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छत्तीसगढ़ का बरनवापारा अभयारण्य बना विलुप्ति के कगार पर पहुंचे काले हिरणों के पुनर्जीवन का मजबूत उदाहरण

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स्थानीय विलुप्ति से लेकर लगभग 200 की संख्या तक पहुँचे काले हिरण : ‘मन की बात’ में मिली राष्ट्रीय पहचान

रायपुर- यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के आज के प्रसारण में छत्तीसगढ़ के काले हिरण के संरक्षण प्रयासों का उल्लेख करते हुए  सराहना की। इसने न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान को सुदृढ़ किया है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे लोगों का मनोबल भी बढ़ाया है। इस उल्लेख से राज्य की पर्यावरणीय पहल राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से सामने आई हैं और बारनवापारा अभयारण्य को नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में 'मन की बात' कार्यक्रम की 133वी कड़ी के श्रवण के बाद यह बात कही।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित, लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य आज वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में उभरा है।

एक समय ऐसा था जब यह अभयारण्य अपने प्रमुख वन्यजीव - काले हिरण - से लगभग खाली हो चुका था। लेकिन अब यही क्षेत्र करीब 200 काले हिरणों (ब्लैकबक) का सुरक्षित आवास बन गया है। यह उपलब्धि योजनाबद्ध प्रयास, वैज्ञानिक प्रबंधन और निरंतर निगरानी का परिणाम है।

बारनवापारा के खुले घास के मैदानों में काले हिरणों (Antilope cervicapra) की सक्रिय मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि लंबे समय बाद भी किसी प्रजाति को उसके प्राकृतिक परिवेश में पुनर्स्थापित किया जा सकता है। जो क्षेत्र कभी सूना हो गया था, वह अब पुनर्जीवन की एक सशक्त कहानी प्रस्तुत कर रहा है।

छत्तीसगढ़ में इस उपलब्धि तक पहुंचने की प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण रही है। 1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और प्राकृतिक आवास के नुकसान के कारण काले हिरण इस क्षेत्र से लगभग समाप्त हो गए थे और करीब पांच दशकों तक यहां स्थानीय रूप से विलुप्त रहे।

अप्रैल 2018 में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड की नौवीं बैठक में पुनर्स्थापन योजना को स्वीकृति मिलने के बाद स्थिति में बदलाव आया। इसके बाद एक सुविचारित योजना के तहत काले हिरणों को फिर से बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी प्रयास के परिणामस्वरूप उनकी संख्या बढ़कर लगभग 200 तक पहुंची और इस सफलता को रविवार को प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उल्लेखित किया गया।

संरक्षण के शुरुआती चरण में कई चुनौतियां सामने आईं। वन अधिकारियों के अनुसार, निमोनिया के कारण लगभग आठ काले हिरणों की मृत्यु हुई, जिसके बाद प्रबंधन प्रणाली में सुधार किए गए। बाड़ों में मजबूत सतह के लिए रेत की परत बिछाई गई, जलभराव रोकने के लिए उचित निकासी व्यवस्था विकसित की गई, अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाया गया और एक समर्पित पशु चिकित्सक की नियुक्ति की गई।

इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप काले हिरणों की आबादी पहले स्थिर हुई और फिर धीरे-धीरे बढ़ने लगी। बेहतर पोषण, नियमित निगरानी और अनुकूल वातावरण के कारण आज इनकी संख्या लगभग 200 तक पहुंच चुकी है। यह इस बात का संकेत है कि ये अपने नए परिवेश में सफलतापूर्वक अनुकूलित हो चुके हैं और भविष्य में इन्हें खुले जंगल में छोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है।

काले हिरण के बारे में:

काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।

“मन की बात” में छत्तीसगढ़ का निरंतर जिक्र गौरव की बात : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण प्रयासों की सराहना कर बढ़ाया प्रदेश का मान - मुख्यमंत्री साय

जनभागीदारी और नवाचार को राष्ट्रीय मंच पर मिल रही पहचान उत्साहजनक : "मन की बात”  देश के जनमानस को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम - मुख्यमंत्री

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” में छत्तीसगढ़ में काले हिरण के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का लगातार जिक्र होना न केवल राज्य की पहचान को सुदृढ़ करता है, बल्कि प्रदेशवासियों के मनोबल को भी नई ऊंचाई प्रदान करता है। 

मुख्यमंत्री साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में विशाल जनसमूह के साथ “मन की बात” की 133वीं कड़ी का श्रवण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “मन की बात” आज देश के जनमानस को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन चुका है, जिसके जरिए देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचार, जनभागीदारी और जमीनी स्तर के उत्कृष्ट प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अभिभावक की तरह देशवासियों से संवाद करते हुए न केवल प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित भी करते हैं। इस संवाद के माध्यम से लोगों में सहभागिता की भावना मजबूत होती है और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को नई ऊर्जा मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेख होना राज्य के लिए विशेष सम्मान का विषय है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता मजबूत है। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि बांस को पेड़ की श्रेणी से अलग कर विशेष श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद इसके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं की आय में सकारात्मक बदलाव आया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा पवन ऊर्जा की आवश्यकता और संभावनाओं पर दिए गए विशेष जोर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में निरंतर और ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने एक अनूठी पहल करते हुए उपस्थित जनसमूह के साथ घर से लाए गए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को साझा कर साथ में भोजन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी विश्वास, अपनापन और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विधायक संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, अजय जामवाल, अखिलेश सोनी, रमेश ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में  गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

पहाड़ी कोरवा बेटी शाम कुमारी के सपनों को मिले पंख,पढ़ाई के साथ मिला रोजगार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की महिलाएं, सरकारी योजनाओं और अपनी मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के धौरपुर क्षेत्र की रहने वाली शाम कुमारी पहाड़ी कोरवा की सफलता की कहानी अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मार्गदर्शन और जिला प्रशासन के पहल पर शाम कुमारी को स्वास्थ्य विभाग में रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जिससे अब वे अपनी उच्च शिक्षा का सपना स्वयं के दम पर पूरा कर रही हैं।

शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवापारा' में वार्ड आया के पद पर पदस्थ शाम कुमारी

सरगुजा जिले के विकासखंड लुंड्रा के ग्राम पंचायत चिरमुण्डा निवासी शाम कुमारी वर्तमान में बी.एससी. (B.Sc.) अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। शिक्षा के प्रति उनके जज्बे और आर्थिक आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें 'शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नवापारा' में वार्ड आया (Ward Aya) के पद पर पदस्थ किया गया है।

पढ़ाई का खर्च अब खुद उठा सकेंगी शाम कुमारी

अपनी खुशी साझा करते हुए शाम कुमारी कहती हैं कि उच्च शिक्षा प्राप्त करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन रोजगार मिलने से अब राह आसान हो गई है। उन्होंने बताया, मैं बहुत खुश हूँ कि मुझे रोजगार का अवसर मिला है। अब मैं अपनी आगे की पढ़ाई का खर्च खुद उठा सकती हूँ और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद कर सकती हूँ।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के प्रति संवेदनशील है प्रशासन

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन विशेष पिछड़ी जनजाति समूहों (PVTG) के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। जिला प्रशासन की पहल पर डीएमएफ मद से शिक्षित पहाड़ी कोरवा युवक युवती को स्वास्थ्य विभाग में वार्ड बॉय और वार्ड आया के 30 पदों पर नियुक्ति किया गया है। शाम कुमारी ने इस अवसर के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन सरगुजा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए शासन द्वारा उठाए जा रहे ये कदम समाज में नया हौसला भर रहे हैं।

शाम कुमारी का चयन न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह क्षेत्र के अन्य पहाड़ी कोरवा छात्र-छात्राओं के लिए भी एक संदेश है कि शासन की योजनाओं और दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

महासमुंद में लू का कहर, ऑरेंज अलर्ट जारी, 48 घंटे बेहद अहम

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के अधिकांश हिस्से भीषण लू की चपेट में हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए कई जिलों में लू चलने की आशंका जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी से जनजीवन प्रभावित हो रहा है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी रायपुर में 25 अप्रैल को अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो अप्रैल महीने में पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ चुका है। वहीं राजनांदगांव प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

प्रदेश के कई जिलों में लू का असर साफ देखा जा रहा है। बलौदा बाजार, महासमुंद, दुर्ग संभाग, बिलासपुर संभाग, बालोद, बेमेतरा और कबीरधाम जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी गई है।

हालांकि बस्तर संभाग को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी का असर बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिणी क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में मामूली राहत मिल सकती है।

इसके अलावा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी और राजनांदगांव जिलों में विशेष रूप से लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिसके बाद स्थिति में कुछ सुधार की संभावना है और अलर्ट को येलो किया जा सकता है।

ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में पहले भी तापमान के कई रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं। वर्ष 1942 में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंचा था। हाल के वर्षों में 22 अप्रैल 2025 को 44.4 डिग्री, 2016 में 44 डिग्री, 2018 में 41 डिग्री, 2024 में 42.8 डिग्री और 2023 में 43.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था। इस वर्ष भी तापमान पुराने रिकॉर्ड के करीब पहुंच गया है।

मौसम वैज्ञानिक सी.एस. अवस्थी के अनुसार, उत्तर और मध्य भारत में चल रही गर्म हवाओं का असर छत्तीसगढ़ में भी देखा जा रहा है। उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आधारित चेतना विकास कार्यशाला सम्पन्न, जीवन विद्या पर दिया गया जोर

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महासमुंद- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रकाश में संकुल केंद्र खट्टा में आयोजित राज्य स्तरीय चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यशाला में शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों ने शिक्षा के उद्देश्य, मानवीय मूल्यों और जीवन विद्या के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।


कार्यक्रम के दौरान शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि कार्यशाला में शिक्षा के विभिन्न आयामों जैसे—शिक्षा का उद्देश्य, जीवन विद्या अध्ययन, परिवार एवं समाज में मूल्य, प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण, तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर संवाद किया गया। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देती है।”

समापन सत्र में जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशारामस्वरूप दीवान ने कहा कि बच्चों में संस्कार और मूल्य विकसित करने के लिए माताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने जीवन विद्या अध्ययन शिविर और चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं को समाज के हर वर्ग के लिए आवश्यक बताया।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजसेवियों एवं शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे और शिक्षा में जीवन विद्या को शामिल करने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की पहल से समाज में जागरूकता बढ़ेगी, पारिवारिक और सामाजिक समरसता मजबूत होगी तथा देशभक्ति की भावना विकसित होगी।

कार्यशाला के आयोजन के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थाओं, अधिकारियों और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने इसे शिक्षा के मानवीयकरण और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।


प्रतिभा, पारदर्शिता और अवसर से ही बनेगा भारत वैश्विक खेल शक्ति, मजबूत खेल व्यवस्था से ही ओलंपिक में सफलता संभव : अरुण साव

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 रायपुर : केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा श्रीनगर में आयोजित खेल चिंतन शिविर के दूसरे दिन आज उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने 'गुड गवर्नेंस इन स्पोर्ट्स' (Good Governance in Sports) पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने इस दौरान छत्तीसगढ़ की खेल योजनाओं एवं भविष्य की रणनीतियों पर बेस्ट प्रेक्टिसेस पर आधारित वीडियो प्रेजेंटेशन भी दिया। 



साव ने विभिन्न राज्यों से आए खेल मंत्रियों एवं अधिकारियों के समक्ष छत्तीसगढ़ में खेलों और खिलाड़ियों के विकास के लिए लागू बेस्ट गवर्नेंस प्रेक्टिसेस (Best Governance Practices) को विस्तार से साझा किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों से सुझाव भी प्राप्त किए। चिंतन शिविर में शामिल अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की भावी योजनाओं की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावी मॉडल बताया।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय खेल चिंतन शिविर के दौरान दो दिनों तक विभिन्न राज्यों के खेल मंत्रियों एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद कर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने खेलों को बढ़ावा देने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए छत्तीसगढ़ में बेहतर खेल अवसंरचना, प्रतिभा संवर्धन एवं खिलाड़ियों को अधिक अवसर प्रदान करने पर जोर दिया।

साव ने कहा कि प्रतिभा, पारदर्शिता और अवसर से ही भारत वैश्विक खेल शक्ति बनेगा। मजबूत खेल व्यवस्था और प्रोत्साहन से ही देश को ओलंपिक खेलों में बड़ी सफलता मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह चिंतन शिविर छत्तीसगढ़ और पूरे देश में खेलों के समग्र विकास, सुदृढ़ खेल व्यवस्था के निर्माण तथा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नई दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चिंतन शिविर के दूसरे दिन भी आज अलग-अलग सत्रों में खेल प्रशासन, नीतिगत सुधार एवं युवा मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। इस दौरान राज्यों में खेल सामग्रियों के निर्माण, सरकारी योजनाओं तथा स्पोर्ट्स स्टार्ट-अप्स (Sports Startups) को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। इसमें यह बात प्रमुखता से आई कि भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल उपकरणों का निर्माण किया जाए, जिससे देश का खेल उद्योग आत्मनिर्भर बन सके।

आज एक महत्वपूर्ण सत्र में सलेक्शन पॉलिसी और एज फ्रॉड (Selection Policy & Age Fraud) पर भी विशेष चर्चा हुई। इसमें खिलाड़ियों के चयन में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं स्पष्ट मापदंड सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही उम्र में गड़बड़ी (Age Fraud) की रोकथाम के लिए सख्त सत्यापन प्रक्रिया एवं तकनीकी उपाय अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि खेलों में ईमानदारी एवं विश्वसनीयता बनी रहे।

आज का अंतिम सत्र 'माई भारत' (MY Bharat) की योजनाओं और इसकी कार्ययोजना (Action Plan) पर केंद्रित रहा। इसमें खेलों के साथ-साथ युवा मामलों को भी समान महत्व देते हुए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक इनका लाभ पहुंच सके।

चिंतन शिविर के समापन के दौरान केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने घोषणा की कि जल्दी ही केवल युवा मामलों पर केंद्रित एक विशेष चिंतन शिविर का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय चिंतन शिविर में देश के दिग्गज खिलाड़ी ओलंपियन अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग सहित खेल प्रशासक और नीति निर्माता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

प्रतिभा, पारदर्शिता और अवसर से ही बनेगा भारत वैश्विक खेल शक्ति, मजबूत खेल व्यवस्था से ही ओलंपिक में सफलता संभव : अरुण साव

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उप मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में राष्ट्रीय खेल चिंतन शिविर में 'गुड गवर्नेंस इन स्पोर्ट्स' सत्र की अध्यक्षता की, छत्तीसगढ़ की खेल योजनाओं एवं भविष्य की रणनीतियों को किया साझा

केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय जल्दी ही युवा मामलों पर भी आयोजित करेगा विशेष चिंतन शिविर

रायपुर- केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा श्रीनगर में आयोजित खेल चिंतन शिविर के दूसरे दिन आज उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने 'गुड गवर्नेंस इन स्पोर्ट्स' (Good Governance in Sports) पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने इस दौरान छत्तीसगढ़ की खेल योजनाओं एवं भविष्य की रणनीतियों पर बेस्ट प्रेक्टिसेस पर आधारित वीडियो प्रेजेंटेशन भी दिया। अरुण साव ने विभिन्न राज्यों से आए खेल मंत्रियों एवं अधिकारियों के समक्ष छत्तीसगढ़ में खेलों और खिलाड़ियों के विकास के लिए लागू बेस्ट गवर्नेंस प्रेक्टिसेस (Best Governance Practices) को विस्तार से साझा किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों से सुझाव भी प्राप्त किए। चिंतन शिविर में शामिल अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की भावी योजनाओं की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावी मॉडल बताया।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय खेल चिंतन शिविर के दौरान दो दिनों तक विभिन्न राज्यों के खेल मंत्रियों एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद कर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने खेलों को बढ़ावा देने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए छत्तीसगढ़ में बेहतर खेल अवसंरचना, प्रतिभा संवर्धन एवं खिलाड़ियों को अधिक अवसर प्रदान करने पर जोर दिया। 

अरुण साव ने कहा कि प्रतिभा, पारदर्शिता और अवसर से ही भारत वैश्विक खेल शक्ति बनेगा। मजबूत खेल व्यवस्था और प्रोत्साहन से ही देश को ओलंपिक खेलों में बड़ी सफलता मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह चिंतन शिविर छत्तीसगढ़ और पूरे देश में खेलों के समग्र विकास, सुदृढ़ खेल व्यवस्था के निर्माण तथा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नई दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चिंतन शिविर के दूसरे दिन भी आज अलग-अलग सत्रों में खेल प्रशासन, नीतिगत सुधार एवं युवा मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। इस दौरान राज्यों में खेल सामग्रियों के निर्माण, सरकारी योजनाओं तथा स्पोर्ट्स स्टार्ट-अप्स (Sports Startups) को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। इसमें यह बात प्रमुखता से आई कि भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल उपकरणों का निर्माण किया जाए, जिससे देश का खेल उद्योग आत्मनिर्भर बन सके।

आज एक महत्वपूर्ण सत्र में सलेक्शन पॉलिसी और एज फ्रॉड (Selection Policy & Age Fraud) पर भी विशेष चर्चा हुई। इसमें खिलाड़ियों के चयन में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं स्पष्ट मापदंड सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही उम्र में गड़बड़ी (Age Fraud) की रोकथाम के लिए सख्त सत्यापन प्रक्रिया एवं तकनीकी उपाय अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि खेलों में ईमानदारी एवं विश्वसनीयता बनी रहे।

आज का अंतिम सत्र 'माई भारत' (MY Bharat) की योजनाओं और इसकी कार्ययोजना (Action Plan) पर केंद्रित रहा। इसमें खेलों के साथ-साथ युवा मामलों को भी समान महत्व देते हुए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक इनका लाभ पहुंच सके। 

चिंतन शिविर के समापन के दौरान केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने घोषणा की कि जल्दी ही केवल युवा मामलों पर केंद्रित एक विशेष चिंतन शिविर का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय चिंतन शिविर में देश के दिग्गज खिलाड़ी ओलंपियन अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग सहित खेल प्रशासक और नीति निर्माता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

“मन की बात” में छत्तीसगढ़ का निरंतर जिक्र गौरव की बात : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” में छत्तीसगढ़ में काले हिरण के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का लगातार जिक्र होना न केवल राज्य की पहचान को सुदृढ़ करता है, बल्कि प्रदेशवासियों के मनोबल को भी नई ऊंचाई प्रदान करता है।


मुख्यमंत्री साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में विशाल जनसमूह के साथ “मन की बात” की 133वीं कड़ी का श्रवण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “मन की बात” आज देश के जनमानस को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन चुका है, जिसके जरिए देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचार, जनभागीदारी और जमीनी स्तर के उत्कृष्ट प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एक अभिभावक की तरह देशवासियों से संवाद करते हुए न केवल प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित भी करते हैं। इस संवाद के माध्यम से लोगों में सहभागिता की भावना मजबूत होती है और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को नई ऊर्जा मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेख होना राज्य के लिए विशेष सम्मान का विषय है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता मजबूत है। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि बांस को पेड़ की श्रेणी से अलग कर विशेष श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद इसके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं की आय में सकारात्मक बदलाव आया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा पवन ऊर्जा की आवश्यकता और संभावनाओं पर दिए गए विशेष जोर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में निरंतर और ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने एक अनूठी पहल करते हुए उपस्थित जनसमूह के साथ घर से लाए गए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को साझा कर साथ में भोजन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी विश्वास, अपनापन और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विधायक संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, श्री अजय जामवाल, अखिलेश सोनी, रमेश ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

व्हाइट हाउस डिनर में घुसा हथियारबंद हमलावर, डोनाल्ड ट्रंप ने शेयर की पहली तस्वीर

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 अमेरिका में व्हाइट हाउस (White House Correspondents') Dinner के दौरान हुई फायरिंग की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की मौजूदगी के बीच हमलावर के हथियार लेकर डिनर हॉल तक पहुंचने की घटना को लेकर जांच तेज कर दी गई है।


ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर हमलावर की पहली तस्वीर और वीडियो साझा किया। वीडियो में आरोपी तेज़ी से सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए होटल परिसर में घुसने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रोकने का प्रयास किया और जवाबी फायरिंग भी की। बाद में हमलावर को काबू कर लिया गया। एक तस्वीर में उसे जमीन पर लेटा हुआ और हाथ बंधे हुए दिखाया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में Donald Trump ने बताया कि आरोपी की पहचान 31 वर्षीय कोल टॉमन एलन के रूप में हुई है, जो कैलिफोर्निया के टॉरेंस का निवासी है। उन्होंने कहा कि हमलावर कई हथियारों से लैस था, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने बहादुरी दिखाते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। ट्रंप ने JD Vance सहित कैबिनेट के सभी सदस्यों के सुरक्षित होने की पुष्टि भी की।

घटना के बावजूद ट्रंप ने कार्यक्रम जारी रखने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि वे ऐसे हमलों से डरने वाले नहीं हैं और “बुरे लोगों” को किसी भी हाल में कार्यक्रम बाधित नहीं करने देंगे।

इस घटना पर भारत की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है और इस प्रकार की घटनाओं की स्पष्ट रूप से निंदा की जानी चाहिए।

यूपी में प्रचंड गर्मी का कहर, बांदा में पारा 47°C पार; दिल्ली-NCR में हीटवेव अलर्ट

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 नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। Uttar Pradesh में तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है, जहां बांदा में अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं राजधानी Lucknow में पारा 42.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक तापमान है।


राष्ट्रीय राजधानी Delhi में भी गर्मी का प्रकोप जारी है। शनिवार को यहां अधिकतम तापमान 43°C और न्यूनतम 25°C दर्ज किया गया। India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में पिछले तीन दिनों से लू का असर बना हुआ है। मौसम विभाग ने आज के लिए ऑरेंज अलर्ट और अगले दिन के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के मुताबिक, 27 अप्रैल से मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। तेज हवाओं, आंधी और हल्की बारिश के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

बिहार में भी गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। Bihar के बक्सर, रोहतास और अरवल सहित कई जिलों में तापमान काफी ऊंचा बना हुआ है। हालांकि, मौसम विभाग ने सीतामढ़ी, मधेपुरा और बांका समेत 21 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है।

मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी लू चलने की संभावना जताई गई है। Madhya Pradesh और Rajasthan में 26 से 29 अप्रैल के बीच तेज हवाएं और हल्की बारिश के आसार हैं।

वहीं, पहाड़ी राज्यों Jammu and Kashmir, Uttarakhand और Himachal Pradesh में 26 से 30 अप्रैल के बीच हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

दक्षिण भारत के Tamil Nadu, Kerala, Karnataka और Telangana में भी गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है।

मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और सतर्क रहने की सलाह दी है।

जलवायु परिवर्तन से महंगी फसलें प्रभावित, किसानों की आय पर बढ़ा संकट

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 नई दिल्ली। देश में बदलते मौसम के मिजाज ने किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। हालिया रबी सीजन में हाई-वैल्यू फसलें—जैसे फल, सब्जियां, मसाले और प्रीमियम चावल—जलवायु परिवर्तन की मार सबसे अधिक झेलती नजर आ रही हैं। मौसम में अचानक बदलाव से पैदावार, गुणवत्ता और किसानों की आय तीनों प्रभावित हो रही हैं।


महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश के कारण अंगूर के बागानों को नुकसान पहुंचा है, वहीं हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सर्दी कम पड़ने से सेब की फसल प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड की कमी से सेब के पेड़ों में फूल आने की प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे उत्पादन घटता है।

देश के कई हिस्सों में लंबी चली हीटवेव ने सब्जियों और फलों की खेती पर भी असर डाला है। अधिक तापमान के कारण फलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जबकि टमाटर और शिमला मिर्च जैसी फसलों में फूल झड़ने की समस्या बढ़ी है। महाराष्ट्र के अंगूर और अनार उत्पादक क्षेत्रों में भी तेज गर्मी के कारण फलों के झुलसने और असमान पकने की शिकायतें सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि Climate Change का स्पष्ट संकेत हैं। पिछले कुछ वर्षों में किसान पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और धान से हटकर अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़े हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और उत्तर भारत के कई राज्यों में बागवानी का रकबा तेजी से बढ़ा है और यह कई क्षेत्रों में आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है।

हालांकि, हाई-वैल्यू फसलें मौसम के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। अनाज के विपरीत, इन फसलों में मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता—जैसे आकार, रंग, स्वाद और टिकाऊपन—भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में फूल आने के समय अधिक गर्मी या कटाई के दौरान बारिश होने से फसल की गुणवत्ता घट जाती है, जिससे बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

बारिश के पैटर्न में बदलाव भी चिंता का विषय बना हुआ है। कम समय में अधिक बारिश से जलभराव और मिट्टी के पोषक तत्वों का नुकसान होता है, जबकि लंबे सूखे से सिंचाई पर दबाव बढ़ता है। कटाई के समय बारिश होने पर फलों के फटने और अनाज की गुणवत्ता खराब होने की समस्या भी सामने आती है।

कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस चुनौती से निपटने के लिए मजबूत मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, क्षेत्र-विशेष अनुसंधान, बेहतर फसल बीमा, माइक्रो-इरिगेशन और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाना चाहिए। इससे किसानों की आय को स्थिर रखने और कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचाने में मदद मिल सकती है।

WHCD डिनर में फायरिंग से हड़कंप, ट्रंप को टेबल के नीचे छिपाया गया; सीक्रेट सर्विस ने सुरक्षित निकाला

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 वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राजधानी में स्थित Washington Hilton में शनिवार रात आयोजित White House Correspondents’ Dinner के दौरान कथित फायरिंग की घटना से अफरातफरी मच गई। कार्यक्रम में मौजूद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump, उपराष्ट्रपति JD Vance और फर्स्ट लेडी Melania Trump को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना में किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है।


प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार्यक्रम शुरू होने के कुछ ही देर बाद गोलियों जैसी आवाज सुनाई दी, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने हॉल में मौजूद लोगों को तुरंत नीचे झुकने और सुरक्षित स्थान लेने के निर्देश दिए। कई मेहमान अपनी जान बचाने के लिए टेबल के नीचे छिप गए, जिससे हॉल में अफरातफरी का माहौल बन गया।

सूत्रों के अनुसार, उस समय राष्ट्रपति ट्रंप मंच पर मौजूद थे। United States Secret Service के एजेंटों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें और अन्य वीआईपी को कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाला। घटना के कुछ समय बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं और हमलावर को पकड़ लिया गया है।

घटना के बाद होटल परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है तथा जांच शुरू कर दी गई है। आसमान में हेलिकॉप्टर गश्त करते नजर आए और सड़कों पर आपातकालीन वाहनों की आवाजाही बढ़ गई।

आयोजकों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से मेहमानों को कुछ समय तक बॉलरूम के भीतर ही रहने के निर्देश दिए गए। हालात सामान्य होने के बाद कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।

फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध व्यक्ति हथियार के साथ कार्यक्रम स्थल तक कैसे पहुंचा। इस घटना के बाद राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

मुख्यमंत्री की तत्परता से मिनटों में हरकत में आया प्रशासन: जरूरतमंद तक पहुँची राहत

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संवेदनशील नेतृत्व का प्रभाव: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर वृद्ध हितग्राही को मिली तत्काल राहत

मीडिया में खबर आते ही मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, प्रशासन हरकत में आया

तीन माह की लंबित पेंशन, राशन और योजनाओं का लाभ तत्काल सुनिश्चित

पेंशन और राशन मिल गया, अब मिली राहत… मुख्यमंत्री जी का आभारी हूँ – भीखलु राम ध्रुव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील, सजग और जनकेंद्रित नेतृत्व का एक और सशक्त उदाहरण सामने आया है, जहाँ एक वृद्ध हितग्राही की समस्या पर त्वरित संज्ञान लेते हुए शासन ने तुरंत राहत सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश पर गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखण्ड के ग्राम पथर्री निवासी भीखलु राम ध्रुव को जिला प्रशासन की सक्रियता से बड़ी राहत मिली है।

मीडिया के माध्यम से प्रसारित एक खबर में यह जानकारी सामने आई थी कि भीखलु राम ध्रुव लंबे समय से पेंशन और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे। इस खबर को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिना विलंब किए तत्काल संज्ञान लिया और जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि संबंधित हितग्राही को शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर बीएस उइके ने स्वयं मामले की जानकारी ली और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि भीखलु राम ध्रुव का ई-केवाईसी किसी कारणवश लंबित था, जिसके कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। प्रशासन द्वारा तत्काल ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई, जिससे उन्हें पुनः शासकीय योजनाओं का लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है। प्रशासन की तत्परता का परिणाम यह रहा कि भीखलु राम ध्रुव को तीन माह की लंबित वृद्धावस्था पेंशन एकमुश्त प्रदान की गई। 

वहीं खाद्य विभाग द्वारा भी संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके घर पहुंचकर 01 क्विंटल चावल उपलब्ध कराया गया है। अब उन्हें नियमित रूप से उचित मूल्य की दुकान से राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इस मानवीय और तत्पर हस्तक्षेप से राहत प्राप्त करने पर भीखलु राम ध्रुव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पेंशन और राशन मिल जाने से मेरे जीवन में बड़ी राहत आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह संवेदनशीलता मेरे लिए बहुत मायने रखती है। अब मुझे भरोसा है कि सरकार हमारी चिंता करती है। 

उल्लखेनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रत्येक जरूरतमंद तक उनका लाभ समय पर पहुंचे, इसके लिए निरंतर सजग और प्रतिबद्ध है।

डिजिटल जनगणना 2027: छत्तीसगढ़ में स्व-गणना को रफ्तार, 61,500+ नागरिकों ने कराया पंजीकरण

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 रायपुर। प्रस्तावित डिजिटल जनगणना 2027 के तहत छत्तीसगढ़ में स्व-गणना (Self-Enumeration) अभियान को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। अब तक राज्य के 61,503 नागरिकों ने आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कराया है, जिनमें से बड़ी संख्या अपनी प्रक्रिया पूरी भी कर चुकी है।


47 हजार से अधिक ने पूरी की प्रक्रिया

जनगणना संचालन निदेशालय, छत्तीसगढ़ के अनुसार, पंजीकृत नागरिकों में से 47,419 लोग स्व-गणना की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर चुके हैं। वहीं 14,084 नागरिक अभी भी अपनी जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया में हैं।

घर बैठे आसान प्रक्रिया

स्व-गणना प्रणाली के तहत नागरिक घर बैठे ही अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए OTP आधारित लॉगिन व्यवस्था लागू की गई है। सत्यापन के बाद आवास, सुविधाओं और परिवार के सदस्यों से जुड़ी जानकारी भरनी होती है। प्रक्रिया पूरी होने पर एक ‘जनगणना संदर्भ संख्या’ (CRN) जारी की जाती है।

नीति निर्माण में मिलेगी मदद

अधिकारियों के मुताबिक, इस डिजिटल पहल का उद्देश्य सटीक और विश्वसनीय डेटा तैयार करना है, जिससे भविष्य की सामाजिक-आर्थिक नीतियों और योजनाओं के निर्माण में सहायता मिल सके। डिजिटल माध्यम से न केवल जनभागीदारी बढ़ रही है, बल्कि प्रशासनिक कार्य भी सरल हो रहा है।

प्रशिक्षण और हेल्पलाइन की व्यवस्था

अभियान के सफल संचालन के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही, नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन सेवाएं भी शुरू की गई हैं।

डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के तहत एकत्र की गई सभी जानकारी कानूनी प्रावधानों के अनुसार पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

लोगों से भागीदारी की अपील

जनगणना संचालन निदेशक डॉ. कार्तिकेय गोयल ने नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान से जुड़ें, ताकि राज्य के समावेशी विकास के लिए मजबूत डेटा आधार तैयार किया जा सके।

सफलता की कहानी-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से फायदा,ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से दुबेलाल का बढ़ा मुनाफा

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रायपुर- प्रदेश के किसान शासन की योजनाओं का लाभ लेकर और आधुनिक खेती किसानी की तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदानी में इजाफा कर रहे हैं। ऐसे ही महासमुन्द जिले के अंतर्गत ग्राम बम्बुरडीह के किसान दुबेलाल कोसरे ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है।दुबेलाल कोसरे, बताते हैं कि पूर्व में वे पारंपरिक रूप से धान एवं अन्य फसलों की खेती करते थे। इस पारंपरिक खेती में लागत अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद उन्हें सीमित लाभ ही प्राप्त हो पाता था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था।

वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्हें यह जानकारी प्राप्त हुई कि उद्यानिकी फसलों के माध्यम से कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन एवं अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। इस जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन घटक का लाभ लिया। दुबेलाल कोसरे बताते है कि योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपए का अनुदान भी प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने अपने 0.40 हेक्टेयर सिंचित भूमि में आधुनिक तकनीक के माध्यम से ग्राफ्टेड टमाटर की खेती प्रारंभ की।

कृषक दुबेलाल कोसरे द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली ग्राफ्टेड पौध, सिंचाई हेतु ड्रिप प्रणाली तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया गया। वे बताते हैं कि उन्नत तकनीकों के समुचित उपयोग से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 16 से 18 टन तक उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में टमाटर का औसत विक्रय मूल्य लगभग 20 रुपए प्रति किलोग्राम मिलने से उन्हें कुल लगभग 3 लाख 9 हजार रुपए का लाभ प्राप्त हुआ। यह लाभ धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक रहा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।दुबेलाल कोसरे द्वारा अन्य किसानों को उन्नत तकनीकों को अपनाने तथा बाजार की मांग के अनुरूप फसल उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। उनके मार्गदर्शन से ग्राम बम्बुरडीह के अन्य कृषक भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और आधुनिक खेती को अपनाने लगे हैं।


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