Media24Media.com: शिक्षक की पहल से बदल रही है स्कूल की तस्वीर, जनभागीदारी से बन रहा भव्य स्वागत द्वार

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शिक्षक की पहल से बदल रही है स्कूल की तस्वीर, जनभागीदारी से बन रहा भव्य स्वागत द्वार

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आरंग- 'जहाँ चाह, वहाँ राह' इसे चरितार्थ कर दिखाया है एक नवाचारी शिक्षक ने। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा के शिक्षक महेंद्र कुमार पटेल की पहल पर जनभागीदारी से स्कूल का भव्य प्रवेश द्वार तैयार हो रहा है।महेंद्र पटेल बताते हैं- प्रतिदिन विद्यालय आते-जाते समय भिलाई के सीआरपीएफ कैंप का भव्य प्रवेश द्वार उन्हें आकर्षित करता था। उनके मन में विचार आया कि विद्यालय का द्वार भी ऐसा ही भव्य होना चाहिए, जिससे बच्चे सकारात्मक ऊर्जा के साथ परिसर में प्रवेश करें।उनका कहना है कि विद्यालय विद्या का मंदिर है। जैसे मंदिर में प्रवेश करते ही आस्था जागती है, वैसे ही स्कूल में प्रवेश करते ही विद्या अर्जन की प्रेरणा और गुरुजनों के प्रति विश्वास सुदृढ़ होना चाहिए।

शिक्षक पटेल ने जब भव्य द्वार का प्रस्ताव शाला प्रबंधन समिति की बैठक में रखा और स्वयं अंशदान की पहल की, तो उनकी निष्ठा से प्रभावित होकर पूरा गांव एकजुट हो गया। सरपंच, पंच, पालकों और महिला संगठनों ने उदारतापूर्वक सहयोग दिया। देखते ही देखते जनसहयोग से हजारों रुपये एकत्र हो गए। करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत से बिना किसी शासकीय सहयोग के यह द्वार आकार लेने लगा।

पटेल कहते हैं कि छत्तीसगढ़ दानवीरों की धरती है। यहाँ पूर्वजों ने स्वधन से तालाब, कुएं, बाग-बगीचे बनाए हैं। हर कार्य के लिए सरकार पर निर्भर रहना उचित नहीं। सभी नागरिक धार्मिक स्थलों के साथ साथ शिक्षा के मंदिर को संवारना भी अपना धर्म समझे। हर विद्यालय में प्रेरणादायक कोटेशन के साथ ऐसा स्वागत द्वार होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि महेंद्र पटेल अब तक सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों के लिए जनभागीदारी से लाखों रुपये जुटा चुके हैं। इन नवाचारों के लिए उन्हें इस वर्ष राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने पुरस्कार में मिले राशि को भी स्वागत द्वार में लगा दिया।

इस कार्य में संस्था प्रधान कीर्ति कुमार परमाल, शिक्षक सूर्यकांत चंद्राकर, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर साहू, सुशील आवड़े, जितेन्द्र यदु, शिक्षिका संगीता पाटले, पायल शुक्ला, पार्वती साहू, प्रभा साहू का सहयोग रहा।

वहीं मिशन में सरपंच देवशरण धीवर, उपसरपंच रवि बंजारे, एसएमसी अध्यक्ष चेतन पैगंबर, शिक्षाविद सकुन चंद्राकर, प्रेमलाल साहू, देवनाथ बंजारी, कन्हैया धीवर, दीपक फरिकार, संतोष कोसरिया, अमित साहू, मनीराम तारक, रेखराज धीवर, लक्ष्मण साहू, राजू साहू, राजा सेन, टीकम धीवर, हेमाराम परमार, दिलीप धीवर, पूर्णिमा धीवर, इंद्राणी महिला समूह, लक्ष्मी साहू, टुकेश धीवर सहित ग्रामीणों का तथा निर्माण में प्रेमलाल साहू, महेन्द्र पटेल, संतोष कोसरिया, राकेश साहू, दुलार साहू का अहम योगदान रहा है।

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