Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में हाथियों का आतंक जारी, 53 हाथी चार झुंडों में घूम रहे, किसानों की फसलें तबाह

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छत्तीसगढ़ में हाथियों का आतंक जारी, 53 हाथी चार झुंडों में घूम रहे, किसानों की फसलें तबाह

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में 53 हाथी चार झुंडों में विचरण कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ताजा मामला कुदमुरा रेंज का है, जहां धरमजयगढ़ वन मंडल से पहुंचे दो दंतैल हाथियों ने गीतकुंवारी गांव में किसानों की खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया।


जानकारी के मुताबिक, कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज स्थित मेउड़ पहाड़ पर 48 हाथियों का बड़ा दल डेरा जमाए हुए है। बताया जा रहा है कि हर साल गर्मी के मौसम में हाथियों का झुंड करीब ढाई से तीन महीने तक इस इलाके में रहता है। इस बार मार्च महीने से हाथियों का दल कटोरीमोती के पास कुकरीचकहर से मेउड़ पहाड़ क्षेत्र में सक्रिय है।

करीब 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेउड़ पहाड़ में हाथियों के लिए भोजन और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। हालांकि भोजन की तलाश में हाथी अक्सर पहाड़ से नीचे उतरकर गांवों की ओर रुख कर लेते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा बढ़ जाता है।

गुरुवार रात धरमजयगढ़ वन मंडल से आए दो दंतैल हाथी गीतकुंवारी गांव में घुस गए। हाथियों ने कई एकड़ में लगी धान की फसल रौंद दी। ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशाल जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक फसलों को भारी नुकसान पहुंच चुका था।

ग्रामीणों का कहना है कि फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन हाथियों के हमले से पूरी मेहनत बर्बाद हो गई। लगातार हाथियों की आवाजाही से कुदमुरा, जटगा और पसान क्षेत्र के लोग भय के साये में जी रहे हैं। रात होते ही ग्रामीण घरों में दुबकने को मजबूर हैं और खेतों की रखवाली करना मुश्किल हो गया है।

वन विभाग की टीम गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क कर रही है। साथ ही हाथी मित्र दल भी लगातार निगरानी में जुटा हुआ है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथी दिखाई देने पर तुरंत सूचना दें, अकेले हाथियों के पास न जाएं और उन्हें छेड़ने की कोशिश न करें।
वन विभाग के अनुसार फसल नुकसान का सर्वे कर मुआवजा प्रकरण तैयार किया जा रहा है। वहीं मेउड़ पहाड़ पर मौजूद 48 हाथियों के दल की ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है, ताकि उन्हें रिहायशी इलाकों में आने से रोका जा सके।
जिले में लगातार बढ़ रही हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
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