Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, धान की फसल को भारी नुकसान; CM विष्णुदेव साय ने दिए तत्काल सर्वे के निर्देश

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छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, धान की फसल को भारी नुकसान; CM विष्णुदेव साय ने दिए तत्काल सर्वे के निर्देश

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान की तैयार फसल को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। कई स्थानों पर तेज हवाओं के कारण धान की फसल जमीन पर गिर गई है, वहीं खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

धान की कटाई का समय नजदीक होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिए तत्काल सर्वे के निर्देश

फसल नुकसान की खबरों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल खेतों का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि प्रभावित किसानों की फसल क्षति का सही आकलन किया जाए और पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने राजस्व एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को सर्वे कार्य में तेजी लाने और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

फसल क्षति का आकलन राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 एवं लागू आपदा राहत प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।

किन इलाकों में हुआ फसल को नुकसान?

रिपोर्टों के अनुसार बारिश और तेज हवाओं का असर बस्तर, रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग के कुछ क्षेत्रों में देखा गया है।

विशेष रूप से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में किसानों ने धान की फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायत की है।

  • तेज हवाओं से खड़ी धान की फसल खेतों में गिर गई।

  • खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ा।

  • कटाई के लिए तैयार धान की बालियां प्रभावित हुईं।

  • खेत में काटकर सुखाने के लिए रखी गई फसल को भी नुकसान की आशंका है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के कुछ किसानों ने अपनी फसल में 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान जताया है। यह किसानों का प्रारंभिक अनुमान है, सरकारी सर्वे का अंतिम आंकड़ा नहीं।

फसल बीमा कराने वाले किसान तुरंत ध्यान दें – 72 घंटे में दें सूचना

महत्वपूर्ण किसान अलर्ट

कृषि विभाग की एडवाइजरी के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसान फसल नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना दर्ज करा सकते हैं।

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कृषि रक्षक हेल्पलाइन – टोल फ्री नंबर

फसल नुकसान की सूचना दर्ज कराने के लिए इस नंबर पर संपर्क करें।

बीमा प्रक्रिया की निर्धारित समय-सीमा

कार्रवाई

                                समय

सर्वेयर की नियुक्ति

                                    48 घंटे

फसल नुकसान का सर्वे

                                    10 दिन

पात्र बीमा क्लेम का भुगतान

सर्वे के बाद                     15 दिन

धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, अरहर, मूंग, उड़द सहित अधिसूचित फसलों के बीमित किसान योजना की शर्तों के अनुसार दावा कर सकते हैं। कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल भी कटाई के 14 दिनों के भीतर हुई कुछ अधिसूचित आपदाओं से नुकसान पर बीमा सुरक्षा के दायरे में आ सकती है।

किसान क्या करें?

  1. खेत में हुए नुकसान की फोटो और वीडियो सुरक्षित रखें।

  2. नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर दर्ज कराएं।

  3. बीमा पॉलिसी और आवेदन की जानकारी रखें।

  4. सूचना दर्ज होने का रेफरेंस नंबर संभालकर रखें।

  5. अपने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें।

31 अक्टूबर तक एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन भी जरूरी

आज अंतिम तिथि

धान और मक्का सहित खरीफ की अन्य फसल लेने वाले किसानों के लिए एक और महत्वपूर्ण सूचना है।

राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना एवं PM-AASHA योजना के तहत खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन तथा फसल एवं रकबे का आवश्यक सत्यापन या संशोधन कराने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

पंजीयन और पात्रता के अनुसार:

  • पिछले खरीफ में धान लेने वाले किसान यदि इस साल धान के स्थान पर दूसरी खरीफ फसल लेते हैं, तो पात्रता के अनुसार ₹15,000 प्रति एकड़ सहायता का प्रावधान है।

  • अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली, तिल, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी अधिसूचित फसलों के लिए ₹10,000 प्रति एकड़ सहायता का प्रावधान है।

  • लाभ के लिए एग्रीस्टैक, एकीकृत किसान पोर्टल पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे की शर्तें पूरी करना आवश्यक है।

किसान अपने नजदीकी सेवा सहकारी समिति या कृषि विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। अंतिम तिथि के बाद नया पंजीयन या संशोधन स्वीकार नहीं किए जाने का प्रावधान बताया गया है।

किसानों के लिए सरकार से प्रमुख मांगें

  • प्रभावित गांवों में शीघ्र फसल सर्वे।

  • वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा।

  • पात्र किसानों को फसल बीमा का भुगतान।

  • खराब मौसम से प्रभावित किसानों को राहत।

  • धान खरीदी के दौरान प्रभावित फसल के लिए उचित व्यवस्था।



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