Media24Media.com: महासमुंद: बेलसोंडा ग्राम पंचायत में लाखों के गबन का आरोप; सरपंच और सचिव के खिलाफ एसडीएम से शिकायत

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महासमुंद: बेलसोंडा ग्राम पंचायत में लाखों के गबन का आरोप; सरपंच और सचिव के खिलाफ एसडीएम से शिकायत

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महासमुंद:- जनपद पंचायत महासमुंद अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलसोंडा में शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने विहित अधिकारी (पंचायत) सह अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), महासमुंद के समक्ष एक विस्तृत शिकायत प्रस्तुत कर सरपंच प्रीति त्रिभुवन धीवर और सचिव नेहा उपाध्याय के खिलाफ धारा 40 के तहत पद से हटाने व निलंबन की मांग की है।

16 माह के कार्यकाल में लाखों की अनियमितता का आरोप

शिकायतकर्ताओं—पोखन लाल चन्द्राकर, लक्ष्मीकांत चन्द्राकर, झम्मन धीवर, लीलाधर धीवर, तेजेश्वर चन्द्राकर और भामिनी चन्द्राकर—का आरोप है कि पंचायत के 2025–30 के कार्यकाल के शुरुआती 16 महीनों में छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम और वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर पंचायत निधि का आहरण किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से कई गड़बड़ियां उजागर हुई हैं।

शिकायत में उठाए गए मुख्य बिंदु:

 * बिना बिल-वाउचर भुगतान: शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लगभग 11.59 लाख रुपये का भुगतान बिना बिल अथवा वाउचर के कर दिया गया।

 * दोहरा भुगतान एवं फर्जी बिलिंग: एक ही बिल पर 2.04 लाख रुपये का दोहरा भुगतान करने तथा अन्य फर्मों के बिल लगाकर राशि आहरण करने का दावा किया गया है।

 * परिजनों व पंचों के नाम पर भुगतान: शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सरपंच पति, पुत्र से जुड़ी फर्म, पंचायत कर्मी और वार्ड पंचों के नाम पर विभिन्न कार्यों व कमीशन के मद में नियमों के विरुद्ध लाखों रुपये का आहरण किया गया।

 * पदभार ग्रहण से पूर्व का भुगतान: दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि सरपंच द्वारा 7 मार्च 2025 को शपथ लेने से पूर्व की तिथियों का फर्जी हाजिरी पत्रक बनाकर जनवरी 2026 में मजदूरी राशि निकाली गई।

 * अवैध मुरम उत्खनन: ग्रामीणों का आरोप है कि बिना खनिज विभाग की अनुमति और बिना माप पुस्तिका (MB) प्रविष्टि के 94 हाईवा और 332 ट्रैक्टर (लगभग 86,000 घन फीट) मुरम का अवैध उत्खनन कर 3.54 लाख रुपये का वित्तीय गबन किया गया।

 * स्वच्छता और पेयजल मद में विसंगतियां: गांव में सफाई व्यवस्था बदहाल होने के बावजूद 15 माह में स्वच्छता के नाम पर लगभग 14.66 लाख रुपये निकालने का आरोप है।

कार्यालय सील करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग

शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए पंचायत भवन को सील कर सभी रिकॉर्ड तुरंत जब्त किए जाएं। साथ ही शासकीय धन के दुरुपयोग के मामले में संबंधितों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर लगभग 17.60 लाख रुपये की वसूली की जाए।

इस शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) और जिला कलेक्टर सहित अन्य उच्चाधिकारियों को भी प्रेषित की गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समयसीमा में निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को विवश होंगे।













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