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CG NEWS : लिफ्ट के बहाने सुनसान जगह ले गए युवक, महिला की सूझबूझ से बची बड़ी वारदात

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 खैरागढ़। जिले के खैरागढ़ में मनरेगा कार्य के लिए घर से निकली एक आदिवासी महिला के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। रास्ते में बाइक सवार दो युवकों ने मदद के बहाने महिला को लिफ्ट दी, लेकिन सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ अश्लील हरकत करने की कोशिश की। महिला के विरोध और शोर मचाने पर दोनों आरोपी मोटरसाइकिल छोड़कर जंगल की ओर फरार हो गए। बाद में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।


पुलिस के अनुसार मामला Salhewara थाना क्षेत्र का है। 25 वर्षीय महिला 8 जून को चूल्हा खोदरा जंगल तालाब क्षेत्र में मनरेगा कार्य के लिए फोटो खिंचवाने पैदल जा रही थी। इसी दौरान देवपुराघाट निवासी सिरताज खान और उसका एक साथी मोटरसाइकिल से वहां पहुंचे। दोनों ने महिला से बातचीत कर भरोसा दिलाया कि वे भी उसी दिशा में जा रहे हैं और उसे रास्ते में छोड़ देंगे।

महिला उनके झांसे में आ गई और बाइक पर बैठ गई। कुछ दूरी तय करने के बाद दोपहर करीब सवा तीन बजे बांधाटोला इलाके के एक सुनसान खेत के पास बाइक रोक दी गई। आरोप है कि वहां दोनों युवकों ने महिला का हाथ पकड़कर उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी।

हालांकि महिला ने साहस दिखाते हुए जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। महिला का विरोध देखकर दोनों आरोपी घबरा गए और अपनी मोटरसाइकिल मौके पर छोड़कर जंगल की ओर भाग निकले। यही मोटरसाइकिल बाद में पुलिस के लिए आरोपियों तक पहुंचने का अहम सुराग बनी।

घटना के दो दिन बाद पीड़िता ने साल्हेवारा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों व मुखबिर की सूचना के आधार पर देवपुराघाट निवासी सिरताज खान (29) और रितेश मारकंडे (18) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई है।

पहचान परेड की कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

इतिहास में पहली बार रेल मानचित्र पर उभरेगा जशपुर

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 रायपुर : जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने के साथ ही जशपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है।


लगभग 291.881 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रारंभ होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। परियोजना के क्रियान्वयन से जशपुर जिला सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा और क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी।


यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित की जा रही आधुनिक आधारभूत संरचना तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों का परिणाम है। वर्षों से क्षेत्रवासियों द्वारा उठाई जा रही रेल संपर्क की मांग अब साकार होने की दिशा में निर्णायक चरण में पहुंच गई है।

रेल मंत्रालय द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को अधिसूचित किया गया है। अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही परियोजना औपचारिक रूप से प्रभावशील हो गई है।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा वनांचल क्षेत्र

प्राकृतिक संसाधनों और संभावनाओं से समृद्ध जशपुर जिला अब तक रेल संपर्क से वंचित था। परिवहन के लिए मुख्यतः सड़क मार्ग पर निर्भरता के कारण आम नागरिकों, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई रेल लाइन के निर्माण से जिले की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा और लोगों को सुरक्षित, सुलभ तथा किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

किसानों और उद्यमियों के लिए खुलेगी नई संभावनाएं

रेल संपर्क स्थापित होने से जशपुर के कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। जैविक खेती, सुगंधित धान, मक्का, दलहन, सब्जियां और बागवानी उत्पादों के लिए पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने से स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही व्यापार और लघु उद्योगों को विस्तार का नया अवसर मिलेगा।

पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने वन क्षेत्रों, जलप्रपातों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन स्थलों के लिए विशेष पहचान रखता है। रेल संपर्क स्थापित होने के बाद पर्यटकों की पहुंच अधिक आसान होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ेगी पहुंच

नई रेल लाइन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंच को सुगम बनाएगी। वहीं गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ उनकी उपलब्धता और पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।

रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनेगा क्षेत्र

रेल परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे। बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

क्षेत्रवासियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद जशपुर सहित पूरे क्षेत्र में उत्साह और खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि यह रेल लाइन केवल यातायात सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास, समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। दशकों की प्रतीक्षा के बाद जशपुर का रेल मानचित्र पर स्थान सुनिश्चित होना जिले के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना जशपुर के विकास को नई दिशा देने वाली आधारभूत संरचना साबित होगी, जो आने वाले वर्षों में जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने का सामर्थ्य रखती है।

जीवन का उपहार: आपकी रगों का खून किसी के घर का बुझता चिराग फिर जला सकता है

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 विश्व रक्तदान दिवस-आपकी रगों में बहता हुआ खून किसी के बुझते हुए घर के चिराग को दोबारा रोशन कर सकता है 

जीवन का उपहार: रक्तदान 

"रक्तदान महादान" — यह केवल एक नारा नहीं है, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा प्रमाण है। जब आप रक्तदान करते हैं, तो आप केवल खून की कुछ बूंदें नहीं दे रहे होते, बल्कि किसी को मुस्कुराने का, जीने का और अपने परिवार के साथ रहने का एक और मौका दे रहे होते हैं। हर साल 14 जून को पूरी दुनिया में 'विश्व रक्तदान दिवस' मनाया जाता है। आपकी रगों में बहता हुआ खून किसी के बुझते हुए घर के चिराग को दोबारा रोशन कर सकता है। इस बार सिर्फ स्टेटस न लगाएं, आगे आएं और रक्तदान करें!

दुनिया में कई तरह के दान किए जाते हैं— अन्नदान, वस्त्रदान, धनदान और विद्यादान। ये सभी दान सम्मानीय हैं, लेकिन रक्तदान इन सबसे ऊपर है। इसका कारण यह है कि बाकी सभी दान व्यक्ति की सुख-सुविधाओं को पूरा करते हैं, जबकि रक्तदान किसी मरते हुए व्यक्ति को जीवनदान देता है। जब कोई व्यक्ति दुर्घटना का शिकार होता है, किसी बड़ी सर्जरी से गुजरता है, या थैलेसीमिया और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहा होता है, तब उसके पास जिंदगी और मौत के बीच बहुत कम समय होता है। उस वक्त आपकी दी हुई खून की एक यूनिट (लगभग 350-450 मिलीलीटर) किसी का बुझता हुआ घर का चिराग दोबारा रोशन कर सकती है।

अत्याधुनिक युग में भी, विज्ञान आज तक प्रयोगशाला में कृत्रिम खून (Artificial Blood) नहीं बना पाया है। इसका सीधा और कड़वा सच यह है कि किसी इंसान की रगों में बहता खून ही किसी दूसरे इंसान की जान बचा सकता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति और समाज में रक्तदान को 'महादान' का दर्जा दिया गया है।

जब आप एक बार रक्तदान करते हैं, तो आप केवल एक नहीं, बल्कि तीन लोगों की जान बचा सकते हैं।ब्लड बैंक में आपके द्वारा दिए गए रक्त को तीन मुख्य घटकों (Components) में अलग किया जाता है:

1. लाल रक्त कणिकाएं (Red Blood Cells - RBC): एनीमिया या अत्यधिक खून बह जाने पर काम आती हैं।

2. प्लाज्मा (Plasma): जलने के मामलों या लीवर की गंभीर बीमारियों में उपयोग होता है।

3. प्लेटलेट्स (Platelets): डेंगू, कैंसर या कीमोथेरेपी के मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होती हैं।

रक्तदान का लाभ:-

रक्तदान करने से हार्ट अटैक का खतरा कम: रक्तदान करने से शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है, जिससे खून का थक्का जमने की संभावना कम होती है और दिल का दौरा पड़ने का खतरा काफी घट जाता है।

कैंसर से बचाव: शरीर में आयरन का स्तर नियंत्रित रहने से कुछ प्रकार के कैंसर (जैसे लीवर, फेफड़े और कोलन कैंसर) का जोखिम कम होता है।

नई ऊर्जा का संचार: रक्तदान के बाद शरीर 48 घंटों के भीतर तरल पदार्थ की कमी पूरी कर लेता है और अगले कुछ हफ्तों में नई रक्त कोशिकाएं (New Blood Cells) बनाता है, जिससे शरीर में स्फूर्ति आती है।

फ्री मिनी-हेल्थ चेकअप: रक्तदान से पहले डोनर के हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, पल्स और वजन की जांच की जाती है। साथ ही रक्त की HIV, हेपेटाइटिस बी और सी, तथा मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों के लिए मुफ्त जांच होती है।

रक्तदान क्यों है बेहद ज़रूरी?

चिकित्सा विज्ञान ने आज आसमान छू लिया है, हम कृत्रिम अंग बना सकते हैं, जटिल से जटिल सर्जरी कर सकते हैं, लेकिन आज तक वैज्ञानिक प्रयोगशाला में कृत्रिम खून (Artificial Blood) नहीं बना पाए हैं। इसका मतलब साफ है कि इंसान की जान बचाने के लिए केवल इंसान का खून ही काम आ सकता है।

इन परिस्थितियों में होती है रक्त की सबसे ज्यादा जरूरत:

दुर्घटनाएं और इमरजेंसी: सड़क हादसों या अन्य दुर्घटनाओं में अत्यधिक खून बह जाने पर।

गंभीर बीमारियाँ: थैलेसीमिया, कैंसर, और हीमोफिलिया जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को नियमित रूप से खून की जरूरत होती है।

प्रसव के दौरान: कई बार डिलीवरी के वक्त महिलाओं को अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) के कारण खून चढ़ाना पड़ता है।

बड़ी सर्जरी:  दिल का ऑपरेशन, ऑर्गन ट्रांसप्लांट आदि में।

"अगर आप किसी के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते हैं, तो पहले अपनी बाहें आगे बढ़ाएं।"

रक्तदान केवल एक सामाजिक या नैतिक कर्तव्य नहीं है, यह विशुद्ध रूप से मानवता का उत्सव है। धर्म, जाति, रंग और ऊंच-नीच की दीवारों को तोड़कर जब एक इंसान का खून दूसरे इंसान की रगों में दौड़ता है, तो वही सच्ची इंसानियत होती है। आइए, इस महादान का हिस्सा बनें। स्वयं भी रक्तदान करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। याद रखें, आपका थोड़ा सा रक्त किसी के लिए पूरा जीवन बन सकता है।


लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में पहुंचीं रक्षा खडसे, युवाओं को बताया विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति

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लद्दाख- केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने 11 से 13 जून तक लद्दाख के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों का तीन दिवसीय दौरा सफलतापूर्वक पूरा किया। यह दौरा केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों के विकास, युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दौरे की शुरुआत लेह स्थित प्रसिद्ध हॉल ऑफ फेम स्मारक से हुई, जहां मंत्री ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों का साहस, अनुशासन और देशभक्ति हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

12 जून को रक्षा खडसे ने सीमावर्ती गांव हेम्या का दौरा किया, जहां स्थानीय लोगों और MY Bharat के स्वयंसेवकों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया।

इस दौरान वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से जुड़े युवाओं ने अपने अनुभव, आकांक्षाएं और गांवों के विकास के लिए सुझाव साझा किए। मंत्री ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के युवा देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

रक्षा खडसे ने आईटीबीपी के डीआईजी ताशी नामग्याल, डिप्टी कमांडेंट प्रियंजन, ग्राम सरपंच और स्थानीय कलाकारों को सामुदायिक विकास एवं राष्ट्रीय एकता में योगदान के लिए सम्मानित भी किया।

मंत्री ने आईटीबीपी शिविर का दौरा कर जवानों से बातचीत की और कठिन परिस्थितियों में उनकी सेवा, समर्पण और साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी केवल सीमा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और स्थानीय समुदायों के विश्वास को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दौरे के अंतिम दिन रक्षा खडसे ने प्रसिद्ध थिकसे मठ में प्रार्थना सभा में भाग लिया और देश की शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के सीमावर्ती गांव अब देश के "पहले गांव" और विकास के प्रवेश द्वार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेल, कौशल विकास, सामुदायिक भागीदारी और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमावर्ती गांवों के युवा केवल विकास के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार हैं। MY Bharat और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम जैसी पहलें उन्हें देश की प्रगति में सार्थक योगदान देने के अवसर प्रदान कर रही हैं।


सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने कोहा सॉफ्टवेयर पर दिया विशेष प्रशिक्षण, पुस्तकालयों के डिजिटल परिवर्तन को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अंतर्गत कार्यरत सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR) ने 10 से 12 जून 2026 तक अपने सत्संग विहार, नई दिल्ली परिसर में “कोहा सॉफ्टवेयर की मूलभूत जानकारी” विषय पर तीन दिवसीय ऑफलाइन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।

संस्थान के प्रशिक्षण प्रभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुस्तकालय स्वचालन (Library Automation) के क्षेत्र में पेशेवर दक्षता को बढ़ाना और प्रतिभागियों को एकीकृत पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली (Integrated Library Management System - ILMS) के संचालन एवं प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।

यह प्रशिक्षण विश्वभर में लोकप्रिय ओपन-सोर्स लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम कोहा (Koha) पर केंद्रित था, जिसमें देशभर के शैक्षणिक, अनुसंधान और पुस्तकालय संस्थानों से 33 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का समन्वयन मीताली भारती (नोडल पीआई), सलीम अंसारी (सह-पीआई) तथा सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण प्रभाग प्रमुख डॉ. मुकेश ए. पुंड द्वारा किया गया।

उद्घाटन सत्र में मीताली भारती ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डिजिटल पुस्तकालय तकनीकों में कौशल विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. मुकेश ए. पुंड ने पुस्तकालय स्वचालन और सूचना संसाधनों की पहुंच को बेहतर बनाने में कोहा जैसे प्लेटफॉर्म की भूमिका को रेखांकित किया। मुख्य वैज्ञानिक सी.बी. सिंह ने ज्ञान प्रबंधन और पुस्तकालय स्वचालन में ओपन-सोर्स तकनीकों के बढ़ते महत्व पर अपने विचार साझा किए।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर की अवधारणा, कोहा की संरचना, लिनक्स इंस्टॉलेशन, कोहा डिप्लॉयमेंट, प्रशासनिक प्रबंधन, कैटलॉग प्रबंधन, उपयोगकर्ता प्रबंधन, सर्कुलेशन सिस्टम और रिपोर्ट जनरेशन जैसे विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. मुकेश ए. पुंड और सलीम अंसारी ने किया। प्रतिभागियों को कोहा सिस्टम को कॉन्फ़िगर करने, पुस्तकालय रिकॉर्ड प्रबंधन और अनुकूलित रिपोर्ट तैयार करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ।

समापन समारोह में मुख्य वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डिजिटल पुस्तकालय प्रणालियों और ओपन-सोर्स समाधानों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान प्रबंधन के क्षेत्र में ऐसी तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पुस्तकालय एवं सूचना सेवाओं में पेशेवर उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, ओपन-सोर्स तकनीकों को अपनाने तथा देशभर में पुस्तकालयों के डिजिटल परिवर्तन को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।


नागपुर बनेगा ग्रीन सिटी: 25 लाख पेड़ लगाने का ऐलान, नितिन गडकरी ने विकास परियोजनाओं की दी जानकारी

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नागपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर को देश के सबसे हरित शहरों में शामिल करने के उद्देश्य से शहर और जिले में 25 लाख पेड़ लगाने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और अन्य संस्थाओं को 2 से 3 मीटर ऊंचाई वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और संरक्षण कार्य किया जा सके।

नागपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए गडकरी ने केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के सभी जिलों और तहसीलों की मैपिंग रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से की जाएगी तथा जिन जिलों ने बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया है, उन्हें विशेष सम्मान दिया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 58 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं। आयुष्मान भारत योजना से 60 करोड़ लोगों को लाभ मिला है, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 11 करोड़ एलपीजी कनेक्शन वितरित किए गए हैं। वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 11 करोड़ किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत लगभग 35 लाख करोड़ रुपये के ऋण 57 करोड़ लाभार्थियों को दिए गए हैं। स्टार्टअप इंडिया अभियान के तहत 1.6 लाख स्टार्टअप और 118 यूनिकॉर्न विकसित हुए हैं। इसके अलावा स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से लगभग 5 करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

नागपुर के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा कि कॉटन मार्केट, इतवारी मार्केट, ऑरेंज मार्केट, नेताजी मार्केट, कमल चौक कॉम्प्लेक्स और कई अन्य बाजारों के आधुनिकीकरण और पुनर्विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसके अलावा नागपुर मेट्रो के दूसरे चरण का कार्य प्रगति पर है, जबकि तीसरे चरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है।

उन्होंने यह भी बताया कि ऑक्सीजन पार्क, बर्ड पार्क, एम्स, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, आईआईआईटी, बुद्धिस्ट सर्किट प्रोजेक्ट और दीक्षाभूमि पुनर्विकास जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शहर के विकास को नई दिशा दे रही हैं।

परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में गडकरी ने कहा कि प्रस्तावित नागपुर-हैदराबाद एक्सप्रेसवे बनने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर लगभग साढ़े तीन घंटे रह जाएगा। वहीं नागपुर का इंदोरा-दिघोरी फ्लाईओवर अंतिम चरण में है और इसे 1 अगस्त 2026 से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।


लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे भारतीय सेना के नए प्रमुख, 30 जून से संभालेंगे कमान

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने वर्तमान उप सेना प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना का अगला थल सेना प्रमुख (Chief of the Army Staff) नियुक्त किया है। वह 30 जून 2026 की दोपहर से यह जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी उसी दिन सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला के पूर्व छात्र हैं और दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कॉर्प्स में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग चार दशकों के अपने शानदार सैन्य करियर में उन्होंने संचालन, रणनीति, सैन्य आधुनिकीकरण और संस्थागत विकास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अपने सैन्य जीवन के दौरान उन्होंने विभिन्न चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में नेतृत्व किया है। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर आर्मर्ड ब्रिगेड तथा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी बल का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन सुदर्शन चक्र कोर की कमान भी संभाली।

इसके बाद उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिविधियों तथा औपचारिक जिम्मेदारियों का संचालन किया। आर्मी कमांडर बनने के बाद उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान दोनों का नेतृत्व किया, जो भारतीय सेना में एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को सेना के आधुनिकीकरण और क्षमता विकास में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उन्होंने सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना और क्षमता विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भारतीय सेना की आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कई महत्वपूर्ण योजनाओं को दिशा दी।

एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी के रूप में उन्होंने सैन्य शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वे हायर कमांड कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज के स्नातक हैं तथा उन्होंने पेरिस में प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी पूरा किया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की दिशा में और अधिक सशक्त होगी।



सेशेल्स पहुंचा आईएनएस तरकश, भारत-सेशेल्स समुद्री साझेदारी हुई और मजबूत

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सेशेल्स- भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तरकश दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के दौरान सेशेल्स की राजधानी पोर्ट विक्टोरिया पहुंचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और सेशेल्स के बीच समुद्री सहयोग तथा द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।

आईएनएस तरकश ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज पीएस ज़ोरोस्टर को भारत से सेशेल्स तक सुरक्षित रूप से एस्कॉर्ट किया। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में मरम्मत और उन्नयन कार्य पूरा करने के बाद सेशेल्स लौट रहा था। यह सहयोग दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

इस दौरे के दौरान आईएनएस तरकश के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन रोहित मिश्रा सेशेल्स सरकार और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

भारतीय नौसेना सेशेल्स सरकार को महत्वपूर्ण तकनीकी उपकरण, आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी सामग्री भी सौंपेगी, जिससे समुद्री सुरक्षा और संचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

यह पोर्ट कॉल भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता, आपसी सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को भी बल मिलेगा।



कृषि जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने विशेषज्ञ समिति का किया पुनर्गठन

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 13(1) के तहत कृषि जैव विविधता (Agrobiodiversity) पर विशेषज्ञ समिति का एक वर्ष के लिए पुनर्गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य कृषि जैव विविधता के संरक्षण, सतत उपयोग तथा एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करना है।

समिति के अध्यक्ष के रूप में पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ. पी. एल. गौतम को नियुक्त किया गया है। डॉ. गौतम राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। हाल ही में उन्हें कृषि विज्ञान में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। वहीं PPVFRA के वर्तमान अध्यक्ष समिति के सह-अध्यक्ष (Co-Chair) होंगे।

यह विशेषज्ञ समिति वर्ष 2005 से राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की एक महत्वपूर्ण सलाहकार संस्था रही है और समय-समय पर कृषि आनुवंशिक संसाधनों से जुड़े उभरते मुद्दों के समाधान के लिए इसका पुनर्गठन किया जाता रहा है।

समिति ने अब तक कृषि जैव विविधता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सुझाव दिए हैं। इनमें खाद्य एवं कृषि के लिए पौध आनुवंशिक संसाधनों पर अंतरराष्ट्रीय संधि (ITPGRFA), बीजों और पशु भ्रूणों के निर्यात से जुड़े लाभ-साझेदारी मुद्दे, पारंपरिक पौध प्रजनन गतिविधियां तथा जैविक संसाधनों से जुड़े अनुसंधान परियोजनाओं के लिए स्वीकृति प्रक्रियाएं शामिल हैं।

नई समिति में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राष्ट्रीय पौध, पशु एवं मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन, नाल्सार विधि विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

समिति कृषि क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने, देशी फसलों एवं पशुधन नस्लों के संरक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोगी अनुसंधान से जुड़े दिशा-निर्देशों की समीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य करेगी।

सरकार का मानना है कि यह कदम कृषि जैव विविधता के संरक्षण, आनुवंशिक संसाधनों एवं पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा तथा जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इसके साथ ही समिति भारत के राष्ट्रीय जैव विविधता कार्ययोजना (NBSAP) लक्ष्यों तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG-2: शून्य भूख, SDG-13: जलवायु कार्रवाई और SDG-15: भूमि पर जीवन) को प्राप्त करने में भी सहयोग करेगी।

एयर फ़ोर्स अकादमी से निकले 231 नए योद्धा, पहली बार NDA की महिला कैडेट्स भी बनीं वायुसेना अधिकारी

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हैदराबाद- हैदराबाद के डुंडीगल स्थित एयर फ़ोर्स अकादमी में आयोजित संयुक्त स्नातक परेड (Combined Graduation Parade) के दौरान 231 फ्लाइट कैडेट्स को भारतीय वायुसेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्रदान किया गया। इनमें 194 पुरुष और 37 महिला कैडेट्स शामिल हैं। खास बात यह रही कि इस बैच में पहली बार राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की महिला कैडेट्स भी शामिल थीं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 217वें कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की और सफल कैडेट्स को राष्ट्रपति आयोग (President's Commission) प्रदान किया। इसके साथ ही फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं के प्रशिक्षण का समापन हुआ।

इस अवसर पर भारतीय नौसेना के 9 अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के 3 अधिकारियों और वियतनाम के 2 अधिकारियों को ‘विंग्स’ प्रदान किए गए। वहीं 3 अधिकारियों को नेविगेशन प्रशिक्षण पूरा करने पर ‘ब्रेवेट्स’ से सम्मानित किया गया।

रक्षा मंत्री ने नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना हमेशा देश की सुरक्षा का मजबूत कवच और प्रभावी शक्ति रही है। उन्होंने 1947-48 के कश्मीर युद्ध, 1971 के युद्ध और हालिया ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वायुसेना ने अपने साहस, अनुशासन और सटीक कार्रवाई से देश का गौरव बढ़ाया है।

उन्होंने अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के युद्ध केवल सैनिकों और हथियारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ड्रोन, सैटेलाइट, सेंसर, रोबोटिक्स और साइबर तकनीकों का उपयोग युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल रहा है।

राजनाथ सिंह ने युवा अधिकारियों से लगातार सीखते रहने, नई तकनीकों को अपनाने और भविष्य की युद्ध रणनीतियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनके कंधों पर लगी ‘विंग्स’ केवल एक बैज नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास का प्रतीक हैं।

महिला अधिकारियों को विशेष बधाई देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी भारतीय वायुसेना को और अधिक मजबूत तथा संतुलित बनाएगी। उन्होंने इसे सशक्त और समावेशी सैन्य बल का प्रतीक बताया।

समारोह के दौरान शानदार फ्लाईपास्ट, आकाश गंगा स्काईडाइविंग टीम, महिला एयर वॉरियर ड्रिल टीम ‘शक्ति’, सारंग हेलीकॉप्टर टीम, सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम और सुखोई-30 एमकेआई के हैरतअंगेज प्रदर्शन ने दर्शकों का मन मोह लिया।

यह समारोह नव-नियुक्त अधिकारियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण रहा, जहां उन्होंने राष्ट्र की संप्रभुता, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करने की शपथ ली और देश सेवा की नई यात्रा की शुरुआत की।

आईएमए की पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन, महिला कैडेट्स को बताया नए भारत की ताकत

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देहरादून- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अधिकारी कैडेट्स को देश के सबसे कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनका साहस और विवेक भविष्य में उनकी सबसे बड़ी ताकत होंगे।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से परेड में शामिल नौ महिला कैडेट्स को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह केवल भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में एक नया अध्याय नहीं है, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की प्रगति का प्रेरणादायक उदाहरण भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में और अधिक महिला कैडेट्स अकादमी का हिस्सा बनेंगी।

राष्ट्रपति मुर्मू ने मित्र देशों से आए विदेशी कैडेट्स को भी बधाई देते हुए कहा कि वे आईएमए से प्राप्त मूल्यों और प्रशिक्षण के बल पर अपने-अपने देशों की सेनाओं में उत्कृष्ट योगदान देंगे।

उन्होंने कहा कि आईएमए में विदेशी कैडेट्स की मौजूदगी भारत की मित्रता, सहयोग और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यहां विकसित होने वाले आपसी विश्वास और पेशेवर संबंध देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं और 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के विश्वास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने उन्हें हमेशा सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और जटिल वैश्विक परिस्थितियों के इस दौर में भारतीय सेना को हमेशा भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने युवा अधिकारियों से आजीवन सीखते रहने, साहसिक निर्णय लेने और नैतिक नेतृत्व का परिचय देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि एक सैन्य अधिकारी के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल नेतृत्व करना ही नहीं, बल्कि अपने सैनिकों का मार्गदर्शन और उनकी देखभाल करना भी है। उन्हें उदाहरण प्रस्तुत करते हुए टीम भावना, समर्पण और विश्वास को मजबूत बनाना होगा ताकि वे अपनी इकाइयों की युद्ध क्षमता को और अधिक प्रभावी बना सकें।


रायपुर की बेटी का कमाल: 23 साल की चारु पांडे ने पास कीं 19 सरकारी परीक्षाएं, राष्ट्रपति भवन में होगा सम्मान

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की 23 वर्षीय चारु पांडे ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। चारु ने अब तक 19 सरकारी प्रतियोगी परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर एक नया इतिहास रच दिया है।

चारु की इस असाधारण उपलब्धि ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनकी सफलता न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। सीमित संसाधनों और कठिन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत करते हुए एक के बाद एक कई प्रतिष्ठित सरकारी परीक्षाओं में सफलता हासिल की।

उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण माना जा रहा है।

चारु पांडे की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर किए जाएं, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता। आज वे लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं और उनकी कहानी युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए उत्साहित कर रही है।

रायपुर और पूरे छत्तीसगढ़ में उनकी इस उपलब्धि पर खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाइयां दे रहे हैं।

कांकेर में बिजली का कहर: पेड़ के नीचे खड़े लोगों पर गिरी आकाशीय बिजली, 3 की मौत

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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से दुखद खबर सामने आई है। जिले के कलगांव क्षेत्र में बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, अचानक शुरू हुई बारिश से बचने के लिए कुछ लोग एक पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली पेड़ पर आ गिरी, जिसकी चपेट में आने से तीन लोगों की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।

प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें तथा सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।

फिलहाल पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और प्रशासन पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दे रहा है।

महिला शक्ति बनेगी विकसित भारत की ताकत, पीएम मोदी ने महिलाओं की बढ़ती भूमिका को सराहा

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान और ड्रोन तकनीक जैसे आधुनिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और देश को नई दिशा दे रही हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि "महिला-नेतृत्व वाला विकास" भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें नए अवसर प्रदान करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज देश की महिलाएं केवल परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्टार्टअप, बैंकिंग, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं। ड्रोन तकनीक में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे भारत के बदलते स्वरूप का प्रतीक बताया।

उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से भारत विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य को और तेजी से हासिल करेगा। प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की मजबूत शक्ति बताया।

महिलाओं के नेतृत्व में विकास को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार लगातार नए कदम उठा रही है, जिससे देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिल रही है।

अमेरिका-ईरान शांति समझौते की ओर बढ़े, लेकिन तनाव अब भी बरकरार

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मध्य पूर्व से बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी के बाद शांति समझौते की उम्मीदें बढ़ गई हैं। दोनों देशों के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि समझौते का मसौदा लगभग तैयार है और जल्द ही इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

हालांकि, कूटनीतिक प्रगति के बीच क्षेत्र में सुरक्षा तनाव अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सेना ने कई ईरानी ड्रोन को मार गिराया, जिन्हें व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा माना गया था।

प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने, कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत देने और भविष्य में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अलग से बातचीत करने की योजना बताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ सकती है और वैश्विक तेल बाजारों को भी राहत मिल सकती है। हालांकि, कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी अंतिम सहमति बनना बाकी है।

फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित ऐतिहासिक समझौते पर टिकी हुई हैं।

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