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महासमुंद में IPL सट्टा सिंडिकेट का भंडाफोड़, 9 आरोपी गिरफ्तार, 3 फरार

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 महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस ने आईपीएल सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए संगठित गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जिले के विभिन्न इलाकों में की गई ताबड़तोड़ छापेमारी में 9 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 3 आरोपी अभी भी फरार हैं।


पुलिस के मुताबिक, यह अवैध सट्टा नेटवर्क बसना, पिथौरा, सांकरा, सरायपाली और भंवरपुर क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय था और ऑनलाइन माध्यम से सट्टेबाजी का कारोबार संचालित कर रहा था।

मामले की शुरुआत भंवरपुर चौक से पकड़े गए आरोपी योगेश्वर देवांगन की गिरफ्तारी से हुई। पूछताछ में मिली अहम जानकारियों के आधार पर पुलिस ने पांच विशेष टीमों का गठन किया और अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से 11 मोबाइल फोन जब्त किए। जांच में सामने आया कि फोन-पे और यूपीआई जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टा लेनदेन किया जा रहा था। शुरुआती जांच में 3 लाख रुपये से अधिक के अवैध ट्रांजैक्शन के प्रमाण मिले हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग लोग मैचों पर दांव लगवाने से लेकर पैसों के लेनदेन तक की जिम्मेदारी निभा रहे थे। आरोपी डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से पूरा नेटवर्क उजागर हो गया।

गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 7(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही मामले को संगठित अपराध की श्रेणी में रखते हुए आगे की जांच जारी है।

इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिनों के संघर्षविराम पर सहमति, ट्रंप का दावा

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 वॉशिंगटन/बेरूत: डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया कि इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के संघर्षविराम (सीजफायर) पर सहमति बन गई है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी जोसेफ आउन और बेंजामिन नेतन्याहू के साथ सकारात्मक बातचीत हुई है।


ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों देशों ने मंगलवार शाम 5 बजे (EST) से 10 दिन के औपचारिक संघर्षविराम को मंजूरी दी है। उन्होंने इसे शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

गौरतलब है कि लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्ला के बीच पिछले एक महीने से अधिक समय से संघर्ष जारी था। इस बीच लेबनान लगातार युद्धविराम की मांग कर रहा था ताकि आगे की वार्ता का रास्ता साफ हो सके।

ट्रंप ने दोनों देशों के नेताओं को उच्च स्तरीय वार्ता के लिए व्हाइट हाउस आमंत्रित करने की भी बात कही। बताया जा रहा है कि 1983 के बाद पहली बार इस स्तर पर बातचीत की पहल की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई संघर्षों को सुलझाने का उन्हें अनुभव है और यह उनका “10वां बड़ा प्रयास” होगा। ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो को स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने संघर्षविराम की दिशा में प्रयासों के लिए ट्रंप का आभार जताया है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे देश के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इस मौके पर संघर्ष में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

देश और राज्य के भविष्य की दिशा तय करने का आधार है जनगणना : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में जनगणना 2027 के तहत ऑनलाइन स्व-गणना कर जनगणना अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर नागरिकों को इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत में विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभियान संचालित हो रहा है और छत्तीसगढ़ में भी आज से ऑनलाइन स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि नागरिक 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 के बीच ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना को आधुनिक और डिजिटल स्वरूप दिया गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुलभ हो सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि देश और राज्य के भविष्य की दिशा तय करने का आधार है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार आने वाले वर्षों की योजनाएं तैयार करती है, ताकि विकास का लाभ हर वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुंच सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 मई 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें मकान सूचीकरण और गणना का कार्य किया जाएगा। 30 मई तक प्रगणक घर-घर जाकर आवासीय और गैर-आवासीय भवनों, उनकी स्थिति, उपयोग तथा बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और संचार व्यवस्था से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे।

उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि जब भी प्रगणक घर आएं, तो उन्हें सही, स्पष्ट और पूर्ण जानकारी दें, क्योंकि प्रत्येक जानकारी राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय एवं नीतिगत उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है और “विकसित छत्तीसगढ़ 2047” के संकल्प को साकार करने में जनगणना की महत्वपूर्ण भूमिका है। सही आंकड़े ही बेहतर योजना और प्रभावी विकास की नींव रखते हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस महाअभियान को जनभागीदारी का उत्सव बनाने और सक्रिय सहयोग देने की अपील की।

इस दौरान अपर मुख्य सचिव तथा जनगणना के नोडल श्री मनोज कुमार पिंगुआ, कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह, संचालक जनगणना श्री कार्तिकेय गोयल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

नौकरी का लालच देकर नाबालिग का सौदा! रायगढ़ पुलिस ने गिरोह का किया खुलासा

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रायगढ़ । जिले के कोतरारोड थाना क्षेत्र में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की को मात्र डेढ़ लाख रुपये में बेचने का बेहद जघन्य मामला सामने आया है। पिता की डांट से परेशान होकर घर से निकली लड़की को जॉब का लालच देकर गिरोह ने मध्य प्रदेश ले जाकर शादी के नाम पर बेच दिया। 



बाद में उसे फिर रायगढ़ लाकर देह व्यापार में धकेल दिया गया। पीड़िता ने 11 अप्रैल को थाने में शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि 26 नवंबर 2025 को गांव के मैदान में वह अकेली थी, तभी परिचित नाबालिग लड़की चमेली (परिवर्तित नाम) ने उसे रायगढ़ में अच्छी नौकरी दिलाने का लालच दिया और अपने साथ ले गई। महादेव मंदिर के पास गिरोह के अन्य सदस्यों से मिलवाया गया।

दूसरे दिन आरोपियों ने नाबालिग को मध्य प्रदेश के सागर जिले ले जाकर 37 वर्षीय सुनील दीक्षित से डेढ़ लाख रुपये में सौदा तय किया। सुनील की शादी नहीं हो रही थी, इसलिए आरोपियों ने पैसे लेकर नाबालिग की उसके साथ जबरन शादी करा दी।

शादी के बाद सुनील ने लड़की के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाना शुरू कर दिया। परेशान होकर नाबालिग मौका देखकर ट्रेन से रायगढ़ भाग आई, लेकिन पिता के डर से घर नहीं गई। फिर वह उसी चमेली से मिली, जिसने उसे अपने पास रखने का भरोसा दिया, लेकिन बाद में उसे देह व्यापार में धकेल दिया गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। पीड़िता का बयान दर्ज किया गया और उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया।

गिरफ्तार आरोपी:

  • बिन्दिया रात्रे (23 वर्ष) – नाबालिग को देह व्यापार में धकेलने वाली
  • पूजा उर्फ बॉबी उर्फ चाची (45 वर्ष) – गिरोह की मां
  • चिकू खान (20 वर्ष) – बेटा
  • एक नाबालिग लड़की (चमेली) – जॉब का झांसा देने वाली
  • सुनील दीक्षित (37 वर्ष), निवासी सागर (मध्य प्रदेश) – जिसने डेढ़ लाख में नाबालिग खरीदी

पुलिस ने सुनील दीक्षित को 13 अप्रैल को छतरपुर से गिरफ्तार कर रायगढ़ लाया। सभी आरोपियों को 15 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया गया। नाबालिग लड़की को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया, जबकि अन्य आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।पुलिस ने आरोपीयों के खिलाफ BNSS की धारा 137(2), 143, 96, 98, 99, 64, 3(5) तथा POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया है।

छत्तीसगढ़ में समय से पहले ग्रीष्मकालीन अवकाश, 20 अप्रैल से 15 जून तक बंद रहेंगे स्कूल

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के सभी शासकीय और निजी स्कूल 20 अप्रैल 2026 से बंद रहेंगे। पहले ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 मई से शुरू होना था, लेकिन बढ़ते तापमान के चलते इसे पहले लागू करने का निर्णय लिया गया है।


स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा।


स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब संशोधित ग्रीष्मकालीन अवकाश 20 अप्रैल से 15 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। यह आदेश प्रदेश के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर-अनुदान प्राप्त और निजी स्कूलों पर लागू होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लगातार बढ़ती गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में स्कूल जाना उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए अवकाश पहले लागू किया गया है।

गौरतलब है कि अभिभावक भी लगातार इस मांग को उठा रहे थे कि अप्रैल में ही पड़ रही तेज गर्मी के कारण बच्चों को राहत दी जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है।

डोपिंग के खिलाफ भारत का सख्त रुख: वैश्विक सम्मेलन में मांडविया ने दोहराई स्वच्छ खेल की प्रतिबद्धता

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नई दिल्ली- युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) के ग्लोबल एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशंस नेटवर्क (GAIIN) के अंतिम सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए स्वच्छ खेल और डोपिंग के खिलाफ वैश्विक सहयोग के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “वैश्विक एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस और जांच नेटवर्क इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।” उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन डोपिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाता है।

डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत ने खेलों की शुचिता बनाए रखने के लिए “सिर्फ अनुपालन के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक प्रतिबद्धता के साथ” कई सुधार किए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग अधिनियम, 2022 को एक मजबूत कानूनी ढांचा बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संशोधन अधिनियम, 2025 वैश्विक मानकों के अनुरूप है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार प्रतिबंधित पदार्थों के प्रशासन और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रावधान लाने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि पहले डोपिंग को व्यक्तिगत गलती माना जाता था, लेकिन अब यह एक संगठित बहुराष्ट्रीय गतिविधि बन चुकी है, जिससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

WADA के अध्यक्ष विटोल्ड बांका ने कहा कि “WADA का इंटेलिजेंस और जांच मॉडल राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत करता है।” उन्होंने बताया कि यह मॉडल साझेदारी पर आधारित है और इसमें Europol तथा INTERPOL जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सहयोग भी शामिल है।

डॉ. मांडविया ने कहा कि WADA कार्यशालाओं और इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी से भारत की जांच क्षमताएं मजबूत हुई हैं और एंटी-डोपिंग पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को “उभरती हुई वैश्विक खेल शक्ति” बताया।

उन्होंने खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदल रहे हैं और खेलों को राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बना रहे हैं।

मंत्री ने खेलों में नैतिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि “खिलाड़ियों के मूल्य खेल उत्कृष्टता के केंद्र में होने चाहिए।” उन्होंने निष्पक्षता, ईमानदारी और सम्मान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

रोकथाम के उपायों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “रोकथाम सबसे प्रभावी रणनीति है,” और खिलाड़ियों को सही समय पर सही जानकारी देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) इंडिया जागरूकता के लिए कार्यशालाएं, सेमिनार, डिजिटल अभियान और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष शैक्षणिक मॉड्यूल भी विकसित किए गए हैं।

खेल सचिव हरि रंजन राव ने कहा कि खेल मंत्रालय ने NADA की संस्थागत और जांच क्षमता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय और सूचना साझाकरण शामिल है। उन्होंने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के साथ साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. मांडविया ने “Know Your Medicine” मोबाइल ऐप का भी उल्लेख किया, जो खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की जांच में मदद करता है। उन्होंने बताया कि देश में डोपिंग जांच की संख्या 2019 में लगभग 4,000 से बढ़कर पिछले वर्ष करीब 8,000 हो गई है, जबकि प्रतिकूल मामलों की दर 5.6% से घटकर 2% से कम हो गई है।

NADA इंडिया के महानिदेशक अनंत कुमार ने कहा कि परीक्षण कार्यक्रम का विस्तार हुआ है, लेकिन अब केवल परीक्षण पर्याप्त नहीं है—इसके लिए खुफिया जानकारी, समन्वय और शिक्षा भी आवश्यक है।

मंत्री ने बताया कि भारत नई WADA-अनुपालन प्रयोगशालाएं स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।

अंत में, डॉ. मांडविया ने कहा कि “डोपिंग की चुनौती का सामना कोई एक संस्था अकेले नहीं कर सकती,” और सरकार, नियामक संस्थाओं तथा खेल संगठनों के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल खेल उत्कृष्टता बल्कि उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026: न्याय विभाग की स्वच्छ, स्वस्थ और सतत भारत की पहल

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न्याय विभाग द्वारा 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत एवं पेशेवर जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता और मानसिक कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

पखवाड़े के दौरान 02.04.2026 को सभी के लिए आधे घंटे का योग सत्र आयोजित किया गया, जिससे कर्मचारियों को योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य स्वच्छता, स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना था।

09.04.2026 को विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्वच्छता और स्वच्छ जीवनशैली पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया।

10.04.2026 को जैसलमेर हाउस परिसर में श्रमदान गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसके पश्चात नीरज वर्मा, सचिव (न्याय) के मार्गदर्शन में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अवसर पर सचिव (न्याय) ने स्वच्छ, हरित और सतत पर्यावरण के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया तथा अधिकारियों को अपने आसपास भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया।

इसी दिन अधिकारियों/कर्मचारियों के बच्चों के लिए स्वच्छता विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

13.04.2026 को विभाग द्वारा iGOT Mission LiFE (Lifestyle for Environment) पर एक सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में सतत आदतों को अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस सत्र में ‘यूज़ एंड डिस्पोज़’ अर्थव्यवस्था के स्थान पर ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को अपनाने और ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ के रूप में जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया गया।

स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान 14 अप्रैल 2026 को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं न्याय मंत्रालय ने जैसलमेर हाउस परिसर में स्थित डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही नीरज वर्मा, सचिव (न्याय), पूर्व सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इन सभी गतिविधियों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे कार्यस्थलों और समाज में स्वच्छता और स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना और मजबूत हुई। पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार भी प्रदान किए गए।


न्याय विभाग स्वच्छ भारत मिशन के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी स्वच्छता एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार की पहल, अभियान और गतिविधियाँ जारी रखेगा।

मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ी पहल: FIU-IND और PFRDA के बीच समझौता

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भारत में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने सूचना साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

यह MoU अमित मोहन गोविल, निदेशक, FIU-IND और रणदीप सिंह जगपाल, पूर्णकालिक सदस्य, PFRDA द्वाराशिवसुब्रमण्यम रामन, अध्यक्ष, PFRDA की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों संस्थाओं को विनियमित/रिपोर्टिंग संस्थाओं के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने में सक्षम बनाना है, विशेष रूप से PFRDA द्वारा विनियमित संस्थाओं में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और आतंकवाद के वित्तपोषण से मुकाबला (CFT) क्षमताओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, दोनों पक्ष अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य करेंगे और पारस्परिक हित के मुद्दों पर चर्चा तथा सूचना आदान-प्रदान के लिए त्रैमासिक बैठकें आयोजित करेंगे।

MoU के तहत, प्रत्येक पक्ष एक नोडल अधिकारी और एक वैकल्पिक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जो दोनों एजेंसियों के बीच नियमित समन्वय और संवाद को सुनिश्चित करेगा। यह समझौता Egmont Principles of Information Exchange के तहत विदेशी FIU के साथ सूचना के आदान-प्रदान में भी सहायक होगा।

इस सहयोग में विभिन्न वित्तीय उप-क्षेत्रों में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण (ML/TF) से जुड़े जोखिमों और कमजोरियों का आकलन, संदिग्ध लेनदेन के लिए रेड फ्लैग संकेतकों की पहचान और प्रसार, तथा रिपोर्टिंग संस्थाओं द्वारा PMLA, PML नियमों और PFRDA दिशानिर्देशों के अनुपालन की निगरानी भी शामिल होगी।

फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) के बारे में

FIU-IND देश की केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित सूचनाओं को प्राप्त, संसाधित, विश्लेषित और प्रसारित करने के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण के खिलाफ प्रयासों का समन्वय करती है।

पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के बारे में

पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना PFRDA अधिनियम, 2013 के तहत की गई है। यह भारत में पेंशन क्षेत्र के विनियमन, विकास और निगरानी के लिए जिम्मेदार है, जिसमें नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और अटल पेंशन योजना (APY) शामिल हैं। PFRDA पेंशन फंड, सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों, ट्रस्टी, एग्रीगेटर्स और प्वाइंट्स ऑफ प्रेजेंस जैसे मध्यस्थों के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा प्रदान करता है, जिससे पेंशन प्रणाली का सुव्यवस्थित विकास और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

इंस्टाग्राम पर दोस्ती, शादी का झांसा… युवती से दुष्कर्म, आरोपी फरार

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 दुर्ग। सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती कर शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। मोहन नगर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।


पुलिस के अनुसार, पीड़िता की पहचान वर्ष 2025 में इंस्टाग्राम के माध्यम से दुर्ग निवासी सौरभ राजपूत से हुई थी। बातचीत बढ़ने के बाद आरोपी ने शादी का झांसा देकर युवती को दुर्ग बुलाया। 5 मार्च 2026 को युवती के दुर्ग पहुंचने पर आरोपी उसे सिकोला भाटा स्थित अपने बड़े भाई के घर ले गया, जहां उसने जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए।

शिकायत में पीड़िता ने बताया कि इसके बाद आरोपी उसे उज्जैन घुमाने के बहाने ले गया, जहां भी उसने कई बार दुष्कर्म किया। आरोपी ने शादी का झांसा देकर दुर्ग सहित अन्य स्थानों पर भी लगातार उसका शोषण किया।

बताया गया कि 11 अप्रैल 2026 को आरोपी युवती को ग्राम संबलपुर स्थित अपने रिश्तेदार के घर ले गया और वहां भी दुष्कर्म किया। अगले दिन उसे उसके गांव छोड़ दिया। जब युवती के परिजनों ने शादी की बात की, तो आरोपी टालमटोल करता रहा और बाद में साफ इंकार कर फरार हो गया।

पीड़िता की शिकायत पर मोहन नगर थाना पुलिस ने आरोपी सौरभ राजपूत के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम: ऊर्जा सुरक्षा हेतु कोयला—15वें वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी चरण का शुभारंभ

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कोयला मंत्रालय 17 अप्रैल 2026 को “आत्मनिर्भर भारत: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला” विषय पर एक हितधारक परामर्श (Stakeholder Consultation) आयोजित करने जा रहा है, साथ ही वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 15वें चरण का शुभारंभ भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम मुंबई में आयोजित होगा, जिसमें श्री विक्रम देव दत्त, सचिव, कोयला मंत्रालय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह पहल भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और आत्मनिर्भर राष्ट्र के विजन को आगे बढ़ाने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामियों की उल्लेखनीय सफलता को आगे बढ़ाते हुए, कोयला मंत्रालय देश के ऊर्जा परिदृश्य को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत के बाद से घरेलू कोयले की उपलब्धता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।

आगामी 15वां चरण इसी प्रगतिशील यात्रा को आगे बढ़ाता है। इसमें कोयला खदानों को अत्यंत उदार शर्तों पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा मिले, विविध निवेश आकर्षित हों और उद्योग की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो। इस चरण में पूरी तरह से अन्वेषित (fully explored) और आंशिक रूप से अन्वेषित (partially explored) कोयला ब्लॉकों की पेशकश की जाएगी, जिसमें अनुभवी खनन कंपनियों के साथ-साथ नए और तकनीक-आधारित उद्यमों को भी भाग लेने का अवसर मिलेगा।

यह पहल कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार सृजन और समग्र क्षेत्रीय विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वाणिज्यिक कोयला खनन ढांचे ने पारदर्शिता को बढ़ाया है, प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया है और सभी प्रतिभागियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए हैं। इसके परिणामस्वरूप घरेलू उद्योगों के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ी है और आयात पर निर्भरता कम हुई है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।

वाणिज्यिक कोयला खनन देश की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है और विभिन्न उद्योगों के लिए कोयले की स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। आने वाला चरण इस मजबूत नींव को और सुदृढ़ करेगा और क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य में विश्वास को बढ़ाएगा।

कोयला मंत्रालय देश को विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ सतत विकास, नवाचार और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

धमतरी में ‘STREE’ परियोजना का शुभारंभ: 300 ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा आत्मनिर्भरता का नया रास्ता

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 रायपुर : ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। कलेक्टोरेट परिसर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) रायपुर, जिला प्रशासन धमतरी और बीआरपी शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के बीच ‘STREE’ (Skill Development through Technological Resources for Empowering Economic Growth of Women) परियोजना के सफल क्रियान्वयन हेतु त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।


इस महत्वपूर्ण अवसर पर NIT रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमणा राव, कलेक्टर अबिनाश मिश्रा तथा पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य ने संयुक्त रूप से MoU पर हस्ताक्षर कर परियोजना का विधिवत शुभारंभ किया।कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित अनेक शिक्षाविद् एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

यह परियोजना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के TDUPW-A2K+ कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 90 लाख रुपये की सहायता से संचालित होगी। 36 माह की अवधि में 300 ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।परियोजना के तहत महिलाओं को कोसा रेशम प्रसंस्करण, फाइबर निष्कर्षण, आधुनिक बुनाई, उत्पाद डिजाइन, उद्यमिता विकास एवं मार्केट लिंकेज जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेष रूप से आदिवासी एवं वंचित वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और मूल्य संवर्धन संभव हो सके।

ज्ञात हो कि धमतरी में हैंडलूम और कृषि आधारित आजीविका की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें इस परियोजना के माध्यम से तकनीकी सहयोग से सशक्त किया जाएगा। वहीं, NIT रायपुर के निदेशक डॉ. रमणा राव ने इसे समावेशी नवाचार और जमीनी विकास की दिशा में एक मजबूत कदम बताते हुए महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने की बात कही। यह पहल न केवल महिलाओं को कौशल विकास का अवसर देगी, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और लघु उद्योगों की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। STREE परियोजना धमतरी में महिला सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल स्थापित करते हुए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगी।

CBSE 10वीं का रिजल्ट जारी: UMANG ऐप समेत इन प्लेटफॉर्म पर देखें नतीजे

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 CBSE 10th Result 2026 Declared: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट बुधवार, 15 अप्रैल की शाम जारी कर दिया। रिजल्ट जारी होते ही देशभर के करीब 26 लाख छात्रों का इंतजार खत्म हो गया। छात्र फिलहाल UMANG ऐप सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपना परिणाम देख सकते हैं।


इस वर्ष CBSE ने 12वीं से पहले 10वीं का रिजल्ट जारी किया है। बोर्ड के अनुसार, यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि इस साल से 10वीं कक्षा के लिए दो चरणों में परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। दूसरा चरण (सेकेंड एग्जाम) मई से शुरू होगा।

इन प्लेटफॉर्म पर देखें रिजल्ट

छात्र अपना परिणाम निम्न माध्यमों से चेक कर सकते हैं-

CBSE की आधिकारिक वेबसाइट
CBSE Results Portal
DigiLocker
UMANG App

ऐसे करें ऑनलाइन रिजल्ट चेक

आधिकारिक वेबसाइट खोलें।
“CBSE Class 10 Result 2026” लिंक पर क्लिक करें।
रोल नंबर, स्कूल नंबर, जन्म तिथि और एडमिट कार्ड आईडी दर्ज करें।
Submit पर क्लिक करें।
स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड या प्रिंट कर सकते हैं।

15 मई से होगा सेकेंड एग्जाम

CBSE ने इस वर्ष से 10वीं बोर्ड का सेकेंड एग्जाम शुरू करने का फैसला किया है। यह परीक्षा 15 मई से 1 जून 2026 तक आयोजित की जाएगी। पहले चरण में शामिल छात्र अधिकतम तीन विषयों में सुधार के लिए इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।

पासिंग मार्क्स और कंपार्टमेंट नियम

CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में पास होने के लिए न्यूनतम 33% अंक जरूरी हैं। यह शर्त कुल अंक के साथ-साथ प्रत्येक विषय पर भी लागू होती है।

एक या दो विषय में 33% से कम अंक आने पर छात्र को कंपार्टमेंट परीक्षा का मौका मिलता है। दो से अधिक विषयों में न्यूनतम अंक न आने पर छात्र को फेल घोषित किया जाता है।

यह साल CBSE के लिए कई बदलावों के साथ अहम माना जा रहा है, खासकर दो चरणों में परीक्षा प्रणाली लागू होने के कारण छात्रों को सुधार का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

साय सरकार की पहल से सशक्त हुई महिलाएं : हमेश्वरी राठौर बनीं “लखपति दीदी”

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास अब सार्थक परिणाम दे रहे हैं। इसका प्रेरक उदाहरण गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत लालपुर की हमेश्वरी राठौर हैं, जो आज “लखपति दीदी” के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।


एक सामान्य ग्रामीण महिला से आत्मनिर्भर उद्यमी बनने तक का उनका सफर संघर्ष, साहस और सफलता की मिसाल है। हमेश्वरी राठौर “रिद्धी-सिद्धी स्वसहायता समूह” से जुड़ीं, जहां उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आर्थिक सहयोग और प्रशिक्षण मिला। समूह के माध्यम से उन्होंने 5 लाख 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया, जो उनके जीवन में परिवर्तन का आधार बना।


इस राशि का उपयोग उन्होंने कृषि और छोटे व्यवसाय को विकसित करने में किया। सब्जी उत्पादन को मुख्य आय का स्रोत बनाते हुए उन्होंने टमाटर, गोभी, अदरक, बरबट्टी और हल्दी जैसी फसलों की खेती शुरू की। साथ ही, उन्होंने सेंटरिंग प्लेट का कार्य भी शुरू किया, जिससे उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत बने।

शुरुआती दौर में मौसम की अनिश्चितता, बाजार की चुनौतियां और लागत जैसी कठिनाइयां सामने आईं, लेकिन विष्णुदेव साय सरकार की योजनाओं से मिले मार्गदर्शन और स्वसहायता समूह के सहयोग ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अपने परिश्रम और दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने हर बाधा को पार किया।

आज हमेश्वरी राठौर की वार्षिक आय लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच चुकी है, जिसने उन्हें “लखपति दीदी” बना दिया है। उनकी सफलता ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि वे क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

हमेश्वरी राठौर की यह उपलब्धि दर्शाती है कि विष्णुदेव साय सरकार की महिला-केंद्रित योजनाएं और स्वसहायता समूहों का सशक्त नेटवर्क ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

व्यक्तियों को रोजगार चाहने वाला बनने के बजाय रोजगार देने वाला बनाएं- केन्द्रीय मंत्री ओंराव

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 रायपुर : केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने देश भर में अनुसूचित जनजाति समुदायों को सशक्त बनाने में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (NSTFDC) द्वारा निभाई गई परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि (NSTFDC) का दृष्टिकोण केवल रोजगार सृजन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और व्यक्तियों को रोजगार चाहने वाला बनने के बजाय रोजगार देने वाला बनने में सक्षम बनाना है। नई दिल्ली में (NSTFDC) के 10 अप्रैल 2026 को आयोजित 25 वें स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए  ओराम ने इस निगम को जनजातीय उद्यमिता के लिए एक उत्प्रेरक बताया।


केंद्रीय जनजाति मंत्री जुएल ओराम द्वारा छत्तीसगढ़ से चयनित लाभार्थी जिला बेमेतरा से किशन ध्रुव ग्राम कुआं (किराना व्यवसाय) एवं धनराज ठाकुर ग्राम गातापार (फोटो स्टूडियो व्यवसाय) सहित छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के प्रतिनिधि (कार्यपालन अधिकारी) प्रवीण कुमार लाटा का स्वागत किया और (NSTFDC) सावधि ऋण योजना के तहत व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित करने में उनके प्रयासों की सराहना की। मंत्री जी द्वारा लाभार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।


इसके जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए ओराव ने निगम के उस मुख्य उद्देश्य को रेखांकित किया जिसके तहत वह बिना किसी गारंटी (collateral-free) के वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिससे जनजातीय लाभार्थियों तक इसकी पहुँच और अधिक व्यापक हो सके। मीडिया से बात करते हुए ओराम ने कहा कि निगम ने लाभार्थियों को 16 लाख से अधिक ऋण वितरित किए हैं और अब तक कुल संवितरण (वितरित राशि) 4,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (NSTFDC) ने नई दिल्ली के विश्व युवा केंद्र में अपना 25 वां स्थापना दिवस मनाया।

इस कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा, संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पांडे और (NSTFDC) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) टी. रौमुआन पाइते, (NSTFDC) के प्रबंधक और मध्य क्षेत्र के प्रमुख विकास रंजन साथ ही निगम के पूर्व CMD और देश भर की राज्य चौनलिंग एजेंसियों के प्रतिनिधियों उपस्थित रहे।

वेदांता प्लांट हादसा: 17 मजदूरों की मौत, 19 घायल… प्रशासन अलर्ट, घायलों के इलाज पर फोकस

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 रायपुर : सक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता प्लांट में बॉयलर फटने से हुए भीषण हादसे के बाद जिला प्रशासन त्वरित रूप से सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय घटना एवं घायलों के उपचार को लेकर कलेक्टर  अमृत विकास टोपनो तथा पुलिस अधीक्षक  प्रफुल्ल ठाकुर से लगातार संपर्क में हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री  श्यामबिहारी जायसवाल भी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और कलेक्टर के साथ समन्वय बनाए हुए हैं।


घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर, एसपी तथा प्रशासन की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया। घायलों को प्राथमिकता के साथ रायगढ़ के फोर्टीस हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज एवं अपेक्स अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार हेतु रायपुर के कालड़ा अस्पताल रेफर किया गया। प्रशासन द्वारा घटनास्थल को बैरिकेड कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।


कलेक्टर टोपनो ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। पोस्टमार्टम उपरांत पार्थिव देह को उनके गृहग्राम तक एम्बुलेंस के माध्यम से भेजने और तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

हादसे में घायल अथवा प्रभावित श्रमिकों को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक बिना उपस्थिति के वेतन देने पर भी सहमति बनाई गई है। कलेक्टर ने बताया कि मुआवजा राशि को लेकर देर रात तक चर्चा कर सहमति स्थापित की गई है। घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं तथा जांच टीम जल्द ही घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। रेस्क्यू कार्य में एसडीआरएफ की टीम भी सक्रिय है।

मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों हेतु 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है।

पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने जानकारी दी कि इस हादसे में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 17 की मृत्यु हो चुकी है तथा 19 घायल हैं, जिनका उपचार जारी है।
कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग, तथा घायलों को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रहेगा और परामर्श (काउंसलिंग) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

मृतकों के नाम

हादसे में मृतकों में छत्तीसगढ़ के 5, बिहार के 2, झारखंड के 3, पश्चिम बंगाल के 5 तथा उत्तर प्रदेश के 2 मजदूर शामिल हैं। मृतकों के नाम इस प्रकार हैं -

रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार),
अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़),
थंडा राम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़),
तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड),
आकिब खान (दरभंगा, बिहार),
सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल),
अब्दुल करीम (झारखंड),
उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़),
शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल),
पप्पू कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश),
अशोक परहिया (पलामू, झारखंड),
मनस गिरी (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल),
बृजेश कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश),
रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर–चांपा, छत्तीसगढ़),
कार्तिक महतो (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल),
नदीम अंसारी (सक्ती, छत्तीसगढ़),
शिबनाथ मुर्मू (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल)।

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