Media24Media.com: डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल: 20 दिन में फेफड़ों की 9 जटिल सर्जरियाँ, मरीजों को मिला नया जीवन

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल: 20 दिन में फेफड़ों की 9 जटिल सर्जरियाँ, मरीजों को मिला नया जीवन

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 रायपुर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विभाग के डॉक्टरों की टीम ने महज 20 दिनों के भीतर 9 लोबेक्टॉमी (Lobectomy) सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की हैं। पिछले दो महीनों के आंकड़ों को जोड़ें तो यह संख्या कुल 13 हो चुकी है।


अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में लोबेक्टॉमी सर्जरी करना छत्तीसगढ़ के किसी भी सरकारी या निजी स्वास्थ्य संस्थान की तुलना में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।

आपातकालीन स्थिति में मिली नई जिंदगी

हाल ही में की गई सर्जरियों में दो ऐसे मरीज भी शामिल थे, जिनकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस) हो रहा था। डॉक्टरों ने तुरंत आपातकालीन सर्जरी कर मरीजों की जान बचाई।

क्या होती है लोबेक्टॉमी सर्जरी?

विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि मानव शरीर के दाएं फेफड़े में तीन और बाएं फेफड़े में दो लोब (हिस्से) होते हैं। जब एस्परजिलोमा, ब्रोन्किएक्टैसिस या लंग ट्यूमर जैसी बीमारियां फेफड़े के किसी एक हिस्से तक सीमित रहती हैं, तो सर्जरी के जरिए केवल उसी बीमारीग्रस्त लोब को बाहर निकाल दिया जाता है। इसी प्रक्रिया को लोबेक्टॉमी कहते हैं।

आधुनिक 'लंग स्टेपलर' तकनीक से जोखिम कम
अम्बेडकर अस्पताल में इन सर्जरियों के लिए आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर का उपयोग किया जा रहा है। डॉ. साहू के अनुसार, इस तकनीक से सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं—विशेष रूप से Bronchopleural Fistula (फेफड़े और चेस्ट कैविटी के बीच रिसाव)—का खतरा न के बराबर रह जाता है। सर्जरी के बाद मरीज आमतौर पर 6 से 8 दिनों में डिस्चार्ज होकर अपने घर लौट जाते हैं।

बीमारी के प्रमुख कारण

  • छत्तीसगढ़ में फेफड़ों के संक्रमण और खराबी का मुख्य कारण टीबी का पुराना इतिहास और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता है:
  • एस्परजिलोमा: यह Aspergillus niger नामक फंगस से होता है, जो ज्यादातर दाएं फेफड़े के ऊपरी लोब को प्रभावित करता है।
  • ब्रोन्किएक्टैसिस व लंग एब्सिस: टीबी या अन्य संक्रमण के बाद फेफड़ों में कैविटी बन जाती है, जिससे खांसी में खून आता है।
  • लंग कैंसर: शुरुआती चरण के कैंसर में लोबेक्टॉमी के जरिए ट्यूमर वाले हिस्से को हटाकर मरीज को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

पड़ोसी राज्यों से भी पहुँच रहे मरीज

अम्बेडकर अस्पताल का हार्ट-चेस्ट विभाग न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण बना हुआ है। यहाँ प्रतिवर्ष औसतन 15 से 20 लोबेक्टॉमी के अलावा डिकॉर्टिकेशन, सेगमेंटेक्टॉमी और न्यूमोनेक्टॉमी (पूरा फेफड़ा निकालने की सर्जरी) जैसी जटिल प्रक्रियाएँ की जाती हैं।

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