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संत कबीर की वाणी समाज को जोड़ती है, सरकार का संकल्प जनजीवन संवारता है : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर :  संत परंपरा और आध्यात्मिक चेतना समाज को सही दिशा देती है, और जब शासन व्यवस्था इन मूल्यों से जुड़ती है, तो विकास और संस्कार दोनों साथ-साथ आगे बढ़ते हैं। संत कबीर की वाणी समाज को जोड़ती है, सरकार का संकल्प जनजीवन संवारता है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम नादिया स्थित कबीर मठ आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय सद्गुरु कबीर संत सम्मेलन फाल्गुन महोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर आश्रम में विकास कार्य के लिए 11 लाख रुपए स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने मठ आश्रम परिसर में स्थायी डोम निर्माण और प्रतिवर्ष आयोजन के लिए बजट में राशि का प्रावधान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम नादिया में मिनी स्टेडियम के निर्माण की घोषणा की, साथ ही राजनांदगांव शहर में कबीर साहेब के नाम भव्य प्रवेश द्वार निर्माण की भी घोषणा की।


मुख्यमंत्री  साय ने संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 202 साल पहले पूज्य सद्गुरु सेवा साहब जी ने नादिया जैसे गांव में कबीर मठ की स्थापना की। हलबा समाज के संत स्वरूप मंतू ठाकुर जी ने आश्रम की सेवा के लिए अपनी समस्त संपत्ति अर्पित कर दी।  साय ने कहा कि हलबा समाज का गौरवशाली और समृद्ध इतिहास रहा है। हलबा समाज से गेंदसिंह जी जैसे महानायक हुए हैं।


मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में सद्गुरु कबीर के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे प्रदेश में सद्गुरु संत कबीर का बड़ा प्रभाव है। उन्होंने अपने बचपन से ही कबीर पंथ से जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कुनकुरी में कबीरपंथ का बड़ा आश्रम है। बचपन से ही पंथ के रीति-रिवाजों से मैं भलीभांति परिचित रहा।छत्तीसगढ़ का जिला कबीरधाम सद्गुरु के नाम पर है। यहां के लोकजीवन में कबीर की वाणी का प्रभाव है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कबीर दास जी के दोहों में जीवन का संदेश है। उन्होंने ‘निंदक नियरे राखिए’ जैसे कबीर संत के दोहों को दोहराया। श्री साय ने कहा कि संत कबीर कहते थे कि हमारे भीतर अपनी कमियों को सुनने का साहस होना चाहिए, ताकि हम खुद को बेहतर बना सकें। उनके दोहों में आदर्श जीवन और मानव समाज के हित के संदेश हैं, इसलिए हमें कबीरदास जी के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है, जहां की 80 प्रतिशत आबादी कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। हमने सुव्यवस्थित धान खरीदी की। धान बेचने के 48 घंटे के भीतर किसानों के खाते में राशि पहुंचे, यह सुनिश्चित किया। शनिवार को हमने 25 लाख 28 हजार से अधिक किसानों के खातों में कृषक उन्नति योजना के माध्यम से 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंतरित की। महतारी वंदन योजना अंतर्गत प्रदेश की 69 लाख से अधिक माताओं-बहनों के खातों में 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मोदी की गारंटी में हमने वादा किया था कि सरकार बनते ही प्राथमिकता के आधार पर 18 लाख आवास प्रदान करेंगे। हमने शपथ लेने के 24 घंटे के भीतर ही पहली कैबिनेट बुलाकर 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दे दी। आज 8 लाख से ज्यादा मकान बन चुके हैं, जिनका गृह प्रवेश भी हो चुका है। इतना ही नहीं, बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त हो रहा है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15,000 प्रधानमंत्री आवासों की अलग से स्वीकृति हुई है। पीवीजीटी समुदाय के लोगों के लिए अलग से 32,000 पीएम आवासों की स्वीकृति हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि जैसे-जैसे नक्सलवाद समाप्त हो रहा है, बस्तर के पिछड़े क्षेत्रों में विकास हो रहा है। जिन गांवों में कभी सर्वे नहीं होता था, आज वहां की 7,000 से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने दो साल में 32,000 से ज्यादा नौकरियों की प्रक्रिया शुरू की। 5,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती निकाली जा रही है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। प्रभु श्रीराम ने 14 साल में सबसे ज्यादा समय छत्तीसगढ़ में बिताया। 500 साल के संघर्ष के बाद अयोध्या धाम में हमारे भांचा राम विराजमान हुए तो हमने छत्तीसगढ़ से श्रीराम लला दर्शन योजना की शुरुआत की, जिसके तहत अब तक 42,000 से अधिक लोगों को अयोध्या धाम और काशी विश्वनाथ धाम का दर्शन कराया जा चुका है। हमने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की भी पुनः शुरुआत की है, जिसमें 5,000 से ज्यादा लोगों को देश के 19 चिन्हांकित तीर्थस्थलों का दर्शन कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ है। डीएमएफ, कोयला और पीएससी घोटाले के दोषी जेल के भीतर हैं। आज राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शी व्यवस्था है, इसलिए गरीब का बेटा भी बड़ा अधिकारी बन रहा है।

स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यदि पूरे भारतवर्ष में देवभूमि, संस्कारभूमि और समर्पण की परंपरा की बात की जाए, तो छत्तीसगढ़ का स्थान अत्यंत विशिष्ट और सम्मानजनक है। यहां की मिट्टी में सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना रची-बसी है, जो प्रदेशवासियों के जीवन और व्यवहार में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग सरल, संवेदनशील और संस्कारों से परिपूर्ण हैं, यही इस प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी समान महत्व दे रही है, जो छत्तीसगढ़ की पहचान को और मजबूत बनाता है।

उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का संत-महात्माओं के प्रति गहरा सम्मान और आस्था है। ऐसा कोई दिन शायद ही गुजरता हो, जब मुख्यमंत्री निवास में किसी संत, महात्मा या आध्यात्मिक व्यक्तित्व का आगमन न होता हो। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, मार्गदर्शन और मूल्यों के संरक्षण का एक सशक्त माध्यम भी है।

सांसद श्री संतोष पांडेय ने छत्तीसगढ़ की धरती को रत्नगर्भा बताते हुए कहा कि हमारी धरती को समय-समय पर संतों का मार्गदर्शन मिलता रहा है। संतों की वाणी में जीवन का आदर्श और दर्शन मिलता है।

इस अवसर पर पूर्व सांसद एवं महापौर मधुसूदन यादव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद  प्रदीप गांधी,पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  दिनेश गांधी, जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष  भरत वर्मा,श्रम मंडल के अध्यक्ष  योगेश दत्त मिश्रा, जिला पंचायत के अध्यक्ष किरण वैष्णव, डोंगरगांव जनपद पंचायत के अध्यक्ष रंजीता ग्राम पंचायत नदिया के सरपंच वंदिता ठाकुर, आचार्य स्वामी मंगल साहेब,धर्माधिकारी सत्येंद्र साहेब, डॉक्टर भागीरथी साहेब, सुश्री साध्वी सुमेधा साहेब संत  राम रतन स्वरूप साहेब,श्री लेख चंद्र साहेब सहित अन्य गणमान्य नागरिक गण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

बच्चों ने दिया गोबर के कंडे से होलिका दहन का संदेश, धार्मिक व मांगलिक कार्यों में होती है गोबर का उपयोग

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 आरंग। शनिवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में बच्चों और शिक्षको ने गोबर के कंडे को हाथों में लेकर कंडे से होलिका दहन करने का संदेश दिये हैं।इनका कहना है होली में तरह-तरह के लकड़ियां डाली जाती है कहीं न कहीं इससे निकलने वाली धुएं से पर्यावरण में असर पड़ता है।


साथ ही कुछ लोग कच्चे पेड़ों की टहनियों को काटकर डाल देते हैं। जिससे खूब धुआं निकलता है। वहीं संस्था के नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया संदेश परक विडियो के माध्यम से भी सोसल मीडिया में कंडे से होलिका दहन के लिए लोगों को अपील कर रहे हैं। जिससे कि होली में लोग पेड़ों को होलिका दहन न प्रयोग न करें।

शास्त्रों में गोबर को पवित्र माना गया है।जीते जी तो लोग इसका उपयोग करते ही हैं मरणोपरांत भी गाय के गोबर से लिपाई कर शव को रखते है।हर धार्मिक व मांगलिक कार्यों में गोबर का उपयोग किया जाता है। ऐसे मे यदि लोग गोबर के कंडे से होलिका दहन करने की परंपरा को बढ़ावा दे तो निश्चित ही पर्यावरण को काफी हद तक संरक्षित किया जा सकता है।

पूना मार्गम: पुनर्वास से पुनर्जीवन — 15 सशस्त्र माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

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कार्यालय पुलिस अधीक्षक, महासमुंद

दिनांक: 01.03.2026

15 सशस्त्र माओवादी समाज की मुख्यधारा में लौटे

राज्य शासन की पुनर्वास नीति एवं सतत संवाद प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रतिबंधित संगठन Communist Party of India (Maoist) की ओडिशा राज्य कमेटी के पश्चिमी सब-जोन अंतर्गत बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद (BBM) डिविजनल कमेटी (DVC) के सभी 15 माओवादियों ने अपने धारित हथियारों के साथ जिला पुलिस महासमुंद के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिलाएं एवं 6 पुरुष शामिल हैं। सभी ने संविधान एवं तिरंगा ध्वज के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए विश्वास, सुरक्षा और विकास का मार्ग चुना।

73 लाख रुपये का कुल इनाम

इन 15 नक्सलियों पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिसमें—

  • 01 स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) – ₹25 लाख

  • 02 डिविजनल कमेटी मेंबर (DCM) – ₹8-8 लाख

  • 05 एरिया कमेटी मेंबर (ACM) – ₹5-5 लाख

  • 07 पार्टी मेंबर (PM) – ₹1-1 लाख


14 अत्याधुनिक हथियार बरामद

आत्मसमर्पण के दौरान कुल 14 हथियार जमा किए गए, जिनमें—

  • 03 एके-47 रायफल

  • 02 एसएलआर रायफल

  • 02 इंसास रायफल

  • 04 .303 रायफल

  • 03 बारह बोर बंदूक

वरिष्ठ नक्सली का आत्मसमर्पण

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे वरिष्ठ विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ बाबन्ना उर्फ राजन्ना उर्फ मुप्पीड़ी साम्बैया (उम्र 57 वर्ष), ग्राम तारलापल्ली, थाना हनुमाकोण्डा, जिला वारंगल (तेलंगाना) का निवासी है। वह वर्ष 1985 से संगठन में सक्रिय था और स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) के पद पर कार्यरत था। वह BBM डिविजन का प्रभारी था और एके-47 के साथ आत्मसमर्पण किया।

डिविजनल कमेटी सदस्य मंगेश उर्फ रमेश (ग्राम हिदूर, जिला कांकेर) एवं बाबू उर्फ सैतु उर्फ बबलू (जिला नारायणपुर) पर ₹8-8 लाख का इनाम घोषित था। दोनों पूर्व में दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के विभिन्न डिविजनों में सक्रिय रहे हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले 6 सदस्य (नीला, सोनू, रीना, दनेश, दीपना, रनीला) पूर्व में सेंट्रल कमेटी सदस्य चलपति के सुरक्षा दस्ते में कार्यरत रहे थे। गरियाबंद के कुल्हाड़ीघाट ऑपरेशन के बाद इन्हें BBM डिविजन में स्थानांतरित किया गया था।

आत्मसमर्पण के कारण

महासमुंद जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय BBM डिविजनल कमेटी के सदस्यों से आत्मसमर्पण कराने हेतु आकाशवाणी, बैनर, पोस्टर, पाम्फलेट एवं अन्य संवाद माध्यमों से लगातार अपील की जा रही थी। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत—

  • पदानुसार प्रोत्साहन राशि

  • हथियार सहित आत्मसमर्पण पर अतिरिक्त लाभ

  • स्वास्थ्य सुविधा

  • आवास एवं रोजगार की व्यवस्था

का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।

जंगलों में कठिन जीवन, परिवार से दूरी, वैचारिक भ्रम तथा पूर्व में आत्मसमर्पण कर चुके साथियों को योजनाओं का लाभ उठाकर परिवार सहित सामान्य जीवन जीते देख इन माओवादियों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

सम्मान एवं पुनर्वास

आत्मसमर्पण उपरांत परसदा स्थित सुरक्षित केंद्र परिसर में सभी को तिरंगा ध्वज, संविधान की प्रति तथा शांति, प्रेम और नए जीवन के प्रतीक स्वरूप लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।

महत्वपूर्ण उपलब्धि

इन 15 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी का पश्चिमी सब-जोन, जिसमें एक वर्ष पूर्व तक 2 डिविजन एवं 7 एरिया कमेटियां सक्रिय थीं, पूर्णतः समाप्त हो गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ का रायपुर पुलिस रेंज एवं ओडिशा का संबलपुर रेंज नक्सल प्रभाव से मुक्त हो गए हैं।

मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पुलिस की अपील

बस्तर क्षेत्र एवं ओडिशा के पूर्वी सब-जोन में सक्रिय शेष नक्सलियों से अपील की जाती है कि वे हथियार त्यागकर संविधान एवं तिरंगा ध्वज के प्रति निष्ठा जताएं और विश्वास, सुरक्षा एवं विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।

राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति तथा “पूना मार्गम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत यह आत्मसमर्पण शांति, संवाद एवं विकास आधारित रणनीति की एक बड़ी सफलता है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों का विवरण इस प्रकार है —






मुख्यमंत्री साय ने राज्यपाल रमेन डेका को जन्मदिन की दी शुभकामनाएँ

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज लोकभवन पहुँचकर राज्यपाल रमेन डेका को उनके जन्मदिन के अवसर पर आत्मीय शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।


मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका को पुष्पगुच्छ, छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ढोकरा शिल्प की आकर्षक कलाकृति तथा शॉल भेंट किया। उन्होंने राज्यपाल रमेन डेका के उत्तम स्वास्थ्य, सुखमय जीवन तथा दीर्घायु की कामना की।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा की दिल्ली दौड़ सफल, कवर्धा को मिला बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तोहफा

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 कवर्धा। जिला मुख्यालय कवर्धा में राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। कवर्धा–जबलपुर और कवर्धा–रायपुर मार्ग के बीच शहर क्षेत्र में बाईपास निर्माण तथा National Highway 30 के धवईपानी (चिल्पी) से सिमगा तक सेक्शन को फोरलेन में विकसित करने के प्रस्ताव को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।


नितिन गडकरी से मुलाकात, दिए आवश्यक निर्देश

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इन परियोजनाओं पर चर्चा की। गडकरी ने बढ़ते यातायात दबाव और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्रस्ताव पर प्राथमिकता से कार्य करने के निर्देश दिए।

पराली से एविएशन फ्यूल का सुझाव

बैठक के दौरान गडकरी ने नवाचार का उल्लेख करते हुए कहा कि पराली से एविएशन फ्यूल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर दिया जा सकता है।

व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र में यातायात सुगमता बढ़ेगी, व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि अंतिम स्वीकृति के बाद यह परियोजना जिले के बुनियादी ढांचे के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

“गौठान में गाय नहीं, सिर्फ घोटाला था”- CM साय का कांग्रेस पर करारा वार

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 रायपुर। विष्णु देव साय ने बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड के रहंगी में कृषक उन्नति योजना के तहत आयोजित वृहद किसान सम्मेलन में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया और गौठान योजना में भ्रष्टाचार हुआ।


“किसानों को बारदाने के लिए रोना पड़ता था”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान किसानों को धान खरीदी के लिए बारदाना समय पर उपलब्ध नहीं हो पाता था। उनकी सरकार ने जूट कमिश्नर के माध्यम से पर्याप्त और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की, जिससे अब किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती।

अंतर की राशि का एकमुश्त भुगतान

साय ने कहा कि कांग्रेस सरकार अंतर की राशि चार किस्तों में देती थी, जबकि वर्तमान सरकार धान खरीदी समाप्त होते ही सप्ताह-दस दिन के भीतर एकमुश्त भुगतान कर रही है। उन्होंने बताया कि एमएसपी के तहत 33,431 करोड़ रुपये का भुगतान 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में किया गया।

अटल सरकार की पहल का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इससे किसानों को पूंजी के लिए भटकना नहीं पड़ता।

सहकारी ऋण पर ब्याज में कमी

उन्होंने कहा कि राज्य गठन (2000) के बाद सहकारी बैंकों का ब्याज 16–18% था, जिसे रमन सिंह के नेतृत्व में 7% और फिर 3% किया गया। वर्तमान में किसानों को ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा मिल रही है।

धान खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल

साय ने कहा कि राज्य सरकार 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है। अधिया, रेगहा, पब्लिक ट्रस्ट और वनभूमि पट्टाधारकों से भी खरीदी की जा रही है। साथ ही 5.62 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।

सिंचाई और कृषि बजट पर जोर

उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार ने सिंचाई के लिए 5,700 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, जबकि उनकी सरकार ने दो वर्षों में 10,700 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। इस वर्ष कृषि क्षेत्र के लिए 13,507 करोड़ रुपये (कुल बजट का 8%) का प्रावधान किया गया है।

“गौठान में भी भ्रष्टाचार”

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जब पार्टी कार्यकर्ताओं ने गौठानों की स्थिति देखी, तो कई स्थानों पर सिर्फ साइन बोर्ड लगे थे—न गाय थीं, न वर्मी कम्पोस्ट। उन्होंने इसे “गौठान घोटाला” बताया।

किसानों को सशक्त बनाने का लक्ष्य

साय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार का लक्ष्य किसानों को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि किसानों के सहयोग से छत्तीसगढ़ विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

लाइव शो में छलके आंसू: अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर पढ़ते रो पड़ी एंकर

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 Ayatollah Ali Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बीच एक भावुक कर देने वाला वीडियो सामने आया है। एक टीवी चैनल पर लाइव प्रसारण के दौरान महिला एंकर खामेनेई के निधन से जुड़ी रिपोर्ट पढ़ते-पढ़ते रो पड़ीं। बताया जा रहा है कि एंकर उन्हें देश के लिए एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में देखती थीं। जैसे ही उन्होंने आधिकारिक बयान का जिक्र किया, उनकी आवाज भर्रा गई और आंखों से आंसू छलक पड़े। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


जानकारी के अनुसार, खामेनेई की मौत की खबरों के बीच ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किए जाने की चर्चा है। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि ईरान के रक्षा मंत्री समेत कई वरिष्ठ कमांडर मारे गए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ स्थानों पर लोगों को सड़कों पर इकट्ठा होकर जश्न मनाते हुए भी देखा गया। हालांकि इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ समूहों ने आतिशबाजी की और सरकार विरोधी नारे लगाए। वहीं कई शहरों में स्थिति सामान्य बताई जा रही है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

इसी बीच अमेरिका की राजधानी Washington, D.C. में कुछ ईरानी-अमेरिकी समुदाय के लोगों के जश्न मनाने की खबरें भी सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में लोग अमेरिकी और ईरानी झंडे लहराते नजर आ रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्रता और बदलाव के समर्थन में नारे लगाए।

गौरतलब है कि खामेनेई की मौत को लेकर अब तक ईरान की ओर से स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है।

सीएसआईआर-एनपीएल में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 का आयोजन, ‘रमन प्रभाव’ की ऐतिहासिक खोज को किया नमन

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 CSIR–National Physical Laboratory (सीएसआईआर-एनपीएल) ने 28 फरवरी 1928 को C. V. Raman द्वारा रमन प्रभाव की ऐतिहासिक घोषणा की स्मृति में 28 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (एनएसडी-2026) मनाया। इस अवसर पर प्रातःकाल “राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन” तथा अपराह्न “राष्ट्रीय विज्ञान दिवस व्याख्यान” का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन से हुई, जिसने 40 वर्ष से कम आयु के शोधार्थियों, विद्यार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को अपने शोध पोस्टर प्रस्तुत करने का सशक्त मंच प्रदान किया। पोस्टर प्रस्तुति तीन व्यापक विषयों—मैटेरियल्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MST), फिजिक्स, इंजीनियरिंग एंड मेट्रोलॉजी (PEM), तथा एनवायरनमेंट, हेल्थ एंड केमिस्ट्री (EHC)—के अंतर्गत आयोजित की गई। चयनित श्रेष्ठ पोस्टरों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और अंतर्विषयी शोध को बढ़ावा देना था।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस व्याख्यान सत्र का शुभारंभ निदेशक, सीएसआईआर-एनपीएल प्रो. वेणु गोपाल अचंता के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने रमन प्रभाव के साथ सीएसआईआर-एनपीएल के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि के. एस. कृष्णन ने रमन प्रभाव के लिए निर्णायक प्रमाण प्रस्तुत किए थे तथा वे सीएसआईआर-एनपीएल के संस्थापक निदेशक भी रहे। प्रो. अचंता ने स्थानीय एवं वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु स्थानीय समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने क्वांटम मेट्रोलॉजी की उभरती चुनौतियों को स्वीकार करने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में मेट्रोलॉजिकल हस्तक्षेपों को आगे बढ़ाने की महत्ता रेखांकित की।

मुख्य अतिथि प्रो. भीम सिंह, विज्ञान श्री, एएनआरएफ राष्ट्रीय विज्ञान चेयर प्रोफेसर एवं आईआईटी दिल्ली के एमेरिटस/मानद प्रोफेसर ने “इलेक्ट्रिक व्हीकल—एक सतत ऊर्जा क्रांति” विषय पर राष्ट्रीय विज्ञान दिवस व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास, तकनीक, चार्जिंग प्रणालियों और मिशन-आधारित रोडमैप पर प्रकाश डालते हुए इसे सतत ऊर्जा क्रांति का आधार बताया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. प्रतीक शर्मा, कुलपति, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने समाज की समस्याओं का एक सुव्यवस्थित भंडार (रिपॉजिटरी) तैयार करने और उनके समाधान हेतु अकादमिक संस्थानों एवं अनुसंधान प्रयोगशालाओं के सहयोग पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अकादमिक-शोध समन्वय और नवाचार-आधारित विकास की अपनी दृष्टि से श्रोताओं को प्रेरित किया।

कार्यक्रम का समापन एनएसडी-2026 के संयोजक डॉ. गोविंद गुप्ता द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सीएसआईआर-एनपीएल द्वारा आयोजित प्रथम राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन सहित विभिन्न गतिविधियों तथा ‘कैटालिसिस विकसित भारत’ पहल के अंतर्गत विज्ञान में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।


आईएनएस तरंगिणी का त्रिंकोमाली पहुंचना, भारत–श्रीलंका नौसैनिक सहयोग को नई मजबूती

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Indian Navy का सेल प्रशिक्षण पोत INS Tarangini 27 फरवरी 2026 को प्रशिक्षण यात्रा पर Trincomalee Harbour, Sri Lanka पहुँचा। पोत का स्वागत श्रीलंका नौसेना के पूर्वी नौसैनिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा गर्मजोशी से किया गया। यह यात्रा हाल ही में Visakhapatnam में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में जहाज की भागीदारी के बाद की गई है।

पोर्ट कॉल के दौरान तरंगिणी के कमांडिंग ऑफिसर ने पूर्वी नौसैनिक क्षेत्र के उप-कमांडर कमोडोर हरिता जयादेवाथे से शिष्टाचार भेंट की और सेल प्रशिक्षण में सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। जहाज पर श्रीलंकाई रक्षा कर्मियों, उनके परिवारों और प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए परिचयात्मक भ्रमण का आयोजन किया गया। पोर्ट कॉल के दौरान सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों और प्रशिक्षण आदान-प्रदान की भी योजना बनाई गई है।

चयनित प्रशिक्षु अधिकारियों को, जो श्रीलंकाई नौसैनिक एवं समुद्री अकादमी से हैं, तरंगिणी पर कोलंबो तक की यात्रा के लिए सवार किया जाएगा। इस दौरान उन्हें सेल प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

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आईएनएस तरंगिणी की यह यात्रा भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों और बढ़ते सहयोग को रेखांकित करती है।

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राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का सफल समापन, समग्र स्वास्थ्य एवं ग्रामीण सशक्तिकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पुनः स्थापित

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Ministry of Ayush द्वारा All India Ayurvedic Congress के सहयोग से Shegaon (जिला Buldhana district), Maharashtra में 25 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का कल सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस आयोजन ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण सशक्तिकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।

पवित्र विसावा मैदान, Sant Gajanan Maharaj Sansthan में आयोजित इस मेले का उद्घाटन भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने किया। चार दिनों तक चले इस आयोजन में स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक विमर्श, किसान सहभागिता और जनभागीदारी का सशक्त संगम देखने को मिला। बुलढाणा तथा व्यापक विदर्भ क्षेत्र से हजारों नागरिकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अपने उद्घाटन संबोधन में राष्ट्रपति ने स्वास्थ्य को सर्वोच्च सुख बताते हुए कहा कि आयुष पद्धतियां शरीर और मन के संतुलन पर आधारित एक समग्र जीवनशैली प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि निवारक एवं समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण रोगभार कम करने और राष्ट्र को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को “लाइफटाइम आयुर्वेदिक गौरव सम्मान” से सम्मानित किया।

Acharya Devvrat, राज्यपाल, महाराष्ट्र ने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में निहित कालातीत वैज्ञानिक परंपरा बताते हुए प्रामाणिकता और गुणवत्ता के महत्व पर बल दिया।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Prataprao Jadhav ने मेले के लगभग सभी दिनों में उपस्थित रहकर इसे भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का “महाकुंभ” बताया। उन्होंने कहा कि आयुष केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि निवारक स्वास्थ्य, ग्रामीण समृद्धि और वैश्विक वेलनेस नेतृत्व का राष्ट्रीय आंदोलन है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रालय आयुष पद्धतियों में साक्ष्य-आधारित शोध, गुणवत्ता आश्वासन और वैश्विक विस्तार को सुदृढ़ कर रहा है। आयुष पर्यटन की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से भारत विश्व में समग्र वेलनेस का शिखर बन सकता है।

मेले की एक प्रमुख विशेषता आम जनता को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना रही। आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी पद्धतियों के लिए स्थापित ओपीडी काउंटरों पर चारों दिनों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हजारों लाभार्थियों ने निःशुल्क परामर्श, स्वास्थ्य जांच और प्रमाणिक आयुष औषधियों का लाभ उठाया। जीवनशैली संबंधी रोगों, दीर्घकालिक बीमारियों और निवारक देखभाल पर विशेषज्ञ सलाह को लोगों ने सराहा।

योग के लाइव प्रदर्शन और योग चिकित्सा सत्रों में सभी आयु वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। मेले के दौरान आयोजित योग प्रतियोगिता में युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने योग के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाया। आयुष आहार खंड में क्षेत्र-विशिष्ट संतुलित आहार पद्धतियों को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

मंत्रालय के मंडप में अनुसंधान परिषदों, राष्ट्रीय संस्थानों और राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। औषधीय पौधों, हर्बल उत्पादों और घरेलू उपचारों से संबंधित इंटरैक्टिव प्रदर्शन विशेषकर ग्रामीण आगंतुकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे।

राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 की विशिष्टता किसानों के साथ विशेष संवाद रही। “आयुर्वेदिक खेती: उत्पादन, मूल्य संवर्धन एवं विपणन” विषय पर आयोजित सत्रों में औषधीय पौधों की खेती, फसलोत्तर प्रबंधन और सुनिश्चित बाजार संपर्क पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। लगभग 2000 किसानों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। हल्दी की खरीद के लिए महत्वपूर्ण बाय-बैक व्यवस्था सहित कई आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ करने और किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

विदर्भ क्षेत्र के किसानों और प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि औषधीय पौधों की खेती पारंपरिक कृषि के साथ एक लाभकारी और सतत विकल्प प्रदान करती है। उन्होंने मेले को स्वास्थ्य उन्नयन, आय वृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन को जोड़ने वाली समयोचित पहल बताया।

चार दिनों तक यह मेला ज्ञान-विनिमय, जन-जागरूकता और प्रत्यक्ष सेवा प्रदाय का सशक्त मंच बना रहा। विशेषज्ञ व्याख्यान, चिकित्सा प्रदर्शनियां, उद्योग सहभागिता और नीति-निर्माताओं तथा जमीनी हितधारकों के बीच संवाद ने स्वास्थ्य और आजीविका के एकीकृत दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया।

शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आयुष मंत्रालय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ शोध, गुणवत्ता मानकों और आयुष मूल्य श्रृंखला में किसानों की भागीदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक सहभागिता, योग प्रतियोगिताओं में युवा भागीदारी और औषधीय पौधों की खेती के लिए संरचित समर्थन को एक साथ जोड़ते हुए इस मेले ने प्रदर्शित किया कि आयुष पद्धतियां सार्वजनिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और भारत को वैश्विक समग्र वेलनेस केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने का अभिनव प्रयास है भजन क्लबिंग – मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय  राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित माधवास रॉक बैंड के ‘बिगेस्ट भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भजन क्लबिंग युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने का एक अभिनव और सकारात्मक प्रयास है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है और युवाओं के कंधों पर ही देश एवं प्रदेश का भविष्य टिका हुआ है। ऐसे आयोजन युवाओं को भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।




प्रसिद्ध भजन बैंड माधवास रॉक बैंड की संगीतमयी प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्ति भाव से सराबोर हो गया। राधा-कृष्णमय माहौल में मुख्यमंत्री  साय ने भी भक्तों के साथ फूलों की होली खेली। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक चेतना मंच द्वारा किया गया था।



मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमें अपनी जड़ों और प्राचीन परंपराओं को कभी नहीं भूलना चाहिए। भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है और यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि जब युवा अध्यात्म से जुड़ते हैं तो उनमें सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना और अधिक सशक्त होती है।



मुख्यमंत्री ने प्रदेश के किसानों के हित में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और राज्य की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज प्रदेश के 25 लाख 28 हजार से अधिक अन्नदाता किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई है। प्रदेश के 146 विकासखंडों में राशि अंतरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने बताया कि वे स्वयं बिल्हा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि होली से पहले किसानों के खातों में राशि पहुंचने से उनके परिवारजन हर्षोल्लास के साथ त्योहार मना सकेंगे।

इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा,  अजय जामवाल,  आलोक डंगस, सामाजिक चेतना मंच के अध्यक्ष श्री उज्ज्वल दीपक सहित अन्य पदाधिकारी, इस्कॉन रायपुर से स्वामी सुलोचन प्रभुजी, स्वामी तमाल कृष्ण प्रभुजी, स्वामी निखिलापति प्रभुजी, स्वामी रघुपति दास तथा बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।

चरौदा में विज्ञान मॉडल एवं रंगोली प्रदर्शनी का आयोजन

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ऐसे आयोजनों से बच्चों में जागृत होती है वैज्ञानिक सोच — डॉ. दिलीप साहू

आरंग- शनिवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी एवं रंगोली के माध्यम से विज्ञान विषयक चित्रकारी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर जनपद पंचायत फिंगेश्वर (जिला गरियाबंद) के सभापति डॉ. दिलीप साहू तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक एवं समाजसेवी पारसनाथ साहू विद्यालय पहुंचकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

डॉ. दिलीप साहू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित होती है तथा उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है और ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ती है। उन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आयोजित मॉडल प्रदर्शनी, रंगोली के माध्यम से विज्ञान आधारित चित्रकारी, अनुशासन व्यवस्था एवं स्वच्छता के लिए विद्यालय प्रबंधन की सराहना की।

समाजसेवी पारसनाथ साहू एवं बागबाहरा कसेकेरा प्रकल्प से विज्ञान परिषद के अध्यक्ष विमल साहू ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का अवलोकन कर उनके उद्देश्यों की जानकारी ली तथा बच्चों को प्रोत्साहित किया।

मॉडल प्रदर्शनी कार्यक्रम का मंच संचालन नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने किया। आयोजन एवं संयोजन में संस्था प्रमुख के.के. परमाल, शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल, सूर्यकांत चन्द्राकार, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर साहू तथा शिक्षिका संगीता पाटले की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों की उपस्थिति एवं सक्रिय सहभागिता रही।


जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक जे.एल. दरियो को सेवानिवृत्ति पर दी गई गरिमामय विदाई

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जनसंपर्क विभाग मे अनवरत 36 वर्षों तक दी उल्लेखनीय सेवाएं

रायपुर- जनसंपर्क विभाग में 36 वर्षों तक अपनी उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद अपर संचालक जवाहर लाल दरियो के सेवानिवृत्ति अवसर पर आज नवा रायपुर स्थित संवाद के ऑडिटोरियम में एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल सहित जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने जे.एल. दरियो को भावभीनी विदाई दी। 

कार्यक्रम में आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल ने जे.एल. दरियो की सेवा, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा की। उन्होंने जे.एल. दरियो को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वस्थ, सुदीर्घ और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। अपर संचालक उमेश मिश्रा ने उनके साथ कार्य के अपने अनुभव को शेयर करते हुए कहा कि अविभाजित मध्य प्रदेश के इंदौर से जब उनका स्थानांतरण हुआ तो उन्होंने ही कार्यभार ग्रहण किया। संयुक्त संचालक संजीव तिवारी ने जे.एल. दरियो की सरलता और दायित्वों के प्रति समर्पण की प्रशंसा की। 

कार्यक्रम का संचालन करते हुए अपर संचालक आलोक देव ने जे.एल.दरियो की जीवनी पर प्रकाश डाला। जे.एल.दरियो ने इस मौके पर विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त मार्गदर्शन और सहकर्मियों से मिले सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि आप सभी लोगों के सहयोग से ही वह अपने दायित्वों के निर्वहन में सफल रहे हैं।

Iran Supreme Leader Death : मारा गया ईरान का सुप्रीम लीडर खामनेई, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, ईरानी मीडिया ने भी की पुष्टि

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 Iran Supreme Leader Death : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि खामेनेई “इतिहास के सबसे दुष्ट व्यक्तियों में से एक” थे और उनकी मौत न्याय की दिशा में बड़ा कदम है।


ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका और इजराइल द्वारा संयुक्त रूप से की गई। उनके अनुसार, अत्याधुनिक खुफिया और ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, जिसमें खामेनेई के साथ कई अन्य वरिष्ठ ईरानी नेता भी मारे गए।

सुरक्षाबलों को दिया संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी पोस्ट में ईरान के सुरक्षाबलों को चेतावनी और प्रस्ताव दोनों दिए। उन्होंने कहा कि यदि वे लड़ाई छोड़ देते हैं तो उन्हें राहत मिल सकती है, अन्यथा कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

ईरानी मीडिया का दावा

ईरानी सरकारी मीडिया Press TV ने भी रिपोर्ट में कहा है कि खामेनेई अमेरिका-इजराइल के हमले में मारे गए। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि उनके परिवार के कुछ सदस्य भी इस हमले में जान गंवा चुके हैं। हालांकि, विस्तृत आधिकारिक बयान का अभी इंतजार है।

अब कौन संभालेगा सत्ता?

खामेनेई की मौत की खबर के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ईरान की सर्वोच्च सत्ता अब किसके हाथों में जाएगी। ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर का चयन विशेषज्ञों की परिषद (Assembly of Experts) द्वारा किया जाता है। ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान की राजनीतिक स्थिति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार राज्य की प्रगति और सशक्त होते आधारभूत ढांचे का प्रमाण : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित बालाजी हॉस्पिटल परिसर में 200 बिस्तरीय अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भगवान बालाजी की पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि और आरोग्य की कामना की। साथ ही उन्होंने कैंसर अस्पताल के नवनिर्मित इकाइयों का शुभारंभ कर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार राज्य की प्रगति और सशक्त होते आधारभूत ढांचे का स्पष्ट प्रमाण है। प्रदेश निर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने पर हम रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं और राज्य गठन के समय जहां प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं बीते वर्षों में 14 से 15 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि अपने दो वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने 5 से 6 नए अत्याधुनिक अस्पतालों का शुभारंभ किया है, जिससे आमजन को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कैंसर अपस्ताल में मरीजों को आयुष्मान योजना का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक दिक्कतें भी कम होगी।

इस अवसर पर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. तेजस नायक, मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. नीता नायक, आर. के. नायक, सत्यवती नायक तथा अस्पताल प्रबंधन और अधिकारी-कर्मचारी और आमजन उपस्थित थे।

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