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कोरिया गणराज्य के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश से भेंट की

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कोरिया गणराज्य के राष्ट्रीय विधानसभा के माननीय उपाध्यक्ष ली हैक-यंग के नेतृत्व में एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने आज संसद भवन में राज्यसभा के माननीय उपसभापति हरिवंश से भेंट की।

बैठक के दौरान हरिवंश ने कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य सशक्त एवं प्रगतिशील लोकतंत्र हैं तथा दोनों देशों के बीच संसदीय आदान-प्रदान की एक मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि दोनों संसदों के बीच नियमित संवाद और संपर्क ने भारत-कोरिया विशेष सामरिक साझेदारी को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

द्विपक्षीय सहयोग के बहुआयामी स्वरूप को रेखांकित करते हुए हरिवंश ने कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य के बीच व्यापार एवं निवेश, रक्षा, संस्कृति तथा जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में घनिष्ठ साझेदारी है, जो लोकतंत्र, विधि के शासन, वैश्विक शांति एवं समृद्धि के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।

दोनों देशों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए हरिवंश ने कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य के बीच अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना और गिम्हे के राजा किम सुरो के वैवाहिक संबंध के माध्यम से गहरे सभ्यतागत संबंध स्थापित हुए हैं, जो दोनों राष्ट्रों के बीच प्राचीन जुड़ाव को दर्शाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यह गर्व का विषय है कि वर्ष 2011 में कोरिया गणराज्य की सरकार ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में सियोल में नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव टैगोर की प्रतिमा स्थापित की। श्री हरिवंश ने स्मरण कराया कि गुरुदेव टैगोर ने वर्ष 1929 में ‘लैम्प ऑफ द ईस्ट’ कविता की रचना की थी, जिसमें उन्होंने कोरिया के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की प्रशंसा की थी, जिसे आज भी कोरियाई जनता स्नेहपूर्वक याद करती है।

हरिवंश ने द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश में निरंतर वृद्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 27 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। भारत में कोरियाई कंपनियों की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हुंडई, सैमसंग और एलजी भारत में घरेलू नाम बन चुके हैं।

साझा दृष्टिकोण को ठोस कार्यरूप देने में सांसदों की भूमिका को रेखांकित करते हुए हरिवंश ने संसदीय सहयोग को और सुदृढ़ करने के लिए आगंतुक प्रतिनिधिमंडल को अपने पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सतत संवाद और आदान-प्रदान से भारत और कोरिया गणराज्य के संबंधों की पूर्ण क्षमता साकार होगी तथा प्रतिनिधिमंडल को भारत में सुखद एवं फलदायी प्रवास की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर राज्यसभा की सदस्य रेखा शर्मा, मुजीबुल्ला खान, डॉ. परमार जशवंतसिंह सलामसिंह, राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी, राज्यसभा सचिवालय एवं विदेश मंत्रालय (एमईए) के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे सिरपुर महोत्सव का शुभारम्भ

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी सिरपुर में 1 फरवरी से 3 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव की तैयारियां लगभग अंतिम चरण में हैं। माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव का शुभारंभ 1 फरवरी 2026 को भव्य उद्घाटन समारोह के साथ होगा, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा एवं जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री को महोत्सव में शामिले होने आमंत्रित किया गया है। उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल करेंगे।


उद्घाटन अवसर पर अति विशिष्ट अतिथि के रूप में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं जिले के प्रभारी दयाल दास बघेल, वित्त, वाणिज्यिक कर मंत्री ओ.पी. चौधरी, सांसद रूप कुमारी चौधरी शामिल होंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक महासमुंद योगेश्वर राजू सिन्हा, विधायक बसना संपत अग्रवाल, विधायक खल्लारी द्वारिकाधीश यादव, विधायक सरायपाली चातुरी नन्द, जिला पंचायत अध्यक्ष मोंगरा पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चन्द्रहास चन्द्राकर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर, नगर पालिका अध्यक्ष महासमुंद श्रीनिखिल कांत साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशा दीवान, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष बागबाहरा खिलेश्वरी बघेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष बागबाहरा केशव नायकराम चंद्राकर, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सरायपाली सरस्वती चन्द्र पटेल (मीलू), जनपद पंचायत अध्यक्ष पिथौरा उषा धृतलहरे, नगर पंचायत अध्यक्ष बसना डॉ. खुशबू अभिषेक अग्रवाल, जनपद पंचायत अध्यक्ष बसना डिलेश्वरी निराला, नगर पंचायत अध्यक्ष पिथौरा देवेश निषाद, जनपद पंचायत अध्यक्ष सरायपाली लक्ष्मी पटेल, नगर पंचायत अध्यक्ष तुमगांव बलरामकांत साहू, जिला पंचायत सदस्य सृष्टि चंद्राकर, राज्य मुख्य आयुक्त, भारत स्काउट एवं गाइड संघ इंद्रजीत सिंह खालसा गोल्डी, जनपद पंचायत सदस्य श्रीमती दशरी ध्रुव एवं भारत स्काउट एवं गाइड संघ के अध्यक्ष श्री येतराम साहू एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।

सिरपुर महोत्सव का समापन समारोह 3 फरवरी 2026 को आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल शामिल होंगे तथा अध्यक्षता सांसद रूप कुमारी चौधरी करेंगी। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक महासमुन्द योगेश्वर राजू सिन्हा, विधायक बसना संपत अग्रवाल, विधायक खल्लारी द्वारिकाधीश यादव, विधायक सरायपाली चातुरी नन्द, जिला पंचायत अध्यक्ष मोंगरा पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चन्द्रहास चन्द्राकर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर, नगर पालिका अध्यक्ष महासमुंद निखिल कांत साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दिशा दीवान, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष बागबाहरा खिलेश्वरी बघेल, जनपद पंचायत बागबाहरा केशव नायकराम चंद्राकर, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सरायपाली सरस्वती चन्द्र पटेल (मीलू), जनपद पंचायत अध्यक्ष पिथौरा उषा धृतलहरे, नगर पंचायत अध्यक्ष बसना डॉ. खुशबू अभिषेक अग्रवाल, जनपद पंचायत अध्यक्ष पिथौरा डिलेश्वरी निराला, नगर पंचायत अध्यक्ष पिथौरा देवेश निषाद, जनपद पंचायत अध्यक्ष सरायपाली लक्ष्मी पटेल, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सृष्टि चंद्राकर, राज्य मुख्य आयुक्त भारत स्काउट एवं गाइड संघ छत्तीसगढ़ इन्द्रजीत सिंह खालसा गोल्डी, जनपद पंचायत सदस्य दशरी ध्रुव तथा जिला अध्यक्ष भारत स्काउट एवं गाइड संघ येतराम साहू तथा गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।

सिरपुर में आयोजित इस तीन दिवसीय महोत्सव को लेकर जिला प्रशासन एवं सिरपुर साडा द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा एवं आवागमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जिला प्रशासन महासमुंद एवं सिरपुर साडा द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस सांस्कृतिक महोत्सव में सहभागिता करें।

सिरपुर महोत्सव में मुख्यमंत्री साय देंगे लगभग 200 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात

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 महासमुंद : ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी सिरपुर में आयोजित होने वाले सिरपुर महोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय जिले को विकास की बड़ी सौगात देंगे। वे जिले में कुल 199 करोड़ 28 लाख 59 हजार रुपए की लागत की 99 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इनमें 40 करोड़ 88 लाख 2 हजार रुपए की लागत के 64 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 158 करोड़ 40 लाख 57 हजार रुपए की लागत के 35 विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है।


कार्यक्रम अंतर्गत लोकार्पण किए जाने वाले कार्यों में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के 98 लाख 80 हजार रुपए की लागत के 4 विकास कार्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 6 करोड़ 64 लाख 20 हजार रुपए की लागत के 19 विकास कार्य, आदिवासी विकास विभाग के 1 करोड़ 52 लाख 97 हजार रुपए की लागत का 1 विकास कार्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 17 करोड़ 95 लाख 86 हजार रुपए की लागत के 26 विकास कार्य तथा विद्युत विभाग के 13 करोड़ 76 लाख 19 हजार रुपए की लागत के 14 विकास कार्य शामिल हैं।

इसी प्रकार भूमिपूजन के अंतर्गत लोक निर्माण विभाग द्वारा 141 करोड़ 19 लाख 19 हजार रुपए की लागत से 22 विकास कार्य, जल संसाधन विभाग के 10 करोड़ 32 लाख 72 हजार रुपए की लागत से 3 विकास कार्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 2 करोड़ 18 लाख 93 हजार रुपए की लागत से 8 विकास कार्य तथा परिवहन विभाग के 4 करोड़ 69 लाख 73 हजार रुपए की लागत से 2 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया जाएगा।

पीएम आवास निर्माण में बलौदाबाजार छत्तीसगढ राज्य में अव्वल

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 रायपुर : प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक आवास योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण बेघर नागरिकों को पक्का मकान प्रदान करना है।इस योजना के तहत कच्चे मकानों में रहने वाले या बिना छत वाले परिवारों को पक्के मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसमें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।


बलौदाबाजार- भाटापारा जिले की उपलब्धियों की फेहरिश्त में एक और कामयाबी शुमार हो गया है। जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2025-26 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बलौदाबाजार -भाटापारा जिला पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में प्रथम स्थान पर है।

बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत के नेतृत्व में जिले ने न केवल आवासों की स्वीकृति में तेजी दिखाई है, बल्कि धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करने में भी रिकॉर्ड कायम किया है।
वर्ष 2025-26 में कुल 26843 आवास स्वीकृत किया है जिसमें 24 हजार 313 आवासों को प्रथम किश्त जारी, 20 हजार 480 आवास का निर्माण प्रारम्भ हो गया है और 15 हज़ार 120 आवास प्लिंथ स्तर तक पूर्ण हो गया है।

सर्वाधिक प्लिंथ निर्माण -

बलौदाबाजार- भाटापारा जिले में 15 हजार 120 आवासों का प्लिंथ स्तर तक का कार्य पूर्ण हो चुका है, जो राज्य के किसी भी जिले की तुलना में सर्वाधिक है।26 हजार 439 आवासों का एफटीओ किया जा चुका है जिसमें से 24 हजार 313 हितग्राहियों के खातों में पहली किश्त का सफलतापूर्वक हस्तांतरण किया जा चुका है।

कुल स्वीकृत आवासों में से 20 हजार 480 मकानों पर काम शुरू हो जाना एवं 139 आवास पूर्ण प्रशासन की मुस्तैदी और ग्रामीणों के उत्साह को दिखाता है। पीएम जनमन योजना अंतर्गत भी जिला में प्राथमिकता से कार्य कराके 25 पात्र हितग्राहियों का आवास स्वीकृत कर सभी का शतप्रतिशत आवास पूर्ण करा लिया गया है।

रेनवाटर हार्वेस्टिंग संरचना निर्माण

जिले को जल संचयन में देश मे द्वितीय पुरुस्कार प्राप्त हुआ है जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के हितग्राहियों का विशेष योगदान रहा है। आवास योजनान्तर्गत पूर्ण आवासो में 15 हजार 260 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचना का निर्माण कराया गया है।
इस उपलब्धि से जिले के हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना अब हकीकत में बदल रहा है। यह न केवल ग्रामीण विकास को गति दे रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।

प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों को मिला डीज़ीपीएस सर्वे एवं वन्यजीव प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण

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 रायपुर : बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन गत दिवस किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, आईटी आधारित वन प्रबंधन तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। इस प्रशिक्षण से भावी वन सेवा के अधिकारियों ने क्षेत्रीय स्तर पर उपयोग में आने वाली तकनीक एवं प्रबंधन प्रक्रियाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित हुए।


वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अखिल भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि आप सभी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर अपनी कौशल को विकसित करें और छत्तीसगढ की वन संपदा की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सतत कार्य करे l उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारी को अपनी शुभकामनाएं दीं l


प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्रीय निदेशक सुश्री स्तोविषा समझदार ने डीज़ीपीएस की कार्यप्रणाली, उसकी उपयोगिता तथा वन सर्वेक्षण, सीमांकन एवं प्रबंधन में इसके महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीज़ीपीएस आधारित सर्वेक्षण से वन क्षेत्रों में सटीक डेटा संग्रह संभव होता है जो दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।

इसी क्रम में उप-निदेशक, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व वरुण जैन ने “गज संकेत” मोबाइल एप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एप हाथी मॉनिटरिंग, मूवमेंट ट्रैकिंग, मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन तथा त्वरित सूचना साझा करने में एक प्रभावी डिजिटल टूल के रूप में कार्य करता है। प्रशिक्षु अधिकारियों को एप के फील्ड उपयोग, डेटा एंट्री एवं प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी एवं फील्ड आधारित प्रशिक्षण भावी वन सेवा के अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल टूल्स एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है तथा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को जमीनी स्तर पर बेहतर निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होंगे।

अधीक्षक बारनवापारा अभ्यारण्य कृषानू चन्द्राकार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बारनवापारा अभ्यारण्य की भौगोलिक, पारिस्थितिक एवं संरक्षण संबंधी विशेषताओं की जानकारी दी । इसके साथ ही अधिकारियों को अभ्यारण्य में संचालित वनभैंसा संरक्षण केंद्र, ब्लैकबक रिलोकेशन एवं संरक्षण केंद्र, ग्रासलैंड विकास क्षेत्रों सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जिससे उन्हें संरक्षण कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला। 

पूर्व CM भूपेश बघेल को सोशल मीडिया पर गाली देना पड़ा भारी, आरोपी गिरफ्तार

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा और गाली-गलौज करने का मामला सामने आने के बाद रायपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है।


पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान अमित सेन के रूप में हुई है, जो भिलाई स्थित आरोग्य हॉस्पिटल में ड्रेसर के पद पर कार्यरत था। आरोपी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट साझा की गई थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई।

बताया गया कि कुछ दिन पहले एक वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर सामने आई थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था। इस मामले को लेकर NSUI अध्यक्ष शान्तनु झा के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ता और प्रदेश पदाधिकारी 27 जनवरी को सिविल लाइन थाना पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। NSUI ने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी अमित सेन के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 352, 353(2) एवं 356 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया। इसके बाद 29 जनवरी (गुरुवार) को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी की ओर से भी कड़ा रुख अपनाया गया। जिला कांग्रेस कमेटी, भिलाई द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया तथा सुपेला थाना प्रभारी विजय यादव को ज्ञापन सौंपते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। विरोध के बाद पुलिस ने जांच में तेजी लाई।

आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि सहायक पुलिस आयुक्त रमाकांत साहू ने की है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने शराब के नशे में आपत्तिजनक पोस्ट किया था। आरोपी मूलतः मध्यप्रदेश के शहडोल जिले का निवासी बताया जा रहा है।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

CG NEWS : 17 साल बाद इंसाफ: CG के चर्चित फर्जी टॉपर कांड में पोराबाई समेत 4 को 5 साल की जेल

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 जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 12वीं बोर्ड टॉपर फर्जीवाड़ा मामले में करीब 17 वर्ष बाद अदालत ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश गणेश राम पटेल की अदालत ने फर्जी टॉपर पोराबाई सहित चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले से शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।


मामला वर्ष 2008 का है, जब सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल, बिर्रा की छात्रा पोराबाई को छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा में राज्य में प्रथम स्थान मिला था। परिणाम घोषित होते ही पोराबाई को टॉपर घोषित कर सम्मानित करने की तैयारी शुरू हो गई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद अंकों की असामान्यता और उत्तर पुस्तिकाओं की लिखावट में अंतर को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ।


तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा मंडल के उप सचिव पी.के. पांडेय के निर्देश पर विशेष जांच कराई गई। जांच के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं में ओवरराइटिंग, अलग-अलग हैंडराइटिंग और अंकों में हेरफेर के ठोस प्रमाण सामने आए। इसके बाद बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाते हुए बिलासपुर संभागीय अधिकारी के माध्यम से पोराबाई सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया।

जांच मेंй रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि एक सुनियोजित साजिश के तहत उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर कर पोराबाई को राज्य की टॉपर बनाया गया। इस मामले में स्कूल प्राचार्य, परीक्षा केंद्राध्यक्ष और शिक्षक की संलिप्तता भी सामने आई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान चांपा मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 27 दिसंबर 2020 को सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से 29 जुलाई 2021 को जांजगीर सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई।

सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक केदारनाथ कश्यप ने अदालत के समक्ष उत्तर पुस्तिकाएं, जांच रिपोर्ट, गवाहों के बयान और बोर्ड अधिकारियों के दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। वहीं बचाव पक्ष ने पूरे मामले को मात्र संदेह के आधार पर की गई कार्रवाई बताया।

सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट रूप से माना कि यह मामला साधारण लापरवाही का नहीं, बल्कि संगठित साजिश का है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतनी बड़ी शैक्षणिक अनियमितता अंदरूनी मिलीभगत के बिना संभव नहीं थी।

अदालत ने पोराबाई को इस फर्जीवाड़े का मुख्य लाभार्थी माना, जबकि स्कूल प्राचार्य, केंद्राध्यक्ष और शिक्षक को साजिश का सक्रिय हिस्सा करार दिया। इसके आधार पर चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा मंडल अध्यक्ष बी.के.एस. रे ने गवाही में बताया कि मेरिट सूची देखने के बाद वे पोराबाई को सम्मानित करना चाहते थे। जब उन्होंने उसकी उत्तर पुस्तिका मंगाई तो असामान्य रूप से साफ लिखावट और अंग्रेजी के उच्चस्तरीय उत्तर देखकर उन्हें तत्काल फर्जीवाड़े का संदेह हुआ।

जांच में यह भी सामने आया कि पोराबाई का पूर्व शैक्षणिक रिकॉर्ड कमजोर था। परीक्षा केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार उसने परीक्षा स्वयं दी ही नहीं थी, बल्कि उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति ने उत्तर लिखे थे। इसी आधार पर मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि प्रारंभिक स्तर पर सबूतों के अभाव में आरोपी बरी हो गए थे, लेकिन बोर्ड की अपील पर अब 17 साल बाद अदालत ने सख्त सजा सुनाकर ऐतिहासिक फैसला दिया है। इस निर्णय को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।

सुकमा में टूटा माओवादी नेटवर्क, 4 इनामी नक्सलियों का सरेंडर

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 सुकमा। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर डिवीजन में चलाए जा रहे “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। जिला पुलिस सुकमा एवं आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिला पुलिस के संयुक्त प्रयासों से कुल 8 लाख रुपये के इनामी चार माओवादी कैडरों, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं, ने आत्मसमर्पण कर दिया।


आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों में गोलापल्ली LOS का कमांडर एवं अन्य पार्टी सदस्य शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने इनके कब्जे से SLR, INSAS, .303 और .315 बोर राइफल सहित भारी मात्रा में हथियार एवं गोला-बारूद बरामद किया है।

आत्मसमर्पण कार्यक्रम बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज (आईपीएस), पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण (आईपीएस), पंकज मीणा (आईपीएस), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह (आईपीएस) तथा 2IC कोंटा रेंज सीआरपीएफ अरविंद पी. आनंद की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति और लगातार दबाव के चलते माओवादी मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हो रहे हैं। यह आत्मसमर्पण अभियान क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

छात्रों से मारपीट पड़ा महंगा: महासमुंद में लेक्चरर निलंबित

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 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। शासकीय आशीबाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ व्याख्याता आशीष देवांगन को छात्रों के साथ दुर्व्यवहार एवं मारपीट के गंभीर आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा की गई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय की शाला प्रबंधन विकास समिति के सदस्य नीलम कुमार दीवान ने व्याख्याता के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शिक्षक द्वारा छात्र-छात्राओं के साथ लगातार डांट-डपट, मारपीट, कान मरोड़ने तथा सिर पर मारने जैसी अनुचित हरकतें की जाती थीं।


शिकायत के पश्चात मामले की जांच हेतु समिति गठित की गई। जांच समिति की रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके आधार पर लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा संबंधित शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, किंतु निर्धारित समय-सीमा में उनका कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।

जांच में दोषी पाए जाने पर उक्त कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए व्याख्याता आशीष देवांगन को निलंबित कर दिया गया।

निलंबन अवधि के दौरान शिक्षक का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, महासमुंद निर्धारित किया गया है। साथ ही नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को निर्देशित किया है कि निलंबन आदेश की तामिली सुनिश्चित करते हुए आरोप पत्र सहित समस्त दस्तावेज सात दिवस के भीतर संचालनालय को प्रेषित किए जाएं।

नए भारत की नई कार्य संस्कृति का प्रतीक है प्रगति पोर्टल: मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश सुशासन की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्लेटफॉर्म सरकार की कथनी और करनी में समानता का सशक्त प्रमाण है तथा सुशासन की दिशा में एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है।


मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में प्रगति पोर्टल के संबंध में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रगति पोर्टल केवल देश की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नए भारत की नई कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह प्लेटफॉर्म मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्सिमम गवर्नेंस की कार्यशैली को सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को विश्वभर में एक आदर्श प्रणाली के रूप में देखा जाता है। इसके पीछे केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, समन्वय और सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रगति प्लेटफॉर्म केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए एक प्रभावी सेतु का कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रगति का अर्थ- प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन है, अर्थात् योजनाओं की पूर्व तैयारी कर उनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। यह प्लेटफॉर्म केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन प्रणाली में जवाबदेही तय करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कार्य संस्कृति में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि पूर्व में अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास तो हो जाता था, लेकिन उनके पूर्ण होने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती थी। कई निर्माण कार्य वर्षों तक लंबित रहते थे। योजनाओं में विलंब, प्रशासनिक अड़चनें और विभागीय समन्वय की कमी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म को लागू किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रधानमंत्री स्वयं राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र सरकार के सचिवों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करते हैं। अब तक 50 से अधिक उच्चस्तरीय प्रगति समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से लंबित परियोजनाओं, कमजोर प्रदर्शन वाली योजनाओं और नागरिकों से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 85 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 3,300 से अधिक परियोजनाओं को गति दी गई है। इसके साथ ही एक देश-एक राशन कार्ड, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम स्वनिधि और स्वच्छ भारत मिशन सहित 61 योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। बैंकिंग, बीमा, रेरा, जनधन योजना और मातृत्व वंदना सहित 36 क्षेत्रों में शिकायत निवारण व्यवस्था को भी प्रगति के माध्यम से सुदृढ़ किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में भी प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 99 राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनमें 6.11 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इनमें से 50 परियोजनाएँ पूर्ण होकर संचालित हो चुकी हैं, जबकि शेष परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। उन्होंने बताया कि प्रगति पोर्टल पर छत्तीसगढ़ से संबंधित कुल 200 मुद्दे दर्ज किए गए, जिनमें से 183 का सफल समाधान किया जा चुका है। इस प्रकार राज्य की समाधान दर 91 प्रतिशत से अधिक रही है। पावर, सड़क परिवहन, रेलवे, कोयला और इस्पात जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लंबित परियोजनाओं की समस्याओं को प्रभावी ढंग से हल किया गया है। सेक्टर के हिसाब से बात करें तो पावर सेक्टर में 24 प्रोजेक्ट का समाधान किया गया। सड़क परिवहन और राजमार्ग के 23 प्रोजेक्ट, रेलवे के 14 प्रोजेक्ट, कोयला सेक्टर के 07 प्रोजेक्ट, स्टील सेक्टर के 09 प्रोजेक्टों का समाधान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भिलाई स्टील प्लांट के आधुनिकीकरण तथा लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट जैसी वर्षों से लंबित परियोजनाओं को प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से गति मिली है। इससे राज्य के औद्योगिक विकास को बल मिला है और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। इसी तरह रायपुर-कोडेबोड मार्ग के फोरलेन कार्य में भूमि उपयोगिता और सामग्री आपूर्ति संबंधी समस्याएं आ रही थी, जिसे प्रगति प्लेटफॉर्म के जरिए हल किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार विकास कार्यों को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमारी सरकार ने भी छत्तीसगढ़ में सुशासन की दिशा में ऐसे ही कई नवाचार किए हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी इस नवाचार की तारीफ की है। इसे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावी तंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी जब विकसित भारत को लेकर अपने विजन की बात करते है, तो यह सिर्फ शब्द नहीं होते, बल्कि विकसित भारत का पूरा रोडमैप होता है। यह बात प्रगति प्लेटफॉर्म जैसे नवाचार से साबित होता है।

नारायणपुर से सीएम साय आज जारी करेंगे महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज 30 जनवरी को नारायणपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त की राशि जारी करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश की 68 लाख 39 हजार 592 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से कुल 641 करोड़ 34 लाख रुपए की राशि का अंतरण किया जाएगा।


उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 21 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु की विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।

योजना के शुभारंभ से अब तक 23 किस्तों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को कुल 14 हजार 954.42 करोड़ रुपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। यह व्यवस्था वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल सिद्ध हो रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 24वीं किस्त के रूप में 641.34 करोड़ रुपए की राशि जारी किए जाने के पश्चात महतारी वंदन योजना के अंतर्गत कुल वितरित राशि बढ़कर 15 हजार 595.77 करोड़ रुपए हो जाएगी। यह राज्य सरकार की महिला कल्याण एवं सशक्तिकरण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा यह प्रमाणित करती है कि योजना से प्रदेश की लाखों महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रही हैं।

विशेष लेख : सिरपुर आस्था, कला और इतिहास का जीवंत संगम

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छत्तीसगढ़ ही नहीं देश की पुरातत्विक धरोहर है सिरपुर महोत्सव, 01 से 03 फरवरी तक भव्य रूप में आयोजित होगा तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव


महासमुंद : छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में पर्व, मड़ई और मेलों की परंपरा सदियों से रची-बसी है। इन्हीं परंपराओं में सिरपुर महोत्सव का विशेष स्थान है, जो प्रतिवर्ष पवित्र महानदी के तट पर माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित किया जाता है। इस वर्ष तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव 01 फरवरी 03 फरवरी 2026 तक भव्य रूप में आयोजित किया जा रहा है।

माघी पूर्णिमा की भोर में आस-पास के ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं द्वारा महानदी में पुण्य स्नान कर गंधेश्वर नाथ महादेव के अलौकिक दर्शन-पूजन के साथ महोत्सव की शुरुआत होती है। वहीं तीन दिनों तक महानदी सांध्य आरती किया जाता है। यह परंपरा सिरपुर की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करती है। हर वर्ष आयोजित होने वाला सिरपुर महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ देते हैं। सिरपुर महोत्सव में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा आवागमन की विशेष व्यवस्था की जा रही है। महोत्सव अवधि के दौरान रायपुर से कुहरी मोड़ तक तथा जिले के सभी विकासखंड मुख्यालयों से सिरपुर तक बसों का प्रबंध किया गया है। निर्धारित रूटों पर बसें नियमित अंतराल में संचालित होंगी, जिससे अधिक से अधिक लोग महोत्सव के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों में सहभागी बन सकें।

सिरपुर को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हेरिटेज स्थल के रूप में विकसित करने हेतु शासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार ने सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विजन 2047 के तहत आधुनिक बुनियादी ढांचा, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अंर्तराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक कॉरिडोर विकसित करने प्रतिबद्ध है। सिरपुर की पुरातात्त्विक संरचनाओं को संरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकें अपनाई जा रही हैं। यहाँ के मंदिर, विहार, मूर्तियाँ और जीवंत परंपराएँ हमें यह सिखाती हैं कि भारत की संस्कृति, सहिष्णुता, कला और ज्ञान का संगम है। यहाँ ईको-ट्रेल, हस्तशिल्प बिक्री केंद्र और स्थानीय भोजनालय चलाई जा रही हैं, ताकि स्थानीय समुदाय को रोजगार मिले और पर्यटन को बढ़ावा मिले।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) केवल एक पुरातात्त्विक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का जीवंत प्रतीक है। यह नगर दक्षिण कोसल के पांडुवश के सबसे महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है और अपनी स्थापत्य कला, बौद्ध धरोहरों तथा प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।

सिरपुर का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है। यहाँ भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म के उपासना स्थलों के अवशेष मिले हैं। 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर का उल्लेख अपनी यात्राओं में किया है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय ख्याति सिद्ध होती है। यह नगर धार्मिक सहिष्णुता और कला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहाँ 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और एक विशाल बौद्ध विहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सिरपुर में लगातार संरक्षण और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है जिससे इसकी ऐतिहासिक गरिमा बनी रहे। डिजिटल टूर, क्यूआर कोड आधारित जानकारी और थ्रीडी गाइडेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।

सिरपुर बौद्ध, जैन और हिन्दू स्थापत्य कला का त्रिवेणी संगम है। यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर भारत का पहला ईंटों से निर्मित मंदिर है जो वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। आनंद प्रभु कुटीर विहार बौद्ध भिक्षुओं का प्रमुख केंद्र है, जहां चीन से आए भिक्षु रह चुके हैं। गंधेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है, जिसमें अनेक मूर्तियाँ और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। 1872 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा सिरपुर के अवशेषों की खोज की गई थी। इसके बाद यहाँ अनेक उत्खनन कार्य हुए, जिनमें बुद्ध, विष्णु, शिव और जैन परंपराओं के असंख्य साक्ष्य मिले। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के विद्वान भी सिरपुर को एशिया की बौद्ध धरोहरों में महत्वपूर्ण स्थान मानते हैं।

ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को मुख्य सचिव ने किया सम्मानित

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 रायपुर : मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्य सचिव ने मंत्रालय सहित राज्य शासन के सभी कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अनिवार्य रूप से निर्धारित समय में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए है।उन्होंने ऐसा नहीं करने वालों को सचेत करते हुए कार्यालय में निर्धारित समय पर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने कहा है।


मुख्य सचिव ने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नही करना स्वीकार नही होगा। मुख्य सचिव ने राज्य शासन के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस से ही फाईल संचालन करने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएग। मुख्य सचिव ने कहा है कि राज्य शासन के सभी अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में ऑनबोर्ड हो जायें। मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी वर्ष से अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश आवेदन ई-ऑफिस प्रणाली से ही स्वीकार किए जायेंगे। उन्होंने कहा कि अचल सम्पत्ति का विवरण और एसीआर भी प्रतिवर्ष ई-ऑफिस से ही दर्ज किया जाएगा। मुख्य सचिव ने अधिकारी-कर्मचारियों से कहा है कि टीम भावना से कार्य करें और पूरे देश में छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के रूप में दर्ज करायें। मुख्य सचिव ने सामान्य प्रशासन विभाग एवं राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों को विभागवार ई-ऑफिस का डेटा तैयार करने के निर्देश दिए। विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को उनके कार्यों की स्थिति की जानकारी एसएमएस द्वारा दी जायें।
मुख्य सचिव ने सभी से ई-ऑफिस में दक्षता से कार्य करने की अपेक्षा की है। उन्होंने आवश्यक निर्देश दिए कि अधिकारी-कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली का प्रशिक्षण देने कहा है। मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है उनमें ई-ऑफिस से फाईल वर्क करने के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव जयश्री जैन, आदिवासी विकास विभाग के संयुक्त सचिव भूपेन्द्र कुमार राजपुत और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त सचिव प्रणय मिश्रा को प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया है। उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव श्री दुरदेशी राम संतापर, सीएम सचिवालय के उप सचिव श्री तीरथ प्रसाद लाड़िया और सामान्य प्रशासन विभाग-1 के उप सचिव श्री किशोर कुमार भूआर्य को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। अवर सचिव श्रेणी में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव स्वर्गीय रणबहादुर ग्वाली, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव अरूण कुमार मिश्रा और गृह विभाग के अवर सचिव पूरनलाल साहू को ई फाईल के लिए प्रशंसा पत्र दिया गया। अनुभाग अधिकारियों में गृह विभाग के अनुभाग अधिकारी पी.नागराजन, सामान्य प्रशासन विभाग के अनुभाग अधिकारी नंदकुमार मेश्राम और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुभाग अधिकारी भोलेनाथ सारथी को प्रशंसा पत्र दिया गया। इसी तरह से ई-फाईल में अच्छा कार्य करने के लिए खनिज संसाधन विभाग के कनिष्ठ सहायक प्रदीप कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग-3 के कनिष्ठ सहायक दीनानाथ साहू और सामान्य प्रशासन विभाग-7 के कनिष्ठ सहायक श्री प्रदीप कुमार राय को प्रशंसा पत्र देकर ई-ऑफिस में ई-फाईल कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।

मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में मुख्य सचिव ने समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मंत्रालयीन अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया है। इसमें प्रथम 10 में प्रथम स्थान करने वालों में अवर सचिव राजेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी, संयुक्त सचिव भूपेन्द्र कुमार राजपूत, स्टेनोग्राफर नवीन नाग, सहायक अनुभाग अधिकारी योगेन्द्र कुर्रे, अतिरिक्त सचिव चंद्रकुमार कश्यप, संयुक्त सचिव अनुपम त्रिवेद्वी, अवर सचिव मनोज कुमार जायसवाल, सहायक अनुभाग अधिकारी पवन कुमार साहू, स्टेनोटायपिस्ट भावना यादव और अतिरिक्त सचिव भूपेन्द्र कुमार वासनिकर को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है। 

भारतमाला परियोजना को रफ्तार: रायपुर–बिलासपुर 6-लेन कॉरिडोर और समृद्धि मार्ग विस्तार का प्रस्ताव

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 रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने रायपुर के आरंग से बिलासपुर के दर्री तक लगभग 95 किलोमीटर लंबे 6-लेन एक्सेस कंट्रोल मार्ग के निर्माण और मुंबई–नागपुर समृद्धि मार्ग के विस्तार को रायपुर तक लाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है।


इस संबंध में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान डिप्टी सीएम ने छत्तीसगढ़ की आठ सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देने और 13 मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन की मांग भी रखी।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि राज्य के उत्तरी क्षेत्र में कोयला खदानें और दक्षिणी क्षेत्र में लौह अयस्क की खदानें स्थित हैं। ऐसे में मुंबई–नागपुर–रायपुर तक 8-लेन एक्सेस कंट्रोल कनेक्टिविटी औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारतमाला परियोजना से खनिज, स्टील और सीमेंट परिवहन को नई मजबूती मिलेगी।

आरंग से दर्री तक प्रस्तावित 6-लेन भारतमाला कॉरिडोर के निर्माण से रायपुर से बिलासपुर की दूरी लगभग एक घंटे में तय की जा सकेगी। साथ ही राज्य की तीनों भारतमाला सड़कें आपस में जुड़ेंगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय को सिरपुर महोत्सव में शामिल होने का आमंत्रण

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने जिले के ऐतिहासिक स्थल सिरपुर में 1 से 3 फरवरी के बीच आयोजित होने वाले सिरपुर महोत्सव में शामिल होने का आमंत्रण दिया।


प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि सिरपुर महोत्सव छत्तीसगढ़ की प्राचीन सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर को संजोए रखने और जनसामान्य तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष भव्य एवं गरिमामय रूप से आयोजित किया जाता है। यह आयोजन राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


मुख्यमंत्री साय ने सिरपुर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार, सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री धम्मशील गणवीर तथा धर्मेंद्र महोबिया उपस्थित थे।

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