Media24Media.com: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम: ICAR का जलवायु-सहिष्णु कृषि पर जोर, गेहूं-जौ अनुसंधान से मजबूत होगी खाद्य सुरक्षा

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आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम: ICAR का जलवायु-सहिष्णु कृषि पर जोर, गेहूं-जौ अनुसंधान से मजबूत होगी खाद्य सुरक्षा

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नई दिल्ली/करनाल- आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) देश में संरक्षण कृषि (Conservation Agriculture) और जलवायु-सहिष्णु गेहूं व जौ प्रणाली पर बड़े स्तर पर शोध कर रही है। इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, किसानों की आय बढ़ाना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।

ICAR के महानिदेशक एवं DARE के सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने आज करनाल स्थित ICAR–गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) और मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) का दौरा कर चल रहे शोध कार्यों की समीक्षा की।

उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर फोकस

डॉ. जाट ने कहा कि भारत इस वर्ष गेहूं उत्पादन में बेहतर स्थिति में है और न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सहयोग देने में सक्षम है।

उन्होंने बताया कि ICAR का मुख्य लक्ष्य जलवायु-सहिष्णु और पोषक तत्वों से भरपूर फसल किस्में विकसित करना है, जिससे किसानों की आय और लोगों का स्वास्थ्य दोनों बेहतर हो सके।

बड़ी उपलब्धियां (Conservation Agriculture)

करनाल में चल रहे शोध से महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं:

  • 85% तक सिंचाई जल की बचत

  • 28% तक उर्वरक की कमी

  • 51% ईंधन की बचत

  • 95% तक पराली जलाने में कमी

  • 46% ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी

  • 33% तक उत्पादन में वृद्धि

  • किसानों की आय लगभग दोगुनी

पर्यावरण और मिट्टी की सेहत में सुधार

  • 15 वर्षों में मिट्टी की गुणवत्ता और जैविक कार्बन दोगुना

  • जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता मजबूत

  • कार्बन न्यूट्रल और “वन हेल्थ” लक्ष्य में योगदान

नई तकनीक: BNI (Biological Nitrification Inhibition)

  • उर्वरक उपयोग में 25% तक कमी संभव

  • उत्पादन पर कोई असर नहीं

  • अगर 25% क्षेत्र में लागू किया जाए तो
     हर साल ₹2000 करोड़ की बचत

गेहूं सुरक्षा और अनुसंधान

  • रस्ट (Rust) बीमारी से बचाव के लिए राष्ट्रीय निगरानी कार्यक्रम

  • 30+ संस्थानों का नेटवर्क, 1 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र कवर

  • हर साल 1000 से ज्यादा नई किस्मों का परीक्षण

जलवायु-सहिष्णु किस्में

  • जंगली प्रजातियों (Aegilops) के जरिए
    सूखा, गर्मी और लवणता सहने वाली नई किस्में विकसित

  • अब तक 55 बायोफोर्टिफाइड गेहूं किस्में जारी

  • 45% क्षेत्र में इनका उपयोग

जौ (Barley) की बढ़ती अहमियत

  • कम पानी और उर्वरक की जरूरत

  • स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद (हाई फाइबर)

  • फूड, फीड और इंडस्ट्री में बढ़ती मांग

आधुनिक खेती तकनीक

  • जीरो टिलेज, मशीन से बुवाई, अवशेष प्रबंधन

  • 6–10% उत्पादन बढ़ोतरी

  • 70–75% समय और ईंधन की बचत

निष्कर्ष

ICAR के ये प्रयास न केवल किसानों को सशक्त बना रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सतत और आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली की ओर भारत को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।

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