Media24Media.com: पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा का भव्य शुभारंभ; आज शाम 4 बजे खींचे जाएंगे रथ, उमड़ा आस्था का जनसैलाब

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पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा का भव्य शुभारंभ; आज शाम 4 बजे खींचे जाएंगे रथ, उमड़ा आस्था का जनसैलाब

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 पुरी: ओडिशा के जगन्नाथ पुरी समेत पूरे देश के लिए आज का दिन बेहद खास और ऐतिहासिक है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के साथ ही आज से विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा का महापर्व शुरू हो गया है। इस वर्ष रथयात्रा के दिन 'रवि योग' का शुभ संयोग बनने से इस उत्सव का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।


श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और छत्तीस निजोग अनुष्ठान उप-समिति द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आज शाम ठीक 4:00 बजे से श्रद्धालुओं द्वारा रथों को खींचने का मुख्य अनुष्ठान शुरू किया जाएगा।

मौसी के घर 9 दिनों का प्रवास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महाउत्सव के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा जी के साथ भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर 'गुंडिचा देवी मंदिर' जाते हैं। भगवान यहाँ कुछ दिनों तक विश्राम और प्रवास करते हैं। इसके बाद आगामी 24 जुलाई को 'बहुदा यात्रा' (उलटी रथयात्रा) के साथ भगवान की वापसी होगी और 27 जुलाई को 'नीलाद्री बीजे' अनुष्ठान के साथ इस भव्य महापर्व का समापन होगा।

जाति-पांत के भेद से परे: रथ खींचने से धुलते हैं पाप

इस महापर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें हर वर्ग, जाति और समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ मिलकर रथ खींचते हैं। माना जाता है कि रथयात्रा के दौरान भगवान स्वयं मंदिर से बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी श्रद्धालु महाप्रभु के रथ की रस्सी खींचता है या इस यात्रा में शामिल होकर दर्शन करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जन्मों-जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

तीन रंगों के भव्य रथ: सबसे पीछे चलेंगे महाप्रभु जगन्नाथ

रथयात्रा के लिए विशेष रूप से नीम की लकड़ियों से तीन विशाल और भव्य रथों का निर्माण किया गया है। परंपरा के अनुसार तीनों रथों का क्रम इस प्रकार रहेगा:

  • सबसे आगे (तालध्वज): बड़े भाई बलराम जी का रथ, जो लाल और हरे रंग का होता है।
  • मध्य में (दर्पदलन या पद्मरथ): बहन सुभद्रा जी का रथ, जो नीले और काले रंग का होता है।
  • सबसे पीछे (नंदिघोष या गरुड़ध्वज): स्वयं महाप्रभु जगन्नाथ जी का रथ, जो लाल और पीले रंग के वस्त्रों से सुसज्जित रहता है।

सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण पूरी जगन्नाथ पुरी 'जय जगन्नाथ' के जयकारों से गुंजायमान है।

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