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डीजल-पेट्रोल फिर होगा महंगा? होर्मुज संकट और रूसी तेल पर सख्ती से बढ़ी चिंता

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 Petrol-Diesel Price:  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों की धीमी आवाजाही ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट आगे नहीं बढ़ाने से भारत की चिंता भी बढ़ गई है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हो सकती है।


दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई और ट्रांसपोर्टेशन लागत प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। टैंकरों के इंश्योरेंस और शिपिंग खर्च में भी तेज इजाफा हुआ है।

भारत के सामने बढ़ी दोहरी चुनौती

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों का सीधा असर देश की महंगाई, सरकारी खर्च और आम लोगों के बजट पर पड़ता है।
यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन भारत और चीन ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद जारी रखी। इससे भारत को लंबे समय तक सस्ता कच्चा तेल मिलता रहा और घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली। इसी दौरान रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बन गया।
हालांकि अब अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर दी गई अस्थायी राहत समाप्त कर दी है। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों के लिए जोखिम और लागत दोनों बढ़ सकती हैं।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था रूसी तेल आयात

डेटा के अनुसार, मई महीने में भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 2.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था। कई महीनों तक भारत के कुल तेल आयात में रूसी क्रूड की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत रही। यही वजह थी कि भारत वैश्विक तेल संकट के बावजूद बड़े झटके से बचा रहा।

क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां टैक्स, सब्सिडी और स्टॉक मैनेजमेंट जैसे विकल्पों के जरिए तत्काल असर को सीमित करने की कोशिश कर सकती हैं।
फिलहाल स्थिति पूरी तरह वैश्विक तनाव और तेल सप्लाई की स्थिरता पर निर्भर मानी जा रही है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक से लूट, मॉर्निंग वॉक के दौरान मोबाइल झपटकर फरार हुआ बदमाश

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में आज सोमवार सुबह बड़ी लूट की वारदात सामने आई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक मॉर्निंग वॉक के दौरान मोबाइल लूट का शिकार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई।


जानकारी के अनुसार, धरमलाल कौशिक सोमवार सुबह करीब 8:15 बजे मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। बताया जा रहा है कि उस समय वे अकेले थे। इसी दौरान बाइक सवार एक बदमाश ने उनका मोबाइल फोन झपट लिया और मौके से फरार हो गया।

घटना के बाद कौशिक ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया। पुलिस आरोपी की पहचान कर उसकी तलाश में जुटी हुई है।

गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में मोबाइल लूट और झपटमारी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में पंडरी इलाके में भी एक युवक पर ब्लेड से हमला कर उसका मोबाइल लूट लिया गया था। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से शहरवासियों में दहशत का माहौल है।

UAE के परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास ड्रोन हमला, आग लगने से मचा हड़कंप

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 Drone Attack in Abu Dhabi : संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि रविवार को उसके परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास ड्रोन हमला हुआ, जिसके बाद आग लग गई। UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, तीन ड्रोन पश्चिमी सीमा की ओर से देश में दाखिल हुए थे। इनमें से दो ड्रोन को सुरक्षा बलों ने मार गिराया, जबकि तीसरा ड्रोन अबू धाबी स्थित बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र की बाहरी सीमा के पास एक बिजली जनरेटर से टकरा गया, जिससे आग लग गई।


अधिकारियों ने बताया कि आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया और घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। साथ ही संयंत्र की परमाणु सुरक्षा व्यवस्था और संचालन पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

UAE ने कहा- जवाब देने का अधिकार सुरक्षित

UAE के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को “खतरनाक उकसावा” और “अस्वीकार्य आक्रामकता” करार दिया है। मंत्रालय ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और मानवीय सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए उचित जवाब देने का अधिकार है। हालांकि, UAE ने अभी तक किसी देश या संगठन को हमले के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी चिंता

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के चलते खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं।

UAE ने पहले भी ईरान पर अपने ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के आरोप लगाए हैं। वहीं, ईरान ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि UAE क्षेत्रीय संघर्ष में अमेरिका और इजरायल का समर्थन कर रहा है।

IAEA ने जताई चिंता

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया।

पहले भी हो चुके हैं हमले

रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में UAE और अन्य खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। UAE का दावा है कि उसके नागरिक और ऊर्जा ढांचे को कई बार निशाना बनाया गया है। हालांकि, इन हमलों को लेकर क्षेत्रीय तनाव लगातार गहराता जा रहा है।

पीएम मोदी ने स्वीडिश कंपनियों को भारत में निवेश के लिए किया आमंत्रित

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 PM Modi in Sweden: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीडिश कंपनियों से भारत में विनिर्माण, हरित हाइड्रोजन, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना समेत कई क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत में सुधारों की रफ्तार तेजी से आगे बढ़ रही है और देश निवेश, नवाचार तथा विनिर्माण के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक केंद्रों में शामिल हो चुका है।


स्वीडन की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन (ERT) को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पूरी गति से चल रही है। उन्होंने स्वीडिश और यूरोपीय कंपनियों को भारत के विकास अभियान में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

कई क्षेत्रों में निवेश की अपील

प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स, डीप टेक मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हरित ऊर्जा, अवसंरचना, शहरी परिवर्तन, गतिशीलता, स्वास्थ्य सेवा और लाइफ साइंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में सभी कंपनियों के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं और सरकार निवेशकों को बेहतर माहौल देने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार की अगली लहर भारत में सह-निर्मित होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने भारत की युवा आबादी, बढ़ते मध्यम वर्ग और तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे को देश की बड़ी ताकत बताया।

भारत-स्वीडन साझेदारी पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्वीडन लोकतंत्र, पारदर्शिता, नवाचार और स्थिरता जैसे साझा मूल्यों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने स्वीडन की तकनीकी क्षमता और भारत के विशाल बाजार एवं प्रतिभा को साथ लाने की जरूरत बताई।

वोल्वो समूह द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोप और भारत की कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

भारत-ईयू व्यापार समझौते को बताया अहम

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बढ़ते संबंधों का स्वागत किया। उन्होंने हाल ही में संपन्न भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को “परिवर्तनकारी आर्थिक साझेदारी” बताया।

उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यापार, तकनीक, विनिर्माण, सेवाओं और मजबूत सप्लाई चेन के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए दोनों पक्ष तेजी से काम कर रहे हैं।

भारत को बताया निवेश का आकर्षक केंद्र

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज निवेश, नवाचार और उत्पादन के लिए दुनिया के सबसे भरोसेमंद और आकर्षक देशों में से एक बन चुका है। उन्होंने “डिजाइन फॉर इंडिया, मेक इन इंडिया और एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया” के विजन को दोहराते हुए यूरोपीय कंपनियों से भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया।

उन्होंने भारत और यूरोप के बीच शिक्षा, कौशल विकास और प्रतिभा आदान-प्रदान को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत का युवा और कुशल कार्यबल भविष्य की वैश्विक आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभाएगा।

सुशासन तिहार में साकार हुआ पक्के घर का सपना

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हितग्राहियों को सौंपी प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी

रायपुर- “अपना पक्का घर केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और नए जीवन की मजबूत नींव होता है।” धमतरी में आयोजित सुशासन तिहार 2026 के दौरान यह भाव उस समय जीवंत हो उठा, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत हितग्राहियों को प्रतीकात्मक चाबी सौंपकर उनके वर्षों पुराने सपनों को साकार किया। सुशासन तिहार  में भाटगांव की हितग्राही कुमारी यादव एवं  लता साहू को मुख्यमंत्री साय के हाथों आवास की चाबी प्रदान की गई। वर्षों तक कच्चे मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाले इन परिवारों के लिए यह क्षण केवल एक सरकारी योजना का लाभ मिलने भर का नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व से भरे नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक बन गया।

हितग्राही कुमारी यादव ने बताया कि बरसात के दिनों में उनका परिवार लगातार परेशानियों का सामना करता था। कच्चे घर की टपकती छत और कमजोर दीवारों के कारण बच्चों की पढ़ाई और परिवार की सुरक्षा हमेशा चिंता का विषय बनी रहती थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित महसूस कर रहा है और बच्चों के भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।

इसी प्रकार  लता साहू ने कहा कि पहले हर मौसम चिंता लेकर आता था, लेकिन अब पक्का घर मिलने से उनके परिवार को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार अंत्योदय की भावना के साथ कार्य कर रही है और प्रत्येक पात्र एवं जरूरतमंद परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल मकान निर्माण की योजना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाया जा रहा है तथा जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। यही कारण है कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हो रहा है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना ने हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई दिशा दी है।

इस अवसर पर सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद अजय चन्द्राकर, विधायक धमतरी ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष अरूण सार्वा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

ग्रामीण अंचल की बेटी बनी प्रेरणा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सराहा उत्कृष्ट प्रदर्शन

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सुशासन तिहार में मेधावी छात्रा कुसुम लता बिप्रे का सम्मान, टैबलेट देकर बढ़ाया उत्साह

रायपुर- धमतरी जिले के छोटे से ग्राम कंडेल की बेटी कुमारी कुसुम लता बिप्रे ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प से पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा में 97.40 प्रतिशत अंक अर्जित कर प्रदेश की प्रावीण्य सूची में पांचवां स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल धमतरी जिले का गौरव बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल भी प्रस्तुत की है।

सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत धमतरी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुसुम लता को मंच पर सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने उन्हें शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा आगे की पढ़ाई और तकनीकी शिक्षा में सहयोग के उद्देश्य से टैबलेट प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज शिक्षा, खेल, विज्ञान और प्रशासन सहित हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और राज्य सरकार उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से निकल रही ऐसी प्रतिभाएं विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान हैं और सरकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कुसुम लता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि यह ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था, परिवार के संस्कार और विद्यार्थियों की मेहनत का सकारात्मक परिणाम है। साधारण परिवार से आने वाली कुसुम लता ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में आगे बढ़ने का संकल्प हो, तो परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।

कुसुम लता ने बताया कि उन्होंने नियमित अध्ययन, अनुशासन और परिवार के सहयोग के बल पर यह सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से जिले के अन्य विद्यार्थियों में भी शिक्षा के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार हुआ है। ग्रामीण अंचल की अनेक बेटियां अब उन्हें अपनी प्रेरणा के रूप में देख रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मेधावी छात्र-छात्राएं राज्य की अमूल्य पूंजी हैं। शासन उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुसुम लता की उपलब्धि हजारों विद्यार्थियों को यह संदेश देती है कि सपनों की उड़ान गांवों से भी शुरू होकर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है और प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती।

इस अवसर पर सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद अजय चन्द्राकर, विधायक धमतरी ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष अरूण सार्वा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

अबूझमाड़ में फैल रही है शिक्षा की रौशनी

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आज़ादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ के अति दूरस्थ गांव कारकाबेड़ा में खुला नया प्राथमिक स्कूल

 नदी-नाले और पहाड़ पार कर 5 घंटे पैदल चलकर अधिकारियों ने कराया दाखिला

रायपुर- देश के गृह मंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ क्षेत्र अब नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर शिक्षा की नई रोशनी की ओर बढ़ रहा है। इसका सबसे सुखद और ऐतिहासिक परिणाम नारायणपुर जिले के अति दूरस्थ ग्राम कारकाबेड़ा में देखने को मिला है, जहां आजादी के बाद पहली बार किसी स्कूल की स्थापना हुई है। कभी नक्सलियों का गढ़ रहे इस इलाके में अब बच्चों को बंदूक की जगह कलम और किताबें मिल रही हैं।

जनसमस्या शिविर से खुला विकास का रास्ता

​हाल ही में अबूझमाड़ के सुदूर क्षेत्र कोड़ेनार में एक जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में कारकाबेड़ा के ग्रामीणों ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए गांव में ही स्कूल खोलने की पुरजोर मांग की थी। कलेक्टर  ने मामले की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए तत्परता दिखाई और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)  को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

​5 घंटे की पैदल यात्रा और सर्वे

​कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम ने सबसे पहले कारकाबेड़ा गांव का सर्वे किया, जिसमें 20 बच्चे प्राथमिक शिक्षा के योग्य पाए गए। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी,खंड स्रोत समन्वयक, संकुल समन्वयक, सरपंच और शिक्षकों की संयुक्त टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया। यह टीम दुर्गम रास्तों, कई नदी-नालों और पहाड़ियों को पार करते हुए लगभग 5 घंटे की कठिन पैदल यात्रा कर कारकाबेड़ा पहुंची और नवीन प्राथमिक शाला का औपचारिक शुभारंभ किया।

मुफ्त गणवेश और शिक्षण सामग्री का वितरण

​स्कूल के पहले ही दिन बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही चमक थी। जिला प्रशासन द्वारा स्कूल प्रारंभ होने के साथ ही सभी 20 बच्चों को ​निःशुल्क गणवेश,​पाठ्यपुस्तकें और स्लेट,पेंसिल, श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियां उपलब्ध कराई गईं।

कारकाबेड़ा सरपंच रामूराम वड्डे ने कहा कि गांव में स्कूल खुलना हमारे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। अब हमारे बच्चों को पढ़ने के लिए जान जोखिम में डालकर दूर नहीं जाना पड़ेगा।

अतिथि शिक्षक की व्यवस्था,पड़ोसी गांवों को भी मिलेगा लाभ

​वर्तमान में इस स्कूल के सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक स्थानीय अतिथि शिक्षक की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में कारकाबेड़ा के इस स्कूल का लाभ आसपास के अन्य दूरस्थ गांवों, जैसे मरकूड़ के बच्चों को भी मिलेगा।

नक्सलवाद के खात्मे के बाद अबूझमाड़ के इस अंदरूनी इलाके में स्कूल खुलना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार और शांति बहाली की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

विशेष लेख-नक्सल मुक्त बीजापुर में विकास की नई दस्तक

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चार दशकों बाद फिर सजी पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली की साप्ताहिक बाजारें

बंद पड़े हाट-बाजारों में लौटी रौनक, आदिवासी अंचलों की अर्थव्यवस्था को मिला नया जीवन

रायपुर- कभी माओवाद के आतंक और भय के कारण वीरान पड़े बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल अब विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की मिसाल बनते जा रहे हैं। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन तेजी से पटरी पर लौट रहा है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण उसूर ब्लॉक के आवापल्ली क्षेत्र अंतर्गत पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के साप्ताहिक बाजार हैं, जहां लगभग चार दशकों बाद फिर से रौनक लौट आई है।

एक समय ऐसा था जब इन क्षेत्रों में भय और असुरक्षा के कारण ग्रामीणों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी थी। माओवाद के प्रभाव के चलते यहां के पारंपरिक साप्ताहिक बाजार पूरी तरह ठप पड़ गए थे। लेकिन अब नक्सल मुक्त वातावरण बनने के बाद बाजारों में फिर से चहल-पहल दिखाई देने लगी है। ग्रामीण, व्यापारी और आदिवासी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।

बस्तर की पहचान हैं साप्ताहिक हाट-बाजार

बस्तर अंचल केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि वनोपज आधारित समृद्ध परंपराओं के लिए भी देशभर में जाना जाता है। यहां के साप्ताहिक हाट-बाजार स्थानीय संस्कृति, सामाजिक जीवन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।

बीजापुर जिला चारों ओर से घने वनांचलों से घिरा हुआ है, जहां आदिवासी समुदाय का जीवन जंगल और वनोपज पर आधारित है। इमली, महुआ, टोरा, चिरौंजी, तेंदू जैसी बहुमूल्य वनोपज यहां के लोगों की आय का प्रमुख स्रोत हैं। ग्रामीण इन उत्पादों का संग्रहण कर साप्ताहिक बाजारों में विक्रय करते हैं तथा बदले में दैनिक जरूरत की वस्तुएं खरीदते हैं।

इन बाजारों का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेल-मिलाप, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक जीवन का भी केंद्र होते हैं।

चार दशकों तक सन्नाटा, अब लौट रही जीवन की रफ्तार

उसूर ब्लॉक के पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के साप्ताहिक बाजार कभी आसपास के अनेक गांवों की आर्थिक धुरी हुआ करते थे। लेकिन माओवादी गतिविधियों और असुरक्षा के माहौल ने इन बाजारों की रौनक छीन ली। धीरे-धीरे यहां व्यापार बंद हो गया और क्षेत्र आर्थिक रूप से प्रभावित होने लगा।

अब जब क्षेत्र पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है, तब वर्षों से बंद पड़े बाजारों में फिर से दुकानें सजने लगी हैं। ग्रामीण दूर-दराज के गांवों से बाजार पहुंच रहे हैं। महिलाएं वनोपज लेकर आ रही हैं तो छोटे व्यापारी दैनिक उपयोग की सामग्री बेचने पहुंच रहे हैं। बाजारों में फिर से स्थानीय बोली, पारंपरिक वेशभूषा और आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई देने लगी है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

पुनः प्रारंभ हुए ये साप्ताहिक बाजार स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए आर्थिक संबल बनकर उभर रहे हैं। ग्रामीणों को अब अपने उत्पाद बेचने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। इससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है तथा स्थानीय स्तर पर आय के नए अवसर भी बढ़ रहे हैं।

बाजारों के पुनर्जीवित होने से छोटे व्यापारियों, किसानों और वनोपज संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। साथ ही क्षेत्र में परिवहन, छोटे व्यवसाय और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।

शांति और विकास का नया प्रतीक बन रहा बीजापुर

बीजापुर में लौटती बाजार संस्कृति यह दर्शाती है कि शांति स्थापित होने पर विकास की संभावनाएं किस प्रकार तेजी से आकार लेती हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार से अब वनांचल के गांव भी मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के बाजारों में लौटती रौनक केवल व्यापार की वापसी नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और समृद्ध भविष्य की वापसी का प्रतीक है। यह बदलता हुआ बीजापुर अब संघर्ष की नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे नेक्स्ट जेन सीजी डायल 112 का शुभारंभ

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गृह मंत्री विजय शर्मा ने किया कार्यक्रम स्थल का किया निरीक्षण

रायपुर- प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं को और अधिक आधुनिक, त्वरित एवं नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में नेक्स्ट जेन सीजी डायल 112 इंटीग्रेटेड इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस 2.0) का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर चलित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी एवं 400 अत्याधुनिक डायल 112 वाहन का भी शुभारंभ किया जाएगा।

कार्यक्रम की तैयारियों के तहत प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को कार्यक्रम की सभी तैयारियां समयबद्ध एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। नेक्स्ट जेन सीजी डायल 112 प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में एक अभिनव पहल है, जिसके माध्यम से पुलिस सेवा, फायर सर्विस, मेडिकल इमरजेंसी सहायता, महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन, आपदा प्रबंधन सहायता तथा हाईवे इमरजेंसी जैसी सेवाओं को एकीकृत मंच पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे नागरिकों को त्वरित एवं समन्वित सहायता सुनिश्चित हो रही है। 

इस उन्नत प्रणाली में केंद्रीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, जीपीएस आधारित इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन, जीआईएस आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑटोमेटिक कॉल लोकेशन पहचान प्रणाली तथा तकनीक सक्षम डिस्पैच प्रबंधन जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। नई व्यवस्था के माध्यम से अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, सड़क दुर्घटना प्रतिक्रिया, चिकित्सकीय सहायता तथा जन-संकट की परिस्थितियों में और अधिक प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। 

प्रदेश में संचालित डायल 112 सेवा वर्ष 2018 से अब तक लाखों नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्रदान कर चुकी है तथा वर्तमान में इसकी सेवाएं 16 जिलों तक सीमित थी अब यह प्रदेश के सभी 33 जिलों तक विस्तारित हो जायेगी।

राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग : B1 कोच जलकर खाक, यात्रियों में मची अफरा-तफरी

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 त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में आज रविवार सुबह भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। हादसा कोटा रेल मंडल के लूणी रीछा और विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के बीच सुबह करीब 5:15 बजे हुआ। आग ट्रेन के B-1 एसी कोच और उसके पीछे लगे सेकेंड लगेज कम गार्ड वैन में लगी, जिससे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


घटना की सूचना मिलते ही कोटा जंक्शन पर तुरंत अलर्ट जारी किया गया और राहत-बचाव दल को मौके के लिए रवाना किया गया। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, B-1 कोच में उस समय 68 यात्री सवार थे। ट्रेन के गार्ड ने सबसे पहले धुआं और आग देखी और तत्काल इसकी जानकारी लोको पायलट को दी। इसके बाद ट्रेन को इमरजेंसी में रोका गया।

15 मिनट में यात्रियों को निकाला गया सुरक्षित

सीनियर डिवीजनल कॉमर्शियल मैनेजर Saurabh Jain ने बताया कि ट्रेन स्टाफ और आरपीएफ की तत्परता से करीब 15 मिनट के भीतर पूरे कोच को खाली करा लिया गया। आग तेजी से फैल रही थी और कुछ ही देर में पूरा कोच इसकी चपेट में आ गया। हालांकि समय रहते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

आग फैलने से रोकने के लिए कोच किया अलग

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि आग को ट्रेन के अन्य डिब्बों तक पहुंचने से रोकने के लिए करीब 20 मिनट बाद प्रभावित कोच को ट्रेन से अलग कर दिया गया। आसपास के स्टेशनों से रेलवे कर्मचारी, तकनीकी टीमें और स्थानीय प्रशासन भी मौके पर पहुंच गए।

आग इतनी भीषण थी कि B-1 कोच का अधिकांश हिस्सा जलकर खाक हो गया। वहीं लगेज वैन में रखा यात्रियों का सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। राहत एवं बचाव दल ने सुबह करीब 7:30 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।

धीरे-धीरे बहाल हो रहा रेल संचालन

रेलवे के अनुसार आग बुझने के बाद दोनों कोचों में भारी धुआं भर गया था, जिससे जांच और राहत कार्य में दिक्कतें आईं। फिलहाल दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर ट्रैक को धीरे-धीरे खोला जा रहा है और रुकी हुई ट्रेनों को आगे रवाना करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जानकारी के मुताबिक, राजधानी एक्सप्रेस सुबह 3:45 बजे Ratlam Junction से रवाना हुई थी और इसका अगला स्टॉप Kota Junction था। राजस्थान में प्रवेश से पहले विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के पास यह हादसा हो गया। रेलवे ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

गांव की चौपाल में दिखी मुख्यमंत्री की सादगी और संवेदनशीलता

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पीपल के पेड़ तले खाट पर बैठकर ग्रामीणों से किया सीधा संवाद: समस्याएं सुनीं और मौके पर दिए समाधान के निर्देश

ग्राम कोसला में “महतारी सदन” एवं हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की घोषणा

रायपुर- सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोसला का औचक निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री साय के गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण बन गया। मुख्यमंत्री साय का बेहद सहज, आत्मीय और सादगीपूर्ण स्वरूप उस समय देखने को मिला, जब वे बिना किसी औपचारिकता के गांव के पीपल पेड़ की छांव तले आयोजित चौपाल में ग्रामीणों के बीच खाट पर बैठकर उनसे सीधे संवाद करने लगे। यह दृश्य ग्रामीणों के लिए यादगार बन गया और चौपाल आत्मीय संवाद तथा संवेदनशील शासन की मिसाल बन गई।

मुख्यमंत्री साय ने चौपाल में ग्रामीणों, महिलाओं और किसानों से सीधे चर्चा करते हुए शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना तथा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार महिलाओं, किसानों, गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है।

ग्रामीणों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पूछा, “पटवारी नियमित रूप से गांव आते हैं या नहीं?” ग्रामीणों द्वारा सकारात्मक जवाब दिए जाने पर मुख्यमंत्री ने गांव के पटवारी शत्रुघन कुर्रे को निर्देशित किया कि ग्रामीणों और किसानों की समस्याओं का तत्परता से निराकरण सुनिश्चित करें, ताकि लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

चौपाल के दौरान ग्राम कोसला की सावित्री कश्यप ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने नियमित रूप से सहायता राशि प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना से परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी करने में काफी मदद मिल रही है और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से आत्मीय चर्चा करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक संबल बन रही है।

इसी दौरान ग्राम की “लखपति दीदी” नीमा तिवारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें शुरुआत में 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली। इसके बाद उन्होंने आटा चक्की का व्यवसाय शुरू किया और आज उनके पास पांच आटा चक्कियां संचालित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए कहा कि वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करें।

मुख्यमंत्री ने गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन की भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि विगत ढाई वर्षों में ग्राम कोसला में 474 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास प्लस सर्वेक्षण के माध्यम से छूटे हुए सभी पात्र हितग्राहियों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद सबसे पहले 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई थी और अब हजारों परिवारों का पक्के घर का सपना साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जन चौपाल के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। महिलाओं की सुविधा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ग्राम कोसला में “महतारी सदन” निर्माण की घोषणा की। साथ ही क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और विद्यार्थियों में उत्साह का वातावरण देखने को मिला।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार कार्य कर रही है और किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है, जिससे उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से जनप्रतिनिधि और अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं और शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ पी चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव रजत बंसल, कलेक्टर जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक निवेदिता पाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

पीपला फाउंडेशन ने रीवा में 5000 लीटर की टंकी स्थापित की,ग्रामीणों को जल संकट से मिली राहत

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आरंग- भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच आरंग क्षेत्र के लोरिक नगर (गढ़रीवां) के ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर आई है। स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए ग्राम पंचायत के सहयोग से गांव में 5000 लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी स्थापित की है। 

इस पहल से न केवल पानी की बर्बादी रुकी है, बल्कि राहगीरों और पशुओं के लिए भी पेयजल सुलभ हो गया है। दरअसल, गांव के ट्यूबवेल के पास भंडारण की व्यवस्था न होने के कारण रोजाना हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था। ग्रामीणों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। समस्या को देखते हुए पीपला फाउंडेशन के सदस्यों ने सरपंच घसियाराम साहू के समक्ष टंकी लगाने का प्रस्ताव रखा। पंचायत ने तत्काल सहमति देते हुए टंकी के लिए पक्का चबूतरा, पाइपलाइन और नलों की व्यवस्था कराई। शनिवार को आयोजित  कार्यक्रम में टंकी का विधिवत शुभारंभ किया गया। अब इस सुविधा का लाभ रीवा के साथ-साथ लखौली और कुकरा के ग्रामीणों को भी मिल रहा है। मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी यह प्यास बुझाने का केंद्र बन गया है। गांव के सरपंच घसियाराम साहू का कहना है कि गांव में पानी की समस्या गंभीर थी। संस्था और पंचायत के इस तालमेल से अब पानी सहेजने में मदद मिलेगी। हम पीपला फाउंडेशन के इस सेवाभावी कार्य का आभार व्यक्त करते हैं। इस शुभारंभ अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू और फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने इस कार्य को जनहित में मील का पत्थर बताया। इस दौरान कोषाध्यक्ष कोमल लाखोटी, सचिव अभिमन्यु साहू, संयुक्त सचिव संजय मेश्राम सहित सक्रिय सदस्य सीताराम साहू, ईश्वरी साहू, पोखराज साहू, हीराधर धीवर पंच वेदप्रकाश साहू, रमेश चंद्राकर, मीरा चंद्राकर, समाजसेवी अश्वनी चंद्राकर ,पी के चंद्राकर,  सहित ग्रामीण उपस्थित थे।


हम सभी जनता के सेवक हैं और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी - मुख्यमंत्री साय

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सुशासन तिहार बना त्वरित समाधान और जवाबदेह प्रशासन का प्रभावी माध्यम: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायगढ़ में मुख्यमंत्री ने रायगढ़, कोरबा और जांजगीर-चांपा जिलों की ली संयुक्त समीक्षा बैठक

राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, पेयजल, स्वास्थ्य एवं खरीफ तैयारी पर दिए विशेष निर्देश

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जल्द होगी शुरू, नागरिकों की शिकायतों का होगा समयबद्ध समाधान

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत रायगढ़ जिला कार्यालय के सृजन सभाकक्ष में रायगढ़, कोरबा एवं जांजगीर-चांपा जिले के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी और समयबद्ध ढंग से पहुंचे तथा आमजन की समस्याओं के निराकरण में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।

बैठक में वित्त मंत्री ओपी चौधरी, सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक लालजीत सिंह राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविंद्र गवेल, महापौर जीवर्धन चौहान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव रजत बंसल सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार का सकारात्मक प्रभाव अब गांव-गांव और शहरों तक दिखाई दे रहा है। शासन और प्रशासन सीधे जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, जिससे लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हम सभी जनता के सेवक हैं और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री साय ने राजस्व प्रकरणों की विशेष समीक्षा करते हुए समयसीमा से बाहर एवं एक वर्ष से अधिक लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े छोटे-छोटे मामले सीधे आम नागरिकों के जीवन और आजीविका को प्रभावित करते हैं, इसलिए इनके निराकरण में संवेदनशीलता और गंभीरता आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने राजस्व अभिलेखों की त्रुटियों को शीघ्र सुधारने तथा जानबूझकर गलती करने वाले संबंधित कर्मचारियों एवं पटवारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने बैठक में बताया कि प्रदेश में शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सेवा प्रारंभ की जाएगी। इसके माध्यम से नागरिक सीधे फोन अथवा ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे तथा शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की सतत मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों के निराकरण में संवेदनशीलता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के दौरान किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वर्षा ऋतु प्रारंभ होने के साथ संभावित मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को अग्रिम तैयारी रखने के निर्देश भी दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के अनुरूप डीजल एवं पेट्रोल के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में पेट्रोल एवं डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री ने हम सभी जनता के सेवक हैं और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने खाद-बीज भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध हो तथा किसी प्रकार की परेशानी न हो। डीएपी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों को एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।महिला सशक्तिकरण की दिशा में मुख्यमंत्री ने अधिक संख्या में “ड्रोन दीदी” तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग देकर आत्मनिर्भर बनाया जाए। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का विस्तार होगा और महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए तथा अधिक से अधिक हितग्राहियों को योजना से जोड़ने पर बल दिया। आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि केवल कार्ड बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार का लाभ भी मिलना चाहिए। कोरबा जिले में आयुष्मान कार्ड उपयोग की बेहतर स्थिति पर मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन की सराहना की।

सेवा सेतु पोर्टल में अपेक्षाकृत अधिक संख्या में आवेदनों के निरस्त होने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों के लिए नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि जांजगीर-चांपा जिले की डोंगा-कोहरोद सड़क निर्माण कार्य को इस वर्ष के बजट में शामिल किया गया है। संबंधित विभाग को शीघ्र प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री साय ने रायगढ़ जिले में निजी स्कूलों के बोर्ड परीक्षा परिणाम अपेक्षाकृत कम आने पर चिंता व्यक्त करते हुए कलेक्टर को इसकी जांच के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए विशेष प्रयास करने पर बल दिया।

इस अवसर पर संभागायुक्त सुनील जैन, आईजी रामगोपाल गर्ग सहित रायगढ़, कोरबा एवं जांजगीर-चांपा जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ, जिला पंचायत सीईओ एवं अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

​खाद कटौती के खिलाफ फूटा अन्नदाताओं का गुस्सा: रीवा सहकारी समिति में किसानों का शांतिपूर्ण धरना, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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​आरंग- रासायनिक खाद की मात्रा में शासन द्वारा की गई भारी कटौती के विरोध में ग्रामीण सेवा सहकारी समिति रीवा (पं.क्र. 1527) के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुकरा, रसनी और रीवा के किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने समिति परिसर में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम समिति प्रबंधक जगदीश साहू को एक ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की है कि खाद वितरण की व्यवस्था को तत्काल पूर्ववत (पहले की तरह) बहाल किया जाए।

 ​नई व्यवस्था से खेती होगी घाटे का सौदा: किसान 

​धरना स्थल पर किसानों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि नई उर्वरक अनुशंसा के कारण खेती की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी और उत्पादन पर इसका सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस जाएंगे।

​ क्या है नई व्यवस्था? 

प्रदेश सरकार द्वारा कृषि विश्वविद्यालय और वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुशंसा का हवाला देकर फसलवार रासायनिक खाद की मात्रा घटा दी गई है। अब प्रति एकड़ केवल 1 बोरी यूरिया, आधा बोरी डीएपी, 1 बोरी पोटाश, 2 बोतल नैनो यूरिया और 1 बोतल नैनो डीएपी देने का प्रावधान किया गया है।

 ​किसान क्यों कर रहे हैं विरोध? 

किसान वर्षों से प्रति एकड़ 2 बोरी यूरिया, 2 बोरी डीएपी और 1 बोरी पोटाश का उपयोग करते आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक समय सरकार ने ही 'अधिक अन्न उपजाओ' का नारा देकर रासायनिक खाद को बढ़ावा दिया था, और अब अचानक कटौती की जा रही है। इससे फसल उत्पादन घटेगा और किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ेगी।

​ 'जमीन की वास्तविक स्थिति समझे सरकार' : वतन चन्द्राकर 

​धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सहकारी समिति रीवा के शेयर होल्डर एवं क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने कहा:

​"अन्नदाता की मेहनत और उसकी जरूरतों को नजरअंदाज कर बनाई गई कोई भी नीति कभी सफल नहीं हो सकती। किसान पहले से ही महंगी खेती, डीजल, बीज और मौसम की अनिश्चितता की मार झेल रहा है। ऐसे संकट के समय में खाद की मात्रा आधी करना किसानों के साथ सरासर अन्याय है। सरकार को जमीन की जमीनी हकीकत को समझते हुए तुरंत पुरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। किसान हितों की रक्षा के लिए हम हर स्तर पर आवाज बुलंद करेंगे।"


​ भानसोज के बाद अब रीवा में गूंजी विरोध की आवाज 

​उल्लेखनीय है कि खाद कटौती को लेकर किसानों का यह विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे पहले 15 मई को भानसोज सोसायटी में भी किसानों द्वारा व्यापक धरना प्रदर्शन किया गया था। रीवा में जुटे किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

​ प्रदर्शन में ये प्रमुख किसान रहे उपस्थित 

​इस शांतिपूर्ण आंदोलन और नाराजगी जताने वालों में मुख्य रूप से:

​दौलत साहू (पूर्व अध्यक्ष, सहकारी समिति रीवा),​वतन चन्द्राकर (जिला पंचायत सदस्य),हरि बंजारे, सुकुल साहू, दिलीप कुर्रे, रमेश चन्द्राकर, अश्वनी चन्द्राकर,​शोभाराम साहू, संतोष साहू, बेनु राम साहू, बिष्णु साहू, घनाराम साहू,मेघनाथ साहू, हेमलाल साहू, हेमू, मिलु, नोहर सिन्हा, प्रदीप साहू,संतोष चन्द्राकर, मोरज चन्द्राकर, चन्द्प्रकाश चन्द्राकर,सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में जागरूक किसान उपस्थित थे।

सिंघनपुर गुफा में रिसर्च टीम पर मधुमक्खियों का हमला, 4 की हालत गंभीर

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले स्थित प्रसिद्ध सिंघनपुर गुफा में रिसर्च के दौरान बड़ा हादसा हो गया। गुफा का निरीक्षण करने पहुंची वैज्ञानिकों की पांच सदस्यीय टीम पर अचानक मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। इस घटना में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि एक वनकर्मी के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। सभी घायलों का इलाज OP Jindal Fortis Hospital में जारी है।


जानकारी के मुताबिक, रायपुर की एक यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम सिंघनपुर गुफा में मौजूद प्राचीन शैल चित्रों के अध्ययन और निरीक्षण के लिए पहुंची थी। टीम में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल थे। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम गुफा के भीतर रिसर्च कार्य में जुटी, तभी अचानक मधुमक्खियों का झुंड उन पर टूट पड़ा।

मधुमक्खियों के हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए टीम के सदस्य इधर-उधर भागने लगे। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बीच रेस्क्यू अभियान चलाकर घायलों को स्ट्रेचर की मदद से नीचे लाया गया और अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, घायल लोगों में ब्रम्हानंद धृतलहरे (27), स्मृद्धि (69), भाग्यश्री (30), सुमन (35), निहारिका (36) और गितेश्वर पटेल शामिल हैं। इनमें से चार लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।

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