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राजनांदगांव जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल से मचा हड़कंप, हाई अलर्ट

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 राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला न्यायालय को आज सुबह बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। यह धमकी न्यायालय की शासकीय ई-मेल आईडी पर भेजी गई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड पर आ गईं।


धमकी मिलते ही पुलिस ने एहतियातन पूरे न्यायालय परिसर को खाली करा दिया। वकीलों, न्यायालय कर्मचारियों और आम नागरिकों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। बम स्क्वॉड और अन्य सुरक्षा एजेंसियां न्यायालय परिसर में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए हैं। फिलहाल धमकी भेजने वाले की पहचान और ई-मेल की तकनीकी जांच जारी है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

कोयला खदान की ‘लापरवाही’ से गई जान, दीपका ब्लास्टिंग कांड के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

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 कोरबा। एसईसीएल की दीपका खदान में हुई भारी ब्लास्टिंग ने एक ग्रामीण की जान ले ली, जिसके बाद पूरे इलाके में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। हादसे के विरोध में ग्रामीणों ने करीब 7 घंटे तक आंदोलन किया, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। देर रात लगभग 11 बजे प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।


जानकारी के अनुसार, ब्लास्टिंग के दौरान उड़े पत्थर की चपेट में आने से रेकी गांव निवासी लखन पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने मुआवजा और रोजगार की मांग को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

कटघोरा एसडीएम रोहित सिंह ने बताया कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई बातचीत के बाद मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को एसईसीएल की कलिंगा कंपनी में नौकरी देने पर सहमति बनी है। इसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।

वहीं, पटेल समाज के अध्यक्ष उत्तम पटेल ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि दीपका क्षेत्र में ऐसे कई परिवार हैं, जो खदानों की गतिविधियों से प्रभावित हुए हैं और वर्षों से मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से सभी लंबित मुआवजा मामलों के शीघ्र निराकरण की मांग की है।

जलवाष्प और एरोसोल की संयुक्त भूमिका से जलवायु परिवर्तन की नई समझ सामने आई

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नए शोध से यह सामने आया है कि एरोसोल (सूक्ष्म कण) और जलवाष्प (Water Vapour) की संयुक्त भूमिका जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और भविष्य के जलवायु अनुमानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अध्ययन के अनुसार, यदि जलवायु के प्रभावों और भविष्य की सटीक भविष्यवाणी करनी है, तो एरोसोल और जलवाष्प—दोनों को एक साथ ध्यान में रखना आवश्यक है, क्योंकि इनके आपसी अंतःक्रिया (इंटरैक्शन) क्षेत्रीय वायुमंडलीय गतिकी और भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून को गहराई से प्रभावित करती है।

एरोसोल और जलवाष्प के विकिरणीय प्रभाव (Radiative Effects) पृथ्वी के विकिरण संतुलन को समझने और उसका पूर्वानुमान लगाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ये प्रभाव यह स्पष्ट करते हैं कि किस प्रकार एरोसोल, जलवाष्पीय बादल और ग्रीनहाउस गैसें सूर्य से आने वाले विकिरण और पृथ्वी से बाहर जाने वाले तापीय विकिरण को अवशोषित एवं प्रकीर्णित (Scattering) करती हैं, जिससे वैश्विक तापमान, मौसम प्रतिरूप और जलवायु स्थिरता प्रभावित होती है।

इंडो-गंगा मैदानी क्षेत्र: एरोसोल का वैश्विक हॉटस्पॉट

इंडो-गंगा मैदानी क्षेत्र (IGP) को एरोसोल लोडिंग का एक वैश्विक हॉटस्पॉट माना जाता है। यहां एरोसोल और जलवाष्प की मात्रा में स्थानिक और कालिक (Spatio-Temporal) रूप से अत्यधिक परिवर्तनशीलता पाई जाती है, जिससे इनके जलवायु प्रभावों का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित हो जाता है। इस क्षेत्र की जलवायु गतिकी पर वायुमंडलीय संरचना में होने वाले परिवर्तनों के प्रभावों को समझने के लिए एरोसोल लोडिंग और जलवाष्प विकिरणीय प्रभाव (WVRE) के संबंध का विश्लेषण आवश्यक है।

DST संस्थानों द्वारा किया गया व्यापक अध्ययन

यह अध्ययन आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्ज़र्वेशनल साइंसेज़ (ARIES), नैनीताल और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिज़िक्स (IIA), बेंगलुरु—जो दोनों ही भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान हैं—द्वारा किया गया। इस शोध में ग्रीस के यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न मैसेडोनिया और जापान की सोका यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया।

शोध का नेतृत्व डॉ. उमेश चंद्र दुमका (ARIES) और डॉ. शांतकुमार एस. निंगोम्बम (IIA) ने किया। शोधकर्ताओं ने IGP क्षेत्र में स्थित छह AERONET (एरोसोल रोबोटिक नेटवर्क) स्थलों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया और SBDART रेडिएटिव ट्रांसफर मॉडल के माध्यम से वायुमंडलीय विकिरणीय सिमुलेशन किए।

एरोसोल के गुणधर्मों और वर्षणीय जलवाष्प (प्रेसिपिटेबल वाटर वेपर) की जलवायुगत स्थिति (क्लाइमेटोलॉजी)।

मुख्य निष्कर्ष

अध्ययन में यह पाया गया कि:

  • जलवाष्प वायुमंडलीय ताप को एरोसोल की तुलना में अधिक प्रभावित करता है।

  • जलवाष्प के विकिरणीय प्रभाव एरोसोल की उपस्थिति से गहराई से प्रभावित होते हैं।

  • एरोसोल-जलवाष्प अंतःक्रिया वायुमंडल के विकिरण बजट को महत्वपूर्ण रूप से नियंत्रित करती है।

  • एरोसोल-मुक्त वातावरण में जलवाष्प का विकिरणीय प्रभाव अधिक तीव्र होता है, जबकि एरोसोल की उपस्थिति में यह प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो जाता है।

  • स्वच्छ वायुमंडल में पृथ्वी की सतह और वायुमंडल—दोनों पर ये प्रभाव अधिक स्पष्ट होते हैं।

  • एरोसोल की मौजूदगी में जलवाष्प का प्रभाव वायुमंडल के ऊपरी हिस्से (Top of the Atmosphere) पर अधिक प्रमुख हो जाता है।

जलवायु पर व्यापक प्रभाव

अध्ययन यह भी दर्शाता है कि जलवाष्प वायुमंडल को एरोसोल की तुलना में कहीं अधिक गर्म करता है, जिससे इंडो-गंगा मैदानी क्षेत्र की जलवायु को आकार देने में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। परिणाम यह भी दिखाते हैं कि ये प्रभाव सूर्य की स्थिति और एरोसोल अवशोषण से जुड़े वायुमंडलीय कारकों पर अत्यधिक निर्भर करते हैं।

यह शोध Atmospheric Research जर्नल में प्रकाशित हुआ है और यह स्पष्ट करता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने के लिए एरोसोल और जलवाष्प—दोनों की संयुक्त भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता।


ठंडे परमाणुओं की रियल-टाइम और गैर-विनाशकारी माप के लिए नई तकनीक विकसित

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वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से ठंडे परमाणुओं (Cold Atoms) की स्थानीय घनत्व (Local Density) को वास्तविक समय (Real Time) में मापा जा सकता है, वह भी बिना उन्हें उल्लेखनीय रूप से प्रभावित किए। यह उपलब्धि क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम सेंसिंग जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां परमाणुओं और उनकी क्वांटम अवस्था की सटीक और त्वरित पहचान अनिवार्य होती है।

RDSNS एक गैर-आक्रामक (नॉन-इनवेसिव) मापन तकनीक है, जो हमें परमाणु बादल को उच्च समयिक और स्थानिक विभेदन (हाई टेम्पोरल व स्पैशियल रेज़ोल्यूशन) के साथ जांचने में सक्षम बनाती है।

परंपरागत कोल्ड एटम प्रयोगों में, लेज़र कूलिंग और ट्रैपिंग तकनीकों के माध्यम से परमाणुओं की गतिज ऊर्जा को लगभग परम शून्य तापमान तक कम किया जाता है। इस अवस्था में परमाणुओं के क्वांटम गुण अधिक स्पष्ट रूप से सामने आते हैं और इन्हें क्वांटम कंप्यूटर व क्वांटम सेंसर्स के संसाधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

हालांकि, इन परमाणुओं की क्वांटम अवस्था को मापने के लिए प्रचलित एब्जॉर्प्शन इमेजिंग और फ्लोरेसेंस इमेजिंग जैसी तकनीकों की अपनी सीमाएं हैं। घने परमाणु बादलों में एब्जॉर्प्शन इमेजिंग प्रभावी नहीं होती, जबकि फ्लोरेसेंस इमेजिंग में अधिक समय लगता है और दोनों ही विधियां अक्सर परमाणुओं की अवस्था को प्रभावित कर देती हैं।

RDSNS तकनीक से मिली बड़ी सफलता

इन्हीं चुनौतियों का समाधान करते हुए, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI)—जो कि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का एक स्वायत्त संस्थान है—के वैज्ञानिकों ने रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (RDSNS) नामक एक नवीन तकनीक का प्रदर्शन किया है।

यह तकनीक स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी पर आधारित है, जिसमें परमाणुओं के स्पिन में होने वाले प्राकृतिक उतार-चढ़ाव को लेज़र प्रकाश के ध्रुवीकरण में आने वाले सूक्ष्म बदलावों के माध्यम से मापा जाता है। इसके साथ ही दो अतिरिक्त लेज़र बीम्स का उपयोग कर परमाणुओं को दो समीपवर्ती स्पिन अवस्थाओं के बीच कोहेरेंट रूप से संचालित किया जाता है।

इन रमन बीम्स के कारण संकेत (सिग्नल) में लगभग दस लाख गुना तक वृद्धि होती है। इस तकनीक में जांच का क्षेत्र मात्र 0.01 घन मिलीमीटर का होता है, जिसे 38 माइक्रोमीटर तक फोकस किए गए प्रोब लेज़र से हासिल किया गया। यह परमाणु बादल के एक अत्यंत छोटे हिस्से में मौजूद लगभग 10,000 परमाणुओं की सटीक स्थानीय घनत्व जानकारी प्रदान करता है, न कि केवल कुल परमाणु संख्या।

प्रयोग और परिणाम

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक का उपयोग मैग्नेटो-ऑप्टिकल ट्रैप (MOT) में पोटैशियम परमाणुओं के अध्ययन के लिए किया। उन्होंने पाया कि परमाणु बादल का केंद्रीय घनत्व मात्र एक सेकंड में संतृप्त हो गया, जबकि फ्लोरेसेंस माप के अनुसार कुल परमाणु संख्या को स्थिर होने में लगभग दोगुना समय लगा।

यह अंतर दर्शाता है कि जहां फ्लोरेसेंस तकनीक वैश्विक परमाणु संख्या बताती है, वहीं RDSNS स्थानीय स्तर पर यह दिखाती है कि परमाणु कितनी सघनता से पैक हुए हैं।

QuMIX लैब की रिसर्च असिस्टेंट्स बर्नाडेट वर्षा एफ.जे. और भाग्यश्री दीपक बिडवाई के अनुसार,

“यह तकनीक गैर-विनाशकारी है, क्योंकि प्रोब लेज़र बहुत कम शक्ति पर और फ्रीक्वेंसी से काफी दूर संचालित होती है। माइक्रोसेकंड स्तर की माप में भी कुछ प्रतिशत की सटीकता हासिल की जा सकती है।”

अध्ययन की प्रमुख लेखिका और RRI की पीएचडी शोधार्थी सायरी ने कहा,

“रियल-टाइम और गैर-विनाशकारी इमेजिंग क्वांटम सेंसिंग और कंप्यूटिंग के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह सूक्ष्म घनत्व उतार-चढ़ाव को पकड़कर कई-कणीय (Many-body) गतिकी को उजागर करती है।”

क्वांटम तकनीकों के लिए व्यापक महत्व

RDSNS की वैधता जांचने के लिए, टीम ने इसके परिणामों की तुलना फ्लोरेसेंस इमेजिंग पर आधारित इनवर्स एबेल ट्रांसफॉर्म से की, जिसमें दोनों विधियों के बीच उल्लेखनीय समानता पाई गई। खास बात यह है कि जहां एबेल ट्रांसफॉर्म को अक्षीय सममिति की आवश्यकता होती है, वहीं RDSNS असममित और गतिशील परमाणु बादलों में भी प्रभावी ढंग से काम करती है।

इस तकनीक का महत्व ग्रैविमीटर, मैग्नेटोमीटर और अन्य उच्च-सटीकता वाले क्वांटम सेंसर्स के लिए अत्यधिक है, जहां परमाणु घनत्व की सटीक जानकारी आवश्यक होती है। माइक्रॉन स्तर पर बिना किसी हस्तक्षेप के माप संभव होने से डेंसिटी वेव प्रोपेगेशन, क्वांटम ट्रांसपोर्ट और नॉन-इक्विलिब्रियम डायनेमिक्स जैसे विषयों के अध्ययन के नए रास्ते खुलते हैं।

QuMIX लैब के प्रमुख प्रो. सप्तऋषि चौधुरी ने कहा,

“हमें उम्मीद है कि यह तकनीक कोल्ड एटम प्रयोगों में रियल-टाइम डायग्नॉस्टिक्स के लिए व्यापक रूप से उपयोगी होगी, विशेष रूप से न्यूट्रल एटम आधारित क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम सिमुलेशन के क्षेत्र में।”

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत समर्थन

भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत समर्थित यह शोध RRI को क्वांटम मापन और सटीकता के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों की पंक्ति में खड़ा करता है। यह खोज इस बात को भी रेखांकित करती है कि वैज्ञानिक प्रगति हमेशा अधिक तीव्रता से देखने से नहीं, बल्कि अधिक कोमल और बुद्धिमत्तापूर्ण तरीकों से देखने से संभव होती है।


सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ, प्रधानमंत्री मोदी ने किया राष्ट्र को संबोधित

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के शुभारंभ पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास को स्मरण करते हुए कहा कि यह पर्व भारत की उस अमर सभ्यतागत चेतना का प्रतीक है, जिसने हजार वर्षों से अधिक समय तक हर आक्रमण और संकट के बावजूद अपनी आस्था और संस्कारों को जीवित रखा।


प्रधानमंत्री ने कहा कि जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर पहला आक्रमण हुआ था। इसके बाद सदियों तक कई हमले हुए, लेकिन न तो करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था डगमगाई और न ही भारत की सांस्कृतिक आत्मा टूटी। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण भारत की अडिग इच्छाशक्ति और सभ्यतागत संकल्प का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,

“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व उन असंख्य भारत माता के सपूतों को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय चाहे कितना भी कठिन क्यों न रहा हो, उनका संकल्प अडिग और हमारी संस्कृति के प्रति निष्ठा अटूट रही।”

प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सोमनाथ के अपने पूर्व दौरों की तस्वीरें साझा करते हुए नागरिकों से भी #SomnathSwabhimanParv हैशटैग के साथ अपनी स्मृतियां साझा करने का आह्वान किया।

उन्होंने 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित ऐतिहासिक कार्यक्रम को भी याद किया, जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया था। गौरतलब है कि 1951 में मंदिर का पुनर्प्रतिष्ठा समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में संपन्न हुआ था। इस पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी और अन्य महान विभूतियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

2001 के उस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह वर्ष सरदार पटेल की 125वीं जयंती का भी प्रतीक था।

आगे की ओर देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2026 में सोमनाथ मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा समारोह के 75 वर्ष पूरे होंगे। उन्होंने इसे केवल एक मंदिर के पुनर्निर्माण की वर्षगांठ नहीं, बल्कि भारत की उस अमर सभ्यतागत शक्ति का उत्सव बताया, जो पीढ़ी दर पीढ़ी देशवासियों को प्रेरणा देती रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व राष्ट्र की एकता, सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।

“जय सोमनाथ!”



एम्बुलेंस बनी गांजा तस्करी की ढाल! महासमुंद में 520 किलो गांजा जब्त, तीन तस्कर गिरफ्तार

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 महासमुंद। तस्करों ने अब कानून से बचने के लिए एम्बुलेंस को भी गांजा तस्करी का जरिया बना लिया है। महासमुंद जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एम्बुलेंस से 520 किलो गांजा जब्त किया है, जिसकी बाजार कीमत करीब 2 करोड़ 60 लाख रुपये आंकी गई है।


जानकारी के मुताबिक आरोपी ओडिशा के भवानीपटना से गांजा लेकर महाराष्ट्र के नागपुर जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने टेमरी चेक पोस्ट पर एम्बुलेंस को रोककर तलाशी ली, जहां से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।

इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपी महाराष्ट्र के निवासी बताए जा रहे हैं। कोमाखान थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

BIG NEWS : महादेव ऑनलाइन बुक मामले में ED की अब तक की सबसे बड़ी कुर्की

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 रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) और Skyexchange.com से जुड़े अवैध सट्टेबाजी संचालन के मामले में 91.82 करोड़ रुपये (लगभग) की चल-अचल संपत्तियों को अटैच करते हुए प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी किया है।


इस कार्रवाई के तहत ED ने मिस परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और M/s Exim General Trading–GZCO के नाम पर रखे गए 74,28,87,483 रुपये के बैंक बैलेंस को अटैच किया है। जांच एजेंसी के अनुसार ये संस्थाएं सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया से जुड़ी हैं, जिनका उपयोग अपराध की कमाई (Proceeds of Crime – PoC) को वैध निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया गया।

इसके अलावा Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता और उनके परिजनों के नाम पर दर्ज 17.5 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अटैच की गई हैं। इनमें महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स शामिल हैं, जिन्हें नकद में अर्जित अवैध धन से खरीदा गया था।

 जांच में बड़े खुलासे

ED की जांच में सामने आया है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com जैसे अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स ने भारी मात्रा में PoC अर्जित किया, जिसे बेनामी बैंक खातों, फर्जी/चोरी किए गए KYC, और लेयरिंग के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग किया गया।

महादेव ऑनलाइन बुक एप को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया था, जो कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स को ग्राहक जुटाने और वित्तीय लेनदेन संचालित करने की सुविधा देता था। जांच में यह भी सामने आया कि वेबसाइटों को इस तरह से हेरफेर किया गया था कि अंततः सभी ग्राहकों को नुकसान हो।

 हवाला, क्रिप्टो और FPI के जरिए पैसा बाहर

ED के मुताबिक, अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो-एसेट्स के जरिए विदेश भेजा गया और बाद में उसे विदेशी FPIs के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया गया।

जांच में एक जटिल “कैशबैक स्कीम” का भी खुलासा हुआ है, जिसमें FPI कंपनियां भारतीय लिस्टेड कंपनियों में निवेश करती थीं और बदले में कंपनी प्रमोटरों को 30% से 40% तक की रकम नकद में लौटाई जाती थी।
ED ने गगन गुप्ता को Salasar Techno Engineering Ltd. और Tiger Logistics Ltd. से जुड़े ऐसे ट्रांजैक्शनों में कम से कम 98 करोड़ रुपये (PoC) का लाभार्थी पाया है।

 अब तक की कार्रवाई

  • 175+ स्थानों पर तलाशी
  • लगभग 2,600 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त/फ्रीज/अटैच
  • 13 गिरफ्तारियां
  • 5 प्रॉसिक्यूशन शिकायतें
  • 74 कंपनियां आरोपी

बस्तर अब बदल रहा है — शांति, विश्वास और विकास की ओर तेज़ी से बढ़ता नया बस्तर : मुख्यमंत्री साय

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बस्तर में अब डर नहीं, बल्कि भरोसे की आवाज़ गूंज रही है : मुख्यमंत्री

सुकमा में ₹64 लाख के इनामी 26 हार्डकोर माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए किया आत्मसमर्पण

रायपुर- बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। सुकमा जिले में ₹64 लाख के इनामी 26 हार्डकोर माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 7 महिलाएँ भी शामिल हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह केवल सुरक्षा मोर्चे पर उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवीय विश्वास और संवाद की जीत है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के स्पष्ट संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में लागू संतुलित सुरक्षा रणनीति और संवेदनशील पुनर्वास नीति का प्रत्यक्ष परिणाम अब दिखाई दे रहा है। “पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान ने उन युवाओं के जीवन में नई आशा जगाई है, जो कभी नक्सलवाद के भ्रम जाल में भटक गए थे।

लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविर, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और सुदूर अंचलों तक शासन की सीधी पहुँच ने बस्तर की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। आज बस्तर में डर नहीं, बल्कि विश्वास की आवाज़ गूंज रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंसा का मार्ग त्यागने वालों के लिए सरकार के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। 

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि नक्सल समस्या का स्थायी समाधान सुरक्षा, विकास और विश्वास की त्रयी में निहित है। मुख्यमंत्री ने शेष माओवादी साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि वे शांति, परिवार और प्रगति का रास्ता चुनें। राज्य सरकार उनकी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में पूरा सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर आज शांति की दिशा में निर्णायक क़दम बढ़ा चुका है और हर आत्मसमर्पण के साथ नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प और अधिक मज़बूत हो रहा है।

राजिम त्रिवेणी संगम में आयोजित भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

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साहू समाज का सामूहिक विवाह कार्यक्रम सामाजिक उत्थान की मिसाल —मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव में हुए शामिल

रायपुर- राजिम भक्तिन माता एवं माता कर्मा के बताए संदेश मानव समाज के लिए कल्याणकारी है, हमें उनके संदेशों का अनुसरण करना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव  साय ने आज राजिम के त्रिवेणी संगम में आयोजित भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने भगवान राजीव लोचन एवं भक्त माता राजिम की पूजा अर्चना कर प्रदेश और समाज की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने साहू सृजन पत्रिका का विमोचन किया। साहू समाज द्वारा मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर स्वागत किया। 



मुख्यमंत्री साय ने राजिम माता भक्ति जयंती की बधाई देते हुए कहा कि साहू समाज समृद्ध और शिक्षित समाज है जो हर दृष्टिकोण से समृद्ध रहा है। साहू समाज का इतिहास भी समृद्ध रहा है। हम सबको दानवीर भामाशाह,बाबा सत्यनारायण जी का आशीर्वाद मिल रहा है। यह समाज निरंतर विकास करें। यही कामना है। जब समाज एक जुट होगा तो केवल समाज ही नहीं प्रदेश और देश भी शक्तिशाली और समृद्ध बनता है। 

मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज के सामूहिक विवाह को अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि राजिम माता ने जिस साहू समाज को अपनी मेहनत और त्याग से संगठित किया, आज वह समाज शिक्षा, कृषि व व्यवसाय सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राजिम माता के आशीर्वाद से हर गारंटी को पूरा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ खनिज, वन, उर्वरा से भरपूर है। अब नक्सलवाद से जवान पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। हम सबका संकल्प है कि 31 मार्च तक बस्तर को नक्सल मुक्त कर देंगे। राज्य के विकास में बाधक नक्सलवाद अब खत्मा की ओर है। राज्य को हम सब समृद्धि की दिशा में लेकर जाएंगे। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज सिरकट्टी आश्रम में भव्य राम जानकी मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना की गई। इस पुण्य अवसर पर हमें शामिल होने का सौभाग्य मिला। जैसे अयोध्या धाम में धर्म ध्वजा स्थापना किए हैं, उसी तर्ज पर यहां कुटेना में भी धर्म ध्वजा स्थापित किया गया है। मेरा सौभाग्य है कि एक साल पहले भी इस अवसर पर शामिल होने का अवसर मिला था। 

उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने कहा कि साहू समाज एक संगठित समाज के रूप में जाना जाता है। आज हम सभी राजिम माता की जयंती मनाने आये हैं। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी संगम के इस पावन धरती से प्रेरणा लेकर जाएंगे और मिलकर समाज के विकास के लिए काम करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि माता राजिम भक्तीन की महिमा का बखान करते हुए कहा कि राजिम त्याग, भूमि तपस्या, साधना और श्रम की भूमि है। भगवान को खिचड़ी खिलाने वाले समाज से हमारा समाज का नाता है। हम अपने पुरखों के योगदान को याद करके समाज को आगे ले जा सकते हैं। शिक्षा और संस्कार भी जरूरी है। 

इस अवसर पर साहू समाज के प्रतिनिधिगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बनेगा सिरकट्टी धाम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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जनसहभागिता से निर्मित भव्य श्रीरामजानकी मंदिर छत्तीसगढ़ की आस्था और एकजुटता का प्रतीक : मुख्यमंत्री साय

श्रीरामजानकी मंदिर के शिखर पर लहराई धर्मध्वजा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की समृद्धि की कामना की

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज गरियाबंद जिले के सिरकट्टी धाम आश्रम स्थित श्रीरामजानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की तथा मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर धर्मध्वजा की स्थापना की। उन्होंने आश्रम को सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताते हुए आश्रम परिसर में समरसता भवन के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद पूरे देश में जो आध्यात्मिक चेतना का वातावरण निर्मित हुआ है, उसी की अखंड धारा का विस्तार आज सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापना के रूप में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा देश ऋषि-मुनियों, साधु-संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की पवित्र भूमि है। हमें धर्म को केवल आस्था के रूप में नहीं, बल्कि कर्तव्य के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय यहीं व्यतीत किया। दंडकारण्य के रूप में विख्यात अबूझमाड़ का विशाल जंगल कभी नक्सल समस्या से प्रभावित क्षेत्र था, जो आज तेजी से नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 39 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की निशुल्क तीर्थयात्रा कराई जा चुकी है। मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा दर्शन योजना के अंतर्गत भी अब तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के पांच शक्तिपीठों के विकास का कार्य भी निरंतर प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव क्षेत्र के समग्र विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के तहत 148 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है तथा रतनपुर के विकास के लिए भी प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। उन्होंने कहा कि राजिम कल्प-कुंभ का आयोजन भी इस बार भव्य स्वरूप में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रीरामजानकी मंदिर का भव्य स्वरूप जनसहभागिता का अनुपम उदाहरण है। लगभग 22 हजार परिवारों के सहयोग से लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर बीते 10 वर्षों की तपस्या का परिणाम है। राजस्थान के शिल्पियों द्वारा पारंपरिक शैली में बिना सीमेंट और छड़ के उपयोग के निर्मित इस मंदिर की आयु लगभग एक हजार वर्ष आंकी गई है। उन्होंने मंदिर निर्माण में सहयोग करने वाले सभी दानदाताओं और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की आस्था और एकजुटता का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने धर्मध्वजा रोहण को ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल परंपरागत ध्वजारोहण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में धर्म, अध्यात्म और सामाजिक समरसता की स्थापना का प्रतीक है। 

केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि हम सभी के लिए सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा की स्थापना देखना अलौकिक अनुभव है। कार्यक्रम में सिरकट्टी आश्रम के महामंडलेश्वर महंत संत गोवर्धन शरण व्यास ने स्वागत उद्बोधन में सिरकट्टी आश्रम की स्थापना और महत्व पर जानकारी दी। 

इस अवसर पर सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक रोहित साहू, दीपेश साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, अनेक जनप्रतिनिधि, देश के विभिन्न स्थानों से आए संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।


सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए किए जा रहे जन-जागरूकता कार्यक्रम

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रायपुर- सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुक्रम में मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ शासन के मार्गदर्शन में अंतर्विभागीय लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा द्वारा पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत प्रतिदिन जन-जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। 

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप की ओर से लीड एजेंसी द्वारा जन जागरूकता संबंधी तैयार पोस्टर एवं फ्लैक्स जारी किया गया। इसी क्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा प्रदेश के समस्त सरपंचों एवं पंचगणों को पंचायत अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु आवश्यक पहल करने के लिए एक अपील जारी किया गया। सड़क सुरक्षा माह के प्रथम दिवस 01 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे, माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑफ रोड सेफ्टी की अध्यक्षता में बेमेतरा में हेलमेट रैली को हरी झण्डी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। इसी कड़ी में 03 जनवरी को दुर्ग में संभाग स्तरीय अधिकारियों, संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, सात जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, परिवहन, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, शिक्षा, आबकारी, स्वास्थ्य निर्माण एजेंसियों की बैठक तथा 05 जनवरी को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की उपस्थिति में संबंधित विभागीय सचिवों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं को रोकने कार्ययोजना के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देने के साथ ही विशेष रूप से सर्वाधिक दुर्घटनाओं वाले जिले रायपुर, बिलासपुर एवं दुर्ग के लिए समन्वित प्रयास से कार्ययोजना बनाया जाकर वर्ष 2026 के दौरान दुर्घटनाओं में कमी लाने के निर्देश दिये गये।

प्रदेश में वर्ष 2025 में गत वर्ष की तुलना में मृत्यु दर में यद्यपि कमी आई है। गत वर्ष की तुलना में यातायात नियमों के उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही में लगभग 45 प्रतिशत अधिक (लगभग 9 लाख प्रकरणों) की जाकर लगभग 39 करोड़ रूपये परिशमन शुल्क संकलित किये गये। साथ ही जन जागरुकता के कार्यों के फलस्वरूप अर्थात् लगभग 3 प्रतिशत मृत्यु दर में कमी परिलक्षित हुई है। प्रदेश के 20 जिलों में मृत्युदर में कमी हुई है। रायपुर सहित अन्य 13 जिलों में मृत्यु दर को कम करने कार्य किए जा रहे हैं। इस वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में न्यूनतम 10 प्रतिशत की कमी सहित दुर्घटना जन्य सड़क खण्डों में यथाशीघ्र सुधारात्मक उपायों एवं आकस्मिक उपचार हेतु त्वरित प्रतिक्रिया हेतु समुचित उपाय का लक्ष्य रखा गया है।

प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह 2026 के दौरान जन-जागरुकता के लिये यातायात पुलिस द्वारा प्रतिदिन पृथक-पृथक गतिविधियों के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं। इसी अनुक्रम में वाहन चालकों एवं यात्रीगणों को बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, मोबाइल में बात करते हुए या नशे का सेवन कर तथा तेज गति से वाहन चलाने वालों को समझाईश देकर यातायात के नियमों का पालन करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही यातायात नियमों के पालन करने वालों को सम्मानित करने का कार्य भी किया जा रहा है।

डॉ. मनसुख मंडाविया ने गोवा में दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का वर्चुअल उद्घाटन किया, श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा मामले एवं खेल मंत्री, डॉ. मनसुख मंडाविया, ने 7 जनवरी 2026 को गोवा में दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का वर्चुअल उद्घाटन किया।

यह सम्मेलन छह क्षेत्रीय सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला है, जिन्हें श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किया जाएगा। इन सम्मेलनों का उद्देश्य चार श्रम संहिताओं के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मंडाविया ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने राज्यों की सराहना की, जिन्होंने चार श्रम संहिताओं के प्रावधानों के अनुरूप अपने मौजूदा श्रम कानूनों में संशोधन करने का उत्साहपूर्वक प्रयास किया। यह सुधार 21 नवंबर 2025 से लागू हुए हैं और इसमें वार्षिक स्वास्थ्य जांच, जोखिमपूर्ण गतिविधियों में लगे श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य, और ग्रेच्युटी की पात्रता अवधि घटाकर एक वर्ष करना जैसी प्रगतिशील प्रावधान शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि आगे केंद्र और राज्य सहनशील समन्वय के माध्यम से कोड्स का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे, जिससे श्रमिकों के कल्याण और लाभ में समानता और निष्पक्षता बढ़ेगी। इन श्रम सुधारों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया जैसे Global Times और The Economist से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

सम्मेलन में सचिव, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, वंदना गुरनानी ने बताया कि चार श्रम संहिताओं का उद्देश्य 29 मौजूदा श्रम कानूनों को समेकित और सरल बनाकर श्रमिक कल्याण को मजबूत करना है। इन संहिताओं में वेब-आधारित निरीक्षण प्रणाली और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज जैसे कई प्रगतिशील उपाय शामिल हैं। केंद्रीय सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट नियमों को पूर्व-प्रकाशित किया है, जबकि नियमों की आवश्यकता न होने वाले प्रावधान 21 नवंबर 2025 से लागू हैं। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे अपने संबंधित नियमों को शीघ्र अधिसूचित करें और इसके लिए कानून विभाग की सलाह लें।

सरलीकृत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने FAQs हैंडबुक जारी की, V.V. गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान (VVGNLI) के माध्यम से क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किए, ड्राफ्ट निरीक्षण योजना साझा की और डिजिटल हस्तक्षेपों के लिए श्रम सुविधा और समाधान पोर्टल्स पर API इंटीग्रेशन किया। राज्यों को PMVBRY के तहत आउटरीच, दुकानों और प्रतिष्ठानों अधिनियमों के साथ ओवरलैप, और ESIC कवरेज के विस्तार का लाभ उठाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों, संविदा और आउटसोर्सेड श्रमिकों को शामिल करना भी शामिल है।

सम्मेलन नियमों और विनियमों पर विचार-विमर्श, अंतराल और असमानताओं की पहचान, सांविधिक अधिसूचनाओं का त्वरित प्रावधान, बोर्डों और फंडों के गठन और संबंधित संस्थागत तंत्रों पर चर्चा के लिए मंच के रूप में कार्य करेगा। इसमें चार श्रम संहिताओं के तहत योजनाओं, आईटी सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के कार्यान्वयन, क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों की क्षमता निर्माण और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों तथा अन्य हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

सम्मेलन में मंत्रालय और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और सक्रिय भागीदारी की।


DGMS ने 125वां स्थापना दिवस मनाया, खान मजदूरों की सुरक्षा और कल्याण में समर्पित सेवा का जश्न

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श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ माइनस सेफ्टी (DGMS) ने आज धनबाद, झारखंड में अपने मुख्यालय में 125वां स्थापना दिवस मनाया, जो देशभर में खान मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करने में एक सदी से अधिक समर्पित सेवा का प्रतीक है। इस अवसर पर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री, शोभा करंडलाजे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। DGMS के महानिदेशक उज्ज्वल ताह, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की संयुक्त सचिव दीपिका कच्छल, DGMS के वरिष्ठ अधिकारी, मंत्रालय के अधिकारी, खनन उद्योग के प्रतिनिधि और विभिन्न हितधारक भी समारोह में उपस्थित थे।

समारोह को संबोधित करते हुए, श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंडलाजे ने कहा कि DGMS की 125 वर्षीय यात्रा अधिकारियों और खान मजदूरों की समर्पित सेवा और बलिदानों का प्रतीक है। उन्होंने उन सभी का योगदान स्वीकार किया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में काम किया। मंत्री ने यह भी कहा कि आज खनन गतिविधियाँ सीधे भारत की विकास कहानी से जुड़ी हैं। उन्होंने खान मजदूरों के साहस और समर्पण को श्रद्धांजलि दी, जिनकी बहादुरी और जीवन जोखिम के बावजूद सेवा ने खनन को संभव बनाया और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया।

मंत्री ने दोहराया कि कर्मचारियों की सुरक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “फर्स्ट सेफ्टी” दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने DGMS की भूमिका पर बल दिया, जो सभी खनन संचालन में समान सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करता है। साथ ही उन्होंने केंद्र-राज्य समन्वय और DGMS के क्षेत्रीय कार्यालयों की सशक्त भागीदारी को प्रभावी सुरक्षा प्रवर्तन के लिए आवश्यक बताया।

श्रम सुधारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए, करंडलाजे ने कहा कि चार श्रम संहिताएँ, जिन्होंने 29 कानूनों का समेकन और प्रतिस्थापन किया, विकसित भारत निर्माण और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई हैं, जिसमें संविदा श्रमिक भी शामिल हैं। उन्होंने DGMS से कहा कि वे संहिताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और खनन सुरक्षा को बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें। मंत्री ने DGMS को सुरक्षित और सतत खनन के लिए मजबूत करने हेतु मंत्रालय का पूर्ण समर्थन सुनिश्चित किया।

मंत्री ने प्रदर्शनी, पुरालेख अनुभाग और मॉडल गैलरी का भ्रमण किया, जिसमें भारत में खान सुरक्षा प्रथाओं की समृद्ध विरासत और विकास को प्रदर्शित किया गया। समारोह के हिस्से के रूप में, उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया, जो DGMS की पर्यावरणीय सततता प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान DGMS की ऐतिहासिक उपलब्धियों, नियामक ढांचे और खनन सुरक्षा में तकनीकी प्रगति को दर्शाने वाली लघु फिल्म भी दिखाई गई। इस अवसर पर राज्य मंत्री ने DGMS का नया लोगो जारी किया, जो पुराने लोगो का प्रतिस्थापन है। इसके साथ ही DGMS थीम सॉन्ग और संगठन की यात्रा तथा योगदान को दर्शाने वाली डिजिटल कॉफी टेबल बुक भी जारी की गई। साथ ही खनन सुरक्षा में सर्वोत्तम प्रथाओं का डिजिटल संकलन/सौवेनियर भी प्रदर्शित किया गया।

एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, रेस्क्यू टीम के सदस्यों को उनके साहस और आपातकालीन स्थितियों में खान मजदूरों की सुरक्षा में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

DGMS, जिसकी स्थापना 1902 में हुई थी, भारत में खनन सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और खान मजदूरों की भलाई तथा खनन उद्योग के सतत विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।


गडकरी ने बायो-बिटुमेन को किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी ने कृषि अपशिष्ट को एक मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बायो-बिटुमेन भारत को विकसित भारत 2047 की दिशा में ले जाने के लिए एक परिवर्तनकारी कदम है। कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके यह फसल जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करता है और सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करता है। 15% मिश्रण के साथ, भारत लगभग ₹4,500 करोड़ विदेशी मुद्रा बचा सकता है और आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है।

CSIR के “फार्म रिसिड्यू से रोड तक: बायो-बिटुमेन via पायरोलिसिस” तकनीकी हस्तांतरण समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा,

“आज भारत की सड़क अवसंरचना में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, क्योंकि हमारा देश दुनिया में पहला है, जो व्यावसायिक रूप से बायो-बिटुमेन का उत्पादन कर रहा है।”

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने CSIR और इसके समर्पित वैज्ञानिकों को बधाई दी और इस अग्रणी उपलब्धि को हासिल करने में लगातार समर्थन देने के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का धन्यवाद भी किया।

गडकरी ने आगे कहा कि यह नवाचार किसानों को सशक्त बनाएगा, ग्रामीण आजीविका सृजित करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। बायो-बिटुमेन, उन्होंने कहा, वास्तव में मोदी सरकार की सतत विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय जिम्मेदार वृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, और एक स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है।



ग्रामीण विकास मंत्रालय और डाक विभाग ने वित्तीय सेवाओं और बाजार पहुँच के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए

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सुदूर ग्रामीण विकास में समावेशी और सतत वृद्धि को तेजी देने के महत्वपूर्ण कदम के रूप में, ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) और डाक विभाग ने आज ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और बाजार तक पहुँच को बढ़ाने के लिए सम्मिलन संस्थागत करने हेतु सहयोग समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी संघीय बजट 2025 के दृष्टिकोण को मूर्त रूप देती है, जिसमें भारत पोस्ट को ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन के प्रमुख चालक के रूप में पुनःस्थापित करने पर जोर दिया गया है।

MoU पर 7 जनवरी 2026 को हस्ताक्षर किए गए, जिनमें माननीय केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री,शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया की उपस्थिति रही। इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, तथा कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी भी उपस्थित थे। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने वर्चुअली भाग लिया। दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार Whole-of-Government दृष्टिकोण के तहत समन्वित प्रयासों से साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व दृष्टि और समग्र विकास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण केवल अवसंरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर आजीविका सृजन, गरिमा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालयों और सशक्त ग्रामीण समुदायों के समन्वित प्रयासों से देश विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

अपने संबोधन में ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि भारत पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की अंतिम-मील डिलीवरी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित संस्थानों को प्रशिक्षण, इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट्स, पॉइंट-ऑफ़-सेल मशीन और प्रमाणन प्रदान किया जाएगा, जिससे वे विभिन्न वित्तीय सेवाओं और उत्पादों को सीधे घर-घर पहुंचा सकेंगे। इसमें डाकघर बचत योजनाएँ, सुकन्या समृद्धि योजना, नकद हस्तांतरण सेवाएँ सहित अन्य कई वित्तीय उत्पाद शामिल होंगे।

यह साझेदारी दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के ग्रामीण स्तर के संस्थागत नेटवर्क और भारत पोस्ट, IPPB और डाक सेवकों के व्यापक नेटवर्क को जोड़ती है। इस सम्मिलन से स्व-सहायता समूह (SHGs), महिला उद्यमियों, ग्रामीण उद्यमों और MSMEs को एकीकृत वित्तीय और लॉजिस्टिक सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।

MoU के तहत:

  • DAY-NRLM ग्रामीण SHG परिवारों में भारत पोस्ट के बचत, जमा, बीमा और पेंशन उत्पादों को अपनाने को बढ़ावा देगा।

  • मिशन SHG महिलाओं को Business Correspondents (BC Sakhis) के रूप में पहचानकर उनका प्रशिक्षण, प्रमाणन और तैनाती सुनिश्चित करेगा।

  • भारत पोस्ट, IPPB के माध्यम से अंतःसंपर्क समर्थन प्रदान करेगा, जिसमें ऑनबोर्डिंग, तकनीकी मॉनिटरिंग डैशबोर्ड, और कस्टमाइज्ड बीमा समाधान शामिल हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं तक अंतिम-मील पहुँच और गहरी होगी।

साझेदारी महिला-नेतृत्व वाले SHG उद्यमों के लिए नए बाजार अवसर भी खोलेगी, उन्हें भारत पोस्ट की लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम से जोड़ा जाएगा। मिशन SHG और फेडरेशन-स्तरीय उद्यमों की पहचान और क्षमता निर्माण में सहायता करेगा, जबकि भारत पोस्ट लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और निर्यात सुविधा सेवाएँ प्रदान करेगा। इसके साथ ही SHG उत्पादों के प्रचार के लिए भारत पोस्ट नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा।

इस MoU से वित्तीय समावेशन में वृद्धि, बाजार तक पहुँच में सुधार और ग्रामीण महिलाओं एवं उद्यमियों के लिए सतत आजीविका के अवसर पैदा होंगे, जो समावेशी विकास और विकसित भारत के दृष्टिकोण में योगदान देंगे।


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