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सहकारिता क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-हितैषी बनाने सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री केदार कश्यप

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मंत्री ने की विभागीय कामकाज की समीक्षा ,किसानों के हित में दिए कड़े निर्देश

​रायपुर- ​सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) के सभाकक्ष में सहकारिता विभाग की एक महत्वपूर्ण एवं उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई।  इस बैठक में विभाग की 16 प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और मैदानी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

समीक्षा बैठक के दौरान सहकारिता के सुदृढ़ीकरण पर जोर देते हुए सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-हितैषी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। हमारा मुख्य ध्येय प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के माध्यम से अंतिम व्यक्ति और प्रदेश के प्रत्येक किसान तक शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना है। डिजिटलाइजेशन और आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से किसानों का भरोसा सहकारिता प्रणाली पर और मजबूत होगा।

​प्रमुख योजनाओं की समीक्षा एवं कड़े निर्देश:

​बैठक में उपस्थित अधिकारियों, प्रबंध संचालकों, संभागीय संयुक्त आयुक्तों, उप/सहायक आयुक्तों तथा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को मंत्री श्री कश्यप ने निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। 

बैठक में मंत्री केदार कश्यप ने छतीसगढ़ में डेयरी तथा मत्स्य सोसाइटियों के कार्य प्रणाली को सक्रिय करने का निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि छत्तीसगढ़ में दुग्ध सोसाइटियों को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ एओयू के तहत कार्ययोजना बनाकर दुग्ध उत्पादन तथा प्रसंस्करण करने के निर्देश दिए।

डिजिटलाइजेशन एवं पारदर्शिता: पैक्स (PACS) के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए ताकि वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रहे।

​किसान कल्याण व ऋण-खाद वितरण: अल्पकालीन कृषि ऋणों पर ब्याज अनुदान, समय पर उर्वरक (खाद), बीज एवं ऋण वितरण सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई। प्रदेश के किसानों को कोआपरेटिव्ह बैंको के माध्यम से चालू खरीफ सीजन 2026 हेतु 8800 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 14 लाख से अधिक किसानों को 6932 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया जा चुका है, जो कि लक्ष्य का 79 प्रतिशत है। बैठक में मंत्री कश्यप द्वारा अधिकारियों को शत-प्रतिशत कृषि ऋण वितरण के निर्देश दिया गया।

​बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार: ग्रामीण अंचलों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का विस्तार करने तथा माइक्रो ए.टी.एम. की उपलब्धता बढ़ाकर डिजिटल बैंकिंग को सुलभ बनाने पर बल दिया गया।

​गोदाम निर्माण एवं नवगठित पैक्स 100 सोसायटियों में गोदाम निर्माण व RIDF योजना के तहत स्वीकृत निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई, साथ ही नवगठित 515 पैक्स के सुचारू संचालन के निर्देश दिए गए। बैठक में आराईडीएफ अंतर्गत  आबंटित 725 गोदामों में 712 गोदामों के निर्माण पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। शेष 13 गोदाम के जल्द ही निर्माण पूर्ण किये जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया।

जन-शिकायतें एवं ई-ऑफिस सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, न्यायालयीन मामलों में समय पर जवाबदावा प्रस्तुत करने तथा कार्यालयों में ई-ऑफिस और आधार-बेस्ड उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए गए।

​धान उपार्जन का अंतिम निराकरण: धान उपार्जन केंद्रों में शेष बचे धान का शीघ्र एवं पारदर्शी तरीके से अंतिम निराकरण करने के आदेश दिए गए।

​बैठक के अंत में मंत्री केदार कश्यप ने सभी विभागीय अधिकारियों को जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता के साथ शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों एवं सहकारिता क्षेत्र से जुड़े आम नागरिकों तक पहुंचाने का निर्देश दिये।

इस अवसर पर सचिव सहकारिता डॉ सी.आर प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता व पंजीयक सहकारी संस्थाए छत्तीसगढ़ रमेश शर्मा, मार्कफेड एमडी जितेंद्र शुक्ला,अपेक्स बैंक प्रबंध संचालक के एन कांडे, अपर पंजीयक यू बीएस राठिया, अपर पंजीयक सावित्री भगत व सहकारिता विभाग व अपेक्स बैंक के अधिकारीगण तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के सीईओ उपस्थित रहे।

धान उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने राज्यभर में सघन कार्रवाई

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अवैध परिवहन, भंडारण व मिलिंग पर प्रशासन सख़्त, कई जिलों में बड़ी कार्रवाई

रायपुर- छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और किसान-केंद्रित बनाए रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अवैध धान परिवहन, भंडारण, विक्रय एवं मिलिंग अनियमितताओं के विरुद्ध राज्यभर में व्यापक और सघन अभियान चलाया जा रहा है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप राजस्व, खाद्य, मंडी एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा अंतर्राज्यीय सीमाओं, धान खरीदी केंद्रों, राइस मिलों एवं संदिग्ध स्थलों पर सतत निगरानी रखते हुए कठोर कार्रवाई की जा रही है, ताकि धान उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही सुनिश्चित हो सके।

खाद्य सचिव रीना कंगाले ने कहा कि राज्य सरकार धान उपार्जन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और किसान-हितैषी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अवैध परिवहन, भंडारण, बिक्री अथवा मिलिंग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने  कहा कि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि धान उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों को ही मिले। बिचौलियों, फर्जी टोकन, मिलावट, अंतर्राज्यीय अवैध परिवहन और कस्टम मिलिंग में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध प्रारंभिक स्तर पर ही सख़्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्यभर में राजस्व, खाद्य, मंडी और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा सतत निगरानी एवं भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहाँ संबंधित व्यक्ति, संस्था अथवा मिल संचालक के विरुद्ध छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। खाद्य सचिव ने दोहराया कि किसानों के हितों की रक्षा और धान खरीदी व्यवस्था की शुचिता बनाए रखना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी क्रम में महासमुंद जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार अवैध धान परिवहन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए सरायपाली विकासखंड अंतर्गत रेहटीखोल क्षेत्र में बीती रात संयुक्त टीम द्वारा एक ट्रक से 694 बोरा धान जब्त किया गया। जब्त धान का कुल वजन लगभग 319 क्विंटल पाया गया। जांच के दौरान यह पाया गया कि उक्त ट्रक में उड़ीसा से छत्तीसगढ़ की ओर बिना किसी वैध दस्तावेज के धान का परिवहन किया जा रहा था। परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर धान से भरे ट्रक को मौके पर ही जब्त कर आगे की वैधानिक कार्रवाई हेतु थाना सिंघोड़ा के सुपुर्द किया गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंतर्राज्यीय सीमाओं पर अवैध धान परिवहन रोकने के लिए सतत निगरानी रखी जा रही है तथा संदिग्ध वाहनों की गहन जांच की जा रही है, ताकि धान खरीदी प्रणाली की शुचिता बनी रहे।

धान उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के तहत धमतरी जिले में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति मर्यादित मोहदी के समिति प्रबंधक एवं ऑपरेटर को सेवा से पृथक कर दिया गया है। निरीक्षण के दौरान मिलावटयुक्त धान, टोकन का दुरुपयोग एवं अवैध बिक्री के प्रकरण सामने आए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि धान उपार्जन व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध प्रारंभिक स्तर पर ही कठोर कार्रवाई की जा रही है, ताकि उपार्जन का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही सीमित रहे और बिचौलियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

इसी प्रकार  13 जनवरी 2026 को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में राजस्व, खाद्य एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम बिलारी (सोनाखान) में अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे 75 कट्टा धान सहित एक पिकअप वाहन जब्त कर पुलिस थाना सलीहा-बिलाईगढ़ के सुपुर्द किया।

सरगुजा जिले में कलेक्टर के निर्देशन में राइस मिलों का सघन भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में राजेश राइस मिल खोडरी एवं सिद्धिविनायक राइस मिल दरिमा में धान की भारी कमी पाई गई। कस्टम मिलिंग आदेश 2016 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत संबंधित मिलों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

महासमुंद जिले में अलग-अलग स्थानों पर की गई कार्रवाई के दौरान संयुक्त टीम द्वारा कुल 217 कट्टा धान एवं एक पिकअप वाहन जब्त किया गया। अवैध परिवहन एवं भंडारण के मामलों में मंडी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में महासमुंद जिले में अब तक की गई कार्रवाई में बीते दो दिनों में कुल 2986 कट्टा अवैध धान जब्त किया गया है। कलेक्टर द्वारा अंतर्राज्यीय जांच चौकी टेमरी, नर्रा एवं खट्टी सहित धान खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर सख़्त निर्देश दिए गए हैं। पिथौरा, बसना एवं सरायपाली क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकरणों में बड़ी मात्रा में अवैध एवं संदिग्ध धान जब्त कर संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कई मामलों में धान को पुलिस थाना के सुपुर्द किया गया है।

बिलासपुर जिले में धान उठाव में गंभीर गड़बड़ी सामने आने पर अमरनाथ एग्रो प्रोडक्ट राइस मिल पर बड़ी कार्रवाई करते हुए मिल को सील किया गया तथा संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। मौके से 54 हजार क्विंटल से अधिक धान जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 16 करोड़ रुपये है। भौतिक सत्यापन में कस्टम मिलिंग के लिए जारी धान की तुलना में हजारों क्विंटल धान की कमी पाई गई। दो दिनों तक चली गहन जांच के बाद अनियमितता की पुष्टि होते ही तत्काल कार्रवाई की गई। खाद्य विभाग के अनुसार बिलासपुर जिले में अब तक 56 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का धान जब्त किया जा चुका है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016 के उल्लंघन के अंतर्गत की गई है। जिला प्रशासन ने दो टूक कहा है कि धान खरीदी, परिवहन, भंडारण एवं मिलिंग में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों, संस्थाओं एवं मिल संचालकों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डिजिटल नवाचार के साथ भारत के डेयरी क्षेत्र का रूपांतरण: NDDB की प्रमुख पहलें

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 मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM) के अंतर्गत 35.68 करोड़ से अधिक पशुओं को “पशु आधार” जारी किया जा चुका है, जिससे पशुधन का ट्रेसेबल (पता लगाने योग्य) प्रबंधन संभव हुआ है।

  • स्वचालित दुग्ध संग्रह प्रणाली (AMCS) के माध्यम से 54 दुग्ध संघों से जुड़े 17.3 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को लाभ मिला है, जिससे पारदर्शी भुगतान और कुशल संचालन सुनिश्चित हुआ है।

  • लगभग 198 दुग्ध संघ और 15 फेडरेशन इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS) का उपयोग कर डेटा-आधारित निर्णय और प्रदर्शन बेंचमार्किंग कर रहे हैं।

  • GIS तकनीक आधारित दूध मार्ग अनुकूलन से कई राज्यों की सहकारी संस्थाओं को परिवहन लागत में उल्लेखनीय बचत और वितरण दक्षता में सुधार हुआ है।

परिचय

भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, जो वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग 25% योगदान देता है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र विस्तार कर रहा है, उत्पादकता, पारदर्शिता और किसानों के कल्याण को बेहतर बनाने में डिजिटल उपकरणों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) इस परिवर्तन में अग्रणी रहा है और उसने ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं जो डेयरी मूल्य श्रृंखला में किसानों, सहकारी संस्थाओं और अन्य हितधारकों को आपस में जोड़ते हैं। इन पहलों का उद्देश्य संचालन का आधुनिकीकरण करना, अक्षमताओं को कम करना और ट्रेसेबिलिटी को बढ़ाना है, जिससे दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत किया जा सके।

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM)

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM), जिसे NDDB द्वारा पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के सहयोग से लागू किया जा रहा है, “भारत पशुधन” नामक एकीकृत डिजिटल पशुधन पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डेटा-आधारित पशुधन प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए भारत पशुधन डेटाबेस में प्रजनन, कृत्रिम गर्भाधान, स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण और उपचार जैसी फील्ड गतिविधियों को दर्ज किया जाता है, जिनमें अब तक 84 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं। पशु चिकित्सक और विस्तार कार्यकर्ता जैसे फील्ड कर्मी किसानों को इस प्रणाली तक पहुंच बनाने में सहायता करते हैं।

NDLM में विशिष्ट पशु पहचान, डेटा एकीकरण और मोबाइल एप्लिकेशन जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जिससे किसानों को सशक्त बनाया जा सके और उत्पादकता बढ़ाई जा सके। इसका लक्ष्य भारत के प्रत्येक पशु को एक डिजिटल पहचान देना है, जिसे उसके स्वास्थ्य रिकॉर्ड और उत्पादकता डेटा से जोड़ा जा सके। इस मिशन के कार्यान्वयन के लिए NDDB राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के अनुरूप, सभी पशुधन को 12 अंकों वाले बारकोड युक्त टैग आईडी के रूप में कान के टैग जारी किए जा रहे हैं। इस विशिष्ट कोड को “पशु आधार” नाम दिया गया है, जो टीकाकरण, प्रजनन, उपचार आदि सभी प्रकार के लेन-देन को दर्ज करने की प्राथमिक कुंजी के रूप में कार्य करता है। इन सभी गतिविधियों को टैग आईडी के आधार पर एक ही स्थान पर देखा जा सकता है, जो किसानों तथा संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्सकों और फील्ड कर्मियों के लिए उपलब्ध रहता है। नवंबर 2025 तक 35.68 करोड़ से अधिक पशु आधार जारी किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के अंतर्गत 1962 ऐप किसानों को सर्वोत्तम प्रथाओं और सरकारी योजनाओं की प्रमाणिक जानकारी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, टोल-फ्री नंबर 1962 के माध्यम से किसान अपने घर पर ही मोबाइल वेटरनरी यूनिट के जरिए पशु चिकित्सा सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

स्वचालित दुग्ध संग्रह प्रणाली (AMCS)

भारत के सहकारी डेयरी मॉडल का केंद्र बिंदु लाखों किसानों से प्रतिदिन दूध का संग्रह है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी, कुशल और किसान-अनुकूल बनाने के लिए NDDB ने स्वचालित दुग्ध संग्रह प्रणाली (AMCS) विकसित की है, जो डेयरी सहकारी समितियों (DCS) के स्तर पर सभी संचालन को प्रबंधित करने वाला एक मजबूत और एकीकृत सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है।

AMCS दूध संग्रह को स्वचालित करता है, जिसमें मात्रा, गुणवत्ता और वसा प्रतिशत सहित प्रत्येक लेन-देन को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है और भुगतान तुरंत किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। ओपन-सोर्स तकनीक पर आधारित यह प्रणाली ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करती है, मैनुअल त्रुटियों को समाप्त करती है और सभी स्तरों पर पारदर्शिता को बढ़ावा देती है। किसानों को उनके दैनिक दूध विक्रय और भुगतान की जानकारी रियल-टाइम SMS के माध्यम से मिलती है, जबकि सहकारी संस्थाओं को बेहतर खरीद और उत्पादन योजना के लिए डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।

यह प्रणाली यूनियन, फेडरेशन और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत है तथा वित्तीय संस्थानों से जुड़ी हुई है। यह सभी हितधारकों के लिए मोबाइल-आधारित प्रमुख सूचना उपलब्ध कराती है। वर्तमान में 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित AMCS, 26,000 से अधिक डेयरी सहकारी समितियों को कवर करती है और 54 दुग्ध संघों से जुड़े 17.3 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचा रही है (22 अक्टूबर 2025 तक)।

AMCS के प्रमुख घटक इस प्रकार हैं:

  • DCS एप्लिकेशन: DCS स्तर पर सामान्य, बहुभाषी AMCS एप्लिकेशन, जो Windows / Linux और Android प्लेटफॉर्म पर कार्य करता है।

  • पोर्टल एप्लिकेशन: यूनियन, फेडरेशन और राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य केंद्रीकृत AMCS पोर्टल।

  • Android ऐप्स: सोसाइटी सचिव, डेयरी पर्यवेक्षक और किसान के लिए अलग-अलग सामान्य, बहुभाषी मोबाइल एप्लिकेशन।

यह Android-आधारित एप्लिकेशन किसानों के लिए डिजिटल पासबुक के रूप में तथा डेयरी सचिवों और पर्यवेक्षकों के लिए रियल-टाइम सूचना और अलर्ट प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है। अब तक 2.43 लाख से अधिक किसान, 1,374 पर्यवेक्षक और 13,644 सचिव (22 अक्टूबर 2025 तक) AMCS मोबाइल ऐप पर पंजीकृत हो चुके हैं।

NDDB डेयरी ERP (NDERP)

NDDB डेयरी ERP (NDERP) एक व्यापक, वेब-आधारित एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से डेयरी और खाद्य तेल उद्योग के लिए विकसित और अनुकूलित किया गया है। यह ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म (Frappe ERPNext) पर आधारित है और किसी भी सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन की आवश्यकता नहीं होती। इसे कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस के माध्यम से आसानी से एक्सेस किया जा सकता है। वितरकों के लिए यह Android और iOS (mNDERP) पर भी उपलब्ध है और बिना किसी लाइसेंस शुल्क के एक पूर्ण एवं किफायती समाधान प्रदान करता है।

iNDERP पोर्टल (https://inderp.nddb.coop) वितरकों के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो NDERP से एकीकृत है। इसके माध्यम से वे ऑर्डर, डिलीवरी चालान, इनवॉइस और भुगतान का कुशल प्रबंधन कर सकते हैं। वितरक डिलीवरी ट्रैक कर सकते हैं, बकाया राशि देख सकते हैं और सीधे इनवॉइस डाउनलोड कर सकते हैं, जिससे दुग्ध संघों और फेडरेशनों के साथ समन्वय बेहतर होता है।

mNDERP मोबाइल ऐप Android और iOS पर उपलब्ध है और चलते-फिरते वितरकों को वही सुविधाएं प्रदान करता है जो iNDERP में उपलब्ध हैं।

NDERP में वित्त एवं लेखा, खरीद, इन्वेंटरी, बिक्री एवं विपणन, विनिर्माण, मानव संसाधन एवं वेतन जैसे सभी प्रमुख मॉड्यूल शामिल हैं, जो उन्नत वर्कफ़्लो और मेकर-चेकर सुविधाओं से युक्त हैं। यह प्रणाली AMCS के साथ एकीकृत होकर “गाय से उपभोक्ता तक” एक एंड-टू-एंड डिजिटल समाधान प्रदान करती है। उत्पादन मॉड्यूल में मास-बैलेंसिंग तकनीक का उपयोग कर प्रसंस्करण हानि को कम किया जाता है।

सीमेन स्टेशन प्रबंधन प्रणाली (SSMS)

सीमेन स्टेशन प्रबंधन प्रणाली (SSMS) एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे फ्रोजन सीमेन डोज (FSD) के उत्पादन को सुव्यवस्थित करने और भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल (MSP) तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली बैल जीवनचक्र प्रबंधन, सीमेन उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, जैव-सुरक्षा, फार्म और चारा प्रबंधन तथा बिक्री ट्रैकिंग जैसी सभी मुख्य गतिविधियों को कवर करती है।

SSMS को सूचना नेटवर्क फॉर सीमेन प्रोडक्शन एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (INSPRM) से जोड़ा गया है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर रियल-टाइम डेटा साझा किया जा सकता है। यह प्रणाली INAPH जैसे फील्ड-लेवल प्लेटफॉर्म से भी जुड़ी हुई है और देशभर में आपूर्ति किए गए सीमेन डोज की पूर्ण ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करती है। वर्तमान में भारत के 38 ग्रेडेड सीमेन स्टेशन SSMS का उपयोग कर रहे हैं।

INAPH

सूचना नेटवर्क फॉर एनिमल प्रोडक्टिविटी एंड हेल्थ (INAPH) एक ऐसा एप्लिकेशन है, जो किसानों के घर तक पहुंचाई जाने वाली प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित रियल-टाइम, विश्वसनीय डेटा को दर्ज करने में मदद करता है। यह परियोजनाओं की प्रगति के आकलन और निगरानी में सहायक है।

इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS)

डेयरी क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित योजना और सूचित निर्णय के लिए कुशल डेटा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। NDDB द्वारा विकसित इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS) दुग्ध सहकारी समितियों, संघों, फेडरेशनों और अन्य संबद्ध इकाइयों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करती है।

वर्तमान में लगभग 198 दुग्ध संघ, 29 विपणन डेयरियां, 54 पशु आहार संयंत्र और 15 फेडरेशन i-DIS का हिस्सा हैं। यह प्रणाली एक विश्वसनीय राष्ट्रीय सहकारी डेयरी उद्योग डेटाबेस तैयार करने में सहायक है और रणनीतिक निर्णय व नीति निर्माण को समर्थन देती है।

दूध मार्ग अनुकूलन (Milk Route Optimisation)

दूध का कुशल संग्रह और वितरण डेयरी आपूर्ति श्रृंखला की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे अधिक किफायती और व्यवस्थित बनाने के लिए NDDB ने GIS तकनीक आधारित दूध मार्ग अनुकूलन की शुरुआत की है। यह डिजिटल तरीका मैनुअल योजना को प्रतिस्थापित कर डिजिटाइज्ड मानचित्रों पर मार्गों की योजना बनाने में मदद करता है।

GIS आधारित योजना से दूरी, ईंधन लागत और समय में कमी आती है। अगस्त 2022 में विदर्भ मराठवाड़ा डेयरी विकास परियोजना के अंतर्गत किए गए मार्ग पुनःडिज़ाइन से उल्लेखनीय बचत हुई। इसी प्रकार वाराणसी, पश्चिम असम, झारखंड और इंदौर दुग्ध संघों में भी सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

NDDB ने सहकारी संस्थाओं के लिए एक निःशुल्क वेब-आधारित डायनामिक रूट प्लानिंग सॉफ्टवेयर भी विकसित किया है, जिससे रियल-टाइम मार्ग योजना और बेहतर संचालन नियंत्रण संभव हो सके।

निष्कर्ष

भारत का डेयरी क्षेत्र, जो वैश्विक दूध उत्पादन का एक चौथाई योगदान देता है, NDDB के नेतृत्व में तेज़ी से डिजिटल रूपांतरण की ओर बढ़ रहा है। NDLM, AMCS, NDERP, SSMS, i-DIS और रूट अनुकूलन जैसे एकीकृत प्लेटफॉर्म न केवल संचालन दक्षता और पारदर्शिता बढ़ा रहे हैं, बल्कि लाखों छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ रहे हैं।

सहकारी शक्ति और डिजिटल नवाचार के संयोजन से भारत टिकाऊ डेयरी विकास में नए मानक स्थापित कर रहा है, जहाँ हर लीटर दूध और हर पशु एक जुड़ी हुई, ट्रेसेबल और कुशल मूल्य श्रृंखला का हिस्सा है।

6वां अंतर्राष्ट्रीय एग्रोनॉमी कांग्रेस (IAC–2025) का उद्घाटन: कृषि में स्मार्ट, सतत और लाभप्रद समाधान पर जोर

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6वें अंतर्राष्ट्रीय एग्रोनॉमी कांग्रेस (IAC–2025) का भव्य उद्घाटन आज एनपीएल ऑडिटोरियम, पुरसा कैंपस, नई दिल्ली में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, शिवराज सिंह चौहान की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह तीन दिवसीय वैश्विक कार्यक्रम (24–26 नवम्बर 2025) भारतीय एग्रोनॉमी सोसाइटी (ISA) द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) और ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

कांग्रेस में भारत और विदेशों से 1,000 से अधिक वैज्ञानिक, नीति निर्माता, छात्र, विकास साझेदार और उद्योग विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, FAO, CIMMYT, ICRISAT, IRRI, ICARDA और IFDC जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के वैज्ञानिक भी इसमें उपस्थित हैं।

उद्घाटन सत्र में, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “Viksit Bharat @2047 की नींव स्मार्ट, सतत और लाभप्रद कृषि में है। कृषि को कम संसाधनों में अधिक उत्पादन करने और भविष्य के लिए संरक्षण करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। एग्रोनॉमी वह पुल है जो वैज्ञानिक अनुसंधान को किसान के खेत से जोड़ता है।” उन्होंने मिट्टी की सेहत, जल उपयोग दक्षता, जैव विविधता, इको-न्यूट्रिशन और डिजिटल कृषि पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने IAC–2025 घोषणापत्र जारी किया, जिसमें प्रमुख सिफारिशें शामिल हैं:

  • मिट्टी में कार्बन संचयन और जल-दक्ष खेती को बढ़ावा देना

  • AI आधारित डिजिटल कृषि समाधान और Agri-Stack फ्रेमवर्क को बढ़ाना

  • प्राकृतिक और पुनर्योजी कृषि मॉडलों को मुख्यधारा में लाना

  • युवा और महिला किसानों के लिए लक्षित नवाचार कार्यक्रम

  • स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर अगली पीढ़ी की एग्रोनॉमी शिक्षा

  • One-Health, LiFE मिशन और Net-Zero 2070 के अनुरूप कृषि रणनीतियाँ

  • भारतीय जलवायु-स्मार्ट कृषि मॉडलों का वैश्विक प्रचार

कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा, “एग्रोनॉमी को किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान बनाना होगा। इसका अंतिम उद्देश्य किसान की आय, पर्यावरण सुरक्षा और पोषण गुणवत्ता बढ़ाना है।” उन्होंने वर्षा पर निर्भर कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, महिला सहभागिता, युवा-नेतृत्व वाले नवाचार और ग्रामीण माइक्रो-उद्यमों को सशक्त करने पर बल दिया।

कांग्रेस में 10 प्रमुख थीमैटिक सिम्पोजिया आयोजित किए जाएंगे, जिनमें वैज्ञानिक प्रस्तुतियाँ शामिल होंगी:

  • जलवायु-प्रतिरोधी और कार्बन-न्यूट्रल कृषि

  • प्राकृतिक समाधान और One-Health

  • सटीक इनपुट प्रबंधन और संसाधन दक्षता

  • आनुवंशिक क्षमता का उपयोग

  • ऊर्जा-कुशल मशीनरी, डिजिटल समाधान और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन

  • पोषण-संवेदनशील कृषि और इको-न्यूट्रिशन

  • लिंग सशक्तिकरण और आजीविका विविधीकरण

  • Agriculture 5.0, अगली पीढ़ी की शिक्षा और Viksit Bharat 2047

  • युवा वैज्ञानिक और छात्र सम्मेलन

ICAR के सचिव और DARE के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जात ने कहा, “भारत की एग्रोनॉमी अनुसंधान विश्व स्तरीय जलवायु-स्मार्ट कृषि का नेतृत्व कर रही है। IAC–2025 के परिणाम ICAR Vision–2050 में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”

यह मंच G20, FAO, CGIAR और साउथ–साउथ कोऑपरेशन के साथ साझेदारी को और मजबूत करेगा और वैश्विक कृषि नवाचार एवं स्थिरता के नए मार्ग खोलेगा।

सरकार की किसान हितैषी नीतियों से बढ़ा किसानों का भरोसा

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तुंहर टोकन मोबाइल ऐप से मिल रही घर बैठे टोकन की सुविधा :रामसाय यादव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में धान खरीदी का महापर्व इस वर्ष भी सुगमता और पारदर्शिता के साथ मनाया जा रहा है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी ने किसानों के बीच नई उम्मीद और उत्साह जगाया है। प्रदेश के किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाकर संतुष्ट हैं तथा बड़ी संख्या में धान खरीदी केंद्रों में पहुँचकर विक्रय कर रहे हैं। प्रशासन ने सभी केंद्रों में किसानों की सुविधा के लिए बेहतर और सुव्यवस्थित प्रबंध सुनिश्चित किए हैं।

जांजगीर चांपा जिले के खरौद के किसान रामसाय यादव आज धान उपार्जन केंद्र खरौद में धान विक्रय के लिए पहुँचे। केंद्र पहुँचने पर जिला कलेक्टर  ने उन्हें फूल-माला पहनाकर और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। रामसाय यादव ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस वर्ष धान खरीदी व्यवस्था पहले से कहीं अधिक बेहतर और किसान-मित्र साबित हो रही है।

उन्होंने बताया कि धान खरीदी से एक दिन पूर्व ही उन्होंने तुंहर टोकन मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर लिया था। पहले टोकन जारी होने के लिए सोसायटी में घंटों इंतजार करना पड़ता था, परंतु अब डिजिटल व्यवस्था से किसानों को बड़ी राहत मिली है।

रामसाय यादव ने लगभग 15 क्विंटल धान का विक्रय किया। उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्र में नमी परीक्षण, बारदाना उपलब्धता, धान भराई, तौल और पर्ची निर्गत— सभी प्रक्रियाएँ समयबद्ध और बिना किसी परेशानी के संपन्न हुईं।

उन्होंने कहा कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीदी सीमा जैसे निर्णय किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं, जिससे खेती अब और अधिक आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है।

सरकार की किसान हितैषी नीतियों और डिजिटल सेवाओं के कारण किसानों में भरोसा और उत्साह लगातार बढ़ रहा है।

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