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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की मिसाल, मानव-वन्यजीव संघर्ष में आई बड़ी कमी

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 उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता सामने आई है। यहां फायर वॉचर्स और वाटर वॉचर्स की प्रभावी तैनाती के चलते मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले संघर्ष में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

वन विभाग द्वारा लागू की गई इस रणनीति के तहत जंगलों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिससे वन्यजीवों की गतिविधियों पर सतत नजर रखी जा रही है। साथ ही, जल स्रोतों के संरक्षण और प्रबंधन से जानवरों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाया गया है, जिससे उनके आबादी क्षेत्रों में भटकने की घटनाएं कम हुई हैं।

इस पहल का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। यह न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी राहत की बात है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है, जहां इस तरह के उपाय अपनाकर मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

कर्नाटक और केरल के राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता व रखरखाव की समीक्षा, नितिन गडकरी ने दिए सख्त निर्देश

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नितिन गडकरी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, ने कर्नाटक और केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की। यह समीक्षा मीडिया और सोशल मीडिया से प्राप्त फीडबैक के आधार पर की गई।

नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा सहित National Highways Authority of India (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और परियोजना ठेकेदारों के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक के दौरान गडकरी ने कर्नाटक में 7,926 किलोमीटर और केरल में 61 परियोजनाओं के तहत 1,513 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव कार्यों की समीक्षा की।

उन्होंने समय पर कार्य पूर्ण करने, उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि राजमार्ग बुनियादी ढांचा टिकाऊ और प्रभावी बन सके। साथ ही, जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने और आधुनिक निर्माण पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए।

केंद्रीय मंत्री ने मानसून से पहले पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और यातायात के सुचारू संचालन के लिए निवारक उपायों और मजबूत प्रतिक्रिया प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने अधिकारियों को मानसून के लिए अग्रिम योजना बनाने के निर्देश भी दिए, जिसमें जल निकासी प्रबंधन, ढलान संरक्षण उपाय और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करना शामिल है, ताकि बाधाओं को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

थाईलैंड में लघु-स्तरीय मत्स्य सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रखा पक्ष

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डॉ. अभिलक्ष लिखी सचिव, मत्स्य विभाग, भारत सरकार, ने 27 से 30 अप्रैल 2026 तक हुआ हिन में आयोजित 5वें विश्व लघु-स्तरीय मत्स्य कांग्रेस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस सम्मेलन का आयोजन Food and Agriculture Organization (FAO) और TBTI ग्लोबल द्वारा किया गया। सम्मेलन का विषय “न्यायपूर्ण समन्वय, युवा भविष्य और पुनर्योजी ज्ञान के लिए लघु-स्तरीय मत्स्य” रहा।

अपने संबोधन में डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि लघु-स्तरीय मत्स्य और जलीय कृषि सामाजिक-आर्थिक विकास, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जहां 19.7 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। साथ ही, आधुनिक तकनीक और निवेश के कारण समुद्री उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने सतत और ट्रेसएबल मत्स्य पालन, डिजिटल परिवर्तन तथा सामुदायिक भागीदारी आधारित दृष्टिकोण पर जोर दिया। साथ ही बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही, जिसमें भारत वर्तमान में अध्यक्ष है।

डॉ. लिखी ने FAO द्वारा आयोजित एक पैनल चर्चा में भी भाग लिया, जिसमें राष्ट्रीय कार्ययोजना (NPOA-SSF) के माध्यम से लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, आजीविका, सांस्कृतिक पहचान और तटीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

चर्चा में यह बात सामने आई कि लघु-स्तरीय मछुआरों की संस्थागत और तकनीकी क्षमता बढ़ाना, वित्त और बुनियादी ढांचे तक पहुंच सुनिश्चित करना तथा नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। साथ ही, सतत और समावेशी मत्स्य प्रबंधन के लिए सामुदायिक आधारित और पारिस्थितिकी तंत्र आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया।

वैश्विक स्तर पर लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र लगभग 90% मछुआरों को रोजगार देता है और कुल मछली उत्पादन का लगभग 40% योगदान करता है। एशिया में यह क्षेत्र करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है, लेकिन इसे जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और औद्योगिक मत्स्य से प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में लगभग 40 लाख समुद्री मछुआरे इस क्षेत्र से जुड़े हैं, जो मुख्यतः 12 समुद्री मील के भीतर कार्य करते हैं। सरकार द्वारा Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) जैसी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत सरकार ने 2015 से अब तक मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 39,272 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। इन पहलों का उद्देश्य मछुआरों की आय बढ़ाना, संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।

यह सम्मेलन लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।

आईएनएस सुदर्शिनी की लास पालमास यात्रा संपन्न, समुद्री कूटनीति को मिली मजबूती

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भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 26 अप्रैल 2026 को कैनरी द्वीप समूह के लास पालमास में अपनी तीन दिवसीय ऐतिहासिक पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक संपन्न की। यह यात्रा उसके लोकायन 26 ट्रांसओशैनिक अभियान का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर रही। स्पेन के इस द्वीप समूह की यात्रा ने समुद्री कूटनीति और पेशेवर सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने कैनरी द्वीप नौसैनिक कमान के प्रमुख सैंटियागो डे कोल्सा ट्रुएबासे मुलाकात की। इस वार्ता में दोनों नौसेनाओं के बीच मजबूत होते संबंधों और बढ़ती साझेदारी पर जोर दिया गया।

पोर्ट कॉल के दौरान जहाज को आम लोगों के लिए भी खोला गया, जहां स्थानीय समुदाय और भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में पहुंचे। आगंतुकों को जहाज का भ्रमण कराया गया, जिसमें भारत की समृद्ध समुद्री विरासत, महासागरीय यात्रा के अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मित्रता के भाव को साझा किया गया।

अब आईएनएस सुदर्शिनी अपनी अगली मंजिल मिंडेलो के लिए रवाना हो गया है, जो ट्रांस-अटलांटिक यात्रा से पहले उसका अंतिम अफ्रीकी पड़ाव होगा। अब तक यह जहाज पश्चिम एशिया, भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका के कई देशों में सात पोर्ट कॉल और नौसैनिक सहभागिता पूरी कर चुका है।

यह यात्रा भारतीय नौसेना की “मित्रता और विश्वास के पुल” बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए।

न्यूज़ीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले ने इसे “एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला अवसर” बताते हुए कहा कि यह समझौता निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजित करेगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय और दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक एवं खेल संबंधों का भी उल्लेख किया।

वहीं, पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता विकसित देशों के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि यह समझौता किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड की ओर से भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश की संभावना जताई गई है।

यह FTA भारत के “विकसित भारत 2047” विजन के अनुरूप है और पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा किए गए प्रमुख व्यापार समझौतों में शामिल है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत को न्यूज़ीलैंड के बाजार में 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जिससे MSME सेक्टर और श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ा लाभ होगा।

समझौते के तहत भारत ने लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर रियायत दी है, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, कृषि उत्पाद और कुछ औद्योगिक वस्तुओं को संरक्षण दिया गया है। इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। सेब, कीवी और मनुका शहद जैसे उत्पादों के आयात के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे संतुलन बना रहे।

सेवा क्षेत्र में भारत को 118 सेक्टरों में बाजार पहुंच मिलेगी, जिसमें आईटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। साथ ही, भारतीय पेशेवरों के लिए 5000 विशेष वीज़ा का प्रावधान किया गया है, जिससे रोजगार और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के अवसर बढ़ेंगे।

छात्रों के लिए भी यह समझौता लाभकारी है। अब भारतीय छात्रों को न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने और पढ़ाई के बाद नौकरी के अधिक अवसर मिलेंगे। युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीज़ा की सुविधा भी दी गई है।

यह समझौता MSME, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और नवाचार को बढ़ावा देगा। साथ ही, भारत के फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को न्यूज़ीलैंड के बाजार में आसान प्रवेश मिलेगा।

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के तहत भारतीय भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों को भी न्यूज़ीलैंड में मान्यता मिलने का रास्ता साफ होगा।

यह समझौता व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने, लागत कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर देता है। सीमा शुल्क निकासी को तेज किया जाएगा और डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।

सांस्कृतिक और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में भी यह समझौता ऐतिहासिक है। AYUSH और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक पहचान दिलाने में यह अहम भूमिका निभाएगा।

कुल मिलाकर, यह समझौता भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच व्यापार, निवेश, रोजगार और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करेगा।

रूस के बाद भारत बनेगा फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश: डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि रूस के बाद भारत दुनिया का दूसरा देश होगा जो व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करेगा। “स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स” विषय पर सांसदों और विधायकों की कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का विकास कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार क्रिटिकलिटी प्राप्त की।

यह रिएक्टर Indira Gandhi Centre for Atomic Research (IGCAR) द्वारा विकसित और BHAVINI द्वारा निर्मित है। यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत को दर्शाता है। इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग होता है, जो जितना ईंधन खर्च करता है उससे अधिक उत्पन्न करता है। इस उपलब्धि के साथ भारत अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता तरुण चुघ ने की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि भारत को परमाणु रणनीति के तीसरे चरण में थोरियम के उपयोग की दिशा में ले जाती है। पूरी तरह संचालन में आने के बाद भारत, रूस के बाद, व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चलाने वाला दूसरा देश बन जाएगा।

वर्तमान में केवल रूस ही व्यावसायिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित कर रहा है, जबकि भारत अपने रिएक्टर के कमीशनिंग के उन्नत चरण में है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे कई देशों ने पहले प्रयोगात्मक फास्ट रिएक्टर विकसित किए थे, लेकिन इनमें से अधिकांश कार्यक्रम अब बंद हो चुके हैं।

मंत्री ने कहा कि प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की स्थापना भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो परमाणु ईंधन के अधिक कुशल उपयोग को सक्षम बनाता है और थोरियम के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक में केवल कुछ ही देशों ने प्रगति की है, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर एक विशेष स्थान मिलता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और दीर्घकालिक स्थिरता लक्ष्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, खासकर 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में।

उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को भविष्य में निरंतर और विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जहां परमाणु ऊर्जा अपरिहार्य होगी।

मंत्री ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs), नीतिगत समर्थन और SHANTI एक्ट जैसी पहलों के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देंगे। “न्यूक्लियर मिशन” के तहत 20,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 2033 तक 5 SMRs स्थापित करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि SMRs उद्योगों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों, दूरदराज के इलाकों और ग्रिड से दूर क्षेत्रों में बिजली उत्पादन के लिए उपयोगी होंगे।

अंत में, उन्होंने कहा कि परमाणु, नवीकरणीय और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का संतुलित मिश्रण 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पोते ने दादी की हत्या, लगातार दूसरी वारदात से शहर में दहशत

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 डोंगरगढ़। शहर में एक बार फिर सनसनीखेज घटना सामने आई है। वार्ड क्रमांक 24 स्थित कश्मीरी पारा में एक युवक ने अपनी ही दादी की चाकू मारकर हत्या कर दी। घटना सोमवार दोपहर की बताई जा रही है, जिसके बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी पोते ने धारदार चाकू से अपनी बुजुर्ग दादी पर ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे हिरासत में ले लिया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक आरोपी लंबे समय से नशे का आदी था और उसका दादी के साथ अक्सर विवाद होता रहता था। कई बार मारपीट जैसी स्थिति भी बन चुकी थी। पुलिस शुरुआती जांच में नशे की लत और पारिवारिक तनाव को घटना की मुख्य वजह मान रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू की। एफएसएल और फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया, जो घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में लगी है। आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।

लगातार घटनाओं से बढ़ी चिंता

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले रामाटोला क्षेत्र में शादी समारोह के दौरान चाकूबाजी में एक युवक की मौत हुई थी। लगातार दो दिनों में हुई इन घटनाओं ने डोंगरगढ़ में कानून-व्यवस्था और सामाजिक हालात को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच के बाद जल्द ही पूरी स्थिति स्पष्ट की जाएगी और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में शादी बना मौत का मैदान: पुरानी रंजिश में युवक की चाकू मारकर हत्या

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 डोंगरगढ़ (राजनांदगांव)। शादी समारोह के दौरान पुरानी रंजिश ने खूनी रूप ले लिया। ग्राम रामाटोला में आयोजित एक विवाह कार्यक्रम के बीच चाकूबाजी की घटना में 20 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक घायल हो गया।


जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान योमिश सिन्हा (20), निवासी रामाटोला के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ग्राम सांखरा में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान योमिश का कुछ युवकों से विवाद हुआ था। इसी रंजिश को लेकर वारदात को अंजाम दिया गया।

बताया गया कि रविवार देर रात रामाटोला में एक अन्य शादी समारोह चल रहा था। इसी दौरान आरोपियों ने योमिश को घेर लिया। पहले उसके साथ मारपीट की गई, इसके बाद चाकू से हमला कर दिया गया। गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना में एक अन्य युवक भी घायल हुआ है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

वारदात के बाद गांव में तनाव का माहौल है। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

गरियाबंद में नहर में बहता मिला गांजा, पुलिस ने 17 पैकेट जब्त किए

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 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में गांजा तस्करी का अनोखा मामला सामने आया है। मोहतरा से अतरमरा के बीच नहर में गांजा से भरे पैकेट बहते हुए दिखाई दिए। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने एक-एक कर 17 पैकेट बरामद किए।


जानकारी के अनुसार, पाण्डुका थाना क्षेत्र अंतर्गत फिंगेश्वर वितरक शाखा नहर में गांजा से भरे पैकेट बहने की सूचना पुलिस को मिली थी। यह स्थान नेशनल हाईवे-130 से करीब 5 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नहर से पैकेट निकालने की कार्रवाई शुरू की।

पुलिस के अनुसार, बरामद पैकेटों में करीब 68 किलोग्राम से अधिक गांजा होने की आशंका है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 7 लाख रुपये बताई जा रही है।

प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए तस्करों ने गांजा से भरे पैकेट नहर में फेंक दिए होंगे। फिलहाल पुलिस आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि तस्करों तक पहुंचा जा सके।

पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं यह मादक पदार्थों की तस्करी का नया तरीका तो नहीं है। मामले की जांच जारी है।

शादी के कार्ड बांट रहा था कांग्रेस नेता, तभी पहुंची पुलिस... दुष्कर्म केस में 12 दिन पहले गिरफ्तार

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 कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शादी की तैयारियों के बीच कांग्रेस नेता रवि चंद्रवंशी को दुष्कर्म के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनकी शादी 7 मई को तय थी, लेकिन उससे 12 दिन पहले ही पुलिस कार्रवाई होने से मामला चर्चा में आ गया है।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी की महिला मित्र ने कवर्धा महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में महिला ने बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से रवि चंद्रवंशी के साथ रिश्ते में थी। आरोप है कि शादी का झांसा देकर आरोपी ने कई बार शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपी को रायपुर से गिरफ्तार किया और 26 अप्रैल को कवर्धा लाया गया। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के समय वह शादी के कार्ड बांट रहा था।

रवि चंद्रवंशी कवर्धा जिला किसान कांग्रेस संघ का अध्यक्ष बताया जा रहा है। वह पहले जोगी कांग्रेस से भी जुड़ा रहा है और पंडरिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुका है। करीब दो वर्ष पहले उसने कांग्रेस में वापसी की थी, जिसके बाद उसे संगठन में जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

कवर्धा एसडीओपी आशीष शुक्ला ने बताया कि पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

छत्तीसगढ़ में बारातियों से भरी बस में लगी आग, कूदकर बचाई जान… बड़ा हादसा टला

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 बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शादी समारोह के बीच बड़ा हादसा टल गया। बारातियों से भरी एक चलती बस में अचानक आग लग गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई।


राहत की बात यह रही कि सभी यात्री समय रहते बस से बाहर निकल गए, जिससे जनहानि नहीं हुई।

मिली जानकारी के अनुसार, शर्मा ट्रेवल्स की बस (CG 07 E 1171) कांकेर जिले के अरौद गांव से बारातियों को लेकर बालोद जिले के बड़गांव जा रही थी। इसी दौरान पुरुर थाना क्षेत्र के जगतरा मंदिर के पास चलती बस में अचानक आग लग गई।

आग लगते ही बस में सवार लोगों में चीख-पुकार मच गई। यात्रियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बस से उतरकर अपनी जान बचाई। कुछ ही देर में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और वाहन जलकर खाक हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।


प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।
यह घटना एक बार फिर यात्री वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

स्कूलों में जल्द शुरू होंगी गर्मियों की छुट्टियां, राज्यवार जानें पूरी डिटेल्स

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 नई दिल्ली। देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और लू ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान का असर सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। कई राज्यों में सरकार और स्कूल प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छुट्टियों और स्कूल टाइमिंग में बदलाव शुरू कर दिया है। ऐसे में अभिभावकों के मन में सवाल है कि स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां कब से शुरू होंगी और कितने दिनों तक रहेंगी।


बढ़ती गर्मी को लेकर प्रशासन सतर्क

मौसम विभाग ने कई राज्यों में हीटवेव और तेज गर्मी को लेकर अलर्ट जारी किया है। राजधानी दिल्ली में भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। तापमान आने वाले दिनों में 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। बच्चों को लू और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए कई स्कूलों में हर घंटे वॉटर बेल बजाई जा रही है, ताकि छात्र समय-समय पर पानी पी सकें।

कई राज्यों में बदले स्कूल के नियम

गर्मी के बढ़ते असर को देखते हुए कई राज्यों ने अपने स्तर पर फैसले लिए हैं। छत्तीसगढ़, ओडिशा और केरल जैसे राज्यों में गर्मी की छुट्टियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। वहीं कुछ राज्यों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, ताकि बच्चे तेज धूप से बच सकें। कई जगह स्कूल सुबह जल्दी खोले जा रहे हैं।

दिल्ली में कब से शुरू होंगी छुट्टियां?

दिल्ली के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां आमतौर पर मई के दूसरे सप्ताह से शुरू होती हैं। पिछले शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार 11 मई से अवकाश शुरू हुआ था। ऐसे में इस बार भी मई के दूसरे सप्ताह से छुट्टियां शुरू होने की संभावना है। सरकार जल्द इस पर अंतिम निर्णय ले सकती है।

करीब 50 दिन तक बंद रह सकते हैं स्कूल

पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखें तो दिल्ली में गर्मी की छुट्टियां लगभग 50 दिनों तक रहती हैं। पिछले साल स्कूल 11 मई से 30 जून तक बंद रहे थे। इस बार भी इसी तरह का शेड्यूल लागू होने की संभावना है। हालांकि, स्कूल खुलने से कुछ दिन पहले शिक्षकों को बुलाया जा सकता है।

यूपी में बदला स्कूल टाइम और छुट्टियों का शेड्यूल

उत्तर प्रदेश में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। गाजियाबाद और लखनऊ जैसे शहरों में स्कूल का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक कर दिया गया है। वहीं गर्मी की छुट्टियां 20 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चल सकती हैं।

बच्चों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता

कुल मिलाकर, बढ़ती गर्मी को देखते हुए राज्यों में स्कूलों की छुट्टियों और समय में बदलाव किया जा रहा है, ताकि बच्चों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

छत्तीसगढ़ में सामूहिक विवाह बना सामाजिक एकता का उत्सव, मुख्यमंत्री ने 13 नवदंपतियों को दिया आशीर्वाद

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 रायपुर : दुर्ग जिले के ग्राम भरर (जामगांव-आर) में आयोजित तहसील स्तरीय विशाल कर्मा महोत्सव एवं सामूहिक आदर्श विवाह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा, जहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सहभागिता करते हुए 13 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया और उनके सुखमय दांपत्य जीवन एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज भवन पाटन में शेड निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही ग्राम भरर पंचायत में शौचालय एवं शेड निर्माण तथा ग्राम पंचायत में सीसी रोड निर्माण के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा भी की, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज को छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और गौरवशाली समाज बताते हुए माता कर्मा के योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि माता कर्मा की भक्ति और सेवा भावना समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रही है। इस दौरान उन्होंने स्वर्गीय ताराचंद साहू को भी नमन किया और उनके साथ कार्य करने के अपने अनुभव साझा किए।

राज्य सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले 28 महीनों में राज्य में सुशासन स्थापित करने के साथ-साथ “मोदी की गारंटी” को पूरा करने की दिशा में ठोस कार्य किए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि राज्य में 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। किसानों को बकाया बोनस राशि का भुगतान, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी तथा “महतारी वंदन योजना” के माध्यम से महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और सिलाई-कढ़ाई, किराना दुकान सहित अन्य छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “रामलला दर्शन योजना” के अंतर्गत दो वर्षों में लगभग 42 हजार लोगों को लाभ मिला है । उन्होंने बस्तर क्षेत्र में नक्सल समस्या के उन्मूलन और विकास कार्यों में आई तेजी को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

ऊर्जा क्षेत्र की पहल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 की शुरुआत मार्च 2026 में की गई है, जो उन उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जिनका बिजली बिल लंबे समय से बकाया है। “मोर बिजली ऐप” के माध्यम से उपभोक्ता मोबाइल से ऑनलाइन पंजीकरण कर अपनी पात्रता की जांच कर सकते हैं। इस योजना के तहत बकाया राशि पर लगने वाले ब्याज या सरचार्ज में 100 प्रतिशत छूट दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि गांव-गांव में अटल डिजिटल केंद्र खोलकर डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाया जा रहा है, जबकि प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में सुशासन को सुदृढ़ करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए गए हैं, जिससे विकास कार्यों में तेजी आई है।

इस अवसर पर सांसद विजय बघेल, कमिश्नर सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर अभिजीत सिंह, अध्यक्ष जिला साहू संघ नंदलाल साहू, अध्यक्ष तेलघानी बोर्ड जितेन्द्र साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।

12 साल बाद गुरु का महासंगम: कर्क में गोचर से बनेगा ‘हंस राजयोग’, 3 राशियों के लिए सुनहरा समय

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 नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति (गुरु) अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेंगे। करीब 12 साल बाद होने वाला यह गोचर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे शक्तिशाली ‘हंस राजयोग’ का निर्माण होगा। यह योग 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा और विशेष रूप से कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।


ज्योतिषियों के मुताबिक, गुरु का कर्क राशि में गोचर शुभ फल देने वाला होता है। इस दौरान गुरु अपनी पूर्ण शक्ति में रहते हैं और जातकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करते हैं। जून से अक्टूबर तक का यह लगभग पांच महीनों का समय आर्थिक, करियर और सामाजिक दृष्टि से उन्नति का संकेत दे रहा है।

कर्क राशि:

गुरु का गोचर आपकी ही राशि में होने से ‘हंस राजयोग’ का सबसे अधिक लाभ कर्क राशि वालों को मिलेगा। इस दौरान आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। व्यापार में निवेश के लिए समय अनुकूल रहेगा, वहीं करियर में भी नई संभावनाएं बन सकती हैं।

वृश्चिक राशि:

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह गोचर भाग्य में वृद्धि का संकेत दे रहा है। लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं। करियर में नई दिशा मिलेगी और नौकरी परिवर्तन के इच्छुक लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं।

मीन राशि:

मीन राशि के स्वामी गुरु ही हैं, ऐसे में उनका उच्च राशि में गोचर शुभ परिणाम देगा। इस अवधि में आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और पुराने निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी, वहीं प्रेम संबंधों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा।

ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर कई लोगों के लिए तरक्की और सफलता के नए द्वार खोल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर प्रभाव में अंतर संभव है।

छत्तीसगढ़ का बरनवापारा अभयारण्य बना विलुप्ति के कगार पर पहुंचे काले हिरणों के पुनर्जीवन का मजबूत उदाहरण

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स्थानीय विलुप्ति से लेकर लगभग 200 की संख्या तक पहुँचे काले हिरण : ‘मन की बात’ में मिली राष्ट्रीय पहचान

रायपुर- यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के आज के प्रसारण में छत्तीसगढ़ के काले हिरण के संरक्षण प्रयासों का उल्लेख करते हुए  सराहना की। इसने न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान को सुदृढ़ किया है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे लोगों का मनोबल भी बढ़ाया है। इस उल्लेख से राज्य की पर्यावरणीय पहल राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से सामने आई हैं और बारनवापारा अभयारण्य को नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में 'मन की बात' कार्यक्रम की 133वी कड़ी के श्रवण के बाद यह बात कही।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित, लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य आज वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में उभरा है।

एक समय ऐसा था जब यह अभयारण्य अपने प्रमुख वन्यजीव - काले हिरण - से लगभग खाली हो चुका था। लेकिन अब यही क्षेत्र करीब 200 काले हिरणों (ब्लैकबक) का सुरक्षित आवास बन गया है। यह उपलब्धि योजनाबद्ध प्रयास, वैज्ञानिक प्रबंधन और निरंतर निगरानी का परिणाम है।

बारनवापारा के खुले घास के मैदानों में काले हिरणों (Antilope cervicapra) की सक्रिय मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि लंबे समय बाद भी किसी प्रजाति को उसके प्राकृतिक परिवेश में पुनर्स्थापित किया जा सकता है। जो क्षेत्र कभी सूना हो गया था, वह अब पुनर्जीवन की एक सशक्त कहानी प्रस्तुत कर रहा है।

छत्तीसगढ़ में इस उपलब्धि तक पहुंचने की प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण रही है। 1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और प्राकृतिक आवास के नुकसान के कारण काले हिरण इस क्षेत्र से लगभग समाप्त हो गए थे और करीब पांच दशकों तक यहां स्थानीय रूप से विलुप्त रहे।

अप्रैल 2018 में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड की नौवीं बैठक में पुनर्स्थापन योजना को स्वीकृति मिलने के बाद स्थिति में बदलाव आया। इसके बाद एक सुविचारित योजना के तहत काले हिरणों को फिर से बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी प्रयास के परिणामस्वरूप उनकी संख्या बढ़कर लगभग 200 तक पहुंची और इस सफलता को रविवार को प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उल्लेखित किया गया।

संरक्षण के शुरुआती चरण में कई चुनौतियां सामने आईं। वन अधिकारियों के अनुसार, निमोनिया के कारण लगभग आठ काले हिरणों की मृत्यु हुई, जिसके बाद प्रबंधन प्रणाली में सुधार किए गए। बाड़ों में मजबूत सतह के लिए रेत की परत बिछाई गई, जलभराव रोकने के लिए उचित निकासी व्यवस्था विकसित की गई, अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाया गया और एक समर्पित पशु चिकित्सक की नियुक्ति की गई।

इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप काले हिरणों की आबादी पहले स्थिर हुई और फिर धीरे-धीरे बढ़ने लगी। बेहतर पोषण, नियमित निगरानी और अनुकूल वातावरण के कारण आज इनकी संख्या लगभग 200 तक पहुंच चुकी है। यह इस बात का संकेत है कि ये अपने नए परिवेश में सफलतापूर्वक अनुकूलित हो चुके हैं और भविष्य में इन्हें खुले जंगल में छोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है।

काले हिरण के बारे में:

काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।

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