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सीपीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए DAKSH नेतृत्व कार्यक्रम के दूसरे बैच का नई दिल्ली में शुभारंभ

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केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसई) के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए प्रमुख नेतृत्व विकास कार्यक्रम DAKSH (Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony) के दूसरे बैच के उद्घाटन सत्र का आयोजन आज नई दिल्ली के स्कोप कन्वेंशन सेंटर में किया गया। यह कार्यक्रम क्षमता निर्माण आयोग (CBC) और स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (SCOPE) द्वारा संयुक्त रूप से मिशन कर्मयोगी के व्यापक ढांचे के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन समारोह में भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. पी. के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव;  के. मोसेस चालई, सचिव, सार्वजनिक उद्यम विभाग; रचना शाह, सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग;  एस. राधा चौहान, अध्यक्ष, क्षमता निर्माण आयोग; के. पी. महादेवस्वामी, अध्यक्ष, स्कोप;अतुल सोबती, महानिदेशक, स्कोप; तथा अलका मित्तल, सदस्य (प्रशासन), क्षमता निर्माण आयोग शामिल थे।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अतुल सोबती, महानिदेशक, स्कोप ने कहा कि DAKSH कार्यक्रम नेताओं को आत्ममंथन, तैयारी और स्वयं के रूपांतरण में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम नेतृत्व उभरने, रणनीतिक विकास और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के अवसर प्रदान करेगा।

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए अलका मित्तल, सदस्य, क्षमता निर्माण आयोग ने DAKSH के डिजाइन और उद्देश्यों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम 12 माह की एक परिवर्तनकारी नेतृत्व यात्रा के रूप में संरचित है, जिसमें डिजिटल लर्निंग, प्रमुख संस्थानों में कक्षा आधारित प्रशिक्षण, एक्जीक्यूटिव कोचिंग, लाइव एक्शन लर्निंग प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र शामिल हैं। उन्होंने जानकारी दी कि DAKSH के पहले बैच में 73 वरिष्ठ सीपीएसई अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया था, जबकि दूसरे बैच में ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं रक्षा, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, खनन एवं खनिज, विनिर्माण और निर्माण जैसे विविध क्षेत्रों से 72 प्रतिभागी शामिल हैं।

उन्होंने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रमुख उपलब्धियों को भी रेखांकित किया, जिनमें iGOT डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिकारियों का बड़े पैमाने पर ऑनबोर्डिंग, कर्मयोगी सप्ताह जैसे पहलों के माध्यम से आजीवन सीखने की संस्कृति का संस्थानीकरण, कर्मयोगी दक्षता मॉडल का विकास, प्रशिक्षण संस्थानों का प्रत्यायन तथा भारत-केंद्रित केस स्टडीज़ के राष्ट्रीय भंडार अमृत ज्ञान कोष का निर्माण शामिल है। सीपीएसई के लिए नेतृत्व विकास, दक्षता आधारित वृद्धि, प्रतिभा गतिशीलता और प्रौद्योगिकी-सक्षम अधिगम को प्राथमिक सुधार क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया।

मुख्य संबोधन देते हुए डॉ. पी. के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने भारत की विकास यात्रा में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के निर्माण में सीपीएसई ने आधारभूत भूमिका निभाई, जिससे आर्थिक वृद्धि, वित्तीय स्थिरता और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की नींव पड़ी। उन्होंने कहा कि कई दशकों तक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम भारत की विकास रणनीति की रीढ़ रहे।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि समय के साथ वैश्वीकरण, तकनीकी परिवर्तन और आर्थिक सुधारों ने वैश्विक एवं घरेलू आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बनाम निजी क्षेत्र के वर्चस्व पर होने वाली बहस अब एक समन्वित दृष्टिकोण में बदल गई है, जहां प्रतिस्पर्धा, दक्षता और नवाचार केंद्र में हैं। इस बदलते परिदृश्य में सीपीएसई से अपेक्षाएँ भी विकसित हुई हैं और उनसे अधिक चुस्ती के साथ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की सेवा करने की अपेक्षा की जाती है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत मुक्त व्यापार समझौतों और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था में गहराई से एकीकृत हो रहा है, सीपीएसई को न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम अनिश्चितता के समय में आर्थिक विकास में रणनीतिक भूमिका निभाते रहते हैं।

डॉ. मिश्रा ने वर्ष 2021 की सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें सीपीएसई को रणनीतिक और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां निजी उद्यमों की भूमिका बढ़ रही है, वहीं ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना और वित्त जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित, स्थिरता और लचीलेपन के लिए आवश्यक बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम उन बाजारों में संतुलनकारी भूमिका निभाते हैं जहां बाजार पूर्ण नहीं होते और जहां सार्वजनिक हित व राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू जुड़े होते हैं।

प्रौद्योगिकी और नवाचार के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि सीपीएसई को प्रौद्योगिकी उन्मुख और नवाचार प्रेरित बने रहना होगा। उन्होंने भारत के वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का उल्लेख करते हुए यूपीआई, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रौद्योगिकी अपनाने में सुधार और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, डेटा गवर्नेंस और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम नेतृत्व करने की बेहतर स्थिति में हैं, जहां राष्ट्रीय विश्वास और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता आवश्यक है।

नेतृत्व और मानव संसाधन पर जोर देते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि किसी भी संस्था की सफलता अंततः उसके नेतृत्व की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने निरंतर सीखने, अनुकूलन क्षमता और रणनीतिक सोच के महत्व पर बल दिया, विशेषकर तीव्र तकनीकी परिवर्तन के इस दौर में। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे DAKSH कार्यक्रम का उपयोग संगठनात्मक सीमाओं से परे दृष्टिकोण विकसित करने, निर्णय क्षमता मजबूत करने, सहयोगात्मक ढंग से कार्य करने और साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप टीम निर्माण के लिए करें।

इससे पहले के. मोसेस चालई, सचिव, सार्वजनिक उद्यम विभाग ने सीपीएसई के पैमाने और आर्थिक योगदान पर संक्षेप में प्रकाश डाला। उन्होंने जीडीपी में योगदान और केंद्रीय राजकोष में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक और घरेलू परिवर्तनों के बीच इस योगदान को बनाए रखने के लिए भविष्य के लिए तैयार नेतृत्व विकसित करना आवश्यक है, और DAKSH इस दिशा में एक समयोचित पहल है।

कार्यक्रम के अंत में जगदीप गुप्ता, सचिव, क्षमता निर्माण आयोग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और मिशन कर्मयोगी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए आयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।

DAKSH नेतृत्व कार्यक्रम को वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च नेतृत्व भूमिकाओं के लिए तैयार करने तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से परिकल्पित किया गया है।



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