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Kisaan School : वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल की बैठक में शामिल हुई समाजसेविका डॉ. गीता सिंह, 28 जून को आयोजित होगा राज्य स्तरीय 'मशरूम महोत्सव'

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जांजगीर-चाम्पा- बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल में बैठक हुई, जहां रायगढ़ से पहुंची समाजसेविका डॉ. गीता सिंह शामिल हुई. बैठक में आगामी 28 जून को किसान स्कूल परिसर में राज्य स्तरीय 'मशरूम महोत्सव' का आयोजन करने का निर्णय लिया गया, जिसमें जिले के मशरूम उत्पादक किसानों समेत छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के मशरूम उत्पादक किसानों को शामिल किया जाएगा.

इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि प्रतिवर्ष 10 दिसम्बर को किसान स्कूल परिसर में राज्य स्तरीय 'भाजी महोत्सव' का आयोजन किया जाता है. ठीक इसी प्रकार से 28 जून को किसान स्कूल परिसर में राज्य स्तरीय 'मशरूम महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा. यह दोनों महोत्सव प्रतिवर्ष किसानों के सहयोग से आयोजित किए जाएंगे. किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि यहां पर किसानों को क़ृषि व पशुपालन के क्षेत्र में 18 विषयों पर निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें मशरूम उत्पादन व मशरूम प्रसंसकरण को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है. उन्होंने बताया कि खेतों में पराली को जलाने के बजाय उससे मशरूम उत्पादन, जैविक खाद बनाने तथा पशु चारा के रूप में इस्तेमाल करने का जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जा रहा हैं. बैठक में महिलाओं को आर्थिक रूप से सम्बल बनाने की दिशा में कार्य करने की भी कार्ययोजना बनाई गई. यहां महिलाओं को घर बैठे रोजगार से जोड़ने और निर्मित सामग्री को बिक्री करने बाजार मुहैया करने को लेकर भी चर्चा की गई.

महोत्सव में मशरूम उत्पादक किसान होंगे सम्मानित

बैठक में शामिल समाजसेविका डॉ. गीता सिंह ने बताया कि 28 जून को बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय मशरूम महोत्सव में मशरूम उत्पादक किसानों को सम्मानित किया जाएगा. इसके साथ ही जिले में मशरूम उत्पादन कारोबार को बढ़ावा देने कार्य योजना बनाई जा रही है, जिससे खेतों में पराली जलाने की समस्या का समाधान हो सके और इस कारोबार से किसानों को अच्छा आमदनी मिल सके.

बैठक में सरपंच चन्द्रकला सरवन कश्यप, पत्रकार राजकुमार साहू, प्रकाश साहू, नारी शक्ति महिला ग्राम संगठन की अध्यक्ष रम्भा गोड़, सचिव रामकुमारी यादव, मितानिन रामबाई यादव, लक्ष्मीन यादव, भगवती यादव, क़ृषि सखी शशि कर्ष, पशु सखी पुष्पा यादव, सक्रिय महिला ललिता यादव, आरबीके साधना यादव, लक्ष्मीन बरेठ, राजाराम यादव, पिंटू कश्यप, उर्मिला यादव, रसोईया संघ के पदाधिकारी कृष्णा समेत अन्य पदाधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित थे.


भारतीय वायु सेना का सिंगापुर एयरशो 2026 में प्रदर्शन

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भारतीय वायु सेना (IAF) सिंगापुर एयरशो 2026 में भाग ले रही है, जिसमें सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव पर प्रदर्शनी देगी। अपनी सटीक उड़ान, क्लोज-फॉर्मेशन manoeuvres और अनुशासित प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध, सारंग टीम ALH ध्रुव की संचालनात्मक बहुमुखी प्रतिभा, चुस्ती और विश्वसनीयता को विभिन्न परिचालन भूमिकाओं में उजागर करती है।

सिंगापुर एयरशो 2026 का आयोजन

सिंगापुर एयर शो 2026, एशिया की प्रमुख द्विवार्षिक एयरोस्पेस और रक्षा प्रदर्शनी है, जो 3 से 8 फरवरी 2026 तक चांगी एग्ज़िबिशन सेंटर में आयोजित किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी वैश्विक वायु सेनाओं, उद्योग के नेताओं और विमानन हितधारकों को एक मंच पर लाती है, जिसमें सैन्य और नागरिक उड्डयन के उन्नत प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किए जाते हैं और पेशेवर बातचीत, रणनीतिक संवाद और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उद्योग सहयोग को बढ़ावा दिया जाता है।

एयर शो में सारंग टीम की भागीदारी

सिंगापुर एयर शो 2026 में सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम सहित तीन अन्य प्रदर्शन टीमों की भी भागीदारी होगी। एयर शो में 37 एयरक्राफ्ट का स्थिर प्रदर्शन भी आयोजित किया जाएगा।

सारंग एरोबेटिक टीम, 2005 में स्थापित, पाँच ALH हेलीकॉप्टरों से मिलकर बनी है। इस टीम ने विभिन्न प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में प्रदर्शन किया है, जैसे:

  • MAKS इंटरनेशनल एयर शो, रूस (2021)

  • दुबई एयर शो (2021 & 2023)

  • बहरीन इंटरनेशनल एयर शो (2024)

  • इसके अलावा सिंगापुर एयर शो 2024 और 2026 में भी प्रदर्शन किया।

टीम घरेलू कार्यक्रमों में भी नियमित रूप से प्रदर्शन करती है और साथ ही मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) में भी अमूल्य सेवाएँ प्रदान करती रही है।


आदिवासी क्षेत्रों में होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी किए

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आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पहल

पर्यटन मंत्रालय ने आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए “आदिवासी क्षेत्रों में होमस्टे का विकास” हेतु राज्य सरकारों और UT प्रशासन के लिए दिशानिर्देश और प्रस्ताव तैयार करने का टेम्पलेट जारी किया है। यह पहल प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के तहत स्वदेश दर्शन योजना का एक उप-योजना है।

इस पहल का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में होमस्टे विकसित करना, जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना और आदिवासी समुदायों के लिए रोज़गार व आजीविका के अवसर बढ़ाना है।

दिशानिर्देशों में होमस्टे मालिकों के तकनीकी कौशल विकास और प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इस योजना के तहत:

  • 1000 होमस्टे विकसित किए जाएंगे।

  • ग्राम समुदाय की आवश्यकताओं के लिए प्रति होमस्टे 5 लाख रुपये तक सहायता।

  • प्रत्येक परिवार के लिए दो नए कमरे बनाने के लिए 5 लाख रुपये तक सहायता।

  • मौजूदा कमरों के नवीनीकरण के लिए 3 लाख रुपये तक सहायता।

चुनौती आधारित पर्यटन स्थल विकास

स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत ‘Challenge Based Destination Development’ उप-योजना तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाना और पर्यटन स्थलों को सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है।

ग्रामीण पर्यटन और सतत पर्यटन को बढ़ावा

पर्यटन मंत्रालय भारत को समग्र रूप में बढ़ावा देता है, विभिन्न पहलों के माध्यम से।

  • ग्रामीण होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना।

  • ग्रामीण पर्यटन स्थलों और उत्पादों का प्रचार मंत्रालय की वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से।

ग्रीन और इको पर्यटन के विकास हेतु:

  • मंत्रालय ने राष्ट्रीय इको पर्यटन और सतत पर्यटन रणनीतियाँ तैयार की हैं।

  • Travel for LiFE कार्यक्रम शुरू किया गया है, ताकि देश में सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके और पर्यटकों एवं पर्यटन व्यवसायों को सतत पर्यटन प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

यह जानकारी आज लोकसभा में पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत द्वारा लिखित उत्तर में दी गई।


केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने “MY Bharat Budget Quest 2026” की शुरुआत की

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केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज MY Bharat Budget Quest 2026 की शुरुआत की। यह एक राष्ट्रीय स्तर की युवा-केंद्रित पहल है, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं में केंद्रीय बजट की समझ को बढ़ाना और बजट से संबंधित प्रावधानों को अधिक सुलभ, प्रासंगिक और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

यह पहल केंद्रीय बजट 2026 को नागरिकों के दैनिक जीवन से जोड़ने के लिए तैयार की गई है, जिसमें पूरे देश के कॉलेज, संस्थान और कोचिंग सेंटर के युवा संरचित और सहभागी ढांचे के माध्यम से शामिल होंगे।

प्रतियोगिता प्रारंभ और प्रक्रिया

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह प्रतियोगिता MY Bharat प्लेटफॉर्म (https://mybharat.gov.in/) पर 3 फरवरी 2026 से शुरू होगी। यह एक राष्ट्रीय स्तर का ऑनलाइन क्विज है, जो केवल MY Bharat पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं के लिए खुलेगा।

प्रमुख तिथियाँ और चरण:

  • पंजीकरण और क्विज़: 3 फरवरी से 17 फरवरी 2026 तक।

  • शीर्ष प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों का चयन: हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से।

  • दूसरा चरण (निबंध लेखन): 17 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक। इसमें प्रतिभागियों को 8 विषय दिए जाएंगे, जो विकसित भारत के दृष्टिकोण से जुड़े होंगे। प्रतिभागी अपने विचार और सुझाव निबंधों के माध्यम से साझा करेंगे।

  • निबंध मूल्यांकन: 3 मार्च से 10 मार्च 2026 तक।

  • राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार मेरिट सूची की घोषणा: 10 मार्च 2026।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के विजेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ “विकसित भारत बजट” के दृष्टिकोण पर संपर्क और विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा। यह पहल सरकार की राष्ट्रीय आर्थिक विमर्श और विकास प्राथमिकताओं में युवाओं की सूचित भागीदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

केंद्रीय मंत्री के विचार

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा,

“इस वर्ष बजट भाषण के दौरान, माननीय वित्त मंत्री ने VBYLD में युवाओं द्वारा साझा किए गए नवाचारी विचारों की सराहना की और कुछ विचारों को केंद्रीय बजट 2026–27 में शामिल किया गया। MY Bharat Budget Quest के माध्यम से हम इसी भावना को जारी रखना चाहते हैं और युवाओं की आवाज़ को पुनः सशक्त करना चाहते हैं।”


बजट 2026–27: Biopharma SHAKTI से भारत के बायोफार्मा क्षेत्र को नया रूप

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प्रमुख निष्कर्ष

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में बायोफार्मा शक्ति (Biopharma SHAKTI) की घोषणा की गई, जिसका बजट पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य भारत में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के उत्पादन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना है।
  • यह पहल भारत को वैश्विक बायोफार्मा उद्योग में अग्रणी बनाने और वैश्विक बायोफार्मास्यूटिकल मार्केट के 5% हिस्से पर कब्ज़ा करने के लक्ष्य के अनुरूप है।
  • राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (National Biopharma Mission) और पिछले कुछ वर्षों में शुरू की गई अन्य योजनाएँ भी इसी उद्देश्य की दिशा में काम कर रही हैं।

परिचय

केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की दवा उद्योग नीति में एक निर्णायक बदलाव दर्शाता है, जिसमें बायोफार्मा और बायोलॉजिक दवाओं को स्वास्थ्य और विनिर्माण रणनीति के केंद्र में रखा गया है। यह भारत को वैश्विक बायोफार्मा उद्योग में अग्रणी बनाने और वैश्विक बाजार में 5% हिस्सेदारी हासिल करने की सरकार की दृष्टि के अनुरूप है।

गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते बोझ और वैश्विक स्तर पर बायोलॉजिक्स एवं बायोसिमिलर पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए, बजट बायोफार्मा को उच्च मूल्य वाला, भविष्य-सामना करने वाला और स्वास्थ्य एवं आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में स्थान देता है।

बायोफार्मा का मतलब जीवित जैविक तंत्र (जैसे मानव कोशिकाएं, सूक्ष्मजीव या फफूंदी) के माध्यम से चिकित्सा उत्पादों का उत्पादन या निर्माण करना है। उदाहरणों में टीके, एंटीबॉडी उपचार, जीन थेरेपी, सेल इम्प्लांट, आधुनिक इंसुलिन और रीकॉम्बिनेंट प्रोटीन दवाएँ शामिल हैं।

केंद्रीय बजट 2026–27: बायोफार्मा शक्ति पहल

मुख्य घोषणाएँ:

  1. Biopharma SHAKTI की स्थापना: पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का बजट, जिसका उद्देश्य भारत में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के लिए पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। यह पहल घरेलू विकास और उत्पादन, आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए है।

  2. NIPER नेटवर्क का विस्तार: तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPERs) की स्थापना और सात मौजूदा NIPERs का उन्नयन, जिससे बायोफार्मा में विशेषज्ञ मानव संसाधनों की जरूरत पूरी हो सके।

  3. क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम का निर्माण: देशभर में 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइटों का विकास प्रस्तावित, जिससे बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर पर उन्नत नैदानिक परीक्षण तेज़ होंगे और भारत को वैश्विक नैतिक और उच्च-गुणवत्ता वाले क्लिनिकल ट्रायल के लिए प्राथमिक स्थान बनाया जा सके।

  4. नियामक ढांचे को सशक्त करना: CDSCO की क्षमता बढ़ाना, विशेषज्ञ वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मियों को शामिल करना, अनुमोदन समय सीमाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप करना और जटिल बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों का तेज़ मूल्यांकन सुनिश्चित करना।

महत्व

बजट ने निर्माण क्षमता, विशेषज्ञ मानव संसाधन, क्लिनिकल रिसर्च क्षमता और नियामक विश्वसनीयता को एक ही ढांचे में जोड़ा है। यह संकेत देता है कि भारत सस्ती जेनेरिक दवाओं के निर्माता से उच्च गुणवत्ता, नवाचार-आधारित बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।

इस पहल से भारत को वैश्विक बायोफार्मा बाजार में प्रतिस्पर्धा करने और घरेलू स्तर पर उन्नत और किफायती बायोलॉजिक दवाओं तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बायोफार्मा क्या है?

पारंपरिक रासायनिक दवाओं के बजाय अब दवाएँ जैविकी (Biology) के माध्यम से विकसित हो रही हैं। बायोफार्मा वह हिस्सा है जो जीवित जैविक तंत्र का उपयोग करके दवाओं का निर्माण करता है।

सरल शब्दों में, बायोफार्मा दवाएँ कोशिकाओं, सूक्ष्मजीवों या अन्य जैविक पदार्थों से बनाई जाती हैं। इनमें मानव या पशु कोशिकाएं, बैक्टीरिया, फफूंदी आदि शामिल हो सकते हैं। इनका उद्देश्य बीमारियों को रोकना, निदान करना या इलाज करना होता है। उदाहरण में टीके, थेराप्यूटिक प्रोटीन, बायोसिमिलर और अन्य उन्नत बायोलॉजिक थेरेपी शामिल हैं।

भारत में बायोफार्मा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकारी पहल

भारत की फार्मास्यूटिकल उद्योग केवल सस्ती जेनेरिक दवाएँ बनाने तक सीमित नहीं रही; अब यह उच्च मूल्य और जटिल बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों में निवेश कर रही है। भारत उपलब्ध गुणवत्ता वाली दवाओं का वैश्विक हब बन चुका है, उत्पादन के हिसाब से 3रा और मूल्य के हिसाब से 14वां स्थान।

सरकार ने पिछले वर्षों में अनुसंधान, उत्पादन, नवाचार और व्यावसायीकरण के लिए कई नीतिगत पहलें और योजनाएँ लागू की हैं। इनमें राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM – i3), BIRAC-लिड बायोटेक इनोवेशन सपोर्ट, PLI स्कीम, SPI स्कीम, Bulk Drug Parks, PRIP, BioE3 और Bio-RIDE जैसी प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं।

इन पहलों का उद्देश्य सरकार, अकादमी, उद्योग और स्टार्टअप्स को एक साथ लाकर साझा अवसंरचना का निर्माण, नवाचार को बढ़ावा और घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाना है।

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM) – Innovate in India (i3)

2017 में शुरू हुआ, इसका उद्देश्य भारत को 2025 तक 100 अरब डॉलर के वैश्विक बायोटेक उद्योग में बदलना और वैश्विक फार्मास्यूटिकल बाजार में 5% हिस्सेदारी प्राप्त करना है।

NBM के अंतर्गत 101 परियोजनाएँ, 150+ संस्थाएँ और 30 MSMEs शामिल हैं। इससे 1,000+ रोजगार पैदा हुए, जिनमें 304 वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल हैं। जीनोम इंडिया प्रोग्राम के तहत 10,000 जीनोम सिक्वेंस किए जा रहे हैं।

BIRAC-नेतृत्व वाले नवाचार समर्थन

BIRAC (2012 में स्थापित) स्टार्टअप्स को फंडिंग, इनक्यूबेशन और मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्रमुख योजनाएँ:

  • Biotechnology Ignition Grant (BIG): 50 लाख तक शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए।

  • SEED Fund: 30 लाख तक प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट स्टार्टअप्स के लिए।

  • LEAP Fund: 1 करोड़ तक वाणिज्यिकरण-तैयार नवाचार के लिए।

  • जनCARE – अमृत ग्रैंड चैलेंज: AI, मशीन लर्निंग, टेलीमेडिसिन और ब्लॉकचेन आधारित 89 डिजिटल हेल्थ टेक इनोवेशन।

विनिर्माण और औद्योगिक सुदृढ़ता

PLI, SPI और Bulk Drug Parks जैसी योजनाओं के माध्यम से निर्माण क्षमता बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना, MSME अपग्रेडेशन और साझा अवसंरचना निर्माण पर ध्यान दिया गया।

निष्कर्ष

ये सभी उपाय भारत में सशक्त बायोफार्मा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए सरकार की रणनीति को दर्शाते हैं। बायोफार्मा शक्ति योजना, पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ, मानव संसाधन विकास, क्लिनिकल ट्रायल अवसंरचना और नियामक क्षमता में निवेश के माध्यम से भारत को वैश्विक बायोफार्मा हब बनाने का महत्वपूर्ण कदम है।


राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय प्रस्तावित करेगा जुलाई 2026–जून 2027 में प्रवासन पर सर्वेक्षण

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राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने जुलाई 2026 से जून 2027 के दौरान प्रवासन पर सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव रखा है।

MoSPI समय-समय पर प्रवासन सर्वेक्षण आयोजित करता रहा है; सबसे हालिया प्रवासन डेटा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2020–21 और मल्टीपल इंडिकेटर सर्वे (2020–21) के माध्यम से एकत्र किए गए थे। आगामी प्रवासन सर्वेक्षण ग्रामीण–शहरी और राज्य-स्तरीय प्रवासन की सीमा और पैटर्न, प्रवासन के कारण, वापसी प्रवासन, मौसमी प्रवासन, प्रवासियों की रोजगार प्रोफाइल आदि पर व्यापक और अद्यतन डेटा प्रदान करेगा।

इस सर्वेक्षण के परिणाम श्रम गतिशीलता, रेमिटेंस प्रवाह और संबंधित पहलुओं को समझने में सहायक होंगे। यह जानकारी नीति-निर्माताओं, योजनाकारों, शोधकर्ताओं और विकास कार्यकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी होगी, क्योंकि इसके माध्यम से शहरी नियोजन, आवास, परिवहन, रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेपों की योजना बनाई जा सकेगी।

PLFS 2020–21 के अनुसार, भारत में प्रवासन दर 28.9% अनुमानित की गई थी।

सभी भारत स्तर पर पुरुषों में प्रवासन दर 10.7% और महिलाओं में 47.9% अनुमानित की गई। प्रवासन के कारण लिंग के अनुसार भिन्न हैं। महिलाओं में विवाह प्रमुख कारण है, जो सभी महिला प्रवासियों का लगभग 86.8 प्रतिशत हिस्सा है। इसके विपरीत, पुरुषों में रोजगार या बेहतर रोजगार की तलाश में प्रवासन सबसे अधिक है, जो सभी भारत स्तर पर 22.8% है। ये विशिष्ट पैटर्न भारत में प्रवासन की लिंग-विशिष्ट प्रकृति को उजागर करते हैं, जिसमें महिलाओं का प्रवासन सामाजिक कारणों जैसे विवाह से प्रभावित है, जबकि पुरुषों का प्रवासन मुख्य रूप से श्रम बाजार के अवसरों से प्रभावित है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री, योजना मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री और संस्कृति मंत्रालय राज्यमंत्री राव इंदरजीत सिंह ने दी।


आर्थिक सर्वेक्षण से स्पष्ट: कृषि और ग्रामीण विकास में अभूतपूर्व प्रगति – शिवराज सिंह चौहान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सर्वेक्षण के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कृषि और ग्रामीण विकास—दोनों मोर्चों पर अभूतपूर्व प्रगति की है।

कृषि क्षेत्र में सतत और स्थिर विकास

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में स्थिर मूल्यों पर औसतन 4.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत से अधिक है। वित्त वर्ष 2016 से 2025 की दशक अवधि में कृषि क्षेत्र ने 4.45 प्रतिशत की दशकगत वृद्धि दर हासिल की है, जो पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही में भी कृषि क्षेत्र ने 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो इसकी मजबूती और लचीलेपन को दर्शाती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2024–25 में देश का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 357.73 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का और मोटे अनाजों—जिसमें ‘श्री अन्न’ (मिलेट्स) भी शामिल हैं—के बेहतर उत्पादन के कारण हुई है। आज भारत न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है, बल्कि कई फसलों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका भी निभा रहा है।

बागवानी कृषि विकास का उज्ज्वल पक्ष

शिवराज चौहान ने कहा कि कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बागवानी क्षेत्र भारतीय कृषि का सबसे उज्ज्वल पक्ष बनकर उभरा है। बागवानी उत्पादन वित्त वर्ष 2013–14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024–25 में 367.72 मिलियन टन हो गया है।

इस अवधि में फल उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जी उत्पादन 219.67 मिलियन टन तथा अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन 33.54 मिलियन टन रहा।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत अब विश्व का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश बन गया है, जो वैश्विक प्याज उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत योगदान देता है। साथ ही, भारत सब्जियों, फलों और आलू का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जिनमें प्रत्येक श्रेणी में वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 12–13 प्रतिशत है।

ग्रामीण भारत में अवसंरचना का ऐतिहासिक विस्तार

ग्रामीण विकास की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए शिवराज चौहान ने कहा कि ग्रामीण अवसंरचना—जिसमें सड़कें, आवास, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी शामिल हैं—में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत अब 99.6 प्रतिशत से अधिक पात्र बसावटों को सभी मौसमों में चलने योग्य सड़कों से जोड़ दिया गया है।

उन्होंने बताया कि पीएमजीएसवाई के विभिन्न चरणों के अंतर्गत लाखों किलोमीटर सड़कों और हजारों पुलों का निर्माण किया गया है। पीएमजीएसवाई-IV के तहत 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिससे जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश की लगभग 3,270 असंपर्कित बसावटों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित होगी।

आवास, डिजिटल सशक्तिकरण और आजीविका में परिवर्तन

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘सबके लिए आवास’ मिशन के तहत पिछले 11 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 3.70 करोड़ पक्के मकानों का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के अंतर्गत 4.14 करोड़ आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से अधिकांश को स्वीकृति दी जा चुकी है।

डिजिटल और तकनीकी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत 3.28 लाख गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरे किए जा चुके हैं और 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड जारी किए गए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 99.8 प्रतिशत भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। ‘लखपति दीदी’ की संख्या 2.5 करोड़ के पार पहुंच चुकी है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में एक बड़ी उपलब्धि है।

शिवराज चौहान ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि सतत नीतिगत फोकस, संस्थागत सुधारों और लक्षित निवेशों ने कृषि को मजबूत किया है और ग्रामीण भारत का व्यापक रूप से रूपांतरण किया है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां समावेशी विकास, किसान कल्याण और सतत ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं, जिससे भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में गांवों की केंद्रीय भूमिका सुनिश्चित होती है।


इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: नई दिल्ली में 16–20 फरवरी को होगा वैश्विक आयोजन

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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में किया जाएगा। यह अब तक आयोजित चार वैश्विक एआई सम्मेलनों में सबसे बड़ा होने की संभावना है, जो जिम्मेदार, समावेशी और प्रभाव-उन्मुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय गति को दर्शाता है।

इस समिट को वैश्विक समुदाय से अभूतपूर्व रुचि प्राप्त हुई है। आयोजन से पूर्व ही 35,000 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हो चुके हैं। समिट का प्रमुख उद्देश्य दृष्टि को व्यवहारिक क्रियान्वयन में बदलना है, जिसमें ज़मीनी स्तर पर प्रभावी और सार्थक परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

समिट में सरकारों, उद्योग जगत के नेताओं, शोधकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भागीदारी अपेक्षित है, जो कार्यक्रम के एजेंडे को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता होने की संभावना है, जिनमें 15–20 राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख, विभिन्न देशों के 50 से अधिक मंत्री तथा वैश्विक और भारतीय कंपनियों के 40 से अधिक सीईओ शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े लगभग 500 प्रमुख व्यक्ति—जिनमें नवोन्मेषक, शोधकर्ता और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTOs) शामिल हैं—भी इसमें भाग लेंगे।

भागीदारी की व्यापकता को दर्शाते हुए, समिट में 500 से अधिक एआई स्टार्टअप्स की स्टार्टअप प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी तथा मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ लगभग 500 सत्रों का आयोजन होगा, जिससे यह एआई पर केंद्रित सबसे व्यापक वैश्विक आयोजनों में से एक बन जाएगा।

समिट से पहले की गतिविधियों में भी व्यापक भागीदारी देखने को मिली है। प्री-समिट आयोजनों के लिए 1,300 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अब तक भारत और वैश्विक स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों एवं क्षेत्रों में 500 से अधिक प्री-समिट कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। समिट ढांचे के अंतर्गत सात प्रमुख (फ्लैगशिप) कार्यक्रम भी शामिल हैं, जिनमें कुल मिलाकर 3,00,000 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता रही है। यह एआई इम्पैक्ट समिट प्रक्रिया में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रुचि को दर्शाता है।

वैश्विक एआई समिट प्रक्रिया समय के साथ विकसित हुई है—जिसकी शुरुआत ब्लेचली पार्क में एआई जोखिमों पर चर्चा से हुई, इसके बाद सियोल में नैतिकता और समावेशन पर विमर्श हुआ, और फिर पेरिस में साझा सिद्धांतों के क्रियान्वयन की दिशा में प्रगति हुई। यह समिट वैश्विक एआई विमर्श में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से संबंधित विस्तृत जानकारी—जिसमें कार्यक्रम, विषयगत फोकस क्षेत्र और भागीदारी की प्रक्रियाएं शामिल हैं—समिट की आधिकारिक वेबसाइट https://impact.indiaai.gov.in/ पर उपलब्ध है। इच्छुक हितधारकों से अनुरोध है कि वे वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण करें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार एवं प्रभावी उपयोग को आगे बढ़ाने के इस वैश्विक संवाद का हिस्सा बनें।

समिट के लिए मीडिया मान्यता (Media Accreditation) प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। केवल मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधियों को ही समिट की कार्यवाही को कवर करने की अनुमति दी जाएगी। आवेदन आधिकारिक पोर्टल https://impact.indiaai.gov.in/media-accreditation के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जाने आवश्यक हैं। मीडिया मान्यता हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 8 फरवरी 2026 है।


त्रि-सेवाओं का फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स 02 फरवरी से नई दिल्ली में प्रारंभ

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त्रि-सेवाओं के फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स का तृतीय संस्करण 02 से 25 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के तत्वावधान में तथा सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज़ (CENJOWS) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस संस्करण में सैन्य अभियानों में उभरते विशेषीकृत विषयों एवं डोमेन-विशिष्ट युद्धक विकास को समाहित करते हुए पाठ्यक्रम को और अधिक समृद्ध किया गया है।

यह कोर्स इस बात की गहन समझ विकसित करने पर केंद्रित है कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी युद्ध संचालन को प्रभावित कर रही है, जिससे हमारी सोच, अवधारणाओं, सिद्धांतों, रणनीतियों तथा टैक्टिक्स, टेक्नीक्स और प्रोसीजर्स (TTPs) पर पुनर्विचार की आवश्यकता उत्पन्न हो रही है। पाठ्यक्रम के अंतर्गत महत्वपूर्ण विषयों का गहन अध्ययन, उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक प्रदर्शन तथा रक्षा बलों की क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण संस्थानों का भ्रमण भी शामिल है।

इस कोर्स में तीनों सेनाओं के अधिकारियों के साथ-साथ रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि—जिनमें स्टार्टअप्स, एमएसएमई, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSUs) तथा निजी उद्योग शामिल हैं—भाग ले रहे हैं। सेनाओं से भाग लेने वाले अधिकारियों की वरिष्ठता मेजर से लेकर मेजर जनरल (एवं समकक्ष) तक है, जहाँ कनिष्ठ अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता एवं नवाचार दृष्टिकोण के साथ योगदान दे रहे हैं, वहीं वरिष्ठ अधिकारी अपने संचालन अनुभव एवं रणनीतिक ज्ञान से पाठ्यक्रम को समृद्ध कर रहे हैं।

फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स का उद्देश्य सशस्त्र बलों की परिचालन प्राथमिकताओं को स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमताओं के साथ संरेखित करना है तथा आधुनिक एवं भविष्य के युद्ध के विभिन्न पहलुओं पर मुक्त एवं सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करना है। इस दौरान पूर्व सैनिकों, सेवारत अधिकारियों, पूर्व राजदूतों, उद्योग विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों सहित विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे, जिससे भारत की सुरक्षा चुनौतियों का व्यापक, गहन एवं पेशेवर विश्लेषण किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, इस कोर्स में महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ पृथ्वी तत्वों, आपूर्ति श्रृंखला की संवेदनशीलताओं तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य जैसे विषयों के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे, जो भविष्य में परिचालन योजना एवं संचालन के लिए रक्षा बलों द्वारा अध्ययन एवं विश्लेषण किए जाने वाले विषयों के दायरे को और विस्तृत करेंगे।

सितंबर 2024 में आयोजित उद्घाटन संस्करण की सफलता के आधार पर, यह विस्तारित तीन सप्ताह का कार्यक्रम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार करना है।


आयुष को सशक्त बनाने वाला बजट, समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम : प्रतापराव जाधव

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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने वाले परिवर्तनकारी बजट घोषणाओं के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए, केंद्रीय आयुष एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)प्रतापराव जाधव ने इन घोषणाओं को भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बताया।

आयुष मंत्री ने बजट को “दूरदर्शी और भविष्य उन्मुख” बताते हुए कहा कि ये उपाय एक समग्र, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसमें आयुष एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रहा है।

अपने बजट भाषण में माननीय वित्त मंत्री ने आयुष क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन, वैश्विक नेतृत्व, मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म तथा कुशल मानव संसाधन विकास को विस्तार देने हेतु कई ऐतिहासिक पहलों की घोषणा की। ये कदम पारंपरिक चिकित्सा को निवारक स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक विकास और वैश्विक वेलनेस नेतृत्व का प्रमुख चालक बनाने की भारत की आकांक्षा को सुदृढ़ करते हैं।

बजट का एक ऐतिहासिक पहलू तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा, उन्नत अनुसंधान और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। मौजूदा राष्ट्रीय संस्थानों की सफलता के आधार पर, ये संस्थान शैक्षणिक मानकों को ऊंचा उठाने और साक्ष्य-आधारित एकीकृत चिकित्सा को सुदृढ़ करने में सहायक होंगे।

बजट में आयुष फार्मेसियों एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को उच्च प्रमाणन मानकों के अनुरूप उन्नत करने का भी प्रस्ताव है। इससे उत्पाद गुणवत्ता, उपभोक्ता विश्वास और निर्यात क्षमता को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और प्रसंस्करण एवं विनिर्माण से जुड़े एमएसएमई को समर्थन मिलेगा।

भारत के वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत करते हुए, जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को उन्नत किया जाएगा, जिससे अनुसंधान सहयोग, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और नीति संवाद को गहराई मिलेगी। इससे भारत पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, प्रस्तावित पाँच क्षेत्रीय मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म हब में आयुष केंद्रों को शामिल किया जाएगा। ये केंद्र उन्नत चिकित्सा उपचार के साथ पारंपरिक उपचार, वेलनेस सेवाओं और पुनर्वास सहायता को जोड़ते हुए एकीकृत स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में विकसित होंगे। इससे आयुष चिकित्सकों, थैरेपिस्टों, योग प्रशिक्षकों और संबद्ध पेशेवरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

इसके अतिरिक्त, एनएसक्यूएफ से संरेखित केयरगिवर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में योग और वेलनेस कौशल को शामिल किया गया है, जिसके तहत आगामी वर्ष में 1.5 लाख केयरगिवरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे आयुष से जुड़े कौशल केयर इकॉनमी में मुख्यधारा में आएंगे और निवारक तथा जेरियाट्रिक देखभाल सेवाएं सशक्त होंगी।

प्रतापराव जाधव ने कहा कि पिछले एक दशक में माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयुष क्षेत्र ने अभूतपूर्व संस्थागत विस्तार, वैश्विक मान्यता, डिजिटल विस्तार और अनुसंधान प्रगति देखी है। उन्होंने कहा, “यह बजट उसी मजबूत आधार पर आगे बढ़ते हुए विस्तार से समेकन, गुणवत्ता संवर्धन और वैश्विक एकीकरण की ओर ले जाता है। यह एक निर्णायक क्षण है, जहां पारंपरिक चिकित्सा को पूरक नहीं, बल्कि भारत के स्वास्थ्य भविष्य का अभिन्न अंग माना जा रहा है।”

आर्थिक प्रभाव पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि ये घोषणाएं स्वास्थ्य नीति को ग्रामीण आजीविका, निर्यात वृद्धि, युवा रोजगार और उद्यमिता से जोड़ती हैं, जिससे भारत के साक्ष्य-आधारित समग्र स्वास्थ्य देखभाल के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने को बल मिलता है।

उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री और माननीय वित्त मंत्री के प्रति उनके निरंतर समर्थन और दूरदर्शी दृष्टिकोण के लिए पुनः आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से सम्मानित भारत के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में निर्णायक कदम है।


डस्टबिन से उद्योग तक- अंजना उरांव की आत्मनिर्भरता की उड़ान

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 कभी-कभी जीवन की दिशा बदलने के लिए किसी बड़े मंच, बड़े अवसर या बड़े संसाधन की आवश्यकता नहीं होती। कभी-कभी एक डस्टबिन में पड़ा काग़ज़ का टुकड़ा भी जीवन की करवट बदल देता है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखण्ड के ग्राम तोलगा की अंजना उरांव की कहानी इसी सच्चाई को सशक्त रूप से सामने रखती है, जो कड़ी मेहनत और लगन से ही स्थायी सफलता हासिल की।


अंजना उरांव कोई उद्योगपति परिवार से नहीं आतीं, न ही उनके पास पूंजी, सिफ़ारिश या विशेष प्रशिक्षण था। वे जनपद पंचायत खड़गवां में एक अंशकालिक डाटा एंट्री ऑपरेटर हैं। स्नातकोत्तर डिग्री होने के बावजूद मात्र चार हजार रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत हैं। जीवन एक तयशुदा सीमित दायरे में चल रहा था, तभी एक दिन कार्यालय के डस्टबिन में उन्हें एक फटा हुआ पन्ना मिला। उस पन्ने पर लिखा था प्रधानमंत्री सृजन स्वरोजगार योजना वह पन्ना कचरा नहीं था, वह संभावना थी। अंजना ने उसे पढ़ा, समझा और उसी क्षण मन में यह निश्चय किया कि वे सिर्फ़ नौकरी करने वाली नहीं, बल्कि कुछ सृजित करने वाली बनेंगी।


विरोध, संदेह और संघर्ष का दौर

योजना की जानकारी लेने जब उन्होंने जनपद कार्यालय में चर्चा की तो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ मिलीं। किसी ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र जाने की सलाह दी, तो किसी ने यह कहकर हतोत्साहित किया कि बैंक और योजनाओं के चक्कर में पड़ना बेवकूफी है। लेकिन अंजना ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक रोचक बात भी बताई कि एक बार मोबाइल व अखबार में जिला कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी का बयान आया था कि महिलाएं किसी से कम नहीं है, अपने हिम्मत से आगे बढ़ सकती हैं। यह वाक्य उनके दिमाग बसा था, इसी जुनून ने आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया।

अंजना ने जब जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से जानकारी लेने के बाद जब पोड़ी-बचरा क्षेत्र में फ्लाईऐश ईंट निर्माण इकाई देखी, तो उनके भीतर एक उद्यमिता जन्म लेने लगा। उन्होंने तय किया कि वे भी फ्लाईऐश ईंट उद्योग स्थापित करेंगी।

इसके बाद शुरू हुआ असली संघर्ष

दस्तावेज़ों की लंबी सूची, बैंकों के बार-बार चक्कर, ऋण अस्वीकृतियाँ और सामाजिक दबाव। मायके और ससुराल दोनों ओर से एक ही सलाह मिली यह लफड़ा मत पालो। अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें कि आप अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।

अंजना की जुनून के आगे बढ़ने में पति का रहा साथ

ऐसे समय में उनके पति अनिल कुमार उनके सबसे बड़े संबल बना। दसवीं तक पढ़े अनिल कुमार को उद्योग का अनुभव नहीं था, लेकिन मेहनत, खेती और परिवार की जिम्मेदारी निभाने का जज्बा भरपूर था। उन्होंने अंजना के सपने को अपना सपना बना लिया। अंततः बैकुंठपुर स्थित एचडीएफसी बैंक से 30 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। कटघोरा से मशीनें मंगाई गईं, शेड का निर्माण हुआ, कोरबा से फ्लाईऐश और स्थानीय स्तर से रेत-सीमेंट की व्यवस्था की गई।

सपना बना हकीकत

अगस्त 2025 में इकाई का लोकार्पण हुआ और अक्टूबर 2025 से उत्पादन शुरू हुआ है। आज अंजना उरांव की अंजना इंटरप्राइजेज फ्लाईऐश ब्रिक्स इकाई लगातार उत्पादन कर रही है। अब तक लगभग 80 हजार ईंटों का निर्माण हो चुका है। वे प्रतिमाह 60 हजार रुपये की बैंक किश्त नियमित रूप से जमा कर रही हैं, बिना किसी चूक के। संयुक्त परिवार, खेती, बच्चों की परवरिश और उद्योग, सब कुछ संतुलन के साथ चल रहा है। चार एकड़ भूमि पर धान और गेहूं की खेती भी जारी है। अब ईंटों की मांग बढ़ती जा रही है। जल्द ही वे ईंट रखने की लकड़ी की ट्रॉली (पीढ़ा) खरीदने वाली हैं। उनका लक्ष्य है प्रतिदिन 15 हजार ईंट उत्पादन और प्रतिमाह 6 से 7 लाख रुपये का कारोबार ।

डस्टबिन से मिली पहचान

आज वही परिवार और समाज, जिसने कभी उन्हें रोका था, उनके साहस की सराहना करता है। अंजना उरांव स्वयं कहती हैं, श्लोग जिस डस्टबिन को कचरा समझते हैं, उसी डस्टबिन ने मुझे मेरी पहचान दी। इसलिए जहाँ से भी ज्ञान मिले, उसे अपनाइए। मेहनत, जुनून और लगन से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।

सकारात्मक और प्रेरणादायक लोगों के साथ रहें, जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी का कहना है कि अंजना उरांव निश्चित ही उन महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो साधनों और संसाधनों के अभाव का हवाला देकर आगे बढ़ने से रुक जाती हैं। सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ लेकर एक सफल उद्यमी बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही अंजना पर गर्व किया जाना चाहिए।

यह एक कहानी नहीं, बल्कि एक संदेश

अंजना उरांव की यह कहानी सिर्फ़ एक महिला उद्यमी की सफलता नहीं है। यह कहानी है सरकारी योजनाओं के सही उपयोग, ग्रामीण महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत की जमीनी तस्वीर और उस सोच की, जो अवसर को कचरे में भी खोज लेती है। डस्टबिन से उद्योग तक का यह सफ़र बताता है कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और अटूट आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है, तभी मजिल को हासिल किया जा सकता है।

धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, एल.डी. मानिकपुरी सहायक जनसंपर्क अधिकारी

फिर हाथी का कहर - जंगल गए बुजुर्ग को कुचल डाला, गांवों में दहशत

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 रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में मानव-हाथी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल रेंज अंतर्गत ग्राम चुहकीमार में जंगली हाथी के हमले से 70 वर्षीय गंगाराम सारथी की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।


जानकारी के अनुसार, गंगाराम सारथी रोज की तरह सुबह जंगल लकड़ी लेने गए थे। दोपहर करीब ढाई बजे जंगल के भीतर उनका सामना एक विशालकाय जंगली हाथी से हो गया। अचानक हुए हमले में हाथी ने उन्हें पटक-पटककर कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद गांव में सन्नाटा

घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सूचना पर वन विभाग की टीम और हाथी मित्र दल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।

वन विभाग ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

ग्रामीणों को जंगल में अकेले न जाने की चेतावनी

वन अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएं और हाथियों के संभावित मूवमेंट रूट से दूरी बनाए रखें। क्षेत्र में लगातार हाथियों की गतिविधि के चलते विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

रायगढ़ जिले में 101 जंगली हाथी, खतरा बरकरार

वन विभाग के अनुसार, रायगढ़ जिले में इस समय कुल 101 जंगली हाथी विचरण कर रहे हैं।

  • रायगढ़ वन मंडल में – 59 हाथी
  • धरमजयगढ़ वन मंडल में – 42 हाथी

इनमें 32 नर, 48 मादा और 21 शावक शामिल हैं। ग्राम चुहकीमार के आसपास के जंगलों में फिलहाल 12 हाथियों का एक दल सक्रिय है, जिससे आसपास के गांवों में लगातार खतरा बना हुआ है।

रात में भी हाथियों का उत्पात

बीती रात लैलूंगा रेंज में भी दंतैल हाथी ने जमकर उत्पात मचाया।
टोंगोटोला, झारआमा, पाकरगांव और सागरपाली गांवों में पांच ग्रामीणों के मकान ध्वस्त हो गए। वहीं प्रेमनगर और कुडेकेला क्षेत्रों में खड़ी फसलों और सिंचाई पाइपलाइनों को भारी नुकसान पहुंचा है।

वन विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही हैं और ग्रामीणों को लगातार सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

सोशल मीडिया बना मौत की वजह! रील बनाने को लेकर विवाद, भिलाई में महिला की आत्महत्या

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 भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर रील बनाने को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद ने एक महिला की जान ले ली। यह घटना छावनी थाना क्षेत्र की है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है।


मृतका की पहचान अंजली साव (35 वर्ष) के रूप में हुई है, जो भिलाई की निवासी थी। अंजली इंस्टाग्राम पर सक्रिय थी और रील बनाती थी, लेकिन उसका यह शौक उसके पति को पसंद नहीं था। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।

बच्चों के ट्यूशन जाने के बाद उठाया खौफनाक कदम

जानकारी के अनुसार, अंजली अपने पति पप्पू साव और दो बच्चों के साथ रहती थी। वह गृहिणी थी, जबकि पति निजी काम करता है। 30 जनवरी को भी दोनों के बीच रील बनाने को लेकर विवाद हुआ था।

शाम के समय जब दोनों बच्चे ट्यूशन के लिए घर से बाहर गए, उसी दौरान अंजली ने पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बच्चों के वापस लौटने पर उन्होंने मां को फंदे से लटका देखा और जोर-जोर से चीखने लगे। बच्चों की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस व पति को सूचना दी गई।

पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच

सूचना मिलते ही छावनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची, शव को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। रविवार को अंजली का अंतिम संस्कार किया गया।

पहले भी कर चुकी थी आत्महत्या की कोशिश

स्थानीय लोगों के अनुसार, अंजली मोहल्ले में रील और डांस वीडियो को लेकर काफी चर्चित थी। उसने 26 जनवरी को इंस्टाग्राम पर अपनी आखिरी पोस्ट साझा की थी। बताया गया है कि दिसंबर महीने में भी उसने आत्महत्या की कोशिश की थी, तब उसने धतूरा खा लिया था। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी जान बच गई थी। इसके बाद से उसका व्यवहार चिड़चिड़ा हो गया था।

फिलहाल पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है और आगे की जांच की जा रही है।

छावनी थाना क्षेत्र में दूसरी आत्महत्या की घटना

इसी थाना क्षेत्र से आत्महत्या की एक और घटना सामने आई है। कैंप-1 श्याम नगर इलाके में रहने वाली 27 वर्षीय युवती नीतू कोरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

नीतू अपने दो भाइयों के साथ रहती थी। यह घटना 31 जनवरी और 1 फरवरी की दरम्यानी रात की बताई जा रही है। सूचना मिलने पर छावनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

आत्महत्या के कारण अभी अज्ञात

फिलहाल नीतू कोरी द्वारा आत्महत्या किए जाने के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। मामले की जांच के तहत परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है।

मां महामाया की नगरी रतनपुर बनेगी कॉरिडोर सिटी, अरुण साव का ऐलान

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 रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 1 फरवरी को रतनपुर में माघी पूर्णिमा एवं आदिवासी विकास मेला वर्ष-2026 का शुभारंभ किया। साव ने इस अवसर पर ऑडिटोरियम निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपए और नगर पालिका भवन में बाउंड्रीवाल के लिए 20 लाख रुपए देने की घोषणा की।


उप मुख्यमंत्री साव ने कार्यक्रम में कहा कि रतनपुर पवित्र और पौराणिक नगरी है, इसकी ख्याति दुनिया भर में है। इस ख्याति के अनुरूप यहां बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यह कभी छत्तीसगढ़ की राजधानी रही है। इसके अनुरूप गरिमा बढ़ाने का काम करेंगे।


साव ने बताया कि रतनपुर को कॉरीडोर के रूप में विकसित करने का काम करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के धार्मिक स्थलों को सजाने और संवारने का काम हुआ है। मां महामाया की कृपा से रतनपुर को भी संवारेंगे। रतनपुर के तालाबों के सौंदर्यीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसे सुंदर बनाने पूरे मन से कार्य करेंगे।

विधायक सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत के अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी और नगर पालिका के अध्यक्ष लवकुश कश्यप सहित पार्षदगण एवं नगरवासी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।

गरियाबंद में हिंसा: दो पक्षों की झड़प में 10 घर जले, पुलिसकर्मी घायल, भारी पुलिस बल तैनात

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 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पुराने विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष के घरों पर हमला कर दिया और करीब 10 घरों में आग लगा दी, वहीं 3 से 4 वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। घटना में एक पुलिसकर्मी घायल हुआ है। पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।


यह मामला फिंगेश्वर थाना क्षेत्र के बकली गांव का है। हालात बिगड़ने के बाद गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव भी किया, जिसमें एक जवान घायल हो गया। घायल पुलिसकर्मी को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। देर रात आईजी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया गया, हालांकि गांव में अब भी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें गांव में तैनात हैं। एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पुराने विवाद से जुड़ा मामला

पुलिस के अनुसार, यह विवाद एक पुराने झगड़े और लूटपाट की घटना से जुड़ा है। चार आरोपियों और शिकायतकर्ता के बीच पहले भी मारपीट हो चुकी है।

चार महीने पहले का वीडियो बना था विवाद की जड़

बताया जा रहा है कि करीब चार महीने पहले हथखोज गांव से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें कुछ युवक राहगीरों के साथ मारपीट और लूटपाट करते नजर आए थे। इसके बाद फिंगेश्वर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

जेल से छूटने के बाद फिर भड़का विवाद

रविवार (1 फरवरी) सुबह करीब 11 बजे, जेल से जमानत पर छूटे आरोपियों ने बकली गांव में शिकायतकर्ता को देखते ही उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। देखते ही देखते मामला दो पक्षों के बीच संघर्ष में बदल गया और हिंसा फैल गई।

आरोपियों के घरों में आगजनी

इसके बाद दूसरे पक्ष के लोगों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने आरोपियों के घरों में आग लगा दी। आगजनी की इस घटना में कई मकान और वाहन जलकर क्षतिग्रस्त हो गए।

ग्रामीणों का आरोप: मंदिर विवाद से जुड़ा मामला

ग्रामीण जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि यह विवाद केवल ताजा घटना तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि डेढ़ साल पहले गांव के शिव मंदिर को तोड़ा गया था, जिसका मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और आरोपी जमानत पर बाहर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसी पुराने विवाद को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है।

पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

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