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23 मार्च 2026 को क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी शुरू करेंगे केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी

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नई दिल्ली- केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे 23 मार्च 2026 को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी (7th Tranche) की शुरुआत करेंगे।

देश के आर्थिक विकास और खनिज सुरक्षा के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर बढ़ते रुझान के कारण लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), टंगस्टन, वैनेडियम, टाइटेनियम जैसे खनिजों की मांग तेजी से बढ़ी है। इनकी सीमित उपलब्धता और कुछ क्षेत्रों में केंद्रित भंडार वैश्विक सप्लाई चेन के लिए चुनौती बन रहे हैं।

इन खनिजों के महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने 17 अगस्त 2023 को खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) में संशोधन किया, जिसके तहत 24 खनिजों को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल घोषित किया गया। इस संशोधन से केंद्र सरकार को इन खनिजों के लिए माइनिंग लीज और कंपोजिट लाइसेंस की नीलामी करने का अधिकार मिला है। इन नीलामियों से होने वाली आय संबंधित राज्य सरकारों को प्राप्त होती है।

अब तक खान मंत्रालय ने 6 चरणों में सफल नीलामी आयोजित की है, जिसमें 46 क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी हो चुकी है। इससे उद्योग जगत की मजबूत भागीदारी और भारत के खनिज क्षेत्र में बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, 7वें चरण में विभिन्न राज्यों के 19 ब्लॉक्स नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे। इन ब्लॉक्स में ऐसे खनिज शामिल हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत तकनीक, उर्वरक और रणनीतिक उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

सरकार ने नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए हैं। मिनरल (ऑक्शन) सेकंड अमेंडमेंट रूल्स, 2025 के तहत नीलामी के बाद की प्रक्रियाओं जैसे परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, अग्रिम भुगतान और लेटर ऑफ इंटेंट को सरल बनाया गया है। वहीं मिनरल (ऑक्शन) अमेंडमेंट रूल्स, 2026 में बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड की सुविधा दी गई है, जिससे बोलीदाताओं को अधिक लचीलापन मिलेगा।

यह नीलामी पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी दो-चरणीय आरोही बोली प्रक्रिया (two-stage ascending forward auction) के माध्यम से होगी, जिसमें सबसे अधिक प्रतिशत बोली लगाने वाले को विजेता चुना जाएगा।


राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 का गांधीनगर में समापन, सतत खनन और महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा पर केंद्र–राज्यों की प्रतिबद्धता

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गांधीनगर, गुजरात- राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 का समापन केंद्र और राज्यों द्वारा सतत खनन को आगे बढ़ाने तथा भारत की महत्वपूर्ण खनिज आवश्यकताओं को सुरक्षित करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। चिंतन शिविर के दूसरे दिन भारत के खनन क्षेत्र को सशक्त बनाने से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, सतत खनन पद्धतियों और दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। विचार-विमर्श में खनन मूल्य शृंखला के सभी चरणों में घरेलू क्षमताओं को समन्वित और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के सामूहिक संकल्प को प्रतिबिंबित किया गया।

विचार-विमर्श के दौरान विवेक कुमार बाजपेयी, संयुक्त सचिव, खान मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की रूपरेखा पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान, अन्वेषण एवं नीलामी रणनीतियों, घरेलू खनन और प्रसंस्करण क्षमताओं को सुदृढ़ करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण से संबंधित पहलों को रेखांकित किया।

भारतीय खान ब्यूरो के महानियंत्रक पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपशिष्ट ढेरों और टेलिंग्स से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति पर प्रस्तुति दी। उन्होंने उन्नत प्रौद्योगिकियों और द्वितीयक संसाधनों के उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जिससे पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी और परिपत्र (सर्कुलर) खनन पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए खनिज उपलब्धता में वृद्धि की जा सके।

सभा को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल, सचिव, खान मंत्रालय ने राष्ट्रीय विकास में खनन क्षेत्र के योगदान को बढ़ाने के लिए खदानों के समयबद्ध संचालन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने त्वरित और जवाबदेह प्रक्रियाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया और कहा कि खान मंत्रालय देश की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप खनन गतिविधियों को तेज करने के लिए कदम उठा रहा है।

पंजाब के खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने राज्य के खनन क्षेत्र की प्रगति और संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए आधुनिक प्रौद्योगिकियों, सतत पद्धतियों और प्रभावी नीतिगत उपायों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि इस क्षेत्र को और सुदृढ़ किया जा सके।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने समावेशी और सतत विकास की आधारशिला के रूप में खनन क्षेत्र को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने खनन से प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) निधियों के प्रभावी उपयोग, मजबूत खान समापन योजनाओं की आवश्यकता और खनिज ब्लॉकों की समयबद्ध नीलामी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने दोहराया कि खनन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने में राज्य प्रमुख भागीदार हैं और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों के अनुरूप उत्तरदायी खनन और घरेलू खनिज सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।

दो दिवसीय सम्मेलन में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, विभिन्न राज्यों के मंत्री तथा खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। आठ से अधिक राज्यों के खनन मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी ने खनन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने हेतु सहकारी संघवाद की सशक्त भावना को दर्शाया।


महत्वपूर्ण खनिजों पर टेक टॉक: राष्ट्रीय सुरक्षा, भू-राजनीति और आत्मनिर्भर भारत पर उच्चस्तरीय मंथन

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संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र (CENJOWS) ने IP बाज़ार के सहयोग से 17 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में “Minerals That Matter: Geopolitics, Sovereignty & Value Chains” विषय पर एक उच्चस्तरीय, बंद कमरे में आयोजित टेक टॉक गोलमेज़ चर्चा का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्य वक्तव्य देते हुए एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CISC) ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) अब राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा क्षमताओं के विकास और तकनीकी संप्रभुता के लिए एक रणनीतिक आधार बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा प्रणालियाँ—जैसे जेट इंजन, मिसाइलें, सटीक हथियार, रडार, उपग्रह, बैटरियाँ और सेमीकंडक्टर—इन खनिजों की सुनिश्चित उपलब्धता पर निर्भर हैं।

एयर मार्शल दीक्षित ने इस बात पर जोर दिया कि महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ अत्यधिक केंद्रित हैं और निर्यात नियंत्रणों तथा भू-राजनीतिक दबावों के अधीन होती जा रही हैं, जिससे आयात पर अत्यधिक निर्भरता एक रणनीतिक कमजोरी बन जाती है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण और परिचालन तत्परता, सुरक्षित और लचीली खनिज आपूर्ति शृंखलाओं से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई हैं, जो विकसित भारत 2047 और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप है।

हाल के राष्ट्रीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए एयर मार्शल ने भारत द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान, राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की स्थापना तथा खनन से लेकर प्रसंस्करण, विनिर्माण और पुनर्चक्रण तक पूरे मूल्य शृंखला को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि ये पहलें नीति उद्देश्यों को ठोस परिणामों में बदलने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इस अवसर पर उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों पर 30 तकनीकी रिपोर्टों के एक संकलन का भी उद्घाटन किया, जिसमें बौद्धिक संपदा (IP) परिदृश्य के विस्तृत अध्ययन और बाज़ार विश्लेषण शामिल हैं।

आमंत्रण-आधारित इस मंच में वरिष्ठ नीति-निर्माता, रक्षा विशेषज्ञ, उद्योग जगत के नेता, प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तक, शिक्षाविद और बौद्धिक संपदा (IP) पेशेवर शामिल हुए। चर्चा का उद्देश्य तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत की रणनीतिक दृष्टि का अन्वेषण करना था। इस आयोजन को भारत सरकार के कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी का स्नेहपूर्ण शुभकामना संदेश भी प्राप्त हुआ।

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