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टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल: मुख्यमंत्री साय ने टीम इंडिया को दी शुभकामनाएं

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 India vs New Zealand Final : टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में आज टीम इंडिया और न्यूजीलैंड आमने-सामने होंगी। इस महामुकाबले को लेकर देशभर में क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।


फाइनल मैच को लेकर मुख्यमंत्री साय ने भी टीम इंडिया को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारतीय टीम फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करेगी और देश को जीत की खुशी देगी।

उन्होंने कहा कि पूरे देश की तरह छत्तीसगढ़ के लोग भी टीम इंडिया की जीत के लिए उत्साहित हैं और सभी की शुभकामनाएं भारतीय खिलाड़ियों के साथ हैं। मुख्यमंत्री साय ने भरोसा जताया कि भारतीय टीम बेहतरीन खेल दिखाते हुए खिताब अपने नाम करेगी।

छत्तीसगढ़ में नशे में धुत युवकों की दरिंदगी: महिला के प्राइवेट पार्ट पर चाकू से तीन वार

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 खैरागढ़। Khairagarh जिले से एक शर्मनाक और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। Sankra village में नशे में धुत तीन युवकों ने एक महिला के घर में घुसकर उस पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोप है कि आरोपियों ने महिला के साथ मारपीट की और उसके प्राइवेट पार्ट पर चाकू से तीन बार वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।


मामला Gatapaar police station area का है। जानकारी के अनुसार, वारदात के समय महिला अपने घर में मौजूद थी, तभी तीनों आरोपी वहां पहुंच गए। बताया जा रहा है कि आरोपी नशे की हालत में थे। उन्होंने पहले महिला से विवाद किया और फिर अचानक उस पर हमला कर दिया।

हमले के दौरान आरोपियों ने महिला के साथ मारपीट की और चाकू से कई वार किए। सबसे गंभीर बात यह है कि महिला के प्राइवेट पार्ट पर भी चाकू से तीन बार हमला किया गया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गई।

महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गए। ग्रामीणों की मदद से घायल महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार महिला को गंभीर चोटें आई हैं और उसकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।

घटना की सूचना मिलते ही गातापार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार करने की कार्रवाई की जा रही है।

Middle East Tension : ईरान मुद्दे पर ट्रंप का ब्रिटेन पर निशाना, पीएम स्टार्मर की आलोचना, कहा ...

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 Middle East Tension : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों को लेकर ब्रिटेन के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को ऐसे सहयोगियों की जरूरत नहीं है जो युद्ध जीतने के बाद उसमें शामिल हों।


शनिवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि ब्रिटेन, जो कभी अमेरिका का एक महान सहयोगी था, अब मध्य पूर्व में दो विमानवाहक पोत भेजने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब इसकी आवश्यकता नहीं है, लेकिन अमेरिका इसे याद रखेगा।

स्टार्मर ने दिया जवाब

ट्रंप की आलोचना पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन के बीच “विशेष संबंध” मजबूत हैं और ट्रंप के बयान इस रिश्ते की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते।

ब्रिटेन की संसद को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा कि अमेरिकी विमान ब्रिटिश सैन्य ठिकानों से उड़ान भर रहे हैं। ब्रिटिश जेट भी संयुक्त ठिकानों से मध्य पूर्व में अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए ड्रोन और मिसाइलों को मार गिरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार खुफिया जानकारी साझा की जा रही है, जो दोनों देशों के संबंधों की मजबूती को दर्शाता है।

हमले में शामिल न होने के फैसले का बचाव

स्टार्मर ने ईरान पर हमले में सीधे शामिल न होने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें इस कार्रवाई का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि उनका रुख अब भी वही है।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने 7 मार्च को ऑपरेशन से जुड़ा अपडेट जारी करते हुए बताया कि अमेरिका ने क्षेत्र में संभावित मिसाइल हमलों को रोकने के लिए ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का उपयोग शुरू किया है, ताकि वहां मौजूद ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इससे पहले ट्रंप ने ब्रिटेन के रुख को असहयोगी बताते हुए स्टार्मर की आलोचना की थी और कहा था कि वह पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल जैसे नेता नहीं हैं। वहीं पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इजरायली रक्षा बलों ने जानकारी दी है कि तेहरान में इजरायली वायु सेना ने ईंधन भंडारण परिसरों पर हमला किया है।

स्व. दिलीप सिंह जूदेव का जीवन जनजातीय समाज के उत्थान को समर्पित रहा : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के मुख्यमंत्री निवास परिसर में उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के दीर्घ सामाजिक-राजनीतिक जीवन और समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदानों को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।उन्होंने कहा कि स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव का संपूर्ण जीवन समाज सेवा, जनकल्याण और विशेष रूप से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर कार्य किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी के विचार, उनके आदर्श और सेवा का भाव आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज और प्रदेश के विकास के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में आदिवासी समाज की पहचान, स्वाभिमान और सामाजिक जागरूकता को मजबूत करने में स्वर्गीय जूदेव का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके प्रयासों से जनजातीय समाज में आत्मगौरव की भावना सशक्त हुई और समाज में सकारात्मक चेतना का संचार हुआ।

इस अवसर पर विधायक गोमती साय, विधायक रायमुनि भगत, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में 8 करोड़ की अफीम खेती का खुलासा, भाजपा नेता समेत 4 आरोपी गिरफ्तार

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 रायपुर । छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल जमीन पर उगाई गई अफीम की फसल जब्त की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है।


यह कार्रवाई कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश और मार्गदर्शन में की गई। मामला पुलगांव थाना क्षेत्र का है, जहां प्रशासन को अवैध खेती की सूचना मिली थी।

जानकारी के अनुसार पुलगांव थाना क्षेत्र के जेवरा-सिरसा चौकी अंतर्गत ग्राम समोदा, झेंडारी और सिरसा के बीच स्थित जमीन पर अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मौके पर अफीम की फसल मिलने के बाद अन्य संबंधित विभागों को भी कार्रवाई के लिए सूचित किया गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि भाजपा नेता विनायक ताम्रकार इस अवैध खेती में संलिप्त हैं। मामला कलेक्टर अभिजीत सिंह के संज्ञान में आते ही उन्होंने बिना किसी दबाव के तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद एसडीएम, तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार, पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई।

मामले की जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और एफएसएल को भी दी गई। टीम ने ग्राम झेंझरी पटवारी हल्का नंबर 8, तहसील व जिला दुर्ग की जमीन की जांच की। जांच में खसरा नंबर 309 रकबा 80 डिसमिल और खसरा नंबर 310 रकबा 9 एकड़ 92 डिसमिल की भूमि शामिल पाई गई। यह जमीन मधुमती ताम्रकार और प्रीतिबाला ताम्रकार के पिता सीताराम ताम्रकार के संयुक्त नाम पर दर्ज है।

जांच में पाया गया कि उक्त जमीन के लगभग 5 एकड़ 62 डिसमिल हिस्से में अफीम की खेती की गई थी। अधिकारियों के अनुसार अफीम की फसल को छिपाने के लिए मक्के की फसल के बीच इसे लगाया गया था, ताकि किसी को शक न हो।

प्रारंभिक जांच में कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आई है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में विनायक ताम्रकार (58), विकास विश्नोई (27), मनीष ठाकुर और अचला राम जाट (28) शामिल हैं। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

डिजिटल इंडिया: भारत की डिजिटल क्रांति

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परिचय

भारत का डिजिटल परिवर्तन दुनिया के सबसे बड़े जनसंख्या स्तर पर कनेक्टिविटी और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवा वितरण के विस्तारों में से एक है। यह परिवर्तन डिजिटल इंडिया कार्यक्रम पर आधारित है, जिसे 2015 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य हर नागरिक के लिए डिजिटल अवसंरचना को एक बुनियादी सुविधा बनाना, डिजिटल विभाजन को कम करना, मांग पर शासन और सेवाएँ प्रदान करना और डिजिटल माध्यम से लोगों को सशक्त बनाना है।

एक दशक पहले भारत में डिजिटल विभाजन काफी स्पष्ट था। तेज़ इंटरनेट मुख्यतः शहरों तक सीमित था, ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी कम थी और ऑनलाइन सेवाओं तक पहुँच स्थान, आय और डिजिटल साक्षरता पर निर्भर करती थी। समय के साथ सरकार के निवेश से ब्रॉडबैंड नेटवर्क और ऑप्टिकल फाइबर अवसंरचना का तेजी से विस्तार हुआ, जिससे गाँवों और दूरदराज़ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर हुई।

आज यह डिजिटल अंतर तेजी से कम हो रहा है। सस्ता इंटरनेट, डिजिटल सेवा केंद्र और इंटरऑपरेबल डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, डिजिटल भुगतान करने, ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने और शासन में भाग लेने में सक्षम बना रहे हैं।

भारत का डिजिटल अवसंरचना निर्माण

भारत का डिजिटल ढांचा तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:

  1. सार्वभौमिक कनेक्टिविटी अवसंरचना

  2. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

  3. कम्प्यूटिंग क्षमता

ये तीनों मिलकर डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी को संभव बनाते हैं।

सार्वभौमिक डिजिटल कनेक्टिविटी और सस्ती इंटरनेट सुविधा

भारत की डिजिटल क्रांति का आधार तेज़ और सस्ती इंटरनेट सुविधा है।

भारतनेट

BharatNet परियोजना के तहत ग्रामीण भारत में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुँचाया जा रहा है।

  • 2026 तक 2.15 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें जुड़ चुकी हैं।

  • ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क 2019 में 19.35 लाख रूट किमी से बढ़कर 2025 में 42.36 लाख रूट किमी हो गया।

5G विस्तार

भारत का तेज़ 5G नेटवर्क अब 99.9% जिलों तक पहुँच चुका है और 5.18 लाख बेस ट्रांसीवर स्टेशन स्थापित किए गए हैं।

सस्ता डेटा

डेटा की कीमतों में भारी कमी आई है:

  • 2014: लगभग ₹269 प्रति GB

  • 2025–26: लगभग ₹8–10 प्रति GB

इसके परिणामस्वरूप ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 100 करोड़ से अधिक हो गई है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इंटरनेट को वास्तविक सेवाओं में बदलता है।

आधार

Aadhaar के तहत 143 करोड़ से अधिक डिजिटल पहचान जारी की गई हैं, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुँचता है।

यूपीआई

Unified Payments Interface के माध्यम से जनवरी 2026 में लगभग 21.7 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग ₹28.33 लाख करोड़ रही।

डिजीलॉकर

DigiLocker के 62 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जहाँ नागरिक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं।

उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और क्लाउड

National Supercomputing Mission के तहत भारत में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए गए हैं जिनकी कुल क्षमता 44 पेटाफ्लॉप्स है।

इसके अलावा MeghRaj सरकारी क्लाउड प्लेटफॉर्म पर 2170 से अधिक मंत्रालय और विभाग अपने एप्लिकेशन चला रहे हैं।

भारत का डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1280 मेगावाट है, जिसे 2030 तक 4–5 गुना बढ़ाने की योजना है।

समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र

डिजिटल परिवर्तन का लक्ष्य केवल इंटरनेट देना नहीं है, बल्कि हर नागरिक को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी का अवसर देना है।

डिजिटल साक्षरता

Pradhan Mantri Gramin Digital Saksharta Abhiyan के तहत 6.39 करोड़ ग्रामीण लोगों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया गया।

डिजिटल शिक्षा

दीक्षा

DIKSHA प्लेटफॉर्म पर:

  • 19,000 से अधिक कोर्स

  • 18 करोड़ से अधिक नामांकन

स्वयं

SWAYAM प्लेटफॉर्म पर:

  • 18,500 से अधिक कोर्स

  • 6 करोड़ से अधिक नामांकन

इंस्पायर-मानक

INSPIRE‑MANAK कार्यक्रम के तहत हर साल 1 लाख छात्र नवाचार विचार चुने जाते हैं।

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)

Common Service Centres ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएँ पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

  • 6.5 लाख से अधिक VLE (Village Level Entrepreneurs) कार्यरत हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण

  • e‑NAM के तहत 1.79 करोड़ किसान और 1522 मंडियाँ जुड़ी हैं।

  • MGNREGA के तहत 99% मजदूरी भुगतान डिजिटल हो चुका है।

PM-WANI

PM‑WANI योजना के तहत फरवरी 2026 तक:

  • 4,09,111 सार्वजनिक Wi-Fi हॉटस्पॉट लगाए गए हैं।

भविष्य के लिए डिजिटल कौशल

अटल इनोवेशन मिशन

Atal Innovation Mission के तहत:

  • 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब

  • 1.1 करोड़ छात्र जुड़ चुके हैं।

इंडिया AI मिशन

IndiaAI Mission के तहत:

  • 38,000 GPU स्थापित

  • 9,500 से अधिक AI डेटासेट उपलब्ध

स्टार्टअप इंडिया

Startup India के तहत:

  • 2016 में 400 स्टार्टअप से बढ़कर 2025 में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप

  • 21 लाख नौकरियाँ सृजित

निष्कर्ष

पिछले एक दशक में भारत का डिजिटल परिवर्तन तकनीक, शासन, शिक्षा और आर्थिक अवसरों तक पहुँच को पूरी तरह बदल चुका है। डिजिटल कनेक्टिविटी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत कंप्यूटिंग के माध्यम से शहरों, गाँवों और दूरदराज़ क्षेत्रों के नागरिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी कर पा रहे हैं।

डिजिटल साक्षरता, नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं पर केंद्रित पहलें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि डिजिटल विकास समावेशी, समान और सतत हो। यह मॉडल भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त और समावेशी राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।


प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और भारत की नारी शक्ति की शक्ति, संकल्प और उपलब्धियों को नमन किया।

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प्रधानमंत्री ने देशभर की महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि आज महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी दृढ़ता, रचनात्मकता और अद्भुत ऊर्जा के साथ भारत की प्रगति को दिशा दे रही हैं। उनकी उपलब्धियाँ पूरे राष्ट्र को प्रेरित करती हैं और विकसित भारत (Viksit Bharat) के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करती हैं।

उन्होंने कहा कि महिला-नेतृत्व वाले विकास (Women-Led Development) को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। महिलाओं के सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई योजनाएँ और पहल शुरू की हैं। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि सरकार हर महिला को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने और भारत के विकास में योगदान देने के लिए अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की नारी शक्ति की उपलब्धियाँ देश के लिए गर्व का विषय हैं और यह राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका की मजबूत याद दिलाती हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ेगा, महिलाओं की आकांक्षाएँ और योगदान देश को एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र बनाने की दिशा में मार्गदर्शन करते रहेंगे।

प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि पिछले एक दशक में जमीनी स्तर पर महिलाओं के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव आए हैं और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी पहलों का कितना व्यापक प्रभाव पड़ा है।

प्रधानमंत्री अपने X (Twitter) पोस्ट में कहा

“अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मैं हमारी सभी नारी शक्ति को शुभकामनाएँ देता हूँ।

हर क्षेत्र में महिलाएँ दृढ़ संकल्प, रचनात्मकता और अद्वितीय उत्साह के साथ भारत की प्रगति को आकार दे रही हैं। उनकी उपलब्धियाँ हमारे राष्ट्र को प्रेरित करती हैं और विकसित भारत के निर्माण के हमारे संकल्प को मजबूत करती हैं।

महिलाओं का सशक्तिकरण हमारी विभिन्न योजनाओं और पहलों के केंद्र में है। हम ऐसे अवसर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो हर महिला को अपनी पूरी क्षमता प्राप्त करने और भारत के विकास की यात्रा में योगदान देने में सक्षम बनाएँ।

#नएभारतकीनारीशक्ति”

“भारत की नारी शक्ति की उपलब्धियाँ गर्व का विषय हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी परिवर्तनकारी भूमिका की शक्तिशाली याद दिलाती हैं।

जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ेगा, महिलाओं की आकांक्षाएँ और योगदान हमें एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की ओर ले जाते रहेंगे।

#नएभारतकीनारीशक्ति”

“पिछले एक दशक में जमीनी स्तर पर महिलाओं के जीवन में आए बदलाव की एक झलक…

#नएभारतकीनारीशक्ति”

गर्मी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग सतर्क, हीटवेव से निपटने की तैयारियाँ तेज

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रायपुर। राज्य में बढ़ते तापमान और संभावित हीटवेव की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को सजग रखने की दिशा में आवश्यक तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएँ, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार जिला अस्पतालों सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्मी से होने वाली बीमारियों के प्रबंधन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं।

जारी निर्देशों के अनुसार जिला अस्पतालों, की स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में हीट स्ट्रोक प्रबंधन कक्ष सक्रिय रखे जाएंगे। इन केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस, आईवी फ्लूड, आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों तथा शीतलन संबंधी व्यवस्थाएँ उपलब्ध रखने को कहा गया है, ताकि गर्मी से प्रभावित मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके। समुचित सुविधाओं से युक्त ऊष्मा आघात कक्ष रायपुर और दुर्ग जिला अस्पताल मे बनाये जा चुके हैं साथ hi अन्य सभी जिलों मे भी इस प्रकार के कक्ष बनाएं जाने निर्देश दिए गए हैं

एम्बुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट मोड में रखने और जरूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्यकम की राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ स्मृति देवांगन ने बताया की अत्यधिक तापमान के संपर्क में आने से शरीर में हीट स्ट्रेस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे हीट रैश, मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर आना, सिरदर्द, अत्यधिक प्यास और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर अवस्था में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाने पर हीट स्ट्रोक की स्थिति बन जाती है, जो चिकित्सकीय आपातकाल मानी जाती है। 

हीट वेव से बचाव के लिए आवश्यक है की गर्मी के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें, हल्के व ढीले सूती कपड़े पहनें तथा दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें। घर से बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखना, नींबू पानी, छाछ और मौसमी फलों का सेवन करना शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है। 

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और खुले में काम करने वाले श्रमिकों को गर्मी से अधिक जोखिम माना गया है। ऐसे में इन वर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। यदि किसी व्यक्ति में तेज बुखार, बेहोशी, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या पसीना आना बंद होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाकर आपातकालीन सेवा 108 के माध्यम से चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

गर्मी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर सावधानी और जागरूकता को सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आम नागरिकों को बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बस्तर में होगा ‘वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026:मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जारी करेंगे महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त

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69 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में पहुंचेगी आर्थिक संबल की नई राशि

रायपुर- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर बस्तर जिले में ‘वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे और सम्मेलन के दौरान प्रदेश की महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त जारी करेंगे। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे।इस गरिमामय आयोजन में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा वन मंत्री केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक तथा विभिन्न आयोगों और मंडलों के पदाधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित यह सम्मेलन मातृशक्ति के सम्मान, महिला सशक्तिकरण तथा महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर विभागीय स्टॉलों के माध्यम से महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं, स्वरोजगार के अवसरों तथा पोषण संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रदान की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की 69 लाख से अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। योजना के तहत 25वीं किस्त जारी होने के बाद अब तक कुल 16 हजार 237 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित हो जाएगी। 

इस योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे वे अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी विशेष ध्यान दे पा रही हैं। यह योजना महिलाओं के आत्मसम्मान और आर्थिक स्वावलंबन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटी नक्सली महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विशेष पहल की जाएगी। इन महिलाओं को लखपति दीदी योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से ब्याजमुक्त एक-एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।इसके साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इन महिलाओं को ‘लक्ष्मी-सखी मिलेट किट’ भी प्रदान की जाएगी। इन महिलाओं को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से मिलेट (मोटे अनाज) आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे इन उत्पादों के निर्माण और बिक्री के माध्यम से स्वरोजगार प्राप्त कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाला यह वृहद सम्मेलन महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगा। सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाएं, स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं तथा विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राही शामिल होंगी। यह आयोजन प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रेमशीला को दिल्ली में किया गया “इंटरनेशनल वूमेंस विजनरी अवार्ड” से सम्मानित

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इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंबेसेडर ऑर्गेनाइजेशन ने दिया पुरस्कार

महासमुंद- महासमुंद की सामाजिक कार्यकर्ता  प्रेमशीला बघेल को आज देश की राजधानी दिल्ली के वाईएमसीए हॉल में आयोजित कार्यक्रम में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंबेसेडर ऑर्गेनाइजेशन द्वारा “इंटरनेशनल विमेंस विजनरी अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें रमादेवी पूर्व सदस्य पैनल ऑफ चेयरपर्सन 17 वीं लोकसभा, राजीव मेनन अभिनेता एवं निर्माता, नुज़रथ जहाँ, अभिनेत्री, मनीष गवई सदस्य, जयलक्ष्मी राव अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एम्बेसडर ऑर्गेनाइजेशन नई दिल्ली द्वारा महिला एवं बाल सशक्तिकरण, डिजिटल वित्तीय समावेशन और ग्रामीण आजीविका विकास के क्षेत्र में उनके तीन दशकों के उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

प्रेमशीला पिछले लगभग 30 वर्षों से गरीब, दलित, आदिवासी तथा ग्रामीण-शहरी महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में मात्र 300 रुपये मानदेय पर बालवाड़ी शिक्षिका के रूप में अपनी सामाजिक यात्रा शुरू की और अब तक 1,500 स्व-सहायता समूहों का गठन कर 15,000 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया। उन्होंने 1,000 से अधिक बैंक खाते खुलवाने, 50 लाख रुपये से अधिक माइक्रो-क्रेडिट लिंकिंग कराने तथा 850 महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग व मोबाइल लेन-देन का प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वर्ष 2005 में उन्होंने “उन्नयन जन विकास समिति” की स्थापना की, जिसके माध्यम से 2,200 से अधिक महिलाओं और युवाओं को साबुन निर्माण, बांस शिल्प, टेराकोटा, हाथकरघा, जैविक खेती एवं अन्य आजीविका कौशलों में प्रशिक्षण दिया गया। उनके प्रयासों से 7,500 से अधिक ग्रामीणों तक जागरूकता अभियान पहुंचा तथा 30 गांवों में बाल विवाह और शराबखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों को कम करने में सफलता मिली।

डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में उन्होंने नाबार्ड के ई-शक्ति कार्यक्रम के तहत स्व-सहायता समूहों का डिजिटलीकरण कराया और महिलाओं को UPI, डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैलेंस जांच तथा मोबाइल रिकॉर्ड कीपिंग का प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा महासमुंद रेलवे स्टेशन के पास सस्ती दर में भोजन उपलब्ध कराने महिला कैंटीन मां की रोटी स्थापित कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया।

 प्रेमशीला बघेल वर्ष 2000 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर महिलाओं की गरीबी और हिंसा से जुड़े मुद्दों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा चुकी हैं।

उन्हें इस वर्ष 2025 में देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य शासन अंतर्गत अलंकरण “वीरांगना अवंतीबाई लोधी पुरस्कार” से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा नाबार्ड , मीडिया समूह, जिला प्रशासन तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया है। वे वर्तमान में श्रम विभाग अंतर्गत जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की सदस्य भी है। 

प्रेमशीला बघेल का महिला दिवस पर संदेश है कि नारी शक्ति जब आत्मविश्वास, शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़ती है, तब समाज में स्थायी परिवर्तन संभव होता है। उनके कार्यों से हजारों महिलाओं में आत्मनिर्भरता, डिजिटल साक्षरता और नेतृत्व की नई चेतना विकसित होती है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष- छत्तीसगढ़ की महिलाएँ गढ़ रहीं हैं नया कीर्तिमान

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छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी

स्व-सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

रायपुर- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में महिला सशक्तिकरण की प्रेरक तस्वीर सामने आ रही है। शासन की योजनाओं, विशेषकर बिहान मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।

सरगुजा जिले में महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा मॉडल सामने आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े निर्माण कार्यों ने महिलाओं के लिए नए व्यवसायिक अवसर पैदा किए हैं। जिले की 650 से अधिक महिलाएं सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय से जुड़ी हैं और 1000 से अधिक सेंट्रिंग प्लेट सेटों का संचालन कर रही हैं। इसके अलावा 271 महिलाएं ईंट निर्माण और कई महिलाएं सीमेंट-छड़ व्यवसाय से जुड़कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। जिले में 319 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं।

धमतरी जिले में 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “महतारी वंदन महिला सम्मान उत्सव” का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम की विशेषता यह होगी कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बस्तर से धमतरी जिले की महिलाओं के साथ द्विमार्गीय संवाद करेंगे।

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम तालगांव की गायत्री यादव महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी हैं। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आठ पंचायतों की महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसी तरह बालोद जिले के गुरूर विकासखंड के ग्राम कर्रेझर में स्थापित महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का नया केंद्र बन गया है। यहां महिलाएं संगठित होकर बैठक, प्रशिक्षण और अपने उत्पादों के भंडारण एवं विक्रय की सुविधाओं का लाभ ले रही हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिलाओं की ये उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि शासन की योजनाओं और महिलाओं की मेहनत से छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक बदलाव आ रहा है और महिलाएं विकास की मुख्य धारा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


महतारी गौरव वर्ष में सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति

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महिला सशक्तिकरण की नयी मिसालें, स्व-सहायता समूहों से जुड़कर बन रहीं आत्मनिर्भर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रभावी पहल की जा रही हैं। मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त बनते हुए समाज में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।

प्रदेश की महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों से जुड़कर कई महिलाओं ने अपने जीवन की दिशा बदली है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के विकासखंड करतला के ग्राम सरगबुंदिया निवासी शासन के सहयोग से कपड़ा व्यवसाय के माध्यम से सावित्री उरांव आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच जीवनयापन करने वाली सावित्री उरांव ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया और आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की पूनम देवी, गणेश महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं और वे आज “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं। पहले वे घर-गृहस्थी के कामकाज तक सीमित थीं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मेहनत-मजदूरी का काम करती थी। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार के अवसर मिले, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया। उन्होंने मछली पालन, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित करते देख उन्हें भी प्रेरणा मिली। उन्होंने मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने छोटे से किराना दुकान के विस्तार कर आत्म निर्भरता की ओर आगे बढ़ रही है। 

कांकेर जिले के ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला सगो तेता भी शासन की योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनी हैं। प्रशिक्षण और सहयोग के माध्यम से उन्होंने अपने हुनर को आगे बढ़ाया और आज वह खेती-किसानी कर “लखपति दीदी” के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

इसी तरह गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की बृहस्पति धुर्वे ने भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर मशरूम उत्पादन और सब्जी-भाजी की खेती शुरू की। कड़ी मेहनत और लगन से आज उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुँच गई है। वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर अपने परिवार की जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं।

कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बुडार में अंजनि, हीरामनी, लीलावती और मित्तल स्वच्छता दीदी के रूप में कार्य करते हुए गाँव को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ये महिलाएँ सप्ताह में दो दिन घर-घर जाकर कचरा संग्रहण करती हैं और ग्रामीणों को गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए जागरूक करती हैं।

बस्तर जिले के ग्राम पंचायत मामड़पाल मुनगा की दशमी नाग भी महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी बन चुकी हैं। पहले मजदूरी पर निर्भर रहने वाली दशमी नाग आज स्व-सहायता समूह से जुड़कर खेती, पशुपालन और सब्जी उत्पादन के माध्यम से “लखपति दीदी” के रूप में अपनी नई पहचान बना चुकी हैं।

प्रदेश में मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन में जनकल्याणकारी योजनाओं और महिला समूहों की सामूहिक पहल से सामाजिक क्षेत्र में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम आनी में ज्योति महिला स्व-सहायता समूह और माँ शारदा स्व-सहायता समूह की महिलाएँ “कोरिया मोदक” नामक पौष्टिक लड्डू तैयार कर रही हैं, जिन्हें गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार और कम वजन वाले शिशुओं के जन्म की समस्या को कम करने में मदद मिल रही है।

इसी प्रकार कोंडागांव के नहरपारा निवासी फरिदा बेगम भी महतारी वंदन योजना का लाभ लेकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर प्रदेश की महिलाएँ आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से वे न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई मिसाल भी स्थापित कर रही हैं।

पीएम आवास योजना 2.0 में 28,461 घरों के लिए 435 करोड़ की स्वीकृति से 'सभी के लिए आवास’ के संकल्प को मिलेगी नई गति: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक आवास दिलाना हमारा संकल्प - उपमुख्यमंत्री अरुण साव

छत्तीसगढ़ के लिए 263 परियोजनाएं स्वीकृत, 36 माह में पूरे होंगे काम

रतनपुर में डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट, आधुनिक और उन्नत तकनीकों से बीएमटीपीसी बनाएगी 40 आवास

रायपुर- छत्तीसगढ़ में शहरी गरीबों के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की राह खुल गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ने राज्य की 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के आवासों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपए से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। हाल ही में 23 फरवरी को केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (Central Sanction & Monitoring Committee) की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। इससे राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हजारों परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना मिल सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सभी के लिए आवास’ के संकल्प को साकार करने देशभर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का क्रियान्वयन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में शहरी गरीबों को किफायती और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने सक्रियता से काम किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव नियमित समीक्षा कर आवासों के आबंटन और इनके निर्माण में तेजी व पारदर्शिता सुनिश्चित करने विभागीय अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं।

केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 211 लाभार्थी आधारित निर्माण परियोजनाएं (Beneficiary-led Construction) और 52 किफायती आवास साझेदारी परियोजनाएं (Affordable Housing Projects) शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेशभर के नगरीय निकायों में कुल 28 हजार 461 आवासों का निर्माण किया जाएगा।

लाभार्थी आधारित निर्माण घटक के तहत 13 हजार 058 आवासों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें पात्र हितग्राही अपनी स्वयं की भूमि पर पक्का घर बना सकेंगे। प्रथम बैच में 52 परियोजनाओं के माध्यम से 3844 आवासों को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 57 करोड़ 66 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। वहीं द्वितीय बैच में 159 परियोजनाओं के अंतर्गत 9214 आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 138 करोड़ 21 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। इन आवासों की प्रति इकाई परियोजना लागत लगभग 3 लाख 89 हजार रुपए निर्धारित की गई है।

किफायती आवास साझेदारी घटक के तहत 15 हजार 363 आवासों का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत शासकीय भूमि पर सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर विकसित किए जाएंगे, जिनमें स्लम पुनर्विकास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए किफायती आवास उपलब्ध होंगे। इस घटक के प्रथम बैच में 24 परियोजनाओं के जरिए 6996 आवासों को मंजूरी दी गई है, जबकि दूसरे बैच में 28 परियोजनाओं के माध्यम से 8367 आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इन आवासों की प्रति इकाई लागत 5 लाख 75 हजार रुपए तय की गई है। ये सभी परियोजनाएं 36 महीनों में पूर्ण की जाएंगी।

भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 तक 50 हजार आवासों के प्रस्ताव प्रस्तुत करने का लक्ष्य दिया था। छत्तीसगढ़ ने 52 हजार 588 आवासों के प्रस्ताव भेजकर लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में राज्य की इस सक्रियता और तत्परता की सराहना भी की गई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी परियोजनाओं के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, भू-अभिलेख, लाभार्थी सूची और यूनिफाइड वेब पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टियां केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं। सभी पात्र हितग्राहियों को केंद्रीय सहायता आधार आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाएगी। यूनिफाइड वेब पोर्टल के जरिए पारदर्शी तरीके से यह पूरी प्रक्रिया संचालित की जाएगी।

रतनपुर में भारत सरकार का नवाचारी प्रोजेक्ट, पात्र लोगों को किराये पर देगा सूडा

केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में बिलासपुर जिले के रतनपुर में एक अभिनव डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट (Demonstration Housing Project) को भी मंजूरी मिली है। यह परियोजना भारत सरकार की नवाचार आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे देश के चुनिंदा राज्यों में ही स्वीकृत किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आधुनिक और उन्नत तकनीकों का उपयोग कर 40 आवास बनाए जाएंगे। इनका निर्माण भवन निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद (Building Materials & Technology Promotion Council) द्वारा किया जाएगा। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) इन आवासों को पात्र लोगों को किराये पर उपलब्ध कराएगा। राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल रतनपुर में आकार लेने वाली यह परियोजना सामाजिक उपयोग के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा देने में सहायक होगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव की विशेष कोशिशों से रतनपुर को यह परियोजना मिली है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य में 28,461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। इससे हजारों जरूरतमंद परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार होगा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 263 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है और अगले 36 महीनों में इन आवासों का निर्माण किया जाएगा। बिलासपुर जिले के रतनपुर में आधुनिक तकनीक से 40 आवासों का एक विशेष प्रोजेक्ट भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल सके।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार शहरी गरीबों को आवासीय सुरक्षा प्रदान करने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। नगरीय निकायों के सहयोग से पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को पक्के आवास दिए जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही 435 करोड़ रुपए की सहायता से आवास निर्माण में और तेजी आएगी।

धमतरी को मखाना हब बनाने की दिशा में पहल

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वनांचल क्षेत्र में आय के नए स्रोत- मखाना खेती से सशक्त होंगे महिला समूह

नगरी क्षेत्र की जलवायु बनी उपयुक्त, मखाना उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय

महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा नया आयाम, मखाना उत्पादन से जुड़ेंगे किसान

रायपुर- मखाना एक ऐसा पौधा है जो तालाबों, दलदलों और आर्द्रभूमि जैसे स्थिर जल निकायों में उगाया जाता है। इसका प्रसार बीजों द्वारा होता है और अंकुरण के लिए पूर्णतः परिपक्व बीजों की आवश्यकता होती है। मखाना की खेती में न्यूनतम खर्च आता है क्योंकि पिछले फसल से बचे हुए बीजों से नए पौधे आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर होने और नकदी फसल के रूप में किसानों की आय को दोगुना करने की अपार क्षमता को देखते मिलता है। मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी ।  छोटी छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने धमतरी प्रवास के दौरान जिले को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन द्वारा मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।

धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में आजीविका संवर्धन की दिशा में एक नई पहल के तहत मखाना खेती की तैयारी स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रारंभ की गई है। जिले में कुल 100 एकड़ भूमि मखाना उत्पादन के लिए चिन्हांकित की गई है। प्रारंभिक चरण में संकरा क्षेत्र में 25 एकड़ रकबे में मखाना की खेती की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। 

विशेषज्ञों के अनुसार नगरी क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त जल उपलब्धता एवं प्राकृतिक वातावरण मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल है। इससे स्थानीय किसानों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे। इस पहल से वनांचल क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

कलेक्टर धमतरी बीते दिनों संकरा पहुंचकर मखाना खेती की तैयारियों का अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “मखाना खेती नगरी वनांचल क्षेत्र के लिए आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बन सकती है। स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। हमारा प्रयास है कि धमतरी जिला प्रदेश में मखाना उत्पादन का मॉडल विकसित करे।”

कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग समन्वय बनाकर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करें तथा जल प्रबंधन एवं फसल संरक्षण पर विशेष ध्यान दें। आने वाले समय में चरणबद्ध रूप से रकबे का विस्तार कर अधिक से अधिक समूहों को इस पहल से जोड़ा जाएगा। जिला प्रशासन की इस पहल से नगरी वनांचल क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं साकार होती दिखाई दे रही हैं।


सीआरपीएफ कंपोजिट अस्पताल भिलाई में चिकित्सा शिविर आयोजित

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आरंग- शनिवार को डीआईजी मेडिकल डॉ.दुर्गा भवानी राजनाला के निर्देशन में सीआरपीएफ कंपोजिट हास्पीटल में चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में सीआरपीएफ कैंप के जवान व उनके परिवारजन, आसपास के ग्राम के ग्रामीणों सहित चरौदा के स्कूली बच्चों ने उपस्थित होकर स्वास्थ्य जांच कराया। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परामर्श व उपचार प्राप्त किया। शिविर के आयोजन, संयोजन में मुख्य रूप डॉ.तनिंदर सिंह ,डॉ इंदु वशिष्ठ,डॉ.अश्वथी रमेश ,सिस्टर कला ,रूबी, अभिषेक ने अहम् भूमिका निभाई।इस मौके पर डाक्टरों ने बच्चों को न्यूट्रिशियन संबंधी जानकारी देते हुए स्वास्थ्य संबंधी जागरूक रहने प्रेरित भी किया।


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