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भारत में देशी मछली प्रजातियों के संवर्धन और मछली पालन में विविधीकरण को बढ़ावा

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भारत की विविध जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, जो हिमालयी नदियों से लेकर भारतीय महासागर के तटीय जल तक फैली हुई है, में कई स्थानीय (देशी) मछली प्रजातियां पाई जाती हैं। ये प्रजातियां न केवल देश की पारिस्थितिकी संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत मूल्यवान हैं। इन देशी मछली प्रजातियों को बढ़ावा देना आवश्यक है, क्योंकि यह मछली पालन की स्थिरता, खाद्य सुरक्षा, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन और जैव विविधता संरक्षण में योगदान देता है। बढ़ती मछली उत्पादों की मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए, इन देशी प्रजातियों का रणनीतिक संवर्धन इन लक्ष्यों को प्राप्त करने का मार्ग प्रदान करता है और देश की जलीय विरासत को संरक्षित करता है।

देशी मछली प्रजातियां, जिन्हें स्थानीय या मूल प्रजातियां भी कहा जाता है, वे प्रजातियां हैं जो विशेष भौगोलिक क्षेत्रों और जलीय वातावरण में विकसित और अनुकूलित हुई हैं। भारत में इन प्रजातियों में ताजा पानी, खारी पानी और समुद्री मछलियों की विस्तृत विविधता शामिल है, जिनका पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व अद्वितीय है। अब तक 2800 से अधिक देशी मछली और शेलफिश प्रजातियां पहचानी जा चुकी हैं, जिनमें 917 ताजा पानी, 394 खारी पानी और 1548 समुद्री प्रजातियां शामिल हैं (स्रोत: ICAR-NBFGR)।

देश में अब तक 80 से अधिक वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण मछली/शेलफिश प्रजातियों के लिए प्रजनन और बीज उत्पादन तकनीक विकसित की गई है। हालांकि, भारत के मछली पालन उत्पादन का बड़ा हिस्सा कुछ चयनित प्रजातियों से ही आता है। तीन प्रमुख कॉर्प मछलियां – रोहु (Labeo rohita), कतला (Catla catla) और मृगल (Cirrhinus mrigala) और जायंट फ्रेशवाटर प्रॉन (Macrobrachium rosenbergii) भारतीय ताजे पानी के मछली पालन की रीढ़ हैं। इस कारण, 19.50 मिलियन टन ताजे पानी की मछली उत्पादन में तीन-चौथाई हिस्सेदारी भारतीय प्रमुख कॉर्प मछलियों की है।

खारी पानी में, वर्तमान उत्पादन का अधिकांश हिस्सा एक विदेशी झींगा प्रजाति (Penaeus vannamei) से आता है, जबकि देशी ब्लैक टाइगर झींगा (Penaeus monodon) का योगदान छोटा है। समुद्री मछली पालन अभी प्रारंभिक अवस्था में है।

मछली पालन में विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए यह आवश्यक है कि ताजे पानी, खारी पानी और समुद्री पर्यावरण में आर्थिक महत्व वाली संभावित देशी मछली प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए। प्रारंभिक रूप से जिन देशी प्रजातियों को चुना गया है, वे इस प्रकार हैं:

  1. फ्रिंज्ड-लिप्ड कॉर्प (Labeo fimbriatus)

  2. ऑलिव बार्ब (Systomus sarana)

  3. पेंगबा (Osteobrama belangiri)

  4. स्ट्राइप्ड मुर्रेल (Channa striata)

  5. पबड़ा (Ompok spp.)

  6. सिंगही (Heteropneustes fossilis)

  7. एशियन सीबास (Lates calcarifer)

  8. पर्लस्पॉट (Etroplus suratensis)

  9. पॉम्पानो (Trachinotus spp.)

  10. मड क्रैब (Scylla spp.)

  11. Penaeus indicus

इन प्रजातियों को मछली पालन के लिए उत्कृष्ट उम्मीदवार माना गया है, और इनके प्रजनन, बड़े पैमाने पर बीज उत्पादन और फार्मिंग तकनीकें उपलब्ध हैं। ये प्रजातियां स्थानीय समुदायों और उनके जलीय वातावरण के बीच गहरे संबंध को दर्शाती हैं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद करती हैं। ये प्रजातियां न केवल सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये स्थानीय और क्षेत्रीय बाजारों में उच्च मूल्य रखती हैं। ये लाखों लोगों के आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और मछली पालन उत्पादन और आय में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

अक्सर देशी मछली प्रजातियों के लाभों के प्रति जागरूकता और तकनीकी ज्ञान की कमी होती है। इस कमी के कारण इन्हें मछली पालन प्रणालियों में पूरी तरह से शामिल करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए हितधारकों को देशी प्रजातियों के प्रजनन, बीज उत्पादन और फार्मिंग तकनीकों के लाभों और तरीकों पर प्रशिक्षण देना आवश्यक है।

भारत में ताजा पानी और मछली पालन उत्पादन कुल मछली उत्पादन का 75% से अधिक योगदान देते हैं, जो दर्शाता है कि फार्मिंग सिस्टम पकड़ मछली (कैप्चर फिशरीज) पर हावी हैं। इस दिशा में, मछली पालन विभाग (DoF), भारत सरकार, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), नया उप-योजना प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMMKSSY) और फिशरीज एवं एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज और फीड की आपूर्ति को बढ़ावा देने, तकनीकी ज्ञान का प्रसार करने और प्रशिक्षण देने का कार्य कर रहा है।

PMMSY योजना का उद्देश्य मछली पालन उत्पादन बढ़ाना, मछुआरों की आजीविका सुधारना और जलीय संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है। यह योजना अक्वाकल्चर का विस्तार, प्रजातियों का विविधीकरण और आनुवंशिक सुधार पर केंद्रित है।

ICAR विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से देशी मछली प्रजातियों पर अनुसंधान करता है, जिसमें उनकी जीवविज्ञान, प्रजनन आदतें, वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण मछली और शेलफिश प्रजातियों के आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम और आवास आवश्यकताओं का अध्ययन शामिल है। ICAR संकटग्रस्त और लुप्तप्राय देशी मछली प्रजातियों के संरक्षण के प्रयासों में भी लगा हुआ है।

DoF ने ICAR के साथ परामर्श कर कुछ देशी प्रजातियों का आनुवंशिक सुधार हेतु चयन किया और गुणवत्तापूर्ण और स्वस्थ बीज उत्पादन के लिए वित्तीय सहायता दी। चयनित प्रजातियां हैं:

  1. स्कैम्पी

  2. रोहु

  3. कतला

  4. मुर्रेल

  5. Penaeus indicus

  6. Penaeus monodon

  7. भारतीय पॉम्पानो

इसके अलावा, PMMSY के तहत ICAR-CIFA, भुवनेश्वर में ताजे पानी की प्रजातियों के लिए न्यूक्लियस ब्रीडिंग सेंटर और ICAR-CMFRI, मंडपम में समुद्री प्रजातियों के लिए न्यूक्लियस ब्रीडिंग सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी गई है।

DoF ने क्षेत्रीय महत्व के आधार पर देशी प्रजातियों के उत्पादन और प्रसंस्करण क्लस्टर भी स्थापित किए हैं, जिनका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, मूल्य श्रृंखला मजबूत करना, पश्चात-उत्पादन नुकसान कम करना और ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को रोजगार प्रदान करना है। कुल 34 क्लस्टर की घोषणा की गई है, जिनमें शामिल हैं:

  • ओडिशा: स्कैम्पी क्लस्टर

  • तेलंगाना: मुर्रेल क्लस्टर

  • त्रिपुरा: पबड़ा क्लस्टर

  • मणिपुर: पेंगबा क्लस्टर

  • जम्मू-कश्मीर: ट्राउट क्लस्टर

  • लद्दाख: ट्राउट क्लस्टर

  • केरल: पर्लस्पॉट क्लस्टर

  • कर्नाटक: समुद्री देशी प्रजातियों का केज कल्चर

  • मदुरै: ऑर्नामेंटल फिशरीज क्लस्टर

ये प्रयास भारत में देशी मछली प्रजातियों के संवर्धन, उत्पादन और सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

MeitY ने ECMS के तहत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी, 41,863 करोड़ रुपये के निवेश और 33,791 रोजगार सृजन की उम्मीद

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पूर्व में घोषित 24 प्रस्तावों के लिए 12,704 करोड़ रुपये की मंजूरी के क्रम में, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 और प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रस्तावों में अनुमानित निवेश 41,863 करोड़ रुपये और अनुमानित उत्पादन 2,58,152 करोड़ रुपये का है। इन अनुमोदनों से लगभग 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

ये अनुमोदन 11 लक्षित उत्पादों के निर्माण से संबंधित हैं, जिनका उपयोग मोबाइल निर्माण, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, स्ट्रैटेजिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर उत्पादों सहित कई क्षेत्रों में होता है। ये 11 उत्पाद इस प्रकार हैं:

1. पांच बेसिक कंपोनेंट्स: PCB, कैपेसिटर, कनेक्टर्स, एन्क्लोज़र और Li-ion सेल
2. तीन सब-असेंबली: कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर
3. तीन सप्लाई चेन आइटम्स: एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न, एनोड मैटेरियल और लैमिनेट (कॉपर क्लैड)

मुख्य अनुमोदन विवरण:

  • PCB (HDI सहित): 9 कंपनियों को मंजूरी—India Circuits Pvt Ltd, Vital Electronics Pvt Ltd, Signum Electronics Ltd, Epitome Components Pvt Ltd, BPL Ltd, AT & S India Pvt Ltd, Ascent-K Circuit Pvt Ltd, CIPSA TEC India Pvt Ltd, Shogini Technoarts Pvt Ltd

  • कैपेसिटर: Deki Electronics Ltd और TDK India Pvt Ltd

  • हाई-स्पीड कनेक्टर्स: Amphenol High Speed Technology India Pvt Ltd

  • एन्क्लोज़र: Yuzhan Technology (India) Pvt Ltd, Motherson Electronic Components Pvt Ltd, Tata Electronics Pvt Ltd

  • Li-ion सेल: ATLbattery Technology (India) Pvt Ltd

सब-असेंबली:

  • ऑप्टिकल ट्रांससीवर (SFP): Dixon Electroconnect Pvt Ltd

  • कैमरा मॉड्यूल: Kunshan Q Tech Microelectronics (India) Pvt Ltd

  • डिस्प्ले मॉड्यूल: Samsung Display Noida Pvt Ltd

सप्लाई चेन सामग्री:

  • एनोड मैटेरियल: NPSPL Advanced Materials Pvt Ltd

  • लैमिनेट (कॉपर क्लैड): Wipro Global Engineering and Electronic Materials Pvt Ltd

  • एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न: Hindalco Industries Ltd

भौगोलिक वितरण: अनुमोदित इकाइयाँ आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में फैली हैं। अब तक ECMS के तहत कुल 46 आवेदन मंजूर हो चुके हैं, जिनमें 11 राज्यों में कुल निवेश 54,567 करोड़ रुपये और लगभग 51,000 प्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित हुए हैं।

अश्विनी वैष्णव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाता है और घरेलू मांग के बड़े हिस्से को स्थानीय उत्पादन से पूरा करने में मदद करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत 2047 तक युवा जनसांख्यिकी बनाए रखेगा और 2100 तक आर्थिक वृद्धि जारी रहेगी, इसलिए इस क्षेत्र के लिए सभी संरचनात्मक आधार स्थापित करना आवश्यक है।

जितिन प्रसाद, राज्य मंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी ने कहा कि भारत अगली बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण दिशा के रूप में उभर रहा है और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक भरोसेमंद साझेदार बन रहा है।

एस. कृष्णन, सचिव MeitY ने कहा कि इस ताजे अनुमोदन चरण में चयनित प्रस्ताव देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं और ECMS के महत्वपूर्ण लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद करेंगे।

ये अनुमोदन घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे, महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए आयात पर निर्भरता कम करेंगे और भारत में उच्च-मूल्य वाले निर्माण क्षमताओं के विकास का समर्थन करेंगे।

ECMS के तहत ये अनुमोदन भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण हब बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप एक साहसी और दूरदर्शी कदम को दर्शाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 जनवरी 2026 को पिपरहवा बुद्ध अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी का करेंगे उद्घाटन

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संस्कृति मंत्रालय द्वारा हाल ही में भारत वापस लाए गए पिपरहवा अवशेषों, अवशेष पात्रों (रिलिक्वेरीज़) और रत्न अवशेषों को प्रदर्शित करने के लिए राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में एक ऐतिहासिक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3 जनवरी 2026 को प्रातः 11.00 बजे किया जाएगा।

यह ऐतिहासिक अवसर 127 वर्षों बाद भगवान बुद्ध के पिपरहवा रत्न अवशेषों के पुनः एकत्रीकरण का प्रतीक है, जिन्हें पिपरहवा स्थल पर 1898 तथा बाद में 1971–1975 के उत्खननों में प्राप्त अवशेषों, रत्न अवशेषों और अवशेष पात्रों के साथ एक साथ प्रदर्शित किया जा रहा है।

“द लाइट एंड द लोटस: द रिलिक्स ऑफ द अवेकेंड वन” शीर्षक से आयोजित यह प्रदर्शनी संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों से संबंधित प्रासंगिक पुरावशेषों और कलाकृतियों को विषयगत रूप से प्रस्तुत करती है। ये अवशेष भगवान बुद्ध से संबद्ध सबसे व्यापक संग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो गहन दार्शनिक अर्थ, उत्कृष्ट शिल्पकला और वैश्विक आध्यात्मिक महत्व के प्रतीक हैं। प्रदर्शनी में छठी शताब्दी ईसा पूर्व से वर्तमान काल तक की अवधि के 80 से अधिक वस्तुएं प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनमें मूर्तियां, पांडुलिपियां, थंका चित्र और अनुष्ठानिक वस्तुएं शामिल हैं।

यह अभूतपूर्व आयोजन जुलाई 2025 में संस्कृति मंत्रालय द्वारा पिपरहवा अवशेषों की सफल स्वदेश वापसी को स्मरण करता है, जिसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से और सॉथबीज़, हांगकांग में प्रस्तावित नीलामी को रोकते हुए संभव बनाया गया। 1898 के उत्खनन के बाद पहली बार, इस प्रदर्शनी में निम्नलिखित को एक साथ प्रस्तुत किया जा रहा है:

  • 1898 के कपिलवस्तु उत्खनन से प्राप्त अवशेष

  • 1972 के उत्खननों से प्राप्त निधियां

  • भारतीय संग्रहालय, कोलकाता से अवशेष पात्र और जड़ाऊ रत्न

  • पेप्पे परिवार के संग्रह से हाल ही में स्वदेश लौटाए गए अवशेष

  • वह एकाश्म पत्थर का संदूक, जिसमें मूल रूप से रत्न अवशेष और अवशेष पात्र पाए गए थे

पवित्र बुद्ध अवशेषों की खोज 1898 में विलियम क्लैक्टन पेप्पे द्वारा प्राचीन कपिलवस्तु स्तूप में की गई थी। खोज के पश्चात इनका एक हिस्सा सियाम (वर्तमान थाईलैंड) के राजा को भेंट किया गया, एक हिस्सा इंग्लैंड ले जाया गया और तीसरा हिस्सा भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में संरक्षित रहा। 2025 में, संस्कृति मंत्रालय के निर्णायक हस्तक्षेप और विश्वभर के बौद्ध समुदायों के समर्थन से पेप्पे परिवार के पास रहे अवशेषों को भारत वापस लाया गया।

यह प्रदर्शनी बौद्ध धर्म की जन्मभूमि के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करती है और वैश्विक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक नेतृत्व में उसकी स्थिति को और सुदृढ़ करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक सहभागिता में उसकी सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का विशेष महत्व उभरकर सामने आया है। अब तक 642 पुरावशेषों की भारत में वापसी हो चुकी है, जिनमें पिपरहवा अवशेषों की वापसी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्रीगण, राजदूत एवं राजनयिक समुदाय के सदस्य, वंदनीय बौद्ध भिक्षु, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विद्वान, विरासत विशेषज्ञ, कला जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां, कला प्रेमी, बौद्ध धर्म के अनुयायी और छात्र भाग लेंगे।

यह प्रदर्शनी विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक नेतृत्व के प्रति संस्कृति मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है तथा भारत की आध्यात्मिक विरासत और बुद्ध धम्म की जन्मभूमि के रूप में उसके वैश्विक महत्व का उत्सव मनाती है। यह भारत की उस सतत प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है, जिसके तहत वह अपनी सभ्यतागत धरोहर को संरक्षित कर विश्व के साथ साझा करता रहा है।


दिसंबर 2025 में कैप्टिव एवं वाणिज्यिक कोयला खदानों के उत्पादन और प्रेषण में निरंतर वृद्धि दर्ज

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वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान दिसंबर 2025 में कैप्टिव एवं वाणिज्यिक कोयला खदानों से कोयला उत्पादन और प्रेषण में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में कोयला उत्पादन 19.48 मिलियन टन (MT) रहा, जबकि कोयला प्रेषण 18.02 मिलियन टन दर्ज किया गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्पादन में 5.75 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही (Q3) के दौरान कैप्टिव एवं वाणिज्यिक खदानों से कुल कोयला उत्पादन 54.14 मिलियन टन रहा, जबकि प्रेषण 50.61 मिलियन टन दर्ज किया गया। इस तिमाही में उत्पादन में 5.35 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र में निरंतर परिचालन गति को दर्शाती है।

समग्र रूप से, वित्त वर्ष 2025–26 में दिसंबर तक की अवधि के दौरान इस क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इस अवधि में कोयला उत्पादन में 9.72 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई, जबकि प्रेषण में 6.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय है। ये उत्साहजनक रुझान बेहतर परिचालन दक्षता और खनन क्षमता के अधिक प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।

संलग्न ग्राफ उत्पादन और प्रेषण—दोनों में निरंतर सुधार और मजबूत वृद्धि को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है।

मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय रणनीतिक नीतिगत उपायों, कठोर निगरानी और हितधारकों को निरंतर सहयोग को जाता है। इन प्रयासों से परिचालन अनुमोदनों में तेजी आई है और उत्पादन क्षमताओं का विस्तार हुआ है, जिससे कोयला उत्पादन और प्रेषण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कोयला मंत्रालय कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए एक स्थिर और प्रदर्शन-आधारित वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। निरंतर नीतिगत सुविधा, निकट प्रदर्शन निगरानी और हितधारकों के साथ समन्वित सहभागिता के माध्यम से मंत्रालय का उद्देश्य विश्वसनीय कोयला उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों में निर्बाध संचालन को समर्थन देना और देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है। ये प्रयास विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद फ्लावर शो की सराहना की, रचनात्मकता और जन-भागीदारी को बताया प्रेरणादायी

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद फ्लावर शो की सराहना करते हुए इसे रचनात्मकता, सततता और जन-भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन शहर की जीवंत भावना और प्रकृति के प्रति उसके गहरे प्रेम को सुंदरता से प्रदर्शित करता है।

फ्लावर शो के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम वर्षों के साथ अपने स्वरूप, भव्यता और कल्पनाशीलता में निरंतर विस्तार करता गया है और आज यह अहमदाबाद की सांस्कृतिक समृद्धि तथा पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक बन चुका है।

गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:

“अहमदाबाद का फ्लावर शो हर किसी का मन मोह लेने वाला है! यह क्रिएटिविटी के साथ-साथ जन भागीदारी का अद्भुत उदाहरण है। इससे शहर की जीवंत भावना के साथ ही प्रकृति से उसका लगाव भी खूबसूरती से प्रदर्शित हो रहा है। यहां यह देखना भी उत्साह से भर देता है कि कैसे इस फ्लावर शो की भव्यता और कल्पनाशीलता हर साल निरंतर बढ़ती जा रही है। इस फ्लावर शो की कुछ आकर्षक तस्वीरें…”

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी अहमदाबाद फ्लावर शो की बढ़ती लोकप्रियता, रचनात्मक प्रस्तुति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को रेखांकित करती है।





उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नई के 34वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नई के 34वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।

नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए उपराष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन के एक नए चरण की शुरुआत है, जिसमें अधिक जिम्मेदारियां और नए अवसर निहित हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्नातक अपने पेशेवर कौशल, करुणा और प्रतिबद्धता के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान देंगे।

तमिलनाडु की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि यह राज्य ज्ञान और समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के व्यापारियों ने भारत के विचार, नैतिक मूल्य और संस्कृति को विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया, जो भारत की आत्मविश्वासी सभ्यतागत परंपरा और सीखने व आदान-प्रदान के प्रति खुलेपन को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत विकसित भारत @2047 के विजन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने का आह्वान किया।

तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती तकनीकें सभी क्षेत्रों को रूपांतरित कर रही हैं। उन्होंने निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल दिया और छात्रों से नियमित रूप से अपने कौशल को उन्नत करने, आजीवन सीखने की मानसिकता अपनाने तथा अपने मुख्य विषयों से परे नई तकनीकों से जुड़ने का आग्रह किया।

मूल्य-आधारित शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता का आधार नैतिकता, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व होना चाहिए।

परिसर से बाहर के जीवन के लिए विद्यार्थियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और दोनों का सामना संतुलन, दृढ़ता और मानसिक शक्ति के साथ करना चाहिए। उन्होंने शॉर्टकट अपनाने और अस्वस्थ तुलना से बचने की सलाह दी तथा स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रगति करने और अपनी विशिष्ट क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से उद्देश्यपूर्ण और सेवा-भाव से युक्त जीवन जीने तथा व्यक्तिगत उत्कृष्टता के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मा. सुब्रमणियन, डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान के चांसलर डॉ. ए. सी. शन्मुगम तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


शराब घोटाले में बड़ा मोड़: पूर्व सीएम के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक हलचल तेज हो गई है।


प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच आया यह आदेश इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला राज्य की राजनीति, सत्ता परिवर्तन और आर्थिक अनियमितताओं से गहराई से जुड़ा रहा है। चैतन्य बघेल लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर थे और उनकी गिरफ्तारी के बाद यह केस और अधिक संवेदनशील हो गया था।

हाईकोर्ट की यह राहत न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ की सियासत पर भी पड़ता दिख रहा है। जमानत मिलने के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है, जबकि विपक्ष का कहना है कि यह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से चैतन्य बघेल को कानूनी राहत मिली है, लेकिन जांच और ट्रायल की प्रक्रिया अब भी जारी रहेगी।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला मामला?

छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले की जांच पिछले कुछ वर्षों से चल रही है। आरोप है कि राज्य की आबकारी नीति के तहत शराब की बिक्री, लाइसेंस जारी करने और सप्लाई चेन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।

जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया गया। इस मामले में कई कारोबारी, आबकारी विभाग के अधिकारी और राजनीतिक प्रभाव से जुड़े नाम सामने आए हैं।

ईडी और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के अनुसार, शराब की समानांतर सप्लाई व्यवस्था बनाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। चैतन्य बघेल का नाम सामने आने के बाद यह मामला और अधिक हाई-प्रोफाइल बन गया और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए।

जमानत पर रोक बरकरार, अमित बघेल की न्यायिक हिरासत बढ़ी

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 रायपुर। अमित बघेल को आज एक बार फिर रायपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 16 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं। अमित बघेल की गिरफ्तारी अपराध क्रमांक 243/25, 338/25, 329/25 और 340/2025 के तहत धारा 299 में की गई थी। अन्य मामलों के संबंध में उन्हें 12 जनवरी को पुनः कोर्ट में पेश किया जाएगा।


जानकारी के अनुसार, अमित बघेल के खिलाफ भिलाई, छिंदवाड़ा और बेंगलुरु में भी अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। इन तीनों स्थानों से एफआईआर की प्रतियां प्राप्त होने के बाद पुलिस ने कोर्ट से अनुमति लेकर इन मामलों में भी उनकी गिरफ्तारी दर्ज की है।

गौरतलब है कि हाल ही में अग्रवाल समाज की ओर से छह बिंदुओं के आधार पर अमित बघेल की जमानत याचिका का विरोध किया गया था। आपत्तिकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ दर्ज अपराधों की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फिलहाल अमित बघेल को न्यायिक हिरासत में ही रखने का आदेश दिया है।

भोरमदेव कॉरिडोर का शिलान्यास: छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले- छत्तीसगढ़ बन रहा देश के विकास की धुरी

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 रायपुर : केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत के विकास का ग्रोथ इंजन छत्तीसगढ़ बनता जा रहा है छत्तीसगढ़ इस संकल्प के साथ में हम सब लोग काम करेंगे ऐसा भरोसा और विश्वास आप सबको दिलाते हुए आप सबको बहुत सारी बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सतत आगे बढ़े और छत्तीसगढ़ का पर्यटन विकसित हो छत्तीसगढ़ की संस्कृति सुरक्षित और संरक्षित हो जिससे छत्तीसगढ़ की एक अलग पहचान बने।


स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रुपये की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्य का विधिवत भूमिपूजन सम्पन्न किया गया। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव मंदिर परिसर से मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ एवं सरोदा जलाशय तक एक सुव्यवस्थित एवं समग्र पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर के निर्माण होने से जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पुरातात्विक स्थलों को एक सशक्त पर्यटन श्रृंखला में जोड़ते हुए भोरमदेव को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी। उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर भोरमदेव कॉरिडोर का विकास किया जाएगा।


छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, उपमुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने नववर्ष के अवसर पर कबीरधाम जिले को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा के आग्रह पर भोरमदेव से बोड़ला तक सड़क चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण कार्य की भी घोषणा की।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर कॉरिडोर के भूमिपूजन के बाद कल सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है।


केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, पेयजल, बिजली, डीबीटी के माध्यम से राशि का अंतरण और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में सकारात्मक बदलाव करते हुए अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार प्रदान किया जा रहा है। साथ ही रोजगार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में हर्जाने की गारंटी भी इस योजना में शामिल की गई है। उन्होंने इसे ‘मोदी की गारंटी’ बताते हुए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों एवं अधिकारियों से आग्रह किया कि 146 करोड़ रुपये की इस परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए, क्योंकि यह कार्य धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नागरिक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि एक हजार साल पुराने बाबा भोरमदेव के मंदिर विकास हेतु आज भूमिपूजन हुआ है जो बहुत ही हर्ष की बात है। सावन के महीने में यहां हजारों की संख्या श्रद्धालु कावड़िये अमरकंटक से माता नर्मदा का जल लेकर बाबा भोरमदेव का जलाभिषेक करते हैं जिनका स्वागत करने के लिए उप मुख्यमंत्रीविजय शर्मा के साथ मैं भी आया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शासन ने हर वर्ग के विकास के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है। कवर्धा के जंगलों में वास करने वाले राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के बैगा जैसे प्रदेश की पिछड़ी जनजातियों के लिए शासन द्वारा पीएम जनमन योजना प्रारम्भ की गई है, जिससे अब गांव-गांव तक पक्की सड़कें, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे अनेक योजनाओं का लाभ यहां के लोगों को मिल रहा है। वहीं उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारम्भ किए गए हैं, जिनमें एंबुलेंस के साथ में डॉक्टर एवं नर्स सहित पूरा तकनीकी स्टाफ भी उपलब्ध रहेगा जो घर घर जाकर लोगों का उपचार करेगा। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता से प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वादे किए थे जिन्हें पूरा करने का कार्य शासन द्वारा किया जा रहा है। मोदी की गारंटी को काम पूरा होने की गारंटी बताते हुए उन्होंने कहा हमारी सरकार बनते ही 18 लाख आवास से वंचित लोगों को आवास का अधिकार दिलाया, 70 लाख महिलाओं के खाते में हर महीने एक हजार रुपए पहुंच रहे है इसी तरह छत्तीसगढ़ के हजारों लोगों में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का भी लाभ लिया है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चौत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है। पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन ही हमें भोरमदेव कॉरिडोर की स्वीकृति प्राप्त हुई थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भोरमदेव की तरह ही आस्था का केंद्र माने जाने वाले पंचमुखी बुढ़ा महादेव मंदिर का भी अब विकास किया जा रहा है, जिसके लिए विगत दिनों जब आयोजन किया गया तो लोगों ने अपनी पूरी भक्ति भाव से मंदिर के विकास के लिए दिल खोलकर दान किया और एक ही दिन में 75 लाख रुपए कार्यक्रम समाप्ति के पूर्व ही संग्रहित हो गए थे। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री श्री अरूण साव और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, सांसद संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी, पूर्व विधायक डॉ. सियाराम साहू, मोतीराम चंद्रवंशी, अशोक साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, राजेन्द्र चंद्रवंशी, जिला पंचायात उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, बोड़ला जनपद अध्यक्ष बालका रामकिंकर वर्मा, उपाध्यक्ष नंद श्रीवास, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामकुमार भट्ट, संतोष पटेल, जिला पंचायत सदस्य गंगाबाई लोकचंद साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रघुराज सिंह, विदेशी राम धुर्वे, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनिल ठाकुर, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, मीलूराम साहू, बोड़ला नगर पंचायत अध्यक्ष विजय पाटिल सहित जनप्रतिनिधिगण और क्षेत्रवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 

नए साल की आड़ में धर्मांतरण का आरोप, बिलासपुर के जोंधरा गांव में मामला दर्ज

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में कथित धर्मांतरण से जुड़े मामलों को लेकर प्रशासनिक सतर्कता बढ़ गई है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से सामने आ रही शिकायतों के बीच ताजा मामला पचपेड़ी थाना क्षेत्र के जोंधरा गांव से सामने आया है, जहां नववर्ष के अवसर पर आयोजित एक प्रार्थना सभा के दौरान धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगाए गए हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, जोंधरा गांव में नए साल के मौके पर एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। आरोप है कि इस सभा में ग्रामीणों को भोजन एवं स्वास्थ्य सहायता का प्रलोभन देकर बुलाया गया और इसी दौरान धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया।

ग्रामीणों के विरोध के बाद पुलिस की कार्रवाई

जब गांव के अन्य लोगों को इस गतिविधि की जानकारी मिली, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पचपेड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।

पास्टर के खिलाफ दर्ज हुआ मामला

ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने सभा आयोजित करने वाले संबंधित पास्टर के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी।

प्रशासन सतर्क, निगरानी बढ़ी

लगातार सामने आ रही शिकायतों के चलते प्रशासन और पुलिस ने जिले में ऐसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी तरह के गैरकानूनी या जबरन धर्म परिवर्तन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Chhattisgarh Weather: छत्तीसगढ़ में बारिश और कोहरे का अलर्ट, ठंड फिर दिखाएगी तेवर

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 Chhattisgarh Weather: छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। अगले दो दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, हालांकि इसके बाद फिर से ठंड तेज होने और तापमान में 2–3 डिग्री की गिरावट दर्ज किए जाने की संभावना है।


दुर्ग संभाग में कोल्ड वेव का असर

दुर्ग संभाग के कुछ इलाकों में पहले ही कोल्ड वेव का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में यहां हल्की बारिश के साथ घना कोहरा छा सकता है, जिससे सुबह और रात के समय ठिठुरन बढ़ेगी।

अंबिकापुर रहा सबसे ठंडा

पिछले 24 घंटों में रायपुर और दुर्ग समेत अधिकांश जिलों में मौसम शुष्क बना रहा। इस दौरान दुर्ग में अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि राज्य में सबसे कम न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज किया गया।

अगले 48 घंटों में बौछारों की संभावना

मौसम विभाग के मुताबिक बीते 24 घंटों में राज्य में कहीं भी बारिश नहीं हुई है, लेकिन अगले 48 घंटों के दौरान कुछ जिलों में हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।

पश्चिमी विक्षोभ का असर

मौसम विभाग ने बताया कि उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे पंजाब क्षेत्र के ऊपर औसत समुद्र तल से करीब 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके साथ ही मध्य और ऊपरी ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर एक ट्रफ भी बना हुआ है। इसी मौसमी सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में ठंड के साथ हल्की बारिश और कोहरे की स्थिति बन रही है।

छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान

  • अंबिकापुर – 5.4 डिग्री
  • पेन्ड्रा रोड – 9 डिग्री
  • राजनांदगांव – 9 डिग्री
  • दुर्ग – 9.6 डिग्री

 

CG NEWS : झीरम घाटी कांड को लेकर बयान पर सियासी भूचाल, प्रवक्ता हटाए गए

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 रायपुर। झीरम घाटी नक्सल कांड को लेकर दिए गए बयान ने छत्तीसगढ़ की सियासत में नया सियासी भूचाल खड़ा कर दिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अनुशासनहीनता के आरोप में अपने वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी को पद से हटा दिया है। पार्टी का मानना है कि उनके कदम से संगठन की आधिकारिक लाइन और छवि को नुकसान पहुंचा है।


दरअसल, विकास तिवारी ने झीरम घाटी नक्सल कांड की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने कांग्रेस और भाजपा—दोनों ही दलों के कुछ नेताओं का नार्कोटेस्ट कराने की मांग की थी। इसी पत्र के सार्वजनिक होने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष गहराया और इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना गया।

झीरम घाटी कांड बना विवाद की वजह

कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि झीरम घाटी कांड एक अत्यंत संवेदनशील विषय है और इस पर पार्टी की स्पष्ट और एकजुट राय रही है। ऐसे में व्यक्तिगत स्तर पर इस तरह की मांग कर मीडिया में वरिष्ठ नेताओं के नाम जोड़ना संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन है।

प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर कार्रवाई

पूरे मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। पार्टी ने विकास तिवारी को तत्काल प्रभाव से वरिष्ठ प्रवक्ता पद से हटाते हुए तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया है।


नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि पार्टी यह जानना चाहती है कि उन्होंने किस आधार पर न्यायिक आयोग को पत्र लिखा और किन परिस्थितियों में मीडिया में नेताओं के नामों का उल्लेख किया। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में आगे और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के भीतर अनुशासन और बयानबाजी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था शर्मसार, महिला पुलिसकर्मी को अर्धनग्न कर दौड़ाया

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 रायगढ़।त्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में हुई हिंसक घटना ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) की कोयला खदान के विरोध के दौरान उग्र भीड़ ने एक महिला आरक्षक के साथ अमानवीय बर्बरता की। घटना का करीब 40 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया है।


घटना 27 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। प्रदर्शन के दौरान महिला आरक्षक को उग्र भीड़ ने करीब आधा किलोमीटर तक दौड़ाया। खेत में गिरने के बाद उसकी वर्दी फाड़ दी गई और उसे अर्धनग्न अवस्था में घसीटा गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला आरक्षक रोते हुए भीड़ से “भाई” कहकर छोड़ देने की गुहार लगाती रही, लेकिन इसके बावजूद भीड़ की बेरहमी जारी रही। वीडियो में चप्पल से मारने की धमकी भी सुनाई देती है।

इससे पहले भी तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम को लात मारने का वीडियो सामने आ चुका है। इस पूरी हिंसक घटना ने पुलिस बल की सुरक्षा और महिला कर्मियों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे भड़की हिंसा

यह विवाद 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है। JPL कोल ब्लॉक सेक्टर-1 से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से आंदोलन कर रहे थे।

27 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे लिबरा चौक पर लगभग 300 ग्रामीण एकत्र हुए और सड़क जाम कर दिया। हालात बिगड़ते देख करीब 10 बजे राजस्व और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश देकर भीड़ को धरना स्थल तक वापस भेजा गया।

हालांकि तनाव बना रहा। जिला प्रशासन के अनुसार, आसपास के गांवों से लोग लगातार पहुंचते रहे और दोपहर तक भीड़ की संख्या करीब 1000 तक पहुंच गई। घरघोड़ा एसडीएम और पुलिस अधिकारी लगातार माइक से शांति की अपील करते रहे, लेकिन भीड़ बार-बार सड़क जाम करती रही।

करीब ढाई बजे स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई। भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और पत्थर व डंडों से हमला शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों पर जमकर पथराव और लाठियां बरसाई गईं।

आगजनी और तोड़फोड़

हिंसा के दौरान पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस में आग लगा दी गई। कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद उग्र भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट पहुंची, जहां कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में आगजनी की गई। प्लांट कार्यालय में भी जमकर तोड़फोड़ हुई।

स्थिति संभालने लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर पहुंचे, लेकिन अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव और आगजनी की घटनाएं होती रहीं।

लगातार आंदोलन और बढ़ते तनाव को देखते हुए जिंदल प्रबंधन ने गारे–पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए प्रस्तावित जनसुनवाई नहीं कराने का निर्णय लिया। इस आंदोलन में 14 गांवों के करीब 4 हजार से अधिक लोग शामिल थे।

घटना के बाद महिला आरक्षक के साथ हुई बर्बरता को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

9वां सिद्ध दिवस 3 जनवरी 2026 को चेन्नई में आयोजित: “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” थीम के साथ भव्य समारोह

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भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा अपने संस्थानों—राष्ट्रीय सिद्ध चिकित्सा संस्थान (NIS) और केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (CCRS)—तथा तमिलनाडु सरकार के भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी निदेशालय के सहयोग से 9वां सिद्ध दिवस 3 जनवरी 2026 को कलाईवनार अरंगम, चेन्नई में मनाया जाएगा। इस वर्ष समारोह की थीम “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” (Siddha for Global Health) रखी गई है। यह आयोजन सिद्ध चिकित्सा के जनक माने जाने वाले महर्षि अगस्त्य की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। सिद्ध दिवस प्रतिवर्ष 6 जनवरी को मनाया जाता है।

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 9वें सिद्ध दिवस समारोह की अध्यक्षता एवं उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रतापराव जाधव, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष मंत्रालय एवं राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार;मा. सुब्रमणियन, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री, तमिलनाडु सरकार; पद्म वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार; डॉ. पी. सेंथिल कुमार, प्रधान सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, तमिलनाडु सरकार; तथा एम. विजयलक्ष्मी, निदेशक, भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी निदेशालय, तमिलनाडु सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

इस समारोह में तमिलनाडु एवं अन्य राज्यों से सिद्ध चिकित्सा के चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, शोधार्थी और छात्र बड़ी संख्या में भाग लेंगे। सिद्ध वैधानिक निकायों के वरिष्ठ सदस्य, NIS और CCRS के शोधकर्ता, आयुष मंत्रालय तथा तमिलनाडु सरकार के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। चेन्नई और पलायमकोट्टई स्थित सरकारी सिद्ध मेडिकल कॉलेजों तथा तमिलनाडु और केरल के स्व-वित्तपोषित सिद्ध कॉलेजों के स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध छात्र भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे।

इस अवसर पर आयुष मंत्रालय सिद्ध चिकित्सा के क्षेत्र में असाधारण और सराहनीय योगदान के लिए पांच प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित करेगा।

9वां सिद्ध दिवस निवारक स्वास्थ्य, अनुसंधान और वैश्विक कल्याण में सिद्ध चिकित्सा के योगदान को प्रदर्शित करेगा। इसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवा वितरण, शोध सहयोग तथा शैक्षणिक उन्नयन में सिद्ध की भूमिका को सुदृढ़ करने हेतु सरकार के निरंतर प्रयासों की पुनः पुष्टि करना है। यह आयोजन आयुष मंत्रालय की उस प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है, जिसके अंतर्गत भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे में बढ़ावा देना, नवाचार को सशक्त करना तथा सिद्ध चिकित्सा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान दिलाना शामिल है।

भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2026 की शुभ शुरुआत: छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहाँ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियाँ खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहाँ आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं। 

केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि भोरमदेव मंदिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी विशेष आस्था का केंद्र रहा है और यह परियोजना उनके कार्यकाल की स्मृति के रूप में कबीरधाम जिले को एक नई पहचान देगी।  केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यह वर्ष परिवर्तन का वर्ष है और भारत को विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प में 140 करोड़ देशवासी सहभागी बनें।  

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चैत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है, पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन  हमें स्वीकृति प्राप्त हो गयी थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भोरमदेव की तरह ही आस्था का केंद्र माने जाने वाले पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर का भी अब विकास किया जा रहा है। 

कार्यक्रम मे उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, सांसद संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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