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आयुष्मान भारत: समग्र स्वास्थ्य कवरेज, सुदृढ़ अवसंरचना और डिजिटल स्वास्थ्य की दिशा में परिवर्तनकारी पहल

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आयुष्मान भारत चार प्रमुख घटकों से मिलकर बना है:

(क) आयुष्मान आरोग्य मंदिर

आयुष्मान भारत का पहला घटक 1,50,000 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स (AB-HWCs) की स्थापना से संबंधित है, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में जाना जाता है। इसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को उन्नत कर समुदाय के निकट समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन केंद्रों का उद्देश्य समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (CPHC) प्रदान करना है, जिसके तहत प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) तथा संक्रामक रोग सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है और गैर-संचारी रोगों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा मौखिक, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच व उपचार सेवाएँ जोड़ी गई हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य, ईएनटी, नेत्र, मुख स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, उपशामक देखभाल, ट्रॉमा केयर तथा योग जैसी स्वास्थ्य संवर्धन गतिविधियाँ भी चरणबद्ध रूप से शामिल की गई हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाते हुए रोकथाम, संवर्धन, उपचार, पुनर्वास और उपशामक सेवाओं को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर तक जोड़ती है। किसी व्यक्ति की जीवन-कालीन स्वास्थ्य आवश्यकताओं का लगभग 80–90% भाग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से पूरा होता है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम एवं जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य टीम द्वारा समुदाय स्तर पर जनसंख्या सूचीकरण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, समय पर रेफरल, उपचार अनुपालन तथा फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाता है। आवश्यक दवाइयाँ एवं जांच सुविधाएँ समुदाय के निकट उपलब्ध कराकर सुदृढ़ एवं लचीली प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है।

उपलब्धियाँ (30.11.2025 तक):

  • 1,81,873 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित

  • 12 सेवाओं का विस्तारित पैकेज एवं टेली-परामर्श सुविधा

  • कुल 494.71 करोड़ लाभार्थी आगमन (फुटफॉल)

  • 41.93 करोड़ टेली-परामर्श

  • उच्च रक्तचाप की 39.50 करोड़ जांच

  • मधुमेह की 36.70 करोड़ जांच

  • मौखिक कैंसर की 32.40 करोड़ जांच

  • महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की 15.23 करोड़ जांच

  • महिलाओं में स्तन कैंसर की 8.37 करोड़ से अधिक जांच

  • 6.54 करोड़ योग/वेलनेस सत्र आयोजित

(ख) आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)

आयुष्मान भारत का दूसरा स्तंभ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है, जो विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके अंतर्गत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य कवरेज द्वितीयक एवं तृतीयक उपचार हेतु प्रदान किया जाता है।

प्रमुख तथ्य:

  • 12 करोड़ परिवार योजना के अंतर्गत आच्छादित

  • कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने संसाधनों से लाभार्थी आधार का विस्तार किया

  • फरवरी 2024 से लगभग 37 लाख आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएँ शामिल

  • 42.48 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी (1 दिसम्बर 2025 तक)

  • 10.98 करोड़ अस्पताल में भर्ती, कुल लागत ₹1.60 लाख करोड़

  • 32,574 अस्पताल (15,532 निजी सहित) पैनल में

  • महिलाओं की भागीदारी:

    • आयुष्मान कार्ड – लगभग 49%

    • अस्पताल में भर्ती – लगभग 48%

आयुष्मान वय वंदना कार्ड:

  • 29 अक्टूबर 2024 को 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉन्च

  • अनुमानित 4.5 करोड़ परिवार / 6 करोड़ व्यक्ति लाभान्वित

  • अब तक 94,19,515 पंजीकरण

डिजिटल पहल:

  • Ayushman App (एंड्रॉयड आधारित) – फेस ऑथ, OTP, आईरिस एवं फिंगरप्रिंट से सत्यापन

  • दिल्ली और ओडिशा में 2025 से योजना का विस्तार

(ग) प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)

यह आयुष्मान भारत का तीसरा स्तंभ है, जिसका कुल परिव्यय लगभग ₹64,180 करोड़ है। इसे 25 अक्टूबर 2021 को शुरू किया गया और यह FY 2021–22 से 2025–26 तक लागू है। यह देशभर में स्वास्थ्य अवसंरचना सुदृढ़ करने की सबसे बड़ी योजना है।

इस मिशन का उद्देश्य प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता बढ़ाना तथा वर्तमान एवं भविष्य की महामारियों/आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना है।

प्रमुख लक्ष्य:

  • आईटी-सक्षम रोग निगरानी प्रणाली

  • ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर सर्विलांस प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

  • प्रवेश बिंदुओं (Points of Entry) पर स्वास्थ्य इकाइयों का सुदृढ़ीकरण

  • वन हेल्थ अप्रोच के अंतर्गत अनुसंधान एवं जैव-चिकित्सीय क्षमता विकास

अवसंरचना प्रावधान:

  • 17,788 भवनरहित उप-स्वास्थ्य केंद्रों का आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में निर्माण

  • 11,024 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स

  • 3,382 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स

  • 730 जिला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ

  • 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में 50–100 बिस्तरों के क्रिटिकल केयर ब्लॉक

वर्तमान स्थिति (CSS घटक):

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों हेतु कुल आवंटन: ₹34,932.27 करोड़

  • ₹32,928.82 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति

  • 621 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 744 जिला प्रयोगशालाएँ, 9519 उप-स्वास्थ्य केंद्र AAM आदि स्वीकृत

12 केंद्रीय अस्पतालों (AIIMS, PGI, JIPMER, IMS-BHU आदि) में 150-बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्वीकृत हैं।

(घ) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

सितंबर 2021 में प्रारंभ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य नागरिक-केंद्रित, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

इसके माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड (प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट, डिस्चार्ज सारांश आदि) सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकते हैं और सहमति के आधार पर डॉक्टरों से साझा कर सकते हैं, जिससे निरंतर एवं बेहतर उपचार संभव होता है।

प्रमुख घटक:

  • ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) – नागरिकों की डिजिटल पहचान

  • HPR – स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री

  • HFR – स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री

  • ड्रग रजिस्ट्री

इंटरऑपरेबिलिटी गेटवे:

  • Health Information Consent Manager (HIE-CM)

  • National Health Claims Exchange (NHCX)

  • Unified Health Interface (UHI)

इन पहलों के माध्यम से ABDM स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

IREDA ने नववर्ष 2026 के अवसर पर आयोजित किया कर्मचारी मिलन समारोह, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सशक्त भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया

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इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) ने 1 जनवरी 2026 को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में नववर्ष 2026 के उपलक्ष्य में एक विशेष न्यू ईयर गेट-टुगेदर का आयोजन किया। यह आयोजन कर्मचारियों के बीच एकता, सहयोग और नववर्ष में नई ऊर्जा के साथ कार्य करने के संकल्प को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के सचिव संतोष कुमार सारंगी, संयुक्त सचिव जे.वी.एन. सुब्रमण्यम, IREDA के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार दास, निदेशक (वित्त) डॉ. विजय कुमार मोहंती, HUDCO के CMD संजय कुलश्रेष्ठ सहित मंत्रालय और IREDA के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संतोष कुमार सारंगी ने टीम निर्माण के महत्व पर जोर दिया और युवा पेशेवरों को भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने IREDA की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि MSME क्षेत्र, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना जैसी प्रमुख पहलों के अंतर्गत वित्तीय सहायता को और सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है। उन्होंने IREDA की विकास यात्रा में MNRE के निरंतर समर्थन का आश्वासन भी दिया।

इस अवसर पर सभी कर्मचारियों को नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए IREDA के CMD प्रदीप कुमार दास ने बताया कि 1 जनवरी 2025 को 168 कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 2026 में 227 हो गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि IREDA में महिला कर्मचारियों की भागीदारी लगभग 23% है, जो केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) के औसत 9.5% से कहीं अधिक है। यह प्रगति सुदृढ़ कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय अनुशासन के कारण संभव हो सकी है, जिसे आगे भी जारी रखा जाएगा।

दास ने IREDA के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 31 दिसंबर 2025 (अनंतिम) तक

  • कुल ऋण स्वीकृतियाँ: ₹2,78,016 करोड़

  • कुल ऋण वितरण: ₹1,80,988 करोड़

  • ऋण पुस्तिका (Loan Book): ₹87,975 करोड़ रही है।

उन्होंने वित्त वर्ष 2024–25 में ₹1,699 करोड़ के अब तक के सर्वाधिक शुद्ध लाभ (PAT) तथा S&P ग्लोबल रेटिंग्स द्वारा अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण मील के पत्थरों को भी याद किया।

कार्यक्रम के अंत में निदेशक (वित्त) डॉ. विजय कुमार मोहंती ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की और उन्हें उच्च स्तर के शासन, पारदर्शिता और दक्षता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

यह नववर्ष समारोह IREDA की नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश की अग्रणी वित्तीय संस्था के रूप में भूमिका को और मजबूत करने के संकल्प का प्रतीक बना।

भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन गुवाहाटी–हावड़ा के बीच चलेगी, जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी करेंगे शुभारंभ

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केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली स्थित रेल भवन में आयोजित बैठक के दौरान नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए घोषणा की कि भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन गुवाहाटी (असम) और हावड़ा (पश्चिम बंगाल) के बीच संचालित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का संपूर्ण ट्रायल, परीक्षण एवं प्रमाणन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। जनवरी माह में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएँगे, जो भारतीय रेल और यात्रियों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। मंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2026 भारतीय रेल के लिए बड़े सुधारों का वर्ष होगा, जिसमें कई यात्री-केंद्रित पहलें शुरू की जाएँगी।

यह ट्रेन असम के कामरूप मेट्रोपोलिटन और बोंगाईगांव तथा पश्चिम बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्धमान, हुगली और हावड़ा जिलों को लाभान्वित करेगी। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें 11 एसी थ्री-टियर, 4 एसी टू-टियर और 1 फर्स्ट क्लास एसी कोच शामिल होंगे। इसकी कुल यात्री क्षमता लगभग 823 यात्रियों की होगी।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस ट्रेन के लिए पूरी तरह नया डिजाइन किया गया बोगी और सस्पेंशन सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे यात्रा अधिक आरामदायक और सुरक्षित होगी। ट्रेन के अंदरूनी हिस्से, सीढ़ियाँ और बर्थ एर्गोनॉमिक डिजाइन के साथ तैयार किए गए हैं, जिनमें सुरक्षा और संरक्षा के विशेष मानक अपनाए गए हैं।

यह स्लीपर ट्रेन रात्रि यात्रा के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई है। इसका समय-सारिणी इस प्रकार होगी कि ट्रेन शाम को प्रस्थान कर अगली सुबह गंतव्य पर पहुँचे, जिससे यात्रियों को समय की बचत और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

यात्रियों को यात्रा के दौरान क्षेत्रीय व्यंजनों का स्वाद भी मिलेगा। गुवाहाटी से चलने वाली ट्रेन में असमिया व्यंजन, जबकि हावड़ा से चलने वाली ट्रेन में पारंपरिक बंगाली पकवान परोसे जाएँगे, जिससे यात्रा सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनेगी।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं में 180 किमी/घंटा तक की डिजाइन गति, स्वचालित दरवाजे, कवच (KAVACH) सुरक्षा प्रणाली, सभी कोचों में सीसीटीवी, उन्नत अग्नि पहचान एवं दमन प्रणाली, दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएँ और उच्च स्तरीय स्वच्छता तकनीक शामिल हैं।

भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का शुभारंभ भारतीय रेल में एक नए युग की शुरुआत है, जो गति, आराम, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं का उत्कृष्ट संगम प्रस्तुत करती है। यह पहल यात्री-केंद्रित सेवाओं, तकनीकी नवाचार और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करते हुए यात्रियों को सुरक्षित, तेज़ और सुविधाजनक रात्रिकालीन यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी।




1 फरवरी 2026 से कार FASTag के लिए KYV प्रक्रिया समाप्त: NHAI ने उपयोगकर्ताओं के लिए प्रक्रिया सरल बनाई

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सार्वजनिक सुविधा बढ़ाने और राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को FASTag सक्रियण के बाद होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारत (NHAI) ने निर्णय लिया है कि 1 फरवरी 2026 से कार/जीप/वैन श्रेणी के सभी नए FASTag जारीकरणों के लिए “Know Your Vehicle (KYV)” प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी।

यह सुधार लाखों आम सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आएगा, जो FASTag सक्रियण के बाद दस्तावेजों के बावजूद KYV आवश्यकताओं के कारण असुविधा और देरी का सामना कर रहे थे।

पहले जारी किए गए FASTag पर बदलाव:

पहले से जारी कार FASTag के लिए अब KYV सामान्य आवश्यकता के रूप में अनिवार्य नहीं होगा। KYV केवल उन मामलों में आवश्यक होगा जहां शिकायतें प्राप्त हों, जैसे:

  • ढीले FASTag

  • गलत जारीकरण

  • दुरुपयोग

यदि कोई शिकायत नहीं है, तो मौजूदा कार FASTag के लिए KYV की आवश्यकता नहीं होगी।

मजबूत पूर्व-सक्रियण सुरक्षा उपाय

उपयोगकर्ताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाते हुए, NHAI ने Issuer Banks के लिए पूर्व-सक्रियण सत्यापन नियम मजबूत किए हैं:

  1. VAHAN-आधारित अनिवार्य सत्यापन: FASTag सक्रियण केवल तब किया जाएगा जब वाहन विवरण VAHAN डेटाबेस से सत्यापित हो।

  2. कोई पोस्ट-सक्रियण सत्यापन नहीं: पहले की व्यवस्था जिसमें सक्रियण के बाद सत्यापन की अनुमति थी, अब समाप्त कर दी गई है।

  3. RC-आधारित सत्यापन केवल असाधारण मामलों में: यदि वाहन विवरण VAHAN में उपलब्ध नहीं है, तो बैंक को Registration Certificate (RC) के आधार पर सत्यापन करना होगा और पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी।

  4. ऑनलाइन FASTag पर भी लागू: ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से बेचे गए FASTag भी केवल पूर्ण सत्यापन के बाद सक्रिय होंगे।

इन उपायों से यह सुनिश्चित होता है कि सभी वाहन सत्यापन पहले ही पूरा हो जाए, और सक्रियण के बाद ग्राहकों से बार-बार फॉलो-अप करने की आवश्यकता समाप्त हो जाए।

ये सुधार NHAI की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं कि FASTag इकोसिस्टम सार्वजनिक उपयोगकर्ता के अनुकूल, पारदर्शी और तकनीक-संचालित हो, साथ ही अनुपालन मजबूत और शिकायतें कम हों। सक्रियण से पहले सत्यापन की पूरी जिम्मेदारी बैंक को सौंपकर, NHAI का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के लिए परेशानी मुक्त अनुभव प्रदान करना है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने DTU में i-TBI का निरीक्षण किया; विश्वविद्यालयों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने देशभर में 15 समावेशी टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (i-TBI) स्थापित किए हैं, जो नवाचार और उद्यमिता को महानगरों के बाहर भी लोकतांत्रिक बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत हैं।

यह जानकारी आज केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, और प्रधानमंत्री कार्यालय, कर्मियों, लोक शिकायतें, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मंत्रालय के मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय (DTU) का दौरा करते हुए दी। दौरे का उद्देश्य DST समर्थित i-TBI की कार्यप्रणाली और प्रभाव का अवलोकन करना था, जिसे राष्ट्रीय नवाचार विकास और उपयोग (NIDHI) कार्यक्रम के तहत स्थापित किया गया है।

दौरे के दौरान, मंत्री ने DTU i-TBI सुविधा का निरीक्षण किया और यह आंका कि यह इनक्यूबेटर नवाचार, शोध और स्टार्टअप विकास के लिए किस हद तक उपयोग में लाया जा रहा है। शिक्षक, छात्र नवप्रवर्तनकर्ता और स्टार्टअप संस्थापकों से बातचीत करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालय की सराहना की कि उन्होंने DST के सहयोग का प्रभावी उपयोग करते हुए एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम का निर्माण किया है।

मंत्री ने बताया कि DST ने देशभर में 15 i-TBI स्थापित किए हैं, जिनमें से एक DTU में है। यह इनक्यूबेटर विशेष रूप से समावेशिता और महिला-उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित करते हुए शैक्षणिक विचारों को बाजार-तैयार समाधान में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की कि DTU i-TBI ने अब तक 15 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया है, जो विश्वविद्यालय पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ती उद्यमशीलता क्षमता को दर्शाता है। इस अवसर पर, तीन स्टार्टअप्स को DST-NIDHI फ्रेमवर्क के तहत प्रत्येक को 5 लाख रुपये का स्टार्टअप इग्निशन ग्रांट प्रदान किया गया, जिससे वे अपने विचार को प्रोटोटाइप और प्रारंभिक व्यावसायीकरण तक ले जा सकें। उन्होंने कहा कि ये ग्रांट प्रेरक (catalytic) हैं और युवाओं में जोखिम लेने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

बड़े नीति दृष्टिकोण पर जोर देते हुए, मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, पिछले दशक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को अभूतपूर्व प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं रहा, बल्कि तकनीक निर्माता के रूप में उभर रहा है, जिसमें शोध अवसंरचना, शैक्षणिक उत्कृष्टता, इनक्यूबेशन, स्टार्टअप और उद्योग सहयोग सहित पूरे नवाचार चक्र का संरचित समर्थन शामिल है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालयों को केवल पारंपरिक शिक्षण और शोध तक सीमित रहने के बजाय नवाचार और उद्यमिता के हब बनने पर जोर दिया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को उद्योग के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने, निजी निवेश आकर्षित करने और वित्तीय स्रोत विविधीकरण करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही FIST, PURSE और NIDHI जैसे सरकारी योजनाओं का उपयोग कर अपने शोध और नवाचार क्षमता को मजबूत करने का आग्रह किया।

राष्ट्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का संदर्भ देते हुए, मंत्री ने कहा कि सरकार ने सुनिश्चित किया है कि नवाचार के अवसर छोटे शहरों और आकांक्षी जिलों तक पहुँचें। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, मेरिट-आधारित चयन और समावेशी पहुंच ने पूरे देश में युवा नवप्रवर्तकों के बीच विश्वास बनाया है, जिससे वैज्ञानिक क्षमता और महत्वाकांक्षा दोनों का लोकतंत्रीकरण हुआ है।

DTU में DST समर्थित i-TBI, DTU इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन फाउंडेशन के अंतर्गत संचालित होता है और ज्ञान-आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिसमें विशेष जोर महिला उद्यमियों पर है। इनक्यूबेटर आइडिएशन से लेकर प्रोटोटाइप, उत्पाद विकास और बाजार तक पहुँच तक पूर्ण सहायता प्रदान करता है, आधुनिक अवसंरचना, मेंटरिंग और वित्तीय सहायता के माध्यम से।

दौरे के समापन पर, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालय-आधारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और यह आश्वासन दिया कि वे ऐसी संस्थाओं का समर्थन जारी रखेंगे जो सार्वजनिक निधियों का प्रभावी उपयोग कर शोध, स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव में ठोस परिणाम उत्पन्न कर रही हैं।

जयंत चौधरी ने कौशल मंथन का समापन सत्र अध्यक्षता किया; 2026 के लिए कौशल संकल्प तैयार

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जयंत चौधरी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और शिक्षा राज्य मंत्री, भारत सरकार ने सप्ताह भर चले “कौशल मंथन” (23 दिसंबर 2025 – 31 दिसंबर 2025) का समापन सत्र अध्यक्षता करते हुए किया। इस कार्यक्रम में MSDE के विभिन्न विभागों, संस्थाओं और प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

सप्ताह भर चलने वाली चर्चाओं का उद्देश्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप महत्वपूर्ण सुधार और पहलें पहचानना था। deliberations का फोकस मजबूत, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख कौशल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर था। सत्र के समापन पर 2026 के लिए कौशल संकल्प (Skill Resolutions) तैयार किए गए, जो आने वाले वर्ष में नीति निर्माण और कार्यक्रम क्रियान्वयन का मार्गदर्शन करेंगे।

चर्चाओं में अगले सुधार चरण पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें परिणामों पर अधिक ध्यान, राज्य सरकारों और उद्योग के साथ मजबूत समन्वय, और प्रशिक्षण गुणवत्ता, आकलन और प्रमाणपत्रों की निगरानी में सुधार शामिल हैं।

एक प्रमुख चर्चा थी संस्थागत तंत्रों को मजबूत करने के साथ सिस्टम को सरल बनाना। प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में ITI के लिए परिणाम-आधारित ग्रेडिंग तंत्र शामिल हैं ताकि गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा दिया जा सके और क्षेत्रीय और संस्थागत स्तर पर शक्तियों का प्रतिनिधिकरण आसान व्यवसाय के लिए सक्षम किया जा सके।

सेक्टर कौशल परिषदों (SSCs) का पुनर्गठन और सुदृढ़ीकरण भी चर्चा का हिस्सा रहा, जिसमें SSCs की नियमित समीक्षा और KPI का निर्धारण शामिल है। चर्चाओं में यह भी रेखांकित किया गया कि तकनीकी परिवर्तन और उद्योग की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम का निरंतर अद्यतन आवश्यक है।

पाठ्यक्रम के आधुनिकीकरण, उद्योग के साथ सह-निर्माण को मजबूत करने और प्रशिक्षण डिजाइन में लचीलापन और अनुकूलता सुनिश्चित करना मजबूत कौशल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए मुख्य कारक माने गए।

कौशल स्तरों के बीच स्पष्ट और सहज मार्ग बनाना भी महत्वपूर्ण बताया गया; इसमें स्कूल से पोस्ट-स्कूल, ड्रॉपआउट्स, कार्यरत पेशेवर और जीवनभर सीखने वालों के लिए क्रेडिट फ्रेमवर्क और प्रोग्राम्स के बीच गतिशीलता शामिल है।

हाल ही में आयोजित CS Conference में MSDE ने समयबद्ध तरीके से निम्नलिखित प्रतिबद्धताएँ व्यक्त की थीं:

  • राष्ट्रीय फेडरेटेड स्किल और वर्कफोर्स रजिस्ट्री की स्थापना

  • राष्ट्रीय प्रशिक्षक ढांचा (National Trainer Framework) का कार्यान्वयन

  • अप्रेंटिसशिप को स्कूल-टू-वर्क प्रमुख मार्ग के रूप में पुनर्स्थापित करना

  • MSMEs को राष्ट्रीय कौशल और अप्रेंटिसशिप ढांचे में शामिल करना

कौशल मंथन ने मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया कि वह राज्य सरकारों के साथ नियमित और संरचित परामर्श, गहन और सतत उद्योग सहभागिता, और अंतर-मंत्रालयीय और संस्थागत समन्वय सुनिश्चित करेगा।

ये साझा उपाय अपेक्षित हैं कि सुधारों के क्रियान्वयन को मजबूत करेंगे और सभी हितधारकों के बीच तालमेल सुनिश्चित करेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने SOAR प्रमाणपत्र प्रदान किए और #SkillTheNation Challenge की घोषणा की

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में छात्रों और सांसदों सहित शिक्षार्थियों को SOAR (Skilling for AI Readiness) प्रमाणपत्र प्रदान किए और ‘#SkillTheNation Challenge’ की घोषणा की, जिससे भारत को डिजिटल रूप से सशक्त, भविष्य-तैयार और समावेशी राष्ट्र बनाने की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि मिली।

इस अवसर पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के PM SHRI स्कूल, केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय के 17 चयनित छात्रों के साथ-साथ देशभर के 15 सांसदों को एआई पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

इस पहल की गति आगामी IndiaAI Summit में और सशक्त होगी, जहाँ भारत की AI के वैश्विक भविष्य को आकार देने की दृष्टि, तत्परता और सामूहिक संकल्प को मजबूती से प्रस्तुत किया जाएगा।

राष्ट्रपति ने ओडिशा के रायरंगपुर में IGNOU क्षेत्रीय केंद्र का भी वर्चुअल उद्घाटन किया। यह केंद्र विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी, महिला और कार्यरत शिक्षार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और शिक्षार्थी समर्थन तक पहुँच को बढ़ाएगा। यह नॉर्दर्न ओडिशा का एक प्रमुख केंद्र बनेगा, जो प्रवेश, परामर्श, शिक्षार्थी सेवाएँ और परीक्षाओं के साथ-साथ कौशल-उन्मुख प्रशिक्षण और रोजगार क्षमता को भी सशक्त करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण चालक के रूप में उभर रही है। आने वाले दशक में AI देश के GDP, रोजगार और उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डेटा साइंस, AI इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे कौशल देश की AI प्रतिभा को विकसित करने में निर्णायक होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न संस्थानों, उद्योग साझेदारों और शैक्षणिक जगत के सहयोग से सुनिश्चित कर रही है कि भारत केवल तकनीक को अपनाए ही नहीं, बल्कि इसके माध्यम से जिम्मेदार भविष्य का निर्माण भी करे। उन्होंने सभी से मिलकर प्रतिबद्धता के साथ विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने और एक तकनीक-संचालित, समावेशी और समृद्ध भारत का निर्माण करने में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मैं यह देखकर भी प्रसन्न हूँ कि आज हम IGNOU क्षेत्रीय केंद्र और कौशल केंद्र, रायरंगपुर, मयूरभंज, ओडिशा का उद्घाटन करके ज्ञान और अवसर की नींव को और मजबूत कर रहे हैं। ये संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और भविष्य-तैयार सीखने को लोगों तक, विशेषकर आकांक्षी क्षेत्रों में, और करीब लाएंगे, जिससे तकनीकी परिवर्तन के इस युग में कोई शिक्षार्थी पीछे न रह जाए।”

राष्ट्रपति ने ‘#SkillTheNation Challenge’ की घोषणा की और नागरिकों और नेताओं से आग्रह किया कि वे भविष्य-तैयार सीखने को अपनाएँ। इस अवसर पर जयंत चौधरी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय एवं शिक्षा राज्य मंत्री ने स्वयं SOAR AI मॉड्यूल में नामांकन किया और पाठ्यक्रम पूरा किया, जिससे जीवनभर सीखने की प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत हुआ। उन्होंने अब इस चैलेंज के तहत अन्य लोगों को नामांकित किया, जिससे नीति निर्माता, शिक्षक, पेशेवर और युवा देशभर में AI जागरूकता, क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए प्रेरित हों।

इस अवसर पर MSDE ने राष्ट्रपति भवन में Google के सहयोग से AI पर एक विशेष सत्र आयोजित किया।

इस कार्यक्रम में उपस्थित थे:

  • धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री

  • जयंत चौधरी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और शिक्षा राज्य मंत्री

  • वरिष्ठ अधिकारी:देबश्री मुखर्जी, सचिव, MSDE, विनीत जोशी, सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, MoE, संजय कुमार, सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, MoE, सोनल मिश्रा, अतिरिक्त सचिव, MSDE

  • प्रोफ. (डॉ.) अशोक कुमार गाबा, कार्यकारी सदस्य, NCVET

  • प्रोफेसर उमा कंजिलाल, कुलपति, IGNOU

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा:

“हमारी नई पीढ़ी को अब AI-सक्षम होना चाहिए। भारत ने डिजिटल क्षेत्र में UPI और अन्य सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से अपनी क्षमता साबित की है। अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि हमारे विद्यार्थी और शिक्षक ‘AI for All’ अपनाएँ, ताकि शिक्षा, शिक्षण और शासन सभी AI की शक्ति से लाभान्वित हों। मैं व्यक्तिगत रूप से इस मिशन के प्रति प्रतिबद्ध हूँ और AI प्रमाणन प्राप्त करूँगा, क्योंकि नेताओं को सीखकर नेतृत्व करना चाहिए। मयूरभंज, ओडिशा में नए IGNOU क्षेत्रीय केंद्र के उद्घाटन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। यह शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने, भविष्य-तैयार कौशल विकसित करने और प्रत्येक शिक्षार्थी को AI-प्रेरित भारत में भागीदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

जयंत चौधरी ने कहा:

“साल के पहले दिन, राष्ट्रपति भवन में, राष्ट्र के सर्वोच्च कार्यालय में, हमें AI-सक्षम समाज बनाने के भारत के संकल्प की पुष्टि करने का सौभाग्य मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मार्गदर्शन यह सुनिश्चित करता है कि जिज्ञासा, तैयारी और जीवनभर सीखना भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का केंद्र हैं। AI अब दूरस्थ नहीं रहा; यह पहले से ही हमारे सीखने, काम करने और समस्याओं के समाधान के तरीकों को बदल रहा है। SOAR, हमारी मंत्रालय द्वारा जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया एक नि:शुल्क पाठ्यक्रम है, जो AI को सभी के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, और पिछले छह महीनों में 1.59 लाख नामांकन इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं। मैं यहाँ केवल मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षार्थी के रूप में खड़ा हूँ, जिसने पाठ्यक्रम पूरा किया और दूसरों को भी करने के लिए प्रेरित किया।

#SkillTheNation Challenge का उद्देश्य सरकारी कार्यक्रम को जनता-प्रधान आंदोलन में बदलना है—जिससे AI अवसर बढ़ाए, समावेश को मजबूत करे, विश्वास बनाए, नैतिक अपनाने को प्रोत्साहित करे और हर भारतीय को केवल भविष्य के अनुकूल बनाने के बजाय इसे आत्मविश्वासपूर्वक आकार देने के लिए तैयार करे।”

ई-बिल सिस्टम का शुभारंभ: उर्वरक सब्सिडी के डिजिटल और पारदर्शी भुगतान की दिशा में बड़ा कदम

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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन और विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य के अनुरूप, उर्वरक विभाग ने डिजिटल शासन और वित्तीय सुधारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में ई-बिल सिस्टम का उद्घाटन किया। इस प्रणाली के माध्यम से सरकार लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के उर्वरक सब्सिडी भुगतान को डिजिटल रूप से संसाधित कर सकेगी।

समारोह में संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह ऑनलाइन प्रणाली पारदर्शी, कुशल और तकनीक-संचालित शासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उर्वरक विभाग के सचिव राजत कुमार मिश्रा ने कहा कि इस लॉन्च के साथ विभाग के वित्तीय संचालन को आधुनिक बनाने में एक बड़ी मील का पत्थर स्थापित हुआ है। यह नई प्रणाली मैन्युअल और कागजी प्रक्रियाओं से पूरी तरह डिजिटल, सिस्टम-टू-सिस्टम वर्कफ़्लो में परिवर्तन का प्रतीक है, जिससे बिलों के भौतिक आदान-प्रदान की आवश्यकता समाप्त हो गई है।

यह पहल उर्वरक विभाग के iFMS (Integrated Financial Management System) और वित्त मंत्रालय के CGA के PFMS के बीच अनोखी तकनीकी साझेदारी का परिणाम है।

CCA संतोष कुमार ने कहा कि इस परिवर्तन से पारदर्शिता और जवाबदेही काफी हद तक बढ़ेगी, क्योंकि यह सभी वित्तीय लेन-देन का केन्द्रीयकृत और छेड़छाड़-रहित डिजिटल ऑडिट ट्रेल बनाएगा, जिससे निगरानी और ऑडिटिंग आसान हो जाएगी। इस प्रणाली के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को रियल-टाइम खर्च की निगरानी और मजबूत वित्तीय नियंत्रण मिलेगा, क्योंकि सभी भुगतान केंद्रीयकृत प्रणाली में ट्रैक और रिपोर्ट किए जाएंगे।

JS (F&A) मनोज सेठी ने कहा कि यह प्रणाली एंड-टू-एंड डिजिटल बिल प्रोसेसिंग सक्षम करती है, जिससे भुगतान की समय-सीमा में तेजी आएगी, विशेषकर साप्ताहिक उर्वरक सब्सिडी भुगतान के समय पर वितरण में। साथ ही, ई-बिल प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं की सुविधा बढ़ाता है क्योंकि उर्वरक कंपनियां ऑनलाइन दावा जमा कर सकती हैं और भुगतान की स्थिति रियल-टाइम में ट्रैक कर सकती हैं, जिससे भौतिक यात्रा और मैन्युअल फॉलो-अप की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

यह प्रणाली विभाग में मानक इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ़्लो (जैसे फर्स्ट-इन-फर्स्ट-आउट बिल प्रोसेसिंग) को लागू करती है, जिससे बिल हैंडलिंग में समानता, निष्पक्षता और वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित होता है। इसके अलावा, सिस्टम एकीकरण से आईटी सिस्टम साइलो कम, सिस्टम मेंटेनेंस सरल और रियल-टाइम वित्तीय जानकारी का व्यापक आधार तैयार होता है, जो नीति निर्माण और बजट प्रबंधन में सहायक है।

इस कार्यक्रम में AS अनीता सी. मेश्राम, AS अपर्णा शर्मा, JS KK पाठक, JS अनुराग रोहतगी और डायरेक्टर लबोनी दास दत्ता उपस्थित थे।

असेम गुप्ता, वरिष्ठ तकनीकी निदेशक, NIC ने समाधान की तकनीकी उत्कृष्टता और सहज आर्किटेक्चर समझाया। NIC टीम, जिसमें जॉइंट डायरेक्टर आशुतोष तिवारी और डेवलपर हरेकृष्ण तिवारी शामिल थे, ने प्लेटफ़ॉर्म के कार्यान्वयन और डेमो का समर्थन किया। NIC के प्रयासों की व्यापक सराहना की गई।

संगठित ई-बिल प्रणाली वित्तीय शासन को सशक्त बनाती है, जिसमें पूर्वनिर्धारित मानदंडों के खिलाफ भुगतान की पुष्टि, ऑडिट उद्देश्यों के लिए हर क्रिया का लॉग और धोखाधड़ी या दुरुपयोग के जोखिम को कम करना शामिल है। यह पहल सरकार की पारदर्शी, कुशल और तकनीक-संचालित प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

भिलाई स्टील प्लांट और लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट को प्रगति प्लेटफॉर्म से नई गति: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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छत्तीसगढ़ में भिलाई इस्पात संयंत्र आधुनिकीकरण और लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मिली नई गति : प्रगति प्लेटफार्म बना गेमचेंजर

दशकों से लंबित परियोजनाएँ अब समयबद्ध रूप से हो रही पूरी : प्रगति प्लेटफ़ॉर्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति नई ऊँचाइयों पर पहुँची है। दशकों से लंबित महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं ऊर्जा परियोजनाएँ अब “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से समयबद्ध ढंग से पूरी हो रही हैं। यह केंद्र सरकार की परिणामोन्मुख, जवाबदेह तथा निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से न केवल देश में रेल उत्पादन को नई गति मिली है, बल्कि इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इससे आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती मिली है और औद्योगिक विकास को नई दिशा प्राप्त हुई है।

इसी प्रकार एनटीपीसी की लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना (1600 मेगावाट) से छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है तथा औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को नई ऊर्जा प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म ने परियोजनाओं की निगरानी, निरंतर समीक्षा और बाधाओं के त्वरित समाधान की एक सशक्त प्रणाली विकसित की है। स्पष्ट लक्ष्य, तेज़ क्रियान्वयन और ठोस परिणाम—यही नए भारत की कार्यसंस्कृति है और यही “विकसित भारत @ 2047” के लक्ष्य को साकार करने का मार्ग है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित प्रगति (PRAGATI) की 50वीं बैठक ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को भी नई गति प्रदान की है। प्रगति सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए विकसित एक आईसीटी आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसने परियोजनाओं की निगरानी और समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है। पिछले दशक में प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं की रफ्तार तेज हुई है। इससे देशभर में अवसंरचना, ऊर्जा, रेल, सड़क, कोयला और अन्य क्षेत्रों से जुड़े अनेक कार्यों को समयबद्ध प्रगति मिली है। इन परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ से संबंधित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ भी शामिल हैं।

बैठक में भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इस परियोजना को वर्ष 2007 में स्वीकृति मिली थी। प्रगति बैठकों में नियमित समीक्षा और अंतर-एजेंसी समन्वय के कारण इस परियोजना को नई गति मिली, जिसके परिणामस्वरूप इसका कार्य तेज़ी से आगे बढ़ा और लक्षित प्रगति सुनिश्चित हुई।

भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, सहायक उद्योगों के विस्तार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्राप्त हुई है। इससे राज्य को देश के प्रमुख इस्पात उत्पादन केंद्र के रूप में और अधिक मजबूती मिली है।

इसी प्रकार रायगढ़ में वर्ष 2009 में स्वीकृत लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना  की प्रगति प्लेटफॉर्म के अंतर्गत उच्च स्तरीय समीक्षाओं, समय-समय पर दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देशों और निरंतर मॉनिटरिंग से तेज गति मिली और इसके क्रियान्वयन में ठोस प्रगति दर्ज की गई।

आज लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली प्रमुख परियोजनाओं में से एक बन चुकी है। इस परियोजना ने न केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान को “पावर हब ऑफ इंडिया” के रूप में और अधिक मजबूत किया है। इससे राज्य और देश दोनों के ऊर्जा तंत्र को नई स्थिरता प्राप्त हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह रेखांकित किया कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने सहयोगी संघवाद को नई शक्ति दी है और केंद्र तथा राज्यों के संयुक्त प्रयासों से विकास कार्यों में गति और विश्वास दोनों बढ़ा है। प्रगति से तेज़ होती छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रगति की 50वीं बैठक को देश और छत्तीसगढ़ के लिए दूरगामी महत्व का बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने की जो व्यवस्था स्थापित की गई है, उसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिला है। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण तथा लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना जैसी बड़ी परियोजनाओं को नई गति मिलना इस बात का प्रमाण है कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने वास्तविक अर्थों में समाधान-उन्मुख शासन का मॉडल प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश के औद्योगिक विकास, ऊर्जा क्षमता, निवेश, रोज़गार और सहायक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रगति के माध्यम से परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित होने से छत्तीसगढ़ विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य में अपनी निर्णायक भूमिका और मजबूती के साथ निभाता रहेगा।

वर्ष 2026 ‘महतारी गौरव वर्ष’ : मातृशक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तिकरण को समर्पित - मुख्यमंत्री साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नूतन वर्ष 2026 के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम जारी अपने ऑडियो संदेश में सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जो मातृशक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तिकरण को समर्पित रहेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में “महतारी” का स्थान सर्वोच्च है। नारी शक्ति त्याग, संस्कार, श्रम और नेतृत्व की प्रतीक है। महतारी गौरव वर्ष के माध्यम से समाज के सभी क्षेत्रों में मातृशक्ति के योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य ने नक्सल उन्मूलन, औद्योगिक प्रगति, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि तथा बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएँ प्राप्त की हैं। इस विकास यात्रा में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महतारी गौरव वर्ष के माध्यम से महिलाएँ आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में और अधिक सशक्त होकर आगे आएँगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति के सहयोग से छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा और अधिक गति और सुदृढ़ता के साथ आगे बढ़ेगी। 

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे नारी सम्मान, नारी सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण को अपने आचरण और जीवन का मूल मंत्र बनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी मिलकर वर्ष 2026 को नारी सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और समावेशी विकास का सशक्त प्रतीक बनाएं। यही नया छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का साझा संकल्प है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी प्रदेशवासियों को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए समृद्धि, शांति और उन्नति की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।

https://x.com/i/status/2006657032368304560

हेल्थकेयर में कौशल विकास को बढ़ावा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ एमओयू

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण एवं सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू राज्य में हेल्थकेयर क्षेत्र का दायरा बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करने तथा युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करने की दिशा में एक अहम कदम है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

समझौते का मुख्य उद्देश्य हेल्थकेयर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना, युवाओं का कौशल उन्नयन तथा आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करना है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से आवासीय एवं गैर-आवासीय दोनों प्रकार के निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किए जाएंगे।

एमओयू के तहत चार प्रकार के कोर्स संचालित किए जाएंगे, जिनमें मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी, कार्डियोलॉजी तकनीशियन, ईसीजी तकनीशियन, कार्डियक केयर तकनीशियन तथा इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन के प्रशिक्षण शामिल हैं। ये कोर्स युवाओं को विशेषज्ञता के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर निर्माण का अवसर उपलब्ध कराएंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार कौशल विकास को विकास की रीढ़ मानती है और विशेष रूप से हेल्थकेयर सेक्टर की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशलयुक्त कार्यबल तैयार करने पर बल दे रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ युवाओं के लिए व्यापक रोजगार संभावनाएँ भी उत्पन्न करेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कौशल विकास पर केंद्रित यह साझेदारी राज्य के दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में सहायक सिद्ध होगी। प्रशिक्षित युवा अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और आपातकालीन सेवाओं में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, कैबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष सी. श्रीनिवास सहित ट्रस्ट के प्रतिनिधि एवं कौशल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। 

एयर मार्शल नागेश कपूर ने भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख का पदभार संभाला

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एयर मार्शल नागेश कपूर SYSM PVSM AVSM VM ने 01 जनवरी 2026 को भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

एयर मार्शल नागेश कपूर ने दिसंबर 1985 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से स्नातक किया और 06 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ब्रांच के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया। वे एक अनुभवी फाइटर पायलट, योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर तथा फाइटर कॉम्बैट लीडर हैं। अपने विशिष्ट उड़ान करियर के दौरान उन्होंने मिग-21 के सभी संस्करणों और मिग-29 विमान को उड़ाया है तथा विभिन्न लड़ाकू और प्रशिक्षण विमानों पर 3400 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव प्राप्त किया है।

वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। अपने 39 वर्षों से अधिक के गौरवशाली सेवा काल में उन्होंने कमांड, ऑपरेशनल, प्रशिक्षण एवं स्टाफ से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनकी ऑपरेशनल नियुक्तियों में मध्य क्षेत्र में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, पश्चिमी क्षेत्र में एक फ्लाइंग बेस के स्टेशन कमांडर तथा एक प्रमुख एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्य करना शामिल है।

उनकी प्रशिक्षण संबंधी नियुक्तियों में एयर फोर्स अकादमी में चीफ इंस्ट्रक्टर (फ्लाइंग) तथा प्रतिष्ठित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में सेवाएं देना शामिल है। एयर फोर्स अकादमी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारतीय वायु सेना में PC-7 Mk II विमान के शामिल किए जाने और उसके संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एयर मार्शल नागेश कपूर ने पाकिस्तान में रक्षा अताशे के रूप में एक कूटनीतिक दायित्व भी निभाया है। उनकी प्रमुख स्टाफ नियुक्तियों में एयर मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ ऑपरेशंस (स्ट्रेटजी), दक्षिण पश्चिमी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर, मुख्यालय मध्य वायु कमान में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर तथा एयर मुख्यालय में एयर ऑफिसर-इन-चार्ज पर्सनल शामिल हैं।

उप प्रमुख का कार्यभार संभालने से पूर्व, एयर मार्शल नागेश कपूर ने एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ट्रेनिंग कमांड तथा इसके बाद एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, साउथ वेस्टर्न एयर कमांड के रूप में कार्य किया।

देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 2008 में वायु सेना पदक, 2022 में अति विशिष्ट सेवा पदक, तथा 2025 में परम विशिष्ट सेवा पदक और सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।

एयर मार्शल नागेश कपूर ने यह पद एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी SYSM PVSM AVSM VM से ग्रहण किया, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में 40 वर्षों की गौरवशाली और विशिष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्ति प्राप्त की।

ऑपरेशन सिंदूर में डीआरडीओ की निर्णायक भूमिका, 68वें स्थापना दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सराहना

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति संगठन की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने यह बात 01 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित डीआरडीओ मुख्यालय में संगठन के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर कही।

रक्षा मंत्री ने स्वदेशी क्षमताओं को सशक्त बनाने तथा सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस करने के लिए डीआरडीओ की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान डीआरडीओ के उपकरणों ने निर्बाध रूप से कार्य किया, जिससे सैनिकों का मनोबल बढ़ा।

राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि डीआरडीओ ‘सुदर्शन चक्र’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस 2025 के अपने संबोधन में की थी। उन्होंने कहा, “इस पहल के अंतर्गत अगले एक दशक में हमारे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को पूर्ण हवाई सुरक्षा प्रदान करने हेतु एयर डिफेंस सिस्टम से लैस करने की जिम्मेदारी डीआरडीओ की है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आधुनिक युद्ध में वायु रक्षा के महत्व को हमने प्रत्यक्ष रूप से देखा है। मुझे विश्वास है कि डीआरडीओ इस लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेगा।”

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ की सराहना करते हुए कहा कि वह केवल तकनीक का सृजन करने वाला ही नहीं, बल्कि विश्वास का निर्माण करने वाला संगठन भी बन गया है, जिससे जनता उसे आशा, विश्वास और निश्चितता के साथ देखती है। निजी क्षेत्र के साथ डीआरडीओ के सहयोग को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्ट-अप्स के साथ बढ़ते तालमेल से एक सशक्त और समन्वित रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है।

उन्होंने कहा, “डीआरडीओ ने अपने सिस्टम, प्रक्रियाओं और कार्यशैली में निरंतर सुधार किया है। खरीद प्रक्रिया से लेकर परियोजना प्रबंधन तक, उद्योग सहभागिता से लेकर स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई के साथ सहयोग तक—हर स्तर पर कार्य को सरल, तेज़ और विश्वसनीय बनाने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।”

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से आग्रह किया कि वह तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिवेश के साथ कदमताल करते हुए समय की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित करता रहे। उन्होंने नवाचार पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के नए क्षेत्रों की पहचान करने का भी आह्वान किया। डीप टेक और अगली पीढ़ी की तकनीकों पर डीआरडीओ के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रगति से न केवल देश की क्षमताएं बढ़ेंगी, बल्कि रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र भी सुदृढ़ होगा।

यह रेखांकित करते हुए कि वर्तमान युग केवल विज्ञान का नहीं, बल्कि निरंतर विकास और सतत सीखने का युग है,राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीक स्कैनिंग, क्षमता आकलन और भविष्य की तैयारी अब केवल शब्द नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया हर दिन बदल रही है। तकनीक, नवाचार और युद्ध के नए क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे कल का ज्ञान आज अप्रासंगिक हो सकता है। हमें यह कभी नहीं मानना चाहिए कि सीखने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। हमें लगातार सीखते रहना होगा और स्वयं को चुनौती देते हुए नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त करना होगा।”

बैठक के दौरान, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने रक्षा मंत्री को संगठन की वर्तमान आरएंडडी गतिविधियों, 2025 की उपलब्धियों, उद्योग, स्टार्ट-अप्स एवं अकादमिक संस्थानों को बढ़ावा देने की विभिन्न पहलों तथा 2026 के रोडमैप की जानकारी दी। रक्षा मंत्री को वर्ष 2026 के लिए निर्धारित प्रमुख लक्ष्यों और संगठन में सुधार हेतु किए जा रहे विभिन्न सुधारों से भी अवगत कराया गया।

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी उपस्थित थे। इसके अलावा, डीआरडीओ के महानिदेशक, कॉरपोरेट निदेशक तथा अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी भी समारोह में शामिल हुए।

एयर मार्शल सीथेपल्ली श्रीनिवास ने ट्रेनिंग कमांड के AOC-in-C का कार्यभार संभाला

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एयर मार्शल सीथेपल्ली श्रीनिवास ने 01 जनवरी 2026 को एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C), ट्रेनिंग कमांड, भारतीय वायु सेना के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। अपने नए पद का कार्यभार संभालने के बाद, एयर मार्शल ने ट्रेनिंग कमांड वॉर मेमोरियल पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

एयर मार्शल श्रीनिवास राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं और उन्हें 13 जून 1987 को भारतीय वायु सेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त हुआ। वे ‘कैटेगरी ए’ योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं और उनके पास 4200 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है। उन्होंने मिग-21, इस्क्रा, किरण, पीसी-7 एमके-II, एचपीटी-32 और माइक्रोलाइट सहित विभिन्न विमानों पर उड़ान भरी है। वे चेतक/चीता हेलीकॉप्टर पर सेकंड पायलट के रूप में भी योग्य हैं तथा पेचोरा मिसाइल सिस्टम पर श्रेणीकृत ऑपरेशंस ऑफिसर हैं।

अपने करियर में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण कमांड नियुक्तियाँ संभाली हैं। वे एयर फोर्स अकादमी के कमांडेंट, पश्चिमी सीमा पर एक अग्रिम पंक्ति के फाइटर बेस तथा एक प्रमुख फ्लाइंग ट्रेनिंग बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग (AOC) रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने एडवांस्ड हेडक्वार्टर वेस्टर्न एयर कमांड (जयपुर) में AOC, फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल के कमांडिंग ऑफिसर, इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस सेफ्टी के कमांडेंट तथा बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल के CO के रूप में भी कार्य किया है।

उनकी स्टाफ नियुक्तियों में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (पर्सनल ऑफिसर्स), एयर फोर्स अकादमी में चीफ इंस्ट्रक्टर (फ्लाइंग), मुख्यालय सेंट्रल एयर कमांड में ऑपरेशंस स्टाफ, तथा कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर में डायरेक्टिंग स्टाफ शामिल हैं। वर्तमान नियुक्ति से पूर्व वे मुख्यालय साउथ वेस्टर्न एयर कमांड (HQ SWAC) में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे।

एयर मार्शल श्रीनिवास नेशनल डिफेंस कॉलेज, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज के स्नातक हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ में एम.फिल., मास्टर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ तथा डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ में एम.एससी. शामिल हैं।

उनकी उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 2017 में विशिष्ट सेवा पदक (VSM) तथा 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) से, माननीय राष्ट्रपति द्वारा, सम्मानित किया गया।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने #SkilltheNation चैलेंज का शुभारंभ किया, एआई को समावेशी और विकसित भारत की कुंजी बताया

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 जनवरी, 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक समारोह में #SkilltheNation चैलेंज का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा के रायरंगपुर में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र एवं कौशल केंद्र का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विश्वभर में अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को नया रूप दे रही है। यह हमारे सीखने, काम करने, आधुनिक सेवाओं तक पहुंच और मानवता की बड़ी चुनौतियों से निपटने के तरीकों को बदल रही है। भारत जैसे युवा राष्ट्र के लिए एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव का एक बड़ा अवसर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा से यह रहा है कि तकनीक लोगों को सशक्त बनाए, समावेशन को बढ़ावा दे और सभी के लिए अवसरों का विस्तार करे। एआई का उपयोग सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी विभाजनों को पाटने के उद्देश्य से होना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसके लाभ सभी वर्गों और आयु समूहों तक, विशेष रूप से वंचित समुदायों तक पहुंचें।

उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि छात्र संभावनाओं और अवसरों से भरे भविष्य के लिए स्वयं को तैयार कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे तकनीक, ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज की सेवा, चुनौतियों के समाधान और दूसरों को सशक्त बनाने के लिए करें। उन्होंने एआई सीखने के मॉड्यूल पूरे करने वाले सांसदों की सराहना करते हुए कहा कि उभरती तकनीकों के बारे में स्वयं सीखकर उन्होंने सीख के माध्यम से नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख विकास चालक के रूप में उभर रही है। आने वाले दशक में एआई देश के जीडीपी, रोजगार और समग्र उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डेटा साइंस, एआई इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे कौशल देश के एआई प्रतिभा आधार के विकास में निर्णायक होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न संस्थानों, उद्योग साझेदारों और शैक्षणिक जगत के सहयोग से यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत केवल तकनीक को अपनाए ही नहीं, बल्कि उसके माध्यम से जिम्मेदार भविष्य का निर्माण भी करे।

राष्ट्रपति ने सभी से मिलकर प्रतिबद्धता के साथ विकसित भारत के निर्माण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने तथा एक तकनीक-संचालित, समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए।

यह कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया, जो एआई-प्रेरित भविष्य के लिए भारत के कार्यबल को तैयार करने की दिशा में सरकार की सतत प्रतिबद्धता का हिस्सा है।


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