Media24Media.com: आरंग के छात्रावासों की व्यवस्था पर उठे सवाल, जांच की मांग

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आरंग के छात्रावासों की व्यवस्था पर उठे सवाल, जांच की मांग

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आरंग- आरंग के अकोली रोड स्थित प्री-मैट्रिक, आश्रम और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने छात्रावासों की व्यवस्था से संबंधित कुछ गंभीर आरोपों की जानकारी देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की अधीक्षिका के नियमित रूप से छात्रावास में उपस्थित नहीं रहने की शिकायत सामने आई है। वहीं प्री-मैट्रिक एवं आश्रम छात्रावास की अधीक्षिका के संबंध में भी छात्रावास परिसर में निवास नहीं करने का आरोप लगाया गया है।

फर्जी प्रवेश और खाद्यान्न को लेकर भी शिकायत

शिकायत में छात्रावास में फर्जी विद्यार्थियों के प्रवेश को दर्शाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा छात्रावास में बच्चों के लिए उपलब्ध चावल को कथित तौर पर अजय गुप्ता नामक व्यक्ति को बेचे जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए विभागीय स्तर पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच बेहद जरूरी है।

बच्चों के भविष्य से जुड़ा मामला

छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थी शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि वास्तव में छात्रावासों में अधीक्षकों की नियमित उपस्थिति नहीं है, विद्यार्थियों की संख्या में गड़बड़ी है या खाद्यान्न के वितरण में अनियमितता हो रही है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय हो सकता है।

इसलिए छात्रावासों में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या और वास्तविक उपस्थिति, प्रवेश रजिस्टर, खाद्यान्न स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर तथा अधीक्षकों की उपस्थिति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।

पुलिस विभाग में पति होने का प्रभाव दिखाने का भी आरोप

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि संबंधित अधीक्षिका अपने पुलिस विभाग में पदस्थ पति का प्रभाव दिखाकर लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास करती हैं। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अचानक निरीक्षण से सामने आ सकती है सच्चाई

मामले में सबसे महत्वपूर्ण कदम संबंधित विभाग द्वारा अचानक छात्रावास निरीक्षण करना होगा। यदि अधिकारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किया जाता है तो छात्रावास में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, उपस्थिति, भोजन व्यवस्था और उपलब्ध खाद्यान्न की स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

इसके साथ ही पिछले कुछ महीनों के रिकॉर्ड की जांच कर यह भी देखा जाना चाहिए कि छात्रावास में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या और वास्तव में उपस्थित विद्यार्थियों की संख्या में कोई अंतर तो नहीं है।

विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों द्वारा सामने रखी गई शिकायत में लगाए गए आरोपों को देखते हुए अब संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो विभाग द्वारा स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

फिलहाल मामला जांच का विषय है और किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले संबंधित अधिकारियों एवं आरोपित पक्ष का पक्ष जानना आवश्यक है।

अब देखने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग आरंग के इन छात्रावासों का औचक निरीक्षण कर शिकायत में लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने लाता है या नहीं।


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