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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर सख्ती: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने हरियाणा सरकार के साथ की समीक्षा बैठक, सर्दियों से पहले तेज़ कार्रवाई के निर्देश

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नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए चल रहे प्रयासों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में हरियाणा के पर्यावरण एवं वन मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम से पहले उपलब्ध समय का पूरा उपयोग मिशन मोड में प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने समयबद्ध कार्रवाई, बेहतर समन्वय और सख्त निगरानी पर विशेष जोर दिया।

सड़कों की धूल और सफाई पर विशेष ध्यान

भूपेंद्र यादव ने सड़कों के दोनों ओर हरियाली विकसित करने, गड्ढों की शीघ्र मरम्मत, फुटपाथ निर्माण और नियमित गहरी सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सितंबर तक सभी मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSM) की तैनाती पूरी कर उन्हें जियो-टैग किया जाए, ताकि सफाई कार्य की रियल-टाइम निगरानी हो सके।

इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

मंत्री ने एनसीआर के हरियाणा नगर निगम क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही सात नगर निगम क्षेत्रों में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की तेज़ स्थापना के लिए हरियाणा सरकार की सराहना की।

पुराने वाहनों पर सख्ती

बैठक में एंड-ऑफ-लाइफ (EoL) वाहनों को एनसीआर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए एनओसी प्रक्रिया तेज़ करने और पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

'No PUCC, No Fuel' अभियान होगा सख्त

मंत्री ने सभी पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने के निर्देश दिए, ताकि 'No PUCC, No Fuel' अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। साथ ही ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्रों की पहचान कर त्वरित समाधान के निर्देश भी दिए।

उद्योगों और कचरा प्रबंधन पर भी जोर

औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (APCDs) जल्द स्थापित करने के निर्देश दिए गए। निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरे के प्रबंधन, पुराने कचरे के निस्तारण और नगर निगम के ठोस कचरे के 100% संग्रहण पर भी जोर दिया गया।

पराली जलाने पर रोक के लिए विशेष योजना

भूपेंद्र यादव ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को प्रशिक्षण देने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन से उद्योगों की फसल अवशेष उपयोग क्षमता का सर्वे कराने और मांग-आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने को भी कहा।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि "वायु प्रदूषण की चुनौती का समाधान तभी संभव है, जब सरकार और समाज मिलकर 'Whole of Government' और 'Whole of Society' दृष्टिकोण अपनाएं।" वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

अंधाधुंध रासायनिक खेती और पराली का धुआं: क्या हम अपनी ही मौत का सामान उगा रहे हैं?

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महासमुंद- छत्तीसगढ़ को 'धान का कटोरा' कहा जाता है, लेकिन आज इस कटोरे में लालच और रसायनों का जहर घुलता जा रहा है। केशवा (महासमुंद) के किसान और पर्यावरण चिंतक मोहन चंद्राकर ने खेती की वर्तमान स्थिति और पर्यावरण को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल उद्योगों की नहीं, बल्कि किसानों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

मोहन चंद्राकर

मुनाफे की अंधी दौड़ में खो गई परंपरा 

​मोहन चंद्राकर का कहना है कि ज्यादा पैदावार के लालच में किसान खतरनाक रसायनों और खादों का भारी उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल मिट्टी बंजर हो रही है, बल्कि कैंसर जैसी बीमारियां घर-घर पहुंच रही हैं। गाँव से गाय और पारंपरिक गोबर खाद (घुरवा) गायब हो रहे हैं। आज किसान विदेशी रसायनों पर निर्भर है, जिससे देश की मुद्रा और किसान का स्वास्थ्य दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

खेतों में जलता 'पैरा' और मौन पर्यावरणविद 

​उन्होंने सवाल उठाया  है कि जब उद्योग प्रदूषण करते हैं, तो सब आवाज उठाते हैं। लेकिन जब किसान खेतों में पराली (पैरा) जलाते हैं, तो पर्यावरणविद चुप क्यों हो जाते हैं? उन्होंने कहा-

  • ​पैरा जलाना एक 'कुकृत्य' है जो आने वाली पीढ़ी का भविष्य जला रहा है।
  • ​किसान फसल की तरह पराली की जिम्मेदारी भी खुद लें।
  • ​पराली को जलाने के बजाय गौशालाओं को दान करें।

सरकार से सख्त कानून की मांग 

​मोहन चंद्राकर ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि जैसे उद्योगों के लिए नियम हैं, वैसे ही किसानों के लिए भी हों। उन्होंने सुझाव दिया कि:-

​ धान खरीदी पर रोक : जो किसान खेत में पैरा जलाते हैं, सरकार उनका धान न खरीदे।

​ मिट्टी की सुरक्षा : खेतों से मिट्टी निकालकर अवैध ईंट भट्ठे चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।

​ निगरानी: गाँवों में ईंट पकाने के लिए लकड़ी और भूसे के अवैध इस्तेमाल को रोका जाए।

​ समाधान: प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर वापसी 

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब हमें कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाजों की ओर लौटना होगा। प्राकृतिक और औषधीय खेती ही पर्यावरण, परंपरा और भारत के गौरव को बचा सकती है। उन्होंने रसायन मुक्त खेती की ओर लौटने का आग्रह किसान भाइयों से किया है।

"जिस दिन प्रकृति हमारे प्रतिकूल हो गई, उस दिन न किसान बचेगा, न अन्न और न ही मानव सभ्यता।" 

— मोहन चंद्राकर, किसान साथी (केशवा, महासमुंद)

यह लेख हर उस किसान के लिए एक आईना है जो मिट्टी को सिर्फ पैसा कमाने का जरिया समझ रहा है। मिट्टी बचेगी, तभी जीवन बचेगा।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली (एनसीटी), हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों तथा संबंधित नगर निकायों की कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा हेतु एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह इस श्रृंखला की चौथी समीक्षा बैठक थी, जो 03.12.2025 को हुई पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार निर्धारित मापदंडों पर आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी उपस्थित रहे।

दिल्ली-एनसीआर में लगातार खराब वायु गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए यादव ने घोषणा की कि जनवरी 2026 से कार्ययोजनाओं की समीक्षा मंत्री स्तर पर हर माह की जाएगी। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि भविष्य की प्रस्तुतियों में अपने-अपने एनसीआर शहरों की कार्ययोजनाओं का एकीकृत प्रस्तुतीकरण करें। साथ ही, कार्यान्वयन से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए उच्चस्तरीय अंतर-राज्य समन्वय बैठकों का आश्वासन दिया।

मंत्री ने राज्यों और नगर निकायों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण हेतु उठाए गए कदमों की समीक्षा करते हुए कहा कि वायु गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार दिखने तक इन प्रयासों की गति बनी रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, लेकिन आम जनता को अनावश्यक असुविधा न हो। चिन्हित समस्याओं पर सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए 15 दिनों में पुनः समीक्षा की जाएगी।

बैठक में 62 चिन्हित ट्रैफिक जाम स्थलों पर सुचारू यातायात प्रबंधन, कॉरपोरेट्स और औद्योगिक इकाइयों द्वारा ईवी/सीएनजी बसों के उपयोग को बढ़ावा, तथा कार्यालयों, मॉल और व्यावसायिक परिसरों के लिए चरणबद्ध समय व्यवस्था पर जोर दिया गया। गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा को इंटीग्रेटेड स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।

मंत्री ने मेट्रो की अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुधारने, 10 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने, गड्ढामुक्त सड़कों के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंध सुनिश्चित करने और मानसून से होने वाले नुकसान को रोकने हेतु उचित जलनिकासी के निर्देश दिए। निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C&D) कचरे, धूल नियंत्रण, जैव-ईंधन जलाने पर रोक और उच्च प्रदूषण अवधि में निर्माण प्रतिबंध के सख्त पालन पर भी बल दिया गया।

हरियाणा को पराली प्रबंधन मशीनों के उपयोग, धान के अवशेषों के निपटान, तथा पेलेटाइजेशन, सीबीजी और इथेनॉल संयंत्रों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। अवैध टायर जलाने वाली इकाइयों और प्रदूषणकारी उद्योगों को सील करने, सभी प्रदूषणकारी इकाइयों में ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) लगाने और 31 दिसंबर की समयसीमा सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए।

इसके अलावा, दिल्ली वन विभाग के साथ मिलकर विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर 11 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया। एनएचएआई को टोल प्लाजा पर जाम कम करने और एएनपीआर प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मंत्रालयों, राज्य सरकारों, सीएक्यूएम, डीएमआरसी, नगर निगमों, पुलिस, एनएचएआई, सीपीसीबी, एसपीसीबी और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

दिल्ली में CAQM का सड़क निरीक्षण अभियान: 136 सड़क खंडों में धूल, कचरा और खुले में जलाने की खामियां उजागर

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 12.12.2025 को सड़क निरीक्षण अभियान के तहत 19 टीमों को तैनात किया। इस अभियान के दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले दिल्ली के कुल 136 सड़क खंडों का निरीक्षण किया गया। यह कार्रवाई लागू GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के अंतर्गत आयोग की सतत निगरानी और प्रवर्तन प्रयासों का हिस्सा थी।

इस विशेष अभियान का उद्देश्य सड़कों पर दिखाई देने वाली धूल, नगर निगम ठोस कचरा (MSW) तथा निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट के जमाव का आकलन करना था। साथ ही, इन सड़क खंडों पर MSW/बायोमास के खुले में जलाने की घटनाओं की भी जांच की गई। तैनात टीमों में CAQM की फ्लाइंग स्क्वॉड्स और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के अधिकारी शामिल थे।

निरीक्षण के दौरान जियो-टैग्ड और समय-स्टैम्प की गई तस्वीरें एकत्र कर समेकित निरीक्षण रिपोर्ट के रूप में आयोग को प्रस्तुत की गईं। संकलित आंकड़ों के अनुसार, 15 सड़क खंडों पर उच्च स्तर की दिखाई देने वाली धूल पाई गई, 38 पर मध्यम स्तर की धूल, 61 पर कम धूल और 22 सड़क खंडों पर कोई दृश्य धूल नहीं पाई गई। MSW और C&D अपशिष्ट के जमाव की सूचना क्रमशः 55 और 53 सड़क खंडों पर मिली। वहीं, 6 सड़क खंडों पर MSW/बायोमास जलाने के प्रमाण पाए गए।

इन अवलोकनों से संबंधित सड़क खंडों के रखरखाव में स्पष्ट कमियां और बार-बार की जा रही लापरवाही सामने आई है। इससे यह आवश्यकता रेखांकित हुई कि DDA को अपनी परिचालन दक्षता बढ़ानी होगी और निरंतर एवं समयबद्ध धूल नियंत्रण उपायों के माध्यम से त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। साथ ही, MSW/बायोमास के खुले में जलाने की रोकथाम के लिए सभी सड़क खंडों पर बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक बताया गया।

आयोग ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं दिल्ली में कणीय पदार्थ (पार्टिकुलेट मैटर) के स्तर को प्रभावित करती हैं। इसलिए जमीनी स्तर पर मजबूत कार्रवाई की आवश्यकता है, जिसमें नियमित यांत्रिक सफाई, एकत्रित धूल का समय पर निपटान, सड़क किनारों और मध्य विभाजकों का रखरखाव, जल छिड़काव/धूल-दमन प्रणालियों की तैनाती तथा खुले में जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए लक्षित कार्रवाई शामिल है, विशेषकर DDA द्वारा अनुरक्षित सभी सड़क खंडों पर।

आयोग ने दोहराया कि ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत इस प्रकार के लक्षित निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेंगे, ताकि धूल नियंत्रण और MSW/बायोमास के खुले में जलाने की रोकथाम संबंधी इसके वैधानिक निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। इसका उद्देश्य दिल्ली भर की सड़कें साफ, धूल और खुले में जलाने से मुक्त तथा नियामक प्रावधानों के अनुरूप बनाए रखना है।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक

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आज नई दिल्ली में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समीक्षा के लिए आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सभी संबंधित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की प्राधिकरणों को अपने-अपने क्षेत्रों में वायु प्रदूषण प्रबंधन से संबंधित किए गए ठोस कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों की समीक्षा के लिए आयोजित चौथी बैठक थी। इस बैठक में दिल्ली सरकार के पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री सरदार मंजींदर सिंह सिरसा भी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान  भूपेंद्र यादव ने फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) के लिए जिला-वार योजना तैयार करने और पराली जलाने के मामलों की सालभर निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने जिला अधिकारियों से कहा कि वे किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित करें और इन मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

 भूपेंद्र यादव ने नगर ठोस अपशिष्ट (Municipal Solid Waste – MSW) के खुले में जलाने के खिलाफ शून्य-सहनशीलता (Zero-Tolerance) अपनाने पर बल दिया और एनसीआर के नगर निकायों से कहा कि वे लेगेसी वेस्ट मैनेजमेंट (Legacy Waste Management) में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए ठोस समयसीमा तय करें और इसके शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करें। उन्होंने विभिन्न नगर निगमों से अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर की “रेड कैटेगरी” उद्योगों में ऑनलाइन कंटीन्यूस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइसेस (APCD) की स्थापना मिशन मोड में की जानी चाहिए। सड़कों की धूल को कम करने के लिए उन्होंने शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों के पुनर्विकास योजनाओं की समीक्षा की और गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निर्माण कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

 भूपेंद्र यादव ने निर्माण और ध्वंस (Construction & Demolition – C&D) अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन पर बल देते हुए सरकारी एवं निजी क्षेत्र दोनों को सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सड़क किनारे हरियाली (Roadside Greening) के कार्यों को मिशन मोड में संचालित करने और नगर निगमों को वन विभागों के सहयोग से नर्सरी विकसित करने का सुझाव दिया, ताकि अधिकाधिक पौधरोपण कर क्षेत्र के हरित आवरण को बढ़ाया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस से यातायात जाम के हॉटस्पॉट्स के लिए ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार करने और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को शीघ्र लागू करने का आग्रह किया, जिससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।

भूपेंद्र  यादव ने सभी हितधारकों, जिनमें नागरिक भी शामिल हैं, के साथ समन्वित प्रयासों के माध्यम से क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस बैठक में सीएक्यूएम (CAQM), सीपीसीबी (CPCB), दिल्ली, हरियाणा, पंजाब की राज्य सरकारों, एनसीआर नगर निगमों के आयुक्तों और अन्य संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में, GRAP Stage-II लागू — नागरिकों और एजेंसियों को सख्त निर्देश

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आज, दिल्ली में औसत दैनिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 296, यानी ‘खराब’ श्रेणी दर्ज की गई, जैसा कि सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी दैनिक AQI बुलेटिन में बताया गया। शाम 6 बजे दिल्ली का घंटा औसत AQI 300 और 7 बजे 302 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। इसके बाद, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की उप-समिति ने मौजूदा वायु गुणवत्ता स्थिति और मौसम/मौसमी हालात की समीक्षा के लिए तुरंत बैठक बुलाई।

GRAP Stage-II लागू करने का निर्णय:

CAQM की उप-समिति ने IMD और IITM से उपलब्ध वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और मौसम संबंधी जानकारी के आधार पर निर्णय लिया कि NCR में Stage-II के 12-बिंदु कार्य योजना को तुरंत लागू किया जाए, ताकि वायु गुणवत्ता में और गिरावट को रोका जा सके।

Stage-II के तहत लागू किए जाने वाले मुख्य उपाय:

नागरिकों के लिए निर्देश:

  • सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और निजी वाहनों का उपयोग कम करें।

  • ट्रैफिक कम congested मार्ग चुनें, भले ही रास्ता लंबा हो।

  • अपने वाहनों के एयर फिल्टर नियमित अंतराल पर बदलें।

  • अक्टूबर से जनवरी तक धूल उत्पन्न करने वाले निर्माण कार्यों से बचें।

  • ठोस कचरा और बायोमास का खुले में जलाना न करें।

Stage-II के 12-बिंदु उपाय (एजेंसियों के लिए):

  1. चिन्हित सड़कों पर मैकेनिकल/वै큼 स्वीपिंग और जल छिड़काव दैनिक रूप से करें। मशीनों के शिफ्ट/घंटों को बढ़ाएँ।

  2. प्रमुख ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स पर धूल नियंत्रण और जल छिड़काव सुनिश्चित करें।

  3. C&D साइटों पर धूल नियंत्रण उपायों की कड़ी निगरानी।

  4. NCR के सभी हॉटस्पॉट्स में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लक्षित कार्रवाई।

  5. अविरत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर DG सेट्स के प्रयोग को कम करना।

  6. DG सेट्स के नियमन का पालन, जिसमें आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर विशेष दिशा-निर्देश लागू।

  7. ट्रैफिक संचालन समन्वय और जाम वाले पॉइंट्स पर पर्याप्त कर्मियों की तैनाती।

  8. समाचार, टीवी, रेडियो में जनजागरूकता अभियान।

  9. पार्किंग शुल्क बढ़ाकर निजी वाहन कम करें।

  10. सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में वृद्धि (CNG/इलेक्ट्रिक बसें, मेट्रो) और समयावधि बढ़ाएँ।

  11. Resident Welfare Associations अपने कर्मचारियों को इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराएँ ताकि बायोमास/एमएसडब्ल्यू जलाने से बचा जा सके।

  12. NCR राज्यों से डिज़ल/EV/ CNG बसों को ही दिल्ली प्रवेश की अनुमति, अन्य बसों पर रोक।

CAQM स्थिति की निगरानी लगातार कर रहा है और आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता पर नियमित समीक्षा करेगा।



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