Media24Media.com: वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए प्रशासनिक क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत

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वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए प्रशासनिक क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज “वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए प्रशासनिक क्षमता निर्माण” पर पहली बार एक समर्पित कार्यक्रम की शुरुआत की। यह पहल मिशन कर्मयोगी के तहत अकादमिक नेतृत्व को प्रशासनिक कौशल और निर्णय लेने की क्षमता से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

“SADHANA सप्तह” के विशेष सत्र में इस पहल की घोषणा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए संरचित प्रशासनिक प्रशिक्षण की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी, खासकर जब वे नेतृत्व की भूमिकाओं में आते हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और अकादमिक पृष्ठभूमि के पेशेवरों को अक्सर बिना पूर्व प्रशासनिक अनुभव के संस्थागत जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं, और यह कार्यक्रम इस कमी को दूर करेगा।

उन्होंने कहा कि यह पहल वैज्ञानिक नेतृत्व के साथ चर्चा से विकसित हुई है और संस्थागत प्रशिक्षण से “स्व-अध्ययन” पर निर्भरता कम होगी, जो समय लेने वाली और असमान हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम को गतिशील बनाए रखना होगा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती तकनीकों के साथ तालमेल बैठाना होगा, साथ ही तकनीक और मानवीय निर्णय के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

मंत्री ने क्षमता निर्माण आयोग (CBC) के लिए नई दिशा-निर्देशों की भी रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए संरचित मॉड्यूल तैयार करना शामिल है। उन्होंने संसद प्रश्नों के उत्तर देने के लिए विशेष पाठ्यक्रम विकसित करने का सुझाव दिया, ताकि अधिकारियों की प्रक्रियागत समझ मजबूत हो सके। साथ ही, प्रारंभिक स्तर के सिविल सेवकों और असिस्टेंट सेक्रेटरी के लिए छोटे ओरिएंटेशन मॉड्यूल भी तैयार किए जा सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर दिया कि क्षमता निर्माण को नियम-आधारित कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर भूमिका-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जिससे अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से अनुकूलन कर सकें। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की कार्यप्रणालियों को भी शासन में शामिल करना जरूरी है, क्योंकि “अब साइलो का युग समाप्त हो चुका है।”

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि मिशन कर्मयोगी का अगला चरण सार्वजनिक संस्थानों को “अनुकूलनीय” और “मानवीय” बनाने पर केंद्रित होगा, खासकर तेजी से बदलती तकनीकी परिस्थितियों में। उन्होंने कहा कि AI के बढ़ते उपयोग के साथ प्रशासन में अनुकूलन क्षमता अनिवार्य हो गई है, जबकि नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण सार्वजनिक सेवा का मूल बना रहेगा।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने UNNATI पोर्टल के उन्नत संस्करण का भी शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य संस्थागत क्षमता निर्माण को मजबूत करना है। साथ ही, कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम के राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन के लिए रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर क्षमता निर्माण आयोग और रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज़ (RIS) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी हुए, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ज्ञान साझेदारी को बढ़ावा देना है।

इस सहयोग के तहत नीति संवाद, विशेषज्ञ आदान-प्रदान और विषयगत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका फोकस AI, डिजिटल परिवर्तन और सार्वजनिक क्षेत्र में नवाचार जैसे क्षेत्रों पर होगा, जिससे क्षमता निर्माण को वैश्विक सार्वजनिक हित के रूप में स्थापित किया जा सके।

विज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में पद्मश्री प्रो. अशुतोष शर्मा, प्रो. अभय करंदीकर (सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग), डॉ. राजेश एस. गोखले (सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग), डॉ. एम. रविचंद्रन (सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय) और अलका मित्तल (सदस्य, प्रशासन, क्षमता निर्माण आयोग) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मिशन कर्मयोगी के पांच वर्षीय लक्ष्य के तहत एक “भविष्य के लिए तैयार” सिविल सेवा का निर्माण किया जा रहा है, जो निरंतर सीखने, तकनीकी अपनाने और नागरिक-केंद्रित शासन पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण का प्रभाव सेवा वितरण और संस्थागत प्रदर्शन में स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए।


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