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आज से छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी, नई दरें लागू

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छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आज से बिजली का उपयोग महंगा हो गया है। 1 जुलाई से राज्य में नई बिजली दरें लागू हो गई हैं। नई दरों के अनुसार औसतन 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर पड़ेगा।

नई दरों के लागू होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक बिजली बिल का भुगतान करना होगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी नई टैरिफ व्यवस्था के तहत विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।

बिजली कंपनियों का कहना है कि उत्पादन, खरीद और वितरण लागत में वृद्धि को देखते हुए टैरिफ में संशोधन आवश्यक था। वहीं, उपभोक्ता संगठनों ने बिजली दरों में बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की बात कही है।

नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी हो चुकी हैं और अब इसी के अनुसार बिजली बिल जारी किए जाएंगे।

बस्तर में खाली हुए सुरक्षा कैंप अब बनेंगे स्कूल, वर्षों बाद फिर गूंजेगी बच्चों की पढ़ाई

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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और हालात सामान्य होने के बाद एक बड़ी पहल शुरू की गई है। जिन सुरक्षा कैंपों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है, उन्हें स्कूलों में परिवर्तित किया जाएगा, ताकि वर्षों से शिक्षा से वंचित बच्चों को फिर से पढ़ाई का अवसर मिल सके।

लंबे समय तक नक्सली हिंसा के कारण कई सरकारी स्कूल बंद हो गए थे या सुरक्षा बलों के अस्थायी कैंप के रूप में उपयोग किए जा रहे थे। इससे हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और कई गांवों में शिक्षा व्यवस्था लगभग ठप हो गई थी।

अब सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद प्रशासन इन भवनों को दोबारा शिक्षा के लिए तैयार कर रहा है। आवश्यक मरम्मत, फर्नीचर, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद इन भवनों में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित की जाएंगी।

इस पहल का उद्देश्य केवल स्कूलों को फिर से खोलना ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के आदिवासी इलाकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना भी है। सरकार का मानना है कि शिक्षा के विस्तार से क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी और युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे।

स्थानीय लोगों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे बस्तर में शांति, विकास और शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का आज जमीनी एवं हवाई दौरा करेंगे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचे, लेकिन खराब मौसम के कारण निर्धारित हवाई सर्वे नहीं कर सके। अब वे 1 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का पूरे दिन जमीनी और हवाई निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे प्रभावित किसानों और परिवारों की स्थिति का जायजा लेंगे, नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे तथा तत्काल राहत और दीर्घकालिक सहायता के उपायों की समीक्षा करेंगे। इस दौरे में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रीकिरेन रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी उनके साथ रहेंगे।

सोमवार दोपहर अरुणाचल प्रदेश पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, लेकिन इससे सरकार का संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, "आज मौसम ने हेलीकॉप्टर को उड़ने से रोक दिया, लेकिन हमारी प्रतिबद्धता को नहीं रोक सकता। कल हम पूरे दिन अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीन और हवाई दोनों माध्यमों से स्थिति का आकलन करेंगे, ताकि हर प्रभावित किसान और हर प्रभावित परिवार तक आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके।"

दिल्ली से ईटानगर पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। लोगों ने बताया कि बाढ़ के पानी ने कृषि भूमि डुबो दी है, खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, घरों को नुकसान पहुंचा है और आजीविका प्रभावित हुई है। मंत्री ने सभी की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और आश्वासन दिया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रभावित परिवार को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।

इसके बाद ईटानगर सचिवालय में अरुणाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने बाढ़ की स्थिति, राहत सामग्री की उपलब्धता एवं वितरण, पुनर्वास कार्यों तथा आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

चौहान ने बताया कि मंगलवार सुबह से वे अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित गांवों और राहत शिविरों का दौरा करेंगे। वे किसानों से मिलकर कृषि भूमि, पशुधन और बाढ़ से जनजीवन पर पड़े प्रभाव का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे। इसके बाद वे अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे भी करेंगे, जिसमें नदियों, तटबंधों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि की स्थिति का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा।

शाम को वे गुवाहाटी में असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें बाढ़ प्रबंधन, राहत वितरण, तटबंधों और सड़कों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली तथा प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देना सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति भी आवश्यक है। उन्होंने बेहतर जल निकासी व्यवस्था, मजबूत तटबंध, सुरक्षित राहत शिविर, उन्नत बाढ़ प्रबंधन ढांचा तथा अधिक प्रभावी फसल बीमा प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर संभव कदम उठाएंगी ताकि राहत, पुनर्वास और सामान्य जीवन की जल्द बहाली सुनिश्चित की जा सके।

मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक प्रिय राज्य है, लेकिन इस समय वह भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन से सड़कें, पुल और अनेक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि संतरा, केला और धान जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं, किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए हैं। हम नुकसान का विस्तृत आकलन करेंगे और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता सुनिश्चित करेंगे।"

उन्होंने विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार पूरी ताकत के साथ राज्य को इस संकट से उबारने, सामान्य स्थिति बहाल करने और सभी प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करेगी।

घरेलू विवाद में पति ने फूंका घर, फायर ब्रिगेड की लापरवाही पर 5 कर्मचारी सस्पेंड

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 बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के Balrampur district जिले के गर्ल्स हाई स्कूल पारा स्थित रिहायशी इलाके में सोमवार को आगजनी की घटना से हड़कंप मच गया। एक नगर सैनिक महिला के पति ने कथित तौर पर घरेलू विवाद के चलते अपने ही घर में आग लगा दी। घटना के समय महिला ड्यूटी पर थी। आग लगाने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। देखते ही देखते आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।


गैस सिलेंडर की आशंका से खाली कराए गए आसपास के घर

स्थानीय लोगों ने घर के भीतर गैस सिलेंडर होने की जानकारी दी, जिसके बाद स्थिति और गंभीर हो गई। संभावित विस्फोट के खतरे को देखते हुए आसपास रहने वाले कई परिवारों को एहतियातन घरों से बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही Chhattisgarh Police की कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्र को खाली कराया। पुलिस और स्थानीय लोगों की सतर्कता से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।


देरी से पहुंची फायर ब्रिगेड, वाहन में पानी भी मिला कम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग बुझाने पहुंची अग्निशमन टीम न केवल देर से घटनास्थल पहुंची, बल्कि वाहन में पर्याप्त पानी भी मौजूद नहीं था। आग बुझाने से पहले वाहन में पानी भरना पड़ा, जिससे आग पर काबू पाने में काफी देर हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आग गैस सिलेंडर तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

घरेलू विवाद बना आगजनी की वजह, आरोपी की तलाश जारी

प्रारंभिक जांच में घरेलू विवाद को आग लगाने की मुख्य वजह माना जा रहा है। थाना प्रभारी सुभाष कुजूर ने बताया कि आरोपी की तलाश की जा रही है। साथ ही आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

कलेक्टर ने लिया संज्ञान, 5 कर्मचारियों पर गिरी गाज

घटना के बाद Chandan Sanjay Tripathi कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने अग्निशमन विभाग की कार्यप्रणाली पर तत्काल संज्ञान लिया। जांच में सामने आया कि फायर ब्रिगेड के घटनास्थल पर पहुंचने में देरी हुई और वाहन में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं था। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कलेक्टर ने जिला सेनानी नगर सेना को जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

कलेक्टर के आदेश पर फायर इंचार्ज संजय पटेल, सैनिक राजेंद्र प्रसाद, बुद्धिनारायण दुबे, पंप ऑपरेटर सह वाहन चालक फासिस जेवियर और फायरमैन सुनीन एक्का को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई होमगार्ड अधिनियम की धारा-13 एवं नियम-12 के तहत की गई है।

छत्तीसगढ़ में फिर बिगड़ेगा मौसम - आज कई जिलों में तेज बारिश-आंधी का अलर्ट, 60 KM की रफ्तार से चल सकती है हवा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। India Meteorological Department (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका जताते हुए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।


मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक प्रदेश के बलरामपुर, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, जशपुर और सुकमा जिलों में आज तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है।


मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। विशेष तौर पर आंधी-तूफान के समय पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने और यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेने को कहा गया है।

प्रदेश में मानसून सक्रिय होने के बाद कई इलाकों में लगातार मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों को संवेदनशील बताते हुए नागरिकों से स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं, जिससे तापमान में गिरावट और उमस से राहत मिलने की संभावना है।

PM मोदी की 4 घंटे मैराथन बैठक- केंद्रीय सचिवों को सख्त संदेश - योजनाओं का असर सीधे जनता तक दिखना चाहिए

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 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ करीब चार घंटे लंबी हाई लेवल बैठक की। इस दौरान सरकार की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधारों और आम लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने को लेकर विस्तार से मंथन किया गया।


बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि सरकारी योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका सीधा फायदा आम जनता के जीवन में नजर आए। उन्होंने अधिकारियों को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को और बेहतर बनाने के लिए तेज गति से काम करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय और फैसलों में तेजी लाने के लिए PM GatiShakti प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया।

बैठक में प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को याद दिलाया कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि आजादी के 100 साल पूरे होने तक देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए गवर्नेंस और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में अगले 10 वर्षों के सुधार एजेंडे पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न मंत्रालयों में चल रहे बड़े संरचनात्मक सुधारों की प्रगति रिपोर्ट पेश की।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में रेलवे समेत कई मंत्रालयों में ‘52 सप्ताह में 52 सुधार’ जैसी महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री मोदी लगातार तय समय सीमा में परिणाम देने और सरकारी कामकाज की नियमित समीक्षा पर जोर देते रहे हैं।

सरकार की यह अहम बैठक आने वाले वर्षों की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकसित भारत 2047 के रोडमैप को लेकर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

’उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड’

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’वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत होने का मिला संकेत’

’अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के कैमरा ट्रैप में पहली बार रिकॉर्ड हुआ चार ढोलों का संगठित झुंड’

रायपुर- वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के दौरान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार दुर्लभ भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग ने इसे जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और बेहतर वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण संकेत बताया है।

’दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी से मजबूत हुआ संरक्षण का भरोसा’

ढोल (भारतीय जंगली कुत्ता) देश के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल है। इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ी है और प्राकृतिक आवास पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हुआ है। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलित और स्वस्थ होने का संकेत मिलता है।

’संरक्षण के लिए उठाए गए प्रभावी कदम’

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इनमें वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर प्राकृतिक स्वरूप में विकसित करना, वन्यजीव अपराधियों और शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, एंटी-पोचिंग अभियान को मजबूत करना तथा कैमरा ट्रैप और आधुनिक तकनीक से लगातार निगरानी करना शामिल है। इन प्रयासों में स्थानीय ग्रामीणों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।

’956 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से हुई मुक्त’

वन विभाग ने रिजर्व क्षेत्र की लगभग 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इससे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास और आवागमन के मार्ग फिर से उपलब्ध हुए। साथ ही 550 से अधिक वन्यजीव अपराधियों और अवैध शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत किया गया।

’ढोल क्यों हैं जंगल के लिए महत्वपूर्ण’

ढोल झुंड में रहने वाले सामाजिक और अनुशासित वन्यजीव हैं। ये चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीवों की संख्या को संतुलित रखते हैं, जिससे जंगल का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। यही कारण है कि इनकी मौजूदगी किसी भी वन क्षेत्र के स्वस्थ और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।

’जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि’

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक ने बताया कि ढोल के संगठित झुंड का रिकॉर्ड होना यह प्रमाणित करता है कि रिजर्व की खाद्य-श्रृंखला मजबूत हुई है और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण विकसित हुआ है। यह उपलब्धि वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में किए गए वैज्ञानिक प्रबंधन, कड़ी सुरक्षा और प्रभावी संरक्षण प्रयासों का परिणाम है।

’वन्यजीव संरक्षण का उभरता मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़’

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों से यह रिजर्व मध्य भारत में वन्यजीवों के सुरक्षित और समृद्ध आवास के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

विकसित भारत-जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

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1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू होगी योजना, ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों के रोजगार की गारंटी

रायपुर- देशभर में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना लागू हो रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका संवर्धन और आधारभूत विकास को नई गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत -2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाना है। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका संवर्धन और गांवों के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

राज्य के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान

योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना विकास, कृषि आधारित कार्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन जैसे टिकाऊ कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकसित ग्राम की परिकल्पना को साकार करने के लिए योजना में कुल 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2026-27 के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

2 जुलाई को होगा शुभारंभ

छत्तीसगढ़ में योजना के शुभारंभ एवं क्रियान्वयन को लेकर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 2 जुलाई 2026 को तिरुपति, आंध्रप्रदेश से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा, जिसमें वे देश के विभिन्न राज्यों से संवाद करेंगे। प्रदेश में यह कार्यक्रम कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ग्रामीणों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर संवाद करेंगे।

ग्राम सभा की भूमिका होगी सशक्त

इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी, 15 दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था होगी, कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान किया गया है। इसी तरह डिजिटल जॉब कार्ड एवं तकनीक आधारित कार्य प्रबंधन प्रणाली, समयबद्ध एवं पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के साथ ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है।

ग्राम सभा द्वारा तैयार की जाएगी पंचायतों के विकास कार्यों की कार्ययोजना

वीबी जीरामजी में जल संरक्षण, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, वृक्षारोपण एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना से ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास एवं आजीविका के नए अवसर प्रदान करेगी। सामाजिक अंकेक्षण एवं डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता में भी वृद्धि होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना ग्राम सभा के माध्यम से तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जा सकेगा।

विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों में विकास की स्थायी आधारशिला तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व पटल पर दिलाएंगे नई पहचान - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन

रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की घोषणा, उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत बनाने की घोषणा

मुख्यमंत्री ने 6 पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स का किया सम्मान

रायपुर- रामगढ़ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा, प्रकृति पूजा, आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। सरगुजा की यह पवित्र भूमि प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है। अनेक प्राचीन ग्रंथों में रामगढ़ का उल्लेख मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को प्रमाणित करता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के ऐतिहासिक दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के  समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनश्रुतियों के अनुसार त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने इस क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। सीताबेंगरा गुफा आज भी श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है तथा रामगढ़ की हवाओं और शिलाओं में रामायण की स्मृतियां आज भी जीवंत हैं।

उन्होंने कहा कि सीताबेंगरा गुफा भारत की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में से एक मानी जाती है, जहां हजारों वर्ष पूर्व सांस्कृतिक आयोजन और नाट्य प्रस्तुतियां होती थीं। वहीं जोगीमारा गुफा अपनी प्राचीन भित्तिचित्र कला के लिए विश्वविख्यात है। हाथीपोल जैसी प्राकृतिक शैल संरचना तथा यहां के प्राचीन शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साक्षी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा मेघदूतम् की रचना इसी क्षेत्र में किए जाने का उल्लेख मिलता है, जिससे रामगढ़ का साहित्यिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार रामगढ़, सीताबेंगरा और जोगीमारा जैसी ऐतिहासिक धरोहरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि जिस भव्यता के साथ इस वर्ष रामगढ़ महोत्सव का आयोजन हुआ है, उसी भव्यता के साथ यह महोत्सव प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में सरगुजा जिले में 2,387 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में लोगों के पक्के आवास का सपना तेजी से साकार हो रहा है। 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति प्रदान की गई है तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 आवास बनकर तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। पुनर्वासित नक्सलियों तथा विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों से 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। 13 लाख किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये अंतरित किए जा रहे हैं। रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन कराया गया है। तीर्थयात्रा दर्शन योजना के अंतर्गत देश के 19 प्रमुख तीर्थस्थलों को शामिल किया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक अपनी इच्छा के अनुसार दर्शन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए विभिन्न विभागों में लगातार भर्ती प्रक्रिया संचालित की जा रही है। आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रारंभ की गई है, जिसके माध्यम से लोगों की शिकायतों का प्रभावी समाधान किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही क्षेत्रवासियों की मांग पर उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत के गठन की घोषणा भी की।इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामगढ़ महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला और गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का सशक्त माध्यम है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य कर रहा है।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सभी को रामगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लगभग 50 वर्षों से आयोजित हो रहा यह महोत्सव ऐतिहासिक, पौराणिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंच से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के छह बच्चों का शाला प्रवेश कराया। उन्होंने बच्चों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई तथा स्कूल बैग, वॉटर बॉटल सहित अध्ययन सामग्री प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने 26 से 30 जून तक सरगुजा जिले के विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर विशेष डॉक्यूमेंट्री तैयार करने वाले टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया।

समापन समारोह में विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, विधायक शकुंतला पोर्ते, विधायक उद्देश्वरी पैंकरा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर सहित अन्य विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह में किया संबोधन

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जनजातीय विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक न्याय के केंद्र बनें : राष्ट्रपति

विजयनगरम- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की विशेष जिम्मेदारी है कि वह जनजातीय समाज में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और नीति निर्माण की योग्यता विकसित करने का केंद्र बने। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य से स्थापित ऐसे संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जनजातीय समुदायों के शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और वन अधिकारों के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर भी कार्य करना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय जनजातीय और वंचित समुदायों के युवाओं के समग्र विकास के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए नवाचार आवश्यक

राष्ट्रपति ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों, विशेषकर जनजातीय विश्वविद्यालयों को ऐसी नवाचारी व्यवस्थाएं विकसित करनी चाहिए, जो जनजातीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि लघु वनोपज, हस्तशिल्प, मोटे अनाज (मिलेट्स), औषधीय पौधों, इको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित किए जाने चाहिए।

दीक्षांत समारोह केवल उत्सव नहीं, संकल्प का भी अवसर

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का अवसर भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को तेजी से बदलते समय के अनुरूप कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर आसपास के सामाजिक और प्राकृतिक परिवेश से भी सीखना चाहिए, ताकि व्यावहारिक कौशल विकसित हो सकें।

उन्होंने विद्यार्थियों से समाज और राष्ट्र के बेहतर भविष्य के निर्माण में योगदान देने के साथ-साथ अपनी समुदाय, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया।

विरासत और आधुनिक विज्ञान का समन्वय जरूरी

राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे भारत में अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने उत्तर आंध्र प्रदेश के जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए 'विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हब' की स्थापना की है।

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने जनजातीय कल्याण, जनस्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर शैक्षणिक और जमीनी स्तर पर उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ये प्रयास समानता पर आधारित विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में निभाएगा महत्वपूर्ण योगदान

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अपनी समावेशी, व्यवहारिक और पर्यावरण संरक्षण आधारित शिक्षा प्रणाली के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि आधुनिक शिक्षा के सकारात्मक पहलुओं को जनजातीय समाज से जोड़कर स्थानीय युवाओं को देश के समावेशी और संतुलित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय "रामगढ़ महोत्सव-2026" के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की।


मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है।

रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति "मेघदूतम्" की रचना की थी, जिसका आरंभ "आषाढस्य प्रथमदिवसे" से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान "हाथीपोल" नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्र में फंसे छह मछुआरों का सुरक्षित किया रेस्क्यू

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नई दिल्ली/मंगलुरु- भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने 29 जून 2026 को मंगलुरु तट के पास समुद्र में संकटग्रस्त भारतीय मछली पकड़ने वाली नाव आईएफबी ‘मंजू माथा’ (IFB Manju Matha) से छह मछुआरों को सफलतापूर्वक बचाया। यह चुनौतीपूर्ण समुद्री खोज एवं बचाव (Search and Rescue - SAR) अभियान भारतीय तटरक्षक पोत आईसीजीएस सचेत (ICGS Sachet) द्वारा अंजाम दिया गया।

तटरक्षक बल को शाम लगभग 4 बजे वीएचएफ रेडियो के माध्यम से संकट संदेश प्राप्त हुआ। संदेश में बताया गया कि सूरतकल तट से लगभग 33 समुद्री मील दूर स्थित मछली पकड़ने वाली नाव में समुद्र की ऊंची लहरों और खराब मौसम के कारण गंभीर जलभराव और नाव के ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे उसमें सवार सभी छह मछुआरों की जान खतरे में पड़ गई है।

संदेश मिलते ही भारतीय तटरक्षक बल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आईसीजीएस सचेत को घटनास्थल की ओर रवाना किया और संकटग्रस्त नौका तक पहुंचकर राहत अभियान शुरू किया।

अत्यंत खराब मौसम, ऊंची लहरों, तेज हवाओं और कम दृश्यता जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद तटरक्षक दल ने उच्च स्तर की दक्षता और साहस का परिचय दिया। अभियान के दौरान विशेष रूप से खराब समुद्री परिस्थितियों के लिए विकसित रिमोट-ऑपरेटेड लाइफबॉय का उपयोग कर सभी मछुआरों तक सुरक्षित पहुंच बनाई गई और उन्हें एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला गया।

शाम 6 बजे तक सभी छह मछुआरों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया। इसके बाद आईसीजीएस सचेत बचाए गए मछुआरों को सुरक्षित उतारने के लिए न्यू मंगलुरु बंदरगाह की ओर रवाना हो गया।

यह अभियान समुद्र में मानव जीवन की सुरक्षा के प्रति भारतीय तटरक्षक बल की अटूट प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह आधुनिक तकनीक, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, साहस और पेशेवर दक्षता के प्रभावी समन्वय को भी दर्शाता है, जिसके बल पर तटरक्षक बल सबसे कठिन समुद्री आपात स्थितियों का भी सफलतापूर्वक सामना कर रहा है।

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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जोगीमारा गुफा शिलालेख एवं हाथीपोल का किया अवलोकन

हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय "रामगढ़ महोत्सव-2026" के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति "मेघदूतम्" की रचना की थी, जिसका आरंभ "आषाढस्य प्रथमदिवसे" से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान "हाथीपोल" नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

‘खेत बचाओ अभियान’ अब बनेगा राष्ट्रीय मिशन : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और मिट्टी संरक्षण से ही समृद्ध किसान तथा विकसित भारत का सपना होगा साकार

रेवाड़ी (हरियाणा)- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह एवं हरियाणा किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिशन के शुभारंभ अवसर पर किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की, जबकि हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी शामिल हुए।

किसान समृद्ध होंगे तभी बनेगा विकसित भारत

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और विकसित भारत का संकल्प तभी पूरा होगा, जब देश का किसान समृद्ध और सशक्त होगा। उन्होंने किसान हितैषी योजनाओं के लिए हरियाणा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे रहा है, भावांतर भरपाई योजना लागू कर चुका है तथा बागवानी, सब्जियों और फलों पर भी मूल्य अंतर की भरपाई कर किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य दिला रहा है।

उन्होंने ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ और ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ जैसी योजनाओं को कृषि प्रबंधन और जल संरक्षण के उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी इनसे सीख लेनी चाहिए।

किसानों ने भारत को बनाया खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक समय भारत को अपनी खाद्यान्न जरूरतों के लिए विदेशों से गेहूं आयात करना पड़ता था, लेकिन आज किसानों की मेहनत से देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और इस उपलब्धि में हरियाणा के किसानों का विशेष योगदान रहा है।

उन्होंने हरियाणा को कृषि के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और खेलों में भी अग्रणी राज्य बताते हुए कहा कि यहां के किसानों और युवाओं की मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

अधिक रासायनिक उर्वरक मिट्टी को बना रहे हैं बीमार

चौहान ने कृषि भूमि की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से धरती मां बीमार हो रही है। उन्होंने किसानों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि मिट्टी मानो स्वयं पुकार रही है कि उस पर जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का बोझ न डाला जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों को केवल मृदा स्वास्थ्य परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। जिस प्रकार डॉक्टर की गलत या अधिक दवा मरीज के लिए नुकसानदायक होती है, उसी प्रकार आवश्यकता से अधिक यूरिया और डीएपी (DAP) का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नष्ट करता है, अम्लीयता बढ़ाता है, पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ता है तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को बढ़ावा देता है। इसका असर फसलों, खाद्य पदार्थों और अंततः मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में भूमि की उत्पादन क्षमता समाप्त हो सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

मोबाइल ऐप से मिलेगी मिट्टी की पूरी जानकारी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ऐसी तकनीक विकसित कर रही है, जिससे किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड की पूरी जानकारी मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होगी। किसान खेत में खड़े-खड़े ही अपनी मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति, उनकी कमी तथा आवश्यक उर्वरकों की सही मात्रा की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादकता बढ़ेगी और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

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प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान

चौहान ने कहा कि सही तरीके से अपनाई गई प्राकृतिक खेती से उत्पादन में कमी नहीं आती। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे शुरुआत में अपनी थोड़ी-सी भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाकर उसके परिणाम स्वयं देखें और बाद में उसका विस्तार करें।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव और केंचुए तेजी से समाप्त हो रहे हैं। इसलिए जैविक संतुलन और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

जल संरक्षण और फसल विविधीकरण पर जोर

जलवायु परिवर्तन और संभावित एल-नीनो प्रभाव का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कम वर्षा की संभावना को देखते हुए केंद्र और हरियाणा सरकार कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा दे रही हैं।

उन्होंने धान की खेती छोड़कर दलहन की खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 8,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने के हरियाणा सरकार के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, फसल विविधीकरण और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

‘खेत बचाओ अभियान’ अब बनेगा राष्ट्रीय मिशन

शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि ‘खेत बचाओ अभियान’ अब केवल एक अभियान नहीं रहेगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर का दीर्घकालिक मिशन बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा, "आज समापन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अभियान समाप्त हो सकता है, लेकिन मिशन आज से शुरू हो रहा है।"

उन्होंने घोषणा की कि केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में वे प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक दिन देश के विभिन्न राज्यों में ‘खेत बचाओ अभियान’ से जुड़े कार्यक्रमों में स्वयं भाग लेंगे।

किसानों को दिलाई शपथ

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री ने किसानों, महिलाओं और युवाओं को ‘खेत बचाओ, धरती बचाओ’ अभियान से जुड़ने, संतुलित उर्वरक उपयोग, स्वस्थ मिट्टी प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने की सामूहिक शपथ दिलाई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को सरकार और किसानों की साझेदारी से ही पूरा किया जा सकता है। केंद्र सरकार हरियाणा जैसे प्रगतिशील राज्यों के साथ मिलकर कृषि विकास की राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करेगी, ताकि वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण, तकनीकी नवाचार और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से समृद्ध किसान, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकसित भारत का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके।

मानवीय संविधान की समझ से ही मानव-मानव के बीच मतभेद होंगे समाप्त : गेंदलाल कोकड़िया

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महासमुंद- मध्यस्थ दर्शन आधारित मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या का अध्ययन मानव जीवन में मानवीय मूल्यों, चरित्र निर्माण और सामाजिक समरसता की स्थापना का प्रभावी माध्यम है। जब तक मानवीय चरित्र की सही व्याख्या और समझ विकसित नहीं होगी, तब तक मानव-मानव के बीच मतभेद, देशों के बीच तनाव, टकराव और युद्ध जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसलिए विश्व के प्रत्येक व्यक्ति तक मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या की समझ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

यह विचार मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े कोकड़ी शासकीय विद्यालय के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने अभ्युदय संस्थान, अछोटी (दुर्ग) में आयोजित जीवन विद्या अध्ययन शिविर को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या के प्रणेता पूज्य ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन मानव जीवन के मूल्यों, व्यवहार और चरित्र निर्माण की वैज्ञानिक समझ प्रदान करता है। उन्होंने जीवन विद्या अध्ययन के लोकव्यापीकरण अभियान की अब तक की उपलब्धियों तथा आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।

कोकड़िया ने बताया कि जीवन विद्या अध्ययन से प्रतिभागियों के व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। उन्होंने विद्यालयों में चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर देते हुए सभी प्रतिभागियों को कोकड़ी शासकीय विद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण करने तथा अपने-अपने क्षेत्रों में मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं का आयोजन करने का आह्वान किया। साथ ही सभी को आगामी जीवन विद्या अध्ययन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

शिविर का प्रबोधन कर रहे अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने सामाजिक परिवर्तन के लिए स्वयं में परिवर्तन लाने और जीवन विद्या अध्ययन की निरंतरता बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन तथा मानवीयता पूर्ण आचरण को समृद्ध समाज की आधारशिला बताया।

कार्यक्रम में अभ्युदय संस्थान, अछोटी की आयोजन समिति के सदस्य सरदार मंजीत सिंह एवं  डाली ने स्वावलंबन के 30 से अधिक व्यावहारिक प्रयोगों की जानकारी देते हुए उपयोगिता मूल्य और कला मूल्य आधारित जीवनशैली पर प्रकाश डाला।

अभिभावक विद्यालय, अछोटी के प्रभारी बलवंत भैयाजी ने श्रेष्ठ व्यक्तियों एवं संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की संस्कृति को मानवीय जीवन का महत्वपूर्ण मूल्य बताया।

युवा प्रकोष्ठ प्रभारी चंद्रशेखर राठौड़ ने युवाओं को चेतना विकास मूल्य शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हुए अखंड समाज, सार्वभौम व्यवस्था और परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य की स्थापना में जीवन विद्या अध्ययन की भूमिका स्पष्ट की।

समाजसेवी एवं आकाशवाणी रायपुर से जुड़ी शुभ्रा ठाकुर ने जीवन विद्या के प्रचार-प्रसार, प्रकाशन और जनजागरण के प्रभावी तरीकों पर विचार रखते हुए मानवीय मूल्यों को परिवार और समाज में व्यवहार के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों को अभ्युदय संस्थान, अछोटी के शैक्षणिक भ्रमण के लिए भी आमंत्रित किया।

उत्सव परिसर, अभ्युदय संस्थान के उत्पादन आयाम प्रभारी महावीर अग्रवाल ने स्वावलंबन एवं शुद्ध उत्पादन के 50 से अधिक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किए तथा संस्थान में एक वर्ष तक अध्ययन-अभ्यास करने वाले 17 से अधिक लक्ष्य फेलो के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

मूल्यांकन सत्र में मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही के सदस्य एवं समाजसेवी संतोष कुमार साहू (रायतुम, पटेवा) ने समाज के सभी वर्गों से जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं में सक्रिय सहभागिता की अपील की।

कार्यक्रम में धमतरी से हेमलाल, ताम्रध्वज साहू, रायपुर से डॉ. श्वेता, शिक्षक मुकेश साहू, कांकेर (चारामा) से डिगेश्वर साहू, बिहार से आदित्य मिश्रा, धमतरी से लक्ष्य फेलो लक्ष्मी साहू, गोढ़ी से पेनोरमा साहू, बालोद के सांकरी (उत्सवपारा) से गोपी निषाद सहित विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक युवा, लक्ष्य फेलो, शिक्षक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

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