Media24Media.com: 75 साल की महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 3 करोड़ की ठगी, पुलिस अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने बनाया शिकार

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75 साल की महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 3 करोड़ की ठगी, पुलिस अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने बनाया शिकार

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Cyber Fraud: छत्रपति संभाजीनगर में साइबर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर 75 वर्षीय महिला को गिरफ्तारी का डर दिखाया। 14 दिनों तक कथित डिजिटल अरेस्ट में रखकर पांच बैंक खातों से 3 करोड़ 80 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए। पुलिस ने 32 लाख रुपये फ्रीज कराए हैं।


छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर 75 वर्षीय महिला को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। ठगों ने महिला के नाम से जुड़े एक बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किए जाने का दावा किया और गिरफ्तारी की धमकी देकर उनसे करोड़ों रुपये ट्रांसफर करा लिए।

आरोप है कि ठगों ने करीब 14 दिनों तक महिला को लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा। इस दौरान पांच अलग-अलग बैंक खातों से कुल 3 करोड़ 80 हजार रुपये अपने बताए खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 32 लाख रुपये फ्रीज कराए हैं।

नासिक क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर किया फोन

पुलिस के मुताबिक, व्यंकटेश नगर निवासी 75 वर्षीय शुभाधा अशोक कुलकर्णी को 18 सितंबर को दोपहर करीब 12 से 1 बजे के बीच फोन आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम राजन भिसे बताते हुए खुद को नासिक अपराध शाखा का अधिकारी बताया।

ठग ने महिला से कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर मुंबई की केनरा बैंक में एक बैंक खाता खोला गया है। इस खाते से कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए पैसे भेजे जा रहे हैं।

इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर दावा किया कि संबंधित खाते में करीब दो करोड़ रुपये जमा हुए हैं और उसमें से दो लाख रुपये कमीशन के तौर पर महिला के खाते में भेजे गए हैं।

वीडियो कॉल पर दिखाई पुलिस की वर्दी और तिरंगा

ठगों ने महिला को विश्वास में लेने के लिए वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल भी की। कॉल के दौरान एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में नजर आया। उसके पीछे तिरंगा और पुलिस का झंडा दिखाई दे रहा था।

इस दृश्य के जरिए महिला को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि सामने मौजूद लोग वास्तव में पुलिस अधिकारी हैं। इसके बाद महिला से कहा गया कि उनके सभी बैंक खातों और लेन-देन की जांच की जा रही है। सहयोग नहीं करने पर उन्हें और उनके बेटे को गिरफ्तार करने की धमकी दी गई।

14 दिन तक रखा कथित डिजिटल अरेस्ट में

शिकायत के मुताबिक, 18 सितंबर से 1 अक्टूबर तक महिला को लगातार फोन किए जाते रहे। ठग सुबह, दोपहर और शाम उनसे संपर्क करते थे और जांच के नाम पर उन्हें निर्देश देते थे।

महिला को किसी अन्य व्यक्ति से घटना की जानकारी साझा नहीं करने की हिदायत दी गई। परिवार को नुकसान पहुंचाने और बेटे की गिरफ्तारी की धमकी देकर उन्हें डराया गया।

आरबीआई जांच के नाम पर कराया करोड़ों का ट्रांसफर

पुलिस के अनुसार, 21 सितंबर को ठगों ने महिला से उनके बैंक खातों, लेन-देन और एफडी समेत वित्तीय जानकारी हासिल की। इसके बाद आरबीआई की कथित जांच का हवाला देते हुए रकम अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए भेजने को कहा गया।

महिला ने ठगों के निर्देश पर पांच अलग-अलग लेन-देन में कुल 3 करोड़ 80 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

रिपोर्ट के मुताबिक रकम इस तरह ट्रांसफर कराई गई—

  • 23 सितंबर: देवगिरी नागरी सहकारी बैंक से 62 लाख रुपये
  • 28 सितंबर: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 89 लाख रुपये
  • 29 सितंबर: औरंगाबाद जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक से 54 लाख रुपये
  • 1 अक्टूबर: एचडीएफसी बैंक से 55 लाख रुपये
  • 1 अक्टूबर: एसबीआई खाते से 40 लाख 80 हजार रुपये

अकेली रहती हैं बुजुर्ग महिला

जिन्सी पुलिस के इंस्पेक्टर गणेश ताठे के मुताबिक, शुभाधा कुलकर्णी घर में अकेली रहती हैं। उनका बेटा जामनगर में रिलायंस कंपनी में काम करता है, जबकि बेटी अमेरिका में रहती है।

पुलिस के अनुसार, ठगों ने इसी स्थिति का फायदा उठाया और महिला को लगातार डराते रहे। उन्हें बेटे की गिरफ्तारी और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई।

पुलिस ने 32 लाख रुपये फ्रीज कराए

ठगी का एहसास होने के बाद महिला ने जिन्सी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस और साइबर टीम ने उन बैंक खातों की जांच शुरू की, जिनमें रकम ट्रांसफर की गई थी।

पुलिस ने अब तक 32 लाख रुपये फ्रीज कराने में सफलता हासिल की है। बाकी रकम की रिकवरी और संबंधित खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई जारी है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए बैंक खातों और लेन-देन की जांच की जा रही है।

पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील

साइबर ठगी के इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाले अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या आरबीआई अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाए तो घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें।

याद रखें, पुलिस या कोई जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट करके बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराने का आदेश नहीं देती।

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