायपुर : प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।

जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।

मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया : गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संबंधों की स्वीकृति के बिना कोई व्यक्ति किसी की सेवा नहीं कर सकता। जब तक हम दूसरे व्यक्ति को अपना संबंधी नहीं मानते, तब तक उसके प्रति सेवाभाव विकसित नहीं होता। संबंध, संबंधी और संबंधों के प्रयोजन को समझने से ही उपकार एवं निरंतर सुख का मार्ग प्रशस्त होता है। यह विचार मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने व्यक्त किए।

वे चेतना विकास मूल्य शिक्षा द्वारा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी शासकीय विद्यालय में आयोजित मध्यस्थ दर्शन सार सत्र के दौरान भारत के 20 से अधिक राज्यों से आए 100 से अधिक जीवन विद्या अध्ययनार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

कोकडिया ने कहा कि मध्यस्थ दर्शन सार सत्र का अध्ययन प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह मानव को समझदार बनने और जीवन को सही दृष्टि से जीने की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि यह सत्र मध्यस्थ दर्शन के 14 वाग्मयों और लगभग 3600 पृष्ठों के व्यापक ज्ञान का सार है, जिसे 15 दिवसीय पाठ्यक्रम के रूप में संचालित किया जाता है।

उन्होंने गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों ने अपना तन, मन और धन जीवन विद्या अध्ययन तथा मानवीय शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया है। वे जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं तथा मानव समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। दोनों ने मिलकर देशभर में छह से अधिक जीवन विद्या अध्ययन केंद्र, गायत्री मंदिर तथा प्रज्ञा पीठों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोकडिया ने बताया कि सामाजिक एवं मानवीय कार्यों में कोई बाधा न आए, इस उद्देश्य से गणेश एवं अर्चना बागडिया ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा और जीवन विद्या के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि इनका जीवन सादगी, सरलता और सज्जनता का प्रेरणादायी उदाहरण है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को जीवन विद्या अध्ययन से परिचित कराने में गणेश बागडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रोफेसरगण एवं जीवन विद्या से जुड़े विभिन्न कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उन्होंने डॉ. कलाम को इस अध्ययन पद्धति से अवगत कराया। बाद में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए डॉ. कलाम स्वयं कानपुर स्थित मानवीय शिक्षा संस्कार केंद्र पहुंचे थे तथा जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा को मानव जीवन में सुख और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया था।

कार्यक्रम के दौरान बिठूर (कानपुर) में आयोजित अध्ययन शिविर का भी उल्लेख किया गया, जहां देशभर से आए लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भीषण गर्मी और नौतपा के समय बिना पंखे एवं कूलर के सामान्य जीवनशैली अपनाते हुए अध्ययन किया। प्रतिभागियों ने प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का अभ्यास करते हुए यह अनुभव साझा किया कि सुख-दुख, गर्मी-ठंड जैसी अनुभूतियां हमारी मान्यताओं और प्राथमिकताओं पर निर्भर करती हैं।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए अनेक अध्ययनार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इनमें एगेश्वरी साहु, ओमन साहु, रेखराज साहु, लक्ष्मी पटेल, हिमाचल पटेल, डॉ. शेषनारायण चंद्राकर, टिकेंद्र चंद्राकर, लोकेश कोठारी, श्वेता जैन, हनी जैन, शीतल गोयल, रजनी अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, राजा अग्रवाल, रोहित शर्मा, संजय शर्मा,  उमा शर्मा, ममता बत्रा, विजय राज, रागेश्वर,  जय श्री, जयंती जैन, शिव नारायण, कल्पेश पटेल, डॉ. पायल पटेल, प्रतिमा, सुनीता जोशी, जितेंद्र, श्री कमलेश एवं अभिषेक सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य जीवन विद्या अध्ययन, मानवीय शिक्षा, राष्ट्रीय एकता एवं मानव मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में समझदारी आधारित जीवन पद्धति को बढ़ावा देना था।

ओडिशा के राज्यपाल ने युवा संगम फेज़-VI के गुजरात छात्र प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात

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भुवनेश्वर- ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने युवा संगम फेज़-VI में भाग ले रहे गुजरात के छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद किया। यह प्रतिनिधिमंडल भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद के नेतृत्व में 22 मई 2026 को ओडिशा पहुंचा था। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला द्वारा आयोजित इस शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत छात्रों का 25 मई को गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका, सांस्कृतिक समझ विकसित करने के महत्व और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। इस संवाद के दौरान छात्रों को नेतृत्व, नागरिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन मिला।

अपने दौरे के दौरान छात्र प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक, शैक्षणिक और विकासात्मक विरासत को करीब से जाना। छात्रों ने कोणार्क सूर्य मंदिर और मां समलेश्वरी मंदिर का भ्रमण कर राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को समझा। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय बुनकरों और कारीगरों से मुलाकात कर ओडिशा की प्रसिद्ध वस्त्र परंपरा के बारे में जानकारी प्राप्त की। छात्रों ने मुंडा जनजाति समुदाय के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक प्रस्तुतियों में भी भाग लिया।

प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र में भाग लिया, जहां भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समरसता में उसकी भूमिका पर चर्चा की गई। छात्रों ने NIT राउरकेला FTBI लैब, राउरकेला स्टील प्लांट, हीराकुंड बांध और बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम का भी दौरा किया। इन यात्राओं के माध्यम से उन्हें ओडिशा की नवाचार क्षमता, औद्योगिक विकास, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और खेल अवसंरचना की जानकारी मिली।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छात्रों ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में भाग लिया और पौधारोपण किया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को भी समझा।

30 मई 2026 को आयोजित समापन समारोह के साथ यह यात्रा संपन्न हुई। युवा संगम के तहत आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों के लिए सीखने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का एक यादगार अनुभव साबित हुआ।

जेल से रिहाई के कुछ समय बाद पूर्व कांग्रेस नेता मृत पाए गए, गौठान परिसर में मिला शव

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 कांकेर। कांकेर शहर में आज मंगलवार सुबह पूर्व कांग्रेस नेता नवाज अली का शव संजय नगर स्थित गौठान परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए।


सूचना मिलने पर पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच के दौरान मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ माह पूर्व कोदागांव क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे में पंचायत सचिव की मौत हो गई थी। इस मामले में नवाज अली के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बताया जा रहा है कि हाल ही में वे जेल से रिहा होकर बाहर आए थे।

फिलहाल पुलिस आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। परिजनों, परिचितों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

घटना के बाद परिवार और समर्थकों में शोक का माहौल है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

स्टील प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट के बाद भीषण आग, इलाके में मची अफरा-तफरी

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के आरंग क्षेत्र अंतर्गत मंदिर हसौद स्थित मिवान स्टील लिमिटेड प्लांट में मंगलवार सुबह बॉयलर ब्लास्ट के बाद भीषण आग लग गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी भयावह थी कि उससे उठता काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 5:30 बजे प्लांट परिसर से जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी। धमाके के कुछ ही देर बाद आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और प्लांट के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद कर्मचारियों और आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बन गया।

मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड और प्रशासन की टीम

आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए गए। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राजस्व विभाग की टीमों ने भी मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य संभाला।

टर्बाइन लीकेज को माना जा रहा संभावित कारण

मंदिर हसौद थाना प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में टर्बाइन लीकेज के कारण आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है।

तहसीलदार विनोद साहू ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया था। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

रेल यात्रियों को बड़ी राहत: रायपुर-कोरबा हसदेव एक्सप्रेस अब रोज चलेगी

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 रायपुर। रायपुर और कोरबा के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। ट्रेनों में बढ़ती भीड़ और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने हसदेव एक्सप्रेस को प्रतिदिन संचालित करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से लागू होगी।


रेलवे अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में गाड़ी संख्या 18249/18250 रायपुर-कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह में चार दिन संचालित होती है, जबकि गाड़ी संख्या 18251/18252 रायपुर-कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन चलती है। अब दोनों ट्रेनों का एकीकरण कर एक ही ट्रेन संख्या 18249/18250 के तहत प्रतिदिन संचालन किया जाएगा।

इस निर्णय के बाद यात्रियों को सप्ताह के सभी सातों दिन रायपुर और कोरबा के बीच नियमित रेल सेवा उपलब्ध होगी। रेलवे का मानना है कि इससे क्षेत्र के हजारों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

रेलवे प्रशासन ने बताया कि ट्रेन का संचालन 15 एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोचों के साथ किया जाएगा। एलएचबी कोच आधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा मानकों और अधिक आरामदायक यात्रा सुविधाओं से लैस होते हैं, जिससे यात्रियों का सफर और अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक होगा।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस निर्णय से रायपुर, बिलासपुर, चांपा, कोरबा समेत मार्ग के अन्य स्टेशनों के यात्रियों को राहत मिलेगी। साथ ही दैनिक आवागमन करने वाले यात्रियों को भी नियमित और बेहतर रेल सुविधा का लाभ मिलेगा।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : ED की बड़ी कार्रवाई, 1200 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1200 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) किया है। एजेंसी ने कारोबारी अनवर ढेबर से जुड़ी चर्चित ‘ढेबर सिटी’ की जमीनों तथा गोवा स्थित लग्जरी ‘वेस्टइन गोवा होटल’ सहित कई संपत्तियों को अपने दायरे में लिया है।


ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 28 मई को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत तीन अलग-अलग अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए। एजेंसी के अनुसार अटैच की गई संपत्तियों की डीड वैल्यू लगभग 200 करोड़ रुपये है, जबकि इनका बाजार मूल्य 1000 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।

2019 से 2023 के बीच 2883 करोड़ की अवैध कमाई का आरोप

ED का दावा है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच आबकारी व्यवस्था में कथित हेरफेर कर एक संगठित शराब सिंडिकेट ने करीब 2883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। जांच एजेंसी के मुताबिक इस सिंडिकेट के संचालन में कारोबारी अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अनिल टुटेजा की प्रमुख भूमिका रही। मामले की जांच EOW और ACB रायपुर में दर्ज FIR के आधार पर आगे बढ़ाई गई है।

गोवा के लग्जरी होटल पर भी कार्रवाई

ED के अनुसार उत्तर गोवा के अंजुना क्षेत्र में स्थित प्रीमियम ‘वेस्टइन गोवा होटल’ को लगभग 110 करोड़ रुपये की कथित बेहिसाबी नकदी से खरीदा गया था। यह होटल पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है। एजेंसी ने दावा किया है कि होटल की खरीद से जुड़े धन के परिवहन में कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

रायपुर की जमीनें और बेनामी संपत्तियां भी कुर्क

पहले कुर्की आदेश के तहत विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है। ED का आरोप है कि विकास अग्रवाल सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क का संचालन करता था तथा डिस्टिलरियों से कथित कमीशन वसूली कर राशि सिंडिकेट तक पहुंचाता था।

कार्रवाई में रायपुर स्थित ‘ढेबर सिटी होम्स’ की जमीनों के अलावा विभिन्न शेल कंपनियों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियां भी शामिल हैं। इन संपत्तियों का अनुमानित मूल्य करीब 30 करोड़ रुपये बताया गया है।

कंपनियों के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड भी जब्त

तीसरे कुर्की आदेश के तहत ओम साई बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड अटैच किए गए हैं।

ED का आरोप है कि इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा कथित तौर पर सिंडिकेट को देने के लिए बाध्य किया जाता था, जिससे लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई।

चार नए आरोपी शामिल, संख्या बढ़कर 85

मामले में ED ने रायपुर की विशेष PMLA अदालत में छठी पूरक अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) भी दाखिल की है। इसमें विजय भाटिया, टी. भुनेश्वर राव, प्रबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर को आरोपी बनाया गया है।

इसके साथ ही शराब घोटाला मामले में जांच के दायरे में आने वाले आरोपियों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

बड़ी खबर: भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता शुरू होने वाली, आर्थिक सहयोग पर होगा बड़ा मंथन

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है। दोनों देशों के वरिष्ठ वार्ताकार आने वाले दिनों में कई दौर की बैठकों में हिस्सा लेंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाना है।

सूत्रों के अनुसार, इस बहु-दिवसीय वार्ता में बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल व्यापार, उन्नत प्रौद्योगिकी और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देश लंबे समय से आर्थिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत सकारात्मक रहती है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक अवसर बढ़ सकते हैं, निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है और कई क्षेत्रों में नई साझेदारियों का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

भारत और अमेरिका दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं, और पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में यह वार्ता वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

व्यापार जगत की निगाहें इस बैठक पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसके नतीजे दोनों देशों के उद्योग, निर्यातकों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

फिलहाल सभी की नज़र इस बात पर है कि क्या दोनों देश व्यापारिक मुद्दों पर नई सहमति बनाकर आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत कर पाएंगे।

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बड़ी खबर: इज़राइल–लेबनान सीमा पर संघर्ष तेज, क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ी

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मध्य पूर्व से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। इज़राइल और लेबनान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य अभियान का विस्तार कर दिया है, जबकि दूसरी ओर हिज़्बुल्लाह लगातार रॉकेट और ड्रोन हमले कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इज़राइली सेना दक्षिणी लेबनान में पहले से अधिक अंदर तक पहुंच गई है और कई रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा कर रही है। हाल ही में इज़राइली बलों ने ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट कैसल क्षेत्र पर कब्ज़ा किया, जिसे सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

उधर, हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़राइल की ओर रॉकेट दागे हैं, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच संघर्ष और तेज हो गया है। इज़राइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में भी हवाई हमले किए हैं, जिन्हें हिज़्बुल्लाह का प्रमुख गढ़ माना जाता है।

लगातार बढ़ती हिंसा के कारण हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जताते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने और युद्धविराम का पालन करने की अपील की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

फिलहाल दुनिया की नज़रें इज़राइल–लेबनान सीमा पर टिकी हैं और सभी को उम्मीद है कि कूटनीतिक प्रयास इस बढ़ते संकट को रोकने में सफल होंगे।

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बड़ी खबर: अमेरिका–ईरान तनाव फिर बढ़ा, मध्य पूर्व में बढ़ी चिंता

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मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का दौर देखने को मिला है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी बलों ने ईरानी सैन्य ठिकानों और ड्रोन नियंत्रण सुविधाओं को निशाना बनाया, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कुवैत समेत कई देशों ने अपने रक्षा तंत्र को अलर्ट पर रखा है और मिसाइल तथा ड्रोन खतरों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है। साथ ही, तेल आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालिया घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

हालांकि कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और सैन्य गतिविधियों के कारण हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

फिलहाल दुनिया की नज़रें मध्य पूर्व पर टिकी हैं और सभी को उम्मीद है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता निकलेगा।

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​ तालाबो की नगरी आरंग का महामाया तालाब झेल रहा उपेक्षा का दंश, कभी पेयजल के लिए होता था इस्तेमाल, आज आ रही दुर्गंध

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 40 वर्ष पहले जो पानी लोगों की प्यास बुझाता था, आज वह खुद अपनी बूंद-बूंद की पवित्रता के लिए तरस रहा; धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के अस्तित्व पर गहराया संकट।


​ आरंग। आस्था, संस्कृति और जन-जीवन का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला आरंग का ऐतिहासिक व प्रसिद्ध ‘महामाया तालाब’ आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। 'तालाबों की नगरी' के नाम से विख्यात आरंग नगर का यह मुख्य जलाशय आज घोर प्रशासनिक उपेक्षा और गंदगी का शिकार है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि तालाब के चारों ओर बने घरों और शौचालयों का दूषित पानी सीधे इसमें आकर मिल रहा है, जिससे कभी निर्मल रहने वाला यह जलस्रोत अब तेज दुर्गंध मार रहा है।

​ कभी था पेयजल का मुख्य स्रोत

​स्थानीय बुजुर्गों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भारी मन से बताया कि करीब 40 वर्ष पहले इस तालाब का पानी इतना स्वच्छ और पारदर्शी था कि पूरे नगर के लोग इसका उपयोग पेयजल और रसोई के कार्यों के लिए करते थे। लेकिन वक्त के साथ संरक्षण के अभाव और बढ़ते शहरीकरण ने इसे एक गंदे नाले के रूप में तब्दील करना शुरू कर दिया है। नियमित सफाई न होने के कारण तालाब के किनारों पर प्लास्टिक, पॉलीथिन और अपशिष्ट कचरे का अंबार लगा हुआ है।

​ चारों दिशाओं में मंदिर, फिर भी अनदेखी

​यह तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आरंग की धार्मिक और सांस्कृतिक आत्मा है। इसके चारों किनारों पर प्राचीन और जागृत देवस्थान स्थापित हैं:
​ पूर्व से पश्चिम तक देवस्थान: तालाब के तट पर आदिशक्ति मां महामाया मंदिर, भव्य दुर्गा मंदिर, प्राचीन नारायण बन हनुमान मंदिर और कुमारेश्वर महादेव सहित कई अन्य शिव मंदिर स्थित हैं।


​ सालभर अनुष्ठान: इन मंदिरों में वर्ष भर धार्मिक अनुष्ठान होते हैं और प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहाँ पूजा-अर्चना के लिए पहुँचते हैं।


​ विसर्जन का मुख्य स्थल: चैत्र व क्वांर नवरात्र में मां दुर्गा की प्रतिमाओं, ज्योति जवारा और लोक पर्व भोजली का विसर्जन इसी पवित्र तालाब में पूरे विधि-विधान से किया जाता है। इसके बावजूद इसकी पवित्रता को अक्षुण्ण रखने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।

​ चर्म रोग की आशंका, निस्तारी के लिए लोग मजबूर

​नगर का मुख्य केंद्र होने के कारण आज भी बड़ी आबादी दैनिक निस्तारी (नहाने-धोने) के लिए इसी तालाब पर निर्भर है। पानी इस कदर दूषित हो चुका है कि इसके संपर्क में आने से स्थानीय लोगों और विशेषकर बच्चों में चर्म रोग (स्किन इन्फेक्शन) तथा अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है।

जन-प्रतिनिधियों और प्रशासन से सौंदर्यीकरण की गुहार

​स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि महामाया तालाब आरंग की बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। इसे इस तरह नष्ट होने नहीं दिया जा सकता। नगरवासियों ने प्रशासन, नगर पालिका और जन-प्रतिनिधियों से पुरजोर मांग की है कि तालाब में गिरने वाले गंदे पानी और नालियों को तुरंत रोका जाए। साथ ही, इसके गहरीकरण, पचरी निर्माण, सौंदर्यीकरण और दीर्घकालिक संरक्षण के लिए तत्काल युद्ध स्तर पर कार्य शुरू किया जाए, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को समय रहते बचाया जा सके।
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126 से घटकर 30 पर सिमटी 'तालाबों की नगरी'

आरंग को इतिहास में 'छः आगर छः कोरी' अर्थात् 126 तालाबों की गौरवशाली नगरी कहा जाता था। अवैध कब्जों, देखरेख की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज यहाँ मुश्किल से 30 से 35 तालाब ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। महामाया तालाब की जो स्थिति है, कमोबेश वही हाल आरंग के अन्य बचे हुए तालाबों का भी है।

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