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मेकाहारा के हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में हुई दुर्लभ 'सर्जरी', ब्रश करते समय फटी गर्दन की नस, फ़िर डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

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 रायपुर : पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। गर्दन की मुख्य धमनी कैरोटिड आर्टरी के अपने आप फट जाने जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा स्थिति में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने समय रहते जटिल सर्जरी कर 40 वर्षीय मरीज की जान बचा ली। यह मामला न केवल छत्तीसगढ़ में पहली बार सामने आया है, बल्कि अब तक विश्व मेडिकल जर्नल में ऐसे केवल 10 ही प्रकरण दर्ज हैं।


ब्रश करते समय अचानक रप्चर (फटी) हुई गर्दन की धमनी

रायपुर निवासी 40 वर्षीय मरीज जब सुबह घर पर दांत साफ कर रहा था, तभी अचानक उसके गले में तेज दर्द हुआ और देखते ही देखते पूरे गर्दन में सूजन आ गई। कुछ ही क्षणों में मरीज बेहोश हो गया। परिजन उसे तत्काल अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर गए।


सीटी एंजियोग्राफी जाँच से पता चला दुर्लभ केस

गर्दन के नसों की सीटी एंजियोग्राफी जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मरीज की दायीं कैरोटिड आर्टरी फट चुकी है और उसके चारों ओर गुब्बारानुमा संरचना बन गई है, जिसे कैरोटिड आर्टरी स्यूडोएन्युरिज्म (Carotid Artery Pseudoaneurysm) कहा जाता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तत्काल हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में में डॉ कृष्ण कांत साहू के पास भेजा गया।

50 से 60% सफलता दर वाली सर्जरी, हर पल था जोखिम भरा

यह ऑपरेशन अत्यंत जोखिमपूर्ण था। गर्दन में खून के अत्यधिक जमाव के कारण धमनी को पहचानना बेहद कठिन था। जरा सी चूक से मरीज की जान जा सकती थी या ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क में खून का थक्का पहुंचने से लकवा या ब्रेन डेड होने का खतरा था। मरीज और परिजनों को सभी जोखिमों की जानकारी देकर सर्जरी की सहमति ली गई।

बोवाइन पेरिकार्डियम पैच से की गई धमनी की मरम्मत

लगभग कई घंटे चले इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में बोवाइन पेरिकार्डियम पैच की सहायता से फटी हुई कैरोटिड आर्टरी को अत्यंत सावधानीपूर्वक रिपेयर किया गया। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और राहत की बात यह रही कि मरीज को किसी भी प्रकार का लकवा नहीं हुआ। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।

स्वतः कैरोटिड आर्टरी का फटना अत्यंत दुर्लभ

सामान्यतः कैरोटिड आर्टरी के फटने की घटनाएं एथेरोस्क्लेरोसिस, ट्रॉमा, कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर,संक्रमण या ट्यूमर से ग्रस्त मरीजों में देखी जाती हैं, लेकिन यह मरीज पूरी तरह स्वस्थ था। अपने आप कैरोटिड आर्टरी का फटना (Spontaneous Carotid Artery Rupture) चिकित्सा जगत में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।

क्या होती है कैरोटिड आर्टरी

कैरोटिड आर्टरी गर्दन के दोनों ओर स्थित प्रमुख धमनी होती है, जो हृदय से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह सुनिश्चित करती है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर मरीज की जान को तत्काल खतरा होता है।

स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने इस दुर्लभ मामले की सफल सर्जरी एवं अभूतपूर्व सफलता पर चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर सहित हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी टीम को बधाई देते हुए इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।

रिश्वतखोरी का VIDEO VIRAL: बिल अटकाकर ठेकेदार से मांगी रिश्वत, पैसा लेते कैमरे में कैद हुआ SDO

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से सरकारी भ्रष्टाचार का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अमृत जल जीवन मिशन के तहत कार्यरत SDO एम.ए. खान पर ठेकेदार से रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगा है। रिश्वत लेते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।


जानकारी के अनुसार, SDO एम.ए. खान ने ठेकेदार से बिल पास करने के बदले 11 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। जब ठेकेदार ने तय कमीशन देने से इनकार किया तो उसका बिल अटका दिया गया। लगातार परेशान किए जाने के बाद ठेकेदार ने मजबूरी में 1 लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत दी, लेकिन इस बार उसने पूरी घटना को कैमरे में कैद कर लिया।

 VIDEO में साफ दिख रहा रिश्वत लेन-देन

वायरल वीडियो में SDO एम.ए. खान को खुलेआम रिश्वत की रकम लेते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

 ACB की नजर, जांच की तैयारी

फिलहाल इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन ACB ने वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान लेने की तैयारी शुरू कर दी है। ACB ने जिले के अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी मांगी है और प्रारंभिक जांच की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, वीडियो की सत्यता की पुष्टि होते ही SDO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

8 जनवरी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का साल का पहला जनदर्शन

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 8 जनवरी, गुरुवार को साल का पहला जनदर्शन कार्यक्रम आयोजित करेंगे। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय, रायपुर में होगा, जहां मुख्यमंत्री प्रदेशवासियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देंगे।


मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनदर्शन में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का त्वरित, संवेदनशील और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

बिना पंजीकरण सीधे पहुंच सकते हैं

जनदर्शन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए किसी प्रकार के पूर्व-पंजीकरण या ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। इच्छुक नागरिक निर्धारित तिथि को सीधे मुख्यमंत्री निवास कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत या आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

आवेदन जमा करने पर टोकन नंबर जारी किया जाता है, जिसके माध्यम से आवेदक बाद में जनदर्शन पोर्टल (jandarshan.cg.nic.in) पर अपनी शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए सुरक्षा और बैठने की समुचित व्यवस्था की जाती है।

27 जून 2024 से शुरू हुआ जनदर्शन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जनदर्शन कार्यक्रम की शुरुआत 27 जून 2024 को हुई थी। पहले ही जनदर्शन में 1500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। यह कार्यक्रम सामान्यतः हर गुरुवार को आयोजित किया जाता है, हालांकि मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं के चलते कभी-कभी इसे स्थगित भी किया गया।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 5 जनवरी 2026 तक लगभग 80 से 85 जनदर्शन कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं। लंबे अंतराल के बाद यह कार्यक्रम 13 नवंबर 2025 से दोबारा नियमित रूप से शुरू हुआ।

रेलवे का बड़ा धमाका: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पहली झलक सामने, जानिए किन शहरों के बीच दौड़ेगी हाई-टेक सेवा

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 नई दिल्ली। भारतीय रेलवे यात्रियों को एक और बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। जल्द ही देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन हावड़ा–गुवाहाटी रूट पर शुरू की जा सकती है। इस अत्याधुनिक स्लीपर ट्रेन की पहली झलक सामने आ चुकी है, जिसने यात्रियों की उत्सुकता बढ़ा दी है।


वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का निर्माण सरकारी कंपनी BEML द्वारा किया गया है, जबकि इसकी मूल तकनीक ICF (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) ने विकसित की है। ट्रेन को नए नारंगी और ग्रे रंग के आकर्षक लुक में तैयार किया गया है। इसका बाहरी डिजाइन पूरी तरह एरोडायनामिक है, जो इसे आधुनिक सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों की श्रेणी में शामिल करता है।

रेलवे के अनुसार, हावड़ा–गुवाहाटी रूट पर इस ट्रेन की औसत गति लगभग 66 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। हालांकि ट्रैक अपग्रेडेशन का कार्य जारी है और भविष्य में इसकी रफ्तार और बढ़ाई जा सकती है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की डिजाइन स्पीड 180 kmph है, लेकिन फिलहाल ट्रैक सीमाओं के कारण इतनी गति संभव नहीं हो पा रही है।

 कोच और क्षमता

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे—

  • 11 कोच AC 3-टियर
  • 4 कोच AC 2-टियर
  • 1 कोच फर्स्ट AC
  • ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के सफर की क्षमता होगी।
  • AC 3-टियर: 611 यात्री
  • AC 2-टियर: 188 यात्री

फर्स्ट AC: 24 यात्री

 हाई-टेक सुविधाएं

यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में—

  • ऑटोमेटिक दरवाजे
  • आधुनिक वेस्टिब्यूल
  • बेहतर कुशनिंग वाली आरामदायक बर्थ
  • नया सस्पेंशन सिस्टम, जिससे झटके और शोर कम होंगे
  • उन्नत डिसइंफेक्टेंट तकनीक से बेहतर साफ-सफाई

 सुरक्षा व्यवस्था

सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन में—

‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली

इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम, जिससे यात्री सीधे ड्राइवर से संपर्क कर सकेंगे

रेल मंत्रालय की योजना 2026 तक 12 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को देश के विभिन्न लंबी दूरी के रूटों पर चलाने की है। इससे रात की रेल यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

CG NEWS : धार्मिक सभा में सनसनीखेज हमला, बुजुर्ग महिलाओं को बनाया निशाना

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 सक्ती (छत्तीसगढ़)। जिले में रविवार को एक शांत सत्संग सभा उस समय हिंसा में बदल गई, जब एक युवक ने सत्संग में बैठी बुजुर्ग महिलाओं पर अचानक डंडे से हमला कर दिया। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ बुजुर्ग महिलाएं एक कमरे में बैठकर सत्संग कर रही थीं। इसी दौरान एक युवक वहां पहुंचा और बिना किसी विवाद या चेतावनी के डंडे से महिलाओं पर हमला शुरू कर दिया। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और महिलाएं जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगीं।

हमले में तीन बुजुर्ग महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसका वीडियो भी सामने आया है।

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और आरोपी युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और हमले के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

कांगेर घाटी में मिली अनोखी “ग्रीन गुफा”, जल्द खुलेंगे पर्यटन के नए द्वार

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ की कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इसी कड़ी में अब कांगेर घाटी में एक और अनोखी प्राकृतिक स्थलाकृति सामने आई है, जिसे “ग्रीन केव” (ग्रीन गुफा) नाम दिया गया है।


गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य सरकार द्वारा पर्यटन और वन्य धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वन मंत्री कश्यप ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन गुफा के पर्यटन मानचित्र में शामिल होने से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को गति प्राप्त होगी और शीघ्र ही पर्यटक इस अद्भुत गुफा की प्राकृतिक खूबसूरती का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकेंगे। वन विभाग द्वारा आवश्यक तैयारियां पूर्ण किए जाने के बाद शीघ्र ही इस गुफा को पर्यटकों के लिए खोले जाने की योजना है।


उल्लेखनीय है कि यह ग्रीन गुफा कोटुमसर परिसर के कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में स्थित है। गुफा की दीवारों और छत से लटकती चूने की आकृतियों (स्टैलेक्टाइट्स) पर हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतें पाई जाती हैं, जिसके कारण इसे “ग्रीन केव” नाम दिया गया है। चूना पत्थर और शैल से निर्मित यह गुफा कांगेर घाटी की दुर्लभ और विशिष्ट गुफाओं में से एक मानी जा रही है।

ग्रीन गुफा तक पहुंचने का मार्ग बड़े-बड़े पत्थरों से होकर गुजरता है। गुफा में प्रवेश करते ही सूक्ष्मजीवी जमाव से ढकी हरी दीवारें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। आगे बढ़ने पर एक विशाल कक्ष दिखाई देता है, जहां से भीतर की ओर चमकदार और विशाल स्टैलेक्टाइट्स तथा फ्लो-स्टोन (बहते पानी से बनी पत्थर की परतें) देखने को मिलती हैं, जो गुफा की प्राकृतिक भव्यता को और भी बढ़ा देती हैं।

घने जंगलों के मध्य स्थित यह गुफा अपनी अनोखी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बनने जा रही है। वन विभाग द्वारा गुफा की सुरक्षा एवं नियमित निगरानी की जा रही है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहुंच मार्ग, पैदल पथ तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य प्रगति पर है। वन विभाग द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवासन तथा प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण पांडे का मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कबीरधाम में रेंज के पहले साइबर थाने का किया शुभारंभ

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 रायपुर : कबीरधाम जिले में साइबर अपराधों के विरुद्ध निर्णायक और दूरदर्शी कदम उठाते हुए उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज पूरे राजनांदगांव रेंज एवं जिले के प्रथम साइबर थाने का शुभारंभ किया। इस थाने को कवर्धा के पुराने पुलिस लाइन में स्थापित किया गया है, इस थाने के जिले में स्थापना को जिले की कानून-व्यवस्था एवं डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।


इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आज का युग डिजिटल है और शासन से लेकर आम नागरिक तक ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के साथ-साथ साइबर अपराधों की चुनौती भी बढ़ी है, जिससे आम नागरिक, महिलाएं, वरिष्ठजन और युवा वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में साइबर थाना की स्थापना आम जनता को त्वरित न्याय, सुरक्षा और भरोसा देने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि साइबर अपराधों में समय सबसे अहम होता है। यदि शुरुआती घंटों में सही कार्रवाई हो जाए तो ठगी की राशि रोकी जा सकती है और अपराधियों तक शीघ्र पहुंचा जा सकता है। साइबर थाना के माध्यम से शिकायतों का तत्काल पंजीकरण, ऑनलाइन फ्रॉड की राशि को समय रहते होल्ड करना, डिजिटल साक्ष्यों का वैज्ञानिक संकलन और अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी। उन्होंने कहा कि यह थाना न केवल अपराध नियंत्रण का केंद्र बनेगा, बल्कि नागरिकों में डिजिटल जागरूकता और विश्वास भी बढ़ाएगा।

कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि साइबर थाना में एक निरीक्षक प्रभारी सहित कुल 30 प्रशिक्षित अधिकारी एवं कर्मचारियों की पदस्थापना की गई है। थाना के प्रभावी पर्यवेक्षण के लिए उप पुलिस अधीक्षक स्तर के राजपत्रित अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे साइबर अपराधों की विवेचना उच्च गुणवत्ता और पेशेवर तरीके से की जा सके।

पुलिस अधीक्षक ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में कबीरधाम पुलिस की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद जिले में साइबर तकनीक के माध्यम से 112 ऑनलाइन ठगी मामलों में लगभग 50 लाख रुपये पीड़ितों को वापस कराए गए हैं। इसके साथ ही सीईआईआर पोर्टल की सहायता से 872 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर नागरिकों को लौटाए गए हैं, जो साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण का प्रमाण है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की इस पहल से कबीरधाम जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम, त्वरित विवेचना और डिजिटल सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

उन्होंने बताया कि गंभीर अपराधों की विवेचना में कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन ट्रैकिंग और डिजिटल साक्ष्यों का उपयोग कर आरोपियों तक शीघ्र पहुंच बनाई गई है। महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों में विशेष संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ कार्रवाई की जा रही है। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित पटेल, डीएसपी कृष्ण कुमार चंद्राकर, डीएसपी आशीष शुक्ला, साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक महेश प्रधान, थाना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक योगेश कश्यप सहित अन्य पुलिस अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

बेंगलुरु में ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, वायुसेना प्रमुख ने किया उद्घाटन

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एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ का शुभारंभ 4 जनवरी 2026 को बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) में हुआ। इस संगोष्ठी का उद्घाटन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने किया। अपने संबोधन में वायुसेना प्रमुख ने एलसीए तेजस की पहली उड़ान के 25 वर्ष पूर्ण होने पर ADA को बधाई दी तथा बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय वायुसेना (IAF) की परिचालन तैयारियों को बनाए रखने के लिए निर्धारित समयसीमा के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने आयात पर निर्भरता कम करने और विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने के लिए स्वदेशी अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के महत्व को रेखांकित किया।

यह संगोष्ठी एयरोस्पेस समुदाय के विशेषज्ञों, औद्योगिक भागीदारों, शैक्षणिक संस्थानों, विमानन उत्साही लोगों तथा वक्ताओं को एक साझा मंच प्रदान कर रही है, जहाँ वे एयरोनॉटिक्स के विकास, डिजाइन नवाचार, विनिर्माण तथा भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा कर रहे हैं। एयरोनॉटिक्स-2047 का मुख्य उद्देश्य आधुनिक एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों के विभिन्न पहलुओं का अन्वेषण करना है, जिनमें अगली पीढ़ी के विमानों के लिए विनिर्माण एवं असेंबली, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, उन्नत लड़ाकू विमानों के लिए एयरोडायनामिक्स, प्रणोदन प्रौद्योगिकियाँ, उड़ान परीक्षण तकनीकें, डिजिटल ट्विन तकनीक, प्रमाणन संबंधी चुनौतियाँ, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम एवं एवियोनिक्स, लड़ाकू विमानों के रखरखाव की चुनौतियाँ, विमान डिजाइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा एक्चुएटर्स के लिए सटीक विनिर्माण शामिल हैं।

यह संगोष्ठी भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के भविष्य और एलसीए तेजस की यात्रा—स्केच से स्क्वाड्रन तक—को भी रेखांकित करेगी। ADA द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया एलसीए तेजस अब तक 5,600 से अधिक सफल उड़ान परीक्षण पूरा कर चुका है। इस कार्यक्रम से 100 से अधिक डिजाइन एवं विकास केंद्र, जिनमें सरकारी प्रयोगशालाएँ, शैक्षणिक संस्थान और उद्योग शामिल हैं, जुड़े रहे। कार्बन कंपोजिट, हल्के पदार्थ, फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम, ग्लास कॉकपिट जैसी कई विशिष्ट तकनीकों का विकास कर एलसीए को चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाया गया।

एलसीए एमके-1ए, स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित इस लड़ाकू विमान का उन्नत संस्करण है, जो भारतीय वायुसेना की परिचालन आवश्यकताओं को प्रभावी रूप से पूरा करेगा। एलसीए एमके-2 और एलसीए नेवी संस्करण वर्तमान में विकासाधीन हैं। संगोष्ठी के दौरान तेजस कार्यक्रम से जुड़े प्रतिष्ठित एवं अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी व्याख्यानों की श्रृंखला भी प्रस्तुत की जाएगी।

एलसीए तेजस के विकास से भारत को अभूतपूर्व लाभ मिला है, क्योंकि देश ने अब स्वदेशी रूप से लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता और सामर्थ्य दोनों हासिल कर ली हैं। एलसीए कार्यक्रम भारत के सबसे सफल स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों में से एक है, जिसके माध्यम से भारतीय वायुसेना को एक उत्कृष्ट वायु श्रेष्ठता लड़ाकू विमान प्राप्त हुआ है। अब तक 38 विमान (32 लड़ाकू और 6 प्रशिक्षक) भारतीय वायुसेना की दो स्क्वाड्रनों में शामिल किए जा चुके हैं।

संगोष्ठी के अंतर्गत बड़ी संख्या में पीएसयू, डीपीएसयू, उद्योग और एमएसएमई अपने स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं विकसित एयरबोर्न अनुप्रयोगों से जुड़े उत्पादों का प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि: पालक सहभागिता में देश में प्रथम

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81,533 पालकों का पंजीयन: देश में पहले स्थान पर छत्तीसगढ़

पालक सहभागिता में देश में प्रथम स्थान गौरव की बात : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

परीक्षा पे चर्चा में छत्तीसगढ़ अव्वल: देश के अभिभावकों के लिए बना रोल मॉडल

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा को तनावमुक्त उत्सव के रूप में मनाने की पहल “परीक्षा पे चर्चा 2026” में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ ने पालकों की भागीदारी में प्रथम स्थान हासिल कर पूरे देश में उदाहरण प्रस्तुत किया है। 

अब तक छत्तीसगढ़ से 25.16 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन किया है, जिनमें 22.75 लाख विद्यार्थी, 1.55 लाख शिक्षक और 81,533 पालक शामिल हैं। यह उपलब्धि राज्य में परीक्षा प्रबंधन, समय प्रबंधन, पालकों को अपने बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक लाने हेतु अनावश्यक दबाव देने से बचने तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए किए जा रहे सुनियोजित प्रयासों को दर्शाती है।

'परीक्षा पे चर्चा' में पालकों की भागीदारी के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। कुल पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर है।  बलोदाबाजार जिले में 14,658 तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 9,952 पालकों द्वारा पंजीयन किया गया है, जो इस अभियान के प्रति अभिभावकों की बढ़ती जागरूकता, सहभागिता और विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। यह उपलब्धि केवल संख्यात्मक सफलता नहीं है, बल्कि यह परीक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव का भी संकेत देती है।

इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे राज्य में अपनाई गई नवाचारपूर्ण रणनीतियाँ महत्वपूर्ण रही हैं। जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की गई, शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों पर ऑन-साइट पंजीयन की व्यवस्था की गई तथा युवा क्लब और “अंगना म शिक्षा कार्यक्रम” के माध्यम से समुदाय को बड़े पैमाने पर जोड़ा गया। 

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” से एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन दर्ज हुए, जबकि इससे पहले प्रतिदिन औसत पंजीयन लगभग 1500 के आसपास था। पिछले प्रयासों के रूप में आयोजित शिक्षक-पालक सम्मेलन और मेगा पीटीएम ने भी अभिभावकों की सजगता और सहभागिता को नई दिशा दी है।

परीक्षा पे चर्चा से जुड़े प्रेरक अनुभव भी लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में शामिल हुई कु. युक्तामुखी ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस वर्ष अधिक से अधिक विद्यार्थियों से पंजीयन कर अपने प्रश्न पूछने की अपील की है। उनका प्रेरक संदेश विद्यार्थियों में उत्साह, आत्मविश्वास और सक्रिय सहभागिता की भावना जागृत कर रहा है। 

इसी प्रकार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में शीतकालीन अवकाश के दौरान आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” में सभी विद्यालयों, समुदाय, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की और इस आयोजन के परिणामस्वरूप एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन हुए। इस सफलता से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी परीक्षा पे चर्चा मेलों का आयोजन किया जा रहा है और लोग उत्साहपूर्वक इस अभियान से जुड़ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में परीक्षा पे चर्चा में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण स्थलों पर ही पंजीयन की व्यवस्था की गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को पंजीयन प्रक्रिया विस्तारपूर्वक समझाई गई और वहीं पर पंजीयन कराने में सहयोग दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षकों द्वारा बहुत बड़ी संख्या में पंजीयन किया गया। 

पंजीयन प्रक्रिया 11 जनवरी 2026 तक खुली रहेगी और इस बात की पूरी संभावना है कि छत्तीसगढ़ में 30 लाख से अधिक पंजीयन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि “परीक्षा पे चर्चा” माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का वार्षिक संवाद कार्यक्रम है, जिसमें वे विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों से सीधे संवाद करते हैं। इस संवाद में परीक्षा से जुड़ी चुनौतियों, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास बढ़ाने के उपायों पर मार्गदर्शन दिया जाता है तथा पालकों को यह संदेश भी दिया जाता है कि वे अधिक अंक लाने के लिए अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि बच्चों का मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ाएँ। यह पहल अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है और परीक्षा को तनाव का विषय न मानकर उत्सव के रूप में मनाने की व्यापक सामाजिक चेतना विकसित कर रही है।

“परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ द्वारा प्राप्त की गई यह उपलब्धि पूरे राज्य के विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा परीक्षा को तनाव नहीं बल्कि उत्सव के रूप में मनाने का जो संदेश दिया गया है, उसे छत्तीसगढ़ ने दिल से अपनाया है। कुल पंजीयन में देश में चौथा स्थान और पालक सहभागिता में प्रथम स्थान प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि हमारे यहां अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ी है और वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इसी उत्साह के साथ हम 30 लाख से अधिक पंजीयन के लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे और परीक्षा को तनावमुक्त बनाने के इस अभियान को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते रहेंगे।” - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

महासमुंद-राजिम मार्ग सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन कार्य के लिए 147 करोड़ रुपए स्वीकृत

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महासमुंद- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य की सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पांच जिलों के लगभग 174 किलोमीटर लंबी सड़कों का चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और उन्नयन कार्य के लिए स्वीकृति प्रदान की है। इसमें राजिम–फिंगेश्वर–महासमुंद मार्ग के 35.5 किमी हिस्से के उन्नयन के लिए 146.86 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। 


इस संबंध में महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने केंद्र एवं राज्य शासन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जारी बयान में कहा है कि केंद्र सरकार की यह स्वीकृति छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई दिशा देगी। बेहतर सड़कें न केवल यातायात को सुरक्षित बनाएंगी, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देंगी। उन्होंने आगे कहा कि महासमुंद से फिंगेश्वर और राजिम तक मार्ग का उन्नयन कार्य क्षेत्र की जनता के लिए काफी लाभकारी साबित होगा। दोनों जिलों को जोड़ने वाले इस सड़क के माध्यम से व्यापार सहित अन्य गतिविधियां जुड़ी हुई है। लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी। महासमुंद विधानसभा क्षेत्र के लोगों द्वारा भी काफी समय से इस मार्ग के उन्नयन की मांग की जा रही थी। राजिम पूरे प्रदेश में आध्यात्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थल है। आगामी दिनों में यहां लगने वाले मेला में भीड़ उमड़ती है। महासमुंद से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु राजीवलोचन मंदिर, कुलेश्वर महादेव के दर्शन करने जाते हैं, जिनका सफर अब सुगमता से पूरा होगा।

आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

महासमुंद को राजिम से जोड़ने वाले यह मार्ग आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से 35 किमी का सफर अब कम समय में और सुगमता से पूरा होगा। महासमुंद और गरियाबंद दोनों जिलों के सैकड़ों गांवों के लोगों के लिए आवागमन आसान होगा, जिससे व्यापार और शिक्षा के क्षेत्रों में नई गति आएगी। फिंगेश्वर क्षेत्र के कई गांव के ग्रामीण जो महासमुंद की सीमा के आसपास हैं वें चिकित्सकीय सुविधा के लिए महासमुंद मेडिकल कॉलेज भी आते हैं। इन सभी के लिए यह काफी लाभदायक साबित होगा।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए चयन ट्रायल 6-8 जनवरी को रायपुर और बिलासपुर में

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ की मेजबानी में देश में पहली बार हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में राज्य की ओर से खेलने वाली टीमों के चयन के लिए ट्रायल 6 जनवरी से 8 जनवरी तक रायपुर और बिलासपुर में आयोजित किए जा रहे हैं। नेशनल ट्राइबल गेम्स में सात खेलों को शामिल किया गया है। इसमें भागीदारी के लिए वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी के खिलाड़ियों का ट्रायल रायपुर में आयोजित किया गया है।


वहीं तीरंदाजी, एथलेटिक्स और तैराकी के खिलाड़ियों के ट्रायल बिलासपुर में होंगे। इच्छुक खिलाड़ी मोबाइल नम्बर +91-8871419609 पर फोन कर या वेबसाइट http://sportsyw.cg.gov.in के माध्यम चयन ट्रायल संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए खिलाड़ी अपना ऑनलाइन पंजीयन क्यूआर कोड और रजिस्ट्रेशन लिंक से कर सकते हैं। सभी ट्रायलस्थलों पर ऑफलाइन पंजीयन भी किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ के स्थायी निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग के खिलाड़ी ही चयन ट्रायल में भाग लेने के पात्र होंगे। महिला एवं पुरूष दोनों वर्गों में पात्र खिलाड़ियों के लिए आयु सीमा का कोई बंधन नहीं है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने ट्रायल में हिस्सा लेने पहुंचने वाले सभी खिलाड़ियों से अपने अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र और आधार कॉर्ड/स्थानीय प्रमाण पत्र की मूल कॉपी (Original Copy) साथ लाने को कहा है।

रायपुर में होंगे वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी के ट्रायल

रायपुर के स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा में 6 जनवरी को सवेरे नौ बजे से वेट-लिफ्टिंग, 7 जनवरी को सवेरे नौ बजे से कुश्ती तथा 7 जनवरी और 8 जनवरी को सवेरे नौ बजे से फुटबॉल के लिए ट्रायल होंगे। 7 जनवरी और 8 जनवरी को सवेरे नौ बजे से रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में हॉकी खिलाड़ियों का ट्रायल होगा।

तीरंदाजी, एथलेटिक्स और तैराकी के ट्रायल बिलासपुर में

बिलासपुर के स्वर्गीय बी.आर. यादव स्टेडियम में 7 जनवरी को सवेरे नौ बजे से तीरंदाजी और एथलेटिक्स के ट्रायल होंगे। बिलासपुर के सरकंडा स्थित जिला खेल परिसर में 7 जनवरी को सवेरे नौ बजे से तैराकी खिलाड़ियों का ट्रायल होगा।

CGPSC : सूबेदार व SI भर्ती: 6 जनवरी से 6 फरवरी तक PMT और दस्तावेज सत्यापन

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर (गृह पुलिस विभाग) भर्ती परीक्षा 2024 के अंतर्गत अभ्यर्थियों के दस्तावेज़ सत्यापन एवं शारीरिक माप परीक्षण की तिथियाँ घोषित कर दी गई हैं।


आयोग द्वारा जारी सूचना के अनुसार यह प्रक्रिया 06 जनवरी से 06 फरवरी 2026 तक आयोजित की जाएगी। दस्तावेज़ सत्यापन एवं शारीरिक माप परीक्षण परीक्षा जिला सरगुजा, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, रायपुर एवं राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) में निर्धारित केंद्रों पर संपन्न होगी।

अभ्यर्थियों के लिए प्रातः 07:00 बजे रिपोर्टिंग समय निर्धारित किया गया है, जबकि शारीरिक माप परीक्षण प्रातः 08:00 बजे से प्रारंभ होगा। आयोग ने बताया कि उक्त परीक्षा हेतु प्रवेश पत्र दिनांक 26 दिसम्बर 2025 को जारी कर दिए गए हैं। अभ्यर्थी अपने प्रवेश पत्र आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov-in से डाउनलोड कर सकते है, एवं अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग द्वारा जानकारी दी गई है कि अभ्यर्थियों को पृथक से प्रवेश पत्र व्यक्तिशः नहीं भेजी जाएगी।

प्रदीप मिश्रा का बड़ा बयान: RSS की तुलना भगवान शिव से की, कहा- विष पीकर भी राष्ट्र की रक्षा करता है संघ

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 भोपाल। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना भगवान शिव से करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान शिव ने विष पीकर सृष्टि की रक्षा की, उसी तरह RSS भी विष पीकर राष्ट्र की रक्षा में लगा हुआ है।


पंडित प्रदीप मिश्रा यह बात शनिवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में RSS द्वारा आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित करते हुए कही। इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और मध्यभारत प्रांत के संघचालक अशोक पांडेय भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्ग अपने-अपने स्तर पर राष्ट्र सेवा में लगे हुए हैं, लेकिन यह आत्मचिंतन भी जरूरी है कि हमने व्यक्तिगत रूप से देश के लिए क्या योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि जन्म चाहे किसी भी जाति में हो, पहचान अंततः हिंदू, सनातनी और भारतीय की ही होती है।

धर्मांतरण को बताया गंभीर षड्यंत्र

पंडित प्रदीप मिश्रा ने धर्मांतरण के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि यह केवल वर्तमान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करने वाला एक गंभीर षड्यंत्र है। उन्होंने समाज से सजग रहने और इससे बचने की अपील की।

उन्होंने ‘ग्रीन महाशिवरात्रि’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि घर-घर मिट्टी के शिवलिंग की पूजा सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण है। यह पहल समाज को जोड़ने का काम कर रही है।

एकता ही हमारी पहचान: मोहन भागवत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि विविधता के बावजूद एकता ही भारत की पहचान है। उन्होंने कहा कि बाहरी रूप से हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं।

भागवत ने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा पद्धति या जीवनशैली के आधार पर विवाद नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है।

बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी सच होने के करीब? अमेरिका–वेनेजुएला तनाव ने बढ़ाई तीसरे विश्व युद्ध की आशंका

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 Baba Vanga 2026 Predictions: फ्रांसीसी भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस और बुल्गारिया की प्रसिद्ध भविष्यवक्ता बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां एक बार फिर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि बाबा वेंगा ने वर्ष 2026 में बड़े वैश्विक युद्ध की चेतावनी दी थी, जो अब मौजूदा अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से मेल खाती नजर आ रही है।


इसी कड़ी में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि 3 जनवरी की रात अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में सैन्य कार्रवाई की, जिसके बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया गया। इन दावों के सामने आने के बाद बाबा वेंगा की भविष्यवाणी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

क्या कहा था बाबा वेंगा ने?

बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों के अनुसार, वर्ष 2026 में दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने कहा था कि यह दौर बेहद विनाशकारी होगा, जिसमें धर्म और राष्ट्रवाद के नाम पर व्यापक हिंसा फैलेगी। इंसान ही इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाएगा और पूरी दुनिया इसका खामियाजा भुगतेगी।

उन्होंने समुद्र से जुड़ी बड़ी दुर्घटनाओं और वैश्विक अस्थिरता की भी चेतावनी दी थी।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा?

वेनेजुएला से जुड़ी हालिया घटनाओं को बाबा वेंगा की भविष्यवाणी से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में जनहानि और बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की बात कही जा रही है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति को लेकर अटकलें तेज हैं।

2026 को लेकर भविष्यवाणी में और क्या?

बाबा वेंगा की भविष्यवाणी के अनुसार, पूर्वी और पश्चिमी शक्तियों के बीच टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। इसमें रूस, चीन और अमेरिका जैसे देशों के बीच सीधे या परोक्ष संघर्ष की संभावना जताई गई थी। उन्होंने कहा था कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा और भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है।

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह करेंगे हैदराबाद में स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर फार्म एवं अत्याधुनिक RAS सुविधा का उद्घाटन

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केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह 5 जनवरी 2026 को तेलंगाना के हैदराबाद में आयोजित सामान्य निकाय बैठक के पश्चात स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर फार्म एवं अनुसंधान संस्थान तथा अत्याधुनिक रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) सुविधा का उद्घाटन करेंगे।

स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर लिमिटेड द्वारा स्थापित यह भारत का पहला वाणिज्यिक स्तर का उष्णकटिबंधीय रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) आधारित रेनबो ट्राउट एक्वाकल्चर फार्म एवं अनुसंधान संस्थान है, जो भारतीय मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। यह परियोजना तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के कंदुकुर मंडल में स्थित है और यह निर्णायक रूप से सिद्ध करती है कि रेनबो ट्राउट जैसी उच्च मूल्य वाली शीत-जल प्रजातियों का उष्णकटिबंधीय जलवायु में भी वर्षभर पालन संभव है। यह उपलब्धि सटीक इंजीनियरिंग, नियंत्रित जैविक प्रणालियों और उन्नत जल पुनर्चक्रण तकनीकों के माध्यम से हासिल की गई है।

यह परियोजना उन दीर्घकालिक धारणाओं को चुनौती देती है, जिनके अनुसार प्रीमियम एक्वाकल्चर प्रजातियाँ केवल विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु क्षेत्रों तक सीमित होती हैं, और यह स्थापित करती है कि एक्वाकल्चर की व्यवहार्यता में जलवायु नहीं बल्कि तकनीक निर्णायक कारक है।

यह परियोजना एक जीवंत प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन मंच के रूप में कार्य करती है, जहाँ युवाओं को उन्नत एक्वाकल्चर प्रणालियों, स्वचालन (ऑटोमेशन) तथा जैव-सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र में मानव संसाधन सुदृढ़ होते हैं।

भारत सरकार ने मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर क्षेत्र के समग्र विकास हेतु कई परिवर्तनकारी पहलें आरंभ की हैं। वर्ष 2015 से अब तक विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत इस क्षेत्र के लिए कुल ₹38,572 करोड़ के निवेश को स्वीकृति अथवा घोषणा दी जा चुकी है, जिससे इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

शीत-जल मत्स्य पालन मत्स्य क्षेत्र का एक उभरता हुआ और उच्च संभावनाओं वाला खंड बनकर तेजी से सामने आ रहा है। प्रीमियम शीत-जल प्रजातियों की बढ़ती बाजार मांग, घरेलू एवं निर्यात अवसरों के विस्तार तथा सतत एक्वाकल्चर तकनीकों में बढ़ते निवेश के कारण यह उप-क्षेत्र आजीविका सृजन और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, विशेषकर पर्वतीय और उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में।

ट्राउट पालन भारत के एक्वाकल्चर क्षेत्र का एक उच्च मूल्य वाला और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खंड है, जो मुख्यतः उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे हिमालयी एवं पर्वतीय राज्यों में केंद्रित है, जहाँ बर्फ से पोषित नदियों और नालों के शीतल एवं ऑक्सीजन-युक्त जल संसाधनों का उपयोग किया जाता है।

मत्स्य पालन विभाग ने रेनबो ट्राउट हैचरी के विकास के माध्यम से इन संसाधनों के प्रभावी उपयोग में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे मत्स्य उत्पादन में वृद्धि हुई है और स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। नई हैचरी की स्थापना और उन्नत एक्वाकल्चर तकनीकों के अपनाने से वार्षिक 14 लाख ट्राउट बीज उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड सरकार ने वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के साथ ट्राउट मछली आपूर्ति हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी हस्ताक्षरित किया है।

भारत सरकार लक्षित निवेश, तकनीकी नवाचार और संस्थागत सुधारों के माध्यम से एक्वाकल्चर को एक रणनीतिक विकास इंजन के रूप में आगे बढ़ा रही है। RAS जैसी आधुनिक प्रणालियों, उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के विविधीकरण, क्षमता निर्माण तथा बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देकर सरकार इस क्षेत्र को पारंपरिक आजीविका-आधारित मॉडल से हटाकर एक तकनीक-प्रेरित, बाजारोन्मुखी पारिस्थितिकी तंत्र की ओर अग्रसर कर रही है। ये हस्तक्षेप उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने, क्षेत्रीय सीमाओं को कम करने और भारतीय एक्वाकल्चर को सतत एवं विस्तार योग्य तरीके से घरेलू मांग और उभरते निर्यात अवसरों को पूरा करने के लिए सक्षम बना रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश में शीत-जल मत्स्य पालन क्लस्टर के विकास हेतु अधिसूचना जारी की है।

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