Media24Media.com: लाफिन कला के ग्रामीण बने प्रेरणा, बारिश में कीचड़ से बदहाल रहता था पुराना गौठान, अब 20 हजार स्क्वायर फीट में ढला सीमेंट का फर्श

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लाफिन कला के ग्रामीण बने प्रेरणा, बारिश में कीचड़ से बदहाल रहता था पुराना गौठान, अब 20 हजार स्क्वायर फीट में ढला सीमेंट का फर्श

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सरकारी बजट की आस छोड़ ग्रामीणों ने खुद 15 लाख की लागत से बना दी कांक्रीट की गौठान,  साढ़े छह लाख से ज्यादा हो चुके खर्च; मंदिर निर्माण के लिए भी जुटा चुके हैं 50 लाख का चंदा


महासमुंद। कहते हैं कि अगर नीयत साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो सरकारी व्यवस्था की ढिलाई भी गांव के विकास की राह नहीं रोक सकती। महासमुंद जिले के ग्राम लाफिन कला के ग्रामीणों ने इसे सच कर दिखाया है। सालों से बारिश के दिनों में कीचड़ से सराबोर रहने वाले गौठान और गोवंशों की दुर्दशा से दुखी होकर ग्रामीणों ने अब किसी सरकारी अनुदान या बजट की राह ताकना पूरी तरह छोड़ दिया है।


ग्राम विकास समिति ने खुद पहल करते हुए करीब 15 लाख रुपये के बजट से 20 हजार स्क्वायर फीट के विशाल गौठान को पूरी तरह कांक्रीट करने का बीड़ा उठाया है। इस जनसहयोग वाले प्रोजेक्ट में अब तक साढ़े 6 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर कांक्रीट ढलाई का बड़ा हिस्सा पूरा भी कर लिया गया है। इस अनोखी पहल से न केवल पशुओं को कीचड़ से राहत मिली है, बल्कि गोबर उठाने और गौठान की साफ-सफाई में भी बड़ी आसानी हो रही है।


ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष रामकुमार साहू ने बताया कि गांव का गौठान सालों से खुले मैदान में संचालित हो रहा था। हर मानसून में यहां गहरा कीचड़ जम जाता था। स्थिति इतनी भयावह हो जाती थी कि बेजुबान गोवंशों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती थी और उन्हें घंटों कीचड़ में ही खड़े रहना पड़ता था। मवेशियों की इस तड़प को देखकर ग्राम समिति ने एक आपात बैठक बुलाई और ग्रामीणों के सामने गौठान के पक्कीकरण की योजना रखी। गांव के हर परिवार ने इसमें सहमति जताई और ग्राम विकास समिति की राशि से कांक्रीट ढलाई का काम शुरू किया गया।

कांक्रीट गौठान के 3 बड़े फायदे

1. कीचड़ से शत-प्रतिशत मुक्ति: फर्श सीमेंटेड होने से अब बारिश का पानी आसानी से बह जाता है और मवेशी आराम से सूखी और साफ जगह पर बैठ सकते हैं।
2. संक्रमण और बीमारियों पर लगाम: कीचड़ और जलभराव न होने से गोवंशों में पैर की सड़ांध, खुरपका और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगभग खत्म हो गया है।
3. जैविक खाद प्रबंधन में आसानी: समतल कांक्रीट धरातल होने से अब गोबर और गौमूत्र का संग्रहण बेहद आसान और त्वरित हो गया है।

चंदे से बना चुके हैं 50 लाख का भव्य मंदिर

लाफिन कला के ग्रामीणों के लिए जनसहयोग से गांव की सूरत बदलना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी ग्रामीणों ने सामाजिक समरसता और एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए करीब 50 लाख रुपये का चंदा आपस में इकट्ठा किया था। इस राशि से गांव में श्रीराम जानकी मंदिर का भव्य निर्माण कराया गया और गांव के बीचों-बीच स्थित तालाब के मध्य में दर्शनीय शिवलिंग आकार के शिव मंदिर की स्थापना की गई। सरकारी तंत्र पर निर्भर रहने के बजाय अपनी समस्याओं का समाधान खुद तलाशने की ग्रामीणों की इस सोच की पूरे इलाके में सराहना हो रही है।

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