Media24Media.com: SIR पर EC का बड़ा स्पष्टीकरण, अंदरूनी मतभेद की खबरें खारिज; कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से

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SIR पर EC का बड़ा स्पष्टीकरण, अंदरूनी मतभेद की खबरें खारिज; कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से

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 नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबरों पर आयोग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि SIR समेत सभी रणनीतिक और प्रशासनिक फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सहमति से लिए गए हैं।


आयोग के सूत्रों के मुताबिक, SIR से जुड़े फैसलों समेत निर्वाचन आयोग के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने कहा कि प्रत्येक फैसले पर मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की लिखित मंजूरी और सहमति रही है।

किस रिपोर्ट के बाद आया आयोग का स्पष्टीकरण?

आयोग का यह बयान The Indian Express की 23 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद आया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।

रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अपील तथा चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों के संबंध में सवाल उठाया था कि क्या उन्हें उनकी जानकारी और मंजूरी के बिना जारी किया गया। इन आपत्तियों की प्रतियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजे जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की व्यवस्था क्या है?

निर्वाचन आयोग तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। आयोग की मौजूदा संरचना में ज्ञानेश कुमार CEC हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं।

2023 के कानून के तहत आयोग के कामकाज को जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से संचालित किए जाने का प्रावधान है। मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लेने की व्यवस्था भी है।

रिपोर्ट में किन मुद्दों का जिक्र?

The Indian Express की रिपोर्ट में फॉर्म-6 में कथित बदलाव, मतदाता सूची के डेटा के केंद्रीकरण और कुछ मामलों में मतदाता नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में गोवा में 97 मतदाताओं से जुड़ी एक प्रक्रिया का भी जिक्र किया गया है, जहां स्थानीय स्तर पर पात्र पाए गए मतदाताओं से संबंधित फैसलों को सॉफ्टवेयर में दर्ज करने में समस्या आने की बात कही गई।

हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन रिपोर्टों से अलग अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि आयोग के सभी फैसले तीनों सदस्यों की सहमति से ही लिए गए हैं।

विपक्षी दलों ने उठाए सवाल

रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मामले को गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली को लेकर चिंता जताई।

वहीं, अन्य विपक्षी नेताओं ने भी SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए हैं। ये राजनीतिक दलों के आरोप और प्रतिक्रियाएं हैं; चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक सूत्रों के माध्यम से आंतरिक मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया जाना बताया है।

फिलहाल SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। आयोग के स्पष्टीकरण और सामने आई मीडिया रिपोर्टों में दावों को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं।

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