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कोरिया में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, सड़े-गले फल जब्त कर नष्ट किए गए 108 किलो फल, दुकानों पर छापेमारी

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​बैकुंठपुर/कोरिया- कोरिया जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले फल विक्रेताओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया गया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक दीपक अग्रवाल के निर्देश पर और कलेक्टर रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन में कोरिया जिले की अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर के नेतृत्व में टीम ने पिछले तीन दिनों 27 मई से 29 मई तक, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताबड़तोड़ निरीक्षण किया। इस दौरान भारी मात्रा में सड़े-गले फल जब्त कर नष्ट कराए गए, वहीं दुकानदारों को सख्त हिदायत भी दी गई। अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि, 27 मई को अभियान की शुरुआत जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से हुई। यहाँ टीम ने 6 फल दुकानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी मात्रा में खराब फल पाए गए, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कराया गया। इस दौरान ​22 किलोग्राम आम, ​4 किलोग्राम सेब, ​14 दर्जन केले, ​1 किलोग्राम संतरा और 500 ग्राम अनार नष्ट कराया गया। इसी तरह से ​28 मई को कार्रवाई के दूसरे दिन टीम पटना पहुँची, जहाँ 9 फल दुकानों की जाँच की गई। टीम ने सभी दुकानदारों को सड़े एवं खराब फल न बेचने तथा दुकानों में स्वच्छता बनाए रखने की सख्त समझाइश दी। कार्रवाई के तीसरे दिन आज ​29 मई को जिला मुख्यालय में दोबारा कार्रवाई की गई। आज मुख्यालय के अलग-अलग क्षेत्र में फिर से 5 फल दुकानों का सघन जांच किया गया। यहाँ नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 77 किलोग्राम से अधिक फल और केले नष्ट कराए गए। जिनमें ​65 किलोग्राम तरबूज, 12 किलोग्राम आम, 0​1 किलोग्राम सेब, ​2 दर्जन केले, 0​1 किलोग्राम अंगूर और 0​1 किलोग्राम चुकंदर शामिल है। 

अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर ने दुकानदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि, लोगों के स्वास्थ्य से समझौता बर्दाश्त नहीं है। गर्मी के इस मौसम में सड़े-गले और हानिकारक रसायनों से पकाए गए फल बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सभी फल विक्रेताओं को अपनी दुकानों में साफ-सफाई रखने और केवल गुणवत्तापूर्ण फल ही बेचने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि, विभाग का यह जांच अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। इस कार्रवाई में नमूना सहायक प्रमोद पैकरा और निधि जायसवाल का योगदान रहा।


छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आम महोत्सव का शुभारंभ, मैंगो टूरिज्म और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा पर जोर

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भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है आम 

छत्तीसगढ़ में मैंगों टूरिज्म की है अपार संभावनाएं - रमेन डेका

रायपुर- आम केवल एक फल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आम उत्पादों को बडे रूप में विकसित करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

राज्यपाल रमेन डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व में आम उत्पादन में अग्रणी है और देश में एक हजार से अधिक किस्मों के आम पाए जाते है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के स्थानीय आमों की विशेषताओें का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उत्पादन से अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां और महोत्सव देश के विभिन्न राज्यों से आए आम उत्पादकों को एक-दूसरे की उन्नत खेती पद्धतियों, नई किस्मों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि बस्तर, कोण्डागांव, कांकेर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में आम उत्पादन की बहुत संभावनाएं है। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी इस क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के व्यापक अवसर मौजूद है। मैंगों टूरिज्म की भी छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं है।

राज्यपाल ने कहा कि आम उत्पादन के साथ-साथ इसके वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को मिलकर कार्य करना चाहिए। डेका ने कहा कि हमारे जीवन को ईको फैंडली बनाना आज की आवश्यकता है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना होगा। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम पर लगाने और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर दिया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आम फलों का राजा है। आम की पत्तियों और लकड़ियों का भी हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है। हमारे घरों में मांगलिक कार्य होने पर हम आम की पत्तियों से तोरण बनाते है एवं आम की सूखी लकड़ियों का उपयोग हवन एवं पूजा में करते है।

इस महोत्सव में 250 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियोें को इस महोत्सव का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। प्रदर्शनी मे बेर के आकार से लेकर बीजापुर के हाथीझुल जैसे बड़े किस्मों के आम भी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी के मंशानुरूप किसानों की आय दुगुनी करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और आम की खेती भी इस संकल्प को पूरा करने के लिए सहायक सिद्ध होगी।

आम महोत्सव के उद्घाटन पश्चात राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय ने आम उत्पादकों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी में आम के विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया । 

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी सहित अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, किसान एवं बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की समीक्षा बैठक में रिकॉर्ड प्रदर्शन, डिजिटल सुधार और वित्तीय समावेशन पर जोर

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वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान उनके परिचालन, वित्तीय और रणनीतिक प्रदर्शन का आकलन किया गया। इस बैठक में DFS के विशेष सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एमडी एवं सीईओ तथा कार्यकारी निदेशक उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान “आपकी पूँजी, आपका अधिकार (Your Money, Your Right)” शीर्षक से एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक देशभर में चलाए गए उस अभियान को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को उनके अनक्लेम्ड वित्तीय परिसंपत्तियों की पहचान करने और उन्हें वापस प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। इस पहल के तहत बैंकों, वित्तीय संस्थानों, नियामकों और अन्य हितधारकों के सहयोग से पिछले छह महीनों में लगभग ₹6,800 करोड़ की राशि लगभग 29 लाख लाभार्थियों को वापस की गई है।

बैठक में DFS की नवीनीकृत वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया। नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ तैयार यह पोर्टल अधिक सुगमता, सरल नेविगेशन और बेहतर सूचना प्रसार प्रदान करता है। यह वेबसाइट 23 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है और इसमें दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए विशेष सुविधाएँ भी शामिल हैं, जो समावेशी डिजिटल सेवा वितरण की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समीक्षा के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के व्यवसाय वृद्धि, लाभप्रदता, परिसंपत्ति गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग, एमएसएमई ऋण प्रवाह, साइबर सुरक्षा और परिचालन जोखिम प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत आकलन किया गया। बताया गया कि वित्त वर्ष 2025–26 में PSBs ने मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन किया है। कुल बैंकिंग व्यवसाय लगभग ₹283.3 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जबकि शुद्ध लाभ बढ़कर लगभग ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

बैठक में यह भी बताया गया कि सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) घटकर 1.93% और शुद्ध NPA घटकर 0.39% के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर आ गई है, जो बैंकिंग प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, पीएम मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा और डिजिटल लेंडिंग जैसी वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

डिजिटल लोन प्रोसेसिंग, ई-केवाईसी, पेपरलेस सिस्टम और सरकारी प्लेटफॉर्म के एकीकरण जैसे उपायों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में एमएसएमई क्षेत्र को ऋण उपलब्धता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और डिजिटल बैंकिंग प्रणाली को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।

अंत में सचिव ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बदलते वैश्विक परिदृश्य में सतर्क रहते हुए दक्षता, पारदर्शिता और ग्राहक सेवा पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को समर्थन मिल सके।

IGI Airport पर भारत की पहली SkyCast प्रणाली का उद्घाटन, विमानन सुरक्षा और मौसम पूर्वानुमान में नई क्रांति

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर भारत की पहली “SkyCast System” का उद्घाटन किया और इसे भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत बताया।

मंत्री ने बताया कि इस तरह की केवल 18 उन्नत प्रणालियाँ अभी तक विश्वभर में स्थापित हैं, और भारत अब 19वाँ देश बन गया है जिसने विमानन मौसम निगरानी के लिए इस एकीकृत एटमॉस्फेरिक रिमोट सेंसिंग सिस्टम को अपनाया है। IGI एयरपोर्ट के बाद ऐसी दूसरी सुविधा जेवर एयरपोर्ट पर स्थापित की जाएगी और इसके बाद इसे देश के अन्य हवाई अड्डों पर भी विस्तारित किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, IMD, IITM, GMR और विमानन क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईकास्ट सिस्टम और फॉग ऑब्जर्वेटरी सुविधा का उद्घाटन किया, जिसके बाद IITM के वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी प्रस्तुति और डेमो दिया गया।

डॉ. सिंह ने कहा कि “मिशन मौसम” के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच ने इस प्रकार की उन्नत मौसम अवसंरचना को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि स्काईकास्ट विमानन सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाएगा और गंभीर मौसम स्थितियों में रीयल-टाइम जानकारी प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली यात्रियों के लिए उड़ानों में देरी, डायवर्जन और रद्दीकरण को काफी हद तक कम करने में मदद करेगी, क्योंकि यह पायलटों को लगभग तीन घंटे पहले तक सटीक चेतावनी दे सकेगी।

स्काईकास्ट प्रणाली में अत्याधुनिक एटमॉस्फेरिक तकनीकें शामिल हैं, जैसे रडार विंड प्रोफाइलर, SODAR, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (GFAS) और CL61 LiDAR आधारित सीलामीटर। यह सिस्टम धुंध, टर्बुलेंस, दृश्यता और मौसम संबंधी रीयल-टाइम डेटा प्रदान करता है।

मंत्री ने बताया कि इसका मुख्य घटक रडार विंड प्रोफाइलर है, जो लगभग 3 किलोमीटर ऊंचाई तक हवा की गति, दिशा और टर्बुलेंस की निगरानी करता है, जिससे लैंडिंग और टेकऑफ अधिक सुरक्षित हो सकें।

फॉग मॉनिटरिंग सिस्टम विशेष रूप से दिल्ली जैसे शहरों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां प्रदूषण और धुंध की परस्पर क्रिया दृश्यता को प्रभावित करती है।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विमानन सुरक्षा, मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगी।

डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि इस प्रकार की तकनीकें भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता को और अधिक सटीक बनाएंगी और मिशन मौसम के तहत देशभर में ऐसी प्रणालियाँ विस्तारित की जाएंगी।

स्काईकास्ट प्रणाली भारत की “वेदर-स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर” दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीक-संचालित विमानन सेवाओं की ओर देश को आगे ले जाएगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर स्मारक पुस्तक का विमोचन किया, 100 सैनिकों के अनुभव शामिल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 मई 2026 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर एक स्मारक पुस्तक (Commemorative Volume) का विमोचन किया, जिसमें इस अभियान में शामिल 100 अधिकारियों, सैनिकों, वायु सैनिकों और अन्य जवानों के व्यक्तिगत अनुभवों को संकलित किया गया है।

रक्षा मंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस प्रकाशन को उन सभी वीरों को श्रद्धांजलि बताया, जिन्होंने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नागरिकों को सैनिकों की समर्पण भावना और दृढ़ता से जुड़ने का अवसर देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को इस पुस्तक से प्रेरणा लेनी चाहिए और राष्ट्र की सुरक्षा तथा संप्रभुता बनाए रखने के लिए देश द्वारा दिए जा रहे भारी बलिदान के योग्य नागरिक बनना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक अभूतपूर्व सफलता बताया, जिसमें भारत ने चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को संघर्षविराम के लिए बाध्य किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब तक के सभी युद्धों से अलग था और यह स्मारक प्रकाशन केवल ऐतिहासिक विवरण नहीं है, बल्कि इसमें सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आधुनिक युद्ध के मानवीय पक्ष को भी दर्शाती है, जहां नेतृत्व, साहस, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और समर्पण रणनीति को सफलता में बदलते हैं।

यह प्रकाशन जानबूझकर पारंपरिक सैन्य इतिहास लेखन से अलग है, क्योंकि इसमें केवल मुख्यालय या संचालन कक्ष के दृष्टिकोण पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि वास्तविक युद्धभूमि के अनुभवों को भी शामिल किया गया है—जैसे एलओसी पर तैनात सैनिक, ड्रोन को निष्क्रिय करने वाले एयर डिफेंस ऑपरेटर, कॉम्बैट पायलट और नौसेना के कर्मी।

इस पुस्तक में तीनों सेनाओं के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, लॉजिस्टिक्स, मेडिकल, सिग्नल्स और अन्य सहयोगी इकाइयों के अनुभव शामिल हैं।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस पुस्तक का संकलन सीडीएस के मार्गदर्शन में किया गया है तथा इसे विभिन्न सैन्य मीडिया इकाइयों और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रकाशित किया गया है।

वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ के रूप में संभाला कार्यभार

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वाइस एडमिरल अजय कोचर, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम ने 29 मई 2026 को भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ (VCNS) के रूप में कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने पर फ्लैग ऑफिसर ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल अजय कोचर को 01 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। गनरी और मिसाइल सिस्टम्स के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अपने 37 वर्षों से अधिक के शानदार करियर में विभिन्न कमांड, ऑपरेशनल और स्टाफ जिम्मेदारियां निभाई हैं।

उन्होंने आईएनएस नाशक, विभूति और किरण की कमान संभाली तथा फ्रिगेट त्रिकंद के कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर रहे। उन्होंने विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की भी कमान संभाली, जिसके दौरान इसके एयर विंग का सफल एकीकरण और संचालन किया गया।

वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, नेवल वॉर कॉलेज, गोवा तथा रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, यूनाइटेड किंगडम के स्नातक हैं। उन्होंने नौसेना मुख्यालय में संयुक्त निदेशक (नेवल प्लान्स), निदेशक (स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) और प्रधान निदेशक DSCT जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

फ्लैग रैंक में पदोन्नति के बाद उन्होंने 2018 में असिस्टेंट कंट्रोलर (कैरियर प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट कंट्रोलर (वारशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन) के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद 2021 में उन्होंने वेस्टर्न फ्लीट की कमान संभाली और बाद में नेशनल डिफेंस अकादमी के कमांडेंट के रूप में प्रशिक्षण मानकों और बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दिया।

उन्होंने 25 मई 2024 को वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ का पद संभाला और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन सिंदूर सहित कई अभियानों में उन्होंने नौसेना की प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया। उनके उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए उन्हें 2022 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

पदभार ग्रहण से पहले वे अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्तता को मजबूत किया।

वाइस एडमिरल अजय कोचर का परिवार उनकी पत्नी रेमन, जो विज्ञापन और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक कलाकार हैं, और उनके दो बच्चों से मिलकर बना है। उनकी पुत्री सबा स्वतंत्र पत्रकार हैं तथा पुत्र करण एक वित्तीय परामर्श फर्म में कार्यरत हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पुसा में खरीफ अभियान 2026 सम्मेलन, कृषि विकास को गति देने पर जोर

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पुसा,नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन – खरीफ अभियान 2026 के दूसरे दिन, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों के साथ भारतीय कृषि के समग्र विकास पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि विकास को अब समयबद्ध, परिणामोन्मुख और किसान-केंद्रित कार्यों के माध्यम से नीति, नवाचार और प्रतिबद्धता के साथ तेज करने की आवश्यकता है। राज्यों के कृषि मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी ने इस सम्मेलन को कृषि उन्नति के लिए एक सशक्त ‘टीम इंडिया’ मंच में बदल दिया।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस सम्मेलन के दूसरे दिन देशभर से आए कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भगीरथ चौधरी भी उपस्थित थे। इसके अलावा ओडिशा के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंह देव, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, महाराष्ट्र के मंत्री जयप्रकाश जयकुमार रावल, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, गुजरात के कृषि मंत्री जीतूभाई सवजीभाई वाघानी, तमिलनाडु के कृषि मंत्री आर. विनोद, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गेब्रियल डी. वांगसू, मेघालय की कृषि मंत्री अम्पारीन लिंगदोह, मिजोरम के कृषि मंत्री पी. सी. वनलालरुआता, त्रिपुरा के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ, सिक्किम के कृषि मंत्री पूरण कुमार गुरूंग, पश्चिम बंगाल के मंत्री अशोक कीर्तनिया तथा असम के पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अतुल बोरा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। कृषि सचिव अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट तथा विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस विस्तृत विचार-विमर्श में शामिल हुए।

जनता को संबोधित करते हुए चौहान ने इस सम्मेलन को ‘भारत की कृषि टीम’ की ऐतिहासिक बैठक बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ‘मिनी इंडिया’ की भावना को दर्शाता है, जहां सभी एक साझा संकल्प के साथ राष्ट्रीय हित, किसान कल्याण और कृषि विकास के लिए एकजुट हैं। नेतृत्व के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जब मंत्री स्वयं योजनाओं का नेतृत्व करते हैं, तो अधिक गति, गंभीरता और ठोस परिणाम दिखाई देते हैं।

चौहान ने कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और राज्यों के सक्रिय सहयोग को दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत चावल उत्पादन में विश्व में अग्रणी बन गया है, जबकि गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन उत्पादन में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के बावजूद गति को धीमा नहीं किया जा सकता। भारत को खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने और पोषण सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि केवल उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की जीवनरेखा है, इसलिए सभी संबंधितों को मिशन मोड में काम करना होगा।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से दलहन मिशन, तिलहन मिशन, कपास मिशन और अन्य प्रमुख कृषि अभियानों की व्यक्तिगत समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप तेज, व्यावहारिक और मांग-आधारित अनुसंधान करने को कहा। विशेष रूप से तूर, सोयाबीन और तिलहन फसलों के लिए अल्प अवधि और उपयुक्त किस्मों के विकास पर जोर दिया गया।

बीज उपलब्धता के मुद्दे पर चौहान ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज कृषि उत्पादकता की पहली और सबसे आवश्यक शर्त है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि देश में पर्याप्त बीज उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को समय पर बीज नहीं मिल पाते। उन्होंने सभी राज्यों को समय पर बीज उठाने, वितरण प्रणाली मजबूत करने और खरीफ मौसम में किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में खराब गुणवत्ता वाले बीज बाजार में नहीं आने चाहिए और इसके खिलाफ सख्त निगरानी एवं कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि आपात स्थिति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीज भंडार प्रणाली स्थापित की गई है।

उन्होंने उर्वरक, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और फार्मर आईडी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड केवल दस्तावेज न रहकर खेत स्तर पर उपयोग में लाए जाएं। उन्होंने ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।

फार्मर आईडी को पारदर्शी और कुशल प्रणाली की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, कालाबाजारी की रोकथाम और वास्तविक किसानों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड पर उन्होंने कहा कि समय पर पूंजी उपलब्धता लाभकारी खेती के लिए आवश्यक है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाने के लिए बैंकों के साथ जल्द चर्चा की जाएगी।

कृषि यंत्रीकरण पर उन्होंने कहा कि केवल मशीनों का वितरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही किसान तक सही मशीन पहुंचनी चाहिए। कस्टम हायरिंग सेंटर की समीक्षा और पारदर्शी चयन प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

बागवानी क्षेत्र में उन्होंने कहा कि भारत में फल और सब्जी उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, और अब लक्ष्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि निर्यात गुणवत्ता का उत्पादन होना चाहिए।

उन्होंने नकली बीज, घटिया कीटनाशक और खराब कृषि इनपुट पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि राष्ट्रीय नुकसान है।

फसल बीमा योजना पर उन्होंने समय पर राहत, बैंक, बीमा कंपनियों और राज्यों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता बताई।

दलहन और तिलहन की खरीद पर उन्होंने कहा कि किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किए बिना आत्मनिर्भरता संभव नहीं है।

एफपीओ, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि ये संस्थान नवाचार और अनुसंधान को सीधे किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को अपनी कृषि कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए और केंद्र सरकार हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि नियम किसानों की सुविधा के लिए हैं, न कि किसान नियमों के लिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, राज्यों, वैज्ञानिकों और किसानों के सहयोग से भारत कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और वैश्विक उदाहरण बनेगा।

रीवा में गहराया जल संकट, हाइड्रो फ्रैक्चरिंग से बढ़ेगी हैंडपंपों की ताकत

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पीएचई टीम और नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों के साथ बनाई कार्ययोजना; भूगर्भ वैज्ञानिक भी पहुंचे  

आरंग- भीषण गर्मी के बीच ग्राम रीवा में पेयजल की किल्लत गहरा गई है। पानी की बूंद-बूंद को तरसते ग्रामीणों की सुध लेने शुक्रवार को प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर गांव पहुंचा। 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधिकारियों और मंदिर हसौद के नायब तहसीलदार ने सीधे मोर्चा संभालते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा की और संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक कार्ययोजना पेश की, जिस पर ग्रामीणों ने सहमति जताई है। गांव में दम तोड़ते जलस्तर को देखते हुए पीएचई विभाग लगातार जद्दोजहद कर रहा है। कम पानी उगलने वाले हैंडपंपों की हाइड्रो फ्रैक्चरिंग मशीनों से जांच की जा रही है, ताकि उनकी जल क्षमता को बढ़ाया जा सके। संकट की गंभीरता को देखते हुए पीएचई ने भूगर्भ विशेषज्ञों (जियोलॉजिस्ट) की टीम को मैदान में उतारा है। यह टीम गांव के भीतर भूगर्भ जल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रही है, ताकि पानी की उपलब्धता वाले नए पॉइंट चिह्नित किए जा सकें। इस दौरान सरपंच, उपसरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता अभियान में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कर्नाटक के दावणगेरे स्थित यूनिवर्सिटी बी.डी.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्लैटिनम जुबली समारोह में भाग लिया और युवाओं से भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इंजीनियरिंग संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे ऐसे समस्या-समाधानकर्ता, नवोन्मेषक, नैतिक नेतृत्वकर्ता और राष्ट्र-निर्माता तैयार करें, जो भारत को तकनीकी प्रगति और वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की ओर अग्रसर कर सकें।

उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में तकनीक, नवाचार और युवाशक्ति से प्रेरित एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, सेमीकंडक्टर निर्माण, हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलें युवा इंजीनियरों, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और उद्यमियों के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रही हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की आकांक्षा इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के योगदान पर काफी हद तक निर्भर करेगी। संस्थान द्वारा अनुसंधान और नवाचार को सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने एआईसीटीई आइडिया लैब, ड्रोन टेक्नोलॉजी प्रयोगशाला तथा कॉलेज द्वारा विकसित उन्नत शोध अवसंरचना जैसी पहलों की प्रशंसा की।

उन्होंने प्लैटिनम जुबली को विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं का उत्सव बताते हुए कहा कि संस्थान के 75 वर्ष दूरदृष्टि, दृढ़ता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और समाज सेवा का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट संस्थानों का निर्माण कई पीढ़ियों के दूरदर्शी संस्थापकों, समर्पित शिक्षकों, निष्ठावान प्रशासकों, मेहनती विद्यार्थियों और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के योगदान से होता है।

संस्थान की स्थापना में ब्रह्मप्पा देवेंद्रप्पा तवनप्पनावर की दूरदर्शी परोपकारिता और महामहिम जयचामराजेंद्र वोडेयार के आशीर्वाद को श्रद्धांजलि देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे संस्थान शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी स्थायी प्रतिबद्धता के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित करते रहते हैं।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उनसे ज्ञान का उपयोग विनम्रता, ईमानदारी और करुणा के साथ करने का आग्रह किया। नवाचार के नैतिक पक्ष पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी मानवता की सेवा के लिए होनी चाहिए,” और इस बात पर बल दिया कि वैज्ञानिक प्रगति सदैव जनकल्याण और मानवीय मूल्यों से प्रेरित होनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने नशा मुक्ति के संबंध में भी सशक्त संदेश देते हुए विद्यार्थियों और समाज से “नशे को ना” कहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने मन पर स्वयं नियंत्रण रखना चाहिए और किसी भी हानिकारक पदार्थ को अपने जीवन पर नियंत्रण नहीं करने देना चाहिए।

संस्थान के भविष्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यूनिवर्सिटी बी.डी.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का केंद्र बनकर भारत की नवाचार, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय विकास की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत; निर्मलानंदनाथ स्वामीजी; कर्नाटक के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम.सी. सुधाकर; सांसद यदुवीर वाडियार; सांसद डॉ. प्रभा मल्लिकार्जुन; कर्नाटक के पूर्व मंत्री एवं जिला प्रभारी एस.एस. मल्लिकार्जुन; बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, निफ्टेम के अध्यक्ष डॉ. टी.जी. सीताराम; वीटीयू के कुलपति डॉ. एस. विद्याशंकर; वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, विद्यार्थी और प्रतिष्ठित पूर्व छात्र भी उपस्थित थे।

महासमुंद - पानी विवाद में युवक की हत्या, शव महानदी किनारे रेत में दफन… 4 आरोपी गिरफ्तार

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 महासमुंद। जिले में 22 मई से लापता युवक भुनेश्वर यादव हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। सिटी कोतवाली पुलिस ने हत्या कर शव को महानदी किनारे रेत में दफनाने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में पानी की समस्या को लेकर हुए विवाद को हत्या की वजह बताया जा रहा है।


पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, भुनेश्वर यादव की गुमशुदगी की रिपोर्ट 22 मई को मंदिर हसौद थाना में दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक को आखिरी बार अपने परिचित नोहर दास और उसके साथियों के साथ देखा गया था। इसके बाद पुलिस ने संदिग्धों से पूछताछ शुरू की।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि नोहर दास, अमित राजपूत, हेमचंद्र बंजारे और श्रवण दास रात्रे मृतक को लेकर मंदिर हसौद से नांदगांव स्थित महानदी किनारे घूमने गए थे। इसी दौरान पानी की समस्या को लेकर भुनेश्वर यादव और नोहर दास के बीच विवाद हो गया।

देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि चारों आरोपियों ने मिलकर भुनेश्वर यादव के साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। लात-घूंसों से की गई पिटाई में युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या के बाद आरोपी घबरा गए और घटना को छिपाने के उद्देश्य से शव को महानदी किनारे रेत में दफना दिया। हालांकि पुलिस की जांच में पूरा मामला सामने आ गया। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

 
 

महासमुंद में एलपीजी गैस की पर्याप्त उपलब्धता, पैनिक बुकिंग की जरूरत नहीं

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 महासमुंद : जिले में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति, दैनिक आवश्यकता एवं उपलब्धता की समीक्षा के लिए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में महत्वपूर्ण बैठक लेकर खाद्य विभाग के अधिकारियों एवं जिले के सभी गैस एजेंसियों से जानकारी ली।


बैठक में कलेक्टर ने कहा कि एलपीजी वितरकों के गोदाम में उपलब्ध रिफिल सिलेंडर का स्टॉक का नियमित रूप से निरीक्षण कर भौतिक सत्यापन किया जाए। वितरकों के पास उपलब्ध ऑनलाइन स्टॉक एवं भौतिक सत्यापन में पाए गए स्टॉक का अनिवार्य रूप से मिलान करें एवं मिलान में अंतर एवं अनियमितता पाए जाने पर तत्काल प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि गैस एजेंसी डिलीवरी दर्शाकर समय पर डिलीवरी नहीं करते तो उन पर कड़ी कार्रवाई किया जाए। उन्होंने कहा कि जिले में अभी गैस की पर्याप्त उपलब्धता है।

गैस एजेंसी संचालकों ने जानकारी दी कि उनके पास घरेलू गैस सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और जिले में उपभोक्ताओं की बुकिंग के अनुसार गैस सिलेंडरों की डिलीवरी सुचारू रूप से की जा रही है। उन्होंने बताया कि सप्लाई प्लांट से भी गैस सिलेंडरों की उपलब्धता में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। खाद्य अधिकारी ने बताया कि अभी जिले में लगभग 3748 गैस सिलेंडर उपलब्ध है। गत दिवस 2222 गैस सिलेंडर डिलीवर किया गया था। जिले में 18 गैस एजेंसी संचालित हैं।

बैठक में गैस एजेंसियों को निर्देशित किया गया कि वे हितग्राहियों को उनकी बुकिंग और पात्रता के अनुसार निर्धारित क्रम में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराएं। साथ ही एजेंसियों को अपने स्टॉक का रिकॉर्ड नियमित रूप से अद्यतन रखने तथा स्टॉक की जानकारी विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
इस संबंध में उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे गैस सिलेंडर की कमी से जुड़ी किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रम पर ध्यान न दें। साथ ही अनावश्यक रूप से लाइन में लगने या घरों में अतिरिक्त सिलेंडर जमा करने की आवश्यकता नहीं है। आवश्यकता होने पर ही गैस की बुकिंग कराकर सिलेंडर प्राप्त करें।

बैठक में अपर कलेक्टर रवि साहू, प्रभारी खाद्य अधिकारी तेजपाल सिंह ध्रुव, खाद्य निरीक्षक सुशील शर्मा सहित जिले के गैस वितरकों के संचालक एवं प्रोपाइटर उपस्थित रहे।

महासमुंद में राइस मिलों की होगी संयुक्त जांच, कलेक्टर ने गठित किए दल

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 महासमुंद : खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के अंतर्गत जिले की राईस मिलों द्वारा कस्टम मिलिंग हेतु उठाए गए धान की मात्रा, शेष धान, निर्मित चावल तथा भारतीय खाद्य निगम में जमा किए गए चावल के संयुक्त भौतिक सत्यापन के लिए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा जांच दल गठित किए गए हैं।


कलेक्टर लंगेह के निर्देशानुसार महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना एवं सरायपाली विकासखंडों में संयुक्त जांच दल द्वारा राईस मिलों का निरीक्षण किया जाएगा। प्रत्येक दल में संबंधित मुख्यालय के तहसीलदार, प्रभार क्षेत्र के सहायक खाद्य अधिकारी/खाद्य निरीक्षक तथा जिला विपणन अधिकारी अथवा उनके प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। संयुक्त जांच दल द्वारा राईस मिलों में उपलब्ध शासकीय शेष धान एवं चावल के साथ-साथ निजी धान एवं चावल का भी भौतिक सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन उपरांत संयुक्त हस्ताक्षरित प्रतिवेदन जिला कार्यालय को प्रस्तुत किया जाएगा।

कलेक्टर ने भारतीय खाद्य निगम में चावल जमा की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं मिलरों को शासन के निर्देशानुसार तत्काल 10 प्रतिशत ब्रोकन चावल जमा कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिन मिलरों द्वारा चावल जमा करने में रुचि नहीं ली जा रही है, उनके यहां भौतिक सत्यापन का आदेश भी जारी कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित राईस मिल संचालकों को शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करते हुए निर्धारित समयावधि में चावल जमा करने के निर्देश दिए हैं।

IMD का बड़ा अलर्ट : 2026 में कमजोर रहेगा मॉनसून, कई राज्यों में सूखे का खतरा

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 नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने वर्ष 2026 के मॉनसून को लेकर दूसरा चरण पूर्वानुमान जारी करते हुए देशभर के लिए चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। IMD ने अनुमान जताया है कि इस साल देश में जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) की केवल 90 प्रतिशत रह सकती है, जिसे “Below Normal” श्रेणी में रखा गया है। इससे पहले जारी पहले चरण के पूर्वानुमान में यह आंकड़ा 92 प्रतिशत बताया गया था।


मौसम विभाग के अनुसार जून माह में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है, जिसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है। कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है।


अल-नीनो बढ़ाएगा मुश्किलें

IMD ने बताया कि प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है। आमतौर पर अल-नीनो के प्रभाव से भारत में मॉनसून कमजोर पड़ जाता है और बारिश में कमी देखने को मिलती है। हालांकि भारतीय महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में बना हुआ है।

कई राज्यों में बढ़ सकती है लू

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में इस साल सामान्य से ज्यादा हीटवेव यानी लू चलने की संभावना है। वहीं राजस्थान और झारखंड में लू के दिनों में कुछ कमी रह सकती है।

खेती और जल संकट पर असर

कम बारिश का सबसे ज्यादा असर धान, मक्का और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। इसके अलावा जल संकट, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। IMD ने राज्यों को जल संरक्षण, सूखा प्रबंधन और फसल बीमा जैसी तैयारियां पहले से करने की सलाह दी है।

निर्माणाधीन पुल का स्लैब ढहा, 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई घंटे चला रेस्क्यू

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 हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में गुरुवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का भारी स्लैब अचानक ढह जाने से छह मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई मजदूर बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और पूरे इलाके में शोक का माहौल फैल गया।


जानकारी के मुताबिक मवई जार और कुरारा को जोड़ने के लिए बेतवा नदी पर पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। गुरुवार रात करीब तीन बजे काम खत्म होने के बाद मजदूर निर्माणाधीन पुल के स्लैब के नीचे और आसपास आराम कर रहे थे। इसी दौरान तेज आंधी, बारिश और बिजली गरजने लगी। खराब मौसम के बीच अचानक पुल का भारी स्लैब भरभराकर नीचे गिर गया।

हादसा इतना भयावह था कि मलबे के नीचे दबे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। अंधेरी रात और मूसलाधार बारिश के बीच मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एसडीआरएफ ने तीन मजदूरों को पुल के पिलर पर फंसी हालत में सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि मलबे में दबे छह मजदूरों के शव बरामद किए गए। मृतकों की पहचान बांदा जिले के लोकेंद्र निषाद, कुलदीप निषाद, सावंत यादव, सभाजीत और हमीरपुर के पुष्पेंद्र सिंह चौहान व राजेश पाल के रूप में हुई है।

हादसे के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों ने निर्माण एजेंसी और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि मौसम विभाग की आंधी-तूफान की चेतावनी के बावजूद मजदूरों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।

इधर, आंधी-तूफान का असर पूरे जिले में देखने को मिला। कई जगह पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभे गिर पड़े, जिससे राहत एवं बचाव कार्य में भी बाधाएं आईं। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

तेंदुए के हमले में अधेड़ की मौत, हाथ-पैर गायब मिलने से इलाके में दहशत

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 धमतरी। जिले के वनांचल क्षेत्र बेलरगांव में तेंदुए के हमले से एक अधेड़ ग्रामीण की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। दुधावा जलाशय के पास स्थित कोड़मुड़ गांव निवासी 55 वर्षीय चौथराम मंडावी मंगलवार शाम से लापता थे। गुरुवार सुबह उनका क्षत-विक्षत शव पहाड़ी क्षेत्र में बरामद किया गया। शव की स्थिति देखकर तेंदुए के हमले की आशंका जताई जा रही है।


जानकारी के अनुसार, चौथराम मंडावी मंगलवार शाम शौच के लिए घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। गुरुवार सुबह दुधावा जलाशय किनारे पहाड़ी इलाके में उनका शव मिला, जिसके बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई।

ग्रामीणों के मुताबिक शव के पास घसीटे जाने के निशान मिले हैं। मृतक का एक हाथ और पैर गायब था, जिससे तेंदुए के हमले की आशंका और मजबूत हो गई है। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई।

इधर, धमतरी से लगे ग्राम कोटाभर्री में भी तेंदुए द्वारा एक गाय के बछड़े का शिकार किए जाने की जानकारी सामने आई है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने लगे हैं।
धमतरी वन मंडल के डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि मामला बिड़गुड़ी वन परिक्षेत्र के कोड़मुड़ गांव का है। प्रारंभिक जांच में घटनास्थल पर घसीटने के निशान और अन्य साक्ष्य मिले हैं, जिससे तेंदुए की मौजूदगी की संभावना अधिक लग रही है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

डीएफओ ने बताया कि धमतरी और गरियाबंद जिले के जंगलों में तेंदुओं की संख्या अधिक है। गर्मी के दिनों में भोजन और पानी की तलाश में वन्य प्राणी गांवों की ओर पहुंच जाते हैं। वन विभाग ने जंगल से लगे गांवों में अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

गौरतलब है कि दो वर्ष पहले भी इसी क्षेत्र में तेंदुए ने आंगन में खेल रही तीन वर्षीय मासूम बच्ची को उठा लिया था। अब एक बार फिर हुई इस घटना ने पूरे वनांचल क्षेत्र में दहशत और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
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