Media24Media.com: नर्सिंग होम सील करने के मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नगर निगम आयुक्त की कार्रवाई रद्द

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नर्सिंग होम सील करने के मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नगर निगम आयुक्त की कार्रवाई रद्द

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मामला Dr. Shyama Agrawal v. State of Chhattisgarh, WPC No. 5701/2022 है। 

दुर्ग- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नर्सिंग होम को सील करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि नगर निगम आयुक्त के पास नर्सिंग होम को सील करने की वैधानिक शक्ति नहीं है। कोर्ट ने दुर्ग नगर निगम द्वारा जारी नोटिस और उसके आधार पर की गई सीलिंग की कार्रवाई को रद्द कर दिया है।

यह मामला दुर्ग स्थित अग्रवाल नर्सिंग होम से संबंधित है। नर्सिंग होम की संचालक डॉ. श्यामा अग्रवाल ने नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी नोटिस और नर्सिंग होम को सील किए जाने की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने की। 

15 दिसंबर 2022 को जारी हुआ था नोटिस

मामले के अनुसार, 15 दिसंबर 2022 को दुर्ग नगर निगम के आयुक्त की ओर से नर्सिंग होम को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद नर्सिंग होम को सील कर दिया गया। नगर निगम की कार्रवाई के पीछे कथित अनियमितताओं, नर्सिंग होम अधिनियम के प्रावधानों के पालन में कमी तथा बायो-मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन और निस्तारण से जुड़े नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया गया था। 

नर्सिंग होम संचालक की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि नगर निगम आयुक्त को नर्सिंग होम का लाइसेंस जारी करने, उसका नियमन करने, लाइसेंस निलंबित या रद्द करने अथवा नर्सिंग होम को सील करने का अधिकार ही नहीं है। इसलिए नगर निगम की कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया। 

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य उपचारगृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2010 और उससे जुड़े नियमों का परीक्षण किया। कोर्ट ने कहा कि नर्सिंग होम के लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

अदालत के अनुसार, संबंधित कानून की धारा 9 के तहत कार्रवाई करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तावित कार्रवाई के आधार और कारण बताते हुए 30 दिन का नोटिस देना होता है। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर भी दिया जाना जरूरी है। इसके बाद ही सक्षम प्राधिकारी कारणों सहित आदेश पारित कर सकता है। 

नगर निगम आयुक्त के पास नहीं थी वैधानिक शक्ति

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित कानून और नियमों में नगर निगम या उसके आयुक्त को नर्सिंग होम का लाइसेंस जारी करने, उसका नियमन करने अथवा लाइसेंस रद्द करने की शक्ति नहीं दी गई है। इसी तरह नर्सिंग होम को सील करने की भी नगर निगम आयुक्त को वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है।

अदालत ने यह भी नोट किया कि नर्सिंग होम कानून के तहत जिला कलेक्टर को सक्षम पर्यवेक्षण प्राधिकारी माना गया है। सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से भी यह स्वीकार किया गया था कि संबंधित कानून के तहत जिला कलेक्टर सक्षम प्राधिकारी हैं।

आरोप सही पाए जाने पर भी नियमानुसार कार्रवाई जरूरी

हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि नर्सिंग होम को बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन और अन्य वैधानिक लाइसेंस संबंधी नियमों का पालन करना होगा। यदि किसी तरह का उल्लंघन पाया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर सकता है।

यानी अदालत ने नर्सिंग होम को नियमों से छूट नहीं दी है, बल्कि यह कहा है कि कार्रवाई वही अधिकारी कर सकता है जिसे कानून ने उसका अधिकार दिया है और उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। 

हाईकोर्ट ने नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की रद्द

सभी पक्षों की दलीलें और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2022 के नोटिस को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही उस नोटिस के आधार पर नर्सिंग होम को सील करने की कार्रवाई भी रद्द कर दी गई।

मामले में अदालत ने यह स्वतंत्रता भी बरकरार रखी कि यदि नर्सिंग होम की ओर से किसी वैधानिक प्रावधान या बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार उचित कार्रवाई कर सकता है। 

मामला: Dr. Shyama Agrawal vs. State of Chhattisgarh & Others
याचिका: WPC No. 5701 of 2022
निर्णय: 22 सितंबर 2026
पीठ: जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट। 


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