Media24Media.com: बिलासपुर में बाढ़ और बिजली व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, CSPDCL और नगर निगम से मांगा नया शपथपत्र

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बिलासपुर में बाढ़ और बिजली व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, CSPDCL और नगर निगम से मांगा नया शपथपत्र

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बिलासपुर- शहर में बारिश के दौरान जलभराव, बाढ़ प्रबंधन और बिजली आपूर्ति की समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक और बिलासपुर नगर निगम के आयुक्त को नया शपथपत्र दाखिल कर अब तक किए गए कामों की वास्तविक प्रगति और मौजूदा स्थिति बताने का निर्देश दिया है।

यह मामला कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई सुओ-मोटो जनहित याचिका से जुड़ा है। कोर्ट ने इससे पहले भी शहर में बारिश के कारण होने वाले जलभराव और बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या पर अधिकारियों से जवाब मांगा था।

कोर्ट ने कहा—सिर्फ योजना नहीं, जमीन पर दिखे काम

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने 25 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा अब तक किए गए कार्यों और प्रस्तावित योजनाओं का संज्ञान लिया।

कोर्ट ने साफ किया कि केवल योजनाएं बनाना या कार्रवाई का आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है। योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभाव दिखाई देना चाहिए, ताकि बिलासपुर के लोगों को बारिश, जलभराव और बिजली से जुड़ी परेशानियों से वास्तविक राहत मिल सके।

इसी उद्देश्य से कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से प्रगति की निगरानी करने और ताजा शपथपत्र में ठोस प्रगति का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम

सुनवाई के दौरान CSPDCL की ओर से बताया गया कि बिलासपुर की बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम शुरू किया गया है।

इनमें क्षतिग्रस्त सीमेंट के बिजली खंभों को लोहे के खंभों से बदलना, बिजली लाइनों से जुड़े खतरनाक विज्ञापन होर्डिंग्स की पहचान करना और आपात स्थिति में बिजली बहाल करने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना शामिल है।

इसके अलावा बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए एक Extra High Voltage (EHV) सब-स्टेशन और दो 33/11 KV सब-स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इनमें लोकांडी क्षेत्र में EHV सब-स्टेशन तथा सलावली नाला और मंगला रिवर व्यू क्षेत्र में 33/11 KV सब-स्टेशन प्रस्तावित हैं।

अधिकारियों का कहना है कि नए सब-स्टेशन बनने से मौजूदा नेटवर्क पर दबाव कम होगा और बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिलेगी।

जलभराव से निपटने नगर निगम ने बनाया Flood Control Cell

बिलासपुर नगर निगम ने मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए Flood Control Cell का गठन किया है। यह सेल विकास भवन, नेहरू चौक में स्थापित किया गया है और इसमें अधिकारियों की शिफ्टवार ड्यूटी तथा शिकायतों की निगरानी की व्यवस्था की गई है।

नगर निगम के अनुसार, आपात स्थिति के लिए राहत शिविरों की पहचान, आपातकालीन रोशनी और पेयजल की व्यवस्था, नालियों एवं सीवर की सफाई, बचाव दलों की तैनाती तथा JCB, पंप और अन्य मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा भारी बारिश के दौरान अधिकारियों को लगातार फील्ड में निगरानी रखने और जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

 सभी आठ जोन में नालों की सफाई

नगर निगम ने बताया कि मानसून से पहले बिलासपुर के सभी आठ नगर निगम जोन में बड़े और छोटे नालों की सफाई एवं डी-सिल्टिंग का काम कराया गया है।

इसके लिए निगम के पास 14 वाहन उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग गाद, कचरा और अन्य सामग्री हटाने के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने में किया जा रहा है।

नगर निगम ने कोर्ट को यह भी बताया कि बारिश और जलभराव से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में अन्य विभागों के साथ समन्वय कर मानव संसाधन, वाहन और मशीनरी उपलब्ध कराई जाएगी।

बिजली शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर

बिजली व्यवस्था को लेकर कोर्ट की निगरानी का एक अहम हिस्सा शिकायतों के त्वरित निराकरण से जुड़ा है।

CSPDCL ने बताया कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतों को जल्द दर्ज करने और निर्धारित समय में उनका समाधान करने के लिए कॉल सेंटर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही आपातकालीन कार्यों के लिए अतिरिक्त मानवबल और ठेकेदारों की सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

इसका उद्देश्य बारिश या तेज आंधी के दौरान बिजली के खंभे, तार या अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त होने पर कम से कम समय में बिजली बहाल करना है।

खराब मौसम और बिजली हादसों पर भी कोर्ट की नजर

बिलासपुर में बिजली और बारिश से जुड़ी समस्याओं पर हाईकोर्ट पहले भी लगातार निगरानी करता रहा है। जुलाई में कोर्ट ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था, जलभराव और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी थी।

एक पूर्व सुनवाई में कोर्ट के सामने यह भी आया था कि बड़ी संख्या में खराब सर्विस वायर को बदलने की जरूरत थी और अधिकारियों से लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था।

अब कोर्ट को देनी होगी जमीनी प्रगति की रिपोर्ट

हाईकोर्ट का मौजूदा निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब अधिकारियों को केवल भविष्य की योजनाएं बताने के बजाय अब तक किए गए काम और उनकी वास्तविक प्रगति का ब्यौरा देना होगा।

कोर्ट ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव, CSPDCL के प्रबंध निदेशक और बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को अपने-अपने स्तर पर चल रहे कार्यों की निगरानी करने और ताजा शपथपत्र में प्रगति दर्ज करने का निर्देश दिया है।

क्यों अहम है यह मामला?

बिलासपुर में बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव और बिजली आपूर्ति में व्यवधान सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट की निगरानी से उम्मीद है कि जल निकासी, बिजली नेटवर्क, आपातकालीन प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण की व्यवस्थाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर प्रभावी बनाया जाएगा।

हाईकोर्ट का संदेश स्पष्ट है—बिलासपुर की जनता को राहत देने के लिए योजनाओं और दावों से आगे बढ़कर उनके परिणाम जमीन पर दिखाई देने चाहिए।

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