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डिफेंस स्किलिंग कॉन्क्लेव 2026 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के लिए कौशल और रक्षा उद्योग सुधारों पर जोर दिया

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केंद्रीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 10 जनवरी 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित डिफेंस स्किलिंग कॉन्क्लेव ऑन डिफेंस, एयरोस्पेस और स्ट्रैटेजिक सेक्टर स्किल डेवलपमेंट के उद्घाटन अवसर पर कहा, “भारत अपने रक्षा और औद्योगिक यात्रा के निर्णायक क्षण में है, जहाँ आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय अनिवार्यता बन चुकी है।” उन्होंने पिछले दशक में भारत के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूपांतरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर यह क्षेत्र आयात पर निर्भरता से हटकर एक सशक्त और जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र में बदल गया है, जिसमें डीफ़ेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs), निजी उद्योग, MSMEs और स्टार्टअप्स शामिल हैं।

रक्षा सचिव ने जोर देकर कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और लगातार नीति सुधारों ने देश में स्वदेशी निर्माण में तेजी लाने में मदद की है, जिससे UAVs, सेंसर जैसी प्लेटफॉर्म्स से लेकर आर्टिलरी गन, बख्तरबंद वाहन और मिसाइल जैसे जटिल सिस्टम का स्वदेशी डिज़ाइन और उत्पादन बढ़ा है। उन्होंने बताया कि अब तक 462 कंपनियों को 788 औद्योगिक लाइसेंस प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं, रक्षा निर्यात 2025 में 23,162 करोड़ रुपये पार कर चुका है, जो 2014 की तुलना में लगभग 35 गुना वृद्धि है।

राजेश कुमार सिंह ने स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स जैसे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, अस्ट्रा BVR मिसाइल, धनुष आर्टिलरी गन और INS विक्रांत को उद्योग, अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन के बीच बढ़ती सहक्रियाशीलता के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में बताया। उन्होंने दोहराया कि रक्षा में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ और तेजी से उन्नत तकनीकें भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए चुनौतियां और अभूतपूर्व अवसर दोनों प्रस्तुत करती हैं।

मानव संसाधन के महत्व पर जोर देते हुए रक्षा सचिव ने कहा कि सच्ची रणनीतिक स्वायत्तता केवल हार्डवेयर के स्वदेशीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कौशल, प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा पर संप्रभुता भी शामिल है। उन्होंने भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रयासों का उल्लेख किया, जिसमें नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग मौजूदा क्षमताओं और भविष्य की कौशल आवश्यकताओं का मानचित्रण कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री की Skilling and Employment through Technology Upgradation (PM-SETU) पहल का जिक्र करते हुए राजेश कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम अकादमी, उद्योग और रक्षा R&D के बीच अंतर को पाटने के लिए लॉन्च किया गया है। 5 वर्षों में कुल ₹60,000 करोड़ के निवेश के साथ, जिसमें 50% केंद्र सरकार का योगदान शामिल है, PM-SETU सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, डुअल अप्रेंटिसशिप, AI-सक्षम प्रशिक्षण उपकरण, और अग्निवीरों व पूर्व सैनिकों के लिए संरचित कौशल पथ स्थापित करने पर केंद्रित है। उन्होंने राज्य सरकारों और उद्योग भागीदारों से अनुरोध किया कि वे प्रयोग और ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण के माध्यम से परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाकर PM-SETU कार्यक्रम को सफल बनाएं, ताकि उद्योग-तैयार प्रतिभा का सृजन सुनिश्चित हो सके।

रक्षा सचिव ने पंजाब में रक्षा निर्माण के अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षा पारिस्थितिकी नेटवर्क, MSME लिंक बढ़ाना, रक्षा R&D संस्थानों के साथ सहयोग, और समर्पित कौशल एवं परीक्षण अवसंरचना राज्य को रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में उभारने के लिए आवश्यक हैं।

अग्निवीरों की भूमिका पर जोर देते हुए राजेश कुमार सिंह ने कहा कि अग्निपथ योजना ने एक ऐसा अनुशासित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवा पूल तैयार किया है, जिसे राष्ट्रीय स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुसार रक्षा निर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में सहजता से एकीकृत किया जा सकता है।

यह कॉन्क्लेव पंजाब सरकार, Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) और Confederation of Indian Industry (CII) के सहयोग से आयोजित किया गया। रक्षा सचिव ने कहा कि इस कॉन्क्लेव ने सरकार, उद्योग और अकादमी की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया कि भारत को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहयोगी प्रयासों से पंजाब और उत्तर भारत रक्षा-प्रेरित विकास के प्रमुख चालक बन सकते हैं।

कार्यक्रम में उद्योग के नेता, वरिष्ठ अधिकारी, अकादमिक प्रतिनिधि और सशस्त्र बल उपस्थित थे।

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