Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

डिजिटल नवाचार के साथ भारत के डेयरी क्षेत्र का रूपांतरण: NDDB की प्रमुख पहलें

Document Thumbnail

 मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM) के अंतर्गत 35.68 करोड़ से अधिक पशुओं को “पशु आधार” जारी किया जा चुका है, जिससे पशुधन का ट्रेसेबल (पता लगाने योग्य) प्रबंधन संभव हुआ है।

  • स्वचालित दुग्ध संग्रह प्रणाली (AMCS) के माध्यम से 54 दुग्ध संघों से जुड़े 17.3 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को लाभ मिला है, जिससे पारदर्शी भुगतान और कुशल संचालन सुनिश्चित हुआ है।

  • लगभग 198 दुग्ध संघ और 15 फेडरेशन इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS) का उपयोग कर डेटा-आधारित निर्णय और प्रदर्शन बेंचमार्किंग कर रहे हैं।

  • GIS तकनीक आधारित दूध मार्ग अनुकूलन से कई राज्यों की सहकारी संस्थाओं को परिवहन लागत में उल्लेखनीय बचत और वितरण दक्षता में सुधार हुआ है।

परिचय

भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, जो वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग 25% योगदान देता है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र विस्तार कर रहा है, उत्पादकता, पारदर्शिता और किसानों के कल्याण को बेहतर बनाने में डिजिटल उपकरणों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) इस परिवर्तन में अग्रणी रहा है और उसने ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं जो डेयरी मूल्य श्रृंखला में किसानों, सहकारी संस्थाओं और अन्य हितधारकों को आपस में जोड़ते हैं। इन पहलों का उद्देश्य संचालन का आधुनिकीकरण करना, अक्षमताओं को कम करना और ट्रेसेबिलिटी को बढ़ाना है, जिससे दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत किया जा सके।

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM)

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM), जिसे NDDB द्वारा पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के सहयोग से लागू किया जा रहा है, “भारत पशुधन” नामक एकीकृत डिजिटल पशुधन पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डेटा-आधारित पशुधन प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए भारत पशुधन डेटाबेस में प्रजनन, कृत्रिम गर्भाधान, स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण और उपचार जैसी फील्ड गतिविधियों को दर्ज किया जाता है, जिनमें अब तक 84 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं। पशु चिकित्सक और विस्तार कार्यकर्ता जैसे फील्ड कर्मी किसानों को इस प्रणाली तक पहुंच बनाने में सहायता करते हैं।

NDLM में विशिष्ट पशु पहचान, डेटा एकीकरण और मोबाइल एप्लिकेशन जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जिससे किसानों को सशक्त बनाया जा सके और उत्पादकता बढ़ाई जा सके। इसका लक्ष्य भारत के प्रत्येक पशु को एक डिजिटल पहचान देना है, जिसे उसके स्वास्थ्य रिकॉर्ड और उत्पादकता डेटा से जोड़ा जा सके। इस मिशन के कार्यान्वयन के लिए NDDB राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के अनुरूप, सभी पशुधन को 12 अंकों वाले बारकोड युक्त टैग आईडी के रूप में कान के टैग जारी किए जा रहे हैं। इस विशिष्ट कोड को “पशु आधार” नाम दिया गया है, जो टीकाकरण, प्रजनन, उपचार आदि सभी प्रकार के लेन-देन को दर्ज करने की प्राथमिक कुंजी के रूप में कार्य करता है। इन सभी गतिविधियों को टैग आईडी के आधार पर एक ही स्थान पर देखा जा सकता है, जो किसानों तथा संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्सकों और फील्ड कर्मियों के लिए उपलब्ध रहता है। नवंबर 2025 तक 35.68 करोड़ से अधिक पशु आधार जारी किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के अंतर्गत 1962 ऐप किसानों को सर्वोत्तम प्रथाओं और सरकारी योजनाओं की प्रमाणिक जानकारी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, टोल-फ्री नंबर 1962 के माध्यम से किसान अपने घर पर ही मोबाइल वेटरनरी यूनिट के जरिए पशु चिकित्सा सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

स्वचालित दुग्ध संग्रह प्रणाली (AMCS)

भारत के सहकारी डेयरी मॉडल का केंद्र बिंदु लाखों किसानों से प्रतिदिन दूध का संग्रह है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी, कुशल और किसान-अनुकूल बनाने के लिए NDDB ने स्वचालित दुग्ध संग्रह प्रणाली (AMCS) विकसित की है, जो डेयरी सहकारी समितियों (DCS) के स्तर पर सभी संचालन को प्रबंधित करने वाला एक मजबूत और एकीकृत सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है।

AMCS दूध संग्रह को स्वचालित करता है, जिसमें मात्रा, गुणवत्ता और वसा प्रतिशत सहित प्रत्येक लेन-देन को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है और भुगतान तुरंत किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। ओपन-सोर्स तकनीक पर आधारित यह प्रणाली ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करती है, मैनुअल त्रुटियों को समाप्त करती है और सभी स्तरों पर पारदर्शिता को बढ़ावा देती है। किसानों को उनके दैनिक दूध विक्रय और भुगतान की जानकारी रियल-टाइम SMS के माध्यम से मिलती है, जबकि सहकारी संस्थाओं को बेहतर खरीद और उत्पादन योजना के लिए डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।

यह प्रणाली यूनियन, फेडरेशन और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत है तथा वित्तीय संस्थानों से जुड़ी हुई है। यह सभी हितधारकों के लिए मोबाइल-आधारित प्रमुख सूचना उपलब्ध कराती है। वर्तमान में 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित AMCS, 26,000 से अधिक डेयरी सहकारी समितियों को कवर करती है और 54 दुग्ध संघों से जुड़े 17.3 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचा रही है (22 अक्टूबर 2025 तक)।

AMCS के प्रमुख घटक इस प्रकार हैं:

  • DCS एप्लिकेशन: DCS स्तर पर सामान्य, बहुभाषी AMCS एप्लिकेशन, जो Windows / Linux और Android प्लेटफॉर्म पर कार्य करता है।

  • पोर्टल एप्लिकेशन: यूनियन, फेडरेशन और राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य केंद्रीकृत AMCS पोर्टल।

  • Android ऐप्स: सोसाइटी सचिव, डेयरी पर्यवेक्षक और किसान के लिए अलग-अलग सामान्य, बहुभाषी मोबाइल एप्लिकेशन।

यह Android-आधारित एप्लिकेशन किसानों के लिए डिजिटल पासबुक के रूप में तथा डेयरी सचिवों और पर्यवेक्षकों के लिए रियल-टाइम सूचना और अलर्ट प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है। अब तक 2.43 लाख से अधिक किसान, 1,374 पर्यवेक्षक और 13,644 सचिव (22 अक्टूबर 2025 तक) AMCS मोबाइल ऐप पर पंजीकृत हो चुके हैं।

NDDB डेयरी ERP (NDERP)

NDDB डेयरी ERP (NDERP) एक व्यापक, वेब-आधारित एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से डेयरी और खाद्य तेल उद्योग के लिए विकसित और अनुकूलित किया गया है। यह ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म (Frappe ERPNext) पर आधारित है और किसी भी सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन की आवश्यकता नहीं होती। इसे कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस के माध्यम से आसानी से एक्सेस किया जा सकता है। वितरकों के लिए यह Android और iOS (mNDERP) पर भी उपलब्ध है और बिना किसी लाइसेंस शुल्क के एक पूर्ण एवं किफायती समाधान प्रदान करता है।

iNDERP पोर्टल (https://inderp.nddb.coop) वितरकों के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो NDERP से एकीकृत है। इसके माध्यम से वे ऑर्डर, डिलीवरी चालान, इनवॉइस और भुगतान का कुशल प्रबंधन कर सकते हैं। वितरक डिलीवरी ट्रैक कर सकते हैं, बकाया राशि देख सकते हैं और सीधे इनवॉइस डाउनलोड कर सकते हैं, जिससे दुग्ध संघों और फेडरेशनों के साथ समन्वय बेहतर होता है।

mNDERP मोबाइल ऐप Android और iOS पर उपलब्ध है और चलते-फिरते वितरकों को वही सुविधाएं प्रदान करता है जो iNDERP में उपलब्ध हैं।

NDERP में वित्त एवं लेखा, खरीद, इन्वेंटरी, बिक्री एवं विपणन, विनिर्माण, मानव संसाधन एवं वेतन जैसे सभी प्रमुख मॉड्यूल शामिल हैं, जो उन्नत वर्कफ़्लो और मेकर-चेकर सुविधाओं से युक्त हैं। यह प्रणाली AMCS के साथ एकीकृत होकर “गाय से उपभोक्ता तक” एक एंड-टू-एंड डिजिटल समाधान प्रदान करती है। उत्पादन मॉड्यूल में मास-बैलेंसिंग तकनीक का उपयोग कर प्रसंस्करण हानि को कम किया जाता है।

सीमेन स्टेशन प्रबंधन प्रणाली (SSMS)

सीमेन स्टेशन प्रबंधन प्रणाली (SSMS) एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे फ्रोजन सीमेन डोज (FSD) के उत्पादन को सुव्यवस्थित करने और भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल (MSP) तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली बैल जीवनचक्र प्रबंधन, सीमेन उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, जैव-सुरक्षा, फार्म और चारा प्रबंधन तथा बिक्री ट्रैकिंग जैसी सभी मुख्य गतिविधियों को कवर करती है।

SSMS को सूचना नेटवर्क फॉर सीमेन प्रोडक्शन एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (INSPRM) से जोड़ा गया है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर रियल-टाइम डेटा साझा किया जा सकता है। यह प्रणाली INAPH जैसे फील्ड-लेवल प्लेटफॉर्म से भी जुड़ी हुई है और देशभर में आपूर्ति किए गए सीमेन डोज की पूर्ण ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करती है। वर्तमान में भारत के 38 ग्रेडेड सीमेन स्टेशन SSMS का उपयोग कर रहे हैं।

INAPH

सूचना नेटवर्क फॉर एनिमल प्रोडक्टिविटी एंड हेल्थ (INAPH) एक ऐसा एप्लिकेशन है, जो किसानों के घर तक पहुंचाई जाने वाली प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित रियल-टाइम, विश्वसनीय डेटा को दर्ज करने में मदद करता है। यह परियोजनाओं की प्रगति के आकलन और निगरानी में सहायक है।

इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS)

डेयरी क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित योजना और सूचित निर्णय के लिए कुशल डेटा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। NDDB द्वारा विकसित इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS) दुग्ध सहकारी समितियों, संघों, फेडरेशनों और अन्य संबद्ध इकाइयों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करती है।

वर्तमान में लगभग 198 दुग्ध संघ, 29 विपणन डेयरियां, 54 पशु आहार संयंत्र और 15 फेडरेशन i-DIS का हिस्सा हैं। यह प्रणाली एक विश्वसनीय राष्ट्रीय सहकारी डेयरी उद्योग डेटाबेस तैयार करने में सहायक है और रणनीतिक निर्णय व नीति निर्माण को समर्थन देती है।

दूध मार्ग अनुकूलन (Milk Route Optimisation)

दूध का कुशल संग्रह और वितरण डेयरी आपूर्ति श्रृंखला की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे अधिक किफायती और व्यवस्थित बनाने के लिए NDDB ने GIS तकनीक आधारित दूध मार्ग अनुकूलन की शुरुआत की है। यह डिजिटल तरीका मैनुअल योजना को प्रतिस्थापित कर डिजिटाइज्ड मानचित्रों पर मार्गों की योजना बनाने में मदद करता है।

GIS आधारित योजना से दूरी, ईंधन लागत और समय में कमी आती है। अगस्त 2022 में विदर्भ मराठवाड़ा डेयरी विकास परियोजना के अंतर्गत किए गए मार्ग पुनःडिज़ाइन से उल्लेखनीय बचत हुई। इसी प्रकार वाराणसी, पश्चिम असम, झारखंड और इंदौर दुग्ध संघों में भी सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

NDDB ने सहकारी संस्थाओं के लिए एक निःशुल्क वेब-आधारित डायनामिक रूट प्लानिंग सॉफ्टवेयर भी विकसित किया है, जिससे रियल-टाइम मार्ग योजना और बेहतर संचालन नियंत्रण संभव हो सके।

निष्कर्ष

भारत का डेयरी क्षेत्र, जो वैश्विक दूध उत्पादन का एक चौथाई योगदान देता है, NDDB के नेतृत्व में तेज़ी से डिजिटल रूपांतरण की ओर बढ़ रहा है। NDLM, AMCS, NDERP, SSMS, i-DIS और रूट अनुकूलन जैसे एकीकृत प्लेटफॉर्म न केवल संचालन दक्षता और पारदर्शिता बढ़ा रहे हैं, बल्कि लाखों छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ रहे हैं।

सहकारी शक्ति और डिजिटल नवाचार के संयोजन से भारत टिकाऊ डेयरी विकास में नए मानक स्थापित कर रहा है, जहाँ हर लीटर दूध और हर पशु एक जुड़ी हुई, ट्रेसेबल और कुशल मूल्य श्रृंखला का हिस्सा है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.