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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, दो महीने का कच्चा तेल भंडार उपलब्ध

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 नई दिल्ली: West Asia में जारी संकट के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। सरकार के अनुसार, भारत के पास लगभग 60 दिनों का कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।


पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने बताया कि भारत के पास कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार है। साथ ही सरकार इस भंडार को और बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

ऊर्जा आपूर्ति पर जोर

उन्होंने कहा कि देशभर में ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पिछले एक महीने में 3.33 लाख पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं, जिनमें से करीब 2.90 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को मिले हैं। इसके अलावा, लगभग साढ़े तीन लाख लोगों ने नए पीएनजी कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है।

सरकार ने पीएनजी उपयोगकर्ताओं से एलपीजी कनेक्शन छोड़ने की अपील भी की है। अब तक करीब 14,400 उपभोक्ताओं ने अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किया है।

कमर्शियल एलपीजी कोटा बढ़ाया

औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आठ राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के कोटे में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

हॉर्मुज जलमार्ग पर भारत का रुख

Strait of Hormuz में तनाव के बीच ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई अंतरराष्ट्रीय बैठक में Vikram Misri ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध आवाजाही के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संकट का समाधान केवल कूटनीति और संवाद से ही संभव है।

बैठक में 60 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया और हॉर्मुज जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा की गई।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ब्रिटेन की विदेश सचिव Yvette Cooper ने कहा कि ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग को बाधित किया है। उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।

दुर्ग में फर्जी स्वास्थ्य अधिकारी बनकर ठगी का खेल, अस्पतालों को डराकर मांगे पैसे

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 दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अस्पताल संचालकों को निशाना बनाकर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोपी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बनकर अस्पतालों को कार्रवाई का डर दिखा रहे हैं और पैसों की मांग कर रहे हैं।


मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र के आर्य नगर स्थित गंगोत्री अस्पताल से जुड़ा है। अस्पताल संचालक डॉ. ओम प्रकाश कराड़े की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

डॉ. कराड़े के अनुसार, 17 मार्च 2026 को उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को अजय अग्रवाल बताते हुए रायपुर स्थित स्वास्थ्य-परिवार कल्याण विभाग के सचिव का पर्सनल स्टाफ बताया। आरोपी ने अस्पताल में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए कार्रवाई का डर दिखाया और मामले को खत्म कराने के नाम पर पैसे की मांग की।

शिकायत में बताया गया है कि आरोपी ने उन्हें मंत्रालय बुलाया। वहां पहुंचने पर उन्हें अंदर प्रवेश नहीं दिया गया और गेट के बाहर ही इंतजार कराया गया। कुछ देर बाद वही व्यक्ति बाहर आया और फिर से दबाव बनाते हुए रकम देने को कहा।

आरोपी ने यह भी धमकी दी कि पैसे नहीं देने पर अस्पताल के खिलाफ जांच कराई जाएगी और मामला सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

संदेह होने पर डॉ. कराड़े ने स्वास्थ्य सचिव कार्यालय से जानकारी ली, जहां स्पष्ट हुआ कि अजय अग्रवाल नाम का कोई भी व्यक्ति वहां कार्यरत नहीं है। इसके बाद उन्होंने तुरंत मोहन नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अन्य अस्पतालों को भी निशाना बनाया है। चरौदा स्थित एएम हॉस्पिटल के संचालक के साथ भी इसी तरह की घटना हुई, जिसके बाद भिलाई-3 थाने में भी मामला दर्ज किया गया है।

दुर्ग जिले में अब तक ऐसे दो मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस मोबाइल नंबर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान और लोकेशन का पता लगाने में जुटी है। आशंका है कि आरोपी के पकड़े जाने पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

“नक्सलवाद खत्म नहीं होने देना चाहते थे” - साव का बघेल पर सीधा हमला

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 रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे कभी नहीं चाहते थे कि राज्य से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो।


मीडिया से बातचीत में साव ने कहा कि बघेल लगातार बस्तर से सुरक्षाबलों की वापसी की बात करते हैं, जबकि हालात सामान्य होने पर सुरक्षा बलों की वापसी स्वतः हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों के हाथ बांध दिए गए थे, जिससे नक्सलियों का मनोबल बढ़ा।

सरेंडर पॉलिसी का असर

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नक्सलवाद के खिलाफ व्यापक रणनीति के तहत अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था की गई है और प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
साव के अनुसार, इसी नीति के चलते बड़ी संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर किया है और कम समय में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

ममता सरकार पर भी निशाना

पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारी को बंधक बनाए जाने की घटना पर टिप्पणी करते हुए साव ने Mamata Banerjee सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वहां कानून व्यवस्था कमजोर हो रही है और राज्य तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में जनता ऐसी सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी।

पेट्रोल कीमतों पर प्रतिक्रिया

पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी पर साव ने कहा कि यह वैश्विक परिस्थितियों का असर है और हालात सुधरने पर स्थिति बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जनता सरकार के साथ है।

आरोपों को बताया निराधार

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े नेता Manish Kunjam के आरोपों को खारिज करते हुए साव ने कहा कि नक्सली स्वेच्छा से सरकार की सरेंडर नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं और किसी प्रकार की “डील” के आरोप गलत हैं।

भारत के सीफूड निर्यात में 11 वर्षों में दोगुनी बढ़ोतरी, झींगा निर्यात बना प्रमुख आधार

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भारत के समुद्री उत्पाद (सीफूड) निर्यात में पिछले 11 वर्षों में मजबूत और निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान निर्यात में औसतन 7% की वार्षिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में ₹30,213 करोड़ के मुकाबले 2024-25 में यह बढ़कर ₹62,408 करोड़ हो गया है, जिसमें प्रमुख योगदान झींगा (श्रिम्प) निर्यात का रहा, जिसकी कीमत ₹43,334 करोड़ रही।

भारत का सीफूड निर्यात काफी विविध है, जिसमें 350 से अधिक उत्पादों की किस्में शामिल हैं और ये लगभग 130 देशों में भेजे जाते हैं। 2024-25 में कुल निर्यात मूल्य का 36.42% हिस्सा अमेरिका को गया, जो सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य-पूर्व प्रमुख गंतव्य हैं।

निर्यात में फ्रोजन श्रिम्प का दबदबा बना हुआ है, इसके बाद फ्रोजन मछली, स्क्विड, सूखे उत्पाद, कटलफिश, सुरिमी आधारित उत्पाद और जीवित व चिल्ड सीफूड का स्थान है। साथ ही, वैल्यू-एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी 2.5% से बढ़कर 11% हो गई है, जिसकी निर्यात कीमत 742 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।

सरकार सीफूड निर्यात में विविधता लाने और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मछली उत्पादन, ब्रैकिश वाटर एक्वाकल्चर का विस्तार, नई तकनीकों को अपनाने, रोग प्रबंधन और ट्रेसबिलिटी सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली बंदरगाह और फिश लैंडिंग सेंटर विकसित किए जा रहे हैं।

उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे टूना, सीबास, कोबिया, पोम्पानो, मड क्रैब, GIFT तिलापिया, ग्रूपर और टाइगर श्रिम्प के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत के निर्यात उत्पादों का दायरा और बढ़ सके।

अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों के अनुरूप बनने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। अमेरिका के मरीन मैमल प्रोटेक्शन एक्ट (MMPA) के तहत आवश्यक शर्तों को पूरा करते हुए भारत को 2025 में मंजूरी मिली, जिससे अमेरिकी बाजार में निर्यात जारी रहेगा। साथ ही, टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TEDs) के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

व्यवसाय को आसान बनाने के लिए सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट (SIP) प्रणाली को डिजिटल कर दिया गया है, जिससे मंजूरी का समय 30 दिनों से घटकर 72 घंटे रह गया है। कुछ उत्पादों के लिए SIP की आवश्यकता भी समाप्त कर दी गई है, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिला है।

आने वाले पांच वर्षों में सरकार का लक्ष्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात बढ़ाना, नए बाजारों तक पहुंच बनाना और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना है। यूके, यूरोपीय संघ, आसियान और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन प्रयासों के साथ भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और प्रीमियम सीफूड निर्यातक के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, बताया राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि वे भारतीय गौरव के अमर प्रतीक और राष्ट्रीय स्वाभिमान के शाश्वत रक्षक छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए लोगों को एकजुट किया और हिंदवी स्वराज की स्थापना की। समुद्री शक्ति के महत्व को समझते हुए उन्होंने एक सशक्त नौसेना का निर्माण किया, जो उनकी दूरदर्शिता और अद्वितीय रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन इस बात का आदर्श उदाहरण है कि एक शासक कैसे अपनी संस्कृति और भाषा की रक्षा करते हुए जनकल्याण के उच्चतम मानक स्थापित कर सकता है।

अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का संघर्ष और उनका जीवन देशवासियों को सदैव मातृभूमि के प्रति समर्पण और निष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा।

होर्मुज संकट पर भारत का रुख स्पष्ट: कूटनीति और संवाद से ही समाधान संभव

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 नई दिल्ली। ईरान संकट के बीच भारत ने एक बार फिर कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को ब्रिटेन की ओर से आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा और समुद्री आवागमन को लेकर चर्चा की गई। बैठक में 60 से अधिक देशों ने भाग लिया।


सुरक्षित आवागमन पर भारत का जोर

बैठक में भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से निर्बाध और सुरक्षित आवागमन के सिद्धांत को अहम बताया। विदेश सचिव ने कहा कि इस संकट का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के दौरान नाविकों की जान गंवाने वाला भारत एक प्रमुख प्रभावित देश रहा है।

तनाव कम करना ही समाधान

भारत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और संबंधित पक्षों के बीच संवाद व कूटनीति को बढ़ावा देना है। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की जिम्मेदारी एशियाई और यूरोपीय देशों पर बताई थी। जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में अमेरिका ने हिस्सा नहीं लिया।

संयुक्त बयान से दूरी

भारत ने अभी तक ब्रिटेन और अन्य देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान का समर्थन नहीं किया है। सरकार का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान सीधे संवाद से निकाला जाना चाहिए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले भी तेहरान के साथ सीधी बातचीत की वकालत कर चुके हैं।

क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को खुले महासागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह लगभग 167 किलोमीटर लंबा है और सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई करीब 33 किलोमीटर है।
सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देश इसी रास्ते से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों को कच्चे तेल और गैस का निर्यात करते हैं। इस कारण यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

इस क्षेत्र में समय-समय पर तनाव और ईरान की ओर से मार्ग बंद करने की चेतावनियों के चलते इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आज भव्य समापन, सीएम साय होंगे मुख्य अतिथि

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ की मेजबानी में पहली बार आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम आज, 3 अप्रैल को शाम 5 बजे रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा।


समारोह में अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर एम.सी. मैरीकॉम और भारतीय फुटबॉल के दिग्गज बाइचुंग भूटिया विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

गौरतलब है कि 25 मार्च से राज्य के तीन शहर—रायपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर—में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के तहत विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसमें देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 2000 जनजातीय खिलाड़ी एवं अधिकारी शामिल हुए।

समापन समारोह की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

इसके अलावा राज्य शासन के मंत्रीगण, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर जिले के विधायकगण, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष भी समारोह में शामिल होंगे।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से तेलंगाना एवं अन्य प्रांतो में प्रवासित परिवारों के लिए पुर्नवास के लिए बनेगी कार्ययोजना

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अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के ऐसे विस्थापित परिवार जो किन्ही कारणों बस्तर संभाग के सीमावर्ती तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश में प्रवासित है, ऐसे परिवारों के पुनर्वास की कार्ययोजना बनायी जा रही है। मंत्रालय महानदी भवन में आज अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में पुनर्वास हेतु गठित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के संबंध में कार्ययोजना तैयार करने विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में बताया गया कि जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के लोग तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश राज्य में प्रवासित हो गए है। इसके लिए प्रवासित परिवारों की ओर से राष्ट्रीय जनजातीय आयोग में याचिका दायर किया गया है। इसके तहत माननीय आयोग द्वारा एक माह के भीतर सर्वे कर प्रवासित परिवारों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके परिपालन में बस्तर संभाग के संभागायुक्त द्वारा एक समयबद्ध कार्यक्रम के तहत कलेक्टर दंतेवाड़ा, सुकमा एवं जिला बीजापुर को प्रवासित परिवारों के सर्वे किया जाकर 15 दिन के भीतर प्रतिवेदन प्रेषित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सर्वे अनुसार जिला दंतेवाड़ा से तेलंगाना प्रदेश के 60 ग्राम में 618 परिवार के 2654 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से तेलंगाना प्रदेश के 293 ग्राम में 2733 परिवार के 12026 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से तेलंगाना प्रदेश के 114 ग्राम में 994 परिवार के 5029 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से तेलंगाना राज्य के 467 ग्राम में 4345 परिवार के 19709 व्यक्ति प्रवासित है।

इसी तरह जिला दंतेवाड़ा से आंध्रप्रदेश के 25 ग्राम में 125 परिवार के 568 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से आंध्रप्रदेश के 155 ग्राम में 2462 परिवार के 10787 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से आंध्रप्रदेश के 04 ग्राम में 07 परिवार के 34 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह से छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से आंध्रप्रदेश राज्य के 184 ग्राम में 2594 परिवार के 11389 व्यक्ति प्रवासित है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के 667 ग्राम से तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश राज्य के 651 ग्राम में 6939 परिवार के 31098 व्यक्ति प्रवासित है। बैठक में अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बस्तर संभाग डोमन सिंह एवं पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज से चर्चा कर अन्य प्रांतों में प्रवासित परिवारों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए एक बार और सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त कर लें।

अपर मुख्य सचिव गृह पिंगुआ ने कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों से अन्य प्रांतों में प्रवासित लोगों के बारे में उनके मूल ग्राम एवं निवास स्थान से आवश्यक जानकारी तैयार कर लें। जिससे पुनर्वास योजना बनाने आसानी होगी। इसी तरह से पुनर्वास योजना बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित दिए गए है कि वे शीघ्र ही अपने-अपने विभागों के नोडल अधिकारी नियुक्त कर दें, जिससे शीघ्र पुनर्वास योजना बनाने में आसानी होगी। 

वीडियो कॉन्फ्रेंस में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, गृह विभाग की सचिव नेहा चम्पावत, आईजी बस्तर सुन्दरराज, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह सहित कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा शामिल हुए। इसी तरह से बैठक में सामान्य प्रशासन, वित्त विभाग, राजस्व, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, वाणिज्य एवं उद्योग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

महासमुंद कांग्रेस भवन में बवाल: नेताओं के बीच मारपीट, कुर्सियां टूटीं

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 महासमुंद। जिला कांग्रेस भवन में आज गुरुवार को उस समय हंगामा मच गया, जब दो कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के दौरान जमकर मारपीट, गाली-गलौज और धक्का-मुक्की हुई, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


जानकारी के अनुसार, विवाद निर्मल जैन और पार्षद विजय साव के बीच शुरू हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में हाथापाई में तब्दील हो गई। दोनों पक्षों के समर्थक भी इसमें शामिल हो गए, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इस दौरान कुर्सियां तोड़े जाने की भी खबर है।

घटना के समय जिला कांग्रेस अध्यक्ष द्वारकाधीश यादव और पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर भी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक विवाद काफी बढ़ चुका था।

सूत्रों के अनुसार, विवाद किसी छोटे मुद्दे को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन पहले से चल रहे गुटीय मतभेद के कारण मामला तूल पकड़ गया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं और खुद को निर्दोष बताया है।

मामला सिटी कोतवाली थाना पहुंच चुका है, जहां शिकायत दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने सभी पक्षों के बयान लेना शुरू कर दिया है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही है।

इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक दलों के भीतर अनुशासन और आपसी समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर कांग्रेस जैसे बड़े संगठन में इस तरह की घटनाएं अंदरूनी गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करती हैं।

नई स्टडी में खुलासा: नदी जल में धातु प्रदूषण से बच्चों को वयस्कों से अधिक खतरा

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नई दिल्ली/लखनऊ- उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बेतवा-यमुना संगम से लिए गए जल नमूनों पर आधारित एक नई स्टडी में सामने आया है कि नदी जल में मौजूद सूक्ष्म धातु (ट्रेस मेटल) प्रदूषण से बच्चों को वयस्कों की तुलना में अधिक स्वास्थ्य जोखिम है।

यह अध्ययन बिरबल साहनी पुराजीव विज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, जिसमें नदी के पानी की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण किया गया।

वैज्ञानिकों ने बताया कि पारंपरिक तरीके में पानी की औसत प्रदूषण स्तर को मापा जाता है, लेकिन इससे वास्तविक जोखिम का पूरा आकलन नहीं हो पाता, क्योंकि यह लोगों की उम्र, शरीर और संपर्क के स्तर पर निर्भर करता है।

अध्ययन के दौरान बेतवा-यमुना संगम क्षेत्र से अलग-अलग स्थानों और मौसमों में पानी के नमूने लिए गए और उनमें आर्सेनिक, सीसा (लेड) और कैडमियम जैसे धातुओं की मात्रा का परीक्षण किया गया।

इसके बाद वैज्ञानिकों ने ‘मोंटे कार्लो सिमुलेशन’ तकनीक का उपयोग करते हुए 10,000 संभावित परिस्थितियों का विश्लेषण किया, जिसमें पानी के सेवन, शरीर के वजन और प्रदूषण स्तर जैसे कारकों को शामिल किया गया।

स्टडी में पाया गया कि बच्चों में गैर-कैंसरजन्य जोखिम (नॉन-कार्सिनोजेनिक रिस्क) काफी अधिक है। लगभग 67% मामलों में ‘हैज़र्ड इंडेक्स’ सुरक्षित सीमा से ऊपर पाया गया। वहीं आर्सेनिक के संपर्क से कैंसर का खतरा भी गंभीर स्तर पर पाया गया।

शोध में यह भी सामने आया कि प्रदूषण के स्रोत प्राकृतिक और मानव-जनित दोनों हैं, जिनमें कृषि अपशिष्ट, औद्योगिक उत्सर्जन, शहरी सीवेज और थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों के संगम क्षेत्रों में दो अलग-अलग जल धाराओं के मिलने से प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ जाता है, जिससे धातुओं का संचरण और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।

यह अध्ययन नदी स्वास्थ्य आकलन के लिए एक नया और प्रभावी तरीका प्रस्तुत करता है और जल सुरक्षा नीति, प्रदूषण नियंत्रण तथा जोखिम प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। वैज्ञानिकों ने बेतवा-यमुना संगम क्षेत्र में भारी धातुओं के नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

कर्मयोगी साधना सप्ताह का शुभारंभ, जन-केंद्रित शासन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली- भारत सरकार ने आज मिशन कर्मयोगी के तहत ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य देशभर के लोक सेवकों की क्षमता, प्रतिबद्धता और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करना है। यह कार्यक्रम 2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शासन को नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए और “नागरिक देवो भव” की भावना से प्रेरित होना चाहिए। उन्होंने निरंतर सीखने, तकनीक और डेटा के उपयोग तथा कर्तव्य-आधारित सेवा दृष्टिकोण पर जोर दिया।

नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम के साथ इस पहल की शुरुआत हुई, जो मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है। यह कार्यक्रम ‘टेक्नोलॉजी, ट्रेडिशन और टैंजिबल आउटकम्स’ के तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि यह पहल एक सक्षम, प्रतिबद्ध और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा के निर्माण को मजबूत करती है। उन्होंने बताया कि अब प्रशिक्षण पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर ‘कभी भी, कहीं भी’ सीखने की दिशा में विकसित हुआ है, जिसे iGOT जैसे प्लेटफॉर्म संभव बना रहे हैं।

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि मिशन कर्मयोगी ने सार्वजनिक सेवा में ज्ञान, कौशल और मूल्यों को एकीकृत कर एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ‘कर्मयोगी’ वह है जो ज्ञान और कर्म को जोड़ते हुए सहानुभूति के साथ शासन करता है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह ने बताया कि iGOT प्लेटफॉर्म पर 1.5 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं, 8 करोड़ से अधिक कोर्स पूरे किए जा चुके हैं और 4,600 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि 130 से अधिक क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार की गई हैं।

कर्मयोगी भारत के अध्यक्ष सुब्रमण्यम रामदोराई ने कहा कि यह पहल सिविल सेवाओं में निरंतर सीखने और आत्म-विकास की संस्कृति को मजबूत करती है। उन्होंने अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों में दक्षता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण पहलें भी शुरू की गईं, जिनमें ‘कर्मयोगी गीत’, ‘कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट’, ‘कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम’ और ‘ट्रस्ट-बेस्ड पीयर असेसमेंट फ्रेमवर्क’ शामिल हैं। साथ ही AI आधारित ‘अमृत ज्ञान कोश’ केस स्टडी सूट भी लॉन्च किया गया।

मिशन कर्मयोगी, जो अब पांच वर्ष पूरे कर चुका है, ने पारंपरिक नियम-आधारित प्रणाली से हटकर एक दक्षता-आधारित ढांचा स्थापित किया है। ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायक होगा।

इस कार्यक्रम में विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

चंचल कुमार ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव का पद संभाला

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नई दिल्ली- वरिष्ठ आईएएस अधिकारी चंचल कुमार ने 1 अप्रैल 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया। वे 1992 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।

पदभार ग्रहण करने के अवसर पर उन्हें निवर्तमान सचिव संजय जाजू और मंत्रालय के अन्य अधिकारियों एवं विभिन्न मीडिया इकाइयों द्वारा स्वागत किया गया। संजय जाजू को अब पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है।

चंचल कुमार इससे पहले पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। वे राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) के प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने सड़क और अवसंरचना परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

बिहार सरकार में भी उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और सचिव के पद शामिल हैं। साथ ही वे कई जिलों में जिला अधिकारी (डीएम) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

श्री चंचल कुमार ने आईआईटी कानपुर से बी.टेक और एम.टेक की डिग्री प्राप्त की है तथा पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की है, जो उनके प्रशासनिक अनुभव के साथ मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है।

यूआईडीएआई और मैपमायइंडिया के बीच समझौता, Mappls ऐप पर दिखेंगे अधिकृत आधार केंद्र

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नई दिल्ली- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के लिए मैपमायइंडिया के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते के तहत आने वाले महीनों में Mappls ऐप पर देशभर के अधिकृत आधार केंद्रों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस पहल से लोगों को अधिकृत आधार केंद्रों की पहचान करने और वहां तक पहुंचने में आसानी होगी। साथ ही, उपयोगकर्ता यह भी देख सकेंगे कि किस केंद्र पर कौन-सी सेवाएं उपलब्ध हैं, जैसे वयस्क नामांकन, बच्चों का नामांकन या केवल पता और मोबाइल अपडेट।

यह सहयोग नागरिकों की सुविधा बढ़ाने, गलत जानकारी को रोकने और आधार सेवा केंद्रों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। यह समझौता 1 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित हुआ।

यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा कि यह पहल नागरिक-केंद्रित सेवाओं को और मजबूत करेगी और देशभर में सत्यापित आधार केंद्रों की डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगी, जिससे लोगों को सही और अधिकृत केंद्र आसानी से मिल सकें।

इस सेवा के लागू होने के बाद, जब उपयोगकर्ता Mappls ऐप पर आधार केंद्र खोजेंगे, तो उन्हें सीधे अधिकृत केंद्रों की जानकारी मिलेगी। मैपमायइंडिया इस प्लेटफॉर्म पर यूआईडीएआई द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी को एकीकृत कर सटीक डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगा।

मैपमायइंडिया के सह-संस्थापक और सीएमडी राकेश वर्मा ने कहा कि यह यूआईडीएआई के साथ जुड़कर लोगों को आधार सेवाओं तक आसान पहुंच देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

डाक प्रशिक्षण केंद्र सहारनपुर के 75 वर्ष पूरे, स्मारक डाक टिकट जारी

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नई दिल्ली- डाक विभाग ने डाक प्रशिक्षण केंद्र (PTC), सहारनपुर के 75 वर्ष पूरे होने पर प्लेटिनम जुबली मनाई। इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया, जो संस्थान की उत्कृष्ट प्रशिक्षण परंपरा और राष्ट्र निर्माण में योगदान को दर्शाता है।

यह डाक टिकट केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली स्थित रंग भवन सभागार में जारी किया गया। इस कार्यक्रम में डाक सेवाओं के महानिदेशक जितेंद्र गुप्ता, सदस्य (वित्त) मनीष सिन्हा, सीजीसीए वंदना गुप्ता और सदस्य (एचआरडी) कर्नल एस. एफ. एच. रिजवी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री सिंधिया ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि डाक प्रशिक्षण केंद्र केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह है जहां इतिहास जीवित है और निरंतर विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि 75 वर्षों का यह सफर राष्ट्र निर्माण में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।

भविष्य की दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक न केवल देश बल्कि विश्व का एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डाक विभाग और उसके कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

2 अप्रैल 1951 को स्थापित डाक प्रशिक्षण केंद्र सहारनपुर का उद्देश्य स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना था। यह संस्थान 56.71 एकड़ परिसर में फैला हुआ है और अब उत्तरी भारत के 8 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के डाक कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने वाला प्रमुख संस्थान बन चुका है।

आज यह केंद्र 11 आधुनिक कंप्यूटर लैब और एक विशेष ई-स्टूडियो से सुसज्जित है, जहां हर साल करीब 3,000 कर्मचारियों को ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, डिजिटल संचालन और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही अनुशासन, विश्वसनीयता और जनसेवा जैसे मूल्यों को भी विकसित किया जाता है।

यह स्मारक डाक टिकट देशभर के फिलैटेलिक ब्यूरो में उपलब्ध है और इसे ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है।

डिजिटल गवर्नेंस को मजबूती: गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी ने ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म अपनाने के लिए समझौता किया

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नई दिल्ली- भारत सरकार ने तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘संपन्न’ (SAMPANN) डिजिटल पेंशन एवं वित्तीय प्रबंधन प्लेटफॉर्म को अपनाने के लिए गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी (CPA) के साथ समझौता किया है।

यह समझौता दूरसंचार विभाग के अंतर्गत नियंत्रक जनरल संचार लेखा (CGCA) कार्यालय की ओर से उप महानियंत्रक जी. संदीप कुमार गौड़, कोचीन पोर्ट अथॉरिटी की ओर से अध्यक्ष कासिविश्वनाथ और गोवा सरकार की ओर से रेजिडेंट कमिश्नर शकील उल रहमान राथर द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

‘संपन्न’ (System for Accounting and Management of Pension) एक क्लाउड-आधारित, एंड-टू-एंड ऑनलाइन पेंशन प्रबंधन प्रणाली है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन के तहत विकसित किया गया है। इसे 29 दिसंबर 2018 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह प्लेटफॉर्म पेंशन की प्रक्रिया को शुरू से लेकर भुगतान और लेखांकन तक पूरी तरह डिजिटल बनाता है।

इस प्लेटफॉर्म के जरिए पेंशन स्वीकृति, अधिकृतकरण, लेखांकन और भुगतान की प्रक्रिया को एक ही डिजिटल मंच पर सरल और पारदर्शी बनाया गया है। गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी द्वारा इसे अपनाने से आधुनिक, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को और मजबूती मिलेगी।

संचार मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से हर महीने औसतन ₹1,650 करोड़ की पेंशन वितरित की जा रही है और अब तक कुल ₹72,000 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन की दिशा बदली है, जहां अब सेवाएं सीधे नागरिकों तक पहुंच रही हैं।

उन्होंने बताया कि इस समझौते के माध्यम से नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाने की इस अवधारणा को अन्य संस्थानों तक भी विस्तारित किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने डाक विभाग और दूरसंचार विभाग को भी ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म अपनाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

इस मौके पर संचार मंत्री ने ‘संपन्न’ कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया, जिसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका को दर्शाया गया है।

कार्यक्रम के अंत में सीजीसीए वंदना गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि पेंशनर्स किसी एक विभाग से नहीं जुड़े होते, बल्कि उन्हें सर्वोत्तम सेवाएं मिलनी चाहिए, इसी सोच के साथ ‘संपन्न’ को सभी संस्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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