Media24Media.com: ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी उपलब्धि: भारत में विकसित बीम कैचर जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय मेगा साइंस प्रोजेक्ट FAIR पहुंचा

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‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी उपलब्धि: भारत में विकसित बीम कैचर जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय मेगा साइंस प्रोजेक्ट FAIR पहुंचा

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नई दिल्ली- भारत की वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। भारत में डिजाइन और निर्मित बीम कैचर (Beam Catcher) उपकरण की पहली इकाई जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय मेगा साइंस प्रोजेक्ट ‘फैसिलिटी फॉर एंटीप्रोटॉन एंड आयन रिसर्च (FAIR)’ में पहुंच गई है। यह उपकरण अब स्थापना की प्रतीक्षा में है और परियोजना के सुपर फ्रैगमेंट सेपरेटर (Super-FRS) का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, जो रेडियोधर्मी आयन बीम तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा।

बीम कैचर को सीएसआईआर-केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-CMERI), दुर्गापुर ने डिजाइन किया है। इसका विकास बोस संस्थान, कोलकाता के मार्गदर्शन में किया गया, जो FAIR परियोजना में भारत की वैज्ञानिक भागीदारी का प्रमुख समन्वयक संस्थान है।

यह उपकरण उच्च-ऊर्जा भारी आयन बीम के अवशेषों को सुरक्षित रूप से अवशोषित करने के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती अत्यधिक ऊर्जा और तापमान को नियंत्रित करना है। इसके लिए इसमें फाइन-ग्रेन्ड ग्रेफाइट और उच्च-शुद्धता वाले तांबे से बने अवशोषक लगाए गए हैं, जिन्हें पिघलने से बचाने के लिए जल-शीतलन (Water Cooling) प्रणाली से लैस किया गया है। पूरा सिस्टम उच्च वैक्यूम तकनीक, सटीक मोटराइज्ड मूवमेंट और रेडियोधर्मिता से सुरक्षा के लिए विशेष आयरन शील्डिंग से युक्त है।

भारत 4 अक्टूबर 2010 को जर्मनी के विस्बाडेन में समझौते पर हस्ताक्षर कर FAIR परियोजना का संस्थापक सदस्य बना था। जर्मनी के डार्मस्टाट में बन रही यह विश्वस्तरीय कण त्वरक (Particle Accelerator) सुविधा दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। इसमें भारत का योगदान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है।

FAIR परियोजना में भारत केवल बीम कैचर ही नहीं, बल्कि 58 अल्ट्रा हाई वैक्यूम चैंबर, 932 किलोमीटर विशेष आईटी एवं डायग्नोस्टिक केबल, और 524 अल्ट्रा-स्टेबल पावर कन्वर्टर जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियां भी उपलब्ध करा रहा है। इन उपकरणों का निर्माण बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कानपुर की भारतीय कंपनियों द्वारा किया गया है। इसके अलावा वडोदरा की INOXCVA ने भी क्रायोजेनिक उपकरणों की आपूर्ति कर परियोजना में योगदान दिया है।

FAIR परियोजना के तहत भारतीय वैज्ञानिक न्यूक्लियर स्ट्रक्चर एंड एस्ट्रोफिजिक्स (NuSTAR) तथा कम्प्रेस्ड बैरियोनिक मैटर (CBM) जैसे अत्याधुनिक प्रयोगों के लिए उन्नत डिटेक्टर प्रणालियों का भी विकास कर रहे हैं।

बोस संस्थान के मार्गदर्शन में भारतीय उद्योगों की भागीदारी ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को वैश्विक स्तर पर मजबूती दे रही है। इस परियोजना से भारतीय कंपनियों की तकनीकी क्षमता अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंच रही है, जिससे भविष्य में ITER, CERN, TMT, SKA और LIGO जैसी वैश्विक मेगा साइंस परियोजनाओं में भारत की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।


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