Media24Media.com: बस्तर में 116 नेताओं की सुरक्षा में कटौती, नक्सलवाद में कमी के बाद सरकार का बड़ा फैसला; केदार कश्यप, दीपक बैज समेत कई दिग्गज नेताओं की सुरक्षा श्रेणी बदली

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बस्तर में 116 नेताओं की सुरक्षा में कटौती, नक्सलवाद में कमी के बाद सरकार का बड़ा फैसला; केदार कश्यप, दीपक बैज समेत कई दिग्गज नेताओं की सुरक्षा श्रेणी बदली

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में नक्सलवाद के प्रभाव में आई कमी और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद राज्य सरकार ने 116 राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा श्रेणी में कटौती करने का निर्णय लिया है। इस फैसले में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं को शामिल किया गया है।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया है, बल्कि पिछले छह महीनों से बस्तर क्षेत्र की जमीनी परिस्थितियों, सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत खतरे का आकलन करने के बाद लिया गया है। सरकार का कहना है कि अब सुरक्षा बलों का बेहतर उपयोग कानून-व्यवस्था और आम जनता की सुरक्षा के लिए किया जा सकेगा।

किन नेताओं की सुरक्षा में हुई कटौती?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा श्रेणी में बदलाव से प्रभावित प्रमुख नामों में शामिल हैं:

  • केदार कश्यप: कैबिनेट मंत्री, Z+ से Z श्रेणी।

  • दीपक बैज: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, Z+ से Z श्रेणी।

  • कवासी लखमा: पूर्व मंत्री, Z+ से Z श्रेणी।

  • महेश गागड़ा: पूर्व मंत्री, Z+ से Z श्रेणी।

  • महेंद्र कर्मा के परिवार के कुछ सदस्य: सुरक्षा श्रेणी में बदलाव की खबर।

रिपोर्टों में कुल नौ प्रमुख व्यक्तियों की Z+ से Z श्रेणी में सुरक्षा बदलने की जानकारी दी गई है। हालांकि सभी 116 लोगों की आधिकारिक नामवार सूची सार्वजनिक नहीं हुई है।

अब किसे मिलेगी कौन-सी सुरक्षा?

सरकार ने सुरक्षा को चरणबद्ध तरीके से एक स्तर कम करने का फैसला किया है।

पहले की सुरक्षा

         नई सुरक्षा

Z+ श्रेणी

         Z श्रेणी

Z श्रेणी

          Y+ श्रेणी

Y+ श्रेणी

            Y श्रेणी

इसका मतलब यह है कि संबंधित नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह समाप्त नहीं की जा रही है, बल्कि उनकी सुरक्षा में तैनात जवानों और सुरक्षा व्यवस्था का स्तर कम किया जा रहा है।

छह महीने बाद फिर होगी समीक्षा

गृह मंत्री विजय शर्मा के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन लक्ष्य की समय-सीमा पूरी होने के तुरंत बाद सभी नेताओं की सुरक्षा हटाना उचित नहीं माना गया।

इसी वजह से सरकार ने छह महीने तक सुरक्षा व्यवस्था और जमीनी हालात की निगरानी की। अब व्यक्तिगत खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव किया जा रहा है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगले छह महीने बाद यानी लगभग अप्रैल 2027 में दोबारा समीक्षा की जाएगी। उस समय की परिस्थितियों के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा।

सरकार ने क्यों लिया सुरक्षा घटाने का फैसला?

बस्तर लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है। यहां जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और राजनीतिक दलों के नेताओं को नक्सली हमलों की आशंका के कारण विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती रही है।

लेकिन हाल के वर्षों में नक्सल विरोधी अभियानों के बाद सुरक्षा स्थिति में बदलाव आया है। सरकार का मानना है कि व्यक्तिगत खतरे का स्तर घटने पर सुरक्षा संसाधनों का पुनर्वितरण किया जाना चाहिए।

इस फैसले के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:

  1. बस्तर में नक्सली हिंसा की घटनाओं में कमी।

  2. नक्सल विरोधी अभियानों में मिली सफलता।

  3. नेताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा का नए सिरे से आकलन।

  4. पुलिस बल को सामान्य कानून-व्यवस्था में लगाने की आवश्यकता।

  5. सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च और संसाधनों का बेहतर उपयोग।

5. सुरक्षा में कितने जवान और वाहन तैनात हैं?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में लगभग 400 सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों की सुरक्षा में 1,550 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 500 वाहन लगाए गए हैं।

केवल बस्तर संभाग में 250 से अधिक लोगों की सुरक्षा के लिए 1,000 से ज्यादा जवान तैनात बताए गए हैं।

सुरक्षा में कटौती से पुलिस बल के कुछ जवानों को सामान्य पुलिसिंग, कानून-व्यवस्था और अन्य आवश्यक जिम्मेदारियों में लगाया जा सकेगा।

कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर क्या कहा?

इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सुरक्षा घटाने के फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बस्तर में नक्सली खतरा कम जरूर हुआ है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त मानना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि विशेषकर अंदरूनी और संवेदनशील इलाकों में आने-जाने वाले जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। सुरक्षा कम करने से पहले प्रत्येक व्यक्ति के खतरे का नए सिरे से आकलन होना जरूरी है।

क्या अब बस्तर में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है?

यह सवाल भी इस फैसले के बाद चर्चा में है।

केंद्र और राज्य सरकारों ने 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र वामपंथी उग्रवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा था। सरकार ने अभियान में मिली सफलता का उल्लेख किया है।

हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और किसी क्षेत्र में खतरे का पूरी तरह समाप्त होना दो अलग-अलग बातें हैं। स्थानीय सुरक्षा स्थिति और व्यक्तिगत खतरे का आकलन आगे भी जरूरी रहेगा।

आगे क्या होगा?

  • गृह विभाग की ओर से संशोधित सुरक्षा व्यवस्था के औपचारिक आदेश जारी किए जाने हैं।

  • 116 नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में चरणबद्ध बदलाव लागू होगा।

  • व्यक्तिगत खतरे के अनुसार सुरक्षा की समीक्षा जारी रहेगी।

  • छह महीने बाद दोबारा समीक्षा की जाएगी।

  • जरूरत पड़ने पर सुरक्षा श्रेणी में फिर बदलाव किया जा सकेगा।



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