Media24Media.com: NEET परीक्षा सुरक्षा पर केंद्र का बड़ा दावा: सुप्रीम कोर्ट में बताया—सिस्टम ‘फुलप्रूफ’, पेपर लीक रोकने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा

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NEET परीक्षा सुरक्षा पर केंद्र का बड़ा दावा: सुप्रीम कोर्ट में बताया—सिस्टम ‘फुलप्रूफ’, पेपर लीक रोकने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा

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नई दिल्ली- NEET-UG परीक्षा की सुरक्षा और पेपर लीक से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष परीक्षा प्रणाली में किए गए सुरक्षा उपायों का विस्तृत ब्यौरा रखा। केंद्र ने दावा किया कि वर्तमान NEET परीक्षा व्यवस्था को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें सेंध लगाना बेहद मुश्किल है। 

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और परीक्षा के दौरान उसके इस्तेमाल तक कई स्तरों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। प्रश्नपत्रों के परिवहन की निगरानी GPS तकनीक के माध्यम से किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई।

प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में भी सुरक्षा

केंद्र के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कई विषय विशेषज्ञ और मॉडरेटर शामिल होते हैं। सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि प्रश्न तैयार करने वाले सभी विशेषज्ञों को यह जानकारी नहीं होती कि अंतिम प्रश्नपत्र में कौन-से प्रश्न शामिल किए जाएंगे। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखना और संभावित लीक की संभावना को कम करना है।

परिवहन से लेकर परीक्षा केंद्र तक निगरानी

सरकार ने बताया कि प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से पैक और परिवहन किया जाता है तथा उनके आवागमन पर निगरानी रखी जाती है। GPS-ट्रैकिंग सहित विभिन्न तकनीकी उपायों का इस्तेमाल प्रश्नपत्रों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए किया जा रहा है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए सीलबंद बॉक्स और CCTV जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया गया। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—सिर्फ सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केवल मौजूदा सुरक्षा उपायों के विवरण पर संतोष व्यक्त करने के बजाय परीक्षा व्यवस्था में स्थायी और संस्थागत सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने NTA की संस्थागत क्षमता, बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

अदालत ने केंद्र से यह भी बताने को कहा कि राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि समिति की परीक्षा सुधार संबंधी सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। NTA को इस संबंध में विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि NEET जैसी विशाल राष्ट्रीय परीक्षा के लिए केवल तात्कालिक या विवाद के बाद किए गए बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे। अदालत ने NTA को अधिक मजबूत, स्थायी और तकनीकी रूप से सक्षम संस्था के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। UPSC जैसी संस्थागत विशेषज्ञता और स्थायी व्यवस्था से सीख लेने की बात भी सुनवाई के दौरान सामने आई। 

600 विशेषज्ञों को परीक्षा प्रक्रिया से हटाने सहित सुधार

रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षा प्रणाली में सुधार के तहत NTA की परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं से लगभग 600 विशेषज्ञों को हटाने और NTA के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। NTA के कार्यालय की सुरक्षा बढ़ाने और परीक्षा प्रक्रिया में अधिक निगरानी एवं विशेषज्ञता लाने पर भी काम किया जा रहा है। 

क्या है पूरा मामला?

NEET-UG 2026 की परीक्षा प्रणाली में सामने आए पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा की सुरक्षा, पारदर्शिता और NTA की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर हुई थीं। इसके बाद अदालत लगातार परीक्षा व्यवस्था में सुधार और सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर रही है। इससे पहले केंद्र ने प्रश्नपत्र को प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया अदालत के समक्ष रखने की बात कही थी। 

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट का जोर इस बात पर है कि NEET जैसी परीक्षा के लिए ऐसी स्थायी, भरोसेमंद और संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे भविष्य में पेपर लीक या अन्य गड़बड़ियों की संभावना न्यूनतम हो। केंद्र को NTA सुधारों और विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों के क्रियान्वयन पर विस्तृत जानकारी देनी है।

निष्कर्ष: केंद्र ने NEET की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत और लगभग अभेद्य बताया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल कागजी या अस्थायी सुरक्षा उपायों के बजाय स्थायी संस्थागत सुधार, मजबूत साइबर सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और जवाबदेही जरूरी है।

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