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मुख्यमंत्री साय का गणतंत्र दिवस संदेश: मार्च तक छत्तीसगढ़ होगा नक्सलमुक्त, किसानों-महिलाओं-युवाओं के लिए ऐतिहासिक फैसले

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छत्तीसगढ़ शासन
 विष्णु देव साय
माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ का
गणतंत्र दिवस संदेश
बिलासपुर, 26 जनवरी 2026 : 

जम्मो महतारी-बहिनी, सियान- जवान अउ लइका मन ला जय जोहार।
आज हमन 77वां गणतंत्र परब मनावत हवन ।
आप मन ल गणतंत्र दिवस के गाड़ा-गाड़ा बधाई अउ सुभकामना ।
जहाँ तक मेरी नजरें जा रही हैं, हर तरफ तिरंगे की शान दिख रही है। माँ भारती की हर संतान उल्लास से भरी हुई दिखती है। हर नागरिक के हृदय में राष्ट्रप्रेम हिलोरे ले रहा है। हर नागरिक के भीतर राष्ट्र निर्माण के संकल्प की ज्योति जल रही है। माँ भारती के ऐसे वीर संतानों का गणतंत्र दिवस के शुभअवसर पर मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।

आज का दिन राष्ट्रीय पर्व की खुशियां मनाने का दिन है। आज का दिन राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले हमारे महापुरुषों को याद करने का दिन है। हम सब कृतज्ञ हैं, उन सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति जिन्होंने आजादी के लिए कठिन संघर्ष किया और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र बनाया।

आज के दिन हम अपने संविधान निर्माताओं का स्मरण करते हैं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाया गया हमारा संविधान बाबा गुरु घासीदास जी द्वारा दिये गये मनखे-मनखे एक समान के संदेश को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। भारतीय परंपरा में तुलसीदास और कबीरदास जैसे महान संतों ने राजव्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सबसे ऊपर रखा था। हमारा संविधान हर नागरिक को इसका अधिकार प्रदान करता है।

भारतीय गणतंत्र ने एक ऐसा खुला समाज बनाया है, जिसमें हर नागरिक राष्ट्र निर्माण के लिए अपने विचार रख सकता है। आज के दिन देश के सभी नागरिक संविधान द्वारा प्रदत्त इन अधिकारों का उत्सव मनाते हैं।

अभी हमने राज्य स्थापना का रजत महोत्सव मनाया है। हमारे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमें छत्तीसगढ़ राज्य की सौगात दी थी। हमने उनके जन्मशताब्दी वर्ष को अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनाया है।

रजत जयंती के मौके पर संविधान के मंदिर हमारे विधानसभा के नये भवन का लोकार्पण यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों सम्पन्न हुआ है।

हमारी लोकतांत्रिक आस्था का प्रतीक यह भवन सही मायने में छत्तीसगढ़ी अस्मिता का प्रतिनिधित्व करता है। धान की बालियों की डिजाइन और बस्तर-सरगुजा की लोककला से समृद्ध इस भवन की वास्तुकला में छत्तीसगढ़ की माटी का प्रतिबिम्ब झलकता है।

25 वर्ष पूर्व रायपुर के राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में हमारी विधानसभा का पहला सत्र आयोजित हुआ था। राज्य के साथ ही विधानसभा ने भी अपनी समृद्ध परंपरा की रजत जयंती मनाई है। यहां ऐसी अनेक लोकतांत्रिक परंपराएं स्थापित हुईं जिनका अनुकरण अन्य राज्यों की विधानसभा ने भी किया।

इस वर्ष हमने राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् की 150वीं जयंती भी मनाई। हमने नवनिर्मित विधानसभा भवन में राष्ट्र निर्माण में वन्दे मातरम् के योगदान पर विशेष चर्चा भी की।


सुकमा जिले के कोंटा से लेकर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सीतामढ़ी हरचौका तक प्रदेश के हर कोने में लोगों ने वन्दे मातरम् का सस्वर गान किया। माँ भारती की प्रशंसा में लिखे गये हमारे राष्ट्रगीत का यह सम्मान बंकिम दा को सच्ची श्रद्धांजलि है।

यह वर्ष डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी का 125 वां जयंती वर्ष भी है। एक राष्ट्र, एक निशान, एक विधान के माध्यम से उन्होंने माँ भारती की अखंडता के लिए बलिदान दिया। जब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई गई तो यह राष्ट्र की ओर से डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि थी।

इस बार हमने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर धरती आबा भगवान श्री बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती भी मनाई।

भगवान श्री बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज में आत्मगौरव का भाव जगाया। उन्होंने ब्रिटिश शोषण और औपनिवेशिक कानूनों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया और अपना बलिदान दिया।

छत्तीसगढ़ की धरती भी ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध जनजातीय विद्रोहों की गवाह रही है। स्वतंत्रता संग्राम में जंगल सत्याग्रह के माध्यम से जनजातीय नायकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों के आजादी की लड़ाई में किये गये बलिदान की कहानी हम डिजिटल माध्यम से सुना रहे हैं। शहीद वीरनारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर किया। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है।

राष्ट्र की अस्मिता के लिए बलिदान देने वाले हमारे जनजातीय नायकों के चरित्र को दिखाने वाला यह म्यूजियम आज की पीढ़ी के लिए तीर्थस्थल की तरह है।

यहां बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और अपने नायकों के प्रति श्रद्धा भाव से भर जाते हैं।

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले । वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा ।।

आज के दिन हम अभिनंदन करते हैं, अपने वीर जवानों का, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर अपनी धरती को माओवाद के खतरे से मुक्त करने का बीड़ा उठाया।


माओवादी हिंसक विचारधारा देश के लोकतंत्र को बड़ी चुनौती है। इनकी आस्था संविधान में नहीं, राष्ट्र की अस्मिता में नहीं, राष्ट्र की अस्मिता के प्रतीक चिन्हों में नहीं। इस कैंसर की तरह व्याधि का उपाय यही है कि इसे जड़ से नष्ट किया जाए।

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में हमने सुनियोजित रणनीति अपनाकर माओवादियों को चुनौती दी।

हमारे जवानों ने रात-दिन कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों में हर पल खतरे का सामना करते हुए एरिया डामिनेशन किया और अपने साहस तथा शौर्य से हर लक्ष्य को प्राप्त किया।

माओवादी हिंसा को समाप्त करने का यह बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने को है। इसी साल के मार्च महीने तक हम माओवाद को इस सुंदर धरती से जड़मुक्त कर देंगे।
खुशी की बात यह है कि अनेक लोग जो रास्ता भटक चुके थे, वे अब लोकतंत्र की मुख्यधारा में वापस लौट रहे हैं।
उन्होंने हथियार रख दिये और अपने हाथों में बाबा साहेब का संविधान थामा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के देश में यह सबसे सुंदर तस्वीर देखने में आई और इसने संविधान की सत्यमेव जयते की भावना को पुष्ट किया।

कुछ महीनों पहले जब मैं एक कार्यक्रम में भाग लेने जगदलपुर गया था। वहां मैं बस्तर कैफे गया, यहां आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं अब कैफे संभालती हैं। हिंसा की राह छोड़कर लोगों की सेवा की राह में आने से उनके चेहरे पर जो खुशी मैंने देखी, उसे बयान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है।

हर काली अंधेरी रात के बाद नई सुबह होती है। अब नक्सलमुक्त क्षेत्र में विकास का सूरज दमक रहा है। बच्चों के चेहरे से भय का साया हट गया है, उनके हाथों में किताबें हैं। बस्तर को इस नये रूप में देखना बहुत अच्छा लगता है।

किसी राज्य की रजत जयंती आत्मावलोकन का अवसर भी है। इसकी कसौटी यह है कि पुरखों द्वारा बताये गये आदर्शों पर हम कितने खरे उतर पाए।

छत्तीसगढ़ का समाज अपने पुरखों द्वारा दिखाये राह पर चलते हुए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटा हुआ है।

भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान छत्तीसगढ़ में विद्रोह की मशाल शहीद वीरनारायण सिंह जी जैसे शूरवीरों ने जलाई। उन्होंने न केवल अंग्रेजी औपनिवेशिक शासन का विरोध किया, अपितु एक ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था की राह भी दिखाई, जो अंत्योदय के प्रति गहरी संवेदना रखती है।

उन्होंने जमाखोरी का विरोध कर अकाल के दौरान भूख से पीड़ित लोगों के पेट की ज्वाला शांत की। छत्तीसगढ़ का पीडीएस मॉडल शहीद वीरनारायण सिंह जी को सच्ची श्रद्धांजलि है।

हमारे यहां कहावत है कि- दुब्बर बर दू असाढ़। इस कहावत से किसान भाइयों की दिक्कतें स्पष्ट रूप से समझ आती है कि खेती-किसानी करना कितना कठिन कार्य है।
राज्य बनने के बाद हमारी सबसे बड़ी चुनौती थी, अन्नदाता का सुख और संतोष । इस रजत जयंती की यात्रा में हमने किसान भाइयों की मुस्कान उन्हें लौटाई है। आज छत्तीसगढ़ के किसान को धान का सबसे अच्छा मूल्य मिल रहा है।

हमारे ग्रामीण परिवेश में समृद्धि का आंकलन घरों के कोठार से होता है। कोठार अनाज से भरे हों, तो समझ जाइये कि समृद्धि हर ओर फैली हुई है।

हमारे प्रदेश का कोठार अर्थात हमारा धान का कटोरा, धान से लबालब है। राज्य बनने के बाद व्यवस्थित रूप से धान की खरीदी हुई, जब धान खरीदी आरंभ हुई तो इसका आंकड़ा 5 लाख मीट्रिक टन था, पिछली बार खरीदी का यह आंकड़ा 149 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। हमने पिछले दो साल में किसान हितैषी योजनाओं के माध्यम से किसानों के खाते में डेढ़ लाख करोड़ रुपए अंतरित किये हैं।

हमारी सरकार किसानों के हित में फैसले लेती है। अटल सिंचाई योजना के तहत वर्षों से अपूर्ण और लंबित पड़ी 115 सिंचाई योजनाओं को पूर्ण करने हमने 28 सौ करोड़ रुपए की योजना की मंजूरी दी है।

प्रधानमंत्री जी ने दीवाली के मौके पर जो जीएसटी रिफार्म्स किये, उसका सबसे अधिक लाभ हमारे किसान भाइयों को मिला है। ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण काफी सस्ते हो गये। कृषि मशीनरी बेचने वाले कारोबारियों के लिए तो काफी व्यस्तता का समय रहा।

खेती-किसानी से संबंधित उत्पादों पर कर घटाने का सबसे बड़ा लाभ यह हो रहा है कि हमारे किसान भाई आधुनिक खेती को तेजी से अपना रहे हैं।

हमारे छत्तीसगढ़ का चावल 120 देशों में निर्यात होता है। लागत घटने और सरकार द्वारा अच्छा मूल्य मिलने से किसानों के लिए अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धी रखने में काफी मदद मिलती है।

हमारा देश अन्य देशों के साथ व्यापार वार्ता भी कर रहा है। यह वार्ता महाशक्तियों के साथ भी हो रही है। प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट कह दिया है कि जो भी व्यापार समझौते होंगे, उनमें किसानों का किसी तरह से अहित नहीं होने दिया जाएगा।

डबल इंजन की सरकार किसानों के मुद्दे पर कभी झुकती नहीं, किसानों के मुद्दे पर सिर उठाकर खड़ी रहती है और किसान भाइयों को उनका हक दिलाती है।

किसानों के साथ ही श्रमिक भाइयों की समृद्धि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी सरकार ने दो वर्षों में 29 लाख से अधिक श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 8 सौ करोड़ रुपए से अधिक राशि अंतरित की है।

महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य को देखते हुए रात की पाली में भी महिला श्रमिकों के सशर्त नियोजन का प्रावधान किया गया है। 2 वर्ष में ही कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत बीमित कामगारों की संख्या 4 लाख 60 हजार से बढ़कर 6 लाख 26 हजार हो गई है। केंद्र सरकार ने जिन 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह 4 श्रम संहिताएं लाई हैं, श्रमिक भाइयों के हित में उनका तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है।

हमारी सरकार ने दो साल पूरे किये हैं। मोदी जी की गारंटी को पूरा करते हुए हमने पहले कैबिनेट की बैठक में ही 18 लाख आवास स्वीकृत करने का निर्णय लिया। प्रदेश में अब तक 26 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं।

लोगों को आवास उपलब्ध कराने का यह काम हम मिशन मोड में कर रहे हैं। मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हर दिन लगभग 2 हजार आवास प्रदेश में बनाये जा रहे हैं।

यह गति पूरे देश में सबसे अधिक है। आप सभी छत्तीसगढ़ में हो रही आवास क्रांति के गवाह हैं। खप्पर वाली छतें अब बीते दिन की बात हो गई, अब हर घर पक्का और बुनियादी सुविधा से युक्त है, जहां जलजीवन मिशन से शुद्ध जल मिल रहा है।

राज्य स्थापना से पूर्व प्रदेश के लोगों को घंटों पॉवर कट का सामना करना पड़ता था। विद्युत उत्पादन के मामले में हम देश में अभी दूसरे नंबर पर है, और पहले नंबर की ओर तेजी से अग्रसर हैं। आज प्रदेश के बीपीएल परिवारों को एकल बत्ती योजना के तहत निःशुल्क बिजली तथा शेष परिवारों को चौबीस घंटे रियायती दरों पर बिजली मिल रही है।

एनर्जी सेक्टर में हम विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की जरूरतों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं, इसी क्रम में प्रधानमंत्री जी ने सीपत में 9790 करोड़ रुपए के सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी है। डबल इंजन की सरकार का फोकस शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को लेकर है और इसी के अनुरूप कोरिया, सरगुजा, बलरामपुर जैसे जिलों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन पर काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री सौर घर मुफ्त बिजली योजना में केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार की सब्सिडी भी मिल रही है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने अक्षय ऊर्जा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। हमने गेल से भी एमओयू किया है, जिसके तहत गैस आधारित उर्वरक परियोजना मुख्य रूप से 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाले यूरिया उत्पादन प्लांट पर केन्द्रित है।
नक्सलवाद की वजह से बस्तर में योजनाओं का क्रियान्वयन धीमा रह गया था लेकिन अब इसने रफ्तार पकड़ ली है। नक्सलवाद ने लोगों को बेघर किया है। हम हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को पक्का घर दे रहे हैं। इसके लिए 15 हजार आवास हमने स्वीकृत किये हैं। पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए हम अब तक 33 हजार 217 आवास स्वीकृत कर चुके हैं।
हमने छत्तीसगढ़ महतारी को संवारने का संकल्प लिया है। छत्तीसगढ़ महतारी को गढ़ने में, संवारने में सबसे ज्यादा भूमिका हमारी माताओं-बहनों की है। मुझे खुशी है कि महिलाओं के सम्मान का पूरा ध्यान रखते हुए हमारी सरकार महतारी वंदन योजना के माध्यम से करीब 70 लाख महिलाओं को प्रति माह
एक-एक हजार रुपए की सम्मान राशि प्रदान कर रही है। अब तक 23 किश्तों में 14 हजार 948 करोड़ रुपए की राशि माताओं-बहनों के खाते में भेज चुके हैं।
प्रधानमंत्री जी ने अगले दस सालों में देश को मैकाले की मानसिकता से पूरी तरह से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। भारत एक समय विश्वगुरु रहा लेकिन मैकाले की मानसिकता ने समाज पर ऐसा असर डाला कि लोग हर विचार को पश्चिमी नजरिये से देखने लगे और अपनी भारतीय संस्कृति के आदर्शों को भूलते गये। इस मानसिकता को भारतीय मूल्यों से युक्त शिक्षा से बदला जा सकता है।
जब हमने सरकार का कामकाज संभाला तो हमारे सामने एक बड़ी चुनौती शिक्षा को लेकर ही थी। यह दो कारणों से थी, पहला तो कोविड की वजह से जो ऑनलाइन क्लासेज हुईं, उनसे बच्चों को काफी लर्निंग लॉस हुआ। बच्चों को पढ़ने-लिखने और गणित की सामान्य क्रियाएं करने में भी परेशानी होती थी, इस लर्निंग लॉस को ठीक करना बड़ी चुनौती थी। इस पर हमने विशेष रूप से मेहनत की।

दूसरी इससे भी बड़ी समस्या दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी की थी। 453 ऐसे स्कूल थे जहां एक भी शिक्षक नहीं थे और 1428 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे थे जबकि राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात की तुलना में हमारे प्रदेश में इसका अनुपात अच्छा है। हमने युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शहरों के अतिशेष शिक्षकों की ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापना की और इस तरह से यह समस्या दूर हुई।
अब जब मैं ग्रामीण क्षेत्रों में जाता हूँ, लोग बहुत खुशी से बताते हैं कि उनके स्कूल में शिक्षक पहुंच गये हैं। स्कूल में बढ़िया पढ़ाई हो रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद बच्चे स्थानीय भाषाओं में पढ़ रहे हैं, इससे उन्हें सीखने में काफी आसानी हो रही है। हमने स्कूलों में आईटी आधारित मॉनिटरिंग को विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से लागू किया है। हम राज्य के स्कूलों में 9 हजार स्मार्ट क्लास आरंभ करने जा रहे हैं और 22 हजार कंप्यूटर लगवाएंगे। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर परख सर्वेक्षण हुआ। सर्वेक्षण में राज्य की स्थिति बेहतर हुई है, इसका श्रेय मैं सभी शिक्षकों को देना चाहूंगा।

उच्च शिक्षा में भी हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है। पिछले महीने हमने कबीरधाम में मेडिकल कॉलेज भवन के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया है। मुझे लगता है कि छत्तीसगढ़ की रजत जयंती यात्रा को समझना है, तो यहां मेडिकल शिक्षा के विकास को समझना होगा। पहले यहां रायपुर में ही मेडिकल कॉलेज था, अब प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हो चुके हैं। हमारी सरकार ने बिलासपुर में मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया है। इसके साथ ही कोनी में शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज के लिए भूमि का चिन्हांकन भी कर लिया गया है। हमने एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में कराने की व्यवस्था आरंभ की है। आईआईटी की तर्ज पर हम राज्य के जशपुर, बस्तर, कबीरधाम, रायपुर और रायगढ़ में प्रौद्योगिकी संस्थाओं का निर्माण करने जा रहे हैं।
हमारी युवा आबादी हमारे लिए बड़ी संभावना है। हम राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं को प्रदेश में ला रहे हैं। नवा रायपुर को हम एडुसिटी के रूप में विकसित कर रहे हैं। हम निफ्ट, नाइलिट और फॉरेसिंक यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान यहां आरंभ कर रहे हैं। युवाओं को पढ़ने-लिखने की बेहतर जगह मिल पाए, इसके लिए

हम रायपुर के नालंदा परिसर की तर्ज पर 34 नगरीय निकायों में अत्याधुनिक लाइब्रेरी बना रहे हैं। युवाओं के स्किल ट्रेनिंग से लेकर नये जमाने के कोर्सेस आदि की सुविधा देने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। 160 आईटीआई को हमने 484 करोड़ रुपए की लागत से मॉडल आईटीआई के रूप में उन्नयन किया है। हम पैन-आईआईटी संस्था के माध्यम से भी स्किल अपग्रेडेशन के लिए काम कर रहे हैं। नई स्टार्टअप नीति के माध्यम से हमने 50 हजार विद्यार्थियों को स्टार्टअप से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
हमारे देश ने वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों के लिए दावेदारी की है। देश में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने एवं खेलों का शानदार माहौल तैयार करने यह कदम उठाया गया है। ओलंपिक खेलों में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें, इसके लिए हम खेल अधोसंरचना को बेहतर बनाने का काम मिशन मोड में कर रहे हैं। नवा रायपुर के सेक्टर 28 में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के लिए 85 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। हमारा राज्य जनजातीय बाहुल्य है। तीरंदाजी की कला हमारे जनजातीय क्षेत्र की पहचान रही है।

इसे निखारने के लिए हमने राष्ट्रीय आर्चरी एकेडमी की स्थापना हेतु नवा रायपुर में 13 एकड़ जमीन आवंटित की है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने हमने ओलंपिक खेलों में पदक विजेताओं के लिए विशेष धन राशि की घोषणा भी की है।
खेल प्रतियोगिताएं कभी अशांत जगहों में आयोजित नहीं होती। खेल सुकून के वातावरण में खेले जाते हैं। बस्तर में भी ऐसा ही सुकून लौट आया है। बस्तर ओलंपिक के आयोजन के माध्यम से हमने खेल के माध्यम से बस्तर की नई पहचान देश-दुनिया के सामने रखी है। पिछले वर्ष इन खेलों में 1 लाख 65 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था, इस बार 2 लाख 92 हजार लोगों ने भाग लिया। इस साल हमें खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी भी मिली है। प्रदेशों में खेलों का परिदृश्य उज्ज्वल है और हम इसकी बेहतरी के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।
प्रदेश की नई औद्योगिक नीति युवा आबादी के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीदें लेकर आई है। नई नीति के तहत हम सिंगल विंडो सिस्टम और इज आफ डूइंग बिजनेस के तहत निवेश में अनुदान प्रावधान तथा अन्य आकर्षक सुविधाएं

निवेशकों को प्रदान कर रहे हैं। नई नीति के तहत हमने मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद और बंगलुरू जैसे महानगरों के साथ ही जापान एवं दक्षिण कोरिया में भी निवेश सम्मेलन किये।
जापान में आयोजित होने वाला ओसाका वर्ल्ड एक्सपो उद्यमियों के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में से है। यहां हमने छत्तीसगढ़ की विशिष्टताओं को दिखाते हुए पवैलियन लगाया और नई औद्योगिक नीति तथा छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। हमने यह सारी जानकारी जापानी भाषा में दी, यह उनके लिए अनूठा अनुभव था। दोनों ही देशों के निवेशकों ने छत्तीसगढ़ में निवेश करने पर रुचि दिखाई। देश-दुनिया से अब तक हमें 7 लाख 83 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, इन पर तेजी से काम किया जा रहा है।
हमने स्टेट कैपिटल रीजन का निर्माण किया है और इसके तेज विकास के लिए प्राधिकरण का गठन किया है। व्यवस्थित विकास और फ्यूचर प्लानिंग के चलते यह रीजन देश के सबसे तेजी से बढ़ते औद्योगिक केंद्र तथा इज आफ लिविंग के मामले में

देश के अग्रणी शहरों में होगा। यहां हम ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने पर भी काम कर रहे हैं ताकि दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियां यहां से अपना कार्य कर सकें।
भविष्य एआई का है। ऊर्जा की अपार उपलब्धता के चलते एआई से जुड़े उपक्रमों की धुरी छत्तीसगढ़ से संचालित होगी। हमने अटल नगर नवा रायपुर में एआई डाटा सेंटर पार्क आरंभकिया है। इसकी लोकेशन भी इसको महत्वपूर्ण बनाती है, यहां से देश के कोने-कोने में डाटा सबसे कम समय में पहुंचाया जा सकेगा। सेमीकंडक्टर यूनिट पर काम शुरू हो गया है। आईटी हब के साथ ही नवा रायपुर फार्मा हब के रूप में भी उभर रहा है। मेडिसिटी के पूरी तरह विकसित होने पर नवा रायपुर देश के सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल हब में से एक होगा।
छत्तीसगढ़ देश का दूसरा ऐसा राज्य है, जहां जनविश्वास विधेयक लाकर हमने अनेक प्रावधानों को अपराध मुक्त कर दिया है। इससे उद्यमियों और कारोबारियों में उत्साह का माहौल है।
नक्सलवाद के दंश ने बस्तर के विकास में काफी बाधा पहुंचाई। अब हमारे सामने बड़ी चुनौती यह है कि मिशन मोड पर विकास कार्य कर बस्तर को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाए।

हमने इसके लिए पूर्व में गंभीर रूप से नक्सल प्रभावित रहे गांवों में नियद नेल्ला नार योजना शुरू की है। 69 सुरक्षा कैंपों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 403 गांवों में इस योजना के तहत शासन के 17 विभागों की भागीदारी से 53 हितग्राही मूलक योजनाओं और 28 सामुदायिक सुविधाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
जब पहली बार महतारी वंदन योजना के लिए सर्वे हुआ तो गंभीर नक्सल प्रभावित होने की वजह से इन इलाकों की महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका था। हमने इस योजना के तहत पुनः सर्वे किया और अब इन गांवों की माताओं-बहनों को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है।
बस्तर में अधोसंरचना विकास के लिए जो मेहनत डबल इंजन की सरकार ने की है। वैसी मेहनत कभी नहीं हुई थी। विशाखापट्नम में गूगल द्वारा 15 बिलियन डॉलर की लागत से एशिया का सबसे बड़ा डाटा सेंटर हब बनाया जा रहा है। विशाखापट्नम से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस-वे के माध्यम से जुड़ रहा है। यह एक्सप्रेस-वे छत्तीसगढ़ की समृद्धि रेखा बनेगा और पोर्ट सिटी के माध्यम से छत्तीसगढ़ के उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाने में मदद करेगा।

इंद्रावती और महानदी को जोड़े जाने की पहल बस्तर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बस्तर और सरगुजा के अंदरूनी इलाकों में सड़कें बनाने के साथ ही यहां लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए हमने मुख्यमंत्री बस सेवा योजना आरंभ की, इसका संचालन स्थानीय लोग ही कर रहे हैं। इससे लोगों के समय की काफी बचत हो रही है और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं तक पहुंच आसान हो गई है।
हमारे प्रयासों से धरती के स्वर्ग बस्तर में पर्यटक लौट रहे हैं। इस साल नये वर्ष में एशिया का नियाग्रा कहा जाने वाला चित्रकोट जलप्रपात पर्यटकों की संख्या में आये उफान का गवाह भी रहा। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और इसकी अद्भुत जनजातीय संस्कृति को देश-दुनिया को दिखाने हमने इस वर्ष भी बस्तर पंडुम का आयोजन कर रहे हैं। स्वदेश दर्शन योजना के तहत हमने कवर्धा में भोरमदेव को शामिल किया और अब यहां काशी विश्वनाथ की तरह कारिडोर बनने का काम आरंभ हो गया है। हमें इस बात की हार्दिक खुशी है कि बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है, इससे जैव-विविधता को सहेजने में मदद मिलेगी।

संस्कृत की श्रेष्ठ कविता मेघदूतम् की प्रेरणा कालिदास को सरगुजा से मिली। सरगुजा संभाग धरती के सबसे सुंदर हिस्सों में से है। यहां पर्यटन को प्रोत्साहित करने हम काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने और होम स्टे में निवेश पर आकर्षक प्रावधान देने का बेहतर नतीजा सामने आ रहा है। जशपुर में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर महादेव के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जशपुर का मयाली भी स्वदेश दर्शन योजना में शामिल हो गया है।
रेल-सड़क और हवाई सेवाओं के विस्तार का असर सरगुजा संभाग के तेज विकास में नजर आ रहा है। यहां निवेश पर किये गये आकर्षक प्रावधानों के चलते तेजी से आर्थिक निवेश हो रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी अधोसंरचना को भी हम बेहतर कर रहे हैं। जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 359 करोड़ रुपए स्वीकृत किये गये हैं। इसके साथ ही यहां 220 बिस्तर वाले अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है।

नगरीय निकायों की सुंदरता एवं यहां बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने हम मिशन मोड में काम कर रहे हैं। इसके अच्छे नतीजे सामने आये हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ के सभी शहरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री जी ने मन की बात कार्यक्रम में बिल्हा की स्वच्छता दीदियों की प्रशंसा भी की है। रायपुर को प्रामिसिंग स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है और गार्बेज फ्री सिटीज की 7 स्टार रेटिंग मिली है। तीन लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बिलासपुर को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के माध्यम से हम 525 करोड़ रुपए की लागत से सभी नगर निगमों में अधोसंरचना के बुनियादी महत्व के कार्य करा रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के माध्यम से रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई में 50, बिलासपुर में 50 तथा कोरबा में 40 ई-बसों की स्वीकृति प्राप्त हुई है। अटल जी के जन्मशताब्दी को यादगार बनाने हम सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर बना रहे हैं।

अटल जी द्वारा दिखाये सुशासन की राह पर हम निरंतर चल रहे हैं। प्रशासनिक कार्यप्रणाली के हर स्तर पर सुशासन को अपनाया गया है। सुशासन की पहली शर्त है पारदर्शिता, इसे अपनाते हुए हमने डिजिटल गवर्नेस को हर स्तर पर अपनाया है। ई-ऑफिस के माध्यम से हमने सरकारी कामकाज में समयसीमा, गुणवत्ता और पारदर्शिता स्थापित की है। बायोमीट्रिक अटेंडेंस हमने सभी विभागों में लागू किया है। ठीक सुबह 10 बजे अपनी उपस्थिति बायोमीट्रिक अटेंडेंस के माध्यम से दर्ज करानी होती है। अधिकारी-कर्मचारी तय समय पर अपनी जगह पर बैठ जाते हैं और कामकाज शुरू हो जाता है। हमने खरीदी में जेम पोर्टल को अपनाया है और इससे सरकारी खरीदी में होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगी है।
शासन प्रणाली में आये इन असाधारण बदलावों का असर राज्य की जीएसडीपी में नजर आ रहा है। जीएसडीपी वर्ष 2024-25 का अग्रिम अनुमान 3 लाख 29 हजार 752 करोड़ रुपए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.51 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार 2023-24 की तुलना में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 9.37 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख 62 हजार 870 रुपए हो गई है।

हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन हमारे लिए सबसे अहम है। श्रीरामलला हमारी सांस्कृतिक आस्था के केंद्र हैं। श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना से अब तक 40 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के पुण्य दर्शन का लाभ ले चुके हैं। भारतभूमि विलक्षण है जहां उत्तर-दक्षिण-पूरब-पश्चिम हर कोने में पुण्यस्थल मौजूद हैं। प्रदेशवासियों को इनके दर्शन कराने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना भी शुरू की गई है, जिसमें अब तक 5 हजार श्रद्धालु तीर्थ स्थलों का दर्शन कर चुके हैं।
अभी रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन हमने किया। इस आयोजन के माध्यम से हमने ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल सहित दिग्गज साहित्यकारों की प्रेरणा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया है। अपनी बोली-भाषा, लोककला, लोकगीत और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने हम ऐसे कार्यक्रम करते रहेंगे।

राज्य के सर्वांगीण विकास में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था की प्रमुख भूमिका रही है। इसमें हमारे छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों का अनुकरणीय योगदान है। इन्होंने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ नक्सल विरोधी अभियानों में अदम्य साहस का परिचय देते हुए अनेक जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस बल में कार्यरत समस्त बल को सम्मान स्वरूप राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक प्रदान किए जाने की मैं घोषणा करता हूं।
विकसित छत्तीसगढ़ के लिए बनाये गये अंजोर विजन डाक्यूमेंट के अनुरूप हम लगातार कार्य करते रहेंगे। जनभागीदारी से हम छत्तीसगढ़ महतारी को संवारते रहेंगे। मुझे इस अवसर पर स्व. लक्ष्मण मस्तूरिया जी की कविता की पंक्तियां याद आ रही हैं...
"सरग ला पृथ्वी मा ला देहूं प्रण अइसन ठाने हव मोर संग चलव रे मोर संग चलव जी मोर संग चलव गा मोर संग चलव रे"

मस्तूरिया जी की इन पंक्तियों को साकार करना है और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है। आप सभी की भागीदारी से निश्चित ही हम यह लक्ष्य प्राप्त करेंगे।
आप सभी को गणतंत्र दिवस की पुनः बहुत-बहुत बधाई।
जय भारत, जय छत्तीसगढ़

माँ दंतेश्वरी मंदिर चोरी केस: CCTV में कैद हुआ चोर, 5 हजार का इनाम घोषित

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जगदलपुर बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी मंदिर में हुई चोरी की घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मंदिर में चोरी को अंजाम देने वाले आरोपी की पहचान सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से कर ली गई है। पुलिस ने आरोपी का फोटो सार्वजनिक करते हुए उसकी जानकारी देने वाले को 5 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।


यह घटना शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात की है, जब अज्ञात चोरों ने मंदिर के पीछे का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। चोर माँ दंतेश्वरी सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों से सोने-चांदी के आभूषण और तीन मूर्तियां चुराकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। जांच के दौरान सुरक्षा कारणों से मंदिर को कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं के लिए बंद रखा गया।

पुलिस द्वारा मंदिर परिसर और आसपास लगे 100 से अधिक शासकीय व निजी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसके बाद आरोपी की पहचान सुनिश्चित की गई। फॉरेंसिक टीम की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 9 विशेष टीमें गठित की हैं। इनमें से 5 टीमें सीमावर्ती राज्य ओडिशा में आरोपी की तलाश के लिए रवाना की गई हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इनाम की घोषणा का उद्देश्य स्थानीय लोगों की सहभागिता बढ़ाना है, ताकि आरोपी को जल्द पकड़ा जा सके और चोरी गया सामान बरामद किया जा सके। पुलिस को उम्मीद है कि मामले का शीघ्र ही खुलासा होगा।

महासमुंद से रायपुर तक हाई-स्पीड ड्रामा, गांजा तस्कर पुलिस के शिकंजे में

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 रायपुर/महासमुंद। महासमुंद में बैरियर तोड़कर फरार हुए महाराष्ट्र के गांजा तस्करों को विधानसभा थाना पुलिस ने फिल्मी अंदाज में घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने रायपुर में भी पुलिस से बचने के प्रयास में डायल-112 वाहन को टक्कर मार दी थी, लेकिन सतर्क पुलिसकर्मियों ने उन्हें दबोच लिया।


गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ठाणे जिला निवासी राकेश गुप्ता और रायगढ़ (महाराष्ट्र) निवासी अमित सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों की कार से 35 किलो से अधिक गांजा बरामद किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

ऐसे हुआ पूरा घटनाक्रम

विधानसभा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार थाने में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक प्रफुल्ल परीक्षा को महासमुंद पुलिस से सूचना मिली थी कि सफेद रंग की किया कार (MH 46 CV 2841) में संदिग्ध सामग्री लेकर आरोपी रायपुर की ओर भागे हैं और महासमुंद में पुलिस बैरियर तोड़ चुके हैं।

सूचना मिलते ही विधानसभा थाना पुलिस ने रिंग रोड-3 पर घेराबंदी की। मंदिर हसौद की ओर से आ रही कार को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन आरोपियों ने तेज रफ्तार में वाहन चलाते हुए डायल-112 की गाड़ी को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद कार की रफ्तार कम हुई, जिसका फायदा उठाकर पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

पुलिस अधिकारियों का बयान

विधानसभा सीएसपी वीरेंद्र चतुर्वेदी ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपियों को गांजा सहित पकड़ा गया है। “आरोपी गांजा कहां से लाए थे और कहां सप्लाई करने जा रहे थे, इसकी जांच की जा रही है। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पड़ताल की जा रही है,” उन्होंने कहा।

Chhattisgarh : देह व्यापार का भंडाफोड़, मकान से 3 युवक व 5 युवतियां संदिग्ध हालत में पकड़े गए

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 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मकान में संचालित देह व्यापार के रैकेट का पर्दाफाश किया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में शनिवार को की गई छापेमारी के दौरान मकान के भीतर 3 युवक और 5 युवतियां संदिग्ध अवस्था में पाए गए, जिन्हें मौके से हिरासत में लेकर थाने लाया गया।


पुलिस के अनुसार यह मकान डिंगापुर और रामपुर के बीच स्थित बस्ती में रहने वाली सुरती पटेल का है। आरोप है कि यहां लंबे समय से अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। मोहल्ले के लोगों द्वारा विरोध किए जाने पर मकान मालकिन कथित तौर पर गाली-गलौज और धमकी देती थी।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि मकान में लगातार बाहरी युवक-युवतियों का आना-जाना बना रहता था, जिससे क्षेत्र में असामाजिक माहौल बन गया था। कई बार आपत्ति जताने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

शिकायत के बाद पुलिस की कार्रवाई

शुक्रवार को परेशान बस्तीवासियों ने सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की पुष्टि होने पर शनिवार को पुलिस ने मकान में दबिश दी। छापेमारी के दौरान अंदर मौजूद लोग भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर सभी को पकड़ लिया।

पुलिस ने मौके से हरदी बाजार निवासी ईश्वर कुमार, नील कुमार यादव, बैगिनडबार निवासी राज दास महंत, मकान मालकिन सुरती पटेल सहित चार युवतियों को हिरासत में लिया। सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विधिवत गिरफ्तारी की गई है।

वार्डवासियों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

घटना के बाद वार्ड क्रमांक-36 के पार्षद अजय गोड सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी सिविल लाइन थाने पहुंचे और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पार्षद ने कहा कि लंबे समय से अवैध गतिविधियों के कारण क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा था, जिससे बच्चों और स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी।

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

CM साय ने बिलासपुर में फहराया तिरंगा, छत्तीसगढ़ ने मनाया 77वां गणतंत्र दिवस

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 बिलासपुर। देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने बिलासपुर में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने और प्रदेश के विकास में सहभागी बनने का आह्वान किया।


देशभर में आयोजित मुख्य समारोह में भारत ने अपनी विकास यात्रा, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन किया। कर्तव्य पथ पर हुए राष्ट्रीय समारोह में हाल ही में गठित नई सैन्य इकाइयों और ऑपरेशन सिंदूर में उपयोग किए गए प्रमुख हथियार प्रणालियों के मॉडल प्रदर्शित किए गए।


इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन रहे। कार्यक्रम की थीम ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पर आधारित रही।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अगुवाई में  समारोह की शुरुआत हुई, जो लगभग 90 मिनट तक चला। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद राष्ट्रपति और मुख्य अतिथि पारंपरिक बग्घी में कर्तव्य पथ पहुंचे।

इस वर्ष का विशेष आकर्षण भारतीय सेना द्वारा पहली बार प्रस्तुत की गई ‘चरणबद्ध युद्ध संरचना’ (Phased Battle Array) रही, जिसमें ड्रोन, टैंक और तोपखाने के समन्वित युद्ध अभ्यास का सजीव प्रदर्शन किया गया, जो आधुनिक युद्ध की वास्तविक परिस्थितियों को दर्शाता है।

आजादी के बाद पहली बार 41 गांव मनाएंगे गणतंत्र दिवस, बस्तर में फहराएगा तिरंगा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति और लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत देखने को मिल रही है। माओवादी प्रभाव से मुक्त हुए बस्तर क्षेत्र के 41 गांव आज़ादी के बाद पहली बार गणतंत्र दिवस मनाएंगे, जहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। यह बदलाव न केवल नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का संकेत है, बल्कि क्षेत्र में भरोसे, विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत होती जड़ों को भी दर्शाता है।


बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुंदरराज पी ने बताया कि इन 41 गांवों में 13 गांव बीजापुर, 18 गांव नारायणपुर और 10 गांव सुकमा जिले में स्थित हैं।

पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा गणतंत्र दिवस

आईजी सुंदरराज ने कहा, “बस्तर संभाग के 41 गांवों में पहली बार 77वां गणतंत्र दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ये गांव दशकों तक राष्ट्रीय आयोजनों से कटे रहे, लेकिन अब वे देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।”

उन्होंने बताया कि बीते कुछ महीनों में इन इलाकों में स्थापित सुरक्षा शिविरों से स्थानीय लोगों में विश्वास, सुरक्षा और सुशासन की भावना मजबूत हुई है।

शांति की ओर बढ़ता बस्तर

आईजी ने कहा कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और स्थानीय समुदाय के सहयोग से यह सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सका है। “पिछले वर्ष 15 अगस्त को 13 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया था। अब उन्हीं गांवों सहित कुल 54 गांव पहली बार गणतंत्र दिवस मनाएंगे।”

उन्होंने बताया कि अबूझमाड़, राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र समेत कई इलाकों में शीर्ष माओवादी नेताओं के निष्क्रिय होने से चरमपंथी प्रभाव काफी कमजोर पड़ा है। इसके चलते भय और धमकी की जगह अब शांति, विकास और प्रशासनिक पहुंच स्थापित हो रही है।

राज्यभर में तैयारियां पूरी

इस बीच, एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि राज्यभर में गणतंत्र दिवस समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राज्यपाल रमन डेका सोमवार सुबह रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराएंगे और सुरक्षा बलों की सलामी गारद लेंगे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बिलासपुर जिले में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।

इंटरनेट की इस दुनिया में प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा रहेगा - राज्यपाल डेका

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर प्रदान करता है। 

समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।

डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवों के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए। 

डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। श्री डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं। 

समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।  

समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा और आर कृष्णा दास, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने जशपुर में होमस्टे का किया शुभारंभ, एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन स्थल के रूप में ग्राम केरे को किया जाएगा विकसित

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रायपुर। जशपुर जिले को एक प्रमुख इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारत के अग्रणी होमस्टे प्लेटफॉर्म होमस्टेज़ ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ शासन और जशपुर जिला प्रशासन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत ग्राम केरे को एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्राम केरे में तैयार किए गए होमस्टे का शुभारंभ किया गया।  

एमओयू के अंतर्गत जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य होगा। एक सुव्यवस्थित एवं विस्तार योग्य होमस्टे-आधारित ग्रामीण पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना होगी। इस पहल के इस माध्यम से स्थानीय परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, सतत आजीविका को सुदृढ़ किया जाएगा तथा क्षमता निर्माण और कौशल विकास के जरिए युवाओं एवं महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस परियोजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना है, ताकि पर्यटन विकास समावेशी, समुदाय-स्वामित्व वाला और पर्यावरण की दृष्टि से सतत बना रहे तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।

मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में हुए इस समझौता का ज्ञापन पर कलेक्टर जशपुर रोहित व्यास तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनोद वर्मा और होमस्टेज़ ऑफ इंडिया प्रा. लि. के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल राज्य सरकार की इको-पर्यटन, समावेशी विकास एवं समुदाय-नेतृत्व वाले आर्थिक विकास की परिकल्पना के अनुरूप है। स्थानीय संस्कृति और प्रकृति पर आधारित प्रामाणिक पर्यटन अनुभवों के माध्यम से यह परियोजना जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने में सहायक होगी।

जशपुर जिले के बच्चे अब पढ़ेंगे स्मार्ट क्लास रूम में : मुख्यमंत्री साय ने कांसाबेल में किया स्मार्ट क्लास रूम का शुभारंभ

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रायपुर। जशपुर जिले के स्कूली बच्चे अब स्मार्ट क्लास रूम के जरिए पढ़ाई करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कांसाबेल के सरस्वती शिशु मंदिर में स्मार्ट क्लास रूम का शुभारंभ किया। इस परियोजना के लिए एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से 5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत जिले के शासकीय विद्यालयों में 206 इंटरएक्टिव पैनल लगाए जाएंगे। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा को रोचक एवं प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी शहरों के समान बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में नवाचार, जिज्ञासा एवं तकनीकी दक्षता का विकास होगा, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनेगा। इस अवसर पर कार्यक्रम में विधायक  गोमती साय सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।  

अधिकारियों ने बताया कि एमओयू के तहत जशपुर जिले के चयनित शासकीय विद्यालयों में चरणबद्ध रूप से इंटरएक्टिव पैनल स्थापित किए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से शिक्षक डिजिटल कंटेंट, वीडियो, प्रेजेंटेशन एवं ई-लर्निंग संसाधनों का उपयोग कर कक्षाओं को अधिक रोचक, सरल एवं प्रभावी बना सकेंगे। इस पहल से जिले के सैकड़ों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा की बेहतर सुविधा प्राप्त होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टिकोण से विगत माह जिला प्रशासन एसईसीएल एवं ईडूसीआईएल के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे।


जशक्राफ्ट को मिला राष्ट्रीय पहचान का नया मंच : महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से बनाए उत्पाद मिलेंगे देश के विभिन्न एयरपोर्ट पर

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रायपुर। वन विभाग की पहल पर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण और वन आधारित आजीविका को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में विगत दिवस बगिया में रेयर प्लेनेट संस्था तथा जशपुर जिले की स्व-सहायता समूह—जागरण, स्माईल आरती, राखी एवं मुस्कान समूह—के मध्य जशक्राफ्ट ब्रांड के उत्पादों के विपणन हेतु अनुबंध समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत अब जशपुर की जनजातीय महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प, आभूषण एवं सजावटी उत्पाद देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर संचालित रेयर प्लेनेट के बिक्री केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्व-सहायता समूहों को स्थायी बाजार, उचित मूल्य तथा नियमित आय के अवसर प्राप्त होंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एमओयू को जशपुर की महिलाओं के लिए एक निर्णायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जशक्राफ्ट जैसे ब्रांड के माध्यम से हमारी आदिवासी बहनों की कला अब देशभर के लोगों तक पहुँचेगी। यह पहल केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और स्वावलंबन की मजबूत नींव रखती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि वन एवं परंपरागत ज्ञान आधारित आजीविका को बाजार से जोड़ा जाए, ताकि महिलाएं अपने गांव में रहकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह एमओयू ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार करता है तथा जशपुर की जनजातीय महिलाओं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक ठोस और दूरगामी पहल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय, पत्थलगांव क्षेत्र की विधायक गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित स्व-सहायता समूह की महिलाएं एवं रेयर प्लेनेट संस्था के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

पुस्तक विमोचन और जशक्राफ्ट उत्पादों की सराहना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा “जशक्राफ्ट” पर आधारित विशेष पुस्तक का विमोचन किया गया। उन्होंने जशक्राफ्ट के अंतर्गत तैयार किए गए आभूषणों एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए उनकी गुणवत्ता, कलात्मकता और नवाचार की सराहना की।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या देवी एवं विधायक गोमती साय का जशक्राफ्ट ब्रांड के पारंपरिक आभूषण पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया, जो महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संस्कृति के सम्मान का सशक्त प्रतीक बना।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा जशक्राफ्ट ब्रांड के प्रचार-प्रसार हेतु तैयार वीडियो का भी विमोचन किया गया, जिससे जशक्राफ्ट को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

जशक्राफ्ट: जशपुर की सांस्कृतिक विरासत से जन्मा सशक्त ब्रांड

उल्लेखनीय है कि जशक्राफ्ट जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की सजीव अभिव्यक्ति है। जिले की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदायों से आती है, जहाँ पीढ़ियों से बाँस, कांसा घास, छिंद पत्ते, लकड़ी एवं मिट्टी से हस्तनिर्मित कलाकृतियाँ तैयार की जाती रही हैं। पूर्व में संगठित व्यवस्था और बाजार की कमी के कारण कारीगरों की प्रतिभा सीमित रह जाती थी। 

जिला प्रशासन की पहल से जशक्राफ्ट के रूप में ऐसा सशक्त मंच विकसित हुआ है, जो जशपुर जिले के आठों विकासखंडों के कारीगरों को एकजुट कर उनकी कला को पहचान, संरक्षण और बाजार उपलब्ध करा रहा है।

इस पहल के केंद्र में आदिवासी महिला कारीगर हैं, जिनके हाथों से बिना मशीनों के बने उत्पाद परंपरा, प्रकृति और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। जशक्राफ्ट आज स्वदेशी ज्ञान से आकार लेते हुए एक टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका मॉडल के रूप में उभर रहा है।

वन विभाग द्वारा संचालित यह पहल महिला स्वावलंबन, वन आधारित आजीविका और स्थानीय उत्पादों के राष्ट्रीय बाजारीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जो आने वाले समय में जशपुर को हस्तशिल्प के राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाएगी।

अवैध शिकार के मामले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार शिकारी गिरफ्तार

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 कोरबा। कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल क्षेत्र में जंगली सुअर के अवैध शिकार के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई ग्राम लीमपानी और ग्राम बारीउमराव क्षेत्र में की गई।


वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम लीमपानी निवासी एक व्यक्ति ने जंगली सुअर का शिकार किया है। सूचना के बाद विभाग द्वारा विशेष टीम गठित कर गांव में दबिश दी गई। पंचों की मौजूदगी में आरोपी के घर की तलाशी ली गई।

घर से मांस और शिकार के औजार बरामद

तलाशी के दौरान आरोपी के घर से करीब 5 किलो जंगली सुअर का कच्चा मांस, दो पुराने जबड़े और तीन पैर बरामद किए गए। इसके साथ ही शिकार में उपयोग किए गए हथियार भी जब्त किए गए, जिनमें दो कुल्हाड़ी, एक परसुल, दो हंसिया, चार बंडल सेटिंग तार और लकड़ी का एक गुटका शामिल है।

फंदा लगाकर किया था शिकार

पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने पलमापहाड़ क्षेत्र में फंदा लगाकर जंगली सुअर का शिकार किया था। फंदे में फंसने से सुअर की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद आरोपी ने गांव के तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर सुअर को काटा और मांस आपस में बांट लिया। कुछ मांस पकाकर खाए जाने की भी पुष्टि हुई है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज

वन विभाग ने बरामद सामग्री, आरोपियों के कथन और पंचनामा के आधार पर चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराएं 9, 39, 44, 48(क), 51 और 52 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। इस संबंध में प्रकरण क्रमांक 32/01 दर्ज है।

न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी

24 जनवरी को सभी आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पाली के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 6 फरवरी 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में कटघोरा जेल भेज दिया गया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे भी जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि अवैध शिकार की इस गतिविधि में और कोई व्यक्ति शामिल तो नहीं था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण के तहत अवैध शिकार के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

सरकारी डॉक्टर की नौकरी दिलाने के नाम पर 20 लाख हड़पे, आरोपी गिरफ्तार

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 दुर्ग। सरकारी डॉक्टर के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर 20 लाख रुपये की ठगी का मामला दुर्ग जिले में सामने आया है। सिटी कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी विकास चंद्राकर (39) को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज करते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।


पुलिस के अनुसार, अंजोरा निवासी सचिन मालगी (43) ने 29 अगस्त 2025 को थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी विकास चंद्राकर ने सरकारी डॉक्टर के पद पर नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाकर अलग-अलग समय पर कुल 20 लाख रुपये ले लिए।

न नौकरी लगी, न पूरी रकम लौटी

शिकायतकर्ता के अनुसार, रकम लेने के बाद भी आरोपी न तो नौकरी दिला सका और न ही पूरी राशि वापस की। प्राथमिक जांच में मामला धोखाधड़ी का पाए जाने पर सिटी कोतवाली दुर्ग में आरोपी के खिलाफ धारा 420 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

पूछताछ में आरोपी ने जुर्म कबूला

विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि मई 2023 में उसने डॉक्टर की नौकरी लगवाने के नाम पर 20 लाख रुपये लिए थे।

चेक दिए, लेकिन जानबूझकर कराए बाउंस

आरोपी ने बताया कि नौकरी नहीं लग पाने पर उसने 8 लाख रुपये अलग-अलग किश्तों में पीड़ित सचिन मालगी और उसकी पत्नी कीर्ति पटानी के खातों में वापस किए। शेष 13 लाख रुपये लौटाने के लिए आरोपी ने भारतीय स्टेट बैंक के अपने खाते से 5 लाख और 8 लाख रुपये के दो चेक दिए, लेकिन खाते में जानबूझकर पे-ऑप्शन सक्रिय नहीं कराया, जिससे दोनों चेक बाउंस हो गए।

महासमुंद निवासी आरोपी जेल भेजा गया

पुलिस ने आरोपी के कृत्य को गंभीर मानते हुए विधिवत कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपी विकास चंद्राकर महासमुंद जिले का निवासी है। पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

‘वोटर ही लोकतंत्र की आत्मा है’ : 2026 की पहली मन की बात में बोले पीएम मोदी

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 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वर्ष 2026 के पहले मन की बात कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित किया। अपने 130वें रेडियो संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र में मतदाता की भूमिका को सबसे अहम बताते हुए कहा कि वोटर ही लोकतंत्र की आत्मा है।


प्रधानमंत्री ने देश की इंडस्ट्री और स्टार्टअप जगत से आह्वान किया कि वे मैन्युफैक्चरिंग में एक्सीलेंस को नया बेंचमार्क बनाएं और भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बेहतरीन गुणवत्ता की पहचान दिलाएं।

‘जीरो डिफेक्ट’ और टॉप क्वालिटी का आह्वान

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय कंपनियां और उद्यमी ‘जीरो डिफेक्ट’ उत्पाद बनाने का संकल्प लें।
उन्होंने कहा, “चाहे कपड़ा हो, टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स या पैकेजिंग—हर क्षेत्र में भारतीय उत्पाद टॉप क्वालिटी का पर्याय बनने चाहिए। जो कुछ भी हम बनाते हैं, उसकी गुणवत्ता को सर्वोच्च बनाना होगा।”

स्टार्टअप इंडिया की सफलता की सराहना

प्रधानमंत्री ने 2016 से शुरू हुई स्टार्टअप इंडिया यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप उन क्षेत्रों में भी काम कर रहे हैं, जिनकी कल्पना एक दशक पहले मुश्किल थी।

युवा शक्ति को सलाम

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “आज शायद ही कोई ऐसा सेक्टर हो, जहां भारतीय स्टार्टअप न हो। मैं उन सभी युवा साथियों को सलाम करता हूं जो स्टार्टअप चला रहे हैं या शुरू करने का सपना देख रहे हैं।”

राष्ट्रीय पर्वों की शुभकामनाएं

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस और गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और लोकतंत्र के इन उत्सवों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

जन जागरूकता से आएगी सड़क दुर्घटनाओं में कमी : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जन जागरूकता से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। यातायात नियमों के प्रति सजगता ही हमें जनहानि से बचा सकती है।


मुख्यमंत्री साय ने सड़क सुरक्षा का संदेश देते हुए स्वयं हेलमेट पहनकर बाइक चालकों के दल के साथ स्कूटी चलाई।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने राजधानी रायपुर के पंडरी में आधुनिक लाइसेंस सेंटर कार्यालय भवन पंडरी का भूमिपूजन और प्रदेश भर में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 12 नवीन मार्गों में 12 नवीन बसों का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मानव जीवन अनमोल है। उन्होंने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए यातायात नियमों के पालन की अपील आम नागरिकों से की जिससे वाहन दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। आज इस कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे राहगीरों, पुलिस मितान, चिकित्सकों, यातायात पुलिस कर्मियों सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया गया है। ये सभी लोग इस कार्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में किसी माता की कोख सूनी हो जाती है, कई भाई अपनी बहन से हमेशा के लिए बिछड़ जाते हैं और कई बच्चे अनाथ हो जाते हैं।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए रायपुर पुलिस ने अभिनव पहल करते हुए 4500 पुलिस मितान बनाए हैं। ये पुलिस मितान गांवों में सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगें। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम ज्यादा होता है। ऐसे में पुलिस मितान की बड़ी भूमिका होगी। हमने इन पुलिस मितान साथियों को हेलमेट और फर्स्ट ऐड किट भी वितरित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हेलमेट पहनना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में हेड इंजरी ही ज्यादा होती है। इसकी वजह से लोगों की जान जाती है। अतः हमें दुपहिया वाहनों में अनिवार्यतः हेलमेट पहनना चाहिए और चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट अवश्य लगाना चाहिए। वाहन चालक हमेशा ध्यान रखें कि वे वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात ना करें और ट्रैफिक सिग्नल ना तोड़े।

कार्यक्रम में परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आज का कार्यक्रम मात्र एक औपचारिकता ना रहे बल्कि सड़क सुरक्षा का जनांदोलन बने। सड़क दुर्घटना में तत्काल सहायता करने वाले राहगीरों को 25 हजार की राशि का प्रावधान किया गया है। सड़क दुर्घटना प्रभावितों के इलाज के लिए डेढ़ लाख के निःशुल्क इलाज की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ये महीना कई माताओं की गोद सूनी होने से बचाने का महीना है। हेलमेट पहनना अब अनिवार्य किया जाना चाहिए। एक्सीडेंट से कई परिवार उजड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। हेलमेट को अनिवार्य करने से वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात करना भी बंद होगा और लोगों की जान बचेगी।

कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा मितान साथियों को 25 हजार व 5 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई और सड़क सुरक्षा के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले चिकित्सा अधिकारियों, यातायात सिपाहियों, वाहनचालकों, भारत स्काउट गाइड के सदस्यों, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, एनएचएआई के अधिकारी तथा एनएसएस व एनसीसी कैडेट्स को भी सम्मानित किया गया ।

मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के अंतर्गत आयोजित की गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी में सड़क सुरक्षा पर स्कूल व कॉलेज के बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग और साइंस मॉडल की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक सुनील सोनी और पुरंदर मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, परिवहन सचिव एस प्रकाश, अपर परिवहन आयुक्त डी रविशंकर सहित बड़ी संख्या में स्काउट गाइड व एनसीसी कैडेट्स और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

उपनिषद से एआई तक : भाषा, ज्ञान और तकनीक पर हुआ मंथन

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 रायपुर : नवा रायपुर में आयोजित साहित्य महोत्सव 2026 के दूसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप पर साहित्य : उपनिषद से एआई तक विषय पर केंद्रित परिचर्चा आयोजित हुई। इस परिचर्चा में वक्ता के रूप में ट्रिपल आईटी नवा रायपुर के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास, वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर, वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल शामिल हुए। परिचर्चा के सूत्रधार साहित्यकार संजीव तिवारी रहे, परिचर्चा का यह सत्र कवि जगन्नाथ प्रसाद भानु को समर्पित रहा। इस अवसर पर डॉ. गोपाल कमल द्वारा लिखित पुस्तक, गुणाढ्य की गुणसूत्र कथा का विमोचन किया गया।


ट्रिपल आईटी के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास ने कहा कि एआई का जो रूप आज हम देख रहे हैं, इसके पीछे विगत 30–40 वर्षों की मेहनत है। एआई निरंतर निखरता जा रहा है। तकनीक खुद को परिमार्जित करती जाती है, यह प्रक्रिया सतत है। एआई नेट पर उपलब्ध जानकारी, आंकड़ों और सूचनाओं का विश्लेषण कर हमें डिस्क्रिप्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में समझाता है। धीरे-धीरे एआई निखरा और प्रिडिक्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में काम करने लगा। आज एआई भविष्य की चीजों को भी बताता है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2022 में पहली बार चैट जीपीटी आया। सिर्फ तीन साल में एआई का रूप कितना भव्य हुआ है, आप देखिए। हम एआई के भविष्य की अब कल्पना भी नहीं कर सकते। भाषा के मानकीकरण में एआई की क्या भूमिका होगी, यह हम सभी के बीच एक बड़ी चुनौती है।

वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर ने परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि गीता के 18 अध्यायों में सभी तरह के ज्ञान का समावेश है। एआई को लेकर लोग चिंतित हैं कि एआई का फ्यूचर क्या होगा। एआई के आधार पर जापान ने जब रोबोट बनाया तो वह स्वयं को नेगेटिव प्रॉम्प्ट देने लगा। एआई कमांड और प्रॉम्प्ट पर काम करता है। एआई वही बताता है जो नेट पर उपलब्ध है। श्री केतकर ने कहा कि हमारे ऋषि सूचना की नहीं, ज्ञान की बात करते थे। वे एआई से बहुत ज्यादा आगे थे। यदि हम मैकाले की शिक्षा पद्धति की बात करें तो उसने हमें अच्छा उत्तर लिखने वाला बना दिया। प्रश्न जितना गहरा होगा, उत्तर भी उतना ही गहरा होगा। मानव के ज्ञान का उद्देश्य प्रकृति पर विजय पाना नहीं, उसके नियमों को समझकर अपने आपको प्रकृति के अनुरूप ढालना था।

वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल ने सत्र में अपने संबोधन में कहा कि हमारे साथ में सोचने की परंपरा ऋग्वेद से आती है। हम सभी एआई में डीप लर्निंग की बात करते हैं। भाषा कहां से आती है, वह आकार कैसे लेती है, मनुष्य भाषा तक कैसे पहुंचा, इस पर होने वाले कार्य और अध्ययन को साइकोलिंग्विस्टिक के नाम से जाना जाता है। जेनेटिक कोड के जरिए ही हम नई चीजों को सीख पाते हैं। डॉ. गोपाल ने कहा कि सोमदेव ने कथासरितसागर के नाम से संस्कृत में पुस्तक लिखी, इसे हम गुणाढ्य के रूप में देख सकते हैं। संस्कृत के लगभग 3900 सूत्र हैं। महेश्वर सूत्रों से हम सभी शब्दरूप और धातुरूप बना सकते हैं। एआई में हम जीरो से एक का सहारा लेते हैं। गुणसूत्र की भाषा से एआई के संचार नेटवर्क को गढ़ा गया है।

परिचर्चा के सूत्रधार, साहित्यकार श्री संजीव तिवारी ने कहा कि मेरे समझ में उपनिषद और एआई एक जैसे हैं। वेद ज्ञान का खजाना है, जिसका भाष्य उपनिषद है। एआई भी प्रश्नोत्तर शैली में उत्तर देता है। हमारा उपनिषद एआई का मूल है। उन्होंने कहा कि ट्रिपल आईटी हैदराबाद जैसे संस्थान एआई को लेकर काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए दूसरे संस्थान भी काफी अच्छा काम कर रहे हैं, ताकि एआई में बेहतर से बेहतर रूप में छत्तीसगढ़ी भाषा निखरकर आ सके। इस अवसर पर गणमान्य साहित्यकार एवं श्रोता उपस्थित रहे।

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