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भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। श्री साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया।

इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ व्ही श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

अफीम की खेती पर सख्त हुए मुख्यमंत्री साय,संलिप्त लोगों के विरुद्ध की गई कड़ी कार्रवाई

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 रायपुर : प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी कीमत पर अवैध मादक पदार्थों की खेती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने शासन और प्रशासन के सभी अधिकारियों को इस मामले की गंभीरता से जांच करने तथा इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन में आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि अपने-अपने जिलों के संवेदनशील एवं संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराया जाए। कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 15 दिवस के भीतर सर्वे पूर्ण कर अपने हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र सहित विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजें, जिसमें यह स्पष्ट उल्लेख हो कि जिले में कहीं भी अवैध रूप से अफीम की खेती तो नहीं की जा रही है।

प्रदेश में हाल ही में कुछ स्थानों पर अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आए हैं, जिन पर प्रशासन ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की है। दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में अफीम के पौधों को जब्त कर नष्ट किया गया तथा आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।अवैध क़ब्ज़े के जेसीबी मशीन से हटाया गया ।

इसी प्रकार बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कोरंधा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तुर्रीपानी (खजुरी) में राजस्व, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए लगभग 1.47 एकड़ भूमि पर की जा रही अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 18 क्विंटल 83 किलोग्राम अफीम के पौधे (लगभग 2 करोड़ रुपये मूल्य) जब्त किए गए तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 एवं 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध मादक पदार्थों की खेती, भंडारण, परिवहन या कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव: संसद में पहली बार अविश्वास नोटिस

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 नई दिल्ली। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी सांसदों ने संसद में अविश्वास का प्रस्ताव लाने की पहल की है। शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसदों ने उन्हें पद से हटाने की मांग को लेकर नोटिस जमा किया। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।


बताया जा रहा है कि यह देश के इतिहास में पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से हटाने की मांग की गई है। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हुई हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, इस नोटिस पर इंडिया गठबंधन के सभी घटक दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी इसका समर्थन करते हुए नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि पार्टी औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। कुछ निर्दलीय सांसदों ने भी इस पहल का समर्थन किया है।

नियमों के अनुसार, लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ नोटिस दिया जा सकता है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल सत्तारूढ़ भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। इसे पारित करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसमें सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी होता है।

बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला: 51 लाख गुजारा भत्ता और बेटियों के लिए FD के बाद तलाक मंजूर

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 बिलासपुर। Chhattisgarh High Court की डिवीजन बेंच ने पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी दे दी है। जस्टिस Sanjay K. Agrawal और जस्टिस Arvind Kumar Verma की खंडपीठ ने यह निर्णय दंपती के बीच सुलह की संभावनाएं समाप्त होने और उनकी दो बेटियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुनाया।


मध्यस्थता केंद्र में हुए समझौते के अनुसार पति ने पत्नी को 51 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने और दोनों बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 15-15 लाख रुपये की एफडी कराने पर सहमति जताई।

मामले के अनुसार महाराष्ट्र के राजोली निवासी व्यक्ति की शादी Chhattisgarh की निवासी महिला से 21 मई 2006 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। शादी के बाद दोनों की दो बेटियां हुईं, लेकिन कुछ वर्षों बाद दोनों के बीच वैचारिक मतभेद शुरू हो गए और अक्टूबर 2018 से दोनों अलग रहने लगे थे।

अलग रहने के दौरान पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन 6 जुलाई 2024 को फैमिली कोर्ट ने क्रूरता साबित नहीं होने का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

इसके बाद पति ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। अदालत ने मामले को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजा। लंबी चर्चा के बाद 18 अगस्त 2025 को दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया।

समझौते के तहत पत्नी को अलग-अलग किस्तों में डिमांड ड्राफ्ट के जरिए राशि दी गई और 23 फरवरी 2026 तक शेष 46 लाख रुपये का भुगतान भी पूरा कर दिया गया। राशि मिलने के बाद पत्नी ने इसे स्वीकार कर लिया।

मध्यस्थता केंद्र में हुए इस समझौते के आधार पर हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी दे दी।

ज्वेलरी शॉप में महिला ने लगाया लाखों का चूना, गहने पहनकर फरार; CCTV खंगाल रही पुलिस

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। Tikrapara थाना क्षेत्र के देवपुरी में एक महिला ज्वेलरी शॉप से करीब 5 लाख रुपये के गहने पहनकर फरार हो गई। पूरी घटना दुकान में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है।


जानकारी के मुताबिक एक महिला ग्राहक बनकर ज्वेलरी शॉप पहुंची थी। उसने सोने का रानी हार, बाली, अंगूठी और चांदी की पायल व बिछिया समेत करीब 4 लाख 93 हजार रुपये के गहने पहनकर देखने के लिए लिए।

इसके बाद महिला ने दुकान संचालक से कहा कि वह बाहर खड़े अपने दोस्तों से पैसे लेकर आती है। जैसे ही वह गहने पहनकर दुकान से बाहर निकली, वह मौके से फरार हो गई।

मामले में कुशालपुर, Purani Basti निवासी दुर्गा प्रसाद सोनी की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। पुलिस आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों के भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके।

पुलिस का कहना है कि आरोपी महिला की पहचान हो चुकी है और जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र का अतिरिक्त सहयोग, छत्तीसगढ़ को मिली 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता

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 रायपुर : प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति ने वर्ष 2025 के दौरान आई बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटने, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ जैसी आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लिए 1,912.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र के इस अतिरिक्त सहयोग के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का आभार माना है।


केंद्र सरकार द्वारा यह सहायता राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से जारी की जाएगी, ताकि प्रभावित राज्यों में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। समिति के निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता स्वीकृत की गई है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत सरकार प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। आपदा की स्थिति में प्रभावित राज्यों को त्वरित राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।

गौरतलब है कि यह अतिरिक्त सहायता राज्यों को पहले से उपलब्ध कराए गए संसाधनों के अतिरिक्त है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को आपदा प्रबंधन के लिए बड़ी राशि पहले ही जारी कर दी है। State Disaster Response Fund (SDRF) के तहत 28 राज्यों को 20,735.20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जबकि National Disaster Response Fund (NDRF) के तहत 21 राज्यों को 3,628.18 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।

इसके अलावा आपदा जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए State Disaster Mitigation Fund (SDMF) से 23 राज्यों को 5,373.20 करोड़ रुपये तथा National Disaster Mitigation Fund (NDMF) से 21 राज्यों को 1,189.56 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं।

राजधानी के होटल में भीषण आग, आसमान में उठे धुएं के गुबार से मचा हड़कंप

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 रायपुर। राजधानी रायपुर से इस वक्त बड़ी खबर सामने आई है। विधानसभा थाना क्षेत्र स्थित होटल रॉयल कैसल में शुक्रवार को भीषण आग लग गई। आग लगते ही इलाके में हड़कंप मच गया और आसमान में धुएं के गुबार दूर तक दिखाई देने लगे। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें होटल से उठता काला धुआं साफ देखा जा सकता है।


जानकारी के मुताबिक होटल के ग्राउंड फ्लोर पर बने स्टोर रूम में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटें तेज हो गईं और पहली मंजिल तक पहुंचती हुई दिखाई दीं। आग लगने के बाद होटल और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके के लिए रवाना हो गई और आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब बंद करने की ईरान की चेतावनी, दुनिया की एनर्जी सप्लाई पर मंडराया बड़ा संकट

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 नई दिल्ली : Iran के एक सैन्य अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर United States कोई रणनीतिक गलती करता है तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद दूसरे अहम समुद्री रास्ते Bab-el-Mandeb Strait को भी बंद कर सकता है। इससे पहले ही Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर बाब अल-मंदेब भी बंद होता है तो इसका असर भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।


दुनिया के कई देश, खासकर India, तेल और गैस की जरूरतों के लिए 80 से 90 प्रतिशत तक खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

‘ईरान का दूसरा होर्मुज’ माना जाता है बाब अल-मंदेब

विश्लेषकों के अनुसार Bab-el-Mandeb Strait को “ईरान का दूसरा होर्मुज” कहा जाता है। यह एक ऐसा रणनीतिक दबाव बिंदु है जहां ईरान यमन में अपने सहयोगी Houthi Movement के जरिए प्रभाव डाल सकता है।

यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों ने पहले भी Red Sea में कई जहाजों पर हमले किए थे। विशेष रूप से Israel और गाजा संघर्ष के दौरान लाल सागर में गुजरने वाले कारोबारी जहाजों पर हमलों से वैश्विक शिपिंग प्रभावित हुई थी। इसके बाद United States को क्षेत्र में अपनी नौसेना तैनात करनी पड़ी थी।

हूतियों के समर्थन के कारण बढ़ी चिंता

हालांकि बाब अल-मंदेब ईरान से काफी दूर है और उस पर उसका प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है, लेकिन ईरान लंबे समय से यमन के हूती आंदोलन का समर्थन करता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार नवंबर 2023 के बाद से हूती बलों ने लाल सागर के व्यापारिक मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 100 से अधिक हमले किए, जिससे करीब 60 देश प्रभावित हुए।

इन हमलों के चलते 2024 के अंत तक बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले तेल और एलएनजी टैंकरों की संख्या में 50 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। हूती समूह ने हाल ही में चेतावनी दी है कि उनकी “उंगलियां ट्रिगर पर हैं।”

दुनिया के लिए अहम समुद्री गलियारा

Bab-el-Mandeb Strait को अरबी में ‘दुख का द्वार’ (Gate of Tears) कहा जाता है। करीब 26 किलोमीटर चौड़ा यह समुद्री मार्ग Yemen और Djibouti के बीच स्थित है। यह मार्ग Red Sea को Gulf of Aden से जोड़ता है और आगे Suez Canal के जरिए भूमध्यसागर तक पहुंच प्रदान करता है।

भारत से इसकी दूरी लगभग 4,000 किलोमीटर बताई जाती है, लेकिन इसके बावजूद यह मार्ग भारत के ऊर्जा आयात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

रोज गुजरते हैं लाखों बैरल तेल

रिपोर्टों के मुताबिक इस समुद्री मार्ग से हर साल करीब 20,000 तेल टैंकर गुजरते हैं। अनुमान है कि रोजाना करीब 62 लाख बैरल कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद इस रास्ते से गुजरते हैं। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर Bab-el-Mandeb Strait भी बंद हो जाता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

‘जिंदगी की परवाह है तो अमेरिका मत आना…’ ट्रंप की ईरानी फुटबॉल टीम को चेतावनी, वर्ल्ड कप से पहले बवाल

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 आगामी FIFA World Cup 2026 से पहले एक नया विवाद सामने आ गया है। Donald Trump द्वारा Iran की फुटबॉल टीम को लेकर की गई टिप्पणी के बाद अंतरराष्ट्रीय खेल और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।


दरअसल, United States, Mexico और Canada की संयुक्त मेजबानी में होने वाला फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 इस बार कई मायनों में खास है। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा लेंगी। यह प्रतियोगिता 11 जून से शुरू होकर जुलाई 2026 तक चलेगी।


इस वर्ल्ड कप में Iran की टीम भी शामिल है और उसे ग्रुप-G में रखा गया है। इस ग्रुप में उसके साथ New Zealand, Belgium और Egypt की टीमें भी हैं। ईरान को ग्रुप चरण के अपने तीनों मुकाबले अमेरिका में ही खेलने हैं।

हालांकि हाल के दिनों में Israel और United States के साथ बढ़े तनाव के बाद ईरान की टीम के वर्ल्ड कप में भाग लेने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। ईरान के खेल मंत्री ने हाल ही में कहा था कि मौजूदा हालात को देखते हुए अपनी राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को अमेरिका भेजना मुश्किल हो सकता है।

इसी बयान के एक दिन बाद Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरानी टीम को लेकर एक टिप्पणी की, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया। ट्रंप ने पोस्ट में लिखा कि ईरान की फुटबॉल टीम का वर्ल्ड कप में स्वागत है, लेकिन उन्हें यहां नहीं होना चाहिए अगर उन्हें अपनी जिंदगी और सुरक्षा की परवाह है।

ट्रंप के इस बयान को कई लोगों ने धमकी भरा बताया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान सुरक्षा कारणों का हवाला देकर टीम को अमेरिका भेजने से इनकार करता है तो FIFA के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में मैचों को किसी अन्य मेजबान देश में शिफ्ट करने या वैकल्पिक व्यवस्था करने पर भी विचार किया जा सकता है।

फिलहाल इस पूरे मामले ने वर्ल्ड कप 2026 की तैयारियों के बीच खेल और राजनीति के टकराव को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

अवैध अफीम खेती पर सख्त हुए CM साय, 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश

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 रायपुर : प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती का मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है।

बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है।

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए।

उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है।

योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी।

इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

आधार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा आत्मनिर्भर बनी संगीता सिंह

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 धनंजय राठौर सयुक्त संचालक, जनसंपर्क

लोकेश्वर सिंह सहायक जनसंपर्क अधिकारी
रायपुर : स्वयं सहायता समूहों को कम ब्याज दर पर ऋण और कौशल विकास के अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे महिलाएं छोटी-छोटी आजीविका गतिविधियां (जैसे- खेती, पशुपालन, सिलाई, आधार से जुड़ी सेवाएं ) शुरू कर सकें। इस मिशन के अंतर्गत महिलाएं सशक्त बनकर न केवल परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर होकर सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार और प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जब महिलाओं को सही अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन में बदलाव लाती हैं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जिला मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम दुधाशी की निवासी संगीता सिंह की कहानी भी महिला सशक्तिकरण की ऐसी ही प्रेरक मिसाल है, जिन्होंने अपने परिश्रम और आत्मविश्वास से एक नई पहचान बनाई है।

बीसी सखी के रूप में शुरू हुआ सफ

संगीता सिंह ने वर्ष 2021 में बीसी सखी के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की। उनके माध्यम से गांव के लोगों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिलने लगा। पहले जहां ग्रामीणों को पैसे निकालने या बैंक से जुड़े कार्यों के लिए दूर शहर या ब्लॉक मुख्यालय तक जाना पड़ता था, वहीं अब यह सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध होने लगीं। इससे ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बचने लगा और गांव के लोगों को बड़ी सुविधा मिली।

स्वयं सहायता समूह से मिली आर्थिक मजबूती

संगीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने बिहान योजना के अंतर्गत अपने स्वयं सहायता समूह से 68 हजार रुपये का ऋण लिया था। इसी आर्थिक सहयोग से उन्होंने बीसी सखी के रूप में अपना कार्य शुरू किया। शुरुआत में कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन अपनी मेहनत, लगन और सेवा भावना से उन्होंने धीरे-धीरे गांव के लोगों का विश्वास जीत लिया। आज गांव के लोग उन्हें भरोसे के साथ अपनी बैंकिंग सेवाओं के लिए संपर्क करते हैं।

उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला आधार किट

संगीता सिंह के समर्पण और उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन को देखते हुए मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर के जिला प्रशासन ने उन्हें नई जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया। आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में आधार सेवाओं के विस्तार के उद्देश्य से जिले में पांच नए आधार केंद्र खोले जा रहे हैं। इसी पहल के तहत संगीता सिंह को लैपटॉप सहित आधार किट प्रदान की गई। जिला प्रशासन की ओर से ईडीएम श्री नारायण केवर्त ने उन्हें यह आधार किट सौंपा।

अब गांव में ही मिलेंगी आधार सेवाएं

आधार किट मिलने के बाद संगीता सिंह अब अपने गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आधार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी। इनमें नया आधार पंजीयन, आधार अपडेट तथा अन्य आवश्यक कार्य शामिल हैं। इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए शहर या ब्लॉक मुख्यालय तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें अपने गांव के पास ही सुविधाएं मिल सकेंगी।

अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

संगीता सिंह की सफलता की कहानी पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को अवसर और सहयोग मिले तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उनकी उपलब्धि यह भी साबित करती है कि महिलाएं केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम

जिला प्रशासन की यह पहल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत कर रही है। संगीता सिंह जैसी महिलाएं आज ग्रामीण भारत में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि आत्मविश्वास, परिश्रम और सही अवसर मिल जाए तो कोई भी महिला अपने सपनों को साकार कर सकती है। बिहान योजना का उद्देश्य गरीबों, विशेष रूप से महिलाओं के लिए मजबूत संस्थाएं बनाकर और उन्हें वित्तीय और आजीविका सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंच प्रदान करके गरीबी कम करने को बढ़ावा देना है।

प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने सौजन्य मुलाकात की।


मुख्यमंत्री साय ने सभी प्रशिक्षु न्यायाधीशों को न्यायिक सेवा में चयन के लिए बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण और सशक्त स्तंभ है। आने वाले समय में आप सभी के कंधों पर समाज और न्याय व्यवस्था से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आप सभी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए इन जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि न्यायपालिका आमजन के अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।

इस अवसर पर विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सांवत, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की संचालक निधि शर्मा तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

बिहान से बदली महिलाओं की जिंदगी, आर्थिक सशक्तिकरण की राह पर बढ़ रहीं ‘लखपति दीदी

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 रायपुर : राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं का प्रभाव अब गांव-गांव में दिखाई देने लगा है।


राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार और समूह आधारित गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं।

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड के ग्राम पोड़ीदल्हा की निवासी श्रीमती पुष्पलता साहू इसका प्रेरक उदाहरण हैं। पहले उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाता था।

साहू बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर माह मिलने वाली सहायता राशि से परिवार की आर्थिक स्थिति में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है। इस राशि से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी मिली। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में शामिल हुईं। समूह की ताकत और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने अपनी आय में लगातार वृद्धि की और आज वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।

पुष्पलता साहू न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आजीविका गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और उन्हें मार्गदर्शन भी देती हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं ने महिलाओं को गरीबी से बाहर निकलकर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया है। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला है।

14 मार्च को लगेगी नेशनल लोक अदालत, आपसी सुलह से निपटेंगे हजारों मामले

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 रायपुर : आपसी सुलह (राजीनामा) के जरिए मामलों का निपटारा करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के तत्वावधान में शनिवार 14 मार्च 2026 को देशव्यापी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) बिलासपुर द्वारा प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों एवं व्यवहार न्यायालयों में भी लोक अदालत आयोजित किए जाएंगे। यह कैलेण्डर वर्ष 2026 की पहली लोक अदालत होगी।


लोक अदालत के दिन जिला न्यायालय एवं तालुका न्यायालय (व्यवहार न्यायालय) में लंबित शमनीय अपराध के प्रकरण मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित प्रकरण, 138 एनआई एक्ट, के अंतर्गत चेक बाउंस का प्रकरण धारा 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता तथा मेट्रोमोनियल डिस्प्युट के अलावा जल कर, संपत्ति कर, राजस्व संबंधी प्रकरण ट्रैफिक चालान, भाड़ा नियंत्रण आबकारी से संबंधित प्रकरणों के निराकरण किया जाएगा। इसी प्रकार बैंक विद्युत संबंधी प्री-लिटिगेशन प्रकरण, राजस्व न्यायालय खंडपीठ में खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे, वारिसों के मध्य बटवारे का निराकरण किया जाएगा। न्यायालयों में बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों में कमी लाने के उद्देश्य से तथा प्रभावित पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में नेशनल लोक अदालत एक प्रभावशाली कदम है।

नेशनल लोक अदालत के लिए खण्डपीठों का गठन कर विभिन्न प्रकरणों तथा प्री.लिटिगेशन का निराकरण किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय में राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरणों धारा. 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों, बैंक रिकवरी प्रकरण, सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, विद्युत संबंधी मामलों तथा पारिवारिक विवाद के मामलों का निराकरण किया जाता हैं। इसके अतिरिक्त राजस्व, बैंक, विद्युत विभाग दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री.लिटिगेशन प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत किए जाएंगे। विधिवत पंजीयन उपरांत संबंधित पक्षकारों के प्रकरण लोक अदालत खण्ड पीठ में निराकृत किए जाएंगे।

इस तरह पक्षकार अपने न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से करा सकते हैं। इसके अलावा लोक अदालत में दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद् में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री-लिटिगेशन प्रकरण, याददाश्त के आधार पर बंटवारा, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक रिकवरी प्रकरण, कब्जे के आधार पर बंटवारा से संबंधित प्रक्ररणों को निराकृत किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) के अंतर्गत कार्यवाही के मामले, रेन्ट कंट्रोल एक्ट, सूखाधिकार से संबंधित मामलों के साथ-साथ विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण के मामले तथा अन्य प्रकृति के सभी मामले सम्मिलित और चिन्हांकित कर आपसी राजीनामा के आधार पर नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया जाएगा।

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