Media24Media.com: दिल्ली की हवा बनी ज़हर! AQI 369 के पार, जहरीले स्मॉग की चादर में लिपटी राजधानी, सांस लेना हुआ मुश्किल!

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दिल्ली की हवा बनी ज़हर! AQI 369 के पार, जहरीले स्मॉग की चादर में लिपटी राजधानी, सांस लेना हुआ मुश्किल!

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नई दिल्ली- देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। बुधवार सुबह दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। सुबह करीब 6 बजे राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 369 तक पहुंच गया। आसमान में धुंध और जहरीले स्मॉग की मोटी परत छाई रही, जिससे लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली में लगातार तीसरे दिन वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच गया, जो गंभीर यानी Severe श्रेणी में आता है।

किन इलाकों में सबसे ज्यादा प्रदूषण?

प्रदूषण की स्थिति दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में और भी चिंताजनक रही। कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया।

दिल्ली का इलाका

AQI

मंदिर मार्ग

508

जहांगीरपुरी

447

पंजाबी बाग

447

IIT दिल्ली                    

438

मुंडका

436

रोहिणी

433

विवेक विहार

428

RK पुरम

417

ITO

414

4 नवंबर की सुबह की रिपोर्टिंग के अनुसार; अलग-अलग समय पर रीडिंग बदल सकती हैं।

आखिर क्यों बढ़ रहा है दिल्ली में प्रदूषण?

विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।

  1. वाहनों से निकलने वाला धुआं: दिल्ली की सड़कों पर लाखों वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन प्रदूषण में योगदान देता है।

  2. पराली जलाना: पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों में फसल अवशेष जलाने से निकलने वाला धुआं भी क्षेत्रीय प्रदूषण में योगदान कर सकता है।

  3. निर्माण कार्यों की धूल: सड़कों, इमारतों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल हवा में प्रदूषक कण बढ़ाती है।

  4. मौसम का असर: कम हवा की गति और स्थिर मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक वातावरण में जमा रह सकते हैं।

  5. PM2.5 का बढ़ता स्तर: बेहद छोटे प्रदूषक कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं।

सरकार ने क्या कदम उठाए?

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP के दूसरे चरण के तहत प्रतिबंध लागू हैं।

  • सड़कों की धूल कम करने के लिए एंटी-स्मॉग गन और पानी के छिड़काव की व्यवस्था की जा रही है।

  • निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों पर जोर दिया जा रहा है।

  • गुरुग्राम में 5 से 20 नवंबर तक धूल पैदा करने वाली निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

  • गुरुग्राम के सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने का निर्देश भी जारी किया गया है।
स्वास्थ्य पर कितना खतरनाक है असर?

डॉक्टरों के अनुसार प्रदूषित हवा का असर केवल सांस के मरीजों तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक जहरीली हवा में रहने से स्वस्थ लोगों को भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।

  • सांस लेने में परेशानी और खांसी।

  • आंखों और गले में जलन।

  • अस्थमा के मरीजों की समस्या बढ़ना।

  • बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर अतिरिक्त जोखिम।

  • हृदय और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ना।

लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

  • सुबह और शाम प्रदूषण अधिक होने पर बाहर व्यायाम करने से बचें।

  • जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें।

  • बच्चों और बुजुर्गों को अनावश्यक बाहर जाने से बचाएं।

  • अस्थमा और सांस के मरीज अपनी निर्धारित दवाएं साथ रखें।

  • घर में धूल और धुएं का प्रवेश कम रखें।

आगे क्या स्थिति रह सकती है?

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 5 नवंबर को भी दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में रहने की आशंका जताई गई है। IITM के पूर्वानुमान में AQI लगभग 343 रहने का अनुमान दिया गया है। फिलहाल राजधानी के लोगों को प्रदूषण से तत्काल राहत मिलने के संकेत सीमित हैं।

निष्कर्ष: दिल्ली में प्रदूषण अब केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर कब राजधानी के लोगों को साफ हवा में सांस लेने का अधिकार मिल पाएगा?
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