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अश्लील वीडियो से ब्लैकमेलिंग के बीच युवक की हत्या, महिला समेत तीन गिरफ्तार

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 कवर्धा। कबीरधाम जिले में युवक की हत्या के एक सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, अश्लील वीडियो के आधार पर कथित ब्लैकमेलिंग और दबाव से परेशान एक महिला ने अपने पति और देवर के साथ मिलकर युवक की हत्या कर दी। घटना के बाद शव को बोरी में भरकर दूसरे स्थान पर फेंक दिया गया था। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।


पुलिस के मुताबिक, चौकी पोंडी क्षेत्र के ग्राम बैहरसरी निवासी कोमल वर्मा 28 मई की रात से लापता था। परिजनों ने अगले दिन उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी दौरान थाना पांडातराई क्षेत्र के ग्राम सोंढा में एक बोरी के भीतर युवक का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

जांच के दौरान पुलिस ने मृतक की कॉल डिटेल और उसकी अंतिम लोकेशन की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि घटना से पहले उसकी लगातार बातचीत मंदाकिनी वर्मा नामक महिला से हो रही थी। संदेह के आधार पर पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस के अनुसार, महिला ने पूछताछ में बताया कि मृतक उसके निजी वीडियो के आधार पर उसे कथित रूप से ब्लैकमेल कर रहा था। आरोप है कि वह वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उस पर लगातार दबाव बनाता था। घटना वाली रात भी उसने महिला को मिलने के लिए कहा था।

महिला के बयान के अनुसार, इसी दौरान युवक को घर बुलाया गया, जहां उस पर लोहे के पाना से हमला किया गया। बाद में महिला, उसके पति रामस्नेही वर्मा और देवर ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को बोरी में भरकर ट्रैक्टर के जरिए दूसरे स्थान पर ले जाकर फेंक दिया गया।

पुलिस ने मामले में महिला, उसके पति और देवर को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

’मन की बात में गूंजा छत्तीसगढ़ का गौरव: मुख्यमंत्री साय ने कहा - यह प्रदेश की प्रतिभा और विरासत को राष्ट्रीय सम्मान मिलने का क्षण’

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और आमजनों के साथ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134वीं कड़ी का श्रवण किया। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व, प्रेरणा और आत्मविश्वास का क्षण बन गया, क्योंकि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय मंच से प्रदेश की प्रतिभा और सांस्कृतिक धरोहर दोनों का उल्लेख कर पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जब देश का सर्वाेच्च नेतृत्व किसी राज्य की उपलब्धियों और प्रतिभाओं का उल्लेख करता है, तो वह केवल व्यक्तियों का सम्मान नहीं होता, बल्कि करोड़ों प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं, परिश्रम और पहचान को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा मिलती है।


मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ आज देश के सकारात्मक प्रयासों, नवाचारों, प्रतिभाओं और प्रेरक जीवन यात्राओं को राष्ट्रीय पहचान देने वाला एक सशक्त मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने आज जशपुर जिले के छोटे से गांव घुइटांगर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले युवा धावक अनिमेष कुजूर की उपलब्धि का उल्लेख कर प्रदेश के युवाओं को यह संदेश दिया है कि सीमित संसाधन किसी प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं सकते, यदि उसके भीतर लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत का जुनून हो।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह की उपलब्धि को जिस आत्मीयता और प्रेरक शैली में प्रस्तुत किया, वह देश के युवाओं में नई ऊर्जा भरने वाला है। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान दोनों खिलाडि़यों से फोन पर संवाद करते हुए उल्लेख किया कि पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में महज दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा और इसे उन्होंने खेलों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का अद्भुत उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह केवल रिकॉर्ड टूटने की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के आत्मविश्वास, अनुशासन और विश्वस्तरीय सोच की कहानी है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा धावक अनिमेष कुजूर ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.15 सेकंड में पूरी कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है और राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए क्वालीफाई कर प्रदेश तथा देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अनिमेष की यात्रा विशेष रूप से प्रेरणादायक है, क्योंकि जशपुर के ग्रामीण परिवेश से निकलकर सैनिक स्कूल अंबिकापुर से शिक्षा प्राप्त करने वाले इस युवा ने सीमित परिस्थितियों में अपनी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचने का सफर तय किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष की उपलब्धि यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ की धरती प्रतिभाओं से परिपूर्ण है और उचित अवसर मिलने पर यहां के युवा विश्व पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री और अनिमेष कुजूर के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी की सोच विशेष रूप से प्रेरक है। प्रधानमंत्री से बातचीत में अनिमेष ने बताया कि किस प्रकार कोविड काल के दौरान खेल के प्रति रुचि बढ़ी, साथियों के प्रोत्साहन से एथलेटिक्स में प्रवेश हुआ और कठिन चुनौतियों तथा संदेहों के बावजूद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष ने यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय खिलाड़ी विश्वस्तरीय स्प्रिंटिंग में नई पहचान बना सकते हैं और भारतीय युवा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। यह आत्मविश्वास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में खेल भावना का अत्यंत प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया कि प्रतिस्पर्धा केवल एक-दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए नहीं, बल्कि देश का मान बढ़ाने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा कही गई यह बात कि ष्एक-दूसरे को चुनौती भी देना है, आगे निकलने का प्रयास भी करना है और साथ ही एक-दूसरे की मदद के लिए भी खड़े रहना है” वास्तव में भारत की नई खेल संस्कृति की पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भी इसी सोच के साथ प्रतिभाशाली खिलाडि़यों को प्रशिक्षण, बेहतर खेल अधोसंरचना और अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक मल्हार में ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत प्राप्त दुर्लभ ताम्र-पट्टिकाओं का उल्लेख किया जाना भी छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 1400 से 1500 वर्ष पुरानी मानी जा रही ये ताम्र-पट्टिकाएं पांडुवंशी शासनकाल, विशेष रूप से महर्षि बालार्जुन काल से जुड़ी मानी जा रही हैं, जो उस समय की शासन व्यवस्था, संस्कृति, धर्म और सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई यह धरोहर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा का सशक्त प्रमाण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार भारत और छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मल्हार की यह खोज केवल पुरातात्विक उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक स्मृति, ऐतिहासिक चेतना और आने वाली पीढि़यों के ज्ञान-विस्तार से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय मंच से ऐसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं, तो इससे विरासत संरक्षण के प्रति समाज में नई जागरूकता और सम्मान की भावना भी विकसित होती है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ एपिसोड इस बात का सशक्त उदाहरण है कि नया भारत अपनी प्रतिभा, परिश्रम, खेल भावना, संस्कृति और विरासत - सभी को समान सम्मान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर जशपुर का युवा खिलाड़ी देश को नई गति देने का सपना देख रहा है और दूसरी ओर मल्हार की धरोहर भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कह रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह दोहरी उपलब्धि पूरे प्रदेश में आत्मगौरव, प्रेरणा और नई ऊर्जा का संचार करने वाली है। इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित  थे।

कल शराब खरीदने का नहीं मिलेगा मौका, जिले में ड्राई डे घोषित

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 गरियाबंद। त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव को शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जनपद पंचायत छुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत करकरा में सरपंच पद के उपचुनाव को देखते हुए संबंधित क्षेत्र में शुष्क दिवस (ड्राई डे) घोषित किया गया है।


कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी बी.एस. उइके ने जारी आदेश में खड़मा स्थित विदेशी कम्पोजिट मदिरा दुकान को मतदान समाप्ति से 48 घंटे पूर्व बंद रखने के निर्देश दिए हैं। आदेश के तहत निर्धारित अवधि में शराब की बिक्री, वितरण और परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

प्रशासन का कहना है कि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा मतदाताओं को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वातावरण उपलब्ध कराने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा क्षेत्र में अवैध शराब के संग्रहण, परिवहन और बिक्री पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी।

जिला प्रशासन ने आबकारी विभाग और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की अनियमितता या शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

 

गरियाबंद सर्किट हाउस में आग से हड़कंप, स्टोर रूम का सामान जलकर खाक

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 गरियाबंद। जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में आज रविवार सुबह अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। सुबह करीब 6:30 बजे परिसर से धुआं उठता देख कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने तत्काल फायर ब्रिगेड व प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी। देखते ही देखते आग ने स्टोर रूम को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां रखा लाखों रुपये मूल्य का सामान जलकर नष्ट हो गया।


सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही मिनटों में स्टोर रूम में रखा फ्रिज, अलमारी, सीलिंग फैन सहित अन्य उपयोगी सामग्री जलकर राख हो गई।

प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। घटना के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी मौके पर पहुंचे और नुकसान का आकलन करने के साथ तकनीकी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

गनीमत रही कि घटना के समय सर्किट हाउस में ठहरे सभी लोग सुरक्षित थे और समय रहते बाहर निकल आए। आगजनी में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है।

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष लेकर मंगोलिया पहुंचा IAF का ‘गजराज’ विमान

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नई दिल्ली- भारतीय वायु सेना के IL-76 सामरिक एयरलिफ्ट विमान ‘गजराज’ ने 30 मई 2026 को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को दिल्ली से मंगोलिया पहुंचाया। विमान ने रातभर की उड़ान भरने के बाद भारतीय समयानुसार सुबह 11:25 बजे मंगोलिया में सफलतापूर्वक लैंडिंग की।

यह मिशन भारत के उन प्रयासों के समर्थन में संचालित किया गया, जिनका उद्देश्य मित्र देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।

यह एयरलिफ्ट मिशन राष्ट्रीय उद्देश्यों की पूर्ति में सहयोग करने तथा भारत की वैश्विक सांस्कृतिक पहुंच को बढ़ावा देने में भारतीय वायु सेना की क्षमता को दर्शाता है।


बदलती खेती में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी बन रहे किसानों की नई पसंद

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कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा का नया विकल्प : नैनो उर्वरक

वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ते कदम, नैनो उर्वरकों से किसानों को मिल रहा फायदा

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से खेती में बचत, उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा

रायपुर- खेती में बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच अब नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक उपयोगी और लोकप्रिय विकल्प बन गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपयोग करें तो इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बेहतर बनाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।


विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाए रखने के लिए उर्वरकों के उपयोग के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी होगा। यही कारण है कि अब किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को लेकर रुचि बढ़ रही है।

छत्तीसगढ़ सहित देश के अधिकांश धान उत्पादक क्षेत्रों में सामान्यतः प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है।

मौजूदा कीमतों के अनुसार एक बोरी यूरिया की कीमत लगभग 270 रुपये और एक बोरी डीएपी की कीमत लगभग 1350 रुपये है। इस प्रकार केवल यूरिया और डीएपी पर प्रति एकड़ करीब 1900 से 2200 रुपये तक खर्च हो जाता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव लगभग एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर माना जाता है। फसल में दो चरणों में छिड़काव के जरिए पारंपरिक यूरिया की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यदि किसान 2 बोरी ठोस यूरिया की जगह 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करते हैं तो अनुमानित खर्च 100 रुपये प्रति एकड़ बचत होती है। दो बोरी पारंपरिक यूरिया का मूल्य लगभग 540 रुपये है। इसके स्थान पर 2 बोतल नैनो यूरिया| लगभग 450-500 में आता है। यानि सीधे खाद लागत में बचत के साथ-साथ परिवहन, भंडारण और मजदूरी खर्च में भी कमी आती है।

इसी प्रकार कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि 50 किलो डीएपी की पूरी मात्रा उपयोग करने के बजाय यदि किसान 25 किलो डीएपी के साथ 500 मिली नैनो डीएपी का उपयोग करें तो प्रति एकड़ लगभग 75 से 150 रुपये तक की बचत होती है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पारंपरिक यूरिया का बड़ा हिस्सा मिट्टी, पानी और वातावरण में नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत नैनो यूरिया के सूक्ष्म कण सीधे पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं। इससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक संतुलित उपयोग की स्थिति में इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आए है।फसल की बढ़वार बेहतर होती है। पौधों की हरियाली लंबे समय तक बनी रहती है। दानों का भराव मजबूत होता है।उत्पादन की गुणवत्ता सुधरती है। उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। कई कृषि परीक्षणों में 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि के संकेत भी मिले हैं।

कृषि क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा रासायनिक अवशेष कम होते हैं।भूजल प्रदूषण घटता है।मिट्टी की जैविक सक्रियता बेहतर बनी रहती है।पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है।इसी कारण वैज्ञानिक खेती में अब संतुलित उर्वरक उपयोग पर अधिक जोर दिया जा रहा है ।

वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित रूप से नैनो उर्वरकों का उपयोग बढ़ाते हैं तोआयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी है।विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। देश में उर्वरक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। उत्पादन इकाइयों में रोजगार बढ़ेगा। कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा।

कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। रायपुर जिले की समितियों में वर्तमान मे यूरिया की उपलब्धता  9,102 मीट्रिक टन और कुल भंडारित यूरिया की मात्रा 10,732 मीट्रिक टन है, जब कि डीएपी की उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन और कुल भंडारित डीएपी की मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है। इसके साथ ही कृषि सेवा केंद्रों और समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है ताकि किसान आवश्यकता और उपयोगिता के आधार पर इन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों का समन्वय ही खेती को अधिक लाभकारी बनाएगा। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प माना जा रहा है, जो कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा तीनों मोर्चों पर किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

CG Rain Alert : छत्तीसगढ़ के 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट: तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी

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 CG Rain Alert : छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर ने प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार सुबह तक कई क्षेत्रों में तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।


मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है।

इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने धमतरी, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, जशपुर और रायगढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में मध्यम दर्जे के तूफान, तेज बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। इन क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है।

इन जिलों में येलो अलर्ट

बिलासपुर, कांकेर, नारायणपुर, बलरामपुर, सरगुजा, कोरबा, जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, महासमुंद और गरियाबंद जिलों में हल्के से मध्यम स्तर की बारिश, गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग की सलाह

मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग ने लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहने की सलाह दी है। इसके अलावा खुले मैदानों और खेतों में जाने से बचने, मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने तथा तेज आंधी के दौरान वाहनों को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले 24 घंटों तक मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है और कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

छत्तीसगढ़ में आंधी-तूफान का कहर: कोरबा में पेड़ की डाल गिरने से तीन दोस्तों की मौत

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कोरबा/बिलासपुर/रायगढ़। छत्तीसगढ़ में शनिवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी, तूफान और बारिश ने जहां भीषण गर्मी से राहत दिलाई, वहीं कई स्थानों पर भारी नुकसान भी पहुंचाया। कोरबा जिले में पेड़ की डाल गिरने से तीन किशोरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि बिलासपुर और रायगढ़ में बिजली व्यवस्था चरमरा गई तथा जनजीवन प्रभावित रहा।


पेड़ के नीचे खड़े तीन दोस्तों की मौत

कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र के चोरका दांड गांव में आंधी-तूफान के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, तेज बारिश और आंधी से बचने के लिए तीन युवक एक पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान पेड़ की एक भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतकों की पहचान शिवराम टेकाम (14 वर्ष), कमलेश बड़ा (18 वर्ष) और दिनेश तिर्की (17 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों आपस में घनिष्ठ मित्र थे और एक ही गांव के निवासी थे। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

सूचना मिलने पर पाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।

बिलासपुर में बारिश के साथ बिजली संकट

बिलासपुर में नवतपा की भीषण गर्मी के बीच हुई बारिश से लोगों को राहत मिली, लेकिन इसके साथ ही शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। बारिश शुरू होते ही कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बिजली गुल होने से विद्युत विभाग की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।

रायगढ़ में जलभराव, घंटों ठप रही बिजली

रायगढ़ में तेज आंधी और बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। वहीं आंधी के कारण विद्युत आपूर्ति भी बाधित हो गई और कई इलाकों में घंटों तक बिजली गुल रही।

शहर के सुभाष चौक में तेज हवा के चलते एक बड़ा होर्डिंग सड़क पर गिर गया। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन आसपास मौजूद लोग बाल-बाल बच गए।

मौसम विभाग ने जारी की सतर्कता की सलाह

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है। विभाग ने आंधी, तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताते हुए लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने तथा आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है।

 

कसौली में भीषण वनाग्नि पर भारतीय वायुसेना का सफल नियंत्रण, पहली बार रात में ‘बांबी बकेट’ अभियान संचालित

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भारतीय वायुसेना को 26 मई को कसौली के निकट जंगल में लगी आग की सूचना मिली, जिसके बाद स्थिति का आकलन करने के लिए तुरंत एक चीता हेलीकॉप्टर रवाना किया गया। इसके बाद नागरिक प्रशासन की सहायता के तहत भारतीय वायुसेना ने Mi-17 V5 मध्यम श्रेणी के हेलीकॉप्टरों को तैनात कर हिमाचल प्रदेश के कसौली क्षेत्र में लगी भीषण वनाग्नि पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पाया।

सोलन जिले के कसौली बीट क्षेत्र में फैली इस आग ने लगभग 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था। आग से रिहायशी इलाकों, महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे तथा सैन्य प्रतिष्ठानों को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।

भारतीय वायुसेना ने राज्य प्रशासन, वन विभाग, भारतीय सेना और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर समन्वित अभियान चलाया। आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टरों द्वारा लगातार ‘बांबी बकेट’ ऑपरेशन संचालित किए गए। इन अभियानों के लिए पानी सुखना झील से लिया गया, जहां प्रत्येक उड़ान में लगभग 2,000 से 2,500 लीटर पानी ले जाया गया।

दिन-रात लगातार चलाए गए इस हवाई अग्निशमन अभियान के दौरान प्रभावित क्षेत्र में 93,000 लीटर से अधिक पानी डाला गया। वायुसेना की त्वरित और समन्वित कार्रवाई ने आग को बड़े हादसे में बदलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारतीय वायुसेना ने पहली बार नाइट विज़न गॉगल्स (NVGs) की सहायता से रात के समय सफलतापूर्वक बांबी बकेट ऑपरेशन संचालित किए। पहाड़ी क्षेत्र और सीमित दृश्यता जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए इन अभियानों ने वायुसेना के पायलटों की उच्च स्तरीय उड़ान क्षमता, सटीकता और परिचालन दक्षता का प्रदर्शन किया।

रात्रिकालीन अग्निशमन अभियानों में मौजूद जोखिमों के बावजूद वायुसेना के वायुयोद्धाओं ने अपने साहस, पेशेवर कौशल और समर्पण के बल पर मिशन को सुरक्षित एवं प्रभावी ढंग से पूरा किया।

हवाई अभियानों के साथ-साथ ग्राउंड स्टाफ ने भी कठिन मौसम परिस्थितियों में निरंतर कार्य करते हुए हेलीकॉप्टरों की त्वरित सर्विसिंग और पुनः उड़ान सुनिश्चित की। उनकी मेहनत के कारण चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के अग्निशमन अभियान जारी रखा जा सका।

भारतीय वायुसेना की यह कार्रवाई आपदा प्रबंधन, त्वरित प्रतिक्रिया और नागरिक प्रशासन की सहायता में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।


लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का उद्घाटन, भारतीय नौसेना के शौर्य और बलिदान को समर्पित अनूठा संग्रहालय

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने 30 मई 2026 को लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित यह ओपन-एयर डिस्प्ले म्यूज़ियम भारतीय नौसेना के शौर्य, पराक्रम और गौरवशाली इतिहास को समर्पित है। इसमें 34 वर्षों तक सेवा देने के बाद 29 मई 2022 को सेवामुक्त हुए युद्धपोत आईएनएस गोमती के हथियारों, उपकरणों और विभिन्न कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नौसेना शौर्य वाटिका केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की वास्तविक कीमत का एहसास कराएगी। उन्होंने कहा कि यह वाटिका देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों के साहस और बलिदान की याद दिलाती रहेगी। यह केवल स्थापत्य कला का उदाहरण नहीं, बल्कि सैनिकों के प्रति कृतज्ञता की भावना को जागृत करने का माध्यम है और युवाओं में राष्ट्र निर्माण का उत्साह पैदा करेगी।

रक्षा मंत्री ने वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में समुद्री मार्गों की सुरक्षा को विश्व शांति और समृद्धि की कुंजी बताते हुए भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने भारतीय सेना और वायुसेना के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अरब सागर में नौसेना की मजबूत मौजूदगी ने विरोधी पक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया, जिसके कारण पाकिस्तान नौसेना अपने बंदरगाहों तक सीमित रही।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार एक मजबूत सेना और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के माध्यम से भारत को सुरक्षित एवं समृद्ध बनाने पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत तभी वास्तव में शक्तिशाली माना जाएगा जब उसकी सेनाएं हथियारों के लिए अन्य देशों पर निर्भर न रहें। इसी उद्देश्य से आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, रक्षा औद्योगिक गलियारा (Defence Industrial Corridor), iDEX और ADITI जैसी पहलें शुरू की गई हैं।

राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और जल्द ही 1.75 लाख करोड़ रुपये के नए रिकॉर्ड को छू सकता है। वहीं रक्षा निर्यात 2014 में एक हजार करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य के सैनिक जहां देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं रक्षा औद्योगिक गलियारा रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार, सड़क, राजमार्ग और हवाई अड्डों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा के कारण ही देशवासी चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं जब राष्ट्र सुरक्षित और सशक्त हो। उन्होंने सैनिकों के सम्मान और कल्याण को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य,बृजेश पाठक नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

नौसेना शौर्य वाटिका की विशेषताएँ

इस पार्क में आईएनएस गोमती पर लगे AK-726 नौसैनिक तोप, ZIF-101 मिसाइल लॉन्चर, सतह से हवा और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणालियाँ, रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, एंकर, जहाज के मस्तूल और अन्य उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा इसमें अब सेवा से बाहर हो चुके लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान TU-142M का वॉक-थ्रू संग्रहालय भी बनाया गया है। पार्क में फूड कोर्ट, स्मृति चिन्ह दुकान और आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

आईएनएस गोमती के बारे में

आईएनएस गोमती का नाम गोमती नदी के नाम पर रखा गया था। इसे 16 अप्रैल 1988 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह गोदावरी श्रेणी के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स का तीसरा युद्धपोत था और सेवामुक्ति के समय पश्चिमी बेड़े का सबसे वरिष्ठ युद्धपोत माना जाता था।

अपने 34 वर्षों के गौरवशाली सेवाकाल में आईएनएस गोमती ने ऑपरेशन कैक्टस,ऑपरेशन पराक्रम,ऑपरेशन रेनबो सहित अनेक महत्वपूर्ण अभियानों और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग लिया। राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए इसे 2007-08 और 2019-20 में प्रतिष्ठित यूनिट सिटेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति 2026’ का सफल समापन, 13 देशों की सेनाओं ने दिखाई सामूहिक क्षमता

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मेघालय के उमरोई मिलिट्री स्टेशन में आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति 2026’ (PRAGATI 2026) का पहला संस्करण 72 घंटे के वैलिडेशन अभ्यास के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अभ्यास ने भाग लेने वाले देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, विश्वास और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। समापन कार्यक्रम में छह उप-सेना प्रमुखों सहित 13 मित्र देशों के 40 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। भारतीय सेना के उप-सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सभी देशों के प्रतिनिधियों की मेजबानी की।

PRAGATI का पूरा नाम “Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region” है। इस अभ्यास में भारत सहित Bhutan, Cambodia, Malaysia, Maldives, Myanmar, Nepal, Philippines, Seychelles, Sri Lanka, Vietnam, Indonesia और Laos के 400 से अधिक सैनिकों ने भाग लिया। यह अभ्यास समानता, मित्रता और पारस्परिक सम्मान की भावना के साथ आयोजित किया गया, जिससे क्षेत्रीय साझेदारों को अनुभव साझा करने, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करने और सैन्य सहयोग मजबूत करने का अवसर मिला।

अभ्यास का मुख्य फोकस अर्ध-पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी अभियानों पर था। व्याख्यान, प्रदर्शन, व्यावहारिक प्रशिक्षण और विशेष कौशल अभ्यासों के बाद प्रतिभागियों ने 72 घंटे का वैलिडेशन अभ्यास किया, जिसमें प्रशिक्षण के परिणामों और सेनाओं के बीच विकसित परिचालन समन्वय का प्रदर्शन किया गया।

प्रशिक्षण में रॉक क्राफ्ट, एम्बुश एवं काउंटर-एम्बुश ड्रिल, स्लिथरिंग, जंगल लेन शूटिंग, कमरे और बस में हस्तक्षेप अभियान, आईईडी की पहचान, घायलों की निकासी तथा अन्य विशेष सैन्य कौशल शामिल थे। विभिन्न देशों के सैनिकों की मिश्रित टीमों ने एक साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिससे आपसी तालमेल, क्षमता निर्माण और विश्वास को बढ़ावा मिला।

अभ्यास की एक प्रमुख विशेषता प्रतिभागियों के बीच दिखाई दी सैनिक भाईचारे और सौहार्द की भावना रही। कठिन प्रशिक्षण परिस्थितियों में सभी सैनिकों ने मिलकर चुनौतियों का सामना किया, जिससे विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच साझा सैनिक भावना और मजबूत हुई। इस दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अनौपचारिक संवाद के अवसर भी मिले, जिससे पेशेवर और व्यक्तिगत संबंध और मजबूत हुए।

अभ्यास के दौरान भारतीय सेना ने Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry के सहयोग से सहभागी देशों के लिए रक्षा उपकरणों की प्रदर्शनी भी आयोजित की। भारतीय सेना के आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो और फिक्की ने भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा विकसित अत्याधुनिक स्वदेशी रक्षा उपकरणों और तकनीकों का प्रदर्शन कराया, जबकि भारतीय सेना ने अपनी सेवा में शामिल नई पीढ़ी के उपकरणों का भी प्रदर्शन किया।

यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा डिजाइन, विकास और विनिर्माण क्षमता को प्रदर्शित करने के साथ-साथ रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच बनी। प्रदर्शनी ने उद्योग सहयोग, ज्ञान साझाकरण और रक्षा क्षेत्र में नए अवसरों को भी प्रोत्साहित किया।

अभ्यास के दौरान उप-सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सहभागी देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में रक्षा सहयोग को और मजबूत करने, आपसी समझ बढ़ाने और सैन्य संबंधों को गहरा करने पर चर्चा हुई।

अभ्यास प्रगति 2026 ने सहभागी देशों के बीच परिचालन क्षमता, सामूहिक तैयारी और आपसी विश्वास को नई मजबूती प्रदान की है। इस प्रथम संस्करण ने शांतिपूर्ण, समृद्ध और सुरक्षित क्षेत्र के लिए प्रतिबद्ध समान विचारधारा वाले देशों के बीच भविष्य के सहयोग की मजबूत नींव रखी है तथा आने वाले वर्षों में इस अभ्यास के और व्यापक स्वरूप में आयोजित होने का मार्ग प्रशस्त किया है।


खेत बचाओ अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान, 1 जून से शुरू होगा माहभर का अभियान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “खेत बचाओ अभियान” को केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांवों को जोड़ने वाला व्यापक राष्ट्रीय अभियान बनाने का संदेश दिया है। आज दिल्ली में अभियान की तैयारियों को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान का मुख्य फोकस उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग, मौसम संबंधी चुनौतियों के अनुसार किसानों को समय पर सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी तथा सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे गांवों तक पहुंचाने पर रहेगा।

1 जून से शुरू होने वाले इस एक माह के अभियान को प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को खेतों की सुरक्षा, लागत में संतुलन तथा किसानों को सही समय पर उचित मार्गदर्शन देने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे (Top-Down) मॉडल पर नहीं चलेगा, बल्कि पंचायत, राज्य और केंद्र की साझेदारी से संचालित होगा।

बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य होगा। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों और अन्य कृषि आदानों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही, हरी खाद, जैविक एवं जैव-उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के जीवंत प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आने वाले दिनों में मौसम संबंधी चुनौतियों को देखते हुए किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी। उन्हें क्या करें और क्या न करें, उपयुक्त फसल चयन, फसल विविधीकरण तथा जल संकट या जोखिम की स्थिति में खेती के बारे में रचनात्मक सुझाव दिए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत स्तर पर परिस्थितियों के अनुरूप सही सलाह पहुंचाना होगा।

उन्होंने पंचायत स्तर पर अभियान की मजबूत नींव रखने पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि कृषि यंत्रीकरण उपकरणों के वितरण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभों को भी इस अभियान के अंतर्गत पंचायत स्तर तक पहुंचाया जाए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल विभागीय दायरे तक सीमित नहीं रहेगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सहयोग का आग्रह किया जाएगा तथा मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि यह प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनभागीदारी का सशक्त मॉडल बन सके।

बैठक में बताया गया कि कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) को अभियान में भाग लेने वाली सभी संस्थाओं के प्रमुख समन्वयक की भूमिका सौंपी गई है। अभियान के लिए 1600 से अधिक टीमों का गठन किया गया है। उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें कृषि विज्ञान केंद्रों, Indian Council of Agricultural Research के संस्थानों, एआईसीआरपी केंद्रों तथा कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा आईसीएआर संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों की 1150 से अधिक बहु-विषयक टीमें भी समानांतर रूप से कार्य करेंगी।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभियान केवल उर्वरक प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी खेत तक पहुंचाया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड, PM-KISAN, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम मिशन, कपास मिशन, संतुलित पोषण, मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण तथा क्षेत्र-विशिष्ट कृषि सलाह जैसी गतिविधियों को एकीकृत कर अभियान को बहुउद्देशीय और प्रभावी बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता की कुंजी यह है कि इसका संदेश व्यावहारिक हो, जमीनी स्तर पर दिखाई दे और स्थानीय संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। अभियान के मूल बिंदु हैं—उर्वरकों का संतुलित एवं कम उपयोग, मौसम के अनुसार खेती की सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रियता, कृषि यंत्रों एवं योजनाओं का लाभ तथा जनप्रतिनिधियों की सहभागिता। अभियान की स्पष्ट दिशा है—खेत बचाना, लागत नियंत्रित करना, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना, किसानों को जागरूक बनाना और गांव स्तर पर कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित करना।

पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी, समाज को दिशा देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर परिश्रम करते हुए सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाते हैं और समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मीडिया की सकारात्मक आलोचना केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि प्रशासन और सरकार को भी आत्ममंथन और बेहतर कार्य की दिशा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर परिसर के सुंदर सदन में आयोजित पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि माता कौशल्या की धरती और भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा पर आधारित ऐसा अद्भुत आयोजन निश्चित रूप से अभिनंदनीय है। उन्होंने आयोजन के लिए रायपुर प्रेस क्लब को बधाई देते हुए कहा कि रायपुर प्रेस क्लब देश के पुराने और प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में से एक है, जिसका इतिहास समृद्ध और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और पत्रकारों के सम्मान में आयोजित ऐसे कार्यक्रम प्रेस क्लब की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का सशक्त प्रमाण हैं।


मुख्यमंत्री  साय ने रायपुर की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शहर ने पत्रकारिता जगत को अनेक शिखर पुरुष दिए हैं। उन्होंने मधुकर खेर, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, रमेश नैय्यर और बबन प्रसाद मिश्र सहित अनेक प्रतिष्ठित संपादकों और पत्रकारों का स्मरण करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने पत्रकारिता की सशक्त और वैचारिक परंपरा को समृद्ध किया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की आधारशिला है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तक पत्रकारिता ने हमेशा परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को कोलकाता से श्री जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित देश के प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड ने भारतीय पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी। हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवर्षि नारद को आदि पत्रकार माना जाता है और इसी कारण पत्रकार बंधु नारद जयंती को सम्मानपूर्वक मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत रोचक और प्रेरक तथ्य है कि उदंत मार्तंड का प्रकाशन भी नारद जयंती के दिन आरंभ हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें हमारी सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता ने राष्ट्रवादी चेतना को स्वर देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, माधवराव सप्रे और सुभाषचंद्र बोस सहित अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पत्रकारिता को सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम के रूप में उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास लिखा जाएगा, तब छत्तीसगढ़ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा। 

उन्होंने मां भारती के सपूत माधवराव सप्रे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ मित्र का संपादन कर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को जागृत और संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पत्रकारिता की चर्चा जब भी होगी, तब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण स्वाभाविक रूप से होगा। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना की जो अलख जगाई, उसने स्वतंत्र भारत में लाखों लोगों को प्रेरित किया। स्वदेश और राष्ट्रधर्म जैसे प्रकाशनों ने राष्ट्र चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मोदी की गारंटियों को धरातल पर उतारने का कार्य किया है और प्रदेश की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विशेष रूप से नक्सलवाद उन्मूलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा जनसहभागिता के साथ-साथ पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रदेश में शांति और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और भटकाव के रास्ते पर जाने वाले लोगों को शांति, विकास और मुख्यधारा की ओर प्रेरित करने में पत्रकारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज जब मीडिया बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव, विकास, पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और बढ़ती संभावनाओं की खबरें सामने लाता है, तब देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनती है। जो बस्तर कभी बंदूक और हिंसा की खबरों से पहचाना जाता था, आज वही बस्तर पर्यटन, प्रकृति और विकास की नई संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा अत्यंत गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि 1826 में जब उदंत मार्तंड की शुरुआत हुई, तब देश अंग्रेजी शासन के कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में पत्रकारिता ने अंधकार को सामने लाने के साथ समाज को उजाले की दिशा दिखाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म समाज और राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करना है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडिया हैबिटेट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. के.जी. सुरेश ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत तक पत्रकारिता ने राष्ट्रधर्म और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने समय के साथ बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है, किंतु सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और नागरिक पत्रकारिता की अवधारणा ने कई नई चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को शोधपरक, तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित बनाए रखना समय की आवश्यकता है, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और सामाजिक भूमिका और मजबूत हो सके।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित नवप्रदेश के विशेष अंक, रायपुर प्रेस क्लब की पत्रकार डायरेक्टरी तथा श्री दिनेश यदु की पुस्तक 'मैं अगहन हूं' का विमोचन भी किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार  कृष्णा दास, विधायक  पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष  राजीव अग्रवाल, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, राम मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष  सुनील रामदास, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष  मोहन तिवारी, प्रेस क्लब के पदाधिकारीगण, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

श्मशान घाट में बिखरे मिले मानव कंकाल और खोपड़ियां, दुर्ग में मचा हड़कंप

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 दुर्ग। शहर के रायपुर नाका स्थित श्मशान घाट में मानव खोपड़ियां, हड्डियां और कंकाल खुले में बिखरे मिलने से सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही स्मृति नगर चौकी पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। श्मशान परिसर में एक प्लास्टिक की थैली में बंधा मानव कंकाल मिलने से मामला और भी रहस्यमय हो गया है।


स्थानीय लोगों ने बताया कि श्मशान घाट के अलग-अलग हिस्सों में मानव अवशेष बिखरे पड़े थे। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया, जबकि एफएसएल टीम ने तीन अलग-अलग कब्रों से मिले अवशेषों के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे हैं।

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने आशंका जताई है कि किसी असामाजिक तत्व द्वारा कब्रों के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है या फिर जंगली जानवरों ने अवशेषों को बाहर निकाला हो। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। एफएसएल रिपोर्ट मिलने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

आत्मानंद स्कूलों की संविदा भर्ती पर रोक, अब केंद्रीकृत परीक्षा से होगा चयन

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 रायपुर, 30 मई। छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में चल रही संविदा भर्ती प्रक्रिया पर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जारी आदेश के अनुसार अब शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय पदों पर भर्ती केंद्रीकृत परीक्षा के माध्यम से की जाएगी।


डीपीआई ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि आगे से भर्ती प्रक्रिया का संचालन संचालनालय स्तर पर किया जाएगा। केंद्रीकृत परीक्षा आयोजित करने के बाद चयन सूची तैयार कर संबंधित जिलों को भेजी जाएगी। इसके चलते जिलास्तर पर संचालित की जा रही भर्ती प्रक्रिया फिलहाल स्थगित रहेगी।


सूत्रों के अनुसार, जिलेवार भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और पारदर्शिता को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को एकीकृत और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।

डीपीआई के इस आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। कई अभ्यर्थी लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे थे। अब उनकी निगाहें संचालनालय द्वारा जारी किए जाने वाले नए परीक्षा कार्यक्रम और भर्ती कैलेंडर पर टिकी हैं।

शिक्षा विभाग की ओर से संकेत मिले हैं कि जल्द ही केंद्रीकृत परीक्षा की रूपरेखा और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

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