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नमामि गंगे मिशन चरण–II के अंतर्गत सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं की महत्वपूर्ण प्रगति

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नमामि गंगे मिशन चरण–II के तहत वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही (Q3) में 5 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू किया गया, जो विभिन्न राज्यों में प्रदूषण निवारण एवं नदी पुनर्जीवन के प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान अब तक कुल 9 परियोजनाएं परिचालित की जा चुकी हैं, जिससे प्रमुख शहरी केंद्रों में सीवेज शोधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दूसरी तिमाही (Q2) तक उत्तराखंड के उधम सिंह नगर, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, पश्चिम बंगाल के महेशतला एवं जंगीपुर में परियोजनाएं परिचालित की जा चुकी थीं।

इन 5 नई परियोजनाओं के चालू होने के साथ, नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक कुल 3,976 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सीवेज शोधन क्षमता का संचालन किया जा चुका है, जबकि परिचालित सीवेज शोधन संयंत्रों (STP) की कुल संख्या 173 हो गई है। ये उपलब्धियां नदियों में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोकने तथा शहरी स्वच्छता अवसंरचना को सुदृढ़ करने के मिशन के मूल उद्देश्य को और मजबूत करती हैं।

उत्तर प्रदेश के शुक्लागंज में प्रदूषण निवारण प्रयासों को एक बड़ी मजबूती मिली है, जहां ₹65 करोड़ की लागत से विकसित 5 एमएलडी क्षमता का सीवेज शोधन संयंत्र परिचालित किया गया है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के अंतर्गत सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर (SBR) तकनीक पर आधारित है। इस परियोजना से लगभग 3 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा, सीवेज का प्रभावी इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन सुनिश्चित होगा तथा गंगा नदी में सीवेज के प्रवाह को रोका जा सकेगा।

आगरा (उत्तर प्रदेश), जो यमुना बेसिन का एक प्रमुख शहर है, में प्रदूषण निवारण कार्य, आगरा परियोजना के अंतर्गत Q3 के दौरान 31 एमएलडी और 35 एमएलडी क्षमता के दो सीवेज शोधन संयंत्रों का संचालन शुरू किया गया है। ₹842 करोड़ की कुल लागत से स्वीकृत इस परियोजना में 13 एसटीपी के माध्यम से कुल 177.6 एमएलडी क्षमता विकसित की जानी है। HAM मॉडल के तहत SBR तकनीक पर आधारित यह परियोजना लगभग 25 लाख निवासियों को लाभान्वित करेगी, जिससे यमुना नदी में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह में उल्लेखनीय कमी आएगी और शहर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार होगा।

पवित्र नगरी वाराणसी में अस्सी–बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी क्षमता का सीवेज शोधन संयंत्र परिचालित किया गया है। ₹308 करोड़ की लागत से स्वीकृत यह परियोजना DBOT मॉडल के अंतर्गत SBR तकनीक पर आधारित है और लगभग 18 लाख की आबादी को सेवाएं प्रदान करेगी। इस संयंत्र के चालू होने से गंगा नदी को सीवेज प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाएगी तथा शहर में दीर्घकालिक अपशिष्ट जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ बैरकपुर में Q3 के दौरान 30 एमएलडी क्षमता का एक सीवेज शोधन संयंत्र परिचालित किया गया है। ₹154 करोड़ की लागत से स्वीकृत इस परियोजना के अंतर्गत कुल 38 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी प्रस्तावित हैं। HAM मॉडल के तहत और एनजीटी मानकों के अनुरूप विकसित यह परियोजना लगभग 2.2 लाख लोगों को लाभ पहुंचाएगी तथा गंगा नदी में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोकने में सहायक होगी।

इसके अतिरिक्त, बिहार के पटना स्थित कंकड़बाग एसटीपी, जिसे पहले 15 एमएलडी क्षमता के साथ आंशिक रूप से परिचालित किया गया था, वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही में इसकी क्षमता बढ़ाकर 30 एमएलडी कर दी गई है। इससे शहर में सीवेज शोधन अवसंरचना और अधिक सुदृढ़ हुई है तथा गंगा के किनारे प्रदूषण निवारण प्रयासों को बल मिला है।

ये सभी उपलब्धियां स्वच्छ नदियों और बेहतर शहरी स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती हैं, साथ ही सतत एवं समग्र नदी पुनर्जीवन के मिशन के मूल उद्देश्य को और सशक्त बनाती हैं।


आंध्र प्रदेश में MISHTI पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन

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आंध्र प्रदेश में 8 एवं 9 जनवरी 2026 को MISHTI (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को MISHTI योजना के माध्यम से मैंग्रोव संरक्षण में राज्यों को सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। इस कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारी, विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक शामिल हुए, जिन्होंने मैंग्रोव संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के सतत उपायों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय कैम्पा (National CAMPA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद मोहन द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसमें MISHTI पहल के उद्देश्यों और कार्यान्वयन ढांचे पर प्रकाश डाला गया। MISHTI का उद्देश्य मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का विकास एवं संरक्षण करना है, जिसमें मैंग्रोव पुनर्स्थापन, तटरेखा संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण तथा तटीय समुदायों के लिए ठोस आजीविका अवसरों के सृजन पर विशेष बल दिया गया है। यह मिशन ‘मैंग्रोव एलायंस फॉर क्लाइमेट’ (MAC) के उद्देश्यों में भी योगदान देता है, जिसका भारत COP-27 के दौरान सक्रिय सदस्य बना था।

प्रस्तुति के दौरान राष्ट्रीय कैम्पा के सीईओ ने जलवायु सहनशीलता, तटीय संरक्षण और सतत आर्थिक लाभों में मैंग्रोव की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों और संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

यह कार्यशाला ज्ञान साझा करने, सर्वोत्तम प्रथाओं और नीति संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई, जिसने MISHTI ढांचे के अंतर्गत मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और सतत तटीय आजीविका सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

आईएनएस चिल्का में 02/25 बैच की भव्य पासिंग आउट परेड संपन्न

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आईएनएस चिल्का में 08 जनवरी 2026 को 02/25 बैच की पासिंग आउट परेड (POP) का आयोजन किया गया, जो 16 सप्ताह के एब-इनिशियो प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक रहा। सूर्यास्त के बाद आयोजित इस भव्य सेरेमोनियल परेड में प्रशिक्षुओं ने अनुशासन, दृढ़ता और युद्ध तत्परता से परिपूर्ण नौसैनिक पेशेवरों में अपने रूपांतरण का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

इस पासिंग-आउट बैच में कुल 2,172 प्रशिक्षु शामिल थे, जिनमें 2,103 अग्निवीर (113 महिला अग्निवीर सहित), 270 एसएसआर (मेडिकल असिस्टेंट), भारतीय नौसेना के 44 खेल कोटा के कार्मिक तथा भारतीय तटरक्षक बल के 295 नाविक शामिल थे।

वाइस एडमिरल समीर सक्सेना, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी नौसेना कमान, इस परेड के मुख्य अतिथि एवं समीक्षा अधिकारी थे। कमोडोर बी दीपक अनील, कमांडिंग ऑफिसर, आईएनएस चिल्का, परेड के संचालन अधिकारी रहे। इस अवसर पर विशिष्ट पूर्व सैनिक, प्रख्यात खेल हस्तियां, वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, अन्य गणमान्य अतिथि तथा पासिंग-आउट प्रशिक्षुओं के परिजन उपस्थित रहे।

परेड में प्रशिक्षुओं द्वारा अर्जित उच्च स्तर के ड्रिल, अनुशासन और पेशेवर दक्षता का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। पुरुष प्रशिक्षुओं के साथ महिला अग्निवीरों की सहभागिता ने परिचालन भूमिकाओं में समावेशन और लैंगिक समानता के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

परेड को संबोधित करते हुए एफओसी-इन-सी (दक्षिण) ने प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण की सफल पूर्णता पर बधाई दी। उन्होंने उन्हें अपने पेशेवर कौशल को निरंतर निखारने, तकनीकी रूप से सजग रहने तथा नौसेना के मूल मूल्यों—कर्तव्य, सम्मान और साहस—को आत्मसात करने का संदेश दिया। उन्होंने प्रशिक्षुओं से साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अपने भविष्य का मार्ग निर्धारित करते हुए राष्ट्र के सम्मान को बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने अग्निवीरों के माता-पिता के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को स्वीकार किया। मुख्य अतिथि ने टीम चिल्का की अथक मेहनत और नौसेना व राष्ट्र के रूपांतरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रशंसा व्यक्त की।

मुख्य अतिथि द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अग्निवीरों को पदक और ट्रॉफियां प्रदान की गईं। साशी बी केंचावगोल और जतिन मिश्रा को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एसएसआर) और सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एमआर) के लिए नौसेना प्रमुख रोलिंग ट्रॉफी एवं स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। अनिता यादव को समग्र मेरिट में सर्वश्रेष्ठ महिला अग्निवीर के लिए जनरल बिपिन रावत रोलिंग ट्रॉफी प्रदान की गई। केशव सूर्यवंशी और सोनेन्द्र को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ नाविक (जीडी) और सर्वश्रेष्ठ नाविक (डीबी) घोषित किया गया।

इससे पूर्व आयोजित दीक्षांत समारोह में समग्र चैम्पियनशिप ट्रॉफी खारवेला डिवीजन को प्रदान की गई, जबकि अशोक डिवीजन उपविजेता रहा। इस अवसर पर आईएनएस चिल्का की द्विभाषी प्रशिक्षु पत्रिका ‘अंकुर 2025’ के द्वितीय संस्करण का भी विमोचन किया गया, जिसमें अग्निवीरों के अनुभवों और उनके रूपांतरणकारी प्रशिक्षण यात्रा को दर्शाया गया है।


डिजिटल नवाचार के साथ भारत के डेयरी क्षेत्र का रूपांतरण: NDDB की प्रमुख पहलें

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 मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM) के अंतर्गत 35.68 करोड़ से अधिक पशुओं को “पशु आधार” जारी किया जा चुका है, जिससे पशुधन का ट्रेसेबल (पता लगाने योग्य) प्रबंधन संभव हुआ है।

  • स्वचालित दुग्ध संग्रह प्रणाली (AMCS) के माध्यम से 54 दुग्ध संघों से जुड़े 17.3 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को लाभ मिला है, जिससे पारदर्शी भुगतान और कुशल संचालन सुनिश्चित हुआ है।

  • लगभग 198 दुग्ध संघ और 15 फेडरेशन इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS) का उपयोग कर डेटा-आधारित निर्णय और प्रदर्शन बेंचमार्किंग कर रहे हैं।

  • GIS तकनीक आधारित दूध मार्ग अनुकूलन से कई राज्यों की सहकारी संस्थाओं को परिवहन लागत में उल्लेखनीय बचत और वितरण दक्षता में सुधार हुआ है।

परिचय

भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, जो वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग 25% योगदान देता है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र विस्तार कर रहा है, उत्पादकता, पारदर्शिता और किसानों के कल्याण को बेहतर बनाने में डिजिटल उपकरणों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) इस परिवर्तन में अग्रणी रहा है और उसने ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं जो डेयरी मूल्य श्रृंखला में किसानों, सहकारी संस्थाओं और अन्य हितधारकों को आपस में जोड़ते हैं। इन पहलों का उद्देश्य संचालन का आधुनिकीकरण करना, अक्षमताओं को कम करना और ट्रेसेबिलिटी को बढ़ाना है, जिससे दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत किया जा सके।

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM)

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM), जिसे NDDB द्वारा पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के सहयोग से लागू किया जा रहा है, “भारत पशुधन” नामक एकीकृत डिजिटल पशुधन पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डेटा-आधारित पशुधन प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए भारत पशुधन डेटाबेस में प्रजनन, कृत्रिम गर्भाधान, स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण और उपचार जैसी फील्ड गतिविधियों को दर्ज किया जाता है, जिनमें अब तक 84 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं। पशु चिकित्सक और विस्तार कार्यकर्ता जैसे फील्ड कर्मी किसानों को इस प्रणाली तक पहुंच बनाने में सहायता करते हैं।

NDLM में विशिष्ट पशु पहचान, डेटा एकीकरण और मोबाइल एप्लिकेशन जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जिससे किसानों को सशक्त बनाया जा सके और उत्पादकता बढ़ाई जा सके। इसका लक्ष्य भारत के प्रत्येक पशु को एक डिजिटल पहचान देना है, जिसे उसके स्वास्थ्य रिकॉर्ड और उत्पादकता डेटा से जोड़ा जा सके। इस मिशन के कार्यान्वयन के लिए NDDB राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के अनुरूप, सभी पशुधन को 12 अंकों वाले बारकोड युक्त टैग आईडी के रूप में कान के टैग जारी किए जा रहे हैं। इस विशिष्ट कोड को “पशु आधार” नाम दिया गया है, जो टीकाकरण, प्रजनन, उपचार आदि सभी प्रकार के लेन-देन को दर्ज करने की प्राथमिक कुंजी के रूप में कार्य करता है। इन सभी गतिविधियों को टैग आईडी के आधार पर एक ही स्थान पर देखा जा सकता है, जो किसानों तथा संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्सकों और फील्ड कर्मियों के लिए उपलब्ध रहता है। नवंबर 2025 तक 35.68 करोड़ से अधिक पशु आधार जारी किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के अंतर्गत 1962 ऐप किसानों को सर्वोत्तम प्रथाओं और सरकारी योजनाओं की प्रमाणिक जानकारी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, टोल-फ्री नंबर 1962 के माध्यम से किसान अपने घर पर ही मोबाइल वेटरनरी यूनिट के जरिए पशु चिकित्सा सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

स्वचालित दुग्ध संग्रह प्रणाली (AMCS)

भारत के सहकारी डेयरी मॉडल का केंद्र बिंदु लाखों किसानों से प्रतिदिन दूध का संग्रह है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी, कुशल और किसान-अनुकूल बनाने के लिए NDDB ने स्वचालित दुग्ध संग्रह प्रणाली (AMCS) विकसित की है, जो डेयरी सहकारी समितियों (DCS) के स्तर पर सभी संचालन को प्रबंधित करने वाला एक मजबूत और एकीकृत सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है।

AMCS दूध संग्रह को स्वचालित करता है, जिसमें मात्रा, गुणवत्ता और वसा प्रतिशत सहित प्रत्येक लेन-देन को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है और भुगतान तुरंत किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। ओपन-सोर्स तकनीक पर आधारित यह प्रणाली ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करती है, मैनुअल त्रुटियों को समाप्त करती है और सभी स्तरों पर पारदर्शिता को बढ़ावा देती है। किसानों को उनके दैनिक दूध विक्रय और भुगतान की जानकारी रियल-टाइम SMS के माध्यम से मिलती है, जबकि सहकारी संस्थाओं को बेहतर खरीद और उत्पादन योजना के लिए डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।

यह प्रणाली यूनियन, फेडरेशन और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत है तथा वित्तीय संस्थानों से जुड़ी हुई है। यह सभी हितधारकों के लिए मोबाइल-आधारित प्रमुख सूचना उपलब्ध कराती है। वर्तमान में 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित AMCS, 26,000 से अधिक डेयरी सहकारी समितियों को कवर करती है और 54 दुग्ध संघों से जुड़े 17.3 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचा रही है (22 अक्टूबर 2025 तक)।

AMCS के प्रमुख घटक इस प्रकार हैं:

  • DCS एप्लिकेशन: DCS स्तर पर सामान्य, बहुभाषी AMCS एप्लिकेशन, जो Windows / Linux और Android प्लेटफॉर्म पर कार्य करता है।

  • पोर्टल एप्लिकेशन: यूनियन, फेडरेशन और राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य केंद्रीकृत AMCS पोर्टल।

  • Android ऐप्स: सोसाइटी सचिव, डेयरी पर्यवेक्षक और किसान के लिए अलग-अलग सामान्य, बहुभाषी मोबाइल एप्लिकेशन।

यह Android-आधारित एप्लिकेशन किसानों के लिए डिजिटल पासबुक के रूप में तथा डेयरी सचिवों और पर्यवेक्षकों के लिए रियल-टाइम सूचना और अलर्ट प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है। अब तक 2.43 लाख से अधिक किसान, 1,374 पर्यवेक्षक और 13,644 सचिव (22 अक्टूबर 2025 तक) AMCS मोबाइल ऐप पर पंजीकृत हो चुके हैं।

NDDB डेयरी ERP (NDERP)

NDDB डेयरी ERP (NDERP) एक व्यापक, वेब-आधारित एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से डेयरी और खाद्य तेल उद्योग के लिए विकसित और अनुकूलित किया गया है। यह ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म (Frappe ERPNext) पर आधारित है और किसी भी सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन की आवश्यकता नहीं होती। इसे कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस के माध्यम से आसानी से एक्सेस किया जा सकता है। वितरकों के लिए यह Android और iOS (mNDERP) पर भी उपलब्ध है और बिना किसी लाइसेंस शुल्क के एक पूर्ण एवं किफायती समाधान प्रदान करता है।

iNDERP पोर्टल (https://inderp.nddb.coop) वितरकों के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो NDERP से एकीकृत है। इसके माध्यम से वे ऑर्डर, डिलीवरी चालान, इनवॉइस और भुगतान का कुशल प्रबंधन कर सकते हैं। वितरक डिलीवरी ट्रैक कर सकते हैं, बकाया राशि देख सकते हैं और सीधे इनवॉइस डाउनलोड कर सकते हैं, जिससे दुग्ध संघों और फेडरेशनों के साथ समन्वय बेहतर होता है।

mNDERP मोबाइल ऐप Android और iOS पर उपलब्ध है और चलते-फिरते वितरकों को वही सुविधाएं प्रदान करता है जो iNDERP में उपलब्ध हैं।

NDERP में वित्त एवं लेखा, खरीद, इन्वेंटरी, बिक्री एवं विपणन, विनिर्माण, मानव संसाधन एवं वेतन जैसे सभी प्रमुख मॉड्यूल शामिल हैं, जो उन्नत वर्कफ़्लो और मेकर-चेकर सुविधाओं से युक्त हैं। यह प्रणाली AMCS के साथ एकीकृत होकर “गाय से उपभोक्ता तक” एक एंड-टू-एंड डिजिटल समाधान प्रदान करती है। उत्पादन मॉड्यूल में मास-बैलेंसिंग तकनीक का उपयोग कर प्रसंस्करण हानि को कम किया जाता है।

सीमेन स्टेशन प्रबंधन प्रणाली (SSMS)

सीमेन स्टेशन प्रबंधन प्रणाली (SSMS) एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे फ्रोजन सीमेन डोज (FSD) के उत्पादन को सुव्यवस्थित करने और भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल (MSP) तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली बैल जीवनचक्र प्रबंधन, सीमेन उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, जैव-सुरक्षा, फार्म और चारा प्रबंधन तथा बिक्री ट्रैकिंग जैसी सभी मुख्य गतिविधियों को कवर करती है।

SSMS को सूचना नेटवर्क फॉर सीमेन प्रोडक्शन एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (INSPRM) से जोड़ा गया है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर रियल-टाइम डेटा साझा किया जा सकता है। यह प्रणाली INAPH जैसे फील्ड-लेवल प्लेटफॉर्म से भी जुड़ी हुई है और देशभर में आपूर्ति किए गए सीमेन डोज की पूर्ण ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करती है। वर्तमान में भारत के 38 ग्रेडेड सीमेन स्टेशन SSMS का उपयोग कर रहे हैं।

INAPH

सूचना नेटवर्क फॉर एनिमल प्रोडक्टिविटी एंड हेल्थ (INAPH) एक ऐसा एप्लिकेशन है, जो किसानों के घर तक पहुंचाई जाने वाली प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित रियल-टाइम, विश्वसनीय डेटा को दर्ज करने में मदद करता है। यह परियोजनाओं की प्रगति के आकलन और निगरानी में सहायक है।

इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS)

डेयरी क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित योजना और सूचित निर्णय के लिए कुशल डेटा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। NDDB द्वारा विकसित इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS) दुग्ध सहकारी समितियों, संघों, फेडरेशनों और अन्य संबद्ध इकाइयों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करती है।

वर्तमान में लगभग 198 दुग्ध संघ, 29 विपणन डेयरियां, 54 पशु आहार संयंत्र और 15 फेडरेशन i-DIS का हिस्सा हैं। यह प्रणाली एक विश्वसनीय राष्ट्रीय सहकारी डेयरी उद्योग डेटाबेस तैयार करने में सहायक है और रणनीतिक निर्णय व नीति निर्माण को समर्थन देती है।

दूध मार्ग अनुकूलन (Milk Route Optimisation)

दूध का कुशल संग्रह और वितरण डेयरी आपूर्ति श्रृंखला की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे अधिक किफायती और व्यवस्थित बनाने के लिए NDDB ने GIS तकनीक आधारित दूध मार्ग अनुकूलन की शुरुआत की है। यह डिजिटल तरीका मैनुअल योजना को प्रतिस्थापित कर डिजिटाइज्ड मानचित्रों पर मार्गों की योजना बनाने में मदद करता है।

GIS आधारित योजना से दूरी, ईंधन लागत और समय में कमी आती है। अगस्त 2022 में विदर्भ मराठवाड़ा डेयरी विकास परियोजना के अंतर्गत किए गए मार्ग पुनःडिज़ाइन से उल्लेखनीय बचत हुई। इसी प्रकार वाराणसी, पश्चिम असम, झारखंड और इंदौर दुग्ध संघों में भी सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

NDDB ने सहकारी संस्थाओं के लिए एक निःशुल्क वेब-आधारित डायनामिक रूट प्लानिंग सॉफ्टवेयर भी विकसित किया है, जिससे रियल-टाइम मार्ग योजना और बेहतर संचालन नियंत्रण संभव हो सके।

निष्कर्ष

भारत का डेयरी क्षेत्र, जो वैश्विक दूध उत्पादन का एक चौथाई योगदान देता है, NDDB के नेतृत्व में तेज़ी से डिजिटल रूपांतरण की ओर बढ़ रहा है। NDLM, AMCS, NDERP, SSMS, i-DIS और रूट अनुकूलन जैसे एकीकृत प्लेटफॉर्म न केवल संचालन दक्षता और पारदर्शिता बढ़ा रहे हैं, बल्कि लाखों छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ रहे हैं।

सहकारी शक्ति और डिजिटल नवाचार के संयोजन से भारत टिकाऊ डेयरी विकास में नए मानक स्थापित कर रहा है, जहाँ हर लीटर दूध और हर पशु एक जुड़ी हुई, ट्रेसेबल और कुशल मूल्य श्रृंखला का हिस्सा है।

सड़क पर लापरवाही नहीं चलेगी! केंद्र-राज्य बैठक में सुरक्षा नियमों पर बड़ा एक्शन प्लान, परिवहन मंत्री कश्यप दिल्ली में हुई बैठक में हुए शामिल

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के परिवहन मंत्री केदार कश्यप बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित सभी राज्यों के परिवहन मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।


केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकांश मौतें यातायात नियमों और सुरक्षा उपायों के पालन में लापरवाही के कारण होती हैं। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि चारपहिया वाहनों में सीट बेल्ट और दोपहिया वाहनों में हेलमेट के उपयोग को सख्ती से लागू किया जाए।

बैठक में परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने छत्तीसगढ़ में संचालित परिवहन से जुड़ी योजनाओं, परियोजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी केंद्रीय मंत्री को दी। इस दौरान परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश भी उपस्थित रहे।

ओवरलोडिंग पर सख्ती पर जोर

बैठक में ओवरलोडिंग को सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण बताते हुए इसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई को आवश्यक बताया गया। ओवरलोड वाहनों की नियमित जांच, तकनीकी निगरानी, प्रभावी प्रवर्तन और कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू करने पर सहमति बनी।

जन-जागरूकता अभियानों पर चर्चा

सड़क सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता अभियानों, सड़क सुरक्षा मित्रों की भागीदारी तथा स्कूल और कॉलेज स्तर पर यातायात नियमों के प्रचार-प्रसार पर भी विचार किया गया। इसके साथ ही दुर्घटनाओं में घायलों के कैशलेस उपचार, हिट एंड रन मामलों में मुआवजा व्यवस्था, वाहन सुरक्षा के नए प्रावधान और मोटर वाहन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा हुई।

RDTC–DTC भवन समय पर पूरे होंगे

परिवहन मंत्री कश्यप ने बताया कि केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप राज्य में स्वीकृत क्षेत्रीय चालक प्रशिक्षण केंद्र (RDTC) और जिला परिवहन केंद्र (DTC) भवनों के निर्माण को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर से बढ़ी पारदर्शिता

उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में वर्तमान में 8 ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, कोरबा, राजनांदगांव और रायगढ़) संचालित हैं। मशीनों से होने वाली फिटनेस जांच पारदर्शी और तकनीकी रूप से सटीक है। इस क्षेत्र में गुजरात के बाद छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर है।

उन्होंने बताया कि आगामी समय में जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद, कांकेर, दंतेवाड़ा, सारंगढ़ और सूरजपुर में भी नए ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

दो राज्यों के बीच सहयोग पर चर्चा, मुख्यमंत्री साय ने गोवा सीएम से की मुलाकात

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गोवा प्रवास के दौरान गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच आपसी सहयोग और साझा हितों से जुड़े विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई।


IICDEM 2026 की तैयारियों के सिलसिले में भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों (CEOs) का सम्मेलन आयोजित किया

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रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आज नई दिल्ली स्थित IIIDEM में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों (CEOs) का एक सम्मेलन आयोजित किया। यह सम्मेलन 21 से 23 जनवरी, 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 'भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन सम्मेलन' (IICDEM) की तैयारियों के हिस्से के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और उन्हें IICDEM 2026 की बारीकियों तथा उनकी विशिष्ट भूमिकाओं के बारे में अवगत कराया।

संबोधन के बाद, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों ने उन 36 विषयगत समूहों (thematic groups) पर चर्चा की, जिनका नेतृत्व IICDEM 2026 में संबंधित CEOs द्वारा किया जाएगा। इन विषयों में चुनाव प्रबंधन के सभी पहलू शामिल हैं और इनका उद्देश्य चुनाव प्रबंधन निकायों (EMBs) के समृद्ध और विविध अनुभवों के आधार पर ज्ञान का भंडार विकसित करना है।

IICDEM 2026 चुनाव प्रबंधन और लोकतंत्र के क्षेत्र में भारत द्वारा आयोजित अपनी तरह का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन होगा। इसमें दुनिया भर के चुनाव प्रबंधन निकायों (EMBs) का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, भारत में विदेशी मिशन और चुनाव क्षेत्र के शैक्षणिक व व्यावहारिक विशेषज्ञ शामिल होंगे।

IICDEM 2026 में सामान्य और पूर्ण सत्र शामिल होंगे, जैसे उद्घाटन सत्र, EMB नेताओं का पूर्ण सत्र, EMB कार्य समूह की बैठकें और 'ECINET' का शुभारंभ। इसके साथ ही वैश्विक चुनावी विषयों, आदर्श अंतर्राष्ट्रीय चुनावी मानकों और चुनावी प्रक्रियाओं में सर्वोत्तम प्रथाओं व नवाचारों को कवर करने वाले विषयगत सत्र भी आयोजित किए जाएंगेइस सम्मेलन में 4 IIT, 6 IIM, 12 NLU और IIMC सहित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की भी भागीदारी होगी। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के CEOs के नेतृत्व में 36 विषयगत समूह और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक विशेषज्ञ इन विचार-विमर्शों में अपना योगदान देंगे।

हिंसा नहीं, विकास बनेगा सुकमा की नई पहचान : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

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रायपुर। बस्तर के अति संवेदनशील इलाकों में विकास की नई किरण पहुंचाने के संकल्प के साथ उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा आज सुकमा ले के जगरगुंडा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बैठक में आए पारंपरिक समाज प्रमुखों गायता, सिरहा, पुजारी, बैगा और जनप्रतिनिधियों के साथ आत्मीय मुलाकात की। जिसमें समाज प्रमुखों ने हिंसा के दौर में विकास के गांव तक नहीं पहुंचने के संबंध में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने बताया कैसे पहले कोई भी विकास कार्य ग्राम में आता तो नक्सलियों द्वारा उनको कभी पूरा होने नहीं दिया जाता था। 

जिससे ग्राम में आधारभूत सुविधाओं का भी आभाव है। जिस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अब हिंसा नहीं बल्कि विकास सुकमा की नई पहचान बनेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन द्वारा ऐसे क्षेत्रों में जहां विकास माओवादी गतिविधियों के कारण बाधित हो गया था, उनके लिए तीव्र विकास हेतु नियद नेल्ला नार योजना चलाई जा रही है। जहां सुरक्षा कैंप केवल नक्सलवाद को रोकने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं को ग्रामीणों तक पहुँचाने के 'सुविधा केंद्र' के रूप में कार्य कर रहे हैं और कई गांव जहां सड़क, बिजली, पेयजल की समस्या थी वहां अब ये सुविधाएं पहुंच रहीं हैं।

उन्होंने आगे बताया कि शासन द्वारा ऐसे ग्राम जो अपने सभी भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाकर खुद को 'सशस्त्र नक्सल हिंसा मुक्त' घोषित करेंगे, उन्हें इलवद पंचायत योजना से 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विकास राशि प्रदाय की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित जनपद सदस्य को 10 लाख और जिला पंचायत सदस्य को 15 लाख रुपये की राशि क्षेत्र के विकास हेतु प्रदान की जाएगी। यह राशि गाँव के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढाँचे के लिए सीधे उपयोग की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि बस्तर अंचल के वनोपजों से ग्रामीण केवल वनोपज संग्राहक से अब व्यवसायी बनने का सफर तय कर रहे हैं, बस्तर के गांवों में विकास का मॉडल तैयार हो रहे हैं। अब ग्रामीण केवल वनोपज इकट्ठा नहीं करेंगे, बल्कि गांवों में ही प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर उत्पादक और व्यवसायी बनेंगे। गांव के वनोत्पादों को भी उचित मूल्य प्राप्त होगा, प्रसंस्करण से अभी के मुकाबले 4 से 5 गुना अधिक लाभ ग्रामीणों को प्राप्त होगा।

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने समाज प्रमुखों से आग्रह किया कि अब हिंसा को रोकना आवश्यक है, वे जंगलों में भटक रहे युवाओं को पुनर्वास नीति का लाभ उठाने और देश के विकास में भागीदार बनने के लिए प्रेरित करें, ताकि सभी का विकास शासन के साथ मिलकर सुनिश्चित किया जा सके। 

50 ग्रामीणों को मिले उन्नत किस्म के पौधे

 इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत समाग्री का भी वितरण किया। जिसमें उन्होंने किसानों को उन्नत किस्म के मूंग और उड़द के बीज प्रदान किए, उद्यानिकी विभाग की ओर से 50 कृषकों को टमाटर और बैंगन के उन्नत किस्म के पौधे वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त 17 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किया गया। 5 ग्राम समूहों को पावर वीडर, 5 संकुल संगठनों को 10 लाख रुपए, 76 समूहों को 11.40 लाख रुपए की रिवोल्विंग फंड, 63 समूहों को 37.80 लाख रुपए की सीआईएफ राशि, 6 समूहों को बैंक लिंकेज के तहत A8 लाख रुपए की राशि भी उनके द्वारा प्रदान की गई।

40 लोगों को मोतियाबिंद के इलाज के लिए विशेष बस द्वारा उपमुख्यमंत्री ने किया रवाना

नियद नेल्ला नार योजना के तहत संवेदनशील ग्रामों को मोतियाबिंद मुक्त बनाने के लिए मिशन दृष्टी के तहत विशेष बस को उपमुख्यमंत्री शर्मा ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा संचालित यह बस सिलगेर, कोंडासावली, तिमापुरम जैसे दुर्गम इलाकों के दोनों आँखों से मोतियाबिंद के मरीजों को विशेष बस द्वारा जिला अस्पताल पहुंचा कर उपचार कराया जाएगा। इसके तहत 40 लोगों के दल को आज रवाना किया गया। जहां उनका पूर्ण उपचार किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने हितग्राहियों से बात कर सभी का हाल जाना और उन्हें पूर्ण उपचार करवाने की सलाह दी।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पीएचसी बुरड़ी, गगनपल्ली और किस्टाराम को एनक्यूएएस सर्टिफिकेट प्रदान किया

स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पीएचसी बुरड़ी, गगनपल्ली और किस्टाराम को उपमुख्यमंत्री ने नेशनल क्वालिटी एसस्यूरेंश स्टैण्डर्ड (एनक्यूएएस) सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री शर्मा ने स्वास्थ्यकर्मियों के क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की भी जानकारी ली एवं उन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष कोंटा कुसुमलता कोवासी, नगर पालिका परिषद सुकमा अध्यक्ष हुंगाराम मरकाम, नगर पंचायत दोरनापाल अध्यक्ष राधा नायक, जिला पंचायत सदस्य कोरसा सन्नू, हुंगा राम मरकाम, सरपंच जगरगुंडा नित्या कोसमा, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास भीम सिंह, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी पी सुंदरराज, संचालक अश्विनी देवांगन, कलेक्टर अमित कुमार, एसपी किरण चव्हाण, जनप्रतिनिधि धनीराम बारसे, नूपुर वैदिक, विश्वराज चौहान, बलिराम नायक, रंजीत बारठ तथा अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

नए ऊर्जा और नई रणनीति के साथ बीजापुर के विकास में जुटें अधिकारी - उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा बीजापुर के अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान बुधवार को जिला कार्यालय सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ नियद नेल्ला नार योजनान्तर्गत संचालित विकास कार्यों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने विभागवार योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की जानकारी लेते हुए कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र माओवाद का पूरी तरह उन्मूलन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके बाद बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का नया अध्याय शुरू होगा।

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि माओवाद के समूल उन्मूलन के बाद लोगों में विश्वास जगाना और विकास कार्यों में तीव्रता लाना आवश्यक होगा। अब समय बहुत कम है, इसलिए शासन की सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन नई ऊर्जा, नई रणनीति और जनकल्याण की भावना के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि बीजापुर के सुदूर अंचलों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी हितग्राही मूलक योजनाओं से प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ा जाएगा। जिले के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाएं सुगमता से पहुंचेंगी, जिसमें जिला, विकासखण्ड और मैदानी अमले के अधिकारी-कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि माओवाद मुक्त ग्राम पंचायतों को विशेष परियोजना के तहत ‘इलवद पंचायत’ के रूप में एक करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी जाएगी। इसके साथ ही शासन की महत्वाकांक्षी ‘नियद नेल्ला नार' योजना के अंतर्गत जिले के 201 गांवों को शामिल किया गया है, जहां शासकीय योजनाओं की शत-प्रतिशत संतृप्तता और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया जा रहा है।

बैठक में एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा ने कहा कि बीजापुर में अब शांति और सुरक्षा की स्थिति सुदृढ़ हो रही है, जिससे शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में पहले की तुलना में अधिक सुगमता आई है। उन्होंने कहा कि पहले और आज के बीजापुर में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

 पंचायत विभाग के सचिव भीम सिंह ने बताया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का निराकरण लगातार किया जा रहा है और बस्तर संभाग का विकास शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

कलेक्टर संबित मिश्रा ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बीजापुर के समग्र विकास के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आश्वासन दिया।

बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, संचालक अश्विनी देवांगन, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, डीएफओ रंगानाथन रामाकृष्णन, जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे सहित जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


निर्धारित मानकों का पालन न करने पर 33 कॉमन सर्विस सेंटर बंद, सीएससी मुख्यालय दिल्ली की सख्त कार्रवाई

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रायपुर। दंतेवाड़ा जिले में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के संचालन में निर्धारित नियमों का पालन न करने पर सीएससी मुख्यालय, दिल्ली ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में अनियमितताएँ मिलने के बाद जिले के 33 सीएससी की पहचान संख्या (आईडी) को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।

जांच के दौरान पाया गया कि कई कॉमन सर्विस सेंटर बिना स्थायी केंद्र के संचालित हो रहे थे। कुछ केंद्रों में निर्धारित कॉमन ब्रांडिंग नहीं थी या बैनर बिना फ्रेम के लगाए गए थे। कई स्थानों पर दर सूची (रेट चार्ट) भी प्रदर्शित नहीं की गई थी। इसके अलावा, कुछ ग्राम स्तरीय उद्यमी (व्हीएलई) अपनी अधिकृत सीएससी पहचान संख्या की बजाय अन्य माध्यमों से लेन-देन कर रहे थे, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

सीएससी मुख्यालय ने कहा कि नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए यह सख्ती आगे भी जारी रहेगी। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन और सीएससी टीम द्वारा पुनः निरीक्षण किया जाएगा। यदि अन्य केंद्रों में भी अनियमितताएँ मिलीं, तो उनकी पहचान संख्या भी रद्द की जा सकती है। जिन व्हीएलई की आईडी बंद की गई है, उन्हें निर्देश दिया गया है कि निर्धारित ब्रांडिंग लगाएँ, दर सूची प्रदर्शित करें और स्थायी केंद्र से संचालन सुनिश्चित करें। सभी लेन-देन केवल अपनी अधिकृत सीएससी आईडी से करें। इन मानकों का पालन करने के बाद ही उनके मामलों की पुनः समीक्षा की जाएगी और पहचान संख्या पुनः सक्रिय करने पर विचार किया जाएगा।

सीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर कॉमन ब्रांडिंग सामग्री डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध है, ताकि सभी VLE अपने केंद्रों को निर्धारित मानकों के अनुसार व्यवस्थित कर सकें। यह कार्रवाई जिले में पारदर्शिता बढ़ाने, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और ग्रामीणों को बेहतर सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।


बालोद में पहली बार आयोजित होगा प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी

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09 से 13 जनवरी तक ग्राम दुधली में जुटेंगे देश-विदेश के 15 हजार रोवर-रेंजर

रायपुर-बालोद जिले के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, नई दिल्ली के तत्वावधान में जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में 09 से 13 जनवरी 2026 तक ‘प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी’ का वृहद एवं भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन देश में पहली बार आयोजित हो रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ के 4,252 सहित देश-विदेश से कुल 15,000 रोवर, रेंजर एवं सीनियर स्काउट-गाइड भाग लेंगे।

09 जनवरी को राज्यपाल करेंगे जंबूरी का शुभारंभ

प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का शुभारंभ शुक्रवार 09 जनवरी 2026 को दोपहर 2 :00 बजे राज्यपाल  रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल जैन करेंगे।

उद्घाटन समारोह में अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति उद्घाटन समारोह में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, कांकेर लोकसभा सांसद भोजराज नाग, मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. के.के. खंडेलवाल उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा विधायकगण, राज्य व जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय व राज्य पदाधिकारी, तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि भी समारोह की गरिमा बढ़ाएंगे।

12 जनवरी को मुख्यमंत्री होंगे समापन समारोह के मुख्य अतिथि

जंबूरी के समापन अवसर पर 12 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही आयोजन के विभिन्न दिवसों में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सहित अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अतिथि शामिल होंगे।

भारतीय एवं वैश्विक संस्कृति की दिखेगी अनुपम झलक

पांच दिवसीय इस आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं अन्य देशों से आए प्रतिभागियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी।

इस जंबूरी के माध्यम से छत्तीसगढ़ी एवं भारतीय संस्कृति के साथ-साथ वैश्विक संस्कृति की भी आकर्षक झलक देखने को मिलेगी।

रोमांचक एवं शैक्षणिक गतिविधियों का होगा आयोजन

जंबूरी के दौरान मार्च पास्ट, क्लोजिंग सेरेमनी, एथनिक फैशन शो, एडवेंचर एरिया, वॉटर स्पोर्ट्स, कैप फायर, रोड कैम्प फायर, राज्य प्रदर्शनी, आदिवासी कार्निवल, राष्ट्रीय युवा दिवस, मास ट्री प्लांटेशन, आपदा प्रबंधन, बैंड प्रतियोगिता, युवा सांसद, क्विज प्रतियोगिता, लोक नृत्य सहित अनेक शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं साहसिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

सुविधा, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की पुख्ता व्यवस्था

भारत स्काउट्स एवं गाइड्स जंबूरी काउंसिल एवं जिला प्रशासन द्वारा आयोजन स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं। जंबूरी मार्केट में खाद्य सामग्री, दवाइयाँ एवं आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध रहेंगी। शुद्ध पेयजल, शौचालय, स्नानघर एवं स्वच्छता व्यवस्था, 30 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल, 24 घंटे चिकित्सकीय सुविधा, अग्निशमन, पुलिस, यातायात एवं सुरक्षा बलों की तैनाती एनडीआरएफ टीम की विशेष तैनातीरहेगी।

राज्य एवं जिले के लिए ऐतिहासिक आयोजन

प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आयोजन बालोद जिला एवं सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस आयोजन से न केवल जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ होगी, बल्कि युवाओं में नेतृत्व, सेवा एवं राष्ट्र निर्माण की भावना भी प्रबल होगी।

संवेदनशील शासन की मिसाल: जनदर्शन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मौके पर सुलझाईं समस्याएँ

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ‘जनदर्शन’ के माध्यम से अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा सुनते हुए न केवल उसकी समस्या को समझ रहे हैं, बल्कि मौके पर ही समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। लोगों की जरूरतों, मांगों और तकलीफों के प्रति यह संवेदनशील और त्वरित दृष्टिकोण यह स्पष्ट करता है कि संवेदनशीलता ही सुशासन के केंद्र में है। जब जन आकांक्षाओं को मुख्यमंत्री की सहृदयता से दिशा मिलती है, तब अंत्योदय की संकल्पना साकार होती है। 

लोकतंत्र में सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है। 

राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री के शासकीय निवास कार्यालय में आयोजित जनदर्शन आज सेवा, संवेदना और समाधान का सजीव उदाहरण बन गया। आज आयोजित जनदर्शन में कुल 1950 आवेदन प्राप्त हुए।मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के दूर-दराज़ अंचलों से आए नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही स्पष्ट निर्देश दिए। कई जरूरतमंदों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई, जिससे यह संदेश और मजबूत हुआ कि जन सरोकारों से जुड़ी समस्याओं का समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भरता की राह: जीवन में लौटी गतिशीलता

आज के जनदर्शन ने कई दिव्यांगजनों के जीवन में नई उम्मीद जगाई। रायपुर के खमतराई निवासी जीवन दास मानिकपुरी और आरंग के भारत साहू को मुख्यमंत्री द्वारा बैटरीचलित ट्राइसिकल प्रदान की गई। ट्राइसिकल पाकर उनके चेहरे पर आत्मनिर्भरता की मुस्कान स्पष्ट झलक रही थी। अब उन्हें आवागमन के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसी तरह रायपुर के चंदू यादव और सुमन साहू को ट्राइसिकल एवं व्हीलचेयर प्रदान की गई। वहीं, सुनने की क्षमता खो चुके सागर नायक और उमेश पटेल को तत्काल श्रवण यंत्र उपलब्ध कराए गए, जिससे वे फिर से दुनिया की आवाज़ें सुन सकेंगे।

लकवा पीड़ित बसंती को इलाज के लिए मिली 5 लाख रुपए की सहायता

जनदर्शन में महासमुंद जिले के ग्राम बड़ेटेमरी की बसंती साव की बड़ी उम्मीद आज पूरी हुई। पैरों से लकवाग्रस्त बसंती ने अपने इलाज के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता और पारिवारिक स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री साय ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अधिकारियों को तत्काल निर्देशित कर मुख्यमंत्री आर्थिक सहायता योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपए की राशि स्वीकृत कराई। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी बसंती को शासन से 75 हजार रुपए की सहायता मिल चुकी है। इस त्वरित निर्णय से बसंती और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली।

60 वर्षीय हनुमंत राव को मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

जनदर्शन में रायपुर के तात्यापारा निवासी 60 वर्षीय अविवाहित श्रमिक हनुमंत राव की समस्या का भी मौके पर ही समाधान हुआ। माता-पिता के निधन के बाद राशन कार्ड की पात्रता को लेकर परेशान  राव ने मुख्यमंत्री को अपनी व्यथा बताई। मुख्यमंत्री ने उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनी और उपस्थित अधिकारियों को तत्काल राशन कार्ड बनाने के निर्देश दिए, जिससे वे अब शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

तीन दिव्यांगों को 20-20 हजार रुपए की तात्कालिक सहायता

मुख्यमंत्री साय ने सूरज नगर लाभांडी, रायपुर निवासी 17 वर्षीय दिव्यांग राज शर्मा को दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण 20 हजार रुपए की तात्कालिक आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। इसके साथ ही फूल गिरी गोस्वामी को पुत्री के विवाह हेतु 20 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई। रायगढ़ निवासी दोनों पैरों से दिव्यांग ओमप्रकाश निषाद को उच्च शिक्षा के लिए भी मुख्यमंत्री द्वारा 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता तत्काल स्वीकृत की गई।

जनदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह केवल आवेदन प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आम जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनदर्शन में प्राप्त प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी जरूरतमंद नागरिक को अनावश्यक भटकना न पड़े।


वित्तीय समावेशन पर आधारित ‘दीदी के गोठ’ का छठवां एपिसोड 08 जनवरी को होगा प्रसारित

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रायपुर। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान द्वारा संचालित लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ का छठवां एपिसोड आगामी 08 जनवरी 2026 को प्रसारित किया जाएगा। यह एपिसोड वित्तीय समावेशन की थीम पर आधारित होगा, जिसमें स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी प्रेरक कहानियों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

इस विशेष एपिसोड में दुर्ग, बालोद एवं गरियाबंद जिलों की दीदियाँ अपने जीवन के अनुभव साझा करेंगी। वे बताएंगी कि बैंकिंग सुविधाओं से जुड़ाव, नियमित बचत, ऋण, बीमा तथा डिजिटल लेन-देन जैसी वित्तीय सेवाओं ने उनके जीवन में किस प्रकार सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाए हैं। कार्यक्रम के माध्यम से यह भी रेखांकित किया जाएगा कि ग्रामीण महिलाएँ किस तरह राज्य की अर्थव्यवस्था में सशक्त भागीदारी निभा रही हैं।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के माननीय उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा का संदेश भी प्रसारित किया जाएगा। अपने संदेश में उपमुख्यमंत्री शर्मा ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, वित्तीय अनुशासन अपनाने और आजीविका के नए अवसर सृजित करने हेतु प्रोत्साहित करेंगे।

‘दीदी के गोठ’ का यह छठवां एपिसोड 08 जनवरी 2026 को हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा में आकाशवाणी के राज्य के समस्त केंद्रों से दोपहर 2:00 बजे से प्रसारित किया जाएगा। वहीं बस्तरिया भाषा में आकाशवाणी केंद्र जगदलपुर तथा सरगुजिया भाषा में आकाशवाणी केंद्र अंबिकापुर से दोपहर 2:30 बजे से इसका प्रसारण किया जाएगा। यह कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उपयोगी जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करेगा।


वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर का दौरा किया

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नई दिल्ली-भारतीय वायुसेना प्रमुख (चीफ ऑफ द एयर स्टाफ) एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने 8 जनवरी 2026 को दिल्ली कैंट स्थित राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) गणतंत्र दिवस शिविर (RDC) का दौरा किया।

इस अवसर पर वायुसेना प्रमुख ने थलसेना, नौसेना और वायुसेना—तीनों विंग्स से आए एनसीसी कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इसके पश्चात राजस्थान के पिलानी स्थित बिड़ला बालिका विद्यापीठ की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत आकर्षक बैंड प्रदर्शन ने सभी का मन मोह लिया।

एयर चीफ मार्शल ने सभी 17 एनसीसी निदेशालयों के कैडेट्स द्वारा विभिन्न सामाजिक जागरूकता विषयों पर तैयार किए गए फ्लैग एरिया का निरीक्षण किया तथा इसके बाद एनसीसी हॉल ऑफ फेम का भ्रमण भी किया।

युवाओं की भूमिका पर जोर

कैडेट्स को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने भारत के युवाओं पर अपना विश्वास व्यक्त किया और राष्ट्र निर्माण में एनसीसी की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनसीसी देश की सबसे बड़ी वर्दीधारी युवा संस्था है, जिसमें 20 लाख से अधिक कैडेट्स शामिल हैं, जिनमें 40 प्रतिशत बालिकाएं हैं।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एनसीसी कैडेट्स की सक्रिय भागीदारी तथा विभिन्न सरकारी पहलों के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कैडेट्स से आह्वान किया कि वे वर्दी से परे भी राष्ट्रवाद को अपने जीवन में अपनाएं और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए “कभी हार न मानने” का दृष्टिकोण विकसित करें।

RDC में चयन पर दी बधाई

गणतंत्र दिवस शिविर के महत्व को रेखांकित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने RDC 2026 में अपने-अपने निदेशालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयनित होने पर कैडेट्स को बधाई दी।

सांस्कृतिक कार्यक्रम ने बांधा समां

इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स ने समूह गीत, बैले और समूह नृत्य के माध्यम से भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता हुआ एक शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसे एयर चीफ मार्शल तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने खूब सराहा।

दूरसंचार विभाग ने “मानकीकरण प्रक्रियाओं” पर वेबिनार का आयोजन किया

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नई दिल्ली- संचार मंत्रालय के अंतर्गत दूरसंचार विभाग (DoT) ने 7 जनवरी 2026 को “मानकीकरण प्रक्रियाएं (Standardization Processes)” विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। इस वेबिनार का उद्देश्य स्टार्टअप्स, टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) के लाभार्थियों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के हितधारकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार मानकीकरण ढांचों तथा उनमें भागीदारी की प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक करना था।

इस वेबिनार का आयोजन टेलीकॉम सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (TCoE) इंडिया द्वारा, दूरसंचार विभाग की ओर से, टेलीकम्युनिकेशंस स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट सोसाइटी, इंडिया (TSDSI) और टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर (TEC) के सहयोग से किया गया। वेबिनार में 150 से अधिक प्रतिभागियों—स्टार्टअप्स, TTDF लाभार्थियों, शिक्षाविदों और उद्योग प्रतिनिधियों—ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में मानकीकरण के महत्व पर जोर

वेबिनार का शुभारंभ एक उद्घाटन सत्र से हुआ, जिसमें अशोक कुमार, उप महानिदेशक (मानक, अनुसंधान एवं नवाचार), DoT, डॉ. राजेश शर्मा, सीईओ, TCoE इंडिया तथा ए. के. मित्तल, महानिदेशक, TSDSI ने संबोधित किया। वक्ताओं ने नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देने, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय मानक विकास में भारत की भूमिका को मजबूत करने में दूरसंचार मानकों के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्रों में वैश्विक मानकीकरण प्रक्रियाओं की जानकारी

TSDSI के विशेषज्ञ पी. के. जसवाल और धिवागर बास्करन (CEWiT) ने 3GPP, oneM2M और TSDSI की मानकीकरण प्रक्रियाओं पर एक विस्तृत तकनीकी सत्र प्रस्तुत किया। इस सत्र में 3GPP की संगठनात्मक संरचना, इंटरऑपरेबल IoT और M2M इकोसिस्टम में oneM2M की भूमिका, मानक विकास की प्रक्रिया तथा स्टार्टअप्स के लिए तकनीकी योगदान प्रस्तुत करने और भागीदारी के व्यावहारिक मार्गों पर चर्चा की गई।

इसके बाद दूरसंचार इंजीनियरिंग सेंटर (TEC), DoT के विनीत मलिक, निदेशक (रेडियो) ने ITU-R और ITU-T मानकीकरण ढांचों की जानकारी दी। उन्होंने रेडियो स्पेक्ट्रम प्रबंधन, दूरसंचार नेटवर्क मानकों और वैश्विक नियामक समन्वय में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) की भूमिका तथा भारतीय हितधारकों के लिए उपलब्ध भागीदारी के अवसरों को रेखांकित किया।

स्टार्टअप अनुभव साझा सत्र

वेबिनार में एक स्टार्टअप अनुभव साझा सत्र भी शामिल था, जिसमें डॉ. श्रीनाथ रामनाथ, संस्थापक, लेखा वायरलेस सॉल्यूशंस ने मानकीकरण निकायों से जुड़ने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रारंभिक चुनौतियों, इकोसिस्टम से प्राप्त सहयोग और वैश्विक मानकों में योगदान से मिलने वाले व्यावहारिक लाभों पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्थाओं द्वारा स्वीकृत तकनीकी योगदान, वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त मानकों का हिस्सा बनते हैं, जो आगे चलकर राष्ट्रीय विनियमों, लाइसेंसिंग ढांचों और ऑपरेटरों की खरीद प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। इससे भारतीय नवप्रवर्तकों की वैश्विक विश्वसनीयता और दृश्यता बढ़ती है।

भारत 6G मिशन के अनुरूप पहल

वेबिनार का समापन एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को भविष्य की मानकीकरण पहलों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।

दूरसंचार विभाग ने दोहराया कि मानकीकरण इंटरऑपरेबिलिटी, वैश्विक बाजार तक पहुंच, प्रौद्योगिकी अपनाने और बौद्धिक संपदा सृजन में अहम भूमिका निभाता है। भारत 6G मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप उभरती प्रौद्योगिकियों में भारतीय हितधारकों की वैश्विक मानकीकरण प्रणालियों में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए DoT अपने तकनीकी और संस्थागत निकायों के माध्यम से निरंतर प्रयास कर रहा है।

संस्थानों के बारे में संक्षिप्त परिचय

टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर (TEC):

TEC, भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की तकनीकी शाखा है, जो दूरसंचार नेटवर्क, उपकरणों, सेवाओं और इंटरऑपरेबिलिटी के लिए तकनीकी मानक और विनिर्देश तैयार करता है तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करता है।

टेलीकम्युनिकेशंस स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट सोसाइटी, इंडिया (TSDSI):

TSDSI एक स्वायत्त राष्ट्रीय मानक विकास संगठन है, जो भारत-विशिष्ट दूरसंचार और ICT मानकों का विकास करता है और वैश्विक मानकीकरण निकायों में भारत की भागीदारी सुनिश्चित करता है।

टेलीकॉम सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (TCoE) इंडिया:

TCoE इंडिया एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी पहल है, जो सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों को जोड़कर दूरसंचार नवाचार, क्षमता निर्माण और स्टार्टअप सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है।


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