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धान उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने राज्यभर में सघन कार्रवाई

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अवैध परिवहन, भंडारण व मिलिंग पर प्रशासन सख़्त, कई जिलों में बड़ी कार्रवाई

रायपुर- छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और किसान-केंद्रित बनाए रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अवैध धान परिवहन, भंडारण, विक्रय एवं मिलिंग अनियमितताओं के विरुद्ध राज्यभर में व्यापक और सघन अभियान चलाया जा रहा है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप राजस्व, खाद्य, मंडी एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा अंतर्राज्यीय सीमाओं, धान खरीदी केंद्रों, राइस मिलों एवं संदिग्ध स्थलों पर सतत निगरानी रखते हुए कठोर कार्रवाई की जा रही है, ताकि धान उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही सुनिश्चित हो सके।

खाद्य सचिव रीना कंगाले ने कहा कि राज्य सरकार धान उपार्जन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और किसान-हितैषी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अवैध परिवहन, भंडारण, बिक्री अथवा मिलिंग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने  कहा कि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि धान उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों को ही मिले। बिचौलियों, फर्जी टोकन, मिलावट, अंतर्राज्यीय अवैध परिवहन और कस्टम मिलिंग में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध प्रारंभिक स्तर पर ही सख़्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्यभर में राजस्व, खाद्य, मंडी और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा सतत निगरानी एवं भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहाँ संबंधित व्यक्ति, संस्था अथवा मिल संचालक के विरुद्ध छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। खाद्य सचिव ने दोहराया कि किसानों के हितों की रक्षा और धान खरीदी व्यवस्था की शुचिता बनाए रखना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी क्रम में महासमुंद जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार अवैध धान परिवहन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए सरायपाली विकासखंड अंतर्गत रेहटीखोल क्षेत्र में बीती रात संयुक्त टीम द्वारा एक ट्रक से 694 बोरा धान जब्त किया गया। जब्त धान का कुल वजन लगभग 319 क्विंटल पाया गया। जांच के दौरान यह पाया गया कि उक्त ट्रक में उड़ीसा से छत्तीसगढ़ की ओर बिना किसी वैध दस्तावेज के धान का परिवहन किया जा रहा था। परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर धान से भरे ट्रक को मौके पर ही जब्त कर आगे की वैधानिक कार्रवाई हेतु थाना सिंघोड़ा के सुपुर्द किया गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंतर्राज्यीय सीमाओं पर अवैध धान परिवहन रोकने के लिए सतत निगरानी रखी जा रही है तथा संदिग्ध वाहनों की गहन जांच की जा रही है, ताकि धान खरीदी प्रणाली की शुचिता बनी रहे।

धान उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के तहत धमतरी जिले में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति मर्यादित मोहदी के समिति प्रबंधक एवं ऑपरेटर को सेवा से पृथक कर दिया गया है। निरीक्षण के दौरान मिलावटयुक्त धान, टोकन का दुरुपयोग एवं अवैध बिक्री के प्रकरण सामने आए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि धान उपार्जन व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध प्रारंभिक स्तर पर ही कठोर कार्रवाई की जा रही है, ताकि उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही सीमित रहे और बिचौलियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

इसी प्रकार  13 जनवरी 2026 को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में राजस्व, खाद्य एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम बिलारी (सोनाखान) में अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे 75 कट्टा धान सहित एक पिकअप वाहन जब्त कर पुलिस थाना सलीहा-बिलाईगढ़ के सुपुर्द किया।

सरगुजा जिले में कलेक्टर के निर्देशन में राइस मिलों का सघन भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में राजेश राइस मिल खोडरी एवं सिद्धिविनायक राइस मिल दरिमा में धान की भारी कमी पाई गई। कस्टम मिलिंग आदेश 2016 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत संबंधित मिलों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

महासमुंद जिले में अलग-अलग स्थानों पर की गई कार्रवाई के दौरान संयुक्त टीम द्वारा कुल 217 कट्टा धान एवं एक पिकअप वाहन जब्त किया गया। अवैध परिवहन एवं भंडारण के मामलों में मंडी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में महासमुंद जिले में अब तक की गई कार्रवाई में बीते दो दिनों में कुल 2986 कट्टा अवैध धान जब्त किया गया है। कलेक्टर द्वारा अंतर्राज्यीय जांच चौकी टेमरी, नर्रा एवं खट्टी सहित धान खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर सख़्त निर्देश दिए गए हैं। पिथौरा, बसना एवं सरायपाली क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकरणों में बड़ी मात्रा में अवैध एवं संदिग्ध धान जब्त कर संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कई मामलों में धान को पुलिस थाना के सुपुर्द किया गया है।

बिलासपुर जिले में धान उठाव में गंभीर गड़बड़ी सामने आने पर अमरनाथ एग्रो प्रोडक्ट राइस मिल पर बड़ी कार्रवाई करते हुए मिल को सील किया गया तथा संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। मौके से 54 हजार क्विंटल से अधिक धान जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 16 करोड़ रुपये है। भौतिक सत्यापन में कस्टम मिलिंग के लिए जारी धान की तुलना में हजारों क्विंटल धान की कमी पाई गई। दो दिनों तक चली गहन जांच के बाद अनियमितता की पुष्टि होते ही तत्काल कार्रवाई की गई। खाद्य विभाग के अनुसार बिलासपुर जिले में अब तक 56 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का धान जब्त किया जा चुका है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016 के उल्लंघन के अंतर्गत की गई है। जिला प्रशासन ने दो टूक कहा है कि धान खरीदी, परिवहन, भंडारण एवं मिलिंग में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों, संस्थाओं एवं मिल संचालकों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

परीक्षा पे चर्चा 2026 - प्रथम चरण में महासमुंद की बेटी कु. सृष्टि साहू का हुआ चयन

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स्वामी आत्मानंद विद्यालय, नयापारा की छात्रा को दिल्ली आमंत्रण

राज्य में पंजीयन को लेकर उत्साहपूर्ण सहभागिता

रायपुर- परीक्षा पे चर्चा के नवें संस्करण में इस वर्ष भी विद्यार्थियों, पालकों एवं शिक्षकों में व्यापक उत्साह देखने को मिला। पंजीयन की अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ राज्य से कुल 29.29 लाख प्रतिभागियों ने पोर्टल पर अपना पंजीयन कराया। यह आंकड़ा गत वर्ष की तुलना में 7.16 लाख अधिक है, जो कार्यक्रम के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

गत वर्ष पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर रहा था, जबकि इस वर्ष अंडमान एवं निकोबार, चंडीगढ़ एवं लक्षद्वीप के बाद राज्य को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस वर्ष राज्य से 1.41 लाख पालकों द्वारा पंजीयन किया गया, जो पालकों की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का स्पष्ट संकेत है।

प्रथम चरण की चयन प्रक्रिया

प्रथम चरण में विद्यार्थियों के चयन हेतु जिलों से विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों से संबंधित वीडियो आमंत्रित किए गए थे। निर्धारित तिथि तक कुल 171 विद्यार्थियों के वीडियो प्राप्त हुए। गठित समिति द्वारा इन वीडियो का गहन परीक्षण किया गया, जिसके उपरांत 18 विद्यार्थियों का चयन कर उनका विवरण केंद्र को भेजा गया। चयनित विद्यार्थियों में पीएमश्री विद्यालय से 04, सेजस से 06, निजी विद्यालयों से 04, शासकीय विद्यालयों से 03 तथा केजीबीव्ही से 01 विद्यार्थी शामिल हैं।

कु. सृष्टि साहू का केंद्रीय स्तर पर चयन

केंद्र की समिति द्वारा महासमुंद जिले के स्वामी आत्मानंद विद्यालय, नयापारा की गणित संकाय की कक्षा 12वीं की छात्रा कु. सृष्टि साहू का चयन किया गया है। कु. सृष्टि साहू, पिता नरेन्द्र कुमार साहू एवं माता दिनेश्वरी साहू को 21 जनवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में सम्मिलित होने हेतु आमंत्रित किया गया है।

प्रशासन एवं शाला परिवार की प्रतिक्रिया

कु. सृष्टि साहू के चयन पर जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगहे ने उनसे भेंट कर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शाला की प्राचार्या अमी रूफस ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि कु. सृष्टि एक अनुशासित, परिश्रमी एवं अध्ययनशील छात्रा है। उन्होंने यह भी बताया कि कु. सृष्टि बाल दिवस के अवसर पर शाला नायक की भूमिका में प्राचार्य की कुर्सी पर बैठकर नेतृत्व प्रदान कर चुकी है।

परिवार का गर्व और सहयोग

कु. सृष्टि साहू के पिता शासकीय विद्यालय में शिक्षक हैं तथा माता गृहणी हैं। दोनों ने अपनी पुत्री के चयन पर गर्व एवं प्रसन्नता व्यक्त की है और इसे परिवार के साथ-साथ जिले के लिए भी गौरव का विषय बताया है।

शाला एवं विभागीय प्रयासों की सराहना

शाला प्राचार्य के अनुसार विद्यालय के सभी शिक्षकों द्वारा परीक्षा पे चर्चा में विद्यार्थियों के पंजीयन हेतु विशेष प्रयास किए गए। विद्यालय में 100 प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित किया गया तथा विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास भी कराया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया।

कु. सृष्टि साहू के चयन पर जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे एवं शिक्षा विभाग द्वारा हार्दिक बधाई दी गई। छात्रा के दिल्ली प्रवास से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाएं समय-सीमा में पूर्ण कराने में जिला परियोजना समन्वयक रेखराज शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा रायपुर द्वारा भी महासमुंद जिले को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं।

आगामी चरण की प्रतीक्षा

परीक्षा पे चर्चा 2026 के आगामी चरणों में और विद्यार्थियों के चयन की प्रक्रिया जारी है, जिसके परिणामों की प्रतीक्षा की जा रही है।

धान की खुशहाली से सजी खुशियाँ:-किसान प्रेमचंद लहरे 9.61 लाख की धान बिक्री से करेंगे भतीजी का विवाह

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रायपुर- खरीफ विपणन वर्ष 2025- 26 में जिले में धान खरीदी का कार्य तेजी और पारदर्शिता के साथ जारी है। 15 नवंबर से प्रारंभ हुई धान खरीदी के अंतर्गत सारंगढ़- बिलाईगढ जिले में कुल 89 हजार 181 कृषक पंजीकृत हैं, जिनमें से अब तक 72 हजार 258 किसानों से 3 लाख 71 हजार 291 टन धान की खरीदी समितियों द्वारा की जा चुकी है। इस प्रकार जिले में लगभग 76 प्रतिशत धान खरीदी का लक्ष्य पूर्ण हो चुका है।

विकासखंड सारंगढ़ के धान उपार्जन केंद्र कोसीर में पंजीकृत ग्राम भाठागांव निवासी किसान प्रेमचंद लहरे ने बिना किसी परेशानी के मात्र दो टोकन के माध्यम से 310 क्विंटल धान का विक्रय किया। धान विक्रय के एवज में उन्हें 9 लाख 61 हजार रुपये की राशि का त्वरित भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुआ।

धान बिक्री से मिली इस राशि ने किसान प्रेमचंद लहरे के परिवार में खुशियों का माहौल बना दिया है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि उनकी भतीजी का विवाह तय हो चुका है और धान बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग वे इसी शुभ अवसर में करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण आज किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है और कार्य सुचारु रूप से हो रहा है।

किसान प्रेमचंद लहरे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में धान खरीदी व्यवस्था सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनी है। उल्लेखनीय है कि शासन के निर्देशानुसार जिले में धान खरीदी का कार्य जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। समयबद्ध भुगतान और सुव्यवस्थित व्यवस्था से किसान संतुष्ट हैं और राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं।

उद्यानिकी खेती से बदली किसान की आर्थिक तस्वीर

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धान की तुलना में स्ट्रॉबेरी की खेती में डबल मुनाफा

तकनीकी मार्गदर्शन, शासन की सब्सिडी से घटा खर्च, बढ़ी आमदनी

रायपुर- जिले में शासन की उद्यानिकी प्रोत्साहन योजनाओं से किसान अब परंपरागत खेती की सीमाओं को तोड़कर नई संभावनाओं की ओर आगे बढ़ रहे हैं। अब किसान केवल धान पर निर्भर न रहकर अधिक लाभ देने वाली  फसलों को अपना रहे हैं। किसान लाल बहादुर सिंह बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है।

सरगुजा जिले के भगवानपुरखुर्द निवासी किसान लाल बहादुर सिंह ने भी इसी सोच के साथ खेती में नवाचार अपनाया और आज वे एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं उन्नत किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।

धान से उद्यानिकी की ओर किया सफल बदलाव

कृषक लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वर्षों से धान की खेती करने के बाद भी अपेक्षाकृत सीमित लाभ ही मिल पाता था। लागत बढ़ने और मौसम पर निर्भरता के कारण मुनाफा कम हो जाता था। इसी बीच उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसल की जानकारी दी और इसके फायदे समझाए। इससे उन्हें अपनी खेती में बदलाव करने की प्रेरणा मिली।

छोटे क्षेत्र से शुरुआत, बड़े रकबे तक विस्तार

उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत उन्होंने मात्र 50 डिसमिल क्षेत्र से की थी। लाभ मिलने पर अगले वर्ष एक एकड़ में खेती की और फिर तीसरे व चौथे वर्ष इसे बढ़ाकर ढाई एकड़ तक कर दिया। वर्तमान में वे ढाई एकड़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की सफल खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।

स्ट्रॉबेरी की खेती में लागत कम अधिक मुनाफा

कृषक सिंह ने बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। लागत निकालने के बाद लगभग 7 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि यही ढाई एकड़ यदि धान की खेती में लगाया जाता, तो लगभग 90 क्विंटल उत्पादन होता, जिससे शासकीय उपार्जन केन्द्र में बेचने पर करीब 3 लाख रुपये की आमदनी होती। धान की खेती में लगभग 1 लाख रुपये की लागत आने के बाद शुद्ध लाभ मात्र 2 लाख रुपये के आसपास ही रहता।

उद्यानिकी में सब्सिडी से घटा खर्च, बढ़ा लाभ

किसान लाल बहादुर सिंह ने बताया कि उद्यानिकी विभाग की इस योजना के अंतर्गत पौध, खाद और बीज की राशि डीबीटी के माध्यम से वापस कर दी जाती है। उन्हें लगभग 80 से 85 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्राप्त होगी। विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है, जिससे खेती और अधिक सफल हो रही है।

अधिकारियों का मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वे पौधे स्वयं मंगवाते हैं और उद्यानिकी विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार खेती करते हैं। विभागीय अधिकारियों द्वारा खेत का निरीक्षण कर आवश्यक सलाह दी जाती है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होता है और बाजार में अच्छी कीमत मिल जाती है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने लाल बहादुर सिंह

लाल बहादुर सिंह ने कहा कि शासन की उद्यानिकी योजना से अन्य किसान भी लाभ ले सकते हैं। धान जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं। आज वे स्वयं उद्यानिकी खेती से सशक्त और आत्मनिर्भर बने हैं तथा अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित कर रहे हैं।

उद्यानिकी प्रोत्साहन के लिए शासन का जताया आभार

किसान लाल बहादुर सिंह ने उद्यानिकी खेती को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से प्रदेश का किसान आज सशक्त, आत्मनिर्भर और उन्नत कृषक बन रहा है।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026 के लिए आम जनता हेतु सुगम यातायात व्यवस्था : 23 से 25 जनवरी तक पुरखौती मुक्तांगन, नवा रायपुर में होगा साहित्य, संस्कृति और विचारों का संगम

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय पटल पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में किया जा रहा है। आम नागरिकों, साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों एवं युवाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा उत्सव स्थल तक सुगम एवं निःशुल्क यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग बिना किसी बाधा के इस तीन दिवसीय साहित्यिक महोत्सव में सहभागिता कर सकें।

इस व्यवस्था के अंतर्गत रायपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पुरखौती मुक्तांगन, नवा रायपुर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कुल 6 विशेष बस रूट निर्धारित किए गए हैं। ये बसें तीनों दिन सुबह 9 बजे, 10.30 बजे, दोपहर 12 बजे, 1.30 बजे, 3 बजे तथा शाम 4.30 बजे निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित होंगी। 

रूट क्रमांक 1 टाटीबंध से प्रारंभ होकर सरोना, रायपुरा चौक, कुशालपुर, भाठागांव चौक, संतोषी नगर चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा। 

रूट क्रमांक 2 रेलवे स्टेशन से फाफाडीह चौक, डी. नगर, मेकाहारा, शास्त्री चौक, कालीबाड़ी, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक जाएगा। 

रूट क्रमांक 3 रेलवे स्टेशन से फाफाडीह चौक, मेकाहारा, घड़ी चौक, गांधी उद्यान, भगत सिंह चौक, तेलीबांधा, अवंतीबाई चौक, पं. दीनदयाल चौक, वीआईपी चौक, कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी, जोरा, नवा रायपुर एवं कैपिटल कॉम्प्लेक्स के मार्ग से पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा।

इसी प्रकार रूट क्रमांक 4 यूनिवर्सिटी गेट से साइंस कॉलेज, आयुर्वेदिक कॉलेज, आश्रम, आमापारा, आज़ाद चौक, कालीबाड़ी, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक संचालित होगा। 

रूट क्रमांक 5 कचना से मोवा, लोधीपारा, पंडरी, शास्त्री चौक, कालीबाड़ी चौक, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, महावीर नगर, तेलीबांधा, अवंतीबाई चौक, पं. दीनदयाल चौक, वीआईपी चौक, कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी, जोरा, नवा रायपुर एवं कैपिटल कॉम्प्लेक्स के रास्ते पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा।

रूट क्रमांक 6 भाठागांव से पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक संचालित किया जाएगा।

तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव–2026 छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा, लोक परंपराओं और साहित्यिक चेतना को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। इस अवसर पर देशभर से प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, कथाकार, विचारक, कलाकार, पत्रकार, रंगकर्मी एवं साहित्य प्रेमी सहभागिता करेंगे। उत्सव के दौरान साहित्यिक संवाद, विचार-मंथन, समकालीन विषयों पर परिचर्चाएँ, कविता पाठ, कथा सत्र, पुस्तक विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं कला-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, जो साहित्यिक और वैचारिक विमर्श को नई दिशा देंगे।

उत्सव के अंतर्गत ओपन माइक सत्र का भी आयोजन किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम नागरिकों, युवाओं एवं नवोदित रचनाकारों को कविता, कहानी, गीत, विचार अथवा नाट्य अंश के रूप में अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, राज्य के विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में उत्सव की जानकारी व्यापक रूप से साझा की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों और युवाओं में साहित्य, भाषा और संस्कृति के प्रति रुचि विकसित हो सके। 

आयोजन के दौरान देश के ख्यातिनाम प्रकाशन समूहों की पुस्तक स्टॉल भी लगाई जाएंगी, जहां पाठकों को विविध विषयों, भाषाओं और विधाओं की पुस्तकों से रूबरू होने और उन्हें खरीदने का अवसर मिलेगा।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026 में सहभागिता के लिए इच्छुक नागरिक, विद्यार्थी एवं साहित्य प्रेमी आधिकारिक वेबसाइट www.raipursahityautsav.org के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं।

देशभक्ति गीतों से गुंजा चरौदा,बच्चों ने गाया बैंड के ध्वनि के साथ वंदेमातरम् गीत

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आरंग- वंदेमातरम् गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर देश भर में सामूहिक रूप से वंदे मातरम् गीत गायन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।इसी कड़ी में डीआईजी अजय कुमार सिंह सीआरपीएफ कैंप ग्रुप केंद्र भिलाई रायपुर के निर्देशन में मंगलवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में कैंप के जवानों की बैंड टीम द्वारा वंदे मातरम् गीत का सस्वर गायन किया गया।जो बच्चों, शिक्षको व ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। संस्था के नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया 

बैंड की सुमधुर ध्वनि के साथ वन्दे मातरम् गीत गायन से बच्चों में गजब का उत्साह दिखा। बच्चे उत्साहित होकर भारत माता की जय, वंदे मातरम् का उद्घोष करते नजर आए। वंदेमातरम् गीत गायन कार्यक्रम के संयोजन में  इंस्पेक्टर यू बी चतुर्वेदी, एएसआई हेमराज और हवलदार सोमपाल ने अहम् भूमिका निभाया।इस अवसर पर संस्था प्रमुख के के परमाल, सरपंच देवशरण धीवर,उप सरपंच रवि बंजारे, संतोष कोसरिया, रेत कलाकार हेमचंद साहू ने वंदे मातरम कार्यक्रम में शामिल होकर बच्चों और जवानों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने किया। उक्त कार्यक्रम के आयोजन संयोजन में शिक्षक सूर्यकांत चन्द्राकार, दीनदयाल धीवर,डिलेश्वर साहू,सुशील कुमार आवडे, जीतेंद्र यदु,शिक्षिका संगीता पाटले, प्रभा साहू, पार्वती साहू ने सहभागिता निभाई।

ऑटो एक्सपो–2026: वाहन खरीदी पर आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन द्वारा 20 जनवरी 2026 से 05 फरवरी 2026 तक श्री राम बिजनेस पार्क, एमजीएम हॉस्पिटल के सामने, विधानसभा रोड, सड्डू रायपुर में ऑटो एक्सपो–2026 का आयोजन किया जा रहा है।

उक्त ऑटो एक्सपो में विक्रय होने वाले वाहनों पर परिवहन विभाग द्वारा एकमुश्त 50 प्रतिशत जीवनकाल कर (आरटीओ टैक्स) में छूट प्रदान की जा रही है, जिससे प्रदेश के आम नागरिकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा।

ऑटो एक्सपो–2026 का आयोजन 20 जनवरी 2026 से 05 फरवरी 2026 तक श्री राम बिजनेस पार्क, रायपुर में किया जा रहा है। इस अवधि में वाहन क्रय करने वाले ग्राहकों को आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

यह प्रदेश का पहला ऑटो एक्सपो है, जिसमें पूरे छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों को लाभ मिलेगा। वाहन खरीदने के लिए आमजन को रायपुर आने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वे अपने शहर अथवा गांव के निकटतम प्रतिभागी/पंजीकृत डीलरों के माध्यम से इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

ऑटो एक्सपो–2026 के अंतर्गत सभी नागरिकों को अपने गृह जिले में ही वाहन पंजीयन कराने की सुविधा उपलब्ध होगी। अर्थात, क्रय किए गए वाहन पर अपने गृह जिले के परिवहन कार्यालय का पंजीयन चिन्ह (आरटीओ कोड) प्राप्त किया जा सकेगा।

दूरस्थ क्षेत्रों के डीलर्स भी इस ऑटो एक्सपो में भाग ले रहे हैं, जिससे छोटे व्यावसायिक विक्रेताओं को रोजगार के उपयुक्त अवसर प्राप्त होंगे और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

रायपुर ऑटो एक्सपो में छत्तीसगढ़ की जनता को एक ही स्थान पर सभी प्रकार के वाहन मॉडल एवं नवीनतम तकनीक से युक्त नए मॉडलों को देखने, परखने और चुनने का अवसर मिलेगा। इससे आमजन नवीनतम ऑटोमोबाइल तकनीकों से भी अवगत हो सकेंगे।

रायपुर ऑटो एक्सपो–2026 में देश के विभिन्न फाइनेंसर एवं बैंक न्यूनतम दरों पर वाहन ऋण उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं इंश्योरेंस कंपनियां न्यूनतम दरों पर वाहन बीमा की सुविधा प्रदान कर रही हैं। इससे वाहन क्रय करने वाले नागरिकों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।

ऑटो एक्सपो–2026 में आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत छूट के साथ-साथ फाइनेंस कंपनियों, बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों एवं विभिन्न डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण न्यूनतम दरों पर वाहन उपलब्ध होंगे, जिससे आमजन को व्यापक आर्थिक राहत मिलेगी।

रायपुर के इस ऑटो एक्सपो में रायपुर जिले के 95 डीलर्स तथा अन्य जिलों के 171 डीलर्स, कुल 266 डीलर्स भाग ले रहे हैं, जिससे प्रदेशभर के नागरिकों को विविध विकल्प उपलब्ध होंगे।

उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष 2025 के ऑटो एक्सपो में कुल 29,348 वाहनों की बिक्री हुई थी, जिसके माध्यम से आम जनता को लगभग 120 करोड़ रुपये की आरटीओ टैक्स में छूट प्रदान की गई थी, जिससे नागरिकों को उल्लेखनीय आर्थिक सहायता प्राप्त हुई थी।

इस प्रकार, ऑटो एक्सपो–2026 प्रदेश के नागरिकों के लिए किफायती दरों पर वाहन क्रय करने, स्थानीय स्तर पर पंजीयन सुविधा प्राप्त करने तथा व्यापक आर्थिक लाभ उठाने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हो रहा है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना: 57 मार्गों पर बस संचालन, पहली बार यात्री बस सुविधा से जुड़े 330 गाँव

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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 से दूरस्थ गाँवों को सुलभ आवागमन की सौगात

छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अंचलों में आवागमन की सुविधा सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह योजना उन ग्रामों तक सार्वजनिक परिवहन पहुँचाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है, जहाँ अब तक यात्री बस सुविधा उपलब्ध नहीं थी।


योजना के प्रथम चरण में बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिलों को सम्मिलित किया गया है। 

अब तक मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत कुल 57 चयनित मार्गों पर 57 बसों का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। इन बसों के माध्यम से कुल 330 नए गाँवों तक पहली बार यात्री बस सुविधा पहुँची है, जिससे ग्रामीण जनजीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

योजना का प्रमुख उद्देश्य ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों को जनपद मुख्यालय, नगरीय क्षेत्र, तहसील मुख्यालय तथा जिला मुख्यालयों से जोड़ना है, जहाँ पूर्व में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं थी। इससे ग्रामीण नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं तक सुगम पहुँच सुनिश्चित हो रही है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत बस संचालकों को राज्य शासन द्वारा प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। प्रथम वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर, द्वितीय वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर तथा तृतीय वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर की दर से सहायता दी जा रही है।

इसके अतिरिक्त योजना के तहत गासिक कर में पूर्णतः छूट अधिकतम तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण मार्गों पर बस संचालन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके।

मार्ग चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। इस योजना के अंतर्गत मार्गों का चयन जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है, ताकि वास्तविक आवश्यकता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल सके।

चयनित मार्गों पर बस संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती है। निविदा के माध्यम से न्यूनतम वित्तीय दर प्रस्तावित करने वाले पात्र आवेदक का चयन किया जाता है, जिससे शासन पर न्यूनतम वित्तीय भार पड़े और सेवा सतत बनी रहे।

निविदा में चयनित आवेदक से विधिवत परमिट आवेदन प्राप्त कर सुनवाई की प्रक्रिया के उपरांत बस संचालन हेतु परमिट जारी किया जाता है। इससे नियामकीय प्रक्रिया का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाता है।

वर्तमान में 12 नवीन ग्रामीण मार्गों पर बस संचालन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसके अतिरिक्त 15 नए ग्रामीण मार्गों का चयन कर लिया गया है, जिन पर बस संचालन हेतु निविदाएँ आमंत्रित की गई हैं।

जिलावार स्थिति की बात करें तो सुकमा में 8, नारायणपुर में 4, जगदलपुर में 2, कोण्डागांव में 4, कांकेर में 6, दंतेवाड़ा में 7, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 2, सूरजपुर में 6, कोरिया में 5, जशपुर में 7, बलरामपुर में 4 तथा अंबिकापुर में 2 बसों का संचालन किया जा रहा है। इस प्रकार कुल 57 मार्गों पर 57 बसें संचालित हैं।

आगामी कार्ययोजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 200 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाकर समावेशी विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगा।

साहित्य उत्सव से छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान

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रायपुर- बसंत पंचमी 23 जनवरी से नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देश भर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होने जा रहे हैं। इस तीन दिवसीय उत्सव से छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर पूरा प्रदेश रजत महोत्सव मना रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह उत्सव न केवल छत्तीसगढ़ को बल्कि पूरे देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ को साहित्यिक जगत में एक नई पहचान प्रदान करेगा तथा जनसमुदाय को साहित्य, लेखन और पठन-पाठन की ओर प्रेरित करेगा। साहित्य महोत्सव के दौरान साहित्य विमर्श खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श होगा। साहित्य महोत्सव को लेकर आम-लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। 

आज जब सोशल मीडिया के कोलाहल मंे ज्ञान की धारा अक्सर सूचनाओं के शोर में दब जाती है। ऐसे समय में साहित्य उत्सव एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। जहां विचार-विमर्श के बीच संवाद की संस्कृति जीवित रहती है। सृजन वही जन्म लेता है, जहां मन खुला हो और कथा वही आकार लेती हैं जहां मनुष्य अपने सत्य से संवाद करने का साहस रखता है। साहित्य महोत्सव के लोगो (डिजाइन) में अंकित ‘‘आदि से अनादि’’ तक वाक्य साहित्य के उस अटूट यात्रा को दर्शाता है, जिसमें आदिकालीन रचनाओं से लेकर निरंतर विकसित हो रहे आधुनिक साहित्य तक सभी रूप समाहित हैं। साहित्य कालातीत है, वह समय, समाज भाषा और पीढ़ियों को जोड़कर चलने वाली निरंतर धारा हैै। तीन दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन में साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कला-प्रदर्शनियों का जीवंत केंद्र बनेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रायपुर साहित्य उत्सव पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सांस्कृतिक गर्व का विषय है क्योंकि इसमें राज्य की हजारों साल पुरानी साहित्यिक जड़े, जनजातीय परंपराएं, सामाजिक समरसता और आधुनिक रचनात्मक दृष्टि सभी का सुंदर सार्थक और कलात्मक संगम दिखाई देगा। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा आदि से अनादि तक अविचल, जीवंत और समृद्ध रही है, और आगे भी इसी धारा में निरंतर विकास की नई कहानियां लिखती रहेंगी। साहित्य उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे, इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र और 3 संवाद सत्र आयोजित किये जाएंगे जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा। रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य, विचार और संस्कृति के संगम का उत्सव है, इसमें युवाओं, शिक्षकों, लेखकों और आम पाठकों की सहभागिता रहेगी। नई पीढ़ी को साहित्य विचार और संस्कृति से जोड़ना इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य है।

उत्सव के दौरान पुस्तक मेला का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 40 स्टॉल लगाएं जाएंगे जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की जाएगी एवं विक्रय के लिए उपलब्ध रहेगी। रायपुर साहित्य उत्सव में विशेष रूप से चाणक्य नाटक का मंचन किया जाएगा जो भारतीय बौद्धिक परंपरा और नाट्य कला का प्रभावशाली उदाहरण होगा। इसके साथ ही लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शको को राज्य की जीवंत लोक संस्कृति से रू-ब-रू कराया जाएगा। विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन आयोजित होगी, जहाँ उनकी सशक्त रचनाएँ श्रोताओं को साहित्यिक रसास्वादन कराएँगी। साथ ही पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र आयोजित किए जाएँगे, जिनमें समकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर सार्थक चर्चा होगी। 

यह आयोजन छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को राष्ट्रीय संवाद से जोड़ने की एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 न केवल लेखकों और पाठकों के बीच सेतु बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और विचार के प्रति संवेदनशील बनाने का भी माध्यम बनेगा। साहित्यिक विमर्श, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध यह तीन दिवसीय उत्सव नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय सिद्ध होगा। 

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक आत्मा और लोक स्मृति में बसे भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की एक रचना - 

हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था,
मैं व्यक्ति को नहीं,
हताशा को जानता था,
हम दोनों साथ चले,
साथ चलने को जानते थें

यही वह साहित्य है जो मनुष्य को धैर्य देता और साथ चलने की सभ्यता सिखाता है।

केंद्र सरकार ने असम के ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग की अनबाधित अनुदान राशि 213.9 करोड़ रुपये जारी की

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गुवाहाटी/नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने असम के ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) के लिए XV वित्त आयोग (Finance Commission) की अनबाधित अनुदान राशि 213.9 करोड़ रुपये जारी की है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए पहली किस्त है। यह अनुदान असम के सभी 2,192 पात्र ग्राम पंचायतों, 182 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 27 पात्र जिला परिषदों को जारी किया गया है।

केंद्र सरकार के द्वारा, पंचायत राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पीने योग्य जल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से राज्यों को XV-FC अनुदान जारी करने की सिफारिश की जाती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान एक वित्तीय वर्ष में 2 किस्तों में जारी किया जाता है।

अनुदान का उपयोग

अनबाधित अनुदान (Untied Grants) का उपयोग पंचायत राज संस्थाएं/ग्रामीण स्थानीय निकाय अपने क्षेत्र की स्थान-विशिष्ट प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए कर सकती हैं। यह खर्च संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत किया जा सकता है, लेकिन इसमें वेतन और अन्य संस्थागत खर्च शामिल नहीं हैं।

बंधित अनुदान (Tied Grants)

बंधित अनुदान का उपयोग निम्नलिखित मूलभूत सेवाओं के लिए किया जा सकता है:

  • स्वच्छता और ODF स्थिति बनाए रखना, जिसमें विशेष रूप से घरेलू कचरा प्रबंधन, मानव मल/मल-जल प्रबंधन और फेकल स्लज प्रबंधन शामिल है।

  • पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण।

यह कदम ग्रामीण स्थानीय निकायों को उनकी स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को लागू करने और विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

जीएसआई की 65वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (CGPB) बैठक 21 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित

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नई दिल्ली- खनिज मंत्रालय के अंतर्गत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत (GSI) 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के ICAR, पुसा स्थित ए. पी. शिंदे सिम्पोजियम हॉल में 65वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (CGPB) की बैठक का आयोजन करेगा। यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग, अकादमिक संस्थानों और खनन क्षेत्रों के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाकर भूवैज्ञानिक प्रगति, खनिज अन्वेषण रणनीतियों और स्वच्छ ऊर्जा, भू-जोखिम तथा सतत विकास से संबंधित चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगी।


CGPB का उद्देश्य और महत्व

केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (CGPB) भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत (GSI), खनिज मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां GSI के वार्षिक फील्ड सीजन प्रोग्राम (FSP) पर चर्चा की जाती है और कार्यों के दोहराव को रोकने के उपाय किए जाते हैं। CGPB के सदस्य और अन्य हितधारक जैसे राज्य सरकारें, केंद्रीय/राज्य खनिज अन्वेषण एजेंसियां, PSU और निजी उद्यमी GSI के साथ सहयोगात्मक कार्यों के लिए प्रस्ताव रखते हैं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं और प्रस्तुत प्रस्तावों की महत्वता व तात्कालिकता के आधार पर आगामी वित्तीय वर्ष के लिए GSI के सर्वेक्षण, मानचित्रण, अन्वेषण, अनुसंधान एवं विकास, सामाजिक परियोजनाओं तथा प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का वार्षिक कार्यक्रम अंतिम रूप दिया जाता है।

65वीं CGPB बैठक का नेतृत्व और सहभागिता

65वीं CGPB बैठक की अध्यक्षता खनिज मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल करेंगे, जबकि GSI के महानिदेशक असित साहा और खनिज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव संजय लोइया की गरिमामयी उपस्थिति में बैठक आयोजित होगी। बैठक में खनिज मंत्रालय, GSI, राज्य भूवैज्ञानिक विभागों, PSU और निजी अन्वेषण/खनन कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे।

बैठक में चर्चा के प्रमुख विषय

बैठक में देश के खनिज क्षेत्र द्वारा सामना की जा रही चुनौतियों पर विचार किया जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं:

  • लिथियम, REEs, ग्रेफाइट, PGE, वैनाडियम, स्कैंडियम, सीज़ियम आदि जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण, जो ऊर्जा संक्रमण और आत्मनिर्भर भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े हैं।

  • AI/ML आधारित डेटा एकीकरण, भू-भौतिक सर्वेक्षण, हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग, डीप ड्रिलिंग और मिनरल सिस्टम अध्ययन जैसे आधुनिक अन्वेषण उपकरणों को अपनाना।

  • महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के लिए प्री-प्रतिस्पर्धात्मक डेटा साझा करने और सहयोगात्मक अन्वेषण मॉडल, ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो, कार्यों का दोहराव कम हो और अन्वेषण से नीलामी-योग्य ब्लॉक्स तक की प्रक्रिया तेज हो।

  • हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में भू-भूस्खलन खतरा जोनिंग और ढलान स्थिरता अध्ययन, ताकि आपदा जोखिम में कमी लाई जा सके।

बैठक में GSI का वार्षिक कार्यक्रम FS 2026-27 भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें पृथ्वी-विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में 1,068 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें प्रमुख जोर खनिज अन्वेषण पर है। यह कार्यक्रम नवाचार और सततता पर केंद्रित है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों, कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन अध्ययन, अपतटीय अन्वेषण और सार्वजनिक भलाई से जुड़ी भू-विज्ञान को प्राथमिकता दी गई है। बैठक में GSI की प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन और रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में GSI की गतिविधियों का प्रदर्शन करने वाली प्रदर्शनी भी आयोजित होगी।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ाव

CGPB बैठक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक प्राथमिकताओं को वैश्विक सततता लक्ष्यों के साथ संरेखित करने, नवाचार और संसाधन सुरक्षा के भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक और समन्वयात्मक मंच के रूप में कार्य करेगी।

पीडीयूएनएएसएस में ईपीएफओ अधिकारियों के लिए ‘कानूनी प्रबंधन एवं दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016’ पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन

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नई दिल्ली- पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS), नई दिल्ली में कल ईपीएफओ (Employees’ Provident Fund Organisation) के अधिकारियों के लिए ‘कानूनी प्रबंधन एवं दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016’ पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। यह कार्यक्रम 19 से 23 जनवरी 2026 तक चल रहा है और इसका उद्देश्य ईपीएफओ अधिकारियों की दिवालियापन से संबंधित मामलों और IBC ढांचे के तहत उत्पन्न कानूनी मुद्दों से निपटने की कानूनी तथा संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाना है।

उद्घाटन सत्र

उद्घाटन सत्र को PDUNASS के निदेशक कुमार रोहित, दिवाला और दिवालियापन बोर्ड ऑफ इंडिया (IBBI) के महाप्रबंधक राजेश तिवारी, PDUNASS के चीफ लर्निंग ऑफिसर रिजवान उद्दीन और RPFC-I एवं कोर्स डायरेक्टर संजय कुमार राय ने संबोधित किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व

PDUNASS के निदेशक कुमार रोहित ने कहा कि दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 ने भारत के कानूनी और आर्थिक ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है। उन्होंने बताया कि ईपीएफओ जैसी वैधानिक संस्थाएं मोराटोरियम प्रावधानों, provident fund देयों की प्राथमिकता, आकलन बनाम वसूली, और IBC प्रणाली के तहत निर्णायक प्राधिकरणों के समक्ष प्रतिनिधित्व जैसे जटिल कानूनी मुद्दों का सामना कर रही हैं।

निदेशक ने यह भी बताया कि दिवालियापन संबंधी न्यायशास्त्र लगातार विकसित हो रहा है, इसलिए ईपीएफओ अधिकारियों को कानूनी रूप से अपडेट, प्रक्रियात्मक रूप से संगठित और संस्थागत रूप से समन्वित रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दिवालियापन मामलों का प्रभावी प्रबंधन श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा हितों की रक्षा और IBC के वैधानिक ढांचे का पालन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को ईपीएफओ के वैधानिक कार्यों से संबंधित दिवालियापन प्रक्रियाओं की व्यावहारिक और समग्र समझ प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

कार्यक्रम में भागीदारी

कुमार रोहित ने बताया कि RPFC-I, RPFC-II और APFC रैंक के अधिकारी, अनुभवी क्षेत्र अधिकारी और नए भर्ती हुए अधिकारी, इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। उन्होंने IBBI द्वारा कार्यक्रम के लिए विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों की उपलब्धता के लिए समर्थन की सराहना की।

अन्य सत्र और शिक्षण सामग्री

IBBI के महाप्रबंधक राजेश तिवारी ने IBC के उद्देश्य, संस्थागत ढांचा और प्रमुख हितधारकों की भूमिकाओं पर प्रकाश डाला। PDUNASS के चीफ लर्निंग ऑफिसर रिजवान उद्दीन ने कार्यक्रम की शैक्षणिक संरचना और सीखने के उद्देश्यों की जानकारी दी, जबकि कोर्स डायरेक्टर संजय कुमार राय ने कोर्स डिजाइन और अपेक्षित सीखने के परिणामों की व्याख्या की।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं

संजय कुमार राय ने बताया कि कार्यक्रम में IBBI के अधिकारी, रेजोल्यूशन प्रोफेशनल, ईपीएफओ के स्टैंडिंग काउंसल, पूर्व NCLT/NCLAT सदस्य और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद शामिल होंगे। सत्रों में ईपीएफओ में कानूनी प्रबंधन, IBC-संबंधित मामलों का निपटान, provident fund देयों की वसूली और दिवालियापन प्रक्रियाओं पर हालिया न्यायिक निर्णयों पर चर्चा होगी।

यह पहल PDUNASS की क्षमता निर्माण और ईपीएफओ अधिकारियों की कानूनी तत्परता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, ताकि वे दिवालियापन समाधान ढांचे में श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा हितों की प्रभावी रक्षा कर सकें।

PDUNASS के बारे में

पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) ईपीएफओ की शीर्ष प्रशिक्षण संस्था है, जो श्रम और रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत आती है। 1990 में स्थापित PDUNASS सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श कार्य करती है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का उदयपुर में दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित

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उदयपुर (राजस्थान)- भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने राजस्थान के उदयपुर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में 22 केंद्रीय मंत्रालयों, 27 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों, 30 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों, निफ्टेम (NIFTEMs) और इन्वेस्ट इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य नीति सुधारों, नवाचार, मूल्य श्रृंखला एकीकरण और सहयोगात्मक कार्यवाही के माध्यम से भारत के खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना था।

चिंतन शिविर में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव, विशेष सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के अपर मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश और पंजाब के प्रमुख सचिव सहित कई राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय रूप से चर्चा में शामिल हुए। वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव सहित अन्य केंद्रीय विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विचार-विमर्श में योगदान दिया।

उद्घाटन सत्र: आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र की परिकल्पना

चिंतन शिविर का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि सरकार एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और समावेशी खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो किसानों की आय बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, खाद्य सुरक्षा एवं पोषण को मजबूत करने तथा विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में सहायक होगा।

उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण को कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निर्यात को बढ़ाने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले, मूल्यवर्धित और सतत खाद्य उत्पादों के विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण में तकनीकी प्रगति और स्टार्ट-अप ग्रांट चैलेंज के विजेताओं की सफलता कथाओं पर आधारित विशेष प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

समूह चर्चा: प्रमुख चुनौतियां और रणनीतिक सुझाव

चिंतन शिविर के दौरान छह विषयगत समूहों में गहन मंथन किया गया। इन समूहों ने अगले पांच वर्षों में भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर को दोगुना करने, प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने, न्यूट्रास्यूटिकल्स, फूड फोर्टिफिकेशन, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन उत्पाद और अल्कोहलिक बेवरेज जैसे उच्च विकास क्षेत्रों की योजना, खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता, फार्म से फोर्क तक मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा प्रसंस्कृत खाद्य को लेकर पोषण और स्वास्थ्य संबंधी भ्रांतियों के समाधान जैसे विषयों पर चर्चा की।

समूहों ने कृषि स्तर पर एकत्रीकरण, एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने, आधुनिक प्रसंस्करण क्षमता, कोल्ड चेन एवं लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने जैसे ठोस सुझाव दिए। निर्यात बढ़ाने के लिए ‘ब्रांड इंडिया’ को बढ़ावा देने, एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म, गैस्ट्रो-डिप्लोमेसी, राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण संवर्धन परिषद की स्थापना और ‘भारत गुणवत्ता खाद्य चिन्ह’ शुरू करने की अनुशंसा की गई।

राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाएं

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अपनी सर्वोत्तम नीतिगत पहलों को साझा किया। उत्तर प्रदेश ने खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना करने की योजना प्रस्तुत की, जबकि महाराष्ट्र ने पीएमएफएमई योजना के तहत अपने नेतृत्व और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल साझा की। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों ने भी क्षेत्रीय नवाचारों और निर्यातोन्मुख नीतियों पर प्रकाश डाला।

सहायक पहल और आगे की राह

चिंतन शिविर के दौरान मंत्री चिराग पासवान ने उदयपुर की कृषि उपज मंडी समिति में पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत विकसित कॉमन इनक्यूबेशन सुविधा का उद्घाटन भी किया, जो सीताफल, जामुन, आंवला, एलोवेरा और मसालों जैसे लघु वनोपज के प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी।

समापन सत्र में मंत्री ने सभी प्रतिभागियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र, राज्य, उद्योग और संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय से ही भारत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकेगा। उन्होंने सभी हितधारकों से समयबद्ध रूप से सिफारिशों को लागू करने का आह्वान किया।


समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 21 जनवरी को नई दिल्ली में राजदूतों एवं उच्चायुक्तों के साथ राउंड टेबल सम्मेलन

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नई दिल्ली- मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य विभाग 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में “समुद्री खाद्य निर्यात संवर्धन पर राजदूतों एवं उच्चायुक्तों के साथ राउंड टेबल सम्मेलन” का आयोजन कर रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को सुदृढ़ करना तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार संपर्कों को मजबूत करना है।

सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय करेंगे। यह कार्यक्रम मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा।

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक देश है और मछली तथा जलीय खाद्य उत्पादों के प्रमुख वैश्विक उत्पादकों में शामिल है। बीते वर्षों में यह क्षेत्र आजीविका आधारित गतिविधि से आगे बढ़कर एक मजबूत, निर्यातोन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें पालन, चारा, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और मूल्य संवर्धन शामिल हैं। साथ ही यह क्षेत्र लाखों छोटे, सीमांत और पारंपरिक मछुआरों एवं किसानों की आजीविका का भी आधार बना हुआ है। लक्षित योजनाओं और नीतिगत समर्थन के बल पर भारत आज मछली एवं मत्स्य उत्पादों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। वर्ष 2024–25 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 16.98 लाख मीट्रिक टन रहा, जिसका मूल्य ₹62,408 करोड़ (7.45 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा, जो देश के कुल कृषि निर्यात का लगभग 18 प्रतिशत है।

इस राउंड टेबल सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ओशिनिया तथा लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई क्षेत्र के 83 साझेदार देशों के राजदूत और उच्चायुक्त भाग लेंगे। इसके अलावा विदेश मंत्रालय, मत्स्य विभाग, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय तथा एफएओ, एएफडी, जीआईजेड, बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम (बीओबीपी), एडीबी और आईएफएडी जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन समुद्री खाद्य व्यापार, बाजार पहुंच, नियामक सहयोग और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय साझेदारियों को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक एवं तकनीकी मंच प्रदान करेगा।

सम्मेलन में सतत, ट्रेस करने योग्य और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य व्यापार को बढ़ावा देने, निवेश, संयुक्त उपक्रम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के अवसरों की पहचान पर चर्चा की जाएगी। साथ ही जलवायु और बाजार जोखिमों के प्रति समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखला की मजबूती पर भी विचार-विमर्श होगा। प्रमुख विषयों में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार के रुझान, मानक एवं प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और डिजिटल रिपोर्टिंग, सतत एवं जिम्मेदार स्रोत, मूल्य संवर्धन एवं उत्पाद नवाचार, कोल्ड चेन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, वित्तपोषण, निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा मत्स्य और एक्वाकल्चर में डिजिटल एवं तकनीकी परिवर्तन शामिल हैं।

विचार-विमर्श के दौरान उच्च गुणवत्ता, प्रमाणित और सतत रूप से प्राप्त समुद्री खाद्य उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में एक्वाकल्चर आधारित प्रोटीन की बढ़ती खपत तथा रेडी-टू-कुक, रेडी-टू-ईट और न्यूट्रास्यूटिकल-ग्रेड समुद्री उत्पादों जैसे प्रीमियम वर्गों के विस्तार पर भी प्रकाश डाला जाएगा। ये रुझान भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अनुपालन, मूल्यवर्धित प्रसंस्करण और प्रजातियों के विविधीकरण के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं।

सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों से खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने, मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की आजीविका में सुधार लाने तथा सतत, लचीले और समावेशी विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की अपेक्षा है।

डाक विभाग ने देशभर में एटीएम अवसंरचना का किया आधुनिकीकरण

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नई दिल्ली- बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुलभ और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डाक विभाग ने देशभर में अपनी एटीएम अवसंरचना का आधुनिकीकरण किया है।

देश के विभिन्न डाकघरों में स्थापित ये 887 एटीएम नागरिकों को उनके घर के निकट आवश्यक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है, जिससे डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने की सरकार की परिकल्पना को मजबूती मिल रही है।

इन एटीएम के माध्यम से ग्राहक आसानी से नकद निकासी, खाते की शेष राशि की जानकारी प्राप्त करने तथा अन्य बुनियादी बैंकिंग लेन-देन कर सकते हैं।

डाक विभाग ने देशभर में उपलब्ध अपनी एटीएम सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए सभी नागरिकों से अपील की है।

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