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संत कबीर जयंती पर विशेष- संत कबीर ने किया रूढ़ियों पर प्रहार और दिया मानवता का संदेश

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 धनंजय राठौर- संयुक्त संचालक, (जनसंपर्क) रायपुर

संत कबीर दास भारतीय इतिहास, साहित्य और दर्शन के एक ऐसे दैदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिनकी चमक सदियां बीत जाने के बाद भी फीकी नहीं पड़ी है। हर वर्ष ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली 'कबीर जयंती' केवल एक संत के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उनके विचारों, उनकी निर्भीकता और समाज सुधार के संकल्प को याद करने का दिन है। मध्यकालीन भारत में जब समाज जात-पात, आडंबरों और संकीर्णता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, तब कबीर ने अपनी सीधी, सरल और मारक वाणी से समाज को झकझोरने का काम किया था। संत कबीर जी के सत्य, समरसता, समानता और मानवता के संदेश आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। उनके आदर्श सामाजिक सद्भाव, सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे।


कबीर का जीवन दर्शन: सादगी और समरसता

कबीरदास जी का जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ था। लोक मान्यताओं के अनुसार, उनका लालन-पालन एक जुलाहा परिवार (नीरू और नीमा) द्वारा किया गया। कबीर ने किताबी ज्ञान की अपेक्षा व्यावहारिक ज्ञान और 'आंखिन देखी' को सर्वोपरि माना। उन्होंने कहा भी है:-
"पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।"

कबीर का दर्शन किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं था। वे एक सच्चे विश्व-मानव थे, जिन्होंने ईश्वर को किसी मंदिर, मस्जिद या तीर्थ स्थान में ढूंढने के बजाय मनुष्य के भीतर ही खोजने की सलाह दी। उनके दोहे आज भी जनमानस को जीवन की सच्चाई दिखाने का काम करते हैं जैसे –
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥”

इस दोहे के माध्यम से कबीर ने अहंकार धार्मिक कट्टरता और कर्मकांडों पर तीखा व्यंग्य किया है। उनकी भाषा सरल, सहज और लोकजीवन से जुड़ी हुई थी, जिससे आम लोग भी उनकी बातों को आसानी से समझ पाते थे।
कबीरदास ने अपने समय में फैले जातिवाद, धार्मिक कट्टरता और कर्मकांडों का खुलकर विरोध किया। वह हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे, उन्होंने दोनों ही धर्मों की रूढ़ियों की आलोचना की। यही कारण है कि उनके विचारों ने सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियों को प्रभावित किया।

सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार

कबीरदास का मानना था कि ईश्वर एक ही है, चाहे कोई भी धर्म मानता हो। उन्होंने सिखाया कि बहुत सारे अनुष्ठान करना या धार्मिक रीति-रिवाजों का अंधाधुंध पालन करना व्यर्थ है। सबसे महत्वपूर्ण है ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम, ईमानदारी और सादा जीवन जीना। कबीर ने जाति व्यवस्था, मूर्ति पूजा और कठोर धार्मिक नियमों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर हमारे हृदय में निवास करता है और उसे आंतरिक भक्ति के माध्यम से पाया जा सकता है, न कि बाहरी वस्तुओं से। उनकी कविताएँ इतनी शक्तिशाली और अर्थपूर्ण थीं कि उन्हें सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल किया गया है। इससे पता चलता है कि उनका संदेश सभी लोगों के लिए था, न कि केवल एक धर्म के लिए।

कबीर दास जी एक महान समाज सुधारक थे। उन्होंने अपने समय में समाज में व्याप्त आडंबरों और संकीर्णता, धार्मिक पाखंडों, छुआछूत और अंधविश्वासों पर तीखे प्रहार किए। वे धर्म के नाम पर होने वाले दिखावे के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने बिना किसी डर के हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों की कुरीतियों पर अपनी बात रखी:-

• बाह्य आडंबर पर
"कांकर पाथर जोरि के, मस्जिद लई बनाय।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खु खुदाय ?"

• जातिवाद पर
"जाति-पाति पूछे नहिं कोई, हरि को भजै सो हरि का होई।"

आधुनिक युग में कबीर की प्रासंगिकता

आज 21वीं सदी में जब तकनीकी प्रगति के बावजूद दुनिया अक्सर वैचारिक मतभेदों, असहिष्णुता और सांप्रदायिकता से जूझ रही है, तब कबीर के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। कबीर हमें सिखाते हैं कि:
1. मानवता सबसे बड़ा धर्म है: किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके जन्म या जाति से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और उसके भीतर के प्रेम से होती है।
2. . सद्भाव और शांति: समाज में शांति बनाए रखने के लिए वाणी की मधुरता और आपसी समझ बहुत जरूरी है। जैसा कि उन्होंने कहा था—

"ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय।"

संत कबीर दास ने लोगों को अंधविश्वासों का पालन किए बिना सच्चे मन से ईश्वर से प्रेम करना सिखाया। कबीर हमेशा कहते थे कि ईश्वर एक है, चाहे आप किसी भी धर्म को मानें। उनके जीवन और शब्दों ने हिंदुओं और मुसलमानों को करीब लाया और आज भी सभी धर्मों के लोग उनके संदेश से प्रेरणा पाते हैं। उनकी शिक्षाओं ने कबीर पंथ की नींव रखी और भक्ति एवं सूफी आंदोलनों को प्रभावित किया। हिंदू, मुसलमान और सिख सभी उन्हें पूजते हैं, और उनके काव्य अपनी शाश्वत ज्ञान और सार्वभौमिक अपील के लिए प्रसिद्ध हैं।

संत कबीर दास भक्ति काल के महान कवि, समाज-सुधारक और दार्शनिक थे। उन्होंने अपने अनमोल दोहों और विचारों के माध्यम से समाज में फैले अंधविश्वासों, पाखंडों और जाति-पाति का कड़ा विरोध किया। कबीर साहेब ने हिंदू-मुस्लिम एकता और मानवता का संदेश दिया। कबीर की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए कबीर पंथ सक्रिय है, जो उनके विचारों सत्य, प्रेम, और समानता को समाज में फैलाने का कार्य कर रहा है।

संत कबीर दास जी की जयंती के इस पावन अवसर पर हमें कबीर के दोहों को केवल पढ़ने या सुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनके संदेशों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। कबीर का मार्ग प्रेम, सत्य और समानता का मार्ग है। आज के समय में समाज में व्याप्त नफरत और असमानता को मिटाने के लिए 'कबीर का विचार' ही सबसे अचूक औषधि है। आइए इस कबीर जयंती पर हम एक ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प लें जहां हर इंसान के प्रति सम्मान हो और प्रेम ही सर्वोपरि हो।

प्रधानमंत्री की 'मन की बात' विकसित भारत के संकल्प को देती है नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' की 135वीं कड़ी जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों के साथ सुनी।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 'मन की बात' आज जनता और नेतृत्व के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार देशवासियों को प्रेरित करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रत्येक कड़ी में देशभर से नवाचार, जनभागीदारी और प्रेरणादायी प्रयासों को सामने लाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक कार्यों को नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि 'मन की बात' की अनेक कड़ियों में छत्तीसगढ़ के नवाचारों और उपलब्धियों का उल्लेख होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी गणेशोत्सव के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मिट्टी से निर्मित भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला तथा वर्षा जल के प्रत्येक बूंद के संरक्षण का संदेश देते हुए जल संचय को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मेघालय के जीवित रूट ब्रिज का उल्लेख करते हुए प्रकृति और मानव के अद्भुत समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विज्ञान, तर्क और जागरूकता के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को दूर करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। असम की महिलाओं द्वारा 'हरगिला आर्मी' के माध्यम से दुर्लभ पक्षी हरगिला के संरक्षण और उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास जनजागरूकता का प्रेरक उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागालैंड में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संचालित नागालैंड बेबी लीग और नागालैंड वुमन फुटसाल लीग जैसी पहलों का उल्लेख किया। साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय एवं सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाने के प्रयासों की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि डोमिनिकन रिपब्लिक में 'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' के सदस्य वैदिक साहित्य का अध्ययन कर भारतीय संस्कृति से जुड़ रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की महिलाओं द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट से सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक बनाने की पहल स्वच्छता और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, सच्चिदानंद उपासने, अखिलेश सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर ;  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर स्थित डीडीयू ऑडिटोरियम में आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में शामिल हुए। गरिमामयी समारोह में उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया तथा आपातकाल पर आधारित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता  इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में लोकतंत्र, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है, जिसे समझने और निभाने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि यह समय भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा का काल था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को स्मरण करते हुए कहा कि उन लोगों ने जेल, यातनाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक आदर्शों को जीवित रखा।

मुख्य वक्ता  कुमार ने कहा कि इतिहास को याद रखना केवल अतीत को जानना नहीं है, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की एकता, अनुशासन और सामाजिक समरसता को मजबूत करें तथा नशामुक्त और स्वच्छ समाज के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों ने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य किया है और इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश - दुनिया में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है। उन्होंने युवाओं से “राष्ट्र प्रथम” की भावना को जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्र, ज्ञान और धर्म प्रथम की भावना ही भारत की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या सृष्टि का वह स्थान है जो सदैव पूजनीय रहेगा और सत्य व धर्म के मार्ग पर चलते हुए हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह कालखंड है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष, त्याग और जेल जीवन की कठिनाइयों को याद करते हुए कहा कि इन लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। श्री साय ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल स्मरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सचेत करना है ताकि वे समझ सकें कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र कितनी बड़ी कुर्बानियों के बाद प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से संघर्ष, संस्कृति और परंपरा की भूमि रही है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था रही है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को इतिहास से अवगत कराने के लिए इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करना प्रशंसनीय पहल है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अपने पारिवारिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में अनेक परिवारों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने कहा कि मेरे बड़े पिताजी स्वर्गीय श्री नरहरि साय 19 महीनों तक जेल में रहे और इन परिवारों की पीड़ा को करीब से देखा है। उस दौर में जब घर के मुखिया को जेल में डाल दिया जाता था, तब लोकतंत्र सेनानियों के परिवार पर जीवन निर्वाह का संकट आ गया था। श्री साय ने कहा कि इस कठिन समय में स्वयंसेवक भेष बदलकर लोकतंत्र सेनानियों के परिवार को अनाज पहुंचाने का काम करते थे ताकि कोई भूखा न रहे। उन्होंने उस दौर से जुड़ी कई और स्मृतियां भी साझा की और सभी लोकतंत्र सेनानियों का पुण्य स्मरण किया।


विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था। उन्होंने प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय लोकतंत्र की मजबूती और जागरूकता का प्रतीक बनकर सामने आया। आपातकाल हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री  तोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संघ  कैलाश सोनी, विधायक  मोतीलाल साहू, विधायक गोमती साय, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीती वर्णिका शर्मा, महामण्डलेश्वर  अजय रामदास,  अखिलेश सोनी, लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष  दिवाकर तिवारी, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  सच्चिदानंद उपासने समेत अनेक प्रबुद्धजन तथा लोकतंत्र सेनानी और उनके परिजन मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यालय स्तर पर "आपातकाल कभी विस्मृत न हो" विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल, रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें 31 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

विवेकानंद विद्यापीठ, कोरबा के श्री सूरज तांडिया को द्वितीय तथा अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल, दुर्ग के श्री अंश देशमुख तृतीय स्थान पर रहे। वहीं महाविद्यालय स्तर पर "25 जून : संविधान हत्या दिवस" विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में रायपुर की सुश्री कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय तथा दुर्ग की सुश्री खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान करते हुए लोकतंत्र और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

बारिश में दर्दनाक हादसा: जर्जर दीवार गिरने से दो सगी बहनों की मौत, बुआ गंभीर हालत में रायपुर रेफर

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 बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में लगातार बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा हो गया। पुराने कच्चे मकान की जर्जर दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से दो मासूम सगी बहनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी बुआ गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है।


यह हादसा बेमेतरा थाना क्षेत्र के राऊरपुर गांव में रविवार सुबह करीब 8:30 बजे हुआ। जानकारी के मुताबिक गांव निवासी चंद्रप्रकाश कोसले ने नया मकान बना लिया था, लेकिन पुराने कच्चे घर की करीब 7 से 8 फीट ऊंची जर्जर दीवार अब भी वहीं खड़ी थी, जिसे हटाया नहीं गया था।

बताया जा रहा है कि घटना के समय जगोना कोसले दीवार के पास बर्तन धो रही थीं, जबकि चंद्रप्रकाश की 7 और 8 साल की दो बेटियां आंगन में खेल रही थीं। इसी दौरान अचानक दीवार ढह गई और तीनों उसके नीचे दब गए।

हादसे में दोनों बच्चियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि जगोना कोसले गंभीर रूप से घायल हो गईं। चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे और मलबा हटाकर बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तीनों करीब एक घंटे तक मलबे में दबी रहीं।

सूचना मिलने पर बेमेतरा पुलिस मौके पर पहुंची। घायल महिला को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर रेफर कर दिया गया। वहीं दोनों बच्चियों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।

सिटी कोतवाली बेमेतरा की टीआई सोनल ग्वाला ने बताया कि राऊरपुर गांव में दीवार गिरने से दो मासूम सगी बहनों की मौत हुई है, जबकि उनकी बुआ गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता देश, प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में गिनाईं उपलब्धियां

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, विज्ञान और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, योग, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में निर्मित C-295 विमान की पहली सफल उड़ान देश के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही DRDO द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष दुनिया भर के 2,500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत ने 114 पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय उत्पाद अपनाने की अपील की। उन्होंने आगामी गणेश उत्सव के अवसर पर मिट्टी से बनी स्थानीय कारीगरों की गणेश प्रतिमाएं खरीदने तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों से बचने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए लोगों से इन योजनाओं का लाभ उठाने और अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की अपील की।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण, 'कैच द रेन' अभियान और जनभागीदारी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सभी नागरिकों से इसमें सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

भारतमाला हाईवे पर दर्दनाक हादसा: मॉर्निंग वॉक पर निकले 3 लोगों को अज्ञात वाहन ने रौंदा, तीनों की मौके पर मौत

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 जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। बलौदा थाना क्षेत्र के ग्राम डोंगरी के पास भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग पर मॉर्निंग वॉक के लिए निकले तीन लोगों को तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया।


मृतकों की पहचान केदार निर्मलकर, दिलहरन वैष्णव और ग्राम कोरबी निवासी एक अन्य व्यक्ति के रूप में हुई है। हादसे की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही बलौदा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुट गई है। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपी वाहन और चालक की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि भारतमाला सड़क परियोजना का निर्माण कार्य अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है, इसके बावजूद इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। लोगों ने प्रशासन से सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने, स्पीड कंट्रोल के इंतजाम करने और लगातार हो रहे हादसों पर रोक लगाने की मांग की है।

“पति को मुंबई पुलिस ने पकड़ा…” कहकर महिला से 35 हजार की ठगी, वीडियो भेजकर बनाया दबाव

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 सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामला Surajpur जिले से सामने आया है, जहां ठगों ने एक महिला को उसके पति की गिरफ्तारी का झांसा देकर करीब 35 हजार रुपए की साइबर ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को Mumbai Police का अधिकारी बताकर पहले पैसे ऐंठे, फिर वीडियो भेजकर महिला को ब्लैकमेल किया।


खुद को बताया पुलिस अधिकारी

पीड़िता सोनी सिंह ने पुलिस को बताया कि उनके पति दूसरे शहर में रहकर ड्राइवर का काम करते हैं। पिछले चार दिनों से उनके व्हाट्सएप पर अलग-अलग नंबरों से कॉल आ रहे थे। कॉल करने वाले खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताते हुए कह रहे थे कि उनके पति को सोना-चांदी से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है।

पति को छोड़ने के नाम पर ऐंठे पैसे

पति की गिरफ्तारी की बात सुनकर महिला घबरा गई। ठगों ने पहले पति को छोड़ने के नाम पर 7 हजार रुपए मांगे। महिला ने भरोसा कर रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद दोबारा कॉल कर 26,100 रुपए और जमा कराने को कहा, जिसे महिला ने भेज दिया।

वीडियो भेजकर किया ब्लैकमेल

कुछ देर बाद आरोपियों ने महिला के व्हाट्सएप पर एक वीडियो भेजा, जिसमें एक व्यक्ति की पिटाई होती दिखाई दे रही थी। ठगों ने दावा किया कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति उसका पति है। इसके बाद 55 हजार रुपए और भेजने का दबाव बनाया गया।

फिर मांगे 20 हजार और

आरोपियों ने महिला को दोबारा फोन कर कहा कि उसके पति को मुंबई से Lucknow ले जाया जा रहा है। अगर वह तुरंत 20 हजार रुपए और भेज देगी तो रास्ते में ही उसे छोड़ दिया जाएगा।

शक हुआ तो पहुंची थाने

लगातार पैसों की मांग और धमकियों के बाद महिला को ठगी का शक हुआ। इसके बाद वह सीधे कोतवाली थाने पहुंची और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस कर रही जांच

पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पैसे मांगने वालों पर भरोसा न करें और पहले जानकारी की पुष्टि जरूर करें।

CG Murder Case : ग्रामीण की हत्या से सनसनी, किसने उतारा मौत के घाट… किसी ने नहीं देखा

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 बेमेतरा। जिले के नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत भद्रराली में एक सनसनीखेज हत्या की वारदात सामने आई है। गांव निवासी कन्हैया बंजारे (लगभग 45 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में निर्मम हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, कन्हैया बंजारे की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर हत्या के कारणों और आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, मृतक गांव में सामान्य जीवन व्यतीत करता था। ऐसे में अचानक हुई इस वारदात ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट आने के बाद मामले में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। हत्या के पीछे पुरानी रंजिश, आपसी विवाद या अन्य किसी कारण की भी पड़ताल की जा रही है। घटना के बाद गांव में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

प्रिसिजन मेडिसिन और जीन थेरेपी से बदलेगा स्वास्थ्य सेवा का भविष्य, भारत बनेगा वैश्विक हेल्थकेयर इनोवेशन हब: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- डॉक्टर्स डे की पूर्व संध्या पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine), जीन थेरेपी, न्यूक्लियर मेडिसिन और अन्य उभरती तकनीकें भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बदल देंगी। उन्होंने कहा कि भारत स्वदेशी अनुसंधान के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान विकसित कर रहा है और तेजी से विश्वस्तरीय हेल्थकेयर इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है।

डॉक्टर्स डे कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की विशाल आनुवंशिक (Genetic) विविधता, विभिन्न प्रकार की बीमारियों का व्यापक स्वरूप और मजबूत होता वैज्ञानिक ढांचा देश को "भारतीय मरीजों के लिए भारतीय डेटा आधारित भारतीय उपचार" विकसित करने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। इससे न केवल देश की स्वास्थ्य जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि दुनिया को भी किफायती और प्रभावी चिकित्सा समाधान मिलेंगे।

प्रिसिजन मेडिसिन से बदलेगा इलाज का तरीका

उन्होंने कहा कि भविष्य में इलाज मरीज के जीन, जीवनशैली और पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर तय होगा। इससे रोगों का अधिक सटीक निदान, लक्षित उपचार और बेहतर परिणाम संभव होंगे।

जीनोम इंडिया मिशन बना मजबूत आधार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जीनोम इंडिया मिशन के तहत अब तक 10,000 से अधिक लोगों का जीनोम सीक्वेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है और भारत दुनिया के सबसे बड़े जीनोमिक डाटाबेस में से एक तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे दुर्लभ आनुवंशिक रोगों और व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) पर शोध को नई गति मिलेगी।

जीन थेरेपी और न्यूक्लियर मेडिसिन में बड़ी उपलब्धियां

उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने हाल ही में हीमोफीलिया के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल प्रदर्शन किया है, जो देश की चिकित्सा अनुसंधान क्षमता का बड़ा उदाहरण है। साथ ही न्यूक्लियर मेडिसिन कैंसर सहित गंभीर बीमारियों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की बढ़ती भूमिका

डॉ. सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज जीनोम विश्लेषण, रोगों की पहचान, मेडिकल शिक्षा, बायोमेडिकल रिसर्च और टेलीमेडिसिन जैसे क्षेत्रों में तेजी से उपयोग हो रहा है। इससे जटिल चिकित्सा डेटा का विश्लेषण तेजी से संभव हो रहा है और दूरदराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं।

स्वदेशी दवा अनुसंधान में भारत आगे

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल विदेशों में विकसित दवाओं का निर्माण करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान, क्लिनिकल ट्रायल और नवाचार के माध्यम से नई दवाएं विकसित कर रहा है। हाल ही में दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए विकसित भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक इसका प्रमाण है।

जैव प्रौद्योगिकी और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में तेजी

डॉ. सिंह ने बताया कि BioE3 नीति और Bio-RIDE मिशन के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थकेयर इनोवेशन को नई गति मिल रही है। वहीं भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीक विकसित कर रहा है।

आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ नेटवर्क की सराहना

उन्होंने आयुष्मान भारत को दुनिया की सबसे समावेशी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीमेडिसिन ने देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को काफी मजबूत किया है।

रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य में डायबिटीज, कैंसर और फैटी लिवर जैसी गैर-संचारी बीमारियों से निपटने के लिए समय पर जांच, नियमित स्क्रीनिंग, जन-जागरूकता और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान में निरंतर निवेश तथा सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी भारत को अगली पीढ़ी की स्वास्थ्य सेवाओं का वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाएगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता में भारत ग्लोबल साउथ को देगा ऊर्जा सुरक्षा का नेतृत्व: प्रधानमंत्री मोदी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) 2026 की अध्यक्षता के दौरान भारत का लक्ष्य ग्लोबल साउथ को सुरक्षित, लचीले, न्यायसंगत और सतत वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में स्थापित करना है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर कहा कि भारत का मानना है कि मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली केवल प्रभावी घरेलू नीतियों से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत वैश्विक साझेदारी से भी निर्मित होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक सहयोग के माध्यम से विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सभी देशों के लिए सुरक्षित एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आईएनएस इक्षाक सेशेल्स पहुंचा, राष्ट्रीय दिवस समारोह में करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित सर्वे वेसल लार्ज (Survey Vessel Large - SVL) आईएनएस इक्षाक (INS Ikshak) 26 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया बंदरगाह (Port Victoria) पहुंच गया।

आईएनएस इक्षाक की यह यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के साथ हो रही है, जो भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों और मित्रता को और सुदृढ़ करने का प्रतीक है।

राष्ट्रीय दिवस समारोह और नौसैनिक सहयोग

अपने प्रवास के दौरान आईएनएस इक्षाक सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेगा। इसके साथ ही भारतीय नौसेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्सेज के बीच कई पेशेवर बैठकों और संयुक्त गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, समन्वय (Interoperability) और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

सामुदायिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन

इस दौरे के दौरान भारतीय नौसेना स्थानीय समुदायों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, आवश्यक वस्तुओं का वितरण तथा अन्य सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, सद्भाव और आपसी संबंधों को और मजबूत करना है।

आम नागरिकों के लिए भी खुलेगा जहाज

पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस इक्षाक को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे लोग भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताओं, स्वदेशी तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को करीब से जान सकेंगे।

MAHASAGAR विजन को मिलेगा बल

आईएनएस इक्षाक की यह तैनाती MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

यह यात्रा एक बार फिर दर्शाती है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

मेड़ पर लगाए थे कुछ पौधे... आज हर साल 2.5 लाख की कमाई

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रायगढ़ के किसान अरुण सॉ ने अनानास की खेती से बदली तकदीर, बने प्रेरणा स्रोत

रायपुर- कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है।

शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल  

अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं।

कम लागत, बेहतर मुनाफा 

अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है।

प्ररोहों की बिक्री से भी आय  

फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।

अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।

गोवा को मिला अत्याधुनिक ‘कैप्टन ऑफ पोर्ट्स’ टर्मिनल, समुद्री प्रशासन और जल परिवहन को मिलेगी नई मजबूती

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पणजी- केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गोवा में ₹48.87 करोड़ की लागत से निर्मित नए कैप्टन ऑफ पोर्ट्स टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक वाटरफ्रंट सुविधा समुद्री प्रशासन को मजबूत बनाने, जहाजों की निगरानी एवं नेविगेशन में सुधार करने और गोवा के सतत समुद्री विकास के विजन को गति देने के उद्देश्य से विकसित की गई है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस नया टर्मिनल

गोवा स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (GSIDC) द्वारा निर्मित यह G+3 भवन 4,405 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है। यह भवन पुराने कैप्टन ऑफ पोर्ट्स कार्यालय का स्थान लेगा, जो बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं रह गया था।

मांडवी नदी के किनारे खड़े जहाज की आकृति से प्रेरित इस भवन में आधुनिक यात्री सुविधाएं, डबल-हाइट पब्लिक लॉबी, कॉन्फ्रेंस हॉल, मरीन एवं हाइड्रोग्राफिक कार्यालय, नेविगेशन कंट्रोल सेंटर, रेडियो कम्युनिकेशन सेंटर, सार्वजनिक सुविधाएं, 450 सीटों वाला रूफटॉप एम्फीथिएटर, इनडोर रेस्तरां और ओपन टैरेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

समुद्री क्षेत्र में भारत की बड़ी उपलब्धियां

उद्घाटन समारोह में सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह भवन केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि गोवा की समुद्री पहचान, आधुनिकीकरण और सतत विकास का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के समुद्री क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है—

  • बंदरगाहों की क्षमता लगभग दोगुनी हुई।

  • जहाजों का टर्नअराउंड समय 95 घंटे से घटकर 41 घंटे रह गया।

  • भारतीय नाविकों (Seafarers) की संख्या 3.23 लाख से अधिक पहुंच गई।

  • तटीय माल परिवहन दोगुने से अधिक बढ़ा।

  • क्रूज़ यात्रियों की संख्या चार गुना से अधिक हुई।

  • परिचालित राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 3 से बढ़कर 32 हो गई।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब सकल टन भार (Gross Tonnage) के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग देश बन चुका है।

गोवा समुद्री सुधारों में अग्रणी

सोनोवाल ने कहा कि इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021 लागू करने वाला गोवा देश का पहला राज्य है। प्रस्तावित गोवा मैरीटाइम बोर्ड, गोवा शिपबिल्डिंग एवं शिप रिपेयर नीति और मैरीटाइम मास्टर प्लान राज्य के समुद्री क्षेत्र को और मजबूत करेंगे।

गोवा वाटर मेट्रो परियोजना को मिली प्राथमिकता

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि प्रस्तावित गोवा वाटर मेट्रो परियोजना को अब फेज-1 में शामिल कर प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना गोवा में पर्यावरण-अनुकूल, तेज और टिकाऊ शहरी जल परिवहन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यटन को भी नई ऊंचाई देगी।

मोरमुगाओ पोर्ट का तेज विकास

उन्होंने बताया कि मोरमुगाओ पोर्ट अथॉरिटी में वर्ष 2014 से अब तक ₹1,300 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि ₹2,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर काम जारी है। इनमें बर्थ नंबर-9 का पुनर्विकास, वास्को बे परियोजना, आधुनिक फिशिंग हार्बर, गहरे ड्राफ्ट के लिए ड्रेजिंग और आधुनिक सीफेयरर्स क्लब शामिल हैं।

मोरमुगाओ पोर्ट देश का पहला ग्रीन पोर्ट और ग्रीन शिप इंसेंटिव शुरू करने वाला पहला बंदरगाह भी बन चुका है।

समुद्री शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

सोनोवाल ने गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैरीटाइम एक्सीलेंस (GIME) की स्थापना का स्वागत करते हुए कहा कि यह संस्थान समुद्री शिक्षा, अंतर्देशीय जलमार्ग, पोत संचालन, सुरक्षा, वाटर स्पोर्ट्स और कौशल विकास का उत्कृष्ट केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गोवा को विश्वस्तरीय समुद्री अवसंरचना विकसित करने में हरसंभव सहयोग देती रहेगी। नया कैप्टन ऑफ पोर्ट्स टर्मिनल गोवा की नदी परिवहन व्यवस्था का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बनने के साथ-साथ राज्य की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रतीक भी बनेगा। यह परियोजना सागरमाला कार्यक्रम और मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत बंदरगाह आधारित विकास, बेहतर लॉजिस्टिक्स और सतत आर्थिक विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती देगी।

29 जून को होगी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक, स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख नीतियों पर होगा मंथन

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 29 जून 2026 (सोमवार) को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (Central Council of Health and Family Welfare - CCHFW) की 16वीं बैठक आयोजित करेगा। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा करेंगे।

इस सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव जाधव भी शामिल होंगे। इसके अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, गैर-सरकारी सदस्य तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं पर होगी चर्चा

बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस वर्ष सम्मेलन के प्रमुख विषय होंगे—

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): सतत विकास लक्ष्य (SDGs) एवं प्राथमिकताएं

  • खाद्य एवं औषधि सुधार (Food & Drug Reforms)

  • सहायक स्वास्थ्य सेवाएं (Allied Health Services)

इन विषयों पर चल रही योजनाओं की समीक्षा, राज्यों के सफल अनुभवों का आदान-प्रदान, नई चुनौतियों की पहचान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सर्वोच्च सलाहकार निकाय

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत गठित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का सर्वोच्च सलाहकार निकाय है। यह परिषद चिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करती है तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों को आवश्यक सुझाव देती है।

सहकारी संघवाद को मिलेगा और बल

यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय महत्व के स्वास्थ्य मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर नियोजन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साझा रणनीति तैयार करती हैं।

सरकार का मानना है कि इस बैठक से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, नीति निर्माण में बेहतर समन्वय और देशभर में जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन को नई दिशा मिलेगी।

आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के बाल्टीमोर पहुंची, ‘लोकायन 26’ अभियान के तहत भारत की समुद्री विरासत का प्रदर्शन

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी (INS Sudarshini) 26 जून 2026 को अमेरिका के मैरीलैंड राज्य स्थित बाल्टीमोर बंदरगाह पहुंचा। यह यात्रा भारतीय नौसेना के ऐतिहासिक ‘लोकायन 26’ (Lokayan 26) अंतरमहासागरीय अभियान का हिस्सा है।

नॉरफ़ॉक से बाल्टीमोर तक की यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर (C&D) नहर से होकर गुजरते हुए मिड-अटलांटिक क्षेत्र के प्रमुख पुलों के नीचे सफलतापूर्वक समुद्री मार्ग तय किया।

भारत-अमेरिका समुद्री मित्रता को मिलेगा नया आयाम

बाल्टीमोर में आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और भारतीय नौसेना तथा अमेरिकी नौसेना के बीच मजबूत मित्रता एवं सहयोग का प्रतीक है। अपने प्रवास के दौरान जहाज विभिन्न समुद्री सहयोग कार्यक्रमों और सामुदायिक संपर्क गतिविधियों में भाग लेगा।

यह दौरा 'Sail250 Maryland' समारोह से पहले हो रहा है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

नॉरफ़ॉक में भी किया भारत का प्रतिनिधित्व

बाल्टीमोर पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने 19 से 23 जून 2026 तक नॉरफ़ॉक (वर्जीनिया) में आयोजित Sail250 Virginia समारोह में भाग लिया। इस दौरान दुनिया भर से आए पारंपरिक ऊंचे जहाजों (Tall Ships) के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 'Parade of Sail' और 'City Crew Parade' में हिस्सा लिया।

पांच महीने में तय किए 13,000 से अधिक समुद्री मील

आईएनएस सुदर्शिनी ने कोच्चि से नॉरफ़ॉक तक की यात्रा में पिछले पांच महीनों के दौरान 13,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय की है। यह ऐतिहासिक अभियान भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना का प्रतीक है, जो समुद्रों के माध्यम से वैश्विक मित्रता, सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने का संदेश देता है।

यह अभियान विश्व समुदाय के बीच भारत की समुद्री क्षमता, सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करता है।

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