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खेत बचाने निकले शिवराज, 1 जून से देशभर में शुरू होगा बड़ा किसान अभियान

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 नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा है कि 1 जून से शुरू होने वाला ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती, खेती और किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने का राष्ट्रीय जन आंदोलन है। उन्होंने अभियान को जनभागीदारी, वैज्ञानिक सोच और सामूहिक प्रयासों के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया।


मध्य प्रदेश के Raisen जिले के रामसिया गांव से अभियान के राष्ट्रीय शुभारंभ से पहले रविवार को शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ कृषि अधिकारियों और किसान हित में कार्यरत संगठनों के प्रतिनिधियों से वर्चुअल संवाद किया।

उन्होंने बताया कि बढ़ता तापमान, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग, मिट्टी की घटती उर्वरता तथा जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां कृषि क्षेत्र के सामने गंभीर संकट बनकर उभर रही हैं। ऐसे में किसानों को जागरूक करना और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

किसानों को दी जाएगी वैज्ञानिक खेती की जानकारी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अभियान के तहत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, हरी खाद, फसल चयन, कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक कृषि पद्धतियां तथा नकली खाद, बीज और कीटनाशकों की पहचान जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी।

उन्होंने कहा कि केवल सलाह देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि खेतों में प्रदर्शन, वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए किसानों का विश्वास मजबूत करना होगा।

30 जून तक तैयार होगा विस्तृत रोडमैप

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 30 जून तक का विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। इसमें यह तय हो कि किस दिन कौन अधिकारी, वैज्ञानिक या टीम किस गांव में जाकर किसानों से संवाद करेगी। उन्होंने डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग और स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

केंद्र, राज्य और वैज्ञानिक संस्थानों को मिलकर करना होगा काम

उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, कृषि विभागों, आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और किसान हितैषी संस्थाओं को एकजुट होकर काम करना होगा। सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी अभियान को मजबूत बनाएगी।

किसानों तक पहुंचेगी योजनाओं की जानकारी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड, मिनी बीज किट, दलहन-तिलहन मिशन और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का लाभ भी पहुंचाया जाएगा। इससे किसानों की आय, जागरूकता और कृषि प्रबंधन क्षमता में वृद्धि होगी।

गांव-गांव तक पहुंचे अभियान का संदेश

शिवराज सिंह चौहान ने प्रचार-प्रसार को अभियान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि यह देशहित और अन्नदाता के भविष्य से जुड़ा कार्यक्रम है। इसकी जानकारी जितनी तेजी से गांव-गांव तक पहुंचेगी, अभियान उतना ही प्रभावी साबित होगा। उन्होंने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से मीडिया के माध्यम से किसानों तक अधिक से अधिक जानकारी पहुंचाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ खेती, पर्यावरण और किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक व्यापक जन आंदोलन का रूप लेगा, जो देश की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

छत्तीसगढ़ में मौसम ने बदला मिजाज, कई जिलों में बारिश और तेज आंधी का अलर्ट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई है। मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।


मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में भी वर्षा गतिविधियों में तेजी आने के संकेत हैं। कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर बिजली गिरने और आंधी चलने की भी आशंका व्यक्त की गई है।


विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बन रही अनुकूल परिस्थितियों के कारण प्रदेश में नमी बढ़ रही है, जिससे बारिश की गतिविधियां मजबूत होंगी। इससे भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि किसानों और आम नागरिकों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है। प्रदेश के कई जिलों में आगामी दिनों में प्री-मानसून बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।

मानसून ने पकड़ी रफ्तार

आईएमडी के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगले 3 से 4 दिनों में इसके और अधिक क्षेत्रों में पहुंचने की संभावना है। मानसून की बढ़ती सक्रियता का असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेगा, जिससे जून के पहले सप्ताह में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार मानसून के समय पर पहुंचने से कृषि कार्यों को भी फायदा मिलेगा।

महंगाई का नया झटका: कमर्शियल LPG सिलेंडर फिर महंगा

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 नई दिल्ली। जून महीने की शुरुआत के साथ ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। देशभर में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए रेट 1 जून से लागू हो गए हैं। हालांकि घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।


सूत्रों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि की गई है, जिसके बाद इसका नया रेट 3,113.50 रुपये हो गया है। वहीं कोलकाता में इसकी कीमत 53.50 रुपये बढ़कर 3,255.50 रुपये प्रति सिलेंडर पहुंच गई है।

5 किलो वाला सिलेंडर भी हुआ महंगा

5 किलोग्राम फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर की कीमत में भी 11 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। नई दरों के अनुसार दिल्ली में यह सिलेंडर अब 821.50 रुपये में उपलब्ध होगा। बढ़ी हुई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।

घरेलू गैस उपभोक्ताओं को राहत

तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए हैं, लेकिन घरेलू उपयोग वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है, जो पहले से ही महंगाई के दबाव का सामना कर रहे हैं।

ईंधन का पर्याप्त भंडार, घबराने की जरूरत नहीं

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। सरकार भविष्य में किसी भी संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए रणनीतिक भंडारण क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रही है।

मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने बताया कि सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रही हैं और एलपीजी उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ी है, जिसका मुख्य कारण कृषि कार्यों से जुड़ी जरूरतें और थोक खरीदारी है।

जमाखोरी पर सरकार की सख्ती

ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। पिछले चार दिनों में एलपीजी से जुड़े 6,500 से अधिक छापे मारे गए हैं। इस दौरान 5 एफआईआर दर्ज की गई हैं और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और लोगों को घबराहट में अतिरिक्त खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है।

 

जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर ने अपर कलेक्टर को सौंपा 10 सूत्रीय ज्ञापन

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आरंग- ग्राम जरौद (क) में आयोजित 'सुशासन तिहार' कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के लोकप्रिय जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर ने किसानों, युवाओं, छात्रों और ग्रामीणों की प्रमुख समस्याओं को लेकर अपर कलेक्टर रायपुर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर प्रशासन ने इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो जनता के हक के लिए बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन की प्रमुख मांगें और मुद्दे: 

किसानों के लिए खाद की पुरानी व्यवस्था: किसानों को हो रही परेशानी को देखते हुए डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की वितरण व्यवस्था को पहले की तरह करने की मांग की गई।

​शासकीय भूमि आवंटन पर रोक: ग्राम रसनी में पंचायत की मर्जी के बिना 56 एकड़ सरकारी जमीन के आवंटन पर तुरंत रोक लगाने की बात कही गई।

​ ट्रेन स्टॉपेज और सिटी बस का विस्तार: आरंग रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव (स्टापेज) और रायपुर की सिटी बस सेवा को भानसोज से आगे फरफौद और खौली तक बढ़ाने की मांग की ताकि यात्रियों को आसानी हो।

​ स्कूलों का उन्नयन (अपग्रेड): शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए रसनी और पारागांव के हाईस्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूल बनाने की मांग रखी।

धान खरीदी केंद्र की बहाली: ग्राम रसनी में राज्यपाल की मंजूरी के बाद स्वीकृत धान खरीदी केंद्र को रद्द किए जाने पर नाराजगी जताते हुए इसे दोबारा शुरू करने की मांग की गई।

अवैध शराब पर रोक: गांवों में बढ़ रही अवैध शराब की बिक्री पर तुरंत लगाम लगाने की मांग की गई।

​मनरेगा में 100 दिन का रोजगार: मनरेगा में रोजगार कटौती पर चिंता जताते हुए कहा गया कि ग्रामीणों को अभी 20 दिन का काम भी नहीं मिला है। हर पात्र परिवार को पूरे 100 दिनों का रोजगार दिया जाए।

​रुका हुआ विकास फंड जारी हो: अलग-अलग ग्राम पंचायतों में पास हो चुके विकास कार्यों के लिए अटकी हुई राशि (फंड) को जल्द से जल्द जारी किया जाए।

​"ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं को दूर करना शासन-प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। क्षेत्र की जनता  के लिए हमारी लड़ाई लगातार जारी रहेगी।"

 — वतन चंद्राकर, जिला पंचायत सदस्य .

पेयजल संकट दूर करने रीवा में जल प्रबंधन पर महामंथन आज,एसडीएम और भूगर्भ वैज्ञानिक देंगे संरक्षण के गुर

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आरंग- ग्राम पंचायत रीवा में गहराते पेयजल संकट से निपटने के लिए आज सोमवार को जल प्रबंधन एवं संरक्षण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होगा। पीपला वेलफेयर फाउंडेशन और समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अफसर, विशेषज्ञ और ग्रामीण एक मंच पर जुटेंगे। फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया कि गांव में पानी की विकट समस्या को देखते हुए साल 2025 से यह कार्यशाला लगातार आयोजित की जा रही है, जिसके अब तक बेहद सकारात्मक परिणाम मिले हैं। कार्यशाला में मुख्य रूप से आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा, जनपद सीईओ अभिषेक बेनर्जी, पीएचई विभाग से ईई अनिल बच्चन, एसडीओ शुभ्रा बघेल, इंजीनियर रानू दिनकर और जिओ हाइड्रोलॉजिस्ट घनश्याम वर्मा,देवव्रत साहू शामिल होकर ग्रामीणों को वाटर रिचार्जिंग व जल सहेजने की तकनीक सिखाएंगे। इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर, जनपद सदस्य कृष्णा महेश साहू, सरपंच घंसियाराम साहू और फाउंडेशन के संरक्षक आनंदराम पत्रकारश्री,अध्यक्ष दूजेराम धीवर, शिक्षाविद मुरली मनोहर देवांगन, समाजसेवी पायलेट ओ के तिवारी,सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।




पर्यावरण संरक्षण पर रील्स/वीडियो बनाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जीतेंगे नकद इनाम

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पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की अनोखी पहल 

आरंग/रायपुर- पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए 'पीपला वेलफेयर फाउंडेशन छत्तीसगढ़' ने एक बेहद अनूठा और आकर्षक जनजागरण अभियान शुरू किया है। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया की ताकत को पहचानते हुए संस्था ने युवाओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यावरण से जोड़ने के लिए एक 'वीडियो बनाओ, इनाम पाओ' प्रतियोगिता की घोषणा की है। इस अभियान का डिजिटल मीडिया पार्टनर www.media24media.com है।

संस्था का मुख्य ध्येय वाक्य है:

​"जब तक पौधा, पेड़ न बन जाए। तरु-मित्र बनकर फर्ज निभाएं।"

​ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए सुनहरा मौका 

​इस अभियान के तहत कंटेंट क्रिएटर्स और रील्स बनाने वाले युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण के महत्व पर केंद्रित वीडियो बनाने होंगे। चयनित उत्कृष्ट वीडियो क्रिएटर्स को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कारों की श्रेणी इस प्रकार है:-

पुरस्कार राशि 

मोबाइल मास्टर आरंग की ओर से प्रथम पुरस्कार ₹ 2001/- नगद एवं प्रशस्ति पत्र, पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से 

द्वितीय पुरस्कार ₹ 1501/- नगद एवं प्रशस्ति पत्र एवं मोबाइल मास्टर आरंग की ओर से ही 

तृतीय पुरस्कार ₹ 1001/- नगद एवं प्रशस्ति पत्र

प्रतियोगिता के नियम और शर्तें: 

​ वीडियो की अवधि: रील्स या वीडियो की लंबाई 30 से 60 सेकंड के बीच होनी चाहिए।

​अपलोड और टैगिंग: वीडियो बनाने के बाद इसे अपने इंस्टाग्राम आईडी पर पोस्ट करना होगा। पोस्ट करते समय #piplawelfarefoundation और facebook पर Media24Media पेज पर  अनिवार्य रूप से टैग करना होगा।

​अंतिम तिथि: प्रविष्टि टैग करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की गई है (जो आवश्यकतानुसार परिवर्तनीय है)।

​ विशेष प्राथमिकता: वीडियो में 'पीपला फाउंडेशन' का लोगो इस्तेमाल करने वाले क्रिएटर्स को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।

नियम व व्यवस्था 

​आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह से एक  जनजागरण अभियान है। इसमें विजेताओं के चयन का सर्वाधिकार संस्था के पास सुरक्षित रहेगा और किसी भी स्तर पर कोई दावा-आपत्ति या चुनौती मान्य नहीं होगी।

व्हाट्सएप पर करें संपर्क: 

प्रतियोगिता और अभियान से जुड़ी किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी के लिए प्रतिभागी केवल व्हाट्सएप नंबर 9753896810 पर संपर्क कर सकते हैं।

​संस्था ने प्रदेश के सभी ऊर्जावान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और पर्यावरण प्रेमियों से इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और धरती को हरा-भरा बनाने में अपना डिजिटल योगदान देने की अपील की है।

अश्लील वीडियो से ब्लैकमेलिंग के बीच युवक की हत्या, महिला समेत तीन गिरफ्तार

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 कवर्धा। कबीरधाम जिले में युवक की हत्या के एक सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, अश्लील वीडियो के आधार पर कथित ब्लैकमेलिंग और दबाव से परेशान एक महिला ने अपने पति और देवर के साथ मिलकर युवक की हत्या कर दी। घटना के बाद शव को बोरी में भरकर दूसरे स्थान पर फेंक दिया गया था। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।


पुलिस के मुताबिक, चौकी पोंडी क्षेत्र के ग्राम बैहरसरी निवासी कोमल वर्मा 28 मई की रात से लापता था। परिजनों ने अगले दिन उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी दौरान थाना पांडातराई क्षेत्र के ग्राम सोंढा में एक बोरी के भीतर युवक का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

जांच के दौरान पुलिस ने मृतक की कॉल डिटेल और उसकी अंतिम लोकेशन की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि घटना से पहले उसकी लगातार बातचीत मंदाकिनी वर्मा नामक महिला से हो रही थी। संदेह के आधार पर पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस के अनुसार, महिला ने पूछताछ में बताया कि मृतक उसके निजी वीडियो के आधार पर उसे कथित रूप से ब्लैकमेल कर रहा था। आरोप है कि वह वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उस पर लगातार दबाव बनाता था। घटना वाली रात भी उसने महिला को मिलने के लिए कहा था।

महिला के बयान के अनुसार, इसी दौरान युवक को घर बुलाया गया, जहां उस पर लोहे के पाना से हमला किया गया। बाद में महिला, उसके पति रामस्नेही वर्मा और देवर ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को बोरी में भरकर ट्रैक्टर के जरिए दूसरे स्थान पर ले जाकर फेंक दिया गया।

पुलिस ने मामले में महिला, उसके पति और देवर को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

’मन की बात में गूंजा छत्तीसगढ़ का गौरव: मुख्यमंत्री साय ने कहा - यह प्रदेश की प्रतिभा और विरासत को राष्ट्रीय सम्मान मिलने का क्षण’

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और आमजनों के साथ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134वीं कड़ी का श्रवण किया। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व, प्रेरणा और आत्मविश्वास का क्षण बन गया, क्योंकि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय मंच से प्रदेश की प्रतिभा और सांस्कृतिक धरोहर दोनों का उल्लेख कर पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जब देश का सर्वाेच्च नेतृत्व किसी राज्य की उपलब्धियों और प्रतिभाओं का उल्लेख करता है, तो वह केवल व्यक्तियों का सम्मान नहीं होता, बल्कि करोड़ों प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं, परिश्रम और पहचान को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा मिलती है।


मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ आज देश के सकारात्मक प्रयासों, नवाचारों, प्रतिभाओं और प्रेरक जीवन यात्राओं को राष्ट्रीय पहचान देने वाला एक सशक्त मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने आज जशपुर जिले के छोटे से गांव घुइटांगर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले युवा धावक अनिमेष कुजूर की उपलब्धि का उल्लेख कर प्रदेश के युवाओं को यह संदेश दिया है कि सीमित संसाधन किसी प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं सकते, यदि उसके भीतर लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत का जुनून हो।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह की उपलब्धि को जिस आत्मीयता और प्रेरक शैली में प्रस्तुत किया, वह देश के युवाओं में नई ऊर्जा भरने वाला है। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान दोनों खिलाडि़यों से फोन पर संवाद करते हुए उल्लेख किया कि पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में महज दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा और इसे उन्होंने खेलों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का अद्भुत उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह केवल रिकॉर्ड टूटने की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के आत्मविश्वास, अनुशासन और विश्वस्तरीय सोच की कहानी है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा धावक अनिमेष कुजूर ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.15 सेकंड में पूरी कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है और राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए क्वालीफाई कर प्रदेश तथा देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अनिमेष की यात्रा विशेष रूप से प्रेरणादायक है, क्योंकि जशपुर के ग्रामीण परिवेश से निकलकर सैनिक स्कूल अंबिकापुर से शिक्षा प्राप्त करने वाले इस युवा ने सीमित परिस्थितियों में अपनी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचने का सफर तय किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष की उपलब्धि यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ की धरती प्रतिभाओं से परिपूर्ण है और उचित अवसर मिलने पर यहां के युवा विश्व पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री और अनिमेष कुजूर के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी की सोच विशेष रूप से प्रेरक है। प्रधानमंत्री से बातचीत में अनिमेष ने बताया कि किस प्रकार कोविड काल के दौरान खेल के प्रति रुचि बढ़ी, साथियों के प्रोत्साहन से एथलेटिक्स में प्रवेश हुआ और कठिन चुनौतियों तथा संदेहों के बावजूद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष ने यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय खिलाड़ी विश्वस्तरीय स्प्रिंटिंग में नई पहचान बना सकते हैं और भारतीय युवा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। यह आत्मविश्वास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में खेल भावना का अत्यंत प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया कि प्रतिस्पर्धा केवल एक-दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए नहीं, बल्कि देश का मान बढ़ाने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा कही गई यह बात कि ष्एक-दूसरे को चुनौती भी देना है, आगे निकलने का प्रयास भी करना है और साथ ही एक-दूसरे की मदद के लिए भी खड़े रहना है” वास्तव में भारत की नई खेल संस्कृति की पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भी इसी सोच के साथ प्रतिभाशाली खिलाडि़यों को प्रशिक्षण, बेहतर खेल अधोसंरचना और अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक मल्हार में ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत प्राप्त दुर्लभ ताम्र-पट्टिकाओं का उल्लेख किया जाना भी छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 1400 से 1500 वर्ष पुरानी मानी जा रही ये ताम्र-पट्टिकाएं पांडुवंशी शासनकाल, विशेष रूप से महर्षि बालार्जुन काल से जुड़ी मानी जा रही हैं, जो उस समय की शासन व्यवस्था, संस्कृति, धर्म और सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई यह धरोहर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा का सशक्त प्रमाण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार भारत और छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मल्हार की यह खोज केवल पुरातात्विक उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक स्मृति, ऐतिहासिक चेतना और आने वाली पीढि़यों के ज्ञान-विस्तार से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय मंच से ऐसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं, तो इससे विरासत संरक्षण के प्रति समाज में नई जागरूकता और सम्मान की भावना भी विकसित होती है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ एपिसोड इस बात का सशक्त उदाहरण है कि नया भारत अपनी प्रतिभा, परिश्रम, खेल भावना, संस्कृति और विरासत - सभी को समान सम्मान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर जशपुर का युवा खिलाड़ी देश को नई गति देने का सपना देख रहा है और दूसरी ओर मल्हार की धरोहर भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कह रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह दोहरी उपलब्धि पूरे प्रदेश में आत्मगौरव, प्रेरणा और नई ऊर्जा का संचार करने वाली है। इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित  थे।

कल शराब खरीदने का नहीं मिलेगा मौका, जिले में ड्राई डे घोषित

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 गरियाबंद। त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव को शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जनपद पंचायत छुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत करकरा में सरपंच पद के उपचुनाव को देखते हुए संबंधित क्षेत्र में शुष्क दिवस (ड्राई डे) घोषित किया गया है।


कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी बी.एस. उइके ने जारी आदेश में खड़मा स्थित विदेशी कम्पोजिट मदिरा दुकान को मतदान समाप्ति से 48 घंटे पूर्व बंद रखने के निर्देश दिए हैं। आदेश के तहत निर्धारित अवधि में शराब की बिक्री, वितरण और परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

प्रशासन का कहना है कि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा मतदाताओं को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वातावरण उपलब्ध कराने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा क्षेत्र में अवैध शराब के संग्रहण, परिवहन और बिक्री पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी।

जिला प्रशासन ने आबकारी विभाग और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की अनियमितता या शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

 

गरियाबंद सर्किट हाउस में आग से हड़कंप, स्टोर रूम का सामान जलकर खाक

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 गरियाबंद। जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में आज रविवार सुबह अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। सुबह करीब 6:30 बजे परिसर से धुआं उठता देख कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने तत्काल फायर ब्रिगेड व प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी। देखते ही देखते आग ने स्टोर रूम को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां रखा लाखों रुपये मूल्य का सामान जलकर नष्ट हो गया।


सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही मिनटों में स्टोर रूम में रखा फ्रिज, अलमारी, सीलिंग फैन सहित अन्य उपयोगी सामग्री जलकर राख हो गई।

प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। घटना के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी मौके पर पहुंचे और नुकसान का आकलन करने के साथ तकनीकी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

गनीमत रही कि घटना के समय सर्किट हाउस में ठहरे सभी लोग सुरक्षित थे और समय रहते बाहर निकल आए। आगजनी में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है।

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष लेकर मंगोलिया पहुंचा IAF का ‘गजराज’ विमान

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नई दिल्ली- भारतीय वायु सेना के IL-76 सामरिक एयरलिफ्ट विमान ‘गजराज’ ने 30 मई 2026 को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को दिल्ली से मंगोलिया पहुंचाया। विमान ने रातभर की उड़ान भरने के बाद भारतीय समयानुसार सुबह 11:25 बजे मंगोलिया में सफलतापूर्वक लैंडिंग की।

यह मिशन भारत के उन प्रयासों के समर्थन में संचालित किया गया, जिनका उद्देश्य मित्र देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।

यह एयरलिफ्ट मिशन राष्ट्रीय उद्देश्यों की पूर्ति में सहयोग करने तथा भारत की वैश्विक सांस्कृतिक पहुंच को बढ़ावा देने में भारतीय वायु सेना की क्षमता को दर्शाता है।


बदलती खेती में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी बन रहे किसानों की नई पसंद

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कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा का नया विकल्प : नैनो उर्वरक

वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ते कदम, नैनो उर्वरकों से किसानों को मिल रहा फायदा

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से खेती में बचत, उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा

रायपुर- खेती में बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच अब नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक उपयोगी और लोकप्रिय विकल्प बन गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपयोग करें तो इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बेहतर बनाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।


विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाए रखने के लिए उर्वरकों के उपयोग के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी होगा। यही कारण है कि अब किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को लेकर रुचि बढ़ रही है।

छत्तीसगढ़ सहित देश के अधिकांश धान उत्पादक क्षेत्रों में सामान्यतः प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है।

मौजूदा कीमतों के अनुसार एक बोरी यूरिया की कीमत लगभग 270 रुपये और एक बोरी डीएपी की कीमत लगभग 1350 रुपये है। इस प्रकार केवल यूरिया और डीएपी पर प्रति एकड़ करीब 1900 से 2200 रुपये तक खर्च हो जाता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव लगभग एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर माना जाता है। फसल में दो चरणों में छिड़काव के जरिए पारंपरिक यूरिया की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यदि किसान 2 बोरी ठोस यूरिया की जगह 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करते हैं तो अनुमानित खर्च 100 रुपये प्रति एकड़ बचत होती है। दो बोरी पारंपरिक यूरिया का मूल्य लगभग 540 रुपये है। इसके स्थान पर 2 बोतल नैनो यूरिया| लगभग 450-500 में आता है। यानि सीधे खाद लागत में बचत के साथ-साथ परिवहन, भंडारण और मजदूरी खर्च में भी कमी आती है।

इसी प्रकार कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि 50 किलो डीएपी की पूरी मात्रा उपयोग करने के बजाय यदि किसान 25 किलो डीएपी के साथ 500 मिली नैनो डीएपी का उपयोग करें तो प्रति एकड़ लगभग 75 से 150 रुपये तक की बचत होती है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पारंपरिक यूरिया का बड़ा हिस्सा मिट्टी, पानी और वातावरण में नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत नैनो यूरिया के सूक्ष्म कण सीधे पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं। इससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक संतुलित उपयोग की स्थिति में इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आए है।फसल की बढ़वार बेहतर होती है। पौधों की हरियाली लंबे समय तक बनी रहती है। दानों का भराव मजबूत होता है।उत्पादन की गुणवत्ता सुधरती है। उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। कई कृषि परीक्षणों में 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि के संकेत भी मिले हैं।

कृषि क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा रासायनिक अवशेष कम होते हैं।भूजल प्रदूषण घटता है।मिट्टी की जैविक सक्रियता बेहतर बनी रहती है।पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है।इसी कारण वैज्ञानिक खेती में अब संतुलित उर्वरक उपयोग पर अधिक जोर दिया जा रहा है ।

वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित रूप से नैनो उर्वरकों का उपयोग बढ़ाते हैं तोआयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी है।विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। देश में उर्वरक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। उत्पादन इकाइयों में रोजगार बढ़ेगा। कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा।

कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। रायपुर जिले की समितियों में वर्तमान मे यूरिया की उपलब्धता  9,102 मीट्रिक टन और कुल भंडारित यूरिया की मात्रा 10,732 मीट्रिक टन है, जब कि डीएपी की उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन और कुल भंडारित डीएपी की मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है। इसके साथ ही कृषि सेवा केंद्रों और समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है ताकि किसान आवश्यकता और उपयोगिता के आधार पर इन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों का समन्वय ही खेती को अधिक लाभकारी बनाएगा। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प माना जा रहा है, जो कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा तीनों मोर्चों पर किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

CG Rain Alert : छत्तीसगढ़ के 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट: तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी

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 CG Rain Alert : छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर ने प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार सुबह तक कई क्षेत्रों में तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।


मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है।

इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने धमतरी, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, जशपुर और रायगढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में मध्यम दर्जे के तूफान, तेज बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। इन क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है।

इन जिलों में येलो अलर्ट

बिलासपुर, कांकेर, नारायणपुर, बलरामपुर, सरगुजा, कोरबा, जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, महासमुंद और गरियाबंद जिलों में हल्के से मध्यम स्तर की बारिश, गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग की सलाह

मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग ने लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहने की सलाह दी है। इसके अलावा खुले मैदानों और खेतों में जाने से बचने, मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने तथा तेज आंधी के दौरान वाहनों को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले 24 घंटों तक मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है और कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

छत्तीसगढ़ में आंधी-तूफान का कहर: कोरबा में पेड़ की डाल गिरने से तीन दोस्तों की मौत

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कोरबा/बिलासपुर/रायगढ़। छत्तीसगढ़ में शनिवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी, तूफान और बारिश ने जहां भीषण गर्मी से राहत दिलाई, वहीं कई स्थानों पर भारी नुकसान भी पहुंचाया। कोरबा जिले में पेड़ की डाल गिरने से तीन किशोरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि बिलासपुर और रायगढ़ में बिजली व्यवस्था चरमरा गई तथा जनजीवन प्रभावित रहा।


पेड़ के नीचे खड़े तीन दोस्तों की मौत

कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र के चोरका दांड गांव में आंधी-तूफान के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, तेज बारिश और आंधी से बचने के लिए तीन युवक एक पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान पेड़ की एक भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतकों की पहचान शिवराम टेकाम (14 वर्ष), कमलेश बड़ा (18 वर्ष) और दिनेश तिर्की (17 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों आपस में घनिष्ठ मित्र थे और एक ही गांव के निवासी थे। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

सूचना मिलने पर पाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।

बिलासपुर में बारिश के साथ बिजली संकट

बिलासपुर में नवतपा की भीषण गर्मी के बीच हुई बारिश से लोगों को राहत मिली, लेकिन इसके साथ ही शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। बारिश शुरू होते ही कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बिजली गुल होने से विद्युत विभाग की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।

रायगढ़ में जलभराव, घंटों ठप रही बिजली

रायगढ़ में तेज आंधी और बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। वहीं आंधी के कारण विद्युत आपूर्ति भी बाधित हो गई और कई इलाकों में घंटों तक बिजली गुल रही।

शहर के सुभाष चौक में तेज हवा के चलते एक बड़ा होर्डिंग सड़क पर गिर गया। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन आसपास मौजूद लोग बाल-बाल बच गए।

मौसम विभाग ने जारी की सतर्कता की सलाह

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है। विभाग ने आंधी, तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताते हुए लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने तथा आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है।

 

कसौली में भीषण वनाग्नि पर भारतीय वायुसेना का सफल नियंत्रण, पहली बार रात में ‘बांबी बकेट’ अभियान संचालित

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भारतीय वायुसेना को 26 मई को कसौली के निकट जंगल में लगी आग की सूचना मिली, जिसके बाद स्थिति का आकलन करने के लिए तुरंत एक चीता हेलीकॉप्टर रवाना किया गया। इसके बाद नागरिक प्रशासन की सहायता के तहत भारतीय वायुसेना ने Mi-17 V5 मध्यम श्रेणी के हेलीकॉप्टरों को तैनात कर हिमाचल प्रदेश के कसौली क्षेत्र में लगी भीषण वनाग्नि पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पाया।

सोलन जिले के कसौली बीट क्षेत्र में फैली इस आग ने लगभग 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था। आग से रिहायशी इलाकों, महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे तथा सैन्य प्रतिष्ठानों को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।

भारतीय वायुसेना ने राज्य प्रशासन, वन विभाग, भारतीय सेना और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर समन्वित अभियान चलाया। आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टरों द्वारा लगातार ‘बांबी बकेट’ ऑपरेशन संचालित किए गए। इन अभियानों के लिए पानी सुखना झील से लिया गया, जहां प्रत्येक उड़ान में लगभग 2,000 से 2,500 लीटर पानी ले जाया गया।

दिन-रात लगातार चलाए गए इस हवाई अग्निशमन अभियान के दौरान प्रभावित क्षेत्र में 93,000 लीटर से अधिक पानी डाला गया। वायुसेना की त्वरित और समन्वित कार्रवाई ने आग को बड़े हादसे में बदलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारतीय वायुसेना ने पहली बार नाइट विज़न गॉगल्स (NVGs) की सहायता से रात के समय सफलतापूर्वक बांबी बकेट ऑपरेशन संचालित किए। पहाड़ी क्षेत्र और सीमित दृश्यता जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए इन अभियानों ने वायुसेना के पायलटों की उच्च स्तरीय उड़ान क्षमता, सटीकता और परिचालन दक्षता का प्रदर्शन किया।

रात्रिकालीन अग्निशमन अभियानों में मौजूद जोखिमों के बावजूद वायुसेना के वायुयोद्धाओं ने अपने साहस, पेशेवर कौशल और समर्पण के बल पर मिशन को सुरक्षित एवं प्रभावी ढंग से पूरा किया।

हवाई अभियानों के साथ-साथ ग्राउंड स्टाफ ने भी कठिन मौसम परिस्थितियों में निरंतर कार्य करते हुए हेलीकॉप्टरों की त्वरित सर्विसिंग और पुनः उड़ान सुनिश्चित की। उनकी मेहनत के कारण चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के अग्निशमन अभियान जारी रखा जा सका।

भारतीय वायुसेना की यह कार्रवाई आपदा प्रबंधन, त्वरित प्रतिक्रिया और नागरिक प्रशासन की सहायता में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।


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