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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर सख्ती: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने हरियाणा सरकार के साथ की समीक्षा बैठक, सर्दियों से पहले तेज़ कार्रवाई के निर्देश

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नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए चल रहे प्रयासों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में हरियाणा के पर्यावरण एवं वन मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम से पहले उपलब्ध समय का पूरा उपयोग मिशन मोड में प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने समयबद्ध कार्रवाई, बेहतर समन्वय और सख्त निगरानी पर विशेष जोर दिया।

सड़कों की धूल और सफाई पर विशेष ध्यान

भूपेंद्र यादव ने सड़कों के दोनों ओर हरियाली विकसित करने, गड्ढों की शीघ्र मरम्मत, फुटपाथ निर्माण और नियमित गहरी सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सितंबर तक सभी मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSM) की तैनाती पूरी कर उन्हें जियो-टैग किया जाए, ताकि सफाई कार्य की रियल-टाइम निगरानी हो सके।

इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

मंत्री ने एनसीआर के हरियाणा नगर निगम क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही सात नगर निगम क्षेत्रों में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की तेज़ स्थापना के लिए हरियाणा सरकार की सराहना की।

पुराने वाहनों पर सख्ती

बैठक में एंड-ऑफ-लाइफ (EoL) वाहनों को एनसीआर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए एनओसी प्रक्रिया तेज़ करने और पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

'No PUCC, No Fuel' अभियान होगा सख्त

मंत्री ने सभी पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने के निर्देश दिए, ताकि 'No PUCC, No Fuel' अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। साथ ही ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्रों की पहचान कर त्वरित समाधान के निर्देश भी दिए।

उद्योगों और कचरा प्रबंधन पर भी जोर

औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (APCDs) जल्द स्थापित करने के निर्देश दिए गए। निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरे के प्रबंधन, पुराने कचरे के निस्तारण और नगर निगम के ठोस कचरे के 100% संग्रहण पर भी जोर दिया गया।

पराली जलाने पर रोक के लिए विशेष योजना

भूपेंद्र यादव ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को प्रशिक्षण देने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन से उद्योगों की फसल अवशेष उपयोग क्षमता का सर्वे कराने और मांग-आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने को भी कहा।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि "वायु प्रदूषण की चुनौती का समाधान तभी संभव है, जब सरकार और समाज मिलकर 'Whole of Government' और 'Whole of Society' दृष्टिकोण अपनाएं।" वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

जनगणना 2027: दिल्ली में जागरूकता वैन रवाना, लोगों से सेल्फ-एन्यूमरेशन में भाग लेने की अपील

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भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ के तहत नई दिल्ली स्थित जनगणना भवन से जागरूकता वैन को रवाना किया गया। इन वैन के जरिए लोगों को जनगणना में भागीदारी, सेल्फ-एन्यूमरेशन सुविधा और जनगणना 2027 की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।

दिल्ली एनसीटी में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का कार्य जारी है। एमसीडी क्षेत्रों में निवासी 15 मई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से सेल्फ-एन्यूमरेशन कर सकते हैं। इसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक गणनाकर्ता घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।

सरकार के अनुसार अब तक 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 92 लाख परिवार सेल्फ-एन्यूमरेशन प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। जनगणना से जुड़ा सारा डेटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय एवं विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा।


दूरसंचार पेंशनरों के लिए बड़ी सुविधा: जनवरी 2026 में ‘जीवन प्रमाण’ शिविरों का आयोजन

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दूरसंचार विभाग (DoT) के अंतर्गत प्रधान नियंत्रक संचार लेखा (Pr. CCA) द्वारा पेंशनरों की सुविधा के लिए जनवरी 2026 माह में टेलीकॉम पेंशनर्स जीवन प्रमाण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। ये शिविर दिल्ली एवं एनसीआर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित होंगे।

ये शिविर Pr. CCA दिल्ली कार्यालय, दिल्ली संचार लेखा भवन, प्रसाद नगर, ईस्टर्न कोर्ट, जनपथ स्थित एक्सटेंशन काउंटर तथा MTNL/BSNL परिसरों में आयोजित किए जाएंगे, ताकि पेंशनरों को जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate) जमा करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

पेंशनरों से अनुरोध है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार निकटतम शिविर में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर मौके पर ही जीवन प्रमाण पत्र का सत्यापन करा सकते हैं।

पेंशनर सुविधा शिविरों का कार्यक्रम

  1. MTNL एक्सचेंज भवन, C-10 यमुना विहार, दिल्ली – 16 जनवरी 2026

  2. MTNL एक्सचेंज भवन, लक्ष्मी नगर, दिल्ली – 19 जनवरी 2026

  3. MTNL एक्सचेंज भवन, नरेला, दिल्ली – 20 जनवरी 2026

  4. MTNL एक्सचेंज भवन, द्वारका सेक्टर-6, दिल्ली – 22 जनवरी 2026

  5. MTNL एक्सचेंज भवन, नेहरू प्लेस, नई दिल्ली – 27 जनवरी 2026

समय: प्रातः 11:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक

शिविरों में उपलब्ध सुविधाएँ

  • डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने का प्रशिक्षण
    (वेबसाइट: www.jeevanpramaan.gov.in)

  • जीवन प्रमाण फेस ऑथेंटिकेशन ऐप के उपयोग का प्रशिक्षण

  • KYP फॉर्म जमा करने की सुविधा
    (एक पासपोर्ट साइज फोटो एवं आधार कार्ड की प्रति साथ लाएं)

  • पेंशन से संबंधित शिकायतों एवं प्रश्नों का समाधान

महत्वपूर्ण सूचना: जिन पेंशनरों ने पहले ही अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर दिया है, उन्हें इस उद्देश्य से शिविर में आने की आवश्यकता नहीं है।

यह पहल पेंशनरों के लिए एक सराहनीय कदम है, जिससे उन्हें डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाने और अपनी पेंशन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने में सहायता मिलेगी।

दिल्ली मेट्रो Phase-V(A) परियोजना के तहत तीन नई कॉरिडोर मंजूर: केंद्रीय राजधानी में बेहतर कनेक्टिविटी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो के Phase-V(A) परियोजना के तहत तीन नई कॉरिडोर को मंजूरी दी है। ये कॉरिडोर निम्नलिखित हैं:

  1. आर.के. आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ (9.913 किमी)

  2. एरोसिटी – IGD एयरपोर्ट टर्मिनल-1 (2.263 किमी)

  3. तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज (3.9 किमी)

इस परियोजना की कुल लंबाई 16.076 किमी होगी और इसका कुल अनुमानित लागत ₹12,014.91 करोड़ है, जो भारत सरकार, दिल्ली सरकार और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा।

मुख्य विशेषताएं और लाभ:

  • सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर से सभी कर्तव्य भवनों से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे लगभग 60,000 ऑफिस जाने वाले और 2 लाख दैनिक आगंतुकों को लाभ मिलेगा।

  • ये कॉरिडोर प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने में मदद करेंगे, जिससे नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा।

कॉरिडोर विवरण:

  • आर.के. आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ: यह बोटैनिकल गार्डन–आर.के. आश्रम मार्ग कॉरिडोर का विस्तार होगा और सेंट्रल विस्टा क्षेत्र को मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

  • एरोसिटी – IGD एयरपोर्ट टर्मिनल-1 और तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज: ये एरोसिटी–तुगलकाबाद कॉरिडोर के विस्तार हैं और एयरपोर्ट को दक्षिणी दिल्ली के क्षेत्रों जैसे तुगलकाबाद, साकेत, कालिंदी कुंज आदि से जोड़ेंगे।

  • इन तीन कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन होंगे, जिनमें से 10 भूमिगत और 3 उन्नत (elevated) स्टेशन होंगे।

स्टेशन विवरण:

  • आर.के. आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर: आर.के. आश्रम मार्ग, शिवाजी स्टेडियम, सेंट्रल सेक्रेटेरियट, कर्तव्य भवन, इंडिया गेट, वॉर मेमोरियल–हाई कोर्ट, बरौदा हाउस, भारत मंडपम, इंद्रप्रस्थ।

  • तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज कॉरिडोर: सरिता विहार डिपो, मदनपुर खादर, कालिंदी कुंज।

  • एरोसिटी – IGD एयरपोर्ट T-1: एरोसिटी स्टेशन IGD T-1 स्टेशन से जुड़ा होगा।

अन्य जानकारियाँ:

  • Phase-IV परियोजना की 111 किमी लंबाई और 83 स्टेशनों का निर्माण जारी है, और लगभग 80.43% सिविल निर्माण पूरा हो चुका है।

  • Phase-IV के प्राथमिक तीन कॉरिडोर दिसंबर 2026 तक चरणबद्ध तरीके से पूरे होने की संभावना है।

  • दिल्ली मेट्रो वर्तमान में 65 लाख यात्रियों प्रति दिन परिवहन कर रही है, जबकि अब तक का अधिकतम रिकॉर्ड 81.87 लाख यात्रियों का है।

  • DMRC वर्तमान में 12 मेट्रो लाइनों, लगभग 395 किमी लंबाई और 289 स्टेशनों के साथ दिल्ली और एनसीआर में संचालन कर रही है। दिल्ली मेट्रो भारत की सबसे बड़ी मेट्रो नेटवर्क और विश्व की बड़ी मेट्रो प्रणालियों में से एक बन चुकी है।

इन नई मेट्रो एक्सटेंशन से सेंट्रल दिल्ली और घरेलू एयरपोर्ट के क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, सड़क पर ट्रैफिक कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली (एनसीटी), हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों तथा संबंधित नगर निकायों की कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा हेतु एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह इस श्रृंखला की चौथी समीक्षा बैठक थी, जो 03.12.2025 को हुई पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार निर्धारित मापदंडों पर आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी उपस्थित रहे।

दिल्ली-एनसीआर में लगातार खराब वायु गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए यादव ने घोषणा की कि जनवरी 2026 से कार्ययोजनाओं की समीक्षा मंत्री स्तर पर हर माह की जाएगी। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि भविष्य की प्रस्तुतियों में अपने-अपने एनसीआर शहरों की कार्ययोजनाओं का एकीकृत प्रस्तुतीकरण करें। साथ ही, कार्यान्वयन से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए उच्चस्तरीय अंतर-राज्य समन्वय बैठकों का आश्वासन दिया।

मंत्री ने राज्यों और नगर निकायों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण हेतु उठाए गए कदमों की समीक्षा करते हुए कहा कि वायु गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार दिखने तक इन प्रयासों की गति बनी रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, लेकिन आम जनता को अनावश्यक असुविधा न हो। चिन्हित समस्याओं पर सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए 15 दिनों में पुनः समीक्षा की जाएगी।

बैठक में 62 चिन्हित ट्रैफिक जाम स्थलों पर सुचारू यातायात प्रबंधन, कॉरपोरेट्स और औद्योगिक इकाइयों द्वारा ईवी/सीएनजी बसों के उपयोग को बढ़ावा, तथा कार्यालयों, मॉल और व्यावसायिक परिसरों के लिए चरणबद्ध समय व्यवस्था पर जोर दिया गया। गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा को इंटीग्रेटेड स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।

मंत्री ने मेट्रो की अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुधारने, 10 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने, गड्ढामुक्त सड़कों के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंध सुनिश्चित करने और मानसून से होने वाले नुकसान को रोकने हेतु उचित जलनिकासी के निर्देश दिए। निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C&D) कचरे, धूल नियंत्रण, जैव-ईंधन जलाने पर रोक और उच्च प्रदूषण अवधि में निर्माण प्रतिबंध के सख्त पालन पर भी बल दिया गया।

हरियाणा को पराली प्रबंधन मशीनों के उपयोग, धान के अवशेषों के निपटान, तथा पेलेटाइजेशन, सीबीजी और इथेनॉल संयंत्रों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। अवैध टायर जलाने वाली इकाइयों और प्रदूषणकारी उद्योगों को सील करने, सभी प्रदूषणकारी इकाइयों में ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) लगाने और 31 दिसंबर की समयसीमा सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए।

इसके अलावा, दिल्ली वन विभाग के साथ मिलकर विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर 11 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया। एनएचएआई को टोल प्लाजा पर जाम कम करने और एएनपीआर प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मंत्रालयों, राज्य सरकारों, सीएक्यूएम, डीएमआरसी, नगर निगमों, पुलिस, एनएचएआई, सीपीसीबी, एसपीसीबी और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण पर CAQM की सख्ती, राज्यों को कड़े निर्देश

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की सुरक्षा एवं प्रवर्तन उप-समिति ने 12 दिसंबर 2025 को दिल्ली–एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों के कड़े प्रवर्तन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बैठक आयोजित की। उप-समिति की यह 23वीं बैठक थी, जिसमें एनसीआर के राज्य सरकारों/दिल्ली सरकार (GNCTD) द्वारा वायु प्रदूषण को कम करने के लिए किए गए क्षेत्र-विशिष्ट प्रवर्तन कार्यों की समीक्षा की गई, विशेष रूप से वर्तमान में लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की अवधि के दौरान।

GNCTD के लिए

अवलोकन:

दिल्ली सरकार को विभिन्न हॉटस्पॉट्स पर यातायात जाम, सड़क की धूल, नगर निगम ठोस अपशिष्ट (MSW) के निस्तारण और उसके जलने की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटना होगा।

आयोग द्वारा दिए गए निर्देश:

  • चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर यातायात जाम कम करने के लिए केंद्रित मासिक बैठकें आयोजित की जाएं।

  • पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर को कम करने के लिए सड़कों की वैक्यूमिंग की जाए।

  • एमसीडी और एनडीएमसी द्वारा नगर निगम ठोस अपशिष्ट का समुचित संग्रहण और निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

  • एमएसडब्ल्यू और बायोमास जलाने की घटनाओं पर रोक के लिए रात्रिकालीन गश्त को तेज किया जाए।

  • पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों के माध्यम से प्रवर्तन को सख्त किया जाए।

हरियाणा के एनसीआर जिलों के लिए

अवलोकन:

हरियाणा का प्रदर्शन यातायात जाम, सड़क की धूल और एमएसडब्ल्यू निस्तारण से निपटने के मामले में संतोषजनक नहीं पाया गया।

आयोग के निर्देश:

  • विभिन्न एजेंसियों और विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

  • वायु प्रदूषण में योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों में अचानक/गोपनीय निरीक्षण के लिए समर्पित टीमें गठित की जाएं।

  • गुरुग्राम में यातायात जाम कम करने के लिए एमसीजी को हॉटस्पॉट्स की पहचान की व्यवस्था मजबूत करनी होगी तथा वाहन प्रदूषण पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी।

  • एमएसडब्ल्यू और बायोमास जलाने की रोकथाम हेतु रात्रिकालीन गश्त तेज की जाए।

  • पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरों की स्थापना कर प्रवर्तन को और सख्त किया जाए।

उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर जिलों के लिए

अवलोकन एवं निर्देश:

उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों का प्रदर्शन वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में तुलनात्मक रूप से संतोषजनक पाया गया। हालांकि, विशेष रूप से वाहन क्षेत्र में केंद्रित कार्रवाई के लिए तय समयसीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा।

आयोग ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान दोनों के एनसीआर जिलों के लिए वाहन एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सेवा प्रदाताओं और ई-कॉमर्स इकाइयों हेतु वेब पोर्टल विकसित करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 निर्धारित की है। इसके साथ ही राजस्थान को इन संस्थाओं की निगरानी के लिए अपनी नीति भी 31 दिसंबर 2025 तक अधिसूचित करनी होगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और सीएक्यूएम अधिनियम की धारा 14 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

उप-समिति ने सभी एनसीआर राज्यों और दिल्ली सरकार को वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए निगरानी, विश्लेषण और प्रभावी शमन हेतु एआई आधारित और अन्य उन्नत तकनीकी समाधानों को तेजी से अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि विशेष रूप से शीतकाल के दौरान दिल्ली–एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के सामूहिक और समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। सभी कार्यान्वयन एजेंसियों ने आश्वासन दिया कि वे वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों की नियमित समीक्षा करेंगी और विभिन्न क्षेत्रों में सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई जारी रखेंगी।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक

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आज नई दिल्ली में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समीक्षा के लिए आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सभी संबंधित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की प्राधिकरणों को अपने-अपने क्षेत्रों में वायु प्रदूषण प्रबंधन से संबंधित किए गए ठोस कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों की समीक्षा के लिए आयोजित चौथी बैठक थी। इस बैठक में दिल्ली सरकार के पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री सरदार मंजींदर सिंह सिरसा भी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान  भूपेंद्र यादव ने फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) के लिए जिला-वार योजना तैयार करने और पराली जलाने के मामलों की सालभर निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने जिला अधिकारियों से कहा कि वे किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित करें और इन मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

 भूपेंद्र यादव ने नगर ठोस अपशिष्ट (Municipal Solid Waste – MSW) के खुले में जलाने के खिलाफ शून्य-सहनशीलता (Zero-Tolerance) अपनाने पर बल दिया और एनसीआर के नगर निकायों से कहा कि वे लेगेसी वेस्ट मैनेजमेंट (Legacy Waste Management) में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए ठोस समयसीमा तय करें और इसके शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करें। उन्होंने विभिन्न नगर निगमों से अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर की “रेड कैटेगरी” उद्योगों में ऑनलाइन कंटीन्यूस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइसेस (APCD) की स्थापना मिशन मोड में की जानी चाहिए। सड़कों की धूल को कम करने के लिए उन्होंने शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों के पुनर्विकास योजनाओं की समीक्षा की और गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निर्माण कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

 भूपेंद्र यादव ने निर्माण और ध्वंस (Construction & Demolition – C&D) अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन पर बल देते हुए सरकारी एवं निजी क्षेत्र दोनों को सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सड़क किनारे हरियाली (Roadside Greening) के कार्यों को मिशन मोड में संचालित करने और नगर निगमों को वन विभागों के सहयोग से नर्सरी विकसित करने का सुझाव दिया, ताकि अधिकाधिक पौधरोपण कर क्षेत्र के हरित आवरण को बढ़ाया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस से यातायात जाम के हॉटस्पॉट्स के लिए ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार करने और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को शीघ्र लागू करने का आग्रह किया, जिससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।

भूपेंद्र  यादव ने सभी हितधारकों, जिनमें नागरिक भी शामिल हैं, के साथ समन्वित प्रयासों के माध्यम से क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस बैठक में सीएक्यूएम (CAQM), सीपीसीबी (CPCB), दिल्ली, हरियाणा, पंजाब की राज्य सरकारों, एनसीआर नगर निगमों के आयुक्तों और अन्य संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दिल्ली में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर, राजधानी घुटन की चपेट में

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राजधानी दिल्ली में शुक्रवार सुबह वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में “बहुत खराब” से “खतरनाक” श्रेणी में पहुंच गया है। कुछ स्थानों पर यह स्तर 300 से भी ऊपर दर्ज किया गया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ITO, नरेला, आनंद विहार जैसे क्षेत्रों में AQI 330+ तक पहुंच गया है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मुख्य रूप से कृषि पराली जलने, ठहरी हुई हवाओं और ठंड की शुरुआत के कारण उत्पन्न हुई है। इन तीनों कारकों ने मिलकर राजधानी के वातावरण में प्रदूषक कणों को फंसा दिया है।

बिज़नेस टुडे के अनुसार, पराली जलने की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे दिल्ली-NCR में धुंध और स्मॉग की परत और गहरी होती जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण स्तर श्वसन रोगियों, बुज़ुर्गों और बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मास्क पहनें, घर से बाहर निकलने से बचें, और एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करें।

सरकार ने भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए आपात बैठक बुलाई है और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्ती बढ़ाने के संकेत दिए हैं।


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