Media24Media.com: राष्ट्रीय सरोवर दिवस विशेष: आरंग में थे 6 कोरी 6 आगर तालाब, संरक्षण की है आवश्यकता

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राष्ट्रीय सरोवर दिवस विशेष: आरंग में थे 6 कोरी 6 आगर तालाब, संरक्षण की है आवश्यकता

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 आरंग। गुरुवार को राष्ट्रीय सरोवर दिवस मनाया गया। जल संरक्षण और तालाबों के महत्व को लेकर मनाए जा रहे इस दिवस पर छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी आरंग की ऐतिहासिक धरोहर और जल-समृद्धि की कहानी याद आना स्वाभाविक है।


किंवदंती है कि प्राचीनकाल में आरंग में 6 कोरी 6 आगर अर्थात 126 तालाब थे। छत्तीसगढ़ में प्राचीनकाल में तालाब ही जल संरक्षण के मुख्य केंद्र थे। इतिहास के अध्येता शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल बताते हैं कि आरंग धार्मिक आस्था और दानी राजा मोरध्वज के साथ-साथ तालाबों की नगरी के रूप में विख्यात था।

महानदी के तट पर बसे होने के बावजूद यहां 126 तालाबों के निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह आज भी शोध का विषय है। पुराविदों के अनुसार आरंग को इसी कारण तालाबों की नगरी भी कहा जाता था। वर्तमान में यहां केवल 51 तालाबों के नाम ही ज्ञात हैं, जिनमें से कई पट चुके हैं और कई डबरी बनकर रह गए हैं। बढ़ती आबादी और अतिक्रमण के कारण तालाबों का अस्तित्व संकट में है।

ये है 51तालाबों के नाम

सेमरिया तालाब, रानी सागर, खरखरा, दबका, दंसेल, कांदा भैरा, रमचेंदवा, अंधियारखोप, कपूरताल, नवा तालाब, झिलमिली, मोहन डबरी, खल्लारी डबरी, कोहली पचरी, गुड़ियारी तालाब, छोटे कटी,बड़े नकटी तालाब, मझला नकटी, ठाकुरदिया, हथमार, झलमला, पंडरी तालाब, केंवसी तालाब, हाथी बुडान, कैंठा तालाब, कुकरी डबरी, गोड़धोवा, मुडधोवा, आमाडबरा, भंडारी तालाब, केशरवा डबरी, डमौउवा तालाब, जलसेन तालाब, ठरमुडिया, लामीकेंवसी, डंगनिया, अगार, हगरिया डबरी, छोटे घोघियई, बड़े घोघियई, भेंडी धोवान, पुरेना, बूढ़ी डबरी, नारायण डबरी, शिवनाथ डबरी, लीलबिलार डबरी, गस्ताही डबरी, नारायण बन, महामाया तालाब।

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