Media24Media.com: छात्र प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूर्व जज की अध्यक्षता में बनेगी हाई-पावर्ड कमेटी

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छात्र प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूर्व जज की अध्यक्षता में बनेगी हाई-पावर्ड कमेटी

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नई दिल्ली- देश के विभिन्न हिस्सों में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण पहल की। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की तथ्यात्मक जांच के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी गठित करने की मंशा जताई है। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में होगी समिति

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज करेंगे। इसमें एक पूर्व हाईकोर्ट जज और सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी/पूर्व DGP को भी शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने बताया कि एक पूर्व CBI निदेशक और एक पूर्व DGP की सहमति भी प्राप्त हो चुकी है। हालांकि समिति की अंतिम संरचना, अधिकार क्षेत्र और जांच की प्रक्रिया को लेकर औपचारिक आदेश जारी होना बाकी है।

कोर्ट ने संबंधित पक्षों को समिति के कार्यादेश और जांच के दायरे को लेकर लिखित सुझाव देने की अनुमति दी है। बताया गया है कि औपचारिक आदेश में समिति के गठन और कामकाज का विस्तृत स्वरूप तय किया जाएगा।

पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की होगी जांच

प्रस्तावित समिति छात्र प्रदर्शनों के दौरान लगाए गए पुलिस ज्यादती के आरोपों की तथ्यात्मक पड़ताल करेगी। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुई हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न एवं अन्य शिकायतों पर भी विचार किया जा सकता है। समिति को आवश्यकता पड़ने पर महत्वपूर्ण या तत्काल मामलों में अंतरिम रिपोर्ट देने की संभावना भी जताई गई है।

यह मामला उन छात्र आंदोलनों से जुड़ा है, जिनमें कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन हुए थे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन किया था।

पुलिस ने आरोपों से किया इनकार

जहां प्रदर्शनकारी पक्षों की ओर से पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए गए हैं, वहीं दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में अत्यधिक बल प्रयोग से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान भीड़ के कुछ हिस्सों द्वारा बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया गया था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल का इस्तेमाल किया गया।

बिहार सरकार ने भी अपने जवाब में पुलिस द्वारा अनुपातहीन बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है। सरकार के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर हथियारों से फायरिंग की घटनाएं हुईं, लेकिन इन घटनाओं के संबंध में उसका पक्ष अलग है और मामले की परिस्थितियों की जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत हो रही है।

छात्रों के भविष्य को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट गंभीर

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में, जहां गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि या गंभीर अपराध शामिल नहीं हैं, छात्रों के खिलाफ मामलों को समाप्त करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि हजारों छात्रों का भविष्य इस मामले से जुड़ा हुआ है।

हालांकि गंभीर अपराधों में शामिल या गंभीर आपराधिक इतिहास वाले लोगों के मामलों को अलग तरीके से देखने की बात कही गई है।

अंतिम आदेश का इंतजार

सुप्रीम कोर्ट की इस पहल को छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष तथ्यात्मक जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी पक्षों के सुझावों पर विचार करने के बाद अदालत समिति की अंतिम संरचना, अधिकार क्षेत्र और कार्यप्रणाली को लेकर औपचारिक आदेश जारी करेगी।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इससे न केवल पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच का रास्ता स्पष्ट होगा, बल्कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर भी आगे की दिशा तय हो सकती है।

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