Media24Media.com: लापरवाही का खूनी गड्ढा: तीन आदिवासी बच्चों की मौत से गांव में पसरा मातम

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लापरवाही का खूनी गड्ढा: तीन आदिवासी बच्चों की मौत से गांव में पसरा मातम

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 डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड अंतर्गत बोरतालाव के आश्रित ग्राम गांधीनगर में बुधवार शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ रेलवे निर्माण कार्य के दौरान खोदे गए एक गहरे गड्ढे में भरे बारिश के पानी में डूबने से तीन मासूम आदिवासी बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। एक ही गांव के तीन बच्चों की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और गांव में मातम पसरा हुआ है।


देर शाम मिले शव, पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए

मिली जानकारी के अनुसार, मृत बच्चों की पहचान सार्थक कोकोटे (8 वर्ष, पिता कमलेश कोकोटे), कृष मंडावी (8 वर्ष, पिता राकेश मंडावी) और दानेश मंडावी (6 वर्ष, पिता राकेश मंडावी) के रूप में हुई है। तीनों बच्चे बुधवार दोपहर से लापता थे। देर शाम तक जब वे घर नहीं लौटे, तो ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने गड्ढे के पानी से तीनों बच्चों के शवों को बाहर निकाला। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शवों को पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगढ़ की मर्चुरी भिजवाया।

ग्रामीणों का आरोप: बिना सुरक्षा इंतजामों के खुला छोड़ दिया गड्ढा

ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि रेलवे कार्य के लिए ठेकेदार द्वारा यहाँ जेसीबी से गहरी खुदाई की गई थी, लेकिन काम पूरा होने के बाद गड्ढे को वैसे ही खुला छोड़ दिया गया। हाल ही में हुई बारिश के कारण इस गड्ढे में भारी मात्रा में पानी भर गया था, जिससे इसकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल था। आशंका जताई जा रही है कि खेलते-खेलते बच्चे इस गड्ढे के पास पहुंच गए और पैर फिसलने या गहराई का पता न चलने के कारण डूब गए। घटना के बाद ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के लिए कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था।

शिक्षकों की हड़ताल का भी साया

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में चल रही शिक्षकों की हड़ताल के कारण बुधवार को स्कूल में बच्चों की देखरेख और नियमित व्यवस्था प्रभावित थी। सामान्य दिनों में शिक्षक बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखते थे या उन्हें सुरक्षित छोड़ते थे। हालांकि, प्रशासन और पुलिस इस पहलू को भी जांच के दायरे में रख रहे हैं कि स्कूल बंद होने का इस हादसे से क्या संबंध है।

प्रशासन का आश्वासन: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस मुस्तैदी से जांच में जुट गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच की जा रही है। यदि जांच में निर्माण एजेंसी या ठेकेदार द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसकी भारी कीमत तीन मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

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